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Jaundice Tips

Jaundice Or Surgical Jaundice!

MCh - Surgical Gastroenterology/G.I. Surgery, MBBS, MS - General Surgery
General Surgeon, Noida
Jaundice Or Surgical Jaundice!

 

Jaundice is yellowish discoloration of the sclera of the eye, It occurs due to excess biliary pigments accumulation when Red blood cells are destroyed these pigments are produced in the liver and secreted in the bile. Bile produced in the liver reaches to duodenum part of the small intestine through the common bile duct (a tube connecting from liver to duodenum), Whenever there is an obstruction in this passage of bile from the liver to duodenum it is called as obstructive or surgical jaundice. Obstruction can occur at any point at this passage and the reason for obstruction can be either intrinsic or external compression of the bile duct. Intrinsic factor includes such as biliary stricture, Stones in the common bile duct or intraluminal mass causing obstruction. There can be any external mass which may compress the bile duct from outside and may cause obstruction. Patient present with jaundice, dark-colored urine, the feature which distinguishes it from medical jaundice is pale colored stools, the patient may have itching and anorexia. Liver function test revels predominant raised conjugated bilirubin level, Ultrasound abdomen can confirm the cause of jaundice as obstructive and can also tell the site and cause of obstruction.

Treatment depends on the cause of obstruction and managed accordingly.

 

नवजात शिशु को पीलिया - Jaundice To Newborn!

Dr. Sanjeev Kumar Singh 87% (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
नवजात शिशु को पीलिया - Jaundice To Newborn!

नवजात शिशु को पीलिया होने पर कई बार पता भी नहीं चल पाता है क्योंकि कई नवजात शिशुओं के त्वचा का रंग भी जन्म के पहले कुछ दिनों में पीली ही होती है. इसलिए शिशु स्वस्थ है या पीलिया ग्रसित? इसका अंदाजा लगाने के लिए आपको दुसरे लक्षणों पर गौर करना होगा. इसके बाद शिशु को उचित के लिए ले जाना चाहिए. आप शिशु के पेट या टांगों को देखें यदि ये पिला लगे चिकित्सक के पास जाएँ.

क्या है नवजात में पीलिया का कारण
 

जाहिर है छोटे शिशुओं में पीलिया (जॉन्डिस) होने के कारण वयस्कों से अलग होते हैं. इसे लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है. जैसा कि आप जानते होंगे कि वयस्कों में पीलिया यकृत (लीवर) में उत्पन्न समस्याओं के कारण होता है. जबकि शिशुओं में इसकी वजह उनके खून में पित्तरंजक (बिलीरुबिन) की मात्रा में वृद्धि हो जाना होती है. आपको बता दें कि नवजात शिशु में बिलिरुबिन का लेवल अधिक होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके शरीर में ऑक्सीजन का वहन करने वाली लाल रक्त कोशिकाएं अतिरिक्त होती हैं. नवजात शिशु का लीवर अभी पूरी तरह परिपक्व न होने के कारण अतिरिक्त बिलिरुबीन का अपचय नहीं कर पाता है. इसी वजह से उनमें पीलिया की संभावना बनती है. जैसे जैसे शिशु की उम्र बढ़ती है उनमें बिलिरुबिन का स्तर भी सामान्य से बढ़ता ही जाता है. पीलापन ऊपर से नीचे की तरफ फैलना शुरु हो जाता है. यानि यह सिर से गर्दन, छाती और गंभीर मामलों में पैरों की उंगलियों तक पहुंच जाता है. अगर, कोई गंभीर स्थिति न हो, तो नवजात शिशु में पीलिया आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है. हलांकि ये भी धान देने योग्य बात है कि कुछ गंभीर लेकिन दुर्लभ मामलों में यदि पीलिया, लीवर के रोग या माँ व शिशु के खून में असामान्यता के कारण हो, तो यह उसके तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है.

क्या है इसका लक्षण?

हमारे यहाँ शिशुओं में पीलिया का होना काफी सामान्य बात है. जब किसी महिला का प्रसव अस्पताल में ही होता है तब डॉक्टर पीलिया के विशिष्ट लक्षणों को देखकर ही इसकी पहचान कर लेते हैं. लेकिन यदि आपको घर आने के बाद लगे कि शिशु को पीलिया हो सकता है, तो आप विशेषज्ञों द्वारा बताए गए आसान घरेलु जांच को आजमाएं.
जिस कमरे में पर्याप्त रौशनी हो उसमें शिशु की छाती को हल्के से दबाएं. जब आप दबाव हटाती हैं तब अगर शिशु की त्वचा में पीलापन नजर आए तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए. जिन शिशुओं का रंग साफ़ होता है उन शिशुओं पर यह तकनीक बेहतर परिणाम देती है.

दुसरे शिशुओं में पीलिया की जांच के लिए देखें कि उनकी आंखों के सफेद हिस्से, नाखूनों, हथेलियों या मसूढ़ों में पीलापन तो नहीं है. इस बात को भी ध्यान में रखें कि नवजात शिशुओं में पीलिया का होना एक अस्थाई स्थिति है. इसलिए यह कई बार बिना किसी उपचार के जल्द ही ठीक हो जाती है. इसलिए इसका कोई दीर्घकालीन प्रभाव भी नहीं होता है. अगर आपको किसी प्रकार का कोई संदेह है तो अपने चिकित्सक से बात करें.

इन सवालों के जवाब के आधार पर स्थिति जानें

जिन शिशुओं का जन्म समय से पहले होता है उनको जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों तक अस्पताल में ही रखा जाना ठीक रहता है. ताकि डॉक्टर उनपर नजर रख सकें. लेकिन जब आपको छुट्टी मिल जाती है और आप डॉक्टर के निर्देशों का पालन भी करते हैं उसके बावजूद शिशु का पीलिया ठीक नहीं होता तो आपको पुनः डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसका पता आप निम्लिखित सवालों के जरिये लगा सकते हैं.

