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Swollen Gums Tips

Teething Trouble - How Can Homeopathy Tackle It In Kids?

Teething Trouble  - How Can Homeopathy Tackle It In Kids?

Biting and gnawing at things is a precursor to the developing of the first teeth of your baby. It is a joy to see the first teeth of your baby. It may be an occasion to be celebrated, but it is an uncomfortable process for the baby. For this reason, teething trouble is common among babies.

Teething Troubles:

Between the ages of 4 to 7 months, babies usually begin to teeth, though some may also have it later. Symptoms of the teething problem include:

  1. Swollen gums

  2. Crying

  3. Slightly high body temperature

  4. Gnawing on hard things

  5. Drooling

  6. Changes in sleeping and eating pattern

These symptoms imply that the baby is feeling uncomfortable from the side effects of teething. He/She may also be feeling pain. If your baby suffers from vomiting, diarrhea, rashes or high fever, you need to take it to a doctor since these are not normal symptoms of teething.

However, even for bringing down the general symptoms of teething, babies are given pain relievers which may not be well tolerated in them, especially in the future. Looking for natural solutions is never harmful in such situations. Homeopathy can bring down the general symptoms of teething or prevent them more naturally.  

Homeopathy To Treat Teething Trouble:

The goal of attending to teething trouble is to reduce the associated pain and inflammation of the gum. There are many homeopathic medicines for bringing down teething trouble. In fact, homeopathy is a great tool for treating problems without much side effect. It is believed that homeopathic medicines don’t have any side effects. They are administered in very small concentrations, and they act by rectifying the homeostatic imbalance in the body. In fact, there are various teething remedies in homeopathy.

Homeopathic Remedies For Teething Trouble:

  1. Aconitum Apellus: If the baby is agitated, his/her gums look inflamed and are very restless, you can use this medicine.

  2. Belladonna: If the baby is suffering from intense pain and inflammation, it may feel restless and get easily startled. In that situation, you can go for this medicine.

  3. Calcarea Carbonica: In some babies, teething begins late; it is slow and also painful. For them, this homeopathic medicine may be effective. If the baby looks anxious or sad, pressing his/her gums together, and suffering from pain, you can use this medicine.

  4. Calcarea Phosphorica: For aching gums and disturbed sleep resulting in food faddism, irritability, and stomach aches, you can give this medicine to the baby.

  5. Chamomilla: If the child is extremely irritable and agitated and is screaming and hitting continuously despite rocking or carrying continuously, he/she may be suffering from intense pain. His/Her gums may have become sensitive to touch that every single bite seems to be producing intense pain. In such a situation one may use this medicine.

Ignatia: If the child seems to be upset, sad, and is suffering from teething trouble, you can use this homeopathic remedy.

मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

आपके मसूड़ों से नियमित रूप से खून का बहना आमतौर पर प्लेटलेट विकार या ल्यूकेमिया जैसे कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. ऐसा आमतौर पर मुंह में स्वच्छता न होने के कारण होता है. अक्सर देखा जाता है कि कई लोगों के मसूड़ों में सूजन आ जाता है. लेकिन इस बीमारी की शुरुआत को जिंजिवाइटिस के नाम से जाना जाता है. जिंजिवाइटिस के दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है. यहाँ तक कि ये खून ब्रश या फ्लॉस करते समय कभी-कभी अपने-आप ही निकल पड़ता है. इकई बार ऐसा भी होता है कि मसूड़ों पर चोट लगने या अधिक गर्म पदार्थ व सख्त चीज़ें खाने से मसूड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण भी मसूड़ों में सूजन उत्पन्न हो जाती है. इससे आपके मसूड़े ढीले-ढाले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का काफी नुकसान हो सकता है. आइए मसूड़ों की बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानें.

मसूड़ों के सूजन को दूर करने के उपाय-

1. बबूल की छाल – यदि आप मसूड़ों में होने वाले सूजन से बचना चाहते हैं तो आपको भी बबूल की छाल के उपयोग करना चाहिए. इससे मसूड़ों के सूजन को आसानी से समाप्त किया जा सकता है. इसके लिए बबूल की छाल के काढ़े से कुल्‍ला करें. इससे आपके मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगती है.

2. अरंडी का तेल और कपूर – यदि आप अरंडी के तेल में थोड़ी मात्रा में कपूर मिला कर प्रतिदिन सुबह तथा शाम मसूड़ों की मालिश करें तो ऐसा करके भी मसूड़ों की सूजन कम होने लगती है.

3. अजवायन – अजवायन का उपयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने के लिए एक अच्छा विकल्प है. इसके लिए अजवायन को तवे पर भून कर पीसने के बाद इसमें 2-3 बूंद राई का तेल मिला कर हल्‍का-हल्‍का मसूड़ों पर मलें. ऐसा करने से मसूड़ों को आराम मिलता है साथ ही दांतों के अन्य रोग भी दूर किए जा सकते हैं.

