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Wockhardt Hospital

  4.3  (14 ratings)

Multi-speciality Hospital (Pulmonologist, General Surgeon & more)

Wockhardt hospital, 1877, Dr.Anand Rao Nair Road, Near Agripada Police Station, Mumbai Central (E), Mumbai, Maharashtra 400011 Mumbai
9 Doctors · ₹1000 - 1500
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Wockhardt Hospital   4.3  (14 ratings) Multi-speciality Hospital (Pulmonologist, General Surgeon & more) Wockhardt hospital, 1877, Dr.Anand Rao Nair Road, Near Agripada Police Station, Mumbai Central (E), Mumbai, Maharashtra 400011 Mumbai
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Customer service is provided by a highly trained, professional staff who look after your comfort and care and are considerate of your time. Their focus is you....more
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More about Wockhardt Hospital
Wockhardt Hospital is known for housing experienced Oncologists. Dr. Hitendra Patil, a well-reputed Oncologist, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Oncologists recommended by 51 patients.

Timings

MON
09:00 AM - 06:00 PM
TUE-FRI
10:00 AM - 06:00 PM
SAT
10:00 AM - 04:00 PM

Location

Wockhardt hospital, 1877, Dr.Anand Rao Nair Road, Near Agripada Police Station, Mumbai Central (E), Mumbai, Maharashtra 400011
Mumbai Central Mumbai, Maharashtra - 400008
Click to view clinic direction
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Doctors in Wockhardt Hospital

Dr. Hitendra Patil

MBBS, DNB ( General Surgery ), DNB - Surgical Oncology
Oncologist
85%  (10 ratings)
16 Years experience
1500 at clinic
Unavailable today

Dr. Hardik Shah

MBBS, DNB - General Medicine, DNB - Gastroenterology
Gastroenterologist
16 Years experience
1500 at clinic
Available today
12:15 PM - 01:30 PM

Dr. Jitendra Jain

MD - Anaesthesiology, DNB, Pain fellowship
Pain Management Specialist
20 Years experience
1500 at clinic
Available today
11:05 AM - 02:00 PM

Dr. Anurag Shrimal

MBBS, MS - General Surgery, Fellowship in Abdominal Multi Organ Transplant Surgery
General Surgeon
18 Years experience
1500 at clinic
Available today
10:00 AM - 04:00 PM
Unavailable today

Dr. Mahesh Sane

MBBS, M C P S, MS - General Surgery
Urologist
31 Years experience
1000 at clinic
Available today
05:05 PM - 06:00 PM

Dr. Tushar Ubale

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
16 Years experience
1200 at clinic
Unavailable today

Dr. Sulaiman Ladhani

MD - Tuberculosis & Respiratory Diseases/Medicine
Pulmonologist
18 Years experience
1500 at clinic
Available today
11:00 AM - 01:00 PM
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Fungal Infection

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, Diploma In Dermatology And Venerology And Leprosy (DDVL), Fellowship in Aesthetic and Cosmetic Surgery
Dermatologist, Pune
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There are many kinds of infections that may afflict the body from time to time. While some of them may be dormant conditions that flare up due to environmental factors, there may be others that may occur due to a change in season as well as other causes, including interaction with a carrier of the same infection.

चेहरे का कालापन कैसे दूर करें - Chehre Ka Kalapan Kaise Door Karen!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
चेहरे का कालापन कैसे दूर करें - Chehre Ka Kalapan Kaise Door Karen!

चेहरे का कालापन कई लोगों के परेशानी का कारण बन जाता है. यदि हम इस कालापन को दूर करने के उपायों की बात करें तो ये बहुत आसान है और हमारे आसपास मौजूद चीजों से ही हो सकता है. अगर किसी के चेहरे पर एक स्वाभाविक चमक दिखे तो लोग ऐसे चेहरे की तारीफ़ करते हैं. इसीलिए लोग अपने चेहरे पर चमक लाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ये चमक प्राकृतिक तरीके से आए. बाजार में मिलने वाले उत्पादों से चमक तो आती है लेकिन इसका दुष्प्रभाव भी हॉट है. इसलिए आइए इस लेख के जरिए हम चेहरे का कालापन दूर करने के विभिन्न उपायों पर के नजर डालें.

