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Vijay Nursing Home

Multi-speciality Clinic (General Physician & Gynaecologist)

F-24-25,Rohini Sector-3. Landmark: Near Avantika Chawl, Delhi Delhi
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It is important to us that you feel comfortable while visiting our office. To achieve this goal, we have staffed our office with caring people who will answer your questions and help you ......more
It is important to us that you feel comfortable while visiting our office. To achieve this goal, we have staffed our office with caring people who will answer your questions and help you understand your treatments.
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Vijay Nursing Home is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Ridhi Kathuria, a well-reputed Gynaecologist, practices in Delhi. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 105 patients.

Timings

MON-SAT
09:00 AM - 09:00 PM

Location

F-24-25,Rohini Sector-3. Landmark: Near Avantika Chawl, Delhi
Rohini Delhi, Delhi
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Doctors in Vijay Nursing Home

Dr. Ridhi Kathuria

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology
Gynaecologist
6 Years experience
300 at clinic
Unavailable today

Dr. Vijay

MBBS, MD - General Medicine
General Physician
38 Years experience
200 at clinic
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05:30 PM - 09:00 PM
09:30 AM - 01:30 PM
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Last few days I suffer allergy in inner part my hand .i do not know what medicines treat it.

MD Hom., Certificate in Food and Nutrition, BHMS, Diploma In Yoga, PGDM
Homeopath, Indore
Last few days I suffer allergy in inner part my hand .i do not know what medicines treat it.
For skin problems, we need to see the case to come to any conclusion. Without visualizing the condition, it is difficult to come to any conclusion regarding skin disease. So if possible, do visit the clinic or book an online appointment for the treatment. Fungal infection usually occurs recurrently, so the type of infection needs to be analysed. It may be either fungal, eczema, psoriasis, lupus or any other disease. For this, you need to take proper homeopathic treatment along with maintaining of hygienic conditions.
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Dear sir I got blood in stool. I went Gastrolagent hospital he saw and say there is fissure and files. He suggest to surgery .I want with out surgery to quit my problem. .any medicine. please give me replay.

MBBS, MD - Internal Medicine, Post Graduate Program in Diabetology
General Physician, Delhi
Dear sir I got blood in stool. I went Gastrolagent hospital he saw and say there is fissure and files.
He suggest to ...
You may take laxatives to avoid constipation and take sitz bath ie sitting on s diluted solution of pot permanganate in a basin Just Tell doctor that you want to defer surgery and discuss non surgical options.
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I have hypothyroidism. I use thyronorm. But every now and then I suffered from stomach problem. Sometimes gas. Bloating. .loose motion. .constipation. .irritating stomach infection. No problem found in full abdomen ultrasound.

BHMS
Homeopath, Chennai
I have hypothyroidism. I use thyronorm. But every now and then I suffered from stomach problem. Sometimes gas. Bloati...
Hypothyroidism is a condition in which the thyroid gland is under active and does not produce sufficient amounts of thyroid hormones required in the body. The most cause of hypothyroidism is Hashimoto’s thyroiditis. Hashimoto’s thyroiditis is an auto immune disorder in which the antibodies are produced by the immune system against its own tissue, which in turn attacks the thyroid gland resulting in hypothyroidism. Severe Iodine defficiency can also lead to hypothyroidism. Natural Homeopathic remedies for hypothyroidism are highly effective and especially useful for people who want to avoid the side effects of prescription drugs. Top Homeopathic Remedies for Hypothyroidism Calcarea carb, Sepia ,Lycopodium, Graphites and Nux Vomica are the leading homeopathic remedies for hypothyroidism The normal range of TSH levels is 0.4 to 4.0 milli-international units per liter. You can easily take an online consultation for further treatment guidance and permanent cure without any side effects Medicines will reach you via courier services.
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Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

जब हमारा शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिऐक्ट करता है तो उसे एलर्जी कहते हैं. इसमें शरीर में खुजली होने लग जाती है या फिर पूरे शरीर में लाल चकत्ते निकल आते हैं या उलटियां होने लग जाती हैं. जिन लोगों को धुल से एलर्जी होती है उन्हें घर में साफ-सफाई के दौरान बहुत परेशानी होती है. इस दौरान यदि उनके नाक में धूल चली जाती है, तो उनकी सांसें तेज-तेज चलने लगती हैं और नाक और आंखों से पानी आने लगता है. नियति को हल्के धुएं में भी सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी होने लगती है. ये एलर्जी के लक्षण हैं यानी ये लोग किसी तरह की एलर्जी से पीड़ित हैं.

