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Amrapali Hospital

Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Pulmonologist & more)

#P-2, Omega 1, National Highway - 34 Landmark : Near Pari Chowk Noida
9 Doctors · ₹0 - 700
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Amrapali Hospital Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Pulmonologist & more) #P-2, Omega 1, National Highway - 34 Landmark : Near Pari Chowk Noida
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We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply....more
We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply.
More about Amrapali Hospital
Amrapali Hospital is known for housing experienced Pediatricians. Dr. Pradeep K Singh, a well-reputed Pediatrician, practices in Noida. Visit this medical health centre for Pediatricians recommended by 67 patients.

Timings

MON-SAT
08:00 AM - 08:30 PM

Location

#P-2, Omega 1, National Highway - 34 Landmark : Near Pari Chowk
Noida, Uttar Pradesh - 201308
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Doctors in Amrapali Hospital

Dr. Pradeep K Singh

MBBS, MD - Paediatrics
Pediatrician
11 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Dhananjay Mishra

MBBS, MD - Paediatrics
Pediatrician
16 Years experience

Dr. Rubal Gupta

MBBS, MD - General Surgery, DM - Gastroenterology
Gastroenterologist
20 Years experience

Dr. Subhendu Mohanty

MBBS, MD - Internal Medicine, DM - Cardiology
Cardiologist
20 Years experience
600 at clinic
Unavailable today

Dr. Ms. Navya Dev

MA - Psychology
Psychologist
4 Years experience
700 at clinic
Unavailable today

Dr. Navreet Sharda

MBBS, MD - Paediatrics, MRCPCH (UK)
Pediatrician
16 Years experience
400 at clinic
Available today
07:00 PM - 08:30 PM

Dr. Amrit Goel

MBBS, DNB - Respiratory Medicine, FCCP
Pulmonologist
14 Years experience

Dr. Amit Gupta

MBBS, DNB - Internal Medicine, MNAMS (Membership of the National Academy)
General Physician
15 Years experience
Unavailable today

Dr. Sumeet Bhargava

MBBS, DNB - Radio Diagnosis
Radiologist
14 Years experience
500 at clinic
Unavailable today
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गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गले में कफ जमना - Gale Mein Kaf Jamna!

अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है या गले में कुछ जमा हुआ अनुभव होता है तो यह गले में कफ जमा होने का है। गले में जमा हुए कफ को बलगम के नाम से भी जानते है. गले में कफ जमा होने के प्रमुख लक्षणों में नाक बहना और बुखार भी शामिल है। यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन यदि यह समस्या लम्बे समय तक बना रहता है तो फिर इससे सांस से जुडी कई समस्याएं हो सकती है. जब आपके नाक या गले के पिछले हिस्से में कफ जमना शुरू हो जाता है तो यह आपको म्यूकस मेम्ब्रेन श्वसन प्रणाली की रक्षा करने और उसको सहारा देने के लिए कफ बनाती है. ये मेंब्रेन नाक, गला, मुंह, फेफड़े, साइनस और नाक की ग्रंथि में होता है. जो एक दिन में कम से कम 1 से 2 लीटर बलगम का उत्पादन करती हैं. बलगम या कफ की अत्याधिक मात्रा होना, परेशान करने वाली समस्या हो सकती है. इसके कारण घंटो बैचेनी रहना, बार-बार गला साफ करते रहना और खांसी जैसी समस्या हो सकती है. ज्यादातर लोगों में यह एक अस्थायी समस्या होती है. हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह एक स्थिर समस्या बन जाती है. जिसके बेहतर उपचार पर थोड़े समय के लिए राहत मिल पाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम गले में कफ के जमने के बारे में जानें.

