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Health Benefits Of Consuming Oranges!

Dt. Neetha Dilip 88% (3209 ratings)
M. Sc. Foods, Nutrition & Dietetics, B.Sc-Home Science
Dietitian/Nutritionist, Visakhapatnam
Health Benefits Of Consuming Oranges!

Oranges are a winter favorite and one of the most loved fruits around the world. The fruit is low in calories, it is good for the skin, the nervous system and the digestive system and it also lowers the risk of many diseases. It can be also included in our diet in several ways- from a morning snack to exotic desserts. Here are a few benefits of oranges:

1. They are good sources of vitamin C - Humans are unable to produce vitamin C endogenously, which is essential for our body and so it needs to be included in your diet. Vitamin C reduces inflammation related to arthritis, muscle injuries and also helps in reducing the risk of heart diseases by blocking the oxidation of cholesterol. Oranges are very rich in vitamin C along with other nutrients like vitamin B9, vitamin A, calcium, and potassium.

2. They are an excellent source of fiber - Fiber-rich fruits like oranges have been proven to moderate the levels of blood sugar after a meal because of their natural sugar- fructose content. For this reason, diabetic patients can also have oranges without worry. Moreover, the roughage present in the fruit reduces chances of constipation and diarrhea.

3. Help prevent cancerThe fiber content in oranges can also play a significant role in keeping cancer-causing chemical components away from the colon. Moreover, vitamin C helps build the immune system so as to resist cancer cells. The antioxidants may also help with breast cancer, skin cancer, stomach cancer and lung cancer.

4. Improves the quality of sperm - A vitamin called folic acid, which is present abundantly in oranges, helps to improve the quality of human sperm and the locomotive abilities. Folic acid also protects the sperm from most kinds of genetic damage.

5. Can prevent loss of hair - Production of collagen, which is one of the most important proteins in our body, is done with the help of vitamins, especially vitamin C. Collagen keeps the tissues in the hair together. So, oranges and other foods rich in vitamin C can help keep a healthy growth of hair even in your old age.

6. Checks the formation of kidney stonesJuice of citrus fruits like orange can increase the pH value of urine and can lead to increased excretion of citric compounds from the body. This reduces the possibility of the formation of calcium oxalate stones in the kidney considerably.

7. Promotes brain development - Vitamin B9 and folic acid keep the brain healthy. The polyphenols in orange help in accelerating the learning and memory functions of the brain and facilitate neurological development in the fetus.

8 Steps You Must Follow To Keep Your Kidneys Healthy!

Dr. Akanksha Aggarwal 84% (153 ratings)
MBBS, MD - Internal Medicine
Nephrologist, Noida
8 Steps You Must Follow To Keep Your Kidneys Healthy!

If you are concerned about your health, it is important for you to keep your kidneys protected from several harmful conditions. There are several types of kidney disorders, which may develop if your kidneys are not well cared for. This may include overload of toxins, acute renal failure, chronic kidney disease and end-stage renal disease. Kidney cancer is another fatal threat.

Steps to keep your kidneys healthy
There are several ways you can undertake for keeping your kidneys safe. They include the following:

  1. Take certain tests for obtaining the panel reading of your BUN or blood urea nitrogen and creatinine levels. The estimated glomerular filtration rate (EGFR) must be determined as well. The scores obtained from these tests will tell you about the condition of your kidneys at that point of time.
  2. Lower the amount of phosphorous intake. When the kidney does not function properly, phosphorus accumulation is likely, which causes serious conditions like heart disorders and calcification of the tissues. You should avoid phosphorous-rich food items and abstain from drinking carbonated drinks.
  3. You must consume several kidney-supportive food items, which may include watermelon, cranberries, cabbage, cauliflower, blueberries, strawberries, apples, garlic, onions and olive oil.
  4. Obesity is linked with kidney cancer and hence, you must maintain a healthy weight. Carry out regular exercises.
  5. Several pain relievers such as non-steroidal anti-inflammatory drugs or NSAIDS may have harmful side effects on the kidney and may lead to kidney cancer. Try to avoid these medicines.
  6. You can take an Epsom salt bath. This is a common measure for detoxification, and the wastes and toxins get removed, improving the kidney’s health rapidly. Have regular checkups of blood and urine along with ultra-sound to know kidneys are working good.
  7. You should keep your blood-sugar level and blood pressure under control as they are triggers for kidney failure. You should quit smoking and stop using tobacco in any form as the toxins from nicotine harm the kidneys.

With proper care and management of your kidneys, you will be able to prevent several harmful conditions.One should get Kidney function test and Ultrasound done to check that the kidney is functioning normally. If you experience any symptom associated with kidney disorders, consult a doctor immediately.

