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We like to think that we are an extraordinary practice that is all about you - your potential, your comfort, your health, and your individuality. You are important to us and we strive to help you in every and any way that we can.
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GUPTA CLINIC is known for housing experienced Internal Medicine Specialists. Dr. Uphar Gupta, a well-reputed Internal Medicine Specialist, practices in nagpur. Visit this medical health centre for Internal Medicine Specialists recommended by 81 patients.

Timings

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01:00 PM - 11:00 PM 07:00 AM - 10:00 AM

Location

MEDICAL SQUARE
Medical Square nagpur, Maharashtra - 440003
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Doctor in GUPTA CLINIC

Dr. Uphar Gupta

MD - General Medicine, MBBS
Internal Medicine Specialist
6 Years experience
200 at clinic
₹50 online
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Please suggest me diet plan. I am a student and whole day I study in library. So I am getting overweight. Recently I have joined gym. Just suggest me proper diet plan. Thank you.

MSc
Dietitian/Nutritionist, Lucknow
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Hi, Thank you for your query. We will be happy to help you. Make sure that you skip eating all kinds of outside food. This includes all junk, processed foods as well as food items that are very oily or sugary. Eat 4 to 5 servings of fruits and vegetables daily. Drink plenty of water throughout the day. Eat protein rich foods and consume less carbohydrates. Have a protein rich breakfast every morning along with a serving of fruits. Even when in library, make sure that every hour or so, you get up and walk a few steps. We are here to guide you. For a detailed or customized diet plan, feel free to leave a message. Eat healthy, stay healthy Regards.
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Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

जब हमारा शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिऐक्ट करता है तो उसे एलर्जी कहते हैं. इसमें शरीर में खुजली होने लग जाती है या फिर पूरे शरीर में लाल चकत्ते निकल आते हैं या उलटियां होने लग जाती हैं. जिन लोगों को धुल से एलर्जी होती है उन्हें घर में साफ-सफाई के दौरान बहुत परेशानी होती है. इस दौरान यदि उनके नाक में धूल चली जाती है, तो उनकी सांसें तेज-तेज चलने लगती हैं और नाक और आंखों से पानी आने लगता है. नियति को हल्के धुएं में भी सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी होने लगती है. ये एलर्जी के लक्षण हैं यानी ये लोग किसी तरह की एलर्जी से पीड़ित हैं.

एलर्जी से बचाव के उपाय
1. बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उन्हें जरूरी चीजें भी दी जानी चाहिए. बच्चों को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिए.
2. बच्चों को धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें. हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें.
3. अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए. बचाव ही एलर्जी का इलाज है.
4. गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए. कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में ड्राइक्लीन करवाते रहें.
5. घर को हमेशा बंद न रखें. घर को खुला और हवादार बनाए रखें ताकि साफ हवा आती रहे.
6. खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं.
7. दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ करते रहें क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है.

एलर्जी का उपचार 
इम्यूनो थेरपी और एलर्जी शॉट्स से भी एलर्जी का इलाज किया जाता है. अगर मरीज की हालत ज्यादा खराब हो, तभी इम्यूनो थेरेपी का सहारा लिया जाता है. यह सेफ तरीका है लेकिन तभी कारगर है, जब किसी ऐसी चीज से ही एलर्जी हो, जिसे नजरअंदाज न किया जा सके. इस थेरपी का असर लंबे समय तक रहता है. कई बार इसका असर 3-4 साल तक रहता है. हालांकि हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है. यह इलाज थोड़ा महंगा होता है. लेकिन यदि आप घरेलु तरीके से कारगर और सस्ता उपचार चाहते हैं तो आप आयुर्वेद का सहारा ले सकते हैं.

