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Dipakshi Nursing and Maternity Home Private Limited

Multi-speciality Hospital (Physiotherapist, Gynaecologist & more)

Udhayan Marg, NTPC Township, Sector 33, Noida, Uttar Pradesh 201307 Landmark : near NTPC building Noida
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Dipakshi Nursing and Maternity Home Private Limited Multi-speciality Hospital (Physiotherapist, Gynaecologist & more) Udhayan Marg, NTPC Township, Sector 33, Noida, Uttar Pradesh 201307 Landmark : near NTPC building Noida
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Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care....more
Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care.
More about Dipakshi Nursing and Maternity Home Private Limited
Dipakshi Nursing and Maternity Home Private Limited is known for housing experienced Physiotherapists. Dr. Amit Aggarwal, a well-reputed Physiotherapist, practices in Noida. Visit this medical health centre for Physiotherapists recommended by 94 patients.

Timings

MON-SUN
09:00 AM - 09:00 PM

Location

Udhayan Marg, NTPC Township, Sector 33, Noida, Uttar Pradesh 201307 Landmark : near NTPC building
Sector-3 Noida, Uttar Pradesh - 201301
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Doctors in Dipakshi Nursing and Maternity Home Private Limited

Dr. Amit Aggarwal

BPTh/BPT
Physiotherapist
11 Years experience
300 at clinic
Unavailable today

Dr. Keshav Anand

MBBS, MD
General Physician
44 Years experience
Unavailable today

Dr. Kshitij Anand

MBBS
General Physician
11 Years experience
400 at clinic
Available today
07:00 PM - 09:00 PM

Dr. Kalpana Singh

MBBS, DGO
Gynaecologist
28 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Vaishali K Anand

MBBS, DOMS
Ophthalmologist
10 Years experience
400 at clinic
Unavailable today
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गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

गुड़हल के फूल का वैज्ञानिक नाम रोजा साइनेसिस है. गुड़हल के फूल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे कि फाइबर वसा कैल्शियम विटामिन सी आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए गुड़हल का फूल हमें कई बीमारियों से निजात दिलाता है. गुड़हल का फूल हमारे यहां धार्मिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है. कई तरह के पूजा-पाठ और देवी देवताओं को चढ़ाने के लिए गुड़हल के फूल का इस्तेमाल हम करते रहते हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे इससे होने वाले फायदे अन्य फायदों की. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम गुड़हल के फूल के फायदे को जानें.

1. वजन कम करने में

गुड़हल के फूल को वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं. गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय पीने से आपके शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए हमें काफी देर तक भूख नहीं लगती है. इसके अलावा गुड़हल के फूल का सेवन भी भूख लगने से रोकता है. यही नहीं इसे खाने से हमारी पाचन क्रिया भी समृद्ध होती है. इससे शरीर में अनावश्यक चर्बी नहीं जमा हो पाती है, और वजन कम होता है.

2. सर्दी जुकाम में
सर्दी-जुकाम की समस्या को दूर करने के लिए भी गुड़हल के फूल का प्रयोग किया जाता है. इसकी पत्तियां जिसमें विटामिन सी की प्रचुरता होती है, को यदि हम रोजाना खाएं तो इससे सर्दी जुकाम में काफी राहत मिलती है. आप चाहें तो इसका चाय भी बना कर पी सकते हैं.

3. जवान बने रहने के लिए
गुड़हल की पत्तियों से होने वाले कई लाभों में से एक यह भी है कि ये एंटी-एजिंग है. यानी कि आपकी बढ़ती उम्र के असर को काफी हद तक कम करता है. दरअसल गुड़हल की पत्तियों में शरीर के फ्री रेडिकल्स को हटाने की क्षमता होती है. इस वजह से ही हमारी त्वचा की बढ़ती उम्र के लक्षणों से लड़ पाता है.