4. अदरक और नमक – मसूड़ों से सम्बंधित समस्याओं को दुर करने के लिए थोड़े से अदरख में थोड़ा नमक मिलकर इसे अच्छे से पीस कर मिला लें. अब इस मिश्रण से धीरे-धीरे मसूड़ों को मले. इससे मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगी.

5. नींबू का रस - नींबू के रस को ताजे पानी में नींबू में डाल लें. इसके बाद बाद इस पानी से कुल्‍ला करें. कुछ दिन इसका प्रयोग करें इससे मसूड़ों की सूजन दूर होने के साथ-साथ मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होने लगती है.

6. प्याज - प्याज मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके सेवन के लिए प्याज में नमक मिलाकर खाने से एवं प्याज को पीसकर मसूड़ों पर दिन में करीब तीन बार मलने से मसूड़ों की सूजन ख़त्म हो जाती है तथा मसूड़े स्वस्थ बने रहते हैं.

7. फिटकरी - फिटकरी का प्रयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके लिए फिटकरी के चूर्ण को मसूड़ों पर मले इससे मसूड़ों की सूजन को कम किया जा सकता है.
 

मसूड़ों से खून निकलने का उपचार
1. खट्टे फल:- यदि आपके मसूड़ों से खून बह रहा है तो इसका एक कारण आपके शरीर में विटामिन सी की कमी भी हो सकती है. ऐसे में विटामिन सी की आपूर्ति के लिए आपको खट्टे फल जैसे नारंगी, नींबू, आदि और सब्जियां विशेष कर ब्रॉकली और बंद गोभी आदि का सेवन करना चाहिए. इससे रक्तस्त्राव में कमी आएगी.

2. दूध:- हमारे मसूड़ों के लिए कैल्शियम भी आवश्यक होता है. कैल्शियम का सबसे अच्छा स्त्रोत दूध है. यदि आप दूध का सेवन करते हैं तो आपके मसूड़ों का रक्तस्त्राव ख़त्म हो सकता है. इसके लिए आप नियमित रूप से दूध का सेवन करते रहें.

3. कच्ची सब्जियां:- कई बार मसूड़ों में रक्त संचरण न होने के कारण भी रक्तस्त्राव होता है. इसके लिए आपको कच्ची सजियाँ चबाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे आपका दांत भी साफ़ होता है. यदि आप नियमित रूप से कच्ची सब्जियां खाने की आदत डालें तो आप ऐसी परेशानियों से बच सकते हैं.

4. क्रैनबेरी और गेहूँ की घास का रस:- मसूड़ों से होने वाले रक्तस्त्राव से राहत पाने के लिए आप क्रैनबेरी या गेहूँ की घास का रस का उपयोग कर सकते हैं. इसका जूस जीवाणुरोधी गुणों से युक्त होता है जिससे कि आपके मसूड़ों से जिवाणुओं का खात्मा हो सकता है.

5. बेकिंग सोडा:- बेकिंग सोडा का उपयोग भी मसूड़ों की देखभाल के लिए किया जाता है. दरअसल बेकिंग सोडा का इस्तेमाल माइक्रोइंवायरनमेंट तैयार करके मुंह में ही बेक्‍टीरिया को मारने के लिए किया जाता है. आप चाहें तो इसे अपने मसूड़ों पर उंगली से भी लगा सकते हैं.

6. लौंग:- लौंग उन औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक है जिसका इस्तेमाल हम प्राचीन काल से ही अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए करते आ रहे हैं. जब भी आपको इस तरह की समस्या हो तो आपको एक लौंग अपने मुंह में रखना चाहिए. इससे राहत मिलती है. लेकिन यदि लम्बे समय तक ऐसा हो तो आपको चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.

7. कपूर, पिपरमिंट का तेल:- मसूड़ों को स्वस्थ बनाने के कई तरीके हैं. उनमें से एक है कपूर और पिपरमिंट के तेल. इसका इस्‍तेमाल आप अपने मुंह की ताज़गी और स्‍वच्‍छता बनाये रखने के लिये कर सकते हैं.

8. कैलेंडूला की पत्‍ती और कैमोमाइल चाय:- मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने के लिए ऐसी चाय पीनी चाहिए जिसमें कैलेंडुला और कैमोमाइल की पत्‍ती डाल कर पकायी जाए. क्योंकि ये मसूड़ों में खून आना रोकती है.

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Homeopathic Treatment For Periodontitis!

Homeopathic Treatment For Periodontitis!

