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Arya vaidya is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Gopalakrishnan, a well-reputed Ayurveda, practices in Chennai. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 106 patients.

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T.Nagar Chennai, Tamil Nadu - 600017
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चेहरे का कालापन कैसे दूर करें - Chehre Ka Kalapan Kaise Door Karen!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
चेहरे का कालापन कैसे दूर करें - Chehre Ka Kalapan Kaise Door Karen!

चेहरे का कालापन कई लोगों के परेशानी का कारण बन जाता है. यदि हम इस कालापन को दूर करने के उपायों की बात करें तो ये बहुत आसान है और हमारे आसपास मौजूद चीजों से ही हो सकता है. अगर किसी के चेहरे पर एक स्वाभाविक चमक दिखे तो लोग ऐसे चेहरे की तारीफ़ करते हैं. इसीलिए लोग अपने चेहरे पर चमक लाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ये चमक प्राकृतिक तरीके से आए. बाजार में मिलने वाले उत्पादों से चमक तो आती है लेकिन इसका दुष्प्रभाव भी हॉट है. इसलिए आइए इस लेख के जरिए हम चेहरे का कालापन दूर करने के विभिन्न उपायों पर के नजर डालें.

1. बेसन का उपयोग
बेसन भी चेहरा साफ़ करने वाला एक प्रचलित सामग्री है. दो चम्मच बेसन में गुलाब जल डालकर पेस्ट तैयार करें और इस पेस्ट को चेहरे पर सूखने तक लगाए रखें. फिर त्वचा को हल्के गर्म पानी से साफ़ कर लें.

2. संतरे का छिलका
संतरे का छिलका भी चेहरे को साफ़ करने वाली सार्वाधिक इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के रूप में प्रचलित है. इसके लिए आपको एक बड़ा चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर, एक चम्मच शहद, एक चुटकी हल्दी, नींबू के जूस की कुछ बूँदें और पानी को मिश्रित कर लें. फिर इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और बीस मिनट तक सूखने के लिए ऐसे ही छोड़ दें. अब इस फेस पैक को पानी से धो लें.

3. एलोवेरा से
एलोवेरा एक प्राचीन सामग्री है जिसके अनेक औषधीय इस्तेमाल हैं. चेहरा साफ़ करने के लिए दो चम्मच एलो वेरा जेल और दो चम्मच ब्राउन शुगर को आपस में अच्छे से मिलाकर इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और स्क्रब की तरह इससे अपने चेहरे पर कुछ मिंट तक रगड़ें. फिर स्क्रब को गुनगुने पानी से धो लें. अब पूरा चेहरे धोने के बाद चेहरे को फिर से ठंडे पानी से धो लें.

4. चावल के आटे का उपयोग
आटे का चावल भी चेहरे की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए दो चम्मच चावल का आटा, एक चम्मच खीरे का जूस और एक चम्मच नींबू का जूस मिलाकर एक मुलायम फेस पैक तैयार करें. अब इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए इसे लगा हुआ छोड़ दें. अब अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें.

5. मुल्तानी मिट्टी
ये एक जाना-माना और प्राचीन तरीकों में से है. इसके कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हैं. इसके लिए आप दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी और तीन चम्मच संतरे का जूस को एक साथ मिलाकर मुलायम पेस्ट बनाएं. अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए लगा हुआ छोड़ दें. अब अपने चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें.

6. दही
दही आसानी से सबके घरोंन में उपलब्ध होता है इसलिए ये भी एक आसान तरीका है. इसके लिए आपको दो चम्मच दही और एक चम्मच शहद को मिश्रित करके एक अच्छा पेस्ट तैयार करना है. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाए रखने के बाद अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

7. दूध
चहरे की सफाई के लिए दूध एक लोकप्रिय पदार्थ है. दूध का इस्तेमाल करने के लिए एक चम्मच दूध और एक चम्मच शहद को मिलाकर मुलायम पेस्ट बनाएं और तब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर हल्के हाथ से रगड़ें. 15 मिनट तक ऐसे ही लगा हुआ छोड़ने के बाद चेहरे को पानी से साफ़ कर लें. अगर आपकी तेलिये त्वचा है तो लो फैट दूध का इस्तेमाल और अगर रूखी त्वचा है तो फुल क्रीम का इस्तेमाल करें.

8. जीरा
अब तक जीरा का इस्तेमाल आपने मसाले के रूप में किया होगा लेकिन अब हम आपको इसे चेहरा साफ़ करने के इस्तेमाल करना बताएंगे. एक चम्मच जीरा के बीज को दो कप पानी में डालकर उबालें. अब इस मिश्रण से अपने चेहरे को धोएं.

9. जई
जई के इस्तेमाल से भी आप चहरे की सफाई कर सकते हैं. इसके लिए तीन चम्मच जई, दो चम्मच गुलाब जल और दही का मिश्रण तैयार करें. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाए रखें.इसके बाद अपने चेहरे को पानी से धो लें.

