Common Specialities
{{speciality.keyWord}}
Common Issues
{{issue.keyWord}}
Common Treatments
{{treatment.keyWord}}
Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online, New Delhi

Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online

  4.7  (459 ratings)

Dietitian/Nutritionist Clinic

G-607, Sarita Vihar New Delhi
1 Doctor · ₹200
Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online   4.7  (459 ratings) Dietitian/Nutritionist Clinic G-607, Sarita Vihar New Delhi
1 Doctor · ₹200
Report Issue
Get Help
Feed
Services

About

By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have place......more
By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have placed in us.
More about Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online
Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online is known for housing experienced Dietitian/Nutritionists. Dt. Radhika, a well-reputed Dietitian/Nutritionist, practices in New Delhi. Visit this medical health centre for Dietitian/Nutritionists recommended by 51 patients.

Timings

MON-SAT
10:00 AM - 09:00 AM

Location

G-607, Sarita Vihar
New Delhi, Delhi - 110076
Get Directions

Videos (1)

Consuming oats is no longer a troubling task. Learn how.
Oats: Consumption gets convenient wit...

Doctor

Dt. Radhika

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist
93%  (459 ratings)
8 Years experience
200 at clinic
Available today
10:00 AM - 09:00 AM
View All
View All

Services

Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
View All Services

Submit Feedback

Submit a review for Best Diet 4 You Online Clinic - Consult Online

Your feedback matters!
Write a Review

Feed

Aids Kaise Hota Hai - ऐड्स कैसे होता है

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Aids Kaise Hota Hai - ऐड्स कैसे होता है

ये सच है की मौत बहाने से आती है और उन बहानों में सबसे आम बहाना होता है बीमारी। हम सभी को जीवन एक बार मिलता है, जिसे हम बेहतर और लम्बा बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश किया करते हैं पर जीवन और मौत के दरम्यान बीमारी की तलवार हमेशा लटकती रहती है। इसलिए हम हमेशा बिमारियों से रूबरू होकर उनसे बचने या जीत हासिल करने की फ़िराक में रहते हैं जिससे अपनी उम्र और स्थिति में इजाफा कर लेते हैं। लेकिन इस बात पर गौर करना होगा कि कुछ बीमारियों से जूझ कर भी हम जीने की उम्मीद नहीं खोते पर कुछ बीमारियाँ ऐसी भी हैं जो हमें मारें उसके पहले ही हम दिमागी तौर पर दिन ब दिन मरने लगते हैं। और आज हम जानेंगे ऐसी ही एक भयावह बीमारी एड्स के बारे में। 

AIDS एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी के रूप में जाना जाता है। यह बीमारी अगर किसी इंसान को हो जाये तो उसकी म्रत्यु निश्चित हो जाती है। केवल भारत को लिया जाए तो सालाना तकरीबन 80,000 से ज्यादा लोगो की म्रत्यु AIDS के वजह से होती है। इसलिए इससे बचना है तो यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एड्स क्या है और होता कैसे है ?

क्या है एड्स 
एड्स यानि कि उपार्जित प्रतिरक्षा नाशक रोग समूह, जिसका अर्थ है कि एड्स मनुष्य जाति मेंस्वाभाविक रूप से शुरू नहीं हुआ बल्कि मनुष्य जाति के अपने ही कुछ कर्मों के कारण उपार्जित हुआ। यह एक संक्रामक रोग है जो कि एच.आई.वी. (ह्यूमनइम्यूनो डेफिशियेन्सी वायरस) नाम के विषाणु के संक्रमण की वजह से होता है। जब यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर जाता है तो ब्लड में पहुंच कर वाइट ब्लड सेल्स मेंमिलकर उसके DNA में पहुंच जाता है जहां वह विभाजित होता है और रक्त के सफेद कणों पर आक्रमण करता है। धीरे-धीरे यह सफेद कणों की संख्या बहुत कम करदेता है। उसी कमी या समाप्ति के साथ शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त करता है। 

यह विषाणुशरीर में प्रवेश करने के बाद समाप्त नहीं होता। और इसी स्थिति को एड्स कहा जाता है।

  • शोधकर्ताओं के अनुसार AIDS दो वायरस के कारण होता है, HIV1 और HIV2।
  • HIV1 वायरस दुनिया भर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला वायरस है और HIV2 वायरस ज्यादातर वेस्ट अफ्रीका में पाया जाता है।
  • यह दोनों वायरस रेट्रोवायरस नामक प्रजाति के हैं जो अपना DNA इंसान के DNA से मिला देते है, और जिंदगी भर उस इंसान के DNA  के साथ रहते हैं।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव शरीर मे पाया जाने वाला वायरस मनुष्यों में बंदरों की प्रजातियों से आया है क्योंकि बंदरों में पाए जाने वाले HIV वायरस और मानव शरीर मे पाए जाने वाले HIV वायरस में काफी समान्यताएँ है।
  • 1930 से 1940 के बीच पहली बार इंसानों में यह वायरस मिला। जो माना जाता है कि बंदर का मास खाने वाले कुछ अफ्रीकी आदिवासियों में पाया गया था और पूरी दुनिया में  फैल गया।
  • भारत देश AIDS के मरीजों की संख्या के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है।

यह जानना जरूरी है की HIV छूने से नहीं फैलता। यह केवल शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थ जैसे थूक, खून, और सेक्स के द्वारा निकलने वाला सेमेन से फैलता है। क्योंकि HIV वायरस शरीर के बाहर जीवित नहीं रह सकता तो 

HIV  के संक्रमण के कारण 

1. वजाइनल, ऐनल और ओरल सेक्स
एचआईवी/एड्स से ग्रसित व्यक्ति के साथ असुरक्षित सेक्स करने से इसके वायरस आपके शरीर मे आ जाते हैं। यह वायरस किसी के शरीर मे चुम्बन द्वारा भी आ सकता है पर इसकी संभावना कम होती है क्योंकि थूक में HIV का वायरस कमज़ोर होता है। और चुंबन  करते समय कम से कम 1-2 लीटर थूक एक्सचेंज हो एक दूसरे का तभी संभव है ठुक द्वारा  HIV/AIDS होना।

2. माँ द्वारा 
यदि जन्म देते समय माँ में HIV वायरस मौजूद है तो वह वायरस बच्चे के अंदर आ सकता है। यदि जन्म देने के बाद किसी कारण से माँ के अंदर HIV का वायरस आ जाता है तो यह बच्चे में स्तनपान के द्वारा भी आ सकता है। सही समय पर सही कदम लेने से यह रोका जा सकता है। सही कदम नहीं उठाने के कारण तकरीबन 30% बच्चे जन्म से ही HIV/AIDS से संक्रमित होते हैं।

3. इंजेक्शन
किसी HIV/AIDS के मरीज़ के शरीर मे इस्तेमाल की गई सुई को किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर मे इस्तेमाल करने से HIV/AIDS फैल सकता है। 

4. शल्य चिकित्सा शास्त्र
शल्य चिकित्सा शास्त्र यानी सर्गिकल इंस्ट्रूमेंट्स जो सर्जरी करने के लिए इस्तेमाल की जाती है अगर HIV AIDS के मरीज़ के शरीर पर इस्तेमाल की गई हो और उसे बिना अच्छे से साफ किये दूसरे के शरीर मे इस्तेमाल किया जाए तो HIV AIDS फैल सकता है। 

5. संक्रमित रक्त 
HIV/AIDS एड्स से ग्रसित व्यक्ति का खून बिना जाँच किए किसी को चढ़ा दिया जाए तो उससे भी HIV/AIDS हो सकता है।

6. म्यूकस मेम्ब्रेन
म्यूकस मेम्ब्रेन जो शरीर के आन्तरिक अंगों को घेरे रहती है और सभी कैविटीज की सबसे ऊपरी परत होती है यदि उसमें HIV/AIDS का संक्रमित रक्त लग जाता है तो उस व्यक्ति को  HIV/AIDS हो सकता है। जैसे कि यदि किसी को चोट लगी हो और उस चोट पर किसी व्यक्ति का खून लग जाए जिसे HIV /AIDS हो तो उस खून में मौजूद HIV वायरस उस चोट लगे हुए हिस्से से दूसरे व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश कर जाता है।

बताये गए कारणों से HIV /AIDS फैलता जरूर है पर जरूरी नहीं है कि इन वजहों से किसी का खून यकीनन संक्रमित ही हो जाए। यह इसपर भी निर्भर करता है कि HIV वायरस कितना मजबूत है। यदि कमज़ोर HIV वायरस किसी के शरीर मे किसी भी तरीके से चला जाए तो संभव है कि उस व्यक्ति को HIV/AIDS न हो।

बदकिस्मती से दुनिया मे HIV को लेके कई गलतफैमियाँ है इस कारण यह भी जानना जरूरी हो जाता है कि HIV AIDS किन कारणों से नही फैलता।

  • कीड़े मकोड़ो के काटने से 
  • किसी HIV AIDS के मरीज के मूत्र और पसीने से
  • शौचालय या स्विमिंग पूल कोन से करने से 
  • HIV AIDS के मरीज का टॉवल या कपड़ा इस्तेमाल करने से 
  •  HIV AIDS के मरीज़ों को छूने से या साथ काम करने से 
  •  HIV AIDS के मरीज के साथ एक थाली में खाने 
  •  HIV AIDS के मरीज का किसी के सामने छींकने से या खाँसने से भी HIV AIDS नही फैलता।
1 person found this helpful

Home Remedies for Sugar - शुगर का घरेलू इलाज

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Home Remedies for Sugar - शुगर का घरेलू इलाज

डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जो महिला-पुरुष,बच्चे, बूढ़े, जवान। किसी को भी हो सकती है। शुगर उस चयापचय बीमारी को कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति के खून में शुगर (रक्त शर्करा) की मात्रा जरुरत से ज्यादा हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्यों कि या तो व्यक्ति से शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन प्रयाप्त मात्रा में नहीं हो रहा हो या वह व्यक्ति के शरीर की कोशिकाएं से सही व्यवहार नहीं कर रही हो।

जब तक शुगर की बीमारी की असली वजह नहीं जान लेते तब तक यह रोग कभी भी ठीक नहीं होगा। जब शरीर में कोलेस्ट्रोल की बढ़त होती है। तो वो हमारी कोशिकाओं में जाकर उनके चारो ओर चिपक जाता है। और हमारे रक्त में विद्यमान इन्सुलिन हमारी कोशिकाओं तक सही तरीके नही पहुँच पाता। इसके लिए हमें इन्सुलिन के टिके लगवाने पडते हैं। कहने का ये मतलब है कि सुगर का सम्बन्ध कोलेस्ट्रोल से होता है ना की शुगर (चीनी) से।

एलोपैथी में तो कह दिया गया है कि उनके पास इससे होने वाली परेशानियों से बचने के उपाय तो हैं। पर इसे जड़ से ख़त्म करने की कोई दवा नहीं है। कुछ अन्य चिकित्सा पद्धतियों में ज़रूर इसे जड़ से ख़त्म कर देने का दावा किया जाता है। अब किसके दावों में कितनी वास्तविकता है इसमें ना पड़ते हुए हम जानेंगे ऐसे घरेलू नुखों के बारे में जो आपकी शुगर को ख़त्म भले ना कर सकें, पर राहत जरूर दे सकते हैं। ख़ास बात ये है कि ये सभी चीजें हर जगह बहुत आसानी से मिल जाती हैं। बल्कि कुछ तो आपके किचन में मौजूद भी होंगी।तो आये जानते हैं कुछ ख़ास उपचार जिनसे शुगर पर लगेगी लगाम।

1. करेला
करेले का खास गुण ये है कि इससे पंक्रियज को इन्सुलिन रिलीज़ करने में मदद मिलती है। और ये ब्लड ग्लूकोज के लेलव को कम करता है। रोजाना सुबह दो-तीन करेले लेकर उनका बीज निकाल दें और फिर उनका जूस निकालें। इस जूस में थोड़ा सा पानी मिलाकर खाली पेट पी जाएं। ये नुस्खा दो महीने आजमाकर देखें। फ़ायदा आपको महसूस होने लगेगा।

2. भिन्डी 
भिन्डी में भी ब्लड ग्लूकोज लेवल को कम करने का खास गुण होता है। थोड़ी सी भिन्डी लेकर उसके दोनों सिरे काट दें। फिर फोर्क की मदद से उनमें कई जगह छेद कर दें। अब इन्हें एक गिलास पानी में डुबोकर रात भर के लिए रख दें। सुबह ये पानी खाली पेट पी जाएं। कुछ ही हफ़्तों में आप अपने शुगर लेवल को डाउन होता पाएंगे।

3. एलोवेरा 
एलोवेरा की खासियत है कि ये फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज को कम करने में अहम रोल अदा करके Type 2 Diabetes के मरीजों को काफी राहत देता है। एलोवेरा तेज पत्ते और हल्दी को साथ लेने से ब्लड शुगर कण्ट्रोल करने में ख़ास मदद मिलती है। इसे लेने का तरीका बड़ा आसान है। आधा चम्मच पिसा तेज पत्ता, आधा चम्मच पिसी हल्दी, एक बड़े चम्मच एलोवेरा के साथ दोपहर और रात के खाने से पहले लें। 

4. कड़ी पत्ता 
अपने खान-पान में कड़ी पत्ता इस्तेमाल करते ही है। बस रोजाना सुबह खाली पेट इसकी 8-10 ताजी पत्तियां चबा जाया करें। इससे शुगर में तो आराम मिलता ही है हाई कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करने और मोटापा पर काबू रकने में भी मदद मिलेगी।

5. आंवला 
आपने ये तो सुना ही होगा कि आंवला विटमिन सी से भरपूर होता है। और शरीर को ताकत देता है। पर शायद आप ये नहीं जानते कि आवंला पेनक्रियाज को सही फंक्शन करने में भी मदद करता है।
दो-तीन आंवले लेकर उनका बीज निकालें। इन आंवलों को अच्छी तरह घिसकर पेस्ट लीजिए।अब पेस्ट को कपड़े में रखकर अच्छी तरह निचोड़िए। जो रस निकले उसमें एक कप पानी मिलाकर सुबह खाली पेट पी जाएं। दो महीने रोजाना सुबह इसे पीने से ही आपको फर्क दिखने लगेगा।

