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Nirogi Kaya

  4.6  (24 ratings)

Acupressurist Clinic

Mithanpura Muzaffarpur
1 Doctor · ₹500
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Nirogi Kaya   4.6  (24 ratings) Acupressurist Clinic Mithanpura Muzaffarpur
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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Acupressurist.By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with ......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Acupressurist.By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have placed in us.
More about Nirogi Kaya
Nirogi Kaya is known for housing experienced Acupressurists. Dr. Vimal Kumar, a well-reputed Acupressurist, practices in Muzaffarpur . Visit this medical health centre for Acupressurists recommended by 73 patients.

Location

Mithanpura
Muzaffarpur , Bihar - 842002
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Doctor in Nirogi Kaya

Dr. Vimal Kumar

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist
92%  (24 ratings)
6 Years experience
500 at clinic
₹50 online
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स्वस्थ्य ह्रदय

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
स्वस्थ्य ह्रदय
स्वस्थ्य ह्रदय"
ह्रदय स्वस्थ्य रखने के उपायग्रीन चाय का प्रयोग करें :इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो आपके कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं , और ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार होते हैं .इसमें कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो कैंसर कोशिकाओं से बढ़ मारते हैं को .ये असमान्य रक्त के थक्के को भी रोकती है , जिस वजह से ये स्ट्रोक रोकने में भी सहायक है .जैतून का तेल का प्रयोग करें :खाना बनाने के लिए जैतून तेल का प्रयोग करें .इसमें मौजूद वसा बुरा एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है .जैतून का तेल में भी एंटीऑक्सीडेंट होते हैं , जो अन्य कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं .पर्याप्त नीद लें :खासतौर से 4o साल के ऊपर के व्यक्ति के लिए अच्छी नीद बहुत ज़रूरी है .पर्याप्त नीद ना लेने पर शरीर से तनाव हार्मोन निकलते हैं , जो धमनियों को ब्लॉक कर देते हैं और जलन पैदा करते हैं .फाइबर युक्त आहार लें :रिसर्च के आधार पर ये साबित हो चुका है कि आप जितना अधिक फाइबर खायेंगे , आपके दिल का दौरा पड़ने के मौके उतने ही कम होंगे .अधिक से अधिक सेम , सूप , और सलाद का प्रयोग करें .मांस की जगह समुद्री भोजन खाना सहायक होगा .नाश्ता में फलों का रस लें :संतरे का रस में फोलिक एसिड होता है जो दिल का दौरा पड़ने के खतरे को कम करता है .अंगूर का रस में flavonoids और resveratrol होता है जो धमनी ब्लॉक करने वाले के थक्के को कम करता है .ज्यादातर रस आपके लिए अच्छे हैं बस ध्यान रखिये कि वो चीनी मुक्त हों .रोज़ व्यायाम करें :यदि आप प्रतिदिन 20 मिनट तक व्यायाम करते हैं तो आपका दिल का दौरा होने का खतरा एक - तिहाई तक घाट जाता है .वॉक पर जाना , एरोबिक्स या नृत्य कक्षाएं करना फायदेमंद होगा .खाने में लहसुन का प्रयोग करें :रेह्र्ता है कम अध्यनो में पाया गया है कि लहसुन खाने से रक्तचाप .ये कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है और साथ ही रक्त शर्करा के स्तर को भी रखता है में नियंत्रण .इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है .
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हँसने के पाँच फायदे

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
हँसने के पाँच फायदे
हँसने के पाँच फायदे
आज की भाग दौङ भरी जिंदगी, ऊपर से काम का प्रेशर हममे में से कई लोगों को तो याद भी न होगा कि पिछली बार कब खिलखिला कर हँसे थे। जबकी हँसना हम सभी के लिये अति महत्वपूर्ण है किन्तु हम उसे नजर अंदाज कर देते हैं। मित्रों हँसने से हमारी जिंदगी किस तरह स्वस्थ एवं खुशनुमा हो सकती है उसी के बारे में थोङी सी जानकारी शेयर करने की कोशिश कर रही हूँ , पसन्द आए तो हँसियेगा जरूर. तो आइये जानते हैं हंसने के पाँच फायदे:

