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Mallige Medical Centre

  4.3  (16 ratings)

Multi-speciality Hospital (Dermatologist, Gynaecologist & more)

#31/32, Crescent Road Landmark : Near Race course Road & Shivananda Circle,Opposite To Hotel Bangalore International Bangalore
23 Doctors · ₹0 - 750
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Mallige Medical Centre   4.3  (16 ratings) Multi-speciality Hospital (Dermatologist, Gynaecologist & more) #31/32, Crescent Road Landmark : Near Race course Road & Shivananda Circle,Opposite To Hotel Bangalore International Bangalore
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We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply....more
We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply.
More about Mallige Medical Centre
Mallige Medical Centre is known for housing experienced Ophthalmologists. Dr. T.M. Muddappa, a well-reputed Ophthalmologist, practices in Bangalore. Visit this medical health centre for Ophthalmologists recommended by 87 patients.

Timings

MON
10:00 AM - 08:30 PM
TUE-SAT
09:00 AM - 08:30 PM

Location

#31/32, Crescent Road Landmark : Near Race course Road & Shivananda Circle,Opposite To Hotel Bangalore International
Race Course Road Bangalore, Karnataka - 560020
Click to view clinic direction
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Doctors in Mallige Medical Centre

Dr. T.M. Muddappa

MBBS, MS - Ophthalmology, DOMS
Ophthalmologist
45 Years experience
350 at clinic
Unavailable today

Dr. Purushothama K R

MBBS, MD - General Medicine
General Physician
21 Years experience
100 at clinic
Available today
07:00 PM - 08:30 PM

Dr. Vidhya Jagirdar

MBBS, MD - Obstetrics & Gynaecology
Gynaecologist
35 Years experience
400 at clinic
Available today
10:00 AM - 08:00 PM

Dr. Seema Shreedhar

MBBS, DGO
Gynaecologist
29 Years experience
500 at clinic
Unavailable today

Dr. M.M. Satish Kumar

MBBS, MD - Internal Medicine, Fellowship in Nephrology
Nephrologist
21 Years experience
Unavailable today

Dr. T.S Ravindra

MBBS, MD
General Physician
35 Years experience
300 at clinic
Unavailable today

Dr. Tarakaram Narayana

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Neuro Surgery
Neurosurgeon
29 Years experience
350 at clinic
Unavailable today

Dr. Basavaraj Dugani

MBBS, MRCP, FRCS - Thoracic Surgery
Cardiologist
54 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. K.N. Srikanth

MS - General Surgery, Fellowship of the Royal College of Surgeons (FRCS)
Bariatrician
22 Years experience
100 at clinic
₹300 online
Available today
07:00 PM - 07:30 PM

Dr. Shenoy Manohar Vasudev

MBBS, MD, DVD
Dermatologist
33 Years experience
550 at clinic
Unavailable today

Dr. G Ravi Shankar

MBBS, Diploma in Otorhinolaryngology (DLO), DNB (ENT)
ENT Specialist
35 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. B. M. Suraj

MBBS, MD - General Medicine
Internal Medicine Specialist
23 Years experience
100 at clinic
Available today
04:50 PM - 06:00 PM

Dr. Kalyani

MBBS, DGO, MD-Gynaecology
Gynaecologist
46 Years experience
500 at clinic
Available today
04:00 PM - 05:30 PM

Dr. Purushottam T. Acharya

MBBS, DM - Neurology, MD - General Medicine
Neurologist
39 Years experience
100 at clinic
Available today
05:30 PM - 07:00 PM

Dr. Mahesh Gowda

MBBS, MS - General Surgery, PDCC (Endocrine Surgery)
Cosmetic/Plastic Surgeon
22 Years experience
100 at clinic
Unavailable today

Dr. Arun Raykar

MBBS, MS - ENT
ENT Specialist
14 Years experience
350 at clinic
Available today
05:30 PM - 06:30 PM

Dr. B.P. Mruthyunjayanna

MBBS, MD - Medicine, DM - Neurology
Neurologist
56 Years experience
450 at clinic
Unavailable today

Dr. Mohammed Attaullah Khan S

MBBS, DNB, Diploma in Tuberculosis and Chest Diseases (DTCD)
Pulmonologist
19 Years experience
Unavailable today

Dr. N. Muralidhar

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
37 Years experience
400 at clinic
Available today
06:30 PM - 08:00 PM

Dr. Anand Jayaraman

MBBS, MRCP - Psychiatry, CCST - Internal Medicine
Psychiatrist
23 Years experience
750 at clinic
Available today
04:00 PM - 05:00 PM
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ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय - Measures To Grow Breast!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय  - Measures To Grow Breast!

ब्रेस्ट को स्त्रीत्व या मातृत्व का प्रतीक कहा जाता है. इसे स्त्री के शरीर का सबसे खूबसूरत और आकर्षक अंग कहा जाता है. जाहीर है स्तनों का एक सामान्य आकार होना ठीक रहता है. लेकिन कई महिलाएं अपने स्तनों के आकर को लेकर संतुष्ट नहीं होती हैं. ये लेख ऐसी महिलाओं के मदद के लिए ही है. आइए इस लेख के माध्यम से ब्रेस्ट को बड़ा करने के कुछ उपायों को जानें.

