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Orthopedics is a specialization in medical science that primarily focuses upon the diagnosis, moving on to the correction, suggesting preventive measures and treating patients with deform......more
Orthopedics is a specialization in medical science that primarily focuses upon the diagnosis, moving on to the correction, suggesting preventive measures and treating patients with deformities in their bones, joints, muscles, tendon, ligaments, nerves as well as the skin. All these elements make up the musculoskeletal system. Orthopedic Surgeons or Orthopedists are the specialist physicians, who deal with problems related to these and carry out necessary surgical methods like arthroscopic surgery for getting people come out of their problems. Dr. Humayun Ali Shah is an experienced Orthopaedic Surgeon in Kolkata, who currently practices at Apex General Hospital in Baguihati as well as in the Naba Jiban Hospital in Hatibagan. He has even been associated in the Department of Orthopaedics at Sanjiban Hospital in Fuleshwar, Howrah as a Clinical Doctor since November 2012. The main area of interest is joint replacement surgery. Dr. Shah had completed his MBBS and MS in General Surgery from RG Kar Medical College, Kolkata in the year 1989 and 1988 respectively. Following these, he went over to the UK and worked as Orthopaedic trainee in the year 2006-07 at Ninewells Hospital, Dundee. One can physically consult with Dr. Humayun Ali Shah on Mon, Wed and Fri at Apex General Hospital from 12:00 PM to 2:30 PM. You can also book your appointment online at and consult privately.
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Apex General Hospital is known for housing experienced Orthopedists. Dr. Humayun Ali Shah, a well-reputed Orthopedist, practices in Kolkata. Visit this medical health centre for Orthopedists recommended by 80 patients.


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Last 4 days in the morning when I wake up my face start swelling, it's more near my right eye lid and right part of face. After 1 pm swelling starts reducing. Why it's happening? What should I do?

Dentist, Noida
It is difficult to diagnose without checking the patient. It might be because of any infected front tooth. Please visit any near by dentist for a checkup, don't delay.

How Can You Treat Heel Spurs?

MBBS, MS - Orthopaedics, FIOS (UK), FIAS (GERMANY)
Orthopedist, Indore
How Can You Treat Heel Spurs?

For some people, the simple act of walking can be very uncomfortable. This is because they may be suffering from a heel spur. Heel spurs are calcium deposits that cause a bony protrusion on the underside of the heel bone. Heel spurs themselves may be painless but walking or jogging can make the person like a knife or pin is sticking into his or her sole. This may also be felt while standing up after being seated for a long time. Heel spurs do not heal on resting and usually need medical attention. Some ways of treating a heel spur are-

  1. Stretching Exercises: Heel spur exercises help strengthen the tissue in the heel and increases the fascia and Achilles tendon flexibility. This, in turn, helps reduce the pain and prevents a recurrence of the condition. Try standing with both feet apart and flex your knees while squatting. Keep your heels on the ground for as long as possible.

  2. Wearing The Right Shoes: Wearing shoes that do not fit well is one of the leading causes for heel spurs. When buying shoes look for a firm heel counter, a ¾-1 1/2 inch heel, a long vamp, semi-rigid or rigid shank and a toe box that is wide enough to accommodate your toes without pinching them.

  3. Taping or Strapping to Rest Stressed Muscles and Tendons: Taping or strapping your foot tightly can help protect the fascia and allow the spur to heal. It also rests the muscles and tendons and distributes the pressure being put on them.

  4. Shoe Inserts or Orthotic Devices: Using an insole can help cushion the heel and reduce the pain of a heel spur. It also reduces the impact felt while walking or standing.

  5. Physical Therapy: Physiotherapy for heel spurs aims at strengthening the foot and calf muscles. Your doctor will try and gradually increase the possible range of motion and restore muscle control in the foot arch. You will also be taught how to improve your running and landing techniques.

  6. Medication: Over the counter medication like ibuprofen may help temporarily ease the pain caused by heel spurs. In some cases, corticosteroid injections may also be prescribed to reduce the inflammation and pain.

  7. Surgery: If there is no improvement in a heel spur within 9 to 12 months, surgery may be considered to remove the spur or release the plantar fascia. However, this is rare and most heel spurs do not need surgery.

नस दबने का इलाज - Nas Dabne Ka Ilaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
नस दबने का इलाज - Nas Dabne Ka Ilaj!

