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Dhanwantari Hospital

Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Gynaecologist & more)

Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk. Pune
21 Doctors · ₹0 - 300
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Dhanwantari Hospital Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Gynaecologist & more) Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk. Pune
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Our goal is to offer our patients, and all our community the most affordable, trustworthy and professional service to ensure your best health....more
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More about Dhanwantari Hospital
Dhanwantari Hospital is known for housing experienced Gastroenterologists. Dr. Praveen Salunkhe, a well-reputed Gastroenterologist, practices in Pune. Visit this medical health centre for Gastroenterologists recommended by 92 patients.

Timings

MON-SAT
03:30 AM - 09:00 PM

Location

Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk.
Nigdi Pune, Maharashtra - 411044
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Doctors

Dr. Praveen Salunkhe

Gastroenterologist
Unavailable today

Dr. Abhijit Joshi

MBBS
Cardiologist
Unavailable today

Dr. S R Patil

General Physician
Unavailable today
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Naresh Rao

ENT Specialist
300 at clinic
Unavailable today
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Jayant Mahajan

MBBS
General Surgeon
Unavailable today
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Uma Deshmukh

MBBS
Anesthesiologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Chandrahekhar Wahegaonkar

Cosmetic/Plastic Surgeon
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Neelam Kolte

MBBS
Pathologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Maya Bhalerao

MBBS
Anesthesiologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
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काजू के फायदे और नुकसान

B.Sc - Dietitics / Nutrition, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
काजू के फायदे और नुकसान

 

काजू एनार्काडियम आक्सीडेन्टल पेड़ का बीज होता है। यह आम तौर पर भारतीय पॅक्वानो में सूखे फल के रूप में प्रयोग किया जाता है। ठोस, नरम, मीठा और स्वादिष्ट काजू ऊर्जा से भरा होता है। यह ब्राजील के अमेज़ॅन वर्षा वन से दुनियाभर में पुर्तगाली यात्रियों द्वारा फैल गया था। अब, ब्राजील, भारत, वियतनाम आदि जैसे विभिन्न देशों में इसकी खेती की जाती है। काजू मोनोअनसैचुरेटेड वसा और प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं। इसके अलावा, काजू विटामिन और खनिजों से भरा हुआ है। अतः काजू खाने के बहुत सारे लाभ हैं, जैसे कि:

1. ट्यूमर से लड़ता है: इसमें प्रोएन्टोकाइनाइडिन है, जो ट्यूमर कोशिकाओं के खिलाफ उनकी वृद्धि और विभाजन को रोक कर लड़ने की क्षमता रखता है। यह विभिन्न कैंसर जैसे कोलन, प्रोस्टेट आदि के कैंसर को रोकता है। इसके अलावा इस में विटामिन "के" होता है, जो ट्यूमर कोशिकाओं के विकास को दबाने की क्षमता रखता है। इसमें सेलेनियम और विटामिन "ई" जैसे एंटीऑक्सिडेंट हैं जो प्रतिरक्षा को बढ़ा देता है।

2. संक्रमण से लड़ता है: इसमें उच्च मात्रा मे जस्ता होता है जो विभिन्न संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।

3. दिल के लिए काजू के लाभ: इसमें मौजूद मैग्नीशियम रक्तचाप को बनाए रखने में मदद करता है। रक्तचाप को कम करने की इसकी प्रवृत्ति दिल के दौरे को रोकने में मदद करती है। इसमें, कम स्तर मे सोडियम और उच्च स्तर मे पोटेशियम होता है जो रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है। काजू में ओलेइक एसिड और पॉमिटॉलिक एसिड नामक आवश्यक फैटी एसिड हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर देते हैं और साथ ही अच्छे कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा देते हैं। काजू इस प्रकार रक्त के लिपिड प्रोफाइल को संतुलित करके कोरोनरी धमनी रोग और स्ट्रोक को रोकता है। इसके अलावा काजू एरोरोस्क्लेरोसिस को रोकता है और धमनियों में पट्टिका के गठन को कम कर देता है। यह ओमेगा -3 फैटी एसिड और ओमेगा -6 फैटी एसिड का भी एक अच्छा स्रोत है जो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं और रक्त कणों को मुक्त कण और हृद्-अतालता से रोकता है। ओलेइक एसिड की तरह आवश्यक फैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल को रक्तप्रवाह में प्रवेश करने से रोकते है। इस प्रकार काजू कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) को कम करता है और खून में उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एचडीएल) को बढ़ाता है और इस तरह हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है।

