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MOHINI CLINICS

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13, Charisma Centre, 19Th Road, Near Dr. Ambedkar Garden, Chembur Mumbai
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MOHINI CLINICS Homeopath Clinic 13, Charisma Centre, 19Th Road, Near Dr. Ambedkar Garden, Chembur Mumbai
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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Homeopath . Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfo......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Homeopath . Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and financial concerns.
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MOHINI CLINICS is known for housing experienced Homeopaths. Dr. Karan Sharma, a well-reputed Homeopath, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Homeopaths recommended by 98 patients.

Timings

MON-SUN
05:00 PM - 09:00 PM
TUE, THU, SAT
07:30 PM - 08:30 PM

Location

13, Charisma Centre, 19Th Road, Near Dr. Ambedkar Garden, Chembur
Chembur Mumbai, Maharashtra - 400071
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ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय - Measures To Grow Breast!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
ब्रेस्ट बड़ा करने के उपाय  - Measures To Grow Breast!

ब्रेस्ट को स्त्रीत्व या मातृत्व का प्रतीक कहा जाता है. इसे स्त्री के शरीर का सबसे खूबसूरत और आकर्षक अंग कहा जाता है. जाहीर है स्तनों का एक सामान्य आकार होना ठीक रहता है. लेकिन कई महिलाएं अपने स्तनों के आकर को लेकर संतुष्ट नहीं होती हैं. ये लेख ऐसी महिलाओं के मदद के लिए ही है. आइए इस लेख के माध्यम से ब्रेस्ट को बड़ा करने के कुछ उपायों को जानें.

सौंफ़ बीज से

सौंफ़ का बीज एस्ट्रोजेन के उत्पादन को उत्तेजित करने में मदद करती है. एस्ट्रोजेन एक महिला हार्मोन है जो स्तनों के विकास को बढ़ावा देता है. सौंफ़ के बीज का उपयोग करने के लिए कॉड लिवर के तेल में सौंफ़ के बीज को गर्म करें जब तक तेल लाल नहीं हो जाता है. इसे ठंडा करने के बाद, अपने स्तनों की इस तेल के साथ 15 मिनट के लिए मालिश करें और एक घंटे बाद धो लें. इस उपाय को दिन में दो बार दोहराएं.

लाल क्लोवर

लाल तिपतिया घास ब्रेस्ट वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए फायदेमंद है. इसमें फाइटोस्टारोगन है जो ब्रेस्ट के ऊतको के विकास को उत्तेजित करता है. आप 10 मिनट के लिए एक गिलास पानी में इस जड़ी बूटी के सूखे फूलो को उबालकर लाल क्लोवर चाय तैयार कर सकते हैं. प्रभावी परिणाम के लिए हर दिन इस चाय के 2 कप पिएं.

व्यायाम से

ब्रेस्ट को बढ़ाने के लिए आप पुश-अप, डम्बल से ब्रेस्ट प्रेस, वाल प्रेस आदि व्यायाम कर सकती है. इन व्यायामो में बाजुओं और कंधों की गतिविधियाँ भी शामिल है जो ब्रेस्ट क्षेत्र के आसपास की त्वचा और मांसपेशियों के ऊतकों को टोन करती है. इससे आपके स्तनों को मजबूती मिलेगी और बड़े दिखाई देंगे. इन अभ्यासों को दैनिक रूप से कम से कम 30 मिनट के लिए करें. सही तरीके से करने के लिए जिम प्रशिक्षक या पेशेवर ट्रेनर से सलाह लें.

सिंहपर्णी की चाय

सिंहपर्णी के पौधे की जड़ स्तनो के ऊतको के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत अच्छी होती है. यह एक और उपयोगी जड़ी बूटी है जिससे आप बड़े स्तनों की इच्छा पूरी कर सकते हैं. इसके लिए आपको एक गिलास पानी में डेंडिलियन जड़ को 5 मिनट के लिए उबालकर चाय तैयार करने की ज़रूरत है. इस चाय को हर रोज पिएं.

केले से

आप शायद इस तथ्य से परिचित होंगे कि ब्रेस्ट वसा से बने होते हैं. तो बड़े और फुलर स्तनों को विकसित करने के लिए, आपको वसा की आवश्यकता होगी. इसलिए इसका एक अच्छा तरीका है केले का सेवन करना. यह आपके ब्रेस्ट के विकास के लिए आवश्यक वसा पोषण प्रदान करने में मदद करेगा.

