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Dr. Shruthishah

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Dr. Shruthishah MBBS Gynaecologist, Mumbai
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I'm dedicated to providing optimal health care in a relaxed environment where I treat every patients as if they were my own family....more
I'm dedicated to providing optimal health care in a relaxed environment where I treat every patients as if they were my own family.
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Dr. Shruthishah is a popular Gynaecologist in Kandivali West, Mumbai. Doctor is a qualified MBBS . Doctor is currently practising at Kandivili Hitvardhak Mandal Hospital in Kandivali West, Mumbai. Save your time and book an appointment online with Dr. Shruthishah on Lybrate.com.

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Kandivili Hitvardhak Mandal Hospital

K H M Medical Centre, Mangubhai Dattani Bhavan, Corner Of S V Road & S M Road, Kandivali West,Near Bata Showroom,Landmark:Opp to Balbarthi High School, MumbaiMumbai Get Directions
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Hi doctor, I am 25 yr old nd had taken misopostl and mifepistne abortion pill in feb month because dont ready for pregnancy. But in next period, bleeding is continue still even 12 th day and bleeding is not normal i. E sometime heavy. Please suggest what to do.

MBBS- 1996 & MD - (OBG)/DVD/DPM/Dip.Andrology.
Gynaecologist, Hyderabad
Hello, don't take any tension, because some little things like like this are a result of of pill action. If again heavy bleeding continues then I will advice u better. No tension.
7 people found this helpful
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लहसुन के औषधीय गुण :

M.Sc - Psychology, PGDEMS, Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Delhi
लहसुन के औषधीय गुण :


आयुर्वेद ग्रंथ 'भावप्रकाश' कहता है कि 'लहसुन वृष्य स्निग्ध, ऊष्णवीर्य, पाचक,सारक,रस विपाक में कटु तथा मधुर रस युक्त, तीक्ष्ण भग्नसंधानक (टूटी हड्डी जोड़ने वाला), पित्त एवं रक्तवर्धक, शरीर में बल, मेधाशक्ति तथा आँखों के लिए हितकर रसायन है। यह हृदय रोग, जीर्ण रोग (ज्वरादि), कटिशूल, मल एवं वातादिक की विबंधता, अरुचि, काम, क्रोध, अर्श, कुष्ठ, वायु, श्वांस की तकलीफ तथा कफ नष्टकारी है।

मेहनतकश किसान-मजदूर तो लहसुन की चटनी, रोटी खाकर स्वस्थ और कर्मठ बने रहते हैं। यह कैंसर से लड़ने में खास उपयोगी है क्योंकि यह खाने -पीने की चीजों या प्रदूषण से शरीर में बनने वाले नाइट्रोसेमाइन के असर को कम करता है। हृदय रोग समेत कई अन्य रोगों में भी यह सुरक्षा कवच बन सकता है। इसे पूरे शरीर के लिए एक शक्तिशाली टॉनिक बताया गया है। पिछले महीने एनालिटिकल बायोकेमिस्ट्री पत्रिका में छपी रिपोर्ट में कहा गया कि नाइट्रोसेमाइन का संबंध कैंसर से होता है। ज्यादातर सब्जियों, डब्बाबंद आहार और उद्योग से निकलने वाले कचरे में नाइट्रेट की मात्रा होती है। करीब 20 प्रतिशत नाइट्रेट शरीर में जाकर नाइट्रोसेमाइन में बदल जाता है। इस अध्ययन में शामिल लोगों को, एक हफ्ते तब बिना नाइट्रेट और लहसुन वाला भोजन दिया गया। इसके बाद उन्हें सोडियम नाइट्रेट की खुराक इस प्रकार दी गई जिससे वह टॉक्सिक में न बदले। इसके बावजूद, पेशाब की जांच में, इसके टॉक्सिक में बदलने की प्रक्रिया का पता लगा। इसके बाद स्टडी में शामिल लोगों के एक ग्रुप का इलाज लहसुन के डोज से किया गया। उन्हें एक, तीन या पांच ग्राम ताजा लहसुन या तीन ग्राम लहसुन का रस दिया गया। दूसरे ग्रुप को 500 मिली ग्राम एस्कॉर्बिक एसिड या विटामिन-सी दिया गया। दोनों समूहों को सात दिन तक ये खुराक दी गई और हर दूसरे दिन उनके पेशाब के नमूने लिए गए। जांच से स्पष्ट हुआ कि लहसुन का सेवन करने वालों में नाइट्रोसेमाइन की मात्रा कम थी। 'एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन' और 'जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन' के अध्ययन का भी निष्कर्ष है कि लहसुन सेवन से कोलेस्ट्रॉल में 10 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है और हर हफ्ते सप्ताह लहसुन के पाँच दाने खाने से कैंसर का खतरा 30 से 40 फीसदी कम हो जाता है। वस्तुतः,षडरस अर्थात् भोजन के 6 रसों में, "अम्ल रस" को छोड़,शेष पाँच रस लहसुन में सदैव विद्यमान रहते हैं। आज षडरस आहार दुर्लभ हो चला है। लहसुन उसकी पूर्ति के लिए बहुत सस्ता, सुलभ विकल्प है। इसीलिए,लहसुन को गरीबों का 'मकरध्वज' कहा जाता है क्योंकि इसके लगातार प्रयोग से मनुष्य का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

