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Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well....more
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NuviLife is known for housing experienced Dietitian/Nutritionists. Dt. Nivedita Singh, a well-reputed Dietitian/Nutritionist, practices in Bangalore. Visit this medical health centre for Dietitian/Nutritionists recommended by 69 patients.

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205 Parth Orchids Apartment,Kadugodi. Landmark: Opp Whitefield Railway Station
Whitefield Bangalore, Karnataka
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Dt. Nivedita Singh

Dietitian/Nutritionist
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Symptoms of Dengue in Hindi

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Symptoms of Dengue in Hindi

मौसम बदलते ही तरह-तरह के वायरल संक्रमण फैलने लगते हैं, जिनमें डेंगू बेहद खतरनाक बीमारी है। वैसे तो डेंगू का सामान्य लक्षण बुखार है, लेकिन ये सामान्य बुखार से अलग होता है। डेंगू में बुखार की तीव्रता काफी अधिक होती है और कमजोरी के साथ चक्कर भी आते हैं। संक्रमण बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होता जाता है और भी लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे- उल्टी आना, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर रैशज वगैरह। ये तो डेंगू के सामान्य लक्षण हैं लेकिन यहां कुछ लक्षण दिए जा रहे हैं, जिनके नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर डेंगू के लक्षणों को ऊपरी तौर पर देखा जाए तो तेज बुखार, लगातार मितली और उल्टी आना, उल्टी में खून आना, पेशाब के साथ खून आना, पेट में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, नाक और मसूड़ों से खून, थकान लगना आदि हैं। यहां विस्तार से देखें कि् कौन सी स्थिति है खतरनाक.

1. 20 का मंत्र:
डॉक्टरों के मुताबिक, नब्ज में 20 की बढ़ोतरी, ब्लड प्रेशर मे 20 की कमी, हाई और लो बीपी में 20 से कम का अंतर और बांह पर 20 से ज्यादा निशान हों तो सतर्क हो जाएं।

2. तेज बुखार:
डेंगू के संक्रमण से होने वाले बुखार की तीव्रता काफी तेज होती है। बुखार में थर्मामीटर का पारा 102 से 105°F तक पहुंच जाता है। एक हफ्ते तक बुखार तेज रहता है, इसके बाद थोड़ा आराम मिल सकता है, लेकिन इसे राहत न समझें। फिर से बुखार वापस आ सकता है, वो भी पहले से ज्यादा तेज।

3. जुकाम या वायरल जैसे लक्षण: 
डेंगू में बुखार के साथ सामान्य फ्लू जैसे लक्षण भी नजर आते हैं। इसमें सिर दर्द, आंखों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द के लक्षण दिखाई देते हैं।

4. प्लाजमा लीकेज: 
प्लाजमा लीकेज डेंगू में खतरनाक अवस्था है। अल्ट्रासाउंड करवाकर प्लाजमा लीकेज का पता लगाया जा सकता है। ये संक्रमण के 3 से 7 दिन के अंदर होता है। अगर शरीर का तापमान कम होने लगे तो भी सतर्क हो जाएं, इसके अलावा पेट दर्द, लगातार उल्टी, सुस्ती वगैरह भी गंभीर लक्षण हैं।

5. सुस्ती: 
डेंगू के लक्षण दिखें तो सबसे पहले प्लेटलेट्स काउंट चेक करवाएं साथ ही बीपी पर भी नजर रखें। कमजोरी और सुस्ती से इन लक्षणों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

6. उल्टी: 
बुखार के साथ बार-बार उल्टी आना भी खतरनाक लक्षण है। लिवर एंजाइम की गड़बड़ी से ऐसा होता है। इस स्थितिस में डिहाइड्रेशन हो जाता है। कुछ खाने और पीने के बाद तुरंत उल्टी हो जाए, तो भी सतर्क हो जाएं।

7. असामान्य रक्तस्त्राव: 
डेंगू के वायरस का असर खून के कंपोजिशन पर काफी होता है। ऐसे में अगर बुखार के साथ नाक या मसूड़ों से खून आए तो सतर्क हो जाएं। इसमें बुखार के साथ आंखें भी लाल दिखाई दे सकती हैं, साथ ही गले में खराश और सूजन भी खतरनाक है। प्लेटलेट्स के कम होने से खून का घनापन पढ़ जाता है, ये भी खतरे की निशानी है।

8. त्वचा पर चकत्ते: 
डेंगू में बुखार आने के तीसरे या चौथे दिन के बाद अगर त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते दिखाई दें तो ये सामान्य बुखार न होकर डेंगू हो सकता है। ये चकत्ते सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देते हैं। इसमें चेहरा लाल भी दिखाई दे सकता है। इन चकत्तों में सामान्यता खुजली नहीं होती। धीरे-धीरे ये चकत्ते बाकी शरीर के साथ हाथ और पैरों तक पहुंच जाते हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लें। कभी-कभी बुखार जाने के बाद खुजली वाले चकत्ते भी उभर आते हैं। ये चकत्ते पैर और हांथ के तलवे पर होते हैं, जिनमें असहनीय खुजली होती है।
सावधानियां

