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Matrix Hospital-kamothe

Multi-speciality Hospital (Ophthalmologist, Orthopedist & more)

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By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have place......more
By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have placed in us.
More about Matrix Hospital-kamothe
Matrix Hospital-kamothe is known for housing experienced Psychiatrists. Dr. Sandeep, a well-reputed Psychiatrist, practices in Navi Mumbai. Visit this medical health centre for Psychiatrists recommended by 106 patients.

Timings

MON-SUN
12:00 AM - 11:55 PM

Location

Plot no. 2A, Kamothe,Landmark: Near kamothe police station.
Kamothe Navi Mumbai, Maharashtra - 410206
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Doctors in Matrix Hospital-kamothe

Dr. Sandeep

MBBS
Psychiatrist
Unavailable today
200 at clinic
Unavailable today

Dr. Sylendra

MBBS
Ophthalmologist
250 at clinic
Available today
09:00 PM - 11:00 PM

Dr. Abdul Patil

MBBS
Orthopedist
200 at clinic
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Hemanth Rao

MBBS
Orthopedist
350 at clinic
Available today
12:00 AM - 11:55 PM
200 at clinic
Available today
06:00 PM - 08:00 PM

Dr. Pankaj Patil

MBBS
Gynaecologist
200 at clinic
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Parag Sharma

MBBS, MD - Dermatology , Venereology & Leprosy
Dermatologist
26 Years experience
Available today
07:00 PM - 08:30 PM

Dr. Aparna Pandit

MBBS
Gynaecologist
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बालों के लिए गुड़हल के फायदे - Baalon Ke Liye Gudhul Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
बालों के लिए गुड़हल के फायदे - Baalon Ke Liye Gudhul Ke Fayde!

गुड़हल के फूल का वैज्ञानिक नाम रोजा साइनेसिस है. गुड़हल के फूल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे कि फाइबर वसा कैल्शियम विटामिन सी आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए गुड़हल का फूल हमें कई बीमारियों से निजात दिलाता है. गुड़हल का फूल हमारे यहां धार्मिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है. हिन्दू परम्पराओं में विभिन्न प्रकार के पूजा अनुष्ठानों में उड़हुल का फूल का इस्तेमाल किया जाता है.लेकिन आज हम इस लेख में उड़हुल के लाभ के बारे में जानेंगे. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम गुड़हल के फूल के फायदे को जानें.

बालों के लिए गुड़हल के फूल के फायदे-
यदि आप अपने बालों को सुंदर और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो गुड़हल का फूल एक बेहतर विकल्प हो सकता है. उड़हुल के ताजे फूलों को पीसकर बालों पर लगया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप चेहरे पर हुए मुंहासे से परेशान हैं तो इसके लिए लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें। अब इस पेस्ट में शहद को मिला कर त्वचा पर लगाएं. यह आपको मुहांसे से राहत प्रदान करता है. गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल की पत्तियों को जैतून के पत्तों के साथ मिलाकर बने पेस्ट को 10 से 15 मिनट के लिए सिर पर लगाकर रखें इसके बाद इसे गुगुने पानी से धो लें. इससे आपके बाल घने दिखाई देने लगेंगे. इसके अलावा गुड़हल की पत्तियों को पीसकर इसमें नारियल तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें. अब इस तेल को अपने सिर पर मालिश करने के लिए प्रयोग करें. इससे आपके बालों में चमक और मजबूती आती है. बालों लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल के पत्तों और फूलों से बना पेस्ट प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है.

गुड़हल के फूल के अन्य फायदे भी हैं-
गुड़हल के फूल की कुछ प्रजातियों बहुत सुंदर और आकर्षक होते है. इसलिए कुछ प्रजातियों को उड़हुल के सुंदरता और आकर्षक होने के कारण लगाया जाता है. आपको जानकार हैरानी होगी कि नींबू, पुदीना आदि की तरह के औषधीय गुण गुड़हल में भी मौजूद होते हैं। इसलिए इसकी चाय भी हमारे सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. गुड़हल के कई प्रजातियों में से एक प्रजाति ‘कनाफ’ का इस्तेमाल कागज निर्मित करने के लिए भी किया जाता है. इसके अलावा एक अन्य प्रजाति ‘रोज़ैल’ का इस्तेमाल मुख्य रूप से कैरिबियाई देशों में सब्जी, चाय और जैम बनाने में भी किया जाता रहा है. गुड़हल के फूलों को हमलोग देवी और गणेश जी की पूजा में अर्पण करने के लिए भी किया जाता है. इनके फूलों में त्वचा को मुलायम बनाने के साथ-साथ आर्तवजनक, फफूंदनाशक, और प्रशीतक जैसे गुणों की भी मौजूदगी होती है।

