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Overview

High Sensitive CRP (1) Test

High Sensitive CRP (1) Test

also known as: Cardiac C-Reactive Protein (CRP) , High-sensitivity CRP

CRP constitutes a protein, which increases within the blood with inflammation. Research studies have revealed that persistent low inflammation level has a primary role in atherosclerosis or narrowing of human blood vessels because of lipids and cholesterol formation. High-Sensitive-CRP test thus measures low C - reactive protein levels accurately, identifies low yet persistent inflammation levels, and thereby, predicts a potential risk of a person to develop cardiovascular diseases.

Patients do not require preparation to appear for the High-Sensitive-CRP Test. However, in case of collecting a lipid profile or triglycerides, a patient should fast for about 9 to 12 hours period before the collection of the blood sample. Patient should remain in healthy condition during the time of blood sample collection i.e. he should free from any infection, illness, injury or inflammation. Patients should intimate doctors about any other current treatments, medicines, allergies or health conditions before stepping ahead for the High-Sensitive-CRP test.

High-Sensitive-CRP Test displaying high CRP levels acts as an indicator of atherosclerosis The test plays the role of a predictor for various types of cardiovascular problems, which include myocardial infarction, peripheral vascular problems, cerebral vascular events and sudden death because of cardiac problems even in individuals, who do not have any background associated with heart problems. Many doctors use this test in combination with lipid profiles or any other forms of heart risk indicators, such as phospholipase, lipoprotein or anything similar to display additional information on risk related to cardiac problems. To determine the potential risk of cardiac problems, strokes and heart attacks. The test has its prime role in the evaluation process prior an individual develops any health issues, along with those related to the heart.

Pathologists perform this test by collecting a blood sample of about 0.5ml by using a venipuncture technique. Hence, the steps involved- Initially, pathologist ties a leather band on either of your arm that causes swelling in the nearby area and veins become visible. Next, he rubs an antiseptic lotion to clean the area of your arm (highlighting visible veins) before collecting the blood. Now, pathologist pricks a small needle in a visible vein and collects the blood sample of 0.5ml by using a nozzle. Finally, they place the collected blood sample in a small vacuum container and forward it for detailed analysis.

LimitationsIncreases in CRP values are nonspecific. CRP is an indicator for a wide range of disease processes and should not be interpreted without a complete clinical history. Recent medical events resulting in tissue injury, infections, or inflammation, which may cause elevated CRP levels, should also be considered when interpreting results. Serial analysis of CRP should not be used to monitor the effects of treatment.
Specimen
Serum or plasma
Volume
1 mL
Container
Red-top tube, gel-barrier tube, lavender-top (EDTA) tube, or green-top (heparin) tube.
Type Gender Age-Group Value
C Reactive Protein (High Sensitivity)
Unisex
All age groups
< 2mg/L
Average price range of the test is between Rs.200 to Rs.1500 depending on the factors of city, quality and availablity.

Table of Content

What is High Sensitive CRP (1) Test?
Preparation for High Sensitive CRP (1) Test
Uses of High Sensitive CRP (1) Test
Procedure for High Sensitive CRP (1) Test
Limitations of High Sensitive CRP (1) Test
Specimen Requirements
Normal values for High Sensitive CRP (1) Test
Price for High Sensitive CRP (1) Test
Lybrate Gaurantee
Lybrate Gaurantee

Popular Questions & Answers

What are the possible causes of serious and continuous hiccup? Give me some possible remedies dear doctors.

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If irritation start in stomach causes of infection in digestion hyperacidity hepatitis A gall bladder stone and more. Treatment depending on cause .you can take cap tzoy one cap one time a day, syp acivay 2 tsf 2 tims a day after meal.
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I had unprotected sex on 24th july and my period is due on 1st of august but I am still not feeling any period pain and my stomach is bloating feeling discomfort and changes in vagina. please suggest.

