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I. P. C Heart Care Centre

Dietitian/Nutritionist Clinic

#103/104 A, 1st Floor, Prathamesh Building, Senapati Bapat Marg, Raghuvanshi Mill, Borivali West. Land Mark: Sidharth Hotel, Mumbai Mumbai
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We are dedicated to providing you with the personalized, quality health care that you deserve....more
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More about I. P. C Heart Care Centre
I. P. C Heart Care Centre is known for housing experienced Dietitian/Nutritionists. Dt. Radhika Kalani, a well-reputed Dietitian/Nutritionist, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Dietitian/Nutritionists recommended by 98 patients.

Timings

MON-SAT
10:00 AM - 06:00 PM

Location

#103/104 A, 1st Floor, Prathamesh Building, Senapati Bapat Marg, Raghuvanshi Mill, Borivali West. Land Mark: Sidharth Hotel, Mumbai
Borivali West Mumbai, Maharashtra
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Doctor in I. P. C Heart Care Centre

Dt. Radhika Kalani

MSc Clinical Nutrition and Health
Dietitian/Nutritionist
5 Years experience
500 at clinic
Available today
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I am cycling daily 40 min almost 10 km. At starting I lost 3 kg in 3 week but now weight increase more than 11.3 kg .my diet is also low please help.

M.Sc - Dietitics / Nutrition, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Dietitian/Nutritionist, Vadodara
I am cycling daily 40 min almost 10 km. At starting I lost 3 kg in 3 week but now weight increase more than 11.3 kg ....
Hello! you can do 20 minutes walking in the morning and 20 minutes cycling in the evening have protein rich diet .avoid fatty foods and excess sugars in your diet. Thank you.

यूरिन इन्फेक्शन का इलाज - Urin Infection Ka Ilaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
यूरिन इन्फेक्शन का इलाज - Urin Infection Ka Ilaj!

देर तक पेशाब रोकने से पेशाब के थैली (ब्लैंडर) में बैक्टीरिया जमा हो जाने से पेशाब में कई तरह के इन्फेक्शन हो जाते हैं इसे ही यूरिन इन्फेक्शन या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या यूटीआई (Urinary Tract InfectionUTI) कहते हैं. अधिकांश यूरिन इन्फेक्शन बैक्टीरिया के कारण होता है पर कभी-कभी या फंगस या वायरस द्वारा भी फैलता है. पुरुषों के अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. यूरिन इन्फेक्शन का असर मूत्राशय, किडनी व मूत्र नली पर भी होता है. यूरिन इन्फेक्शन बने रहने से किडनी खराब भी हो सकती है. अतः यूरिन इन्फेक्शन को नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए बल्कि इसका उचित इलाज किया जाना चाहिए. आइए हम यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण, कारण व इलाज पर चर्चा करते हैं.

यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण-

यूरिन इन्फेक्शन में कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं. यूरिन इन्फेक्शन में पेशाब में जलन के साथ-साथ पेशाब करते समय दर्द भी हो सकता है. यूरिन इन्फेक्शन में बार-बार पेशाब या थोड़ा-थोड़ा पेशाब होता है या पेशाब करके आने पर फिर ऐसा लगता है कि फिर पेशाब होगा. यूरिन इन्फेक्शन में पेशाब में बदबू भी आ सकती है. कभी-कभी पेशाब में खून भी आता है. पेशाब का रंग गाढ़ा पीला हो जाता है. यूरिन इन्फेक्शन में पेट या नाभि के नीचे दर्द भी हो सकता है तथा इन्फेक्शन का असर किडनी तक पहुँच जाने पर तेज बुखार भी आ सकता है.

यूरिन इन्फेक्शन का कारण-
यूरिन इन्फेक्शन होने के कई कारण हैं. पेशाब आने पर तुरत पेशाब नहीं करना व पेशाब को रोके रखना इसका मुख्य कारण है. पेशाब रोके रखने से पेशाब के ब्लैंडर में बैक्टीरिया जमा हो जाता है और फिर इस बैक्टीरिया से संक्रमण या इन्फेक्शन हो जाता है. यूरिन इन्फेक्शन के अन्य कारण भी हैं. पानी कम पीने से भी यूरिन इन्फेक्शन होता है. इसके अलावा प्रोजेस्ट्रोन हर्मोन का बढ़ने या एस्ट्रोजन हर्मोन का कम होने से भी यूरिन इन्फेक्शन होता है. रीढ़ की हड्डी स्पाइनल कार्ड में चोट लागने से भी यूरिन इन्फेक्शन होता है. मधुमेह के मरीज को भी यूरिन इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक रहती है. इसके अलावा यूरिन इन्फेक्शन आनुवांशिक भी होता है. जननांग क्षेत्र में साफ-सफाई का ध्यान न रखना भी यूरिन इन्फेक्शन का कारण होता है. लड़कियों या महिलाओं में महवारी के समय यूरिन इन्फेक्शन के संभावना बढ़ जाती है.