क्या शिशु को बुखार है?
क्या वह सही से स्तनपान कर रहा है?
क्या उसका मल काफी फीके रंग का है (करीब-करीब चिकनी मिट्टी या सफेद रंग का)?
क्या शिशु निरुत्सहित और उनींदा सा है?
क्या पीलिये का पीलापन गहरे पीले रंग में बदल रहा है?
क्या पेशाब का रंग भी गहरा हो रहा है?
क्या है नवजात शिशु में पीलिया का उपचार?

अगर आपके शिशु को पीलिया हो, तो डॉक्टर उसके खून में बिलिरुबिन के स्तर को मापने के लिए जांचें करवाने के लिए कह सकते हैं. गर्भावस्था की पूर्ण अवधि पर जन्मे और स्वस्थ शिशु में पीलिये का उपचार डॉक्टर तब तक शुरु नहीं करते, जब तक कि शिशु के रक्त में बिलिरुबिन का स्तर 16 मिलिग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा न हो. मगर यह शिशु की उम्र पर भी निर्भर करता है. 70 के दशक की शुरुआत से पीलिये का उपचार फोटोथैरेपी से किया जा रहा है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नवजात शिशु को फ्लोरोसेंट रोशनी में रखा जाता है. इससे शरीर से अतिरिक्त बिलिरुबिन टूटने लगता है.

शिशु को आमतौर पर पूरे कपड़े उतारकर एक या दो दिन के लिए इस रोशनी में रखा जाता है. उसकी आंखों को रक्षात्मक पट्टी (मास्क) से ढक दिया जाता है. अगर नवजात के शरीर में बिलिरुबिन का स्तर कम हो और फोटोथैरेपी की जरुरत न हो, तो भी आप शिशु को सुबह-सुबह या शाम होने पर सूरज की रोशनी में ले जा सकती हैं. इससे भी बिलिरुबिन का स्तर घटने में मदद मिलती है. ध्यान रखें कि शिशु को ज्यादा समय तक धूप में न रखें क्योंकि इससे शिशु की नाजुक त्वचा में सनबर्न हो सकता है. माँ और शिशु के खून में असंगति होने के कुछ दुर्लभ मामलों में बिलिरुबिन का स्तर खतरनाक उच्च स्तर पर पहुंच सकता है. ऐसी परिस्थिति होने पर शिशु को खून चढ़वाने की भी जरुरत पड़ सकती है.
 

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Jaundice - Types, Causes, Symptoms, Treatment And More!

MBBS
Internal Medicine Specialist, Delhi

Jaundice:

Jaundice is a medical condition when the amount of bilirubin in the blood increases causing yellow discoloration of skin, whites of the eye and mucous membranes. Bilirubin is produced by natural breakdown of red blood cells and it is also referred to as icterus.

Types of Jaundice

There are three types of jaundice:

1. Hepatocellular jaundice

2. Hemolytic jaundice

3. Obstructive jaundice

Hepatocellular jaundice – This type of jaundice is triggered due to a disease, an injury or damage caused to the liver.

Hemolytic jaundice – This type of jaundice is triggered when an increased amount of bilirubin is produced in the body as a result of breakdown of red blood cells at a very fast pace.

Obstructive jaundice – This type of jaundice occurs when there is an obstruction in the bile duct. This obstruction prevents bilirubin passing through the liver resulting in jaundice.

Symptoms

Common symptoms of jaundice include:

- a yellow tinge to the skin and the whites of the eyes, normally starting at the head and spreading down the body

- pale stools

-  dark urine

- itchiness

Accompanying symptoms of jaundice resulting from low bilirubin levels include:

- fatigue

- abdominal pain

-  weight loss

-  vomiting

-  fever

- pale stools

-  dark urine

Causes

As aforementioned, Jaundice is a medical condition where the skin, the mucous membrane and the eyes turn yellow due to excess amount of bilirubin in blood. The major causes of increase in bilirubin include:

-  Breaking down or dying of red blood cells and protruding through the liver.

-  Overload or damage to the liver.

-  Improper movement of the bilirubin from the liver into the digestive tract.

Here are some major conditions that can cause jaundice:

-  Liver infections including hepatitis A, B, C, D and E or liver infections caused to parasites

-  Overdose of certain drugs (acetaminophen)

-  Exposure to certain poisonous items

-  Birth defects

-  Disorders such as Gilbert syndrome, Dubin-Johnson syndrome, Rotor syndrome, or Crigler-Najjar syndrome

-  Chronic liver diseases

-  Gallstones

-  Gallbladder disorders

-  Blood disorders

-  Pancreatic cancer

- Bile buildup in the gallbladder (jaundice of pregnancy)

Risk factors

As already discussed earlier, Jaundice occurs due to the production of excess amount of bilirubin in the blood. This causes bilirubin to get deposited in the tissues. Here are some medical conditions that increase the risk of jaundice:

- Liver inflammation.

- Bile duct inflammation.

-  Blockage of the bile duct

-  Hemolytic anemia

-  Gilbert's syndrome

- Cholestasis

Listed below are some rare medical conditions that increase the risk of jaundice:

-  Crigler-Najjar syndrome.

-  Dubin-Johnson syndrome.

-  Pseudojaundice

Complications

If not treated properly, Jaundice may lead to severe itching. Sometime, this itching is so intense that patients scratch their skin intensely, suffer from insomnia and even start experiencing suicidal tendencies. Here it is important to understand that these complications are due to some underlying problems and the disease itself.

Jaundice, caused due to obstruction of bile duct, may lead to uncontrolled and unexplained bleeding. The bleeding caused is uncontrolled because of the lack of the vitamin required for clotting of blood.

Diagnosis

Diagnosis of the disease is often done by checking the medical history of the patient, his/her physical examination and a test to confirm the bilirubin level.

