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Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care....more
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Get Well Hospital is known for housing experienced Orthopedists. Dr. Gurdeep Singh, a well-reputed Orthopedist, practices in Agra. Visit this medical health centre for Orthopedists recommended by 51 patients.

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MON-SUN
11:00 AM - 02:00 PM

Location

#33, Pandit Radharaman Satyavichitra Road, Laxmi Nagar, Landmark: Near Railway Crossing & Near Bank Of Baroda .
Sikandra Agra, Uttar Pradesh - 282007
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Doctors in Get Well Hospital

Dr. Gurdeep Singh

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
35 Years experience
24 Years experience
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बालों के लिए गुड़हल के फायदे - Baalon Ke Liye Gudhul Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
बालों के लिए गुड़हल के फायदे - Baalon Ke Liye Gudhul Ke Fayde!

गुड़हल के फूल का वैज्ञानिक नाम रोजा साइनेसिस है. गुड़हल के फूल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे कि फाइबर वसा कैल्शियम विटामिन सी आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए गुड़हल का फूल हमें कई बीमारियों से निजात दिलाता है. गुड़हल का फूल हमारे यहां धार्मिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है. हिन्दू परम्पराओं में विभिन्न प्रकार के पूजा अनुष्ठानों में उड़हुल का फूल का इस्तेमाल किया जाता है.लेकिन आज हम इस लेख में उड़हुल के लाभ के बारे में जानेंगे. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम गुड़हल के फूल के फायदे को जानें.

बालों के लिए गुड़हल के फूल के फायदे-
यदि आप अपने बालों को सुंदर और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो गुड़हल का फूल एक बेहतर विकल्प हो सकता है. उड़हुल के ताजे फूलों को पीसकर बालों पर लगया जा सकता है. इसके अलावा यदि आप चेहरे पर हुए मुंहासे से परेशान हैं तो इसके लिए लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें। अब इस पेस्ट में शहद को मिला कर त्वचा पर लगाएं. यह आपको मुहांसे से राहत प्रदान करता है. गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल की पत्तियों को जैतून के पत्तों के साथ मिलाकर बने पेस्ट को 10 से 15 मिनट के लिए सिर पर लगाकर रखें इसके बाद इसे गुगुने पानी से धो लें. इससे आपके बाल घने दिखाई देने लगेंगे. इसके अलावा गुड़हल की पत्तियों को पीसकर इसमें नारियल तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें. अब इस तेल को अपने सिर पर मालिश करने के लिए प्रयोग करें. इससे आपके बालों में चमक और मजबूती आती है. बालों लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल के पत्तों और फूलों से बना पेस्ट प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है.

गुड़हल के फूल के अन्य फायदे भी हैं-
गुड़हल के फूल की कुछ प्रजातियों बहुत सुंदर और आकर्षक होते है. इसलिए कुछ प्रजातियों को उड़हुल के सुंदरता और आकर्षक होने के कारण लगाया जाता है. आपको जानकार हैरानी होगी कि नींबू, पुदीना आदि की तरह के औषधीय गुण गुड़हल में भी मौजूद होते हैं। इसलिए इसकी चाय भी हमारे सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. गुड़हल के कई प्रजातियों में से एक प्रजाति ‘कनाफ’ का इस्तेमाल कागज निर्मित करने के लिए भी किया जाता है. इसके अलावा एक अन्य प्रजाति ‘रोज़ैल’ का इस्तेमाल मुख्य रूप से कैरिबियाई देशों में सब्जी, चाय और जैम बनाने में भी किया जाता रहा है. गुड़हल के फूलों को हमलोग देवी और गणेश जी की पूजा में अर्पण करने के लिए भी किया जाता है. इनके फूलों में त्वचा को मुलायम बनाने के साथ-साथ आर्तवजनक, फफूंदनाशक, और प्रशीतक जैसे गुणों की भी मौजूदगी होती है।

कई कीट प्रजातियों के लार्वा इसका इस्तेमाल भोजन के रूप में भी करते हैं। इसके फूलों और पत्तियों को पीस कर इसका लेप सर पर लगाने से बाल झड़ने और रूसी की समस्याओं से कारगर तरीके से निपटा जा सकता है। यही नहीं इसका इस्तेमाल केश तेल बनने के लिए भी किया जाता है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने में भी किया जाता है. गुड़हल के फूल को परंपरागत हवाई महिलायें अपने कान के पीछे से टिका कर पहनने के लिए भी करती हैं। ये बहुत रोचक बात है क्योंकि इस संकेत का अर्थ ये होता है कि वो महिला अविवाहित है और वो विवाह के लिए उपलब्ध है.

* गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल बालों को आकर्षक और स्वस्थ रखने के लिए भी किया जा सकता है. गुड़हल के फूलों को पानी में उबाल कर बाल धोने से हेयर फॉल की समस्या दूर हो जाती है. यह एक तरह का आयुर्वेदिक उपचार है.
* गुड़हल की 10 ग्राम पत्तियों को मेहंदी और नींबू के रस में मिलाकर बालों की जड़ों से सिरे तक अच्छे से लगाएं. इस विधि से बालों के डैंड्रफ खत्म हो जाती है.
* इसका उपयोग कॉस्मेटिक में भी किया जाता है. भारत में गुड़हल की पत्तियों और फूलों से हर्बल आईशैडो बनती है.
* गुड़हल का फूल शरीर की सूजन के साथ-साथ खुजली तथा जलन जैसी समस्याओं से भी राहत देता है. गुड़हल के फूल की ताजी पत्तियों को अच्छी तरह पीस कर सूजन तथा जलन वाली जगह पर लगाएं, कुछ ही मिनटों में समस्या दूर हो जाएगी.
* बच्चों के लिए हर्बल शैम्पू बनाने में भी इसका उपयोग होता है, क्योंकि यह माइल्ड होता है.
* गुड़हल के फूल और पत्तों का उपयोग त्वचा से झुर्रियां दूर करने में भी किया जाता है.

गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुड़हल के फूल के फायदे - Gudhul Ke Phul Ke Fayde!

गुड़हल के फूल का वैज्ञानिक नाम रोजा साइनेसिस है. गुड़हल के फूल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे कि फाइबर वसा कैल्शियम विटामिन सी आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए गुड़हल का फूल हमें कई बीमारियों से निजात दिलाता है. गुड़हल का फूल हमारे यहां धार्मिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है. कई तरह के पूजा-पाठ और देवी देवताओं को चढ़ाने के लिए गुड़हल के फूल का इस्तेमाल हम करते रहते हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे इससे होने वाले फायदे अन्य फायदों की. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम गुड़हल के फूल के फायदे को जानें.

1. वजन कम करने में

गुड़हल के फूल को वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं. गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय पीने से आपके शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए हमें काफी देर तक भूख नहीं लगती है. इसके अलावा गुड़हल के फूल का सेवन भी भूख लगने से रोकता है. यही नहीं इसे खाने से हमारी पाचन क्रिया भी समृद्ध होती है. इससे शरीर में अनावश्यक चर्बी नहीं जमा हो पाती है, और वजन कम होता है.

2. सर्दी जुकाम में
सर्दी-जुकाम की समस्या को दूर करने के लिए भी गुड़हल के फूल का प्रयोग किया जाता है. इसकी पत्तियां जिसमें विटामिन सी की प्रचुरता होती है, को यदि हम रोजाना खाएं तो इससे सर्दी जुकाम में काफी राहत मिलती है. आप चाहें तो इसका चाय भी बना कर पी सकते हैं.

3. जवान बने रहने के लिए
गुड़हल की पत्तियों से होने वाले कई लाभों में से एक यह भी है कि ये एंटी-एजिंग है. यानी कि आपकी बढ़ती उम्र के असर को काफी हद तक कम करता है. दरअसल गुड़हल की पत्तियों में शरीर के फ्री रेडिकल्स को हटाने की क्षमता होती है. इस वजह से ही हमारी त्वचा की बढ़ती उम्र के लक्षणों से लड़ पाता है.

4. बालों के लिए
गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल की पत्तियों को जैतून के पत्तों के साथ मिलाकर बने पेस्ट को 10 से 15 मिनट के लिए सिर पर लगाकर रखें इसके बाद इसे गुगुने पानी से धो लें. इससे आपके बाल घने दिखाई देने लगेंगे. इसके अलावा गुड़हल की पत्तियों को पीसकर इसमें नारियल तेल मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें. अब इस तेल को अपने सिर पर मालिश करने के लिए प्रयोग करें. इससे आपके बालों में चमक और मजबूती आती है. बालों लिए गुड़हल के फूल का प्रयोग हम बालों की कई समस्याओं के लिए भी कर सकते हैं. गुड़हल के पत्तों और फूलों से बना पेस्ट प्राकृतिक कंडिशनर का काम करता है.

5. कोलेस्ट्राल कम करने के लिए
कोलेस्ट्राल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी गुड़हल का प्रयोग किया जाता है. ये धमनी में पट्टिका को जमने से रोकती है. इसतरह ये कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने में मददगार साबित होती है.

6. गुर्दे की पथरी के लिए
गुर्दे की पथरी से परेशां व्यक्ति गुड़हल के फायदे का इस्तेमाल कर सकता है. इसका कारण ये है कि इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसके लिए आपको बस गुड़हल की चाय पीनी होती है.