कई कीट प्रजातियों के लार्वा इसका इस्तेमाल भोजन के रूप में भी करते हैं। इसके फूलों और पत्तियों को पीस कर इसका लेप सर पर लगाने से बाल झड़ने और रूसी की समस्याओं से कारगर तरीके से निपटा जा सकता है। यही नहीं इसका इस्तेमाल केश तेल बनने के लिए भी किया जाता है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने में भी किया जाता है. गुड़हल के फूल को परंपरागत हवाई महिलायें अपने कान के पीछे से टिका कर पहनने के लिए भी करती हैं। ये बहुत रोचक बात है क्योंकि इस संकेत का अर्थ ये होता है कि वो महिला अविवाहित है और वो विवाह के लिए उपलब्ध है.

* गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल बालों को आकर्षक और स्वस्थ रखने के लिए भी किया जा सकता है. गुड़हल के फूलों को पानी में उबाल कर बाल धोने से हेयर फॉल की समस्या दूर हो जाती है. यह एक तरह का आयुर्वेदिक उपचार है.
* गुड़हल की 10 ग्राम पत्तियों को मेहंदी और नींबू के रस में मिलाकर बालों की जड़ों से सिरे तक अच्छे से लगाएं. इस विधि से बालों के डैंड्रफ खत्म हो जाती है.
* इसका उपयोग कॉस्मेटिक में भी किया जाता है. भारत में गुड़हल की पत्तियों और फूलों से हर्बल आईशैडो बनती है.
* गुड़हल का फूल शरीर की सूजन के साथ-साथ खुजली तथा जलन जैसी समस्याओं से भी राहत देता है. गुड़हल के फूल की ताजी पत्तियों को अच्छी तरह पीस कर सूजन तथा जलन वाली जगह पर लगाएं, कुछ ही मिनटों में समस्या दूर हो जाएगी.
* बच्चों के लिए हर्बल शैम्पू बनाने में भी इसका उपयोग होता है, क्योंकि यह माइल्ड होता है.
* गुड़हल के फूल और पत्तों का उपयोग त्वचा से झुर्रियां दूर करने में भी किया जाता है.

गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

गुड़हल के फूल का वैज्ञानिक नाम रोजा साइनेसिस है. गुड़हल के फूल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे कि फाइबर वसा कैल्शियम विटामिन सी आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए गुड़हल का फूल हमें कई बीमारियों से निजात दिलाता है. गुड़हल का फूल हमारे यहां धार्मिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है. कई तरह के पूजा-पाठ और देवी देवताओं को चढ़ाने के लिए गुड़हल के फूल का इस्तेमाल हम करते रहते हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे इससे होने वाले फायदे अन्य फायदों की. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम गुड़हल के फूल के फायदे को जानें.

1. वजन कम करने में

गुड़हल के फूल को वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं. गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय पीने से आपके शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए हमें काफी देर तक भूख नहीं लगती है. इसके अलावा गुड़हल के फूल का सेवन भी भूख लगने से रोकता है. यही नहीं इसे खाने से हमारी पाचन क्रिया भी समृद्ध होती है. इससे शरीर में अनावश्यक चर्बी नहीं जमा हो पाती है, और वजन कम होता है.

2. सर्दी जुकाम में
सर्दी-जुकाम की समस्या को दूर करने के लिए भी गुड़हल के फूल का प्रयोग किया जाता है. इसकी पत्तियां जिसमें विटामिन सी की प्रचुरता होती है, को यदि हम रोजाना खाएं तो इससे सर्दी जुकाम में काफी राहत मिलती है. आप चाहें तो इसका चाय भी बना कर पी सकते हैं.

3. जवान बने रहने के लिए
गुड़हल की पत्तियों से होने वाले कई लाभों में से एक यह भी है कि ये एंटी-एजिंग है. यानी कि आपकी बढ़ती उम्र के असर को काफी हद तक कम करता है. दरअसल गुड़हल की पत्तियों में शरीर के फ्री रेडिकल्स को हटाने की क्षमता होती है. इस वजह से ही हमारी त्वचा की बढ़ती उम्र के लक्षणों से लड़ पाता है.

