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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of General Physician.Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedicatio......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of General Physician.Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care.
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Himagiri Hospitals is known for housing experienced General Physicians. Dr. Vasundhara, a well-reputed General Physician, practices in Hyderabad. Visit this medical health centre for General Physicians recommended by 66 patients.

Timings

MON-SUN
09:00 AM - 01:30 PM

Location

Stadium Main Road, Gachibowli. Landmark: Beside Petrol Bunk, Hyderabad
Gachibowli Hyderabad, Andhra Pradesh
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Dr. Vasundhara

General Physician
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गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है या गले में कुछ जमा हुआ अनुभव होता है तो यह गले में कफ जमा होने का है। गले में जमा हुए कफ को बलगम के नाम से भी जानते है. गले में कफ जमा होने के प्रमुख लक्षणों में नाक बहना और बुखार भी शामिल है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन यदि यह समस्या लम्बे समय तक बना रहता है तो फिर इससे सांस से जुडी कई समस्याएं हो सकती है. जब आपके नाक या गले के पिछले हिस्से में कफ जमना शुरू हो जाता है तो यह आपको म्यूकस मेम्ब्रेन श्वसन प्रणाली की रक्षा करने और उसको सहारा देने के लिए कफ बनाती है. ये मेंब्रेन नाक, गला, मुंह, फेफड़े, साइनस और नाक की ग्रंथि में होता है. जो एक दिन में कम से कम 1 से 2 लीटर बलगम का उत्पादन करती हैं. बलगम या कफ की अत्याधिक मात्रा होना, परेशान करने वाली समस्या हो सकती है. इसके कारण घंटो बैचेनी रहना, बार-बार गला साफ करते रहना और खांसी जैसी समस्या हो सकती है. ज्यादातर लोगों में यह एक अस्थायी समस्या होती है. हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह एक स्थिर समस्या बन जाती है. जिसके बेहतर उपचार पर थोड़े समय के लिए राहत मिल पाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम गले में कफ के जमने के बारे में जानें.

गले में कफ के जमने का क्या लक्षण है?
बलगम या कफ से भी सांसो में दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि कफ में मौजूद प्रोटीन के कारण बैक्टीरिया पैदा होती है. जब शरीर जरूरत से ज्यादा कफ उत्पादन करती है, तब अत्याधिक कफ आपके नाक के वायुमार्गों में अवरोध पैदा करता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगती है. कफ बनने के कारण नाक रूकने की समस्या काफी असहज और यहां तक कि दर्दनाक स्थिति पैदा कर सकती है. अत्याधिक कफ आपके गले व फेफड़ों में जमा हो सकता है. सामान्य कफ साफ या सफेद रंग का होता है और कम गाढ़ा होता है. जो कफ हल्के पीले या हरे रंग का दिखाई पड़ता है या जो कफ असाधारण रूप से अधिक गाढ़ा होता है, वह बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत देता है.

गले में कफ जमने के कारण-
जब कोई सर्दी-जुखाम या फ्लू, वायरल इंफेक्शन, साइनस जैसी बिमारियों से ग्रसित होता है तो व्यक्ति का बलगम कोल्ड या इंफेक्शन से बीमार होता है, तो उस व्यक्ति का कफ गाढ़ा हो जाता है और उसके बलगम के रंग में भी परिवर्तन आता है. बलगम के चिपचिपा होने के कारण वायरस, धूल या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ बलगम से चिपक जाते है. बलगम का गाढ़ापन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. जब व्यक्ति बीमार पड़ता है तो आपका शरीर कई सारे कणों के संपर्क में आता है जो कफ के साथ चिपकता है और कफ गाढ़ा हो जाता है. वैसे तो कफ आपकी श्वसन प्रणाली का एक स्वस्थ हिस्सा होता है, लेकिन अगर यह आपको परेशान कर रहा है, तो आप इसको पतला करने के या इसे निकालने के लिए कुछ तरीकों को अपना सकते हैं.

खाद्य पदार्थ: – कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते है जो गले में कफ उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता हैं. गले में कफ जमने के लिए मुख्य रूप से डायरी पदार्थ को जिम्मेदार माना जाता हैं. इन खाद्य पदार्थों में कैसिइन नाम के प्रोटीन अणु होते हैं, जो बलगम का स्त्राव बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं. दूध उत्पादों के साथ-साथ कैफीन, चीनी, नमक, काली चाय आदि ये सभी पदार्थ भी अतिरिक्त बलगम बनाते हैं. इसके साथ ही साथ जो लोग डेयरी उत्पादों को छोड़, सोया उत्पादों को अपना लेते हैं, इस स्थिति में उनके शरीर में अस्वस्थ बलगम बनने के जोखिम बढ़ जाते हैं.

