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Suvarna Health Care is known for housing experienced Homeopaths. Dr. Suvarna Pogu, a well-reputed Homeopath, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Homeopaths recommended by 92 patients.

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अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज - Asthma Ka Ayurvedic Ilaaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज - Asthma Ka Ayurvedic Ilaaj!

अस्थमा श्वसन संबंधी रोग होता है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है. अस्थमा में श्वास नलियों की सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसनमार्ग संकुचित हो जाता है. श्वसनमार्ग के संकुचित हो जाने से सांस लेते समय आवाज़ आना, श्वास की कमी, सीने में जकड़न और खाँसी आदि समस्याएं होने लगती हैं.
इस लेख के माध्यम से हम आपको अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज बताने जा रहे हैं.

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज-


* आयुर्वेदिक दवाएं में कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता हैं और सुरक्षित है. यह अस्थमा के इलाज में बहुत हद्द तक कारगर है. कुछ आयुर्वेदिक दवाओं को शामिल कर के अस्थमा को ठीक किया जा सकता है जैसे कंटकारी अवालेह, अगस्त्याप्रश, चित्रक, कनाकसव इत्यादि.
* रात का खाना जितना हल्का हो सके लें व सोने से एक घंटे पहले ही खा लें.
* अस्थमा से बचने के लिए सुबह और शाम को टहलने के लिए निकलें. इसके अलावा योग में आसान भी कर सकते है जैसे ‘प्राणायाम’ और मेडिटेशन.
* अस्थमा के मरीज को मुश्किल एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए.
* हवादार कमरे में रहें और सोएं. एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की सीधी हवा से बचें.
* अस्थमा रोगी को ठंडे और नम स्थानों से दूर रहना चाहिए.
* स्मोकिंग,टोबैको और ड्रिंक करने से बचे. कमरे में किसी खुसबूदार चीजे जैसे इत्र अगरबत्ती या अन्य चीजों का प्रयोग ना करें.
* गजर और पालक के उचित अनुपात मरीन मिलकर रोजाना रस पीएं.
* जौ, कुल्थी, बथुआ, द्रम स्तिच्क अदरक, करेला, लहसुन को अस्थमा रोगी को नियमित रूप से लेना चाहिए.
* मूलेठी और अदरक को आधा चम्मच एक कप पानी में डाल कर पीएं.
* तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है, इसलिए अस्थमा के मरीजों को तुलसी का सेवन करना चाहिए.
* जो लोग इस रोग का सामना आकर रहे हैं, वह हर मौसम के आगमन पर पंचकर्म की नस्य या शिरोविरेचन की साहयता लें.
* यदि रात में अस्थमा का अटैक आ जाए, तो छाती और पीठ पर गर्म तिल के तेल का सेंक करें.
* घर में एक शीशी प्राणधारा की अवश्य रखें. उसमें अजवाइन का सत् होता है, जिसकी भाप दमा के दौरे में राहत देती है.
* एक चौथाई चम्मच सोंठ, छ: काली मिर्च, काला नमक एक चौथाई चम्मच, तुलसी की 5 पत्तियों को पानी में उबाल कर पीने से भी दमा में आराम मिलता है.
* एक चौथाई प्याज का रस, शहद एक चम्मच, काली मिर्च 1/8 चम्मच को पानी के साथ लें.

अस्थमा के घरेलू उपचार - Asthma Ke Gharelu Upchaar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अस्थमा के घरेलू उपचार - Asthma Ke Gharelu Upchaar!

अस्थमा श्वसन संबंधी रोग होता है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है. अस्थमा में श्वास नलियों की सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसनमार्ग संकुचित हो जाता है. श्वसनमार्ग के संकुचित हो जाने से सांस लेते समय आवाज़ आना, श्वास की कमी, सीने में जकड़न और खाँसी आदि समस्याएं होने लगती हैं. 
आइए इस लेख के माध्यम से हम अस्थमा के घरेलू उपचारों के बारे में जानें ताकि इस विषय में लोगों को जागरूक किया जा सके.

