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Ramashankar Gupta Clinic

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Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care....more
Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care.
More about Ramashankar Gupta Clinic
Ramashankar Gupta Clinic is known for housing experienced Homeopaths. Dr. Ramashankar M.Gupta, a well-reputed Homeopath, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Homeopaths recommended by 78 patients.

Timings

MON-SAT
10:00 AM - 01:00 PM

Location

Ramdas Chowk,Kurla West, Landmark: New Mill Road, Mumbai
Kurla West Mumbai, Maharastra
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नशा मुक्ति के उपाय - Nasha Mukti Ke Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
नशा मुक्ति के उपाय - Nasha Mukti Ke Upay!

नशा मुक्ति की पहल लगातार वैश्विक स्तर पर किया जाता रहा है. देखा जाए तो नशा करने वाले लोगों की संख्या भी विश्व स्तर पर बहुत ज्यादा है. ऐसे लोग समाज में कई बार खतरा बन जाते हैं. इसलिए नशा को छुड़ाना आवश्यक है. ऐसे लोग नशे के सेवन से पहले असामान्य रहते हैं और उसे पाने के बाद खुद को सामान्य स्थिति में पाते हैं. यह स्थिति ऐसे लोगों को पूरी तरह बीमार बना देती है. दरअसल नशे की लत लगना एक लाइलाज बीमारी है. यह कई बहाने से शरीर में प्रवेश करती है और धीरे-धीरे जिंदगी को अपनी गिरफ्त में ले लेती है. नशे की लत एक चतुर, शक्तिशाली और मायावी बीमारी है. आइए इस लेख के माध्यम से हम नशा मुक्ति के लिए उपलब्ध विभिन्न तरीकों पर एक नजर डालें ताकि एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके.

आयुर्वेद से दूर करें नशा-
आयुर्वेद में कई रोगों का प्रभावी इलाज उपलब्ध है. शराब छोड़ने के लिए इसमें कोई विशेष प्रवाधान तो नहीं है लेकिन शराब से होने वाली बीमारियों को दूर करने के उपचार किया जाता है. लिवर में सूजन, पेट और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां के उपचार के लिए दी जाने वाली वाली दवाएं ही अन्य लाभ के रूप में शराब छुड़ा सकती हैं. जैसे ऐलोवेरा लिवर के लिए फायदेमंद है, जबकि अश्वगंधा तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को पुष्ट बनाता है. सार्थक चूर्ण, ब्राह्मी घृतम आदि शरीर से शराब के जहर को कम करते हैं. इसके अलावा शंखपुष्पी, कुटकी, आरोग्य वर्धनी आदि भी दिए जाते हैं. शराब के विकल्प के रूप में सुरा का सेवन कराया जाता है. शराब के बदले मृतसंजीवनी सुरा 30-40 एमएल दी जाती है. लेकिन इन दवाओं का इस्तेमाल किसी चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करना चाहिए.

होम्योपैथी में भी है नशा मुक्ति का उपाय-
होम्योपैथी में भी कई ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से शराब और इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है. ये दवाएं बीमारियों को ठीक करने के साथ ही मनोवैज्ञानिक नजरिये से भी फायदा पहुंचाती हैं. लेकिन इन दवाओं के इस्तेमाल के लिए किसी डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें. इसके लिए क्यूरकस क्यू, सिनकोना ऑफिसिनैलिस, कैलिडोनियम आदि दवाएं चिकित्सक के निर्देशानुसार इस्तेमाल की जा सकती हैं.

ध्यान और योगाभ्यास-
योगाभ्यास के जरिए भी इसको दूर किया जा सकता है. मुद्रा, ध्यान तथा योग क्रियाओं के माध्यम से उनके शरीर से विकार को दूर किया जाता है. जो निम्नलिखित है:

1. ज्ञान मुद्रा : ज्ञान मुद्रा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और इससे मन का शुद्धिकरण होता है. ज्ञान मुद्रा करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को तर्जनी के टिप पर लगाएं और बाईं हथेली को छाती के ऊपर रखें. इस क्रिया को लगातार 45 मिनट तक करने से काफी फायदा मिलता है.
2. ध्यान : ध्यान करने से शरीर के अंदर से खराब तत्व बाहर हो जाते हैं. एकाग्रता लाने के लिए त्राटक किया जाता है. इसमें बिना पलक झपकाए प्रकाश की रोशनी को लगातार देखने का अभ्यास किया जाता है. इसके अलावा कई तरह की योगक्रियायें भी आप कर सकते हैं जैसे कि कुंजल क्रिया, वस्ति, शंख प्रक्षालन, शंख प्रक्षालन में सावधानी आदि.