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Mulberry Fruit Benefits and Side Effects in Hindi - शहतूत के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Mulberry Fruit Benefits and Side Effects in Hindi - शहतूत के फायदे और नुकसान

वैज्ञानिक नाम मोरस अल्बा वाले शहतूत को सबसे पहले चीन में उगाया गया था. लेकिन अब स्वाद में मीठा लगाने वाले इस फल को दुनिया भर के विभिन्न समशीतोष्ण क्षेत्रों में उगाया जाता है. अपने देश में यह पंजाब, कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तरी पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में उगाया जाता है. ये अलग-अलग क्षेत्रों में लाल, काले और नीले रंगों में पाया जाता है. इन सबमें अमेरिकी शहतूत और काले शहतूत का स्वाद बेहतरीन होता है. शहतूत के पेड़ की पत्तियां रेशम के कीड़े के लिए एकमात्र खाद्य स्रोत है. ये तमाम पोषक तत्वों जैसे लोहा, राइबोफ्लैविविन, विटामिन सी, विटामिन K, पोटेशियम, फास्फोरस और कैल्शियम आदि से भरपूर होता है. इसके साथ ही साथ इसमें आहार फाइबर और कार्बनिक यौगिक जैसे रिवेस्ट्रैटोल, एंथोकायनिन, ल्यूटिन और कई अन्य पॉलीफेनॉयलिक यौगिकों की भी मौजूदगी होती है. शहतूत के अन्य फायदे और नुकसान भी हैं.

1. रक्तचाप को नियंत्रित करने में
शहतूत में मौजूद रेस्वेराट्रोल एक बहुत ही जरुरी फ्लैवोनॉइड एंटीऑक्सीडेंट है. ये सीधे रक्त वाहिकाओं में कुछ तंत्र के कार्यों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है जिससे कि रक्त वाहिका में संकुचन पैदा हो सकती है. दरअसल रिवेराट्रोल नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन में वृद्धि करके रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचाता है. इस प्रकार ये रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है.
2. हड्डियों के लिए
इसमें पाया जाने वाला विटामिन K, कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस और मैग्नीशियम हड्डियों के ऊतकों के निर्माण और रखरखाव के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं. ये हड्डियों में मजबूती बनाए रखते हुए, उपचार की प्रक्रिया में तेजी या हड्डियों के क्षति को ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के साथ ही अन्य आयु से संबंधित हड्डियों की विकार को रोकने के लिए जरुरी होता है.
3. पाचन में
शहतूत में आहार फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. जो कि पाचन में सुधार करके भोजन की गति बढ़ाकर कब्ज, ब्लोटिंग और ऐंठन की समस्या को कम करता है. इसके अतरिक्त फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियमित करने में भी मददगार होता है. नियमित रूप से इसका सेवन हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है.
4. रक्त संचार के लिए
इसमें लोहा की प्रचुरता होती है. ये शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को काफी बढ़ाने में सहायक होता है. इससे शरीर महत्वपूर्ण ऊतकों और अंग प्रणालियों के लिए ऑक्सीजन के वितरण में वृद्धि होता है और चयापचय एवं ऑप्टिमाइज़ कार्यक्षमता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है.
5. कैंसर के उपचार में
कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से मुकाबला करने के लिए इसमें एंथोकायनिन, विटामिन सी, विटामिन ए और अन्य पॉलीफेनोलिक और फ़यटोनुट्रिएंट्स यौगिकों की भरपूर मात्रा पाई जाती है. एंटीऑक्सिडेंट मुक्त कणों के खिलाफ हमारी रक्षा करते हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा होता है.
6. आँखों के लिए उपयोगी
शहतूत में पाए जाने वाले कई तत्वों में कैरोटीनॉइड भी है जो कि ज़ियेजैंथिन रेटिना मैक्यूला ल्यूटिया सहित कुछ ऑकुलर कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव तनाव में कमी लाती है. इसके अतिरिक्त ज़ियेजैंथिन एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हुए रेटिना को होने वाले नुकसानों को को भी कुछ हद तक रोकता है.
7. प्रतिरक्षा तंत्र के लिए
इसमें मौजूद विटामिन सी हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है. इसके अलावा इस फल में मौजूद खनिजों और विटामिनों के साथ मिलकर यह बीमारी के खिलाफ हमारी रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
8. त्वचा के लिए
शहतूत में विटामिन ए और विटामिन ई भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसमें लोटिन, बीटा कैरोटीन, ज़ा-एक्सथिन और अल्फा कैरोटीन जैसे कैरोटेनोइड घटक भी उपलब्ध होते हैं. ये सभी तत्व एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हुए त्वचा, ऊतक, बाल और शरीर के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं. शहतूत त्वचा को मुलायम रखने में भी मदद करते हैं.
9. बालों को स्वस्थ बनाने में
बालों की विभिन्न समस्याओं के लिए भी शहतूत के गुण उपयोगी साबित होते हैं. ये बालों के विकास को बढ़ावा देने के साथ ही बालों के झड़ने को भी रोकने का काम करते हैं. शहतूत मुक्त कणों के ऑक्सीडेटिव कार्यों को रोककर बालों को चमकदार और स्वस्थ बनाता है.
10. मधुमेह में
शहतूत में मौजूद ग्लूकोज इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है जिससे कि टाइप 2 डायबिटीज रुक सकता है. इसका रस प्लाज्मा ग्लूकोज में वृद्धि या भोजन के बाद रक्त शर्करा को रोकता है. इससे मधुमेह की प्रगति कम होने की संभावना बनती है.
11. वजन कम करने में
वजन घटाने का ये सबसे मजेदार तरीका हो सकता है. क्योंकि सफेद शहतूत की मिठास आपको स्वाद के साथ वजन घटाने में मदद कर सकते हैं. एक शोध के अनुसार इसमें भूख को दबाने की भी शक्ति पाई जाती है.
12. मस्तिष्क को दुरुस्त करने में
शहतूत का अर्क ग्लाइफोसेट से मस्तिष्क की सुरक्षा करता है. यह यौगिक ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बन सकता है. ये पार्किंसंस रोग से भी जुड़ा हुआ है. काले शहतूत में सीखने की कमी में सुधार और मेमोरी रिटेंशन जैसे अनुकूल प्रभाव भी पाए जाते हैं.