शतावरी पाउडर

महिलाओं की हर प्रकार की समस्याओं में शतावरी नामक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बहुत लोकप्रिय है. इसका नियमित रूप से सेवन आपके स्तनों को बढ़ाने में मदद करेगा. आप सोने से पहले एक कप दूध के साथ 3 ग्राम शतावरी जड़ के पाउडर का सेवन कर सकते हैं. लगभग 2 महीने के लिए इसका सेवन रोज करें.

प्याज का रस

प्याज का रस स्वस्थ और बड़े स्तनों को बढ़ावा देने में सहायक होता है. हर रात सोने से पहले शहद के साथ प्याज का रस मिलाकर स्तनों की मसाज करें. रात भर इस मिश्रण को लगाकर रखें और सुबह उठने के बाद धो लें. यह उपाय स्तनों का आकर बढ़ाने में फायदेमंद साबित होगा. आप ऐसा दैनिक रूप से कर सकते हैं.

जैतून का तेल

जैतून के तेल की मालिश आपके स्तनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. आपको हर दिन एक या दो बार 20 मिनट के लिए अपने स्तनों की नियमित रूप से मालिश करनी चाहिए. आप इसके लिए गुनगुने जैतून के तेल का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा आप तिल के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं. कम से कम दो महीने के लिए ऐसा रोजाना करें.

मसूर की दाल

मसूर की लाल दालें फ़्योटोस्ट्रोजन से भरी हुई है. ये हार्मोन ब्रेस्ट ऊतक के विकास में सहायक होते हैं. इस सरल घरेलू उपाय का उपयोग करने के लिए, आपको सबसे पहले 2 घंटे के लिए गर्म पानी में लाल दाल को भिगोना होगा. इसके बाद इसका पेस्ट तैयार करें और अपने स्तनों पर लगाएँ और आधे घंटे के बाद धो लें.

वीट जर्म ऑइल

वीट जर्म ऑइल कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरा हुआ है जो फुलर और सुडौल स्तनों को विकसित करने में सहायता करता है. इस तेल के साथ नियमित रूप से मालिश आपके स्तनों को बढ़ाने में सहायता करेगी. आप इस तेल के कुछ बूंद लें और मालिश करने से पहले अपने दोनों हथेलियों को थोड़ा गर्म करने के लिए रगड़ें. लगभग 10 मिनट के लिए दिन में दो बार मालिश करें.

मेथी

मेथी, महिलाओं के स्तनो के आकार को बड़ा करना के लिए भी काम आती है. इसमें शक्तिशाली फाइटोस्टेग्रन्स शामिल होता हैं जो एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन की उत्तेजना से स्तनों के आकार को बढ़ाने में सहायता करते हैं. उपयोग के लिए, आप मेथी पाउडर और पानी को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को स्तनों पर लगाएँ और 15 मिनट के बाद धो लें. आप ऐसा दिन में दो बार कर सकते हैं.

मूली

मूली स्तनों के रक्त प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है. इससे स्तनो की वृद्धि में मदद मिलती है. अपने आहार में मूली को शामिल करें और नियमित आधार पर इसका उपभोग करें.
 

Anal Fissure Treament!

Graduate of Ayurvedic Medicine and Surgery (GAMS)
Ayurveda, Delhi
Anal Fissure Treament!

Anal fissure

दोस्तों आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनशैली कुछ ऐसी हो गयी है की लोगो को बवासीर से ज्यादा फिशर हो रहा है, 

फिशर अक्सर तब होता है, जब आप मल त्याग के दौरान कठोर और बड़े आकार का मल निकालते हैं। फिशर के कारण आमतौर पर मल त्याग करने के दौरान दर्द होना और मल के साथ में खून भी आता है। 

फिशर के दौरान आपको अपनी गुदा के अंत में मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती है। फिशर छोटे बच्चों में काफी सामान्य स्थिति होती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

फिशर के सामान्य तौर पर दो प्रकार होते हैं: 
तीव्र (acute) – त्वचा की ऊपरी सतह पर छेद या दरार को एक्यूट फिशर कहा जाता है। 
दीर्घकालिक (chronic) - अगर त्वचा की सतह पर हुआ छेद या दरार ठीक ना हो पाए, तो समय के साथ-साथ क्रॉनिक फिशर विकसित होने लगता है।