ऐल्कॉहॉलिक्स एनॉनिमस-
ऐल्कॉहॉलिक्स एनॉनिमस. संस्था न कहकर इसे ऐल्कॉहॉलिजम के शिकार महिला, पुरुषों का परिवार कहें तो बेहतर होगा. यहां किसी तरह की फीस नहीं ली जाती. इस परिवार से जुड़ने वाले हर नए सदस्य का पूरे सम्मान के साथ यहां स्वागत किया जाता है. यहां होने वाली मीटिंग में सभी सदस्य अपने अनुभव और उन गलतियों को शेयर करते हैं, जो उन्होंने शराब की वजह से कीं. नए सदस्य को एक ट्रेनर को सौंप दिया जाता है जिसे स्पॉन्सर कहते हैं. स्पॉन्सर उनके साथ हमेशा कॉन्टैक्ट बनाए रखता है. इसके लिए लगातार 90 मीटिंग अटेंड करने की सलाह दी जाती है. अगर किसी ने शराब भी पी रखी है तो भी वह मीटिंग अटेंड कर सकता है. मीटिंग जॉइन करने वाले नए सदस्य से उनके बीते दिनों के अनुभवों को लिखवाया जाता है. अगर कोई अनपढ़ है तो उसकी बातों को टेप किया जाता है या कोई साथी सदस्य उसके कहे अनुसार लिखने में मदद करता है. व्यक्तित्व में बदलाव के लिए पूरे 12 सूत्र बनाए गए हैं.

नशा मुक्ति के कुछ घरेलू नुस्खे-
1. संतरा और नीबू के रस तथा सेव, केला आदि के सेवन से ऐल्कॉहॉल की वजह से शरीर में जमा जहर कम हो जाता है.
2. खजूर काफी फायदेमंद रहता है. 3-4 खजूर को आधे गिलास पानी में रगड़कर देने से शराब की आदत छोड़ने में मदद मिलती है.
3. धूम्रपान करना बिल्कुल बंद कर दें. धूम्रपान से ऐल्कॉहॉल लेने की इच्छा प्रबल होने लगती है.
4. आधा गिलास पानी और समान मात्रा में अजवाइन से बने रस को मिलाकर रोजाना एक महीने तक पीने से काफी फायदा मिलता है.

स्वप्नदोष रोकने के उपाय - Swapndosh Rokne Ke Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
स्वप्नदोष रोकने के उपाय - Swapndosh Rokne Ke Upay!

नाइटफॉल या नाइट डिस्चार्ज एक ऐसी स्थिति है जब कुछ पुरुष आमतौर पर सुबह या देर रात के शुरुआती समय में नींद में स्खलन करते हैं. यह आमतौर पर अत्यधिक हस्तमैथुन के पिछले बुरे इतिहास, स्पर्म की चिपचिपाहट के पतले होने, हार्मोन में उतार-चढ़ाव और एक पूर्ण मूत्राशय के कारण लिंग की मांसपेशियों और नसों में कमजोरी के कारण गंभीर हो जाती है. आमतौर पर, पुरुष वीर्य को धारण करने में सक्षम होते हैं लेकिन जब यह अधिक हो जाता है तब यह स्वप्नदोष रूप में समाप्त होता है. अत्यधिक वीर्य प्रवाह और स्वप्नदोष के मामले में, एक व्यक्ति अनिद्रा, चक्कर आना, कमजोरी, स्मृति और दृष्टि की हानि, घुटनों में दर्द, कमजोर यौन अक्षमता, बांझपन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, शिथिलता और तनाव हो सकता है. दुर्लभ मामलों में, एक व्यक्ति वीर्य के साथ मूत्र पारित कर सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से स्वप्नदोष रोकने के उपायों पर एक नजर डालें.

स्‍वप्‍नदोष का उपचार-

यह माना जाता है कि स्वप्नदोष रोकने का सबसे अच्छा तरीका जीवनशैली को बदलना और डॉक्टर के मार्गदर्शन के साथ इलाज करना है। इसमें हस्तमैथुन की आवृत्ति को कम करना और अश्लील और नग्न चित्रों से बचना शामिल है। हालांकि, यहाँ स्वप्नदोष को प्राकृतिक रूप से ठीक करने के कुछ तरीके दिए गए हैं. कई जानकार मानते हैं कि सोने से पहले हस्‍तमैथुन करने से भी स्‍वप्‍नदोष से बचा जा सकता है. हालांकि, लेकिन इस बात को लेकर विशेषज्ञों में एक राय नहीं है.