1) हंसने से हद्रय की एक्सरसाइज हो जाती है। रक्त का संचार अच्छीतरह होता है। हँसने पर शरीर से एंडोर्फिन रसायन निकलता है, ये द्रव्य ह्रदय को मजबूत बनाता है। हँसने से हार्ट-अटैक की संभावना कम हो जाती है।

2) एक रिसर्च के अनुसार ऑक्सीजन की उपस्थिती में कैंसर कोशिका और कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया एवं वायरस नष्ट हो जाते हैं। ऑक्सीजन हमें हँसने से अधिक मात्रा में मिलती है और शरीर का प्रतिरक्षातंत्र भी मजबूत हो जाता है।
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मुंहासे (pimples)

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
मुंहासे (pimples)
मुंहासे (Pimples)

परिचय:-
मुंहासे जवानी में होने वाला एक आम रोग है। इस रोग को यौवन पीड़िका भी कहते हैं तथा इसे अंग्रेजी में एकनी कहते हैं। इस रोग को कीलें निकलना भी कहते हैं। यह रोग जवान स्त्री-पुरूषों को होने वाला रोग है। यह रोग 13 वर्ष की आयु से लेकर 25 वर्ष की आयु तक होता है। इस रोग में चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं जिन्हें मुंहासे कहते हैं। कभी-कभी तो ये मुंहासे इतने अधिक होते हैं कि रोगी का पूरा चेहरा मुंहासों से ढक जाता है।
मुंहासे दो प्रकार के होते हैं-

• यह मुंहासे चेहरे पर छोटे-छोटे दानों के रूप में प्रकट होते हैं और कुछ समय के बाद पक जाते हैं। इनके सूख जाने पर आस-पास की त्वचा को दबाकर इनके अन्दर की कीलें निकाल दी जाती है तो उनमें छेद हो जाते हैं जो बाद में भर जाते हैं।
• दूसरे प्रकार के मुंहासें वे होते हैं जो बिना पके ही काली कील निकलने वाले होते हैं।

मुंहासे होने का कारण-

• मुंहासे होने का सबसे प्रमुख कारण कफ, वायु तथा रक्त के सम्बन्धित रोग है।
• तैलीय पदार्थ के भोजन का अधिक सेवन करने से चेहरे की त्वचा आवश्यक रूप से चर्बीदार हो जाती है, जिससे वहां की तैलीय ग्रंथियों में वृद्धि होकर वे फुन्सियों का रूप धारण कर लेती हैं जिसके कारण चेहरे पर मुंहासे निकलने लगते हैं।
• अधिक चिकनाई, शक्कर, मांस, शराब, चाय, कॉफी, सिगरेट आदि नशीले पदार्थों का सेवन करने से चेहरे पर मुंहासे निकलने लगते हैं। लेकिन यह रोग केवल जवान युवक-युवतियों को ही होता है।
• कब्ज तथा अजीर्ण रोग के कारण भी चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं।
• वासनामय जीवन जीने वाले जवान स्त्री तथा पुरुषों को मुंहासे अधिक होते हैं।
• स्त्रियों में मुंहासे मासिकधर्म की खराबी के कारण अधिक होते हैं।