गले में कफ के जमने का क्या लक्षण है?
बलगम या कफ से भी सांसो में दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि कफ में मौजूद प्रोटीन के कारण बैक्टीरिया पैदा होती है. जब शरीर जरूरत से ज्यादा कफ उत्पादन करती है, तब अत्याधिक कफ आपके नाक के वायुमार्गों में अवरोध पैदा करता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगती है. कफ बनने के कारण नाक रूकने की समस्या काफी असहज और यहां तक कि दर्दनाक स्थिति पैदा कर सकती है. अत्याधिक कफ आपके गले व फेफड़ों में जमा हो सकता है. सामान्य कफ साफ या सफेद रंग का होता है और कम गाढ़ा होता है. जो कफ हल्के पीले या हरे रंग का दिखाई पड़ता है या जो कफ असाधारण रूप से अधिक गाढ़ा होता है, वह बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत देता है.

गले में कफ जमने के कारण-
जब कोई सर्दी-जुखाम या फ्लू, वायरल इंफेक्शन, साइनस जैसी बिमारियों से ग्रसित होता है तो व्यक्ति का बलगम कोल्ड या इंफेक्शन से बीमार होता है, तो उस व्यक्ति का कफ गाढ़ा हो जाता है और उसके बलगम के रंग में भी परिवर्तन आता है. बलगम के चिपचिपा होने के कारण वायरस, धूल या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ बलगम से चिपक जाते है. बलगम का गाढ़ापन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. जब व्यक्ति बीमार पड़ता है तो आपका शरीर कई सारे कणों के संपर्क में आता है जो कफ के साथ चिपकता है और कफ गाढ़ा हो जाता है. वैसे तो कफ आपकी श्वसन प्रणाली का एक स्वस्थ हिस्सा होता है, लेकिन अगर यह आपको परेशान कर रहा है, तो आप इसको पतला करने के या इसे निकालने के लिए कुछ तरीकों को अपना सकते हैं.

खाद्य पदार्थ: – कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते है जो गले में कफ उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता हैं. गले में कफ जमने के लिए मुख्य रूप से डायरी पदार्थ को जिम्मेदार माना जाता हैं. इन खाद्य पदार्थों में कैसिइन नाम के प्रोटीन अणु होते हैं, जो बलगम का स्त्राव बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं. दूध उत्पादों के साथ-साथ कैफीन, चीनी, नमक, काली चाय आदि ये सभी पदार्थ भी अतिरिक्त बलगम बनाते हैं. इसके साथ ही साथ जो लोग डेयरी उत्पादों को छोड़, सोया उत्पादों को अपना लेते हैं, इस स्थिति में उनके शरीर में अस्वस्थ बलगम बनने के जोखिम बढ़ जाते हैं.

गर्भावस्था: – यह देखा गया है की कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान छींकना, नाक रूकना और खांसी आदि लक्षण अनुभव होते हैं. वैसे तो प्रेगनेंसी में इस तरह के लक्षणों को सामान्य माना गया है. बलगम उत्पादन और गाढ़ापन के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन को भी एक कारण माना जाता है.

पोस्ट नेजल ड्रिप: – जब गले और नाक में अधिक कफ जमा हो जाता है तो यह खांसी पैदा करता है. रात के दौरान गले में कफ का उत्पादन होता है और सुबह तक यह गले में जम जाता है.

मौसमी एलर्जी: – मौसमी एलर्जी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं. मौसमी एलर्जी के लक्षण गले में बलगम जमना, छींकना और खांसना आदि समस्या शामिल हैं. ऐसे कई एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ हैं, जो ये लक्षण पैदा करते हैं, इसमें सर्दियों के अंत से गर्मियों तक की अवधि शामिल होती है. पेड़ और फूलों की पराग मौसमी एलर्जी के प्रमुख कारकों में से एक होते हैं और इसके लक्षण तब तक रहते हैं जब तक एलर्जी करने वाले पदार्थ नष्ट नहीं हो जाते.

अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अधिक पसीना आना - Adhik Pasina Aana!

गर्मी के मौसम में सामान्य पसीना आना तो ठीक है, लेकिन अक्सर लोग जब एक्सरसाइज करने या धूप में जाते हैं तो उन्हें बहुत पसीना आता हैं लेकिन कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा पसीना निकलता है तो ऐसे में शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती है. अधिक पसीना आना और सर्दी में भी पसीना आना एक समस्या हो सकती है. यह समस्या कई बार आपको दुरुगंध का शिकार बना कर आपको असहज कर सकती है. इस लक्षण को हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. लोग इसे बड़ी आम बात समझ कर ध्यान नहीं देते लेकिन आगे जाकर यह किसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है. ज्यादा पसीना आने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इस समस्या को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से बहुत अधिक पसीना आने के विभिन्न पहलुओं को जानें ताकि इस विषय में जानकारी बढ़ाई जा सके.