यूरिन इन्फेक्शन का इलाज
बेकिंग सोडा:
- यूरिन इन्फेक्शन में आधा से एक चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास पानी में मिलाकर दिन में एक या दो बार पीना चाहिए. इससे शरीर में एसिड का लेवल बना रहता है व पेशाब का इन्फेक्शन भी दूर होता है.

खूब पानी पीना: - यूरिन इन्फेक्शन में खूब पानी पीना चाहिए. अधिक पानी पीने के कारण अधिक पेशाब आने से पेशाब के थैली (ब्लैंडर) का बैक्टीरिया पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर आ जाते हैं और इन्फेक्शन भी ठीक हो जाता है.

छाछ या दही: - यूरिन इन्फेक्शन में छाछ पीना फायदेमंद होता है. छाछ पीने से ब्लैंडर में पनप रहे बैक्टीरिया बाहर हो जाते हैं. छाछ के स्थान पर दही भी लिया जा सकता है.

क्रेनबेरी (Cranberry): - क्रेनबेरी फल का जूस यूरिन इन्फेक्शन में बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली होता है. क्रेनबेरी फल का जूस को सेब के जूस के साथ मिलाकर पीया जा सकता है. इसके प्रयोग से कुछ ही दिन में इन्फेक्शन ठीक हो जाता है.

अन्नानास: - अन्नानास में ब्रोमेलाइन नमक एक एंजाइम होता है जो किडनी व पेशाब के इन्फेक्शन में फायदेमंद होता है. अतः यूरिन इन्फेक्शन में रोज अन्नानास खाना चाहिए या अन्नानास का जूस पीना चाहिए.

सेब का सिरका: - एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर अच्छी तरह मिला लेना चाहिए. अच्छे परिणाम के लिए इसमें नींबू का रस व शहद भी मिला लेना चाहिए. फिर इस सिरका को रोज दो बार पीना चाहिए. इससे इन्फेक्शन दूर होता है.

लहसुन: - लहसुन जीवाणुरोधी माने जाते हैं. अतः इसके सेवन से बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सकता है. यूरिन इन्फेक्शन में लहसुन के 3-4 कली खाने चाहिए. लहसुन के दुर्गंध से दिक्कत हो तो लहसुन का पेस्ट बनाकर इसे मक्खन के साथ प्रयोग किया जा सकता है.

प्याज: - प्याज शरीर से फ्री रेडिकल्स व विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. इसलिए यूरिन इन्फेक्शन में सलाद के रूप में या जूस के रूप में प्याज का सेवन से इन्फेक्शन जल्द ठीक होता है.

खट्टे फल: - यूरिन इन्फेक्शन में ब्लैंडर के बैक्टीरिया को साइट्रिक एसिड द्वारा दूर किया जा सकता है. अतः यूरिन इन्फेक्शन में खट्टा फल नींबू, संतरा इत्यादि खूब खाना चाहिए. नींबू पानी पीने से भी जल्दी लाभ होता है.


नोट: -
यूरिन इन्फेक्शन यदि जल्द ठीक न हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि चिकित्सक के परामर्श से उचित इलाज कराना चाहिए क्योंकि इन्फेक्शन बने रहने से अन्य बीमारी या किडनी पर प्रभाव भी हो सकता है. इन्फेक्शन किडनी तक पहुँच जाने पर किडनी खराब भी हो सकती है.

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जामुन के फायदे - Jamun Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
जामुन के फायदे - Jamun Ke Fayde!