1. बेसन का उपयोग
बेसन भी चेहरा साफ़ करने वाला एक प्रचलित सामग्री है. दो चम्मच बेसन में गुलाब जल डालकर पेस्ट तैयार करें और इस पेस्ट को चेहरे पर सूखने तक लगाए रखें. फिर त्वचा को हल्के गर्म पानी से साफ़ कर लें.

2. संतरे का छिलका
संतरे का छिलका भी चेहरे को साफ़ करने वाली सार्वाधिक इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के रूप में प्रचलित है. इसके लिए आपको एक बड़ा चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर, एक चम्मच शहद, एक चुटकी हल्दी, नींबू के जूस की कुछ बूँदें और पानी को मिश्रित कर लें. फिर इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और बीस मिनट तक सूखने के लिए ऐसे ही छोड़ दें. अब इस फेस पैक को पानी से धो लें.

3. एलोवेरा से
एलोवेरा एक प्राचीन सामग्री है जिसके अनेक औषधीय इस्तेमाल हैं. चेहरा साफ़ करने के लिए दो चम्मच एलो वेरा जेल और दो चम्मच ब्राउन शुगर को आपस में अच्छे से मिलाकर इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और स्क्रब की तरह इससे अपने चेहरे पर कुछ मिंट तक रगड़ें. फिर स्क्रब को गुनगुने पानी से धो लें. अब पूरा चेहरे धोने के बाद चेहरे को फिर से ठंडे पानी से धो लें.

4. चावल के आटे का उपयोग
आटे का चावल भी चेहरे की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए दो चम्मच चावल का आटा, एक चम्मच खीरे का जूस और एक चम्मच नींबू का जूस मिलाकर एक मुलायम फेस पैक तैयार करें. अब इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए इसे लगा हुआ छोड़ दें. अब अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें.

5. मुल्तानी मिट्टी
ये एक जाना-माना और प्राचीन तरीकों में से है. इसके कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हैं. इसके लिए आप दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी और तीन चम्मच संतरे का जूस को एक साथ मिलाकर मुलायम पेस्ट बनाएं. अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए लगा हुआ छोड़ दें. अब अपने चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें.

6. दही
दही आसानी से सबके घरोंन में उपलब्ध होता है इसलिए ये भी एक आसान तरीका है. इसके लिए आपको दो चम्मच दही और एक चम्मच शहद को मिश्रित करके एक अच्छा पेस्ट तैयार करना है. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाए रखने के बाद अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

7. दूध
चहरे की सफाई के लिए दूध एक लोकप्रिय पदार्थ है. दूध का इस्तेमाल करने के लिए एक चम्मच दूध और एक चम्मच शहद को मिलाकर मुलायम पेस्ट बनाएं और तब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर हल्के हाथ से रगड़ें. 15 मिनट तक ऐसे ही लगा हुआ छोड़ने के बाद चेहरे को पानी से साफ़ कर लें. अगर आपकी तेलिये त्वचा है तो लो फैट दूध का इस्तेमाल और अगर रूखी त्वचा है तो फुल क्रीम का इस्तेमाल करें.

8. जीरा
अब तक जीरा का इस्तेमाल आपने मसाले के रूप में किया होगा लेकिन अब हम आपको इसे चेहरा साफ़ करने के इस्तेमाल करना बताएंगे. एक चम्मच जीरा के बीज को दो कप पानी में डालकर उबालें. अब इस मिश्रण से अपने चेहरे को धोएं.

9. जई
जई के इस्तेमाल से भी आप चहरे की सफाई कर सकते हैं. इसके लिए तीन चम्मच जई, दो चम्मच गुलाब जल और दही का मिश्रण तैयार करें. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाए रखें.इसके बाद अपने चेहरे को पानी से धो लें.