क्यों आता है बहुत ज्यादा पसीना?
जब अपके शरीर में अत्याधिक पसीना आता है तो आप शारीरिक और मानसिक रुप से असहज महसूस करते है. जब आपके हाथ, पैर और बगलें पसीना से तर-बतर हो जाते हैं तो इस परिस्थिति को प्राइमरी या फोकल हाइपरहाइड्रोसिस के नाम से जानते है. प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस से केवल 2-3 प्रतिशत आबादी प्रभावित है, लेकिन इससे पीड़ित 40 प्रतिशत से भी कम व्यक्ति ही डॉक्टरी सलाह लेते हैं. आमतौर पर इसके कारण का पता नहीं लगता है. यह एक अनुवाशिंक समस्या भी हो सकती है जो परिवार में पहले से चली आ रही हो. यदि अत्यधिक पसीने की शिकायत किसी डॉक्टरी स्थिति के कारण होती है तो इसे सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है. पसीना पूरे शरीर से भी निकल सकता है या फिर यह किसी खास स्थान से भी आ सकता है. दरअसल, हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों को मौसम ठंडा रहने या उनके आराम करने के दौरान भी पसीना आ सकता है.

बचने के उपाय-
पसीने से प्रभावित व्यक्ति को बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए का बगल में इस्तेमाल कर सकते हैं. यह व्यक्ति को अत्यधिक पसीने से निजात दिलाएगा। यह अतिसक्रिय पसीना ग्रंथि की तंत्रिकाओं को शांत करता है, जिससे पसीने में कमी आती है.

बोटॉक्स भी हो सकता है इलाज-
प्राइमरी एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस के इलाज के लिए बोटॉक्स भी के विकल्प के रूप में आया है. बोटुलिनम टॉक्सिन का इंजेक्शन बाजुओं में लगाने से पसीने के लिए जिम्मेदार तंत्रिकाएं अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाती हैं. एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, जिससे चार-महीने तक राहत मिल जाती है और शरीर की दुरुगंध से भी निजात मिल जाती है. ललाट या चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने जैसी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति में मेसो बोटॉक्स सबसे अच्छा उपाय है. इसमें पसीने की रफ्तार कम करने के लिए त्वचा के संवेदनशील टिश्यू (डर्मिज) में बोटॉक्स के पतले घोल का इंजेक्शन लगाया जाता है.

इसके अलावा भी हैं उपाय-
एंटीपर्सपिरेंट: जब पसीना ज्यादा निकलता है तो पसीने को कंट्रोल करने के लिए तेज एंटी-पर्सपिरेंट को आजमाया जा सकता है, जो पसीने की नलिकाओं को ब्लॉक कर देते हैं. बाजुओं और बगलों में पसीने के शुरुआती इलाज के लिए 10 से 20 प्रतिशत अल्युमीनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट की मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ मरीजों को अल्युमीनियम क्लोराइड की अत्यधिक मात्र वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी जा सकती है. ये उत्पाद प्रभावित हिस्सों में रात के वक्त इस्तेमाल किए जा सकते हैं. एंटीपर्सपिरेंट से त्वचा में खुजलाहट हो सकती है. इसकी अधिकता कपड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. याद रखें: डियोडरेंट से पसीना रुकता नहीं है, बल्कि शरीर की दुरुगंध कम होती है.

