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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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High Blood Pressure Ke Prabhaw - हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
High Blood Pressure Ke Prabhaw - हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव!

वर्तमान समय में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या बन कर उभरा है. इसके मरीज साल दर साल बढ़ रहे है. इस भागदौड़ से भरी जीवनशैली में, हम कई तरह के अनुचित आदतों को अपना लेते हैं जो हमारे शरीर पर प्रतिकूल या हानिकारक प्रभाव डालते है. इस भागदौड़ की ज़िंदगी में हम अनुचित खान-पान, एक्सरसाइज से दूर रहना, स्ट्रेस, पोषक तत्वों की कमी या फिर धूम्रपान और ड्रिंकिंग जैसे कई गलत आदतों में पड़ जाते हैं. यह सभी आदतें आपको हाई ब्लड प्रेशर की तरफ अग्रसर कर सकती है. भारत में होने वाली मौतों के लिए हाई ब्लड प्रेशर को चौथा कारण माना गया है. 

हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव बहुत गंभीर और जानलेवा हो सकता हैं. इस बिमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 90 % लोगों को हाई ब्लज प्रेशर के लक्षण का पता नहीं लगता है. इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ के रूप  में भी जाना जाता है. जब धमनियों में ब्लड का प्रेशर बढ़ जाता है तो इस प्रेशर को हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं. 

हमारे शरीर में ह्रदय धमनियों के माध्यम से ब्लड को पुरे शरीर में पंप करती है. जब हमारा दिल धड़कता है तो वास्तव में यह ब्लड को पूरी बॉडी में पंप कर रह होता है. हाई ब्लड प्रेशर का प्रभाव शरीर के कई अंगो पर पड़ता है. इसलिए हाई ब्लड प्रेशर से बचाव करना महत्वपूर्ण है. आइए हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव को जाने और इससे बचाव कैसे करें. 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

हाई ब्लड प्रेशर का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन कुछ संभावित कारण है जिसके वजह से आप हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित हो सकते है. इसमें उम्र बढ़ना, अनुवांशिक, मोटापा, स्ट्रेस, धूम्रपान और ड्रिंकिंग, अनुचित जीवनशैली जैसे कारक शामिल है. 

हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव

हाई ब्लड प्रेशर के कारण शरीर के कई अंगो पर हनिकारक प्रभाव पड़ता है. जो निम्नलिखित है:

  1. आँखों पर प्रभाव- हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव से आपके देखने की क्षमता कम हो जाती है. इसके कारण आपकी दृष्टि धुंधली पड़ जाती है और रौशनी कम होने लगती है. इसलिए आपको नियमित रूप से आँखों को जांच करने की सलाह दी जाती है. 
  2. दिल का दौरा- जब धमनियों में ब्लड का प्रेशर अधिक हो जाता है तो परिणामस्वरूप ह्रदय को अधिक काम करना पड़ता है. इस अधिक प्रेशर के कारण दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. 
  3. किडनी फेल हो सकती है-  हमारे शरीर से टॉक्सिक पदार्थ को बाहर निकालने का काम किडनी का होता है. जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो किडनी पर दबाब भी बढ़ जाता जाता है और ब्लड वेसल्स संकीर्ण हो जाती है. इसके साथ ही किडनी में टॉक्सिक पदार्थो को फ़िल्टर करने वाली कोशिकाएं भी प्रभावित होती है. इन सभी कारणों से किडनी आपने काम को सुचारु रूप से नहीं करता है और ब्लड में टॉक्सिक जमा होना लगते हैं. इस कारण से किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. 
  4. मस्तिष्क पर प्रभाव-  जब आपकी उम्र बढ़ने लगती है और आप हाई बीपी से ग्रसित होते है तो इसका आपके मस्तिष्क पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है. इसके कारण आपके याददाश्त कमज़ोर होने लग जाती है, जिसे डिमेंशिया भी कहा जाता है. इसके अलावा, मस्तिष्क में खून की आपूर्ति कम हो जाती है और मष्तिष्क की सोचने समझने की क्षमता भी प्रभावित होती है.  

हाई ब्लड प्रेशर से कैसे करें बचाव 

यदि आप हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित है या होने का खतरा है तो आप इस बिमारी से बचाव के लिए निम्नलिखित सुझाव का पालन कर सकते हैं:

स्वस्थ जीवनशैली: हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव से बचने के लिए सबसे पहले स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना चाहिए. स्वस्थ जीवनशैली में नियमित शारीरक गतिविधि करना और  ड्रिंकिंग, स्मोकिंग जैसी आदतों से दूर रहना शामिल हैं. अगर आपका वजन अधिक हो तो वजन कम करना चाहिए. 

उचित आहार- आपको स्वस्थ रखने के लिए उचित आहार का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण है. यह आपके हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी सहायक होता है. इसके लिए आपको चर्बी और हाई फैट वाले आहार से दूर रहना चाहिए. आपको अपने नमक का सेवन पर भी नियंत्रण करना चाहिए. आप अपने आहार में तरबूज, नारंगी, केला, सेब, आम , नाशपाती, पपीता  और अनानास को शामिल करना चाहिए. इसके अलावा सलाद के रूप में खीरा, गाजर, मूली, प्याज़ और टमाटर आदि को भी सेवन करना चाहिए. उचित आहार आपको हाई ब्लड  प्रेशर के प्रभाव से बचाव करता है. 
 
योग और एक्सरसाइज- योग और अभ्यास हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए बहुत सहायक होते है. यह ना आपको केवल स्वस्थ रखता है बल्कि वजन नियंत्रण और बेहतर रक्त परिसंचरण के लिए भी फायदेमंद होता है. आपको हर दिन नियमित रूप से आधे घंटे एक्सरसाइज करनी चाहिए. योग अभ्यास भी बहुत सहायक होते है. कई तरह के योगासन है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करतें है जिनमे धनुरासन, भुंजागसन, ताङासन, वज्रासन आदि. योग और एक्सरसाइज हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव को कंट्रोल करतें है.

High Blood Pressure Kya Hota Hai - हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri
High Blood Pressure Kya Hota Hai - हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?

एक समय था, जब हाई ब्लड प्रेशर को केवल शहरों तक ही सीमित माना जाता था. लेकिन बढ़ते आधुनिकरण और अनुचित जीवनशैली के कारण इस बीमारी ने गांव -देहात तक अपनी पकड़ बना ली है. हाई ब्लड प्रेशर एक बहुत ही जटिल समस्या है और इस बिमारी में आपको पता नहीं होता कि आप कब इससे ग्रसित हो सकते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण बहुत ही अस्पष्ट होते है और इसी वजह से इसे साइलेंट किलर के रूप में भी जाना जाता है. एक अध्ययन के अनुसार, भारत की बात करें तो यहां 10 में से 3 व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है. भारत में हर वर्ष होने वाली मौत में हाई ब्लड प्रेशर को एक प्रमुख कारण माना गया है.

हाई ब्लड प्रेशर का इलाज संभव है. लेकिन हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है? ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती हैं. इसलिए, आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है और इसका पता कैसे लगाया जाता है. साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के क्या उपचार होते हैं. 

हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है 

हाई ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता है. जब ब्लड वेसल्स(नसों) में ब्लड का प्रेशर बढ़ जाता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते है. जब यह प्रेशर कम हो जाता है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर के रूप में जाना जाता है. हमारे शरीर में हार्ट ब्लड वेसल्स के माध्यम से ब्लड को पूरे शरीर में पंप करता है. हमारे बॉडी में ब्लड को पंप करने के लिए एक निश्चित प्रेशर की जरुरत होती है. जब किसी कारण यह प्रेशर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है तो ब्लड वेसल्स पर अधिक दबाब पड़ता है और इस स्थिति को हाइपर टेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के रूप में जाना जाता है. ब्लड वेसल्स पर बढ़ते प्रेशर के कारण ह्रदय को ज्यादा काम करना पड़ता है. यह स्थिति बाद में हार्ट फेल या दिल के दौरे का कारण भी बन सकती है. इसलिए, हाइपरटेंशन को जानलेवा बिमारी माना गया है. 

हाई ब्लड प्रेशर का प्रकार 

हाई ब्लड प्रेशर दो प्रकार का होता है. सिस्टोलिक प्रेशर और डायस्टोलिक प्रेशर - इस प्रेशर को हाईएस्ट रीडिंग और लोएस्ट रीडिंग भी कहा जाता है. सामान्य स्थिति में एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90 से 140 तक होता है.  यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90 और 140 के स्तर से, कई दिनों तक ऊपर रहता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है. सिस्टोलिक रीडिंग 100 से 140 के बिच रहती है और डायस्टोलिक रीडिंग 60 से 90 के बीच में रहती है. इसके अलावा व्यक्ति का ब्लड प्रेशर इस बात पर भी निर्भर करता है कि मांशपेशियों में संकुचन हो रहा है या नहीं. 

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण 

आमतौर पर हाइपरटेंशन को मूक हत्यारा के रूप में जाना जाता है. इसलिए इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते है. जब तक कि इससे पीड़ित व्यक्ति को कोई गंभीर समस्या जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि उत्पन्न नहीं होता है, तब तक वे इस बीमारी से अवगत नहीं हो पाते हैं. इसलिए आपको सामान्य स्थिति में भी ब्लड प्रेशर की नियमित चेक अप करवाना चाहिए. इसके साथ ही आपको हेल्थी लाइफस्टाइल और डॉक्टर से परामर्श भी लेना चाहिए. हालाँकि, हाई बीपी के कुछ लक्षण है जो लोगों द्वारा अनुभव किए जाते हैं, जिनमें चक्कर आना, दर्द, धुंधला दिखना, उल्टी, नाक से खून बहना या सीने में दर्द होना इत्यादि शामिल है. 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

हाई ब्लड प्रेशर के निश्चित कारण का पता लगाना मुश्किल होता है. अधिकांश लोगों को पता नहीं होता है कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है, इसी कारण यह रोग और भी घातक हो जाता है. हालाँकि, इसके कुछ संभावित कारण है जिसमे हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. हाई ब्लड प्रेशर के संभावित कारण निम्नलिखित हो सकते है:

  1. अनुवांशिकता- यदि आपके परिवार में किसी को भी हाई बीपी होता है, तो आप भी इस बीमारी के लिए प्रवण होते है.  इस स्थिति में आपको स्वस्थ जीवनशैली और उचित खानपान को अपनाना चाहिए. 
  2. उम्र - बढ़ती उम्र भी हाई बीपी के लिए एक प्रमुख कारण  है. उम्र बढ़ने के साथ हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ जाता है. यह बिमारी महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में अधिक सामान्य हैं. हालाँकि, बुढ़ापे में महिलाओं और पुरुषों में हाई बीपी का खतरा सामान्य हो जाता है. 
  3. मोटापा - सामान्य से अधिक वजन रखने वाले लोगों के लिए हाई बीपी का खतरा ज्यादा होता  है. 
  4. स्मोकिंग और ड्रिंकिंग - अत्यधिक  स्मोकिंग के कारण ब्लड वेसल्स संकीर्ण हो जाता है जो बीपी हाई का कारण बन जाती है. दूसरी तरफ, अत्यधिक अल्कोहल सेवन के कारण ब्लड में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, इससे ह्रदय को क्षति होती है और हाई बीपी का कारण बनता है. 
  5. अनुचित आहार- यदि आप अधिक नमक या हाई फैट वाले आहार का सेवन करते है तो आप भी हाई बीपी के लिए जोखिम रखते है. 
  6. स्ट्रेस- कई स्टडीज के अनुसार मेन्टल स्ट्रेस को भी हाई बीपी के लिए जिम्मेदार माना गया है.  

हाई ब्लड का इलाज 

किसी भी बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले उपचार, रोकथाम और बचाव है. आपको सबसे पहले यह जानने की जरुरत है कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है और आप इसे कैसे रोक सकते है. यदि आपको बताए गए कारणों जैसे मोटापे या स्ट्रेस की वजह से हाई ब्लड प्रेशर है तो आपको  मोटापा कम करना चाहिए. 

साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए. इसके अलावा शराब का सेवन भी प्रतिबंधित करना चाहिए. आप नियमित रूप से ब्लड प्रेशर का चेकअप करवाते रहें और कोई लक्षण दिखने पर शुरुआत से ही इलाज शुरू करें. आपको नमक की सेवन पर नियंत्रण रखना चाहिए. आप बीपी को कंट्रोल करने के लिए योग की भी मदद ले सकते हैं. कई योग है जो बीपी कंट्रोल करने में मदद करते है. 

इनमें से कुछ निम्न इस प्रकार है - भुजंगासन, धनुरासन, वज्रासन, ताडासन और धनुरासन बहुत उपयोगी है. यदि अनुवांशिक कारणों से हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित है तो आपको डॉक्टर के साथ हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है, इसके बारे में विस्तार से चर्चा करनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा निर्धारित किए गए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए.

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लिवर के लिए योग - Liver Ke Liye Yog!

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लिवर के लिए योग - Liver Ke Liye Yog!

आपको जानकार हैरानी होगी कि लीवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है. इसके साथ ही लीवर, हमारे शरीर में एक ऐसे रासायनिक प्रयोगशाला की तरह है, जिसका कार्य पित्त तैयार करना है. यह वसा को पचाने के साथ ही आंतों में उपस्थित हानिकारक कीटाणुओं को भी नष्ट करता है. लेकिन कई आज बदली हुई जीवनशैली के कुछ बुरी आदतों के कारण हमारा लिवर खराब भी हो सकता है. लीवर खराब होने के कारणों में शराब ज्यादा पीना, धूम्रपान करना इत्यादि शामिल हैं. इसके अतिरिक्त आवश्यकता से अधिक नमक और खट्टा खाने से भी आपको लिवर की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं. जाहीर है लीवर की समस्याओं से निजात पाने के कई तरीके हैं. यदि किसी कारण से लीवर में दोष उत्पन्न हो जाता है तो शरीर की पूरी प्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाती है. योग के नियमित अभ्यास से लीवर को सशक्त रखा जा सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम लीवर को ठीक करने के लिए योग के महत्व पर एक नजर डालें.
आसन-
लीवर के दोषों को दूर करने के लिए सूक्ष्म व्यायाम का नियमित अभ्यास बहुत लाभकारी होता है. इसके अतिरिक्त पवनमुक्तासन, वज्रासन, मर्करासन आदि का अभ्यास करना चाहिए. रोग की प्रारम्भिक स्थिति में कठिन आसनों को छोड़कर बाकी सभी आसन किये जा सकते हैं.

