Common Specialities
{{speciality.keyWord}}
Common Issues
{{issue.keyWord}}
Common Treatments
{{treatment.keyWord}}
Call Doctor
Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

89 (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

10 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
Consult Online
Call Doctor
Dr. Sanjeev Kumar Singh 89% (192 ratings) Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
10 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
Consult Online
Call Doctor
Submit Feedback
Report Issue
Get Help
Services
Feed

Personal Statement

To provide my patients with the highest quality healthcare, I'm dedicated to the newest advancements and keep up-to-date with the latest health care technologies....more
To provide my patients with the highest quality healthcare, I'm dedicated to the newest advancements and keep up-to-date with the latest health care technologies.
More about Dr. Sanjeev Kumar Singh
He has been a successful Ayurveda for the last 10 years. He has completed Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) . You can book an instant appointment online with Dr. Sanjeev Kumar Singh on Lybrate.com.

Lybrate.com has a nexus of the most experienced Ayurvedas in India. You will find Ayurvedas with more than 28 years of experience on Lybrate.com. You can view profiles of all Ayurvedas online in Lakhimpur Kheri. View the profile of medical specialists and their reviews from other patients to make an informed decision.

Info

Education
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

Location

Book Clinic Appointment with Dr. Sanjeev Kumar Singh

Singh Polyclinic

Opposite Palia Montessori School, Sampurana Nagar Road, Palia KalanLakhimpur Kheri Get Directions
  4.5  (192 ratings)
200 at clinic
...more
View All

Consult Online

Text Consult
Send multiple messages/attachments. Get first response within 6 hours.
7 days validity ₹100 online
Consult Now

Services

View All Services

Submit Feedback

Submit a review for Dr. Sanjeev Kumar Singh

Your feedback matters!
Write a Review

Patient Review Highlights

"Thorough" 1 review "Caring" 1 review "Very helpful" 10 reviews "Helped me impr..." 4 reviews "knowledgeable" 3 reviews "Practical" 1 review "Saved my life" 1 review "Inspiring" 1 review "Professional" 1 review

Feed

योग का महत्व - Importance Of Yoga In Hindi!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
योग का महत्व - Importance Of Yoga In Hindi!

योग का जन्म भारत में हुआ तो सही लेकिन आधुनिक कहे जाने वाले समय में लोगों ने अपनी दौड़ती-भागती जिंदगी से योग को अपनी दिनचर्या से ही हटा लिया. मगर आज भारत में ही नहीं विश्व भर में योग का बोलबाला है और निसंदेह उसका श्रेय भारत के ही योग गुरूओं को जाता है जिन्होंने योग को फिर से पुनर्जीवित किया है. योग को समुचित रूप से साधने के लिए इसके आठ अंग बनाए गए जिसका चौथा सोपान प्राणायाम है. योग के महत्व को समझने के लिए हमें यम, नियम तथा योगासन के बारे में भी जानना होगा. क्योंकि इनके संतुलन से ही हमारा शरीर स्वस्थ और सुंदर बनता है. इसलिए ये हमारे शरीर के सुचारु रूप से संचालन के लिए बहुत ही आवश्यक तत्व हैं. इसकी सहायता से शरीर और मन दोनों में शुचिता आ जाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम योग के महत्व पर प्रकाश डालें ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों द्वारा नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करके इसका लाभ लिया जा सके.

सहज साध्य और सर्वसुलभ-

योग की सबसे अच्छी बात यह हैं कि यह सहज और सभी के करने योग्य हैं. योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ ज्यादा खर्च होता है और न ज्यादा किसी विशेस यंत्र की जरुरत होती है. योगासनों में इतनी विविधता है कि इसका इस्तेमाल अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान और सभी स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकते हैं.

आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों तरह के लाभ-
आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है. शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योग का अपना अलग महत्त्व है.

शरीर के आंतरिक अंगों को ठीक करता है-
योग से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है. इसके द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं. पाचन-संस्थान में गड़बड़ियां उत्पन्न नहीं होतीं.

नाड़ी शक्ति और हड्डियों के लिए-
योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं. इसके साथ ही पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं. इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है.

शरीर स्त्रियों के रचना में करे सुधार-
योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं. वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सुघड़ता और गति, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं. स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, अत: मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है.

बुद्धि के विकास के लिए-
योग से बुद्धि का विकास और मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है. इसके साथ ही धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी भी मिलती है. ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्मसुधार के प्रयास बढ़ जाते हैं.

मानसिक स्थिरता के लिए-
प्राणायाम के द्वारा श्वास-क्रिया का नियमन होता क्योंकि ये हृदय और फेफड़ों को बल देकर रक्त को शुद्ध करते हैं इसके साथ ही ये अपने मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को भी बढ़ाते हैं. शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी ये वरदान स्वरूप ही हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं.

रोगों से करे रक्षा-
योग तमाम रोग विकारों को नष्ट करके उनसे हमारी रक्षा करते हैं. इसलिए इन्हे नियमित रूप से करने वाले व्यक्ति का शरीर निरोग, स्वस्थ एवं बलिष्ठ बनता है. आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है. आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है.

सम्पूर्ण व्यायाम-
योगासन के जरिए हमारे शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, यानि सम्पूर्ण व्यायाम और इससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है. आसन शरीर के पांच मुख्यांगों, स्नायु तंत्र, रक्ताभिगमन तंत्र, श्वासोच्छवास तंत्र की क्रियाओं का व्यवस्थित रूप से संचालन करते हैं जिससे शरीर पूर्णत: स्वस्थ बना रहता है और कोई रोग नहीं हो पाता है.

गर्भावस्था में कमर दर्द के कारण - Garbhawstha Mein Kamar Dard Ke Karan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गर्भावस्था में कमर दर्द के कारण - Garbhawstha Mein Kamar Dard Ke Karan!

यों तो गर्भावस्था में कमर दर्द आम बात है जो शरीर के वजन बढ़ना, मांसपेशियों के खिंचाव इत्यादि कारणों से होते हैं. पर जब अचानक या बहुत तेज कमर दर्द हो तब इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि तुरत अपने डॉक्टर से संपर्क कर उचित सलाह लेनी चाहिए.