6. अमरुद 
अमरूद में भरपूर फाइबर और विटमिन सी होता है। ये शुगर को रोकने में बहुत कारगर है। शुगर के मरीज इसका छिलका उतारकर खाएं। पर दिन भर में दो-तीन अमरूद से ज्याना ना खाएं। 

7. आम के पत्ते 
आम के पत्तों में ब्लड में इन्सुलिन लेवल को संयमित करने का गुण होता है इसलिए आम के 10-15 मुलायम पत्ते रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को खाली पेट पी जाएं। अगर आपको रोज-रोज ये सब करना न जमें तो बहुत से आम के पत्ते लेकर उन्हें छांव में सुखा लें। उसके बाद उन्हें पीसकर किसी बोतल या डिब्बे में रख लें। ये पाउडर रोजाना सुबह शाम आधा-आधा खाकर पानी पी लें। 

8. लो फैट 
लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध ही लें। 

9. ग्रीन टी पीना अच्छा है 
चाय के साथ हाई फाइबर बिस्किट या फीके बिस्किट ही लें और अगर ब्लडप्रेशर है तो नमकीन बिस्किट भी खा सकते हैं। 

10. थोडा थोडा खाएं 
दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने की बजाय बार-बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। 

11. फल 
फल अपनाएं यह एनी चीजों के साथ शुगर में भी फायदेमंद होते हैं। लेकिन ध्यान रहे सभी नही फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता,मोसंबी आदि खाएं।

1 person found this helpful

Urine Infection symptoms in hindi - मूत्र संक्रमण के लक्षण

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Urine Infection symptoms in hindi - मूत्र संक्रमण के लक्षण

जिस तरह एक केमिकल फैक्ट्री में कई प्रकार के केमिकल्स की रचना की जाती है और दवाइयां बनाई जाती है और उससे निकले अनावश्यक पदार्थ को बाहर फेंक दिया जाता है। वैसे ही हमारा शरीर एक केमिकल फैक्ट्री की तरह ही काम करता है जहाँ ग्रहण किए गए सभी पदर्थों के तत्व निकालकर अनावश्यक पदार्थ निकाल दिए जाते है। जब भी मानव शरीर मे कोई तत्व बनता है तो उससे निकले अनावश्यक पदार्थ शरीर में जमा होने लगता है और उसे निकालना जरूरी हो जाता है। और यही काम करती है किडनी। जी बिलकुल किडनी खून में मौजूद आवश्यक तत्व को निकाल के बचे हुए अनावशयक तत्व को मूत्राशय यानी ब्लैडर में जमा कर देता है जिसे हम मूत्र कहते हैं। हमारे मूत्र में वो सभी केमिकल्स मौजूद होते है जिसकी जरूरत हमारे शरीर को नही होती इस लिए उसे निकाल दिया जाता है। 

अब यह तो रहा सामान्य प्रोसेस पर अगर यह प्रोसेस सही से ना हो या इसके दौरान तकलीफों का सामना करना पड़े तो हमारी कई बीमारियों से भी मुलाक़ात हो सकती है। पेशाब में दिक्कत आना या यूरीन इन्फेक्शन होना एक आम समस्या होती जा रही है। ज़्यादातर पुरुष, महिलाओं या किशोरियों में 100 में से अस्सी प्रतिशत लोग कभी न कभी मूत्र रोगों से परेशान रहे होते हैं। 

यूरिन इन्फेक्शन जिसे यूटीआई कहते हैं पेशाब से संबंधित अंगों में होने वाला इन्फेक्शन है। जब कुछ कीटाणु पेशाब से जुड़े अंगों में चले जाते हैं तो वहाँ संक्रमण हो जता है इस वजह से पेशाब में दर्द, जलन,कमर दर्द,बुखार आदि की तकलीफें पैदा होने लगती हैं और इसी को यूरिन इन्फेक्शन या युटीआई कहते हैं। 

यूरिन इन्फेक्शन गंभीर बीमारी है। अगर यूरिन में इन्फेक्शन होता है तो सबसे पहले असर किडनी पर होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है तो क्रोनिक किडनी की बीमारी हो सकती है। इसमें सूजन आ सकती है और समय पर इलाज नहीं कराने पर किडनी फेल भी हो सकती है। यह इन्फेक्शन ब्लड के जरिए बॉडी के बाकी ऑर्गन तक भी पहुंच सकता है और उन्हें भी डैमेज कर सकता है।

मूत्र मार्ग संक्रमण यानी के यूरीन इन्फेक्शन दोस्तों इसके लक्षण आम और आसानी से पहचाने योग्य होते हैं। पर अगर ध्यान ना दिया जाए तो यह तो बिमारियों से भी मिलवा सकता है।
इसलिए जरूरी है की इसके लक्षणों से अवगत रहें जिससे समय रहते इसकी पहचान करके उपचार कर सकें वरना गंभीर बीमारियाँ गले पड़ जाएंगी।

यूरिन इन्फेक्शन होने की संभावना लगभग 50 % महिलाओं को होती है। 
इसलिए इसकी जानकारी सभी महिलाओं को होनी चाहिए। ताकि थोड़ी सावधानी रखकर इस परेशानी से बचा जा सके।

  1. पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।
  2.  बार बार तेज पेशाब आने जैसा महसूस होता है, लेकिन मुश्किल से थोड़ी सी पेशाब आती है।
  3.  नाभि से नीचे पेट में, पीछे पीठ में या पेट के साइड में दर्द होना।
  4.  गंदला सा, गहरे रंग का, गुलाबी से रंग का, या अजीब से गंध वाला पेशाब होना।
  5.  थकान और कमजोरी महसूस होना।
  6.  उलटी होना, जी घबराना।
  7.  बुखार या कंपकंपी ( जब इन्फेक्शन किडनी तक पहुँच जाता है ) होना।

 

 

5 people found this helpful

Oats: Consumption gets convenient with cookies

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Play video

Consuming Oats is no longer a troubling task. Learn how.

Symptoms of Aids - एड्स के लक्षण

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Symptoms of Aids - एड्स के लक्षण

स्कूल में बच्चों को धरती से आसमान, इंसान जानवर, कीड़े-मकौड़े ज्ञान-विज्ञान इतिहास नागरिक-शास्त्र भूत भविष्य वर्तमान हर चीज के बारे में बताया जाता है, पर जिस चीज के बारे में हर व्यक्ति को जानकारी होनी ही चाहिए। उस बात पर समाज स्कूल परिवार हर कोई चुप रहता आया है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं सेक्स एजुकेशन की। हालांकि समय-समय पर सेक्स एजुकेशन मुद्दा जरुर बनता आया है पर, जमीनी हकीक़त यही है कि, हम इसके बारे में बोलने, आपस में चर्चा करने, जागरूकता फैलाने के बजाय केवल हाय-तौबा करते आ रहे हैं। और इस नासमझी की वजह से ही देश क्या पुरे विश्व में जाने-अनजाने करोड़ों लोग एसटीडी एच आई वी/एड्स जैसी बीमारी की चपेट में फंसते जा रहे हैं। 

दरअसल सेक्स एजुकेशन के प्रति हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। जैसे अन्य बिमारियों के होने की कई वजह होती है जो हमारी आदतों और रहन सहन से जुडी होती हैं, जिनसे बचने के उपाय और लक्षणों की सही जानकारी होने पर हम खुदको बचा लेते हैं। उसी तरह एसटीडी/एचाईवी/एड्स जैसी बीमारी के लक्षणों को पहचानने और इनसे बचने की जानकारी होने के लिए जरूरी है की हम इस विषय से पूरी तरह रूबरू हों। जिसके लिए कम उम्र से ही सेक्स एजुकेशन, मुक्तरूप से परिचर्चा, लेखन आदि के द्वारा समाज को जागरूक करना जरूरी है।
 
बीमारियाँ तो जानलेवा हो ही सकती हैं पर एड्स नाम की बीमारी जान लेकर ही ख़त्म होती है। यह बीमारी जितनी भयावह है इसके फैलने का प्रोसेस उतना ही आसान। ये उन बिमारियों में से है कि पीड़ित अपनी मौत की भीख मांगता है। 

एड्स क्या‍ है
एड्स का पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम' है और यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है। यह वायरस मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को कमज़ोर कर देता है। 
शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है. इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है. एड्स वायरस को रेट्रोवायरस कहा जाता है. 
यह जानलेवा बीमारी तेजी से अपने पांव पसार रही है। एड्स के कारण पिछले तीन दशकों में 25 मिलियन से ज्याादा लोगों की मौत हो गई है। वर्तमान में दुनियाभर में लगभग 34 मिलियन से ज्यायदा एचआईवी वायरस से संक्रमित हैं। 
एच.आई.वी. पाजी़टिव होने का मतलब है, एड्स वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको एड्स है। एच.आई.वी. पाजीटिव होने के 6 महीने से 10 साल के बीच में कभी भी एड्स हो सकता है। और एक स्वस्थ व्यक्ति अगर एच.आई.वी. पाजीटिव के संपर्क में आता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है।

लक्षण 
एचआईवी के शुरुआती स्टे ज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्यगक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है। इसलिये जरूरी है की सभी को इसके लक्षणों के बारे में पूरी जानकारी हो। 
1. थकान
अगर किसी व्‍यक्ति को पहले से ज्याभदा थकान हो रही हो या हर समय थकान का अहसास होता हो, तो उसे इसे गंभीरता से लेते हुए एचआईवी की जांच करवानी चाहिए।

2. मांशपेशियों में खिंचाव
अगर बिना कोई कड़ा शारीरिक काम किए हमेशा आपकी मांसपेशियां तनावग्रस्तन और अकड़ी रहती हैं। तो इसे मामूली न समझें। यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

3. जोड़ों में दर्द और सूजन
उम्र के साथ-साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना सामान्य  माना जाता है, लेकिन कहीं यह समय से पहले हो जाए, तो इस पर सोचने की जरूरत है। इसे हल्के  में लेने की भूल न करें। यह एचआईवी का इशारा हो सकता है।

4. सिर दर्द
अगर आपके सिर में हर समय दर्द रहता हो, यह दर्द अगर सुबह-शाम कम हो जाए और दिन में बढ़ जाए, तो यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

5. वजन कम होना
एचआईवी से ग्रस्त  मरीज का वजन रोजाना कुछ कम होने लगता है। अगर बीते दो महीनों में बिना किसी कोशिश के भी आपका वजन कम हो रहा है, तो आपको अपनी जांच करवानी चाहिए।

6. त्वचा पर निशान
इम्यून व रेसिटेंस पावर कम होने के कारण शरीर बीमारियों से आपको बचाने में सक्षम नहीं रह पाता। इसका असर त्वचा की बाहरी सतह पर भी होता है। त्वचा पर लाल रेशेस होना और उनका ठीक न हो पाना भी एड्स का लक्षण है।

7. गला पकना
अगर आप पर्याप्ती मात्रा में पानी पीते, तो आपको गला पकने की शिकायत हो सकती है। लेकिन, किसी व्यरक्ति का गला अगर पर्याप्त  मात्रा में पानी पीने के बाद भी पक रहा है, तो आपको इस पर विचार करने की जरूरत है। दरअसल, बिना किसी कारण गले में भयंकर खराश और पकन महसूस हो, तो यह एचआईवी का लक्षण दर्शाता है।

8. बेवजह तनाव होना
बिना किसी कारण के तनाव हो, जरा-जरा सी बात पर रोना आये तो यह एचआईवी की ओर इशारा करता है।

9. सूखी खांसी और मतली आना 
बिना भयंकर खांसी के भी कफ बना रहना। लेकिन कफ में खून न आना। हमेशा मुंह का स्वाऔद बिगड़ा रहना आदि भी एचआईवी के लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही हर समय मतली आना या फिर खाना खाने के तुरंत बाद उल्टीो होना भी शरीर में एच आई वी के वायरस के संक्रमण का इशारा करते हैं।

10. जुकाम
यूं तो जुकाम होना आम बात है लेकिन अगर बार-बार अनुकूल मौसम में भी जुकाम जकड रहा हो तो यह भी एचआईवी होने का लक्षण हो सकता है।

11. सोते वक्त पसीना आना 
अगर किसी भी तापमान में सोते वक़्त पसीना आता है और घुटन महसूस होती हैं तो यह भी एड्स का लक्षण हो सकता है।

4 people found this helpful

Alzheimer's disease in hindi - जाने क्या होता है अलजाइमर रोग?

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Alzheimer's disease in hindi - जाने क्या होता है अलजाइमर रोग?