सौंफ़ बीज से

सौंफ़ का बीज एस्ट्रोजेन के उत्पादन को उत्तेजित करने में मदद करती है. एस्ट्रोजेन एक महिला हार्मोन है जो स्तनों के विकास को बढ़ावा देता है. सौंफ़ के बीज का उपयोग करने के लिए कॉड लिवर के तेल में सौंफ़ के बीज को गर्म करें जब तक तेल लाल नहीं हो जाता है. इसे ठंडा करने के बाद, अपने स्तनों की इस तेल के साथ 15 मिनट के लिए मालिश करें और एक घंटे बाद धो लें. इस उपाय को दिन में दो बार दोहराएं.

लाल क्लोवर

लाल तिपतिया घास ब्रेस्ट वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए फायदेमंद है. इसमें फाइटोस्टारोगन है जो ब्रेस्ट के ऊतको के विकास को उत्तेजित करता है. आप 10 मिनट के लिए एक गिलास पानी में इस जड़ी बूटी के सूखे फूलो को उबालकर लाल क्लोवर चाय तैयार कर सकते हैं. प्रभावी परिणाम के लिए हर दिन इस चाय के 2 कप पिएं.

व्यायाम से

ब्रेस्ट को बढ़ाने के लिए आप पुश-अप, डम्बल से ब्रेस्ट प्रेस, वाल प्रेस आदि व्यायाम कर सकती है. इन व्यायामो में बाजुओं और कंधों की गतिविधियाँ भी शामिल है जो ब्रेस्ट क्षेत्र के आसपास की त्वचा और मांसपेशियों के ऊतकों को टोन करती है. इससे आपके स्तनों को मजबूती मिलेगी और बड़े दिखाई देंगे. इन अभ्यासों को दैनिक रूप से कम से कम 30 मिनट के लिए करें. सही तरीके से करने के लिए जिम प्रशिक्षक या पेशेवर ट्रेनर से सलाह लें.

सिंहपर्णी की चाय

सिंहपर्णी के पौधे की जड़ स्तनो के ऊतको के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत अच्छी होती है. यह एक और उपयोगी जड़ी बूटी है जिससे आप बड़े स्तनों की इच्छा पूरी कर सकते हैं. इसके लिए आपको एक गिलास पानी में डेंडिलियन जड़ को 5 मिनट के लिए उबालकर चाय तैयार करने की ज़रूरत है. इस चाय को हर रोज पिएं.

केले से

आप शायद इस तथ्य से परिचित होंगे कि ब्रेस्ट वसा से बने होते हैं. तो बड़े और फुलर स्तनों को विकसित करने के लिए, आपको वसा की आवश्यकता होगी. इसलिए इसका एक अच्छा तरीका है केले का सेवन करना. यह आपके ब्रेस्ट के विकास के लिए आवश्यक वसा पोषण प्रदान करने में मदद करेगा.

शतावरी पाउडर

महिलाओं की हर प्रकार की समस्याओं में शतावरी नामक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बहुत लोकप्रिय है. इसका नियमित रूप से सेवन आपके स्तनों को बढ़ाने में मदद करेगा. आप सोने से पहले एक कप दूध के साथ 3 ग्राम शतावरी जड़ के पाउडर का सेवन कर सकते हैं. लगभग 2 महीने के लिए इसका सेवन रोज करें.

प्याज का रस

प्याज का रस स्वस्थ और बड़े स्तनों को बढ़ावा देने में सहायक होता है. हर रात सोने से पहले शहद के साथ प्याज का रस मिलाकर स्तनों की मसाज करें. रात भर इस मिश्रण को लगाकर रखें और सुबह उठने के बाद धो लें. यह उपाय स्तनों का आकर बढ़ाने में फायदेमंद साबित होगा. आप ऐसा दैनिक रूप से कर सकते हैं.

जैतून का तेल

जैतून के तेल की मालिश आपके स्तनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. आपको हर दिन एक या दो बार 20 मिनट के लिए अपने स्तनों की नियमित रूप से मालिश करनी चाहिए. आप इसके लिए गुनगुने जैतून के तेल का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा आप तिल के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं. कम से कम दो महीने के लिए ऐसा रोजाना करें.

मसूर की दाल

मसूर की लाल दालें फ़्योटोस्ट्रोजन से भरी हुई है. ये हार्मोन ब्रेस्ट ऊतक के विकास में सहायक होते हैं. इस सरल घरेलू उपाय का उपयोग करने के लिए, आपको सबसे पहले 2 घंटे के लिए गर्म पानी में लाल दाल को भिगोना होगा. इसके बाद इसका पेस्ट तैयार करें और अपने स्तनों पर लगाएँ और आधे घंटे के बाद धो लें.