4. बालों के लिए काजू का लाभ: इसमें तांबा नामक एक महत्वपूर्ण खनिज होता है, जो बालों को अपनी चमक, ताकत और काले रंग को बनाए रखने के लिए मदद करता है। इसमें पाया गया कॉपर कई एंजाइमों के लिए एक आवश्यक घटक के रूप में कार्य करता है। ट्राइरोसेनेस एक तांबे वाला एंजाइम है, जो टाइरोसिन को मेरिनिन (एक रंगद्रव्य जो बाल और त्वचा को रंग प्रदान करता है) में परिवर्तित करने में मदद करता है।

5. हड्डियों के लिए काजू का लाभ: इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस इत्यादि जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शरीर में अच्छा मैग्नीशियम स्तर भी हड्डियों द्वारा कैल्शियम अवशोषण स्तर को बढ़ाता है। इसकी उच्च स्तरीय प्रोटीन और अच्छे मैग्नीशियम और कैल्शियम का स्तर मजबूत हड्डी संरचना को बनाने में मदद करता है। उच्च तांबे का स्तर हड्डियों और जोड़ों के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है। काजू में पाए जाने वाले "विटामिन के" हड्डियों को कड़ा करके स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने में मदद करता है, जो ऑस्टियोपोरोसिस और कंकाल विकृति जैसी बिमारिओं को रोकता है ।

6. तंत्रिकाओं के लिए काजू के लाभ: इसमें मौजूद मैग्नीशियम हड्डियों की सतह पर संग्रहित हो जाता है और कैल्शियम को तंत्रिका कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है।

7. वजन घटाने में मदद करता है: काजू की उच्च ऊर्जा घनत्व और आहार के तंतुओं का उच्च स्तर है, दोनों ही अगर सीमित मात्रा में खाए जाएं तो वजन प्रबंधन के लिए सहायता करते हैं।

 

काजू के नुकसान अतः काजू को कम मात्रा में खाने से बहुत स्वस्थ हो सकता है, परंतु अगर बड़ी मात्रा में खाया जाए तो कई दुष्प्रभाव भी उत्पन्न हो सकते हैं। जैसे कि:

1. भार बढ़ना: काजू में काफी कैलोरी होती हैं इसलिए वजन बढ़ा सकता हैं।

2. एलर्जी: कुछ लोगों को काजू से एलर्जी होती है। एलर्जी मुंह और गले में पित्ती, चकत्ते, खुजली पैदा कर सकती है।

3. रक्तचाप बढ़ना: बड़ी मात्रा में काजू उपभोग करने से सोडियम तेजी से बढ़ सकता है, जो आपके रक्तचाप को बढ़ा सकता है।

4. सिरदर्द: यदि आप सिर दर्द और माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो काजू से बचें। इस में मौजूद एमिनो एसिड सिरदर्द पैदा कर सकता है।

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Amla Drink

Non-invasive Cardiology
Cardiologist, Thane
Amla Drink

An easy to make recipe which taken regularly helps manage blood sugar levels. The antioxidant property of amla helps boost immunity and metabolism.

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Amla Drink

Non-invasive Cardiology
Cardiologist, Thane
Amla Drink

An easy to make recipe which taken regularly helps manage blood sugar levels. The antioxidant property of amla helps boost immunity and metabolism.