डेंगू फैलने के मौसम में विशेष सावधानी रखें। आसपास कहीं पानी जमा न होने दें। कूलर में पानी बदलते रहें और सफाई का विशेष ध्यान रखें। डेंगू होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा ज्यादा से तरल पदार्थ लें, आराम करें और पौष्टिक खाना खाएं।
डेंगू में नीम, तुलसी, गिलोय, पिप्पली, पपीते की ताजी पत्तियों का रस, गेंहू की बालिकयों का रस, आंवला और एलोविरा का रस पीने से फायदा मिलता है। रस से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और प्लेटलेट्स के निर्माण में तेजी आती है।

शरीर को नैचरल तरीके से डिटॉक्स करने वाले 7 खाद्द पदार्थ!

Ayurveda, Delhi
शरीर को नैचरल तरीके से डिटॉक्स करने वाले 7 खाद्द पदार्थ!

शरीर को नैचरल तरीके से डिटॉक्स करने वाले 7 खाद्द पदार्थ

निरोग रहने के लिए शरीर के भीतरी अवांछित विषाक्त पदार्थ (toxins) को निकालना भी बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि इसकी अधिकता शरीर के नियमित कार्य में बाधा उत्पन्न होता है । अगर आप नैचरल तरीके से डिटॉक्स (detox) करना चाहते हैं तो अपने डायट में डिटॉक्स फूड्स को शामिल करें। लेकिन क्या आपको पता है कि डिटॉक्स फूड्स कौन-कौन से हैं?

  1. अंडा- अंडा एक ऐसा अमिनो एसिड युक्त प्रोटीन फूड है जो शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में बहुत मदद करता है। इसलिए अपने ब्रेकफास्ट में रोज एक अंडा शामिल करना न भूलें।
  2. ओट्स- ओट्स एन्टीऑक्सिडेंट और घुलनशील फाइबर (soluble fibre) का सबसे अच्छा स्रोत होता है, जो लीवर से पित्त को निकालकर शरीर के प्रतिरक्षी कार्य (immune function) को उन्नत करने के साथ-साथ चयापचय (metabolism) के दर को बढ़ाने में भी मदद करता है।
  3. प्याज़ और लहसुन – ये नैचरल प्रोबायोटिक (probiotic) के स्रोत होते हैं जो अच्छे बैक्टिरीआ के उत्पादन में मदद करते हैं। यह प्रोबायोटिक शरीर के प्रतिरक्षी कार्य (immune function) को और अच्छी तरह से करने में मदद तो करते ही हैं साथ ही डिटॉक्स करने में भी सहायता करते हैं। 
  4. विटामिन बी वाले फूड्स- क्या आपको पता है विटामिन बी युक्त खाद्द पदार्थ हजम शक्ति बढ़ाकर शरीर के चयापचय (metabolism) के दर को बढ़ाने में मदद करते हैं? चयापचय अच्छी तरह होने पर शरीर से विषाक्त पदार्थ आसानी से निकल जाते हैं। विटामिन बी6 के लिए केला,विटामिन बी12 के लिए मछली और पोलट्री और विटामिन बी के लिए हरे पत्तेदार सब्ज़ियाँ खा सकते हैं। 
  5. बीन्स और मसूर दाल (lentils)- बीन्स और मसूर दाल प्रोटीन का स्रोत होने के साथ-साथ जिन्क और मैग्नेशियम से भरपूर होते हैं। इनके ये गुण शरीर के चयापचय (metabolism) के दर को बढ़ाकर शरीर के विषाक्त पदार्थ को निकालने में मदद करता है। 
  6. खट्टे फल- खट्टे फलों में जो एन्टीऑक्सिडेंट के गुण होते हैं वे शरीर को डिटॉक्सफाई (detoxify) करने में मदद करते हैं। खट्टे फलों (citrus fruits) में संतरा, मोसंबी और नींबू आदि आते हैं।
  7. दही- रोज दही खायें और निरोग रहें। क्योंकि दही खाने से शरीर में प्रोबायोटिक (probiotic) यानि अच्छे बैक्टिरीआ का उत्पादन होता है जो हजम शक्ति और चयापचय के दर को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में मदद करता है।

Understanding Prostatitis Treatment Options!

MD - General Medicine
Sexologist, Delhi
Understanding Prostatitis Treatment Options!

Prostatitis is one of the most common conditions in men over the age of 40. When you are suffering from it, there are many treatment options you can go with. It's good to note that the options vary depending on the type of condition you are suffering from. Some of these options include:

Acute prostatitis

From its name, when you have acute prostatitis it means that you have had the condition for only a short time. The options for this condition are aimed at curing the infection and also prevent complications from coming about. Doctors use different ways to treat the condition. The most common ways being: fluids, rest, medicine, and stool softeners. If you need intravenous antibiotics or are unable to urinate, the doctor may recommend that you be admitted.

Chronic prostatitis

When suffering from this condition, you may need more than one option. In most cases, the doctors will use antibiotics. If the symptoms don't improve, the professionals will stop the treatment and look for other options. The professionals may also use alpha blockers and muscle relaxants. This is if you are experiencing muscle spasms that are bringing about pain and urination problems.

