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Mgm Hospital - Belapur

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Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and fin......more
Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and financial concerns.
More about Mgm Hospital - Belapur
Mgm Hospital - Belapur is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Rajshekhar Yadav, a well-reputed Gynaecologist, practices in Navi Mumbai. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 43 patients.

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08:00 PM - 09:00 PM

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1A,CBD Belapur, Landmark: Near To Bus Stand & Police Station, Navi Mumbai
CBD Belapur Navi Mumbai, Maharastra
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गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

गुलकंद अपने बेहतरीन स्वाद के कारण ज़्यादातर लोगों की पसंद है. जाहीर है आपमें से भी कई लोगों ने इसे खाया ही होगा. कई लोगों का आटो ये फेवरेट भी होगा. स्वाद में अच्छा लगने वाला गुलकंद आपको कई औषधीय पोशाक तत्वों से भी भर देता है. इसके इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है. इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में भी खूब किया जाता है. आपको बता दें कि गुलकंद, गुलाब की पत्तियों और शक्कर को मिलाकर बनाया जाता है. यह हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है इसलिए यह गर्मी से संबंधित कई समस्याएं जैसे सुस्ती, थकान खुजली आदि में इस्तेमाल किया जाता है. जिन भी लोगों को हथेली और पैरों में जलन की समस्या है वे भी इसे खाकर अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं. गुलकंद हमारे स्वास्थ्य से लेकर हमारे सौन्दर्य तक की समस्या को दूर करता है. आइए गुलकंद के फ़ायदों पर एक नजर डालते हैं.

1. प्रेगनेंसी के दौरान

आयुर्वेद के अनुसार, प्रेगनेंसी में गुलकंद के सेवन को सुरक्षित माना गया है. यह प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए दिया जाता है. गुलकंद मल को पतला कर देता है और इसमें मौजूद शुगर इंटेस्टाइन में पानी की मात्रा बनाए रखता है, जो कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है.

2. मुंह के अल्सर्स में
गुलकंद शरीर को शीतिलता प्रदान करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें शीतल गुण होते है. यह मुंह के छाले के लिए बहुत फायदेमंद है. यह मुंह के छालों के प्रभाव को कम करता है और साथ में यह छालों के कारण मुंह के जलन और दर्द को कम करने में मदद करता है.

3. त्वचा के लिए
हर दिन गुलकंद खाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और त्वचा बेजान नहीं दिखती है. यदि आप पानी कम पीते है जिसके कारण आपकी त्वचा बेजान हो रही है तो गुलकंद बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण इससे मुँहासे जैसी समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है. यह रक्त को साफ करता है, जिससे हमारी त्वचा का रंग भी सुधरता है और त्वचा की कई समस्याओं में फायदा
मिलता है.

4. सनबर्न में
गुलकंद में शीतल गुण होते है इसलिए इसका नियमित रूप से सेवन सनबर्न की समस्या से निजात दिलाता है. यह आपके बॉडी में अतिरिक्त गर्मी के प्रभाव को कम कर देता है.

5. पेट के लिए
वर्तमान समय में पेट में गैस की समस्या बहुत आम हो गयी हैं. कई लोग पेट की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए खाली पेट एंटी एसिड दवा लेते हैं. गैस के कारण हमें कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे गले में छाले, पेट में मरोड़, अपच मुंह और गले में छाले आदि. यदि हम रोजाना भोजन के बाद गुलकंद का उपयोग करते है तो इन सभी परेशानी से छुटकारा मिल जाएगी. गर्मी के दिनों में कई लोग पेट में जलन और पेट दर्द जैसी समस्या से परेशान होते है ऐसे में उनके लिए इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए गुलकंद बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. यह पेट में ठंडक प्रदान करता है. गुलकंद कब्ज जैसी समस्या से निजात दिलाने में उपयोगी है. इस में मौजूद गुण मल को पतला कर देता है और हमें मल त्यागने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है साथ में यह बवासीर के सूजन को भी कम करता है.

6. आँखो की समस्या में
गुलकंद आँखो की रोशनी बढ़ाने के लिए फायदेमंद है. यह कंजंक्टिवाइटिस के लिए अच्छी औषधि है. इनसब के अलावा यह आँखो में जलन की समस्या को भी दूर करता है.

7. वजन कम करने में
गुलाब में ड्यूरेटिक और लैक्सेटिव गुण पाए जाते है जो मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करते हैं. जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है तो शरीर में कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है जिससे वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. आर्युवेद में भी बहुत पहले से वजन कम करने के लिए गुलाब का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं तो गुलाब की कुछ 20 पंखुडियों को एक गिलास पानी में डालकर उबाले. आपको पानी को तब तक उबालें जब तक पानी का रंग गहरा गुलाबी न लगने लगे. अब इसमें एक चुटकी इलायची पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं. अब इस मिश्रण को छानकर दिन में दो बार लें. इसके सेवन से आपका वजन भी कम होता है और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है. गुलकंद में गुलाब का अर्क होता है. इस का नियमित उपयोग भी आप के वजन को कम करता है.

अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

गेहूं का इस्तेमाल हम आटे के रूप में तो करते ही हैं लेकिन इसके साथ ही गेहूं को अंकुरित करके भी उपयोग में लाया जाता है. गेहूं को अंकुरित करने से इसके पोषक तत्वों को बढ़ाया या बदला जा सकता है. जाहीर है गेहूं को पूरे भारत सहित विश्व में भी किया जाता है. इससे कई सारी चीजें बनाई जाती हैं, जैसे की दलिया, कुकीज, रोटी, केक आदि. गेहूं को मैदा के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक भी माना गया है. इसलिए गेहूं एक बहुत ही महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. जिसे आसानी से पचाया भी जा सकता है. गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आदि प्रमुख हैं. अंकुरित गेहूं हमारे शरीर के उपापचय का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ विषैले पदार्थों को निष्प्रभावी भी करता है. यदि आप रोजाना अंकुरित गेहूं का सेवन करेंगे तो आपके शरीर को विटामिन, मिनरल्‍स, फाइबर, फोलेट आदि मिलेंगे जो कि आपके त्‍वचा और बालों के लिये फायदेमंद है. इसे खाने से किडनी, ग्रंथियां, तंत्रिका तंत्र की मजबूती और रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में मदद मिलती है. आइए अंकुरित गेहूं के फ़ायदों पर एक नजर डालें.

1. अंकुरित गेहूं के फायदे वजन कम करने में
अंकुरित गेहूं के सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म रेट भी बढ़ता है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. इससे शरीर की गंदगी बाहर निकलती है और रक्‍त शुद्ध होता है. अंकुरित भोजन शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है. यह शरीर में बनने वाले विषैले तत्वों को बेअसर कर, रक्त को शुध्द करता है.

2. पाचन संबंधी समस्याओं के निदान में
जिन लोगों को हर वक्‍त पाचन संबन्‍धी समस्‍या रहती है उनके लिये अं‍कुरित गेहूं अच्‍छा रहता है क्‍योंकि यह फाइबर से भरा होता है. यह अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाता है. अंकुरित खाने में एंटीआक्सीडेंट, विटामिन ए, बी, सी, ई पाया जाता है. इससे कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक मिलता है. रेशे से भरपूर अंकुरित अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाते हैं.

3. यौवन क्षमता को बढ़ाने में
अंकुर उगे हुए गेहूं में विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होता है. शरीर की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-ई एक आवश्यक पोषक तत्व है.

4. बाल और त्वचा को चमकदार बनाने में
यही नहीं, इस तरह के गेहूं के सेवन से त्वचा और बाल भी चमकदार बने रहते हैं. किडनी, ग्रंथियों, तंत्रिका तंत्र की मजबूत तथा नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी इससे मदद मिलती है. अंकुरित गेहूं में मौजूद तत्व शरीर से अतिरिक्त वसा का भी शोषण कर लेते हैं.

5. कोशिकाओं के शुद्धिकरण में
अंकुरित गेहूं के दानों को चबाकर खाने से शरीर की कोशिकाएं शुध्द होती हैं और इससे नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है. अंकुरित भोज्य पदार्थ में मौजूद विटामिन और प्रोटीन होते हैं तो शरीर को फिट रखते हैं और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है.

6. शरीर की शक्ति बढ़ाने में
अंकुरित मूंग, चना, मसूर, मूंगफली के दानें आदि शरीर की शक्ति बढ़ाते हैं. अंकुरित दालें थकान, प्रदूषण व बाहर के खाने से उत्पन्न होने वाले ऐसिड्स को बेअसर कर देतीं हैं और साथ ही ये ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ा देती हैं.

7. हड्डी के इलाज में
गेहूं का इस्तेमाल हड्डी दर्द के इलाज के लिए कर सकते हैं. क्योंकि गेहूं में कैल्शियम की प्रचुरता होती है. और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. इसलिए गेहूं का सेवन हड्डी दर्द के इलाज में उपयोगी साबित होता है.

8. कब्ज दूर करने में
कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए अंकुरित गेहूं का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाया जाने वाला प्रचुर मात्रा में फाइबर हमारे पेट की विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाता है. जिसमें कब्ज भी है.

9. शुगर के उपचार में
गेहूं का उपयोग हम शुगर जैसी बीमारियों के उपचार में भी करते हैं. शुगर के मरीजों के लिए गेहूं एक अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करें तो आपको शुगर की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है.

10. कैंसर के उपचार में
गेहूं हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है. इसका कारण है, गेहूं में पाया जाने वाला विटामिन ए और फाइबर. विटामिन ए और फाइबर हमारे शरीर से कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है.