10. अंडे का उपयोग
चेहरे को साफ़ करने के लिए अंडे को भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए आपको एक अंडे को फोड़कर कटोरे में झागदार और मुलायम बनने तक चलाते रहें. फिर इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर सूखने दें. इसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लें.

11. गाजर, टमाटर और खीरा
गाजर, टमाटर और खीरा के इस्तेमला से भी आप अपने चेहरे को साफ़ कर सकते हैं. इसके लिए आपको 1 एवोकैडो, 1 मध्यम आकार का उबला हुआ गाजर, 1 बड़ा चम्मच क्रीम, 1 अंडा और 1 चम्मच शहद को अच्छी तरह मिश्रित करके 15 मिनट तक लगाने के बाद ठंडे पानी से धो लें. इसी तरह से आप टमाटर का भी पेस्ट बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा खीरे का इस्तेमाल करने के लिए आपको तीन चम्मच खीरे का जूस और एक चम्मच नींबू का जूस मिश्रित करके इसमें रुई डुबाकर चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट के बाद इसे धो लें.

12. ग्रीन टी
चेहरे को साफ़ करने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल करने के लिए 2 इस्तेमाल की हुई ग्रीन टी बैग, 1 चम्मच नींबू का जूस और 1 चम्मच शहद की आवश्यकता होगी. टी बैग को काटकर उसमें से पाउडर को निकाल लें और इसमें नींबू का जूस और शहद को डालें फिर इसे अच्छी तरह से मिला दें. अब इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब चेहरे को पानी से धो

चिकन खाने के फायदे - Chicken Khane Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
चिकन खाने के फायदे - Chicken Khane Ke Fayde!

चिकन की लोकप्रियता मांसाहारी खाद्य पदार्थों में काफी है. दुनिया भर में इसकी माँग बढ़ने के कारण उत्पादन में वृद्धि करना पड़ा था. इसलिए बड़े पैमाने पर चिकन की खेती के लिए कई नस्लों को जन्म देना पड़ा जिनमें अमेरिकी, भूमध्यसागरीय, अंग्रेजी, एशियाटिक, प्लायमाउथ रॉक, वायंडोटे, रोड आइलैंड रेड, न्यू हैम्पशायर, ब्लैक कोचीन, रेड मलय गेम फ़ॉल और लेघर्न आदि शामिल हैं. इतनी अलग तरह की वैरायटी होने के बावजूद भी इसमें हमारी हेल्थ के लिए निम्न पोषण मूल्य होते है जो इस प्रकार है -100 ग्राम चिकन की बात करें तो इसमें 65 ग्राम मॉइचराइज़र, 215 कैलरीज, 18 ग्राम प्रोटीन, 15 ग्राम फैट 4 ग्राम ट्रांस फैट, 75 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल, 11 मिलीग्राम कैल्शियम, 0.9 मिलीग्राम आयरन, 20 मिलीग्राम मैग्नीशियम, 147 मिलीग्राम फॉस्फोरस, 189 मिलीग्राम पोटेशियम, 70 मिलीग्राम सोडियम और 1.3 मिलीग्राम जिंक के साथ-साथ विटामिन सी, थायामिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन बी-6, फोलेट, आदि मात्रा में उपलब्ध होते है. अगर विटामिन की बात करें तो इसमें विटामिन बी-12, विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन डी और विटामिन k पाया जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम चिकन खाने के फायदों को विस्तार से जानें.

1. प्रोटीन के लिए-
चिकन शरीर में प्रोटीन की मात्रा में अहम भूमिका निभाता है. इसके 100 ग्राम में 18 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है, यह मात्रा किसी के भी शरीर के लिए बहुत अहम होती है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो चिकन अमीनो एसिड से बना होता है, जिससे प्रोटीन बनता है और यह हमारी मांसपेशियों के लिए बहुत मददगार सिद्ध होता है.

2. वजन कम करने के लिए-
आज के समय में मोटापा बहुत ही बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका कारण लाइफस्टाइल का खराब होना है. ऐसे लोग जो वजन घटाने की सोच रहे है उनके लिए चिकन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. ऐसे में इसे अपनी डाइट में शामिल करने से काफी लाभ मिलता है. इसकी हाई प्रोटीन मात्रा वजन घटाने में प्रभावी होती है. हाल ही में हुई स्टडीज की माने तो नियमित रूप से चिकन खाने से वजन कंट्रोल में रहता है.

3. कोलेस्ट्रोल कैंसर
हाल ही में हुई स्टडीज की माने तो रेड मीट का सेवन करने वाले लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है. लेकिन चिकन के साथ मछली खाने के मामलों में देखा गया कि इस प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो जाता है. इसलिए रेड मीट से बेहतर, चिकन का सेवन करना है.