4. बालों के लिए
गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल की पत्तियों को जैतून के पत्तों के साथ मिलाकर बने पेस्ट को 10 से 15 मिनट के लिए सिर पर लगाकर रखें इसके बाद इसे गुगुने पानी से धो लें. इससे आपके बाल घने दिखाई देने लगेंगे. इसके अलावा गुड़हल की पत्तियों को पीसकर इसमें नारियल तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें. अब इस तेल को अपने सिर पर मालिश करने के लिए प्रयोग करें. इससे आपके बालों में चमक और मजबूती आती है. बालों लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल के पत्तों और फूलों से बना पेस्ट प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है.

5. कोलेस्ट्राल कम करने के लिए
कोलेस्ट्राल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी गुड़हल का प्रयोग किया जाता है. ये धमनी में पट्टिका को जमने से रोकती है. इसतरह ये कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने में मददगार साबित होती है.

6. गुर्दे की पथरी के लिए
गुर्दे की पथरी से परेशां व्यक्ति गुड़हल के फायदे का इस्तेमाल कर सकता है. इसका कारण ये है कि इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसके लिए आपको बस गुड़हल की चाय पीनी होती है.

7. पीरियड्स के दौरान
पीरियड्स को नियमित करने में गुड़हल काफी महत्वपूर्ण साबित होता है. पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में ऐस्ट्रोजेन की कमी होने से हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है. गुड़हल इसे नियमित करता है.

8. उच्च रक्तचाप के लिए
गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय के तमाम फ़ायदों में से एक ये भी है कि ये उच्च रक्तचाप में भी लाभदायक साबित होता है. इससे हृदय की गति भी सामान्य होती है.

9. खून की कमी में
खून की कमी यानि एनिमिया की समस्या में भी गुड़हल लाभदायक होती है. इसके लिए लगभग 40 से 50 गुड़हल के फूल की कलियों को अच्छे से पीसकर उसके रस को एक टाइट डिब्बे में बंद कर लें. सुबह-शाम इसके सेवन से आपकी एनीमिया में राहत मिलती है.

10. त्वचा के लिए
गुड़हल की पत्तियों मेन ऐन्टी-ऑक्सीडेंट, आयरन और विटामिन सी की मौजूदगी इसे त्वचा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है. इससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहांसे और झुर्रियां आदि जैसी कई समस्याएँ खत्म होती हैं. इसके लिए गुड़हल की पत्तियों को पानी मेन उबालकर इसे अच्छी तरह पीस लें और इसमें शहद मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएँ.
 

गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है या गले में कुछ जमा हुआ अनुभव होता है तो यह गले में कफ जमा होने का है। गले में जमा हुए कफ को बलगम के नाम से भी जानते है. गले में कफ जमा होने के प्रमुख लक्षणों में नाक बहना और बुखार भी शामिल है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन यदि यह समस्या लम्बे समय तक बना रहता है तो फिर इससे सांस से जुडी कई समस्याएं हो सकती है. जब आपके नाक या गले के पिछले हिस्से में कफ जमना शुरू हो जाता है तो यह आपको म्यूकस मेम्ब्रेन श्वसन प्रणाली की रक्षा करने और उसको सहारा देने के लिए कफ बनाती है. ये मेंब्रेन नाक, गला, मुंह, फेफड़े, साइनस और नाक की ग्रंथि में होता है. जो एक दिन में कम से कम 1 से 2 लीटर बलगम का उत्पादन करती हैं. बलगम या कफ की अत्याधिक मात्रा होना, परेशान करने वाली समस्या हो सकती है. इसके कारण घंटो बैचेनी रहना, बार-बार गला साफ करते रहना और खांसी जैसी समस्या हो सकती है. ज्यादातर लोगों में यह एक अस्थायी समस्या होती है. हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह एक स्थिर समस्या बन जाती है. जिसके बेहतर उपचार पर थोड़े समय के लिए राहत मिल पाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम गले में कफ के जमने के बारे में जानें.