शहतूत के नुकसान

  • यह त्वचा के कैंसर का कारण बन सकता है.
  • शहतूत अत्यधिक पोटेशियम से भरपूर होते हैं जो गुर्दे की बीमारियों और पित्ताशय के दर्द से पीड़ित रोगियों में जटिलता पैदा कर सकते हैं.
  • शहतूत के अधिक सेवन से बचना चाहिए.
  • शहतूत से सिरदर्द, भूख, धुंधला दृष्टि, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, भ्रम, झटके आदि समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
  • शहतूत कार्बोहाइड्रेट अवशोषण को बाधित करके ट्राइसीलेग्लिसराल और कार्बोहाइड्रेट अवशोषण को रोक सकते हैं.
  • किमोथेरेपी के तहत आने वाले रोगियों को शहतूत अर्क से बचना चाहिए, जब तक कि डॉक्टर इसे विशेष रूप से अनुमति न दें.
  • शहतूत लेने के बाद कुछ लोगों को एलर्जी प्रतिक्रियाओं का अनुभव हो सकता है.
  • लिवर की समस्याओं वाले रोगियों में, अधिक शहतूत के सेवन से लिवर पर भार हो सकता है और आगे चलकर अंगों को नुकसान पहुंच सकता है.
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला को शहतूत से बचना चाहिए. क्योंकि इससे उन पर हानिकारक साइड इफेक्ट हो सकते हैं.
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Hanuman Phal (Soursop) Benefits and Side Effects in Hindi - हनुमान फल के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Hanuman Phal (Soursop) Benefits and Side Effects in Hindi - हनुमान फल के फायदे और नुकसान

हनुमान फल का वैज्ञानिक नाम एनोना मुरिकाटा है. इसे हनुमान फल के अलावा और भी कई नामों जैसे कि लक्ष्मण फल, ग्राविओला आदि नामों से भी जाना जाता है. ये मुख्य रूप से मैक्सिको, कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है. इसका स्वाद स्ट्रॉबेरी और अनानास के मिश्रित स्वाद जैसा है. ये देखने में सीताफल या रामफल जैसा ही है. इसकी सहायता से कई खाद्य पदार्थ जैसे कि शक्कर, कैंडी, डेजर्ट आदि निर्मित किए जाते हैं. इसमें स्वाद के साथ-साथ पोषक तत्वों की भी प्रचुरता होती है. विटामिन सी, विटामिन बी और कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक से भरपूर हनुमानफल के रस का उपयोग शरीर पर लगाने के लिए किया जाता है. हनुमानफल के अन्य फायदे और नुकसान निम्लिखित हैं.

