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Dhanwantari Hospital

Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Gynaecologist & more)

Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk. Pune
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Dhanwantari Hospital Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Gynaecologist & more) Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk. Pune
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More about Dhanwantari Hospital
Dhanwantari Hospital is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Swarupa Patil, a well-reputed Gynaecologist, practices in Pune. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 96 patients.

Timings

MON-SAT
09:00 AM - 09:00 PM

Location

Sector 27, Tilak Road, Pradhikaran, Nigdi. Landmark: Near Lokmanya Hospital & Near Spencer Daily & Bell Chowk.
Nigdi Pune, Maharashtra - 411044
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Doctors in Dhanwantari Hospital

Unavailable today

Dr. Abhijit Joshi

MBBS
Cardiologist
Unavailable today

Dr. S R Patil

MBBS
General Physician
30 Years experience
300 at clinic
Unavailable today
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Jayant Mahajan

MBBS
General Surgeon
Unavailable today

Dr. Uma Deshmukh

MBBS
Anesthesiologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Rajiv Sethi

FESC, MBBS, MD - General Medicine, DNB - General Medicine, DNB (Cardiology), DM - Cardiology
Cardiologist
28 Years experience
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Chandrahekhar Wahegaonkar

Cosmetic/Plastic Surgeon
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Neelam Kolte

MBBS
Pathologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Maya Bhalerao

MBBS
Anesthesiologist
Available today
09:00 AM - 09:00 PM
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. Seema Sudame

MBBS, MD - Paediatrics
Pediatrician
38 Years experience
Available today
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Symptoms of Lung Cancer In Hindi - फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Symptoms of Lung Cancer In Hindi - फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

फेफड़ों का कैंसर का कारण फेफड़ों की कोशिकाओं का अनियंत्रित रूप से बढ़ना है. इन कोशिकाओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़कर एक ट्यूमर का रूप ले लेती है. कैंसर के ज्यदातर खतरनाक मामले जिनमें मौत होने की संभावना होती है उन सभी में मृत्यु के लिए मृत्यु के लिए फेफड़े का कैंसर ज़िम्मेदार है. फेफड़ों के कैंसर को मुख्य रूप से दो भागो में बाँटा गया है – स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) और नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी). एससीएलसी, नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर की तुलना में ज़्यादा आक्रामक होता है. एनएससीएलसी फेफड़ों के कैंसर का अधिक सामान्य रूप है - 80-85% लंग कैंसर के मामलों एनएससीएलसी के होते हैं. फेफड़ों में होने वाले कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण खाँसी है, जो धीरे धीरे गंभीर रूप ले तेती है. इसके ठीक होने में लम्बा समय भी लग सकता है. इसके अन्य लक्षणों में निमोनिया या ब्रांगकाइटिस है जो बार-बार होता रहता है, वज़न कम होना, भूख में कमी होना, थकान, सांस लेने में तकलीफ, आवाज़ का बदलना भी इसके अन्य लक्षणों में शामिल हैं. आइए फेफड़ों के कैंसर की गंभीरता को देखते हुए इसके लक्षणों को एक-एक करके समझने की कोशिश करें.

