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Varsha Family Clinic

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543, Thayappa Layout, Near Thanisandra Bus Stop, Rachenahalli Main Road Bangalore
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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of General Physician . Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experien......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of General Physician . Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and financial concerns.
More about Varsha Family Clinic
Varsha Family Clinic is known for housing experienced General Physicians. Dr. Fathima Anthony, a well-reputed General Physician, practices in Bangalore. Visit this medical health centre for General Physicians recommended by 41 patients.

Timings

MON-SAT
06:30 PM - 08:30 PM 09:30 AM - 01:00 PM

Location

543, Thayappa Layout, Near Thanisandra Bus Stop, Rachenahalli Main Road
Thanisandra Bangalore, Karnataka - 560077
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Doctor in Varsha Family Clinic

Dr. Fathima Anthony

dnb , dfid
General Physician
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इरेक्टाइल डिसफंक्शन क्या है - Erectile Dysfunction Kya Hai!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
इरेक्टाइल डिसफंक्शन क्या है - Erectile Dysfunction Kya Hai!

नपुंसकता को इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी कहा जाता है. जब किसी पुरुष को यौन संभोग के दौरान निर्माण जारी रखने या जारी रखने में समस्याएं आती हैं, तो वह इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) से पीड़ित हो सकता है. इस समस्या के कारण कई कपल्स (जोड़ों) के रिश्ते में दरार पड़ जाती और रिश्ते टूटने तब की नौबत आ जाती है. हालाँकि, लिंग में हमेशा उत्तेजना बना रहें जरुरी नहीं होता है. कभी-कभी लिंग में उत्तेजना ना आना कोई गंभीर समस्या नहीं होती है. यदि पेनिस का इरेक्शन बनाए रखने में कई बार असमर्थ होते है, तो यह सामान्य समस्या होती है. इसके लिए तनाव भी एक कारण हो सकता है. लेकिन निरंतर होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या किसी स्वास्थ्य समस्या के खतरे की तरफ इशारा करता है, जिनके इलाज की आवश्यकता होती है. यह भावनात्मक या रिश्तों से संबंधी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है, जिन्हें डॉक्टर को दिखाना पड़ सकता है. इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कुछ प्रमुख कारणों में अत्यधिक शराब पीना, धुम्रपान करने, थकावट, चिंता करना इत्यादि शामिल है. इसलिए इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहलें अपनी जीवनशैली में बदलाव करना जरुरी होता है. हालांकि इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या अगर जारी रहती है, तो इसकी जांच एक डॉक्टर द्वारा करवानी चाहिए. ईडी का परिणाम हृदय रोग जैसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के कारण हो सकता है, इस प्रकार समस्या के साथ जल्द से जल्द डॉक्टर से चर्चा की जानी चाहिए।

समस्या के कारणों और सीमा के अनुसार डॉक्टर एक प्रकार के उपचार की सिफारिश करेगा जिसमें मौखिक दवा, लिंग पंप, लिंग इम्प्लांटेशन और यहां तक कि सर्जरी भी शामिल हो सकती है. तनाव और चिंता से पीड़ित पुरुषों को मनोवैज्ञानिक परामर्श की सिफारिश की जाती है. कम आत्म-सम्मान भी ईडी का कारण बन सकता है. परामर्श प्रभावी ढंग से पुरुषों को उनके मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को सुलझाने और ईडी को दूर करने में मदद करता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बारे में जानें ताकि इस विषय में लोगों की जानकारी बढ़ाई जा सके.

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के प्रकार
1. प्राइमरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन –
प्राइमरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन में वो पुरुष आते है, जोज कभी भी पेनिस के इरेक्शन बनाए रखने में असमर्थ होते हैं.

2. सेकेंडरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन – इस प्रकार में व्यक्ति शुरुआत एं इरेक्शन बनाए रखने में सक्षम होते हैं, लेकिन बाद में असमर्थ हो जाते हैं. इस स्थिति को सेकेंडरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन के नाम से जाना जाता है. प्राइमरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन कभी-कभार होती है. यह हमेशा मानसिक कारकों या नैदानिक रूप से कुछ स्पष्ट शारीरिक विकारों के कारण होता है. द्वितीय इरेक्टाइल डिसफंक्शन अधिक सामान्य स्थिति है और इसके 90 प्रतिशत मामलों में कार्बनिक एटीयोलॉजी होती है. सेकेंडरी इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित होने वाले ज्यादातर लोग रिएक्टिव साइकोलॉजी विकसित कर लेते हैं जो मिलकर इस समस्या को पैदा करती हैं.

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण
आप भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित हो सकते है, यदि आप नियमित रूप से लिंग में उत्तेजना की कमी का अनुभव करते हैं, यौन गतिविधि में रूचि की होती है और इरेक्शन को बनाए रखने में कठिनाई होते है.