1. ध्यान से एकाग्रता बढ़ती है और आंतरिक भावनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है. यह पुरुषों को अवांछित गतिविधियों में शामिल होने से विचलित करने में मदद करता है और रात के समय को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी है.

2. व्यायाम और योग व्यक्ति को अपने मन, शरीर और आत्मा पर पूर्ण नियंत्रण रखने की मदद करते हैं. नियमित योग और व्यायाम करने से सेक्स-संबंधी गतिविधियाँ नियंत्रण में होती हैं जो स्वप्नदोष को रोकती हैं.

3. बिस्तर पर जाने से पहले आवश्यक तेलों के साथ स्नान करना सहायक होता है, क्योंकि यह शरीर और मन को शांत करता है और अच्छी नींद में सहायता करता है.

4. आहार में बदलाव से स्वप्नदोष को रोका जा सकता है। जो पुरुष इस समस्या से पीड़ित हैं उन्हें अम्लीय भोजन से बचना चाहिए।

अगर नाइटफॉल जारी रहता है, तो आपको एक सेक्सोलॉजिस्ट से परामर्श करने की आवश्यकता है और अंतर्निहित कारण के उचित उपचार के साथ आप अपनी खोई हुई शारीरिक और यौन शक्ति के साथ अपनी समस्या को पूरी तरह से ठीक कर सकते हैं.

स्वप्नदोष का इलाज करना आसान है और इसे मान्यता दी जानी चाहिए ताकि यह एक आदमी के यौन जीवन को बाधित न करे.

स्वप्नदोष को नियंत्रित करने या रोकने के लिए निम्नलिखित घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं:

1. लौकी में शीतलन प्रभाव होता है, जिससे उस प्रणाली को ठंडक मिलती है जो स्वप्नदोष के लिए जिम्मेदार होते है। इसका उपयोग दो तरीकों से किया जा सकता है, या तो रात को सोने से पहले लौकी का रस पीने या रस को तिल के तेल के साथ मिलाकर मालिश किया जा सकता है।

2. आंवला शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है कि एक ग्लास आंवले का जूस पीने से नाइटफॉल से छुटकारा मिलता है।
3. प्याज और लहसुन कई स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों को ठीक करने के लिए जाने जाते हैं। 3-4 लहसुन की कच्ची लहसुन और सलाद के रूप में प्याज को रात में ठीक करना चाहिए।

4. पहले से भिगोए हुए बादाम, केला, और अदरक के साथ मिलाने पर दूध इस समस्या को खत्म करने में मदद करता है. केले में शीतलन गुण होता है जो समस्या को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा, दही खाना फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें हीलिंग गुण होते हैं जो सिस्टम को ठंडा करते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।

5. अजवाइन और मेथी का रस नाइटफॉल के साथ-साथ शीघ्रपतन में भी बहुत मददगार है. इन रसों को 2: 1 के अनुपात में शहद के साथ मिश्रित किया जा सकता है।

नवजात शिशु की देखभाल - Nawjaat Shishu Ki Dekhbhal!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
नवजात शिशु की देखभाल - Nawjaat Shishu Ki Dekhbhal!

नवजात शिशु जितने ज्यादा छोटे होते हैं, उनकी देखभाल भी बहुत नाजुकता से करनी पड़ती है. माँ और शिशु का रिश्तों सभी रिश्तों से अनमोल होता है. इस रिश्तों को माँ से बेहतर कोई नहीं जन सकता है. बच्चे के जन्म के बाद ही बहुत सावधानी से देखभाल करना चाहिए. ऐसे में शिशु का सम्पूर्ण स्वास्‍‍थ्य उसके जन्म से 28 दिन के बीच निर्धारित होता है. जन्म के बाद शिशु को माँ का दूध प्रयाप्त मात्रा में कैसे मिले, उसके कपडे बदलना, उसका रोना इत्यादि सभी बातों को बारीकी से ध्यान रखना पड़ता है. यदि आपका बच्चे में ऐसी कोई भी बदलाव दिखता है, तो उसे नजरअंदाज ना करें. इसके अलावा नवजात का शरीर बहुत ही संवेदनशील होता है, इसलिए शिशु के कमरे का तापमान का भी ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि यह बच्‍चे के लिए नुकसानदेह हो सकता है. स्वस्थ बच्चों में भी कुछ बातों का खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है. आइए इस लेख के माध्यम से जानें कि नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें.