आयुर्वेद

  • आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह नीबू पानी पिएं.
  • अगर स्किन एलर्जी है तो फिटकरी के पानी से प्रभावित हिस्से को धोएं. नारियल तेल में कपूर या जैतून * तेल मिलाकर लगाएं. चंदन का लेप भी राहत देता है. इससे खुजली कम होती है और चकत्ते भी कम होते हैं.
  • पंचकर्म का हिस्सा नास्य शिरोधारा भी एलर्जी में भी बहुत मदद करता है. इसमें खास तरीके से तेल नाक में डाला जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया घर में नहीं करनी चाहिए. एक्सपर्ट की देखरेख में इसे करें. 

नेचुरोपैथी और योग
योग और नेचुरोपैथी एलर्जी से मुकाबला करने के लिए एक बेहतर तरीका साबित हो सकता है. इसके विशेषग्य कहते हैं एलर्जी से बचने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. इसके अलावा स्वच्छता भी बहुत जरुरी है. आपको नियमित रूप से रोजाना करीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फायदा होता है क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इसके अलावा प्रदुषण से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नीबू, काली मिर्च और शहद डालकर पिना भी फायदेमंद होता है.
 

Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

मूत्र से संबंधित बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र रो के कारण, लक्षण और घरेलु उपचार को समझने का प्रयास करें.

क्या है मूत्र रोग का कारण?
जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण
मूत्र रोग के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है.

मूत्र रोग के उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

1. पहला प्रयोग
यदि आप केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण के साथ 100 मि.ली.पानी मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ पीसकर उसका पेडू पर लेप करने से पेशाब खुलकर आता है.
2. दूसरा प्रयोग
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.
3. तीसरा प्रयोग
मूत्र रोग को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.
4. चौथा प्रयोग
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.
5. पाँचवाँ प्रयोग
इस तरीके में 50-60 ग्राम करेले के पत्तों के रस को चुटकी भर हींग मिलाकर देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है अथवा 100 ग्राम बकरी का कच्चा दूध 1 लीटर पानी और शक्कर मिलाकर पियें.

अन्य घरेलू उपचार
1. खीरा ककड़ी

यदि रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.
2. मूली के पत्तों का रस
मूत्र विकार में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं. यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.
3. नींबू
नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.
4. पालक
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.
5. गाजर
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.
6. मट्ठा
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.
7. भिंडी
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.
8. सौंफ
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र रोग में राहत मिलती है.
 

6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

MS - General Surgery, MBBS
General Surgeon, Jaipur
6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

Any surgery that requires an incision will involve sutures or staples as the last step of the procedure. This helps close the incision and keep out infections. Taking care of your stitches can help limit scarring and discomfort and speed up the healing process.

Here are a few things to keep in mind.

  1. Keep it clean and dry: For the first few days, use a washed wet cloth to clean the incision site. After a few days, you may start washing the area with soap and water unless advised else wise by your doctor. Ensure that you dry the skin thoroughly after washing it. Avoid baths that involve soaking the area in water. Also, avoid swimming. Do not use any powders, lotions, creams, deodorants etc on the wound site.
  2. Look out for signs of infections: Avoid activities that may involve exposing your wound to dirty water, chemicals, dust etc. This increases your risk of infections. Also look out for signs f infections such as redness, swelling, pus or bleeding, fever or increased pain from the wound. In case you notice such signs, consult your doctor at the earliest.
  3. Do not scratch: As it heals, your skin is likely to turn itchy. However, refrain from scratching so as to reduce chances of infections. Do not try and pull away from the scab but let it fall off on its own. This will also help limit scarring.
  4. Limit contact: Avoid wearing tight clothes or anything that sticks to the skin while your wound is healing. Instead have plenty of loose, comfortable clothes easily accessible. Also, do not take part in close contact sports such as football etc until the stitches have healed completely.
  5. Change your dressing regularly: A dressing should be changed as soon as it gets wet or soaked with blood or other body fluids. Wear clean medical gloves while changing a dressing. When putting on a new dressing do not touch the inside of the dressing or apply any creams on the stitches unless advised so by your doctor. In the case of removable stitches, the doctor will usually remove the stitches after a few days. DO not attempt to pull the stitches out on your own.
  6. Avoid exposing the wound to sunlight: New skin that forms as the incision heals is very sensitive to sunlight and gets sunburnt very easily. Limiting your exposure to sunlight can help reduce the effects of scarring. In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!
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Iron And Its Efficacy In Human Body

BHMS
Homeopath, Delhi
Iron And Its Efficacy In Human Body
IRON:

Daily requirement: Children: 10-15 mg/day
Adults: 10 mg/day
Premenopausal women: 15 mg/day
Pregnant women: 30 mg/day
Iron is required for
i) Formation of haemoglobin in blood.
ii) For muscular activity.

