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Ashtvinayak Hospital

Ayurveda Clinic

Opposite Maratha Hospital, Talegaon Dhamdhre, Shikrapur Pune
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Ashtvinayak Hospital Ayurveda Clinic Opposite Maratha Hospital, Talegaon Dhamdhre, Shikrapur Pune
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We like to think that we are an extraordinary practice that is all about you - your potential, your comfort, your health, and your individuality. You are important to us and we strive to ......more
We like to think that we are an extraordinary practice that is all about you - your potential, your comfort, your health, and your individuality. You are important to us and we strive to help you in every and any way that we can.
More about Ashtvinayak Hospital
Ashtvinayak Hospital is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Sharad Atamaram Landge, a well-reputed Ayurveda, practices in Pune. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 80 patients.

Timings

MON-SUN
10:00 AM - 02:00 PM 05:00 PM - 08:00 PM

Location

Opposite Maratha Hospital, Talegaon Dhamdhre, Shikrapur
Talegaon Pune, Maharashtra - 412208
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Doctor in Ashtvinayak Hospital

Dr. Sharad Atamaram Landge

MS - Obstetrics and Gynaecology
Ayurveda
6 Years experience
100 at clinic
Available today
10:00 AM - 02:00 PM
05:00 PM - 08:00 PM
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गैस से होने वाले रोग - Gas-borne Diseases!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गैस से होने वाले रोग - Gas-borne Diseases!

गैस से होने वाले रोगों से परेशान लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. कई बार तो पेट के गैस से लोग बेचैन तक हो जाते हैं. इसलिए ये आवश्यक है कि इस समस्या को दूर करने के उपायों पर चर्चा की जाए. पेट के गैस की समस्या से पीड़ित व्यक्ति के पेट में जलन की शिकायत होती है. कुछ लोगों के गले तक में जलन या सरदर्द की परेशानी भी नजर आती है. इसलिए इस दौरान खाने पीने का मन भी नहीं करता है जिससे परेशानी और बढ़ सकती है. कई कारणों से पेट में गैस बनती है. इसके कुछ प्रमुख कारण हैं सही समय पर खाना न खाना, संतुलित आहार न लेना और एक्सरसाइज न करना. गलत समय पर सोने या जागने की वजह से भी कई बार पेट में गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है. पेट में गैस होने की वजह कब्ज भी हो सकती है कई लोगो को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है.कब्ज की वजह से दिनभर थकान ,सर में भारीपन और पेट फूलने जैसी समस्या रहती है. जिसकी वजह से आपका पूरा ध्यान पेट की तरफ ही लगा रहता है और आपका पूरा दिन ख़राब हो जाता है. इसलिए आइए गैस से होने वाले रोगों और इसे दूर करने के उपायों को इस लेख के माध्यम से जानें.

लौंग और शहद

पेट में होने वाली गैस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ दो लौंग काफी है. ये बहुत ही आसान उपाय है और आपको कहीं जाने की जरुरत नहीं है. आयुर्वेद में तो पेट में होने वाली गैस को दूर करने में लौंग को रामबाण माना जाता है. लौंग को चूसने मात्र से ही आपकी गैस गायब हो जाएगी और इससे हमारा पेट भी ठीक रहता है. अगर आप लौंग को शहद के साथ लेंगे तो आपकी कब्ज भी दूर हो जाएगी अगर कब्ज नहीं होगी तो फिर आपको गैस की समस्या भी नहीं रहेगी.

नींबू पानी
 

यदि आप नियमित रूप से प्रत्येक सुबह खली पेट गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलकर पियेँ तो इससे भी हमारा पेट सही रहता है और पाचन तंत्र भी ठीक ढंग से काम करता है. इसका फायदा ये होता है कि इससे हमारे पेट की गैस भी दूर हो जाती है.

मेथी का काढ़ा

मेथी से बना काढ़ा गैस से होने वाले रोगों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप मेथी को पानी में भिगो दें और फिर इसे पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें और इसे पियें तब भी आपको बहुत ही जल्दी पेट में होने वाली गैस की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा.