Periodontitis is a serious gum infection that damages the soft tissue and destroys the bone that supports the teeth. Periodontitis can cause teeth to loosen or lead to tooth loss.
Periodontitis is common but largely preventable. It's usually the result of poor oral hygiene. Brushing at least twice a day, flossing daily and getting regular dental checkups can greatly improve your chances of successful treatment for periodontitis and can also reduce your chance of developing it.
There are several different types of periodontitis. The more common types include those below.
Chronic periodontitis is the most common type, affecting mostly adults, though children can be affected, too. This type is caused by plaque buildup and involves slow deterioration that may improve and get worse over time but causes destruction in the gums and bone and loss of teeth if not treated.
Aggressive periodontitis usually begins in childhood or early adulthood and affects only a small number of people. It tends to affect families and causes rapid progression of bone and tooth loss if untreated.

Necrotizing periodontal disease is characterized by the death of gum tissue, tooth ligaments and supporting bone caused by lack of blood supply (necrosis), resulting in severe infection. This type generally occurs in people with a suppressed immune system — such as from hiv infection, cancer treatment or other causes — and malnutrition.
Causes -
In most cases, periodontitis begins with plaque — a sticky film composed mainly of bacteria. If left untreated, here's how plaque can eventually advance to periodontitis:

  • plaque forms on your teeth when starches and sugars in food interact with bacteria normally found in your mouth. Brushing your teeth twice a day and flossing once a day removes plaque, but plaque re-forms quickly.
  • plaque can harden under your gumline into tartar (calculus) if it stays on your teeth. Tartar is more difficult to remove and it's filled with bacteria. The longer plaque and tartar remain on your teeth, the more damage they can do. You can't get rid of tartar by brushing and flossing — you need a professional dental cleaning to remove it.
  • plaque can cause gingivitis, the mildest form of periodontal disease. Gingivitis is irritation and inflammation of the part of your gum around the base of your teeth (gingiva). Gingivitis can be reversed with professional treatment and good home oral care.
  • ongoing gum inflammation can cause periodontitis, eventually causing pockets to develop between your gums and teeth that fill with plaque, tartar and bacteria. In time, these pockets become deeper, filling with more bacteria. If not treated, these deep infections cause a loss of tissue and bone, and ultimately you may lose one or more teeth. Also, ongoing chronic inflammation can put a strain on your immune system.

Symptoms -
Healthy gums are firm and pale pink and fit snuggly around teeth. Signs and symptoms of periodontitis can include:

  • swollen or puffy gums
  • bright red, dusky red or purplish gums
  • gums that feel tender when touched
  • gums that bleed easily
  • gums that pull away from your teeth (recede), making your teeth look longer than normal
  • new spaces developing between your teeth
  • pus between your teeth and gums
  • bad breath
  • loose teeth
  • painful chewing
  • a change in the way your teeth fit together when you bite

Risk factors -
Factors that can increase your risk of periodontitis include:

Complications -
Periodontitis can cause tooth loss. And some research suggests that the bacteria responsible for periodontitis can enter your bloodstream through gum tissue, possibly affecting your heart, lungs and other parts of your body. For example, periodontitis may be linked with respiratory disease, rheumatoid arthritis, coronary artery disease or stroke. But more studies are needed to confirm a link.

Prevention -
The best way to prevent periodontitis is to follow a program of good oral hygiene, one that you begin early and practice consistently throughout life.

  • good oral hygiene. That means brushing your teeth for two minutes at least twice daily — in the morning and before going to bed — and flossing at least once a day. Flossing before you brush allows you to clean away the loosened food particles and bacteria.
  • regular dental visits. See your dentist or dental hygienist regularly for cleanings, usually every six to 12 months. If you have risk factors that increase your chance of developing periodontitis — such as having dry mouth, taking certain medications or smoking — you may need professional cleaning more often.

Homoeopathic remedies -
Homoeopathy today is a rapidly growing system and is being practiced all over the world. Its strength lies in its evident effectiveness as it takes a holistic approach towards the sick individual through promotion of inner balance at mental, emotional, spiritual and physical levels. When peridonditis is concerned there are many effective medicines are available in homoeopathy, but the selection depends upon the individuality of the patient, considering the mental and physical symptoms.