मुंहासों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-

• मुंहासे होने का सबसे प्रमुख कारण पेट के रोग हैं इसलिए मुंहासों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को सादा, बिना तैलीय तथा बिना चिकनाई वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। इसके बाद मुंहासों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करना चाहिए।
• मुंहासे रोग से पीड़ित रोगी को भोजन में साग-सब्जी, उबली सब्जियां, नींबू, संतरा, अंगूर, अनार, नाशपाती, सेब, टमाटर, गाजर, अमरूद तथा पपीते आदि का अधिक सेवन करना चाहिए।
• चोकर सहित आटे की रोटी, दही और मठे आदि का सेवन करना मुंहासों के रोग में बहुत लाभदायक है।
• मुंहासों से पीड़ित रोगी को दिन में 2 बार फल और 2 बार साधारण भोजन का सेवन करना चाहिए।
• मुंहासें रोग से पीड़ित रोगी को एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसका पेशाब साफ होता रहे, त्वचा से पसीना निकलता रहे, फेफड़े ठीक प्रकार से काम करते रहें और कब्ज न होने पाए।
• मुंहासों से पीड़ित रोगी को 1 दिन उपवास करना चाहिए फिर इसके बाद प्रतिदिन सुबह के समय में ताजी हवा में हल्की कसरत करनी चाहिए।
• मुंहासों से पीड़ित रोगी को कुछ दिनों तक प्रतिदिन 1-2 बार अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की पट्टी का आधे-आधे घण्टे तक लेप करना चाहिए। यदि कब्ज बन रहा हो तो कब्ज को दूर करने के लिए चिकित्सा करानी चाहिए तथा 24 घण्टे में एक बार एनिमा लेना चाहिए।
• मुंहासे रोग से पीड़ित रोगी को अपने चेहरे पर स्नो या क्रीम का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे मुंहासे समाप्त होने की बजाय और अधिक हो जाते हैं।
• मुंहासों से पीड़ित रोगी को उपचार करने के लिए किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन में पानी भरकर आग पर उबलने के लिए रख दें। जब इसमें से भाप निकलने लगे तो आग से बर्तन को उतार लें और लगभग 15 मिनट तक चेहरे पर भाप लें और इसके बाद मुलायम तौलिये से चेहरे को धीरे-धीरे रगड़कर साफ कर लें। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। इस प्रकार की क्रिया सप्ताह में कम से कम 3 बार करनी चाहिए। मुंहासों को ठीक करने के लिए सूर्य की अल्ट्रावॉलेट किरणें बहुत ही लाभदायक होती है। सुबह के समय में सूर्य की किरणों में अल्ट्रावॉलेट किरणें होती हैं।
• मुंहासों को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन नियमपूर्वक सूर्योदय के समय में पूरब दिशा की ओर मुंह करके सूर्य की किरणें अपने चेहरे पर लेनी चाहिए। कुछ दिनों तक इस प्रकार से उपचार करने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
• मुंहासों को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को अपने चेहरे के सामने पारदर्शी शीशा रखकर ठीक सामने से प्रकाश को शीशे के बीच से गुजारना चाहिए लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि शीशा चेहरे के सामने इस प्रकार से रखें कि नीला प्रकाश चेहरे पर पड़े। इस प्रकर से कुछ दिनों तक उपचार करने से मुंहासे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
• रोगी व्यक्ति के मुंहासे जब सूख जाएं और उनमें काली कीलें दिखाई देने लगें तो उन्हें धीरे-धीरे हाथ से दबाकर निकाल देना चाहिए और इसके बाद चेहरे पर दूध की मलाई मल लेनी चाहिए। इससे मुंहासे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
• मुंहासों को ठीक करने के लिए मसूर का चूर्ण, घी और दूध को एकसाथ मिलाकर चेहरे पर उबटन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• मुंहासों से पीड़ित रोगी को रात के समय कच्चे दूध को चेहरे पर मलना चाहिए और सुबह के समय उठकर चेहरे को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। इससे मुंहासे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
• संतरे का छिलका पानी में पीसकर दिन में 3 बार चेहरे पर मलने से मुंहासे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
• दही में काली चिकनी मिट्टी को मिलाकर, इस उबटन को रात के समय में चेहरे पर लगाकर सो जाएं। फिर इसके बाद सुबह के समय में उठकर चेहरे को धो लें। इस प्रकार की क्रिया कुछ दिनों तक करने से मुंहासे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
• छुहारे की गुठली को घिसकर नींबू के रस के साथ मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को रात को सोने से पहले चेहरे पर लगा लें और थोड़ी देर के बाद धो लें। इस क्रिया को प्रतिदिन करने से कुछ ही दिनों में चेहरे के मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
• मुंहासों को ठीक करने के लिए मुलहठी को पानी में पीसकर लेप बना लें, इसके बाद इस लेप को चेहरे पर मल लें। इससे कुछ ही दिनों में मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
• धनिया, सफेद बच, पीली सरसों, पठानी, लाल चन्दन, मजीठ, कड़वी कूठ, मालकंगनी, कालीमिर्च, बड़ के अंकुर, सेंधानमक प्रत्येक औषधि को 10-10 ग्राम की मात्रा में ले लें। फिर इसके बाद 5 ग्राम हल्दी और 40 ग्राम मसूर की दाल पहले की सामग्री के साथ मिलाकर पीस ले और चमेली के तेल में मिला लें। रोगी व्यक्ति को स्नान करने से पहले लगभग इस 20 ग्राम लेप को लेकर इसमें 5 ग्राम पिसी हुई खड़िया मिट्टी मिलाकर चेहरे पर लेप कर लें। थोड़ी देर बाद लेप को मलकर छुड़ा डालें और स्नान कर लें। स्नान करने के बाद चेहरे पर चमेली का तेल मल लेना चाहिए। इस प्रकार से मुंहासों का उपचार करने से रोगी के मुंहासे ठीक हो जाते हैं।