4. विटामिन और मिनरल के लिए
हमारे शरीर को कई तरह के विटामिन और मिनरल की जरूरत होती है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमें कई तरह के काम करने के लिए एनर्जी की जरूरत होती है. इसलिए किसी भी मानव शरीर को कई तरह के विटामिन और मिनरल की आवश्यकता होती है, जो चिकन में पूर्ण रूप से उपलब्ध होते है. यह कई तरह के रोगों जैसे - इम्यून सिस्टम स्ट्रोंग करना, माइग्रेन दर्द, हाई कोलेस्ट्रोल, डायबिटीज, स्किन डिस्आर्डर, मोतियाबिंद, कैल्शियम और हड्डी मजबूत करने में बहुत ही लाभ देता है.

5. कम कोलेस्ट्रोल में मदद करता है
चिकन की तुलना में रेड मीट में अधिक ट्रांस फैट, कोलेस्ट्रोल की मात्रा बहुत अधिक होती है. जबकि चिकन में यह बहुत कम होती है, जो हार्ट रोग और कोलेस्ट्रोल कम करने में काफी मददगार साबित होती है. डॉकटरों के अनुसार मछली और चिकन का सामान्य मात्र में सेवन करना चाहिए. अधिक मात्रा हार्ट ओर कोलेस्ट्रोल का खतरा बढ़ा सकती है.

6. सर्दी व खांसी के लिए
नाक बंद होना, गले में कफ आदि जैसी समस्याओं से राहत प्रदान करने के लिए गर्म चिकन का सूप काफी लाभ देता है. इसलिए जब भी आपको सर्दी खांसी जैसी समस्या हो आप इसकी सहाता से उसे दूर कर सकते हैं.

7. ब्लड प्रेशर सामान्य करने में
विदेशों में हुए शोधों में देखा गया है कि बल्ड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए चिकन का नियमित सेवन काफी लाभ देता है और यह अच्छा स्त्रोत भी होता है. शोध में शामिल लोगों ने कम फैट वाली डाइट, हरी सब्जियां, फल और ड्राई फूट्स का सेवन साथ में किया था.

चर्बी की गांठ का इलाज - Charbi Ki Gaanth Ka Ilaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
चर्बी की गांठ का इलाज - Charbi Ki Gaanth Ka Ilaj!

चर्बी की गाँठ के बनने को यदि हम चिकित्सकीय भाषा में समझें तो इसका अर्थ है मांस के अंदर फैट निर्मित होना. एक रोचक तथ्य यह भी है कि यह देखने में हमारे शरीर की त्वचा के भीतर हुए फोड़े के जैसा ही लगता है. यह हमारे शरीर के किसी भी भाग में हो सकते हैं. हालांकि चर्बी की गाँठ अक्सर गर्दन या बाहों पर ही दिखाई पड़ते हैं. आप इसे एक तरह का ट्यूमर भी कह सकते हैं जो हमारी चमड़ी के निचली परतों में चर्बी की गाँठों के रूप में धीरे-धीरे जमा होता जाता है. यह भी हैरान करने वाला तथ्य है कि चर्बी की गाँठ का मोटापे से कुछ भी लेना-देना नहीं है. इन गाँठों में किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता है और यह गांठे ज्यादातर गर्दन, हाथ और पैरों पर पायी जाती हैं. कुछ लोग इन गाँठों को देखकर परेशान हो जाते हैं कि कहीं ये कैंसर तो नहीं. लेकिन ऐसा नहीं है, चर्बी की गाँठ और कैंसर की गाँठों में सबसे बड़ा फर्क होता है कि चर्बी की गाँठ की गांठें मुलायम होती हैं और हिलती हैं जबकि कैंसर वाली गाँठ सख्त होती हैं और वह हिलती नहीं हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम चर्बी की गाँठ के इलाज के विभिन्न तरीकों और इसके होने के कारणों के बार में जानें ताकि इस विषय में जागरूकता फैल सके.

चर्बी की गाँठ होने का कारण-
चर्बी की गाँठ की गांठें आपकी त्वचा के अंदरूनी हिस्से में होती हैं जो एक से तीन सेंटीमीटर तक मोटी हो सकती हैं. इन छोटी गाँठों में ना तो कभी दर्द होता है और ना ही ये गांठे कभी कोई नुकसान पहुंचाती हैं.

जब यह गांठें बड़ी हो जाती हैं तब ये थोड़ी बुरी सी दिखने लगती हैं बस यही एक परेशानी सामने आती है. चर्बी की गाँठ या चर्बी की गाँठ बनने का सही कारण आज तक पता नहीं चल पाया है, इसीलिए इन गाँठों का सही कारण बता पाना बेहद कठिन हैं. कुछ लोग बोलते हैं कि मोटापे की वजह से ये गांठे हो जाती हैं लेकिन चर्बी की गाँठ का मोटापे से कोई सम्बन्ध नहीं है.