1. त्वचा के लिए 
हनुमानफल के बीज का पाउडर बनाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा में कसाव आता है. इससे आपको चेहरे की झुर्रियों, बढ़ती उम्र के निशान और दाग-धब्बों को कम करने में मदद मिलती है. यदि आप इस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से लगायें तो ना केवल आपकी त्वचा स्वस्थ होगी, बल्कि जीवाणुओं के संक्रमण से भी स्वयं को सुरक्षित रख सकेंगे.
2. गठिया में
जोड़ो के दर्द या सूजन के मरीज इसके उपयोग से राहत महसूस कर सकते हैं. गाउट या गठिया जैसी स्थितियों से, तो प्रभावित क्षेत्र पर हनुमान फल के काढ़े से मालिश करने से काफी आराम मिलता है. हनुमान फल में मौजूद सूजन कम करने वाले यौगिक प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से उपचार करते हुए, दर्द को शांत और जोड़ो के लचीलेपन में सुधार भी काफी करते हैं.
3. तनावमुक्त नींद के लिए नींद
हनुमान फल तनावमुक्त नींद के लिए भी प्रयोग किया जाता है. इससे बनी चाय का उपयोग सदियों से तनाव को मुक्त करने के लिए किया जाता रहा है. हनुमान फल में सुखदायक गुण भी हैं जो अत्यधिक तनाव और चिंता से छुटकारा दिलाने के लिए बहुत प्रभावी हैं. शरीर में तनाव वाले हार्मोन आपके प्राकृतिक चयापचय चक्र के साथ-साथ आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकते हैं. अनिद्रा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भी हनुमान फल से बनी चाय आपके लिए एक अच्छा विकल्प है.
4. जठरांत्र प्रणाली के लिए
हनुमान फल का रस जठरांत्र मार्ग की सफाई करने के अलावा विषाक्त पदार्थों को निकालने वाला और मूत्रवर्धक के रूप में काम करने वाला होता है. इसकी विरोधी परजीवी स्वाभाव के कारण यह एक लोकप्रिय उपचार बन गया हैं. इसकी पत्तियों से बनी चाय को पीकर आप अपने पेट को साफ कर सकते हैं. इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी, स्कर्वी और पेचिश के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में प्राचीन काल से ही इस्तेमाल होता रहा है.
5. सर्दी-खांसी में
सर्दी-खांसी जैसी आम बिमारियों के उपचार में भी हनुमान फल की मुख्य भूमिका होती है. सूजन को कम करने वाला इसका गुण हमारे वायुमार्ग की सफाई करके, रक्त-संकुलन (शरीर के किसी एक भाग में खुन का असाधारण जमाव) से राहत देने और जलन को शांत करने में भी मददगार होता है. हुनमान फल कफ और बलगम को समाप्त करने का बेहतरीन उपाय है. श्वसन संबंधी समस्याओं के उपचार में भी इसकी भूमिका होती है.
6. कैंसर में फायदेमंद
इसके कई महत्वपूर्ण लाभों में से एक है इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे एसीटोजिनिन, क्विनॉलोन और ऐल्कलॉइड आदि. दरअसल ये तत्व सीधे कैंसर की रोकथाम और ट्यूमर के आकार को कम करने के लिए आवश्यक होते हैं. कई शोधों में इसे कैंसर के वैकल्पिक उपचार के रूप में देखा गया है. इसमें पाया जाने वाला एसिटोजिनिन गैर-सामान्य कोशिकाओं के विकास के लिए रक्त के प्रवाह को काटकर स्तन, अग्नाशयी, प्रोस्टेट और फेफड़ों के कैंसर के उपचार में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं.
7. घावों को भरने में
पेन किलर के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. घावों या ज़ख्मों पर बाहरी रूप में कई पीढ़ियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. हनुमान फल के शामक और सूजन को कम करने के गुण सभी प्रकार के शरीर के दर्द के लिए एक अच्छा समाधान साबित होता है.
8. प्रतिरक्षा प्रणाली की मज़बूती में
विटामिन सी के रूप में इसमें पाया जाने वाले तत्व हमारे शरीर के प्रतिरक्षातंत्र के लिए काफी उपयोगी साबित होता है. इसके कारण यह फल सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करता है. साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंफ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं. ये लम्बे समय से चलती आ रही बीमारियों को भी रोकने में मददगार है.

हनुमान फल के नुकसान

  • निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति को हर कीमत पर इसके सेवन से बचना चाहिए.
  • किसी भी अन्य प्राकृतिक उत्पाद की तरह, आपको इसे भी नियंत्रित मात्रा में ही उपभोग करना चाहिए.
  • इसकी उच्च मात्रा उल्टी के साथ-साथ मतली के कारण भी पैदा कर सकती है.
  • कई शोधों के अनुसार, इस पौधे के तने और पत्तियों का उपयोग करने बनाई गई चाय, न्यूरोटॉक्सिसीटी विकारों को जन्म दे सकती है.
  • तनाव ग्रसित लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.
  • अधिक लंबे समय के लिए इसका उपयोग शरीर में कवक और खमीर संक्रमण के विकास को जन्म दे सकता है.
  • कई शोधों ने संकेत दिया है कि इस फल में मौजूद रसायन पार्किन्सन विकार से पीड़ित मनुष्यों में मौजूद है. इसलिए इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से पीड़ित रोगियों को इसके सेवन से बचना चाहिए, अन्यथा यह लक्षणों को खराब कर सकता है
  • ग्रेविओला की अधिक खुराक शरीर की हृदय प्रणाली को प्रभावित कर सकती है.
  • यह फल अपने अवसाद प्रभाव के लिए जाना जाता है. इसलिए, दिल की समस्याओं से पीड़ित लोगों को पूरी तरह से इसके उपयोग से बचने चाहिए. सौर्सोप का अत्यधिक सेवन गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है.
  • गर्भवती महिलाओं को इसके उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है. हनुमान फल का सेवन तंत्रिका संबंधी विकारों के विकास को पैदा कर सकता है.
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Pedophilia - 8 Quick Facts About It!

Dr. Vaibhav Dubey 87% (10 ratings)
MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Bhopal
Pedophilia - 8 Quick Facts About It!