10. अंडे का उपयोग
चेहरे को साफ़ करने के लिए अंडे को भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए आपको एक अंडे को फोड़कर कटोरे में झागदार और मुलायम बनने तक चलाते रहें. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर सूखने दें. इसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लें.

11. गाजर, टमाटर और खीरा
गाजर, टमाटर और खीरा के इस्तेमला से भी आप अपने चेहरे को साफ़ कर सकते हैं. इसके लिए आपको 1 एवोकैडो, 1 मध्यम आकार का उबला हुआ गाजर, 1 बड़ा चम्मच क्रीम, 1 अंडा और 1 चम्मच शहद को अच्छी तरह मिश्रित करके 15 मिनट तक लगाने के बाद ठंडे पानी से धो लें. इसी तरह से आप टमाटर का भी पेस्ट बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा खीरे का इस्तेमाल करने के लिए आपको तीन चम्मच खीरे का जूस और एक चम्मच नींबू का जूस मिश्रित करके इसमें रुई डुबाकर चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट के बाद इसे धो लें.

12. ग्रीन टी
चेहरे को साफ़ करने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल करने के लिए 2 इस्तेमाल की हुई ग्रीन टी बैग, 1 चम्मच नींबू का जूस और 1 चम्मच शहद की आवश्यकता होगी. टी बैग को काटकर उसमें से पाउडर को निकाल लें और इसमें नींबू का जूस और शहद को डालें फिर इसे अच्छी तरह से मिला दें. अब इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब चेहरे को पानी से धो

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छाती में दर्द के उपाय - Chhati Mein Dard Ke Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
छाती में दर्द के उपाय - Chhati Mein Dard Ke Upay!

छाती में दर्द का कारण हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है पर हमेशा छाती दर्द हार्ट अटैक या हृदय संबंधी बीमारी के कारण नहीं होता है. कई बार छाती दर्द हृदय संबंधी बीमारी के कारण न होकर एनजाइना या अन्य कारण से होता है. कोरोनरी आर्टरी में रक्त के प्रवाह की प्रक्रिया बाधित होने से या बलगम के वजह से उत्पन्न अवरोध के कारण हृदय तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है जिससे ऑक्सीज़न की पूरी पूर्ति नहीं हो पाती है और इस कारण छाती में दर्द होने लगता है. हृदय तक रक्त का प्रवाह कम होने के इस बीमारी को एनजाइना कहते है. इसमें लोगों को छाती कसा हुआ, भारीपन, जलन व ब्रेस्टबोन पर दबाव महसूस होता है. एनजाइना के अलावा अन्य कई कारणों से भी छाती में दर्द हो सकते हैं. एसिडिटी, सर्दी, कफ, बदहजमी, धूम्रपान या तनाव से भी छाती में दर्द हो सकता है. छाती में जिस कारण से भी दर्द हो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि डॉक्टर से मिलकर यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि दर्द हार्ट अटैक या हृदय संबंधी अन्य बीमारी के कारण तो नहीं है. छाती दर्द का इलाज इस बात पर निर्भर करती है कि दर्द किस कारण से हुआ है. यदि छाती में दर्द हार्ट अटैक या हृदय संबंधी किसी बीमारी के कारण हुआ हो तो डॉक्टर से उचित इलाज करानी चाहिए. पर यदि दर्द हार्ट अटैक या हृदय संबंधी किसी बीमारी के कारण न हो तो इसे कुछ घरेलू उपाय से भी ठीक किया जा सकता है.