अस्थमा के कारण-

* जीवनशैली में परिवर्तन जैसे मिलावटी आहार और ज्यादा स्पाइसी खाना या सूखे आहार का ज्यादा सेवन
* स्ट्रेस या किसी बात के डर से भी अस्थमा हो सकता है
* ब्लड में किसी तरह का डिफेक्ट
* स्मोकिंग और टोबैको का सेवन
* नजल पाइप में धूल या मिट्टी फंस जाना
* प्रदुषण से होने वाली समस्या
* पर्यावरणीय कारक
* अधिक परिश्रम करना

अस्थमा के लक्षण-
* सांस फूलना और सांस लेने में तकलीफ होती है
* निरंतर खांसी आना
* सांस लेते समय व्हूप की आवाज आना
* छाती में संकुचन
* खांसी के साथ कफ का बाहर नहीं आना

अस्थमा के घरेलू उपचार-
* आयुर्वेदिक दवाएं बहुत सुरक्षित हैं और काफी हद तक समस्या का इलाज है. कुछ आम दवाओं कंटकारी अवालेह, अगस्त्याप्रश, चित्रक, कनाकसव का प्रयोग किया जा सकता है.
* रात का खाना जितना हल्का हो सके लें व सोने से एक घंटे पहले ही खा लें.
* सुबह या शाम टहलें और योग में मुख्य रूप से ‘प्राणायाम’ और भावातीत ध्यान करें.
* अस्थमा के मरीज अधिक व्यायाम करने से बचें.
* हवादार कमरे में रहें और सोएं. एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की सीधी हवा से बचें.
* इस दौरान आपको ठंडे और नम स्थानों से दूर ही रहना चाहिए.
* धूम्रपान चबाने वाली तम्बाकू, शराब और कृत्रिम मिठास और ठंडे पेय न लें. जिन्हें इत्र से इलर्जी हैं, वे अगरबत्ती, मच्छर रेपेलेंट्स का प्रयोग न करें.
* दो तिहाई गाजर का रस, एक तिहाई पालक का रस, एक गिलास रोज पिएं.
* जौ, कुल्थी, बथुआ, द्रम स्तिच्क अदरक, करेला, लहसुन का अस्थमा में नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है.
* मूलेठी और अदरक आधा-आधा चम्मच एक कप पानी में लेना बहुत उपयोगी होता है.
* तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, इसलिए अस्थमा के मरीजों को तुलसी का सेवन करना चाहिए.
* जो लोग इस रोग की चपेट में आ चुके हैं, उनके लिए हर ऋतु के प्रारम्भ में एक-एक सप्ताह तक पंचकर्म की नस्य या शिरोविरेचन चिकित्सा इस रोग की रोकथाम में सहायक होती है.
* दिल्ली के शालीमार बाग स्थित महर्षि आयुर्वेद अस्पताल में इसकी अच्छी व्यवस्था है.
* रात-विरात यदि दमा प्रकुपित हो जाए, तो छाती और पीठ पर गर्म तिल तेल का सेंक करें.
* घर में एक शीशी प्राणधारा की अवश्य रखें. उसमें अजवाइन का सत् होता है, जिसकी भाप दमा के दौरे में राहत देती है.
* एक चौथाई चम्मच सोंठ, छ: काली मिर्च, काला नमक एक चौथाई चम्मच, तुलसी की 5 पत्तियों को पानी में उबाल कर पीने से भी दमा में आराम मिलता है.
* एक चौथाई प्याज का रस, शहद एक चम्मच, काली मिर्च 1/8 चम्मच को पानी के साथ लें.
 

अर्जुन की छाल का उपयोग - Arjun Ki Chhal Ka Upyog!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अर्जुन की छाल का उपयोग - Arjun Ki Chhal Ka Upyog!

अर्जुन वृक्ष का नाम प्रमुख औषधीय वृक्षों में है. अमरूद की समान पत्तियों वाले लेकिन आकार में इससे बहुत बड़े अर्जुन वृक्ष का वैज्ञानिक नाम टर्मिमिनेलिया अर्जुना है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे धवल, कुकुभ और नाडिसार्ज जैसे नामों से भी जानते हैं. अर्जुन वृक्ष एक सदाबहार यानी हमेशा हरा-भरा आने वाला वृक्ष है. इसका इस्तेमाल ह्रदय रोग में प्राचीन काल से ही होता आ रहा है. अर्जुन वृक्ष के छाल के चूर्ण, काढ़ा, अरिष्ट आदि के रूप में उपयोग किया जाता है. तो आइए इस लेख के माध्यम से अर्जुन वृक्ष की छाल के फायदे को जानें.