Prevent Dengue

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
Prevent Dengue
To prevent Dengue, take homeopathy medicine eupatorium perf 200 morning and evening 2drop one day repeat after 10days
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My mother is suffering from knee & joint pain with lack of gum. Doctors in my place suggesting Operation that cost 4 lakhs. She is unable to walk.

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
My mother is suffering from knee & joint pain with lack of gum. Doctors in my place suggesting Operation that cost 4 ...
Massage castor oil on both knee at bed time and cotton cloth bandadge both knee whole night. Both middle & ring finger middle joint nail side colour with black sketch pen. Totally 15 days treatment.
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बुखार (Fever)

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
बुखार (Fever)
बुखार (Fever)

परिचय:-
मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट से 36.4 डिग्री सेल्सियस तक होता है। जब तापमान इससे अधिक बढ़ जाता है तो उसे बुखार कहा जाता है। यह इस बात की पुष्टि करता है कि शरीर विजातीय द्रव्यों को जलाकर अपने कार्य तंत्र की सफाई करता है और उसे दुबारा से सक्रियता प्रदान करता है। लेकिन बहुत से लोग इस स्थिति से जल्दी ही डर जाते हैं और एंटीबायोटिक औषधियों से उपचार कराने लगते हैं जिसके कारण उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे दूसरी अन्य बीमारियों को पनपने का मौका मिल जाता है।
बुखार से एक बात का और संकेत मिलता है कि शरीर के अन्दर कोई न कोई गड़बड़ी हो गई है।