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Dear lybrate-user! Wait for 10-15 days more and confirm the pregnancy. Sometimes the periods may delay after sexual contact.
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I an nit age 38 m from meerut up, am a alcoholic from 3.4 years .I can't be admit in any rehab. Pls suggest me how can I get rid of alcohol completely, please suggest ant nisha multi kendra or any other option. But should be available in my home city. Meerut (U.P)

Remembered the first day when you first have the alcohol Why did not you ask how to drink the alcohol, now why to ask just, leave it like that only without asking to anybody, when you have gut to take this then you must be having the same gut for leaving it or not to take the alcohol, you are not going to die if you stop this but of course you will be no more if keep it continue.
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Popular Health Tips

How To Increase Breast Size in hindi - स्तन बढ़ाने के घरेलू उपाय

How To Increase Breast Size in hindi - स्तन बढ़ाने के घरेलू उपाय

हर महिला की ख्वाहिश होती है की उसके शरीर का हर हिस्सा सुन्दर सुडौल आकर्षण भरा हो पर पुरुषों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाला और महिलाओं का सबसे खास हिस्सा होता है स्तन। स्तन के साइज की कोई लिखी परिभाषा नहीं होनी चाहिए यह निर्भर होना चाहिए अपनी कंफर्ट और साथी के परेफरेंस पर, लेकिन ब्रेस्ट साइज हमारी पर्सनालिटी को एक्सपोज़ करने में काफी अहम होते हैं। महिलाओं का ब्रेस्ट साइज बहुत ही ज्यादा छोटा या बहुत ज्यादा बड़ा होता है जो उन्हें कई बार शर्मिंदा भी करता है। कभी कभी इस वजह से पार्टनर की रूचि भी इफ़ेक्ट करता है। और इस समस्या से निजात पाने के लिए सर्जरी मेडिसिन जैसे बाजारू नुस्खे महंगे होने के साथ ही साइड इफ़ेक्ट से भी भरपूर होते हैं। इसलिए अगर आपकी ख्वाहिश है की आपका ब्रैस्ट साइज हो परफेक्ट सुडौल सुन्दर और आकर्षण भरा तो बस आप हमारे बताए नुस्खों को अपनाएं फर्क आप खुद महसूस करने लगेगी।

पर हाँ ध्यान रहे की हर नुस्खा आपको सूट ही करे इसलिए ऑब्जर्व करें अगर सूट न करे तो छोड़ दे और सूट करता हो तो फिर आप कंटीन्यू करते रहें। असर जरूर होगा और हा ब्रेस्ट साइज बढ़ाना एक रात या दो चार दिन का काम नहीं है, इसका असर नजर आने में समय लगता है, इसलिए पेशेंस के साथ नुस्खों को खुदपर आजमाएं। नतीजा अपने समय पर खुद ब खुद सामने आएगा। तो आइये जानते हैं ब्रेस्ट साइज बढ़ाने वाले नुस्खों को। 

1. पोषित आहार
कोई भी नुस्खा तब तक असर नही दिखा पाएगा जब तक आप सही डाइट नहीं लेंगे। ध्यान रखें उन महिलाओं के ऊपर ये नुस्खे ज्यादा असर नहीं दिखा पायेंगे जो बहुत दुबली हैं और ठीक से खाती पीती नहीं। अगर आप छोटे स्तनों को लेकर परेशान हैं, तो सबसे पहले अपनी डाइट ठीक करें। अपने खाने में दूध, बादाम, अखरोट हेल्दी डाइट को शामिल करें। 

2. कच्चे आम 
कच्चे आम की गुठली निकाल कर गूदे को पीसकर लेप बनाएं। इस लेप को स्तनों पर लगायें और जब लेप सूख जाये तो उसे धो लें। धोते वक्त बहुत ठंडे पानी का यूज न करें पानी या तो हल्का गुनगुना हो या फिर सामान्य तासीर वाला। इस उपाय को अन्य उपायों के साथ लंबे समय तक ट्राई करती रहें। इससे न केवल साइज बढ़ाने में मदद मिलती है बल्कि जिन महिलाओं के स्तन ढीले हो गए हैं उनमें कसावट भी आएगी। 

3. सोयाबीन
स्तनों का आकार नहीं बढ़ने की एक बड़ी अहम वजह होती है बॉडी में एस्ट्रोजन के लेवल में कमी। यह ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। इसलिए आप सोयाबीन खाना शुरू कर दें। इसे खाने से बॉडी में एस्ट्रोजन लेवल बढ़ता है। दूसरी बात सोयाबीन में प्रोटीन भी खूब होता है। ऐसे में आप बेफिक्र सोयाबीन खायें।

4. दूध 
दूध अपनेआप में कंप्लीट फूड होता है, लेकिन अक्सर हम देखते हैं कि फीमेल्स दूध का कम ही इस्तेमाल करती हैं। ये जरूरी नहीं है कि जो महिलायें दूध नहीं पीतिं उनके स्तन छोटें ही हों पर हां, जिन महिलाओं की ब्रेस्ट का साइज छोटा है उनके लिए दूध फायदेमंद जरूर है। दूध में प्रोटीन और वसा दोनों होते हैं दोनों ही ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने में मदद करते हैं। स्तनों में खाली मसल्स नहीं होते उनमें फैट भी होता है और दूध से हमें चक फैट मिलता है।

