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Atharva Clinic

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We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply....more
We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply.
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Atharva Clinic is known for housing experienced Homeopaths. Dr. Sameer A. Joshi, a well-reputed Homeopath, practices in Thane. Visit this medical health centre for Homeopaths recommended by 88 patients.

Timings

MON-SAT
06:00 PM - 09:00 PM 10:30 AM - 12:00 PM

Location

Shop No 3, Rane Tower, Saraswat Colony, Dombivili East, Landmark : Near Neeraj Meical, Thane
Dombivali Thane, Maharastra
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Doctor in Atharva Clinic

21 Years experience
200 at clinic
Available today
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Please suggest me diet plan. I am a student and whole day I study in library. So I am getting overweight. Recently I have joined gym. Just suggest me proper diet plan. Thank you.

MSc
Dietitian/Nutritionist, Lucknow
Please suggest me diet plan. I am a student and whole day I study in library. So I am getting overweight. Recently I ...
Hi, Thank you for your query. We will be happy to help you. Make sure that you skip eating all kinds of outside food. This includes all junk, processed foods as well as food items that are very oily or sugary. Eat 4 to 5 servings of fruits and vegetables daily. Drink plenty of water throughout the day. Eat protein rich foods and consume less carbohydrates. Have a protein rich breakfast every morning along with a serving of fruits. Even when in library, make sure that every hour or so, you get up and walk a few steps. We are here to guide you. For a detailed or customized diet plan, feel free to leave a message. Eat healthy, stay healthy Regards.
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Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Dust Allergy Treatment In Hindi - धूल से एलर्जी के उपचार

जब हमारा शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिऐक्ट करता है तो उसे एलर्जी कहते हैं. इसमें शरीर में खुजली होने लग जाती है या फिर पूरे शरीर में लाल चकत्ते निकल आते हैं या उलटियां होने लग जाती हैं. जिन लोगों को धुल से एलर्जी होती है उन्हें घर में साफ-सफाई के दौरान बहुत परेशानी होती है. इस दौरान यदि उनके नाक में धूल चली जाती है, तो उनकी सांसें तेज-तेज चलने लगती हैं और नाक और आंखों से पानी आने लगता है. नियति को हल्के धुएं में भी सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी होने लगती है. ये एलर्जी के लक्षण हैं यानी ये लोग किसी तरह की एलर्जी से पीड़ित हैं.

एलर्जी से बचाव के उपाय
1. बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उन्हें जरूरी चीजें भी दी जानी चाहिए. बच्चों को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिए.
2. बच्चों को धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें. हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें.
3. अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए. बचाव ही एलर्जी का इलाज है.
4. गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए. कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में ड्राइक्लीन करवाते रहें.
5. घर को हमेशा बंद न रखें. घर को खुला और हवादार बनाए रखें ताकि साफ हवा आती रहे.
6. खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं.
7. दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ करते रहें क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है.

एलर्जी का उपचार 
इम्यूनो थेरपी और एलर्जी शॉट्स से भी एलर्जी का इलाज किया जाता है. अगर मरीज की हालत ज्यादा खराब हो, तभी इम्यूनो थेरेपी का सहारा लिया जाता है. यह सेफ तरीका है लेकिन तभी कारगर है, जब किसी ऐसी चीज से ही एलर्जी हो, जिसे नजरअंदाज न किया जा सके. इस थेरपी का असर लंबे समय तक रहता है. कई बार इसका असर 3-4 साल तक रहता है. हालांकि हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है. यह इलाज थोड़ा महंगा होता है. लेकिन यदि आप घरेलु तरीके से कारगर और सस्ता उपचार चाहते हैं तो आप आयुर्वेद का सहारा ले सकते हैं.

आयुर्वेद

  • आयुर्वेद के अनुसार रोज सुबह नीबू पानी पिएं.
  • अगर स्किन एलर्जी है तो फिटकरी के पानी से प्रभावित हिस्से को धोएं. नारियल तेल में कपूर या जैतून * तेल मिलाकर लगाएं. चंदन का लेप भी राहत देता है. इससे खुजली कम होती है और चकत्ते भी कम होते हैं.
  • पंचकर्म का हिस्सा नास्य शिरोधारा भी एलर्जी में भी बहुत मदद करता है. इसमें खास तरीके से तेल नाक में डाला जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया घर में नहीं करनी चाहिए. एक्सपर्ट की देखरेख में इसे करें. 