गर्भावस्था: – यह देखा गया है की कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान छींकना, नाक रूकना और खांसी आदि लक्षण अनुभव होते हैं. वैसे तो प्रेगनेंसी में इस तरह के लक्षणों को सामान्य माना गया है. बलगम उत्पादन और गाढ़ापन के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन को भी एक कारण माना जाता है.

पोस्ट नेजल ड्रिप: – जब गले और नाक में अधिक कफ जमा हो जाता है तो यह खांसी पैदा करता है. रात के दौरान गले में कफ का उत्पादन होता है और सुबह तक यह गले में जम जाता है.

मौसमी एलर्जी: – मौसमी एलर्जी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं. मौसमी एलर्जी के लक्षण गले में बलगम जमना, छींकना और खांसना आदि समस्या शामिल हैं. ऐसे कई एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ हैं, जो ये लक्षण पैदा करते हैं, इसमें सर्दियों के अंत से गर्मियों तक की अवधि शामिल होती है. पेड़ और फूलों की पराग मौसमी एलर्जी के प्रमुख कारकों में से एक होते हैं और इसके लक्षण तब तक रहते हैं जब तक एलर्जी करने वाले पदार्थ नष्ट नहीं हो जाते.

अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

गर्मी के मौसम में सामान्य पसीना आना तो ठीक है, लेकिन अक्सर लोग जब एक्सरसाइज करने या धूप में जाते हैं तो उन्हें बहुत पसीना आता हैं लेकिन कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा पसीना निकलता है तो ऐसे में शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती है. अधिक पसीना आना और सर्दी में भी पसीना आना एक समस्या हो सकती है. यह समस्या कई बार आपको दुरुगंध का शिकार बना कर आपको असहज कर सकती है. इस लक्षण को हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. लोग इसे बड़ी आम बात समझ कर ध्यान नहीं देते लेकिन आगे जाकर यह किसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है. ज्यादा पसीना आने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इस समस्या को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से बहुत अधिक पसीना आने के विभिन्न पहलुओं को जानें ताकि इस विषय में जानकारी बढ़ाई जा सके.

क्यों आता है बहुत ज्यादा पसीना?
जब अपके शरीर में अत्याधिक पसीना आता है तो आप शारीरिक और मानसिक रुप से असहज महसूस करते है. जब आपके हाथ, पैर और बगलें पसीना से तर-बतर हो जाते हैं तो इस परिस्थिति को प्राइमरी या फोकल हाइपरहाइड्रोसिस के नाम से जानते है. प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस से केवल 2-3 प्रतिशत आबादी प्रभावित है, लेकिन इससे पीड़ित 40 प्रतिशत से भी कम व्यक्ति ही डॉक्टरी सलाह लेते हैं. आमतौर पर इसके कारण का पता नहीं लगता है. यह एक अनुवाशिंक समस्या भी हो सकती है जो परिवार में पहले से चली आ रही हो. यदि अत्यधिक पसीने की शिकायत किसी डॉक्टरी स्थिति के कारण होती है तो इसे सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. पसीना पूरे शरीर से भी निकल सकता है या फिर यह किसी खास स्थान से भी आ सकता है. दरअसल, हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों को मौसम ठंडा रहने या उनके आराम करने के दौरान भी पसीना आ सकता है.

बचने के उपाय-
पसीने से प्रभावित व्यक्ति को बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए का बगल में इस्तेमाल कर सकते हैं. यह व्यक्ति को अत्यधिक पसीने से निजात दिलाएगा। यह अतिसक्रिय पसीना ग्रंथि की तंत्रिकाओं को शांत करता है, जिससे पसीने में कमी आती है.