गर्भावस्था में कमर दर्द के कारण-
गर्भावस्था के दौरान महिलाएँ कई प्रकार के परेशानियों से गुजरती रहती हैं. उनके शरीर में बदलाव के साथ-साथ उनके हार्मोन्स में भी बदलाव होते हैं. उनके पेट में जो बच्चा रहता है उसका पूरा भार उनके पेट पर नीचे के तरफ रहता है जिसका पूरा असर उनके रीढ़ के हड्डी व कमर पर पड़ता है और इससे पीठ के मांसपेशियों में तनाव होता है. इन्हीं सब कारणों से गर्भावस्था में कमर दर्द या पीठ दर्द होती है जो मुख्य रूप से सेक्रोइलियक जॉइन्ट (Sacroiliac Joint) यानि जहाँ श्रोणि व रीढ़ की हड्डी मिलती है, के पास होता है. इस प्रकार के दर्द के मुख्य कारण ये हैं:

1. वजन बढ़ना: - गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन समान्यतः 11 से 15 किलोग्राम तक बढ़ जाता है. इस सारे वजन को रीढ़ की हड्डी ही सपोर्ट करती है. इसके अलावा बढ़ते बच्चे व गर्भाशय का वजन भी श्रोणि और पीठ की रक्त वाहिकाओं व तंत्रिकाओं पर दबाव डालती है. इन्हीं अतिरिक्त वजन के कारण से गर्भावस्था में पीठ व कमर दर्द हो जाता है.

2. शरीर के गुरुत्व केंद्र में परिवर्तन: - गर्भावस्था में पेट बढ़ जाने के कारण शरीर का आकार बदल जाता है जिस कारण से शरीर का गुरुत्व केंद्र बदल जाता है. इस प्रकार गुरुत्व केंद्र बदलने से बिना ध्यान में आए धीरे-धीरे शरीर की मुद्रा बदल जाती है और फिर जब महिला आगे बढ़ती है तो पीठ या कमर में दर्द या तनाव होता है.

3. हार्मोन में परिवर्तन: - गर्भावस्था के दौरान शरीर में रिलैक्सिन (Relaxin) नामक हार्मोन बनता है. यह हार्मोन श्रोणि क्षेत्र में दो हड्डियों को जोड़ने वाला उत्तक लिंगामेंट्स को आराम पहुंचाता है और जोड़ों को बच्चे के जन्म लेने के लिए थोड़ा ढीला करता है. जोड़ों में यह अस्थिरता भी दर्द का कारण बनता है.

4. मांसपेशियों का अलग होना:- जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता है मांसपेशियों के दो सामानांतर शीट्स, जो पसलियों से प्युबिक हड्डी तक जाती है, बीच से अलग हो सकती है. मांसपेशियों के इस विभाजन से पीठ में ज्यादा दर्द हो सकता है.

5. तनाव: - वजन बढ़ने के कारण या अधिक भार उठाने के कारण या एक ही जगह खड़े रहने से पीठ के मांसपेशियों में तनाव हो जाता है और इस तनाव से पीठ में दर्द होती है. भावनात्मक तनाव से भी पीठ के मांसपेशियों में तनाव हो सकती है और इससे पीठ में दर्द या ऐंठन हो सकता है.

6. कुछ अन्य कारण: - विकासशील शिशु द्वारा गर्भाशय के दीवार पर खिंचाव, वजन बढ़ने के कारण मेरुदंड व कूल्हा के जोड़ व अस्थि-बंधन पर बढ़ रहे तनाव, नसों पर दबाव, मांसपेशी व स्नायुतंत्र पर खिंचाव इत्यादि के कारण कमर दर्द गर्भावस्था में कमर दर्द के साधारण लक्षण हो सकते हैं. पर असहनीय तीव्र कमर दर्द अपरिहार्य गर्भपात, अस्थानिक गर्भावस्था, यौन संक्रमण, मूत्र रोग, पथरी, आंत के रोग या मेरुदंड के नस पर अत्यधिक दबाव के कारण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज करानी चाहिए.

गर्भावस्था में कमर दर्द से छुटकारा पाने के उपाय-
वैसे तो गर्भावस्था में कमर दर्द का होना आम बात है. पर यदि अचानक असहनीय तीव्र दर्द हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि तुरत अपने चिकित्सक से मिलकर उचित इलाज करानी चाहिए. कुछ सावधानी बरतकर महिला गर्भावस्था में होने वाले सामान्य कमर दर्द के परेशानी से बहुत हद तक राहत पा सकती है. इन्हीं सावधानी व उपायों में से कुछ हैं:

करवट सोना चाहिए: -
सोते समय पीठ के बल सोने के बजाय करवट होकर सोना चाहिए. करवट सोते समय भी कम से कम एक घुटना को मोड़कर सोना चाहिए व घुटनों के बीच तकिया लगाना चाहिए. दोनों पैर सीधा करके नहीं सोना चाहिए.

सक्रिय रहना चाहिए व व्यायाम करना चाहिए: - गर्भावस्था में सक्रिय न रहने से कमर दर्द व पीठ दर्द बढ़ सकता है. इसलिए सक्रिय रहना चाहिए व नियमित रूप से हल्का व्यायाम करना चाहिए. व्यायाम से मांसपेशियों को ताकत भी मिलता है. पैदल चलना, टहलना या स्विमिंग करना किया जा सकता है. पर अपने चिकित्सक से पुछकर अपने लिए उचित व्यायाम की जानकारी ले लेनी चाहिए.

मसाज करना चाहिए: - मसाज या मालिश से मांसपेशियों को आराम मिलता है. अतः गर्भावस्था के कमर या पीठ दर्द में भी मालिश करके दर्द के परेशानी से बचा जा सकता है.

सिकाई करना चाहिए: - गर्भावस्था के दर्द से राहत पाने के लिए गर्म पानी के बोतल या बर्फ से सिकाई भी की जा सकती है.

ढीले कपड़ा पहनना चाहिए: - गर्भावस्था में तंग कपड़ा पहने से मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिससे दर्द बढ़ती है इसके अलावा तंग कपड़ा पहनने से रक्त का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो पाता है व मांसपेशियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति भी कम हो जाती है और इस कारण भी गर्भावस्था में कमर दर्द होता है. अतः तंग कपड़ा न पहनकर ढीला-ढाला सूती कपड़ा पहनना चाहिए.

लंबे समय तक खड़े या बैठे नहीं रहना चाहिए: - लंबे समय तक एक ही जगह खड़े या बैठे नहीं रहना चाहिए तथा न ही एक पैर के बल खड़ा रहना चाहिए. बैठने के लिए वैसा कुर्सी लेना चाहिए जिसमें सपोर्ट हो तथा पीठ पर एक तकिया रखना चाहिए. इसके साथ ही पीठ सीधी करके बैठना चाहिए.