गुदा में फिशर के लक्षण व संकेतों में निम्न शामिल हो सकते हैं

मल त्याग के दौरान दर्द, कभी-कभी गंभीर दर्द होना। 
मल त्याग करने के बाद दर्द होना जो कई घंटों तक रह सकता है। 
मल त्याग के बाद मल पर गहरा लाल रंग दिखाई देना। 
गुदा के आसपास खुजली या जलन होना। 
गुदा के चारों ओर की त्वचा में एक दरार दिखाई देना। 
गुदा फिशर के पास त्वचा पर गांठ या स्किन टैग दिखाई देना।

फिशर के अन्य संभावित कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं

लगातार डायरिया (दस्त) रहना। 
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (ibd), जैसे क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस। 
लंबे समय तक कब्ज रहना। 
कभी-कभी यौन संचारित संक्रमण (sti), जैसे कि सिफिलिस या हर्पीस, जो गुदा व गुदा नलिका को संक्रमित और नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
एनल स्फिंक्टर की मांसपेशियां असामान्य रूप से टाइट होना, जो आपकी गुदा नलिका में तनाव बढ़ा सकती हैं। जो आपको एनल फिशर के लिए अतिसंवेदनशील बनाता है।

एनल फिशर से बचाव

आप कब्ज की रोकथाम करके एनल फिशर विकसित होने के जोखिमों को कम कर सकते हैं। अगर पहले कभी आपको फिशर की समस्या हुई है, तो कब्ज की रोकथाम करना बहुत जरूरी है। 

आप निम्न की मदद से कब्ज की रोकथाम कर सकते हैं

एक संतुलित आहार खाएं, जिसमें अच्छी मात्रा में फाइबर, फल और सब्जियां शामिल होती हैं। 
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीएं। नियमित रूप से व्यायाम करते रहें। 
यह महत्वपूर्ण है कि आप मल त्याग करने के बाद अपने गुदा को धीरे-धीरे पोंछें। 
जब शौचालय जाने की इच्छा महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि आंतों को खाली ना करना बाद में कब्ज का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आंतों में जमा होने वाला मल कठोर बन जाता है, जो गुदा के अंदर से गुजरने के दौरान दर्द व गुदा में दरार (खरोंच) पैदा कर कर सकता है। 
टॉयलेट में अधिक देर तक ना बैठें और अधिक जोर ना लगाएं। ऐसा करने से गुदा नलिका में दबाव बढ़ता है। अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जो फिशर होने के जोखिम को बढ़ाती है, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं। वे आपसे इस बारे में बात करेंगे कि इस स्थिति को कैसे मैनेज करना है और एनल फिशर होने के जोखिमों को कैसे कम करना है।

फिशर का परीक्षण कैसे किया जाता है? 
 

डॉक्टर आमतौर पर गुदा के आस-पास के क्षेत्र की जांच करके फिशर का परीक्षण कर सकते हैं। लेकिन वे परीक्षण की पुष्टी करने के लिए गुदा का भी परीक्षण कर सकते हैं। परीक्षण के दौरान डॉक्टर मरीज की गुदा में एंडोस्कोप (endoscope) डालते हैं, जिससे वे दरार को आसानी से देख पाते हैं। एंडोस्कोप एक मेडिकल उपकरण होता है, यह एक पतली ट्यूब होती है जिसकी मदद से डॉक्टर गुदा नलिका की जांच करते हैं। एंडोस्कोप के प्रयोग की मदद से डॉक्टर गुदा व गुदा नलिका से जुड़ी अन्य बीमारियों का पता भी लगा सकते हैं, जैसे बवासीर।

अनल फिशर के लिए नवीनतम आधुनिक उपचार
लेटरल इंटरनल स्फिंक्टरोटॉमी anal fissure का नया आधुनिक उपचार है, इसमें पेशेंट मात्र 7 से 15 दिन में बिलकुल ठीक हो जाता है साथ में anal dilatation करना होता है ताकि गुदा की मासपेशिया नरम मुलायम बने और गुदा की चिकनाहट बड़े, 
 

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Spermatocele!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Spermatocele!

Spermatocele 

Treatment of Spermatocele
Homeopathic Treatment of Spermatocele
Acupuncture & Acupressure Treatment of Spermatocele
Psychotherapy Treatment of Spermatocele
Conventional / Allopathic Treatment of Spermatocele
Surgical Treatment of Spermatocele
Dietary & Herbal Treatment of Spermatocele
Other Treatment of Spermatocele
What is Spermatocele
Symptoms of Spermatocele
Causes of Spermatocele
Risk factors of Spermatocele
Complications of Spermatocele
Lab Investigations and Diagnosis of Spermatocele
Precautions & Prevention of Spermatocele
Treatment of Spermatocele 

Homeopathic Treatment of Spermatocele

Homeopathy heals cyst swelling and pain. It treats the person as a whole. Treatment is constitutional. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Spermatocele are:

Am C
Canth
Puls
Spong
Graph
Rhodo
Teuc
 

Acupuncture and Acupressure Treatment of Spermatocele

Acupuncture relieves by improving the physiological function of the organs and organ system. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Spermatocele

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Spermatocele

Allopathic Treatment of Spermatocele involves over-the-counter pain medications, such as acetaminophen or ibuprofen.