5. पपीता 
पपीता केवल पेट को ही ठीक नहीं रखता यह पेट से ऊपर के साथ चेहरे और ब्रेस्ट को भी सुडौल बनाने के काम आता है। पपीते और दूध के कंबाइन डाइट को ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने के लिए बेस्ट टिप्स के तौर पर माना जाता है।

6. मेथी के बीज 
मेथी का बीज हमारे लिए कई मामलों में मददगार है। और सबसे ज्यादा हम इसे जानते हैं अपनी रसोई का स्वाद बढ़ाने के लिए पर शायद आपको ये बात नहीं मालूम होगी की ये ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने के लिए भी यह कारगर इलाज है। मेथी शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल को बढ़ाता है। रात को एक चम्मच मेथी के दाने भिगो कर रख दें सुबह उन्हें चबाकर खाएं और पानी पी लें। साथ ही भीगे हुए मेथी के बीजों को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर ब्रेस्ट पर लगायें और सूखने के बाद धो लें और इसके तेल की मालिश भी कर सकती हैं।

7. अलसी के बीज 
ब्रैस्ट साइज बढ़ाने में अलसी के बीज भी बहुत अच्छा काम करते हैं। आप इनके सीधे खा सकती हैं या गेहूं में पिसवा सकती हैं। इनके बीजों की चटनी भी बनती है। आप इसका तेल सलाद वगैरा पर डालकर खा सकती हैं और अलसी के तेल से ब्रैस्ट की मसाज भी करें। यकीन मानिए यह सस्ता होने के साथ ही सबसे कारगर नुस्खा है।

8. मसाज
ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए मालिश सबसे बेहतर ऑप्शन है। हाथों पर तेल लगाकर सबसे पहले आराम से दोनों स्तनों पर तेल लगाएं। उसके बाद ब्रेस्ट को नीचे से ऊपर की ओर हल्के हल्के रगड़ें। हाथों की मूवमेंट नीचे से ऊपर की ही रखें। इसके बाद हल्के हाथों को नीचे से ऊपर की ओर गोलाई में घुमायें। मालिश करने के लिए अलसी, बादाम, सौंफ, जैतून य सरसो के तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं। करीब तीस मिनट का मसाज करते रहने से कुछ ही दिनों में आपको पॉजिटिव रिजल्ट नजर आने लगेगा।  

9. व्यायाम करें
ब्रेस्ट के साइज को बढ़ाने के लिए व्यायाम सबसे आसान तरिका है। व्यायाम करने से आपके शरीर की सुंदरता में भी निखार आएगा। इसके लिए आप दोनों हाथों में 5 किलो वजन ले और एक कुर्सी पर बैठे जाए, और इसे लिफ्ट करें। ध्यान रखें कि आपके हाथ आपके कंधे के बराबर हों। 5 से 10 सेकंड तक लगातार ऐसा करें, फिर शुरू की स्थिति में आए, फिर वापस ऐसा करें। रोजाना इस एक्ससरसैज कीजिए रिजल्ट आपको महसूस होने लगेगा।

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How To Reduce Breast Size in hindi - ब्रैस्ट कम करने के उपाय

How To Reduce Breast Size in hindi - ब्रैस्ट कम करने के उपाय

इतिहास इस बात का गवाह है कि समाज में सुंदरता की हमेशा होड़ रही है। इसे पाने में दिखाने में और खुद में अपने आपको परफेक्ट फील करने में। वैसे तो महिला का हर अंग पुरुषों के लिए आकर्षण और कामुकता का हिस्सा रहा है पर सारी दुनिया के पुरुष अगर सबसे ज्यादा बदन के किसी हिस्से पर अट्रैक्ट होते हैं तो वह है ब्रेस्ट यानि स्तन। हर महिला को यह पसंद होता है कि पुरूष उनपर फ़िदा और ऐसा ही हो इसके लिए महिलाएं हमेशा कोशिश करती हैं कि उनके ब्रेस्ट का साइज बड़ा हो, ब्रेस्ट में कसावट हो, सही आकार में हो इत्यादि। पर ये चाहत और कोशिशें तब उलटी पड़ जाती हैं, जब ब्रेस्ट का साइज जरूरत से ज्यादा बड़ा हो। न सिर्फ ये दिखने में भद्दा लगता है, बल्कि उस महिला के तकलीफ का भी सबब बन जाता है। कुछ महिलाएं सुंदर कपड़े और शर्ट पहनना चाहती हैं, पर उनका ब्रेस्ट सही आकार में ना होने के कारण उनको ऐसा करने में तकलीफ होती है। कई बार जरूरत से ज्यादा बड़े ब्रेस्ट होने से महिलाओं को कपड़े सही फिट नहीं आते। 