मां का दूध पिलाना चाहिए.-
बच्चों को धुप में ले जाकर बैठने की प्रकिया को फोटोथेरेपी कहते हैं. नवजात बच्चे को कुछ समय के लिए कपड़े में रख कर धूप भी दिखाएं. इससे बच्‍चे की हड्डियां स्वस्थ होती हैं.
नवजात शिशु को 6 महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए. इसके 6 महीने के बाद शिशु को कुछ हल्के आहार भी दे सकते हैं. इस बात का ख्याल रखें की आहार में कुछ ऐसा ना हो जिससे पाचन में समस्या हो.

पहली बार माँ-बाप बनने पर इन बातों का रखें ध्यान-
चूंकि शिशुओं में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है और संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं. इसलिए यह सबसे महत्वपूर्ण है कि आपके बच्चे को संभालने वाला कोई भी व्यक्ति स्वच्छता का ख्याल अवश्य रखता हो. आपको अपने बच्चे के सिर और गर्दन को हमेशा समर्थन और क्रैडलिंग के बारे में भी सावधान रहना होगा, क्योंकि जन्म के दौरान गर्दन में मांसपेशियों कमजोर होती है और बच्चे केवल छह महीने के बाद ही सिर नियंत्रण करना विकसित करते हैं. अपने नवजात शिशु को प्यार करने या गुस्से में आकार ज्यादा हिलाने की कोशिश न करें. इससे बच्चे के सिर से ब्लीडिंग हो सकती है, जो गंभीर मामलों में मौत का कारण भी बन सकती है. नवजात शिशु को उठाने के लिए बच्चे के पैर में गुदगुदी करें.
उगलना और उल्टी में अंतर नए मां-बाप अक्सर उगलना और उल्टी में अंतर नहीं कर पाते और घबरा जाते हैं. दरअसल जो चीज शिशु को पसंद नहीं आती है वो उसे उगल देता है या थूक देता है. मगर उल्टी अलग चीज है. उगलना और उल्टी करने में अंतर है. शिशुओं में उल्टी आमतौर पर कुछ खिलाने के 15 से 45 मिनट के बाद ही होती है जबकि उगलने की क्रिया खिलाने के साथ ही हो सकती है. इसलिए इस अंतर को समझें. किसी रोग की स्थिति में शिशु कुछ खिलाने के साथ ही उल्टी कर सकता है. मगर उसकी बदबू में थोड़ा अंतर होता है इसलिए इसे पहचाना जा सकता है.

डायपरिंग:
सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि क्या आप अपने शिशु के लिए डिस्पोजेबल या कपड़ा वाले डायपर चाहते हैं. शिशु कम से कम प्रतिदिन दस डायपर से गुजरते हैं (भले ही वे कपड़े या डिस्पोजेबल हों). डायपरिंग करते समय, आपको ध्यान रखना चाहिए कि बदलने वाले टेबल पर अपने बच्चे को न छोड़ें. अपने शिशु के डायपर बदलने से पहले साफ डायपर, डायपर ऑइंटमेंट (रैश के मामले में), फास्टनर, डायपर वाइप्स और गर्म पानी जैसी सभी आवश्यक चीजें रख लें.

नहाना:
नवजात शिशुओं को गर्म पानी के साथ एक स्पंज स्नान करवाना चाहिए और जब तक नाभि पूरी तरह से ठीक नहीं होता है तब तक हल्के साबुन लगाना चाहिए. इसमें लगभग एक से चार सप्ताह लग सकते हैं. नवजात शिशु को ठीक होने के बाद बच्चे को दो या तीन बार नहाना चाहिए, क्योंकि बार-बार स्नान करने से बच्चे की त्वचा को नुकसान हो सकता है.

स्तनपान और डकार:
डॉक्टर्स बच्चे को बोलने पर खिलाने की सलाह देते हैं यानी जब भी आपका बच्चा भूखा हो. रोना, मुंह में उंगलियां डालना या चूसने वाली शोर बनाने से पता चलता है कि बच्चे को भूख लगी है. नवजात शिशु को हर दो घंटे में खिलाना चाहिए.
डकार महत्वपूर्ण है ताकि भोजन के दौरान सेवन हवा को बाहर निकाला जा सके, क्योंकि यह बच्चे को उबाऊ बनाता है. नवजात शिशु की पीठ को पट्टी पर रगड़ने से आमतौर पर उन्हें गैस पास करने में मदद मिलती है.