आप अपना चश्मा रखकर भूल सकते हैं, किसी का नाम भूल सकते हैं लेकिन अगर कहीं जाकर आप ये भूल जाएं कि आप यहां क्यों आए हैं, तो सचेत हो जाएं। खासकर अगर आपकी उम्र 50 से कम है तो ये खतरे की घंटी है। अल्जाइमर ज्यादातर 65 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली दिमाग से जुड़ी बीमारी है। ये एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें दिमाग की कोशिकाएं नष्ट होने से यादाश्त जाने लगती है। ये बीमारी शुरुआत में हल्के-फुल्के भूलने की आदत से शुरू होती है लेकिन धीरे-धीरे खतरनाक होती जाती है। अलजाइमर के मरीज के लिए शुरुआती दौर में तुरंत घटी घटनाओं को भी याद करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही पुरानी यादें भी धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। अलजाइमर की आखिरी स्टेज डिमेंशिया काफी खतरनाक होती है।

ये हैं शुरुआती लक्षण
अलजाइमर में यादाश्त कमजोर होने के साथ-साथ कुछ और भी लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे- पहले लोगों के नाम भूल जाना, अपने विचारों को व्यक्त करने में कठिनाई, निर्देशों का पालन करने में दिक्कत, किसी बात को समझने में भी परेशानी होती है। बार-बार एक ही बात पूंछना, अपना सामान बार-बार खो देना, बहुत परिचित रास्ते में भी खो जाना वगैरह जैसे कुछ लक्षण शुरुआत में दिखाई दे सकते हैं। दो तिहाई लोगों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी देखी जा सकती हैं। जैसे बात-बात पर चिड़चिड़ाना, गुस्सा करना और तनाव वगैरह। 
जैसे-जैसे रोगी अलजाइमर की मिडिल स्टेज पर पहुंचता है और आगे की स्टेज पर जाता है तो उसे कई तरह के भ्रम होने लगते हैं। रोगी कुछ ऐसी चीज दिखाई देने की बात कह सकता है जो उसके आसपास है ही नहीं, या उसे ऐसा लग सकता है कि उसे किसी ने छुआ है, कुछ सुनाई देना और किसी चीज की खुशबू आना वगैरह।

आखिर क्यों होता है अलजाइमर
अभी तक अल्जाइमर रोग की सही वजह पता नहीं हैं लेकि न कुछ रिसर्चेस के मुताबिक, अल्जाइमर रोग शायद आनुवंशिक असर, लाइफ स्टाइल और दिमाग को प्रभावित करने वाले आसपास के फैक्टर की वजह से होता है।

रिस्क फैक्टर
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र के साथ हमारे मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या संदेश पहुंचने में गड़बड़ी होने लगती है। अगर आपके परिवार में किसी को ये बीमारी है तो आपको ये रोग होने की संभावन बढ़ जाती है। इसके अलावा डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा और सिर में चोट के इतिहास वाले लोगों में ये बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। हालांकिी इस बीमारी में उम्र सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। ये बीमारी ज्यादातर 60 की उम्र पार कर चुके लोगों को होती है। कम उम्र में भी आप अलजाइमर के शिकार हो सकते हैं। 80 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते छह में से एक व्यक्तिा में ये बीमारी देखी जा सकती है। 

जांच
अलजाइमर का पता शुरुआती दिनों में चल जाए तो बेहतर रहता है। अगर अलजाइमर का शक हो तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मिलें। वह मरीज से बातचीत करके अंदाजा लगा सकता है। इसके बाद मरीज को सीटी स्कैन, एमआरआई और पीईटी जैसे टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं। 

बचाव
अलजाइमर को एक लाइलाज बीमारी माना जाता है। अगर आप रिस्क फैक्टर में आते हैं तो बचाव के लिए यहां दिए उपाय किए जा सकते हैं।

1. अपने वज़न का नियंत्रण, पौष्टिक भोजन लें, अच्छी मात्रा में ताज़े फल और सब्जी खाएं।
2. नियमित व्यायाम करें।
3. मानसिक रूप से सक्रिय रहें, कुछ नया सीखें और नए शौक विकसित करें।
4. उचित कदम लेकर हृदय रोग की संभावना कम करें।
5. मेल-जोल बढ़ाएं, दोस्त बनाएं और खुश रहें।
6. मैडीटेरेनियन आहार (मछली, जैतून का तेल, प्रचुर मात्र में सब्जियां) लेने से अलजाइमर के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है।
7. हल्दी में मिलने वाले करक्यूमिन को नैनोतकनीक से नैनो-पार्टिकल में एनकैप्सूलेट कर अल्जाइमर का प्रभावी इलाज में मददगार हो सकते हैं।
8. 40 की आयु पार कर जाने के बाद अपने भोजन में बादाम, टमाटर, मछली आदि को नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। 

करें योग
योग एक ऐसा माध्यम है जिसे निरंतर करने से इस बीमारी का हल निकाला जा सकता है। एक्सपर्टों का कहना है कि इस बीमारी को शुरुआत में पता लगते ही व्यायाम करना शुरू कर देना चाहिए। इतना ही नहीं निरंतर योग करने से याद्दाश्त भी बढ़ती है। इसलिए अलजाइमर के पीड़ितों को रोजाना 20 से 25 मिनट योगा करना चाहिए।

1 person found this helpful

Gas ka ilaj - गैस का इलाज

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Gas ka ilaj - गैस का इलाज

हम अक्सर देखते हैं की कितने ही लोग शरीर से भारी हों या हल्के, बूढ़े हों या जवान यहाँ तक की आजकल तो बच्चे बेचारे भी हैं पेट की गैस से परेशान| भले ही यह एक बेहद आम बीमारी है पर अगर इसे समय रहते इसपर सावधानी न बरती जाए तो यह एक दिन बड़ी बीमारी जैसे अल्सर का भी रूप ले सकती है। 

कारण 
पेट में गैस की समस्या वालों की तादाद ज्यादा बढ़ने के लिए जिम्मेदार है आज की बेढंग जीवनशैली जिसमें स्ट्रेस, बैचेन, डर, चिंता, गुस्से के कारण डाइजेशन पार्ट्स के जरूरी पाचक रसों का स्राव कम हो जाता है, और परिणामतः अपच की समस्या हो जाती है और अपच के कारण ही पेट में गैस बनती है।

गैस की समस्या है तो गंभीर पर थोड़ी सावधानी अगर बरती जाए तो इससे आराम भी मिलना अपने हाँथ ही है| हमारे किचन में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें अजमाने से गैस की तकलीफ होने पर आराम पाया सकता है|

1. अजवाइन 
अजवाइन हर घर में होती है तली जाने वाली चीजों में अक्सर इस्तेमाल की जाती है| वैसे अजवाइन सिर्फ इसीलिए यूजफुल नही है बल्कि अजवाइन पेट के कई रोगों जैसे गैस, पेट के कीड़े या फिर एसिडिटी है सबसे बड़ा दुश्मन । अगर आपको पेट में दर्द हो रहा है और आपको पता है कि यह एसिडिटी या गैस है तो तुरंत गर्म पानी के साथ एक छोटी चम्मच अजवाइन की लें फांकी जिससे आपको एसिडिटी और गैस से मिल जाएगा छुटकारा।

2. पुदीना
पुदीना की चटनी तो मशहूर हैं ही पर आप ये भी याद रखें की पुदीना में बहुत से औषधीय गुण भी हैं| पुदीना हमारे पूरे स्वास्थ्य के लिए एक वरदान है। वैसे तो यह लगभग हर बीमारी में किसी न किसी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है| पर खासकर जब बात हो पेट में गैस, एसिडिटी की तो यह है रामबाण इलाज। अगर आपको पेट में गैस, एसिडिटी जी मचलना या उलटी की समस्या हो तो पुदीने का जूस, इसकी चटनी, काढ़ा या ग्रीन टी के रूप में सेवन करें और गैस की समस्या को बाय बाय बोलकर तरोताजा महसूस करें|

3. नीबू 
नींबू है पेट के गैस के खिलाफ लड़ने वाला खतरनाक दुश्मन| अगर कभी पेट में जलन या गैस महसूस हो रही हो तो नींबू पानी और नींबू की चाय पियें इससे आप गैस से छुटकारा पा जाएंगे| इसके अलावा अगर कभी ज्यादा ही परेशानी हो रही हो तो एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर, उसमें थोड़ा सा काला नमक, चुटकी भर भुना जीरा, चुटकी भर अजवाइन, 2 चम्मच मिश्री एक चम्मच ताजे पुदीने का रस मिलाकर पी जाएं इससे गैस की समस्या से आप तेज रफ़्तार में आराम पा जाएँगे| 

4. सेब 
डेली ए एप्पल कीप डॉक्टर अवे ये कहावत तो हम सभी जानते हैं पर क्या आप जानते हैं की सेब का सिरका पेट में गैस की तकलीफ से तुरंत आराम दिलाता है| जब भी पेट में गैस की तकलीफ हो सेब के सिरके की दो चम्मच गुनगुने पानी में मिलाकर पिएँ इससे तुरंत राहत मिलेगी|

6. छास 
छास गैस का दुश्मन माना जाता है | गैस की तकलीफ महसूस होने पर या इससे बचने के लिए चुटकी भर भुना जीरा, काला नमक और पुदीना छाछ में मिलाकर खाना खाने के बाद पीएं और गैस की बीमारी से बचे रहें|

 7. सरसों का तेल 
अगर पेट की नाभि अपने स्थान से हट जाती है तो पेट में गैस, दर्द और भूख नहीं लगती है। ऐसे में नाभि को सही बैठाने से और नाभि पर सरसों का तेल लगाने से फायदा होता है| अगर पेट में दर्द ज्यादा हो रहा हो तो रूई का फाया सरसों के तेल में भिगोकर नाभि पर रखकर पट्टी भी बांध सकते हैं। कुछ ही समय में इसका फायदा महसूस होने लगेगा|

8. लौंग 
दो लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डाले दें फिर कुछ देर ठण्डा होने दे और रोजाना दिन में तीन बार पियें और गैस की बीमारी से खुद को बचाएं| 
इसीके साथ कुछ आदतों को आपनाने और कुछ चीजों को ना खाने या कम खाने से भी पेट की गैस से मिलती है राहत| पेट में गैस होने पर भोजन में मिर्च, मसाले, भारी भोजन, मांस, मछली, अण्डे मूंग, चना, मटर, अरहर, आलू, सेम, चावल आदि से बनी चीजों को खाने से बचें| तेल घी का इस्तेमाल कम से कम करें| आसानी से पचने वाले भोजन जैसे सब्जियां, खिचड़ी, चोकर सहित बनी आटे की रोटी, दूध, तोरई, कद्दू, पालक, टिंडा, शलजम, अदरक, आंवला, नींबू आदि का इस्तेमाल अधिक खाएं|

9. खाना चबाकर खाएं 
खाना खूब चबा-चबा कर आराम से खाना चाहिए। बीच-बीच में ज्यादा पानी पीने से बचें| खाने के एक घंटे के बाद 1 से 2 गिलास पानी पिएं। दोनों समय के भोजन के बीच हल्का नाश्ता या फल आदि अवश्य खाएं। 
रेगुलर व्यायाम योगा करें| नियमित जीवन शैली अपनाएं|

3 people found this helpful

Typhoid Fever in Hindi - जाने क्या है टाइफाइड फीवर

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Typhoid Fever in Hindi - जाने क्या है टाइफाइड फीवर

टाइफायड साल्मोनेला बैक्टीरिया से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है। इसे मियादी बुखार भी कहते हैं। टाइफायड  बुखार पाचन तंत्र और ब्लटस्ट्रीम में बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से होता है। गंदे पानी, संक्रमित जूस या पेय के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। टायफायड की संभावना किसी संक्रमित व्यक्ति के जूठे खाद्य-पदार्थ के खाने-पीने से भी हो सकती है। वहीं दूषित खाद्य पदार्थ के सेवन से भी ये संक्रमण हो जाता है। पाचन तंत्र में पहुंचकर इन बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। शरीर के अंदर ही ये बैक्टीर‌िया एक अंग से दूसरे अंग में पहुंचते हैं। टाइफायड के इलाज में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाह‌िए। दवाओं का कोर्स पूरा न किया जाए तो इसके वापस आने की भी संभावना रहती है।

क्या है टाइफायड 
टाइफायड के बैक्टीरिया इंसानों के शरीर में ही पाया जाता है। इससे संक्रमित लोगों के मल से सप्लाई का पानी दूषित हो जाता है। ये पानी खाद्य पदार्थों में भी पहुंच सकता है। बैक्टीरिया पानी और सूखे मल में हफ्तों तक ‌जिंदा रहता है। इस तरह ये दूषित पानी और खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचकर संक्रमण पहुंचाता है। संक्रमण बहुत अधिक हो जाने पर 3 से 5 फीसदी लोग इस बीमारी के कैरियर हो जाते हैं। जहां कुछ लोगों को हल्की से परेशानी होती है, जिसके लक्षण पहचान में भी नहीं आते वहीं कैरियर लंबे समय के लिए इस बीमारी से ग्रसित रहते हैं। उनमें भी ये लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन कई सालों तक इनसे टाइफायड का संक्रमण हो सकता है।

लक्षण
संक्रमित पानी या खाना खाने के बाद साल्मोनेला छोटी आंत के जरिए ब्लड स्ट्रीम में मिल जाता है। लिवर, स्प्लीन और बोनमैरो की श्वेत रुधिर क‌णिकाओं के जरिए इनकी संख्या बढ़ती रहती है और ये रक्त धारा में फिर से पहुंच जाते हैं। बुखार टाइफायड का प्रमुख लक्षण है। इसके बाद संक्रमण बढ़ने के साथ भूख कम होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द होना, तेज बुखार, ठंड लगना, दस्त लगना, सुस्ती, कमजोरी और उल्टी  जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आंतों के संक्रमण के कारण शरीर के हर भाग में संक्रमण हो सकता है, जिससे कई अन्य संक्रमित बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

सामान्यता टाइफायड 1 महीने तक चलता है, लेकिन कमजोरी ज्यादा होने पर ज्यादा समय ले सकता है। इस दौरान शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है और जिससे रोगी को सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है। 

टाइफायड की जांच
शुरुआती स्टेज में रोगी के ब्लड सैंपल की जांच करके उसका इलाज शुरू किया जाता है। इसके अलावा रोगी का स्टूल टेस्ट करके उसके शरीर में टाइफायड के बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। विडाल टेस्ट भी टाइफायड के टेस्ट का प्रचलित तरीका है लेकि‌न कई बार टाइफायड ठीक होने के बाद भी सालों-साल मरीज के ब्लड में विडाल टेस्ट पॉजिटिव आता रहता है। इसके लिए स्टूल और टा‌इफायड टेस्ट कराना बेहतर विकल्प है। कभी-कभी संक्रमण ज्यादा होने पर अगर मरीज को ज्यादा पेट दर्द या उल्टी हो तो सोनोग्राफी भी करनी पड़ सकती है।

इलाज
टाइफायड का  इलाज एंटी बायोटिक दवाओं के जरिये किया जाता है। शुरुआती अवस्था का टाइफायड एंटीबायोटिक गोलियों और इंजेक्शन की मदद से दो हफ्ते के अंदर ठीक हो जाता है। इसके साथ परहेज रखना बेहद जरूरी है।

ऐसे करें मरीज की देख-रेख

टाइफायड के दौरान तेज बुखार आता है। ऐसे में किसी कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर शरीर को पोंछे। इसके अलावा ठंडे पानी की पट्टियां सिर पर रखने से भी शरीर का तापमान कम होता है। कपड़े को समय समय पर बदलते रहना चाहिए। ये ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि पानी बर्फ का ना हो। पट्टी रखने के ल‌िए साधारण पानी का इस्तेमाल करें।