Pedophilia is an unnatural or abnormal attraction towards children of either or both sexes, usually aged thirteen years or younger. A pedophile's attraction towards adults varies. They fantasize and/or act on their fantasies with children who have not reached puberty. Pedophilia is one of the most common paraphilia (abnormal sexual desires). The DSM i. E. Diagnostic and statistical manual of mental disorders has included pedophilia as a mental disorder.

Here are a few facts about the disorder:

1. Pedophilic disorder is when pedophiles approach children to sexually gratify themselves or if desires towards children make them feel guilty and anxious and so, they alienate themselves from the society and are unable to achieve their personal goals.

2. One very important fact that one must keep in mind is that not all pedophiles molest children and not all child molesters are pedophiles. When one desires children, they are pedophilic. But only when they act on their desires, and sexually assault children, they are child molesters.

3. Since most pedophiles do not come forward or admit to having sexual desires towards children, most of the studies have been conducted on the pedophilic child molesters. However, the number of pedophiles is vast considering that there are about 4 million websites in business catering to child pornography.

4. Opening up and seeking help from a psychologist or psychiatrist might help them in curbing and managing these desires and prevent them from acting on them and committing sexual offenses. In rare cases, pedophiles are also prescribed medications to lower their sex drive.

5. Male pedophiles are far more common than female ones.

6. Most of the child sex offenders are family and relatives.

7. Psychologists believe that children who are lonely and aloof, and feel neglected are at a higher risk of being sexually abused. The type of activities differs in each case, while some just undress and look at a child, others force the child to take part and perform oral sex and/or touch the genitals or more.

8. In most countries, it is mandatory to report a pedophile to the authorities even when there is no risk, which is why most pedophiles do not come forward and admit having this disorder. They refrain from seeking help.

However, there is a prevention project dunkelfeld in Germany that provides free of cost services to people who are attracted to children, but are dedicated to not to act on their desires and molest children. This program maintains its members' confidentiality. Such programs are essential for a healthy society.

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Meat - Red vs White Facts Check

Dt. Neena Luthra 88% (10 ratings)
M.Sc - Dietitics / Nutrition, P.G. Diploma in Nutrition and Dietetics, B.Sc. Home Science
Dietitian/Nutritionist, Chandigarh
Meat - Red vs White Facts Check

Meat forms an essential part of the daily diet of many people. But it often gets difficult to choose between white meat (chicken or fish) and red meat (beef or pork or mutton) due to the numerous health benefits offered by both. Moreover, both kinds of meat have some health risks as well, which should be kept in mind while consuming either of them.

Read on to find how each type of meat may affect your health, and, which will be more beneficial for your body.

Fat content

People who are more conscious about their weight often tend to choose white meat over red meat because of its lower fat content. For example, fat content in chicken is only about 11%, whereas pork contains about 45% fat. Moreover, the saturated fat content of red meat is about 2.64 times that of white meat.

Protein content

100 gm of chicken breast has about 29.80 gm of protein, whereas the same amount of lamb and pork contain 22.51 gm and 27.55 gm protein respectively. In this case, consumption of white meat will prove to be beneficial as your body can absorb only 74% of the protein in red meat and 80% of the protein in white meat.

Other nutrient content

Red meat is rich in niacin, vitamin b12, riboflavin and thiamine, iron and minerals like zinc and phosphorus. While vitamin b12 aids proper nerve health and ensures that the red blood cells function properly, zinc is responsible for strengthening your immune system.

White meat contains fewer nutrients in comparison to red meat. However, fish contains high amount of omega-3 fatty acids, which help in improving lipid profiles and prevent cardiovascular diseases.

Health risks

Consumption of both types of meat has been long associated with increased risk of different diseases. The presence of myoglobin, a type of protein in red meat, is responsible for increasing the risk of certain types of cancer. Also, red meat has been often linked with increased chances of hypertension and heart diseases.

These days, feeding antibiotics to chicken for enlarging their size has become a common practise. So, consumption of this type of meat increases the amount of drug-resistant bacteria in your body and reduces the effect of useful drugs too.

White meat and red meat both have their own health benefits and risks, so including small amounts of both in your diet will prove to be beneficial for your body. Determine the amount of each type of meat you will consume depending on your body's specific requirements.

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Pumpkin (Petha) - 5 Amazing Reasons To Eat It!

Dr. Anis Akhtar 88% (449 ratings)
Bachelor of Unani Medicine & Surgery (B.U.M.S)
Ayurveda, Allahabad
Pumpkin (Petha) - 5 Amazing Reasons To Eat It!

Ayurveda treats food as a medicine, and most of the conditions are cured with Ayurvedic diets. Ayurveda considers certain foods as exceptional as they offer numerous health benefits, and one among them is Pumpkin.
Do you know the pumpkin can offer you numerous health benefits and not be used merely for making your jack-o-lantern during halloween? As per Ayurveda, it is especially beneficial for individuals with elevated vata and pitta doshas. It also serves as “Basti Shodan” and helps maintain bladder health.