देखने में काला लेकिन बेहद चमकदार लगने वाला जामुन खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होता है. इसके साथ ही इसमें कई तरह के औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. भले ही इसका सार्वाधिक लोकप्रिय नाम जामुन है लेकिन इसको कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी इत्यादि. ये स्वभाव में अम्लीय और कसैली लेकिन पक जाने पर मीठी होती है. इसलिए पकने के बाद इसका स्वाद खाने में मीठा होता है. जामुन को नमक के साथ खाने पर इसका स्वाद और बेहतरीन हो जाता है. जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज भी मौजूद होते हैं. जामुन में खनिजों की अधिक होती है. इसके बीज में आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है. आइए निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से जामुन के फ़ायदों को जानें.

पेट और पाचन शक्ति के लिए-

जामुन स्वाद में तो बेहतरीन है ही लेकिन इसके साथ ही ये कई अन्य फायदे भी दिलाता है. पेट के लिए ये एक टॉनिक की तरह काम करता है. ये आपका पाचनशक्ति को बढ़ाकर आपके पेट के कई विकारों को दूर करने का काम करता है.

मधुमेह में-
मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. मधुमेह के मरीजों को जामुन के बीजों सुखाने के बाद उसे पीसकर उनका सेवन करना चाहिए. ऐसा करने से उनके शुगर का स्तर सामान्‍य बना रहता है.

कैंसर रोधी फल के रूप में-
जामुन के फल में कैंसर रोधी गुण भी मौजूद रहते हैं. कई विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि कैंसर के उपचार के लिए किए जाने वाले कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के बाद जामुन खाने से काफी लाभ मिलता है.


पथरी के उपचार में-
जामुन खाने से पथरी में फायदा होता है. जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है. लीवर के लिए जामुन का प्रयोग फायदेमंद होता है. कब्ज और पेट के रोगों में भी जामुन बहुत फायदेमंद है.

मुंह के छाले में-
मुंह में होने वाले छालों से अक्सर कई लोग परेशान रहते हैं. लेकिन छालों को दूर करने के लिए यदि आप जामुन के रस का इस्तेमाल करें तो आपको इससे काफी लाभ मिलता है. जामुन के सीजन में आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

दस्त या खूनी दस्त में लाभकारी-
यदि आपको दस्त या खूनी दस्त की समस्या है तो आप इससे जामुन खाकर बच सकते हैं. इस दौरान आप जामुन का सेवन करें तो काफी लाभ मिलेगा. दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाता है.

मुंहासों को दूर करने में-
मुंहासे के होने से चेहरे की सुंदरता में कमी आती है इसीलिए लोग इसे दूर करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. इसके लिए यदि आप जामुन की गुठलियों का इस्तेमाल करना चाहें तो इन्हें सुखाकर पीस लीजिए. फिर इस पाउडर में रात को सोने से पहले गाय का दूध मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएँ. इसके कुछ देर बाद इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धो लीजिए.

आवाज के परेशानियों के लिए-
यदि आपको भी कभी आवाज से संबन्धित कोई परेशानी होती है तो आप इसे दूर करने के लिए अगर आवाज फंस गई हो या फिर बोलने में दिक्कत हो रही हो तो जामुन की गुठली के काढे़ से कुल्ला कीजिए. आवाज को मधुर बनाने के लिए जामुन का काढा बहुत फायदेमंद है.

दाँतों की मजबूती के लिए-
दांतों के मजबूती के लिए भी हम जामुन के छाल का उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए आपको जामुन की छाल को एकदम बारीक पीसकर प्रत्येक दिन मंजन करना होगा. ऐसा करने से आपके दांत मजबूत और रोग-रहित बनते हैं.

एसिडिटी के उपचार में-
एसिडिटी आजकल एक आम समस्या है. जब भी आपको गैस से कोई परेशानी हो तो आप इसे दूर करने के लिए जामुन का के बीज का भूने हुए चूर्ण को काला नमक के साथ लें. ऐसा करने से आप गैस की समस्या से राहत पा सकेंगे.

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जामुन खाने के फायदे - Jaamun Khane Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
जामुन खाने के फायदे - Jaamun Khane Ke Fayde!