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Amla Drink

Non-invasive Cardiology
Cardiologist, Thane
Amla Drink

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Amla Drink

Non-invasive Cardiology
Cardiologist, Thane
Amla Drink

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Stay Healthy

PG Diploma in Emergency Medicine Services (PGDEMS), Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MD - Alternate Medicine
Ayurveda, Ghaziabad
Stay Healthy

Boil water with 20 to 30 neem leaves in it and use this water for hair bath, this beauty tip is very useful in clearing dandruff problems.

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A Healthy Amla Drink to Manage Your Blood Sugar Level

Non-invasive Cardiology
Cardiologist, Thane
A Healthy Amla Drink to Manage Your Blood Sugar Level

An easy to make recipe which taken regularly helps manage blood sugar levels. The antioxidant property of amla helps boost immunity and metabolism.

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My fasting sugar 135 and Pp 150 Checked by glucometer. How to control provide Diet chart.

Diploma in Diabetology, Pregnancy & Diabetes, Hypertension, Cardiovascular Prevention in Diabetes ,Thyroid
Sexologist, Sri Ganganagar
My fasting sugar 135 and Pp 150
Checked by glucometer.
How to control
provide Diet chart.
Dear lybrate-user you are a cade of fasting Hyperglycemia. Most probably you are obese .if so please decrease weight by exercise and diet control. Take small frequent meal. Take full plate salad before each of Three meals. Take fruits in between meal. Brisk walking daily .More ask on line.
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Intracytoplasmic Morphologically Selected Sperm Injection (IMSI) - To Help You Live Your Dream!

MD - Obstetrtics & Gynaecology, DGO
IVF Specialist, Mumbai
Intracytoplasmic Morphologically Selected Sperm Injection (IMSI) - To Help You Live Your Dream!

Of a million sperms released in one ejaculation, a single sperm manages to fertilize the egg, which grows into an embryo and then a baby. Due to various reasons, when this does not happen, it is termed as infertility and is currently on the rise.

With In-vitro fertilization (IVF), couples sometimes go through multiple sessions to ensure fertilizationICSI or intracytoplasmic sperm injection improved this chance of fertilization. It is where a single sperm is used to fertilize an egg in an artificially controlled environment and then injected into the uterus where it grows further.

The next step in this technique is IMSI, where the chances of successful pregnancy are further enhanced and also promises improved quality of the embryo. IMSI, as it stands for, has “morphologically selected” which means under a highly powerful microscope, the best sperms are selected and then used to fertilize the egg. Morphology stands for shape, and the shape of the sperm is a direct indicator of the sperm quality. This not just ensures good success rate but also ensures the sperm which is used produces a high-quality embryo.

Features

  1. High success rate of fertility
  2. Reliable and efficient method of ART (assisted reproductive technology)
  3. More expensive than traditional IVF methods or ICSI
  4. Requires complex equipment, training, and set-up

Indications:

  1. Useful in couples who have failed IVF previously
  2. Male infertility with unidentifiable cause
  3. Poor sperm quality

What to expect?

Both partners are prepared both physically and mentally prior to IMSI.

Before the procedure - men:

  1. A screening is first done to decide if the sperms can be used directly
  2. In case of hereditary diseases, a donor is preferred
  3. The first technical step involves sperm collection, either directly or through a donor
  4. Sperms are collected either through masturbation or through a small incision in the testicles
  5. Sperms used could be fresh or frozen; fresh ones may be stored for later use also

Before the procedure – women:

  1. The woman is put on some ovulation therapy to ensure the release of multiple eggs, so a good one is picked. These high doses of hormones ensure multiple eggs are released.
  2. Egg release is monitored through blood and urine tests
  3. They are collected within after 36 hours of release

During the IMSI procedure:

  1. A healthy egg is chosen and placed in a glass container containing hyaluronidase
  2. Sperms are placed in a medium which will slow their movement, which enables picking a good sperm for fertilization
  3. The dual advantage of this is that in addition to a high success rate of fertilization, the quality of the embryo is also assured 

    If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a gynaecologist.