नसें हमारे शरीर में विभिन्न पदार्थों से संचरण में सहायक होती हैं. इसलिए नसों में आई खराबी की वजह से समस्या गंभीर हो सकती है. नर्व दर्द या न्यूरॉल्जिया की समस्या के दौरान आपके किसी खास नस में दबाव के कारण दर्द होना शुरू हो जाता ता है. न्यूरॉल्जिया में जलन, संवेदनहीनता या एक से अधिक नस में दर्द फैलने की समस्या हो सकती है. न्यूरॉल्जिया से कोई भी नस प्रभावित हो सकती है. नसों में दर्द के सही मतलब और इसके उपचार के बारे में जानने से ही इसका ठीक तरह से इलाज किया जा सकता है. इसलिए इस लेख के माध्यम से आइए हम नस दबने के विभिन्न उपचार जानें.

नस के दर्द के कारण-
ड्रग्स, रसायनों के कारण परेशानी, क्रॉनिक रिनल इनसफिशिएंशी, मधुमेह, संक्रमण, जैसे-शिंगल्स, सिफलिस और लाइम डिजीज, पॉरफाइरिया, नजदीकी अंगों (ट्यूमर या रक्त नलिकाएं) से नस पर दबाव पड़ना, नस में सूजन या तकलीफ, नस के लिए खतरे या गंभीर समस्याएं(इसमें शल्यक्रिया शामिल है), अधिकतर मामलों में कारण का पता नहीं चलता. नस दर्द एक जटिल और क्रॉनिक तकलीफदेह स्थिति है, जिसमें वास्तविक समस्या समाप्त हो जाने के बाद भी दर्द स्थायी रूप से बना रहता है. नस दर्द में दर्द शुरू होने और रोग की पहचान होने में कुछ दिन से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं. नस को थोड़ा सा भी नुकसान पहुंचने पर या पुराने चोट ठीक हो जाने पर भी दर्द शुरू हो सकता है.

जलन की अनुभूति, संवेदनहीनता और पूरे नस में दर्द शरीर के प्रभावित भाग की गति औऱ कार्य-प्रणाली मांसपेशियों की कमजोरी, दर्द या नस की क्षति के कारण अवरुद्ध हो जाती है. दर्द अचानक उठता है और बहुत तेज दर्द होना, जैसे-कोई नुकीली चीज चुभ रही हो या जलन की अनुभूति होती है. यह दर्द लगातार रह सकता है या रुक-रुक कर होता है. छूने या दबाने से दर्द महसूस होता है और चलना फिरना भी कष्टदायक हो जाता है. प्रभावित नस के पथ में दर्द रहता है या यह दर्द बार-बार होता है.

किसी एक जांच से नस दर्द की पहचान नहीं की जा सकती. प्रारंभ में डॉक्टर आपके लक्षणों और दर्द के विवरण के साथ शारीरिक जांच से रोग के पहचान का प्रयास करता है. आपके शारीरिक जांच से पता चल सकता है-

  • त्वचा में असामान्य अनुभूति.
  • गहरी टेंडन रिफ्लैक्स में कमी या मांसपेशियों का कम होना.
  • प्रभावित क्षेत्र में पसीना कम निकलना(पसीना निकलना नस के द्वारा नियंत्रित होता है).
  • नस के पास स्पर्श से दर्द या सूजन महसूस होना.
  • ट्रिगर प्वाइंट या ऐसे क्षेत्र जहां हल्के से छू देने से भी दर्द शुरू हो जाए.
  • दांतों की जांच, जिसमें फेशियल दर्द को जन्म देनेवाली दांतों की समस्याएं शामिल नहीं हैं(जैसे-दांतों में ऐबसेस या फोड़े)
  • प्रभावित क्षेत्र के लाल हो जाने या सूजन आने जैसे-लक्षण, जिससे संक्रमण, ह़ड्डी टूटने या रयूमेटॉइड अर्थाराइटिस की स्थिति की पहचान में सहायता मिले.

नसों में दबाव के कारण होने वाला दर्द की पमरेशानी कम करने के लिए कुछ उपाय जानिए.नस दर्द का इलाज सामान्यतया कठिन है, और प्राय: दर्द से राहत देने वाले इलाजों से इस दर्द में कोई अंतर नहीं आता. आपको कई प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों को आजमाने की आवश्यकता होती है, ताकि पता चल सके कि कौन सी प्रणाली आपके लिए लाभकारी है. कभी-कभी स्वयं या समय के साथ हालत में खुद-ब-खुद सुधार आ जाता है. चूंकि नस दर्द का इलाज आसान नहीं है. इसलिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा.