Retinal Detachment - Know The Symptoms & Treatment Of It!

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MS - Ophthalmology, DNB Ophtalmology
Ophthalmologist, Navi Mumbai
Retinal Detachment - Know The Symptoms & Treatment Of It!

Retinal detachment is an emergency eye condition in which the retina at the back of the eye gets separated from the surrounding tissue and pulls away from its normal position. The retina acts as a light-sensitive wallpaper in the eye, providing a lining for the inside of the eyewall and sending visual signals to the brain. As the retina can't work properly under these conditions, one can permanently lose vision if the detached retina is not repaired immediately.

During the retinal detachment, the retinal cells get separated from the layer of blood vessels which provides oxygen and nourishment. Usually, it begins in form of small torn area of retina known as retinal tears or retinal breaks. This condition, if not treated, leads to retinal detachment and finally permanent vision loss.
Retinal detachment has tell-tale warning signs like an increase in sudden appearance of floaters resembling cobwebs floating in field of vision. It can be coupled with flashes of light or curtain from any direction causing a loss of vision.

Retinal detachment is of three types. The most common form is Rhegmatogenous retinal detachment where a tear allows fluid to get under retina and prevents nourishment to reach retina from retinal pigment epithelium by separating them. In Fractional form, scar tissue on the retina's surface shrinks causing it to separate from the retinal pigment epithelium. This form is most prevalent with diabetes patients. Lastly, in case of Exudative retinal detachment, the fluid leaks into the area under retina without a tear or breaks in the retina. Retinal diseases or trauma to the eye are main causes for Exudative retinal detachment.

Although a person of any age can suffer from retinal detachment, but it is more prevalent in people over the age of 40. People suffering from degenerative myopia or lattice degeneration are more prone to this medical condition. People with family history of retinal detachment are also likely to suffer from the same.

Retinal detachment can be treated in many ways. The most common form is the Laser surgery in which small tears and hole are joined back to the retina. Another method is Cryopexy in which the area around the hole in frozen and helps reattach the retina. Both the above procedure are performed at ophthalmologist's clinic.

Sometimes, one may have to opt for Scleral buckle in which a tiny synthetic band is attached to the outside of the eyeball which gently pushes the wall of the eye in toward the centre of the eye placing the eyewall very close to the detached retina. Another option is vitrectomy surgery to replace the vitreous that fills the centre of the eye and helps the eye maintain a round shape.

A retinal detachment is an emergency medical condition and must be treated immediately to save one's vision. Most people have been successfully treated for retinal detachment, but ophthalmologists cannot always predict how vision will turn out. The visual outcome will not be known for up to several months after surgery. However, the results are best when the retinal detachment is treated as soon as possible.

Premature Menopause - How Is Your Body Affected?

Fellowship in Laparoscopic and Robotic Onco-Surgery, MD - Obstetrics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist, Chandigarh
Premature Menopause - How Is Your Body Affected?

During the natural course of events, a women's body starts its reproductive phase with menarche and at about 50 years of age, attains menopause. This is when the reproductive function ceases and the ovaries stop producing the hormone estrogen and progesterone. In some cases, for various reasons including medical, the ovaries stop functioning earlier, and this is medically termed early or premature menopause. Menopause that occurs before 40 years of age is termed premature menopause; it is due to primary ovarian insufficiency and occurs in 1% of the women.  If it occurs between 45 to 50 years, it is termed early menopause.

Causes: Normal ageing, family history, genetic disorders, autoimmune disorders, toxins, and surgery are some reasons that could lead to premature menopause.

Effects: Estrogen and progesterone have a lot of beneficial effects on a women's body. Reduction in their levels leads to some of the below changes:

- Emotional changes like mood swings, irritability, and in some cases depression, especially in premature menopause.
- Irregular cycles before complete cessation of the menstrual cycles.
- General mucosal dryness leading to vaginal dryness, dry skin, dry eyes.
- There also would be urinary incontinence and reduced sex drive due to reduced hormone levels.
- For women who still would want to have children, infertility would be a big cause for concern. This could lead to other emotional issues, worsening the depression.
- Osteoporosis - Bones lose their density and get weak and are more prone to fracture.
- Cardiovascular health - Post menopause, women are more prone to heart attacks and stroke. Though not fully proven, this is believed to be true as the good role that estrogen plays on blood vessels is negated with menopause.
- Accelerated ageing - Menopause leads to accelerated damage of genetic structures, thereby leading to faster ageing. This also leaves a feeling in the women of being less attractive and less desirable.