बुखार कई प्रकार का होता है जो इस प्रकार हैं-

• इन्फलुएंजा (फ्लू)
• न्यूमोनिया
• टाइफाईड
• मलेरिया

बुखार होने के लक्षण:-

• जब किसी व्यक्ति को बुखार होता है तो उसका शरीर सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।
• कभी-कभी तो बुखार बहुत अधिक तेज हो जाता है जिसके कारण शरीर गर्म हो जाता है।
• बुखार के साथ-साथ रोगी के पूरे शरीर में दर्द भी रहता है।
• बुखार के कारण रोगी व्यक्ति के मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है।
• बुखार के कारण रोगी को बेचैनी तथा थकान सी महसूस होने लगती है।
• बुखार हो जाने के कारण रोगी व्यक्ति कमजोर भी हो जाता है।
• बुखार में ठंड लगती है और सिर तथा अन्य मांसपेशियों में दर्द होता है।
• बुखार के कारण व्यक्ति की नाक तथा गले में कभी-कभी सूजन आ जाती है।
• बुखार के कारण रोगी की नाक तथा आंख से पानी भी आने लगता है।
• बुखार कभी-कभी तो 2-3 दिन तक रहता है लेकिन यह कभी-कभी तो 4-5 दिनों तक भी रहता है।
• न्यूमोनिया बुखार हो जाने पर व्यक्ति को बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी तथा छाती में तेज दर्द होने लगता है।
• टाइफाईड बुखार रहने पर व्यक्ति को सुबह के समय में तो बुखार कम रहता है लेकिन शाम के समय में बुखार तेज हो जाता है और यह बुखार व्यक्ति को कई दिनों तक रहता है।
• टाइफाईड बुखार से पीड़ित रोगी को भूख भी कम लगती है, रोगी की जीभ लाल हो जाती है, रोगी की पीठ, कमर, टखने तथा सिर में दर्द रहता है और इस रोग के कारण व्यक्ति की तिल्ली (प्लीहा) तथा जिगर बढ़ जाते हैं। कभी-कभी तो रोगी की आंतों से खून भी निकलने लगता है।
• मलेरिया बुखार के कारण रोगी व्यक्ति को ठंड लगकर बुखार होता है तथा सिर में दर्द तथा पैरों में दर्द होता रहता है। इसके कुछ समय बाद रोगी को पसीना आकर बुखार तेज हो जाता है।

बुखार होने के कारण:-

• गलत तरीके के खान-पान (भोजन खाने का तरीका) से शरीर में विजातीय द्रव्य बहुत अधिक बढ़ जाते हैं जिसके कारण मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और शरीर में बैक्टीरिया, कीटाणु तथा वायरस आदि पनपने लगते हैं जिसके कारण व्यक्ति को बुखार हो जाता है।
• बुखार कई प्रकार के कीटाणुओं के संक्रमण के कारण भी हो सकता है।
• जिस किसी मनुष्य में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उस व्यक्ति को यदि किसी प्रकार से सूजन या चोट लग जाए तो उसे बुखार हो सकता है।
• मलेरिया बुखार एनोफिलीज नामक एक विशेष प्रकार के मच्छर के काटने से हो जाता है।

बुखार का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

• बुखार को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को तब तक उपवास रखना चाहिए जब तक कि उसके बुखार के लक्षण दूर न हो जाए। फिर इसके बाद दालचीनी के काढ़े में कालीमिर्च और शहद मिलाकर खुराक के रूप में लेना चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• अगर किसी व्यक्ति को न्यूमोनिया बुखार है तो उसे लहसुन का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए।
• रोगी को उपवास रखने के बाद धीरे-धीरे फल खाने शुरू करने चाहिए तथा इसके बाद सामान्य भोजन सलाद, फल तथा अंकुरित दाल को भोजन के रूप में लेना चाहिए।
• बुखार रोग से पीड़ित रोगी के बुखार को ठीक करने के लिए प्रतिदिन रोगी को गुनगुने पानी का एनिमा देना चाहिए तथा इसके बाद उसके पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी लगानी चाहिए और फिर आवश्यकतानुसार गर्म या ठंडा कटिस्नान तथा जलनेति क्रिया भी करानी चाहिए।
• यदि बुखार बहुत तेज हो तो रोगी के माथे पर ठंडी गीली पट्टी रखनी चाहिए तथा उसके शरीर पर स्पंज, गीली चादर लपेटनी चाहिए और फिर इसके बाद गर्म पाद स्नान क्रिया करानी चाहिए।
• जिस समय बुखार तेज न हो उस समय रोगी से कुंजल क्रिया करानी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• यदि रोगी व्यक्ति को बुखार के कारण ठंड लग रही हो तो उसके पास में गर्म पानी की बोतल रखकर उसे कम्बल ओढ़ा देना चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• रोगी के शरीर पर घर्षण क्रिया करने से बुखार बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
• इस रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से विश्राम करना चाहिए तथा इसके बाद रोगी को अपना इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से कराना चाहिए।
• बुखार से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त नीली बोतल का पानी 2-2 घंटे पर पिलाने से बुखार जल्दी ठीक हो जाता है।
• शीतकारी प्राणायाम, शीतली, शवासन तथा योगध्यान करने से भी रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• रोगी व्यक्ति को ठंडा स्पंज स्नान या ठंडा फ्रिक्शन स्नान कराने से शरीर में फुर्ती पैदा होती है और बुखार भी उतरने लगता है।
• रोगी की रीढ़ की हड्डी पर बर्फ की मालिश करने से बुखार कम हो जाता है।
• इस रोग से पीड़ित रोगी को खुले हवादार कमरे में रहना चाहिए, हलके आरामदायक वस्त्र पहनने चाहिए तथा पर्याप्त आराम करना चाहिए।
• जब रोगी व्यक्ति का बुखार उतर जाता है और उसकी जीभ की सफेदी कम हो जाती है तो उसे फलों का ताजा रस पीकर उपवास तोड़ देना चाहिए और इसके बाद रोगी को कच्चे सलाद, अंकुरित दालों व सूप का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से दुबारा बुखार नहीं होता है।
• इस रोग से पीड़ित रोगी को संतरे का रस दिन में 2 बार पीना चाहिए इससे बुखार जल्दी ही ठीक हो जाता है।
• इस रोग से पीड़ित रोगी को तुलसी के पत्तों का सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• तुलसी की पत्तियों को उबालकर उसमें कालीमिर्च पाउडर और थोड़ी चीनी मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
• बुखार से पीड़ित रोगी को दूध नहीं पीना चाहिए लेकिन यदि दूध पीने की इच्छा हो तो इसमें पानी मिलाकर हल्का कर लेना चाहिए तथा इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए। ध्यान रहे कि इसमें चीनी बिल्कुल भी नहीं मिलानी चाहिए।
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कब्ज (constipation)