चर्बी की गांठ का घरेलू इलाज है सुबह की दौड़-
सबसे पहले तो आप ये जान लीजिये कि ये गांठे चर्बी की होती हैं अर्थात अगर चर्बी पिघलेगी तो यह गांठे भी पिघल जायेंगी. तो सबसे पहले सुबह उठकर दौड़ना शुरू कीजिये जिससे आपके शरीर में जो फालतू चर्बी है तो कम होना शुरू हो जायेगी. एक सप्ताह में ही देखते ही देखते आपकी चर्बी की गाँठ की गांठे छोटी होती चली जायेंगी. अगर 2 महीने तक आपने रोजाना दौड़ लगायी तो ये गांठें बिल्कुल पिघल जायेंगी. इसलिए रोजाना 5 से 10 मिनट दौड़ जरूर लगायें.

1. तला भुना और जंक फूड कम खायें
यूँ तो चर्बी की गाँठ का सही कारण डॉक्टरों को भी नहीं पता होता लेकिन डॉक्टर हमेंशा सलाह देते हैं कि तला भुना खाना और जंक फूड से दूरी ही बनाये रखें. आपको यकीन ना हो तो आप एक सप्ताह रोजाना खूब तला भूना और जंक फूड खाकर देखें. आप देखेंगे कि आपकी गांठे और बड़ी होने लगी हैं. इसलिए बाहर की तली भूनी चीज़ें और जंक फूड खाना तुरंत बंद कर दें.

2. आटा और शहद का लेप
ये बहुत ही आसान घरेलू तरीका है. आटा तो सबके घरों में होता ही है और शहद आप बाजार से ला सकते हैं. एक कटोरी में थोड़ा सा आटा लें और इतनी ही समान मात्रा में इसमें शहद मिला लें. अब दोनों को घोलकर एक लेप तैयार करें और इस लेप को अपनी गाँठों पर लगाएं और ऊपर से किसी नैपकिन से ढक लें ताकि मक्खियाँ ना बैठें. इसे आप 2 से 3 घंटे ऐसे ही छोड़ दें और अगर आप फ्री हैं तो सारा दिन लगा रहने दें. शाम को इसे छुटा लें और अगले दिन फिर से यही प्रक्रिया करनी है. आप देखेंगे कि कुछ सप्ताह में गांठें गायब होने लगेंगी.

3. सर्जरी से गांठे निकलवाना
काफी लोगों की गांठे बड़ी -बड़ी हो जाती हैं तो यह दिखने में बहुत गन्दी लगने लगती हैं इसलिए डॉक्टर सर्जरी का रास्ता अपनाते हैं. सर्जरी की सहायता से गांठ वाली जगह पर छोटा सा चीरा लगाकर गाँठ को बाहर निकाल दिया जाता है. लेकिन सर्जरी के बाद यह गारंटी नहीं होती कि गाँठ फिर से नहीं होंगी क्यूंकि कई केसों में यह देखने में आया है कि सर्जरी के कुछ समय बाद फिर से गांठे बनने लगती हैं.

4. सुईं की सहायता से गांठे निकालना
चर्बी की गाँठ की सर्जरी कराने से शरीर पर निशान बन जाते हैं इसलिए डॉक्टर इन गाँठों का इलाज करने के लिए एक नयी तकनीक अपनाते हैं जिसमें गाँठों में सुईं डालकर इनमें से चर्बी बाहर निकाल दी जाती है. इससे शरीर पर निशान नहीं बनते और काफी लोग इस इलाज को अपनाते भी हैं लेकिन इस इलाज के लिए डाक्टरी परामर्श बेहद जरुरी है.

दांत सफाई युक्तियाँ - Teeth Cleaning Tips In Hindi!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
दांत सफाई युक्तियाँ - Teeth Cleaning Tips In Hindi!

हर कोई चाहता है की उसके दांत सफेद और आकर्षक हो, क्योंकि कोई भी व्यक्ति सबसे पहले आपके चेहरे की मुसकराहट पर ही पड़ती है. एक आकड़े के अनुसार, वर्ष 2015 में, अमेरिका के लोगों ने केवल दांतों को सफाई करने में लगभग 11 बिलियन डॉलर से अधिक रुपये खर्च कर दिए. इसमें घर पर इस्तेमाल करने वाले व्हाइटनिंग प्रोडक्ट पर 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक का खर्च शामिल था.

  • जब आपके दांतों को सफेद करने की बात आती है, तो ऐसे बहुत सारे प्रोडक्ट है जिसका आप चुनाव कर सकते हैं.
  • हालांकि, अधिकांश व्हाइटनिंग प्रोडक्ट आपके दांतों को ब्लीच करने के लिए केमिकल का उपयोग करते हैं, जो कई लोगों के लिए समस्या का कारण बन सकता है.
  • यदि आप सफेद दांत चाहते हैं, लेकिन रसायनों से भी बचना चाहते हैं, तो यह लेख कई विकल्पों को सूचीबद्ध करता है जो प्राकृतिक और सुरक्षित हैं.

पीले दांत का कारण क्या है?

