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Dr. Vidya Harne

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I believe in health care that is based on a personal commitment to meet patient needs with compassion and care....more
I believe in health care that is based on a personal commitment to meet patient needs with compassion and care.
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I am 34 Year old woman and had been suffering with gas problem since last 2 years. Its like GERD. I had taken allopathy, ayurveda and homeopathy too. Two weeks back I got pain in my lower abdomen. It lasted for two weeks. I consulted my gastro doc and my gynecologist. I went through many tests but no reason was found. I spent a big amount on several tests, ultrasounds and CECT etc. And its very disappointing that no test could gave me good reason. According to CECT, I have a cyst around 3mm in left ovary but my doc ruled out this possibility too as its not of a big size. Please let me know what can be the reasons for this pain. Can stress be a reason too?

AUTLS, CCEDM, MD - Internal Medicine, MBBS
General Physician, Faridabad
I am 34 Year old woman and had been suffering with gas problem since last 2 years. Its like GERD. I had taken allopat...
YES STRESS is the biggest causative agent for acidity/gerd..3 mm cyst has no significance..what about your urine frequency? do u have to urinate every now and then...or is there any burning sensation during urination..is there any discharge that comes out??answers needed to these before prescribing medications..as long term infection in body too causes acidity...till then take plenty fluids ..avoid tea/coffee/chillies /stress
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Memory Problem (Dementia)!

DM - Neurology, MD - General Medicine, MBBS
Neurologist, Jaipur
Memory Problem (Dementia)!

डिमेंशिया (dementia) alzheimer disease क्या है? क्या यह संभव है कि आपका कोई प्रियजन डिमेंशिया से ग्रस्त है, और आपको मालूम ही नहीं? सतर्क रहने के लिए आप को डिमेंशिया के बारे मे क्या जानना चाहिए? या हो सकता है कि आपके परिवार में किसी को डिमेंशिया है, और आप समझ नहीं पा रहे कि उसकी देखभाल करें तो कैसे करें, क्योंकि वह व्यक्ति आपकी बात समझ ही नहीं पाता है और अजीब तरह से पेश आ रहा है. आइये, डिमेंशिया और उसकी देखभाल के बारे में कुछ आवश्यक बातें देखें.

डिमेंशिया: संक्षेप में कहें तो डिमेंशिया किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं, बल्कि एक बड़े से लक्षणों के समूह का नाम है (संलक्षण, syndrome)। डिमेंशिया को कुछ लोग “भूलने की बीमारी” कहते हैं, परन्तु डिमेंशिया सिर्फ भूलने का दूसरा नाम नहीं हैं, इसके अन्य भी कई लक्षण हैं–नयी बातें याद करने में दिक्कत, तर्क न समझ पाना, लोगों से मेल-जोल करने में झिझकना, सामान्य काम न कर पाना, अपनी भावनाओं को संभालने में मुश्किल, व्यक्तित्व में बदलाव, इत्यादि। यह सभी लक्षण मस्तिष्क की हानि के कारण होते हैं, और ज़िंदगी के हर पहलू में दिक्कतें पैदा करते हैं। यह भी गौर करें कि यह ज़रूरी नहीं है कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की याददाश्त खराब हो–कुछ प्रकार के डिमेंशिया में शुरू में चरित्र में बदलाव, चाल और संतुलन में मुश्किल, बोलने में दिक्कत, या अन्य लक्षण प्रकट हो सकते हैं, पर याददाश्त सही रह सकती है. डिमेंशिया के लक्षण अनेक रोगों की वजह से पैदा हो सकते हैं, जैसे कि अल्ज़ाइमर रोग (ad), लुई बॉडीज वाला डिमेंशिया (lwd) वास्कुलर डिमेंशिया (नाड़ी सम्बंधित/ संवहनी मनोभ्रंश) vad), फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (ftd) पार्किन्सन dementia (pdd), इत्यादि।