4. बालों के लिए
गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल की पत्तियों को जैतून के पत्तों के साथ मिलाकर बने पेस्ट को 10 से 15 मिनट के लिए सिर पर लगाकर रखें इसके बाद इसे गुगुने पानी से धो लें. इससे आपके बाल घने दिखाई देने लगेंगे. इसके अलावा गुड़हल की पत्तियों को पीसकर इसमें नारियल तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें. अब इस तेल को अपने सिर पर मालिश करने के लिए प्रयोग करें. इससे आपके बालों में चमक और मजबूती आती है. बालों लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल के पत्तों और फूलों से बना पेस्ट प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है.

5. कोलेस्ट्राल कम करने के लिए
कोलेस्ट्राल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी गुड़हल का प्रयोग किया जाता है. ये धमनी में पट्टिका को जमने से रोकती है. इसतरह ये कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने में मददगार साबित होती है.

6. गुर्दे की पथरी के लिए
गुर्दे की पथरी से परेशां व्यक्ति गुड़हल के फायदे का इस्तेमाल कर सकता है. इसका कारण ये है कि इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसके लिए आपको बस गुड़हल की चाय पीनी होती है.

7. पीरियड्स के दौरान
पीरियड्स को नियमित करने में गुड़हल काफी महत्वपूर्ण साबित होता है. पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में ऐस्ट्रोजेन की कमी होने से हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है. गुड़हल इसे नियमित करता है.

8. उच्च रक्तचाप के लिए
गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय के तमाम फ़ायदों में से एक ये भी है कि ये उच्च रक्तचाप में भी लाभदायक साबित होता है. इससे हृदय की गति भी सामान्य होती है.

9. खून की कमी में
खून की कमी यानि एनिमिया की समस्या में भी गुड़हल लाभदायक होती है. इसके लिए लगभग 40 से 50 गुड़हल के फूल की कलियों को अच्छे से पीसकर उसके रस को एक टाइट डिब्बे में बंद कर लें. सुबह-शाम इसके सेवन से आपकी एनीमिया में राहत मिलती है.

10. त्वचा के लिए
गुड़हल की पत्तियों मेन ऐन्टी-ऑक्सीडेंट, आयरन और विटामिन सी की मौजूदगी इसे त्वचा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है. इससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहांसे और झुर्रियां आदि जैसी कई समस्याएँ खत्म होती हैं. इसके लिए गुड़हल की पत्तियों को पानी मेन उबालकर इसे अच्छी तरह पीस लें और इसमें शहद मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएँ.
 

Osteoarthritis Of The Knee

Fellowship In Joint Replacement, MS - Orthopaedics, MBBS
Orthopedist, Delhi
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In medical terms, Osteoarthritis is referred to a disease of the joints. It mostly affects the cartilage or the slippery tissue, which helps to cover the ends of bones in a joint. Proper cartilage helps in gliding of the bones one over the other. In osteoarthritis, the cartilage’s top layer gets damaged or breaks down. This leads to rubbing of the bones and swelling, pain or loss of motion. As time passes by, the joint may lose its shape. There is also a possibility of developing bone spurs from the edges of the joint. This causes pain and damage.

238 people found this helpful

Nutrition & Healthy Lifestyle

MBA-HR, MBA-Finance, Diploma in Dietetics, Health and Nutrition (DDHN), Diploma in Nutrition and Health Education (DNHE))
Dietitian/Nutritionist, Delhi
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A healthy diet is one which will improve not just your physical health, but your mental health as well. It is essentially concerned with healthy nutrients and essential amino acids, fatty acids, vitamins and minerals. A healthy diet can be obtained by consuming the correct proportion of vegetarian and non-vegetarian foods.

270 people found this helpful

Anxiety, Panic & Phobia

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Being constantly anxious impairs work performance and creates havoc in relationships. The best way to deal with it to accept that it is only a temporary phase which everyone faces. If you keep worrying and try to fight it, you will become even more anxious and your health will become even worse.

335 people found this helpful

Depression

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Depression, or major depressive disorder, is a mental health condition marked by an overwhelming feeling of sadness, isolation and despair that affects how a person thinks, feels and functions. Depression can affect people of all ages, races and socioeconomic classes, and can strike at any time.

237 people found this helpful

Knee Arthritis

DNB, Diploma In Orthopaedics (D. Ortho), MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, Feloship In Joint Replacement
Orthopedist, Mumbai
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The knee acts as hinge joint and allows flexion (bending) and extension (straightening). The knee is formed by the tibiofemoral joints, where the end of the femur (thigh bone) glides over the top of the tibia (shin bone) and the patellofemoral joint where the kneecap glides over the end part of the femur.

282 people found this helpful

Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to get pregnancy.