  • ऐसे कई कारक हैं जिनके कारण दांत पीले होते हैं और उनकी चमकदार, सफेद चमक खो जाती है.
  • कुछ खाद्य पदार्थ के कारण तामचीनी में दाग लग सकते हैं, जो आपके दांतों की सबसे बाहरी परत है. इसके अतिरिक्त, आपके दांतों पर पट्टिका का निर्माण उनके पीले दिखने का कारण बन सकता है.
  • इस प्रकार के मलिनकिरण का उपचार आमतौर पर नियमित क्लींजिंग और व्हाइटेनिंग उपचार के साथ किया जा सकता है.
  • हालांकि, कभी-कभी दांत पीले दिखते हैं क्योंकि कठोर तामचीनी नष्ट हो जाती है, जिससे दांतों के नीचे की सतह दिखने नजर आने लगता है. डेंटिन एक स्वाभाविक रूप से पीला, बोनी टिश्यू है जो तामचीनी के नीचे स्थित है.

यहां 7 सरल तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अपने दांतों को प्राकृतिक रूप से सफेद कर सकते हैं.
1. ऑयल पुल्लिंग इस्तेमाल करें

  • ऑयल पुल्लिंग एक पारंपरिक भारतीय लोक उपचार है जिसका उद्देश्य मौखिक स्वच्छता में सुधार करना और शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को निकालना है.
  • इस अभ्यास में बैक्टीरिया को हटाने के लिए आपके मुंह में चारों ओर तेल से गरारे करना होता है. बैक्टीरिया के कारण पट्टिका का निर्माण हो सकता है जो आपके दांतों के पीला होने का कारण बन सकता है.
  • परंपरागत रूप से, भारतीय ऑयल पुल्लिंग के लिए सूरजमुखी या तिल के तेल का उपयोग करते थे, लेकिन इसके लिए किसी भी प्रकार के तेल को उपयोग किया जा सकता है.
  • नारियल तेल एक लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि इसमें एक सुखद स्वाद है और कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है.
  • नारियल का तेल लॉरिक एसिड में भी उच्च होता है, जो सूजन को कम करने और बैक्टीरिया को मारने की क्षमता के लिए जाना जाता है.
  • कुछ अध्ययनों से पता चला है कि दैनिक ऑयल पुल्लिंग से मुंह में बैक्टीरिया को कम किया जाता है, साथ ही पट्टिका और मसूड़े की सूजन से राहत प्रदान करता है.
  • स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स मुंह में बैक्टीरिया के प्राथमिक प्रकारों में से एक है जो पट्टिका और मसूड़े की सूजन का कारण बनता है. एक अध्ययन में पाया गया है कि तिल के तेल के साथ रोजाना गरारे से लार में स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स को बहुत कम किया है.


2. बेकिंग सोडा के साथ ब्रश
बेकिंग सोडा में प्राकृतिक सफेदी गुण होते हैं, यही वजह है कि यह कमर्शियल टूथपेस्ट में एक लोकप्रिय घटक है. यह एक हल्का अपघर्षक है जो दांतों पर सतह के दाग को दूर करने में मदद कर सकता है.
इसके अतिरिक्त, बेकिंग सोडा आपके मुंह में एक क्षारीय वातावरण बनाता है, जो बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है. विज्ञान ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि प्लेन बेकिंग सोडा के साथ ब्रश करने से आपके दाँत सफेद हो जाएंगे, लेकिन कई अध्ययनों से पता चलता है कि बेकिंग सोडा के साथ टूथपेस्ट का महत्वपूर्ण सफेदी प्रभाव है.

3. हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग करें
हाइड्रोजन पेरोक्साइड एक प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट है जो आपके मुंह में बैक्टीरिया को भी मारता है.
वास्तव में, लोग बैक्टीरिया को मारने की क्षमता के कारण घावों कीटाणुरहित करने के लिए वर्षों से हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग कर रहे हैं. कई कमर्शियल व्हाइटनिंग प्रोडक्ट में भी हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है.

4. एप्पल साइडर सिरका का उपयोग करें
ऐप्पल साइडर सिरका का इस्तेमाल सदियों से एक कीटाणुनाशक और प्राकृतिक सफाई उत्पाद के रूप में किया जाता रहा है. एसिटिक एसिड, जो सेब साइडर सिरका में मुख्य सक्रिय घटक है, प्रभावी रूप से बैक्टीरिया को मारता है. सिरका की जीवाणुरोधी गुण वह है जो आपके मुंह को साफ करने और आपके दांत को सफेद करने के लिए उपयोगी है. गाय के दांतों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सेब साइडर सिरका का दांतों पर विरंजन प्रभाव पड़ता है. हालांकि, उन्होंने यह भी पाया कि सिरका दांतों को नरम कर सकता है.

5. फलों और सब्जियों का उपयोग करें
फलों और सब्जियों में उच्च आहार आपके शरीर और आपके दांतों दोनों के लिए अच्छा हो सकता है.
हालाँकि, आपके दाँत को ब्रश करने का कोई अन्य विकल्प नहीं है लेकिन कुरकुरे, कच्चे फल और सब्जियों को चबाने से पट्टिका को रगड़ने में मदद मिल सकती हैं.