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How can I decrease the sensitivity of my penis which will stop the effect of premature ejaculation? Or is there any other natural way which can solve the problem of premature ejaculation?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Haridwar
How can I decrease the sensitivity of my penis which will stop the effect of premature ejaculation? Or is there any o...
PmeEjaculation of the semen with minimal sexual stimulation, or before the man and his partner wish, is known as premature ejaculation. If this happens frequently, it can cause distress and problems in the relationship. Causes The cause of PE could be temporary depression, stress, anxiety, a history of sexual repression, or a lack of emotional bonding between the partners. Physical disease can also be the reason, such as a swollen prostate gland (prostatitis), diabetes, sexually transmitted diseases, or cardiovascular disease. Ayurveda compares Shukra dhatu (semen) to purified butter. Just as purified butter melts in the presence of heat, semen loses its consistency when there is Pitta (fire) aggravation in the body. Aggravated Pitta travels into the channels carrying semen, causing semen to decrease in consistency, and thus it gets ejaculated before sufficient erection. Biological and psychological factors can also play a role in causing premature ejaculation. Symptoms Ejaculation before penetration Ayurvedic View According to Ayurvedic perspective, premature ejaculation is caused by aggravation of Vata (air) and Pitta Dosha at the commencement of physical mating. These doshas can be aggravated by anxiety or nervousness before the sexual act. Vata is characterized by its qualities of quickness and heightened sensitivity to the sense of touch. This gives a predisposition towards quicker ejaculation. Pitta plays a role in thinning of the semen, thereby supporting its early ejaculation. Secondly, these aggravated doshas cause hyperactivity of muscles in the male organ, thus increasing sensitivity to vibration and hence leading to early ejaculation. Ayurvedic treatment of premature ejaculation is aimed at keeping the Vata and Pitta in balance by eating a balanced diet. Problems of stress and anxiety during sexual intercourse can be effectively dealt with rejuvenating herbs, yoga, meditation and counseling. Diet & Lifestyle Advice Avoid intake of pitta-aggravating foods like hot, penetrating, or excessively salty and spicy foods, as well as chilies, garlic, pickles, fermented and preserved foods. Increase intake of foods that are sweet and have a cooling effect on the body, like milk, butter, purified butter, almonds, raisins, black gram, licorice and asparagus. Consult me online.
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I have doubt regarding masturbating whether it good or bad I am doing this since from last 12 years.

Diploma in Paediatrics, MBBS
Sexologist, Dehradun
I have doubt regarding masturbating whether it good or bad I am doing this since from last 12 years.
Masturbation max twice a week is acceptable but long time addiction can cause sexual weakness, so try to deviate your mind from sexual thought. Start yoga and meditation.
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Can we suncros and skinless creams are continue my life long time? Without side effect mam.

Jiva Ayurveda Clinic
Ayurveda, Faridabad
Can we  suncros and skinless creams are continue my life long time? Without side effect mam.
Dear patient, as the sunscreens contain sun protecting factor which we call SPF, is really helpful for our skin rejuvenation and protection. Nowadays,there is global warming and other hazardous conditions in the environment which may worsen your skin problems and your body lotion or fairness cream would not be very much helpful. You should use aloe vera gel twice/week by applying on your face and keeping it for next 10-15 minutes and then rinse off, repeat it every time when you come back from outside. And whnever you go out, even if it's a rainy day, the ultra-violet rays of sun are still affecting you, so apply sunscreen before 20-30 minutes of leaving your place, so the skin would absorb it finely, drink plenty of water to naturally hydrate your skin and take citrus fruits like orange, lemon etc, watermelon in this summer, stay healthy.
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Natural Cycle IVF

DNB (Obstetrics and Gynecology), MBBS
Gynaecologist, Delhi
Natural Cycle IVF

Natural Cycle IVF

  • What is natural cycle IVF?

Natural cycle IVF involves collecting and fertilising the one egg that you release during your normal monthly cycle. No fertility drugs are used in this treatment.

  • Is natural cycle IVF for me?