In the physical examination, medical professionals usually look for swelling abdomen and inflammation in lever. Here it is important to know that a stiff liver may indicate signs of cirrhosis or cancer in the liver.

In addition to the physical examination, several other types of tests can confirm jaundice. One such test is liver function test. If the liver function test indicates signs of jaundice, doctors may also suggest:

-  Bilirubin tests

-  FBC (full blood count)

-  CBC (complete blood count)

-  Tests for hepatitis A, B, or C

In order to diagnose an obstruction in the liver, doctors may suggest:

-  MRI

-  CT

- Ultrasound Scans

-  ERCP (endoscopic retrograde cholangiopancreatography)

-  X-ray imaging.

Furthermore, doctors may also suggest a liver biopsy to detect the signs of liver inflammation, fatty liver, cirrhosis and cancer. Liver biopsy is done by obtaining a liver tissue by inserting a needle into the liver.

Treatment

The treatment of Jaundice depends upon the underlying cause. Typically, the treatment of the disease is done to cure the cause and not just the symptoms of jaundice. Treatment of jaundice includes:

-  Jaundice caused due to anemia is treated by iron supplements and iron-rich foods in order to increase the iron component in the blood cells.

-  Jaundice caused due to hepatitis is treated using steroid or antiviral medicines.

- Jaundice caused due to obstruction is treated by performing a surgery to remove obstruction.

-  Jaundice caused by overuse of certain medicine is treated using alternative medicines.

Prevention

Typically, jaundice is caused to the malfunction of liver. Therefore, it is important to ensure healthy functioning of the liver by ensuring healthy and balanced diet, regular exercise and refraining from the consumption of alcohol.

Myths

Myth 1: Jaundice is a waterborne disease.

Fact: While it is true that jaundice is usually triggered due to consumption of contaminated water, it is not the only cause. Jaundice is also caused due to malaria, leptospirosis, and hepatitis B/ C. These diseases are not waterborne. Obstruction of bile duct, gall stones or cancer may also lead to jaundice and these disease too are not waterborne.

Myth 2: All liver problems lead to Jaundice.

Fact: Though liver malfunction mostly leads to jaundice, all medical issues related to liver do not trigger jaundice. There are many medical conditions related to liver that do not lead to jaundice.

Myth 3: Itching is the sign that patient is recovering from jaundice.

Fact: Jaundice, caused due to obstruction, usually triggers acute itching. However, itching doesn’t signal that the patient is recovering from the disease. 

Myth 4: Jaundice usually causes extreme sleepiness or insomnia.

Fact: Though extreme fatigue is common jaundice during jaundice, excessive sleepiness or insomnia is not caused by jaundice. On the other hand, excessive sleepiness or insomnia may be a signal of liver malfunction or liver failure. In such a case, one must seek immediate medical attention.

Myth 5: There is no cure for jaundice.

Fact: A large fraction of people believe that there is no cure for jaundice. In fact, this is one of the biggest myths associated with this disease. The reality, however, is akin to this myth. Successful evaluation of the jaundice by liver function test can help one understand the caused and severity of the disease. Once the cause is identified, one can seek medical treatment to treat the root cause of Jaundice.

Myth 6: When diagnosed with jaundice, one needs to stop eating spices and non-vegetarian food.

Fact: While it is important to ensure balanced diet when diagnosed with jaundice, one can eat spicy and non-vegetarian food. However, it is important to ensure avoiding too much spices as it may lead to nausea. A balanced and frequent diet is important to ensure fix the liver malfunctioning and bring it back to a healthy state.

Myth 7: Consuming turmeric can lead to severity of jaundice.

Fact: This is yet another myth around the disease. No medical evidence has been found that proves the consuming turmeric can lead to the increase in the production of bilirubin. Therefore, one can consume turmeric during jaundice; however, it is advised to consume only small quantity of it.

Myth 8: Sugarcane juice is the best treatment option for jaundice.

Fact: A large number of people believe that sugarcane juice is the best treatment for jaundice. However, this is not completely true. Sugarcane juice is a great source of carbohydrate and helps increase nutrients in the body. But it doesn’t really help heal the liver faster or slow down the excessive production of bilirubin in the blood.

Myth 9: It is important to give water to newborn babies to treat jaundice.

Fact: Typically, most newborn babies have jaundice. Some people believe that if the newborn has jaundice, they aren’t really adjusting to their mother’s milk and they should be given water instead. However, this is wrong. Mother’s milk is safest for newborn babies. In addition, giving water to newborn babies may lead to jaundice, if the water is not clean and also lead to several other infections leading to life-threatening complications.

Myth 10: Jaundice spreads by physical contact.

Fact: A fair share of people also believes that jaundice is spread by physical contact. However, this is not true at all. Jaundice doesn’t spread by physical contact.

FAQs

Question 1: What is infant jaundice?

Answer: Infant jaundice is very common amongst babies born before the completion of the pregnancy period. Typically, a large number of babies, born before 38 weeks, the completion of pregnancy period and breastfeeding, show the symptoms of jaundice. But there is nothing to really fear as the signs of jaundice don’t signal that the baby is born with weak or malfunctioning liver. In newborn babies, liver aren’t usually string enough to remove bilirubin produced in the blood. But as the baby grows, the liver becomes stronger and starts functioning normally.

There is not treatment for infant jaundice and the symptoms of the disease automatically subside without the help of any medicines. However, some medical professionals may suggest medicines for infant jaundice depending upon the condition of the newborn baby and the complication of the disease. Complication of infant jaundice may even lead to brain damage.

Question 2: What causes infant jaundice?

Answer: Listed below are some of the many causes for infant jaundice:

When the liver is still underdeveloped. This is very common and one must not worry about the same. Gradually, the liver becomes stronger and starts removing bilirubin from the blood.

-When there is some internal bleeding

-When the newborn suffers from blood infection

-When the newborn baby suffers from deficiency or malfunctioning of enzyme

-When the red blood cells of the newborn baby break down more than normal

-When the newborn baby’s blood is not compatible with mother's blood. This lead to abnormal breakdown of RBCs.