औषधीय गुणः
मलेरिया के रोगी को भोजन से पहले तिल के तेल में भुना लहसुन खिलाना चाहिए। लहसुन का तेल सवेरे निराहार पानी के साथ लेने से, कितनी ही पुरानी खाँसी हो, फायदा होता है। बिच्छू के काटे स्थान पर डंक साफकर लहसुन और अमचूर पीसकर लगाने से जहर उतर जाता है। डंक ग्रस्त भाग पर पिसी चटनी भी लगाएँ। इन्फ्लूएंजा में लहसुन का रस पानी में मिलाकर चार-चार घंटे बाद दें। इसके सेवन से रक्त में थक्का बनने की प्रवृत्ति बहुत कम हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। लहसुन की गंध से मच्छर भी दूर भागते हैं।यह उच्च रक्तचाप में भी काफी लाभदायक माना गया है। जी मचलने पर लहसुन की कलियाँ चबाना या लहसुनादि वटी चूसना फायदेमंद होता है। रोगाणुनाशक क्षमता होने के कारण लहसुन के एक भाग रस में तीन भाग पानी मिलाकर इसका इस्तेमाल घाव धोने के लिए किया जाता है। कुनकुने पानी में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करने से गले की खरास दूर हो जाती है। लहसुन में पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व होता है जो कि रक्त निर्माण में सहायक होता है। विटामिन-सी युक्त होने के कारण यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है। लहसुन का रस 25 ग्राम की मात्रा में प्रातः निराहार ही त्रिफला के साथ कुछ दिन लगातार लेने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। यह कब्जहारी है। इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द या गठिया में भी होता है तथा यह सूजन का भी नाश करती है। लहसुन के रस की पाँच-पाँच बूंदें सुबह-शाम लेने से काली खाँसी दूर हो जाती है। कान में दर्द होने पर, लहसुन और अदरक को बराबर की मात्रा में कूटकर कुनकुना करके कान में लेने से आराम मिलता है। 10 ग्राम लहसुन का रस मट्ठे में मिलाकर तीन बार लेने से पेचिश का शमन हो जाता है। लहसुन के सेवन से ट्यूमर को 50 से 70 फीसदी तक कम किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए। यह रक्तचाप को नियंत्रित रख कर शिशु को नुकसान से बचाता है। उससे भावी शिशु का वजन भी बढ़ता है और समय पूर्व प्रसव का खतरा भी कम होता है।