भारी वस्तु नहीं उठाना चाहिए: - कोई भी भारी वस्तु नहीं उठाना चाहिए और यदि कोई वस्तु उठाना ही है तो वस्तु को उठाने के लिए कमर के बल नहीं झुकना चाहिए बल्कि घुटना के बल झुकना चाहिए व पीठ पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहिए.

ऊँची एड़ी (High Heels) के जूता या चप्पल नहीं पहनना चाहिए: - ऊँची एड़ी वाले जूता पहनने से खिंचाव बढ़ता है जिससे कमर व पीठ का दर्द बढ़ता है. अतः गर्भावस्था में ऊँची एड़ी वाले जूता या चप्पल नहीं पहनना चाहिए.

झुककर काम नहीं करना चाहिए: - झुककर काम करने से कमर दर्द बढ़ता है अतः कोई भी काम झुककर नहीं करना चाहिए. बल्कि काम सीधे बैठकर करना चाहिए व करते समय पीठ को सीधा रखना चाहिए.

नोट: -
यहाँ दी गई बातें जानकारी के लिए दी गई हैं. पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह के विशेष दर्द या समस्या होने पर उसे नजरअंदाज न करें व अपनी समस्याओं के संदर्भ में अपने चिकित्सक से उचित परामर्श लें.

यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण - Urine Infection Ke Lakshan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण - Urine Infection Ke Lakshan!

यूरिन इन्फेक्शन मूत्र से संबंधित एक ऐसी बीमारी है जो कि महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है. किडनी हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता है, इसके अन्य कार्य भी हैं, जैसे- ब्लड को फ़िल्टर करना, बॉडी में पानी का संतुलन, एसिड और बेस का संतुलन, ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. जैसा कि हर रोग के कुछ कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार यूरिन डिसऑर्डर के भी कई कारण होते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण बैक्टीरिया और फंगस है. इनके कारण यूरिनरी ट्रैक्ट के अन्य ऑर्गन जैसे किडनी, युरेथ्रा और प्रोस्टेट ग्लैंड और वैजाइना में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए यूरिन इन्फेक्शन के विभिन्न लक्षणों पर एक नजर डालें.

यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण-

यूरिन इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • तीव्र गंध वाला पेशाब होना,
  • पेशाब का रंग बदल जाना,
  • मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना,
  • कमज़ोरी महसूस होना,
  • पेट में दर्द
  • बुखार की हरारत इत्यादि.

इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है.

यूरिन इन्फेक्शन के उपचार-
आयुर्वेदिक उपचार-

1. पहला प्रयोग-

यदि आप केले की जड़ के 20 से 50 एमएल रस को 30 से 50 एमएल गौझरण के साथ 100 एमएल पानी मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ पीसकर उसका पेडू पर लेप करने से पेशाब खुलकर आता है.

2. दूसरा प्रयोग-
आधा से 2 ग्राम शुद्ध शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.

3. तीसरा प्रयोग-
यूरिन इन्फेक्शन को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें, क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.

4. चौथा प्रयोग-
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.

5. पाँचवाँ प्रयोग-
इस प्रयोग के लिए आपको सबसे पहले तो 50-60 ग्राम करेले के पत्तों का रस लेना होगा, उसके बाद उसमें चुटकी भर हींग मिलायेँ. इस मिश्रण को पीड़ित को देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है इसके अलावा आप चाहें तो उपलब्ध हने पर 100 ग्राम बकरी के कच्चे दूध में 1 लीटर पानी और शक्कर मिलाकर पिएं.

अन्य घरेलू उपचार-
1. खीरा ककड़ी-

यदि रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.

2. मूली के पत्तों का रस-
यूरिन इन्फेक्शन में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं. यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.

3. नींबू-
नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.

4. पालक-
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.

5. गाजर-
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.

6. मट्ठा-
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.

7. भिंडी-
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.

8. सौंफ-
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से यूरिन इन्फेक्शन में राहत मिलती है.

जल्दी मोटा होने के उपाय - Jaldi Mota Hone Ke Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
जल्दी मोटा होने के उपाय - Jaldi Mota Hone Ke Upay!

मोटापा एक ऐसी अवस्था है जिससे कुछ लोग पीछा छुड़ाना चाहते हैं तो दूसरी तरफ कुछ लोग मोटा होना चाहते हैं. ये लोग मोटा होने के लिए अलग-अलग तरीके खोजते रहते हैं. यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि सामान्य से कम वजन होना भी आपके स्वास्थ्य के लिए उतना ही बुरा होता है जितना मोटापा. इसके अतिरिक्त, कई लोग जो कम वजन की समस्या से परेशान हैं, वे भी वजन बढ़ाने के लिए कई तरीके को अपनाते है. आइए इस लेख के माध्यम से मोटापा बढ़ाने के कुछ तरीके जानें.

कैलोरी के साथ उच्च मात्रा में प्रोटीन भी लें-
वजन बढ़ाने के लिए कैलोरी के साथ सही मात्रा में प्रोटीन भी बहुत महत्वपूर्ण है. अंडा, मीट, मछली, चिकन, दाल, अंकुरित अनाज और डेरी उत्पाद प्रोटीन से समृद्ध आहार भी मोटापे में सहायक होता है. प्रोटीन में एमिनो एसिड होता है जो आपकी मसल्स के लिए बहुत लाभदायक है. ये आहार आपकी मसल्स को टोन और बढ़ाने के लिए बेहद लाभदायक हैं.

हेल्थी फैट-
अच्छी फैट मसल्स के विकास और होर्मोनेस के उत्पादन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. ये मांसपेशियों के विकास और मजबूती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. ये मेटाबोलिक लेवल को बढ़ाती है और इससे शरीर में बेकार फैट निकलने लगती है और अच्छी फैट जमा होती जाती है. अच्छी फैट नट्स, हरी सब्ज़ियों, सल्मोन, अलसी के तेल, एवोकाडो के तेल और अन्य बीज से मिलती है.

वजन बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स-
कुछ मामलों में, डाइट और एक्सरसाइज सभी तरह के पोषक तत्त्व की आपूर्ति नहीं कर पाते है. इसलिए वजन बढ़ाने के लिए आप दूसरा विकल्प भी चुन सकते हैं - अपने आहार के साथ साथ सप्लीमेंट्स का भी सेवन करें जैसे प्रोटीन पाउडर जिसे आप अपने दूध में मिलाकर पी सकते हैं. ये सप्लीमेंट्स मसल्स और वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं.