बोटॉक्स भी हो सकता है इलाज-
प्राइमरी एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस के इलाज के लिए बोटॉक्स भी के विकल्प के रूप में आया है. बोटुलिनम टॉक्सिन का इंजेक्शन बाजुओं में लगाने से पसीने के लिए जिम्मेदार तंत्रिकाएं अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाती हैं. एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, जिससे चार-महीने तक राहत मिल जाती है और शरीर की दुरुगंध से भी निजात मिल जाती है. ललाट या चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने जैसी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति में मेसो बोटॉक्स सबसे अच्छा उपाय है. इसमें पसीने की रफ्तार कम करने के लिए त्वचा के संवेदनशील टिश्यू (डर्मिज) में बोटॉक्स के पतले घोल का इंजेक्शन लगाया जाता है.

इसके अलावा भी हैं उपाय-
एंटीपर्सपिरेंट: जब पसीना ज्यादा निकलता है तो पसीने को कंट्रोल करने के लिए तेज एंटी-पर्सपिरेंट को आजमाया जा सकता है, जो पसीने की नलिकाओं को ब्लॉक कर देते हैं. बाजुओं और बगलों में पसीने के शुरुआती इलाज के लिए 10 से 20 प्रतिशत अल्युमीनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट की मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ मरीजों को अल्युमीनियम क्लोराइड की अत्यधिक मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी जा सकती है. ये उत्पाद प्रभावित हिस्सों में रात के वक्त इस्तेमाल किए जा सकते हैं. एंटीपर्सपिरेंट से त्वचा में खुजलाहट हो सकती है. इसकी अधिकता कपड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. याद रखें: डियोडरेंट से पसीना रुकता नहीं है, बल्कि शरीर की दुरुगंध कम होती है.

दवाओं का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
रोबिनुल, रोबिनुल-फोर्ट जैसी एंटीकोलिनर्जिक दवाएं पसीने की सक्रिय ग्रंथियों को निष्क्रिय करती हैं. हालांकि, कुछ लोगों पर प्रभावी होने के बावजूद इन दवाओं के प्रभाव का स्टडी नहीं किया गया है. इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी सकते है जिसमें शुष्क मुंह, चक्कर तथा पेशाब संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
ईटीएस (एंडोस्कोपिक थोरेसिस सिंपैथेक्टोमी): जब स्थिति गंभीर हो जाती है तो सिंपैथेक्टोमी नामक मामूली सर्जरी प्रक्रिया की सलाह दी जाती है, जब अन्य उपाय असफल हो जाते हैं. यह उपाय उन मरीजों पर आजमाया जाता है, जिनकी हथेलियों पर सामान्य से ज्यादा पसीना आता है. इसका इस्तेमाल चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में भी किया जा सकता है.

Breathlessness

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Chest & TB
Pulmonologist, Faridabad
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When you experience shortness of breath for no reason, you might wonder if there is something to worry. Breathing difficulty (dyspnea) affects around 1 in every 10 adults. The causes are varied, and just like other health problems like dizziness, fatigue, and abdominal pain, shortness of breath too has several causes.

Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to get pregnancy.

BHMS
Homeopath, Noida
Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to g...
1. Don't Overeat 2. Don't take tea empty stomach. Eat something like a banana (if you are not diabetic) or any seasonal fruit or soaked almonds and a glass of water first thing in the morning (within 10 mins of waking up). No only biscuits or rusk will not do. 3. Take your breakfast every day. Don't skip it. 4. Have light meals every 2 hours (in addition to your breakfast, lunch n dinner) e.g. Nariyal paani, chaach, a handful of dry fruits, a handful of peanuts, any fresh n seasonal fruit, a cup of curd/milk etc 5. Finish your dinner at least 2 hours before going to sleep. 6. Maintain active life style. This is most important n non negotiable part 7. Avoid fast foods, spicy n fried foods, Carbonated beverages 8. Take a lot of green vegetables n fruit. 9. Drink lot of water. 10. Curd is good for u. 11. Everyday preferably sleep on same time For more details you can consult me.

Sir I am suffering from sexual problem my penis is very little only 4 inch I want increase it my sex timing is very short time please tell me something idea how to increase my penis please plz sir.