1. पवनमुक्त आसनछ:- पीठ के बल जमीन पर लेट जाइए. दांयें पैर को घुटने से मोड़कर इसके घुटने को हाथों से पकड़कर घुटने को सीने के पास लाइए. इसके बाद सिर को जमीन से ऊपर उठाइए. उस स्थिति में आरामदायक समय तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आइए. इसके बाद यही क्रिया बांयें पैर और फिर दोनों पैरों से एक साथ कीजिए. यह पवनमुक्तासन का एक चक्र है. प्रारम्भ एक या दो चक्रों से करें, धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाकर दस से पन्द्रह तक कीजिए.

2. धनुरासन:- जिन्हें फैटी लिवर की समस्या है उनके लिए ये आसन बहुत उपयोगी है. इस आसन में आपको उल्टा लेटकर अपने पैरों को पकड़ना होता है. आप जितनी देर तक आराम से इस आसन को कर सकते हैं तब तक करते रहिए. जितना हो सके इस आसन को दोहराएं.

3. गोमुख आसन:- ये आसन आपके लिवर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. ये आसन लिवर सिरोसिस के लिए बेहतर माना जाता है. लिवर सिरोसिस में संक्रमित व्यक्ति का लिवर अपने आप सिकुड़ता रहता है और कठोर हो जाता है. इसे करने के लिए पालथी मारकर बैठें. फिर बाएं पैर को मोड़कर बाएं तलवे को दाएं हिप्स के पीछे लाएं और दाएं पैर को मोड़कर दाएं तलवे को बाएं हिप्स के पीछे लाएं. फिर हथेलियों को पैरों पर रखें. इसके बाद हिप्स पर हल्का दवाब डालें और शरीर के ऊपरी भाग को सीधा रखें. अब बायीं कोहनी को मोड़कर हाथों को पीछे की ओर ले जाएं, सांस को खीचते हुए दाएं हाथ को ऊपर उठाएं. दायीं कोहनी को मोड़कर दाएं हाथ को पीछे ले जाएं फिर दोनों उंगलियों को आपस में जोड़ें. दोनों हाथों को हल्के-हल्के अपनी ओर खींचें.
4. नौकासन:- ये सबसे आसान आसन होता है. इसे करने का तरीका भी काफी आसान है. इसे करने के लिए शवासन की मुद्रा में लेटना होता है. फिर एड़ी और पंजे को मिलाएं और दोनों हाथों को कमर से सटा लें. अपनी हथेली और गर्दन को जमीन पर सीधा रखें. इसके बाद दोनों पैरों, गर्दन और हाथों को धीरे-धीरे उठाएं. आखिर में अपना वजन हिप्स डाल दें. करीब 30 सेकेंड तक ऐसे ही रहें. और धीरे-धीरे शवासन अवस्था में लेट जाएं.

5. अर्ध मत्सयेंद्रासन:- अगर आपका लिवर खराब हो गया है तो ये आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. दोनों पैरों को फैलाकर बैठें. फिर बाएं पैर को मोड़कर बायीं एड़ी को दाहिनें हिप के नीचे रखें. अब दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं पैर का तलवा लाएं और घुटने की बायीं ओर जमीन पर रखें. इसके बाद बाएं हाथ को दाएं घुटने की दायीं ओर ले जाएं और कमर को घुमाते हुए दाएं पैर के तलवे को पकड़ लें और दाएं हाथ को कमर पर रखें. सिर से कमर तक के हिस्से को दायीं और मोड़ें. अब ऐसा दूसरी ओर से भी करें.

प्राणायाम
1. शीतली प्राणायाम:- लीवर बढ़ने की समस्या से ग्रस्त लोगों को शीतकारी या शीतली प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए. शीतली प्राणायाम के अभ्यास की विधि इस प्रकार है-
पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाइए. दोनों हाथों को घुटनों पर सहजता से रखें. आंखों को ढीली बन्द कर चेहरे को शान्त कर लें. अब जीभ को बाहर निकालकर दोनों किनारों से मोड़ लें. इसके बाद मुंह से गहरी तथा धीमी सांस बाहर निकालें. इसकी प्रारम्भ में 12 आवृतियों का अभ्यास करें. धीरे-धीरे संख्या बढ़ाकर 24 से 30 कर लीजिए.

2. कपालभाति प्राणायाम:- इसमें आपको सिद्धासन, पदमासन या वज्रासन में बैठना होता है. इसके बाद गहरी सांस लें और इसे नाक से निकालें. एक बार सांस लेने की क्रिया पांच से दस सेकेंड के बीच होनी चाहिए. इसमें सबसे ज्यादा ध्यान आपको सांस निकालने पर देना है. इस योग को रोजाना पंद्रह मिनट के लिए करें. इसे करने से लिवर की कार्यक्षमता सुधरती है.

नोट: कफ की समस्या से ग्रस्त लोग इसका अभ्यास न कर नाड़ी शोधन का अभ्यास करें. लीवर की समस्या से ग्रस्त लोगों को ध्यान का प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए.

लेसिक लेजर सर्जरी के नुकसान - Lasik Laser Surgery Ke Nuksaan!

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लेसिक लेजर सर्जरी के नुकसान - Lasik Laser Surgery Ke Nuksaan!

आँख हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है. यह जितना महत्वपूर्ण है उतना ही सेंसेटिव होता है. इसलिए आपको आँखों को विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए. बदलते जीवनशैली और पर्यावरण में बढ़ते प्रदुषण के कारण आंखों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है. आँखों के खराब होने के कई कारण हो सकते है, इससे निदान पाने के लिए लोग ज्यादातर चश्मा का सहारा लेते है.एक बार चश्मा लगाने के बाद फिर पूरी जिंदगी चश्मा लगाना पड़ता है. लेकिन आजकल के उन्नत तकनीक ने चश्मे का बोझ उतरने का विकल्प ला दिया है. अब आप चश्मे के बजाए लेसिक सर्जरी का विकल्प अपना सकते है. डॉक्टर अब लेसिक आई सर्जरी का सुझाव दते है और लोग इसका अनुसरन भी कर रहे हैं. हालाँकि, लेसिक सर्जरी के कुछ नुकसान भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइये जानते है लेसिक सर्जरी क्या होता है और इसके फायदे और नुकसान क्या है.