योग-
योग कई समस्याओं का इलाज करता है जैसे तनाव, खराब मेटाबोलिज्म और स्टैमिना की कमी आदि. ये आपके वजन को बढ़ाने में भी बहुत फायदेमंद है. कई योगासन को करने से आपकी भूख बढ़ती है जैसे सर्वांगासन और पवनमुक्तासन. ये आपके पेट से संबंधित समस्याओं को ठीक करते हैं और भूख को बढ़ाते हैं.

एक्सरसाइज-
यदि कमज़ोर मसल्स में फट जमा होते हैं तो ये मजबूत होती है साथ ही मास भी बढ़ता है. इसके अलावा नीचे कुछ व्यायाम भी दिए गए हैं जो आपकी मांसपेशियों को बढ़ाने में मदद करेंगे. साथ ही ध्यान रहे आप इन व्यायामों को करने के लिए किसी पेशेवर ट्रेनर की मदद ज़रूर लें.

  • ट्विस्टिंग क्रंचेस
  • लेग प्रेस
  • लेग एक्सटेंशन
  • लेग कर्ल्स
  • आर्म कर्ल्स
  • शोल्डर श्रग
  • सीटेड डंबल प्रे.
  • ट्राइसेप्स
  • पुश डाउन
  • बार्बेल स्क्वाट्स
  • पुलअप्स
  • साइड लेटरल रेस
  • डंबल लंजेस
  • वेटेड क्रंचेस


वजन बढ़ाने की खाद्य पदार्थों की सूची तैयार करें-
अगर आपको वजन बढ़ाना है तो खाद्य पदार्थों की एक सूची तैयार करें. पूरे दिन अपने क्या खाया उसपर ध्यान रखें जिससे आपकी रोज़ाना खाना खाने की आदत बेहतर बने. आपका वजन हफ्ते के अंत में जितना भी बढे उसको भी अपनी डायरी में लिखें. इस तरह आपको प्रोत्साहन मिलेगा और आप अपना वजन बढ़ा पाएंगे.

कुछ अन्य सुझाव-
ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज के साथ साथ उच्च कैलोरी के भोजन का सेवन करना, वज़न बढ़ाने के दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं. कहा जाता है कि, इनके अलावा भी कई और चीजें हैं जो आपका वजन तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकती हैं. वजन बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:
1. आपका शरीर जितनी कैलोरी बर्न करता है उससे अधिक कैलोरी खाएं.
2. भोजन करने से पहले पानी न पिएं.
3. यह आपके पेट को भर देता है और फिर पर्याप्त कैलोरी का सेवन करना कठिन हो सकता है.
4. दिनभर में अधिक बार खाने की कोशिश करें.
5. रात को सोने से पहले जब भी आपका मन हो आप अतिरिक्त भोजन या नाश्ता कर सकते हैं.
6. प्रोटीन पहले और सब्जियां बाद में खाएं.
7. अगर आपकी प्लेट में बहुत सारे खाद्य पदार्थ हैं, तो कैलोरी और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ पहले खाएं और सब्जियां बाद में.
8. प्यास बुझाने के लिए अधिकतर दूध पीना, उच्च गुणवत्ता वाली प्रोटीन और कैलोरी प्राप्त करने का एक आसान तरीका है.
9. वजन बढ़ाने वाले शेक पिएं. इनमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी बहुत अधिक होती है.
10. अधिक से अधिक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा खाने की कोशिश करें और इन्हें दिन में कम से कम तीन बार ज़रूर खाएं.
11. ऊर्जा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें और सॉस और मसालों का उपयोग करें.
12. अपनी कॉफी में क्रीम मिलाएं. यह अधिक कैलोरी का सेवन करने का एक आसान तरीका है.

मुलतानी मिट्टी लगाने के फायदे - Multani Mitti Lgane Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मुलतानी मिट्टी लगाने के फायदे - Multani Mitti Lgane Ke Fayde!

मुलतानी मिट्टी का नाम तो आपने भी सुना ही होगा. क्योंकि कई तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का निर्माण इसकी सहायता से किया जाता है. बल्कि यूं कहें कि मुलतानी मिट्टी स्वयं एक सौंदर्य प्रसाधन है. मुलतानी मिट्टी को इसमें मौजूद गुणों के आधार पर प्राकृतिक फेस पैक और प्राकृतिक कंडीशनर कहा जाता है. इसका उपयोग त्‍वचा को निखारने, बालों की समस्‍याओं के साथ थकान को दूर करने के लिए भी किया जाता है. मुलतानी मिट्टी में कई प्रकार के मिनरल्‍स जैसे - मैग्‍नीसियम, क्‍वार्ट्ज, सिलिका, आयरन, कैल्सियम, कैल्‍साइट आदि मौजूद होते हैं. इसका उपयोग बाजार में मिलने वाले विभिन्‍न प्रकार के कॉस्मेटिक उत्पादों में किया जाता है. आइए इस लेख में हमलोग मुलतानी मिट्टी लगाने के कुछ फायदों पर एक नजर डालें.

1. चेहरे को निखारें-

अपने चेहरे को निखारने के लिए मुलतानी मिट्टी से बने फेस पैक का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मुलतानी मिट्टी, मलाई, शहद, बेसन, गुलाबजल को समान मात्रा में डाल कर इसका पेस्ट बना लीजिए. इसे अपने चेहरे पर लगाने के 20 मिनट बाद चेहरे को हल्‍के गुनगुने पानी से धो लें. इसके परिणामस्वरुप आपका चेहरा खिल हुआ महसूस होगा.

2. ऑयली स्किन के लिए-
ऑयली स्किन में कील-मुहांसे होने का ज्यादा जोखिम होता है. अपने त्वचा में मौजूद तेल को सोखने के लिए मुलतानी मिट्टी का प्रयोग कारगर सिद्ध हो सकता है. मुलतानी मिट्टी के साथ गुलाबजल और चंदन पाउडर को बराबर मात्रा में लेकर पेस्‍ट बनाकर, इसे चेहरे पर लगायें. मिट्टी सूखने के बाद हल्‍के गुनगुने पानी से चेहरा साफ कर लें.