वीट जर्म ऑइल

वीट जर्म ऑइल कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरा हुआ है जो फुलर और सुडौल स्तनों को विकसित करने में सहायता करता है. इस तेल के साथ नियमित रूप से मालिश आपके स्तनों को बढ़ाने में सहायता करेगी. आप इस तेल के कुछ बूंद लें और मालिश करने से पहले अपने दोनों हथेलियों को थोड़ा गर्म करने के लिए रगड़ें. लगभग 10 मिनट के लिए दिन में दो बार मालिश करें.

मेथी

मेथी, महिलाओं के स्तनो के आकार को बड़ा करना के लिए भी काम आती है. इसमें शक्तिशाली फाइटोस्टेग्रन्स शामिल होता हैं जो एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन की उत्तेजना से स्तनों के आकार को बढ़ाने में सहायता करते हैं. उपयोग के लिए, आप मेथी पाउडर और पानी को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को स्तनों पर लगाएँ और 15 मिनट के बाद धो लें. आप ऐसा दिन में दो बार कर सकते हैं.

मूली

मूली स्तनों के रक्त प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है. इससे स्तनो की वृद्धि में मदद मिलती है. अपने आहार में मूली को शामिल करें और नियमित आधार पर इसका उपभोग करें.
 

Anal Fissure Treament!

Graduate of Ayurvedic Medicine and Surgery (GAMS)
Ayurveda, Delhi
Anal Fissure Treament!

Anal fissure

दोस्तों आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनशैली कुछ ऐसी हो गयी है की लोगो को बवासीर से ज्यादा फिशर हो रहा है, 

फिशर अक्सर तब होता है, जब आप मल त्याग के दौरान कठोर और बड़े आकार का मल निकालते हैं। फिशर के कारण आमतौर पर मल त्याग करने के दौरान दर्द होना और मल के साथ में खून भी आता है। 

फिशर के दौरान आपको अपनी गुदा के अंत में मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती है। फिशर छोटे बच्चों में काफी सामान्य स्थिति होती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

फिशर के सामान्य तौर पर दो प्रकार होते हैं: 
तीव्र (acute) – त्वचा की ऊपरी सतह पर छेद या दरार को एक्यूट फिशर कहा जाता है। 
दीर्घकालिक (chronic) - अगर त्वचा की सतह पर हुआ छेद या दरार ठीक ना हो पाए, तो समय के साथ-साथ क्रॉनिक फिशर विकसित होने लगता है।

गुदा में फिशर के लक्षण व संकेतों में निम्न शामिल हो सकते हैं

मल त्याग के दौरान दर्द, कभी-कभी गंभीर दर्द होना। 
मल त्याग करने के बाद दर्द होना जो कई घंटों तक रह सकता है। 
मल त्याग के बाद मल पर गहरा लाल रंग दिखाई देना। 
गुदा के आसपास खुजली या जलन होना। 
गुदा के चारों ओर की त्वचा में एक दरार दिखाई देना। 
गुदा फिशर के पास त्वचा पर गांठ या स्किन टैग दिखाई देना।

फिशर के अन्य संभावित कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं

लगातार डायरिया (दस्त) रहना। 
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (ibd), जैसे क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस। 
लंबे समय तक कब्ज रहना। 
कभी-कभी यौन संचारित संक्रमण (sti), जैसे कि सिफिलिस या हर्पीस, जो गुदा व गुदा नलिका को संक्रमित और नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
एनल स्फिंक्टर की मांसपेशियां असामान्य रूप से टाइट होना, जो आपकी गुदा नलिका में तनाव बढ़ा सकती हैं। जो आपको एनल फिशर के लिए अतिसंवेदनशील बनाता है।

एनल फिशर से बचाव

आप कब्ज की रोकथाम करके एनल फिशर विकसित होने के जोखिमों को कम कर सकते हैं। अगर पहले कभी आपको फिशर की समस्या हुई है, तो कब्ज की रोकथाम करना बहुत जरूरी है। 

आप निम्न की मदद से कब्ज की रोकथाम कर सकते हैं

एक संतुलित आहार खाएं, जिसमें अच्छी मात्रा में फाइबर, फल और सब्जियां शामिल होती हैं। 
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीएं। नियमित रूप से व्यायाम करते रहें। 
यह महत्वपूर्ण है कि आप मल त्याग करने के बाद अपने गुदा को धीरे-धीरे पोंछें। 
जब शौचालय जाने की इच्छा महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि आंतों को खाली ना करना बाद में कब्ज का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आंतों में जमा होने वाला मल कठोर बन जाता है, जो गुदा के अंदर से गुजरने के दौरान दर्द व गुदा में दरार (खरोंच) पैदा कर कर सकता है। 
टॉयलेट में अधिक देर तक ना बैठें और अधिक जोर ना लगाएं। ऐसा करने से गुदा नलिका में दबाव बढ़ता है। अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जो फिशर होने के जोखिम को बढ़ाती है, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं। वे आपसे इस बारे में बात करेंगे कि इस स्थिति को कैसे मैनेज करना है और एनल फिशर होने के जोखिमों को कैसे कम करना है।

फिशर का परीक्षण कैसे किया जाता है? 
 