It may be worth discussing this treatment option with your clinician if your periods are fairly regular and you are ovulating normally, but:

you are unable to take fertility drugs (for example, cancer patients or those whose clinician has suggested that they are at risk of OHSS “ ovarian hyper-stimulation “ a dangerous over-reaction to fertility drugs) because for personal or religious beliefs you do not wish to have surplus eggs or embryos destroyed or stored.

  • How does natural cycle IVF work?

The treatment is the same as conventional IVF, but without the fertility drugs that are used to stop natural egg production and hormones that boost the supply of eggs.

As your ovaries are’nt being artificially stimulated, you don’t need to rest as you would after conventional IVF.

If your treatment is unsuccessful, you can try again sooner if you wish.

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Medicine From Kitchen - Mint

MD- Ayurvedic Pathology
Ayurveda, Amritsar
Medicine From Kitchen - Mint

Mint, scientifically known as ‘mentha’, is a herb with small green leaves and a characteristic strong odour. It is also a virtual cure-all plant. Try using mint by adding it to your meals, oral care and skin care regimen to remain healthy and fresh forever. A few prominent mint health benefits include the following:

Digestion aid: Try mint leaves if you are not feeling hungry. It is a great appetizer as well as a promoter of digestion. It soothes your stomach when you’re suffering from inflammation or indigestion. So, next time you have a stomach upset, go for mint tea or mint oil. Mint’s characteristic aroma acts as an appetizer. It stimulates the salivary glands and other digestive glands to produce saliva and digestive juices, thereby facilitating digestion.

Nausea and headache: Mint leaves, especially freshly crushed leaves, help staunch nausea and headache, thanks to the strong and refreshing aroma. Menthol oil or mint-flavoured products are very useful for alleviating nausea. Similarly, balms with a mint base or mint oil can be rubbed on your forehead and nose to give quick relief from headache. Mint tea oil derived from mint is also very effective in treating nausea and motion sickness while travelling.

Respiratory disorders: The strong minty aroma is very effective in clearing up congestion of the nose, throat, bronchi and lungs. This makes mint a very effective remedy for asthma and common cold. The herb is also a good remedy for cough. This is because mint has a cooling and soothing effect on the throat, nose and other respiratory channels, and this helps relieve the irritation, which causes chronic coughing. Regular use of mint in any form is very beneficial for asthma patients as well, because it is a good relaxant and it relieves congestion that blocks respiratory channels, causing symptoms of asthma.

Depression and fatigue reliever: As mint is a natural stimulant, it can help relieve fatigue and feelings of sadness. Mint essential oil is very good if you are feeling anxious, sad, depressed, low or just plain sluggish. Mint oil can be ingested, applied as a salve topically, or inhaled as a vapour to help with fatigue and depression.

Oral health: Mint has germicidal qualities and can quickly freshen up your breath. It also gets eradicates harmful oral bacteria inside your mouth, alleviating oral health. The mint leaves can be rubbed directly on your tongue, teeth and gums to clean and refresh your mouth. You can also get the benefits of mint by simply chewing on its leaves.

Skin health: Since mint oil is a good antiseptic and anti-pruritic, it acts as an excellent skin cleanser. It is used to clear pimples as well as soothe and cure skin from infections.

Mint’s anti-pruritic properties can be used for treating insect bites, mosquito bites, stings by honeybees etc. With its cooling property, mint will relieve you of the irritation of stings and bring the swelling down. Also, women can use mint oil to relieve cracks and pain in nipples which occur during breastfeeding.

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High Blood Pressure Treated By Ayurveda