हल्दी का सेवन

हल्दी भी हमें गैस से होने वाले रोगों से बचाने में मददगार है. हल्दी पेट में गैस की समस्या को दूर करती है और ये भोजन को पचाने में भी मदद करता है. इसलिए हम रोज थोड़ी सी हल्दी का सेवन करना चाहिए. हल्दी के सेवन से आप कई अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे.

जीरा पाउडर

पेट में होने वाली गैस व जलन को दूर करने में जीरा बहुत ही रामबाण दवा का काम करता है जिसको भोजन सही ढंग से पच न रहा हो उसे हर रोज एक गिलास पानी में जीरा पाउडर मिलकर पीना चाहिए इससे पेट की इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.

पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन

गैस से होने वाले ज़्यादातर रोगों के पीछे मुख्य कारण होता है पानी की कमी. पानी आसानी से उपलब्ध है इसलिए हमें दिन में एक निश्चित अंतराल पर आवश्यकतानुसार पानी का सेवन करते रहना चाहिए. हर रोज एक दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए. जिसकी वजह से हम पेट की समस्या से छुटकारा पा लेंगे.

यूरिक एसिड में परहेज - Uric Acid Me Parhez!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
यूरिक एसिड में परहेज - Uric Acid Me Parhez!

यूरिक एसिड की बीमारी से ग्रस्त मरीजों के शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं जैसे पैरों के अंगूठे, टखने. घुटने, जोड़ों और एड़ी आदि भी. आपको बता दें कि रक्त में यूरिक एसिड नामक रसायन की मात्रा असंतुलित होने के कारण ये बीमारी उत्पन्न होती है. इसके गुणों के आधार पर इसे अर्थराइटिस का ही एक रूप माना जाता है. क्योंकि इसमें भी जोड़ों और अन्य स्थानों पर सूजन होती है. जैसे कि अर्थराइटिस में दिखाई पड़ती है. यह बीमारी आमतौर पर लंबे समय तक भोजन ना करने डीहाइड्रेशन तनाव कसरत ना करना शराब का सेवन बहुत ज्यादा करना आदि से हो सकती है. इसके साथ ही जंक फूड और जीवन शैली में बदलाव भी इसके कारण हो सकते हैं. किसी भी बिमारी के दौरान कुछ सामान्य परहेज करके उसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. कई बार तो हम परहेज करके बिमारी को भी ख़त्म करने में सफलता प्राप्त कर लेते हैं. इसलिए आइए यूरिक एसिड से पीड़ित मरीजों के लिए परहेज किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जानें.

1. सरसों के तेल का इस्तेमाल करें कम

खाना पकाने के लिए हम आम तौर पर सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं लेकिन यदि आपको यूरिक एसिड की समस्या है तो आप कोल्ड प्रेस जैतून के तेल का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए करें. इससे आपकी परेशानी कम होगी.

2. बेकरी के उत्पाद से बचें

जो व्यक्ति यूरिक एसिड से ग्रसित हैं उन लोगों को बेकरी उत्पादों से बचना चाहिए. क्योंकि बेकरी के उत्पाद जैसे की एक पेस्ट्री में अनसैचुरेटेड फैट की अधिकता होती है. इन के सेवन से यूरिक एसिड के स्तर में और वृद्धि होने का खतरा रहता है. इसलिए इसके सेवन से बचना चाहिए.

3. एल्‍कोहल से दूर रहें

शराब पीना भी यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए काफी जोखिम भरा फैसला हो सकता है. क्योंकि यदि आप अल्कोहल का सेवन करेंगे तो इससे आपके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है. जिससे अटैक भी आ सकता है. इसलिए अल्कोहल से दूरी बनाकर रखने में ही समझदारी होगी.

4. डिब्‍बा बंद भोजन से बनाएं दुरी

यूरिक एसिड के स्तर में वृद्धि होने की शिकायत होने पर आपको डिब्बा बंद भोजन से बिल्कुल किनारा कर लेना चाहिए. क्योंकि डिब्बा बंद भोजन में आपको यूरिक एसिड को बूस्ट अप करने वाले तत्व मिलते हैं और यदि आप इनका सेवन करें इससे यूरिक एसिड एसिड के स्तर में वृद्धि हो जाएगी.