विशेष रूप से, स्ट्रॉबेरी और अनानास दो फल हैं जिन्हें आपके दांतों को सफेद करने में मदद करने का दावा किया गया है.

High Fibre Diet - Can It Benefit Your Heart?

Cardiologist, Navi Mumbai
High Fibre Diet - Can It Benefit Your Heart?

Most people associate fibre to be good for the digestive system. It helps to add roughage and therefore helps in avoiding constipation. When we dig deeper, the fibre seems to do good not just to the stomach but to the heart as well. Those who are prone to develop heart disease should make an attempt to include more fibre in their diet and reap the rich benefits it offers.

There are two classifications of fibres

  1. Dietary
  2. Functional 

Dietary are found in diet products and functional being added fibre through various food supplements. Soluble and insoluble fibre, based on their solubility in water. Most foods contain some amounts of both. The insoluble one has more digestive benefits, as it adds to the roughage. Both types have cardiac benefits.

Read on to know some of the cardiac benefits of fibres.

  1. Reduces cholesterol: There is good cholesterol which is essential for the body, and there is bad cholesterol causes heart disease. What fibres do is reduce the amount of bad and overall cholesterol in circulation. The fibre binds to the cholesterol and removes it from the body, which otherwise would get into circulation and lead to plaque formation and heart disease.
  2. Reduces blood pressure: Because the cholesterol does not circulate in the blood stream, the blood is not as viscous and therefore the vessels exert much less pressure to allow for free flow. A diet change to whole grains can show a marked difference in people with hypertension.
  3. Weight management: Eating fibre means more bulk and fewer calories so that a person feels full after eating smaller amounts. This is a great way to lose weight and bring preexisting heart disease under control.
  4. Stroke prevention: The circulating cholesterol usually gets sluggish and settles down along the walls of the blood vessels. This attracts more cholesterol, which eventually forms what is knowns as plaque. When this plaque attains a considerable size, it gets dislodged, circulates in the blood stream, and can reach any of the vital organs. When it reaches the heart or brain, it can lead to heart attack or stroke. By removing the cholesterol which leads to all these complications, fibre reduces the incidence of stroke and heart attacks.
  5. Management of diabetes: Blood pressure, increased weight, and heart disease all are predisposing factors and have common contributing factors as does diabetes. Controlling all these helps in prolonging the onset of diabetes and reducing its severity too.

High-fiber diet mainly reduces cholesterol which helps in multiple ways to maintain not just a healthy body but also improves the overall quality of life.

Filler Injections - Know More About Them!

MBBS, PGDCC - Post Graduate Diploma in Clinical Cosmetology, Fellow Hair Transplant Surgery
Trichologist, Pune
Filler Injections - Know More About Them!

In today's contemporary times, our outer appearance plays a huge role in determining our path of success. Looking good in many ways has become essential for leaving a lasting impression. Nowadays, age is no longer a factor for looking or feeling beautiful. While beauty lies in the eye of the beholder, the onus to maintain that beauty lies with ourselves. Numerous grooming centres and salons are spread all over the street these days to cater to all our beauty needs. Gone are the days when dressing up and putting on make up were scoffed at. Why then do we tolerate wrinkles and scars just because time has decreed so?

With all kinds of correctional therapies and treatments, our skin can be as smooth and glamorous as ever. One of the most popular trick in this regard is filler injections.

What are Filler Injections?

Filler injections enable us to redefine those aspects of our faces, which have been the causes of consternation for a long period of time. These injections makes it possible to cover up unwanted wrinkles, smoothen lines and remove pitted scars. They can also be used to make the lips look fuller. These injections, when injected under the skin, raise up that area, lending it a more wholesome appearance. It is however,  transient in nature and often requires repeated surgeries. While some of the most common aftermaths of this are redness, swelling or itchiness, none these last more than a day.

It is therefore,  a very safe beauty therapy for giving the furrowed skin a new leash of life. Many have vouched for how the filler surgeries have renewed their self confidence. However, there are a few risk factors that one must be mindful of before opting for a filler surgery.

Risk factors of Filler Injections:

Filler injections make the skin prone to certain allergies and rashes or even flu-like symptoms. Infections, bleeding and inflammation are other repercussions of a filler surgery. Filler injections contain Hyaluronic acid, collagens, fat cells and man-made polymers. In case one's skin reacts to any of these ingredients, then one must resort to expert care. However, most of these outbreaks are temporary in nature and this treatment is easily reversible in case one chooses to do so

Acne & Pimples - Can Homeopathy Cure It?

BHMS, MBAHCS, B.Sc. in Biology
Homeopath, Delhi
Acne & Pimples - Can Homeopathy Cure It?

Acne and pimples mostly occur due to hormonal changes occurring in the body. They are most prominent among teenagers undergoing hormonal transition. The growth hormones become ultra active and the oil glands present in the skin produce more. The glands present under hair follicles are infected and get inflamed, resulting in pimples. Pimples are a nightmare for teenagers, who are conscious about their look and appearance. Eruptions of pimples of different sizes, blisters and rashes of black or red colours are bound to worry look-conscious individuals. Acne and pimples do not usually have easy solutions or quick remedies.