एलर्जी से बचाव के उपाय
1. बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उन्हें जरूरी चीजें भी दी जानी चाहिए. बच्चों को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिए.
2. बच्चों को धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें. हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें.
3. अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए. बचाव ही एलर्जी का इलाज है.
4. गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए. कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में ड्राइक्लीन करवाते रहें.
5. घर को हमेशा बंद न रखें. घर को खुला और हवादार बनाए रखें ताकि साफ हवा आती रहे.
6. खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं.
7. दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ करते रहें क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है.

एलर्जी का उपचार 
इम्यूनो थेरपी और एलर्जी शॉट्स से भी एलर्जी का इलाज किया जाता है. अगर मरीज की हालत ज्यादा खराब हो, तभी इम्यूनो थेरेपी का सहारा लिया जाता है. यह सेफ तरीका है लेकिन तभी कारगर है, जब किसी ऐसी चीज से ही एलर्जी हो, जिसे नजरअंदाज न किया जा सके. इस थेरपी का असर लंबे समय तक रहता है. कई बार इसका असर 3-4 साल तक रहता है. हालांकि हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है. यह इलाज थोड़ा महंगा होता है. लेकिन यदि आप घरेलु तरीके से कारगर और सस्ता उपचार चाहते हैं तो आप आयुर्वेद का सहारा ले सकते हैं.

आयुर्वेद

  • आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह नीबू पानी पिएं.
  • अगर स्किन एलर्जी है तो फिटकरी के पानी से प्रभावित हिस्से को धोएं. नारियल तेल में कपूर या जैतून * तेल मिलाकर लगाएं. चंदन का लेप भी राहत देता है. इससे खुजली कम होती है और चकत्ते भी कम होते हैं.
  • पंचकर्म का हिस्सा नास्य शिरोधारा भी एलर्जी में भी बहुत मदद करता है. इसमें खास तरीके से तेल नाक में डाला जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया घर में नहीं करनी चाहिए. एक्सपर्ट की देखरेख में इसे करें. 

नेचुरोपैथी और योग
योग और नेचुरोपैथी एलर्जी से मुकाबला करने के लिए एक बेहतर तरीका साबित हो सकता है. इसके विशेषग्य कहते हैं एलर्जी से बचने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. इसके अलावा स्वच्छता भी बहुत जरुरी है. आपको नियमित रूप से रोजाना करीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फायदा होता है क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इसके अलावा प्रदुषण से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नीबू, काली मिर्च और शहद डालकर पिना भी फायदेमंद होता है.
 

Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

मूत्र से संबंधित बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र रो के कारण, लक्षण और घरेलु उपचार को समझने का प्रयास करें.

क्या है मूत्र रोग का कारण?
जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण
मूत्र रोग के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है.

मूत्र रोग के उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

1. पहला प्रयोग
यदि आप केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण के साथ 100 मि.ली.पानी मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ पीसकर उसका पेडू पर लेप करने से पेशाब खुलकर आता है.
2. दूसरा प्रयोग
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.
3. तीसरा प्रयोग
मूत्र रोग को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.
4. चौथा प्रयोग
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.
5. पाँचवाँ प्रयोग
इस तरीके में 50-60 ग्राम करेले के पत्तों के रस को चुटकी भर हींग मिलाकर देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है अथवा 100 ग्राम बकरी का कच्चा दूध 1 लीटर पानी और शक्कर मिलाकर पियें.

अन्य घरेलू उपचार
1. खीरा ककड़ी

यदि रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.
2. मूली के पत्तों का रस
मूत्र विकार में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं. यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.
3. नींबू
नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.
4. पालक
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.
5. गाजर
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.
6. मट्ठा
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.
7. भिंडी
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.
8. सौंफ
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र रोग में राहत मिलती है.
 

6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

MS - General Surgery, MBBS
General Surgeon, Jaipur
6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

Any surgery that requires an incision will involve sutures or staples as the last step of the procedure. This helps close the incision and keep out infections. Taking care of your stitches can help limit scarring and discomfort and speed up the healing process.

Here are a few things to keep in mind.