  • Mercurius sol 30 - Merc sol is one of the top remedy for inflammation of gums. Merc sol is prescribed where the gums inflamed, painful which is purple, swollen and spongy. Sometimes toothache associated with inflammation of gums. The gums recede, bleed and the tooth loose. Another marked feature is increased salivation accompanied with this complaint. Mouth full of saliva, which is soapy or stringy. Due to saliva the mouth is wet even then there is thirst for large quantities of cold water. The tongue is heavy, thick, moist, coated yellow, flabby, shows the imprint of teeth with ulcers, feels as if burnt. Profuse perspiration is another leading symptom. Bad odor from the mouth. All discharges from the body are offensive. The breath is putrid, offensive urine, stool, sweat etc.
  • Kreosotum 30 - Kreosotum is another effective remedy for peridonditis with rapid decay of teeth. The gums inflamed, turned bluish, spongy and bleeding. Putrid odour and bitter taste in mouth. Teeth appears dark, crumbly and black spots on teeth.
  • Carbo vegetabilis 30 - Carbo veg is effective for inflammation of gums with scorbutic gums. Blood oozes from the gums when cleaning teeth. Gums retracted and bleed easily, painful while chewing. Gums turned black. Bad smell and sour, bitter taste in mouth.
  • Alumen 30 - Alumen is best for peridonditis with loose teeth. Gums swollen, inflamed and spongy. Teeth and gums scorbutic.
  • Hepar sulphur 30 — Hepar sulph is indicated, where the gums and mouth painful to touch and bleed easily. Foul odor from breath.
  • Kali carbonicum 30 — Kali carb is another indicated remedy, where the gums separate from teeth. Itching in gums, pus oozes out. Much salivation. Mouth and tongue covered with burning, soreness or painful vesicles. Offensive odor from mouth.
  • Lachesis 30 - Lachesis is best for inflammation of gums with bluish appearance. The gum swollen, spongy and easily bleeding. There is bad odour and sour peppery taste in mouth. If with toothache the pain extends to ears.
  • Phosphorus 30 - Phosphorus is another top medicine for inflammation of gums with bleeding. The gums bleeding easily, sore behind incisors. Pain get worse from cold heat and while eating. Salty or sweetish saliva.
  • Silicea 30 - Silicea is best for inflammation of gums where the gum is sensitive to cold air and cold water. Teeth feel long and loose. Water tastes badly and vomits after drinking. There is an offensive odour from mouth and the mouth feels dry.
  • Staphysagria 30 - Staphysagria is best for inflammation of gums with teeth decay. The gums pale, swollen and bleed easily. There is much salivation. Teeth black and crumbling. Musty taste in mouth.
  • Thuja occidentalis 200 - Thuja is indicated for inflammation of gums with tooth decay. Teeth decay at the edge of gums, crumble, turn yellow. Gums very sensitive and retract.
     
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Treatment of Gingivitis!

Treatment of Gingivitis!

Treatment of Gingivitis

Homeopathic Treatment of Gingivitis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Gingivitis
Psychotherapy Treatment of Gingivitis
Conventional / Allopathic Treatment of Gingivitis
Surgical Treatment of Gingivitis
Dietary & Herbal Treatment of Gingivitis
Other Treatment of Gingivitis
What is Gingivitis
Symptoms of Gingivitis
Causes of Gingivitis
Risk factors of Gingivitis
Complications of Gingivitis
Lab Investigations and Diagnosis of Gingivitis
Precautions & Prevention of Gingivitis
Treatment of Gingivitis

 Homeopathic Treatment of Gingivitis

Homeopathic Treatment of Gingivitis is useful for poor gum tone or gums which bleed after brushing. Homeopathic remedies promote healing in the gums. Some of the homeopathic remedies for gingivitis are:

Arsenic alb
Bovista
Carb V
Merc C
Hypericum
Ferrum phos

Conventional / Allopathic Treatment of Gingivitis

Allopathic Treatment of Gingivitis involves the instruction on effective daily home brushing and flossing techniques and regular follow-up professional checkups and cleaning. Using an antiseptic mouth rinse is also sometimes recommended by your dentist.

Dietary & Herbal Treatment of Gingivitis

Eliminate sugar-sweetened juices and soft drinks
Limit alcohol consumption
Eat crunchy, fiber rich foods
Avoid eating processed foods with added sugar.
Eat a diet rich in yellow and dark green vegetables

What is Gingivitis?

Gingivitis is a very common and mild form of gum (periodontal) disease. Because gingivitis can be very mild, you may not be aware that you have the condition. It is due to the long-term effects of plaque deposits on your teeth. It can lead to much more serious gum disease and eventual tooth loss.

Symptoms of Gingivitis

Swollen gums
Bleeding gums
Bad breath
Bright red or red-purple appearance to gums
Soft, puffy gums
Receding gums
Occasionally, tender gums
Causes of Gingivitis

Poor oral hygiene
Plaque accumulation on the teeth

Risk factors of Gingivitis

Poor oral hygiene
Older age
Diabetes
Dry mouth
Poor nutrition
Hormonal changes during puberty or pregnancy
Ill-fitting dental restorations
Medications that reduce saliva in the mouth
Tobacco use

Complications of Gingivitis

Tooth loss
Heart attack
Stroke or lung disease 
Diagnosis of Gingivitis

Diagnosis of Gingivitis is based on signs and symptoms you describe and an examination of your teeth, gums, mouth and tongue.

Precautions & Prevention of Gingivitis

Brush your teeth at least twice a day
Floss at least once a day
Use an antiseptic mouthwash
Use a soft toothbrush and replace it at least every three to four months.