When it comes to treatment of acnes and pimples, Homeopathic medicines are considered the most effective and paramount. Homeopathic cure does not intend to quick-fix  acne and pimples. The objective being the correction of inner causes, it allows the pimples to heal slowly on their own instead of taking any medicine of high dose. The process might take some time, but it surely is the most effective. The problem gets solved from its roots. Scars from previous eruptions are also permanently  healed using homeopathic medicines. Homeopathy is, therefore, the best way to cure acnes and pimples. 

POPULAR HOMEOPATHIC REMEDIES FOR ACNE AND PIMPLES.

Here is a list of the most common solutions for acne and pimples and what they indicate:

1. Sulphur

- It is a very common cure, especially for chronic cases of acne
- The eruptions cause great pain.
- They are present in the form of abscesses.
- Patient is vulnerable to cold and pain. Increased rate of perspiration.
- Patient tends to get agitated and irritates very easily


2. Silicea

- In cases where there is pus formation
- The best homeopathic medicine for acne
- Increased rate of perspiration. The patient cannot bear cold at all.
- Skin turns pale and tender.

3. Pulsatilla  

- For cases where the intake of rich junk  food and indigestion are the causes of acne. 
- Also in cases of girls suffering from menstrual problems
- Symptoms include decreased thirst.
- Patient is usually very sensitive to heat

4. Nux Vomica

- For cases where acne formation is because of gastric disruptions.
- Skin seems to appear red and blotchy
- Caused because of having too much spicy food
- Signs of constipation and over sensitiveness to cold

5. Antimoniumcrudum

- Formation of tiny red pimples all over the face
- Very irritable in nature
- Arthritic pain in fingers and loss of appetite
- White, thick coating on tongue

6. Bovista

- Formed due to cosmetic use, especially during summer
- Skin tends to itch
- Cheeks swell up and become pale
- Makes patient restless.

Homeopathy is certainly the best way to deal with and to get rid of unwanted, ugly acne, which ruin your face. There are more homeopathic cures for other types of acne and pimples for which you can consult any homeopathy physician.

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Aromatherapy - Knowing The Benefits Of It!

MD - Ayurveda, BAMS, Post Graduate Diploma in Nutrition and Dietetics
Ayurveda, Bangalore
Aromatherapy - Knowing The Benefits Of It!

Aromatherapy is an ancient practice that dates back to ancient times across many cultures. This is a practice where concentrated oils are used to treat many imbalances and disorders within the body. The oils emit a fragrance or aroma, through which many important molecules enter your blood stream which have a healing effect. The oils can be applied on the skin and the aroma is then absorbed directly into the body through it. They can also be used as an aromatic agent where you need to sniff them in order for the molecules to get inside the body and then be absorbed into your blood.

What kind of oils are generally used in aromatherapy?
Aromatherapy uses essential oils similar to the ones used for massage in many other forms of alternative medicine such as Ayurveda and Chinese medicine. These oils have the organic compounds within the plants or respective sources concentrated into a small dose so it can pass on the benefits of those compounds to you, healing your body. Some of the types of oils used in aromatherapy are –
1. Peppermint oil
2. Tee tree oil
3. Lavender oil
4. Frankincense oil
5. Lemon oils among many others

How are essential oils made?
Essential oils are made from natural ingredients such as herbs and resins of different plants. These can be extracted from the following sources of a plant, tree or herb:
1. Flowers
2. Seeds
3. Fruits
4. Leaves
5. Bark
6. Roots
7. Stems etc.

Aromatic oils tend to be powerful as a lot of ingredients go into the making of a small quantity of oil. It is estimated that it takes multiple kilos of an ingredient to make only a few milliliters of an essential oil. Due to the immense concentration of the powerful organic compounds created by this, organic oils are very effective and thus potent in curing ailments. The compounds are separated through a distillation process that separates the oils from the other components.

How and where are essential oils in aromatherapy effective?
Aromatherapy is very effective in dealing with lesser ailments and also as a supplementary form of treatment for other larger problems such as recovery form surgery and pain relief. Some of the more common areas where aromatherapy is very helpful are:

1. Relieving and reducing stress
2. Relief from joint pain
3. Resisting Cold and flu like infections
4. Building the immunity of the body
5. Improving the appearance and health of your skin by fighting wrinklesskin infections and inflammation
6. Reduce pain from inflammation and other disorders
7. Corrects and properly regulates hormone production within the body
8. Helps with gastrointestinal problems as well as improving digestion among many other such benefits

Certain specific types of essential oils and their benefits in aromatherapy
1. Lavender oil: Helps heal burns and cuts quicker, relaxes your body and improves your mood
2. Peppermint oil: Helps with digestion, builds up immunity, and helps with the ability to focus among others
3. Rosemary oil: Helps build hair strength, improves memory and brain function in general
4. Sandalwood oil: Improves skin quality, fights inflammation and wrinkles and also acts a as a libido booster
5. Rose oil: Extremely effective for combatting skin problems as well as for natural glow of the skin
6. Tea tree oil: An excellent immunity booster, Tea tree oil also has antifungal and antimicrobial properties which can fight off infections and cure the ailments much quicker.