छाती में दर्द को ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय-
1. लहसुन: -
घरेलू उपाय में लहसुन छाती दर्द के लिए एक प्रभावशाली उपाय है. लहसुन में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, थियामिन, राइबोफ्लोबिन, नियासीन, बीटामिन सी के अलावा आयोडिन, सल्फर और क्लोरीन भी पाया जाता है. लहसुन हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और प्लाक को धमनियों तक पहुँचने से रोकता है जिससे हृदय में रक्त का प्रवाह सुधरता है. इसके अलावा यह कफ, खाँसी, अस्थमा आदि कारणों से छाती में होने वाले दर्द को दूर करने में भी मदद करता है. एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच लहसुन का रस मिलाकर पीना चाहिए. इसके अलावा रोज सुबह खाली पेट लहसुन की एक या दो कली भी पानी के साथ लिया जा सकता है.

2. अदरक: - अदरक विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए बहुत ही पुराना उपाय है. अदरक में जिंजरोल नमक एक रासायनिक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है. अदरक में एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं जो रक्त वाहिकाओं को खराब होने से बचाते हैं. इस कारण से अदरक छाती दर्द में बहुत ही प्रभावशाली है. जब भी छाती में दर्द का अनुभव हो तो दर्द से राहत पाने के लिए व सूजन कम करने के लिए अदरक के जड़ की चाय का सेवन लाभकारी होता है. हार्टबर्न के कारण होने वाली छाती दर्द को दूर करने में भी अदरक के जड़ की चाय लाभकारी होता है.

3. हल्दी: - हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है जिस कारण से यह पेट फूलना, घाव, छाती दर्द आदि रोगों में लाभकारी है. करक्यूमिन कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीजन, जो रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर धमनियों के दीवारों पर प्लाक को मजबूत बनाता है, को रोकने में मदद करता है. अपने इस गुण के कारण हल्दी छाती यानि सीने के दर्द में बहुत ही लाभकारी होता है. एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर उबाल लेना चाहिए. फिर उबलने के बाद इसमें थोड़ा शहद मिलाकर इस मिश्रण को गुनगुना ही पीना चाहिए.

4. तुलसी: - तुलसी के पत्तियों मैं मौजूद मैग्निशियम रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है. इस कारण तुलसी के उपयोग से हृदय रोग का इलाज होता है व इससे रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है. इसके अलावा तुलसी में उपलब्ध एंटीऑक्सीडेंट के गुण रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को रोकने में मदद करता है. छाती दर्द के दौरान 8-10 ताजी तुलसी के पत्ती को चबाकर खानी चाहिए या एक कप तुलसी के पत्ती का चाय बनाकर पीना चाहिए. छाती के दर्द को रोकने के लिए व हृदय के स्थिति को सुधारने के लिए एक चम्मच तुलसी के पत्ती के रस को एक चम्मच शहद के साथ रोज सुबह खाली पेट पीना चाहिए.

5. मेथी: - मेथी में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट व कार्डिओ-प्रोटेक्टिव गुण कोलेस्ट्रॉल को दूर कर रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है. अपने इन्हीं गुण के कारण मेथी छाती दर्द में फायदेमंद है. एक चम्मच मेथी के बीज को आधा कप पानी में डालकर 5 मिनट तक उबालना चाहिए. फिर इसे छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए. कोलेस्ट्रॉल दूर करने के लिए व छाती के दर्द को रोकने के लिए रोज मेथी के बीज को खाना चाहिए. मेथी के बीज खाने के लिए एक चम्मच मेथी के बीज को पानी में डालकर रात भर छोड़ देना चाहिए. फिर अगली सुबह भींगे हुये इस मेथी के बीज को पानी के साथ खाली पेट खाना चाहिए.

6. बादाम: - बादाम में पोलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो ब्लड कोलेस्ट्रॉल को दूर करता है. इसमें फाइबर और मैग्निशियम भी पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और छाती के दर्द को रोकता है. इस कारण से छाती के दर्द में बादाम का उपयोग फायदेमंद रहता है. बादाम का तेल व गुलाब का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण को छाती पर धीरे-धीरे रगड़ना चाहिए. इससे छाती दर्द जल्द ठीक हो जाता है. छाती दर्द व हृदय के रोग को कम करने के लिए रोज मुट्ठी भर बादाम खाना चाहिए.