1. पेरानियोप्लास्टिक लक्षण
जाहिर है प्रत्येक बीमारी अपने साथ कुछ लक्षणों को भी लाती है जिसके आधार पर हम उसकी पहचान करते हैं. फेफड़े के कैंसर अक्सर लक्षणों के साथ होते हैं, जो ट्यूमर कोशिकाओं द्वारा हार्मोन जैसे पदार्थों के उत्पन्न होने से विकसित होते हैं. ये पेरानियोप्लास्टिक लक्षण सबसे ज़्यादा एससीएलसी में पाए जाते हैं, लेकिन किसी ट्यूमर के प्रकार के साथ भी देखे जा सकते हैं.
2. कैंसर से संबंधित लक्षण
फेफड़े और उसके आसपास के ऊतकों पर होने वाले कैंसर के आक्रमण से श्वसन प्रक्रिया में समस्या उत्पन्न हो सकती है. इसमें खाँसी, सांस की तकलीफ, ज़ोर ज़ोर से सांस लेना, सीने में दर्द और खाँसी के साथ रक्त निकलना (हेमोप्टेसिस) जैसे लक्षण हो सकते हैं. यदि कैंसर तंत्रिकाओं पर हमला करता है, तो कंधे में भयंकर दर्द होता है. यह दर्द कंधे से लेकर बांह को प्रभावित करता है या इसके कारण स्वरतंत्री भी पैरालाइज हो सकती हैं. कैंसर से प्रभावित भोजन नली द्वारा निगलने में कठिनाई हो सकती है.
3. गैरविशिष्ट लक्षण
फेफड़ों के कैंसर के कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो गैरविशिष्ट लक्षणों के अन्तर्गत आते हैं. इन्हें कई प्रकार के कैंसरों के रूप में देखा जाता है, जिनमें लंग कैंसर भी शामिल है. इन लक्षणों में हमें वजन घटना, कमजोरी और थकान आदि दिखाई पड़ सकते हैं. इसके अलावा कुछ मनोवैज्ञानिक लक्षण, जैसे – अवसाद और मनोदशा में होने वाले परिवर्तन भी आम हैं.
4. मेटास्टेसिस से सम्बन्धित लक्षण
मेटास्टेसिस का मतलब है कि कैंसर जिस अंग से शुरू हुआ था, उससे बढ़कर अन्य अंगों तक पहुँच चुका है. फेफड़ों का कैंसर हड्डियों में फैलकर उनके जोड़ों में असहनीय दर्द पैदा कर सकता है. मस्तिष्क में कैंसर के फैलने पर कई न्यूरोलॉजिक लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं. इनमें धुंधली दृष्टि, सिर दर्द, दौरे या स्ट्रोक के लक्षण जैसे कि शरीर के कुछ हिस्सों में होने वाली सनसनी का कम या खत्म हो जाना शामिल हैं.
5. कोई लक्षण न होना
कई बार ऐसा भी हो सकता है कि इसके लक्षण हमें प्रत्यक्ष रूप से नजर न आएं. या बेहद कमजोर नजर आएं. ऐसे में लक्षणों का सामने न आना खतरनाक हो सकता है. इसलिए आपको समय-समय पर जांच कराते रहना होगा. फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित को नियमित रूप से छाती के एक्स-रे या सीटी स्कैन द्वारा एक छोटे घाव से कराते रहना चाहिए. द्विआयामी एक्स- रे या सीटी स्कैन द्वारा परीक्षण करने पर ये गोल ट्यूमर एक सिक्के की तरह लगता है. जिन रोगियों में पहली बार लंग काकनेर का निदान कॉइन लेशन से किया जाता है, उनमें लंग कैंसर पाए जाने के समय अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते.
 

Lungs Me Pani Bharne Ka Karan - फेफड़ों में पानी भरने का कारण

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Lungs Me Pani Bharne Ka Karan - फेफड़ों में पानी भरने का कारण

हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियाँ होती रहती हैं. इनमें कुछ तो आसानी से ठीक हो जाती हैं वहीं कुछ बेहद मुश्किलें लाने वाली होती है. फेफड़ों में पानी का भरना भी गंभीर बीमारियों का ही लक्षण है. छाती के अंदर फेफड़े के चारों ओर पानी के जमाव को ही हम मेडिकल भाषा में ‘प्ल्यूरल इफ्यूजन’ या ‘हाइड्रोथोरेक्स’ के नाम से जानते हैं. लकिन जब पानी की जगह खून का जमाव होने लगता है तो इसे हम ‘हीमोथोरेक्स’ कहते हैं. यहाँ कई बार ‘लिम्फ’ नामक तरल पदार्थ का भी जमाव हो जाता तब इसे ‘काइलोथोरेक्स’ कहते हैं. आपको बता दें कि फेफड़े के ऊपरी सतह से रिसते पानी को सोखने की क्षमता होती है. इस वजह से पानी रिसने सोखने के बीच एक संतुलन बना रहता है. लकिन कई बार फेफड़े के ऊपरी सतह से पानी रिसने की मात्रा अचानक बहुत बढ़ जाती है तब यह सूक्ष्म संतुलन बिगड़ जाता है. इसलिए फेफड़े के चारों ओर छाती के अन्दर पानी या तरल पदार्थ इकट्‌ठा होने लगता है. हमारे यहाँ फेफड़ों में पानी भरने का सबसे अहम कारण है टीबी का इन्फेक्शन है. यदि समय रहते टीबी इन्फेक्शन वाले पीले पानी के जमाव को रोका नहीं गया तो फेफड़े के नष्ट होने के साथ गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. आइए हम फेफड़ों में पानी भरने के कारणों पर विचार करें.