Sexologist, Delhi
Sir I am suffering from sexual problem my penis is very little only 4 inch I want increase it my sex timing is very s...
Dear lybrate-user, if your sex timing is less then maybe you are suffering from Premature Ejaculation. Premature Ejaculation is a problem in which both the partners are not equally satisfied during sexual intercourse. The person is ejaculating before penetration. The length of a non-erect penis doesn't consistently predict length when the penis is erect. If your penis is about 13 cm (5 inches) or longer when erect, it's of normal size. A penis is considered abnormally small only if it measures less than 3 inches (about 7.5 centimeters) when erect, a condition called micro penis. Both the problem have one solution is that Ayurveda. For more information about treatment please consult us privately on Lybrate.
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Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

MD -Homeopathy, BHMS, Certificate Course In Child Counseling & Parenting
Homeopath, Pune
Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

Epilepsy is a disease that affects the brain's nerve cells and triggers the release of abnormal electrical signals. This can cause temporary malfunctioning of the other brain cells and result in seizures and sometimes loss of consciousness. Epilepsy can affect both children and adults.

Causes of Epilepsy

The cause of this condition isn’t very evident; however, few causes of epileptic seizures to metion are brain tumours, injury, infections in the brain or birth defects. Some doctors believe that epilepsy is caused due to genetic mutations and is an outcome of abnormal activity of cells in the brain. Other causes for this condition can be alcohol or narcotics withdrawal and electrolyte problems.

Symptoms

  1. Repeated seizures

  2. Impaired memory

  3. Bouts of fainting

  4. Short spans of blackout

  5. Sudden bouts of blinking and chewing

  6. Panic

  7. Inappropriate repetitive movements

Types of Seizures
A seizure, also known as fit, is usually a brief episode characterised by uncontrollable jerking movement and loss of awareness due to abnormal neuronal activity in your brain. A collective occurrence of these seizures causes epilepsy.

There are three types of seizures based on aetiology:

  1. Idiopathic: This kind of seizure has no apparent cause.

  2. Cryptogenic: The doctors believe that there is a cause for the seizure but cause cannot be detected.

  3. Symptomatic: These seizures occur due to a reason, as a symptom of some neuro-medical condition.

Role of Homeopathy

Homeopathy is a form of healing based upon the principle of ‘Similia similibus curentur’ or ‘like cures like’. It was founded by a German doctor, Dr. Samuel Hahnemann in 1810. Homoeopathy offers vast scope in the treatment of various illnesses, both acute and chronic including epilepsy. Homeopathy takes into account the entire person like the patients family history, past history, etc. Homoeopathic doctors study each case thoroughly, analyze and evaluate the symptoms and then prescribe the medicine.

Homeopaths treat the patient’s mental, emotional and physical make-up i.e. the constitution. This is known as ’constitutional treatment’. Constitutional treatment treats the disease and removes it from its roots. The Constitutional method is employed in the treatment of epilepsy in Homoeopathy. This method is gives amazing results in many cases.

Homeopathy has immense scope in the treatment of Epilepsy. In fresh cases, where the child is new to epileptic treatment, homoeopathy can relieve complaints by giving ‘constitutional treatment’.

In other cases where the child is already taking treatment, homoeopathy can taper off the doses gradually and thus treat the patient effectively. Thus, in both the cases, homoeopathic treatment is beneficial in treating epilepsy.

In either of the cases, a constitutional medicine is given to treat epilepsy. Constitutional treatment relieves the patient from seizures, convulsions, etc. Thus the child can attend school daily and concentrate on his studies. In about 1/3 cases of epilepsy, a surgery known as ‘seizure surgery’ is performed. Regular constitutional treatment is very useful in such cases.

Homeopathic medicines are completely side-effect free and are not habit-forming. They can be taken by children, adults and even by pregnant women. They must be taken only after consultation from a homoeopathic practitioner.

I am having a urinary test result of 5-6hpf pus cells and 0-2 hpf rbc and my epithelial cells are many. Am I pregnant?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MS - Obstetrics and Gynaecology, Fellowship in Gynaecology & Laprascopy
Gynaecologist, Mumbai
I am having a urinary test result of 5-6hpf pus cells and 0-2 hpf rbc and my epithelial cells are many. Am I pregnant?
The urine test report that you have stated does not help in the diagnosis of pregnancy. The detection of pregnancy needs urine pregnancy test result.

Asthma

BHMS
Homeopath, Faridabad
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If you have been diagnosed with asthma, it is important for you to know about the most common triggers of asthma. Asthma is a medical condition, which is characterized by paroxysmal wheezing respiration dyspnoea.

Diabetes & Depression - How Are The Associated?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, HIV Management Course, HIV Update Course
General Physician, Hyderabad
Diabetes & Depression - How Are The Associated?