3. कील मुहांसे होने पर-
कील मुहांसे से छुटकारे पाने के लिए दो छोटे चम्मच पिसी हुई मुलतानी मिट्टी के साथ एक छोटा चम्मच से नींबू का रस, एक छोटा चम्मच बेसन और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर लेप बनाएं. इस लेप को रोजाना चेहरे पर लगाने से मुंहासे दूर हो जाएंगे.

4. त्‍वचा का कालापन-
त्‍वचा का कालापन दूर करने के लिए 2 चम्मच मुलतानी मिट्टी, 1 चम्मच सरसों का तेल, 1 चम्मच मलाई, 1 चम्मच बेसन व थोड़ी सी हल्दी लेकर पेस्‍ट बना लीजिए. इसे पेस्ट को नहाने से पहले पूरी त्वचा पर लगाने से त्वचा का कालापन दूर होता है.

5. झुर्रियां होने पर-
झुर्रियों के लिए मुलतानी मिट्टी का प्रयोग कीजिए, 2 चम्मच मुलतानी मिट्टी, 5 बादाम की गिरि व 4 चम्मच खीरे का रस मिलाकर पेस्‍ट बना लीजिए. इस पेस्‍ट को सप्ताह में एक बार चेहरे पर लगाने से झुर्रियों की समस्‍या दूर होगी.

6. घने बालों के लिए-
मुलतानी मिट्टी त्‍वचा के अलावा बालों की समस्‍या से भी निजात दिलाती है. 2 बड़े चम्मच मुलतानी मिट्टी के साथ 1 बड़ा चम्मच दही, 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस मिलाकर बालों पर लगाएं. मिटटी को बालों पर लगाने के 20 मिनट बाद धो लें, इसका नियमित प्रयोग करने से बाल काले, घने और मुलायम होंगे.

7. डैंड्रफ भगाने के लिए-
डैंड्रफ बालों की बड़ी समस्‍या है, अगर इसका समय पर उपचार न किया जाए तो हेयरफाॅल होने लगते हैं. चार चम्‍मच मुलतानी मिट्टी के साथ दो-दो चम्‍मच नींबू का रस और शहद लेकर एक पेस्‍ट बना लीजिए. कुछ सप्‍ताह तक निरंतर नहाने से 20 मिनट पहले इस पेस्‍ट को बालों पर लगाने से डैंड्रफ की समस्‍या से निजात मिल जाती है.

8. थकान मिटाएं-
भागदौड़ के कारण थकान होना एक सामान्‍य बात है. थकान को दूर करने के लिए मुलतानी मिट्टी में पानी डालकर पेस्‍ट बनाकर थकान वाली जगह पर लगाइए, सूखने के बाद हल्‍के गरम पानी से इसे धो लें, यह आपको थकान से राहत देती है.

9. दो मुहें बालों के उपचार में-
अगर बालों की सही तरह से केयर न की जाए तो वे दोमुंहे हो जाते हैं. मुलतानी मिट्टी को प्राकृतिक शैंपू और कंडीशनर कहा जाता है. दोमुहें बाल होने पर बालों में मुलतानी मिट्टी लगाने से यह समस्‍या दूर होती है और आपके बाल घने और मुलायम भी होते हैं.

10. बालों की कई अन्‍य समस्‍याओं के उपचार में-
अगर आप अपने मोटे और घुंघराले बालों से परेशान हैं तो मुलतानी मिट्टी का इस्तेमाल कारगर सिद्ध होगा. एक कप मुलतानी मिट्टी के साथ चार चम्‍मच चावल का पानी, एक अंडे का सफेद भाग और एक कप पानी लेकर पेस्‍ट बनाएं. रात में सोने से पहले बालों में तेल लगाएं और सुबह उठकर बालों में पेस्‍ट लगाएं, इसके परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों में आपके बाल सीधे हो जाएंगे.

मोच का उपचार - Moch Ka Upchar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मोच का उपचार - Moch Ka Upchar!

मोच आने का कोई खास वक्त या तरीका नहीं है ये कभी भी किसी भी तरह से आ सकती है. कभी चलते समय तो कभी कुछ सामान उठाते समय तो कभी किसी और तरीके से मोच आ सकती है. मोच या तो अचानक दौड़ते हुए या चलते हुए पैरों में मोच आ जाना, यह एक आम समस्या है. मोच आने पर इंसान एक जगह अपना पैर पकड़कर बैठ जाता है और उसे बहुत दर्द झेलना पड़ता है. इसलिए आज हम कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे लेकर आए हैं जिन्हें अपनाकर पैर में आई हुई मोच से जल्दी आराम पाया जा सकता है. इसके उपचार में भिन्नता होती है और इसमें आराम (रेस्ट), बर्फ़(आइस), संपीड़न(कम्प्रेशन), और उत्थापन(इलेवेशन) (RICE) और साथ ही जलन-रोधी दवाएं शामिल हो सकती हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम मोच के विभिन उपचारों पर एक नजर डालें ताकि इस विषय में हम जागरूक हो सकें.

1. फिटकरी

एंटिसेप्टिक के रूप में काम आने वाली फिटकरी का इस्तेमाल आप मोच के उपचार में भी कर सकते हैं. एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच फिटकरी मिलाकर इसका सेवन करें. इसका सेवन करने से मोच काफी जल्दी ठीक हो जाएगी.

2. हल्‍दी
दो चम्‍मच हल्‍दी में थोड़ा सा पानी मिला कर पेस्‍ट बना लें. अब इस पेस्ट को हल्का गर्म करके मोच वाली जगह पर लगाएं. फिर 2 घंटे के बाद पैरों को गुनगुने पानी से धो लें. मोच के उपचार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करने से काफी जल्दी और प्रभावशाली ढंग से असर होता है.

3. चूना
चुना का इस्तेमाल अक्सर तंबाकू खाने वाले लोग करन्ते हैं. लेकिन आपको बता दें कि शहद और चूने की एक समान मात्रा को आपस में मिला कर मोच वाली जगह पर हल्‍की मालिश करने से काफी असरदार तरीके से राहत मिलती है.

4. तुलसी
घर-घर में पाई जाने वाली तुलसी का इस्तेमाल हमलोग कई रोग में औषधि के रूप में करते हैं. तुलसी की कुछ पत्तियों को पीसकर इसका पेस्ट तैयार करें और फिर उसको मोच वाले स्थान पर लगाएं. ऐसा करने से काफी आराम महसूस होगा.