There is also a good news, that after menopause women are at lesser risk of cancer - especially breast and ovarian. 

It is not easy for women to handle premature menopause. The body undergoes some changes much earlier than expected, and it requires a lot of support and caring and comforting to come to terms with it - especially if associated with infertility or chemotherapy for cancer. Emotional issues of not being able to have children and feeling less attractive require frank talks to boost the person's confidence and increase self-worthiness.

It is easier said than done, but one of the key ways to handle premature menopause is an open discussion.

Belching - What Can You Do To Prevent It?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, Md - Medicine
General Physician, Patna
Belching - What Can You Do To Prevent It?

After eating a meal to your heart’s content, it is very normal to burp or belch. However, it is normal only when it happens occasionally, or after a meal, for someone used to a contented meal every single time. On the other hand, excessive burping or belching can happen due to two reasons.

  1. Excessive air intake: There are multiple ways that excessive air can reach the food pipe. Sucking on straws, chewing gum constantly and ill-fitting dentures are some common reasons for burping.
  2. Digestive problems: Ulcers in the stomach, prolonged gastric, gallstones and rarely, esophageal or stomach cancers can also cause burping.

When to see a doctor
Check with a doctor if you have persistent burping, followed by a meal or otherwise, and accompanied by the following symptoms.

  1. Nausea
  2. Bloody stools
  3. Abdominal pain
  4. Vomiting
  5. Weight loss
  6. Fever

Preventing belching

  1. Go slow when eating and/or drinking: Most of us are pressed for time and eating and/or drinking has now become a task that needs to be finished quickly. Eating fast causes air to be swallowed, and therefore one of the best ways to stop burping is to eat slowly. Sitting in a calm, relaxing environment when eating also allows one to enjoy the food and avoid or stop burping.
  2. Avoid taliking while eating: There is always so much to catch up, whether at home or outside. So, talking while eating is a common practice. This is not just bad manners, but there is also a lot of air that is swallowed, which leads to burping. A solution is to chew the food properly, which not just helps stop burping, but also aids in better food digestion by mixing it adequately with saliva.
  3. Substitute coke with water: Carbonated drinks are another reason for belching. Replacing them with water, tea, or anything noncarbonated is advisable, not just from burping perspective, but also from the excessive sugar consumption. Carbonated drinks are just sugar solutions, and are absolutely of no nutritive value.
  4. Avoid straw: When possible, drink from a glass and avoid straws. This reduces the amount of gas taken in and helps stop burping
  5. Quit smoking: Quitting it has multiple health benefits, and getting rid of smoking is just one of them.
  6. Dentures: Ill-fitting dentures can be a reason for belching, and so they should be checked and corrected, if required, in a person who has persistent burping.
  7. Chewing gum: Constantly chewing gum contributes to burping, and so avoiding chewing gum or sucking on hard candy is another way to control burping.
  8. Avoid certain foods: Foodstuffs like broccoli, cauliflower, lettuce, sprouts, and lentils can produce excessive gas and should be avoided in people who have persistent burping.

Follow the above steps in your daily routine; still if your burping problem persists, it is time to consult your physician.

Enamel Loss- Ways To Fix It!

BDS, MDS
Dentist, Jaipur
Enamel Loss- Ways To Fix It!

Enamel loss is nothing but tooth-enamel erosion, and this is quite a pathetic kind of oral condition. If the eroded enamel does not get restored, then your oral condition will get deteriorated to a great extent. 
Teeth enamel plays the most important role in protecting teeth and if this layer gets eroded, then your teeth will get heavily damaged. Your teeth will not only get eroded, but the real dental color will also get changed. 

Why enamel erosion occurs? 

-  Drinking excessive hot or cold: your enamel is very much sensitive to hot or cold food items as a result of which email loss is invited. 

-  Having fruit drinks: Citric acid in the fruit drinks is the element that can cause enamel erosion.

-  Sugary diet: Excessive sugary diet is the very prominent cause of this kind of dental condition, and  thus you should take more and more of non-sugary foods.