5. मछली और मीट से भी परहेज

मछली और मीट का सेवन भी यूरिक एसिड की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए खतरनाक है. कुछ विशेष प्रकार की मछलियां तो बिल्कुल ही नहीं खाना चाहिए क्योंकि इन सब खाद्य पदार्थों के सेवन से आपकी यूरिक एसिड के स्तर में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है.

6. एंटीआक्सीडेंट युक्त भोजन

एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन करना भी कुछ यूरिक एसिड से पीड़ित लोगों की काफी मदद करता है. इसके लिए आप टमाटर, अंगूर, ब्लूबेरी, लाल शिमला मिर्च आदि का सेवन कर सकते हैं क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी की भरपूर मात्रा मौजूद रहती है. एंटीऑक्सीडेंट्स मुक्त अणुओं को शरीर से बाहर निकालने में मददगार होते हैं. इसके अलावा इससे यूरिक एसिड के स्तर में भी कमी होती है.

7. सेब का सिरका
 

सेब के सिरके की सहायता से भी यूरिक एसिड की समस्या से निजात पाई जा सकती है. क्योंकि सेब का सिरका हमारे शरीर में रक्त का PH मान को बढ़ाकर यूरिक एसिड के स्तर को कम करता है. यह ध्यान रहे कि सिरका बनाते समय सेब कच्चा बिना पाश्चुरीकृत और बिना पानी मिला हुआ होना चाहिए

8. अजवाइन के बीज का अर्क

यदि आप यूरिक एसिड की समस्या से ग्रसित हैं तो आपको अपना दर्द कम करने के लिए अजवाइन के बीज के अर्क का सेवन करना चाहिए. क्योंकि अजवाइन में दर्द को कम करने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स में डाइयुरेटिक्स का गुण पाया जाता है. इसके अलावा यह एंटीसेप्टिक भी होता है. कई बार तो इसका इस्तेमाल नींद ना आने, नर्वस ब्रेकडाउन या व्यग्रता जैसी समस्याओं के उपचार में भी किया जाता है.
 

Dry Skin Care!

Ayurveda, Mumbai
Dry Skin Care!

Reasons for dry skin
 

Unhealthy lifestyles, exposures to extreme wealth conditions, bathing for long time in hot water, using harsh soaps, harsh cosmetics, can cause drying of skin. 

Ayurveda's point of view about dry skin

According to texts of ayurveda, dry skin is caused by increased vat dosh in the body. When vaat dosha increases in the body, it reduces kaha dosha and makes skin dry and wrinkled. 

The causes which increases vaat dosha in the body

1) exposure to cold and dry climate
2) controlling natural urges like urination, defecation, hunger, thirst etc
3) keeping awake till night 
4) irregular food habits
5) consumption of spicy, dry and bitter food
 

Hot And Cold Food!

M.Sc. in Dietetics and Food Service Management , Post Graduate Diploma In Computer Application, P.G.Diploma in Clinical Nutrition & Dietetics , B.Sc.Clinical Nutrition & Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Mumbai
Hot And Cold Food!

Hot And Cold Food!

Know The Type Of Sexual Problem You Are Suffering With!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), B.Sc
Ayurveda, Amritsar
Know The Type Of Sexual Problem You Are Suffering With!

A physical problem related to intimacy is something that keeps the patient from having a satisfactory intimate experience. Many women encounter many kinds of problems at various stages of their lives.

In this article, we have listed the seven most common sex problems that women experience. Take a look to know more!

Lack of sexual desire: a total lack of, or inhibited sexual desire is a problem that may be caused due to factors like age, menopause, stress, hormonal changes, pregnancy and child birth, depression, and even fatigue. Also, a work heavy lifestyle as well as too much focus on areas like children can lead to a situation where sex takes a backseat and after a while, lack of desire sets in.

Anorgasmia: not being able to orgasm during intercourse despite plenty of stimulations is a problem that some women face. This condition can be of various types including primary, secondary and others, to depict a range of orgasm related issues where a proper sexual release does not occur. This can happen due to causes like infections, past sex related trauma, pain during intercourse and other issues including anxiety and depression.