Anti-inflammatory medications are also heavily used in the treatment of chronic prostatitis. Here the doctors use the anti-inflammatory drugs that are at their disposal to get rid of the problem. To slow the growth of the prostate, some professionals use 5-alpha reductase inhibitors.

Other than these treatment options, the doctors may also use physical therapy, exercises, massage therapy, relaxation, and counseling. Certain plant extracts such as bee pollen has been found to be highly effective.

Chronic bacterial prostatitis

The options for this type of prostatitis are similar to those you find in acute prostatitis. You undertake the treatment to cure the infection and also prevent complications from coming about. During the treatment, the doctors will give you antibiotics for 6-12 weeks and inspect the progression.

In some cases, the symptoms don't go away, and in such a case, the professionals may recommend alternative options. If you have prostate stones, you may have to have them removed surgically. The same thing applies if you are suffering from urinary tract problems such as narrowing of the urethra and neck.

Conclusion

This is what you need to know about the treatment options for prostatitis. To avoid complications, make it a habit of undertaking regular checkups especially if you are over the age of 40.

 

Vaginismus - Make Sex Less Painful For Your Lady!

MD-Pharmacology, MBBS
Sexologist, Delhi
Vaginismus - Make Sex Less Painful For Your Lady!

Sexual intercourse for humans is not only a reproductive act, but is also considered to be an emotional and pleasurable act. However, statistics report that almost 30% of the women experience pain during intercourse also known as vaginismus. This not only hampers the pleasure, but is also an unhealthy sign since it is indicative of a problem.

Vaginismus / Painful intercourse could be a regular occurrence, or a sporadic one. There could be numerous reasons that cause the discomfort and pain. Though it might be an early manifestation of grave diseases such as endometriosis or fibroids, but more often, it is triggered due to conditions such as vaginal dryness, yeast infection, bacterial vaginiosis, which can be easily treated. It is pertinent to understand that it is not the physical infirmity of the entire female anatomy that causes such pain/ discomfort, but the existence of certain conditions that can be treated by a medical practitioner. 

Certain such causal factors associated with painful intercourse and the efficient ways to deal with them are discussed below:

  1. Vaginal dryness- Vaginal dryness is one of the most commonly cited causes for painful intercourse. There are various causal factors of vaginal dryness. These include, but are not limited to, consumption of certain drugs, bathing with hot water, health conditions or even lack of foreplay. Vaginal dryness due to the aforementioned causes is a short-lived condition that can be treated well with the help of a medical practitioner. Usage of lubricants that is suitable for you, as advised by a medical practitioner, could go a long way in aiding the ease of sexual intercourse. The lubricants act as an effective substitute, if the body is unable to naturally secrete vaginal fluids to ease intercourse, thereby greatly reducing the pain that is experienced.

  2. Improper vaginal expansion- The female anatomy is designed in such a way that it expands normally during intercourse. Proper foreplay enables the woman to get excited, which results in the release of vaginal fluids that aids in sexual intercourse. However, in the event that the female is not excited enough prior to the act, sexual intercourse can become a painful act, since the vagina is unable to expand in the absence of vaginal fluids. In such cases, take things slow and give your body time to comfortably go with the flow.

  3. Vaginal itching caused by infection- Vaginal infections can be caused by antibiotics, prior sexual activity that has resulted in contraction of Sexually Transmitted Diseases etc. This results in an itching or burning sensation while having sex. It is essential to rest your body instead of forcing things, and to consult your doctor as soon as possible. The doctor can correctly diagnose the causal factors behind the infection, and prescribe the necessary medicines for it.

  4. Emotional issues including fear of sex, marital issues/ disputes, etc are also leading cause of painful sex

Treatment:

However, symptoms vary from the common ones mentioned above, it is always advisable to consult a experienced doctor including a gynecologist, sexologist or sexual counselor.

Role of sexual counselor is very important, as he she can offer Sex therapy in the form of counseling, brief psychoanalysis, or behavioural therapy .This can help to address any underlying psychological issues, such as fear or anxiety, tackle any irrational beliefs that you have about sex, educate you about sex.

Also some special techniques can be taught eventually stop your vagina closing involuntarily, such as using vaginal trainers and pelvic floor exercises

If you wish to discuss about this problem, you can consult a doctor and ask a question.


 

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13 Tips to Help You Stay Safe While Cycling!

mpt
Physiotherapist, Ahmedabad
13 Tips to Help You Stay Safe While Cycling!

Can you think of anyone who is into cycling (professional or a regular cyclist) and has not faced any injuries? You would have to think real hard, as injuries are a very common part of cycling. Right from the stage when a person starts learning to whatever stage they decide to stop at, injuries are a part and parcel of it.

There are, however, some tips that can help you avoid or reduce the incidence of injuries and their impact. These are gaining importance, as there are more people getting into the sport. Follow these and have a happy time cycling away!