देखने में काला लेकिन बेहद चमकदार लगने वाला जामुन खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होता है. इसके साथ ही इसमें कई तरह के औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. भले ही इसका सार्वाधिक लोकप्रिय नाम जामुन है लेकिन इसको कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी इत्यादि. ये स्वभाव में अम्लीय और कसैली लेकिन पक जाने पर मीठी होती है. इसलिए पकने के बाद इसका स्वाद खाने में मीठा होता है. जामुन को नमक के साथ खाने पर इसका स्वाद और बेहतरीन हो जाता है. जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज भी मौजूद होते हैं. जामुन में खनिजों की अधिक होती है. इसके बीज में आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है. आइए निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से जामुन के फ़ायदों को जानें.

पेट और पाचन शक्ति के लिए-
जामुन स्वाद में तो बेहतरीन है ही लेकिन इसके साथ ही ये कई अन्य फायदे भी दिलाता है. पेट के लिए ये एक टॉनिक की तरह काम करता है. ये आपका पाचनशक्ति को बढ़ाकर आपके पेट के कई विकारों को दूर करने का काम करता है.

मधुमेह में-
मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. मधुमेह के मरीजों को जामुन के बीजों सुखाने के बाद उसे पीसकर उनका सेवन करना चाहिए. ऐसा करने से उनके शुगर का स्तर सामान्‍य बना रहता है.

कैंसर रोधी फल के रूप में-
जामुन के फल में कैंसर रोधी गुण भी मौजूद रहते हैं. कई विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि कैंसर के उपचार के लिए किए जाने वाले कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के बाद जामुन खाने से काफी लाभ मिलता है.

पथरी के उपचार में-
जामुन खाने से पथरी में फायदा होता है. जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है. लीवर के लिए जामुन का प्रयोग फायदेमंद होता है. कब्ज और पेट के रोगों में भी जामुन बहुत फायदेमंद है.

मुंह के छाले में-
मुंह में होने वाले छालों से अक्सर कई लोग परेशान रहते हैं. लेकिन छालों को दूर करने के लिए यदि आप जामुन के रस का इस्तेमाल करें तो आपको इससे काफी लाभ मिलता है. जामुन के सीजन में आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

दस्त या खूनी दस्त में लाभकारी-
यदि आपको दस्त या खूनी दस्त की समस्या है तो आप इससे जामुन खाकर बच सकते हैं. इस दौरान आप जामुन का सेवन करें तो काफी लाभ मिलेगा. दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाता है.

मुंहासों को दूर करने में-
मुंहासे के होने से चेहरे की सुंदरता में कमी आती है इसीलिए लोग इसे दूर करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. इसके लिए यदि आप जामुन की गुठलियों का इस्तेमाल करना चाहें तो इन्हें सुखाकर पीस लीजिए. फिर इस पाउडर में रात को सोने से पहले गाय का दूध मिलाकर इसे चेहरे पर लगाएँ. इसके कुछ देर बाद इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धो लीजिए.

आवाज के परेशानियों के लिए-
यदि आपको भी कभी आवाज से संबन्धित कोई परेशानी होती है तो आप इसे दूर करने के लिए अगर आवाज फंस गई हो या फिर बोलने में दिक्कत हो रही हो तो जामुन की गुठली के काढे़ से कुल्ला कीजिए. आवाज को मधुर बनाने के लिए जामुन का काढा बहुत फायदेमंद है.

दाँतों की मजबूती के लिए-
दांतों के मजबूती के लिए भी हम जामुन के छाल का उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए आपको जामुन की छाल को एकदम बारीक पीसकर प्रत्येक दिन मंजन करना होगा. ऐसा करने से आपके दांत मजबूत और रोग-रहित बनते हैं.

एसिडिटी के उपचार में-
एसिडिटी आजकल एक आम समस्या है. जब भी आपको गैस से कोई परेशानी हो तो आप इसे दूर करने के लिए जामुन का के बीज का भूने हुए चूर्ण को काला नमक के साथ लें. ऐसा करने से आप गैस की समस्या से राहत पा सकेंगे.

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सफ़ेद तिल के फायदें - Saphed Til Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
सफ़ेद तिल के फायदें - Saphed Til Ke Fayde!

तिल का वैज्ञानिक नाम सेसम इण्डिकम है. सफ़ेद तिल के बीज के स्वास्थ्य लाभ विटामिन, खनिज, प्राकृतिक तेलों और कार्बनिक यौगिकों सहित कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, फास्फोरस, मैंगनीज, तांबा, जस्ता, फाइबर, थायामिन, विटामिन बी 6, फोलेट, प्रोटीन और ट्रिप्टोफैन आदि प्रदान करते हैं. आइए सफ़ेद तिल के फायदों को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से जानें.