-When the newborn has any viral or bacterial infection

-When the baby isn’t breastfed sufficiently

Question 3: Can jaundice occur without discoloration of the skin?

Answer: Discoloration or yellowish tinge of the skin is just one of the symptoms of jaundice. There have been many cases where jaundice patients have shown delayed discoloration or yellowish tinge. This is why one must know all the signs and symptoms of jaundice. Here is a list of some of the other symptoms of jaundice:

Extreme pain in the abdomen

Discoloration of urine and stool

Excessive vomiting

High fever

Weight loss

Extreme fatigue

Question 4: Is it difficult to treat jaundice?

Answer: the answer is no. The treatment of jaundice is not difficult. In fact, the treatment of jaundice can be easily administered depending upon the causes of the disease.

Listed below are just some of the many treatment options for the disease:

Hemolytic jaundice can be treated using medicines to increase iron in the blood. Also, iron rich diet can help treat hemolytic jaundice.

Jaundice can also be treated using steroids. Jaundice caused due to bile obstructions can be treated with surgeries in order to remove the obstruction.

Question 5: Can jaundice be fatal?

Answer: Typically, jaundice is not a fatal disease. However, those suffering from extreme liver problems may eventually develop chronic jaundice and this could lead to life-threatening scenarios. Age also plays an affective factor in the treatment of the disease. Jaundice may prove to be life-threatening for elderly people and that’s why most doctors recommend hospitalization to elderly people suffering from jaundice. In addition, those who consume excessive amount of alcohol may damage their liver developing chronic jaundice that may prove to be fatal.

Question 6: What is Latent Jaundice?

Answer: Latent jaundice is a medical condition where the amount of bilirubin in the blood increases without any signs or symptoms of jaundice. In this medical condition, the inner skin cells turn to yellowish greenish color excluding the brain cells.

Question 7: What is the recovery period for jaundice?

Answer: Typically, jaundice patients take approximately one to two months to completely recover from the disease. However, weakness, pain and itching associated with jaundice usually disappear by the end of the 3rd week. But it is important to stick to healthy and balanced diet to ensure complete recovery of the liver in its best forms.

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IMMUNITY AND CHANGE OF WEATHER

Dr. Tarannum Shaikh 92% (504 ratings)
B.H.M.S., Post Graduate Certificate In Nutrition, Obesity & Health
Homeopath, Indore
IMMUNITY AND CHANGE OF WEATHER

How many people adults or children do we see in day to day life who tend to fall ill at every change of temperature?

Sensitivity to change in atmospheric conditions has become a very common phenomenon in todays world. Most people end up with viral infections such as cough, cold, fever etc at every change in season – be it summer to rainy, rainy to winter or winter to summer.Other common infections include stomach infections, diarrhoea, typhoid, jaundice, malaria, allergic rhinitis, breathing problems etc.This sensitivity basically comes from an altered or weakened immune system. A body which is not capable enough to handle natural external stimuli and ends up over reacting and throwing out symptoms such as sneezing, runny nose, cough, fever, bodyache, upset stomach, loss of appetite etc.

Most of the times attention is given to the symptoms and thus symptomatic relief is obtained. The actual cause of the symptoms is oftern overlooked .When the body throws out symptoms, it is asking for help so that it can fight for itself and not get affected by external stimuli.This is where homeopathy steps in....where the PATIENT is treated and not just his symptoms. Homeopathic medicines are prescribed afer a detailed case study covering every aspect of the patient’s personality and thus they help in giving relief to existing symptoms and in the long run the medicines make the body capable of fighting for itself.

Homeopathic medicines have practically no side effects and can be given to even infants, or the elderly . They can also be administered side by side along with regular medication and eventually we can reduce the patient’s depency on medicines.For more information or treatment for conditions such as allergic rhinitis, illness at every change of weather, bronchitis, skin allergies, weak digestion or lowered immune system please feel free to consult a doctor.

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Jaundice - Know The Basic Types Of It!

Dr. Amit Beniwal 87% (110 ratings)
MBBS, MD - Medicine, Masters In Evidence Based Medicine
General Physician, Delhi

Jaundice is a disease which causes the skin and the sclerae of the eye to turn yellow. It is caused by hyperbilirubinemia or excess secretion of bilirubin into the blood. The body fluids may also turn yellow. The shade of the skin depends on the bilirubin level. A mild increase in the bilirubin turns the skin pale yellow, and high level makes the skin turn brown.

There are three primary types of jaundice:

  1. Hepatocellular jaundice: This type of jaundice occurs due to liver disorders.
  2. Hemolytic jaundice: This type of jaundice occurs due to the breakdown of erythrocytes or red blood cells, and then excess bilirubin is produced.
  3. Obstructive jaundice: This type of jaundice develops due to an obstruction in your bile duct, restricting the bilirubin to exit the liver.

The common causes of jaundice are as follows:

  1. Inflammation of the liver disables the secretion and production of bilirubin and results in a buildup of bilirubin.
  2. Inflammation of the bile duct disables the secretion of bile juice, which results in bilirubin removal and leads to jaundice.
  3. In case the bile duct gets obstructed, the liver cannot dispose the bilirubin and leads to hyperbilirubinemia.
  4. Hemolytic anaemia may result in jaundice. When a large number of red blood cells break down, bilirubin production gets enhanced.
  5. An inherited condition known as Gilbert’s syndrome may also lead to jaundice. The enzyme’s ability to process bile excretion is also impaired.
  6. Another medical condition called Cholestasis disrupts the flow of bile from the liver. The conjugated bilirubin containing bile remains in the liver and leads to jaundice.
  7. Jaundice is also caused from alcoholic liver disease, caused due to excess alcohol consumption.