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
कब्ज (constipation)
कब्ज (Constipation)

परिचय:-
कब्ज रोग होने की असली जड़ भोजन का ठीक प्रकार से न पचना होता है। यदि पेट रोगों का घर होता है तो आंत विषैले तत्वों की उत्पति का स्थान होता है। यह बहुत से रोगों को जन्म देता है जिनमें कब्ज प्रमुख रोग होता है।
कब्ज एक प्रकार का ऐसा रोग है जो पाचनशक्ति के कार्य में किसी बाधा उत्पन्न होने के कारण होता है। इस रोग के होने पर शारीरिक व्यवस्था बिगड़ जाती है जिसके कारण पेट के कई रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इस रोग के कारण शरीर में कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है। इस रोग के कारण कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं जैसे- अफारा, पेट में दर्द, गैस बनना, सिर में दर्द, हाथ-पैरों में दर्द, अपच तथा बवासीर आदि।

कब्ज रोग का लक्षण:-

• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है। कभी-कभी मल में गांठे बनने लगती हैं। जब रोगी मलत्याग कर लेता है तो उसे थोड़ा हल्कापन महसूस होता है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है।
• कब्ज के रोग से पीड़ित व्यक्ति के मुंह से भी बदबू आती रहती है।
• इस रोग में रोगी को बहुत कम भूख लगती है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के सिर में दर्द भी होता रहता है।
• रोगी व्यक्ति की आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलाता रहता है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के और भी रोग हो जाते हैं जैसे- मुंहासे निकलना, मुंह के छाले, अम्लता, चिड़चिड़ापन, गठिया, आंखों का मोतियाबिन्द तथा उच्च रक्तचाप आदि।

कब्ज होने के कारण-

• तली हुई चीजों का अधिक सेवन करने के कारण कब्ज रोग हो जाता है।
• मल तथा पेशाब के वेग को रोकने से कब्ज रोग हो सकता है।
• ठंडी चीजे जैसे- आइसक्रीम, पेस्ट्री, चाकलेट तथा ठंडे पेय पदार्थ खाने से कब्ज रोग हो सकता है।
• दर्दनाशक दवाइयों का अधिक सेवन करने के कारण कब्ज रोग हो जाता है।
• व्यायाम तथा शारीरिक श्रम न करने के कारण भी कब्ज रोग हो जाता है।
• शरीर में खून की कमी तथा अधिक सोने के कारण भी कब्ज रोग हो जाता है।
• कम पानी पीने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।
• समय पर भोजन न करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।
• गलत तरीके से खान-पान के कारण भी कब्ज का रोग हो सकता है।
• मैदा तथा चोकर के बिना भोजन खाने के कारण कब्ज का रोग हो सकता है।
• बासी भोजन का सेवन करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।
• तरल पदार्थों का सेवन अधिक करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।
• अधिक धूम्रपान तथा नशीली दवाइयों का प्रयोग करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।