Surgical Treatment of Spermatocele

The following surgery is performed for spermatocele:

Spermatocelectomy – is performed on an outpatient basis, using local or general anesthetic. The surgeon makes an incision in the scrotum and separates the spermatocele from the epididymis.

What is Spermatocele?

A spermatocele is a small cyst filled with clear fluid that may contain sperm. Spermatoceles, sometimes called spermatic cysts, are common.

Symptoms of Spermatocele

Pain or discomfort in the affected testicle
Swelling behind and above the testicle
A feeling of heaviness in the testicle with the spermatocele
 

Causes of Spermatocele

The exact cause of spermatoceles is unknown.

Risk factors of Spermatocele

Common in men
Age between 40 and 60
 

Diagnosis of Spermatocele

Diagnosis of Spermatocele involves the following tests:

Physical exam
Ultrasound
Transillumination
 

Precautions & Prevention of Spermatocele

There is no way to prevent a spermatocele.

Abdominal Strain!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Abdominal Strain!

Abdominal Strain

Treatment of Abdominal Strain
Homeopathic Treatment of Abdominal Strain
Acupuncture & Acupressure Treatment of Abdominal Strain
Psychotherapy Treatment of Abdominal Strain
Conventional / Allopathic Treatment of Abdominal Strain
Surgical Treatment of Abdominal Strain
Dietary & Herbal Treatment of Abdominal Strain
Other Treatment of Abdominal Strain
What is Abdominal Strain
Symptoms of Abdominal Strain
Causes of Abdominal Strain
Risk factors of Abdominal Strain
Complications of Abdominal Strain
Lab Investigations and Diagnosis of Abdominal Strain
Precautions & Prevention of Abdominal Strain
 

Treatment of Abdominal Strain 

Homeopathic Treatment of Abdominal Strain

Homeopathy gives instant relief in pain and inflammation. It treats the person as a whole. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some common homeopathic medicines used for abdominal strain are:

Belladona
Bryonia
Ran B
Rhus Tox
Mag M 

Acupuncture & Acupressure Treatment of Abdominal Strain

Acupuncture proves beneficial in the treatment of strained abdominal muscles. Doctors may also recommend physical therapy for treatment of pain in the abdominal wall Acupuncture and Dry Needling are useful modalities to provide pain relief and assist injury rehabilitation. According to acupuncture theory, chi circulates in the body along twelve major pathways, called meridians, each linked to specific internal organs and organ systems.

Psychotherapy Treatment of Abdominal Strain

Psychotherapy is a form of treatment that has been studied in terms of its effectiveness in helping people with abdominal strain. In this treatment, patient is taught healthy ways of thinking and coping behaviors to help reduce suffering. A therapist will teach relaxation and other pain management skills.

Conventional / Allopathic Treatment of Abdominal Strain

Allopathic treatment helps to address symptoms of abdominal pain. Conventional Allopathic treatment modalities may help to provide momentary relief from the symptoms.

Surgical Treatment of Abdominal Strain

In some cases of abdominal strain such as appendicitis and a hernia, surgery is necessary.

Dietary & Herbal Treatment of Abdominal Strain

Matricaria recutita is a medicinal herb, used for centuries as a natural anti-inflammatory and anti-spasmodic. It is an extremely effective treatment for abdominal pain.

Other Treatment of Abdominal Strain

The Ice Packs relieve pain and reduce bleeding in the damaged tissue.

What is Abdominal Strain?

Abdominal strain is damage to the abdominal muscle due to over-stretching of the muscle tissue. It is an injury to one of the muscles of the abdominal wall. The damage involves tearing the muscle tissue.

Symptoms of Abdominal Strain 

Swelling and bruising
Muscle pain
Muscle spams
Stiffness
Inflammation
Redness

Causes of Abdominal Strain

Accident or injury
Exercising excessively
Improperly performing exercises or sports activities
Lifting heavy objects
Sharply twisting the body

Risk factors of Abdominal Strain

Overexerting muscles
Exercising in cold weather
Performing exercises incorrectly
Having weak back muscles
Being tired
Participating in forceful activity

Complications of Abdominal Strain

Herniation of the intestines 

Diagnosis of Abdominal Strain

Your doctor will ask about your symptoms and medical history. Physical exam includes Tenderness, swelling, pain and some loss of strength may be present.