Painful intercourse: this condition can also be called vaginismus. A number of causes can trigger pain that women feel in the vaginal area during intercourse, which can lead to vaginal contractions or an involuntary spasm. The causes include endometriosis, stds or sexually transmitted diseases, ovarian cysts, vaginititis, lack of proper lubrication during sex, and stress.

Arousal problems: lack of sexual arousal is another problem that can happen due to lack of sufficient stimulation and lubrication which affects the blood flow to the vagina, thus preventing an erection of the clitoris. This condition may also be caused due to stress and relationship problems.

Related ailments: the presence of a chronic ailment can also lead to sexual problems for a member of either sex. When a woman is suffering from diabetes, cardiovascular diseases, drug abuse and other such ailments, then sex related activities tend to take a back seat and are often also hindered due to the symptoms of some of these conditions.

Side effects: taking medication that has to do with depression or menopause can also have a bearing on the kind of sex life that a woman enjoys as these medicines often create hormonal imbalances and numb certain neurotransmitters with the suppressants that they contain. Psychological factors: it has been proven medically that stress, anxiety, depression, trauma and other such factors play up on the sex life of a patient in a serious manner. Using frequent practice with proper lubrication and counselling as well, one can overcome such problems.

Dr, I get sounds in my stomach, pain near the Abdomen. And I am not feel well with this problem. When I went to the Dr. He told me its bowel problem, after few days I started getting loose stools again, like burning sensation up side of chest sometimes I do not understand what it is about!

BHMS, OCRT KOLKATA
Homeopath, Asansol
Dr,
I get sounds in my stomach, pain near the Abdomen. And I am not feel well with this problem.
When I went to the D...
You need completed course of treatment to clears this IBS. For time being POLO PHYLUM 200 THRICE DAILY 15 DROP WITH WATER.
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I’m 17. I’ve been experiencing light pink vaginal discharge with a strong odor. Two weeks ago, the discharge was white and chunky like cottage cheese. What is it and what treatment should I take for it?

BHMS
Homeopath, Noida
Never heard of pink leucorrhoea. May be your periods just got over. U need to tell details about your case, then only its possible to help u. In the meanwhile I will suggest, you maintain high grade of personal hygiene. Do change your underclothes at least 2 times a day Wear cotton panties Stay hydrated Keep the area dry.
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Hii I am irritated from my black face except my face whole body is fair even in childhood it was fare suggest me any ingredients which will help me to make my face fare again I was using panderm+ for fairness but when i came to know the truth of that cream I suddenly stopped using that cream bt because of not using my face becomes dark nd after applying aloe vera it is normal but not fair like my childhood plzz suggest any ingredients.

BHMS
Homeopath, Noida
Hii I am irritated from my black face except my face whole body is fair even in childhood it was fare suggest me any ...
You can use aloe vera juice/gel from its leaf (fresh), not from ready made gels available in market. Apply it every day. For this homeopathic treatment is very effective. Use some sunblock with SPF (at least 50) every time you go out in sun. U need proper constitutional med to get permanent relief. Ask for consultation with pics of affected area so that I can help you better.
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Rheumatoid Arthritis - What Is It And How Can It Be Treated With Homeopathy?

BHMS
Homeopath, Ahmedabad
Rheumatoid Arthritis - What Is It And How Can It Be Treated With Homeopathy?

Rheumatoid arthritis is a chronic inflammatory disorder that can affect more than just your joints. In some people, the condition also can damage a wide variety of body systems, including the skin, eyes, lungs, heart and blood vessels.

Rheumatoid arthritis is is not the same as osteoarthritis. This is an autoimmune disease characterized by the body’s attacks on the lining of its own joints. Rheumatoid arthritis is a very painful condition and can affect children as well as adults.

Symptoms:

Common symptoms of this condition include

  1. swelling
  2. pain
  3. reduction in the range of motion/functionality
  4. stiffness in joints 

These symptoms can vary from being mild to very severe. They may also come and go. Allopathic treatment can help control and manage the symptoms associated with this condition but cannot cure it completely. Thus many people suffering from this condition experience flare-ups throughout their life.