घरेलू उपचार
1. तुलसी और सूरजमुखी के पत्तों का रस निकालकर पीने से टाइफायड में राहत मिलती है।

2. लहसुन की तासीर गर्म होती है और यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। घी में 5 से 7 लहसुन की कलियां पीसकर तलें और सेंधा नमक मिलाकर खाएं। 

3. सेब का जूस निकालकर इसमें अदरक का रस मिलाकर प‌िएं, इससे हर तरह के बुखार में राहत मिलती है।

4. पके हुए केले को पीसकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं।

5. लौंग में टाइफायड ठीक करने के गुण होते हैं। लौंग के तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। आठ कप पानी में 5 से 7 लौंग डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए इसे छान लें। इस पानी को पूरा दिन पीएं। इस उपचार को एक हफ्ते लगातार करें।

2 people found this helpful

Symptoms of Liver Disease - लीवर रोग के लक्षण

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Symptoms of Liver Disease - लीवर रोग के लक्षण

कहते है ना कि हर क्लास में अच्छे बच्चों के बीच कुछ शरारती बच्चे भी होते है, जिन्हें मास्टरजी डाँट फटकार से सुधारते हैं, वैसे ही हमारे शरीर मे खून का कुछ हिस्सा खराब हो जाता है जिसे शरीर के अंदरूनी हिस्से का सबसे बड़ा और एक बेहद महत्वपूण हिस्सा साफ करता है। जिसे हम लीवर के नाम से जानते हैं। हम सब जानते है कि शरीर का 70% भाग पानी है और 30% भाग मास है, मगर क्या आप जानते है कि 70% पानी मे लगभग 7% सिर्फ खून है| अगर किसी इंसान के शरीर का वजन 55 किलो है तो उसके शरीर मे लगभग साढ़े चार से साढ़े पांच किलो खून मिलेगा। यह खून हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे हम डिलीवरी मैन भी कह सकते है क्योंकि यही खून हमारे शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सिजन पहुचाते हैं| और निकलने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड और टॉक्सिक को बाहर ले जाते हैं। और जब यही खून एक क्लास के शरारती बच्चे की तरह बिगड़ जाता है तो उसे सुधारना जरूरी हो जाता है और यह काम हमारे शरीर का मास्टरजी यानी "लीवर " करता है।

लीवर खून साफ करने के अलावा खाना पचाने, किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन से लड़ने में भी काम करता है। लीवर में एक ऐसी क्षमता भी पाई जाती है, जिससे वह अपने आप को डैमेज होने के बाद दुबारा सही हो जाता है| ठीक हमारी स्किन की तरह। लेकिन अगर लीवर में यह खूबियाँ न रह जाए तो हमारा शरीर ज्यादा दिन नही चल पाएगा क्योंकि तब ना खून साफ होगा और ना ही शरीर का इन्फेक्शन से लड़ने में कोई मदद करेगा। इसलिए ऐसा कुछ भी करना जिससे लीवर की क्षमता अपने आप को और बाकी अंगों को ठीक करने से रोके वह आपके जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। 

भले ही लीवर शरीर के अंदर होता है पर उसके खराब होने का असर शरीर के सभी हिस्सों पर पड़ता है| इसलिए लीवर का ख़ास ख्याल तो रखें ही पर बताए गए कुछ लक्षण आगर आपको नजर आए तो ख़ास हिदायत बरतने के साथ ही डॉक्टर से भी मिलें।

• शरीर का पीला पड़ना 
जब आपका लीवर सही तरीके से काम नहीं कर पाता तो शरीर पीला पड़ने लगता है। साथ ही आंखों का सफेद हिसस भी हल्का पिला नजर आने लगता है। यह इसलिए होता है क्योंकि बिलरुबिन नाम का केमिकल जो पीले रंग का होता है लीवर उसे साफ नहीं कर पाता और वह शरीर मे रह जाता है। इस स्थिति को हम पीलिया के नाम से जानते है। U K की नेशनल हेल्थ सेविस के अनुसार अधिक मात्रा में शराब ड्रग्स का सेवन करने से यदि लीवर खराब हुआ हो और उसके बाद व्यक्ति में पीलिया के लक्षण नजर आएं तो यह उसके जीवन के लिए बहुत खतरनाक है। इसलिए पीलिया होने पर अनिवार्यतः लीवर की जांच करानी चाहिए।

•  मल मूत्र का रंग बदलना
लीवर खराब होने पर मूत्र का रंग गहरा पिला और मल का रंग हल्का पीला हो जाता है। इसलिए अगर ऐसे कोई लक्षण नजर आएं तो तुरंत अपने लीवर की जाँच कराएं।

• खुजली होना
खुजली होनालीवर खराब होने के शुरुवाती लक्षणों में से एक है। थ पैर या बदन के किसी भी हिस्से, यह खुजली शरीर मे कहीं भी हो सकती है। खुजली होने पर आपकी स्किन का लाल होना, खुजली वाली जगह पर सूजन आना, धब्बे पड़ना, चमड़ी का रंग फीका पड़ना, चमड़ी का सूख के फटने जैसे बदलाव आना। यह खुजली व्यक्ति में लंबे समय तक रह सकती है और खुजाने पर खुजली मिटने के बजाय और बढ़ सकती है। आमतौर पर जलने काटने से खुजली होती है परंतु अगर आपको बिना जले कटे खुजली हो तो समझी लीवर पर संकट आने को है या आ चूका है। 

• चोट लगने पर ज्यादा खून बहना
आमतौर पर जिसका लीवर कमजोर होता है उसे चोट लगने पर सामान्य व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा खून बहता है। क्योंकि खराब लीवर वाले व्यक्ति को चोट लगने पर जो प्रोटीन्स लीवर बनाता है खून को ज्यादा बहने से रोकने के लिए, जिसे हम ब्लड क्लोटिंग के नाम से भी जानते है, वह प्रोटीन्स बनना कम हो जाता है। इसलिए अगर चोट लगने पर खून बहना ना रुके तो यह चिंता का विषय हो सकता है|

• शरीर मे सूजन आना
जैसे ही लीवर कमज़ोर होने लगता है शरीर मे पानी जमा होने लगता है जिसकी वजह से शरीर मे सूजन आ जाती है। लीवर खराब होने पर पानी व्यक्ति के पेट हाँथ -पैर समेत हार्ट तक में जमा होने लगता है। कई बार हार्ट में ज्यादा पानी जमा होने की वजह से हार्ट अटैक होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए हांथों –पैरों में सूजन आये या पेट अचानक बढ़ने लगे तो लीवर की हाल खबर जरुर लें 

• कोई सिग्नल ना मिलना
लोवा विश्वविद्यालय का कहना है कि जरूरी नहीं कि अगर आपमें लीवर खराब होने के कोई भी लक्षण न दिखाई दे तो आपका लीवर तंदरुस्त है। यह पूरी तरह से मुमकिन है कि आपका लीवर कमजोर हो पर कोई लक्षण शरीर पर नजर न आए। रिसर्च द्वारा पता चला है कि कमजोर लीवर वाले लोगो मे से आधेलोगों को बाहर से कोई लक्षण नही दिखाई देते और बाकी लोगों में से कुछ लोगो को हल्के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे कि थकान महसूस होना, चक्कर आना, कभी कभार खुजली होना| 

इस तरह अगर शुरुवात में लीवर के कमजोर होने के लक्षण को नही पहचाना जाए या कोई लक्षण न दिखने पर लीवर की नियमित जाँच न की जाए उसका ख्याल न रखा जाए तो यह आगे चलके बेहद खतरनाक साबित हो सकता है| जो कि व्यक्ति को कोमा या मौत की वजह बन सजता है| इसलिए शरीर के मुख्या हिस्सों की तरह लीवर का भी ख़ास ख्याल रखें|

What to eat in jaundice in hindi - पीलिया में क्या खाएं?

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
What to eat in jaundice in hindi - पीलिया में क्या खाएं?

सच कहा गया है कि पेट से पूरा शरीर चलता है और अगर ये दुरुस्त ना हो तो पूरा शरीर अव्यस्थित भी हो जाता है। इसीलिए तो पेट में खराबी हो तो असर सीधे चेहरे पर नज़र आने लगता है। और पेट की तमाम बीमारियों में एक है जॉन्डिसकी बीमारी। जॉन्डिस यानि पीलिया की बीमारी जो रक्त में बिलरूबीन की मात्रा बढ़ जाने की वजह से होती है। पाचन तंत्र कमजोर होना पीलिया का प्रमुख कारण है। पीलिया के रोग का प्रभाव शरीर में खून बनने पर पड़ता है जिससे शरीर में ब्लड की कमी होने लगती है। इस रोग में अगर लापरवाही की जाये तो ये काला पीलिया बन जाता है जो जानलेवा रोग हो सकता है। सामान्यत: शरीर में बिलरूबीन का स्तर 0.2 से 1.2 mg/dl से कम होता है लेकिन जब यह 3 mg/dl से बढ़ जाता है,इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते पर ये रोग जब बढ़ जाता है तब मरीज की आँखे और नाख़ून पीले पड़ जाते है, इसके इलावा पेशाब पीले रंग का आने लगता है और खाना ठीक से नहीं पचता। इसके इलावा शरीर मे होने वाले कुछ परिवर्तनों से जॉन्डिस को पहचाना जा सकता है। 

लक्षण 

शरीर मे इनमें से कुछ बदलाव नज़र आये तो इसे पीलिया के लक्षण के तौर पर समझना चाहिए और तुरंत इलाज शुरू कर देनी चाहिए।
●त्वचा का रंग पीला पड़ना 
●त्वचा चिपचिपी होना
● आंखें पीली नजर आना
● पेट में दर्द व सूजन होना 
●उल्टी आना, 
●जी मचलाना, 
●कमजोरी, 
●सिरदर्द
●भूख न लगना 
●बैचेनी 

जॉन्डिस दो प्रकार के होते हैं जिन्हें सर्जिकल जॉन्डिस और मेडिकल जॉन्डिस के नाम से जाना जाता है।

पीलिया के कारण
• इंफेक्शन 
•  लिवर में कमज़ोरी
•  शरीर में ब्लड की कमी 
•  सड़क किनारे कटी, खुली और दूषित चीज़े खाना

पीलिया में योग्य आहार 

पीलिया पुराना हो या नया कुछ घरेलू आहार ऐसे हैं जिनके नियमतः इस्तेमाल से पीलिया का उपचार संभव है। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कुछ चीजों को खाने के साथ ही कुछ चीजों से परहेज करना भी जरूरी है।
जैसे ही पीलिये के लक्षण आपको दिखने तो बताये गए कुछ चीजों को आप रोजाना अपने आहार में शामिल करना शुरू कर दें|

●प्याज का  पीलिया के उपचार में बेहद उपयोगी है। प्याज छील कर इसे बारीक़ काटे फिर पीसी हुई काली मिर्च, थोड़ा काला नमक और नींबू का रस इसमें मिलाकर हर रोज दिन में सुबह शाम सेवन करें।
●ताजा मूली के हरे पत्ते पीस कर रस निकाले और इसे छान कर पी जाएं। इससे मरीज के जिगर की कमजोरी दूर होती है, पेट की आंते साफ़ होती है और भूख लगने लगती है।
●जॉन्डिस ठीक करने में टमाटर का प्रयोग भी अच्छा उपाय है। एक गिलास टमाटर जूस में नमक और थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से चमत्कारी तरीके से फायदा मिलता है।
 ●धनिया बीज - को रात में भिगोने रख दे सुबह उन बीजों को खाएं।
●आयरन और कैल्सियम जॉन्डिस से लड़ने के लिए जरूरी है, इसलिए इन दोनों तत्वों से युक्त होने के कारण छांछ का सेवन करना फायदेमंद है।
●पपीता खाने से एंजाइम एल्बुमिन का स्तर संतुलित रहता है|
● गन्ने का जूस पीये यह ब्लड में अतिरिक्त बिलरुबिन की मात्रा सही करता है| 
●दही पीलिया रोग से लड़ने में  कारगर सिद्ध होता है इसमें उपयोगी बैक्टीरिया पीलिया फैलने से रोकते है
● लहसुन की तीन से चार कलियाँ पीस कर इसे दूध के साथ ले, इससे पीलिया का जड़ से इलाज होता है और लिवर को ताकत मिलती है।
●चने की दाल रात को पानी में भिगो कर रखे। सुबह इसमें से पानी निकाल ले और गुड़ मिलाकर खाए। लगातार कुछ दिन इस नुस्खे को करने पर जॉन्डिस में राहत मिलती है।
●पीलिया के मरीज को गाजर और गोभी का रस बराबर बराबर मिलाकर एक गिलास पिए।  इस जूस को कुछ दिन लगातार पीने पर पीलिया से जल्दी आराम मिलता है।
●निम्बू का रस पीलिया में काफी फायदेमंद है। पीलिये से ग्रस्त मरीज को रोजाना नींबू का रस पंद्रह से बीस एम एल दो से तीन बार पीना चाहिए। नींबू की शिकंजी बना कर पीना भी अच्छा है।
● गुड़ और पीसी हुई सौंठ मिला ले और ठंडे पानी के साथ लें।
● ताजे आँवले का रस शहद में मिलाकर हर रोज पिएँ इससे दो से तीन हफ्ते में पीलिया ठीक हो जायेगा।
• नवजात शिशुओं में यदि जॉन्डिस के लक्षण हो तो ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मां ओं को भी रोजाना सुबह एक गिलास टमाटर का जूस पीना चाहिए।

परहेज़ की जाने वाली चीजें

  • गरम पदार्थ न खाएं|
  • जादा घूमना फिरना ना करे और आराम करे।
  • इस रोग में मिर्च मसालेदार, मेदा, मिठाइयां, उड़द की दाल और तले हुए खाने से बचें।
  • आसानी से पचने वाला आहार लें|
  • पीलिया होने पर इन उपायों को तो अपनाएं ही पर साथ ही डॉक्टर को भी दिखाएं|
1 person found this helpful

Shighrapatan Ke Karan in Hindi - शीघ्रपतन के कारण

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Shighrapatan Ke Karan in Hindi - शीघ्रपतन के कारण