-  Environmental factors: There are many environmental factors that are responsible for enamel loss, and they are corrosion, stress, tear, wear, friction and others.

-  Medications: Few medications are there that can cause enamel erosion and these medicines are antihistamines, aspirin and many more.

-  Gastrointestinal troubles: These kinds of troubles are prone to the frequent erosion of tooth enamel and thus these problems need to be resolved as soon as possible.  

What are the leading treatments for restoring enamel loss?

-  Using fluoride toothpaste and mouthwash: There are many talented dentists who are strongly recommending the usage of both fluoride mouthwash and toothpaste so that tooth decay can be easily prevented. These products are now commercially available over-the-counter. 

-  Routine dental check-up: Daily dental check-up is needed so that oral condition can be checked so that the causes and signs of enamel loss can be detected, and then only perfect treatments can be easily applied. 

-  Taking vitamin-D supplements: there are many drugs and supplements that are enriched with vitamin-D, and they can be taken on a regular basis so that decayed enamel can be easily restored in a safe manner. Coconut oil can be taken in addition to these supplements for getting greater oral benefits. 

-  Cosmetic restoration options: There are many enamel-restoration options that can be cosmetically performed. Some of the popular options are crowning, filling, and others. On the other hand, leading a healthy lifestyle is also very important in this regard.

First Aid In Heart Attack- How To Administer It?

MBBS, MD- General Medicine, Diploma in Diabetes
General Physician, Vijayawada
First Aid In Heart Attack- How To Administer It?

There was a time when only the elderly were at risk for a heart attack. Today however, anyone can have a heart attack. Symptoms of an oncoming heart attack are often misunderstood. When it comes to first aid for a heart attack, every second is precious and hence it is important to be clear about what a heart attack looks and feels like.

Here are a few symptoms of heart attacks to look out for.

  • Feeling of weight on the chest
  • Stomach pain with nausea and heartburn
  • Radiating pain on the left side of the body, particularly on the arm
  • Dizziness and shortness of breath
  • Pain that moves from the chest to the throat and jaw
  • Extreme exhaustion and weakness
  • Cold sweat

The first thing to do if you or someone around you experiences a heart attack is to call a doctor. Call emergency services and ask for an ambulance to be sent at the earliest. Lie down and try to relax. Any form of exertion can worsen the situation. If you are alone, do not attempt to drive yourself anywhere. If an ambulance cannot get to you, ask someone around to drive you to the doctor.

Chewing on an aspirin immediately after a heart attack can help save a life. Aspirin has blood thinning properties that can increase the supply of blood to the heart. Studies have shown that chewing an aspirin is better than simply swallowing it in case of a heart attack.

If the patient loses consciousness at any point, check their heart rate. In case the person's heart stops beating attempt to perform CPR to restart the heart. This can restore partial supply of oxygenated blood to the heart. To perform CPR have the patient lie down on the ground and kneel beside them. Place your right palm on the center of their chest and place the left hand over it while interlocking the fingers. Keep your arms straight as you press down on the chest at regular intervals. Try and achieve 100 compressions a minute.

Living a healthy lifestyle can lower the risk of suffering from a heart attack. Cholesterol is one of the most common triggers of a heart attack. Eat a diet rich in fiber and low in fats and salt content can lower your cholesterol levels. This combined with regular exercise can also help maintain a healthy BMI that would in turn lower the risk of having a heart attack.

Healthy Eating During Pregnancy!

MBBS, MS - Obs and Gynae, MRCOG(London), DNB, Fellowship In Uro Gynaecology
Gynaecologist, Mumbai
Healthy Eating During Pregnancy!

Keeping healthy during pregnancy depends on both the amount and the type of food you eat while planning pregnancy and during your pregnancy. Some foods are best avoided as they may contain substances that may affect the baby’s development.

To eat healthy, you should aim to do the following:

  1. Base your meals on starchy foods such as potatoes, bread, rice and pasta, choosing wholegrain if possible. These foods are satisfying without containing too many calories.
  2. Eat at least five portions of different fruit and vegetables every day.
  3. Eat a low-fat diet. Eat as little fried food as possible and avoid drinks that are high in added sugars, and other foods such as sweets, cakes and biscuits that have a high fat or sugar content.
  4. Eat fibre-rich foods such as oats, beans, lentils, grains and seeds, as well as wholegrain bread, brown rice and wholemeal pasta. Fibre helps to prevent constipation and also helps to reduce blood glucose and cholesterol.
  5. Eat some protein every day; choose lean meat. Lentils, eggs, nuts, milk cheese, beans and tofu are also good sources of protein.
  6. Eat dairy foods for calcium but choose low-fat varieties such as skimmed milk or low-fat yogurt.
  7. Watch the portion size of your meals and snacks. Do not ‘eat for two’.
  8. Always eat breakfast.
  9. Limit your caffeine intake to 200 milligrams (mg) per day, for example, two mugs of instant coffee. Be aware that other drinks such as tea and energy drinks also contain caffeine.

