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Salmonella Typhi Vaccine Health Feed

Vaccination

Dr. Mool Chand Gupta 96% (36436 ratings)
MD - Pulmonary, DTCD
Pulmonologist, Faridabad
Vaccination
Get flu and pneumonia vaccination for adults to prevent flu/pneumonia.
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Vaccination

Dr. Shripad Kulkarni 93% (965 ratings)
M.D.( Pediatrics), DCH
Pediatrician,
Vaccination

Vaccination is the best insurance against illness.

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Vaccine

Dr. Sanjeev Kumar 91% (435 ratings)
MD - Paediatrics, MBBS
Pediatrician, Faridabad
Vaccine

हेक्सावेलेंट वैक्सीन (1 में 6) 6 घटक वैक्सीन का एक संयोजन है जिसका उद्धेश्य डिप्थीरिया, टेटनस, हेमोफिलिस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, हेपेटाटिस बी और पोलियो से रोकथाम है |

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Hi Dr. I just want to know regarding typhoid vaccination for children. My child is 2 years old n her paediatrician advised that it is not necessary to take typhoid vaccine. So we skip the dose. Is it possible to take this vaccine at any age?

Dr. Shripad Kulkarni 93% (965 ratings)
M.D.( Pediatrics), DCH
Pediatrician,
It is better to take typhoid vaccine at any age after six months of age. For children bellow two years of age (tcv) polysaccharide conjugate vaccine should be used. After two years routine vi surface polysaccharide vaccine can be given every three years. Need for booster dose of tcv conjugate vaccine is not yet studied.
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I want a prescription for Zostavax vaccine & pneumovax23 vaccine as I want to get vaccinated.

Dr. Nirav Patel 88% (46 ratings)
MBBS,D.Ped., Jawaharlal Nehru Medical college, Belgaum , Boston University, UNITED STATES OF AMERICA
Pediatrician, Ahmedabad
I want a prescription for Zostavax vaccine & pneumovax23 vaccine as I want to get vaccinated.
You can get your vaccination done from local Pediatrician but as they are special vaccines you need to inform doctor prior going there as they have to arrange it specially for you.
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Mr. Vaccine and MMR Vaccine are same or not? I had given my child MMR Vaccine some time ago whether should I have to him give Mr. Vaccine also.

Dr. K.B Rangaswamy 91% (2158 ratings)
MD - Paediatrics, MBBS
Pediatrician, Tumkur
Mr. Vaccine and MMR Vaccine are same or not? I had given my child MMR Vaccine some time ago whether should I have to ...
MMR is superior to Mr. vaccine as it has additional mumps coverage which is also potentially dangerous infection.
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Vaccination In Pets

Dr. Santosh Giri 85% (39 ratings)
B.V.Sc
Veterinarian, Varanasi
Vaccination In Pets

Vaccination in dog

टीकाकरण की प्रकिया एक ऐसा उपाय है जिससे, कुत्तो में होने वाली कुछ प्रमुख विषाणु एवं जीवाणु जनित जानलेवा एवं लाइलाज, बीमारियों जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज तथा केनल कफ़ आदि से बचाव के लिए समय समय पर कुत्तों के शरीर में टीका लगाया जाता है,जिससे इन रोगों के खिलाफ रोगप्रतिरोधक क्षमता का शारीर में विकास हो जाता है और हमारा पालतू जानवर एक सिमित अवधि तक इन बिमारियों के घातक प्रभाव से बचा रहता है |

कुछ टीकाकरण संबंधी सामान्य प्रश्नो के जबाब -
 
१- क्या सभी उम्र के कुत्तो का टीकाकरण जरूरी होता है?
हाँ। आमतौर पर १. ५ महीने (४५ दिन) के उम्र से ऊपर सभी कुत्तो का नियमित समय पर टीकाकरण करना जरूरी होता है यदि किसी कारण वश नयमिति या कभी कराया ही न गया हो तो किसी भी उम्र से टीकाकरण शुरू किया जा सकता है। 

२. छोटे बच्चो को किस उम्र से टीका का पहली खुराक देना शुरू करना चाहिए?
४५ दिन के उम्र से ही टीके की पहली खुराक देना बेहद जरूरी होता है 

३. क्या सभी छोटे पप्स को टीकाकरण के पहले पेट के कीड़े देना जरूरी होता है -
हाँ। बहुत से परजीवी ऐसे होते है जो माँ के पेट से ही या दूध के जरिये से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाते है जिससे शरीर को कमजोर कर देते है और जब टीका लगाया जाता है तो कमजोरी के वजह से उतना अच्छा शरीर में प्रतिरोधक छमता का विकास नहीं हो पता इसलिए पहले ऐसे परजीवीओ को नष्ट करना जरूरी होता है 