Treatment of jaundice
Jaundice itself cannot be cured and hence, the underlying cause of the jaundice is treated. Different types of jaundice are cured using different methods:

  1. Jaundice induced by anaemia can be cured by increasing the iron amount in your blood. This is done by intake of iron supplements or having iron rich food.
  2. Jaundice caused from hepatitis is treated by injections of anti-viral and steroid medicines.
  3. Obstruction induced jaundice has to be treated by surgical means. The obstruction is removed by surgery.
  4. Jaundice inflicted from medication is usually treated by choosing alternative medicines and abstaining from the medicines which caused the jaundice.
  5. Jaundice can be kept away if you take proper care of your liver. For this, you should eat a balanced diet, work out regularly and prohibit yourself from consuming excess of alcohol.

Jaundice is the most common type of liver disorder and occurs in people of all ages and also in newborn babies. Keep away from contaminated food and water, if you want to avoid jaundice.

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Ayurvedic Treatment Of Jaundice - पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज

Dr. Sanjeev Kumar Singh 87% (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ayurvedic Treatment Of Jaundice - पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज

पीलिया एक सामान्य रोग है जो बच्चो से लेकर वृद्धों में विकसित हो सकता है. यह ब्लड में बिलीरूबिन के अतिरिक्त स्राव के कारण होता है. आमतौर पर, यह टिश्यू और ब्लड में बनते है. जब लिवर में रेड ब्लड सेल्स टूटती है, तब इसमें एक पीले रंग का बिलीरूबिन नामक पदार्थ बनता है. जब यह पदार्थ किसी कारण ब्लड से लिवर की और जाता है और लिवर के माध्यम से शरीर से फिल्टर होकर शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है, इसके परिणामस्वरूप पीलिया होता है. पीलिया का इलाज के लिए सबसे उपयोगी आयुर्वेदिक उपचार होता है. निम्नलिखित कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताए गए है, जो पीलिया के इलाज में बहुत कारगर साबित हो सकते हैं:

करेला
करेला में कई तरह के पौष्टिक गुण पाए जाते हैं. इसमें पीलिया को ठीक करने के भी क्षमता होती है. आप नियमित रूप से करेला का जूस का सेवन करना होगा और आपको पीलिया जैसे रोग से छुटकारा मिल जाएगा. पीलिया के उपचार के लिए करेला का जूस रामबाण जैसा होता है. आप करेला का एक एक चौथाई कप जूस पीये और अपने लिवर को स्वस्थ बनायें.

जौ पाउडर
जौ आपके शरीर से जहरीले पदार्थ को खत्म करने में उपयोगी है. यह आपके शरीर से बिलीरूबिन सहित शरीर में अतिरिक्त जहरीले पदार्थ को नष्ट करती है. आपको भुनी हुई जौ को गर्म पानी में शहद के साथ मिलाना है नियमित रूप से दिन में बार पीएं. यह आपको पीलिया को ठीक करने में मददगार साबित होगा.

बेरी
जौंडिस बेरी( अंबरबारिस) को बैरबैरिस नाम से भी जाना जाता है. इसके पीलिया उपचार में प्रभावशीलता के कारण जौंडिस बेरी का नाम दिया गया है. यह अपने स्वाद में कड़वापन लाता है. आप इसे जूस या फल दोनों तरह से सेवन कर सकते है. इसके छाल का जूस बनायें और दिन में दो बार पीएं. यह लिवर में होने वाली बीमारी के लिए फायदेमंद है.

गिलोय
गिलोय या गुदुची एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है. यह लिवर को किसी भी प्रकार के नुकसान से रोकती है और लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में मदद करती है. आपको 10 ग्राम गिलोय लेना है और इसका रस निकालना है. इसके अदभुत परिणाम देखने के लिए, इसके रस को दिन में 2 से 3 बार रोजाना पीयें. इसके अलावा आप एक चमच गुदुची पाउडर भी दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं.

हल्दी
हल्दी के औषधीय गुण से हर कोई परिचित है. यह हर घर में उपयोग की जाने वाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है. आप इसको एक ग्लास गर्म पानी में एक चमच का एक चौथाई हल्दी मिलाएं और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए दिन में तीन बार पीएं.

मूली
यदि आप मूली को हर दिन खाते है या जूस निकाल कर पीते है , तो इससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिल सकती है. यह आपके शरीर से बिलीरूबिन को नष्ट कर देता है. इसके बेहतर परिणाम देखने के लिए , आप इसमें एक चमच तुलसी पाउडर भी मिला सकते हैं.

कुटकी
कुटकी को पीलिया इलाज के लिए सबसे उपयोगी माना जाता है. यह लिवर को हेल्थी रखने में मदद करती है और पित्त के उत्पादन को नियंत्रित करती है. कुटकी के 1 या 2 चमच जड़ो के चूर्ण को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ पीये. अगर आप गंभीर रूप से बिमार है, तो इसे निसोथ के साथ भी ले सकते है.

नींबू
नींबू आपके लिवर के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. इसलिए, यह पीलिया रोग से निपटने में मदद करती है. आप दिन में 2 से 3 बार नींबू का रस पी सकते है.

कटनीप
पीलिया रोग बच्चों में बहुत सामान्य है क्योंकि उनके पास रेड ब्लड सेल्स बहुत अधिक होती है. बच्चो का लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं होता है. इसके परिणामस्वरूप शरीर से बिलीरूबिन को नष्ट करने में लिवर सही ढंग से कार्य नहीं करता है. इस स्थिति में कटनीप सबसे सफल घरेलु उपाय है, जो बच्चो में पीलिया रोग को होने रोक सकती है. अगर माँ अपने बच्चो को स्तनपान कराती है, तो वे दिन में 2 से 3 बार कटनीप की चाय पी सकती है, जो पीलिया रोग में मदद करता है.

आंवला
यह एक बहुत सामान्य आयुर्वेदिक जड़ीबूटी है जो कई तरह के रोगों में मदद करती है. यह आपके लिवर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. इसके जूस को दिन में 2 से 3 बार पीने से लिवर रोग से छुटकारा मिल सकती है.