Tests include:

X-rays
Ultrasound
MRI

Precautions &Prevention of Abdominal Strain 

Maintain good muscle strength
If you are tired, stop exercising
Get proper training exercises
Do not overexert

Rheumatoid Arthritis!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi
Rheumatoid Arthritis!

Rheumatoid Arthritis 

Treatment of Rheumatoid arthritis
Homeopathic Treatment of Rheumatoid arthritis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Rheumatoid arthritis
Psychotherapy Treatment of Rheumatoid arthritis
Conventional / Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis
Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis
Dietary & Herbal Treatment of Rheumatoid arthritis
Other Treatment of Rheumatoid arthritis
What is Rheumatoid arthritis
Symptoms of Rheumatoid arthritis
Causes of Rheumatoid arthritis
Risk factors of Rheumatoid arthritis
Complications of Rheumatoid arthritis
Lab Investigations and Diagnosis of Rheumatoid arthritis
Precautions & Prevention of Rheumatoid arthritis
Treatment of Rheumatoid arthritis

Homeopathic Treatment of Rheumatoid arthritis

Homeopathy is extremely successful in treating rheumatoid arthritis. Homeopathic treatment gives relief in arthritis with inflammation, pain, stiffness and lameness. It is useful in preventing and treating deformities associated with the disease. Some of the homeopathic remedies that can be used for treatment of rheumatoid arthritis are:

Arnica
Bryonia
Calcarea
Causticum
Chinin s
Dulcamara
Kali carb
Pulsatilla
 

Acupuncture & Acupressure Treatment of Rheumatoid arthritis

The acupuncture and acupressure stimulate dilation of the blood vessels, potentially reducing swelling and pain. Acupuncture and Acupressure helps in nourishing the tendons and joints. It also has a strong effect on promoting the smooth flow of chi throughout the body. Obstruction to the smooth flow of chi causes pain and discomfort. Acupuncture gives lasting relief in rheumatoid arthritis.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Rheumatoid arthritis

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis

Allopathic Treatment of Rheumatoid arthritis involves the following medications:

NSAIDs – ibuprofen and naproxen
Steroids – prednisone
DMARDs – leflunomide and hydroxychloroquine
Immunosuppressants – cyclosporine and cyclophosphamide
TNF-alpha inhibitors – etanercept and infliximab
 

Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis

Surgical Treatment of Rheumatoid arthritis involves the following surgeries:

Total joint replacement
Tendon repair
Joint fusion
 

Dietary & Herbal Treatment of Rheumatoid arthritis

Eat foods rich in omega-3 fatty acid such as soybeans, walnuts and avocados
Avoid saturated fats
Avoid fried and grilled food
Avoid tea and coffee
 

Other Treatment of Rheumatoid arthritis

Heat compresses relax your muscles and stimulate blood flow
Applying cold also decreases muscle spasms.
 

What is Rheumatoid arthritis

Rheumatoid arthritis (RA) is a form of arthritis that causes pain, swelling, stiffness and loss of function in your joints. Hands, feet and wrists are commonly affected, but it can also damage other parts of the body.

Symptoms of Rheumatoid arthritis

Swollen joints
Pain in the joints
Fatigue
Fever
Weight loss
Morning stiffness
 

Causes of Rheumatoid arthritis

The exact cause of rheumatoid arthritis is unknown.

Risk factors of Rheumatoid arthritis

More common in women
Between the ages of 40 and 60
Cigarette smoking
Family history
 

Complications of Rheumatoid arthritis

Carpal tunnel syndrome
Heart problems
Lung disease
Deformities
Osteoporosis
 

Diagnosis of Rheumatoid arthritis

Diagnosis of Rheumatoid arthritis involves the following tests:

Physical exam
Blood tests
X-rays
 

Precautions & Prevention of Rheumatoid arthritis

You can gain control of rheumatoid arthritis and improve your chances by taking the following steps:

Get the treatment early
Avoid exercising tender, injured or severely inflamed joints
Rest when you need to
Use a cane in the hand opposite a painful hip or knee

Reactive Arthritis!