लक्षणों के कुछ उदाहरण: हाल में हुई घटना को भूल जाना, बातचीत करने समय सही शब्द याद न आना, बैंक की स्टेटमेंट न समझ पाना, भीड़ में या दुकान में सामान खरीदते समय घबरा जाना, नए मोबाईल के बटन न समझ पाना, ज़रूरी निर्णय न ले पाना, लोगों और साधारण वस्तुओं को न पहचान पाना, वगैरह। रोगियों का व्यवहार अकसर काफी बदल जाता है। कई डिमेंशिया वाले व्यक्ति ज्यादा शक करने लगते हैं, और आसपास के लोगों पर चोरी करने का, मारने का, या भूखा रखने का आरोप लगाते हैं। कुछ व्यक्ति अधिक उत्तेजित रहने लगते हैं, कुछ अन्य व्यक्ति लोगों से मिलना बंद कर देते हैं और दिन भर चुपचाप बैठे रहते हैं। कुछ व्यक्ति अश्लील हरकतें भी करने लगते हैं। कौन से व्यक्ति में कौन से लक्षण नज़र आयेंगे, यह इस बात पर निर्भर है कि उनके मस्तिष्क के किस हिस्से में हानि हुई है। किसीमे कुछ लक्षण नज़र आते हैं, किसी में कुछ और। जैसे कि, कुछ रोगियों में भूलना इतना प्रमुख नहीं होता जितना चरित्र का बदलाव।

भारत में ज़्यादातर लोग इन सब लक्षणों को उम्र बढ़ने का स्वाभाविक अंश समझते हैं, या सोचते हैं कि यह तनाव के कारण है या व्यक्ति का चरित्र बिगड गया है, पर यह सोच गलत है। ये लक्षण डिमेंशिया या अन्य किसी बीमारी के कारण भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना उपयुक्त है। अफ़सोस, भारत में डिमेंशिया की जानकारी कम होने के कारण इनमे से कई लक्षणों के साथ कलंक भी जुड़ा है। इसलिए डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति यह सोच कर अपनी समस्याओं को छुपाते हैं कि या उन्हें पागल समझा जाएगा या लोग हंसेंगे कि क्या छोटी सी बात लेकर डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं! परिवार वाले इन लक्षणों को बुढापे का नतीजा समझ कर नकार देते हैं। वे यह नहीं सोचते कि सलाह पाने से स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्हें यह भी नहीं पता होता है कि व्यक्ति को सहायता की ज़रूरत है। व्यक्ति के बदले हुए व्यवहार को परिवार वाले हट्टीपन या चरित्र का दोष या पागलपन समझते हैं, और कभी दुःखी और निराश होते हैं, तो कभी व्यक्ति पर गुस्सा करने लगते हैं।

निदान (diagnosis) क्यों ज़रूरी है: अगर कोई व्यक्ति डिमेंशिया के लक्षणों से परेशान है तो डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए। डॉक्टर जांच करके पता चलाएंगे कि यह लक्षण किस रोग के कारण हो रहे हैं। हर भूलने का मामला डिमेंशिया नहीं होता–हो सकता है कि लक्षण किसी दूसरी समस्या के कारण हों, जैसे कि अवसाद (depression). या हो सकता है कि यह लक्षण ऐसे रोग के कारण हैं जिसे दवाई से पूरी तरह ठीक हो सकता है (उदाहरण के तौर पर thyroid होरमोन की कमी होना)। कुछ प्रकार के डिमेंशिया ऐसे भी हैं जिनका उपचार तो नहीं, पर फिर भी दवाई से कुछ रोगियों को लक्षणों से कुछ आराम मिल सकता है। यह सब तो डॉक्टर की जांच के बाद ही पता चल सकता है।