डॉक्टर आमतौर पर गुदा के आस-पास के क्षेत्र की जांच करके फिशर का परीक्षण कर सकते हैं। लेकिन वे परीक्षण की पुष्टी करने के लिए गुदा का भी परीक्षण कर सकते हैं। परीक्षण के दौरान डॉक्टर मरीज की गुदा में एंडोस्कोप (endoscope) डालते हैं, जिससे वे दरार को आसानी से देख पाते हैं। एंडोस्कोप एक मेडिकल उपकरण होता है, यह एक पतली ट्यूब होती है जिसकी मदद से डॉक्टर गुदा नलिका की जांच करते हैं। एंडोस्कोप के प्रयोग की मदद से डॉक्टर गुदा व गुदा नलिका से जुड़ी अन्य बीमारियों का पता भी लगा सकते हैं, जैसे बवासीर।

अनल फिशर के लिए नवीनतम आधुनिक उपचार
लेटरल इंटरनल स्फिंक्टरोटॉमी anal fissure का नया आधुनिक उपचार है, इसमें पेशेंट मात्र 7 से 15 दिन में बिलकुल ठीक हो जाता है साथ में anal dilatation करना होता है ताकि गुदा की मासपेशिया नरम मुलायम बने और गुदा की चिकनाहट बड़े, 
 

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Spermatocele!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Spermatocele!

Spermatocele 

Treatment of Spermatocele
Homeopathic Treatment of Spermatocele
Acupuncture & Acupressure Treatment of Spermatocele
Psychotherapy Treatment of Spermatocele
Conventional / Allopathic Treatment of Spermatocele
Surgical Treatment of Spermatocele
Dietary & Herbal Treatment of Spermatocele
Other Treatment of Spermatocele
What is Spermatocele
Symptoms of Spermatocele
Causes of Spermatocele
Risk factors of Spermatocele
Complications of Spermatocele
Lab Investigations and Diagnosis of Spermatocele
Precautions & Prevention of Spermatocele
Treatment of Spermatocele 

Homeopathic Treatment of Spermatocele

Homeopathy heals cyst swelling and pain. It treats the person as a whole. Treatment is constitutional. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Spermatocele are:

Am C
Canth
Puls
Spong
Graph
Rhodo
Teuc
 

Acupuncture and Acupressure Treatment of Spermatocele

Acupuncture relieves by improving the physiological function of the organs and organ system. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Spermatocele

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Spermatocele

Allopathic Treatment of Spermatocele involves over-the-counter pain medications, such as acetaminophen or ibuprofen.

Surgical Treatment of Spermatocele

The following surgery is performed for spermatocele:

Spermatocelectomy – is performed on an outpatient basis, using local or general anesthetic. The surgeon makes an incision in the scrotum and separates the spermatocele from the epididymis.

What is Spermatocele?

A spermatocele is a small cyst filled with clear fluid that may contain sperm. Spermatoceles, sometimes called spermatic cysts, are common.

Symptoms of Spermatocele

Pain or discomfort in the affected testicle
Swelling behind and above the testicle
A feeling of heaviness in the testicle with the spermatocele
 

Causes of Spermatocele

The exact cause of spermatoceles is unknown.

Risk factors of Spermatocele

Common in men
Age between 40 and 60
 

Diagnosis of Spermatocele

Diagnosis of Spermatocele involves the following tests:

Physical exam
Ultrasound
Transillumination
 

Precautions & Prevention of Spermatocele

There is no way to prevent a spermatocele.

Abdominal Strain!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Abdominal Strain!

Abdominal Strain

Treatment of Abdominal Strain
Homeopathic Treatment of Abdominal Strain
Acupuncture & Acupressure Treatment of Abdominal Strain
Psychotherapy Treatment of Abdominal Strain
Conventional / Allopathic Treatment of Abdominal Strain
Surgical Treatment of Abdominal Strain
Dietary & Herbal Treatment of Abdominal Strain
Other Treatment of Abdominal Strain
What is Abdominal Strain
Symptoms of Abdominal Strain
Causes of Abdominal Strain
Risk factors of Abdominal Strain
Complications of Abdominal Strain
Lab Investigations and Diagnosis of Abdominal Strain
Precautions & Prevention of Abdominal Strain
 

Treatment of Abdominal Strain 

Homeopathic Treatment of Abdominal Strain

Homeopathy gives instant relief in pain and inflammation. It treats the person as a whole. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some common homeopathic medicines used for abdominal strain are:

Belladona
Bryonia
Ran B
Rhus Tox
Mag M 

Acupuncture & Acupressure Treatment of Abdominal Strain

Acupuncture proves beneficial in the treatment of strained abdominal muscles. Doctors may also recommend physical therapy for treatment of pain in the abdominal wall Acupuncture and Dry Needling are useful modalities to provide pain relief and assist injury rehabilitation. According to acupuncture theory, chi circulates in the body along twelve major pathways, called meridians, each linked to specific internal organs and organ systems.

Psychotherapy Treatment of Abdominal Strain

Psychotherapy is a form of treatment that has been studied in terms of its effectiveness in helping people with abdominal strain. In this treatment, patient is taught healthy ways of thinking and coping behaviors to help reduce suffering. A therapist will teach relaxation and other pain management skills.