MD - Acupuncture, Diploma In Accupuncture, Advanced Diploma In Accupuncture
Acupuncturist, Delhi

Reactive Arthritis 

Treatment of Reactive arthritis
Homeopathic Treatment of Reactive arthritis
Acupuncture & Acupressure Treatment of Reactive arthritis
Psychotherapy Treatment of Reactive arthritis
Conventional / Allopathic Treatment of Reactive arthritis
Surgical Treatment of Reactive arthritis
Dietary & Herbal Treatment of Reactive arthritis
Other Treatment of Reactive arthritis
What is Reactive arthritis
Symptoms of Reactive arthritis
Causes of Reactive arthritis
Risk factors of Reactive arthritis
Complications of Reactive arthritis
Lab Investigations and Diagnosis of Reactive arthritis
Precautions & Prevention of Reactive arthritis
Treatment of Reactive arthritis 

Homeopathic Treatment of Reactive Arthritis

Homeopathy improves immunity, heals joints and relieves pain, inflammation and other complaints. It treats the person as a whole. Treatment is constitutional. It means that homeopathic treatment focuses on the patient as a person, as well as his pathological condition. It balances the energy system, improves immunity and body functions. It naturally cures the root cause of disorder. Some of the homeopathic medicines that can be used for treatment of Reactive Arthritis are:

Bryonia
Ledum
Silicea
Calcarea
Guaj
Kali
Merc
Phyto

Acupuncture and Acupressure Treatment of Reactive Arthritis

Acupuncture relieves by improving the physiological function of the organs and organ system. In acupuncture therapist will first diagnose the case on the basis of energy system or chi blockage as well as on the basis of status of five elements. On this basis certain disease specific acupoints are selected and stimulated.

Psychotherapy and Hypnotherapy Treatment of Reactive Arthritis

Psychotherapy and hypnotherapy can help in stress relief. They can help in better coping and early relief.

Conventional / Allopathic Treatment of Reactive arthritis

Allopathic Treatment of Reactive arthritis involves the following medications:

Nonsteroidal anti-inflammatory drugs (NSAIDs)
Corticosteroids
Tumor necrosis factor (TNF) blockers

Dietary & Herbal Treatment of Reactive arthritis

Limit your intake of sugar, fat, cholesterol and alcohol
Eat plenty of fresh fruits and vegetables
Eat whole grains and lean protein
 

Other Treatment of Reactive arthritis

Strengthening exercises helps in developing the muscles around your affected joints, which increase the joint’s support.

What is Reactive arthritis

Reactive arthritis is joint pain and swelling triggered by an infection. The joints in your knees, ankles and feet are the usual targets of reactive arthritis. It develops shortly after a bowel, genital tract or, less frequently, throat infection.

 

Symptoms of Reactive arthritis

Joint pain in your knees, ankles and feet
Pain and swelling at the back of your ankle
Swollen toes or fingers, which may look like sausages
Pain in your low back or buttocks
Pain or burning during urination
Inflammation of the prostate gland
Inflammation of the cervix
Eye inflammation
Mouth ulcers
Skin rashes

Causes of Reactive arthritis

Numerous bacteria can cause reactive arthritis. The most common ones include:

Chlamydia
Salmonella
Shigella
Yersinia
Campylobacter
 

Risk factors of Reactive arthritis

Hereditary factors
Common in men
Age 20 to 40 years
 

Diagnosis of Reactive arthritis

Diagnosis of Reactive arthritis involves the following tests:

Physical examination
Blood tests
Joint fluid tests
Urine and Stool test
X-rays of your joints
 

Precautions & Prevention of Reactive arthritis

Cooked your food properly
Make sure your food is stored at proper temperatures

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण - Cervical Cancer Symptoms !

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण  - Cervical Cancer Symptoms !

केवल महिलाओं को होने वाले प्रमुख कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है. ये कैंसर महिलाओं में योनि से गर्भाशय की ओर एक संकीर्ण खुलाव जिसे गर्भाशय ग्रीवा भी कहते हैं, में जन्म लेता है. महिलाओं में इसकी गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यह दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है. भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु में सर्वाइकल कैंसर दूसरा कारण रहा है. दुर्भाग्य से, भारत जैसे विकासशील देशों में जागरूकता न होने कारण अधिकतर महिलाओं में यह कैंसर अग्रिम चरणों में ही सामने आता है. हालांकि इंस्पेक्शन स्क्रीनिंग्स, जो प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर सकते हैं, के आगमन से सर्वाइकल कैंसर के मामले कम दर्ज किये जा रहे हैं. आइए सर्वाइकल के लक्षणों को जानें.