डिमेंशिया किस को हो सकता है: डिमेंशिया शब्द अँग्रेज़ी का शब्द है, परन्तु इससे ग्रस्त व्यक्ति हर देश, हर शहर, हर कौम में पाए जाते हैं। इसकी संभावना उम्र के साथ बढ़ती है। अगर आप बुजुर्गों के किस्से सुनें तो पायेंगे कि परिवार ने जिसे एक अधेढ़ उम्र के व्यक्ति का अटपटा व्यवहार समझा था, वह शायद व्यवहार शायद डिमेंशिया के कारण था। (चूंकि डिमेंशिया अँग्रेज़ी का शब्द है, इसलिए देवनागरी लिपि में इसे लिखने के कई तरीके हैं, जैसे कि: डिमेन्शिया, डिमेंशिया डिमेंश्या, डिमेंटिया, डेमेंटिया, इत्यादि. कुछ लोग इसके लिए संस्कृत के शब्द, मनोभ्रंश का इस्तेमाल करते हैं)

विश्व भर में डिमेंशिया की पहचान पिछले कुछ दशक में ज्यादा अच्छी तरह से हुई है, और अब डॉक्टरों का मानना है कि यह लक्षण उम्र बढ़ने का साधारण अंग नहीं हैं। जो रोग डिमेंशिया का कारण हैं, उन पर शोध हो रहा है ताकि बचाव और इलाज के तरीके ढूंढें जा सकें। आजकल भी, डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों और उनके परिवार वालों के आराम के लिए कुछ उपाय मौजूद हैं, जिससे व्यक्ति और उसके परिवार वाले ज्यादा सरलता और सुख से रह सकें, लक्षणों की वजह से हो रही तकलीफें कम हो जाएँ, और घर के माहौल का तनाव कम हो।

डिमेंशिया और बुढ़ापे में फ़र्क: डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के साथ रहना किसी अन्य स्वस्थ बुज़ुर्ग के साथ रहने से बहुत फ़र्क है। डिमेंशिया की वजह से व्यक्ति के सोचने-करने की क्षमता पर बहुत असर होता है, और परिवार वालों को देखभाल के तरीके उसके अनुसार बदलने होते हैं। व्यक्ति से बातचीत करने का, उसकी सहायता करने का, और उसके उत्तेजित या उदासीन मूड को संभालने का तरीका बदलना होता है। समय के साथ रोग के कारण मस्तिष्क में बहुत अधिक हानि हो जाती है, और व्यक्ति ज़्यादा निर्भर होते जाते हैं। परिवार वालों को देखभाल के लिए दिन भर व्यक्ति के साथ रहना पड़ता है, और इस को संभव बनाने के लिए अपनी अन्य जिम्मेदारियों में समझौता करना पड़ता है।

डिमेंशिया सिर्फ बुढापे में ही नहीं, पहले भी हो सकता है (जैसे कि 30, 40 या 50 साल में): कई लोग सोचते हैं कि डिमेंशिया बुढापे की बीमारी है, और सिर्फ बुजुर्गों में पायी जाती है, पर कुछ प्रकार के डिमेंशिया जल्दी शुरू हो सकते हैं। who (वर्ल्ड हेल्थ ऑरगैनाइज़ेशन) का अनुमान है कि 65 साल से कम उम्र में होने वाले डिमेंशिया (जिसे young onset या early onset कहते हैं) अकसर पहचाने नहीं जाते और ऐसे केस शायद 6 से 9 प्रतिशत हैं।