Sources of Iron:
Red meat.
Chicken
Sea food.
Animals products (eggs).
Green leafy vegetables.
Grains.
Nuts.
Dry fruits, like dates and raisins.
Human milk, which contains about 1 mg/litre

Iron deficiency causes:
Anaemia.
Fatigue.
Paleness
Dizziness.
Irritability.
Palpitation.
Recurrent infections.

Iron in excess causes:
Diarrhoea.
Constipation.
Vomiting
Headache
Dizziness
Stomach cramps.

Health Tips

BHMS
Homeopath, Bahadurgarh
Health Tips

Health Tips

Ailments From Change Of Weather

B.H.M.S., Post Graduate Certificate In Nutrition, Obesity & Health
Homeopath, Indore
Ailments From Change Of Weather
  • Temperatures are beginning to rise gradually and soon we will be welcoming summers. But this change of weather phase often leads to a fresh spurt of infections mainly viral with symptoms such as headaches, bodyache, cough cold and flu like symptoms. Also respiratory and skin allergies tend to get worse at this time. 
  • With the days being hot and nights and early mornings cold it is difficult for the body to adjust to the environment. It is essential that we keep warm at these times to avoid sudden temperature drop in the body and exposing it to infection. 
  • Also eat healthy and avoid outside food at all times. Keep away from cold water and cold drinks yet. It will again mess up with your body temperature. 
  • There are quite a few homeopathic medicines which help in ailments from change of weather, or cloudy weather, or when the days are hot and nights cold. 
  • It is advisable to take homeopathy treatment for chronic or frequently repeating ailments as they can be kept at bay with homeopathic treatment.

Chronic Sinusitis

MD - Bio-Chemistry, MF Homeo (London), DHMS (Diploma in Homeopathic Medicine and Surgery), BHMS
Homeopath, Kolkata
Chronic Sinusitis

Aetiology
This follows an acute sinus infection which fails to resolve the cause of failure is usually some anatomical or pathological narrowing of the middle meatus which prevents adequate drainage common causes of such narrowing are septal deviations, enlargement of the middle turbinate, chronic generalized oedema of the nasal mucosa due to allergic or vasomotor rhinitis mucous polypi. Chronic frontal sinusitis is usually secondary to antral or ethmoidal infection & a dental abscess can cause a particularly severe foul infection of the maxillary antrum.

Symptoms/ sign and complications:-

  • Local symptoms are often slight so that the disease can easily be overlooked. There is intermittent nasal obstruction discharge with a feeling of dullness or heaviness in the face and head. These symptoms are made worse by a coryza the patient often suffers from nasal catarrh for a long time after each cold. Recurrent or chronic tonsillitis, pharyngitis, or laryngitis is often the complaint which makes the patient seek medical advice sinus infection shoud always be looked for in such cases. Chonic sinusitis is often present in bronchiectasis chronic bronchitis. There is no tenderness over the sins as in acute infection and nasal examination often show no obvious infection but will reveal the narrowing of the middle meatus, ct are particularly useful in revealing the condition & the state of the lining membrne. Spread to the orbit or anterior cranial fossa may occur as in acute infections.
  •  Homeopathic treatment medicine apply one symptoms sigs base only.