Conventional / Allopathic Treatment of Abdominal Strain

Allopathic treatment helps to address symptoms of abdominal pain. Conventional Allopathic treatment modalities may help to provide momentary relief from the symptoms.

Surgical Treatment of Abdominal Strain

In some cases of abdominal strain such as appendicitis and a hernia, surgery is necessary.

Dietary & Herbal Treatment of Abdominal Strain

Matricaria recutita is a medicinal herb, used for centuries as a natural anti-inflammatory and anti-spasmodic. It is an extremely effective treatment for abdominal pain.

Other Treatment of Abdominal Strain

The Ice Packs relieve pain and reduce bleeding in the damaged tissue.

What is Abdominal Strain?

Abdominal strain is damage to the abdominal muscle due to over-stretching of the muscle tissue. It is an injury to one of the muscles of the abdominal wall. The damage involves tearing the muscle tissue.

Symptoms of Abdominal Strain 

Swelling and bruising
Muscle pain
Muscle spams
Stiffness
Inflammation
Redness

Causes of Abdominal Strain

Accident or injury
Exercising excessively
Improperly performing exercises or sports activities
Lifting heavy objects
Sharply twisting the body

Risk factors of Abdominal Strain

Overexerting muscles
Exercising in cold weather
Performing exercises incorrectly
Having weak back muscles
Being tired
Participating in forceful activity

Complications of Abdominal Strain

Herniation of the intestines 

Diagnosis of Abdominal Strain

Your doctor will ask about your symptoms and medical history. Physical exam includes Tenderness, swelling, pain and some loss of strength may be present.

Tests include:

X-rays
Ultrasound
MRI

Precautions &Prevention of Abdominal Strain 

Maintain good muscle strength
If you are tired, stop exercising
Get proper training exercises
Do not overexert

Self Injury Or Cutting!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi

Self Injury Or Cutting 

Treatment of Self Injury or Cutting
Homeopathic Treatment of Self Injury or Cutting
Acupuncture & Acupressure Treatment of Self Injury or Cutting
Psychotherapy Treatment of Self Injury or Cutting
Conventional / Allopathic Treatment of Self Injury or Cutting
Surgical Treatment of Self Injury or Cutting
Dietary & Herbal Treatment of Self Injury or Cutting
Other Treatment of Self Injury or Cutting
What is Self Injury or Cutting
Symptoms of Self Injury or Cutting
Causes of Self Injury or Cutting
Risk factors of Self Injury or Cutting
Complications of Self Injury or Cutting
Lab Investigations and Diagnosis of Self Injury or Cutting
Precautions & Prevention of Self Injury or Cutting
Treatment of Self Injury or Cutting 

Homeopathic Treatment of Self Injury or Cutting

Homeopathy is safe natural and effective treatment of psychoemotional complaints. It acts on thoughts, emotions and behavior to help develop a healthy personality. It has the ability to relieve emotional pain and suffering. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Self Injury or Cutting are:

Agar
Bell
Hyos
Lach
Lil T
Merc
Nux V
Staph
 

Acupuncture and Acupressure Treatment of Self Injury or Cutting

Acupuncture is well known for treatment of psychological disorders. It calms mind and relieves stress arising due to deep psychological issues. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Self Injury or Cutting

Psychotherapy and hypnotherapy Treatment of Self Injury or Cutting can help you identify and manage underlying issues that trigger self-injury. In psychotherapy, individuals can talk through their problems, and establish what is at the heart of their need to self-harm. It helps you learn skills to better tolerate stress and regulate your emotions. It also boosts your self-image; improve your relationships and problem-solving skills. Hypnotherapy is safe and quick treatment of deep seated psychological issues and barriers.

Conventional / Allopathic Treatment of Self Injury or Cutting

Allopathic Treatment of Self Injury or Cutting involves the use of antidepressants or other psychiatric medications. These medications help improve depression, anxiety or other mental disorders commonly associated with self-injury.

What is Self Injury or Cutting

Self-injury is the act of deliberately harming your own body, such as cutting or burning yourself. Self-injury is often done on impulse, it may be considered an impulse-control behavior problem.

Symptoms of Self Injury or Cutting

Scars, such as from burns or cuts
Fresh cuts, scratches, bruises or other wounds
Broken bones
Keeping sharp objects on hand
Relationship troubles
Wearing long sleeves or long pants, even in hot weather
Claiming to have frequent accidents
 

Causes of Self Injury or Cutting

Emotionally empty
Seek attention or to manipulate others
Punish yourself for perceived faults
 

Risk factors of Self Injury or Cutting

Early teen years
Sexually, physically or emotionally abused
Negative emotions
Having friends who self-injure
Alcohol or substance use
 

Complications of Self Injury or Cutting

Permanent scars or disfigurement
Guilt and low self-esteem
Accidental or deliberate suicide
Infection
Blood loss if major blood vessels or arteries are cut 
 

Diagnosis of Self Injury or Cutting

There is no specific diagnostic test for self-injury. Diagnosis is based on a physical and mental evaluation.