सावधानीः
लहसुन की तासीर काफी गर्म और खुश्क होने के कारण इसे उचित अनुपात में ही लेना चाहिए। खासकर गर्मी के मौसम में पित्त प्रधान प्रकृति वालों को इसका संतुलित इस्तेमाल ही करना चाहिए। कच्चा लहसुन बहुत तीक्ष्ण होता है इसीलिए इसका ज्यादा उपभोग करने से पाचन क्रिया गड़बड़ा सकती है। कुछ लोगों को लहसुन से एलर्जी भी होती है। ऐसी एलर्जी का लक्षण यह होता है कि कहीं-कहीं त्वचा लाल हो जाती है और सिरदर्द होता है। बुखार भी हो सकता है। सर्जरी से पहले लहसुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एड्स के रोगी अगर लहसुन का सेवन करते हैं तो उन्हें साइड-इफेक्ट हो सकता है। अगर लहसुन का कुछ दुष्प्रभाव महसूस हो तो मरीज को गोंद कतीरा, धनिया, बादाम-रोगन, नींबू, पुदीना देते रहने से उसका दुष्प्रभाव दूर हो जाता है। घी में भून कर लेने से भी इसका कुप्रभाव दूर हो जाता है। सूखा लहसुन छीलकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
148 people found this helpful

i am 43 years male want a baby, i am trying since last 1 year. i have 10 years son

MBBS (Gold Medalist, Hons), MS (Obst and Gynae- Gold Medalist), DNB (Obst and Gynae), Fellow- Reproductive Endocrinology and Infertility (ACOG, USA), FIAOG
Gynaecologist, Kolkata
One year is enough time. So, you and your wife should consult your gynaecologist to have some basic work up. There may be problem in the female or the male or the both. Even sometimes no problems may be found. But please remember, as you already have a son, your chance of having baby is quite good. And try to have regular physical relationship between 12-16 days of the menstrual period. All the best.
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Health Tip

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, FNB Reproductive Medicine, MRCOG
Gynaecologist, Mumbai
Health Tip

Taking contraceptive pills might reduce the desire for sexual involvement.

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I am 26 years female married, my last menstrual period was 1st October, and on 1st November I missed my period, I take a test on 6th November and it's positive so my question is how many days or week I am pregnant, I don't know how to count. Please tell me.

BAMS
Ayurveda, Bangalore
I am 26 years female married, my last menstrual period was 1st October, and on 1st November I missed my period, I tak...
Hi, Counting of days starts from your last menstrual cycle, ie, from 1st october. Thus it is 37days of pregnancy or 6 weeks of pregnancy.
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Dengue Treatment in Hindi - डेंगू का इलाज

MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Dengue Treatment in Hindi - डेंगू का इलाज

डेंगू वायरसजनित बीमारी है। ये बीमारी मच्छर से फैलती है और इसका सबसे पहला लक्षण तेज बुखार है। इस बीमारी के दौरान शरीर की प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। डेंगू एडीज नाम के मच्छर से फैलता है। हर साल बरसात के महीने में ये बीमारी फैलती है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। 
डॉक्टर बताते हैं किम शरीर में 1 मिली खून में 30-40 हजार प्लेटलेट्स होती हैं। ये प्लेटलेट्स रोज नष्ट होती हैं और रोज बनती रहती हैं। डेंगू होने पर शरीर के काम करने की गतिे धीमी पड़ जाती है, जिससे प्लेटलेट्स बनने की गतिी भी धीमी हो जाती है। ऐसे में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी गिरने लगती है। डेंगू का मच्छर ज्यादातर दिन में काटता है और ये साफ पानी में फैलता है। मादा एडीज कूलर, ड्रम, टंकी और गमलों में इकट्ठे पानी में अंडे देती है, यहीं से डेंगू फैलता है।

डेंगू के लक्षण 
एडीज मच्छर के काटने के बाद डेंगू का वायरस शरीर में पहुंच जाता है। इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार होता है। इसके बाद सिर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों मे भी दर्द होता है। शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी और भूख न लगना भी डेंगू के लक्षण हैं।

डेंगू का इलाज 
1. डेंगू में नीम, तुलसी, गिलोय, पिप्पली, पपीते
की ताजी पत्तियों का रस, गेंहू की बालि यों का रस, आंवला और एलोविरा का रस पीने से फायदा मिलता है। रस से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और प्लेटलेट्स के निर्माण में तेजी आती है।