1. मुंह के छालों के उपचार में

मुंह के छालों से परेशान व्यक्ति भी अर्जुन की छाल का उपयोग कर सकता है. इसके लिए नारियल के तेल में अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से आपकी परेशानी निश्चित रूप से कम होगी. यही नहीं ऐसे थोड़े गुड़ के साथ लेने से बुखार में भी आराम मिलता है.

2. खांसी में
सूखे हुए अर्जुन वृक्ष की छाल का बारीक पाउडर, ताजे हरे अडूसे के पत्तों के रस में मिलाकर इसे फिर से सुखा लें. ऐसा इसी तरह से मिला-मिला कर सात बार के बाद जो चूर्ण बचता है. उसमें शहद मिलाकर खांसी पीड़ित को देने से वो राहत महसूस करता है.

3. मोटापा दूर करने में
मोटापे से परेशान लोग अर्जुन वृक्ष की छाल का काढ़ा सुबह शाम पीकर अपनी परेशानी कम कर सकते हैं. यह मोटापे को इतनी तेजी से कम करता है कि एक महीने में ही इसका असर दिखने लगता है.

4. शुगर में
शुगर के मरीज भी अर्जुन वृक्ष की छाल से अपनी परेशानी खत्म कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें अर्जुन वृक्ष की छाल का चूर्ण, देसी जामुन के बीजों के चूर्ण की समान मात्रा के साथ मिलाकर सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लें. दूसरा विकल्प है कि अर्जुन वृक्ष के छाल, कदम की छाल, जामुन की छाल और अजवायन एक समान मात्रा, पीसकर बारीक पाउडर बना लें. इस पाउडर में आधा लीटर पानी मिलाकर काढ़ा बनाएं और इस काढ़े को सुबह शाम 3 सप्ताह तक लगातार प्रयोग करें. इससे मधुमेह में राहत मिलेगी.

5. पेशाब की रुकावट दूर करने में
अर्जुन वृक्ष की छाल से बना हुआ काढ़ा पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल को पीसकर दो कप पानी में उबालें जब जब पानी आधा रह जाए तो इसे ठंडा होने के बाद रोगी को पिलाएं. दिन में एक बार पिलाने से यह पेशाब की रुकावट को दूर कर देता है.

6. उच्च रक्तचाप को कम करने में
अर्जुन वृक्ष की छाल काफी लाभदायक साबित होती है. दरअसल इसकी छाल कोलेस्ट्रॉल को कम करके लिपिड ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी घटाते हैं. इसके छाल का सेवन रक्त प्रवाह के अवरोध को भी दूर करता है. इसके लिए आपको एक चम्मच अर्जुन वृक्ष की छाल का पाउडर दो गिलास पानी में आधा रह जाने तक उबालकर इस पानी को सुबह-शाम पिएं. ऐसा करने से बंद हुई धमनियां खुल जाएंगी और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम हो जाएगा.

7. बालों के विकास के लिए
अर्जुन वृक्ष की छाल का उपयोग हम बालों के विकास के लिए भी कर सकते हैं. सर के बाल में अर्जुन वृक्ष की छाल और मेहंदी का मिश्रण लगाने से सर के बाल सफेद से काले होने लगते हैं. इससे बालों में मजबूती भी आती है.

8. त्वचा के लिए
त्वचा की कई समस्याओं को खत्म करने में अर्जुन वृक्ष के छाल का असर प्रभावशाली होता है. अर्जुन वृक्ष की छाल, बदाम, हल्दी और कपूर की एक समान मात्रा को पीस कर उबटन की तरह चेहरे पर लगाएं ऐसा करने से चेहरे के सारे रिंकल्स चले जाते हैं और चेहरे में निखार आता है.