लेसिक सर्जरी आंखों में मौजूद डिफेक्ट्स को दूर करने के लिए किया जाता है. यह आपको दूर दृष्ट और नजदीक की दृष्टि को ठीक करने के लिए किया जाता है. लेकिन जिन लोगो की आँख पूरी तरह से खराब हो गयी है, वह लेसिक सर्जरी के लिए योग्य नहीं है. हालंकि, लेज़र आई सर्जरी कराने के बाद भी कुछ मरीजों को रात में वाहन चलाते समय चश्मा लगाने की जरुरत पड़ सकती है. लेसिक सर्जरी के लिए ज्यादा समय नहीं पड़ती है. इसके लिए आपको 1 से 2 घंटे लग सकते है और सर्जरी की प्रक्रिया को पूरी करने में 15 मिनट लगते है. सर्जरी के बाद आँख को रिकवर होने में 8 घंटे का समय लगता है. सर्जरी के बाद आँखों में कुछ समय के लिए खुजली या जलन या फिर आँखों से असामान्य रूप से आंसू निकल सकते है. जो आँखों के ठीक होने के संकेत होते है.

लेसिक सर्जरी के फायदे
1. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है की अधिकाँश मरीजों को बेहतर आँखों की रौशनी प्राप्त हो जाती है.
2. इस सर्जरी में बहुत कम समय लगता है और रिकवरी का समय भी बहुत कम है.
3. इसमें मरीज को किसी तरह का असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है और प्रक्रिया पूरी तरह से दर्द रहित है.
4. रोगी को चश्मे से पूरी तरह से आजादी मिल जाती है.
5. यदि उम्र ढलने पर आँख खराब होती है तो इसे सुधारा भी जा सकता है.
6. सर्जरी के बाद आँखों को ठीक होने में बहुत कम समय लगता है.

लेसिक सर्जरी के नुकसान
लेसिक सर्जरी के फायदे तो है लेकिन कुछ नुकसान भी है जिसे दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता है. आइये लेसिक सर्जरी के नुकसान पर नजर डालें.


1. लेसिक सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया है, इसमें आँखों की रौशनी जाने का भी खतरा होता है.
2. सर्जरी के दौरान कॉर्निया में होने वाले परिवर्तन को दोबारा उसी स्थिति में नहीं लाया जा सकता है.
3. कई मामलें में सर्जरी के दौरान कॉर्निया के लटके हुए टिश्यू के काटने से आँखों के रौशनी की रौशनी खतरा होता है.
4. लेसिक सर्जरी हर किसी के लिए संभव नहीं है और सभी डॉक्टर इस सर्जरी को करने में सफल नहीं होते है, तो सर्जरी करवाने से पहलें लेसिक सर्जरी से होने वाले नुकसान को भी जान लें.

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मलेरिया के उपचार - Malaria ke upchaar!

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मलेरिया के उपचार - Malaria ke upchaar!

आपके शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पेट होता है. अगर आपका पेट खराब रहता है तो आपकी तबियत भी सही नहीं रहती है. पेट की जलन आपके लिए काफी परेशान करने वाली होती है. पेट की गर्मी कई कारणों से होती है और इससे कई प्रकार की बीमारी भी होती है. आजकल हम कभी कभी खाने पीने में ध्यान नहीं देते है और हमे कई बीमारियां घेर लेती है. पेट के रोग अक्सर दूषित खाना खाने से होते हैं. पेट की गर्मी भी तब होती है जब हम भोजन में कुछ अनहेल्थी खा लेते है. आज इस लेख में हम आपको बताएंगे इससे जुड़े कुछ घरेलू उपायों के बारे में, जिन्हें आप घर पर आज़मा सकते है.

1. अरहर की दाल
अगर आपको पेट की गर्मी की समस्या परेशान कर रहे है तो आपको परेशान नहीं होना है. इसके लिए आपको अरहर की दाल की सहारा लेना है. इसके लिए आपको अरहर की दाल को पीसकर पीना है. ऐसा करने से आपको पेट की जलन से आराम मिल जाएगा.

2. हल्दी से गरारा
आपकी इस समस्या को खत्म करन के लिए आपको हल्दी और पानी मिलाकर इससे गरारा करना है. इससे आपको पेट की जलन से आराम मिल जाएगा. ये एक असरदार घरेलू उपाय है यदि आप इसे नियमित रूप से करें तो काफी फायदा मिलता है.

3. काला नमक और नींबू पानी
आपके पेट के लिए काला नमक वैसे भी बहुत उपयोगी माना गया है. आपको बता दें कि अगर आपको पेट की जलन की समस्या है तो आपको काला नमक और नीबूं पानी मिलाकर आपको पीने से इसमे आराम मिल जाएगा. इससे आपके पेट का पाचन भी सही रहेगा.

4. छाछ, नारियल या गन्ने का जूस
आपको बता दे कि आपको अन्य लीवर संबंधी समस्या हो जाए तो आपको इसके लिए पेट और लिवर तो स्वस्थ रखने के लिए छाछ, नारियल या गन्ने का जूस का सेवन करना चाहिए. इससे आपको इन सारी समस्याओं से आराम मिलेगा.

5. नीम का दातून
अगर आपको हमेशा ये समस्या रहती है तो आपको इसके लिए अपने रोजाना की दिनचर्या में नीम की दातून करना शुरु कर देना चाहिए. नीम आपके शरीर से गर्मी को बाहर निकालने में मदद करती है. ये आपके लिए काफी फायदेमंद है.

6. गुनगुना पानी
आपको बता दें कि इसके लिए आपको गुनगुना पानी भी काफी फायदा करता है. अगर आपको ये समस्या है तो आप इसका सेवन करें. अगर आप इसके साथ नीबूं का इस्तेमाल करते है तो ये आपको ज्यादा फायदा पहुंचाएगा.

7. नारियल पानी
पेट की गर्मी को तुरंत शांत करने के लिए आपको नारियल पानी का सेवन करना चाहिए इससे आपको तुरंत आराम मिल जाएगा. ये आपके लिए किसी रामबाण से कम नहीं है. इसके नियमित सेवन से आपको पेट की गर्मी की समस्या नहीं होगी.

8. गुड़ का पानी
अगर आपके गले में सूजन आ गई है या आपके पेट में गर्मी है तो आपको गुड़ का पानी पीने से इन दोनों समस्याओं से आराम मिलता है. तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए. इससे आपके पेट की गर्मी तो शांत होगी ही साथ में आपको कई अन्य लाभ भी मिलेंगे.

9. बबूल की छाल
आपके पेट की गर्मी को शांत करने के लिए आप आयुर्वेदिक औषधि का भी इस्तेमाल कर सकते है. इसके लिए आपको बबूल की छाल का प्रयोग करना है ये बहुत फायदेमंद औषधि होती है. आपको इसकी छाल को पीसकर पानी में मिलाकर कु्ल्ला करना है ऐसा करने से आपको इससे तुरंत आराम मिल जाएगा.

10. ठंडी चीजों का करें सेवन
आपको बता दें कि आपको अगर पेटी की गर्मी से हमेशा के लिए राहत चाहिए तो आपको इसके लिए ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए. इसके लिए आपको नारियल पानी, नीबू, और शहद जैसी चीजें इस्तेमाल करना चाहिए.