BAMS
Ayurveda, Sonipat
High Blood Pressure Treated By Ayurveda

आयुर्वेद के अनुसार #high_bp की बीमारी ठीक करने के लिए घर में उपलब्ध कुछ आयुर्वेदिक दबाईया है जो आप ले सकते है । जैसे एक बहुत अच्छी दवा है आप के घर में है वो है दालचीनी जो मसाले के रूप में उपयोग होता है वो आप पत्थर में पिस कर पावडर बनाके आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ खाइए |
अगर थोडा खर्च कर सकते है तो दालचीनी को शहद के साथ लीजिये (आधा चम्मच शहद आधा चम्मच दालचीनी) गरम पानी के साथ, ये हाई bp के लिए बहुत अच्छी दवा है । और एक अच्छी दवा है जो आप ले सकते है पर दोनों में से कोई एक । दूसरी दावा है मेथी दाना, मेथी दाना आधा चम्मच लीजिये एक ग्लास गरम पानी में और रात को भिगो दीजिये, रात भर पड़ा रहने दीजिये पानी में और सुबह उठ कर पानी को पि लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकी हाई bp कम कर देगा, देड से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा । 
और एक तीसरी अच्छी दवा है |
हाई bp के लिए वो है अर्जुन की छाल । अर्जुन एक वृक्ष होती है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पावडर बना लीजिये । आधा चम्मच पावडर, आधा ग्लास गरम पानी में मिलाकर उबाल ले, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पि ले । ये हाई bp को ठीक करेगा, कोलेस्ट्रोल को ठीक करेगा, ट्राईग्लिसाराईडको ठीक करेगा, मोटापा कम करता है, हार्ट में अर्टेरिस में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । डॉक्टर अक्सर ये कहते है न की दिल कमजोर है आपका; अगर दिल कमजोर है तो आप जरुर अर्जुन की छाल लीजिये हरदिन, दिल बहुत मजबूत हो जायेगा आपका; आपका esr ठीक होगा, ejection fraction भी ठीक हो जायेगा; बहुत अछि दावा है ये अर्जुन की छाल ।
और एक अछि दावा है हमारे घर में वो है लौकी का रस । एक कप लौकी का रस रोज पीना सबेरे खाली पेट नास्ता करने से एक घंटे पहले ; और इस लौकी की रस में पांच धनिया पत्ता, पांच पुदीना पत्ता, पांच तुलसी पत्ता मिलाके, तिन चार कलि मिर्च पिस के ये सब डाल के पीना. ये बहुत अच्छा आपके bp ठीक करेगा और ये ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है, कोलेस्ट्रोल को ठीक रखेगा, डाईबेटिस में भी काम आता है ।
और एक मुफ्त की दावा है, बेल पत्र की पत्ते - ये उच्च रक्तचाप में बहुत काम आते है । पांच बेल पत्र ले कर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लीजिये, इतना गरम करिए के पानी आधा हो जाये, फिर उसको ठंडा करके पि लीजिये ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीक करता है और ये बेलपत्र आपके सुगर को भी सामान्य कर देगा । जिनको उच्च रक्तचाप और सुगर दोनों है उनके लिए बेल पत्र सबसे अछि दावा है ।
और एक मुफ्त की दावा है हाई bp के लिए - देशी गाय की मूत्र पीये आधा कप रोज सुबह खाली पेट ये बहुत जल्दी हाई bp को ठीक कर देता है । और ये गोमूत्र बहुत अद्भूत है, ये हाई bp को भी ठीक करता है और लो bp को भी ठीक कर देता है - दोनों में काम आता है और येही गोमूत्र डाईबेटिस को भी ठीक कर देता है, arthritis, gout (गठिया) दोनों ठीक होते है । अगर आप गोमूत्र लगातार पि रहे है तो दमा भी ठीक होता है अस्थमा भी ठीक होता है, tuberculosis भी ठीक हो जाती है । इसमें दो सावधानिया ध्यान रखने की है के गाय सुद्धरूप से देशी हो और वो गर्भावस्था में न हो ।
हाई बीपी वाले पेशेंट को बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि उसके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकल जाएं
Low bp:की बीमारी के लिए दावा. निम्न रक्तचाप की बीमारी के लिए सबसे अछि दावा है गुड । ये गुड पानी में मिलाके, नमक डालके, नीबू का रस मिलाके पि लो । एक ग्लास पानी में 25 ग्राम गुड, थोडा नमक नीबू का रस मिलाके दिन में दो तिन बार पिने से लो bp सबसे जल्दी ठीक होगा ।
और एक अछि दावा है.अगर आपके पास थोड़े पैसे है तो रोज अनार का रस पियो नमक डालकर इससे बहुत जल्दी लो bp ठीक हो जाती है, गन्ने का रस पीये नमक डालकर ये भी लो bp ठीक कर देता है, संतरे का रस नमक डाल के पियो ये भी लो bp ठीक कर देता है, अनन्नास का रस पीये नमक डाल कर ये भी लो bp ठीक कर देता है ।
लो bp के लिए और एक बढ़िया दावा है मिसरी और मखन मिलाके खाओ - ये लो bp की सबसे अछि दावा है ।
लो bp के लिए और एक बढ़िया दावा है दूध में घी मिलाके पियो, एक ग्लास देशी गाय का दूध और एक चम्मच देशी गाय की घी मिलाके रातको पिने से लो bp बहुत अछे से ठीक होगा ।
और एक अछि दावा है लो bp की और सबसे सस्ता भी वो है नमक का पानी पियो दिन में दो तिन बार, जो गरीब लोग है ये उनके लिए सबसे अच्छा है ।