ऐसे में कई महिलाएं अपनी ब्रेस्ट साइज को कम करना चाहती है। पर नही कर पाती जिसके कई कारण होजैसे वे वह हिचकिचाती है किसी से कहने मे की लोग क्या सोचेंगे। कुछ महिलाएं यह सोच कर भी पीछे हट जाती है कि, आपरेशन करके ब्रेस्ट साइज कम करना काफी महंगा होता है वगैरा वगैरा। पर वह यह नही जानती की ब्रेस्ट के साइज को नैचुरली भी कम किया जा सकता है। जी तोआज हम जानेंगे नैचुरली अपने ब्रेस्ट कम करने के नुस्खे जो बेहद आसान भी हैं और असरदार भी। 

1. नियमित व्यायाम 
ब्रेस्ट बहुत से फैटी टिशू से मिलकर बना होता है, जिनको कम करके महिलाएं अपने ब्रेस्ट के आकार को कम कर सकती हैं। इसके लिए सही व्यायाम करना बहोत जरूरी होता है। शरीर की चर्बी काम करके ब्रेस्ट का आकार कम किया जा सकता है। यह करने के लिए दौड़ लगाना, साइकलिंग करना, सीढि़यां चढ़ने व उतारने से कैलोरी बर्न होती है। इसके अलावा नियमित रूप से पुश-अप एक्सर्साइज, जौगिंग तथा चेस्ट फ्लाइ जैसे व्यायाम करना फायदे मंद होता है, पर ध्यान रहे जब भी आप व्यायाम करें तो स्पोर्ट्स ब्रा जरूर पहने। क्योंकि हम जैसे-जैसे मूवमेंट करते हैं, ब्रेस्ट भी वैसे ही मूवमेंट करते हैं, इसलिए बिना सही सपोर्ट के व्यायाम करने से स्तनों में दर्द हो सकता है। साथ ही इसके लिगामेंट को भी नुकसान पहुंच सकता है और त्वचा ढीली पड़ सकती है।

2. योगा 
अपने बेस्ट के आकार को कम करने के लिए आप योग का सहारा ले सकती हैं। इसके लिए नियमित रूप से अर्द्ध चक्रासन मुद्रा बेहद मददगार साबित होती है।

3. अंडे का उपयोग
स्तन का आकार कम करने के लिए अंडे की सफेदी भी सहायक होती है। यह आपके स्तनों को सुडौल बनाती है तथा छाती के भाग में कसावट लाकर स्तनों को छोटा करने में मदद करती है। एक अंडे के सफ़ेद भाग को फेंटकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को अपने स्तनों के नीचे लगाएं और इसे आधे घंटे के लिए छोड़ दें। आधे घंटे के बाद एक गिलास में प्याज का रस लें और उससे अंडे की सफेदी लगी जगह को धो लें। इस प्रक्रिया का प्रयोग कुछ हफ़्तों तक रोजाना करने से आपके स्तन को कम कियांज सकता है।

4. ग्रीन टी 
ग्रीन टी वज़न घटाने में काफी लाभदायक है और इसका प्रयोग स्तनों का आकार घटाने में भी किया जा सकता है। ग्रीन टी में कथेचिंस मौजूद होते हैं जो शरीर की कैलोरी घटा के शरीर की चर्बी कम करती है और आपका वज़न घटाती हैं। ग्रीन टी स्तनों के कैंसर के खतरे को भी काफी कम करती है। 1 चम्मच ग्रीन टी के पत्तों को एक कप गर्म पानी में मिलाकर इसे कुछ मिनटों तक ढककर रखें और फिर इस मिश्रण को छान कर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर हर रोज़ कुछ महीनों तक 3 से 4 कप ग्रीन टी का सेवन करने से आपको जरूर फर्क नजर आएगा।