दवाओं का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
रोबिनुल, रोबिनुल-फोर्ट जैसी एंटीकोलिनर्जिक दवाएं पसीने की सक्रिय ग्रंथियों को निष्क्रिय करती हैं. हालांकि, कुछ लोगों पर प्रभावी होने के बावजूद इन दवाओं के प्रभाव का स्टडी नहीं किया गया है. इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी सकते है जिसमें शुष्क मुंह, चक्कर तथा पेशाब संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
ईटीएस (एंडोस्कोपिक थोरेसिस सिंपैथेक्टोमी): जब स्थिति गंभीर हो जाती है तो सिंपैथेक्टोमी नामक मामूली सर्जरी प्रक्रिया की सलाह दी जाती है, जब अन्य उपाय असफल हो जाते हैं. यह उपाय उन मरीजों पर आजमाया जाता है, जिनकी हथेलियों पर सामान्य से ज्यादा पसीना आता है. इसका इस्तेमाल चेहरे पर अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में भी किया जा सकता है.

1 person found this helpful

Breathlessness

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Chest & TB
Pulmonologist, Faridabad
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When you experience shortness of breath for no reason, you might wonder if there is something to worry. Breathing difficulty (dyspnea) affects around 1 in every 10 adults. The causes are varied, and just like other health problems like dizziness, fatigue, and abdominal pain, shortness of breath too has several causes.

189 people found this helpful

Anxiety, Panic & Phobia

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Being constantly anxious impairs work performance and creates havoc in relationships. The best way to deal with it to accept that it is only a temporary phase which everyone faces. If you keep worrying and try to fight it, you will become even more anxious and your health will become even worse.

335 people found this helpful

Depression

Member of the Royal College of Psychiatrists, United Kingdom (MRC Psych), MD - Psychiatry, MBBS
Psychiatrist, Ghaziabad
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Depression, or major depressive disorder, is a mental health condition marked by an overwhelming feeling of sadness, isolation and despair that affects how a person thinks, feels and functions. Depression can affect people of all ages, races and socioeconomic classes, and can strike at any time.

237 people found this helpful

Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to get pregnancy.

BHMS
Homeopath, Noida
Hello sir, I am 28 years old. My height is 4'10 and wait is 67. Suffering from pcod. How can I control my weight to g...
1. Don't Overeat 2. Don't take tea empty stomach. Eat something like a banana (if you are not diabetic) or any seasonal fruit or soaked almonds and a glass of water first thing in the morning (within 10 mins of waking up). No only biscuits or rusk will not do. 3. Take your breakfast every day. Don't skip it. 4. Have light meals every 2 hours (in addition to your breakfast, lunch n dinner) e.g. Nariyal paani, chaach, a handful of dry fruits, a handful of peanuts, any fresh n seasonal fruit, a cup of curd/milk etc 5. Finish your dinner at least 2 hours before going to sleep. 6. Maintain active life style. This is most important n non negotiable part 7. Avoid fast foods, spicy n fried foods, Carbonated beverages 8. Take a lot of green vegetables n fruit. 9. Drink lot of water. 10. Curd is good for u. 11. Everyday preferably sleep on same time For more details you can consult me.

I am suffering from excessive gas for past few months. Please suggest me a remedy.

MBBS
General Physician, Mumbai
I am suffering from excessive gas for past few months. Please suggest me a remedy.
Dear lybrate-user, - Follow some dietary precautions for your problem: - avoid fried spicy processed and junk foods, also restrict tea, coffee intake to 1-2 cups per day, avoid gas forming foods like milk & milk products, beans, lentils, pulses, citrus fruits, mint, chocolates, aerated drinks - chew your food well, do not skip meals, have meals on time, take a walk for 5-10 min after meals for proper digestion - take tablet Pan 40, 1 tablet daily half an hour before breakfast - have plenty of oral fluids including 7-8 glasses of water for proper digestion.

Sir I am suffering from sexual problem my penis is very little only 4 inch I want increase it my sex timing is very short time please tell me something idea how to increase my penis please plz sir.

Sexologist, Delhi
Sir I am suffering from sexual problem my penis is very little only 4 inch I want increase it my sex timing is very s...
Dear lybrate-user, if your sex timing is less then maybe you are suffering from Premature Ejaculation. Premature Ejaculation is a problem in which both the partners are not equally satisfied during sexual intercourse. The person is ejaculating before penetration. The length of a non-erect penis doesn't consistently predict length when the penis is erect. If your penis is about 13 cm (5 inches) or longer when erect, it's of normal size. A penis is considered abnormally small only if it measures less than 3 inches (about 7.5 centimeters) when erect, a condition called micro penis. Both the problem have one solution is that Ayurveda. For more information about treatment please consult us privately on Lybrate.
3 people found this helpful

Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

MD -Homeopathy, BHMS, Certificate Course In Child Counseling & Parenting
Homeopath, Pune
Epilepsy - Causes, Symptoms & Homeopathic Treatment Of It!