 

मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

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मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

आपके मसूड़ों से नियमित रूप से खून का बहना आमतौर पर प्लेटलेट विकार या ल्यूकेमिया जैसे कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. ऐसा आमतौर पर मुंह में स्वच्छता न होने के कारण होता है. अक्सर देखा जाता है कि कई लोगों के मसूड़ों में सूजन आ जाता है. लेकिन इस बीमारी की शुरुआत को जिंजिवाइटिस के नाम से जाना जाता है. जिंजिवाइटिस के दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है. यहाँ तक कि ये खून ब्रश या फ्लॉस करते समय कभी-कभी अपने-आप ही निकल पड़ता है. इकई बार ऐसा भी होता है कि मसूड़ों पर चोट लगने या अधिक गर्म पदार्थ व सख्त चीज़ें खाने से मसूड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण भी मसूड़ों में सूजन उत्पन्न हो जाती है. इससे आपके मसूड़े ढीले-ढाले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का काफी नुकसान हो सकता है. आइए मसूड़ों की बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानें.

मसूड़ों के सूजन को दूर करने के उपाय-

1. बबूल की छाल – यदि आप मसूड़ों में होने वाले सूजन से बचना चाहते हैं तो आपको भी बबूल की छाल के उपयोग करना चाहिए. इससे मसूड़ों के सूजन को आसानी से समाप्त किया जा सकता है. इसके लिए बबूल की छाल के काढ़े से कुल्‍ला करें. इससे आपके मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगती है.

2. अरंडी का तेल और कपूर – यदि आप अरंडी के तेल में थोड़ी मात्रा में कपूर मिला कर प्रतिदिन सुबह तथा शाम मसूड़ों की मालिश करें तो ऐसा करके भी मसूड़ों की सूजन कम होने लगती है.

3. अजवायन – अजवायन का उपयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने के लिए एक अच्छा विकल्प है. इसके लिए अजवायन को तवे पर भून कर पीसने के बाद इसमें 2-3 बूंद राई का तेल मिला कर हल्‍का-हल्‍का मसूड़ों पर मलें. ऐसा करने से मसूड़ों को आराम मिलता है साथ ही दांतों के अन्य रोग भी दूर किए जा सकते हैं.

4. अदरक और नमक – मसूड़ों से सम्बंधित समस्याओं को दुर करने के लिए थोड़े से अदरख में थोड़ा नमक मिलकर इसे अच्छे से पीस कर मिला लें. अब इस मिश्रण से धीरे-धीरे मसूड़ों को मले. इससे मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगी.

5. नींबू का रस - नींबू के रस को ताजे पानी में नींबू में डाल लें. इसके बाद बाद इस पानी से कुल्‍ला करें. कुछ दिन इसका प्रयोग करें इससे मसूड़ों की सूजन दूर होने के साथ-साथ मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होने लगती है.

6. प्याज - प्याज मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके सेवन के लिए प्याज में नमक मिलाकर खाने से एवं प्याज को पीसकर मसूड़ों पर दिन में करीब तीन बार मलने से मसूड़ों की सूजन ख़त्म हो जाती है तथा मसूड़े स्वस्थ बने रहते हैं.

7. फिटकरी - फिटकरी का प्रयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके लिए फिटकरी के चूर्ण को मसूड़ों पर मले इससे मसूड़ों की सूजन को कम किया जा सकता है.
 

मसूड़ों से खून निकलने का उपचार
1. खट्टे फल:- यदि आपके मसूड़ों से खून बह रहा है तो इसका एक कारण आपके शरीर में विटामिन सी की कमी भी हो सकती है. ऐसे में विटामिन सी की आपूर्ति के लिए आपको खट्टे फल जैसे नारंगी, नींबू, आदि और सब्जियां विशेष कर ब्रॉकली और बंद गोभी आदि का सेवन करना चाहिए. इससे रक्तस्त्राव में कमी आएगी.

2. दूध:- हमारे मसूड़ों के लिए कैल्शियम भी आवश्यक होता है. कैल्शियम का सबसे अच्छा स्त्रोत दूध है. यदि आप दूध का सेवन करते हैं तो आपके मसूड़ों का रक्तस्त्राव ख़त्म हो सकता है. इसके लिए आप नियमित रूप से दूध का सेवन करते रहें.

3. कच्ची सब्जियां:- कई बार मसूड़ों में रक्त संचरण न होने के कारण भी रक्तस्त्राव होता है. इसके लिए आपको कच्ची सजियाँ चबाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे आपका दांत भी साफ़ होता है. यदि आप नियमित रूप से कच्ची सब्जियां खाने की आदत डालें तो आप ऐसी परेशानियों से बच सकते हैं.

4. क्रैनबेरी और गेहूँ की घास का रस:- मसूड़ों से होने वाले रक्तस्त्राव से राहत पाने के लिए आप क्रैनबेरी या गेहूँ की घास का रस का उपयोग कर सकते हैं. इसका जूस जीवाणुरोधी गुणों से युक्त होता है जिससे कि आपके मसूड़ों से जिवाणुओं का खात्मा हो सकता है.

5. बेकिंग सोडा:- बेकिंग सोडा का उपयोग भी मसूड़ों की देखभाल के लिए किया जाता है. दरअसल बेकिंग सोडा का इस्तेमाल माइक्रोइंवायरनमेंट तैयार करके मुंह में ही बेक्‍टीरिया को मारने के लिए किया जाता है. आप चाहें तो इसे अपने मसूड़ों पर उंगली से भी लगा सकते हैं.

6. लौंग:- लौंग उन औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक है जिसका इस्तेमाल हम प्राचीन काल से ही अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए करते आ रहे हैं. जब भी आपको इस तरह की समस्या हो तो आपको एक लौंग अपने मुंह में रखना चाहिए. इससे राहत मिलती है. लेकिन यदि लम्बे समय तक ऐसा हो तो आपको चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.

7. कपूर, पिपरमिंट का तेल:- मसूड़ों को स्वस्थ बनाने के कई तरीके हैं. उनमें से एक है कपूर और पिपरमिंट के तेल. इसका इस्‍तेमाल आप अपने मुंह की ताज़गी और स्‍वच्‍छता बनाये रखने के लिये कर सकते हैं.

8. कैलेंडूला की पत्‍ती और कैमोमाइल चाय:- मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने के लिए ऐसी चाय पीनी चाहिए जिसमें कैलेंडुला और कैमोमाइल की पत्‍ती डाल कर पकायी जाए. क्योंकि ये मसूड़ों में खून आना रोकती है.

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डीएनए टेस्ट कैसे होता है - DNA Test Kaise Hota Hai!

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डीएनए टेस्ट कैसे होता है - DNA Test Kaise Hota Hai!

जेनोटिक टेस्टिंग एक प्रकार का मेडिकल टेस्ट होता है जिसमें जैव, क्रोमोसोम्स और प्रोटीन की पहचान की जाती है. इस टेस्ट के माध्यम से यह पताया लगाया जा सकता है क्या कोई व्यक्ति किसी ऐसी स्थिति जैसे हेल्थ प्रॉब्लम से ग्रस्त है, जिससे उसकी आने वाली पीढ़ियों निकट भविष्य में ग्रस्त हो सकती है. इसके अलावा, इससे जीन की जांच भी होती है जो हमारे माता-पिता से मिलते है. यह टेस्ट उचित इलाज का चयन करने और यह जानने में मदद करता है कि संबंधित समस्या उपचार के प्रति कैसी प्रतिक्रिया दे सकती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम डीएनए टेस्ट कैसे होता है ये जानें ताकि इस विषय में हमारी जागरूकता बढ़ सके.