Here are some of the most important benefits that pumpkins proffer when you eat them regularly.

  1. Contains copious amounts of vitamin A: Daily consumption of pumpkin can get you high doses of vitamin A, which is necessary to maintain your eye health. Not only eyes, but it will also help you in having a good skin, healthy bones, and teeth.
  2. It has a high dose of fiber: A bowl of mashed pumpkin contains 3 grams of dietary fiber while a handful of pumpkin seeds can give you 1.3 grams of this nutrient. Therefore, pumpkin serves you the required amount of dietary fiber as per our recommended daily requirement.
  3. Pumpkin can give you a good night’s sleep: Don’t forget to use the seed when it comes to a pumpkin. Pumpkin seeds contain Tryptophan which is an amino acid that promotes better sleep while also improving your mood.
  4. Good for your heart health: The fiber contents of pumpkin also protects you from a wide range of coronary diseases. It is also helpful in maintaining a healthy blood pressure owing to the presence of phytoestrogens in it.
  5. Cools the system: Pumpkin also has a cooling effect on the body system which makes it very beneficial for people who suffer from heartburn and burning sensations in the hands, feet, and stomach. It helps in cooling the digestive systems which, in turn, reduces the impacts of stomach infection, acid reflux, enlargement of liver and constipation.

The juice of petha is also useful for the health in a variety of ways. It can cure bleeding from any part of the body such as gums or nose or piles. This type of bleeding generally occurs due to an imbalance in the body temperature. It happens when there is a considerable rise in the temperature of the body. The cooling nature of petha aids in maintaining body temperature and prevent this kind of complications.

It is also beneficial, if you are suffering from kidney problems or urinary tract infections or stones or bladder issues and is also regarded as an excellent remedy for treating asthma. Pumpkin can also help in eliminating the risk of diabetes and can help keep it in control, if you already have diabetes.

As you can see, this simple fruit vegetable is highly beneficial for your good health and deserves to be added as a part of your diet. You can experiment various recipes right from soups to desserts using pumpkin to accomplish this easily.

In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!

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Grapefruit (Chakotara) Benefits and Side Effects in Hindi - चकोतरा के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Grapefruit (Chakotara) Benefits and Side Effects in Hindi - चकोतरा के फायदे और नुकसान

संतरे और नींबू के प्रजाति का ही फल है चकोतरा. लेकिन इसमें संतरे की बजाए सिट्रिक एसिड अधिक और शर्करा कम होती है. इसमें नींबू और संतरे के सभी गुण मौजूद होते हैं. स्वाद में खट्टा और कुछ मीठा लगने वाला चकोतरा की खेती सबसे पहले भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिणपूर्वी एशिया क्षेत्र में शुरू की गई थी. चकोतरा में पोटेशियम और लाइकोपीन के अलावा और भी कई पोषक तत्व और विटामिन मौजूद होते हैं. इनमें कैल्शियम, शर्करा, फॉस्फोरस, और विटामिन ए एवं सी प्रमुख हैं. आइए चकोतरा के फायदे और नुकसान को समझें.