See your dentist or dental hygienist regularly for professional cleanings, usually every six to 12 months

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Visit Your Dental Surgeon Regularly!

Visit Your Dental Surgeon Regularly!

What is periodontal disease?

Periodontal disease is a highly common infection of the periodontal tissues (gums and bone) that are responsible for supporting the teeth. These infections are caused by bacteria that grow on the teeth near the gum line due to poor brushing and flossing practices. Periodontal disease is known as gingivitis during its earliest stages, which is typically characterized by a sore, swollen gums that may bleed easily. Allowed to progress, an advanced periodontal disease may set in causing pain, receding gums and pockets between the gums and teeth. Known as periodontitis, this type of periodontal disease is the leading cause of tooth loss among adults even more so than decay.

Did you know?

Periodontal disease has been associated with a number of risk factors aside from poor brushing and flossing habits. In fact, the risk of developing gingivitis or periodontitis increases if you have a systemic disease like heart disease, as well as conditions like diabetes and aids. Other factors that may contribute to the development of periodontal disease include stress, genetics, crowded teeth, faulty dental restorations, and the use of certain medications that may cause dry mouth. According to the centers for disease control, women are also at an increased risk for periodontal disease when they are undergoing hormonal changes, such as with menopause or pregnancy.

Frequently asked questions

Do I have periodontal disease?

You may have gingivitis or periodontitis if you are experiencing any of the symptoms listed above. However, the only way of knowing for sure whether you have a periodontal disease is via a professional dental exam. Keep in mind that you may have periodontal disease and be asymptomatic; so be sure to visit your dentist for a thorough exam and cleaning at least twice per year.

What will my dentist do if I am diagnosed with periodontal disease?

Your treatment will depend on whether you are diagnosed with gingivitis or periodontitis. Minor cases of periodontal disease are usually treated with a thorough cleaning and topical antibiotic. If, however, your periodontal tissues have begun to deteriorate and your gums have begun pulling away from your teeth, you may require a more complex treatment, such as flap surgery or bone and gum grafting.

Will I need to do anything to prevent periodontal disease from returning?

Yes. Periodontal disease can reoccur  especially if you do not make any changes to your brushing and flossing habits. By brushing after every meal, flossing once daily, avoiding tobacco, and getting frequent professional dental cleanings, you could help prevent periodontal disease from returning in the future.
 

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Gums Weakening in Hindi - कमजोर मसूड़ों का कारण

Gums Weakening in Hindi - कमजोर मसूड़ों का कारण

हमारे शरीर में दांतों के महत्त्व से कौन इनकार कर सकता है. जब बात दांतों की है इसे धारण करने वाले मसूड़ों को अनदेखा नहीं कर सकते हैं. मसूड़ों में में आने वाली समस्याओं का प्रत्यक्ष प्रभाव दांतों पर पड़ता है. इसलिए जब भी सूजन हो, उनमें कमजोरी आए, ब्रश करने के बाद खून आए, दांत हिलने लगें और मुंह से लगातार दुर्गंध आए, तो ये सभी मसूड़ों की समस्या के लक्षण हैं. जब ये लक्षण नजर आएं तो तुरंत इसका उपचार शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इससे शुरुआती चरण में छुटकारा पाना आसान है. लेकिन समस्या के बढ़ जाने पर बहुत मुश्किल हो जाता है.