  1. Keep it clean and dry: For the first few days, use a washed wet cloth to clean the incision site. After a few days, you may start washing the area with soap and water unless advised else wise by your doctor. Ensure that you dry the skin thoroughly after washing it. Avoid baths that involve soaking the area in water. Also, avoid swimming. Do not use any powders, lotions, creams, deodorants etc on the wound site.
  2. Look out for signs of infections: Avoid activities that may involve exposing your wound to dirty water, chemicals, dust etc. This increases your risk of infections. Also look out for signs f infections such as redness, swelling, pus or bleeding, fever or increased pain from the wound. In case you notice such signs, consult your doctor at the earliest.
  3. Do not scratch: As it heals, your skin is likely to turn itchy. However, refrain from scratching so as to reduce chances of infections. Do not try and pull away from the scab but let it fall off on its own. This will also help limit scarring.
  4. Limit contact: Avoid wearing tight clothes or anything that sticks to the skin while your wound is healing. Instead have plenty of loose, comfortable clothes easily accessible. Also, do not take part in close contact sports such as football etc until the stitches have healed completely.
  5. Change your dressing regularly: A dressing should be changed as soon as it gets wet or soaked with blood or other body fluids. Wear clean medical gloves while changing a dressing. When putting on a new dressing do not touch the inside of the dressing or apply any creams on the stitches unless advised so by your doctor. In the case of removable stitches, the doctor will usually remove the stitches after a few days. DO not attempt to pull the stitches out on your own.
  6. Avoid exposing the wound to sunlight: New skin that forms as the incision heals is very sensitive to sunlight and gets sunburnt very easily. Limiting your exposure to sunlight can help reduce the effects of scarring. In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!
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Natural Birth

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology, Gynae-Laproscopy
Gynaecologist, Delhi
Natural Birth


A variety of methods are used during natural childbirth to help the mother. Pain management techniques other than analgesics and epidural analgesia include hydrotherapy, massage, relaxation therapy, hypnosis, breathing exercises, music therapy etc. These days ldr (labour, delivery and recovery) rooms are available in many hospitals for a better experience of the delivery as the husband or any other close relative can be present in these rooms along with the labouring mother throughout labour. The comfort of these rooms along with safe analgesic methods help in increasing the incidence of natural childbirth.

Some myths are attached with labour and the methods used in aiding the mother during labour-
1. Epidural analgesia leads to caesarian sections in most cases.
This belief is still held by some, but recent studies have shown that epidurals do not cause an increase in caesarian sections. In fact this aids in making the labour smoother and by reducing the extreme pain it helps the mother both mentally and physically.
2. Induction of labour always leads to a faster labour.
Some mothers wish for a normal delivery but do not want to wait for natural pains. They want to deliver on the day of their liking. This can be done by induction of labour. But induction of labour does not always work. It works best when the cervix has already begun to soften and dilate. You may go in for your 39 or 40 week appointment hoping for a labour induction only to be told that your cervix is not favourable to be induced
It is also possible to have a failed induction. This means that inspite of giving full dosage of labour inducing drugs you do not get pains at all.
3. Childbirth is best without any medication.
Natural childbirth, with the aid of relaxation exercises and deep breathing in between contractions, offers one option for pain management. But there are situations when labour is much prolonged due to a slight abnormal presentation of the baby’s head, or the uterine contractions are not effective or the mother has got exhausted, here medication will definitely help in aiding the mother to go through the labour and have a normal delivery. Therefore an unmedicated birth is ideal, but a happy, healthy birth is also possible with the use of medicines.
4. Once a caesarian birth always a caesarian birth.
This may or may not be true depending on the reason of your caesarian section. Vaginal births after caesarian are becoming increasingly more common. You will need to discuss with your doctor whether a normal delivery will be possible for you.
8. Next labour will be easier.
This may or may not be true for you. Generally speaking, consequent labours are shorter in duration, but that is not always true. Shorter does not always mean easier. This time your baby could be bigger than your first or the baby’s head could be in a slightly abnormal position leading to a longer labour which could be even longer and more difficult than the previous one. Also if there is a long gap of many many years in between the pregnancies then it may be like the first labour.
All said, always think positive, labour is a wonderful experience. The pain just vanishes on seeing your baby’s face. Take antenatal classes where you are told about various exercises which will help you go through a smooth labour. Discuss with your doctor about various pain relieving methods during labour. God has made all women brave enough to go through a normal and natural childbirth.
 

Iron And Its Efficacy In Human Body

BHMS
Homeopath, Delhi
Iron And Its Efficacy In Human Body
IRON:

Daily requirement: Children: 10-15 mg/day
Adults: 10 mg/day
Premenopausal women: 15 mg/day
Pregnant women: 30 mg/day
Iron is required for
i) Formation of haemoglobin in blood.
ii) For muscular activity.