मधुमेह के नियंत्रण में-
तिल के बीज में कई तरह के पोषक तत्त्व मौजूद होते है, उसमे से एक तत्त्व मैग्नीशियम है जो डायबिटीज से लड़ने में आपको मदद करती हैं. टाइप 2 डायबिटीज से लड़ने में तिल के बीज का तेल डायबिटीज की दवा के प्रभाव को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. यह दवा की कार्यक्षमता में सुधार और शरीर में इंसुलिन और ग्लूकोज के लेवल को प्रबंधित करता है जिससे डायबिटीज के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.

एनीमिया से दिलाए राहत-
तिल के बीज में आयरन की प्रचुरता होती है, जो एनीमिया से पीड़ित रोगियों के लिए इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. तिल के बीज में सेसमोल नामक आर्गेनिक गुण होता है. यह रेडिएशन के हानिकारक प्रभावों से डीएनए की सुरक्षा करता है.

चिंता दूर करने में-
तिल के बीज में पाए जाने वाले मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स मांसपेशियों के कार्य को प्रबंधित करते हुए एक एन्टीस्पैस्मोडिक के रूप में कार्य करते हैं. विटामिन बी-1 को शिथिल करने वाले गुण होते हैं जो तंत्रिका के कार्यों में सहायता करते हैं. इस विटामिन की कमी से मसल्स क्रैंप और डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार हो सकती है. ट्रिप्टोफैन एक आवश्यक अमीनो एसिड है जो दर्द को कम कर देता है और नींद के पैटर्न और मूड को नियंत्रित करता है.

ह्रदय के लिए-
सफेद तिल के बीज का तेल में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी- इंफ्लेमेटरी गूण होता है जो धमनियों को सख्त होने से रोकता है, जो आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है.

हाइपरटेंशन दूर करने में-
सफेद तिल के के बीज में मौजूद प्राकृतिक तेल हाई ब्लड प्रेशर को प्रबंधित करने में मदद करते हैं. इससे कार्डियोवास्कुलर सिस्टम से तनाव कम होता है और विभिन्न हृदय समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. इसके अलावा, मैग्नीशियम हाइपरटेंशन को कम करने के लिए जाना जाता है और इसमें आवश्यक खनिज से भरे हुए हैं. जिसे सेसामोल कहा जाता है, जिसमें एंटी-एथ्रोजेनिक गुण होते हैं.

गठिया के उपचार में-
इसमें कॉपर होता है, एक मिनरल जो एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है. इसके अलावा, यह मिनरल ब्लड वेसल्स, हड्डियों और जॉइंट को ताकत प्रदान करता है. तिल के बीज में पाए जाने वाला मैग्नीशियम, अस्थमा और अन्य श्वसन समस्या को ठीक करने में मदद करता है.

पाचन को बेहतर करने में-
सफेद तिल में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को सही करता है, क्योंकि यह इटंस्टाइन को अपने कार्य सुचारू रूप से करने में मदद करता है. यह कब्ज जैसी समस्या को ठीक कर सकता है. फाइबर धमनियों और रक्त वाहिकाओं से खतरनाक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल का दौरा और स्ट्रोक आदि होने की सम्भावना कम हो जाती है.

हड्डियों की मजबूती के लिए-
तिल के बीज में जिंक, कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. यह मिनरल्स नई हड्डियों को बनाने और मजबूत करने में उनकी मरम्मत करने में मदद करते हैं.

बालों के लिए लाभकारी-
तिल में मौजूद ओमेगा-3, ओमेगा-6 और ओमेगा-9 जैसे आवश्यक फैटी एसिड होते हैं जो बालों को बढ़ाने में मदद करते हैं. तिल के बीज का तेल बालों को कंडीशन करता है और खोपड़ी को स्वस्थ रखता है, इस तरह से ये बालों को लंबा करने में मदद करता है. गर्म तिल के तेल के साथ नियमित मालिश करने से रक्त परिसंचरण बढ़ता है.

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I am in my thirties needed a diet plan. which can be easily followed, since I am away from my home?