1. आँखों के लिए
चकोतरा हमारे आँखों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. गुलाबी और लाल रंग के चकोतरा में बड़ी मात्रा में बीटा कैरोटीन पाया जाता है. बीटा कैरोटिन हमारे आँखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व है. इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए और फ्लेवोनोइड एंटीऑक्सिडेंट जैसे कि नारीरेनिन और नॉररीनिंग भी आँखों के लिए फायदेमंद है.
2. बालों के लिए
इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी कई तरह से हमारे बालों के लिए लाभकारी साबित होता है. दरअसल विटामिन सी एक एंटीऑक्सिडेंट है जो कि बालों के वृद्धि और विकास के लिए एक आवश्यक तत्व है. इसके अलावा ये बालों से रुसी और अन्य समस्याओं को भी ख़त्म करता है.
3. बुखार में
चकोतरा बुखार में भी काफी उपयोगी है. इसमें बहुमूल्य और प्राकृतिक 'क्विनिन' होता है जो मलेरिया के उपचार में मुख्य भूमिका निभाता है. इसके अलावा क्विनिन एक प्रकार का अल्कोअलॉइड है जो मलेरिया के इलाज के साथ साथ ही गठिया और पैर की ऐंठन के उपचार में भी लाभकारी है. इसके लिए चकोतरा के पल्प या रस का इस्तेमाल किया जा सकता है.
4. पेट की समस्याओं के लिए
चकोतरा के सेवन से हम पेट की समस्याओं से भी निपट सकते हैं. इसका ताजा रस पाचन के बाद एक क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करता है. इसलिए ये शरीर में एसिड गठन को रोककर कई समस्याओं को ख़त्म करता है. अपच में भी इसके रस से काफी लाभ मिलता है. इसमें मौजूद फाइबर और वेजटेटिव पल्प आंतों के लिए बल्क जोड़ता है और आपके शौच जाने को नियंत्रित करता है. कब्ज की समस्या से बचने के लिए आप इसके रस का सुबह खाली पेट इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. थकान को करे दूर
थकान मिटाने और अनिद्रा जैसी बीमारी में भी चकोतरा काफी उपयोगी है. इसके रस में नॉटकेटन नाम का एक बहुत दुर्लभ और महत्वपूर्ण यौगिक पाया जाता है. जो कि हमारे शरीर के ऊर्जा और सहनशक्ति में वृद्धि करता है. इसमें मौजूद ट्रिप्टोफान हमारे नींद से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है.
6. मूत्र विकार का उपचार
मूत्र विकार को दूर करने में भी चकोतरा काफी उपयोगी फल है. ये किडनी के पथरी और रक्तचाप में भी काफी उपयोगी है. इसके रस में पोटेशियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन सी मूत्र पीएच को बढ़ाने और जिस दर पर साइट्रिक एसिड को स्रावित किया जाता है, उसे तेज करने में मदद करता है. इसकी वजह से हमें बनने वाला कैल्शियम पथरी के खतरे को कम करता है.
7. कैंसर के उपचार में
इसमें पाया जाने वाला फ्लेवोनोइड शरीर में संक्रमण का और कार्सिनोजन के असर को कम करता है. इसके अलावा इसमें मौजूद फ्लेवोनॉइड और विटामिन ए फेफड़ों के कैंसर और मौखिक कैंसर से बचाने में मदद करता है.
8. गठिया का उपचार
इसमें पाया जाने वाला सैलिसिलिक एसिड शरीर के कैल्शियम को तोड़ने में मदद करता है. जो कि जोड़ों की कार्टिलेज को निर्मित करता है. गठिया के बेहतर उपचार के लिए चकोतरा के रस के साथ सेब का सिरका मिलकर पिएं.
9. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
चकोतरा में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल स्तर को घटाने में भी उपयोगी होता है. नियमित रूप से चकोतरा का सेवन कोलेस्ट्रॉल का स्तर 15% और ट्राइग्लिसराइड का स्तर 17% तक कम कर सकता है.
10. लिवर की के लिए
लीवर में बनने वाले कई तरह के विषाक्त पदार्थों को चकोतरा में मौजूद सफाई एजेंट हटा देते हैं. इसमें लिमोनाइड नाम का एंटीऑक्सिडेंट और फाइटो पोषक तत्व भी पाया जाता है जो कि विषाक्त पदार्थों को इक्स्क्रीट करने में मदद करता है. जिससे उन्हें पानी में अधिक घुलनशील बनाया जा सकता है.
11. वजन कम करने में
चकोतरा में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. जो कि भूख को कोलेसाइटोकिनिन नाम के पाचक रस को नियंत्रित करने वाले हारमोन को स्त्रावित करके भूख को संतुष्ट करता है. चकोतरा के सेवन से इंसुलिन कम होता है, इस प्रकार यह चीनी को संग्रह करने और वसा को बदलने की जगह, इसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में करता है. इस वजह से वजन घटाने की संभावना बढ़ जाती है.
12. त्वचा के लिए
चकोतरा में विटामिन ए और सी, खनिज और एंटी ऑक्सीडेंट भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव त्वचा को पर्यावरणीय खतरों से बचाने के साथ ही स्किन कोलेजन के उत्पादन को उत्तेजित करता है. जो कि त्वचा को चिकनाई और लोच प्रदान करके इसे कोमलता प्रदान करता है.

चकोतरा के नुकसान

  • चकोतरा के रस में कुछ दवाओं के असर को कम करने वाले रसायन पाए जाते हैं इसलिए इसके रस का इस्तेमाल सावधानी से करें.
  • इसका प्रयोग किसी चिकित्सक के परामर्श से ही करना उचित रहेगा.

Sapodilla (Chiku) Benefits in Hindi - चीकू के फायदे

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Sapodilla (Chiku) Benefits in Hindi - चीकू के फायदे

तमाम लाभदायक फलों में चीकू भी प्रमुख है. ये न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि इसमें पोषक तत्वों की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है. इसमें 71 प्रतिशत पानी, 1.5 प्रतिशत प्रोटीन, 1.5 प्रतिशत चर्बी और 25.5 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है. विटामिन ए और सी से भरपूर चीकू में 14 प्रतिशत शर्करा भी पाया जात है. प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए व सी, फॉस्फोरस, आयरन आदि पोषक तत्वों से भरपूर चीकू सेहत के दृष्टिकोण से काफी लाभदायक फल है. इसके बेहतर लाभ के लिए इसे दूध के साथ खाया जाना चाहिए. इसके लाभकारी गुणों के कारण ये गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बेहद उपयोगी है. इसके फायदे जानने के लिए निम्लिखित बिन्दुओं को देखें.