कब्ज रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-

• कब्ज रोग का उपचार करने के लिए कभी भी दस्त लाने वाली औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि कब्ज रोग होने के कारणों को दूर करना चाहिए और फिर प्राकृतिक चिकित्सा से इसका उपचार कराना चाहिए।
• कब्ज के रोग को ठीक करने के लिए चोकर सहित आटे की रोटी तथा हरी पत्तेदार सब्जियां चबा-चबाकर खानी चाहिए। अधिक से अधिक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए। अंकुरित अन्न का अधिक सेवन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।
• रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए ये फल इस प्रकार हैं- पपीता, संतरा, खजूर, नारियल, अमरूद, अंगूर, सेब, खीरा, गाजर, चुकन्दर, बेल, अखरोट, अंजीर आदि।
• नींबू पानी, नारियल पानी, फल तथा सब्जियों का रस पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी को बहुत फायदा मिलता है।
• गेहूं का रस अधिक मात्रा में पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
• कच्चे पालक का रस प्रतिदिन सुबह तथा शाम पीने से कब्ज रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इस प्रकार से उपचार करने से कब्ज रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
• रोगी व्यक्ति को रात के समय में 25 ग्राम किशमिश को पानी में भिगोने के लिए रख देना चाहिए। रोजाना सुबह के समय इस किशमिश को खाने से पुराने से पुराना कब्ज रोग ठीक हो जाता है।
• कब्ज से पीड़ित रोगी को सुबह तथा शाम 10-12 मुनक्का खाने से बहुत लाभ होता है।
• नींबू का रस गर्म पानी में मिलाकर रात के समय पीने से शौच साफ आती है।
• कब्ज के रोग को ठीक करने के लिए त्रिफला चूर्ण को प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।
• रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में उठते ही 2-4 गिलास पानी पीना चाहिए और उसके बाद शौच के लिए जाना चाहिए।
• कब्ज का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को अपने पेट पर 20 से 25 मिनट तक मिट्टी की या कपड़े की पट्टी करनी चाहिए। यह क्रिया प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इसके बाद रोगी व्यक्ति को कटिस्नान करना चाहिए तथा एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए।
• कब्ज से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में खुली हवा में प्रतिदिन सैर के लिए जाना चाहिए।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को शाम के समय में हरे रंग की बोतल का सूर्यतप्त पानी पीना चाहिए। जिसके फलस्वरूप कब्ज रोग को ठीक होने में मदद मिलती है। इसके बाद ईसबगोल की भूसी ली जा सकती है। लेकिन इसमें कोई खाद्य पदार्थ नहीं होना चाहिए।
• रोगी व्यक्ति को मैदा, बेसन, तली-भुनी तथा मिर्च मसालेदार चीजों आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद लगभग 5 मिनट तक वज्रासन करना चाहिए। यदि सुबह के समय में उठते ही वज्रासन करे तो शौच जल्दी आ जाती है।
• कब्ज रोग को ठीक करने के लिए पानी पीकर कई प्रकार के आसन करने से कब्ज रोग ठीक हो जाता है- सर्पासन, कटि-चक्रासन, उर्ध्वहस्तोत्तोनासन, उदराकर्षासन तथा पादहस्तासन आदि।
• यदि किसी व्यक्ति को बहुत समय से कब्ज हो तो उसे सुबह तथा शाम को कटिस्नान करना चाहिए और सोते समय पेट पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए और प्रतिदिन कम से कम 6 गिलास पानी पीना चाहिए।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को 1 चम्मच आंवले की चटनी गुनगुने दूध में मिलाकर लेने तथा रात को सोते समय एक गिलास गुनगुना पानी पीने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में तांबे के बर्तन में पानी को रखकर सुबह के समय में पीने से शौच खुलकर आती है और कब्ज नहीं बनती है।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में 2 सेब दांतों से काटकर छिलके समेत चबा-चबाकर खाना चाहिए। इससे रोगी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
• सप्ताह में 1 बार गर्म दूध में 1 चम्मच एरण्डी का तेल मिलाकर पीने से कब्ज का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
• कब्ज रोग से बचने के लिए जब व्यक्ति को भूख लगे तभी खाना खाना चाहिए।
• कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेडू पर ठंडे पानी में भिगोया तौलिया कम से कम 8 मिनट तक रखना चाहिए जिसके फलस्वरूप कब्ज रोग जल्दी ठीक हो जाता है।
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एंजाइना पेक्टोरिस