5. नीम और हल्दी 
नीम और हल्दी स्तनपान के दौरान स्तनों में हुई जलन और सूजन दूर करने में काफी कारगर साबित होती है क्योंकि इन पदार्थों में जलन कम करने के गुण हैं। इनका प्रयोग करने से आपके स्तनों का आकार अपने आप ही कम हो जाता है। यह करने के लिए आप 4 कप पानी में 10 मिनट तक मुट्ठीभर नीम की पत्तियों को उबालें और फिर इन्हें छान लें। इन्हें अच्छे से मिलाकर इसमें 2 चम्मच हल्दी और थोड़ा सा शहद डालकर इस पानी को कुछ महीनों तक रोजाना पीने से काफी हद तक ब्रेस्ट का आकार कम हो जाता है।

6. मसाज 
मसाज एक कारगर तरीका है वज़न घटाने का और इससे आपके स्तनों का आकार भी काफी कम हो सकता है। स्तनों पर मसाज करते समय दोनों स्तनों को बराबर समय देकर स्तनों पर गर्म जैतून का तेल या नारियल का तेल लगाएं और इस प्रक्रिया के लिए अपने बीच की ऊँगली और अनामिका उंगली का इस्तेमाल करके अपने स्तनों पर गोल आकर में व नीचे से ऊपर जाने की मुद्रा में करीब 10 मिनट तक मसाज करें। इस प्रक्रिया को नियमित रूप से कम से कम 3 महीने तक हर रोज़ दिन में 2 बार करने से स्तनों के आकार में फर्क दिखने लगेगा।
 

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Epidurals - Know The Benefits & Disadvantages!

Epidurals - Know The Benefits & Disadvantages!

Modern women want to have it all, in personal and professional life. They want to experience the joy of motherhood but not the pain associated with normal delivery. For such women, epidural analgesia during labour is a blessing. Epidural analgesia/anaesthesia is given to pregnant women during childbirth. Epidural painkillers stop the pain signals transmitted nerves from uterus. This stops the pain sensation of labour. For epidural analgesia, a catheter (small tube) is inserted into the epidural space in the spinal cord. It is through this tube that the drugs (painkillers) reach the desired nerves. 

Types of Epidurals: 

Epidurals can be 

  1. Injection with top-ups: Once given, epidurals help to relieve the pain that arises due to contractions. When the epidural starts to wear off, top-ups or refills are used. The refills can last for 1-2 hours. 
  2. Combined Spinal Epidural: Compared to the regular epidurals, the combined spinal epidurals are powerful, quick, and more effective. Here too, epidural painkillers are made to pass through the catheter, once the first injection wears off. It is also known as Walking Epidural. 
  3. Continuous infusion (patient-controlled epidural analgesia): Here, the other end of the epidural catheter is attached to a pump. This pump continuously infuses the painkillers into your back. For an effective response, top-ups may be used. Many hospitals allow patients to control the pump. 

Merits and demerits of having an epidural--

Merits: 

  1. Epidurals make the delivery smooth and hassle free. 
  2. Epidurals are relatively safe as only a small fraction of the medicine reaches the baby. 
  3. Women stay fully awake and experience no pain during the cervix dilation. This enables them to push the baby out with more energy.
  4. Depending on the requirement, the dosage of epidurals can be adjusted. 
  5. Epidurals help to lower the cases of C-section delivery. 

Demerits: 
Though epidurals make childbirth easy, one cannot overlook its demerits. 

  1. Infections can sometimes occur. 
  2. Sometimes epidural analgesia can have a patchy effect, causing some pain to persist. 
  3. Though rare, epidural can result in nerve damage. 
  4. Epidurals bring about a fall in blood pressure. At times, this can be risky for the baby. 
  5. Nausea, headache, itchiness, backache, soreness are the common side effects of epidurals. 
  6. Epidurals relax a woman, thereby reducing their urge to push the baby out. 

Thus, they may take longer than usual to push the baby. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Pain Management Specialist.

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Cervical Spondylosis (Arthritis of the Neck) - Know Its Treatment!!

Cervical Spondylosis (Arthritis of the Neck) - Know Its Treatment!!

Cervical spondylosis is fast becoming the bane of modern life. An age-related wear and tear problem affecting the spinal discs in your neck, cervical spondylosis is increasingly affecting the young because of the use of cell phones, laptops and the like.

Cervical spondylosis is a general term used to define shrinkage of discs in between vertebrae in the neck region. Along with disc degeneration, bony projections also form in the area and are called bone spurs.
Other causes of cervical spondylosis are dehydrated discs. Discs are thick, pad-like cushions in between vertebrae that act as shock absorbers. They are made of a gel- like material that can dry over time. This causes the spinal vertebrae to rub together causing pain. The discs also crack which allows the internal gel-like material to spill out and impinge on spinal nerves causing symptoms.