5. बर्फ
थोड़े से बर्फ के टुकड़ों को किसी एक कपड़े में रखकर सूजन वाले जगह पर लगाएं. इससे सूजन कम हो जाती है और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है. मोच में बर्फ से भी काफी राहत मिलती है. लेकिन ध्यान रहे ज्यादा देर तक इस्तेमाल न करें.

मोच के अलग-अलग प्रकार के हिसाब से मोच का उपचार-
1. मोच खाए टखने: -
बहुत से लोग टखने में आई मोच का उपचार घर पर ही आराम, बर्फ, और दर्द निवारकों से करते हैं. गंभीर रूप से आई मोच के लिए डॉक्‍टर को दिखाना पड़ सकता है.

2. अंगूठे में मोच: - उपचारों में पट्टी या कास्ट से जोड़ को स्थिर करना और सूजन कम करने के लिए बर्फ़ लगाना शामिल है. शायद ही कभी, स्नायु के पूरी तरह फट जाने पर शल्य चिकित्सा की जरूरत हो सकती है.

3. कलाई में मोच: - आराम, बर्फ़, दर्दनिवारक दवाएं, और कलाई को ऊंचा करने से मदद मिल सकती है. डॉक्टर पट्टी के साथ जोड़ को स्थिर कर सकते हैं.

4. घुटने में मोच: - जल्द से जल्द आराम करने, ऊंचाई पर रखने और बर्फ लगाने से सूजन कम हो जाती है.
 

मैदा खाने के नुकसान - Maida Khane Ke Nuksan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मैदा खाने के नुकसान - Maida Khane Ke Nuksan!

मैदा एक रिफाइंड गेहूं का आटा है. गेहूं के ऊपरी छिलके को हटा कर बचे हुए सफेद हिस्से को बारीकी से पीस कर मैदा मैदा बनाया जाता हैं. उसके बाद बचे हुए सफेद हिस्से को बारीक पीसकर मैदा बनता है. गेहूं के सबसे ज्यादा पोषक तत्त्व इसी परत में होते है जो मैदा बनाते समय निकल जाता है. छिलका हटने से मैदे में फाइबर बिल्कुल नहीं होता है. इसके बाद इसे बेंजोइल पेरोक्साइड ब्‍लीच किया जाता है जिससे इसको साफ और सफेद रंग और टेक्‍सचर दिया जाता है. मैदा का इस्तेमाल आज बहुत व्यापक हो चूका हैं. मैदा खाने को लेकर कई लोगों को तो पता भी होता है कि ये नुकसानदेह है लेकिन इसके बावजूद जिह्वा के स्वाद के लिए वो इसे खाते हैं. दरअसल इससे ऐसी चटकदार चीजें बनाई जाती हैं कि लोग इनकार नहीं कर पात हैं. समोसे से लेकर मोमोज तक मैदा से बनी ऐसी कई चीजें हैं जो लगभग सभी के दिल पर राज करती है. भूख लगने पर हमें सबसे ज्‍यादा इन्‍हीं स्‍नैक्‍स की याद आने लगती है. मैदे के कई साइड इफेक्‍ट होते हैं, जो लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद ही पता चलते है. आइए मैदा खाने के नुकसानों को जानें ताकि हमारा स्वास्थ्य इससे प्रभावित न हो सके.

1. मोटापा बढ़ा-

मैदा में स्‍टार्च की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इसलिए इसे खाने से मोटापा बढ़ता है. मैदा खाने से शरीर का वजन बढ़ने की समस्या भी शुरू हो जाती है. यही नहीं इससे कोलेस्‍ट्रॉल और ब्‍लड में ट्राइग्‍लीसराइड स्‍तर भी बढ़ता है. इसलिए अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो यदि अपने आहार में से मैदे को हमेशा के लिये हटा दें.

2. डायबिटीज का खतरा-
शुगर एक बहुत ही गंभीर बिमारी है जिसका ट्रीटमेंट समय रहते न किया जाए तो रोगी के मौत भी हो सकती है. मैदा खाने से शुगर लेवल तुरंत ही बढ़ जाता है, क्‍योंकि इसमें बहुत ज्‍यादा हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स होता है. तो इसलिए अगर आप बहुत ज्‍यादा मैदे का सेवन करते हैं, तो पैंक्रियास की चिंता आपको अवश्य करना चाहिए.

3. हड्डियां और इम्‍यूनिटी में कमजोरी-
गेहूं से मैदा बनाते समय इसमें से प्रोटीन निकाल लिया जाता है, जिसके कारण यह एसिडिक बन जाता है जो हड्डियों से कैल्‍शियम को खींच लेता है. इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इसे खाने से मसल्‍स कमजोर होती है और अर्थराइटिस की संभावना बढ़ जाती है. मैदे के नियमित सेवन से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर हो जाता है और बार-बार बीमार होने की संभावना बढ़ने लगती है.

4. पेट की समस्‍या और फूड एलर्जी-
मैदा पेट के लिए अच्‍छा नहीं होता है, क्‍योंकि इसमें डाइट्री फाइबर बिलकुल भी नहीं होता, इसलिए जब कोई मैदे से बनी सामग्री का सेवन करता है तो ये पूरी तरह से पच नहीं पाता है. सही से पाचन न हो पाने के कारण इसका कुछ हिस्सा आंतों में ही चिपक जाता है और कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है. इसके सेवन से अक्सर कब्ज की समस्या हो जाती है. मैदे में भारी मात्रा में ग्‍लूटन पाया जाता है जो खाने को लचीला बना कर उसको मुलायम टेक्‍सचर देता है, फूड एलर्जी का कारण बनता है.

मेहंदी लगाने का तरीका - Mehandi Lgane Ka Tareeka!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मेहंदी लगाने का तरीका - Mehandi Lgane Ka Tareeka!