BHMS
Homeopath, Noida
Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to g...
1. Don't Overeat 2. Don't take tea empty stomach. Eat something like a banana (if you are not diabetic) or any seasonal fruit or soaked almonds and a glass of water first thing in the morning (within 10 mins of waking up). No only biscuits or rusk will not do. 3. Take your breakfast every day. Don't skip it. 4. Have light meals every 2 hours (in addition to your breakfast, lunch n dinner) e.g. Nariyal paani, chaach, a handful of dry fruits, a handful of peanuts, any fresh n seasonal fruit, a cup of curd/milk etc 5. Finish your dinner at least 2 hours before going to sleep. 6. Maintain active life style. This is most important n non negotiable part 7. Avoid fast foods, spicy n fried foods, Carbonated beverages 8. Take a lot of green vegetables n fruit. 9. Drink lot of water. 10. Curd is good for u. 11. Everyday preferably sleep on same time For more details you can consult me.

I feel nausea and pain during my first day of menstrual cycle but my menstrual cycle is always on time.

BHMS
Homeopath, Noida
I feel nausea and pain during my first day of menstrual cycle but my menstrual cycle is always on time.
Place a heating pad or hot water bottle on your lower back or abdomen. Rest when needed. Give yourself a little massage where it hurts. Exercise-- Get Moving to Relieve Symptoms. Walking, running, Yoga etc. Avoid foods that contain caffeine. Avoid smoking and drinking alcohol For better results consult with details.

Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

MD -Homeopathy, BHMS, Certificate Course In Child Counseling & Parenting
Homeopath, Pune
Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

Epilepsy is a disease that affects the brain's nerve cells and triggers the release of abnormal electrical signals. This can cause temporary malfunctioning of the other brain cells and result in seizures and sometimes loss of consciousness. Epilepsy can affect both children and adults.

Causes of Epilepsy

The cause of this condition isn’t very evident; however, few causes of epileptic seizures to metion are brain tumours, injury, infections in the brain or birth defects. Some doctors believe that epilepsy is caused due to genetic mutations and is an outcome of abnormal activity of cells in the brain. Other causes for this condition can be alcohol or narcotics withdrawal and electrolyte problems.

Symptoms

  1. Repeated seizures

  2. Impaired memory

  3. Bouts of fainting

  4. Short spans of blackout

  5. Sudden bouts of blinking and chewing

  6. Panic

  7. Inappropriate repetitive movements

Types of Seizures
A seizure, also known as fit, is usually a brief episode characterised by uncontrollable jerking movement and loss of awareness due to abnormal neuronal activity in your brain. A collective occurrence of these seizures causes epilepsy.

There are three types of seizures based on aetiology:

  1. Idiopathic: This kind of seizure has no apparent cause.

  2. Cryptogenic: The doctors believe that there is a cause for the seizure but cause cannot be detected.

  3. Symptomatic: These seizures occur due to a reason, as a symptom of some neuro-medical condition.

Role of Homeopathy

Homeopathy is a form of healing based upon the principle of ‘Similia similibus curentur’ or ‘like cures like’. It was founded by a German doctor, Dr. Samuel Hahnemann in 1810. Homoeopathy offers vast scope in the treatment of various illnesses, both acute and chronic including epilepsy. Homeopathy takes into account the entire person like the patients family history, past history, etc. Homoeopathic doctors study each case thoroughly, analyze and evaluate the symptoms and then prescribe the medicine.

Homeopaths treat the patient’s mental, emotional and physical make-up i.e. the constitution. This is known as ’constitutional treatment’. Constitutional treatment treats the disease and removes it from its roots. The Constitutional method is employed in the treatment of epilepsy in Homoeopathy. This method is gives amazing results in many cases.

Homeopathy has immense scope in the treatment of Epilepsy. In fresh cases, where the child is new to epileptic treatment, homoeopathy can relieve complaints by giving ‘constitutional treatment’.

In other cases where the child is already taking treatment, homoeopathy can taper off the doses gradually and thus treat the patient effectively. Thus, in both the cases, homoeopathic treatment is beneficial in treating epilepsy.

In either of the cases, a constitutional medicine is given to treat epilepsy. Constitutional treatment relieves the patient from seizures, convulsions, etc. Thus the child can attend school daily and concentrate on his studies. In about 1/3 cases of epilepsy, a surgery known as ‘seizure surgery’ is performed. Regular constitutional treatment is very useful in such cases.

Homeopathic medicines are completely side-effect free and are not habit-forming. They can be taken by children, adults and even by pregnant women. They must be taken only after consultation from a homoeopathic practitioner.

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