1. प्रारम्भिक लक्षणों को अनदेखा करना
किसी भी समस्या को यदि आप प्रारंभ में सुलझाने का प्रयास करें तो उसका निदान बेहतर और आसान होता है लेकिन यदि आप शुरुवात में उसे अनदेखा करेंगे तो आपको गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. जब भी आपको मसूड़ों में सूजन होना, उनका कमजोर पड़ना, ब्रश करने के बाद खून आना, दांत हिलना और मुंह से लगातार दुर्गंध आना आदि मसूड़ों की समस्याएं नजर आयें तो आप सावधानी से इसका उपचार शुरू कर दें. क्योंकि यदि आप देर करेंगे तो इसके दुष्परिणाम के रूप में दांतों का टूटना और कई अन्य रोगों उत्पन्न हो सकते हैं. मसूड़ों में में आने वाले सूजन या खून को हलके में नहीं लेना चाहिए.
2. नियमित रूप से ब्रश न करना
रोजाना ब्रश करने से पुरे मुंह की स्वच्छता बनी रहती है. इसलिए नियमित रूप से ब्रश करने पर आप दांतों और मसूड़ों की कई समस्याओं से बच सकते हैं. लेकिन नियमित रूप से ब्रश न करना, आपके दांतों में ब्लॉक प्लाक पैदा कर सकता है. यही प्लाक नहीं हटाए जाने पर टार्टर बन जाता है. टार्टर को ब्रश भी साफ नहीं कर पाता है. ऐसे में आपके पास सिर्फ प्रोफेशनल क्लीनिंग के द्वारा ही सफाई का एकमात्र विकल्प रह जाता है. इसके कई संभावित कारण हैं जैसे धूम्रपान, डायबिटीज, आनुवांशिक कारण, कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता आदि.
3. गिन्गिविटिज
जब मसूड़ों की समस्याएं बढ़ जाती हैं तो इसे गिंगिविटीज़ भी कहते हैं. इस दौरान आपके मसूड़ों का लाल होना, सूजन और दर्द, ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों का दांतों के ऊपर निकल जाना और लगातार सांस से बदबू आना जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं. गर्भवती महिलाओं में ऐसी समस्या होना आम बात है. इसलिए उन्हें अपनी सेहत व दांतों का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए.
4. मसूड़ों की बीमारी
जब हम प्रारंभिक लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं तो मसूड़ों की ये बीमारी की दूसरे स्टेज पर पहुँच जाती है. इसके संकेत हमें मसूड़ों और दांतों के बीच मवाद बनने, दांतों का गिरने, दांतों व मसूड़ों के बीच बहुत अंतर आने, और खाने को चबाते समय सभी दांतों की स्थिति में बदलाव आने के रूप में नजर आता है.
5. मुंह की सफाई न होना
मसूड़ों की समस्याओं के प्रमुख कारणों में से एक ये है, मुंह की साफ-सफाई का ध्यान न रखना. जैसे खाना खाने के बाद हमें ठीक से कुल्ला कर लेना चाहिए जिससे दांतों के बीच फंसे कई चीजें जो बाद में सड़ सकती हैं, वो बाहर निकल जाती हैं. रोजाना ब्रश तो करना ही चाहिए. यदि आप नियमित रूप से ऐसा करेंगे तो आप इन परेशानियों से पहले ही बच सकते हैं.
6. डेंटल ट्रीटमेंट
कई बार ऐसा होता है कि मसूड़ों या दांतों से संबंधित परेशानियों को अनदेखा करने से कई ऐसी परेशानियाँ उत्पन्न हो जाती हैं जिनमें डेंटल ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है. दांतों से प्लाक और टार्टर हटाने के लिए आप प्रोफेशनल क्लीनिंग करवा सकते हैं. कभी-कभी मसूड़ों की समस्या में रूट प्लानिंग करवानी पड़ती हैं. इससे दांतों की जड़ से बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं.
7. चिकित्सकीय परामर्श न लेना
मसूड़ों से संबंधित समस्याओं में कई बार चिकित्सकीय परामर्श की भी आवश्यकता होती है. समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेना कई परेशानियों को दूर कर सकता है. लेकिन आप समय रहते चिकित्सकीय परामर्श नहीं लेंगे तो परेशानियाँ बढ़ सकती हैं. ऐसी समस्याओं में की समस्या में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स का परामर्श भी देते हैं.
8. अन्य कारण
मसूड़ों की कई समस्याओं में कुछ घरेलू उपचार भी कारगर होते हैं. कई समस्याएं जो प्रारंभिक अवस्था में होती हैं. इन समस्याओं के उपचार में आप आंवला, नीम की पत्तियां, काली मिर्च और काला नमक जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी, दक्षिणी सुपारी आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं.
 

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Swollen Gums Treatment in Hindi - मसूड़ों की सूजन से राहत पाने के प्राकृतिक उपचार

Swollen Gums Treatment in Hindi - मसूड़ों की सूजन से राहत पाने के प्राकृतिक उपचार

अक्सर देखा जाता है कि कई लोगों के मसूड़ों में सूजन आ जाता है. लेकिन इस बीमारी की शुरुआत को जिंजिवाइटिस के नाम से जाना जाता है. जिंजिवाइटिस के दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है. यहाँ तक कि ये खून ब्रश या फ्लॉस करते समय कभी-कभी अपने-आप ही निकल पड़ता है. इकई बार ऐसा भी होता है कि मसूड़ों पर चोट लगने या अधिक गर्म पदार्थ व सख्त चीज़ें खाने से मसूड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण भी मसूड़ों में सूजन उत्पन्न हो जाती है. इससे आपके मसूड़े ढीले-ढाले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का काफी नुकसान हो सकता है. यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तो दांत हिलकर गिरने लगते हैं. और फिर इसके कारण हम अपना मन पसंद खाना भी नहीं खा पाते हैं. इसलिए आइए मसूड़ों की सूजन से राहत पाने के प्राकृतिक उपचार के लिए कुछ उपायों को जानें.