मेहंदी का नाम सुनते ही हमें विभिन्न त्योहारों में महिलाओं द्वारा हाथ-पैर में लगाए जाने वाले मेहंदी की याद आ जाती है. मेहंदी लगाने के लिए महिलाओं को विभिन्न मौकों पर पर्याप्त अवसर उपलब्ध होते हैं जैसे सावन, हरियाली तीज, रक्षाबंधन, कोई वैवाहिक उत्सव या कोई अन्य खुशी का मौका हो तो ऐसे मौकों पर मेहंदी लगाने का अवसर महिलाएं छोड़ना नहीं चाहती हैं. मेहंदी की लोकप्रियता और आकर्षित करने की इसकी खासियत के कारण अब इसे महिलाओं के सौंदर्य और श्रंगार का एक अहम हिस्सा माना जाता है. आजकल लोगों की शिकायत होती है कि मेहंदी चढ़ती तो गहरी है, लेकिन पहले की तरह ज्यादा दिन टिकती नही. तो इसका कारण क्या है? आखिर कहाँ कामी रह जाती है कि इतने परिश्रम के बावजूद मेहंदी तिक नहीं पाती है? दरअसल पहले मेहंदी सीधे इसके पौधे निकालकर इस्तेमाल करते थे लेकिन आजकल मेहंदी के कोन आसानी से बाजारों में मिल जाते हैं इसलिए लोगों ने घरों में इन्हें बनाना लगभग बंद ही कर दिया है. बाजार की मेहंदी में केमिकल होने के कारण ये जितनी जल्दी गहरी होती है उतनी ही जल्दी उतर भी जाती है. इसके अलावा जब ये उतरती है तो परतों में उतरती है इसके कारण उतरते समय इसका रंग काफी खराब हो जाता है. इसलिए कोन खरीदने की बजाय इसे घर में बनाएं. आइए इस लेख के माध्यम से मेहंदी लगाने के तरीकों पर एक नजर डालें.

इस तरह से मेहंदी तैयार करना ठीक रहेगा-

मेहंदी तैयार करने के लिए सबसे पहले मेहंदी पाउडर को बिल्कुल बारीक कपड़े से छान लें. एक पैन में पानी गर्म करें. इसमें इसमें आधा चम्मच कत्था, आधा चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच चायपत्ती डालकर अच्छे से उबालें. अब मेहंदी को एक चौड़े बर्तन में लें. पानी जब ठंडा हो जाए तो इसे धीरे—धीरे डालते हुए मेहंदी को अच्छे से ऐसे मिलाए कि एक भी गांठ शेष न रहे. मेहंदी को लसीला बनाने के लिए दो-चार भिंडी को भी पानी के साथ उबाल सकते हैं. यदि चुकंदर का मौसम हो तो इसे घिसकर बारीक कपड़े से छानकर रस निकालें पर मेहंदी में डालें, खूबसूरत रंग चढ़ेगा. ध्यान रहे मेहंदी को कम से कम 2 से 3 घंटे भिगोएं. इसे भिगोने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें.

मेहंदी लगाते समय रहे ध्यान-
यदि मेहंदी लगाते समय भी आप कुहच बातों का ध्यान रखें तो आपको इसका स्पष्ट फायदा नजर आएगा. इसके लिए एक पॉलिथिन से कोन बना लें और इसमें बारीक सुई से छेद करें. अब इस कोन में मेंहंदी भर लें. हाथों को अच्छे से धोकर साफ कर लें. इसके बाद पोंछकर ही मेहंदी लगवाएं. लेटेस्ट डिजायन के लिए बाजार में बिकने वाली किताबों की मदद ले सकते हैं. धीरे—धीरे कोन को दबाते हुए मेहंदी का डिजायन तैयार करें. जब मेहंदी सूखने लगे, तब इस पर नींबू का रस और चीनी मिले पानी का लेप करें. लेप करने के बाद इसे कम से कम 8 से 9 घंटे मेहंदी रखें. जितनी देर हाथों पर मेहंदी रहेगी उतनी ही अच्छी रचेगी. जितनी ज्यादा अच्छी रचेगी उतनी ही खूबसूरती भी बढ़ाएगी.

मेहंदी सूखने के बाद-
बात मेहंदी का लेप लगा लेने के बाद ही खत्म नहीं हो जाती है. बल्कि इसके बाद भी कुछ चीजें करने से मेहंदी का अप्रभाव ज्यादा दिनों तक बरकरार रहेगा. मेहंदी सूखने के बाद इसे किसी बिना धार वाले चाकू से की मदद से या दोनों हाथों को रगड़ कर उतारें. उतारने के बाद लौंग को तवे पर गर्म करके सावधानीपूर्वक इसका धुआं लें. 2 से 3 घंटे तक इस पर पानी न डलने दें. यदि जरूरी हो तो काम पॉलिथिन पहनकर या ग्लव्स पहनकर करें. इसके बाद आपकी मेहंदी का रंग भी बहुत खूबसूरत आएगा, साथ ही ये जल्दी उतरेगी भी नहीं.

मेथी दाना के फायदे - Methi Daane Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मेथी दाना के फायदे - Methi Daane Ke Fayde!

मेथी दाना के फायदे से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं. इसकी पौष्टिकता और तमाम समस्याओं से लड़ने की क्षमता बहुत ज्यादा है लेकिन फिर भी ये अन्य तेलों की तरह लोकप्रियता नहीं हासिल कर सका है. कई पौधों के बीजों से तैयार तेल जिसमें अपेक्षाकृत कम पोषक तत्व होते हैं वो ज्यादा प्रचलित हैं. लेकिन मेथी दाना के फायदे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. इसमें कई तरह के अस्थिर ऑर्गेनिक यौगिक पाए जाते हैं. आइए निम्लिखित लेख के माध्यम से हम मेथी दाना के फायदे को विस्तारपूर्वक जानें.

1. मालिश के लिए-

मालिश करने से भी व्यक्ति को आराम या सुकून मिलता है और इसके बाद ताजगी महसूस करता है. लेकिन यदि आप ये मालिश मेथी दाना में बादाम के तेल को मिलाकर करेंगे तो आपको मानसिक शान्ति के आलावा त्वचा की चमक भी मिलेगी.

2. त्वचा के लिए-
त्वचा के लिए मेथी दाने से निकले तेल को इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए जैतून के तेल में मेथी दाना की कुछ बूंदें डालकर त्वचा पर मालिश करने से आपके त्वचा का रूखापन, सूजन और एलर्जी के उपचार में मदद मिलती है.

3. शुगर के उपचार में-
शुगर जैसी बिमारियों के उपचार में भी मेथी दाना की सहायता ली जा सकती है. ये ग्लूकोज को बढ़ाकर रक्त शर्करा को भी कम कर सकता है. ये बीटा कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से भी बचाकर इन्सुलिन को भी प्रोत्साहित करता है.

4. रुसी दूर करने में-
यदि आप भी बालों में रुसी की समस्या से परेशान हैं तो आपको भी मेथी दाने से निकले तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए आपको इसके लिए आपको 5 बूँद दालचीनी तेल के साथ मेथी का तेल मिलाकर इस मिश्रण को सर पर अच्छे से लगाएं. कुछ घंटे बाद इसे शैम्पू से धो लें. इससे रुसी ख़त्म होती है.