Masters In Clinical Nutrition & Dietitics
Dietitian/Nutritionist, Bangalore
I am in my thirties needed a diet plan. which can be easily followed, since I am away from my home?
Hello user sure ,we will help you we have a diet plan for bachelor's, which not only help to stay fit and healthy but also easy to follow. But before prescribing any thing we need some information like. Vitals.purpose. Medical history. Family history. Occupation.physical activity. Daily routine and many more so, if you want to contact us, you can contact us directly thru Lybrate.

How Slowing Down Your Life Will Make You Healthier & Happier

M.Ed., M.A - English, M.Sc - Psychology
Psychologist, Hyderabad
How Slowing Down Your Life Will Make You Healthier & Happier

The pressing urge to do loads in a short span of time, to plan life in a day, to see dreams unfurl into reality at the slightest of efforts inundates millions across the world. It is neither about the goals one sets before oneself nor about rational expectations arising from the awareness of one's capabilities. The problem runs deeper. Happiness and health are two elemental factors discerning the quality of your life. Happiness is directly proportional to your personal health. Neglecting one will affect the other. The best way to cope in the given situation is to take a detour from the overriding rat race. While others are in a hurry, you must slow down and care to nurture your mind and body.

Take a look at the benefits of slowing down:-

1. It will give you ample time to interact- Moving out of your comfort zone in order to exchange ideas with colleagues or friends plays an eminent role in shaping your personality. Interaction provides a person with food for thought. Therefore slowing down a little will encourage a free flow of countless ideas.

2. It will encourage you to pursue a hobby- Hobbies keep you alive. You should take out time to pursue an interest. This is a tried and tested way of rekindling happiness in one's life.

3. It will make you attentive towards others- A fast life shelters you within its clutches. You fail to take note of the changes in and around you. Going slow will let you take care of your loved ones.

4. It will enable you to see your inimitability- Once you slow down, you'll find time to introspect and retrospect as well. A person can come to realize how unique he or she is in this vast scope of things.

5. It will improve your sex life- Dopamine is the chief chemical that regulates a person's sexual desires. Increased levels of stress can hamper the production of dopamine making you lax about sex. Taking an easy pace can add zing to your sex life.

6. It will keep your heart healthy- Being overly hyper about delay subjects you to the risk of heart diseases. You should never be frantic about plans; this can lead to high blood pressure or can even cause severe harm to your heart health.

Rectal Prolaps - Types & Treatment Of It!

MS - Ayurveda, BAMS
Ayurveda, Mumbai
Rectal Prolaps - Types & Treatment Of It!

With more than 50,000 cases every year in India alone, rectal prolapse has been a really complicated medical disorder which affects both men and women. However, women who are over the age of 50 years, can get affected with the disease with a much increased risk.

Rectal prolapse is a medical disorder which affects the rectum and slowly pushes through the anus. It is a serious medical issue which can become really serious if not treated the right way. So here are some important details about Rectal prolapse which will help you to combat the disease in a much better manner.

What is Rectal Prolapse?

Rectal prolapse is a serious medical condition in which the rectum of the affected person's starts to lose the system's normal attachments within the body by slowly pushing it out of the anus. Even though it does not any kind of serious life threatening medical disorder to the patient but it can be really embarrassing at times. Moreover, it will have a really serious negative impact on the quality of life of the person suffering from the problem.

If the person suffering from it has a age group of less than 10 years, then it can produce serious medical consequences like autism, dysfunctional behaviour or different psychiatric problems. Rectal prolapse is not always dependent on operation because it can be treated with the help of definitive treatment. 

Types of Rectal Prolapse - There are some different kinds of rectal prolapse. Here are the most common and serious types of rectal prolapse that affects the people in general.

● Internal prolapse: in this type of disorder the rectum starts to drop, but it has not yet been pushed through the anus completely. 

● Partial prolapse: in this type a part of the rectum tends to move through the anus.

● Complete prolapse: as the name suggests the entire rectum extends out through the anus in this case which is really embarrassing.

So here are the most common types of rectal prolapse that can be mostly seen among the people.

Treatment

Treatment of rectal prolapse needs to be mainly done if the type of prolapse is of the later two categories that we have mentioned. If the treatment is mild then one can wait to see under a doctor's recommendation and check whether it is recovering itself. If not then the doctor will surely opt for a treatment. A surgery is conducted through the abdomen area which can be either a open surgery or a incision. In worst cases, the rectum can be operated and pulled out to replace it back.