टमाटर का रस
यदि आप हर सुबह टमाटर का जूस खाली पेट पीते है तो यह आपको पीलिया जैसे रोगों से लड़ने में मदद कर सकती है. टमाटर में लाइकोपीन उच्य मात्रा में होती है जो लिवर के के कार्य को सुगम बनता है और पीलिया से निदान पाने में तेजी लाता है. आप इसमें काली मिर्च और नमक भी मिश्रित कर सकते हैं.

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Jaundice - Common Causes Of It!!

Dr. Bhupindera Jaswant 88% (4570 ratings)
MD - Consultant Physician, Doctor of Medicine, MD
General Physician, Ahmedabad
Jaundice - Common Causes Of It!!

Jaundice is a disease which causes the skin and the sclerae of the eye to turn yellow. It is caused by hyperbilirubinemia or excess secretion of bilirubin into the blood. The body fluids may also turn yellow. The shade of the skin depends on the bilirubin level. A mild increase in the bilirubin turns the skin pale yellow, and high level makes the skin turn brown.

There are three primary types of jaundice:

  1. Hepatocellular jaundice: This type of jaundice occurs due to liver disorders.
  2. Hemolytic jaundice: This type of jaundice occurs due to the breakdown of erythrocytes or red blood cells, and then excess bilirubin is produced.
  3. Obstructive jaundice: This type of jaundice develops due to an obstruction in your bile duct, restricting the bilirubin to exit the liver.

The common causes of jaundice are as follows:

  1. Inflammation of the liver disables the secretion and production of bilirubin and results in a buildup of bilirubin.
  2. Inflammation of the bile duct disables the secretion of bile juice, which results in bilirubin removal and leads to jaundice.
  3. In case the bile duct gets obstructed, the liver cannot dispose the bilirubin and leads to hyperbilirubinemia.
  4. Hemolytic anaemia may result in jaundice. When a large number of red blood cells break down, bilirubin production gets enhanced.
  5. An inherited condition known as Gilbert’s syndrome may also lead to jaundice. The enzyme’s ability to process bile excretion is also impaired.
  6. Another medical condition called Cholestasis disrupts the flow of bile from the liver. The conjugated bilirubin containing bile remains in the liver and leads to jaundice.
  7. Jaundice is also caused from alcoholic liver disease, caused due to excess alcohol consumption.

Treatment of jaundice
Jaundice itself cannot be cured and hence, the underlying cause of the jaundice is treated. Different types of jaundice are cured using different methods:

  1. Jaundice induced by anaemia can be cured by increasing the iron amount in your blood. This is done by intake of iron supplements or having iron rich food.
  2. Jaundice caused from hepatitis is treated by injections of anti-viral and steroid medicines.
  3. Obstruction induced jaundice has to be treated by surgical means. The obstruction is removed by surgery.
  4. Jaundice inflicted from medication is usually treated by choosing alternative medicines and abstaining from the medicines which caused the jaundice.
  5. Jaundice can be kept away if you take proper care of your liver. For this, you should eat a balanced diet, work out regularly and prohibit yourself from consuming excess of alcohol.

Jaundice is the most common type of liver disorder and occurs in people of all ages and also in newborn babies. Keep away from contaminated food and water, if you want to avoid jaundice.

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Jaundice - The Right Way It Can Be Treated!

MBBS, DNB - Internal Medicine, DNB - Gastroenterology
Gastroenterologist, Faridabad
Jaundice - The Right Way It Can Be Treated!

Jaundice is a medical condition where the bilirubin level shoots up in the blood of the affected person. Also referred to as icterus, the condition may affect adults as well as newborn babies (Neonatal Jaundice), whereby the skin and the white part of the eye (sclera) appears yellowish in color (due to the accumulation of bilirubin).

Bilirubin is the bile pigment that results from the breakdown of hemoglobin (when the RBC cells breakdown). The bilirubin thus produced is released into the plasma. The liver then filters the released bilirubin for further metabolism. In the case of a diseased condition, injury or infection to the liver, it fails to remove the bilirubin from the bloodstream. As a result, there is an abnormal rise in the bilirubin level in the blood (Hyperbilirubinemia), resulting in jaundice. In jaundice, Bilirubin can go upto much higher levels. At 2.5-3 it just starts to get manifest as yellow eyes. Obstructive jaundice may require an endoscopic procedure or surgery.

Types of jaundice:
Jaundice may be of the following types:

  • Hepatocellular jaundice: In Hepatocellular jaundice, the elevated bilirubin level in the blood is an outcome of a liver disease or an injury (altering the normal functioning of the liver).
  • Hemolytic jaundice: Here, the increased level of bilirubin in the blood results from an increased breakdown of the RBCs (Hemolysis).
  • Obstructive jaundice: As the name suggests, Obstructive jaundice results from an obstruction in the bile duct. As a result, the bilirubin does not get filtered and remains in the liver.


Factors contributing to jaundice:
The increased buildup of bilirubin may be an outcome of

  • Obstruction and inflammation of the bile duct.
  • Chronic liver disease including liver cirrhosis and hepatitis.
  • Pancreatic Cancer.
  • Hemolytic anemia: It is a condition resulting from increased breakdown of RBCs.
  • Gilbert's syndrome.
  • Certain medications may also interfere and alter the normal functioning of the liver (steroids, birth control pills, and acetaminophen, to name a few).
  • In cholestasis, the bile (conjugated bilirubin), instead of getting eliminated, remains in the liver.

Symptoms:
The symptoms associated with jaundice include

  • The skin (particularly, the face, hands, nails, and feet) and the sclera appear yellowish.
  • The urine appears dark in color.
  • Fever, vomiting, tiredness, and loss of body weight.
  • Abdominal pain (mild to severe).
  • The stool appears pale in color.
  • Itchiness or Pruritus.