7. अल्फाल्फा: - अल्फाल्फा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को दूर करता है व प्लाक को बढ़ने से रोकता है तथा हृदय तक रक्त के प्रवाह को सुधारता है. अल्फाल्फा में क्लोरोफिल पाया जाता है जिस कारण से यह धमनियों को सही रखता है व छाती के दर्द को दूर करता है. छाती में दर्द रहने पर एक चम्मच सुखी अल्फाल्फा की पत्ती गर्म पानी में डालकर 5 मिनट तक उबालना चाहिए. फिर इसे छानकर इस चाय को पीना चाहिए.

नोट-
यहाँ बताए गए घरेलू उपाय मात्र जानकारी के लिए दिये गए हैं. पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह के छाती दर्द को वे नजरअंदाज न करें. उन्हें अपने डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जाँच कराकर उचित इलाज करानी चाहिए.

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I am 35 years man, for past two days when I pass urine I can see blood clots are mixed in the urine and the urine color is red at the end of urinating I can see little amount of blood leaking. I feel pain and burning sensation only while urinating. After passing urine for few minutes I feel pain on my belly button.

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, DNB - MEdicine, DNB- Nephrology
Nephrologist, Gurgaon
I am 35 years man, for past two days when I pass urine I can see blood clots are mixed in the urine and the urine col...
This may be due to urine infection or stone in lower passage get USG abdomen and urine test and consultation.
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Gynecological Cancer - Know The Signs And Symptoms!

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Obstetrics & Gynaecology
Gynaecologist, Delhi
Gynecological Cancer - Know The Signs And Symptoms!

Being diagnosed with cancer is something no one looks forward to and Gynaecological Cancer is every woman’s worst nightmare. However, if diagnosed in time, it can be treated. Cancer in any part of a woman’s reproductive system is termed as gynecological cancer. It is of five types:

  1. Cervical cancer

  2. Ovarian cancer

  3. Vaginal cancer

  4. Vulvar cancer and

  5. Uterine cancer

Paying attention to your body and understanding its natural rhythm can help you recognize signs of gynecological cancer. This is because signs of gynecological cancer can be difficult to identify unless you know your body. Here are a five signs to watch out for-

  1. Abnormal Vaginal Bleeding: Bleeding in between periods is okay once in a while but if it happens continuously over a period of 2 to 3 months, do not ignore it. Vaginal bleeding after menopause should also never be ignored. Abnormal bleeding could be triggered by a number of conditions including cancer of the lining of the uterus. Sudden changes in your menstrual blood that persist for over 2 cycles such as heavy bleeding can also be a symptom of uterine cancer. Heavy bleeding can be defined as a period that lasts for over 7 days.

  2. Changes in the Vulva: Any change in colour of development of bumps, sores of thickened skin should be immediately shown to a gynecologist. Any form of vulvar itching or burning should also not be ignored. These conditions could be symptoms of vulvar cancer. Hence, it is important to know what your vulva looks like normally.

  3. Bloating: Persistent bloating that lasts for over a fortnight can be a sign of ovarian cancer. This is especially true in cases of bloating accompanied by sudden weight loss or between-period bleeding.

  4. Change in Bathroom Habits: Due to the proximity of the bladder to the reproductive organs, a tumour or swelling in the reproductive organs can trigger symptoms similar to those of a urinary tract infection. This includes pain while urinating, difficulty passing urine, diarrhea or constipation. Urinary incontinence could also a sign of gynecological cancer.

  5. Abdominal or Back Pain: In rare cases, lower back pain could be a sign of ovarian cancer or uterine cancer. Pain in the lower abdomen or pelvic area can also be a sign of ovarian cancer.

The above could also be signs of other health disorders. The only way of knowing for sure is by consulting a doctor. Hence, understand your body and if you notice any of these symptoms consult your gynecologist at the earliest.  