नेचुरोपैथी और योग
योग और नेचुरोपैथी एलर्जी से मुकाबला करने के लिए एक बेहतर तरीका साबित हो सकता है. इसके विशेषग्य कहते हैं एलर्जी से बचने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. इसके अलावा स्वच्छता भी बहुत जरुरी है. आपको नियमित रूप से रोजाना करीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फायदा होता है क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इसके अलावा प्रदुषण से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नीबू, काली मिर्च और शहद डालकर पिना भी फायदेमंद होता है.
 

I am not getting weight. I eat healthy food daily yet I am not gaining weight .please recommended healthy food.

Masters in Nutritional Therapy, Diabetes Educator, MSc - Food & Applied Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Kolkata
I am not getting weight. I eat healthy food daily yet I am not gaining weight .please recommended healthy food.
It is important to exercise also along with healthy diet to gain muscle mass. Get your diet and exercise chart made by a professional to gain weight in a healthy way.
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Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

मूत्र से संबंधित बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र रो के कारण, लक्षण और घरेलु उपचार को समझने का प्रयास करें.

क्या है मूत्र रोग का कारण?
जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण
मूत्र रोग के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है.

मूत्र रोग के उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

1. पहला प्रयोग
यदि आप केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण के साथ 100 मि.ली.पानी मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ पीसकर उसका पेडू पर लेप करने से पेशाब खुलकर आता है.
2. दूसरा प्रयोग
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.
3. तीसरा प्रयोग
मूत्र रोग को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.
4. चौथा प्रयोग
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.
5. पाँचवाँ प्रयोग
इस तरीके में 50-60 ग्राम करेले के पत्तों के रस को चुटकी भर हींग मिलाकर देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है अथवा 100 ग्राम बकरी का कच्चा दूध 1 लीटर पानी और शक्कर मिलाकर पियें.

अन्य घरेलू उपचार
1. खीरा ककड़ी

यदि रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.
2. मूली के पत्तों का रस
मूत्र विकार में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं. यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.
3. नींबू
नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.
4. पालक
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.
5. गाजर
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.
6. मट्ठा
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.
7. भिंडी
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.
8. सौंफ
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र रोग में राहत मिलती है.
 

6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

MS - General Surgery, MBBS
General Surgeon, Jaipur
6 Simple Ways You Can Take Care Of Your Post Surgery Stitches!

Any surgery that requires an incision will involve sutures or staples as the last step of the procedure. This helps close the incision and keep out infections. Taking care of your stitches can help limit scarring and discomfort and speed up the healing process.

Here are a few things to keep in mind.

  1. Keep it clean and dry: For the first few days, use a washed wet cloth to clean the incision site. After a few days, you may start washing the area with soap and water unless advised else wise by your doctor. Ensure that you dry the skin thoroughly after washing it. Avoid baths that involve soaking the area in water. Also, avoid swimming. Do not use any powders, lotions, creams, deodorants etc on the wound site.
  2. Look out for signs of infections: Avoid activities that may involve exposing your wound to dirty water, chemicals, dust etc. This increases your risk of infections. Also look out for signs f infections such as redness, swelling, pus or bleeding, fever or increased pain from the wound. In case you notice such signs, consult your doctor at the earliest.
  3. Do not scratch: As it heals, your skin is likely to turn itchy. However, refrain from scratching so as to reduce chances of infections. Do not try and pull away from the scab but let it fall off on its own. This will also help limit scarring.
  4. Limit contact: Avoid wearing tight clothes or anything that sticks to the skin while your wound is healing. Instead have plenty of loose, comfortable clothes easily accessible. Also, do not take part in close contact sports such as football etc until the stitches have healed completely.
  5. Change your dressing regularly: A dressing should be changed as soon as it gets wet or soaked with blood or other body fluids. Wear clean medical gloves while changing a dressing. When putting on a new dressing do not touch the inside of the dressing or apply any creams on the stitches unless advised so by your doctor. In the case of removable stitches, the doctor will usually remove the stitches after a few days. DO not attempt to pull the stitches out on your own.
  6. Avoid exposing the wound to sunlight: New skin that forms as the incision heals is very sensitive to sunlight and gets sunburnt very easily. Limiting your exposure to sunlight can help reduce the effects of scarring. In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!
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Natural Birth