Precautions & Prevention of Self Injury or Cutting

There is no sure way to prevent self-injury. You can follow the following ways to reduce the risk of self-injury:

Promoting programs encouraging peers to seek help
Offering education about media influence
Adults should be educated about the warning signs of self-injury
Identifying people most at risk and offering help

 

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Rheumatoid Arthritis!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Rheumatoid Arthritis!

Rheumatoid Arthritis 

Treatment of Rheumatoid arthritis
Homeopathic Treatment of Rheumatoid arthritis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Rheumatoid arthritis
Psychotherapy Treatment of Rheumatoid arthritis
Conventional / Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis
Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis
Dietary & Herbal Treatment of Rheumatoid arthritis
Other Treatment of Rheumatoid arthritis
What is Rheumatoid arthritis
Symptoms of Rheumatoid arthritis
Causes of Rheumatoid arthritis
Risk factors of Rheumatoid arthritis
Complications of Rheumatoid arthritis
Lab Investigations and Diagnosis of Rheumatoid arthritis
Precautions & Prevention of Rheumatoid arthritis
Treatment of Rheumatoid arthritis

Homeopathic Treatment of Rheumatoid arthritis

Homeopathy is extremely successful in treating rheumatoid arthritis. Homeopathic treatment gives relief in arthritis with inflammation, pain, stiffness and lameness. It is useful in preventing and treating deformities associated with the disease. Some of the homeopathic remedies that can be used for treatment of rheumatoid arthritis are:

Arnica
Bryonia
Calcarea
Causticum
Chinin s
Dulcamara
Kali carb
Pulsatilla
 

Acupuncture & Acupressure Treatment of Rheumatoid arthritis

The acupuncture and acupressure stimulate dilation of the blood vessels, potentially reducing swelling and pain. Acupuncture and Acupressure helps in nourishing the tendons and joints. It also has a strong effect on promoting the smooth flow of chi throughout the body. Obstruction to the smooth flow of chi causes pain and discomfort. Acupuncture gives lasting relief in rheumatoid arthritis.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Rheumatoid arthritis

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis

Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis involves the following medications:

NSAIDs – ibuprofen and naproxen
Steroids – prednisone
DMARDs – leflunomide and hydroxychloroquine
Immunosuppressants – cyclosporine and cyclophosphamide
TNF-alpha inhibitors – etanercept and infliximab
 

Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis

Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis involves the following surgeries:

Total joint replacement
Tendon repair
Joint fusion
 

Dietary & Herbal Treatment of Rheumatoid arthritis

Eat foods rich in omega-3 fatty acid such as soybeans, walnuts and avocados
Avoid saturated fats
Avoid fried and grilled food
Avoid tea and coffee
 

Other Treatment of Rheumatoid arthritis

Heat compresses relax your muscles and stimulate blood flow
Applying cold also decreases muscle spasms.
 

What is Rheumatoid arthritis

Rheumatoid arthritis (RA) is a form of arthritis that causes pain, swelling, stiffness and loss of function in your joints. Hands, feet and wrists are commonly affected, but it can also damage other parts of the body.

Symptoms of Rheumatoid arthritis

Swollen joints
Pain in the joints
Fatigue
Fever
Weight loss
Morning stiffness
 

Causes of Rheumatoid arthritis

The exact cause of rheumatoid arthritis is unknown.

Risk factors of Rheumatoid arthritis

More common in women
Between the ages of 40 and 60
Cigarette smoking
Family history
 

Complications of Rheumatoid arthritis

Carpal tunnel syndrome
Heart problems
Lung disease
Deformities
Osteoporosis
 

Diagnosis of Rheumatoid arthritis

Diagnosis of Rheumatoid arthritis involves the following tests:

Physical exam
Blood tests
X-rays
 

Precautions & Prevention of Rheumatoid arthritis

You can gain control of rheumatoid arthritis and improve your chances by taking the following steps:

Get the treatment early
Avoid exercising tender, injured or severely inflamed joints
Rest when you need to
Use a cane in the hand opposite a painful hip or knee

Scoliosis!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi

Scoliosis 

Treatment of Scoliosis
Homeopathic Treatment of Scoliosis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Scoliosis
Psychotherapy Treatment of Scoliosis
Conventional / Allopathic Treatment of Scoliosis
Surgical Treatment of Scoliosis
Dietary & Herbal Treatment of Scoliosis
Other Treatment of Scoliosis
What is Scoliosis
Symptoms of Scoliosis
Causes of Scoliosis
Risk factors of Scoliosis
Complications of Scoliosis
Lab Investigations and Diagnosis of Scoliosis
Precautions & Prevention of Scoliosis
Treatment of Scoliosis 

Homeopathic Treatment of Scoliosis

Homeopathy treats the person as a whole. It can help in prevention and in slowing down progress of condition. It also helps in improving overall health. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Scoliosis are:
Calc
Lyco
Puls
Rhus tox
Ruta
Sepia
Silicea
 

Acupuncture and Acupressure Treatment of Scoliosis

Acupuncture relieves by improving the energy system. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Scoliosis

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and better life management. 