5. मुंहासों को दूर करने में-
मुंहासों के दूर करने के लिए भी मेथी दाना का इस्तेमाल किया जा सकता है. मेथी दाना का 5 बूंद, 5 मिलीलीटर जोजोबा तेल में मिलाकर लगाने से मुंहासे आदि को दूर करने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट भी पिम्पल्स को रोकता है.

6. फोड़े फुंसी के उपचार में-
फोड़े-फुंसी के उपचार में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. मेथी का तेल सिस्ट्स को हटाने और फॉलिकल्स जैसी समस्याओं को भी दूर करने में काफी मददगार होती है.

7. स्तनों के विकास में-
जो महिलाएं अपने स्तनों के वृध्दि के लिए प्रयासरत हैं वो मेथी दाना का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके लिए ब्रेस्ट फार्मिंग तेल के साथ मेथी दाना को मिलाकर हथेलियों पर रखें और स्तनों की मालिश करें.

8. अरोमाथेरेपी में-
अरोमोथेरेपी में हवा में सुगंध फैलाकर उपचार किया जाता है. इसके लिए डिफ्युजर या एक तेल बर्नर में लगभग 4-5 बूँद मेथी का तेल मिलाकर इस्तेमाल करने से तंत्रिका तंत्र पर आरामदायक प्रभाव पड़ता है. इससे आप भी सुकून महसूस करेंगे.

9. गुर्दे के लिए-
गुर्दे के सेहत के लिए भी मेथी का तेल फायदेमंद साबित होता है. इसके मालिश से गुर्दे और अग्नाशय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इससे सम्बंधित कई परेशानियाँ दूर होती हैं. इसका इस्तेमाल सुरक्षित भी है.

10. बलगम दूर करने में-
बलगम से परेशान व्यक्ति भी मेथी दाना की सहायता से अपनी परेशानी दूर कर सकता है. इसके लिए एक बर्तन में पानी उबालकर लगभग 10 बूंद मेथी का तेल मिलाएं. फिर किसी तौलिये की मदद से भाप लें. इससे आपको निश्चित रूप से राहत मिलेगी.

योगासन और प्राणायाम - Yogasan Aur Pranayam!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
योगासन और प्राणायाम - Yogasan Aur Pranayam!

माना जाता है कि योग का जन्म भारत में ही हुआ मगर दुखद यह रहा की आधुनिक कहे वाले समय में अपनी दौड़ती-भागती जिंदगी से लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या से हटा लिया. जिसका असर लोगों के स्वाथ्य पर हुआ. मगर आज भारत में ही नहीं विश्व भर में योग का बोलबाला है और निसंदेह उसका श्रेय भारत के ही योग गुरूओं को जाता है जिन्होंने योग को फिर से पुनर्जीवित किया. योग को समुचित रूप से साधने के लिए इसके आठ अंग बनाए गए जिसका चौथा सोपान प्राणायाम है. योगासन और प्राणायाम के महत्व को समझने के लिए हमें यम, नियम तथा योगासन के बारे में भी जानना होगा. क्योंकि इनके संतुलन से ही हमारा शरीर स्वस्थ और सुंदर बनता है. इसलिए ये हमारे शरीर के सुरचारु रूप से संचालन के लिए बहुत ही आवश्यक तत्व हैं. जहां तक बात प्राणायाम की है तो इसके बाद प्रत्याहार, ध्यान, धारणा तथा समाधि जैसे इसके घटक भी मन को सुदृढ़ करने के मानसिक साधन हैं. प्राणायाम शारी और मन दोनों के बीच का साधन है, अर्थात्‌ इससे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के लाभ अर्जित किए जा सकते हैं. इसकी सहायता से शरीर और मन दोनों में शुचिता आ जाती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम योगासन और प्राणायाम के महत्व को समझें ताकि लोगों द्वारा नियमित रूप से इसका इस्तेमाल किया जा सके.

योगासन और प्राणायाम के गुण और लाभ-

1. सहज साध्य और सर्वसुलभ: -
योगासन और प्राणायाम का सबसे बड़ा गुण यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं. योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है. योगासनों में इतनी वैरायटी है कि इसका इस्तेमाल अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान और सभी स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकते हैं.

2. आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों तरह के लाभ: - आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है. शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासन और प्राणायाम का अपना अलग महत्त्व है.

3. ठीक करे शरीर के आंतरिक अंगों को: - योगासन और प्राणायाम से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है. इसके द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं. पाचन-संस्थान में गड़बड़ियां उत्पन्न नहीं होतीं.

4. नाड़ी शक्ति और हड्डियों के लिए: - योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं. इसके साथ ही पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं. इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है.

5. शरीर स्त्रियों के रचना में करे सुधार: - योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं. वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सुघड़ता और गति, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं. स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, अत: मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है.

6. बुद्धि के विकास के लिए: - योगासन और प्राणायाम से बुद्धि का विकास और मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है. इसके साथ ही धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी भी मिलती है. ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्मसुधार के प्रयास बढ़ जाते हैं.

7. मानसिक स्थिरता के लिए: - प्राणायाम के द्वारा श्वास-क्रिया का नियमन होता क्योंकि ये हृदय और फेफड़ों को बल देकर रक्त को शुद्ध करते हैं इसके साथ ही ये अपने मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को भी बढ़ाते हैं. शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी ये वरदान स्वरूप ही हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं.

8. रोगों से करे रक्षा: - आसन और प्राणायाम तमाम रोग विकारों को नष्ट करके उनसे हमारी रक्षा करते हैं. इसलिए इन्हे नियमित रूप से करने वाले व्यक्ति का शरीर निरोग, स्वस्थ एवं बलिष्ठ बनता है. आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है. आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है.

9. सम्पूर्ण व्यायाम: - योगासन के जरिए हमारे शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, यानि सम्पूर्ण व्यायाम और इससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है. आसन शरीर के पांच मुख्यांगों, स्नायु तंत्र, रक्ताभिगमन तंत्र, श्वासोच्छवास तंत्र की क्रियाओं का व्यवस्थित रूप से संचालन करते हैं जिससे शरीर पूर्णत: स्वस्थ बना रहता है और कोई रोग नहीं होने पाता.

View All Feed