  1. Choose the right bike for your height and frame. Do not use cycles which are too small or too big for you.
  2. Always use a helmet of the approved standards and use the helmet lock. It does not prevent scratches and skin tears, but definitely helps protect your head.
  3. Common notion is that traffic rules don’t apply to cyclists. We all can remember how a cyclist gets off the bike at the signal and pushes the bike to cross over. This is wrong and the traffic rules apply as much to the cyclists as to the other motorists.
  4. Using hand signals to indicate stopping, turning or changing lanes is also a practice that cyclists must follow.
  5. When riding on the roads, keep safe distance from other vehicles. If there is a cycling lane, stick to it.
  6. Though cycling with music in your ears is very appealing, try not to do that, especially if you are on the road where you might not be able to hear honking from other vehicles.
  7. If you are cycling in a group, make sure you cycle one behind the other, not as a group.
  8. Do not try bike stunts like speeding, wheeling, etc., on roads which have regular traffic. Choose off-peak hours and quieter areas for these stunts.
  9. If you are crossing a pedestrian lane, get off the bike and cross it carefully.
  10. Try not to use the edge of the road from where it is easy to fall off. Riding on the road helps others to notice you, so ride accordingly.
  11. If you are riding at night, make sure you are wearing bright clothing; there are fluorescent colored bibs with reflectors available. The bike should also have reflectors, so others can see you and the bike.
  12. For regular practice, try staying in residential areas, compared to roads which have other vehicles.
  13. Ensure the bike is always maintained in a good condition with brakes and gears working properly. Get your bike serviced regularly, so it is well oiled and checked for proper functioning. If you wish to discuss about any specific problem, you can ask a free question.

 

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How to gain weight I am 24 year old what type of food taken through that I gain my weight I am vegetarian Pls give some tips.

Nutrition - Management of Weight & Lifestyle Related Disorders
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Weight gain is a time taking process so you have to be little patient and practice it properly. Include good amount of protein like cheese, tofu, soya bean in your diet, take shakes like mango shake, banana shake, strawberry shake, include all fruits and juices, vegetables and pulses. Do not skip any of your meal, drink atleast 7-8 glass of water in a day. Have frequent meals.
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How to increase body weight I have tried every method but weight doesn't increase please tell me the best method or medium to increase weight.

B.Sc.(Hons), P.G.Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Gurgaon
Hello Lybrate user add to calories in your diet in buying increasing the consumption of daily product do not cut back on the fat contain in your milk .add a healthy portion of red meat to your diet but keep in mind not to overdo. You can even add olive oil to your salads add vegetables in your diets, and for other details please contact diet clinic for a healthy diet
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Diabetes - Know Its Ayurvedic Remedies!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Ahmedabad
Diabetes - Know Its Ayurvedic Remedies!

When the sugar concentration in the blood increases suddenly and unreasonably, the resulting condition is known as diabetes. Sugar or glucose is generally used in order to provide much needed energy to our bodies. But when the pancreas dysfunctions, it leads to a problem in the insulin production. As a result, glucose or sugar gets directly absorbed into the blood, instead of getting absorbed by insulin. And this leads to the condition of diabetes.

Diabetes Treatment in Ayurveda
For Ayurvedic treatment of diabetes, the first step is usually dietary planning and lifestyle change. Adopting a more active lifestyle, and a healthy, balanced diet low on sugars and starches, is a must. You must begin by avoiding sugars in all forms. This means you will have to get rid of rice, potatoes, white bread, sugar coated cereals, bananas, colocasia and much more. Add a lot of green leafy vegetables to your diet to improve your nutritional status and metabolism. In addition to these, also add some herbs to your diet. Ayurvedic herbs that act as natural medicine for diabetes include turmeric, bitter gourd, gurmar leaves, bael, fenugreek and many more.

Apart from diabetes Ayurvedic treatment, you could also practice yoga, which can help you improve your health. Several yogic asanas help massage your internal organs so that they are healthier and can function much better. Some of the asanas are especially beneficial for the pancreas, which produces insulin. You may have to make some changes to your lifestyle as well. For starters, you will have to maintain a more active lifestyle. You will also have to avoid sleeping in the daytime. Avoid smoking and consuming alcohol and take extra care of your feet.

As an ancient science based on lifestyle related treatment methods that include herbs, massages and life changing tweaks, Ayurveda also provides various methods of managing this ailment. Here's how!