Arthritis - Have Homeopathy At Your Rescue!

BHMS, Diploma In Diet & Nutrition For Obesity Management, Certificate Cource in Cosmetology & Aesthetic Medicine
Homeopath, Pune
Arthritis - Have Homeopathy At Your Rescue!

Arthritis is an inflammatory joint disorder of autoimmune starting point. In arthritis, the joints get to be painful, inflamed, swollen and warm with checked stiffness. Chiefly the little joints of wrist, fingers, ankles and toes are included. Over the long haul, other huge joints may likewise get influenced.

Homeopathy is a standout amongst the most prevalent all encompassing system of medicine. The determination of remedy is based upon the theory of individualization and symptoms comparability by utilizing comprehensive approach. To the extent therapeutic medication is concerned, a few very much demonstrated medicines are accessible for homeopathic treatment of arthritis that can be chosen on the premise of cause, sensation, location, modalities and augmentation of the protests. For individualized remedy determination and treatment, the patient ought to counsel a qualified homeopathic doctor face to face.

Causes of arthritis

  1. Injury: It can harm to ligament, bone, and cartilage that eventually prompts to extreme pain.
  2. Obesity and propelled age: Both are extremely regular cause of arthritis.
  3. Infection: Any sort of infection to the joint may come about arthritis.
  4. Sprain: Due to sudden unnatural developments causes pain and additionally limitation of development of the joint.
  5. Overuse: Overuse of knee joint can cause bursitis which eventually prompts to extraordinary pain.
  6. Dislocation: Also causes serious arthritis.
  7. Different causes: Include Sickle cell disease, SarcoidosisKawasaki diseaseLupusbone tumorsCrohn's diseasebleeding disorders and so forth.

Will Homeopathy treat joint inflammation?
Homeopathic method of treatment is extremely powerful in treating rheumatoid arthritis. Homeopathic medicines treat rheumatoid arthritis by directing the overactive immune system. They decrease joint inflammation and symptoms including swelling, pain and stiffness of joints. Homeopathy offers an extensive variety of medicines for rheumatoid arthritis. However, there is nobody cure for all ills connected with this condition. The most fitting Homeopathic medicine for rheumatoid arthritis is chosen in light of an inside and out analysis of individual symptoms. Exceedingly successful Homeopathic medicines for rheumatoid arthritis are ActaeaSpicata, RhusTox, Causticum, Bryonia, Kalmia, Caulophyllum, Ledum pal, Guaiacum, Benzoic acid, Calcaria Carb.

The homeopathic treatment for arthritis has the capability of forever reestablishing the health of your joints. It merits finding a decent homeopath that will regard you as the individual you seem to be, instead of essentially "obtaining" a remedy from another person's experience.

Filler Injections - Know More About Them!

MBBS, PGDCC - Post Graduate Diploma in Clinical Cosmetology, Fellow Hair Transplant Surgery
Trichologist, Pune
Filler Injections - Know More About Them!

In today's contemporary times, our outer appearance plays a huge role in determining our path of success. Looking good in many ways has become essential for leaving a lasting impression. Nowadays, age is no longer a factor for looking or feeling beautiful. While beauty lies in the eye of the beholder, the onus to maintain that beauty lies with ourselves. Numerous grooming centres and salons are spread all over the street these days to cater to all our beauty needs. Gone are the days when dressing up and putting on make up were scoffed at. Why then do we tolerate wrinkles and scars just because time has decreed so?

With all kinds of correctional therapies and treatments, our skin can be as smooth and glamorous as ever. One of the most popular trick in this regard is filler injections.

What are Filler Injections?

Filler injections enable us to redefine those aspects of our faces, which have been the causes of consternation for a long period of time. These injections makes it possible to cover up unwanted wrinkles, smoothen lines and remove pitted scars. They can also be used to make the lips look fuller. These injections, when injected under the skin, raise up that area, lending it a more wholesome appearance. It is however,  transient in nature and often requires repeated surgeries. While some of the most common aftermaths of this are redness, swelling or itchiness, none these last more than a day.