शीघ्रपतन पुरुषों में होने वाली आम समस्या है। अक्सर शीघ्रपतन की मुख्या वजह शारीरिक कम मानसिक ज्यादा होती है! लोगों में दोनों या दोनों में से कोई भी एक समस्या हो सकती है। सेक्स के दौरान शुरुआती 3० सेकेंड से दो मिनट के बीच ही वीर्य निकल जाए तो इस स्थिति को शीघ्र पतन या प्रीमेच्योर इजेकुलेशन कहते हैं। शीघ्रपतन होने पर स्त्री संभोग का पूरा आनंद नहीं उठा पाती है, जिसके कारण पति-पत्नी दोनों में तनाव भी पैदा हो सकता है। इस स्थिति में पुरुषों में हीनभावना आ जाती है। वीर्य निकालने वाली नली में खुश्की के कारण जब कमजोरी आ जाती है, तब वीर्य-स्खलन जल्दी हो जाता है। इस स्थिति में वीर्य पतला तथा उसका रंग सफेद होता है। इस समस्या की वजह युवक के लिंग के ऊपरी भाग का अधिक संवेदनशील होना, कोई लम्बी बीमारी अथवा लम्बे समय से किसी दवाई का सेवन, अधिकतर समय शारीरिक संबंधों के बारे में सोचना, कोई चोट लगना, मानसिक बिमारी, ड्रग्स, या शरीर में हार्मोन से जुड़ी समस्या का होना भी हो सकता है। नजर डालें कुछ ऐसे ही कारणों पर:

  1. जब किसी कारणवश शरीर में रक्त तथा वीर्य उचित से अधिक मात्रा में बढ़ जाते हैं, तब भी वीर्य-स्खलन जल्दी हो जाता है। ऐसी स्थिति में वीर्य न अधिक गाढ़ा होता है और न अधिक पतला परन्तु लिंग में कड़ापन अधिक होता है।
  2. किसी भी प्रकार का नशा न करें। नशा आपकी सेक्स पावर को घटाता है। तनाव न लें। बहुत से लोग इसी तनाव से ग्रस्त रहते हैं कि पता नहीं वे अपने साथी को खुश कर पाएंगे या नहीं। शीघ्रपतन कोई बीमारी नहीं है। खुद पर यकीन रखें।
  3. वीर्य-नली में सुस्ती अथवा ढीलापन आ जाने से वह वीर्य रोक पाने में असमर्थ हो जाती है, ऐसी स्थिति में वीर्य अपने आप निकल जाता है। 
  4. वीर्य-वर्द्धक औषधियों के सेवन से जब शरीर में अधिक वीर्य जमा हो जाता है, तब मैथुन के समय वह शीघ्र तथा अधिक परिमाण में निकलता है। ऐसा वीर्य न अधिक गाढ़ा होता है और न अधिक पतला।
  5. कई लोग कहते हैं कि हस्तमैथुन करने से पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या देखने को मिलती है। उन्हें क्लाइमेक्स तक पहुंचने की जल्दी होती है जिस वजह से यह समस्या देखने को मिलती है। हालांकि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
  6. दिल, दिमाग, पैंक्रियाज या किडनी आदि की समस्या होने पर वीर्य-स्खलन शीघ्र होता है।
  7. डायबिटीज जैसी बीमारियों का प्रभाव नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। तंत्रिका प्रणाली पर असर होने के चलते लिंग की नसें कमजोर हो जाती हैं जिससे ये समस्या हो सकती है। इसके अलावा ड्रग्स वगैरह लेने पर भी ये समस्या हो सकती है।
  8. मानसिक तनाव स्वास्थ्य के लिए किसी भी तरह से ठीक नहीं। इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है।
  9. सेक्स पावर की कमी की मूल वजह भी शरीर में वीर्य की कमी का होना ही समझना चाहिए। कम सेक्स पावर वाले लोगों का वीर्य भी शीघ्र स्खलित होता है।
  10. थायरायड, लिंग की कमजोरी, हाईब्लडप्रेशर, विटामिन की कमी वगैरह भी शीघ्रपतन की वजह हो सकती हैं। 
  11. उम्र के साथ शरीर में हार्मोंस में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की कमी से भी ये समस्या देखने को मिलती है। जंक फूड और मोटापे के चलते भी ये समस्या पैदा हो सकती है।
  12. ब्रेन केमिकल का असमान्य स्तर या अनुवांशिक कारणों से भी ये समस्या हो सकती है।
  13. प्रोटेस्ट या मूत्रमार्ग में सूजन या संक्रमण से भी शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है।
  14. कभी-कभी ज्यादा ओरल सेक्स और फोरप्ले के चलते भी ये समस्या देखने में आती है।
20 people found this helpful

Jaundice in Hindi - क्या होता है पीलिया?

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Jaundice in Hindi - क्या होता है पीलिया?

रक्त में बिलीरूबीन के बढ़ जाने से त्वचा, नाखून और आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगता है, इस स्थिति को पीलिया या जॉन्डिस कहते हैं। पीलिया से पीड़ित मरीज की पेशाब का रंग भी पीला नजर आता है। पीलिया साधारण बीमारी लग सकती है, मगर इसका सही समय पर इलाज ना हो तो ये बहुत भयंकर परिणाम देती है। ये लीवर से संबंपधित रोग है और इसमें मरीज की जान तक जा सकती है। नवजात शिशुओं में ये समस्या ज्यातर देखी जाती है लेकिन वयस्क भी इसके शिकार होते हैं। 

क्यों होता है पीलिया
बिलीरूबीन पीले रंग का पदार्थ होता है। ये रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। जब ये कोशिकाएं मृत हो जाती हैं तो लिवर इनको रक्त से फिल्टर कर देता है। लेकिन लिवर में कुछ दिक्कत होने के चलते लिवर ये प्रक्रिया ठीक से नहीं कर पाता है और बिलीरूबीन बढ़ने लगता है। इसी के चलते हमारी त्वचा पीली नजर आने लगती है। वयस्कों में पीलिया कम ही होता है, यहां कुछ वजहें हैं जिनके चलते ये समस्या हो जाती है।

  1. हेपेटाइटिस
  2. पैंक्रियास का कैंसर
  3. बाइल डक्ट का बंद होना
  4. एल्कोहल से संबधी लिवर की बीमारी
  5. सड़क के किनारे, कटी, खुतली, दूषित वस्तुएं और  गंदा पानी पीने से
  6. कुछ दवाओं के चलते भी ये समस्या हो सकती है।

इन लक्षणों से करें पहचान

  1. बिलीरूबिन का स्तर खून में बढ़ने से, त्वचा, नाखून और आंख का सफेद हिस्सा तेजी से पीला होने लगता है।
  2. फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देना- इसमें मरीज को ठंड लगती है, बुखार आता है, उल्टियां भी आने लगती हैं।
  3. लिवर की बीमारियों की तरह इसमें मितली आना, पेट दर्द, भूख न लगना और खाना न हजम होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।
  4. वजन घटना
  5. गाढ़ा/पीला पेशाब होना
  6. लगातार थकान महसूस करना

कराएं ये जांचें
ऊपर दिए गए लक्षणों के आधार पर अगर आपको शक है कि पीलिया हुआ है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर को मरीज की शारीरिक जांच से अंदाजा हो जाता है कि उसे पीलिया हो सकता है। खासकर आंखों और त्वचा के रंग से इसकी पहचान हो जाती है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर बिलीरूबिन टेस्ट, फुल ब्लड काउंट (एफबीसी) या कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) और हेपेटाइटिस ए, बी और सी के टेस्ट कराएं।

इन बातों का रखें ध्यान

  1. किसी भी बीमारी के दौरान सही खान-पान बेहद जरूरी है। पीलिया के दौरान नियमित भोजन और हल्कीफुल्की एक्सरसाइज की जा सकती है। हालांकिद स्थिति। ज्यादा खराब हो तो परहेज करें और पूरी तरह से आराम को तरजीह दें। इसके अलावा लिक्विड डाइट लें और फलों का जूस पीते रहें। संतरा, नींबू, नाशपती, अंगूर, गाजर,चुकंदर, आंवले का जूस फायदेमंद होता है।
  2. भारी खाना न खाएं। खाने की जगह दलिया खाना बेहतर रहेगा। 
  3. नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती को जगह दें।
  4. नारियल पानी भी इस दौरान काफी फायदेमंद होता है। इसे कम से कम दो बार लें।
  5. इसके अलावा खाने में उबली हुई पालक, मेथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और एक गिलास छाछ लें।
  6. चिकनाई युक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम 15 दिन तक न खाएं। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तेल उपयोग कर सकते हैं। 
  7. इस दौरान भोजन ऐसा होना चाहिए जिसमें पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन सी ,विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। ठीक होने के बाद भी भोजन में लापरवाही न बरतें।

करें ये घरेलू उपाय

  1. प्याज पीलिया में काफी फायदेमंद होता है। प्याज छीलकर इसे बारीक काटें फिर पिसी हुई काली मिर्च, थोड़ा काला नमक और नींबू का रस डालकर हर रोज दिन में दो बार लें।
  2. पीलिया में गन्ने का रस काफी फायदा करता है लेकिन ध्यान रखें किये शुद्धता से बनाया गया हो।
  3. लहसुन की तीन,चार कलियां पीसकर दूध के साथ लेने से पीलिया से तुरंत आराम मिलता है और लि।वर भी मजबूत बनता है।
  4. मूली के हरे पत्ते पीलिया में बेहद फायदेमंद है। पत्ते पीसकर रस निकाल लें, फिर छानकर पिएं। इससे भूख बढ़ेगी और आंतें साफ होंगी।
  5. टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीएं। स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। टमाटर का सूप भी ले सकते हैं।
  6. चने की दाल को रात में पानी में भिगोकर रखें सुबह इसे पानी से निकालकर गुण के साथ खाएं, राहत मिलेगी।

ये आजमाकर देखें
खाने वाला बंगला पान (खाने में थोड़ा तीखा लगता है) लेकर इस पान में चूना और कत्था लगाइए। अब इस पान में आक (आँकौड़ा, अकौना, मदार जामुनी फूल वाला) के दूध की 3-4 बूंद मिलाकर सुबह खा लें।

Hepatitis B in Hindi - जाने क्या होता है हेपेटिटिस बी?

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Hepatitis B in Hindi - जाने क्या होता है हेपेटिटिस बी?

कई बिमारियां ऐसी होती हैं जो बदलते मौसम के साथ आती हैं। कई बार तो  बीमारियाँ आसानी से चली जाती हैं पर कई बार बात मरीज की जान पर बन आती है। अब जैसे बारिश के मौसम में ही गौर करें तो कई बीमारियां सिर उठाने लगती हैं और उन बिमारियों की तादाद में से एक बीमारी है हेपेटाइटिस बी। जो  की वायरस बी की वजह से होती है। 

लीवर में सूजन को ‘हेपेटाइटिस’ कहते हैं। लीवर में सूजन पैदा करने वाला खतरनाक वायरस है बी। इस वायरस के संक्रमण से होने वाले लीवर के रोग को हेपेटाइटिस बी के नाम से जाना जाता है। यह वायरस बी लीवर को बीमार बनाता है। शरीर में वायरस बी मौजूद है तो लीवर और उसके बीच लगातार जंग चलती रहती है। जरूरी नहीं की वायरस बी हमेशा खतरनाक ही साबित हो पर कभी कभी यह लिवर के लिए संकट का विषय बन जाता है।

टीका 
अगर आप इस वायरस की चपेट में नहीं आये हैं तो हमेशा इस बीमारी के प्रति निडर रहने के लिए आप  हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं। और यदि ग्रसित हैं तो फिर समझिए की लिवर पर संकट आ चूका है जिसके लिए टीका बेअसर है।

निष्क्रिय वायरस 
लीवर खून में बने जहरीले पदार्थ और शरीर से वायरस बी को भी निकाल बाहर करता है। और अगर ऐसा नहीं हो सका तो वायरस बी लीवर पर हमले के लिए तैयार रहता है है। इन्फेक्शन के बाद लीवर को वायरस बी से बचाव लीवर पर हमेशा निगरानी रखनी पड़ेगी। हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी दो स्थितियां बनती हैं। वायरस बी निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है। इस स्थिति में रहते हुए वायरस लीवर का कुछ नहीं बिगाड़ता। वह शरीर को छोड़ कर बाहर भी जा सकता है, लेकिन वह सक्रिय भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हेपेटाइटिस बी वायरस निष्क्रिय अवस्था में भी रहे तो हमें नियमित रूप से इसकी जांच कराते रहनी चाहिए।

एक्टिव वायरस 
दूसरी स्थिति है कि वायरस शरीर में सक्रिय स्थिति में हो तो यह खतरनाक है और दवा से इसका इलाज जरूरी है। सक्रिय हेपेटाइटिस वायरस का पुराना संक्रमण हो तो लीवर सिरसिस और कैंसर होने का खतरा मंडराता रहता है। शरीर में यह वायरस है तो साल भर में एक बार जांच करा लेने से यह पता चलता रहता है कि वायरस किस स्थिति में है।

आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन के हालिया आंकड़े के मुताबिक पूरी दुनिया में 2 अरब लोग इस वायरस से प्रभावित हैं। हर साल इसकी वजह से 6 लाख लोगों की मौत हो जाती है। भारत में अभी हेपेटाइटिस बी से पीड़ित लोगों की संख्या 4 करोड़ के आसपास है। हेपेटाइटिस बी एचआईवी की बीमारी 100 गुना से भी ज्यादा संक्रामक है।

वायरस बी संक्रमण के लक्षण
हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होने के तुरंत बाद आमतौर पर कोई लक्षण सामने नहीं आता। 
हेपेटाइटिस बी के शुरुआती लक्षण
•        भूख की कमी 
•        थकावट का एहसास होना,
•        हल्का बुखार आते रहना,
•        मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना, 
•        मितली और उल्टी,
•        त्वचा का पीला पड़ जाना 
•        पेशाब का रंग काला होने लगना 