Conventional / Allopathic Treatment of Scoliosis

If your child’s bones are still growing, your doctor may recommend a brace. It usually prevents further progression of the curve.

Surgical Treatment of Scoliosis

Surgical Treatment of Scoliosis is called spinal fusion. Surgeons connect two or more of the bones in the spine (vertebrae) together, so they can’t move independently. Pieces of bone or a bone-like material are placed between the vertebrae. Metal rods, hooks, screws or wires typically hold that part of the spine straight and still while the old and new bone material fuses together.

 

Dietary & Herbal Treatment of Scoliosis

Eat sources of vitamin D such as cereal, saltwater fish and eggs
Eat calcium-rich foods such as Broccoli and orange juice
Eat dark leafy vegetables
 

What is Scoliosis

Scoliosis causes a sideways curve of your backbone, or spine. It occurs most often during the growth spurt just before puberty. Most cases of scoliosis are mild, but some children develop spine deformities that continue to get more severe as they grow.

Symptoms of Scoliosis

Uneven shoulders
one shoulder or hip that looks higher than the other
One shoulder blade that appears more prominent than the other
waistline is flat on one side
 

Causes of Scoliosis

Hereditary factors
Neuromuscular conditions, such as cerebral palsy or muscular dystrophy
Birth defects affecting the development of the bones of the spine
Injuries to or infections of the spine
 

Risk factors of Scoliosis

Family history
Between the ages of 9 and 15 years
Being a girl
 

Complications of Scoliosis

Lung and heart damage
Chronic back pain
Self-conscious about their appearance 
 

Diagnosis of Scoliosis

Diagnosis of Scoliosis involves the following tests:

Medical history
Physical exam
Neurological exam
X-rays
MRI and CT scan
Bone scan
 

Precautions & Prevention of Scoliosis

General exercise or participating in sports may have the benefit of improving overall health and well-being.

 

Hi, I am 36 years old. I have fatty liver and bad gas and constipation. Please suggest me.

BHMS, Diploma in Dermatology
Homeopath, Hyderabad
Hi, I am 36 years old. I have fatty liver and bad gas and constipation. Please suggest me.
1. Eat less cruciferous & allium vegetables. 2. Regulate your fiber intake. 3. Eat small amonts of legumes .4. Cut out dairy. 5. Cook your food. 6. Be careful what you drink. 7. Avoid fatty food. 8. Cut out junk food. 9. Decrease portion sizes. 10. Decrease stress.
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Reactive Arthritis!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi

Reactive Arthritis 

Treatment of Reactive arthritis
Homeopathic Treatment of Reactive arthritis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Reactive arthritis
Psychotherapy Treatment of Reactive arthritis
Conventional / Allopathic Treatment of Reactive arthritis
Surgical Treatment of Reactive arthritis
Dietary & Herbal Treatment of Reactive arthritis
Other Treatment of Reactive arthritis
What is Reactive arthritis
Symptoms of Reactive arthritis
Causes of Reactive arthritis
Risk factors of Reactive arthritis
Complications of Reactive arthritis
Lab Investigations and Diagnosis of Reactive arthritis
Precautions & Prevention of Reactive arthritis
Treatment of Reactive arthritis 

Homeopathic Treatment of Reactive Arthritis

Homeopathy improves immunity, heals joints and relieves pain, inflammation and other complaints. It treats the person as a whole. Treatment is constitutional. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Reactive Arthritis are:

Bryonia
Ledum
Silicea
Calcarea
Guaj
Kali
Merc
Phyto

Acupuncture and Acupressure Treatment of Reactive Arthritis

Acupuncture relieves by improving the physiological function of the organs and organ system. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Reactive Arthritis

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Reactive arthritis

Allopathic Treatment of Reactive arthritis involves the following medications:

Nonsteroidal anti-inflammatory drugs (NSAIDs)
Corticosteroids
Tumor necrosis factor (TNF) blockers

Dietary & Herbal Treatment of Reactive arthritis

Limit your intake of sugar, fat, cholesterol and alcohol
Eat plenty of fresh fruits and vegetables
Eat whole grains and lean protein
 

Other Treatment of Reactive arthritis

Strengthening exercises helps in developing the muscles around your affected joints, which increase the joint’s support.

What is Reactive arthritis

Reactive arthritis is joint pain and swelling triggered by an infection. The joints in your knees, ankles and feet are the usual targets of reactive arthritis. It develops shortly after a bowel, genital tract or, less frequently, throat infection.

 

Symptoms of Reactive arthritis

Joint pain in your knees, ankles and feet
Pain and swelling at the back of your ankle
Swollen toes or fingers, which may look like sausages
Pain in your low back or buttocks
Pain or burning during urination
Inflammation of the prostate gland
Inflammation of the cervix
Eye inflammation
Mouth ulcers
Skin rashes

Causes of Reactive arthritis

Numerous bacteria can cause reactive arthritis. The most common ones include:

Chlamydia
Salmonella
Shigella
Yersinia
Campylobacter
 

Risk factors of Reactive arthritis

Hereditary factors
Common in men
Age 20 to 40 years
 

Diagnosis of Reactive arthritis

Diagnosis of Reactive arthritis involves the following tests:

Physical examination
Blood tests
Joint fluid tests
Urine and Stool test
X-rays of your joints
 

Precautions & Prevention of Reactive arthritis

Cooked your food properly
Make sure your food is stored at proper temperatures

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण - Cervical Cancer Symptoms !