Sources of Iron:
Red meat.
Chicken
Sea food.
Animals products (eggs).
Green leafy vegetables.
Grains.
Nuts.
Dry fruits, like dates and raisins.
Human milk, which contains about 1 mg/litre

Iron deficiency causes:
Anaemia.
Fatigue.
Paleness
Dizziness.
Irritability.
Palpitation.
Recurrent infections.

Iron in excess causes:
Diarrhoea.
Constipation.
Vomiting
Headache
Dizziness
Stomach cramps.

Diet For Kidney Disease

BHMS
Homeopath, Bahadurgarh

The purpose of this diet is to maintain a balance of electrolytes, minerals, and fluid in patients who have chronic kidney disease or who are on dialysis. *patients who are on dialysis need this special diet to limit the buildup of waste products in their body*. These waste products can also build up between dialysis treatments.

Most dialysis patients urinate very little or not at all. Limiting fluids between treatments is very important. Without urination, fluid will build up in the body and lead to excess fluid in the heart, lungs, and ankles. & it is too dangerous for our health.

When you have chronic kidney disease, you need to make changes in your diet, including:

  •  Limiting fluids
  •  Eating a low-protein diet
  •  Restricting salt, potassium, phosphorous
  •  Getting enough calories if you are losing weight

Your recommended diet may change over time if your kidney disease gets worse, or if you need dialysis.

Other Diet Tips:

1. Salt is a major cause. So restrict your daily intake. The lesser, the better! low-salt substitutes are no good either, since they contain high levels of potassium.

2. Potassium levels can be high in severe renal failure or for those on dialysis. Very high levels are dangerous and can cause cardiac arrest.

3. Excess phosphorus can cause total kidney failure as well as bone disease and heart ailments. If phosphorus may still build up in your body. When your kidneys aren't functioning well enough, you may need dialysis to eliminate the extra phosphorus. But dialysis alone can't do the job.

4. Calcium is another concern for kidney patients, causing serious bone disease in later years if not controlled.

5. Fluid intake must also be monitored. If fluid retention is a problem, limit salt intake.

Healthy food-

  • Cabbage. High in vitamin k, vitamin c and fiber, cabbage is also a good source of vitamin b6 and folic acid. Low in potassium and low in cost, it’s an affordable addition to the kidney diet.
  • Cauliflower. Cauliflower is high in vitamin c and a good source of folate and fiber.
  • Garlic. Garlic helps prevent plaque from forming on your teeth, lowers cholesterol and reduces inflammation. 
  • Onions. Onions are low in potassium and a good source of chromium, a mineral that helps with carbohydrate, fat and protein metabolism.
  • Apple. High in fiber and anti-inflammatory compounds really helps a lot in.
  • Blueberries. Blueberries are a good source of vitamin c; manganese, a compound that keeps your bones healthy; and fiber, and may also help protect the brain from some of the effects of aging.
  • Cherries*. Cherries have been shown to reduce inflammation when eaten daily.
  • Egg whites. Egg whites are pure protein and provide the highest quality of protein with all the essential amino acids. For the kidney diet, egg whites provide protein with less phosphorus than other protein sources such as egg yolk or meats.
  • Fish. Fish provides high-quality protein and contains anti-inflammatory fats called omega-3s. The healthy fats in fish help fight diseases such as heart disease and cancer. Omega-3s also help lower low-density lipoprotein or ldl cholesterol, which is bad cholesterol, and raise high-density lipoprotein or hdl cholesterol, which is good cholesterol.

Ailments From Change Of Weather

B.H.M.S., Post Graduate Certificate In Nutrition, Obesity & Health
Homeopath, Indore
Ailments From Change Of Weather
  • Temperatures are beginning to rise gradually and soon we will be welcoming summers. But this change of weather phase often leads to a fresh spurt of infections mainly viral with symptoms such as headaches, bodyache, cough cold and flu like symptoms. Also respiratory and skin allergies tend to get worse at this time. 
  • With the days being hot and nights and early mornings cold it is difficult for the body to adjust to the environment. It is essential that we keep warm at these times to avoid sudden temperature drop in the body and exposing it to infection. 
  • Also eat healthy and avoid outside food at all times. Keep away from cold water and cold drinks yet. It will again mess up with your body temperature. 
  • There are quite a few homeopathic medicines which help in ailments from change of weather, or cloudy weather, or when the days are hot and nights cold. 
  • It is advisable to take homeopathy treatment for chronic or frequently repeating ailments as they can be kept at bay with homeopathic treatment.
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