Most women do not need any extra calories during the first six months of pregnancy. It is only in the last 12 weeks that they need to eat a little more, and then only an extra 200 calories a day, which is roughly the same as two slices of bread.

Healthy weight:

You can find out your healthy weight from your BMI (body mass index). This is a measure of your weight in relation to your height. A healthy BMI is above 18.5 but below 25. Being overweight or underweight carries risks for you and your baby. Trying to lose weight by dieting during pregnancy is not recommended as it may harm your baby. For women with a normal BMI, the ideal weight gain in pregnancy should be between 11.5-16 Kgs. Underweight women should gain 12.5-18 Kg and overweight women may need to gain only 7- 11.5 Kg.

Vitamins and minerals:

Vitamins and minerals play an important role in the baby’s development. During pregnancy, there is increased requirement of folic acid, iron and calcium. Taking prenatal supplements can ensure that you are getting adequate amounts.

Is it safe to eat fish in pregnancy?

In general, eating fish is a healthy option during pregnancy, but eat no more than two portions of oily fish, such as mackerel or salmon, a week. This is because too much of a substance found in oily fish (mercury) can be harmful to an unborn baby’s development. Also, pregnant women should not eat more than two fresh tuna steaks or four medium-sized cans of tuna a week, and should avoid eating shark and swordfish.

Decreasing the risk of infection from food:

Contaminated food can cause infection which can harm your unborn baby. The following can help to reduce the risk:

  1. Drink only pasteurised or UHT milk
  2. Avoid eating ripened soft cheese but hard cheese is fine
  3. Avoid eating undercooked food
  4. Wash all fruit and vegetables, including ready-prepared salads
  5. Cook raw meats and ready-prepared chilled meats thoroughly
  6. Wear gloves and wash your hands thoroughly after gardening or handling soil

Effect Of Genes On Aging Process!

MBBS, MD - Dermatology
Dermatologist, Delhi
Effect Of Genes On Aging Process!

Every living thing goes through a cycle of birth, growth, development, aging, and based on its lifespan, die. Be it an insect with a lifespan of few hours to the giant tortoise who live for more than 150 years. Now what causes ageing has been debated about widely. It is a combination of gradual wear and tear of the body combined with gradually declining pace of replacement of the worn out/missing parts. When younger, the body's ability to replace lost skin or bone is strong and it gradually declines with age.

Recent studies have shown that there is a strong genetic component to ageing. We all have noticed how not everybody ages at the same pace - while some continue to look younger than their biological age, the reverse is also true. Intrigued by this finding, a lot of research have gone into what contributes to ageing. It has been discovered that a lot of ageing factors are inherited, especially from the mother.

Now, a little bit of cellular details. There is a part of the cell that is called mitochondria, which is the energy production unit within each cell. It has been discovered that the DNA of the mitochondria which is mDNA has a lot to do with how a person ages, specifically what is inherited from the mother. If this has undergone mutation, the inherited mutated mDNA accelerates the ageing process.

To add to this, there is also a lot of research studying the details of how young genes look different from old genes. The idea is to study this difference and then find out the difference and then see how we can make the older ones look more like the younger ones. This will indirectly reduce the aged look and produce a younger outlook.

Since the most obvious and apparent ageing is seen on the skin, research is being conducted how the cellular membranes called aquaporins act. These are important for regulation of water movement to and from the cell. It is well known that younger skin is more hydrated compared to older skin, and ways are being identified to keep the older skin more hydrated and thereby produce a younger look.

There is also a lot of correlation between nutrition and environmental factors and the overall ageing process. Genetic mutations are produced by these factors which also lead to accelerated ageing.

While everybody tries to maintain the younger looks, ageing is something inevitable. While we can do a lot of things by modifying our lifestyle and with chemical support, it cannot be completely halted. While we can try to manage the diseases related to old age, ageing may not be something that can be stopped completely.

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