7. पीरियड्स के दौरान
पीरियड्स को नियमित करने में गुड़हल काफी महत्वपूर्ण साबित होता है. पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में ऐस्ट्रोजेन की कमी होने से हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है. गुड़हल इसे नियमित करता है.

8. उच्च रक्तचाप के लिए
गुड़हल की पत्तियों से बनी चाय के तमाम फ़ायदों में से एक ये भी है कि ये उच्च रक्तचाप में भी लाभदायक साबित होता है. इससे हृदय की गति भी सामान्य होती है.

9. खून की कमी में
खून की कमी यानि एनिमिया की समस्या में भी गुड़हल लाभदायक होती है. इसके लिए लगभग 40 से 50 गुड़हल के फूल की कलियों को अच्छे से पीसकर उसके रस को एक टाइट डिब्बे में बंद कर लें. सुबह-शाम इसके सेवन से आपकी एनीमिया में राहत मिलती है.

10. त्वचा के लिए
गुड़हल की पत्तियों मेन ऐन्टी-ऑक्सीडेंट, आयरन और विटामिन सी की मौजूदगी इसे त्वचा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है. इससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहांसे और झुर्रियां आदि जैसी कई समस्याएँ खत्म होती हैं. इसके लिए गुड़हल की पत्तियों को पानी मेन उबालकर इसे अच्छी तरह पीस लें और इसमें शहद मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएँ.
 

गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है या गले में कुछ जमा हुआ अनुभव होता है तो यह गले में कफ जमा होने का है। गले में जमा हुए कफ को बलगम के नाम से भी जानते है. गले में कफ जमा होने के प्रमुख लक्षणों में नाक बहना और बुखार भी शामिल है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन यदि यह समस्या लम्बे समय तक बना रहता है तो फिर इससे सांस से जुडी कई समस्याएं हो सकती है. जब आपके नाक या गले के पिछले हिस्से में कफ जमना शुरू हो जाता है तो यह आपको म्यूकस मेम्ब्रेन श्वसन प्रणाली की रक्षा करने और उसको सहारा देने के लिए कफ बनाती है. ये मेंब्रेन नाक, गला, मुंह, फेफड़े, साइनस और नाक की ग्रंथि में होता है. जो एक दिन में कम से कम 1 से 2 लीटर बलगम का उत्पादन करती हैं. बलगम या कफ की अत्याधिक मात्रा होना, परेशान करने वाली समस्या हो सकती है. इसके कारण घंटो बैचेनी रहना, बार-बार गला साफ करते रहना और खांसी जैसी समस्या हो सकती है. ज्यादातर लोगों में यह एक अस्थायी समस्या होती है. हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह एक स्थिर समस्या बन जाती है. जिसके बेहतर उपचार पर थोड़े समय के लिए राहत मिल पाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम गले में कफ के जमने के बारे में जानें.

गले में कफ के जमने का क्या लक्षण है?
बलगम या कफ से भी सांसो में दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि कफ में मौजूद प्रोटीन के कारण बैक्टीरिया पैदा होती है. जब शरीर जरूरत से ज्यादा कफ उत्पादन करती है, तब अत्याधिक कफ आपके नाक के वायुमार्गों में अवरोध पैदा करता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगती है. कफ बनने के कारण नाक रूकने की समस्या काफी असहज और यहां तक कि दर्दनाक स्थिति पैदा कर सकती है. अत्याधिक कफ आपके गले व फेफड़ों में जमा हो सकता है. सामान्य कफ साफ या सफेद रंग का होता है और कम गाढ़ा होता है. जो कफ हल्के पीले या हरे रंग का दिखाई पड़ता है या जो कफ असाधारण रूप से अधिक गाढ़ा होता है, वह बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत देता है.

गले में कफ जमने के कारण-
जब कोई सर्दी-जुखाम या फ्लू, वायरल इंफेक्शन, साइनस जैसी बिमारियों से ग्रसित होता है तो व्यक्ति का बलगम कोल्ड या इंफेक्शन से बीमार होता है, तो उस व्यक्ति का कफ गाढ़ा हो जाता है और उसके बलगम के रंग में भी परिवर्तन आता है. बलगम के चिपचिपा होने के कारण वायरस, धूल या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ बलगम से चिपक जाते है. बलगम का गाढ़ापन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. जब व्यक्ति बीमार पड़ता है तो आपका शरीर कई सारे कणों के संपर्क में आता है जो कफ के साथ चिपकता है और कफ गाढ़ा हो जाता है. वैसे तो कफ आपकी श्वसन प्रणाली का एक स्वस्थ हिस्सा होता है, लेकिन अगर यह आपको परेशान कर रहा है, तो आप इसको पतला करने के या इसे निकालने के लिए कुछ तरीकों को अपना सकते हैं.

