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Swavalamban Children Rehabilitation center

Occupational Therapist Clinic

Dhanvantri marg Freeganj, Ujjain
1 Doctor · ₹300 · 2 Reviews
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Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well....more
Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well.
More about Swavalamban Children Rehabilitation center
Swavalamban Children Rehabilitation center is known for housing experienced Occupational Therapists. Dr. Pooja Pathak, a well-reputed Occupational Therapist, practices in Freeganj, Ujjain. Visit this medical health centre for Occupational Therapists recommended by 98 patients.

Timings

MON-FRI
02:30 PM - 08:00 PM

Location

Dhanvantri marg
Freeganj, Ujjain, Madhya Pradesh - 456010
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Photos (3)

Swavalamban Children Rehabilitation center Image 1
Swavalamban Children Rehabilitation center Image 2
Swavalamban Children Rehabilitation center Image 3

Doctor

Dr. Pooja Pathak

Bachelor of Occupational Therapy (BOT)
Occupational Therapist
10 Years experience
300 at clinic
Available today
02:30 PM - 08:00 PM
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Bachelor of Occupational Therapy (BOT)
Occupational Therapist, Ujjain

डिमेंशिया मस्तिष्क की क्षमता को प्रभावित करने वाली स्थिति होती है, जिसमे पीड़ित व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता एवं स्मरण शक्ति का ह्रास होता है.  

डिमेंशिया स्वयं एक बीमारी न होकर मस्तिष्क  को एफेक्ट करने वाली कई अन्य बिमारियों का लक्षण मात्र होती है (जैसे एल्ज़ीमर्स डिसीज़ या पार्किंसन डिसीज़). 

डिमेंशिया  कई प्रकार का होता है, जैसे एल्ज़ीमर्स,

वैस्कुलर, फ़्रन्टो-टेम्पोरल, वेर्निक-कोर्सकोफ्फ़,

अथवा मिक्स्ड टाइप्स आदि.

डिमेंशिया मुख्यतः वृद्धावस्था में होने वाली कंडीशन है परन्तु वर्त्तमान परिवेश में तेज़ी से बदलती हुई जीवन-शैली के परिणामस्वरूप इसके लक्षण ४० वर्ष की आयु के बाद भी दिखाई देने लगे है.

डिमेंशिया के कुछ मुख्य लक्षण :

- स्मरण शक्ति (याददाश्त ) कमजोर होना

- जरुरी घटनाएँ , तिथियाँ , या लोगों के नाम भूल जाना 

- कोई भी कार्य या प्रक्रिया करने के कुछ समय पश्चात भूल जाना 

- दिशाएं/रास्तें भूल जाना 

- एक ही प्रश्न बार-बार पूछना 

- कोई भी नया कार्य करते समय उसके दिशा-निर्देशों को नही समझ पाना 

- अंकों से सम्बंधित कार्यों को करने में परेशानी ( बिल भरना, खरीददारी करना)

डिमेंशिया को उसके प्रोग्रेशन के आधार पर ५ चरणो में विभाजित किया गया है, जो की अफ्फेक्टेड व्यक्ति की अनुभूति और मानसिक कार्यशीलता पर आधारित है. 

डिमेंशिया के डायग्नोसिस के लिए CT स्कैन , MRI , न्यूरो-साइकोलॉजिकल टेस्टिंग, और मिनी-मेन्टल स्टेट एग्जामिनेशन किया जाता है.

डिमेंशिया का कोई निश्चित ईलाज नही है,पर इसके लक्षणों की गति को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कुछ मेडिसिन्स, सेंसरी थेरेपी, फैमिली थेरेपी, आर्ट एंड म्यूजिक थेरेपी, एक्सरसाइजेज, डाइट एवं सही न्यूट्रिशन से पीड़ित व्यक्ति भी अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है.

 

Dr. Pooja Pathak

@ swavalamban rehab

Understanding Dyslexia ( Reading Disorder) in kids

Bachelor of Occupational Therapy (BOT)
Occupational Therapist, Ujjain
Understanding Dyslexia ( Reading Disorder) in kids

Dyslexia, also konown as Reading disability, is a common learning disorder in children. 

 

Diagnosis of Dyslexia is based on signs/symptoms related to reading/ learning n academic performance of the children.

 

डिस्लेक्सिया के कुछ प्रमुख लक्षण : 

 

१ से ६ वर्ष की आयु में: देर से बोलना सीखना, 

नए शब्दों को सीखने/बोलने में दिक्कत, 

कविताएं सुनाने में अटकना, 

वाणी अस्पष्ट होना. 

 

६ से १५ वर्ष आयु में : 

 

 

 

अपनी आयु के समान बच्चो से पढ़ाई में पिछड़ना, 

स्पेलिंग (शब्दार्थ) लिखते समय गलती करना,

लिखावट (हैंड-राइटिंग) अस्पष्ट होना, 

सुनी गई बात को समझने और रिप्लाय (उत्तर) देने में परेशानी, 

त्वरित निर्देशों को समझ नही पाना, 

किसी भी क्रिया को करने की प्रक्रिया स्टेप बाए स्टेप फॉलो नही कर पाना, 

 

१५ वर्ष से अधिक : 

 

 

 

पढ़ने में दिक्कत स्पेशली जोर से पढ़ने में, 

धीरे- धीरे पढ़ना, 

सिंपल मीनिंग वाली बातचीत के आलावा मज़ाक/जोक्स/ आदि को समझने में परेशानी, 

गणित /जोड़-घटाव आदि अंकों से रिलेटेड प्रोब्लेम्स को सॉल्व नही कर पाना

By applying specific therapeutic strategies and special education techniques,children with Dyslexia can lead a normal productive life. 

Understanding Autism Spectrum Disorder

Bachelor of Occupational Therapy (BOT)
Occupational Therapist, Ujjain
Understanding Autism Spectrum Disorder

WHO के अनुमान के अनुसार विश्व में २०० में से हर एक बच्चा आटिज्म से ग्रसित है. सिर्फ भारत में हे करीब २० मिलियन से ज्यादा लोग इस डिसऑर्डर से ग्रसित हैं. आटिज्म से पीड़ित बच्चों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है. कुछ रिसर्चेस के निष्कर्षों के आधार पर यह सामने आया है की किन्ही अनुवांशिक कारणों एवं प्राकृतिक बदलाव की वजह से यह डिसऑर्डर होता है.

All children with autism have problems with: 

Social Interaction 

Verbal and Nonverbal Communication

Repetitive Behaviors or Interests

 

Autistic children also tend to show some ‘typical‘ exhibitory behavior such as:

Rocking back and forth

Tapping ears

Scratching

 

Spinning in a circle

Finger flicking

Head banging

Staring at lights 

 

Explore more about autism on http://swavalambanrehab.blogspot.in/2016/04/understanding-mystery-of-autism.html

 

 

 

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