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology, Gynae-Laproscopy
Gynaecologist, Delhi
Natural Birth


A variety of methods are used during natural childbirth to help the mother. Pain management techniques other than analgesics and epidural analgesia include hydrotherapy, massage, relaxation therapy, hypnosis, breathing exercises, music therapy etc. These days ldr (labour, delivery and recovery) rooms are available in many hospitals for a better experience of the delivery as the husband or any other close relative can be present in these rooms along with the labouring mother throughout labour. The comfort of these rooms along with safe analgesic methods help in increasing the incidence of natural childbirth.

Some myths are attached with labour and the methods used in aiding the mother during labour-
1. Epidural analgesia leads to caesarian sections in most cases.
This belief is still held by some, but recent studies have shown that epidurals do not cause an increase in caesarian sections. In fact this aids in making the labour smoother and by reducing the extreme pain it helps the mother both mentally and physically.
2. Induction of labour always leads to a faster labour.
Some mothers wish for a normal delivery but do not want to wait for natural pains. They want to deliver on the day of their liking. This can be done by induction of labour. But induction of labour does not always work. It works best when the cervix has already begun to soften and dilate. You may go in for your 39 or 40 week appointment hoping for a labour induction only to be told that your cervix is not favourable to be induced
It is also possible to have a failed induction. This means that inspite of giving full dosage of labour inducing drugs you do not get pains at all.
3. Childbirth is best without any medication.
Natural childbirth, with the aid of relaxation exercises and deep breathing in between contractions, offers one option for pain management. But there are situations when labour is much prolonged due to a slight abnormal presentation of the baby’s head, or the uterine contractions are not effective or the mother has got exhausted, here medication will definitely help in aiding the mother to go through the labour and have a normal delivery. Therefore an unmedicated birth is ideal, but a happy, healthy birth is also possible with the use of medicines.
4. Once a caesarian birth always a caesarian birth.
This may or may not be true depending on the reason of your caesarian section. Vaginal births after caesarian are becoming increasingly more common. You will need to discuss with your doctor whether a normal delivery will be possible for you.
8. Next labour will be easier.
This may or may not be true for you. Generally speaking, consequent labours are shorter in duration, but that is not always true. Shorter does not always mean easier. This time your baby could be bigger than your first or the baby’s head could be in a slightly abnormal position leading to a longer labour which could be even longer and more difficult than the previous one. Also if there is a long gap of many many years in between the pregnancies then it may be like the first labour.
All said, always think positive, labour is a wonderful experience. The pain just vanishes on seeing your baby’s face. Take antenatal classes where you are told about various exercises which will help you go through a smooth labour. Discuss with your doctor about various pain relieving methods during labour. God has made all women brave enough to go through a normal and natural childbirth.
 

Healthy Gums = Healthy Body

MDS - Periodontics
Dentist, Thane
Healthy Gums = Healthy Body

A varied diet which is rich in vitamins, minerals and fresh fruit and veggies will help in maintaining gum health and preventing gum disease!

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Iron And Its Efficacy In Human Body

BHMS
Homeopath, Delhi
Iron And Its Efficacy In Human Body
IRON:

Daily requirement: Children: 10-15 mg/day
Adults: 10 mg/day
Premenopausal women: 15 mg/day
Pregnant women: 30 mg/day
Iron is required for
i) Formation of haemoglobin in blood.
ii) For muscular activity.

Sources of Iron:
Red meat.
Chicken
Sea food.
Animals products (eggs).
Green leafy vegetables.
Grains.
Nuts.
Dry fruits, like dates and raisins.
Human milk, which contains about 1 mg/litre

Iron deficiency causes:
Anaemia.
Fatigue.
Paleness
Dizziness.
Irritability.
Palpitation.
Recurrent infections.

Iron in excess causes:
Diarrhoea.
Constipation.
Vomiting
Headache
Dizziness
Stomach cramps.

Dental Health

MDS - Periodontics, Certified Implantologist, BDS
Dentist, Chandigarh
Dental Health

Periodontists are specialists in treating gum diseases and offer treatment options which dentists might not refer to.

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