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण  - Cervical Cancer Symptoms !

केवल महिलाओं को होने वाले प्रमुख कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है. ये कैंसर महिलाओं में योनि से गर्भाशय की ओर एक संकीर्ण खुलाव जिसे गर्भाशय ग्रीवा भी कहते हैं, में जन्म लेता है. महिलाओं में इसकी गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यह दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है. भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु में सर्वाइकल कैंसर दूसरा कारण रहा है. दुर्भाग्य से, भारत जैसे विकासशील देशों में जागरूकता न होने कारण अधिकतर महिलाओं में यह कैंसर अग्रिम चरणों में ही सामने आता है. हालांकि इंस्पेक्शन स्क्रीनिंग्स, जो प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर सकते हैं, के आगमन से सर्वाइकल कैंसर के मामले कम दर्ज किये जा रहे हैं. आइए सर्वाइकल के लक्षणों को जानें.

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के लक्षण

कैंसर से पहले कोशिकाओं में होने वाले बदलावों और सर्विक्स के शुरूआती कैंसर आम तौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाते. इस वजह से पैप और एचपीवी टेस्ट्स की नियमित स्क्रीनिंग करवाते रहने से कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाया जा सकेगा और कैंसर को बनने या बढ़ने से भी रोका जा सकता है. बीमारी के अग्रिम चरण में होने वाले संभावित लक्षण हैं –
* असामान्य या अनियमित योनिक रक्तस्त्राव
* संभोग के वक़्त दर्द
* योनिक स्त्राव
* नियमित मासिक धर्म चक्र के बीच असामन्य रक्तस्त्राव
* यौन संभोग के दौरान रक्त स्त्राव
* पेल्विक एग्ज़ाम के बाद
* मेनोपॉज़ के बाद रक्तस्त्राव.
श्रोणिक दर्द जो मासिक धर्म चक्र से सम्बंधित नहीं है. भारी और असामान्य स्त्राव जो तरल, गाढ़ा और बदबूदार हो सकता है. मूत्रत्याग करने में दर्द. यह लक्षण किसी और स्वास्थ्य समस्या के कारण भी हो सकती हैं. कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से अवश्य सलाह करें.

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के कारण

कैंसर असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन और विकास के कारन होता है. असामान्य कोशिकाओं की दो परेशानियां होती हैं: ये मरते नहीं ये विभाजित होते रहते हैं ये असामन्य कोशिकाएं इस वजह से एकत्रित होकर ट्यूमर बन जाती हैं. सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में असामन्य कोशिकाओं के बन जाने से होता है. हालांकि, निम्न लिखित कुछ कारक हैं जो सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम बढ़ाते हैं:

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस

यह एक यौन संचारित वायरस है. इसके कई प्रकार होते हैं जिनमें से कम से कम 13 सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं.
असुरक्षित यौन सम्बन्ध: सर्वाइकल कैंसर का कारण बनने वाले HPV के प्रकार लगभग हर बार संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से फैलते हैं. जो महिलाएं एक से अधिक साथियों के साथ यौन संबंध बना चुकी हैं या जो कम उम्र में यौन सम्बन्ध बना चुकी होती हैं, उनमें इस कैंसर के होने का जोखिम ज़्यादा होता है.

धूम्रपान: धूम्रपान कई कैंसर के जोखिम को बढ़ता है.

कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकती है.
दीर्घकालिक मानसिक तनाव: जो महिलाएं लम्बे समय तक तनाव के उच्च दर का अनुभव करतीं हैं उनमें HPV से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है.

बहुत छोटी उम्र में गर्भधारण करना: जो महिलाएं 17 वर्ष की उम्र से पहले गर्भधारण कर लेती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर के बनने का जोखिम ज़्यादा होता है (उन महिलाओं की तुलना में जो 25 वर्ष के बाद पहली बार गर्भधारण करती हैं).

बार बार गर्भधारण करने से: जो महिलाएं तीन से ज़्यादा बच्चों को जन्म दे चुकी हैं उनमें इस बीमारी के होने का जोखिम ज़्यादा होता है.
गर्भनिरोधक गोलियां: ज़्यादा समय तक गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग भी कैंसर के जोखिम को बढ़ता है.
अन्य यौन संचारित बीमारियां: जो महिलाएं क्लैमाइडिया, सूजाक या उपदंश से संक्रमित हो चुकी हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर का जोखिम अधिक होता है. सामाजिक-आर्थिक स्थिति: कई देशों में हुए अध्ययनों में पाया गया है कि जो महिलाएं वंचित इलाकों में रहती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम ज़्यादा होता है.
 

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