Epilepsy is a disease that affects the brain's nerve cells and triggers the release of abnormal electrical signals. This can cause temporary malfunctioning of the other brain cells and result in seizures and sometimes loss of consciousness. Epilepsy can affect both children and adults.

Causes of Epilepsy

The cause of this condition isn’t very evident; however, few causes of epileptic seizures to metion are brain tumours, injury, infections in the brain or birth defects. Some doctors believe that epilepsy is caused due to genetic mutations and is an outcome of abnormal activity of cells in the brain. Other causes for this condition can be alcohol or narcotics withdrawal and electrolyte problems.

Symptoms

  1. Repeated seizures

  2. Impaired memory

  3. Bouts of fainting

  4. Short spans of blackout

  5. Sudden bouts of blinking and chewing

  6. Panic

  7. Inappropriate repetitive movements

Types of Seizures
A seizure, also known as fit, is usually a brief episode characterised by uncontrollable jerking movement and loss of awareness due to abnormal neuronal activity in your brain. A collective occurrence of these seizures causes epilepsy.

There are three types of seizures based on aetiology:

  1. Idiopathic: This kind of seizure has no apparent cause.

  2. Cryptogenic: The doctors believe that there is a cause for the seizure but cause cannot be detected.

  3. Symptomatic: These seizures occur due to a reason, as a symptom of some neuro-medical condition.

Role of Homeopathy

Homeopathy is a form of healing based upon the principle of ‘Similia similibus curentur’ or ‘like cures like’. It was founded by a German doctor, Dr. Samuel Hahnemann in 1810. Homoeopathy offers vast scope in the treatment of various illnesses, both acute and chronic including epilepsy. Homeopathy takes into account the entire person like the patients family history, past history, etc. Homoeopathic doctors study each case thoroughly, analyze and evaluate the symptoms and then prescribe the medicine.

Homeopaths treat the patient’s mental, emotional and physical make-up i.e. the constitution. This is known as ’constitutional treatment’. Constitutional treatment treats the disease and removes it from its roots. The Constitutional method is employed in the treatment of epilepsy in Homoeopathy. This method is gives amazing results in many cases.

Homeopathy has immense scope in the treatment of Epilepsy. In fresh cases, where the child is new to epileptic treatment, homoeopathy can relieve complaints by giving ‘constitutional treatment’.

In other cases where the child is already taking treatment, homoeopathy can taper off the doses gradually and thus treat the patient effectively. Thus, in both the cases, homoeopathic treatment is beneficial in treating epilepsy.

In either of the cases, a constitutional medicine is given to treat epilepsy. Constitutional treatment relieves the patient from seizures, convulsions, etc. Thus the child can attend school daily and concentrate on his studies. In about 1/3 cases of epilepsy, a surgery known as ‘seizure surgery’ is performed. Regular constitutional treatment is very useful in such cases.

Homeopathic medicines are completely side-effect free and are not habit-forming. They can be taken by children, adults and even by pregnant women. They must be taken only after consultation from a homoeopathic practitioner.

My dad has an sugar problem so if can suggest me something that can control sugar level?

BSc (Life Science), DHMS (Diploma in Homeopathic Medicine and Surgery), NDDY(Naturopathy and Yoga), Punjabi University.
Homeopath, Mohali
My dad has an sugar problem so if can suggest me something that can control sugar level?
Dear Lybrate user In type 2 diabetes (you didn't mention, healthy diet and at proper intervals ,healthy life style, mental relaxation, avoidance of refined food, regular physical exercise, refreshing sleep, plays an important role in controlling sugar level. The medication is required or not. If required what will be the dosage, it can be assessed by the consulting doctor.
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