डीएनए टेस्ट कैसे होता है?
डीएनए टेस्ट के लिए आपके शरीर से कुछ सैंपल लिया जाता है. इसमें आपके खून, उल्ब तरल, बाल या त्वचा आदि लिया जा सकता है. आपको बता दें कि उल्ब तरल या एम्नियोटिक फ्लूइड गर्भावस्था में भ्रूण के चारों ओर मौजूद तरल को कहते हैं. इसके अतिरिक्त आप डीएनए टेस्ट कराने वाले व्यक्ति के गालों के अंदरूनी भाग से भी सैंपल लिए जा सकते हैं. इन नमूनों के जाँच के लिए जगह-जगह पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएँ बनाईं गईं हैं. इन प्रयोगशालाओं में आप एक निश्चित रकम जो कि 10 से 40 हजार के बीच हो सकती है, चुका कर डीएनए टेस्ट करवा सकते हैं. जाँच की रिपोर्ट आपको 15 दिनों के अंदर मिल सकती है.

डीएनए टेस्ट कब करवाना चाहिए?
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य उम्र के एक पड़ाव पर आकार एक जैसे तरीके के रोगों से ग्रस्त हो जाते है तो आप डीएनए टेस्ट करवा सकते है. हम में से बहुत से लोगों को पता नही होता है कि उन्हें कौनसा वंशानुगत रोग है, ऐसे में डीएनए टेस्ट करवाया जा सकता है. जिन महिलाओं को गर्भपात हुआ है, उन्हें इस टेस्ट को करवाना चाहिए.

डीएनए टेस्ट किसलिए किया जाता है?
जेनेटिक टेस्ट की कई वजह हो सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकती हैं –
1. जन्म लेने से पहले शिशु में जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच तलाश करने के लिए.
2. अगर किसी व्यक्ति के जीन में कोई रोग है और जो उसके बच्चों में फैल सकता है, तो डीएनए टेस्ट द्वारा इसकी जांच की जाती है.

भ्रूण में रोग की जांच करना.
व्यस्कों में रोग लक्षणों के विकसित होने से पहले ही जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच करने के लिए.
जिन लोगों में रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनके टेस्ट करने के लिए. इससे किसी व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर दवा और उसकी खुराक का पता लगाने में भी मदद मिलती है.

हर व्यक्ति में टेस्ट करवाने के और टेस्ट ना करवाने की कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं. कुछ लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि अगर उनमें टेस्ट का रिजल्ट पोजिटिव आता है तो क्या उस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है या इसका इलाज किया जा सकता है. कुछ मामलों में ईलाज संभव नहीं हो पाता, लेकिन टेस्ट की मदद से व्यक्ति अपने जीवन के कई जरूरी फैसले कर पाता है, जैसे परिवार नियोजन या बीमाकृत राशि आदि. एक आनुवंशिक परामर्शदाता आपको टेस्ट के फायदे व नुकसान से संबंधित सभी जानकारियां दे सकता है.

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आंत के रोग के लक्षण - Aant Rog Ke Lakshan!

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आंत के रोग के लक्षण - Aant Rog Ke Lakshan!

आंतों की बीमारियां सूजन प्रक्रियाओं का एक समूह होती हैं जो बड़ी और छोटी आंत में होती हैं. विभिन्न नकारात्मक कारकों, घावों और श्लेष्म झिल्ली को पतला करने के कारण आंतरिक अंगों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं. गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट आंतों की समस्याओं में लगे हुए हैं. नकारात्मक कारकों के शरीर पर प्रभाव के कारण पेट और आंतों के रोग, और दुर्लभ मामलों में, सूजन का कारण कुछ एक परिस्थिति है. अधिक विभिन्न कारणों से एक साथ मानव शरीर को प्रभावित होता है, और अधिक कठिन रोग होता है और, इसके परिणामस्वरूप, इसका इलाज करना अधिक कठिन होगा. छोटी आंत की बीमारी में शामिल हैं आंतशोथ (छोटी आंत की विकृति संबंधी विकृति), कार्बोहाइड्रेट असहिष्णुता, लस एंटाइपेथी (शरीर में आवश्यक एंजाइमों की कमी के कारण), नाड़ी और छोटी आंतों की एलर्जी संबंधी बीमारियां, व्हाइपल का रोग और अन्य. अनुचित पोषण या विशिष्ट दवाइयां लेने के कारण, छोटी आंतों में चिपचिपा झिल्ली के अखंडता या जलन के उल्लंघन के कारण उनमें से सभी अपना विकास शुरू करते हैं.
बड़ी आंत के रोगों में बृहदांत्रशोथ, अल्सर, क्रोहन रोग, डिवर्टक्यूलोसिस और बृहदान्त्र, ट्यूमर और अन्य बीमारियों के अन्य परेशानियां शामिल हैं. इस क्षेत्र में अधिकांश भड़काऊ प्रक्रियाएं बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती हैं, लेकिन जब कारण एंटीबायोटिक दवाओं का एक लंबा कोर्स होता है, विकारों को खाने और इतने पर.

छोटी आंत रोग के लक्षण
आंत रोग के साथ, लक्षण और उपचार सूजन की गंभीरता और इसके स्थानीयकरण की स्थिति पर निर्भर करता है. रोग के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं. रोग के सक्रिय चरण की अवधि को छूट की अवधि के द्वारा बदल दिया जाता है. छोटी आंत की सूजन की क्लिनिकल तस्वीर निम्नलिखित अभिव्यक्तियों की विशेषता है:
* दस्त समान बीमारियों वाले लोगों के लिए एक आम समस्या है.
* उच्च शरीर का तापमान और थकान की बढ़ती भावना अक्सर आंतों के साथ समस्याओं के साथ, एक व्यक्ति के पास एक निम्न श्रेणी के बुखार होता है, वह थका हुआ और टूटा लगता है.
* पेट में दर्द, पेट का दर्द सूजन और छोटी आंत म्यूकोसा के अल्सर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के माध्यम से भोजन की सामान्य गति को प्रभावित कर सकता है और इस तरह दर्द और ऐंठन पैदा कर सकता है.
* मल में खून की उपस्थिति यह आमतौर पर छोटी आंत की आंतरिक खून बह रहा है.
* भूख में कमी पेट दर्द और पेट का दर्द, साथ ही शरीर में सूजन प्रक्रिया की उपस्थिति, भूख की भावना को सुस्त लगती है.
* तीव्र गति से वजन का घटना.

बड़ी आंत के रोगों के लक्षण
आंतों के रोगों के कई लक्षण आम हैं और एक दूसरे के साथ प्रतिध्वनित होते हैं. लक्षण लक्षण एक सुस्त या ऐंठन चरित्र के पेट दर्द में शामिल हैं, ऐंठन संभव है. बड़ी आंत की आंतरिक सतह घावों से भरा है जो रक्तस्राव कर सकती है. रोगी सुबह की थकान, रक्त और बलगम, रक्ताल्पता (रक्त की बड़ी मात्रा में कमी के साथ), जोड़ों की बीमारी से मुक्ति के बारे में शिकायत करते हैं. अक्सर जब रोग अनियंत्रित वजन घटाने, भूख की हानि, बुखार, पेट फूलना, निर्जलीकरण होता है अक्सर रोगी में गुदा उथल-पुथल होता है. यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बड़ी आंत की ऐसी बीमारी, जिनमें से लक्षण अन्य रोगों के लिए गलत हो सकते हैं, समय पर निदान किया गया था. पर्याप्त उपचार की अनुपस्थिति में, रोगी जटिलताओं (ऑन्कोलॉजी, फिस्टुला, आंतों के टूटना और आंतों की रुकावट) के लिए बढ़ते जोखिम पर है.