  1. Bitter Gourd: Known as an ingredient that is rich in antioxidants, this can be consumed to take care of diabetes. You will need to first remove the peel of at least four to five bitter gourds before crushing them to create a paste. This paste has to be put through a sieve so that the juice of the gourds can be extracted. You will then have to drink this juice every morning, on an empty stomach.
  2. Cinnamon: From treating coughs and colds to diabetes and other serious ailments, this is a wonder spice that can be found in most Indian kitchens. You can start by boiling a litre of water and letting it simmer on the gas for about twenty minutes. Thereafter, you can add three teaspoons of cinnamon powder to this simmering water. Strain this mixture and drink the entire batch every day to clear out the toxins.
  3. Fenugreek Seeds: For this, you will need to take about four to five tablespoons of fenugreek seeds. These will have to be soaked in a glass of water or about 250ml of water, overnight. In the morning, the softened seeds will need to be crushed before the mixture is strained. The water that escapes should be collected and ingested every day for a period of two months.
  4. Turmeric: Turmeric is a powerful and well-known ingredient that is used for curing and managing many ailments. You will need to mix about half a teaspoon of turmeric powder with one teaspoon of amla powder as well as half a tablespoon of methi seeds or fenugreek seeds powder. This concoction will have to mixed in half a glass of water and taken daily on an empty stomach. This can be used by patients suffering from heart ailments as well.
  5. Diet: Cereals like ragi, corn, kulit, green millet, and barley are known to beneficial for patients suffering from diabetes. Leafy greens are also a must for such patients along with protein-rich foods like soya beans. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult an Ayurveda.
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How to maintain weight for a lifetime, my metabolism is slow, I have been lifting weights and doing cardio, I can easily put on weight if I left the gym, honest answer required.

Dietitian/Nutritionist, Navi Mumbai
Honestly workout, water intake sleep stress and food all play a role in weight gain and weight loss. To increase metabolism drink one glass of warm water with lemon juice in it, first thing in the morning. And drink 3 litres water daily but not with food. Change exercise pattern. We can discuss in detail how to have a active lifestyle without gym.
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I want gain weight something 10-15 kg. My weight only 49 kg. Please suggest me diet.

Dietitian/Nutritionist, Navi Mumbai
Hi lybrate-user Increase protein in diet. Eat more daal sprouts, eggs (two boiled for four days a week after workout) eat chicken and fish twice a week if non vegetarian do push ups daily.
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Is any problem Using packed milk without boiling it? Drinking of Raw packed milk causes any difficulty to health?

Diploma in Diet and Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Hyderabad
1. It is better to boil it before using it. 2. It travels over long time and distance before it reaches you.
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My son is suffering from deficiency of vitamin D.It is between 7 to 8. His legs are slightly curved. Is It curable?

BHMS
Homeopath, Chennai
The most accurate way to measure how much vitamin D is in your body is the 25-hydroxy vitamin D blood test. A level of 20 nanograms/milliliter to 50 ng/mL is considered adequate for healthy people. A level less than 12 ng/mL indicatesvitamin D deficiency. Spending as little as 5 to 30 minutes in direct sunlight with your face, arms, legs or back exposed two times a week between 10 a.m. And 3 p.m. In the summer, fall and spring can synthesize enough vitamin D3 to supply your needs Very few foods naturally supply vitamin D. Beef liver, cheese, egg yolks and fatty fish, which contain small amounts of D3, are the best dietary sources of D3. Cod liver oil provide a time-honored potent source of D3, although the taste might be a turnoff. Fortified milk and orange juice also contain vitamin D; manufacturers can choose to add either either D2 or D3. Mushrooms supply D2 to your diet. Top 10 Vitamin D Rich Foods 1) Sunlight Promotes vitamin D synthesis from cholesterol in the skin. 2) Cod liver oil 1 tsp: 440 IU (over 100% DV) 3) Sardines 3 ounces: 164 IU (41% DV) 4) Salmon 3 ounces: 400 IU (100% DV) 5) Mackerel 3 ounces: 400 IU (100% DV) 6) Tuna 3 ounces: 228 IU (57% DV) 7) Raw Milk 1 cup: 98 IU (24% DV) 8) Caviar 1 oz: 33 IU (8% DV) 9) Eggs 1 large: 41 IU (10% DV) 10) Mushrooms 1 cup: 2 IU (1% DV) Also a constitutional homoeopathic treatment is required to correct the assimilation, since susceptibility is one of the major factor leading to a certain group of disorders. You can easily take an online consultation for further treatment guidance.
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Why You Need To Practice Yoga Daily?

M.D (HOMEOPATHY), MBA (Healthcare)
Homeopath, Gulbarga
Why You Need To Practice Yoga Daily?

1. The food we eat, has to be digested and then thrown out of body in 24 hours, else we will fall ill.

2. The water we drink, gets in our body and is thrown out in 4 hours, else we might fall ill.

3. The air we breathe, has to be thrown out in 1 minute, else we will die.

What about negative emotions like hatred, anger, jealousy, insecurity. We hold in our body for days, months and years.

If these negative emotions are not thrown out regularly it props up into psycho-somatic diseases.

Yoga, meditation and prayers are safest way to dissolve these emotions.

 

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My 32 year old son suffering from diabetes since 3 years. Sugar not came normal range from starting. All remedies and afferds failed. Ayurvedic and alophaty both treatments are running but still sugar not in normal range. What should I do.?

MBBS, CCEBDM, Diploma in Diabetology
Endocrinologist, Hubli-Dharwad
Hello, Thanks for your query. It very unlikely that all efforts to control blood glucose would fail. Since there is no mention about current blood glucose levels, HbA1c%, drugs with dosage and also about diet and exercise, it is very difficult to comment anything. If you and your son are keen on getting appropriate treatment then please come back with following details: Fasting, PP glucose lvels, HbA1c%, weight, height, present drugs with dosage, dietary pattern and extent of daily exercise. Then based on those details I will be able to give specific guidamce. Thanks.
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How can gain weight .what should I eat and gain weight what should I do for healthy body.