अगर आपका शरीर इस संक्रमण से लड़ने में सफल हो जाता है तो ये लक्षण खत्म हो जाते हैं। जो लोग इस संक्रमण से मुक्त नहीं हो पाते, उनके संक्रमण को कहा जाता है क्रोनिक। ऐसे लोगों में लक्षण सामने नहीं भी आ सकते और संभव है कि वे इस बात से अनभिज्ञ रह जाएं कि उन्हें यह वायरस है। लंबे समय बाद उन्हें इस बात का पता तभी लगता है, जब उनका लीवर क्षतिग्रस्त होने लगता है और सिरसिस की स्थिति तक पहुंच जाता है।

संक्रमण के कारण 
हेपेटाइटिस बी के संक्रमण के कारण लगभग एचआईवी के जैसे ही हैं। 
•        खून के संपर्क में आने 
•        असुरक्षित यौन संबंध 
•        किसी बीमारी में खून का चढ़ाया जाना 
•        संक्रमित सूई, ड्रग्स लेने की आदत 
•        लंबे समय तक किडनी डायलिसिस होते रहना 
•        शरीर पर टैटू बनवाना या एक्यूपंक्चर की सुई 
•        मां का संक्रमित होना 

बचाव के उपाय 
संक्रमण से पूरी तरह बचाव के लिए पहले तो स्क्रीनिंग जरूरी है। एक साधारण खून की जांच से यह पता चल जाए कि आप इस संक्रमण से बचे हुए हैं तो कोई देरी किए बगैर टीका लगवाएं। ओने साथ ही  परिवार के हर सदस्य को टीका लगवा दें |

संक्रमण का क्या है इलाज
हेपेटाइटिस बी संक्रमण के पुराने मरीजों का इलाज वायरल रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं, जिससे लीवर सिरसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

1 person found this helpful

IuI treatment in hindi - IuI उपचार

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
IuI treatment in hindi - IuI  उपचार

लोगों में एक आम धारणा है कि गर्भधारण न हो पाने के लिए महिलाएं जिम्मेदार हैं या उनमें कुछ कमी है। जबकि  ये बात पूरी तरह सच नहीं है। इनफर्टलिटी के करीब 30 फीसदी मामलों में समस्या पुरुषों में होती है। वहीं 30 मामलों में महिला पुरुष दोनों जिम्मेदार होते हैं। अगर आपके जीवन में भी इस तरह की समस्या है तो डॉक्टर से मिलकर टेस्ट कराए जा सकते हैं। पुरुषों की समस्या की पहचान का बेसिक तरीका सीमेन की जांच है। महिलाओं में पीसीओडी (पॉलीसिस्टिस ओवेरियन डिसीज) बड़ी समस्या है वहीं पुरुषों में खराब स्पर्म काउंट की वजह से दिक्कत आती है।
पुरुषों में  स्पर्म काउंट कम होने की कई वजहें होती हैं, जिनमें बचपन में हुआ कोई इन्फेक्शन, हार्मोनल डिसॉर्डर, जेनेटिक कारण और शारीरिक अक्षमता आदि शामिल हैं। जो लोग नशा करते हैं और स्मोकिंग करते हैं उनका स्पर्म काउंट सामान्य पुरुषों के मुकाबले गिर जाता है। आजकल की लाइफ स्टाइल, हानिकारण किरणों का संपर्क और तनाव भी काफी हद तक इन समस्याओं को बढ़ा रहा है। 

पुरुषों में ये समस्याएं एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज) की वजह से भी हो सकती है। गोनोरिया और क्लेमेडिया ऐसी ही समस्याएं हैं जिनके चलते स्पर्म को बाहर पहुंचाने वाले ट्यूब बंद हो जाते हैं। बचपन में हुआ गलकंठ रोग भी कई बार टेस्टिकिबल को नुकसान पहुंचा देता है। वहीं स्पर्मबैंक के आस-पास की नसों में सूजन भी पुरुषों में बांझपन के लिकए जिम्मेदार हो सकती हैं।

जिन पुरुषों का स्पर्म काउंट कम है या स्पर्म की क्वालिटी खराब है, वे भी अब नई तकनीकि की मदद से पिता बन सकते हैं। अगर स्पर्म काउंट कम से कम 10 मिलियन है तो आईयूआई या इंट्रायूटेराइन इनसिमेनेशन तकनीकि मददगार साबित हो सकती है। 

क्या है ये तकनीकि
इस तकनीक में सीमेन को लैब में खास तरीके से साफ किया जाता है और ट्यूब के इस्तेमाल से, महिला की कोख में बेहद कम मात्रा में स्पर्म रखा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह बेहद सामान्य और कम खर्चीली प्रक्रिया है।
आईयूआई पद्धतिड से बेहतरीन परिणाम पाने कें महिलाओं को ओव्यूलेशन के लिुए डॉक्टरों की दी गई दवाओं का भी साथ में सेवन करना चाहिेए। ये पद्धति् आपके लिए लाभकारी है अगर...

  • आपको बांझपन की वजह पता नहीं है।
  • पतिो को एजेकुलेशन की समस्या है।
  • सर्वाइकल म्यूकस में कुछ गड़बड़ी है।
  • संबंध बनाते वक्त तेज दर्द होता है।
  • एसटीडी, एचआईवी या हेपेटाइटिस की समस्या है।

आईयूआई पद्धतिआ से इलाज की सफलता का प्रतिशत कई चीजें पर निर्भर करता है। सबसे बड़ा फैक्टर है महिला की उम्र। 

आईयूआई तकनीकि मे सफलता की दर

  • 30 से 34 साल के लिए 12 से 28 प्रतिश
  • 35 से 39 साल के लिएए सात से 18 प्रतिशत
  • 40 से 44 साल के लिए चार से नौ प्रतिशत
  • 44 से ऊपर की उम्र के लिए सफलता न के बराबर

अगर आपको हल्का एंडोमेट्रियोसिस है या फिर आपके पति के शुक्राणुओं की संख्या कम है, तो इस उपचार की करीब छह सिटिंग लेने पड़ सकती हैं। करीब छह चक्र तक करवाने की सलाह दी जाती है। अगर, आप छह बार तक इस उपचार को आजमाती हैं, तो आपके गर्भवती होने की संभावनाएं वास्तव में बढ़ जाती हैं।

इन बातों का भी दें ध्यान
इनसीमेनेशन या वीर्यरोपण की टाइमिंरग इस प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए आपके पतिी को क्लीनिक या अस्पताल की मांग पर हस्तमैथुन के जर‌िए शुक्राणु का नमूना देना होगा। वह इस प्रक्रिया में सक्षम होने चाहिए।
कैथेडर या नलिका अंदर डालने की प्रक्रिया में भी कभी-कभी मुश्किल आती है। आपको इसके लिए तैयार होना होगा।

4 people found this helpful

Test Tube Baby in Hindi - टेस्ट ट्यूब बेबी कैसे होता है

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Test Tube Baby in Hindi -  टेस्ट ट्यूब बेबी कैसे होता है

आज के दौर में टेक्नोलॉजी इस कदर बढ़ गई है कि इसकी मदद से हमनें लगभग हर नामुमकिन सवालो के जवाब ढूंढ लिए हैं| ये हमारी तकनिक का ही वरदान है की हम सूरज चाँद जैसे रहस्यमयी विषयों की वास्तविकता का पता लगा पाए है| हमने एटम बम बनाने से लेकर सौर मंडल तक का सफ़र तय कर लिया है| तकनीकिय स्तर पर हमारा इस कदर विकास हुआ है की कल तक जिसे केवल किस्मत का खेल और भगवान की मर्जी पर छोड़ दिया जाता था आज उन सभी इच्छाओं को या यूँ कहें जरूरतों को टेक्नोलॉजी के सहारे हासिल कर लिया है| आज से कुछ साल पहले पेरेंट्स बनना न बनना स्वास्थ्य पर निर्भर हुआ करता था पर आज के इस दौर में शरीर ना साथ दे या किसी भी वजह से माँ बाप बनने में परेशानी हो रही हो तो कोई बात नहीं टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से मशहूर तकनीक है हमारे पास जिसके माध्यम से बच्चा पैदा किया जाता है और इसे इन वरतो फर्टिलाइजेशन (IVF) या टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से जानते हैं|

जो कपल गर्भ नहीं धारण कर पाते उन्हें टेस्टट्यूब बेबी की इस तकनिकी के सहारे औलाद का सुख मिलता है| टेस्टट्यूब बेबी के बारे में जानने के पहले हम जानते हैं कंसीव न कर पाने के मुख्य कारण|

इनफर्टिलिटी
यह कमी पुरुषों में पाई जाती है, जिसका मतलब होता है कि पुरुष में पर्याप्त मात्र में स्पर्म्स नहीं हैं जिससे उनके लिए गर्भ धारण करना मुश्किल हो जाता है।

ओवुलेशन साईकल में अस्थिरता
इस गड़बड़ी के कारण महिला के भीतर आवश्यक अण्डों का निर्माण नहीं होता या फिर अण्डों के निर्माण प्रक्रिया में भी गड़बड़ी हो सकती है। वे महिलाएं जिन्हें थाईरॉइड की समस्या होती हैं| उनमे ओवुलेशन प्रक्रिया बाधित हो जाती है और उनका गर्भ धारण मुश्किल हो जाता है।

फलोपियन ट्यूब और ओवरी
गर्भधारण न कर पाने की समस्या, ओवरी और फैलोपियन ट्यूब से भी जुडी हो सकती है।

अधिक उम्र

  • महिला और पुरुष की उम्र भी गर्भ न धारण करने की बहुत बड़ी वजह बन सकती है।
  • अगर कोई दंपति जोड़ा गर्भ धारण नही कर पाते किसी भी वजह से तो उनके लिए मेडिकल साइंस में कुछ तरीके उपलब्ध हैं जिनमे से टेस्ट ट्यूब सबसे अहम है|

सामान्यतः एक नेचुरल गर्भ धारण प्रक्रिया में पुरुष का स्पर्म महिला के ओवरी में मौजूद अंडे के अंदर जाकर उसे फर्टिलाइज करता है| ओवुलेशन के बाद अंडा फर्टिलाइज होकर ओवरी से निकलकर महिला के यूटेरस में चला जाता है और वह धीरे धीरे इंसान का रूप लेता है। जो महिला नैचुरली कंसीव नही कर पाती है तो उनके लिए IVF की तकनिकी वरदान की तरह है|

  • I V F से गर्भ धारण करने की प्रक्रिया
  • पहला स्टेप – मासिक धर्म को को रोकना

कम से कम 2 हफ़्तों तक इंजेक्शन में दवाई दे कर महिलाओ का मासिक धर्म रोका जाता है क्योंकि मासिक धर्म चलते रहने पर गर्भ धारण नही किया जा सकता|

दूसरा स्टेप - सुपर ओवुलेशन
दूसरे चरण में ओवरी जहाँ अंडा बनाता है ओवुलेशन के दौरान उसे फर्टिलिटी ड्रग दिया जाता है| जिसमे फर्टिलिटी हॉर्मोन्स होते है जिससे ओवरी समान्य से अधिक अंडो की पैदावार करता है। 

तीसरा स्टेप - अंडे को  बाहर निकालना
फर्टिलिटी हॉर्मोन के वजह से ओवरी में बनाए जाने वाले अंडो को एक छोटी सी सर्जरी द्वारा बाहर निकाला जाता है। सर्जरी में एक पतली सी सुई महिला के वजाइना से होकर ओवरी तक ले जाई जाती है, जिसमे सुई के आगे लगे सक्शन पंप अंडे को खींच के बाहर निकालते हैं।

चौथा स्टेप - इनसेमिनेशन और फर्टिलाइजेशन
चौथे चरण में बाहर निकाले गए अंडो को पुरुष के स्पर्म के साथ रखा जाता है । कुछ समय बाद स्पर्म अंडे के अंदर जाना शुरू कर देते है। कई बार अंडो के अंदर स्पर्म्स को इंजेक्शन द्वारा डाला जाता है। इस प्रक्रिया को इनसेमिनेशन कहा जाता है। स्पर्म जब अंडे के अंदर चला जाता है तो उसे फर्टिलाइज करना शुरू कर देता है। अंडा जब पूरी तरह से फर्टिलाइज हो जाता है तो वह एम्ब्रायो का रूप ले लेता है। यह प्रक्रिया महिला के ओवरी से निकाले गए सभी अंडो के साथ होती है।

पांचवा स्टेप - एम्ब्रायो को अंदर डालना
पांचवे चरण में सभी एम्ब्रायो की जाँच की जाती है और उनमें से सबसे बेहतर एम्ब्रायो को चुना जाता है। डॉक्टर और दंपति आपस मे विचार विमर्श करके चयन करते है कि कौनसा एम्ब्रायो महिला के गर्भ में जाना चाहिए। अगर बने हुए सभी एम्ब्रायो मे से एक भी मजबूत नही हो तो महिला के गर्भ में एक से अधिक एम्ब्रायो डाले जाते है। एम्ब्रायो को एक पतले से ट्यूब द्वारा वजाइना से होते हुए महिला के यूटरस में डाल दिया जाता है और धीरे-धीरे बच्चे का आकार लेना शुरू कर देता है। 
इन सारे स्टेप्स के कुछ दिनों बाद एक टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म होता है। विश्व मे अब तक लगभग 50 लाख से ज्यादा टस्ट ट्यूब बेबी जन्म ले चुके हैं और लूसी ब्राउन नाम की बच्ची दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी बनी। 

इस प्रक्रिया से बच्चे को जन्म देना काफी महँगा भी होता है इसलिए सभी सस्ते प्रक्रियाओ के असफल होने के बाद ही इसका सहारा लें|

8 people found this helpful

Skin Allergy Treatment In Hindi

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Skin Allergy Treatment In Hindi

हमारी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है, लिहाजा खानपान, वातावरण, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स जैसे कई कारणों से एलर्जी हो सकती है। बरसात के मौसम में उमस व नमी की स्थितियां बनने से एलर्जी की संभावना बढ़ जाती है। जलन, खुजली, खाज, लाल-लाल चकत्ते, दाने, पित्त और फुंसियां इस मौसम में ज्यादातर देखने को मिलती है। कई बार रक्त की अशुद्धि से भी ये समस्या देखने को मिलती है। वैसे तो त्वचा की एलर्जी समय के साथ अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन कई इससे छुटकारा पाने के लिए उपाय करना पड़ता है। यहां हैं स्किन एलर्जी से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपचार।