इरेक्टाइल डिसफंक्शन से संबंधित अन्य समस्या
सेक्सुअल डिसऑर्डर में शामिल हैं:-

समय पूर्व स्खलन.
स्खलन में देरी.
कभी कभी पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त करने के बाद भी संभोग सुख प्राप्त करने में असमर्थता कुछ अन्य भावनात्मक लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे संकोच, शर्म, लज्जा, या परस्पर बातचीत की कमी.
अगर किसी व्यक्ति को ये लक्षण नियमित रूप से हो रहे हैं, तो उसमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित मान लिया जाता है.

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण
सामन्य इरेक्शन के कार्य को नीचे दी गई प्रणालियों से जुड़ी किसी भी समस्या द्वारा प्रभावित किया जा सकता है –

  • ब्लीडिंग
  • नर्व की क्षति
  • हार्मोन

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कई संभावित कारण हैं. इसमें भावनात्मक और शारीरिक दोनों डिसऑर्डर को शामिल कर सकते हैं. ज्यादातर इरेक्शन डिसऑर्डर वेसल्स, न्यूरोलॉजिक, साइकोलॉजिक और हार्मोन संबंधी डिसऑर्डर से संबंधित होते है. कभी-कभी ड्रग का इस्तेमाल करना भी एक कारण हो सकता है. कुछ सामान्य कारण हैं:

  • हार्मोनल डिसऑर्डर – टेस्टिक्युलर विफलता, पिट्यूटरी ग्लैंड से संबंधित समस्या या अन्य प्रकार की दवाओं के सेवन से टेस्टोस्टेरोन (पुरुष सेक्स हार्मोन) में कमी हो सकती है.
     
  • डिप्रेशन – इरेक्टाइल डिसफंक्शन का एक सामान्य कारण है. डिप्रेशन एक शारीरिक विकार है साथ ही मानसिक विकार से भी संबंधित है. डिप्रेशन के शारीरिक प्रभाव भी हो सकते हैं. अगर आप यौन समस्या से परेशान हैं, तो इसके शारीरिक प्रभाव भी हो सकते हैं.
     
  • शराब की आदत – लंबे समय से शराब पीने की आदत के कारण भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन से ग्रसित हो सकते है. चाहे सेक्स करने के दौरान ब्लड में अल्कोहल भी ना हो.
     
  • परिसंचरण संबंधी समस्याएं – इरेक्शन तब होता है जब लिंग में ब्लड भर जाता है. ब्लड भरने के बाद पेनिस के निचे लगी वाल्व बंद हो जाती है जिससे ब्लड अंदर ही रुक जाता है. डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और एथेरोस्क्लेरोसिस आदि ये रोग पेनिस इरेक्शन की इस प्रक्रिया में इंटरैक्ट कर सकते हैं. ऐसी परिसंचरण समस्याएं इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए प्रमुख कारण होती हैं. अक्सर इरेक्टाइल डिसफंक्शन को कार्डियोवास्कुलर डिजीज का पहला ध्यान देने योग्य लक्षण माना जाता है.
     
  • सर्जरी – पेल्विक सर्जरी और विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर के लिए प्रोस्टेट की सर्जरी करने से वे नसें क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिनकी इरेक्शन प्राप्त करने और बनाए रखने में आवश्यकता पड़ती है.
     
  • रीढ़ की हड्डी या पेल्विक इंजरी – इनमें चोट लगने से इरेक्शन को उत्तेजित करने वाली नस कट सकती है.
     
  • पेरोनी डिजीज– पेनिस के अंदर स्कार टिश्यू विकसित हो जाते है.
     
  • धूम्रपान – सिगरेट आदि पीने से ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं. जिससे पेनिस में ब्लड का लीकेज कम हो जाता है और इस कारण से इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो जाता है.
     
  • परफॉरमेंस एंग्जायटी - सेक्स करने के दौरान अपने परफॉरमेंस को लेकर हमेशा तनाव या चिंता बना रहता है. यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए एक प्रमुख कारण माना गया है. अगर ऐसा लगतार बना रहता है, तो सेक्स की पूर्वानुमान तंत्रिका प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करती हैं और इरेक्शन नहीं हो पाता है. यह सारी प्रक्रिया डिसऑर्डर साइकिल के रूप में काम करने लगती हैं.
     
  • स्थितिगत साइकोलॉजिकल समस्याएं – ऐसी समस्याएं कुछ लोगों को विशेष स्थितियों में ही होती हैं. रिश्तों में समस्या होने के कारण कुछ पुरुष अपने साथी के साथ पूरी तरह से इरेक्शन प्राप्त नहीं कर पाते है, लेकिन किसी और के साथ इरेक्शन की समस्याएं नहीं होती है.
     