1. न्यूमोनिया के कारण
न्युमोनिया एक ऐसी बिमारी है जिसमें सांस लेने में समस्या आने लगती है. इसके पीछे के कारणों में भी छाती में पानी इकट्‌ठा होना हो सकता है. इसके कारण इकट्‌ठा हुआ पानी जल्दी मवाद यानी पस में परिवर्तित हो जाता है. जी कि बेहद गंभीर समस्या है.
2. कैंसर की वजह से
फेफड़ों में पानी भरने का अपने देश में मुख्य कारण कैंसर भी हो सकता है. छाती में कैंसर की वजह से पानी जमा होने में तीन तरह के कैंसर- फेफड़े, ब्रेस्ट का कैंसर और गिल्टी का कैंसर हो सकता है. जाहिर है कैंसर भी गंभीर बीमारी ही है.
3. ट्यूमर भी हो सकता है
कई मरीजों में ट्यूमर के कारण भी उनकेफे फेफड़ों में पानी भरने की समस्या देखी गई है. कुछ मरीजों में छाती के अन्दरूनी दीवार का ट्यूमर यानी मीजोथीलियोमा भी जिम्मेदार होता है. ट्यूमर की समस्या को ठीक से दूर करना बेहद आवश्यक है नहीं तो ये जानलेवा भी हो सकता है.
4. अन्य कारण भी हो सकते हैं
इन सभी कारणों के अलावा भी कई ऐसे कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से फेफड़ों में पानी भरने की समस्या देखी जा सकती है. इनके अलावा दूसरे अन्य कारण भी छाती में पानी के जमाव के होते हैं जैसे जिगर की बीमारी यानी लिवर सिरोसिस, पेट में पानी यानी असाइटिस, या दिल की बीमारी.
5. फेफड़ों में पानी भरने के लक्षण
जब आपके फेफड़ों में पानी का भराव होता है तब इसके लक्षणों के रूप में बुखार जो पसीने के साथ प्रतिदिन शाम को तेज़ हो जाए, वज़न में गिरावट, सांस फूलना या सांस लेते वक्त छाती में दर्द होना,बलगम का आना, शरीर को हिलाने में छाती में गढ़ गढ़ की आवाज़ होना या फिर छाती में भारीपन का अहसास होने लगता है.

क्या करें
फेफड़े में इकट्‌ठे पानी को ऐसे ही छोड़ देना नुकसानदायक है. समय बीतते पानी के चारों ओर झिल्ली का निर्माण हो जाता है. यह झिल्ली एक तरफ तो पानी को सोखने नहीं देती है तो दूसरी तरफ निकट स्थित फेफड़े के हिस्से को दबाती है जिससे फेफड़े की कार्यप्रणाली में बाधा पड़ती है. कभी-कभी पानी मवाद यानी पस में परिवर्तित हो जाता है. कैंसर के मरीजों में छाती से पानी एक बार निकलवा देने के बावजूद भी बार बार पानी भर जाता है. इसके लिए ‘प्ल्यूरोडेसिस’ नामक विधि का सहारा लिया जाता है, जिसमें छाती के अन्दर एक विशेष दवा डाली जाती है जो छाती के अन्दर की दोनों दीवारों को आपस में चिपकाने में मदद करती है जिससे दुबारा पानी इकट्ठा होने की जगह ही रहे.
 

Diabetes

BHMS, PGD IN FAMILY WELFARE &HEALTH MANAGEMENT, pg diploma in clinical research and pharmacovigilance
Homeopath, Shimla
Diabetes

Symptoms of Diabetes

1 person found this helpful

Hi, I am eating a high carb diet and having a good amount of fiber also but I am facing digestion problem and facing constipation also. What should I do? Help plz.

MD - Gastroenterology
Gastroenterologist, Delhi
Hi, I am eating a high carb diet and having a good amount of fiber also but I am facing digestion problem and facing ...
Hi dear. Constipation is multifactorial. Do you have lots of gas and spend lot of time in washroom. Start powder lactihusk 4 spoons everyday with warm water. You also need a colonoscopy to look for the cause of constipation.
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Know About Microdermabrasion

PG Diploma In Clinical Cosmetology (PGDCC), BHMS
Homeopath, Delhi
Know About Microdermabrasion

Know About Microdermabrasion

Scoliosis - Poor Awareness And Social Stigma Leads To Delayed Diagnosis in India

MBBS, MS - Orthopaedics, DNB - Orthopedics
Orthopedist, Chennai
Scoliosis - Poor Awareness And Social Stigma Leads To Delayed Diagnosis in India

Awareness is the key to catch it early and reduce the risks associated.