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के लक्षण

कैंसर से पहले कोशिकाओं में होने वाले बदलावों और सर्विक्स के शुरूआती कैंसर आम तौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाते. इस वजह से पैप और एचपीवी टेस्ट्स की नियमित स्क्रीनिंग करवाते रहने से कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाया जा सकेगा और कैंसर को बनने या बढ़ने से भी रोका जा सकता है. बीमारी के अग्रिम चरण में होने वाले संभावित लक्षण हैं –
* असामान्य या अनियमित योनिक रक्तस्त्राव
* संभोग के वक़्त दर्द
* योनिक स्त्राव
* नियमित मासिक धर्म चक्र के बीच असामन्य रक्तस्त्राव
* यौन संभोग के दौरान रक्त स्त्राव
* पेल्विक एग्ज़ाम के बाद
* मेनोपॉज़ के बाद रक्तस्त्राव.
श्रोणिक दर्द जो मासिक धर्म चक्र से सम्बंधित नहीं है. भारी और असामान्य स्त्राव जो तरल, गाढ़ा और बदबूदार हो सकता है. मूत्रत्याग करने में दर्द. यह लक्षण किसी और स्वास्थ्य समस्या के कारण भी हो सकती हैं. कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से अवश्य सलाह करें.

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के कारण

कैंसर असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन और विकास के कारन होता है. असामान्य कोशिकाओं की दो परेशानियां होती हैं: ये मरते नहीं ये विभाजित होते रहते हैं ये असामन्य कोशिकाएं इस वजह से एकत्रित होकर ट्यूमर बन जाती हैं. सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में असामन्य कोशिकाओं के बन जाने से होता है. हालांकि, निम्न लिखित कुछ कारक हैं जो सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम बढ़ाते हैं:

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस

यह एक यौन संचारित वायरस है. इसके कई प्रकार होते हैं जिनमें से कम से कम 13 सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं.
असुरक्षित यौन सम्बन्ध: सर्वाइकल कैंसर का कारण बनने वाले HPV के प्रकार लगभग हर बार संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से फैलते हैं. जो महिलाएं एक से अधिक साथियों के साथ यौन संबंध बना चुकी हैं या जो कम उम्र में यौन सम्बन्ध बना चुकी होती हैं, उनमें इस कैंसर के होने का जोखिम ज़्यादा होता है.

धूम्रपान: धूम्रपान कई कैंसर के जोखिम को बढ़ता है.

कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकती है.
दीर्घकालिक मानसिक तनाव: जो महिलाएं लम्बे समय तक तनाव के उच्च दर का अनुभव करतीं हैं उनमें HPV से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है.

बहुत छोटी उम्र में गर्भधारण करना: जो महिलाएं 17 वर्ष की उम्र से पहले गर्भधारण कर लेती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर के बनने का जोखिम ज़्यादा होता है (उन महिलाओं की तुलना में जो 25 वर्ष के बाद पहली बार गर्भधारण करती हैं).

बार बार गर्भधारण करने से: जो महिलाएं तीन से ज़्यादा बच्चों को जन्म दे चुकी हैं उनमें इस बीमारी के होने का जोखिम ज़्यादा होता है.
गर्भनिरोधक गोलियां: ज़्यादा समय तक गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग भी कैंसर के जोखिम को बढ़ता है.
अन्य यौन संचारित बीमारियां: जो महिलाएं क्लैमाइडिया, सूजाक या उपदंश से संक्रमित हो चुकी हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर का जोखिम अधिक होता है. सामाजिक-आर्थिक स्थिति: कई देशों में हुए अध्ययनों में पाया गया है कि जो महिलाएं वंचित इलाकों में रहती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम ज़्यादा होता है.
 

Suffering from Headache?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MD - Ayurveda
Ayurveda, Nashik
Suffering from Headache?

Suffering from Headache? You should know this.

(Ayurveda Tips to treat Headache)

Headache is pain & aches in the region of forehead, scalp, behind eyes, temple & neck, it can be mild, moderate to severe & can be acute or chronic in origin. Nature of the pain can be throbbing, squeezing, pulsating, constant, unrelenting, or intermittent. In ayurveda this is called as Shirashul. Primary reason of Shirashul is vitiated vata dosha, which gets combined with other vitiated doshas, accumulates in the region of head & causes pain. In ayurveda classic 11 types of primary headaches (Shirashul) are described. According to world health organization (WHO) headache is simple form of nervous disease & half of the population in the world suffers from headache at least once in a year.

There are many reasons & types of Headache but this is classified in 2 main types- Primary Headache & secondary headache.