४. क्या होता है टीकाकरण का सही उम्र और समयांतराल?
१. पहली खुराक -जन्म के ६ -८ सप्ताह के उपरांत(कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा हेतु) 
२. बूस्टर खुराक या दूसरी खुराक - प्रथम खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर दूसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 
३. तीसरी खुराक - रेबीज वायरस हेतु- प्रथम खुराक जन्म के ३ माह के उपरान्त। 
४. बूस्टर खुराक या चौथी खुराक - तीसरी खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर तीसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 

५. क्या बूस्टर खुराक देना जरूरी होता है या नहीं?
जन्म के साथ ही माँ से प्राप्त एंटीबाडीज और प्रथम दूध से मिलने वाली सुरछा कवच कुछ सप्ताह तक नवजात के खून में मौज़ूद रह करअनेको बीमारयों से सुरछा प्रदान करती है परन्तु समय के साथ साथ इनकी मात्रा बच्चे के शरीर में कम होने लगती है। जिससे बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए लगभग ४५ दिन के बाद टिका का प्रथम खुराक देते है यद्पि ये पता नहीं रहता की माँ से मिलने वाली सुरछा का असर किस स्तर का है जिससे आमतौर पर ये स्तर अधिक होने पर प्रथम खुराक से बच्चे के शरीर में टीकाकरण की गुणवत्ता को बाधित करती है, जो की पप्पस में रोगप्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने में असक्षम हो जाता है इसलिए कुछ सप्ताह बाद टीकाकरण के दूसरी खुराक दे कर टीकाकरण से रोगप्रतिरोधक क्षमता करने के उद्देश्य को प्राप्त करते है ऐसी दूसरी खुराक को बूस्टर खुराक कहते है। 

६. क्या है टीकाकरण की सही खुराक देने के मात्रा:
डॉग चाहे किसी भी उम्र, भार, लिंग अथवा नस्ल के हों उनको समान मात्रा में टीकाकरण का खुराक दिया जाता है 

७. क्या है टीकाकरण का सही तरीका:
टीकाकरण खाल के नीचे:कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा तथा रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए खाल के नीचे दिया जाता है
 नथुनों में:केनल कफ़ का टीकाकरण कुत्ते के नथुनों में दवा डाल कर किया जाता है

८. क्या सभी टीके एक ही प्रकार के होते है:कुत्तों में टीकाकरण दो प्रकार की होती है
 १. कोर टीकाकरण - टीकाकरण जो सभी कुत्तों के लिये आवश्यक है. यह उन बिमारीयों में दिया जाता है जो आसानी से फैलती हैं अथवा घातक होती हैं जैसे रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर.
 २. नान कोर टीकाकरण – उपरोक्त ४ बिमाँरीयों (रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर) के टीकाकरण को छोड़कर अन्य सभी नानकोर टीकाकरण माना जाता है | यह उन बिमाँरियों से सुरक्षा प्रदान करता है जो वातावरण के अनावरण अथवा जीवनचर्या पर निर्भर करती है जैसे लाइम डिजीज, केनलकफ और लेप्टोस्पाइरोसिस.

९. एक सफल टीकाकरण करने के बाद क्या फिर भी टीकाकरण विफल हो सकता है?हाँ। 
 टीकाकरण के विफलता के कारण कुत्ते में बीमारी होने के निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते है –
१. टीकाकरण के दौरान कुत्ते की रोगप्रतिरोधक क्षमता का सम्पूर्ण रूप से कार्य न करना |
२.आयु – कम उम्र के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्णतः विकसित नही होती और बड़े आयु के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली कई कारणों से अक्सर कमज़ोर या क्षीण हो जाती है |
३. मानवीय चूक (टीके का अनुचित संग्रहण या अनुचित मिश्रण)- टीकों का संग्रहण एवं इस्तेमाल भी निर्देशानुसार ही होना आवश्यक है | सूरज की रोशनी,गर्म तापमान टीके के प्रभाव को नस्ट कर सकता है | टीके का मिश्रण पशु में टीकाकरण के तुरंत पहले तैयार करना चाहिए | टीके खरीदने के पहले पता करना चाहिए कि टीकों को उचित तापमान एवं देखभाल से रखा गया है या नहीं |
४. डीवार्मिंग – टीकाकरण करने के पहले पेट के कीड़े मारने के लिए डीवर्मिंग करना आवश्यक है, वरना इस तरह का तनाव टीकाकरण के प्रभाव को कम कर सकता है |
५. गलत सीरोटाईप / स्टेन का इस्तेमाल – प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बहुत विशिष्ट होती है | अतः टीके में होने वाली जीवाणु या विषाणु की सही स्टेन होनी चाहिए वरना उससे उत्पन्न होने वाली प्रतिरक्षा जानवर में सही तौर पर सुरक्षा नहीं कर पाती |
६. अनुवांशिक बीमारियाँ – कुछ जानवरों में आनुवंशिक बिमारियों की वजह से सभी रोगों के लिए प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पर कम ही उत्पन्न हो पाती है |
७. वैक्सीन की गुणवत्ता – टीके में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में प्रतिजनी की मात्रा होना चाहिए वरना टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रयाप्त नहीं होती है |
८. पुराने या अवधि समाप्त टीके – पुराने टीकों में आवश्यक प्रतिजनी गुण समाप्त या कम हो जाता है | इस तरह के टीके लगाने से जानवरों को बेमतलब तनाव दिया जाता है |
९. टीकाकरण का अनुचित समय – टीका निर्माता के निर्देशों के अनुसार टीकाकरण का समय (उम्र एवं मौसम के अनुसार), लगाने का तरीका एवं मात्रा तथा दोबारा लगाये जाने की अवधि, इत्यादि निश्चित होता है |इन निर्देशों का पालन सही समय पर न करने से टीकाकरण विफल या निष्क्रिय हो जाता है |
१०. पोषण की स्तिथि- कुपोषण की वजह से जिन पशुओं में पोषक तत्वों की कमी रह जाती है उनमे टीकाकरण के बाद भी प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पे कम ही उत्पन्न हो पाती है |