5 Ways To Deal With Anxiousness In Kids!

MBBS, Structure of Intellect learning Specialist, Membership
Psychiatrist, Delhi
5 Ways To Deal With Anxiousness In Kids!

Worrying is a natural tendency among children. While some worrying helps children to excel, too much worrying can lead to anxiety related disorders. From friendship woes to homework to fear of failure, there could be a lot of factors that can lead to anxiousness in a kid. This problem is mostly witnessed in school going, children. Some of the common symptoms that are portrayed include the need to be perfectionists, seeking of constant reassurance, getting sick worrying too much, scared of participating in a group event.

How to prepare your child to overcome anxiety?

  1. Help them prepare: One major cause of anxiousness in a child is ill preparation. Be it tests or essays, if a child has not prepared well, he tends to get nervous and suffer from anxiousness. The solution is to teach them various study techniques such as flashcards and quizzes. If this is done regularly and reviewed meticulously, your child will get over the fear of failing and perform better.
  2. Teach them to focus: Losing focus is a major tendency among kids who tend to suffer from anxiety related disorders. Keeping the concentration going is a major skill that needs to be taught by parents. Kids often go blank during tests thinking others are far smarter than they are. Some good method to tech focus is to teach them reverse counting, slow breathing technique and frequent consumption of water.
  3. Pass on the anxiety: Anxiousness has to be passed in form of something. Certain activities, therefore play great strokes in addressing anxiousness. Teach your kids to distress in the form of TV or teach them to write when they are anxious. This not only takes off anxiety from the equation, it helps a kid to relax without the fear of failure.
  4. Reassurance: Kids suffering from anxiousness often need repeated reassurance about the task in hand. The task here for a parent is to make their kid understand that failure will not impact their relationship with their parents. Often the failure of letting someone down makes a kid anxious. Constant reassurance will curtail the tendency. This being said, parents should ensure that this doesn’t become a habit for the kid. The idea is to make them comfortable and not letting your child dependent on you.
  5. Relaxation techniques: A study published by the Journal of School Counseling argued that kids who practice relaxation techniques are far less likely to suffer from anxiety and stress related disorders as compared to their peers. Some of the relaxation techniques that can be easily learned and practised include breathing exercises, meditation, yoga and so on. This exercise helps children to focus and concentrate more.


 

Fiber Consumption - How To Increase It?

Registered Dietitian, P.G.Dip in Dietetics, B.H.SC.-Food Science & Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Ahmedabad
Fiber Consumption - How To Increase It?

The human body is designed to process foods with the help of fibers. The benefits of fibers are being recognized widely, and people are being advised to use more fibers.  Per day, the body requires about 25 to 30 g of fiber per day.

The body requires two types of fibers - soluble and insoluble. The soluble ones absorb water during digestion, contribute to stool bulk, and are believed to reduce cholesterol levels. Fruits, vegetables, legumes, oats, and barley are good sources of soluble fibers.

The insoluble ones are required for good movement of food through the intestines.  These are also found in fruits, vegetables, and whole grains like wheat, rice, barley, oats, etc.

It takes a little planning to ensure your food is fibrous, but the benefits will be lot and long lasting.  Follow some of the following simple steps and your will see them for yourself:

Vegetables:  On a lighter note, make sure each meal of yours is as colorful as possible.  Include good amounts of carrots, radish, greens, legumes, tomatoes, cabbage, and any vegetable that you like in each meal.  This ensures that you get all the fiber and nutrients that you want in a meal.  Baked, boiled, raw - choose any form that you like.

Fruits - It is advisable to eat a raw fruit as compared to having its juice. The fiber content gets reduced when you convert it to a juice.  Try not to discard the peel, unless it is not edible at all, pineapple or jackfruit for example.  Fruits, along with vegetables, form the most natural and best source of fiber.  About 5 servings of fruits and vegetables per day will get you all the fiber you need for a day - 25 to 30 g per day.  Berries, pears, prunes, figs, apples, oranges, apples, pears, mangoes, pineapples - take your pick.

Whole grains:  Whether you are picking up bread, noodles, cookies, or a packet of pasta, make sure they are made of whole grains and not refined flour.  Include one cereal in your breakfast.  Oats, barley, wheat germ powder, flaxseeds can all be good sources of fiber. Replace white rice with brown rice to get more fiber.

Water:  Though not a direct contributor to fiber, increasing the water intake makes the fiber from the above mentioned foods more effective. It promotes better food passage through the intestines and contributes to better stool.  It also reduces the bloated feeling that you get with increased fiber.

Try to gradually make these small changes to your diet and you will see the benefits almost immediately.  Try including more fibrous foods to also prolong your hunger pangs, breakfast being the best way to start.  
 

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