खाद्य पदार्थ: – कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते है जो गले में कफ उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता हैं. गले में कफ जमने के लिए मुख्य रूप से डायरी पदार्थ को जिम्मेदार माना जाता हैं. इन खाद्य पदार्थों में कैसिइन नाम के प्रोटीन अणु होते हैं, जो बलगम का स्त्राव बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं. दूध उत्पादों के साथ-साथ कैफीन, चीनी, नमक, काली चाय आदि ये सभी पदार्थ भी अतिरिक्त बलगम बनाते हैं. इसके साथ ही साथ जो लोग डेयरी उत्पादों को छोड़, सोया उत्पादों को अपना लेते हैं, इस स्थिति में उनके शरीर में अस्वस्थ बलगम बनने के जोखिम बढ़ जाते हैं.

गर्भावस्था: – यह देखा गया है की कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान छींकना, नाक रूकना और खांसी आदि लक्षण अनुभव होते हैं. वैसे तो प्रेगनेंसी में इस तरह के लक्षणों को सामान्य माना गया है. बलगम उत्पादन और गाढ़ापन के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन को भी एक कारण माना जाता है.

पोस्ट नेजल ड्रिप: – जब गले और नाक में अधिक कफ जमा हो जाता है तो यह खांसी पैदा करता है. रात के दौरान गले में कफ का उत्पादन होता है और सुबह तक यह गले में जम जाता है.

मौसमी एलर्जी: – मौसमी एलर्जी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं. मौसमी एलर्जी के लक्षण गले में बलगम जमना, छींकना और खांसना आदि समस्या शामिल हैं. ऐसे कई एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ हैं, जो ये लक्षण पैदा करते हैं, इसमें सर्दियों के अंत से गर्मियों तक की अवधि शामिल होती है. पेड़ और फूलों की पराग मौसमी एलर्जी के प्रमुख कारकों में से एक होते हैं और इसके लक्षण तब तक रहते हैं जब तक एलर्जी करने वाले पदार्थ नष्ट नहीं हो जाते.

Osteoarthritis Of The Knee

Fellowship In Joint Replacement, MS - Orthopaedics, MBBS
Orthopedist, Delhi
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In medical terms, Osteoarthritis is referred to a disease of the joints. It mostly affects the cartilage or the slippery tissue, which helps to cover the ends of bones in a joint. Proper cartilage helps in gliding of the bones one over the other. In osteoarthritis, the cartilage’s top layer gets damaged or breaks down. This leads to rubbing of the bones and swelling, pain or loss of motion. As time passes by, the joint may lose its shape. There is also a possibility of developing bone spurs from the edges of the joint. This causes pain and damage.

238 people found this helpful

Nutrition & Healthy Lifestyle

MBA-HR, MBA-Finance, Diploma in Dietetics, Health and Nutrition (DDHN), Diploma in Nutrition and Health Education (DNHE))
Dietitian/Nutritionist, Delhi
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A healthy diet is one which will improve not just your physical health, but your mental health as well. It is essentially concerned with healthy nutrients and essential amino acids, fatty acids, vitamins and minerals. A healthy diet can be obtained by consuming the correct proportion of vegetarian and non-vegetarian foods.

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Anxiety, Panic & Phobia

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Being constantly anxious impairs work performance and creates havoc in relationships. The best way to deal with it to accept that it is only a temporary phase which everyone faces. If you keep worrying and try to fight it, you will become even more anxious and your health will become even worse.

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Depression

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Depression, or major depressive disorder, is a mental health condition marked by an overwhelming feeling of sadness, isolation and despair that affects how a person thinks, feels and functions. Depression can affect people of all ages, races and socioeconomic classes, and can strike at any time.

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Knee Arthritis

DNB, Diploma In Orthopaedics (D. Ortho), MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, Feloship In Joint Replacement
Orthopedist, Mumbai
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The knee acts as hinge joint and allows flexion (bending) and extension (straightening). The knee is formed by the tibiofemoral joints, where the end of the femur (thigh bone) glides over the top of the tibia (shin bone) and the patellofemoral joint where the kneecap glides over the end part of the femur.

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I am suffering from excessive gas for past few months. Please suggest me a remedy.

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Dear lybrate-user, - Follow some dietary precautions for your problem: - avoid fried spicy processed and junk foods, also restrict tea, coffee intake to 1-2 cups per day, avoid gas forming foods like milk & milk products, beans, lentils, pulses, citrus fruits, mint, chocolates, aerated drinks - chew your food well, do not skip meals, have meals on time, take a walk for 5-10 min after meals for proper digestion - take tablet Pan 40, 1 tablet daily half an hour before breakfast - have plenty of oral fluids including 7-8 glasses of water for proper digestion.
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