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
एंजाइना पेक्टोरिस
एंजाइना पेक्टोरिस

परिचय-

एंजाइना पेक्टोरिस के रोग में रोगी ऐंठन का शिकार हो जाता है। इस रोग में शरीर के अंदर खून का संचार कम होने की वजह से रोगी को पूरी तरह आक्सीजन नहीं मिल पाती है।

कारण-

जब रोगी के शरीर की धमनियां एकदम सख्त हो जाती है तब यह रोग पैदा होता है।

लक्षण-

इस रोग की शुरुआत में रोगी की छाती के बीचो-बीच में तेज दर्द होता है। खासतौर पर इस तरह का दर्द व्यायाम के बाद ही होता है। कभी-कभी यह दर्द जबड़े या बांह के ऊपरी भाग में भी चला जाता है। इस रोग में रोगी को काफी घुटन महसूस होती है और उसे ऐसा लगता है कि किसी ने उसकी छाती पर कुछ भारी सामान रख दिया हो। इस रोग की पहचान के लिए रोगी की इलेक्ट्रो-कॉडियोग्राम जांच करानी अच्छी रहती है।

उपचार-

इस रोग के होने पर सबसे पहले रोगी को अपने ब्लड प्रेशर की जांच करा लेनी चाहिए। अगर ब्लड प्रेशर बढ़ा

हुआ तो उसे कंट्रोल करने की कोशिश करनी चाहिए। आपकी लंबाई के हिसाब से अगर आपका वजन ज्यादा हो तो वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर रोगी धूम्रपान करता हो तो उसे धूम्रपान तुरंत छोड़ देना चाहिए नहीं तो यह खतरनाक हो सकता है।

तुलसी के उपयोग

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Acupressurist, Muzaffarpur
तुलसी के उपयोग
तुलसी के उपयोग -----

- दिल की बीमारी में यह अमृत है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों को तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

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मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी - मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, जैसे मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है। जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए। इससे बुखार में आराम मिलता है। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा।

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- तुलसी व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।

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- तुलसी के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी की परेशानी दूर हो जाती है।

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- चार-पांच लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत लाभ होता है।

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- किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।

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- फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।

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- तुलसी थकान मिटाने वाली एक औषधि है। बहुत थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है।

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- प्रतिदिन 4- 5 बार तुलसी की 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।

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- तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। इससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।

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- तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।

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- तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में डालें। कम से कम एक-सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा रहने दें। यह पानी पीने से कई बीमारियां पास नहीं आतीं।
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आँवला

Associate Bachelor in A A & H S, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
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आँवला

आंवला




आंवला के उपयोग -----

- आंवला मोतियाबिंद की परेशानी में फायदेमंद रहता है।

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- आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

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- सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने से आप स्वस्थ बने रह सकते हैं।

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- आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है।

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- आंवला अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।

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- आंवला खाने से सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

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- दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी।

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- आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को मजबूत करता है और बालों का झडऩा भी काफी हद तक रोकता है।

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