उचित देखभाल रोगियों और परिवार की खुशहाली के लिए बहुत ज़रूरी है: फिलहाल, अधिकांश डिमेंशिया में दवाई की भूमिका बहुत सीमित है. न तो दवाई मस्तिष्क को दोबारा ठीक कर सकती है, न ही बीमारी को बढ़ने से रोक सकती है, सिर्फ कुछ केस में दवाई लक्षणों से कुछ राहत पंहुचा पाती है। क्योंकि डिमेंशिया का सिलसिला कई साल तक चलता है, पर दवाई से कोई खास अंतर नहीं होता और रोग कम नहीं होता, इसलिए डिमेंशिया वाले व्यक्ति और परिवार की खुशहाली उचित देखभाल पर निर्भर है। यदि परिवार वाले यह समझ पाएँ कि डिमेंशिया वाले व्यक्ति को किस प्रकार की दिक्कतें हो रही हैं, और वे व्यक्ति से अपनी उम्मीदें उसी हिसाब से रखें और मदद के सही तरीके अपनाएँ तो स्थिति सहनीय रह पाती है, वरना व्यक्ति और परिवार, दोनों के लिए बहुत तनाव बना रहता है। कारगर देखभाल के लिए डिमेंशिया को समझना और सम्बंधित देखभाल के तरीके समझना आवश्यक है।
 

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I am 16 weeks pregnant through IVF with a singleton. Is it necessary to opt for elective ceasarian and not normal delivery ? My IVF specialist & gynae both suggested the same to avoid any risk. Please suggest.

MBBS, DNB (Obstetrics and Gynecology)
Gynaecologist, Bhubaneswar
Do u want any kind of trial for this baby.Normal delivery is definitely a trial.How doctors can take this risk of trial.U need this baby very badly.Don't u.Now days Ivf pregnancies have become a accepted indication for Cs in modern obstetrics.Good luck
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Sugar Intake - 6 Ways You Can Cut It!

M.Sc - Dietitics / Nutrition, B.Sc Home Science (hons)
Dietitian/Nutritionist, Ludhiana
Sugar Intake - 6 Ways You Can Cut It!

Sugar (cane sugar) is not only a big industry, but has been a part of many of our traditional foods. Somehow, today sugar has been given a tag of being an 'unhealthy' food. What we don't realize before we demonize a food is the reason behind it being called as 'unhealthy'. Sugar in small required amounts does not cause any health issue. What we don't realize is the amount of sugar that we are unknowingly consuming through foods like packaged cereals, juices, health drinks, pastries, burgers and even the so called 'low fat' packaged foods marketed as healthy foods. Excessive sugar in these forms can definitely become harmful. So, rather than banning sugar from your diet, try to make better food choices.

The steps you can take to reduce sugar intake in a week are

  1. Stay hydrated and avoid health drinks and packaged juices: Replace so-called health drinks and packaged juices with fresh drinks like lime water, coconut water, herbal teas and home-made fruit drinks like raw mango juice / aam panah and Water. The natural electrolytes will stop any craving for excessive sugar laden foods.
  2. Limit caffeine intake: Drinking coffee in the morning causes caffeine kick which spikes the energy levels in the body. As soon as this spike wears off, there is an intense sugar craving in the body.
  3. Eat more complex carbohydrates: Increasing consumption of complex carbohydrates such as whole grains and yams helps in stabilizing blood sugar levels in the body. This happens as they are digested slowly and help in controlling sugar cravings.
  4. Restrict salt intake: Excessive salt consumption can increase cravings for sugary foods. Eating too much salt can cause the body to balance out the flavors thus leading to increased sugar cravings.
  5. Exercise: Exercise causes perspiration in the body which helps in flushing out the salt and making the body alkaline thus reducing sugar cravings.
  6. Limit processed food intake: Eating naturally occurring foods such as grains and fruits are healthier than eating packaged foods. Packaged foods generally contain both added sugar and salt which tend to increase sugar cravings and promotes weight gain. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a dietitian-nutritionist.
4810 people found this helpful

My periods is not regular. It comes after 2-3 month. N also my period session is very painful in first 2-3 days.

MBBS, MD - Obstetrtics & Gynaecology, FMAS, DMAS
Gynaecologist, Noida
My periods is not regular. It comes after 2-3 month. N also my period session is very painful in first 2-3 days.
Hello, there is a possibility that you are suffering from pcos which needs to be investigated with a hormonal profile and an ultrasound pelvis.
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Hello Doctor, I have a abscess on my labia minora. Its painful. Please suggest some good medicine. I have used T-Bact ointment. Its occurring again and again. Is there something to worry?