9. सूजन को कम करने में
भी अर्जुन वृक्ष के छाल की सकारात्मक भूमिका है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल का महीन पिसा हुआ चूर्ण 5 से 10 ग्राम मात्रा में क्षीरपाक विधि से खिलाने से हृदय रोग के साथ-साथ इससे पैदा होने वाली सूजन में भी कमी आती है. इसके अलावा लगभग 1 से 3 ग्राम चूर्ण खिलाने से सूजन में कमी आती है. उससे संबंधित परेशानियां भी दूर होती हैं

10. ह्रदय से हृदय के विकारों में
ह्रदय से संबंधित तमाम विकारों जैसे की अनियमित धड़कन और सूजन आदि को दूर करने में भी अर्जुन वृक्ष का छाल सहायक होता है. यह स्ट्रोक के खतरे को भी कम करती है. इसके लिए अर्जुन वृक्ष की छाल को जंगली प्याज की समान मात्रा के साथ मिलाकर चूर्ण बनाएं इस चूर्ण को रोजाना आधा चम्मच दूध के साथ हृदय रोगी को देने से हृदय की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है. ये ब्लॉकेज में भी लाभदायक होता है. खाना खाने के बाद दो चम्मच लगभग 20 mm अर्जुनारिष्ट आधा कप पानी में मिलाकर दो 3 माह तक पीने से हृदय रोगियों को तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है.

Acne Myths!

MD - Dermatology
Dermatologist, Ahmedabad
Acne Myths!

Myths vs facts:
Myth: junk food causes acne.

Fact: there is no correlation between junk food/oily food/spicy food with acne.

There is, however, a recent evidence connecting foods having high glycemic index with triggering of acne. These foods include-white rice, sugary drinks, sweets-items that can raise the blood sugar and insulin levels quickly.
This said they need not be completely restricted.

Infertility In Men And Women!

MD - General Medicine
Sexologist, Delhi
Infertility In Men And Women!

Infertility is a widespread problem. for about one in five infertile couples the problem lies solely in the male partner and in another quarter, both partners have problems. In most cases, there are no obious symptoms or signs of infertility. Intercourse, erection and ejaculation will usually happen without difficulty. The quantity and appearance of the ejaculated semen generally appears normal to the naked eye. Medical tests are needed to find out if a man is infertile. Male infertility is usually caused by problems that affact either sperm production or sperm transport. Through medical testing, the doctor may be able to find the cause of the problem.

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Frozen shoulder!

FSS, BPTh/BPT, PGDDCN(Dietetics and Clinical Nutrition)
Physiotherapist, Noida
Frozen shoulder!

Frozen shoulder is characterized by progressive pain and stiffness of the shoulder which usually resolves spontaneously after about 18 months. 

There are three phases that the condition will pass through; 
A freezing phase where the joint tightens up, a stiff phase where the movement in the shoulder is significantly reduced and a thawing phase where the pain gradually reduces and mobility increases.


Clinical features

  • Age - 40 - 60 yrs
  • History of trauma, often trivial followed by aching in the arm and shoulder.
  • Tenderness
  • Stiffness
  • Wasting

Cardinal features: stubborn lack of active and passive movements of shoulder in all directions.

Treatment: 

  • One should seek proffessional advise before attempting any frozen shoulder rehab.
  • Treatment is divided into two modes: conservative. And surgical.
  • Conservative treatment: physiotherapy plays an important role in the prevention as well as resolution of this condition. It aims to releive pain and prevent further stiffening with:
  • Rest
  • Non steroidal anti inflammatory drugs
  • Electrotherapy - ultrasound, tens & laser treatment may also help reduce pain and inflammation.

Therapeutic exercises

1 Pendulum exercise

2 Wand exercises

3 Therapist assisted mobilizations

4 Stretches - 

  • Shoulder flexion stretch
  • External rotation stretch
  • Chest stretch
  • Posterior shoulder stretch

 
5 Strengthening exercises

  • Isometrics shoulder exercises
  • Postural exercises - scapular squeezes

6 Taping

  • Surgery 
  • Surgery is the last resort if normal treatment has failed.