Diagnosis and treatment:
The earlier the diagnosis, more effective is the treatment.

  • Jaundice can be diagnosed by
  • Physical examination.
  • Bilirubin tests to determine the total bilirubin level.
  • CBC is used to determine the levels of RBCs, WBCs, and platelets.
  • Liver function tests.

The treatment for jaundice involves identifying the underlying factor responsible for the condition and treating it.

  • In the case of obstructive jaundice, operation helps to improve the condition.
  • Patients with hepatitis may benefit from antiviral medicines as well as steroids.
  • In hemolytic anemia, use of iron supplements helps to improve the condition.
  • Avoid oily and spicy foods, smoking and drinking.
  • Rest as much as possible.

In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!

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Symptoms Of Jaundice In Hindi - पीलिया के लक्षण

Dr. Sanjeev Kumar Singh 87% (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Symptoms Of Jaundice In Hindi - पीलिया के लक्षण

पीलिया नाम की बीमारी ऐसी है जो कभी न कभी हर किसीको हुई होती है। पीलिया जिसे हम जॉइंडिस नाम सेभी जानते हैं,यहबीमारीइतनी आम है कि गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा होने वालीमुख्यबीमारियों में से यह एक है। पीलिया होने की सबसे अहम वजह है भारी गर्मी में बार बार प्यास बुझाने के लिए बाहर का प्रदूषित पानी पीना। मतलब आप समझ ही गए होंगे कि पीलिया होने की वजह है गंदे पानी और दूषित भोजन का सेवन। पीलिया आमतौर पर हेपेटाइटिस ए वायरस की वजह से होता है जो दूषित या संक्रमित खानपान से फैलता है। यही नहीं कई और बीमारियां हैं जिनके होने से लिवर पर असर पड़ता है, जो पीलिया होने की एक और वजह हो सकती है।पीलिया बच्चे बूढ़े किसीको भी हो सकता है। बस इसके होने की वजह और लक्षण के बार उम्र के हिसाब से अलग अलग नजर आते हैं। पीलिया वैसे तो प्राणघातक नहीं है पर अगर ज्यादा देर हो जाए तो खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहतेपीलिया का जल्द से जल्द  लक्षण जानकर उसका इलाज किया जाए। अब आप लक्षण की पहचान कैसे की जाए इस सोच में ना पढ़ें क्योंकि आज हम आपको पीलिया के बारीक से बारीक सिम्पटम्स बताएंगे जिससे सही समय पर उपचार करके खुदको स्वस्थ और सुरक्षित रख सकेंगे।

पीलिया के सिम्पटम्स

1. नवजात शिशु को पीलिया
नवजात शिशु को होने वाला पीलिया वयस्कों को होने वाले पीलिया से काफी अलग होता है। शिशुओं को पीलिया लीवर की बीमारी की वजह से नहीं होता। बच्चों का लीवर इतना सक्षम नहीं होता कि वो वयस्कों के लीवर की तरह बिलिरुबिन को कम कर सके। इस वजह से रक्त में बिलिरुबिन जमा हो जाता है और पीलिया हो जाता है। बच्चों में होने वाले पीलिया के सामान्य लक्षण आंखों व त्वचा का पीलापन, अनिद्रा, भूख में कमी और बहुत तेज़ रोना आदि हो सकते हैं।

2. शरीर और आंखों का पीला होना
पीलिया शब्द ही पीले रंग से लिया गया है। त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला हो जाना इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण है। ऐसा बिलिरुबिन का स्तर गिरने के कारण होता है जो कि एक ऐसा पिगमेंट है जो लीवर में रेड ब्लड सेल्स नष्ट होने से पैदा होता है। इसलिए कोई भी बीमारी जो लीवर के सिस्टम को प्रभावित करती है उसमें भी बिलिरुबिन का स्तर ऊंचा हो सकता है और उसका प्रभाव त्वचा पर दिख सकता है।

3. स्टूल में चेंजेस
जिस इंसान को पीलिया होता है उसके बिलिरुबिन की अत्यधिक मात्रा का अधिकतर हिस्सा यूरीन में निकल जाता है लेकिन जितना हिस्सा बचता है वो पूरे शरीर की कोशिकाओं में फैल जाता है। और इसी वजह से स्टूल का रंग बदल जाता है।

4. पेट में दर्द होना
पीलिया बिले डक्ट में बिलिरूबिन की रूकावट के कारण भी हो सकता है। ये रूकावट आमतौर पर गालस्टोन के रूप में या फिर बाइल डक्ट में सूजन के कारण होती है। इससे पिगमेंट का स्तर बढ़ जाता है। बहुत से लोगों को ऐसे में पेट दर्द होता है। आमतौर पर ये दर्द पेट के दाहिने तरफ होता है। 

5. पेशाब का रंग गहरा होना
आमतौर पर ऐसा होता है कि लाल रक्त कोशिकाएं बिलिरुबिन में और फिर बाइल कहलाने वाले एक पिगमेंट में बदल जाते हैं। बिलिरुबिन के असामान्य स्तर होने पर यूरीन में बाइल पिगमेंट की मात्रा बढ़ जाती है। इससे यूरीन का रंग गहरा हो जाता है।

6. वोमिटिंग होना
पीलिया में उल्टी और मतली की शिकायत भी हो सकती है। अगर इसका इलाज ठीक प्रकार से न किया जाए तो आगे चलकर ये समस्या बहुत बड़ी भी हो सकती है। 

7. शरीर में इचिंग होना
कोलेस्टासिस की वजह से जिन लोगों को पीलिया होता है उनको खुजली की शिकायत भी हो जाती है।शुरुआत में खुजली हाथों में होती है और फिर पैरों में। फिर धीरे धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। रात को खुजली की ये समस्या काफी बढ़ जाती है।

8. नींद में प्रॉब्लम होना
जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें नींद से जुड़ी समस्याएं काफी आम है। साथ ही, भावनात्मक कष्ट भी महसूस हो सकता है।