  1. नारियल का तेल: नारियल के तेल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। ये त्वचा के लिंए बेहद फायदेमंद होता है। बिना किसी एलर्जी के भी रोजाना त्वचा पर नारियल तेल की मसाज की जा सकती है। एलर्जी होने पर इसे हल्का गर्म करके रात में सोने से पहले अपनी त्वचा पर लगाएं। इसे ऐसे ही लगाकर सो जाएं।
  2. ऑलिव ऑयल: अगर रैशेज हो गए हों तो ऑलिव ऑयल लगाने से आपको तुरंत आराम मिलेगा। खासतौर पर एलर्जी से होने वाली जलन और खुजली शांत करने में ऑलिव ऑयल कारगर है।
  3. ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं: पानी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। स्किन एलर्जी से बचने के लिए सबसे सस्ता उपाय है पानी। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर की गंदगी यूरिन के साथ बाहर निकल जाती है।
  4. सुबह की धूप लें: सुबह की धूप त्वचा के लिए कई मायनों फायदेमंद होती है। त्वचा में एलर्जी और फंगस जैसी समस्या सूर्य के प्रकाश से दूर होती हैं। सुबह 20 मिनट की धूप लेने की आदत बनाएं।
  5. कॉड लिवर ऑयल व विटामिन ई: विटामिन ई ऑयल में कॉड लिवर ऑयल मिलाकर एलर्जी वाली जगह पर लगाएं और रात भर छोड़ दें। सुबह तक रैशेज में आराम मिल जाएगा।
  6. नींबू का रस: नींबू में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट त्वचा की एलर्जी को दूर करने में फायदेमंद होता है। एलर्जी वाले स्थान पर रुई से नींबू का रस लगाएं। इसके अलावा नींबू के रस को आप नारियल तेल में मिला कर भी लगा सकती हैं।
  7. एलोवेरा: एलोवेरा प्रकृ तिा का वरदान है। इसमें विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। एलोविरा का पौधा घर पर हो तो इसका जेल निकालकर फ्रिज में रखें और त्वचा पर लगाएं। बाजार का एलोविरा जेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा एलोविरा जेल और इसका नेक्टर भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और बाहरी एलर्जी से लड़ता है। एलोवेरा जेल में गुलाबजल मिलाकर लगाने से एलर्जी जल्द ही दूर जाती है।
  8. तुलसी पत्ते का पैक: तुलसी पत्ते को पीस लें। इसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल, लहसुन की दो कलियां, एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। इसे एलर्जी वाली जगह पर लगाएं और थोड़ी देर बाद साफ कर लें।
  9. सेब का सिरका और शहद: एक चम्मच एप्पल सिडार वेनेगर और इतनी ही मात्रा में शहद लें और इसे एक ग्लास पानी में मिलाएं। इसे दिन में तीन बार रैशेज पर लगाएं, आराम मिलेगा।
  10. नीम: एंटी बैक्टीरियल गुण का कारण स्किन की हर तरह की समस्या के निदान में नीम बहुत फायदेमंद है। एलर्जी को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगो कर पीस लें। इसको त्वचा पर लगा कर 30 मिनट तक लगाने के बाद धो लें। इसके अलावा नीम की पत्ती को पानी में उबालकर नहाने से भी फायदा मिलता है।
  11. पपीता: पपीते में मौजूद एन्जाइम स्किन एलर्जी को दूर करने में भी मददगार होता है। एलर्जी होने पर पपीते के गूदे को मसलकर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट लगा रहने के बाद धो दें।

ऐसे करें बचाव

  1. घर से निकलने से पहले त्वचा को अच्छी तरह ढंक लें। धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन जरूर लगाएं।
  2. बाहर से आकर चेहरे को पानी से जरूर धोएं। फेसवॉश का ज्यादा इस्तेमाल न करें इससे त्वचा शुष्क होती है।
  3. जिन चीजों से एलर्जी हो उन्हें खाने से बचें। कुछ खाद्य पदार्थ एक साथ खाने से भी एलर्जी हो जाती है।
  4. फिल्टर्ड पानी का ही प्रयोग करें।

ये उपाय भी अपनाएं

  1. एलर्जी से प्रभावित त्वचा को फिटकरी के पानी से धोकर साफ करें।
  2. एलर्जी पर कपूर और सरसों का तेल लगाती रहें।
  3. नीबू प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, रोजाना नीबू पानी पिएं।
  4. आंवले की गुठली जलाकर राख कर लें। उसमें एक चुटकी फिटकरी और
  5. खट्टी चीजों, मिर्च-मसालों से परहेज करें। नारियल का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे लगाती रहें।
5 people found this helpful

Breast Growth Tips By Doctors in Hindi

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Breast Growth Tips By Doctors in Hindi

किसी भी महिला के शरीर में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र होता है उसका स्तन। अगर वो ही बेडौल और ढीला हो जाये तो? भले ही कितनी ही खूबसूरती हों, गोरी हों पर लगता है कि कुछ कमी है।

हर महिला अपने हिसाब से एक परफेक्ट ब्रैस्ट की इच्छा रखती है। लेकिन ये सबके लिए सम्भव हो नहीं पाता है। अंततः बिगड़े स्वरूप के स्तन में कसावट लाने उन्हें खूबसूरत बनाने के लिए बाज़ार में मिलने वाले कृत्रिम यंत्र, क्रीम या जेल का उपयोग करना शुरू कर देती हैं। पर इस तरह के अपनाए गए उपाय भविष्य में हानिकारक साबित होते हैं।

काफी महिलाएं अपने स्तनों की उचित देखभाल नहीं करती हैं। उनकी कई आदतें उनके स्तनों को खराब कर देती हैं जिसकी उन्हें खबर भी नहीं होती। दरसल स्तन का ढीला होना एक नेचुरल प्रोसेस है जो उम्र या मेडिकल कंडीशन्स के कारण होता है जिससे स्तन की स्थिरता और दृढ़ता खत्म हो जाती है। ज्यादातर 40 साल के उम्र के बाद ही स्तनों का ढीला होना शुरू होता है, लेकिन ये पहले भी हो सकता है। पर कई बार कुछ स्थितियों और आदतों के कारण भी जल्दी ढीला हो जाता है।

ये जानने से पहले की स्तनों को कैसे सुडौल बनाया जाए हम ये जान लेते हैं कि स्तन बेडौल क्यों और किन वजहों से होते हैं।

  1. ख़राब फिटिंग वाली ब्रा: सही सपोर्ट वाली ब्रा पहनना बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि ये आपके स्तन को बना और बिगाड़ दोनों ही सकती है।
  2. प्रेगनेंसी: स्त्री जब प्रेग्नेंट होती है तोह उसके स्तन में दूध बनना शुरू होता है जो स्तन के ढीले होने का एक अहम कारण है।
  3. स्तनपान: माँ बनने के बाद शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं जिनमे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला हिस्सा ब्रेस्ट और पेट। माँ जब अपने बच्चे को दूध पिलाती है तब बच्चे की सेहत अच्छी होती है मगर उस स्त्री का स्तन ढीला होने लगता है।
  4. मेनोपॉज़: एक साल तक माहवारी के न होने को रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज़ कहा जाता है। मेनोपॉज़ किसी भी स्त्री के जीवन का वह समय है जब उसके अंडकोष की गतिविधियां समाप्त हो जाती हैं। इसके होने से भी स्तन ढीला होने लगता है।
  5. कसरत: वैसे तो कसरत शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है पर जरूरत से ज्यादा कसरत करना ब्रैस्ट की कसावट को कम करने के लिए जिम्मेदार हो सकता है
  6. वजन: जब आपका वजन कम या ज़्यादा होता है तो उसका सीधा असर आपके स्तन पर दिखता है।
  7. पोषक तत्वों की कमी: कई महिलाओं में पाया गया है कि उनके शरीर मे पोषक तत्वों की कमी से उनके स्तन को सही मात्रा में पोषण नई मिल पाता जिससे स्तन बेडौल होने लगते है।
  8. ज्यादा धूम्रपान, शराब या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसी चीजों का सेवन करने से स्तन में सही पोषक तत्व नही पहुँच पाते जिसके कारण वो बेडौल होने लगते है।
  9. ब्रैस्ट कैंसर या ट्यूबरक्लोसिस जैसी बीमारियों की वजह से स्तन ढीला और बेडौल हो जाता है।

इनमे से कोई भी कारण अगर आप अपने आप में देखते है तो घबराने की जरूरत नही है बस अपनी बिगड़ी आदतों को सुधारने के साथ ही बताए जा रहे उपाय अपनाएं जिससे आसानी से स्तन के टिससु दुबारा बनें और

स्तन में कसावट लाने के साथ ही इन्हें सुन्दर सुडौल बनाएं

  1. पौस्टिक भोजन: स्तन को स्वस्थ सुंदर हेल्थी और सुडौल रखने के लिए अपनी डाइट को हमेशा बेहतर रखें। अपने भोजन में जैतून का तेल, पनीर, दही, कद्दू, लहसुन, लाल राजमा, दूध, अंडे, मूंगफली का मक्खन, मछली, चिकन, चेरी, सेब, सलाद और सोया प्रोडक्ट्स को नियमित रूप से शामिल करें।
  2. स्तन मसाज: जैसे कि शरीर के अन्य भागों में मसाज कर उस हिस्से के मसल्स को स्ट्रांग बनाया जाता है उसी तरह स्तन को भी मसाज कर सुडौल बनाया जा सकता है। रोजाना नहाने के बाद पर्याप्त रूप से स्तन का मसाज करें।
  3. नग्न होना: हाल ही में कई विदेशी शोध से यह बात निकल कर सामने आई है कि अगर महिलाएं योग और कसरत नग्न अवस्था में करती है तो सेक्सुअल पार्ट्स पर इसका लाभ जल्द और बेहतर होता है। ब्रैस्ट को कसावट भरा और हेल्दी बनाने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट नग्न अवस्था में योग व कसरत जरुर करें।
  4. गरम ठंडे पानी से नहाना: गरम ठंडे पानी से नहाना स्तन को सुडौल बनाने के लिए काफी असरदार उपाय है। इस तरीके का लाभ लेने के लिए सबसे पहले स्तन पर गर्म पानी से 30 सेकंड तक शावर लें। उसके बाद 10 सेकंड तक ठंडे पानी से शावर लें। इस ट्रिक को प्रयोग में लाते समय इस बात का ध्यान रखें हॉट और कोल्ड वाटर शावर के बीच कम से कम 3 सेकंड का अंतर हो और समाप्ती हमेशा ठंडे पानी से ही करें। यह तरीका स्तन में रक्त संचार ठीक करके उसे टाइट कर पहले से अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने का काम करता है।
  5. सूर्योदय से बनाएं स्तन को सुडौल: हाल ही में हुए कई शोधों से यह बात भी साबित हो चुकी है कि विटामिन डी जो सूरज से मिलती है उससे स्तन का आकार तो बड़ा होता ही है साथ में ब्रैस्ट की स्कीन में चमक भी पैदा होती है। यदि सुबह सुबह सूरज की किरणें नग्न स्तनों पर पड़ने दें तो कुछ ही दिनों आपको फर्क महसूस होने लगेगा।
  6. सही ब्रा का करें चुनाव: ढीले और बेडौल स्तन को टाइट दिखाने के लिए अकसर महिलाएं साइज से छोटी ब्रा पहनती है जो हेल्दी स्तन के लिए बेहद खतरनाक होता है। हमेशा सही साइज की ब्रा ही चुने जो आखिरी हुक तक फिट हो। इसके आलावा एक ही ब्रा अधिक समय तक ना पहनें। कपड़ों की तरह ही ब्रा की भी कम से कम 5 से 6 सेट आपके पास होने चाहिए। सूती ब्रा का प्रयोग नायलोन और फोम ब्रा के बजाय ज्यादा करना चाहिए और रात को बिना ब्रा के सोना सबसे बेहतर है।

उपर दिए गये सभी उपायों के अतिरिक्त प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन और ओरल सेक्स भी सुंदर स्वस्थ स्तन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। पानी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने का काम करता है तो ओरल सेक्स सच्ची ख़ुशी के साथ-साथ ब्रेस्ट साइज बढाने, स्तन कैंसर और मीनोपॉज के प्रभाव को कम क

7 people found this helpful

Rice Bran Oil Benefits And Side Effects In Hindi - चावल की भूसी के तेल के फायदे और नुकसान

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Rice Bran Oil Benefits And Side Effects In Hindi - चावल की भूसी के तेल के फायदे और नुकसान

हमारी रसोई में अनाज के अलावा कई ऐसी चीजों का समावेश होता है जिनके बगैर हमारा भोजन स्वादहीन कहलाएगा। और इस बात से हम इंकार नहीं कर सकते कि दुनिया स्वाद के पीछे भागती है। तमाम मसालों सब्जियों के गुणों को निखार कर हमारे भोजन को लज़ीज़ बनाता है तेल। जी हां हमारे भोजन में तेल का विशेष महत्त्व होता है, तेल का इस्तेमाल खाने को और टेस्टी बनाने के लिए किया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते है की हमारे स्वास्थ्य का सीधा कनेक्शन हमारे डाइट से होता है। हम जैसा खाना खायेंगे वैसा हमारा शरीर परफॉर्म करेगा, हम अगर मिलावटी खाना खाएं तो हमारा शरीर कमजोर होता है और उम्र कम होती है। और जब बात हो तेल की तो हर बात पर इस्तेमाल किए जाने वाले इस पदार्थ की गुणवत्ता ऊँची होनी जरूरी हो जाती है। बाजार में कई प्रकार के तेल उपलब्ध हैं, जिनमें से आज हम आपको उस तेल के बारे में बताएंगे जिसे पसंद करने वालों की तादाद काफी है। जी बिलकुल हम बात करेंगे गुणों की खान माने जाने वाले राइस ब्रैन ऑइल यानि की चावल के छिलकों (भूसी) से निकाले गए तेल की।