Prevetion Of Kidney Stones!

MBBS, DNB ( General Surgery ), DNB - Urology/Genito - Urinary Surgery
Urologist, Pune
Prevetion Of Kidney Stones!

Drink water enough to maintain your urine colour as good as water's colour.
 

Fibroadenoma And Its Treatment!

BHMS
Sexologist, Lucknow


Fibroadenomas are non-cancerous (benign) and harmless tumors which are made up of fibrous tissues of the breast. These are common in adolescent and young women. The incidence of fibroadenoma reduces with increasing age.

Signs and symptoms-

  • Fibroadenomas are smooth, round and easily movable swellings. It is referred as ‘breast mouse’ or ‘floating tumor’ as it easily sleeps away from fingers. Size of the tumor may vary from one to five centimeters.
  • It could be single or multiple. Generally, it is painless and may affect both breasts.
  • Pain and tenderness (pain when touched) may be present especially before periods and subsides after periods. These cyclical changes are because of the hormonal changes. This is the reason why it is less common after menopause.

Causes of fibroadenoma-

The exact cause of fibroadenoma is unknown. It is because of the cyclical hormonal changes that take place in the body of women of childbearing age.

Diagnosis-

  • Clinical history
  • Physical examination
  • Mammography – it is the process of using low amplitude x rays to examine breast.
  • Biopsy – women in their teens do not need a biopsy if the lump dissolves on its own.
  • Dangerous signs
  • Sudden increase in size of tumor
  • Pain in breast not affected by menstrual cycle
  • Hard, immovable tumors
  • Transformation of fibroadenoma into the cancerous tumor is very rare. Only 0.002-0.012% of the fibroadenoma convert into a cancerous growth.

Treatment conventional treatment

1) fibroadenoma can subside on its own.

Cryoablation (use of extreme cold to destroy tissue) is safe and effective and less invasive method of treatment for fibroadenoma.

Surgical removal may be required in case of large fibroadenoma.

Homeopathic treatment

Homeopathy is strongly suggested in the treatment of fibroadenoma. Homeopathy can be given as a baseline treatment in mild and moderate cases whereas it has a good supporting role in advanced cases of tissue changes. The results using homeopathy in the cases of fibroadenoma are very good.

Homeopathic medicines are prescribed after studying patient’s complete case history. It enhances the body’s self-healing mechanism (immunity) thus a further recurrence of fibroadenoma can be prevented.

Unani Treatments - Know More About It!

Doctor In Unani Medicine(D.U.M.B.I.M)
Sexologist, Delhi
Unani Treatments - Know More About It!

Unani Treatments

For diagnosing the disease,
unani physicians (commonly known as hakims) feel the rhythmic expansion of arteries (nubz) of the patient. Mainly there are four types of unani treatments available:

Ilaj bil tadbeer (regimental therapy): It is a detoxification method that improves constitution of body by removing waste materials. Regimental therapy also protects health and increases defence mechanism of the body. Important techniques in regimental therapy include massage (dalk, malish), Turkish bath (hammam), exercise (Riyazat), leeching (Taleeq-e-Alaq) and venesection (Fasd).
Ilaj bil Ghiza (dietotherapy): As the name suggests, dietotherapy involves regulation of quantity and quality of your diet. Unani physician may ask you to increase intake of specific food that is helpful to alleviate symptoms of the disease.
Ilaj bil dawa (Pharmacotherapy): Natural drugs from plant, minerals and animal drugs are used in unani system. Potency and temperament of drugs are important consideration in unani treatment. The drugs are supposed to act according to their temperament .i.e. hot, cold, moist and dry. Unani medicines are available in form of tablets, decoctions, infusion, Jawarish, Majoon, Khamira, Syrup and powder.
Jarahat (Surgery): Ancient physicians of unani system were considered to be pioneer in the field. However, at present only

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Natural Cure For Arthritis!

M.Sc. in Dietetics and Food Service Management , Post Graduate Diploma In Computer Application, P.G.Diploma in Clinical Nutrition & Dietetics , B.Sc.Clinical Nutrition & Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Mumbai
Natural Cure For Arthritis!

Natural Cure For Arthritis!

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