2. पपीते की पत्ती: 
डेंगू में प्लेटलेट्स की रिकवरी के लिए पपीते की ताजी पत्तियों के रस को बहुत उपयोगी माना जाता है। इस रस को बनाने के लिए कुछ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर पीस लें। ध्यान रखें, पत्तिीयां नई उगी हुई ताजी हों। इन पत्तियों के अर्क को दिन में दो-तीन चम्मच डेंगू के मरीज को पिलाएं। ये शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालता है साथ ही प्लेटलेट्स की मात्री तेजी से बढ़ती है।

3. गिलोय का काढ़ा:
25 ग्राम ताजी गिलोय का तना लेकर कूट लें, 5-6 तुलसी के पत्ते और 3-4 काली मिर्च पीसकर 1 लीटर पानी में उबालें। पानी को तब तक उबालें जब तक ये 250 मिली न रह जाए। इसे तीन हिस्सों में बांट लें। डेंगू फैलने पर ये काढ़ा पि्एं इसे वायरल इन्फेक्शन के बचाव के लिसए इस्तेमाल किया जाता है।

4. तुलसी: 
तुलसी की पत्तियां हर तरह के वायरल में लाभकारी होती हैं। इसकी पत्तियों को चाय में डालकर रोजाना पीने से वायरल से बचाव होता है। डेंगू के मरीज को पानी में तुलसी की पत्ती उबालकर दें, इससे शरीर को रोग से लड़ने की ताकत मिलती है।अनार और चुकंदर का जूस- डेंगू के मरीज के लिीए अनार और चुकंदर का जूस लाभकारी होता है। अनार खून की कमी को दूर करता है।

5. एलोविरा: 
एलोविरा का जूस प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है और पाचन शक्ति ठीक रखता है। डेंगू होने पर मरीज को एलोविरा का जूस या नेक्टर (मकरंद) दें, ये शरीर को शक्तिे प्रदान करता है।

6. आंवला: 
आंवले में विटामिन सी होता है, ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। वहीं शरीर में पहुंचकर लौह तत्व का ज्यादा अवशोषण करता है, जिससे खून बढ़ता है।
ये सारे उपाय डेंगू के लक्षणों को कंट्रोल करने के लि।ए हैं, आराम न मिलने की स्थिपतिा में डॉक्टर का परामर्श जरूर लें।

डेंगू से बचाव 

डेंगू से मुकाबला करना मुश्किल है और इसके वायरस के संक्रमण के बाद तेजी से प्लेटलेट्स गिरती हैं।  इस स्थि ति् में संभलने का वक्त नहीं मिलता। इसलिबए इससे बचाव रखना भी बेहद जरूरी है।
1. ध्यान रखें कि घर में कहीं भी पानी इकट्ठा न हो। सफाई का खास खयाल रखें। 
2. कूलर वगैरह का पानी वक्त पर बदलते रहें और कूलर साफ करें। जहां भी पानी इकट्ठा हो रहा हो उसमें मिट्टी का तेल  डाल दें ताकि अंडे विकसित न हो सकें।
3. गमलों में भी पानी इकट्ठा न होने दें। मिट्टी नम रखें बाकी पानी गिरा दें।
4. बर्तन धोने वाली जगह पर भी पानी न इकट्ठा होने दें। हो सके तो बर्तनों को उलटा करके रखें।
5. घर में मच्छर मारने के उपाय करें। नीम की पत्तियां जलाएं, मॉसक्वीटो रिपेलेंट लगाएं और मच्छरदानी लगाकर सोएं। बच्चों को भी पूरे कपड़े पहनाकर सुलाएं और दिन के वक्त खासकर मच्छर भगाने के इंतजाम रखें।
6. कपूर के धुएं से भी मच्छर भागते हैं, कपूर को दिये में रखकर जलाएं और हर कमरें धुआं करें। अगर घर में किसी को डेंगू हो गया हो तो विशेष ध्यान रखें।

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Benefits of Homeopathy

B.H.M.S ( Mumbai) (Silver Medalist), Certificate In Gyn and Obstetric
Homeopath, Noida
Benefits of Homeopathy

Homeopathy is a holistic and a natural approach towards quick healing of an ailing individual. An estimate suggests that about 30% of the Indian population relies solely on the homeopathic treatment for their medical complications. People have witnessed incredible results with Homeopathy. The best part of Homeopathy is that there are no side effects associated with it, making it a much safer form of treatment. The fact that Homeopathy is both cost efficient and holistic or permanent in its cure, is one of the key benefits of this treatment. 