  • मेडिकेशन – इसके नीचे कुछ प्रकार के ड्रग्स के बारे में बताया गया है, जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बन सकते हैं.
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द्विध्रुवी विकार कारण, लक्षण और उपचार - Dwidhruvi Vikar Karan, Lakshan Aur Upchar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
द्विध्रुवी विकार कारण, लक्षण और उपचार - Dwidhruvi Vikar Karan, Lakshan Aur Upchar!

द्विध्रुवी विकार (Bipolar Disorder) एक गंभीर मानसिक रोग है, जिसमें बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति की मनोदशा असामान्य रूप से बदलती है. इस बीमारी में वे कभी बहुत खुश, सक्रिय, उन्माद में रह सकते हैं और फिर इस स्थिति से वे उदास, निराश, निष्क्रिय, अवसाद में आ सकते हैं. फिर वे दोबारा से खुश हो सकते हैं. बीच में उनकी मनोदशा अक्सर सामान्य होती है. खुशी की मनोदशा को मेनिया और उदासी की मनोदशा को अवसाद कहते हैं. आगे हम द्विध्रुवी विकार के बारे मैं जानेंगे.

द्विध्रुवी विकार के लक्षण-
द्विध्रुवी विकार के लक्षण जीवन में कभी भी बचपन से 50 वर्ष के उम्र तक में उभर सकते हैं. हालांकि यह अक्सर किशोरावस्था के आगे व वयस्कता के शुरुआत में होता है. पर बच्चे व व्यसकों को भी यह हो सकता है. बीमारी हो जाती है तो यह बीमारी अक्सर जीवन भर रहती है.

द्विध्रुवी विकार से पीड़ित व्यक्ति की मनोदशा असामान्य रूप से बदलता हुआ प्रतीत हो सकता है. वह कभी एकदम खुश या उन्माद की स्थिति में तो फिर कभी एकदम निराश, अवसाद के रूप में हो सकता है. मरीज में असामान्य रूप से तीव्र भावना हो सकती है. उनके गतिविधि के स्तर में परिवर्तन पाये जा सकते हैं व उनमें असामान्य व्यवहार पाये जा सकते हैं. दिन-प्रतिदिन उनके कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

द्विध्रुवी विकार में खुशी के मनोदशा को मेनिया व उदासी के मनोदशा को अवसाद कहते हैं. इस बीमारी के मेनिया एपिसोड व अवसाद एपिसोड में निम्न लक्षण हो सकते हैं:
1. द्विध्रुवी विकार के मेनिया एपिसोड के लक्षण
2. आत्म-महत्व की बढ़ती भावना
3. अति चिड़चिड़ापन
4. उत्तेजक या आक्रामक व्यवहार
5. कमजोर एकाग्रता
6. नींद नहीं आना
7. दवाओं का दुरुपयोग, जैसे कोकीन, शराब या नींद की दवाएँ लेना
8. पागलों के तरह खर्च करना
9. मूड में घबराहट
10. यौन व्यवहार में वृद्धि
11. विचारों का तेजी से बदलना, तेजी से बात करना, विचारों के बीच में दौड़ना
12. ऊर्जा बढ़ जाना, गतिविधि, बेचैनी

द्विध्रुवी विकार के अवसादग्रस्त एपिसोड के लक्षण-
1. ऊर्जा में कमी, थकान
2. उदास, चिंतित या खाली महसूस करना
3. अपराध, निष्ठा या असहायता की भावना
4. निराशा व निराशावाद की भावना
5. निर्णय लेने में कठिनाई होना
6. सेक्स या अन्य किसी भी गतिविधि में रुचि या खुशी का न होना
7. बेचैनी और चिड़चिड़ापन
8. भूख में कमी
9. अचानक वजन घटना या बढ़ना
10. मृत्यु या आत्महत्या का विचार आना

द्विध्रुवी विकार के कारण-
द्विध्रुवी विकार का सही कारण अब तक ज्ञात नहीं हो सका है. हालांकि आनुवांशिक, पर्यावरण, बदलती मस्तिष्क संरचना और रसायन विज्ञान का संयोजन का भूमिका इस विकार के लिए हो सकता है. जिस समय इस विकार के लक्षण सामने आते हैं उस समय भी इसका कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता है. यह आनुवांशिक भी हो सकता है. असामान्य मस्तिष्क संरचना और क्रियाविधि के कारण भी ऐसा विकार हो सकता है. पर इसके सबसे सामान्य कारण मस्तिष्क के चोट, अधिक तनाव, तंत्रिका संबंधी चोट हो सकते हैं.

द्विध्रुवी विकार के उपचार-
जैसा कि द्विध्रुवी विकार होने के सही कारण का अब तक पता नहीं चला है. अतः इसका कोई निश्चित उपचार भी अब तक नहीं ढूंढा जा सका है. वर्तमान में इसके निदान बीमारी के लक्षण और परिवार के इतिहास पर आधारित होता है. मनोचिकित्सा व दवाओं के द्वारा ही इसका इलाज का प्रबंध किया जाता है.