क्रोनिक एन्डोकॉलिटिस
क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस, दोनों छोटी और बड़ी आंतों का एक साथ सूजन है, जो आंतों की आंतरिक सतह को लपेटने वाले श्लेष्म झिल्ली के शोष द्वारा विशेषता है, जो आंतों के कार्यों की परेशानी का कारण बनता है. भड़काऊ प्रक्रिया के स्थान पर निर्भर करते हुए, बीमारी को पतली और मोटी आंतों के लिए अलग से वर्गीकृत किया जाता है.
क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस के कारण निम्न रोग संबंधी कारकों के मानव शरीर पर प्रभाव के कारण होते हैं:
* दीर्घकालिक कुपोषण
* बिगड़ा प्रतिरक्षा और चयापचय
* हार्मोनल विकार, तनाव
* दवाओं और रसायनों के साथ नशा
* आंत की संरचना की विशेषताएं
* आंतरिक अंगों के रोग
* आंतों और परजीवी संक्रमण.

क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस के सबसे आम रोगजनकों में से एक आंतों का लैम्ब्लीस. वे तेजी से गुणा करने में सक्षम हैं और लैम्ब्लियासिस का कारण है. रोग के लक्षणों में अतिसार, अतिरिक्त गैस, ऐंठन और पेट में दर्द, मतली, उल्टी शामिल है. दो रूपों में मौजूद: सक्रिय और निष्क्रिय परजीवी के सक्रिय रूप से मानव शरीर में रहते हैं, जब वे मल के साथ बाहर निकलते हैं तो वे एक निष्क्रिय रूप में जाते हैं और शरीर के बाहर संक्रमण फैलाते हैं. क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस अक्सर सूजन आंत प्रक्रियाओं के तीव्र रूपों के असामान्य या खराब गुणवत्ता के उपचार से परिणामस्वरूप होता है. इसके अलावा, विरासत का खतरा है और जो लोग बचपन के लिए स्तनपान कर चुके हैं.

सब्जा के बीज के फायदे - Sabja Ke Beej Ke Fayde!

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सब्जा के बीज के फायदे - Sabja Ke Beej Ke Fayde!

आजकल के ज़्यादातर लोगों ने सब्जा के बीज का नाम भी नहीं सुना होगा. इसलिए लोग इसमें मौजूद पोशाक तत्वों और औषधीय गुणों से भी परिचित नहीं हैं. जो लोग गांवों से आते हैं या कभी कभार गाँव जाते हैं उन्हें भी सब्जा के बारे में और इसका महत्व पता होगा. उन लोगों ने गर्मी के दिनों में सब्जा के स्वादिष्ट बीजों का आस्वाद भी चखा होगा. सब्जा के स्वादिष्ट और रसीले बीजों का स्वाद यदि आपने के बार ले लिया तो आपको बार बार इसे चखने का मन करेगा. गर्मी के दिनों में गर्मी से राहत के लिए जब भी शर्बत बनाते हैं तब उसमें भी सब्जा के बीज डाल देने से उसका स्वाद और बढ़ जाता है. इस शर्बत में नींबू, पानी और चीनी के अलावा सब्जा के बीज भी डालें. सब्जा के बीज केवल स्वाद में भी बेहतर नहीं होते हैं बल्कि ये पोषक तत्वों से भी भरे होते हैं. इसमें फाइबर की प्रचुरता होती है. फिर देखें कि इससे स्वाद कितना बढ़ जाता है.
आइए इस लेख के माध्यम से हमलोग सब्जा के बीज के फायदे जानें.

1. बालों के लिए सब्जा के बीज
इसमें विटामिन, प्रोटीन और लोहा की पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं. यह पोषक तत्व बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने के लिए सहायक होते हैं. इस तरह इसके इस्तेमाल से बालों के झड़ने और गंजापन को रोक जा सकता है.

2. सुंदर त्वचा के लिए सब्जा के बीज
सब्जा के बीज और नारियल तेल के मिश्रण त्वचा से संबंधित विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाता है. सबसे पहले नारियल तेल (100 ml) मिले हुये सब्जा के बीज लें. अब इस मिश्रण को 5 मिनट तक गर्म करें. अब इसको छान ले और अपने त्वचा पर लगाएँ. यह सोरायसिस और एग्जीमा जैसी बिमारिओं के इलाज के लिए लाभदायक है.

3. सब्जा के बीज गैस के उपचार के लिए
आज कल गैस एक आम समस्या बन गया है. इसका मुख्य कारण हमारी दोषपूर्ण जीवन शैली और गलत आहार पैटर्न हैं. सब्जा के बीज पेट को ठंडक पहुँचाने में बहुत लाभदायक है. सबसे पहले दूध (1 कप) और तुलसी के बीज लें. अब इसको अच्छी तरह हिलाएं और पियें. यह पेट के जलन को कम करने के लिए प्रभावी है.

4. मधुमेह के उपचार के लिए सब्जा के बीज
तुलसी का बीज रक्त में शुगर को कम करके शुगर टाइप 2 के इलाज में फायेदमंद है. सिक्त सब्जा के बीज, स्वाद के लिए टोंड दूध (1 ग्लास) और वेनिला दिन में एक बार लें. यह आप को ऊर्जा भी देता है बिना किसी शुगर के.

5. कब्ज से भी छुटकारा दिलाता है
जब सिक्त सब्जा के बीज खाने में इस्तेमाल किया जाता है तो यह पेट को अच्छी तरह साफ़ करने में मदद करता है. यह आसान मल त्याग सुनिश्चित करता है और पेट से विष बाहर निकलवाने में मदद करता है. कब्ज की बीमारी में और अधिक लाभ पाने के लिए इसको मिल्क के साथ लिया जा सकता है.

6. ठंडक प्राप्त करने के लिए
इन बीजों को शरीर की गर्मी को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और विभिन्न प्रकार के ठंडक प्रदान करने वाले पेय पदार्थों जैसे फ़ालूदा, रुआवज़ा, नींबू पानी और शर्बत के रूप में भी ठीक से उपयोग किया जाता है.

पोषक तत्वों से भरपृ सब्जा के बीज
इसमें विभिन्न प्रकार के फाइटो-केमिकल्स और पोलिफेनोलिक फ्लेवेनॉइड्स होते हैं जैसे ओरिएंटिन, विसिएनिन और अन्य एंटिओक्सीडेंट्स. इनके पत्तियों में इसेंशियल ऑइल होते हैं. उदाहरण के लिए ईक्विनॉल, सिट्रोनेलॉल, लाइमीन, सिट्राल और टारपीनॉल आदि. इसमें दूसरे बायोकेमिकल्स की भी बहुलता होती है जैसे पोटेशियम, मैंगनीज, तांबा, कैल्शियम, फोलेट्स, मैग्नीशियम, बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन और विटामिन ए आदि प्रमुख हैं.
 