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PCOD and Homoeopathy: Obesity and Infertility

MD - Homeopathy
Homeopath, Pune
PCOD and Homoeopathy: Obesity and Infertility

Polycystic ovarian disease is very common disorder occurs 1 in 10 females.  It is most important  cause for infertility and obesity. Obesity and PCOD are interrelated or depends  on each other  as obesity increase leads to PCOD and PCOD leads to Obesity. So the weight  control is one of the important factor in case of PCOD.

PCOD is a disorder occurred due to disturbances of female hormonal levels leads cystic appearances of ovaries, to menstrual irregularities, facial hair growth, obesity, thinning of hairs. 

Causes  of PCOD:

1. Increase in insulin levels

2. Increase in leutinising Harmon levels

3. Increase in lactating harmone

4. Increase in testosterone levels 

Symptoms of PCOD:

1. Menstrual irregularities

2. Facial hair growth

3. Oiling of skin leads to acne

4. Abdominal pain

5. Obesity

6. Infertility 

Homoeopathic medicines not only  help to remove the symptoms of PCOD but also regularise the function of the ovaries, normalise the hormonal levels. Homoeopathy removes the route cause of disease and cures the disease. There are lot many Homoeopathic medicines has wonderful result s in PCOD such as Pulsatilla is given  to the sensitive woman with irregularities of menses, irritability. Thuja, sepia, sabadilla, cocculus, arsenic.

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Treatment Of Psoriasis In Ayurveda

BAMS, CERTIFICATE COURSE IN KSHAR-SUTRA SURGERY
Ayurveda, Jodhpur
Treatment Of Psoriasis In Ayurveda

Treatment Of Psoriasis In Ayurveda:

  • Adopt your ancient ayurvedic medicine system and make your whole and healthy india healthy.
  • Ayurveda is not only a medical practice but it is also a science of life.
  • It is possible to treat 100 percent of every disease, according to the condition of the disease and the condition of various diseases of the skin are possible in ayurveda.
  • Psoriaisis, which is called bark disease in ayurveda, this disease is very good treatment in ayurveda. Ayurvedic classical yoga is proven to be useful for this disease free from the disease.
  • If a patient is troubled by psoriasis around you, after taking many medicines, it is not possible to make them aware about ayurvedic medicine.
  • We have reliable treatment of dermatological diseases.
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Knee Joint Pain

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MD- Ayurveda
Ayurveda,
Knee Joint Pain

Use fresh juice of alovera and shunti every day early in the morning.

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Benefits of Hot Packs

BPTh/BPT
Physiotherapist, Delhi
Benefits of Hot Packs

Hot packs are very effective as they dilate blood vessels and increase blood flow, delivering needed nutrients and oxygen to cells in the area being heated, aiding the removal of cell waste and promoting healing.

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Hot Therapy

BPTh/BPT
Physiotherapist, Delhi
Hot Therapy

Electric pads, hot water bottles, and gel packs or moist such as damp clay packs are the common hot agents used for hot therapy.

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