  • दर्द की तीव्रता कम करना
  • स्थायी दर्द से जूझने में आपकी सहायता करना
  • आपके दैनिक जीवन पर दर्द के प्रभाव कम करना
  • अगर किसी आंतरिक बीमारी(जैसे-डायबिटीज, ट्यूमर) के कारण दर्द हो रहा है तो इसका पता चलने पर अगर इस बीमारी का इलाज संभव है तो इलाज करना.
  • डायबिटीज के रोगियों में शुगर पर कड़े नियंत्रण से न्यूरॉल्जिया में लाभ होता है.
  • कभी-कभी ट्यूमर या किसी अन्य वजह से नस पर दबाव पड़ने की वजह से उसमें दर्द होता है, ऐसी स्थिति में जिस कारण से दबाव पड़ रहा है उसे सर्जरी से हटाने की जरूरत होती

नस पर नस चढ़ना के लक्षण - Nas Par Nas Chadna Ke Lakshan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
नस पर नस चढ़ना के लक्षण - Nas Par Nas Chadna Ke Lakshan!

नस पर नस का चढ़ने को एक संयोग से उत्पन्न बीमारी कहा जा सकता है. दरअसल हमारे शरीर के संरचना और उसमें फैले नसों के जाल से कई बार अजीब परिणाम आने लगते हैं. हालांकि इसका मुख्य कारण शारीरिक कमजोरी को माना जाता है. लेकिन फिर भी इसके कई अन्य संभावित कारणों से इंकार नहीं किया जा सकता है. जब नस पर नस चढ़ जाता है तो उस समय काफी पीड़ा होती है. कई लोग इस तरह की परेशानियों के लिए अपने खान पान पर ध्यान न देने को जिम्मेदार मानते हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही बीमारी के बारे में बताने जा रहे है जो बीमारी है नस पर नस चढ़ना. आपको बता दें की ये बीमारी किसी को भी हो सकती है. इस बीमारी से बेचने के लिए हमें हमारे रहने का तरीका सही रखना होगा. आइए इस लेख के माध्यम से हम नस पर नस चढ़ जाने के कारणों को विस्तारपूर्वक जानें ताकि इस समस्या को ठीक समझकर इसका निदान किया जा सके.

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के लक्षण-
सोते समय यदि हाथ अथवा पैर सोने लगे या सोते हुए हाथ थोड़ा दबते ही सुन्न होने लगते हैं या कई बार एक हाथ सुन्न होता है, दूसरे हाथ से उसको उठाकर करवट बदलनी पड़ती है. हाथों की पकड़ ढीली होना, अथवा पैरों से सीढ़ी चढ़ते हुए घुटने से नीचे के हिस्सों में खिचांव आना. गर्दन के आस-पास के हिस्सों में ताकत की कमी महसूस देना आदि से नस पर नस चढ़ जाती है. इस दौरान कई बार कुछ समय के लिए भयंकर दर्द होने लगता है. लेकिन थोड़ी ही देर बाद सबकुछ सामान्य हो जाता है.

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के कारण-
शरीर में जल, रक्तमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम की कमी से मैग्नीशियम स्तर कम होने, पेशाब ज्यादा होने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स सेवन करने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने , मधुमेह, अधिक शराब पीने से, किसी बिमारी के कारण कमजोरी, कम भोजन या पौष्टिक भोजन ना लेने से या नसों की कमजोरी आदि से नस पर नस चढ़ जाती है.

नस पर नस चढ़ने की बीमारी से कैसे बचें?
सोते समय पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं तथा पैरों को ऊंचाई पर रखें. प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे. सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करे. अगर गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट की करें तो इस समस्या और दर्द दोनों से राहत मिलेगी.आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों, तंतुओं पर खिंचाव दें, आहिस्ता से मालिश करें आदि उपाय से न पर नस नहीं चढ़ती है.

नस पर नस चढ़ने पर कैसा हो आपका भोजन?
भोजन में नीबू-पानी, नारियल-पानी, फलों, विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि शामिल करें. सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें. 2-3 अखरोट की गिरि, 2-5 पिस्ता, 5-10 बादाम की गिरि, 5-10 किशमिश का रोज़ रोज़ सेवन करें, तथा इसके अलावा हमें देशी खाने का उपयोग करना चाहिए. भोजन का सही से व्यवस्थित होना आपको कई अनावश्यक परेशानियों से बचाने का काम करता हैं. इसलिए आपको अपने भोजन को सही ढंग से लेना चाहिए.