1. पेट के लिए
पेट में होने वाली कई तरह की परेशानियों को दूर करने में चीकू प्रमुख भूमिका निभाता है. चीकू आंतों को मजबूत बनाने, भूख को बढ़ाने और यूरिन की कमी एवं जलन को दूर करने में सहायक साबित होता है. चीकू में टैनिन नाम का एक उत्कृष्ट एंटीइनफ्लेमेट्री एजेंट पाया जाता है. जो कि हैं कई तरह की पेट की समस्याओं से निपटने में सहायता करता है. इसमें पाया जाने वलाल विटामिन-ए हमारी आँखों की समस्याओं को दूर करने में काफी उपयोगी है. इसमें ग्लूकोज की अधिकता होने के कारण ये शरीर को ऊर्जा देने का भी काम करता है. काफी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को एनर्जी देने का काम करता है.
2. गुर्दे के लिए
चीकू में मौजूद तमाम लाभदायक तत्व हमारे गुर्दे के लिए काफी उपयोगी साबित होता है. ये गुर्दे व् ह्रदय से जुड़े हमारे तमाम समस्याओं को दूर करता है. इसमें पाया जाने वाला भरपूर आयरन हमारे शरीर में खून की कमी को भी दूर करता है. कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्व भी इसमें पाए जाते हैं.
3. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी चीकू बेहद फायदेमंद साबित होता है. दरअसल इसमें तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि इस दौरान आवश्यक होते हैं. हमारे हड्डियों के लिए जरुरी कैल्शियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज भी काफी सहायक हैं.

चीकू के अन्य फायदे

  • ये हमारे दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होता होता है.
  • ये कब्ज और दस्त की बिमारी को ठीक करने बहुत सहायक होता है.
  • चीकू कैंसर के खतरे को भी कम करने में काफी मददगार है. 
  • इसमें पाया जाने वाला बीटा क्रिप्टोक्सैन्थीन फेफड़ो के कैंसर के खतरे को भी कम करता है.
  • चीकू एनिमिया होने की संभावना से भी हमें बचाने काम करता है.
  • यह हृदय रोगों और गुर्दे के रोगों से भी हमें बचाने का काम करता है. 
  • इसे खाने से आंतों की शक्ति बढती है और आंतें अधिक मजबूत होती हैं.
  • इसकी छाल में बुखार नाशक गुण पाया जाता है. ऐसा इसकी छाल में पाए जाने वाले टैनिन के कारण संभव हो पाता है.
  • इसके फल में थोड़ी सी मात्रा में संपोटिन नामक तत्व रहता है. चीकू के बीज मृदुरेचक और मूत्रकारक माने जाते हैं. चीकू के बीज में सापोनीन एवं संपोटिनीन नामक कड़वा पदार्थ होता है.
  • इसके पे़ड की छाल से निकले चिकना दूधिया- `रस-चिकल` नामक गोंद से चबाने का गोंद च्युंइगम बनता है. यह छोटी-छोटी वस्तुओं को जो़डने के काम आता है. दंत विज्ञान से संबन्धित शल्य चिकित्सा में `ट्रांसमीशन बेल्ट्स` बनाने में इसका उपयोग होता है.
  • चीकू ज्वर के रोगियों के लिए भी एक अत्यंत उपयोगी पदार्थ है.
  • भोजन के एक घंटे बाद यदि चीकू का सेवन किया जाए तो यह निश्चित रूप से लाभ कारक है.
  • चीकू के नित्य सेवन से धातुपुष्ट होती है तथा पेशाब में जलन की परेशानी दूर होती है.

Top 10 Copper Rich Foods

Dt. Neha Suryawanshi 96% (8411 ratings)
M.Sc. in Dietetics and Food Service Management , Post Graduate Diploma In Computer Application, P.G.Diploma in Clinical Nutrition & Dietetics , B.Sc.Clinical Nutrition & Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Mumbai

Copper is a trace mineral, meaning it is needed in a very small quantity. Its primary role is to help form hemoglobin and collagen in the body.

  • A deficiency in copper results in poorly formed red blood cells, known as anemia. It also is an antioxidant, helping with the elimination of free radicals.
  • Copper deficiency symptoms can include increased parasitic infections, weakness from anemia and leaky gut.
  • Copper must stay in balance with zinc and iron in the body as well and if you consume too much of one it can throw the others out of balance.

The rda for copper is 900 mcg/day. The daily value is 2 mg.

Top 10 copper rich foods list

1) Beef liver
3 oz: 14 mg (over 100% dv)

2) Sunflower seeds
¼ cup: 0.63 mg (31% dv)

3) Lentils
1 cup: 0.5mg (25% dv)

4) Almonds
¼ cup: 0.4 mg (20% dv)

5) Dried apricots
1 cup: 0.69mg (34% dv)

6) Dark chocolate
1 square: 0.9 mg (45% dv)

7) Blackstrap molasses
2 tsp: 0.28 mg (14% dv)

8) Asparagus
1 cup: 0.25 (12% dv)

9) Mushrooms
1 cup: 0.43 mg (20% dv)

10) Turnip greens
1 cup, cooked: 0.36 (18% dv)

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