गले में कफ के जमने का क्या लक्षण है?
बलगम या कफ से भी सांसो में दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि कफ में मौजूद प्रोटीन के कारण बैक्टीरिया पैदा होती है. जब शरीर जरूरत से ज्यादा कफ उत्पादन करती है, तब अत्याधिक कफ आपके नाक के वायुमार्गों में अवरोध पैदा करता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगती है. कफ बनने के कारण नाक रूकने की समस्या काफी असहज और यहां तक कि दर्दनाक स्थिति पैदा कर सकती है. अत्याधिक कफ आपके गले व फेफड़ों में जमा हो सकता है. सामान्य कफ साफ या सफेद रंग का होता है और कम गाढ़ा होता है. जो कफ हल्के पीले या हरे रंग का दिखाई पड़ता है या जो कफ असाधारण रूप से अधिक गाढ़ा होता है, वह बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत देता है.

गले में कफ जमने के कारण-
जब कोई सर्दी-जुखाम या फ्लू, वायरल इंफेक्शन, साइनस जैसी बिमारियों से ग्रसित होता है तो व्यक्ति का बलगम कोल्ड या इंफेक्शन से बीमार होता है, तो उस व्यक्ति का कफ गाढ़ा हो जाता है और उसके बलगम के रंग में भी परिवर्तन आता है. बलगम के चिपचिपा होने के कारण वायरस, धूल या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ बलगम से चिपक जाते है. बलगम का गाढ़ापन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. जब व्यक्ति बीमार पड़ता है तो आपका शरीर कई सारे कणों के संपर्क में आता है जो कफ के साथ चिपकता है और कफ गाढ़ा हो जाता है. वैसे तो कफ आपकी श्वसन प्रणाली का एक स्वस्थ हिस्सा होता है, लेकिन अगर यह आपको परेशान कर रहा है, तो आप इसको पतला करने के या इसे निकालने के लिए कुछ तरीकों को अपना सकते हैं.

खाद्य पदार्थ: – कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते है जो गले में कफ उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता हैं. गले में कफ जमने के लिए मुख्य रूप से डायरी पदार्थ को जिम्मेदार माना जाता हैं. इन खाद्य पदार्थों में कैसिइन नाम के प्रोटीन अणु होते हैं, जो बलगम का स्त्राव बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं. दूध उत्पादों के साथ-साथ कैफीन, चीनी, नमक, काली चाय आदि ये सभी पदार्थ भी अतिरिक्त बलगम बनाते हैं. इसके साथ ही साथ जो लोग डेयरी उत्पादों को छोड़, सोया उत्पादों को अपना लेते हैं, इस स्थिति में उनके शरीर में अस्वस्थ बलगम बनने के जोखिम बढ़ जाते हैं.

गर्भावस्था: – यह देखा गया है की कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान छींकना, नाक रूकना और खांसी आदि लक्षण अनुभव होते हैं. वैसे तो प्रेगनेंसी में इस तरह के लक्षणों को सामान्य माना गया है. बलगम उत्पादन और गाढ़ापन के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन को भी एक कारण माना जाता है.

पोस्ट नेजल ड्रिप: – जब गले और नाक में अधिक कफ जमा हो जाता है तो यह खांसी पैदा करता है. रात के दौरान गले में कफ का उत्पादन होता है और सुबह तक यह गले में जम जाता है.

मौसमी एलर्जी: – मौसमी एलर्जी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं. मौसमी एलर्जी के लक्षण गले में बलगम जमना, छींकना और खांसना आदि समस्या शामिल हैं. ऐसे कई एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ हैं, जो ये लक्षण पैदा करते हैं, इसमें सर्दियों के अंत से गर्मियों तक की अवधि शामिल होती है. पेड़ और फूलों की पराग मौसमी एलर्जी के प्रमुख कारकों में से एक होते हैं और इसके लक्षण तब तक रहते हैं जब तक एलर्जी करने वाले पदार्थ नष्ट नहीं हो जाते.

अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

गर्मी के मौसम में सामान्य पसीना आना तो ठीक है, लेकिन अक्सर लोग जब एक्सरसाइज करने या धूप में जाते हैं तो उन्हें बहुत पसीना आता हैं लेकिन कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा पसीना निकलता है तो ऐसे में शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती है. अधिक पसीना आना और सर्दी में भी पसीना आना एक समस्या हो सकती है. यह समस्या कई बार आपको दुरुगंध का शिकार बना कर आपको असहज कर सकती है. इस लक्षण को हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. लोग इसे बड़ी आम बात समझ कर ध्यान नहीं देते लेकिन आगे जाकर यह किसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है. ज्यादा पसीना आने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इस समस्या को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से बहुत अधिक पसीना आने के विभिन्न पहलुओं को जानें ताकि इस विषय में जानकारी बढ़ाई जा सके.

क्यों आता है बहुत ज्यादा पसीना?
जब अपके शरीर में अत्याधिक पसीना आता है तो आप शारीरिक और मानसिक रुप से असहज महसूस करते है. जब आपके हाथ, पैर और बगलें पसीना से तर-बतर हो जाते हैं तो इस परिस्थिति को प्राइमरी या फोकल हाइपरहाइड्रोसिस के नाम से जानते है. प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस से केवल 2-3 प्रतिशत आबादी प्रभावित है, लेकिन इससे पीड़ित 40 प्रतिशत से भी कम व्यक्ति ही डॉक्टरी सलाह लेते हैं. आमतौर पर इसके कारण का पता नहीं लगता है. यह एक अनुवाशिंक समस्या भी हो सकती है जो परिवार में पहले से चली आ रही हो. यदि अत्यधिक पसीने की शिकायत किसी डॉक्टरी स्थिति के कारण होती है तो इसे सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. पसीना पूरे शरीर से भी निकल सकता है या फिर यह किसी खास स्थान से भी आ सकता है. दरअसल, हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों को मौसम ठंडा रहने या उनके आराम करने के दौरान भी पसीना आ सकता है.

बचने के उपाय-
पसीने से प्रभावित व्यक्ति को बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए का बगल में इस्तेमाल कर सकते हैं. यह व्यक्ति को अत्यधिक पसीने से निजात दिलाएगा। यह अतिसक्रिय पसीना ग्रंथि की तंत्रिकाओं को शांत करता है, जिससे पसीने में कमी आती है.

बोटॉक्स भी हो सकता है इलाज-
प्राइमरी एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस के इलाज के लिए बोटॉक्स भी के विकल्प के रूप में आया है. बोटुलिनम टॉक्सिन का इंजेक्शन बाजुओं में लगाने से पसीने के लिए जिम्मेदार तंत्रिकाएं अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाती हैं. एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, जिससे चार-महीने तक राहत मिल जाती है और शरीर की दुरुगंध से भी निजात मिल जाती है. ललाट या चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने जैसी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति में मेसो बोटॉक्स सबसे अच्छा उपाय है. इसमें पसीने की रफ्तार कम करने के लिए त्वचा के संवेदनशील टिश्यू (डर्मिज) में बोटॉक्स के पतले घोल का इंजेक्शन लगाया जाता है.

इसके अलावा भी हैं उपाय-
एंटीपर्सपिरेंट: जब पसीना ज्यादा निकलता है तो पसीने को कंट्रोल करने के लिए तेज एंटी-पर्सपिरेंट को आजमाया जा सकता है, जो पसीने की नलिकाओं को ब्लॉक कर देते हैं. बाजुओं और बगलों में पसीने के शुरुआती इलाज के लिए 10 से 20 प्रतिशत अल्युमीनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट की मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ मरीजों को अल्युमीनियम क्लोराइड की अत्यधिक मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी जा सकती है. ये उत्पाद प्रभावित हिस्सों में रात के वक्त इस्तेमाल किए जा सकते हैं. एंटीपर्सपिरेंट से त्वचा में खुजलाहट हो सकती है. इसकी अधिकता कपड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. याद रखें: डियोडरेंट से पसीना रुकता नहीं है, बल्कि शरीर की दुरुगंध कम होती है.