मसूड़ों की सूजन का कारण

  • जिंजिवीटीज – जिंजिवीटीज के कारण भी कई बार हमारे मसूड़ों में सूजन आने लगती है. जिसका मुख्य कारण जिंजिवीटीज होता है. जबभी हमारे मसूड़ों में सूजन होता इसके उपरांत हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कभी-कभी यह समस्या इतनी विकराल हो जाती है कि हमारे दांत भी गिरने लगते हैं.
  • पोषक तत्वों की कमी – हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी की वजह से कई तरह की परेशानियाँ उत्पन्न होने लगे हैं. इसकी वजह से कई बार हमारे मसूड़ों में सूजन आने लगती है जिसके द्वारा व्यक्ति को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है.
  • संक्रमण – मसूड़ों में होने वाले सूजन का एक कारण मुंह में होने वाल संक्रमण भी हो सकता है. इस संक्रमण  के कारण हमारे मसूड़ों में सूजन के साथ-साथ दर्द भी होने लगता है.

मसूड़ों के सूजन को दूर करने के उपाय

  • बबूल की छाल – यदि आप मसूड़ों में होने वाले सूजन से बचना चाहते हैं तो आपको भी बबूल की छाल के उपयोग करना चाहिए. इससे मसूड़ों के सूजन को आसानी से समाप्त किया जा सकता है. इसके लिए बबूल की छाल के काढ़े से कुल्‍ला करें. इससे आपके मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगती है.
  • अरंडी का तेल और कपूर – यदि आप अरंडी के तेल में थोड़ी मात्रा में कपूर मिला कर प्रतिदिन सुबह तथा शाम मसूड़ों की मालिश करें तो ऐसा करके भी मसूड़ों की सूजन कम होने लगती है.
  • अजवायन – अजवायन का उपयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने के लिए एक अच्छा विकल्प है. इसके लिए अजवायन को तवे पर भून कर पीसने के बाद इसमें 2-3 बूंद राई का तेल मिला कर हल्‍का-हल्‍का मसूड़ों पर मलें.  ऐसा करने से मसूड़ों को आराम मिलता है साथ ही दांतों के अन्य रोग भी दूर किए जा सकते हैं.
  • अदरक और नमक – मसूड़ों से सम्बंधित समस्याओं को दुर करने के लिए थोड़े से अदरख में थोड़ा नमक मिलकर इसे अच्छे से पीस कर मिला लें. अब इस मिश्रण से धीरे-धीरे मसूड़ों को मले. इससे मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगी.
  • नींबू का रस - नींबू के रस को ताजे पानी में नींबू में डाल लें. इसके बाद बाद इस पानी से कुल्‍ला करें. कुछ दिन इसका प्रयोग करें इससे मसूड़ों की सूजन दूर होने के साथ-साथ मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होने लगती है.
  • प्याज - प्याज मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके सेवन के लिए प्याज में नमक मिलाकर खाने से एवं प्याज को पीसकर मसूड़ों पर दिन में करीब तीन बार मलने से मसूड़ों की सूजन ख़त्म हो जाती है तथा मसूड़े स्वस्थ बने रहते हैं.
  • फिटकरी - फिटकरी का प्रयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके लिए फिटकरी के चूर्ण को मसूड़ों पर मले इससे मसूड़ों की सूजन को कम किया जा सकता है.
     

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How do I know if I have gum disease?

How do I know if I have gum disease?

How do I know if I have gum disease?
Gum disease is generally painless, even though it damages the bone supporting the teeth. Gum disease (gingivitis) will usually show itself as red, swollen gums that bleed when you brush or clean between your teeth. Many people are worried when they notice their gums are bleeding and then brush more gently, or stop altogether. In fact, it is important that you continue to clean regularly and thoroughly if you are to fight the gum disease. If the bleeding does not go away within a few days see your dental team to ask for their advice.

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Vitamin C - 8 Reasons Why Your Body Needs It!

Vitamin C - 8 Reasons Why Your Body Needs It!

Vitamin C is a water soluble vitamin, which is essential for various functions and it is not produced or stored by the body, so it is important that the food contains adequate amount of it. It plays a vital role in heart, eyes, skin, and prenatal health and immunity. Long-term non-availability of vitamin C can lead to various symptoms, which though are not immediately threatening, can turn dangerous in the long run.