Let us discuss some of the benefits of Homeopathy in detail:

  1. No side-effects: Homeopathic medicines are very safe to consume as they are formulated using natural ingredients. Homeopathic pills are known to boost our immune systems and do not hamper digestion process. They do not cause allergies and suits almost everyone including children, adults and even pregnant and senior patients. National medicine agencies assure the safety and quality of homeopathy medicines as per the requirements of European Union Legislation and European Pharmacopoeia standards. Furthermore, homeopathy medication is completely free from chemicals and synthetic materials.
  2. Effective and Permanent cure: Acute or Chronic - homeopathy works like a miracle in both the cases. It treats a disease from its root and thus follows a more holistic or permanent approach to healing a person with least chances of reoccurrence of the disease. Most effective for allergic disorders and seasonal illnesses, homeopathy works wonders for bacterial or viral infections.
  3. Inexpensive and cost effective: When compared to conventional drugs, these medicines are much less expensive. Homeopathy medicines are also sustainable as they can be stored for prolonged periods and reused, if required.
  4. Long term gain: Studies have shown that homeopathic treatment ensures long term relief, eventually leading to complete cure. It is best known to boost our immune systems and strengthen the body's defense mechanisms alongside curing our diseases. There are least chances of reoccurrence of the disease, with this medication. 
  5. Gentle way of treatment and easy to administer: One of the vital reasons behind prescribing homeopathic medicine over conventional drugs is its gentle nature. The doses are in the form of sweet globules and thus are consumable by people of all age groups. Those who do not want to consume the sweetened globules have provision for liquids, powders or dissolvable tablets. The best part is that there are no injections! It boasts of non-invasive therapy and avoids surgery. It can be very well incorporated along with other therapies and medication.

Further, the medications of homeopathy are non-addictive in nature unlike some of the chemical antibiotics. Studies have shown that with appropriate medical treatment, homeopathy can reverse even the most chronic disorders with its gentle approach.

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I am 5 month pregnant. Till now everything is normal. Earlier I have 2 miscarriages. But suddenly nowadays I start feeling that I am not happy and I am not able to feel my baby movement so much. please help what can I do to remove the feeling that I am not happy? Also please suggest some healthy food?

MBBS, MS - Obstetrics & Gynecology, Fellowship in Infertility (IVF Specialist)
Gynaecologist, Aurangabad
I am 5 month pregnant. Till now everything is normal. Earlier I have 2 miscarriages. But suddenly nowadays I start fe...
Hi lybrate-user in view of previous abortions it obvious that you are worried about this pregnancy. Please get in touch with good obstetrician and follow up frequently and get all tests done that will give you surety. Start some meditation, positive thinking, keep yourself busy with some work so that your mind will be diverted.
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My sister is 2 month pregnant. please anyone tell what are the food she must take in her regular diet.

Doctor of Homeopathic Medicine (H.M.D.), Nutrition/ Diet planning, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS), Cosmetology, BHMS, DND, Pranic Healing
Homeopath, Navi Mumbai
My sister is 2 month pregnant. please anyone tell what are the food she must take in her regular diet.
Hello, diet consultation and customized diet planning/chart consists of protein, carbohydrate and fats in proportionate form with calculated calories to achieve your goals in healthy manner with follow ups. Guaranteed results.
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Dr. Vandana Walvekar

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Dr. Sharmila Naik

MBBS, DNB - Obstetrics and Gynaecology
Gynaecologist
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Dr. Mohan Krishna Raut

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, DGO
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MBBS, DGO
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