दवाओं का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
रोबिनुल, रोबिनुल-फोर्ट जैसी एंटीकोलिनर्जिक दवाएं पसीने की सक्रिय ग्रंथियों को निष्क्रिय करती हैं. हालांकि, कुछ लोगों पर प्रभावी होने के बावजूद इन दवाओं के प्रभाव का स्टडी नहीं किया गया है. इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी सकते है जिसमें शुष्क मुंह, चक्कर तथा पेशाब संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
ईटीएस (एंडोस्कोपिक थोरेसिस सिंपैथेक्टोमी): जब स्थिति गंभीर हो जाती है तो सिंपैथेक्टोमी नामक मामूली सर्जरी प्रक्रिया की सलाह दी जाती है, जब अन्य उपाय असफल हो जाते हैं. यह उपाय उन मरीजों पर आजमाया जाता है, जिनकी हथेलियों पर सामान्य से ज्यादा पसीना आता है. इसका इस्तेमाल चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में भी किया जा सकता है.

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Nutrition & Healthy Lifestyle

MBA-HR, MBA-Finance, Diploma in Dietetics, Health and Nutrition (DDHN), Diploma in Nutrition and Health Education (DNHE))
Dietitian/Nutritionist, Delhi
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A healthy diet is one which will improve not just your physical health, but your mental health as well. It is essentially concerned with healthy nutrients and essential amino acids, fatty acids, vitamins and minerals. A healthy diet can be obtained by consuming the correct proportion of vegetarian and non-vegetarian foods.

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Breathlessness

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Chest & TB
Pulmonologist, Faridabad
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When you experience shortness of breath for no reason, you might wonder if there is something to worry. Breathing difficulty (dyspnea) affects around 1 in every 10 adults. The causes are varied, and just like other health problems like dizziness, fatigue, and abdominal pain, shortness of breath too has several causes.

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Knee Arthritis

DNB, Diploma In Orthopaedics (D. Ortho), MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, Feloship In Joint Replacement
Orthopedist, Mumbai
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The knee acts as hinge joint and allows flexion (bending) and extension (straightening). The knee is formed by the tibiofemoral joints, where the end of the femur (thigh bone) glides over the top of the tibia (shin bone) and the patellofemoral joint where the kneecap glides over the end part of the femur.

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Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to get pregnancy.

BHMS
Homeopath, Noida
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1. Don't Overeat 2. Don't take tea empty stomach. Eat something like a banana (if you are not diabetic) or any seasonal fruit or soaked almonds and a glass of water first thing in the morning (within 10 mins of waking up). No only biscuits or rusk will not do. 3. Take your breakfast every day. Don't skip it. 4. Have light meals every 2 hours (in addition to your breakfast, lunch n dinner) e.g. Nariyal paani, chaach, a handful of dry fruits, a handful of peanuts, any fresh n seasonal fruit, a cup of curd/milk etc 5. Finish your dinner at least 2 hours before going to sleep. 6. Maintain active life style. This is most important n non negotiable part 7. Avoid fast foods, spicy n fried foods, Carbonated beverages 8. Take a lot of green vegetables n fruit. 9. Drink lot of water. 10. Curd is good for u. 11. Everyday preferably sleep on same time For more details you can consult me.

I am suffering from excessive gas for past few months. Please suggest me a remedy.

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General Physician, Mumbai
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Dear lybrate-user, - Follow some dietary precautions for your problem: - avoid fried spicy processed and junk foods, also restrict tea, coffee intake to 1-2 cups per day, avoid gas forming foods like milk & milk products, beans, lentils, pulses, citrus fruits, mint, chocolates, aerated drinks - chew your food well, do not skip meals, have meals on time, take a walk for 5-10 min after meals for proper digestion - take tablet Pan 40, 1 tablet daily half an hour before breakfast - have plenty of oral fluids including 7-8 glasses of water for proper digestion.

Sir I am suffering from sexual problem my penis is very little only 4 inch I want increase it my sex timing is very short time please tell me something idea how to increase my penis please plz sir.

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Place a heating pad or hot water bottle on your lower back or abdomen. Rest when needed. Give yourself a little massage where it hurts. Exercise-- Get Moving to Relieve Symptoms. Walking, running, Yoga etc. Avoid foods that contain caffeine. Avoid smoking and drinking alcohol For better results consult with details.
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