11. उच्च रक्तचाप के लिए
उच्च रक्तचाप आज आम बीमारी हो गई है. यदि आप उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको मैदा का त्याग करके गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए. इससे रक्तचाप को नियंत्रित रहने रखने में मदद मिलती है.

12. सांसों की बदबू दूर करने में
कई बार मुंह से अनावश्यक बदबू आनी शुरु हो जाती है. जिससे कि कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो आपको गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए.

13. थायराइड के उपचार में
गेहूं के उपयोग से हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने दिनचर्या के भोजन में गेहूं को शामिल करना चाहिए.

14. गुर्दे की पथरी में
किडनी स्टोन जिसे गुर्दे की पथरी भी कहा जाता है, के उपचार के लिए गेहूं का नियमित सेवन फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाए जाने वाले तत्वों में किडनी स्टोन को गलाने की क्षमता होती है.

15. प्रोटीन के स्रोत और खून की कमी दूर कने में
गेहूं प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है. विशेष रूप से अंकुरित गेहूं. यदि आप नियमित रूप से अंकुरित गेहूं का सेवन करें तो आपके शरीर में प्रोटीन की कमी का सामना कभी नहीं करना होगा. कई लोगों को खून की कमी यानी कि एनीमिया हो जाती है. लेकिन गेहूं के सेवन से इसे दूर किया जा सकता है. क्योंकि गेहूं शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण में मदद पहुंचाता है.

16. हृदय विकारों से बचाने में
गेहूं के सेवन से हम हृदय से संबंधित तमाम विकारों से बच सकते हैं. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करते हैं. तो आपका दिल स्वस्थ और मजबूत रहेगा.

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Hi, sir meri wife pregnent hai uske 3 months complete ho gye hai 14 january ko to main yeh puchna chatta hu ki abi koi dar ki baat to ni hai hum ghar jaa skte hai kya mere ghar ki distance 250 km hai please suggest me.

BHMS, OCRT KOLKATA
Homeopath, Asansol
Hi, sir meri wife pregnent hai uske 3 months complete ho gye hai 14 january ko to main yeh puchna chatta hu ki abi ko...
Yes definitely but by train journey ONLY. As much as possible AVOID travel in this period especially last trimester. If further any query please msg me.

I am suffering from pcod. Is there any chance of pregnancy. My thyroid, diabetes are okay.

Diploma In Postpartum Depression, Formerly , House Job , Gynecology, MBBS
Gynaecologist, Delhi
I am suffering from pcod. Is there any chance of pregnancy. My thyroid, diabetes are okay.
Hello, Definitely you can get pregnant but you have a consult a gynacologist and take proper treatment for PCOD. This includes medication for 6 - 9 months. You also have to have diet control and regulaqr exercise. Avoid all maida based items.

HI, My 8 years old daughter has been complaining at times that she has pain in her right breast. Right on the right nipple. Please advise Doctor.

MS.(Obs. & Gyn.) Enrl., B.A.M.S
Gynaecologist, Varanasi
HI, My 8 years old daughter has been complaining at times that she has pain in her right breast. Right on the right n...
Do not worry some time its occour during puberty change, check harmone prolectine and inform me repprt.

Hi, I'm 25 years old girl. I got a sexual pleasure while I rub my clit. It cums like a sticky liquid. My doubt is whether my hymen is braked or not?

M.D. Consultant Pathologist, CCEBDM Diabetes, PGDS Sexology USA, CCMTD Thyroid, ACDMC Heart Disease, CCMH Hypertension, ECG
Sexologist, Sri Ganganagar
Hi, I'm 25 years old girl. I got a sexual pleasure while I rub my clit. It cums like a sticky liquid. My doubt is whe...
There is no break in hymen. But by rubbing clitoris every lady get pleasure. There is no relation to hymen.

Care Givers - The Support System One Needs!

PhD - Clinical Psychology, Diploma in Clinical and Community Psychology, MA - Clinical Psychology, BA - Psychology
Psychologist, Delhi
Care Givers - The Support System One Needs!

Family members are the primary caregivers of persons with mental illnesses. The family caregiver plays multiple roles in the care of persons with mental illness, including taking day-to-day care, supervising medications, taking the patient to the hospital and looking after the financial needs. 

The family caregiver also has to bear with the behavioral disturbances in the patient. Thus, the family caregiver experiences considerable stress and burden and needs help in coping with it. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden.

 An unhealthy coping style is likely to adversely affect the care giving function. Hence, it is important to take care of the needs of family caregivers. The caregivers caring for their patient with mental illness feel stressed, anxious and low since the illness tends to be chronic and demanding. In the long run, there may occur burnout and emotional exhaustion. The caregivers feel isolated from the society, both due to the restriction of their social and leisure activities, as well as the social discrimination and stigma attached to the mental illnesses. 