9. ज्यादा थकान लगना
जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें सबसे सामान्य लक्षण थकान है। ये आमतौर पर प्राइमरी बाइलिअरी सर्होसिस, प्राइमरी स्केरोसिंग कोलेंजाटाइसऔर बाइल डक्ट सिंड्रोममें होता है।

10. दर्दरहित पीलिया
जब पीलिया में दर्द महसूस नहीं होता तो संभव है कि बालइ डक्ट में रुकावट आ रही हो। इस तरह के मामलों में पीलिया में, त्वचा पीली होने के साथ साथ, वजन घटना या दस्त या कब्ज़ जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
 

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Jaundice Treatment in hindi - पीलिया का उपचार

Dr. Sanjeev Kumar Singh 87% (192 ratings)
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Jaundice Treatment in hindi - पीलिया का उपचार

पीलिया एक ऐसी अवस्था को कहते हैं, जब मरीज के त्वचा और आंख का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगता है। खून में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक बीमारी या परिस्थिति का लक्षण है, जिसमें तत्काल सावधानी बरतने की जरूरत है।
पीलिया कई बीमारियों की वजह बन जाता है। मलेरिया, सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसे रोग बिलिरुबिन के निर्माण की गति को तेज कर देते हैं, जबकि हेपेटाइटिस, अल्कोहलिक लिवर की बीमारी, ग्रंथियों का बुखार, लिवर का कैंसर, और यहां तक कि अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से बिलिरुबिन को प्रोसेस करने की लिवर की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा अन्य परिस्थितियां, जैसे कि – गॉल स्टोन्स और पैनक्रियाटिटिस, शरीर से बिलिरुबिन को बाहर निकालने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करती हैं।

पीलिया रोग के कारण
पीलिया रोग का मुख्य कारण खून में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होना है। बिलिरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है, जो खून में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं के 120 दिन के साइकिल के पूरे होने पर टूटने से बनता है। बिलिरुबिन में बिलि होता है, जो लिवर में बनने वाला पाचक तरल पदार्थ होता है और यह गॉल ब्लेडर में रहता है। यह भोजन के अवशोषण और मल के उत्सर्जन में मदद करता है। जब बिलिरुबिन किसी कारण से बिलि के साथ मिश्रण नहीं बना पाता या जब लाल रक्त कणिकाएं सामान्य से कम अवधि में टूटने लगती हैं, तो खून में बिलिरुबिन का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। और इस तरह यह अन्य अंगों में पहुंचकर उनमें भी पीलापन पैदा कर सकता है।

  • इसके अलावा गंदे पानी के प्रयोग से पीलिया हो सकता है।
  • अत्यधिक शराब का सेवन करना एक मुख्य कारण है पीलिया होने का।
  • मसालेदार भोजन खाने से भी पीलिया हो सकता है।
  • वायरल इन्फेक्शन के कारण भी पीलिया हो सकता है।
  • शरीर में खून की कमी होने से पीलिया हो सकता है।

पीलिया के लक्षण
पीलिया के नाम से ही पता चलता है की ये एक पीला रोग है। इस रोग में शरीर के विभिन्न हिस्सो पर पीलापन नज़र आता है। इसके अलावा और भी कई लक्षण है पीलिया के जिनके देखकर आप पहचान सकते है की मनुष्य को पीलिया रोग है या  नहीं । जैसे कि -

  • आँख के सफ़ेद भाग का पीला होना।
  • जी मचलना।
  • उल्टियां आना।
  • त्वचा का रंग हल्का पीला होना।
  • दाहिनी पसलियों के नीचे भारीपन आना और उनमे दर्द होना।
  • मल का रांफ फीका या सफ़ेद हो जाना।
  • पेट में दर्द होना।
  • भूख नहीं लगना।
  • लगातार वजन में कमी होना।
  • शाम के समय थकावट महसूस होना।
  • 102॰ के आस पास बुखार रहना।
  • जोड़ो में दर्द होना।
  • शरीर में खुजली होना।

लोग पीलिया होने पर कई बार अंग्रेजी दवाओं से ज्यादा भरोसा घरेलू नुस्खों पर किया करते हैं। इसलिए आइए हम जानते हैं, कुछ अचूक नुस्खे जिससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिलेगी ।

1. गन्ने का रस
गन्ने का रस दिन में कई बार पीना चाहिये। पीलिया के रोग में यह अमृत है। गन्ने के रस का सेवन करने से पीलिया बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।
2. छाछ 
पीलिया के रोग में 1 ग्लास छाछ रोज़ाना पीनी चाहिये। इसमें काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से इसका गुण और भी बढ़ जाता है और यह कुछ ही दिनों में पीलिया के रोग को समाप्त कर देता है।
3. प्याज़ से इलाज
प्याज़ पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है। प्याज़ को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये। कुछ घंटों बाद इस प्याज़ को निकाल लीजिये। इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। दिन में 2 बार इस प्याज़ को खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है।

4. फ्रूट्स
फलों में तरबूज और खरबूजा दोनों ही पीलिया में बहुत लाभदायक हैं। इन्हें अच्छी मात्रा में खाना चाहिये। इससे पीलिया का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
5. निम्बू का रस
लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पिएं। कुछ ही दिनों में आप खुदको पीलिया से छुटकारा मिलता है महसूस करेंगे।
6. मूली के पत्ते
मूली के हरे पत्ते पीलिया के इलाज में बेहद लाभदायक होता है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी। और आप पाएंगे पीलिया से छुटकारा।
7. टमाटर का रस
टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। 
8. खास एहतियात बरतें
स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। भोजन में उन चीजों को शामिल करें  जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें। वर्कआउट खूब करें और स्वच्छता से रहें हेल्दी चीजें खाएं।

9. पीलिया में इनका सेवन न करें
सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। 
दाल खाने से बचें,  क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है।

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