Diabetes is a state where the body suffers from lack of energy due to poor metabolic state. This is construed as depression in many patients as they already feel lethargic and subdued. The fatigued state of body in diabetes can be alleviated by exercise which raises endorphins - substances which are released in the body especially by exercise - providing us the necessary elation so much necessary for our recovery

Managing diabetes may make a person feel alone and set apart from their friends and family due to the number of dietary restrictions they need to follow. Additionally, if the person has trouble controlling their blood sugar level, it may make him frustrated and anxious. Over time, these negative emotions can build up into depression.

Depression can make a person lose his sense of purpose and can make regular tasks feel like too much to handle. Thus, a depressed person may stop taking care of himself. The lack of energy can lead to a loss of appetite or unhealthy snacking. This can trigger fluctuations in blood sugar levels that worsen diabetes.

Thus, depression and diabetes have a cyclic relationship. The good news is that these two diseases can be treated together and managing one of these diseases can have a positive effect on the other as well.

Here are a few ways to treat diabetes and depression:

  1. Regular Exercise: Regular exercise is very beneficial towards treating, both depression and diabetes. Exercise helps regulate blood sugar levels and hence can help control diabetes. It also helps in reducing excess weight, which can enhance your self image and make you feel happier. Simultaneously, it also releases endorphins or the 'feel good' brain chemical. This can help alleviate depression symptoms.
  2. A Balanced DietA balanced diet is essential for good health and can help manage, both these disorders. Along with a balanced diet, there is also a need to abstain from snacking between meals. Reducing the amount of sugar in your meals helps stabilize blood sugar level and control fluctuations. Stable blood sugar level keep a person from becoming increasingly anxious and can thus prevent depression.
  3. Restful Sleep: A good night's sleep can treat, both diabetes and depression. If you have proper sleep, you will awake feeling refreshed and energetic. This positive energy balances the negativity of depression, lowers the urge to snack and helps in stabilizing blood sugar level.
  4. PsychotherapyPsychotherapy or in particular cognitive behavioral therapyhas been proven beneficial towards treating depression. This in turn gives a person the motivation needed to manage his diabetes as well.

Pancreatitis - Know Signs Of It!

FACRSI (Colo-Rectal Surgery), Fellowship in Minimal Access Surgery(FMAS) & Reproductive Medicine, FAIS, FICS, FIAGES-Advanced Laparoscopy, MBA (Hospital & Healthcare Management), MS - General Surgery
General Surgeon, Bikaner
Pancreatitis - Know Signs Of It!

An inflammation of the pancreas is known as pancreatitis. The pancreas is an organ that produces digestive enzymes. Pancreatitis might start any day and continue for long period and it requires immediate medical attention. It is of two types- acute pancreatitis and chronic pancreatitis. Although the treatment usually requires hospitalization, pancreatitis can be easily stabilized and the underlying cause can be treated thereafter.

CAUSES:

Pancreatitis may be caused due to various reasons:

1. Gall bladder stone: The pancreatic duct lies next to the bile duct. The gallstones enter the small intestine after passing through the common bile duct. Often the stones that remain in the common bile duct have a negative effect on the pancreas, which causes a hindrance to the normal flow of the pancreatic fluids, causing pancreatitis. Also a back flow of the bile into the pancreas can cause pancreatitis. 

2. Alcohol: Long time alcohol use also causes pancreatitis. Alcohol can damage the pancreas tremendously causing it to get inflamed.

3. Other causes: Hereditary disorders in the pancreas, cystic fibrosis, high level of triglycerides, and a few medicines may also cause pancreatitis.


Symptoms

1. The first symptom of pancreatitis is abdominal pain: The pain may be sudden or gradually increasing, but is usually aggravated after eating. It is severe and constant, and may continue for a few days. If you are suffering from pancreatitis, you will feel very sick after a sudden attack and you might require medical assistance immediately.

2. Swollen abdomen: Pancreatitis my cause your abdominal area to swell up and become tender.

3. Nausea: If your abdomen suddenly starts paining due to the onset of pancreatitis, you tend to feel extremely nauseous. You might end up vomiting and may also have violent heaves.

4. Fever: The inflammation will cause you to run a temperature, along with a searing pain in your stomach, which will make you feel extremely uncomfortable.

5. Rapid pulse: Pancreatitis affects the rate at which the heart beats, causing a rapid increase in the pulse rate.

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