जैसा कि हम जानते है कि राइस ब्रैन तेल को चावल की भूसी से तैयार किया जाता हैं। चावल के छिलकों से निकाला गया होने के कारण इस तेल में फैट बिलकुल भी नहीं होता है। और इसमें पाया जाने वाला ओरिज़ॉनल एक बेहद लाभदयाक तत्व होता है। जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में हमारी मदद करता है, उच्च रक्तचाप को कम करने में कारगर है और हाइपर थाइरोइड के रोगियों के लिए काफी फायदे मंद साबित हुआ है इतना ही नहीं यह नाड़ी तंत्र की रक्षा करने में भी कामयाब साबित हुआ है।
सही तेल को अपने आहार के लिए चुनना आपके हेल्दी लाइफ के लिए बेहद जरूरी होता है। पिछले कुछ सालों में लोगो ने रिफाइंड ऑइल को खाना कम किया है क्योंकि अनियमति दिनचर्या और तरह-तरह के तेल के सेवन से लोगो मे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगी और दिल की बीमारी जैसी शिकायत देखने को मिली इसलिए लोगो ने अपनी सेहत का ख़्याल रखने के लिए अन्य तेल की तुलना में राइस ब्रैन ऑइल का इस्तेमाल करना शुरू किया।

तो अब जरूरी है कि हमें मालूम हो चावल के छिलकों से निकाले गये इस तेल का हमारी सेहत पर किस तरह और कैसा प्रभाव पड़ता है।

1. कैंसर होने से रोके
राइस ब्रैन ऑयल में टोकोफेरोल्स एंड टॉकटरिनोल्स नामक पदार्थ हेाते हैं,जो फ्री रैडिकल्स से होने वाले कैंसर को रोकते है। इसलिए कैंसर की संभावना नजर आये तो यह तेल जरूर अपनाएं।
2. वजन कम 
राइस ब्रैन ऑयल में ट्रांस फैटी एसिड और कोलेस्ट्रॉल बिलकुल भी नहीं होता, जो मोटापा बढ़ने का सबसे अहम कारण होता है। यह तेल के इस्तेमाल से आप बेहिचक अपना मन पसंद खाना खा सकते है।
3. बढ़ाए चेहरे की रंगत 
क्या ये बेहद खुशी की बात नही होगी कि जो खाना आपकी सेहत बनाता है उसी खाने से आप सुंदर भी बन सकते है। यह तेल सेहत के साथ रूप-रंग भी निखरता है। झुर्रियां कम करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है जिससे आप अपने उम्र से अधिक जवां दिखते हैं। 
4. बालों का झड़ना करे कम
राइस ब्रैन ऑइल का बना हुआ खाना खाने से न ही आपके बालों का गिरना रोकता है बल्कि आपके बालों के ग्रोथ को भी बढाता है। इस तेल में फेरुलिक एसिड और ईस्टर्स होते हैं जो कि बालों की ग्रोथ के लिये जरूरी होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन ई, ओमेगा 3 और ओमेगा 6 पाए जाते हैं, जो कि बालों को सफेद होने से बचाते हैं और उन्हें स्वस्थ बनाए रखते हैं।
4. लिवर के लिये फायदेमंद
राइस ब्रैन ऑयल में लीवर को मजबूत करने वाले विटामिन और प्रोटीन का समावेश होता है, जिससे लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ने में मदद मिलती है। यह एग्जिमा रोग को भी ठीक करने में सहायक है। इसी के साथ यह अन्य बीमारियों से भी शरीर को बचाए रखता है।
5. इम्युन सिस्टम बढाए
राइस ब्रैन ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की इम्युन सिस्टम को मजबूत बनाता है। इस तेल से बना हुआ खाना खाने से शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को बेहद लाभ पहुचता है। कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद करता है क्योंकि इस तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर में उपस्थित फ्री रेडीकल्स से लड़ता है और शरीर में कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।

जैसे की हर पदार्थ के कुछ नुकसान और कुछ फायदे होते हैं उसी तरह राइस ब्रैन ऑयल के भी तमाम फायदों के साथ कुछ कंडीशन्स में नुकसान भी हैं। 

1. अत्यधिक न करे इस्तेमाल 
राइस ब्रैन ऑयल लगभग हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना हो सकता है आपके शरीर के लिए नुकसानदेय। 
2. सीधा न करें सेवन
इस तेल का इस्तेमाल केवल खाना बनाने में ही करें, सीधा इसका सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। 
3. पेट की बीमारी 
राइस ब्रैन ऑयल को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से गैस तथा अन्य पेट से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

7 people found this helpful

Pet Ka Motaapa Kam Karane Ke Upaay - पेट का मोटापा कम करने के उपाय

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Pet Ka Motaapa Kam Karane Ke Upaay - पेट का मोटापा कम करने के उपाय

ज्यादा समय तक एक ही जगह बैठे रहने, अनियमित दिनचर्या का हमारी हेल्थ पर काफी बुरा असर पड़ता है। पर ऐसी गलत रूटीन का सबसे पहले और सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है हमारे पेट पर। शुरुआती समय में तो हम आलस की चपेट में आते हैं। और हमें ये आदतें बहुत भाती हैं, पर धीरे-धीरे इन आदतों का असर हमारे शरीर और उसपर भी सबसे पहले पेट पर नजर आने लगता है, पूरी शरीर भारी लगने लगती है। कुछ समय बाद काम करना तो दूर उठना-बैठना मुहाल हो जाता है। और अंत में ऐसी स्थिति होती है कि हम चाहें भी खुद के मोटापे पर काबू पाने की तो भी हमारा शरीर जबाब दे जाता है। और हाँ मोटापा सिर्फ दिखने में ही भद्दा नही लगता बल्कि यह अपने साथ तरह-तरह की बीमारियां भी लाता है।
भारत में मोटे लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। आज करीब 4 करोड़ 10 लाख ऐसे लोग भारत में मौजूद हैं, जिनका वजन सामान्य से कहीं ज्यादा है। अधिकांश लोग शुरुआत में मोटापा बढ़ने पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन जब मोटापा बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे घटाने के लिए घंटों पसीना बहाते रहते हैं। और शरीर के बाकी हिस्सों की चर्बी कम हो भी जाती है पर पेट की चर्बी पर काबू पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

पेट बढ़ने की वजह 
मेटाबॉलिज्म के स्लो डाउन होने की सबसे बड़ी वजह होती है आप खाना तो पूरा खा रहे हैं, लेकिन वर्कआउट नहीं कर रहे हैं, इसके अलावा हमारी 8 घंटे नींद का पूरा ना होना भी पेट का फैट बढ़ाता है। रात की नींद अगर पूरी नहीं होगी तो आपका खाना डाइजेस्ट नहीं होगा तो आप का मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे स्लो होता जाएगा।

मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें और कुछ आदतें ऐसी हैं, जिन्हें अपनाने से बेडौल पेट को सुडौल बनाया जा सकता है और जो अभी फिट हैं वे इन नुस्खों की मदद से अपनी मेंटेनेंस को बरकरार रख सकते हैं।

1. खाने के तुरंत बाद पानी नहीं 
सबसे पहले तो ध्यान रखने वाली बात यह है कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पीयें, बल्कि खाने के एक से डेढ़ घंटे के अंतराल पर पानी पीयें।
2. कार्बोहाइड्रेट से बचें
ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
3. मिश्रित आटा
केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
4. पत्ता गोभी
रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
5. पपीता 
पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।
6. दही 
दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
7. मिर्च
मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
8. अजवाइन
अपनी डाइट में अजवाइन की पत्तियों को शामिल कर लीजिए। अजवाइन की पत्ती के सेवन से पेट की चर्बी कम होती है। बेहद कम कैलोरी, फाइबर युक्त, कैल्शियम और विटामिन सी का प्रमुख माध्यम होने की वजह से ये बेली फैट कम करने में एक असरकारक चीज है। खाने के पहले अजवाइन का पानी पीने से पाचन तंत्र सही रहता है
9. पुदीना
एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
10. सब्जी और फल 
सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।
11. सलाद 
खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
12. अनानास
अनानास में ब्रोमीलेन नामक एंजाइम पाया जाता है। ये तत्व पेट को फ्लैट करने में मददगार
13. साइक्लिंग
पेट की चर्बी कम करने के लिए साइक्लिंग करना फायदेमंद है।  टहलना सेहत के लिए फायदेमंद है। 
14. सीढ़ी
लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करें।

51 people found this helpful

Angioplasty in Hindi - एंजियोप्लास्टी

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Angioplasty in Hindi - एंजियोप्लास्टी

आजकल की तेज रफ्तार जीवनशैली के चलते दिल से जुड़ी बीमारियां भी तेज रफ्तार से बढ़ती जा रही है। बुजुर्ग ही नहीं कम उम्र के लोग भी इसकी जद में आ रहे हैं। लिहाजा दिल से जुड़ी परेशानी के लिए की जाने वाली तरह-तरह की सर्जरी भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसी ही सर्जरी है एंजियोप्लास्टी। भले ही यह सर्जरी आम हो गई हो लेकिन इससे जुड़ी सावधानी और खतरे के बारे में जानना बेहद जरूरी। हृदय रोगों और हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह हृदय की धमनियों और शिराओं में कोलेस्ट्रॉल का जमा होना है। कोलेस्ट्रॉल जमा होने से नलियां अंदर से संकरी हो जाती हैं जिससे हार्ट तक पर्याप्त बहाव के साथ खून नहीं पहुंच पाता। धीरे-धीरे ये नलियां बंद होने लगती हैं और हार्ट अटैक तक की नौबत आ जाती है। यदि आपके भी हृदय की रक्त धमनियां संकरी हैं तो हार्ट एंजियोप्लास्टी की जा सकती है। इस प्रक्रिया में रक्त प्रवाह बेहतर बनाने के लिए कैथेटर के आखिर में लगे बैलून का उपयोग रक्त धमनी खोलने के लिए किया जाता है। रक्त धमनी को खुला रखने के लिए एक स्टेंट लगाया जा सकता है। स्टेंट तार की नली जैसा छोटा उपकारण होता है। एंजियोप्लास्टी सर्जरी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि ब्लॉकेज कौन सी आर्टरी में हुई है। पैरीफेरल आर्टरी में एंजियोप्लास्टी सर्जरी लगभग 98 फीसदी तक सफल रहती है। एंजियोप्लास्टी कराने वाले महज 10 प्रतिशत रोगियों के फिर से ब्लॉकेज होने की आशंका रहती है। ब्लॉकेज का जल्द पता चल जाता है तो इसके सफल होने की गारंटी और बढ़ जाती है। अब शरीर की सभी आर्टरीज की एंजियोप्लॉस्टी की जा सकती है।

अगर आपने एंजियोप्लास्टी करवाई है तो ध्यान दें

  • दवाएं बराबर लें। अपनी सभी दवाएं, आपके ह्रदय विशेषज्ञ द्वारा बताएं अनुसार नियमित रूप से ले, भले ही आपको कोई शिकायत न हो। अपने ह्रदय विशेषज्ञ से पूछे बिना कोई भी दवा बंद ना करें।
  • भारी और थकाने वाले कार्यों से बचें। शुरू में आपको लगभग एक सप्ताह के लिए भारी गतिविधियों से बचने की जरूरत है। फिर धीरे धीरे अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी क्षमता बढ़ाएं। 
  • कोलेस्ट्रॉल लेवल पर नजर रखें।
  • नियमित रूप से चेक-अप कराते रहें।
  • तनाव न लें, चिंता न करें और गुस्स को काबू में रखें।
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें।
  • डायबिटीज को नियंत्रण में रखें।
  • वजन को संतुलित रखें।
  • दिल के लिए फायदेमंद चीजें खाएं।
  • डॉक्टर ने जो परहेज और व्यायाम बताए हैं उनका भी ध्यान रखें।
  • इन चीजों से बचें-
  • स्मोकिंग न करें।
  • दौड़-भाग न करें।
  • वजन न उठाएं। 
  • ज्यादा वसा वाले खाने से परहेज करें।

एंजियोप्लास्टी के खतरे
एंजियोप्लास्टी के लिए हमेशा अनुभवी सर्जन के पास जाएं। एंजियोप्लास्टी के दौरान एक्स-रे डाई से कई बार एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। इसके साथ ही हार्ट का वॉल्व या ब्लड वैसेल के क्षतिग्रस्त होने का भी डर रहता है।
यदि अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से ऑपरेशन कराया जाए तो वह सुरक्षित होता है लेकिन जिन्हें इनका ज्यादा अनुभव नहीं तो कुछ खतरे हो सकते हैं। वहीं जिस हिस्से में नलिका या कैथिटर लगाया गया है, उसमें ब्लीडिंग या क्लॉटिंग हो सकती है

एंजियोप्लास्टी से बचने के लिए ले ये घरेलू दवा
एक कप नींबू का रस, एक कप अदरक का रस, एक कप प्याज का रस और एक कप शहद लें और सेब का सिरका लें। इन चारों रसों को मिला लें और एक बरतन में लेकर धीमी आंच पर रख दें। लगभग आधा से 1 घंटे तक पकाने के बाद जब यह मिश्रण 3 कप रह जाए, तब इसे आंच से उतार लें और ठंडा होने के लिए रख दें। तब इसमें 3 कप शहद अच्छी तरह से मिलाएं। इस मिश्रण को रोजाना खाली पेट दवा के रूप में लें। ये आपके हार्ट के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।  

क्या खाएं
हार्ट पेशेंट को हमेशा यह उलझन रहती कि वे अपने भोजन में क्या शामिल करें। ऐसी स्थिति में वसा युक्त पदार्थ यानी घी, तेल से सबसे पहले परहेज किया जाता है। क्योंकि शरीर को वसा की हमेशा जरूरत रहती है, इसलिए इसे पूरी तरह भोजन से हटाया नहीं जा सकता लेकिन इसकी मात्रा नियंत्रित रखें साथ ही जीवन शैली पर भी ध्यान दें।
खाने-पीने से ही कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। कैलोरी, वसा, कोलेस्ट्रॉल, सोडियम लेने की मात्रा को ध्यान में रखकर दिल की हिफाजत की जा सकती है। दिल के मरीज डॉक्टर की सलाह लेकर अपना डाइट चार्ट बना सकते हैं।

 

4 people found this helpful
View All Feed

Near By Clinics

Kiran Heart Centre

Karol Bagh, Delhi, New Delhi
View Clinic
  4.5  (21 ratings)

Intermed

Patel Nagar, Delhi, Delhi
View Clinic