Most caregivers take up the caring role in the absence of any significant knowledge about the illness. The role and demands are incorporated within the regular family responsibilities. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden of caregiving. A lot of trial and error may be involved in coping. 

Coping mechanisms of the caregiver: It is important to understand caregivers’ coping mechanisms for tackling burden because it affects caregivers’ day-to-day functioning. The burden is a constant source of stress, and how the caregivers cope with it, affects the course of illness. The burden and the coping methods also influence the physical and mental health of the caregiver and hence their further efficacy as a caregiver.

The coping strategies can be broadly grouped into two groups: Emotion-focused and problem focused. ·    

 1. The emotion-focused strategies aim to diminish the negative emotional impact of the stressor, and include avoidance, denial, fatalism, or looking to religion. The emotion-focused coping has been reported to be associated with the perception of a higher burden 

2. The problem focused coping refers to direct actions, which individual undertakes to change the situation. These include problem-solving or seeking social support to resolve the stress of care giving. Problem-focused and fewer emotion-focused coping strategies lead to reduced perception of burden. Problem-solving coping has been reported to be associated with better functioning

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Being Feminine - A Gift!

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist, Gurgaon
Being Feminine - A Gift!

Every woman is given nature's gift of being feminine. However, the many roles of a woman take a toll on her health and body.
Pregnancy, childbirth, hormonal changes all create challenges for her to maintain her youthfulness. 
So whether it is a recurrent urinary and vaginal infection, vaginal looseness, unable to enjoy your sexual life or loss of control over urine and urine leakage, don't be shy or embarrassed.
O shot/ PRP treatments along with laser techniques are now available which can cure these issues quickly and discreetly. 
 

Some benefits of this are:
1. Improved pelvic/gynecological health
2. Better immunity against vaginal and urinary tract infections
3. Vaginal tightening
4. Better control over urine
5. Improved aesthetics and looks of your private parts
6. Better experience during lovemaking

So girls, go ahead and talk to your gynecologist about these unspoken issues and reclaim your confidence.

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What Is Emotional Quotient (EQ)?

Ph. D - Psychology
Psychologist, Delhi
What Is Emotional Quotient (EQ)?

Emotional Intelligence means using emotions and thinking together – it’s about balance. In layman’s words, it means being smarter with feelingsEmotional Quotient (EQ) means knowing and managing your own emotions and recognizes and manages other people’s emotions and motivates yourself too. It helps to manage relationships so that a person can achieve personal and professional goals through the use of other people.

EQ mainly represents personal and social competence.

Personal Competence: It means knowing your emotions means Self-awareness about how you feel. It helps to access your emotional state. It has three aspects which includes

  • Self-Assessment-means awareness about your positive and negatives, strengths and weaknesses.
  • Self Confidence- to be positive and secure and assured whatever situation you are.
  • Self-Management- to understand and control your emotions so that they don’t control you i.e. self-control which means maintaining positivism in the face of the problematic. The people who excel in it can bounce back far more quickly from life’s setbacks and disappointments.

Social Competence: It means how well you manage your relationship with others, including their emotions. It has two concepts.

  • Social Awareness-means understanding the emotions of those people around you and empathizes with others and aware about what is affecting them.
  • Social Management- by using the awareness of owns emotions and others to build a healthy relationship. It’s a way to communicatepersuade and lead others, whilst being direct and lowest without alienating People who excel in these skills do well at anything that relies on interacting smoothly with others.

The Four Fundamental Aspects of Emotional Intelligence are:-

  • Recognizing emotions
  • Understanding emotions
  • Regulating emotions
  • Using emotions

Emotional Quotient (EQ) is more important than Intelligence Quotient (IQ). It is more important for personal and professional success. The research found that IQ had little relation to success at work and in the rest of their lives. Once you are established in some particular work or job/ life, success is more likely to depend on your ability to persist in the face of difficulty and to get along well with others. It can be remedied to a great extent.  It represents a habit and response that can be improved with the right effort.

 

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Shirodhara For Good Health!

Bachelor of Ayurveda, Medicine & Surgery (BAMS)
Ayurveda, Nashik
Shirodhara For Good Health!

Shirodhara
It is otherwise called Shiro pariseka.
Well developed by physicians of Maharashtra.
By selecting different liquid media, we can use it for many diseases.
For example
For vata- Oil.
For pita- Milk, ghee and coconut water.
For Kapha- Buttermilk, cow's urine and dhanyamlam (a fermented liquid preparation of cereals).
Dhara can be done on head or all over the body or locally.

General indications
- Insanity.
- Chronic sinusitis.
- Cerebrovascular diseases.
- Diseases of head, neck, ears, nose, throat and nervous system.
- Epilepsy
- Psoriasis.
- Migraine headache
- Mental disorder
- Hair fall
- Improve hair health 

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