Master of Hospital Administration, DTM&H, MBBS
General Physician, Kolkata
Depending on the size of abscess may need drainage, if small, can apply ointment with antibiotic orally.
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Why Homeopathy Is A Safer Alternative For Infertility?

MD. CH
Homeopath, Agartala
Why Homeopathy Is A Safer Alternative For Infertility?

Starting a family and being people who you can completely rely on is something that may be a dream that most people nurture and work towards. In the Indian culture, it is seen that children are supposed to serve as the backbone for the parents in their old age and when a couple is able to bear children, they may be able to lead more satisfied lives than at any other point in time. While most couples are blessed with happy families, there are a lot of those couples who may have to rely on medicines and treatments to be able to conceive a child.

With the changing lifestyle and the increasing amount of stress, a lot of couples are not able to conceive naturally. This is when they turn to medical help from professionals who may be able to suggest treatments and counselling. Even though the medications and treatments are sought very popularly, it is also a fact that couples have to go through painful procedures and unfruitful trials before they are able to get positive results, if at all that is possible. Not to mention the expensive treatment costs and the costly medicines that they have to invest in, apart from the mental and emotional trauma that is accompanied with it.

A safer alternative:
One of the safest alternatives to conventional medicine and treatments is to opt for homeopathy. This is a style of treatment that works on the body using natural means such as plants extracts and other natural derivatives, in combination with medicinal properties in healthy portions. With the use of such treatments and medicines, it may be possible for aspirant couples to be able to work on their body systems to make them healthier and more responsive to conceiving a child.

Some of the most important advantages of homeopathic treatment for infertility:

  1. The medicines make sure that they do not put the others aspects of health at jeopardy for the users of homeopathic medicines which means that the medicines do not have highly destructive side effects.
  2. The lack of side effects in the homeopathic medicines for infertility ensure that the couples remain mentally and emotionally strong enough to stick to the resolve of getting treated and that is something that may be helpful in the success of the treatment.
  3. Since the medicines are all organic, most of them are not as expensive as the conventional medicines.
  4. Choosing a safe stream of medication such as homeopathy may also help in ensuring that when the child is conceived, it does not get affected by the harmful medicines that may be administered to the couple.

When the future of your family and health is at stake, it is important that you take well thought out and wise decisions about what kind of treatments you should undergo. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Homeopath.

4467 people found this helpful

Hi, i'm suffering from irregular menses from last 5 years. I'm 21 years old now. My menses cycle is always late (around 15 days late) but when it comes then it remains 8 days. What should I do? thank you.

Ph.D - Ayurveda, MD - Ayurveda
Ayurveda, Delhi
Hi, i'm suffering from irregular menses from last 5 years. I'm 21 years old now. My menses cycle is always late (arou...
Are you taking any hormonal preparation? if so stop, you need menstruation regularizing herbal preparations
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When to check for pregnancy test from previous month date and are there any symptoms that she is getting pregnant.

MBBS, MD - Obstetrtics & Gynaecology
Gynaecologist, Gurgaon
When to check for pregnancy test from previous month date and are there any symptoms that she is getting pregnant.
If you have missed your due date you can do a Urine pregnancy test to confirm for pregnancy Sometimes there are no symptoms for the first few days so don't depend on that.
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Missed period for 16 days and negative test pregnancy result blood test and feeling little pain in lower abdomen and feel like it's bloated and sometimes feverish.

MBBS
General Physician, Mumbai
Missed period for 16 days and negative test pregnancy result blood test and feeling little pain in lower abdomen and ...
For stomach pain take tablet Meftalspas-Ds eight hourly if necessary and wait for the periods to come on its own
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Dr. Parag Patil

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist
PHOENIX CLINIC, 
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