  1. Bruised skin: Easy bruising is one of the early symptoms of vitamin C deficiency. There could be capillaries which appear superficial and have an increased tendency to bruise and bleed. There could also be unexplained reddish purple marks on the skin in people who have low levels of vitamin C.
  2. Bleeding gums: Another major indicator of vitamin C deficiency is swollen gums that tend to bleed easily. This again is related to their role in collagen formation and if not identified and treated in the early phases, it can lead to severe gum inflammation, periodontal disease, and even loss of teeth.
  3. Slow wound healing: Vitamin C has an important role to play in connective tissue formation, and if there is less of vitamin C in the body, collagen formation is delayed. This can lead to prolonged and delayed healing of wounds, even simple ones like cuts and bruises. The added role of vitamin C as an immune booster also leads to reduced healing when there is vitamin C deficiency.
  4. Nosebleeds: Frequent unexplained nosebleeds is another sign of vitamin C deficiency. Reduced amounts of vitamin C make the capillaries fragile causing them to bleed easily.
  5. Dry skin: While weather does determine if the skin is dry or normal, vitamin C also does. The decreased levels of collagen can lead to an unhealthy skin which can turn red and can be dry and can also lead to keratosis pilaris, which is an accumulation of melanin pigments in the skin. Good amounts of vitamin D helps as a good anti-ageing agent and reduces wrinkles and retains moisture. It also has sun protective effects and antioxidant properties.
  6. Unexplained weight gain: Vitamin C plays a vital role in fat metabolism and therefore deficiency leads to weight accumulation, especially around the waist. It helps oxidise fat and so helps in weight regulation.
  7. Lowered immunity: Vitamin C deficiency affects the body’s susceptibility to infections, making it prone to more severe and frequent infections. People catching a common cold very frequently could be suffering from vitamin C deficiency.
  8. Emotional health: Vitamin C is also a mood regulator, so inadequate amount can lead to depression. Try eating a juicy orange and see yourself feeling better! If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a doctor and ask a free question.
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Best Homeopathic Medicines For Pyorrhea

Best Homeopathic Medicines For Pyorrhea

What is Pyorrhea?

Pyorrhea, also known as periodontitis, is inflammation and destruction of the tissues and bone surrounding the teeth. Periodontitis mainly begins with gingivitis. Gingivitis refers to inflammation of gums as a result of plaque formation due to poor oral hygiene. Gingivitis, when left untreated, leads to periodontitis. Gingivitis is a milder form of the disease and in gingivitis, no irreversible changes take place. However, persistent gingivitis leads to formation of deep pockets between the gums and teeth. These pockets get filled with plaque and bacteria over time and start to damage the tissue and bone surrounding and supporting the teeth. Eventually, the teeth lose their grip and fall off.

Symptoms of Pyorrhea:

Symptoms of pyorrhea include swollen gums, pain and tenderness of gums, red/purple gums, bleeding gums, spitting of blood after brushing, bad breath, metallic taste in the mouth, receding gums and loose teeth in sockets.

Treating Gum Disease With Homeopathy:

Homeopathy is one of the most popular holistic systems of medicine. The selection of remedy is based upon the theory of individualization and symptoms similarity by using holistic approach. This is the only way through which a state of complete health can be regained by removing all the sign and symptoms from which the patient is suffering. The aim of homeopathy is not only to treat gum disease but to address its underlying cause and individual susceptibility. As far as therapeutic medication is concerned, several remedies are available to treat gum disease that can be selected on the basis of cause, sensations and modalities of the complaints.  For individualized remedy selection and treatment, the patient should consult a qualified homeopathic doctor in person. There are following remedies which are helpful in the treatment of gum disease:

  1. Merc Sol: This is one of the best homeopathic medicines for pyorrhea. It is used when symptoms such as swollen, bleeding, and tender gums are experienced. The gums are likely to turn bluish red. A metallic taste in the mouth and foul breath are also indicated. An increase in saliva is another likely symptom, along with loosening of teeth in the sockets.

  2. Carbo Veg: This homeopathic medicine is used for treating pyorrhea, especially in cases where there is gum bleeding after cleaning the teeth. The gums are receding and become blackish in color. Toothache is also experienced, which worsens when you chew food. A sour, bitter taste may be felt in the mouth.

  3. Kreosotum: This medicine is effective for treating teeth and its surrounding structures in case of pyorrhea. It is ideal for use when symptoms such as puffy, bluish gums, and foul odor from the mouth are observed. Bleeding of dark blood is also indicated. Teeth may become decayed or turn dark and crumbly. Kreosotum is beneficial in treating such symptoms associated with pyorrhea.

  4. Phosphorus: This is another important homeopathic medicine used for the treatment of pyorrhea. It is useful in cases of pyorrhea when gum bleeding occurs easily. It is an effective anti-hemorrhagic medicine. Gum pain and soreness are also likely in such cases. The pain worsens by both heat and cold. Pain in the teeth may also occur along with gum pain.

  5. Lachesis: This medicine is used for curing pyorrhea when there is a swelling of the cheeks along with other symptoms. The gums become dark purple in color and swell up immensely. Burning along with a coppery taste in the mouth is also experienced, which is a unique symptom. The tooth pain is likely to extend into the ears.

There are homeopathic medicines meant for curing pyorrhea occurring from various factors, with different symptoms. However, it is important for you to consult a homeopathic practitioner before taking any of these medicines. This is because homeopathy does not work the same for all people, in spite of similar symptoms, and only a licensed doctor will know about the best medicine that will suit your purpose.

 

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