BAMS, PGFP
Ayurveda, Jalgaon
Hello For healthy weight gain your body & mind both should be healthy So Do the following 1) FOR MIND mental stability is important thing. Do meditations regularly. 2) for BODY Do not take market suppliments for body building. Do not eat fast food. Keep eating times regular. Do not eat late night. Do not eat too much spicy. Do not eat rice items in night. Take Sound sleep at night. Do not sleep during day. Do regular exercises. Early morning 30 mins walk is most important. Revert back if medicines needed.
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6 Symptoms of Uterine Prolapse

MBBS, M.S( Gynaecology)
Gynaecologist, Surat
6 Symptoms of Uterine Prolapse

The uterus is a muscular structure held in place inside your pelvis with the help of muscles, ligaments, and tissues. These muscles weaken in women due to pregnancy, childbirth or delivery complications and can lead to severe complications. One such complication is a uterine prolapse. Uterine prolapse occurs when the uterus sags or slips from its normal position into the vaginal canal.

The causes of uterine prolapse are varied and include:

- Delivering a large baby
- Pregnancy
- Difficulty in labor and delivery
- Reduction in estrogen levels post menopause
- Traumatic childbirth
- Loss or weakening of the pelvic muscle
- Conditions which lead to increased pressure in the abdominal area such as a chronic cough, straining, pelvic tumors or accumulation of fluid in the abdomen
- Loss of external support due to major surgery in pelvic area

Uterine prolapse can be complete or incomplete depending on how far the uterus sags into the vagina. Women who have minor uterine prolapse may not have any visible symptoms. However, if the condition worsens, it manifests itself in visible signs.

Symptoms of moderate or severe prolapse are:

1. A feeling of fullness or pressure in your pelvis when you sit
2. Seeing the uterus or cervix coming out of the vagina
3. Vaginal bleeding or increased discharge
4. Painful sexual intercourse
5. Recurrent bladder infections
6. Continuing back pain with difficulty in walking, urinating and moving your bowels

Without proper attention, the condition can cause impairments in the bowel, and can also affect bladder and sexual function. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Gynaecologist.

244 people found this helpful

COPD: Causes and Symptoms

Multi Speciality Clinic
Multi Speciality, Gurgaon
COPD: Causes and Symptoms

COPD, short for Chronic Obstructive Pulmonary Disease, is an inflammatory disease of the lungs. The disease obstructs the flow of air in the lungs and subsequently causes difficulty in breathing. Prolonged exposure to cigarette smoke, gases or particulate matter can lead to this condition. The condition transcends all age brackets meaning it can affect anyone from young teenagers to aged adults. People who contract this disease are at an increased likelihood of developing cardiovascular conditions and lung diseases, in addition to a horde of other conditions.

Causes of COPD
1. The chief cause of COPD is smoking tobacco and being subjected to fumes from cooking and heating. A study estimated that in and around 25% of long-standing smokers develop symptoms of this condition. Yet, statistics show that COPD is often misdiagnosed until an elaborate evaluation is diagnosed.
2. Conditions like Emphysema and chronic bronchitis are also known to cause the disease. Your lungs depend on the intrinsic elasticity of the air sacs and bronchial tubes that help facilitate the passage of air through the lungs. Chronic Obstructive Pulmonary Disease causes these passages to lose their elasticity thus rendering them partially ineffective.

Symptoms of COPD 
The symptoms of COPD do not appear until the lungs are significantly damaged and the condition tends to deteriorate if smoking persists. Apart from coughing and production of sputum, other apparent symptoms include:

  1. Difficulty in breathing
  2. Stiffness and tightness of chest
  3. A persistent cough
  4. Fatigue and weakness
  5. Weight loss
  6. Frequent allergic reactions of the respiratory glands

Along with the aforementioned symptoms, patients who are diagnosed with COPD are likely to experience bouts of exacerbation, during which their symptoms heighten and tend to grow worse for several days.
Although anyone can contract the condition, certain people are at an increased risk of condition. Such risk factors include:

  • Chronic smoking
  • A medical history of asthma
  • Exposure to chemicals and dusts
  • Weakening of the immune system with increasing age
  • Heredity

If you experience or entertain symptoms or suspicions of this disease, consulting a pulmonologist is duly advised.