Homeopathy for Acute Bronchitis

BHMS, MD - Homeopathy
Homeopath, Bhubaneswar
Homeopathy for Acute Bronchitis

Allergic Acute Bronchitis

The word itself defines the bronchitis caused due to allergy. An acute bronchitis generally start with viral causes and if stay for more days bacterial growth appears. Any patient who suffer from acute bronchitis if start treatment with proper homeopathy remedies can be cured within 2 to 3 days. As there are no specific medicines in homeopathy for any disease and are choose as per the symptoms so it varies patient to patient. But homeopathy has an assured treatment in acute bronchitis. Here it is a question comes in everybody mind how for a same disease different medicines come. It is because homeopathy helps to cure the disease by enhancing body immune power so that the body itself get boost and cure the condition. So to find out the medicines for any person a homeopathy physician finds the medicines which can be best suitable to give the boosting effect to the person's immune system. The word 'boosting ' also can not exactly applied but can say modify the body's immune system to work healthily to maintain a healthy body function. Therefore to choose the exact medicine for the person it is required to know his details physical symptoms , mental symptoms and the most unique symptom of the disease that the patient tells which altogether helps us to find out a homeopathy remedy that can able to modify the body's immune system to work healthily. 

Chronic Allergic Bronchitis

Chronic allergic bronchitis is generally caused by allergy. There is no bacterial cause for chronic allergic bronchitis. In chronic allergic bronchitis the common symptoms are productive cough, fever, malaise, wheezing sound, respiratory distress, loss of appetite. The general cause of chronic bronchitis is exposure to various allergens. In the atmosphere where we live do expose to numerous allergen or antigen in the form dust mites, pollens, moulds, animal dander, chemicals, various smoke, various proteins, etc. Those starts reacting in our body and cause various respiratory disease and chronic bronchitis is one among them. But the most important thing is why some people suffer from such disease but others do not suffer though all are staying in the same environment. Here the immune system plays the important role. Some person's immune system is very hypersensitive to certain allergen and when contact with them start reacting, but others immune system are not so much sensitive so not react aggressively. Here one thing strikes why one's immune system is so oversensitive than others. There are various cause for the hypersensitiveness of the immune system of any person. Many factors affect the immune system like emotional factors, faulty life style and faulty food habits, environmental pollution, nature of a person, suppression of emotion, hereditary cause etc. Here the homeopathy treatment helps to modify the person's hypersensitiveness immune system to work as a healthy one. Every person has different factors of getting hypersensitive immune system. That needs to know and to select the homeopathy medicines accordingly so that the hypersensitiveness of the immune system modify to a healthy one and works healthily. This is the key point how homeopathy offers a long term cure to a chronic bronchitis. 

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Horse Gram -Miracle Pulse

Doctor of Medicine (M.D.), MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery
Internal Medicine Specialist, Bangalore
Horse Gram -Miracle Pulse

Nature and wellness

Horse gram - the miracle pulse (continued)

Unbelievable health benefits of horse gram.

  • Renal recovery: horse gram has astringent and diuretic properties, hence it is excellent to restore renal health, (kidney health) urinary discharge, kidney stones. Scientific studies have shown that horse gram inhibits formation of calcium oxalate stones in kidneys. When made a part of weekly diet (twice a week) it helps in prevention of kidney related health issues.
  • Increases sperm count and overall sperm health: the nutrients like calcium, phosphorus, iron and amino acids present in horse gram promote sperm count. Horse gram also removes impurities from sperm and makes the sperm more motile thus increasing the fertility quotient. Ayurveda uses horse gram for treating fertility related issues in men.
  • Diabetes and obesity: in my practice, I have seen good results with people who are diabetic or obese, after introduction of horse gram into the diet. Horse gram being high on protein and fiber, low on carbs and having an excellent lipid profile, it helps in reducing blood glucose levels and reducing weight. It also the phenol content gives it the ability to attack fatty tissues.
  • Menstrual irregularities: irregular menstrual cycle or or scanty bleeding, consumption of horse grams is very effective in menstrual corrections, the strong iron content of this pulse helps in boost hemoglobin levels which is lost during menstrual cycles.

In my next post on this I will cover, the ways to include horse gram into our diet, and the time of the day it should be had, also I will explain how it is effective in enhancing body's immunity and in natural treatment of bronchitis/asthma and gastric issues.

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