  • Scoliosis is an abnormal sideways curve in the spine. Normally the spine has a straight alignment when seen from the front or back. A sideways curve in the spine can develop due to a various reasons at different stages of growth. As the spine grows taller, there is a tendency for the curves to worsen and can become severe by the time the kid reaches skeletal maturity.
  • The curve in the spine is associated with rotation of the spinal column to one side. As the ribs attached to the spine rotate along with it, it leads to a rib hump in the back on one side and prominence of chest wall in the front on the other side. A curve in the lower spine leads to asymmetry in the waist lines. It is usually the rib hump or asymmetrical waist line that brings the problem to notice, usually at a time when the kid is growing rapidly.
  • Severe curves distort the chest cavity and reduce the space available for the lungs, thereby reducing the breathing capacity, especially if the scoliosis starts before 5 years of age (early onset scoliosis). This is known to significantly reduce life expectancy due to failure of lung and heart function over the years. In some with severe curves, the spinal cord function may get affected leading to progressive weakness in lower limbs and eventually loss of ability to walk. But the most common and important complaint with scoliosis is the cosmetic appearance and related problems. The social stigma and misconceptions associated with these deformities  is often the reason for the parents not seeking medical opinion earlier. The child may suffer low confidence due to self perceived defective body image, affecting their performance in studies and sports.
  • Common cause of scoliosis in infants and toddlers is a bony defect in the spine resulting in asymmetrical growth in both sides of the spine leading to a rapidly worsening curve (known as Congenital scoliosis). A bony defect during development of skeleton in the womb or during growth after birth is usually associated with birth defects in other systems like heart, kidneys and other bones and can be detected at or soon after birth. In some, it is a nerve or muscle disorder leading to muscle imbalance resulting in a curve in the spine (known as Neuromuscular scoliosis, for example: Poliomyelitis, cerebral palsy). But majority of scoliosis that is noticed in second decade of life has no known cause and is called Idiopathic scoliosis.
  • Treatment options include serial observations, spinal braces, and surgical correction of the deformity depending on various factors in each individual patient.
  • But the most important factor that may help reduce the severity of the problem is early detection and treatment. The risks involved in surgical correction of a severe curve are much more than in a smaller curve detected much earlier. Newer techniques like growing rods can be used in those with early onset scoliosis to prevent compromise of lung and heart function while allowing the spine to grow in a better alignment. Consult a Spine specialist if you notice any suspicious curve / asymmetry in the back in your kid.

Facts And Myths About Diabetes

M.Sc - Dietitics / Nutrition (Delhi University)
Dietitian/Nutritionist, Panipat
Facts And Myths About Diabetes

Is jaggery good for Diabetic patient, Facts & Myths About Diabetes Be Aware, Be Healthy!

MYTH-Jaggery is better or safe in diabetes :

FACT-Jaggery and sugar both are essentially same. Both contain sucrose, as they are prepared from sugar cane juice. Hence eating either of these will increase blood glucose considerably. In jaggery there are some vitamins and a few antioxidants. But both are bad for a diabetic person.
 

MYTH- Eating Sugar or Sweets causes Diabetes :

FACT -It is incorrect to say that eating sweets and / or sugar causes diabetes. Basically excess food intake will lead to excess production of glucose. That puts excess load on insulin producing cells in pancreas due glucotoxicity. Also due to central obesity  the fat around internal organs causes lipotoxicity affecting the beta cells. Therefore, excess food intake in general and weight gain  are the reasons for diabetes.


MYTH- Rice should not be eaten in diabetes :

FACT- Not really true. Because in south India this is the major or at times only main food. Rice has a high glycemic index so gets converted to glucose rapidly. So polished rice is not good. Brown rice is better. Quantity should be regulated. All other cereals  also are converted  glucose after digestion. 