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Dengue Treatment in Hindi - डेंगू का इलाज

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Dengue Treatment in Hindi - डेंगू का इलाज

डेंगू वायरसजनित बीमारी है। ये बीमारी मच्छर से फैलती है और इसका सबसे पहला लक्षण तेज बुखार है। इस बीमारी के दौरान शरीर की प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। डेंगू एडीज नाम के मच्छर से फैलता है। हर साल बरसात के महीने में ये बीमारी फैलती है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। 
डॉक्टर बताते हैं किम शरीर में 1 मिली खून में 30-40 हजार प्लेटलेट्स होती हैं। ये प्लेटलेट्स रोज नष्ट होती हैं और रोज बनती रहती हैं। डेंगू होने पर शरीर के काम करने की गतिे धीमी पड़ जाती है, जिससे प्लेटलेट्स बनने की गतिी भी धीमी हो जाती है। ऐसे में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी गिरने लगती है। डेंगू का मच्छर ज्यादातर दिन में काटता है और ये साफ पानी में फैलता है। मादा एडीज कूलर, ड्रम, टंकी और गमलों में इकट्ठे पानी में अंडे देती है, यहीं से डेंगू फैलता है।

डेंगू के लक्षण 
एडीज मच्छर के काटने के बाद डेंगू का वायरस शरीर में पहुंच जाता है। इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार होता है। इसके बाद सिर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों मे भी दर्द होता है। शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी और भूख न लगना भी डेंगू के लक्षण हैं।

डेंगू का इलाज 
1. डेंगू में नीम, तुलसी, गिलोय, पिप्पली, पपीते
की ताजी पत्तियों का रस, गेंहू की बालि यों का रस, आंवला और एलोविरा का रस पीने से फायदा मिलता है। रस से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और प्लेटलेट्स के निर्माण में तेजी आती है।

2. पपीते की पत्ती: 
डेंगू में प्लेटलेट्स की रिकवरी के लिए पपीते की ताजी पत्तियों के रस को बहुत उपयोगी माना जाता है। इस रस को बनाने के लिए कुछ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर पीस लें। ध्यान रखें, पत्तिीयां नई उगी हुई ताजी हों। इन पत्तियों के अर्क को दिन में दो-तीन चम्मच डेंगू के मरीज को पिलाएं। ये शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालता है साथ ही प्लेटलेट्स की मात्री तेजी से बढ़ती है।

3. गिलोय का काढ़ा:
25 ग्राम ताजी गिलोय का तना लेकर कूट लें, 5-6 तुलसी के पत्ते और 3-4 काली मिर्च पीसकर 1 लीटर पानी में उबालें। पानी को तब तक उबालें जब तक ये 250 मिली न रह जाए। इसे तीन हिस्सों में बांट लें। डेंगू फैलने पर ये काढ़ा पि्एं इसे वायरल इन्फेक्शन के बचाव के लिसए इस्तेमाल किया जाता है।

4. तुलसी: 
तुलसी की पत्तियां हर तरह के वायरल में लाभकारी होती हैं। इसकी पत्तियों को चाय में डालकर रोजाना पीने से वायरल से बचाव होता है। डेंगू के मरीज को पानी में तुलसी की पत्ती उबालकर दें, इससे शरीर को रोग से लड़ने की ताकत मिलती है।अनार और चुकंदर का जूस- डेंगू के मरीज के लिीए अनार और चुकंदर का जूस लाभकारी होता है। अनार खून की कमी को दूर करता है।

5. एलोविरा: 
एलोविरा का जूस प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है और पाचन शक्ति ठीक रखता है। डेंगू होने पर मरीज को एलोविरा का जूस या नेक्टर (मकरंद) दें, ये शरीर को शक्तिे प्रदान करता है।

6. आंवला: 
आंवले में विटामिन सी होता है, ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। वहीं शरीर में पहुंचकर लौह तत्व का ज्यादा अवशोषण करता है, जिससे खून बढ़ता है।
ये सारे उपाय डेंगू के लक्षणों को कंट्रोल करने के लि।ए हैं, आराम न मिलने की स्थिपतिा में डॉक्टर का परामर्श जरूर लें।

डेंगू से बचाव 

डेंगू से मुकाबला करना मुश्किल है और इसके वायरस के संक्रमण के बाद तेजी से प्लेटलेट्स गिरती हैं।  इस स्थि ति् में संभलने का वक्त नहीं मिलता। इसलिबए इससे बचाव रखना भी बेहद जरूरी है।
1. ध्यान रखें कि घर में कहीं भी पानी इकट्ठा न हो। सफाई का खास खयाल रखें। 
2. कूलर वगैरह का पानी वक्त पर बदलते रहें और कूलर साफ करें। जहां भी पानी इकट्ठा हो रहा हो उसमें मिट्टी का तेल  डाल दें ताकि अंडे विकसित न हो सकें।
3. गमलों में भी पानी इकट्ठा न होने दें। मिट्टी नम रखें बाकी पानी गिरा दें।
4. बर्तन धोने वाली जगह पर भी पानी न इकट्ठा होने दें। हो सके तो बर्तनों को उलटा करके रखें।
5. घर में मच्छर मारने के उपाय करें। नीम की पत्तियां जलाएं, मॉसक्वीटो रिपेलेंट लगाएं और मच्छरदानी लगाकर सोएं। बच्चों को भी पूरे कपड़े पहनाकर सुलाएं और दिन के वक्त खासकर मच्छर भगाने के इंतजाम रखें।
6. कपूर के धुएं से भी मच्छर भागते हैं, कपूर को दिये में रखकर जलाएं और हर कमरें धुआं करें। अगर घर में किसी को डेंगू हो गया हो तो विशेष ध्यान रखें।

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Anemia in hindi - रक्त की कमी

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Anemia in hindi - रक्त की कमी