I am feeling mild pain in left side below buttocks from last 3-4 months. Specially from waist to hips. I feel pain only when I sit. When I sit on hard surface more stress I feel to urinate and ejucate. due to this pain and stress while sitting, my urination frequency has increased and I am also facing ED. I visited to urology department and several tests have been conducted like blood, urine, urine flow, ultrasound of abdominal, prostate gland, prv, kidney, diabetes etc and all results are normal. However my doctor has prescribed me alfoo 10 mg and modula 5 mg for 10 days. I think alfoo 10 mg is used to treat enlarged prostate gland while my gland is normal 15. 3 cc. I am confused now whether I should take this medicine or not. Further my doctor could not detect my problem.

Homeopath, Noida
I am feeling mild pain in left side below buttocks from last 3-4 months. Specially from waist to hips. I feel pain on...
There are exercises a man can carry out to reduce the effects of ed. The best way to treat erectile dysfunction without medication is by strengthening the pelvic floor muscles with kegel exercises. These are often associated with women looking to strengthen their pelvic area during pregnancy, but they can be effective for men looking to regain full function of the penis. Firstly, find the pelvic floor muscles. You can achieve this by stopping mid-stream two or three times the next time you urinate. The muscles you can feel working during this process are the pelvic floor muscles, and they will be the focus of kegel exercises. One kegel exercise consists of tightening and holding these muscles for 5 seconds and then releasing them. Try to do between 10 and 20 repetitions each day. This may not be possible when you first start doing the exercises. However, they should become easier over time. You should be able to notice an improvement after 6 weeks. Make sure you are breathing naturally throughout this process and avoid pushing down as if you are forcing urination. Instead, bring the muscles together in a squeezing motion. Aerobic exercise, such a jog or even a brisk walk, can also help the blood to circulate better and can help improve ed in men who have circulation issues.

Meri lower back mein pain hai .tight rehta hai .vein mein sensation sa hota hai .week ho gaya.

Ayurveda, Noida
Meri lower back mein pain hai .tight rehta hai .vein mein sensation sa hota hai .week ho gaya.
low back pain is due to posture, so correct your posture, if any kind sensation in vain get mri and x ray to find out cause, do warm oil massage, back exercise will help in such conditions
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Exercises After ACL Surgery!

MSPT (Master of Physical Therapy)
Physiotherapist, Indore

If you’ve recently had acl surgery, exercises are an important part of your recovery, in addition to a physical therapy program.

These level 1 exercises should be done for 1-4 weeks after surgery. The goal of these exercises is to regain neuromuscular control of the quadriceps, strengthen the hip and maintain knee and ankle range of motion on the affected leg.
Perform these exercises 1-3 times per day, only within pain-free range of motion. Stop the activity if it causes increased pain.
Please consult with your doctor before starting any home exercise program. These exercises should not replace instructions from your doctor.

1. Long sitting towel calf stretch-

Sit up with good posture and place towel on the bottom of your foot, while holding on to the ends.
Now pull the towel across the foot, so that your toes are being pulled towards you. Repeat for 2 sets for 30 seconds.

2. Supine hamstring stretch-
Sit up and place towel over your foot, while holding on to the towel with both hands.
Lie down on your back and bring your leg up until you feel a stretch in the back of your leg. Hold this for 30 seconds. Repeat twice, 30 seconds each time.

3. Quad sets-
Lie down on your back, place a small towel roll behind your knee.
Tighten the muscles at the front of your leg, and hold 3-5 seconds. Repeat for 2 sets of 10 repetitions.

4. Ankle pumps-
Lie on your back, or sit in a chair.
Life your ankles and toes up, then point them down. Repeat this for 2 sets of 10 repetitions.

5. Heel slides-
Sit down with a towel over your foot.
Slide your foot back by pulling the towel with your arms, bend your knee as far as you can. Hold it bent for 3-5 seconds. Continue to bend and straighten your knee for 2 sets of 10 repetitions.

6. Prone hip extension-
Lie on your stomach with your head on a pillow.
On your stomach, lift your leg up with your knee completely straight.
Continue this for 2 sets of 10 repetitions.

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