MYTH- Diabetes is curable :

FACT-Diabetes is  mainly due deficiency of Insulin (hormone produced by Beta cells of pancreas), plus resistance to action of insulin, overweightor obesity  and inactivity. Therefore, to treat diabetes we need drugs that initiate insulin secretion, reduce insulin resistance. In some cases  insulin itself. Plus dietary control and regular exercise to maintain normal weight or reduce excess weight. Hence it can only be effectively controlled. Cure is not possible

MYTH-Allopathic Medications Damage Kidneys, so go for either Ayurvedic or Homeopathic Drugs :

FACT-In fact diabetes itself affects kidney, particularly the filtering membrane of glomerulurous  (a filtering unit in the kidney).   Even when diabetes fairly well controlled, kidney does get affected. The drugs used to treat diabetes  help in overcoming kidney damage. Therefore it is wrong to think that modern drugs cause kidney damage.

MYTH-Sugar intake is essential for body :

FACT- Some people keep asking that eating sugar is very necessary for getting energy for the body tissues. This is not at all true.  Because all the cereals like rice, jowar, wheat, ragi, bajra and other millets, contain starch as the main ingredient. Hence intake of each of these foods  provides glucose after digestion. So there is no separate need for taking sugar.

Few things to be remembered and practiced are :

  • Always use whole grain flour, as it contains a good amount of biber content for making chapati or roti.
  • Consume more of green leafy vegetables and salads with every meal.
  • Consider fruits and green leafy vegetables as part of regular snacks
  • Take small meals on more number of occasion to avoid glucose surge.
  • Avoid Maida and foods made from it. It is probably worst kind of food that one can consume.
  • Form healthy food habits.

 

Constipation

Ph.D - Ayurveda, MD - Ayurveda
Ayurveda, Delhi
Constipation

Common problem in particular with urban population.

If any one experienced these symptoms for more than three months, it is referred to as chronic constipation.

  • Passing stools less regularly

  • Stools becoming lumpy or hard

  • Additional straining when having bowel movements

  • Experiencing the sensation of a blockage that is preventing bowel movements

The recommended daily dietary fibre intake for adults is 25g for women and 30g for men, through fibre-rich foods, such as vegetables, fruit, cereals and whole grains.

it is recommended that whole foods be consumed, rather than a dietary fibre supplement. Additionally, fibre supplements can sometimes aggravate constipation, especially if you do not increase the amount of water you drink daily.

Did you know water makes up about three-quarters of the faecal content? Or that constipation can occur with a high-fibre diet if not enough water is consumed? To sum up, adequate water intake is important to keep bowel contents soft and easy to pass.

Recommended daily fluid intake

Approximate adequate daily intakes of fluids (including plain water, milk, and other drinks) for women are 2.1 litres (about 8 cups) per day and for men is 2.6 litres (about 10 cups) per day.

Simple measures are to be tried to regularize bowel discipline like

  • Goos berry=Amla powder 4-5 gm at bed time with warm water

OR

  • Trimyrebolan=Triphala powder 4-5 gm at bed time with warm water. If these measures are failed then one has to consult Doctor for further investigations and management.

Traditional Medicine VS Holistic Medicine

BHMS, PGD IN FAMILY WELFARE &HEALTH MANAGEMENT, pg diploma in clinical research and pharmacovigilance
Homeopath, Shimla
Traditional Medicine VS Holistic Medicine

Traditional Medicine VS Holistic Medicine

Flaxseed Solve Your Sexual Health Issues

Sexologist Clinic
Sexologist, Faridabad
Flaxseed Solve Your Sexual Health Issues

There are number of sexual diseases known nowadays and flaxseed is very beneficial for curing these sexual disorders in both men and women.Flaxseed oil and seeds both offer number of sexual benefits in both men and women as well. Some of the sexual benefits offered by Flaxseed are listed below.

  • It is beneficial for increasing libido:Testosterone, a natural sex hormone known in human body and regular use of flaxseed helps to increase testosterone thus resulting in increase of libido and other male sexual characteristics. Apart from these flax seeds also contains fatty acids, which are considered as the major building blocks for sex hormones. 
  • It promotes Male Fertility: Flaxseed oil is considered as one of the best supplement for promoting fertility. It contains L-Arginine which is very beneficial for promoting sperm counts. Flaxseed oils are useful for making sperm healthy.
  • It improves Sexual Performance: Flaxseed Oil plays a major role in increasing blood flow to sexual organs thus promoting longer erections. 

 

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