10. क्या वैक्सीन लगते समय कुत्ते पर कोई दुस्प्रभाव हो सकते है? हाँ 
 कुछ कुत्तो प्रतिरोधक छमता अधिक सक्रिय होने की वजह से कुछ सामान्य लचण जैसे ज्वर, उल्टी, दस्त, लासीका ग्रंथियों का सूजना, मुख का सूजना, हीव्स, यकृत विफलता और कभी -कभी मौत भी हो सकती है।

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Leprosy Vaccination

Dr. A Z Khan 92% (376 ratings)
Bachelor of Unani Medicine & Surgery (B.U.M.S)
Unani Specialist, Gaya
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Vaccination for Newborns and Adults

Dr. B.M Lava 93% (8479 ratings)
Diploma in Child Health (DCH), MBBS
General Physician, Bangalore
Vaccination for Newborns and Adults

The immune system is extremely important in an individual's system. A strong immune system helps to combat the invasion of foreign particles and consequently resists the diseases.  Vaccination in such a context becomes imperative as it strengthens an individual's immunity. In vaccination, antigens or germs are given in very small doses. They stimulate the immune system to produce antibodies to fight against that particular infection. Vaccinations are provided to both children and adults to protect them from a number of diseases.  However, different vaccinations are provided in different ages according to the susceptibility to diseases.

Some of the vaccinations that are provided to newborns are:

1. Hepatitis B vaccine: This vaccination is given in order to prevent the child from having Hepatitis B. Hepatitis B is a liver disease that if persists can lead to liver failure or even liver cancer. This vaccine must be injected immediately after the birth of the baby. The first dose must be followed by administering a second dose within a span of a month or two. 

2. Rotavirus Vaccine (RV): This vaccine, taken orally, prevents the infant from Rotavirus. This virus causes vomiting and diarrhea in children that often leads to severe dehydration. This vaccine is administered within two to four months of the baby's birth. Sometimes, on doctor's prescription a second dose may be necessary in the sixth month. 

3. Acellular Pertussis Vaccine and Diphtheria and Tetanus Toxoids: This is a combination of various vaccines that protects the child from tetanus and diphtheria. Newborns are extremely prone to diphtheria that causes fatal illness and sometimes even deaths in children. This vaccination thereby, is extremely important and must be administered within two or four months and must be followed up with secondary doses later under the doctor's supervision. Vaccinations do not end with childhood. In many cases adults too need to be vaccinated against certain diseases. Some of them are:

  • Hepatitis A Vaccine: You can get this vaccination if there is any risk of you suffering from Hepatitis A. Much like Hepatitis B, Hepatitis A too is an acute liver disease. This is extremely fatal and is seldom accompanied by any symptoms. 
  • Human Papillomavirus Vaccine: This is a sexually transmitted virus that causes cervical dysplasia in women and men.  The apt age for both men and women for this vaccination differs. Women who are twenty six years of age or younger and men below or at the age of twenty one are most suitable for this vaccination. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a doctor and ask a free question.
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Vaccination in diabetes

Dr. Neeraj Kumar Singh 90% (143 ratings)
MD - Internal Medicine, CCMD(Diabetology), PG Course in Diabetology, ADVANCED CERTIFICATE COURSE IN DIABETES
Diabetologist, Dehradun
Vaccination in diabetes
Patients with diabetes are considered to be at an increased risk of infection and infectious complications. There should consider vaccination for hepatitis b, influenza (flu vaccine) and 23-valent pneumococcal polysaccharide vaccination, according to a study published in clinical diabetes, 2015.
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