इसके इलाज में दवा के रूप में आमतौर पर मस्तिष्क स्थिर करने वाली दवा दिया जाता है. लिथियम सबसे अधिक निर्धारित मूड स्टेबलाइजर है. जब्ती विकारों के इलाज के लिए एंटीकनवाल्स्लेट दवाएं दी जाती है. एंटीसाइकोटिंक्स व एंटीडिप्रेसंट का भी प्रयोग किया जाता है. द्विध्रुवी विकार के इलाज में दवाओं के अलावा मनोचिकित्सा व परिवार के लोगों का सहायता भी लिया जाता है.

द्विध्रुवी विकार (Bipolar Disorder) के लिए सबसे अच्छा मूड स्टेबलाइजर में कार्बमाजिपिन (कार्बाट्रोल, एपिटोल, इकेट्रो, टेगेटोल), डेवलप्रोक्स सोडियम (डीपकोटे), लैमट्रीजीन (लैमिक्टल), लिथियम व वैलप्रोइक एसिड (डेपाकिन) शामिल है.

दवाओं के साइड इफेक्ट-
द्विध्रुवी विकार के इलाज में प्रयोग की जाने वाले दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट भी हैं. इस बीमारी के इलाज में प्रयोग की जाने वाली दवाओं से मतली, उल्टी और दस्त हो सकते हैं. शरीर में सिहरन या उनींदापन भी हो सकते हैं. प्यास ज्यादा लगना व पेशाब ज्यादा होने की शिकायत भी हो सकती है. दवाई के प्रयोग शुरू होने के बाद प्रारंभ के कुछ महीनों में वजन में वृद्धि हो सकती है.

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Pityriasis Rosea - How To Tackle It?

MBBS, MD - Dermatology , Venereology & Leprosy
Dermatologist, Mohali
Pityriasis Rosea - How To Tackle It?

Pityriasis rosea is a rash that appears on your skin most commonly between the ages of 10 and 35. It is usually harmless and a pretty common condition. It is also worth noting that pityriasis rosea does not spread from person to person. 

Causes

The exact causes of pityriasis rosea have not been identified yet. Some doctors claim that it is caused by a virus, bacteria or fungus while others claim that it is caused by an allergic reaction.

Symptoms

There is a fair number of warning signs of the pityriasis rosea rash. The symptoms may differ depending on the patient's general health condition, the climate and the season.

1. Size and appearance at first
When the rash first appears, it will have a raised border. It will be scaly and have a pink patch which will either be round or oval. 2 to 10 cm is the usual size of the patch.

2. Few days or weeks later
1 or 2 cm is the size of many patches on the abdomen, back, chest, legs and arms which now appear. They sometimes spread to the neck but rarely spread to the face.

3. Back patches
The patches on the back are slightly different from the rest. They tend to be angled and look somewhat like a Christmas tree. Sometimes it is itchy but it goes away within 6 to 8 weeks.

Treatment

1. Apply anti-allergic powder or wash the body with cold water to prevent the rash and itching from worsening
2. Eat a lot of oatmeal and try bath products which have oatmeal in them 
3. Hydrocortisone cream is very good for the itchy areas on your body. However, do not use these on the face or pubic areas.
4. Use antihistamines but do not give it to your child without checking with the doctor first.
5.  Apply moisturizer regularly
6.  Use gentle soaps and avoid deodorant soaps as these worsen the rash and the itching
 

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Dr. I used to masturbate in past when I went school. But now, till I don't give up this habit properly. I become thin. And my penis is bent on right side. What to do?

MBBS, MD - Community Medicine, CCIP
Sexologist, Ranchi
Dr. I used to masturbate in past when I went school. But now, till I don't give up this habit properly. I become thin...
Nothing Lybrate-user! nothing! you are perfectly fine. Get out of the notion that masturbation has caused any problems. For more details do consult me online.

Dear sir, I am not getting sleep for the last 6 months. Always some noise in my ears. Kindly help to sleep me.

BAMS, MD - Ayurveda
Ayurveda, Thane
Consult to ent take tab -brahmi vati 2----------2 syrup - sarswatarishtha 3 tablespoon 2 times a day do yoga meditation.

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BHMS Bachelor of Homeopathic Medicine and Surgery
Homeopath, Delhi
I was suffering from constipation for about one month. Showed to a homeopath. Now the constipation is gone but I am h...
Drink warm water daily empty stomach. If you eat outside food then take warm water mixed with black salt. Make a habit of drinking warm water before sleep also. Sometime eat papaya also. If it will nopt workl allium sativa q .(10 drops 2 times a day)
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