There is a narrowing of the space required by the spinal cord and nerves that emanate in the upper spine to go to various parts of the body. Pinching of these nerves can cause alarming symptoms like:

  1. Numbness and weakness in your arms, hands, legs and feet
  2. Lack of coordination and difficulty in walking
  3. Loss of bladder or bowel movement
  4. Stiffness and pain in neck

Treatment and management
Usually, cervical spondylosis doesn’t cause any symptoms. But when you start experiencing pain, stiffness and weakness of muscles, it’s best to go to a doctor who will diagnose the problem and then treat it.
Treatment for cervical spondylosis depends on the severity of your symptoms. Its goal is to get rid of pain, allow you to carry on your daily activities and prevent any permanent damage to your spinal cord and nerves.

Medicines

  1. Anti-inflammatory drugs are prescribed to reduce pain and inflammation. Example Ibuprofen.
  2. Corticosteroids are oral medications to get rid of the severe pain. If these don’t work, your doctor can suggest steroid injections.
  3. Muscle relaxants medicines relax the muscles in the upper part of the spine and help in curing neck pain and stiffness
  4. Anti-seizure medications are also prescribed to dull the pain of damaged nerves in the spine. These include epilepsy medications, such as gabapentin and pregabalin.

Physiotherapy

  1. Non surgical treatments are usually very effective in treating cervical spondylosis and surgery is usually not required. Physiotherapy is a bulwark for patients as it helps manage the condition very well.
  2. Neck exercises that help stretch and strengthen muscles in your neck and shoulders can help manage debilitating symptoms of cervical spondylosis.
  3. Few patients also benefit from traction, which can help provide more space for nerve roots within the spine.

Surgery

  1. Surgery is the last resort for treating cervical spondylosis.
  2. It is suggested when non-surgical treatments fail and the pain and neurological signs such as weakness in your arms or legs get worse.
  3. It is done to create more room for your spinal cord and nerve roots.

Cervical spondylosis surgery typically involves removing:

  1. Herniated disk
  2. Bone spurs
  3. Part of a vertebra. 

If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Physiotherapist.

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How is HIV / AIDS transmitted?

How is HIV / AIDS transmitted?

No matter how much information there is available about AIDS and HIV, the thought of it makes a person shudder. The Human Immunodeficiency Virus or HIV is the virus responsible for AIDS or Acquired Immune Deficiency Syndrome. This virus attacks the immune system and over time leaves the body defenseless against other infections and types of cancer. Till date, there is no cure for HIV or AIDS. However, what we do know is how the disease can be transmitted from one person to another. Knowing this enables us to control the transmission of the disease.

Unlike other viruses, HIV cannot be transmitted through air, water etc. This virus can only be transmitted through:

Blood-

Receiving blood transfusions from an HIV positive person is sure to put you at risk of suffering from the disease as well. For this reason, it is essential to only take blood from registered blood banks that run HIV screening tests. This holds true for organ and tissue transplants as well. Being stuck with an HIV infected needle can also put you at risk of coming in contact the virus. In some cases, direct contact between broken skin, wounds and mucus membranes can also lead to the transferring of HIV cells from one person to another. HIV does not spread through saliva, however, if while kissing, both partners suffer from bleeding gums and one partner is HIV positive, there is a risk of the transference of HIV from one person to the other.

Bodily fluids such as semen and vaginal fluids-

The only way to prevent the transmission of the HIV virus from one partner to another while having intercourse is by using a condom. This creates a barrier between the bodily fluids of both partners and keeps them safe. A condom is needed even if the couple is engaging in anal sex. In fact when comparing anal and vaginal intercourse; anal sex puts HIV negative partners at a higher risk of getting in contact the virus than vaginal sex. Theoretically, this virus can be transmitted even through oral sex is a HIV positive man ejaculates into the woman's mouth. However, this is a rare occurrence.

From a mother to an unborn child-

A HIV positive mother can transmit the virus to her child when pregnant, at birth or while breastfeeding. However, if the mother follows HIV treatment, the chances of her passing on this virus to her child are significantly lowered.

The above are the only three ways HIV can be transferred from one person to another. HIV cannot be transmitted by sharing utensils, drinking the same water, through mosquito bites or by shaking hands etc. Thus, there is no reason to ostracize an HIV infected person. If you wish to discuss about any specific problem, you can ask a free question.

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