वैसे तो एनीमिया कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, मगर ये कई बड़ी और जानलेवा बीमारियों की वजह से जरूर हो सकती है। यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। हमारे देश की लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। एनीमिया को लोग सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकिम इस स्थिसतिब से जान तक जा सकती है। सामान्य भाषा में बात करे तो खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिसे हम एनीमिया के नाम से जानते हैं।  

आयरन की कमी है मुख्य वजह 
विज्ञान की भाषा में इसे ऐसे समझा जा सकता है किम हमारा शरीर तीन तरह की ब्लड सेल्स बनाता है- आरबीसी यानी श्वेत रुधि र कणिका, डब्ल्यूबीसी या श्वेत रुधिर कणिका और प्लेटलेट्स। डब्ल्यूबीसी शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाती हैं। प्लेटलेट्स रक्त का थक्का जमाने में मदद करती हैं और आरबीसी का काम आपके पूरे शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाना है। हमारे शरीर की कोशिकाओं को एक्टिव रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ये ऑक्सीजन शरीर के अलग-अलग भागों में आरबीसी में मौजूद हीमोग्लोबिरन की मदद से पहुंचता है। आयरन हमारे शरीर में आरबीसी का निर्माण करता है। आयरन की कमी से आरबीसी और हीमोग्लोबिलन बनने की क्रिया प्रभावित होती है। इसके प्रभावति होने से कोशिकाओं तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। हम खाने के रूप में जो कार्बोहाइड्रेट और वसा लेते हैं, ऑक्सीजन उसे जलाकर ऊर्जा पैदा करता है। ये ऊर्जा हमारे जीवन के लिंए जरूरी है। जब शरीर में आयरन की इतनी कमी हो जाए कि शरीर और दिमाग की काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगे, तो इस स्थितिल को एनीमिया या रक्तअल्पता कहते हैं।

एनीमिया के कारण 
शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी के अलावा इसके पीछे कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है। एनीमिया रक्त से जुड़ी समस्या है। इसके कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे- रक्त में आरबीसी का कम बनना, हेमरेज या ज्यादा खून बह जाना, आयरन की कमी, विटामिन बी 12 या फोलिक एसिड की कमी। खाने में ज्यादा मात्रा में कैल्शिगयम लेना। हरी सब्जिियां कम या बिल्कुल न खाना। किसी इन्फेक्शन या लंबी बीमारी के चलते भी एनीमिया के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।  इसके साथ ही माहवारी (पीरियड्स) के दिनों में बहुत ज्यादा स्राव भी एक वजह हो सकती है। वहीं इसके पीछे अनुवांशिक कारण भी हो सकता है। यहां देखें और वजहें.

1. गंभीर बीमारियों से हुआ एनीमिेया: 
कैंसर, एड्स, किडनी की समस्या और रुमेटाइड अर्थराइटिीस जैसी बीमारियों के जलते आरबीसी का निर्माण प्रभावित होता है।
2. ए-प्लास्टिक एनीमिया: 
इन्फेक्शन, हानिकारक पदार्थों का प्रभाव और कुछ दवाओं के प्रभाव से भी ये बीमारी हो सकती है। ए-प्लास्टििक एनीमिया बहुत कम केसों में होता है, लेकिन ये जानलेवा बीमारी है।

एनीमिया के लक्षण 
एनीमिया होने पर आपके शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। ऐसे में कमजोरी और थकान महसूस होती है। अगर लगातार एनीमिया रहे तो न्यूरोलॉजिकल गड़बड़िभयां देखने को मिलती हैं। बच्चों में पेट में कीड़े होने पर उनमें एनीमिया की शिकायत देखने को मिलती है। ऐसे में वह चिड़चिड़े हो जाते हैं और रोते रहते हैं। एनीमिया में सांस लेने में दिक्कत होती है और कमजोरी से चक्कर भी आ सकता है। लगातार एनीमिया रहने पर सिरदर्द, पैरों मे दर्द, जीभ में जलन, हल्का बुखार, गला सूकना, बाल गिरना, मुंह में छाले पड़ना, नाखून पीले पड़ जाना और सीने में दर्द जैसी शिकायतें भी मिलती हैं।

तुरंत कराएं जांच 

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड टेस्ट कराएं। महिलाओं में आजमाएं ये उपाय: 
खाने में ऐसी चीजें शामिल करें जिनमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता हो। इसके लिेए चुकंदर, गाजर, टमाटर, पत्तागोभी, हरी सब्जिियां अपनी डाइट में शामिल करें।

  • अगर मांसाहारी हों तो खाने में अंडा लें। मूंग की दाल और बाजरा भी काफी फायदेमंद होता है।
  • ऐसा माना जाता है किल लोहे की कढ़ाई में खाना पकाकर खाने से भी शरीर को आयरन मिलता है।
  • रोजाना सेव डायट में शामिल करें। दूध और केला भी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है।
  • ज्यादा मात्रा में कैल्शिलयम भी हानिकारक होता है। बाजार में आयरन की गोलियां मिलती हैं लेकिन अपने आप इनका इस्तेमाल न करें।
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