It is therefore,  a very safe beauty therapy for giving the furrowed skin a new leash of life. Many have vouched for how the filler surgeries have renewed their self confidence. However, there are a few risk factors that one must be mindful of before opting for a filler surgery.

Risk factors of Filler Injections:

Filler injections make the skin prone to certain allergies and rashes or even flu-like symptoms. Infections, bleeding and inflammation are other repercussions of a filler surgery. Filler injections contain Hyaluronic acid, collagens, fat cells and man-made polymers. In case one's skin reacts to any of these ingredients, then one must resort to expert care. However, most of these outbreaks are temporary in nature and this treatment is easily reversible in case one chooses to do so

Nutrition After Kidney Transplant!

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Urology, Fellowship, Faculty (Assistant Professor)
Urologist, Mohali
Nutrition After Kidney Transplant!

A kidney transplantation is a surgical procedure where a diseased kidney is replaced with a healthy one.

Once the surgery is over and you are recuperating, it is very important that you make certain alterations to your diet to facilitate faster recovery. You need to maintain your weight and exercise on a regular basis.

What Does a Balanced Diet Include?

After the surgery, eat meals or food items that are low in sodium. A properly balanced diet should include ample amounts of fresh fruits, lean meats, fresh vegetables, dairy products that are low in fat. Drink sufficient amount of water (2-3 litres) to keep yourself hydrated.

Why Do You Need to Supervise Your Diet?

Post a kidney transplantation surgery the patient will need to take anti-rejection drugs which are also known as immunosuppressive drugs. These medications lower the risk of the new kidney being rejected by the body. On the flip side, these drugs suppress the immune system making you vulnerable to infections. A healthy diet will ensure that you don’t fall ill.

What Food Items Should You Avoid?

• Consuming undercooked or raw meat, poultry and seafood such as squid, crabs or prawns.
• Consuming dairy products that have been made from unpasteurized milk such as yoghurt and cheese.
• Undercooked or uncooked eggs or any food items that might contain such eggs
• Fruits such as pomegranates or grapefruits
• Unwashed salads, sprouts and vegetables.

Restrain Caution when Consuming Carbohydrates:

When you are taking drugs, it is difficult for the body to utilize all the extra carbohydrates that you consume. This can lead to high blood sugar levels. Carbohydrate-laden food items come from starches and sugars and provide fuel for the body.

In short right after a kidney transplantation surgery, you need to make sure that you are following a diet that is high in proteins but low in sugar. In order to avoid developing diabetes or any associated disease during this phase consult with your healthcare provider and chalk out a proper dietary plan.

Irritable Bowel Syndrome (IBS) - Homeopathic Ways Of Treating It!

MD (Hom) Medicine, BHMS (Bachelor of Homeopathic Medicine and Surgery (BHMS)), CCAH, MCAH
Homeopath, Indore
Irritable Bowel Syndrome (IBS) - Homeopathic Ways Of Treating It!

Irritable bowel syndrome is a disorder that is diagnosed on the basis of its symptoms. It is characterised by intense abdominal pain, discomfort, bloating and change in bowel habits. One of the primary symptoms of IBS is abdominal pain. It may also be accompanied with frequent diarrhoea or constipation.

There might also be a feeling of partial or incomplete evacuation. The symptoms are sometimes relieved by the proper bowel movement. Other symptoms, in this case, include depression and anxiety. In rare cases, there is also a possibility of sexual dysfunction and reduced libido.

Causes of Irritable Bowel Syndrome–

The exact reason behind the occurrence of IBS is not known. It is a disruption of the brain-gut axis that is known to cause the problem. It is also caused due to small intestinal bacterial overgrowth.

Triggering factors–

IBS is intensified or triggered by the following factors:

  1. Foods: Edibles like chocolate, milk and alcohol might lead to constipation or diarrhoea. One must also avoid carbonated beverages and some fruits and vegetables. These might lead to bloating and discomfort.