Causes And Symptoms Of Celiac Disease!

MS - General Surgery, Membership of The Royal College of Surgeons (MRCS), Diploma In Laparoscopy, FICS, FACRSI
Gastroenterologist, Salem
Causes And Symptoms Of Celiac Disease!

Also called gluten-sensitive enteropathy and celiac sprue, celiac disease is an autoimmune digestive disorder, wherein the consumption of gluten-based foods leads to damage of the tissues that line the small intestine. This hinders the ability of your body to absorb the essential nutrients from the foods you eat.

Causes
Under normal conditions, the immune system of the body offers protection against external intruders. When individuals diagnosed with celiac disease consume gluten-based foods, gluten resistant antibodies are formed by the immune system. This causes them to attack the linings around the intestines, thus causing irritation in the digestive tract and harming the villi (hair-like structures on the covering of the small intestine which absorb nutrients from the food). This impairs the nutrient absorbing capacity of the individual, thus increasing chances of malnourishment.

Symptoms
Celiac disease has symptoms that vary from patient to patient. Some of the common symptoms include:

  1. A severe skin rash called dermatitis herpetiformis.
  2. Digestive problems such as:
  3. Musculoskeletal problems such as bone and joint pain as well as muscle cramps
  4. Seizures
  5. Aphthous ulcers which are basically sores occurring in the mouth
  6. Tingling sensation in the legs which are caused by low calcium and nerve damage
  7. Growth issues in children since they cannot absorb the required amount of nutrients
  8. Irregular menstrual cycles

Other complications associated with celiac disease

  1. Miscarriage or Infertility
  2. Osteoporosis. This is a disease which weakens the bones and causes fractures. It is caused because of a deficiency of Vitamin D and calcium.
  3. Intestinal Cancer
  4. Other birth defects: Such as irregular spinal shape because of the deficiency of certain nutrients, especially folic acid.

Gastritis - Know Ayurvedic Approach For It!

BAMS, MD - Ayurveda
Ayurveda, Bangalore
Gastritis - Know Ayurvedic Approach For It!

Your stomach is lined with a mucosal membrane known as the mucosa and due to a variety of factors, it may become inflamed. This inflammation may cause a lot of problems and complications which are grouped under gastritis.
Symptoms of gastritis

  1. Upper abdominal pain,
  2. Hiccups
  3. Diarrhea,
  4. Nausea
  5. Heartburn
  6. Constipation
  7. Reduction of appetite
  8. Blood in the stool amongst the others

Gastritis can be quite debilitating and limiting for the people affected by it.

The Ayurveda approach
Ayurveda is a holistic form of medicine which takes into account many factors rather than just the physical disposition and symptoms that strives to cure the patients of the illness in a well-rounded manner. To this effect, Ayurveda helps you treat this problem with multiple angles of attack such as herbal medications and special cleansing therapies among many others. Let’s take a look at some of the methods usually employed in various combinations among the patients.

  1. Changes in dietConsuming any diet which has a lot of spicy and rich foods over prolonged periods may result in gastritis and other problems. If you already have gastritis, then certain other types of food also need to be excluded such as tea, coffee, sour foods, chilies and buffalo milk among others. These food groups are excluded as they may increase the acidity of the stomach which may cause an escalation of the problems. Some of the foods that may help with gastritis are grapes, pumpkins, bitter gourd, pomegranate, melons and cucumber, etc.
  2. Natural remedies: Some natural remedies that can be very effective in dealing with the symptoms of gastritis are mentioned below
    • Ajwain and rock salt have been an age old remedy in treating multiple gastrointestinal disorders and can be effective in this case as well.
    • Lemon juice is also very effective in treating symptoms or gastritis and also reducing inflammation.
    • Take amla, ginger, and licorice either in a raw form or as a dried option or mixed with other things such as milk or honey. These help in regulating and reducing the acidity within the stomach.
  3. Ayurvedic medications: There are many specialized Ayurvedic medications which can be used to treat gastritis such as:
    • Amalaki choorna
    • Avipattikara choorna
    • Sootashekhara rasa
    • Sukumara Ghrita
    • Dhatri Lauha

However, you should consult a specialist Ayurveda doctor as they can prescribe the correct medications for you after studying your specific symptoms.

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