सब्जा के बीज की रेसिपी
सब्जा के बीज को आप कई रेसिपी में स्वाद बढ़ाने के लिए डाल सकते हैं. खीर, भारतीय नींबू पानी, पान गुलकंद खीर, स्ट्रॉबेरी-फ़ालूदा, आम-फ़ालूदा, आम का शर्बत, आदि. नींबू पानी, शिकंजी, शरबत, बेल शरबत, गुलाब भी महत्वपूर्ण स्वस्थ व्यंजनों में से कुछ हैं.
सब्जा के बीज के औषधीय गुण
यह पाचन समस्याओं के इलाज जैसे कब्ज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. त्वचा संक्रमण, सांस की बीमारी, गले की परेशानी और तनाव से राहत दिलाता है. यानि इसके सेवन से कई बीमारियों का इलाज ह सकता है.

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बॉडी बनाने के घरेलू उपाय - Body Bnane Ke Gharelu Upay!

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बॉडी बनाने के घरेलू उपाय - Body Bnane Ke Gharelu Upay!

आजकल के युवाओं में बॉडी बनाने को लेकर बहुत उत्सुकता होती है. कई बार बॉडी बनाने के चक्कर में लोग परेशानी में भी पड़ जाते हैं. इसलिए ये आवश्यक है कि बॉडी बनाने को लेकर थोड़ा सावधान रहा जाए और ऐसे तरीके अपनाया जाए जिससे नुकसान होने की संभावना कम हो. आप आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण भी कमजोर महसूस कर सकते हैं जैसे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, अत्यधिक शराब पीना, भोजन छोड़ना, भावनात्मक तनाव और बहुत शारीरिक श्रम आदि. कई सरल घरेलू उपाय भी आपकी ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं और आपकी शक्ति को बहाल कर सकते हैं.

आइए इस लेख के माध्यम से हम बॉडी बनाने के घरेलू उपायों को जानें.

1. बादाम
बादाम में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में होती हैं जो आपको ऊर्जांवित करता हैं और शरीर में स्फूर्ति जगाती हैं. इसके अलावा बादाम में मैग्नीशियम की प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा स्रोतों में बदलने में एक अच्छी भूमिका निभाती है. मैग्नीशियम की हल्की कमी कुछ लोगों में कमजोरी का कारण हो सकती है.

2. अंडे
बॉडी बनाने के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक संतुलित आहार पर निर्भर रहें. अंडे प्रोटीन, आयरन, विटामिन ए, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन और पैंटोफेनीक एसिड जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हैं. हर दिन अंडे का सेवन करें. आप उबले हुए अंडे, पनीर या हरी सब्जियों के साथ एक आमलेट या एग सैंडविच खा सकते हैं.

3. दूध
दूध को महत्वपूर्ण बी विटामिन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है जो कमजोरी को कम करने के लिए जाना जाता है. इसके अलावा यह कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है जो आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है.

4. मुलेठी
मुलेठी एक और जड़ी बूटी है जो कमजोरी के विभिन्न लक्षणों से लड़ती है. यह जड़ी बूटी प्राकृतिक रूप से शरीर द्वारा निर्मित एड्रि‍नल हार्मोन को प्रेरित किया जिससे आपकी ऊर्जा और चयापचय को बढ़ावा मिलता है.

5. केला
केले सुक्रोज़, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज जैसे प्राकृतिक शर्करा का एक बड़ा स्रोत है जो आपको त्वरित और पर्याप्त ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं. इसके अलावा केले में पोटेशियम है, एक खनिज जिसे आपके शरीर को शक्कर से ऊर्जा में बदलने की जरूरत है. केले में मौजूद फाइबर आपके रक्त में ग्लूकोज स्तर को बनाए रखने में भी मदद करता है.

6. एक्सरसाइज
नियमित व्यायाम और सरल शारीरिक गतिविधियां आपकी सहनशक्ति को मजबूत करती हैं और आपकी मांसपेशियों की ताकत बढ़ाती है. सुबह का समय व्यायाम के लिए सबसे अच्छा होता है. दैनिक रूप से 15 मिनट के लिए वार्म अप और स्ट्रेचिंग आपको ताज़ा और ऊर्जावान रखेंगी. योग और ध्यान भी आपके ऊर्जा के स्तर को उच्च रखने के लिए एक बढ़िया तरीका है.

7. स्ट्रॉबेरी
स्ट्रॉबेरी पूरे दिन आपको ऊर्जावान रख सकते हैं. ये विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरे हुए हैं जो शरीर के ऊतकों की रिपेयर में मदद करते हैं, प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं और मुक्त कणों की क्षति से रक्षा करते हैं. इसके अलावा, आपको स्ट्रॉबेरी से मैंगनीज, फाइबर और पानी की एक स्वस्थ खुराक मिलती है.

8. मैंगो
मैंगो एक मीठा और रसदार फल है जिसमें एक अच्छी मात्रा में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं. आम आहार फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और तांबे का भी एक उत्कृष्ट स्रोत हैं. इसके अलावा, मैंगो में मौजूद लोहा शरीर में लाल रक्त कोशिका की संख्या को बढ़ाकर मुकाबला करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, मैंगो में स्टार्च होता है, जो कि चीनी में परिवर्तित होता है जो आपको तत्काल ऊर्जा प्रदान करता है.

9. पानी
निर्जलीकरण की वजह से थकान हो सकती है, इसलिए हाइड्रेटेड रहने के लिए बहुत सारा पानी, रस, दूध या अन्य तरल पेय पदार्थ पीते रहें. फलों के रस में विटामिन ए, स, और बी 1 आप को ऊर्जावान करते हैं.

10. एक्यूप्रेशर
यह एक स्पर्श चिकित्सा है जिसमें शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए शरीर के कुछ विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव का उपयोग किया जाता है. भौंह के बीच, कंधे की मांसपेशियों में लोअर नैक की साइड में 1-2 इंच, घुटने के नीचे, छाती के बाहरी भाग पर, नाभि के नीचे तीन उंगली की चौड़ाई के बिंदुओं पर दबाव डालने से सामान्य कमजोरी से छुटकारा पा सकते हैं.

11. आंवला
आंवला एक उच्च पौष्टिक फल है जो आपके ऊर्जा स्तर को सुधार सकता है. यह विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, लोहा, कार्बोहाइड्रेट और फास्फोरस का एक अच्छा स्रोत है. रोजाना सिर्फ एक आंवला खाने से आप अपनी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकते हैं.

12. कॉफी
कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क को सक्रिय करता है और आप में तत्काल ऊर्जा को बढ़ावा देता है. कॉफी पीने से कोई नुकसान नहीं होता है जब तक आप इसे कम मात्रा में पीते हैं. ऊर्जावान महसूस कराने के अलावा, यह आपके चयापचय दर में सुधार कर सकती है, धीरज बढ़ा सकती है, फोकस में सुधार कर सकती है और दर्द कम कर सकती है. प्रति दिन दो कप कॉफी से ज्यादा पीना न पिएं. इसके अधिक सेवन से चिंता और अनिद्रा जैसी जोखिम बढ़ सकते हैं.
 

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