  2. Stress: The condition gets worse with any type of stress.

  3. Hormones: In women, the symptoms occur as a result of the hormones during menstrual periods.

  4. Complications: It is not associated with any fatal condition. But it can lead to diarrhoea and constipation and aggravate hemorrhoids.

Adverse Impacts of the Disease-

IBS has an adverse impact on your lifestyle. It will limit your ability to get social or carry out your daily professional activities. You will find it difficult to cope up with the symptoms while living away from your comfort zone or home. You will not have a good sex life. You will get depressed and may even feel suicidal in extreme cases.

Treatment of Irritable Bowel Syndrome-

IBS is treated broadly by bringing in certain changes in the lifestyle. To begin with, you are advised to check your diet. Include fibre in your diet, if you are suffering from constipation. Also, avoid oily, spicy and hot food items. Besides, you are prescribed medicines such as stool softeners and laxatives and antispasmodic drugs and proton pump inhibitors.

Homeopathic medicines-IBS requires prolonged treatment. Homoeopathy works best to get you relief from the symptoms and cures it, from the roots. Here are certain homeopathic remedies that are helpful in treating the disorder.

  1. Argentum nitricum

  2. Asafoetida

  3. Colocynthis

  4. Lilium tigrinum

  5. Lycopodium

  6. Natrum carbonicum

  7. Nux vomica

  8. Podophyllum

  9. Sulphur

  10. Aloe

It has to be kept in mind that these are just basic remedies. There are over 150 Homeopathic medicines that can be used for treating IBS.

Lower Back Pain - How Does Physiotherapy Cure It?

BPT
Physiotherapist, Gurgaon
Lower Back Pain - How Does Physiotherapy Cure It?

Lower back pains may underline a host of diseases, some of the most distinctive being the degeneration of lumbar disc and strain of back muscles. If left unattended, these acute durations of severe pain can lead to further complications, beyond the scope of both active and passive physical treatment regimes. Hence, it is always recommended to attend to these minuscule symptoms as soon as they are detected.

How physiotherapy works wonders in lower back pains:

  1. Physiotherapy is recommended when lower back pains are frequent, or stretch for days at a time. Most medical literatures, which shower their unanimous support in favour of physiotherapy for back pain, make note that physiotherapy relieves pain, as well as improves the functions, which are most likely to be affected by this disorder.
  2. Pain emanating, following a surgery, is recognized as one of the most significant aspects where benefits of physiotherapy are more visible. Generally, patients are advised to undergo physiotherapy sessions after surgical procedures irrespective of age and gender, unless the move is contraindicated in specific cases.
  3. Muscular spasms and muscle shrinking is a highly familiar phenomenon observed in individuals who are relatively less active. Muscle shrinking can often be attributed to very low usage of certain muscles, while muscle spasmcan occur when neurons at the affected muscles are irritated. Physiotherapy is observed as both the first line as well as the second line of treatment regimen in such occurrences; a routine for gradual and slow stretching is recommended by physiotherapists involving the muscles of legs, hips, abdomen and lower back, based on their intensity of pain.
  4. Advanced stages of a physiotherapy treatment regime upgrade the simple stretching exercises to more rigorous ones like specific stabilizing drills, exercises involving balancing machines and/or exercise balls. This aspect of physiotherapy caters to the secondary spine muscles of the human body.
  5. The area of the body considered to be the core of lower back pain (lower back muscles and muscles of abdomen) requires more than just stretching or exercises involving machines. Workout focused on these core areas are based on a complex set of exercises, which may have to be improvised such that the aforementioned muscles absorb the maximum shock.
  6. In addition to these conventional exercises, which are based on applications of gravity, some centres offer a different environment for individuals who are unable to perform activities in normal conditions. The concept of aquatic pools addresses the issue, and makes exercising quite an easy feat for the physically challenged individuals.
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