Primary headache is due to pathology in the pain sensitive structure of head.  Secondary headache is symptom due to any other disease present in the body eg.-headache due to sinusitis or dental carries.

Most common reasons of primary headache are - Migraine, Cluster Headache & Tension Headache.

Migraine-

Migraine is excruciating or throbbing pain in the half of the head or all over the head. In ayurveda Migraine can be compared with Ardhavbhedak & Vata vitiated with pitta dosha is the main reason behind it. Modern science is unable to describe etiology (reasons) of this disease but in ayurveda classics some cause are mentioned like- excess alcohol & smoking, suppressing natural urges, late night sleeping, sleeping in a day, long time work in smoke & dust. Migraine comes in form of attack which can last for 45 minutes to 24 hours. After attack person feels very normal but during migraine attack pain is so severe that one cannot able to do any work. Ayurveda classics compare this pain like scorpion bite or someone hitting head with hammer. This pain can be followed by nausea & vomiting.  Migraine can be with aura or without aura. Aura is preliminary subjective symptoms before headache, like ringing in ears or weakness or visualization of special things in light. Headache is followed by aura in 30% population suffering from migraine. Photophobia, loss of concentration, tinnitus in ears etc. are some associated symptoms of Migraine.

Tension headache-

Tension headache is most common form of headache. Yearly many people suffer from this type of headache. This is continuous or constant type of pain in the scalp or forehead which can last for few minutes to one week. Stress, improper or less sleep in night, heavy work load, travel and emotional stress are some precipitating factors for tension headache. Though reasons are not known but in ayurveda Vata dosha prakopa is primary reason. Due to precipitating factors mentioned above muscle surrounding head becomes stiff & contracts which causes continuous pain in that region. Tension headache is totally harmless type of headache but quality of work & life may get affected due to this.

Cluster headache-

Cluster headache occurs in cluster pattern hence this name is given. This headache come in groups i.e. It occurs daily at same time for some weeks to month then there is symptom free period of 3 to 4 months, after this 3- 4 months same pattern occurs. In this type, headache is unilateral affecting one side of head, cheek, eyebrow & eye, also associated with redness of eye, watering of eye & jaw pain. Nature of pain is pulsating, intermittent & severity of pain is moderate to severe, which can be followed by nausea & vomiting. This type of headache is not associated with aura. Causes of cluster headache are unknown but some scholars believe that it may be due to a sudden release of the chemicals histamine and serotonin in the brain. Smoking, Alcohol, disturbed biological clock, stress are triggering factors for cluster headache.

Management of Shirashul/ Headache-

In moderns medicine some NSAID’s & antidepressants are used, also triptans & ergotamine class drugs are used to treat headache but due to their side effects & cost, these medicines are not advised to take for longer duration.

Ayurveda believes in treating root cause of disease so there is no any pain killer medication used. Main reason of headache (Shirashul) Vata & associated doshas are treated with the safe herbal medicines like bhringaraja(eclipta alba), rasona (allium saivum), vasa, Shirish, ardrak(Ginger).  If these doshas are accumulated in excess quantity in body then body purification with Panchkarma’s like Virechan, basti, Nasya, Shirodhara can be done. There are many medicines in ayurveda for shiroraga (diseases of head) which can be used according to person’s digestive capacity (agni), dosha prakopa, body constitution (prakruti) etc.

While treating Shirashul, Yogasana & Pranayama also works very well with the ayurveda treatment. Anumloma-Viloma Pranayama & Tratak is very helpful for relieving symptoms of Shirashul.

Tips to avoid Headache- (diet advice for headache)

-Stop eating food which aggravates vata dosha like- horse gram, dried food, packaged & refrigerated products, cold drinks, icecream etc.

- Do not eat spicy & heavy to digest foods like pickle, chillie products, sago etc.

-also avoid fermented food like bakery products- bread, Idli-dosa, cake.

- Avoid eating fast food like pizza, burger, vadapav, missal etc.

-Do not suppress natural urges like urination, defecation etc.

-Avoid cold breeze which comes from east side, especially while riding bike.

-Avoid excess alcohol, tobacco & smoking; also avoid late night parties or study.

- Avoid stress either physical or emotional. Avoid habit of sleeping in a day time.

-Follow Yoga practice & do regular Anuloam-viloam pranayama & Tratak to avoid & cure any kind of headache.

 

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MD - Bio-Chemistry, MF Homeo (London), DHMS (Diploma in Homeopathic Medicine and Surgery), BHMS
Homeopath, Kolkata
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