How Homeopathy Can Help?

Homeopathy has proven to be quite effective in treating and curing Rheumatoid arthritis. It aims at treating this condition not only by merely reducing the symptoms but by addressing the root cause of this disease. Homeopathy is an alternative form of medication that treats the symptoms being presented as well as the patient’s overall physical, mental, and emotional health. For this reason, two patients with the same symptoms may not always be treated with the same homeopathic remedy. This also makes it important to consult a doctor for homeopathic remedies and avoid self-medicating. That said, it is important to note that homeopathy has negligible side effects. When being treated with homeopathy, patience is essential as it can take a while for the body’s immune system to work properly and stop attacking itself.

Homeopathic remedies can work in many ways to treat Rheumatoid arthritis. Some medications are best suited to arthritic symptoms seen in small joints while others are effective against arthritic symptoms noticed in deformed joints. The joints affected by this disease also influence the remedy. It eases the pain associated with this condition and simultaneously keeps it from progressing by altering the immune system’s behavior. It also strengthens the immune system so that the patient is less susceptible to other conditions such as the flu that can aggravate Rheumatoid arthritis symptoms.

In addition to medication, lifestyle changes can also help a Rheumatoid arthritis patient live more comfortably. Exercise in moderation can help improve joint flexibility and reduce stiffness. Omega 3 fatty acids found in fish and nuts; and antioxidants found in tea, fruits, and vegetables can help control inflammation. At the same time, foods that can aggravate inflammation such as fatty foods, red meat, and food with a high carbohydrate value should be avoided.

Rotating The Fetus- What Are The Indications And Contradictions?

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology
Gynaecologist, Lucknow
Rotating The Fetus- What Are The Indications And Contradictions?

In a normal pregnancy, the baby develops with its head pointed down, and the head is usually the part which comes out first during normal delivery. However, in many cases, the baby could have its legs, feet, or buttocks pointing to the cervix. In a majority of cases, the baby may have this position, but rotates to have its head pointing down before the third trimester. However, this may not happen, and this is referred to as breech.

In a lot of cases, the doctor would try to move the baby’s head downwards usually around the 37th week, and this is referred to as external cephalic version (ECV) or even as version. The process is done externally by manipulation and hence the name external. It is done before labor and may allow for a vaginal birth. In very rare cases, it may be done during labor, but before the amniotic sac has ruptured. As a backup, there should be a provision for the patient to undergo C-section, if ECV is not successful.

Indications:

  1. Single pregnancy, into 36 weeks of pregnancy, with no complications, and preferably not the first pregnancy
  2. No engagement of the fetus (any part) in the uterus
  3. Adequate amniotic fluid, which will provide a good environment to move the baby with minimal injury

Contraindications:

  1. Suspected/known birth defects
  2. Multiple pregnancies (twins/triplets)
  3. Ruptured amniotic sac
  4. Fetus with a hyperextended neck
  5. Mother’s health is not optimal and is on cardiac medications
  6. Condition that mandates a cesarean section (placental separation from the uterus, placenta covering the cervix, etc.)

Procedure

The fetal position is first estimated using an ultrasound. The position of the placenta and the amount of amniotic fluid are also closely monitored. Under constant monitoring, the uterus is relaxed through medications. With one hand on the fetal head and another on the buttocks, the doctor tries to rotate the fetus. Depending on how much pressure the mother is able to tolerate and how flexible the uterus is, version may be successful (success rate is about 60%).

A second attempt under epidural anesthesia may be done, if the first one did not succeed. However, the chances of success with subsequent attempts is very doubtful. The fetus is constantly monitored through ultrasound and fetal heart rate monitoring. A fetus is considered healthy if the heart rate moves up during this procedure. However, if the heart rate seems abnormally high, the procedure would be abandoned.

After the procedure, the mother and the fetus would be monitored for a while before being sent home. As the fetus is constantly monitored throughout pregnancy, the doctor would be able to tell if this procedure is required.

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