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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

9 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
Dr. Sanjeev Kumar Singh Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Motiyabind ka Treatment - मोतियाबिंद का इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Motiyabind ka Treatment - मोतियाबिंद का इलाज

हमारे देश में एक ऐसी बीमारी है जो ज्यादातर बुजुर्ग लोगों में देखा जाता है इनमें से भी महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है. मोतियाबिंद की बीमारी भरोसा हमारी आंखों के लेंस में धुंधलापन आने के कारण होती है. इससे हमारी आंखों में देखने की क्षमता में कमी आ जाती है. ऐसा तब होता है जब आंखों में प्रोटीन के गुच्छे जमा होने लगते हैं और यह गुच्छे बैलेंस को रेटिना का स्पष्ट चित्र भेजने से भेजने में बाधा पहुंचाते हैं. दरअसल रेटिना लेंस के माध्यम से संकेतो में प्राप्त होने वाली रोशनी को परिवर्तित करने का काम करता है. यह संकेत को ऑप्टिक तंत्रिका तक पहुंचाकर फिर उन्हें मस्तिष्क में ले जाता है मोतियाबिंद की बीमारी अक्षर धीरे-धीरे विकसित होती है और यह दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती है इसमें रंगों का फीका देखना धुंधला दिखना प्रकाश की चाल रोशनी जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं. मोतियाबिंद में न्यूक्लियर मोतियाबिंद महिलाओं में ज्यादा देखने में आता है. आइए अब हम मोतियाबिंद के उपचार के बारे में समझें.
मोतियाबिंद का उपचार

  • मोतियाबिंद उपचार मरीज के दृष्टि के स्तर पर आधारित है. इस जांच के स्तर को देखने के बाद अगर मोतियाबिंद दृष्टि को कम प्रभावित करता है या बिल्कुल नहीं करता तो कोई इलाज की आवश्यकता नहीं होती. ऐसे मरीजों को ये सलाह दी जाती है कि अपने लक्षणों का ध्यान रखें और नियमित चेक-अप कराते रहें.
  • कई बार ऐसा होता है कि चश्मा बदलने मात्र से ही दृष्टि में अस्थायी सुधार हो जाता है. इसके अलावा, चश्मा के लेंस पर एंटी-ग्लेयर की परत लगवाने से रात में ड्राइविंग में मदद मिल सकती है और पढ़ने में उपयोग होने वाले प्रकाश की मात्रा में वृद्धि करना भी फायदेमंद हो सकता है.
  • जब मोतियाबिंद का स्तर काफी बढ़ जाता है तब यह किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की सामान्य कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करने लगता है. ऐसे में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है. मोतियाबिंद सर्जरी बहुत आसान होती है इसमें आंखों के लेंस को हटाकर इसे एक अर्टिफिशियल लेंस से बदल दिया जाता है.

मोतियाबिंद सर्जरी के दृष्टिकोण

  • स्माल-इंसीज़न - इसमें कॉर्निया (आंख का स्पष्ट बाहरी आवरण) के पास एक चीरा लगाकर आंखों में एक छोटा सा औज़ार डाला जाता है. यह औज़ार अल्ट्रासाउंड तरंगों का उत्सर्जन करता है जो लेंस नरम करता है जिससे वह टूट जाता है और उसे बाहर निकालकर उसे बदल देते हैं.
  • एक्स्ट्राकैप्सुलर सर्जरी – इस सर्जरी में कॉर्निया में एक बड़ा चीरा लगाया जाता है ताकि लेंस को एक टुकड़े में निकला जा सके. इसके बाद प्राकृतिक लेंस को एक स्पष्ट प्लास्टिक लेंस से बदल दिया जाता है जिसे इंट्राओक्युलर लेंस (आईओएल) कहा जाता है.
  • नियमित जांच से - मोतियाबिंद को रोकने का कोई बहुत प्रभावी तरीका नहीं है. लेकिन कुछ जीवन शैली की कुछ आदतों में बदलाव करके इसके विकास को धीमा किया जा सकता है. इसके लिए नियमित तौर पर अपनी आँखों की जाँच कराना चाहिए क्योंकि नियमित रूप से आँखों की जाँच कराने से आपके डॉक्टर अपनी आँखों में होने वाली परेशानियों का जल्दी निदान कर पाएंगे.
  • नशीले पदार्थों का सेवन बंद करके - मोतियाबिंद पर हुए कई शोधों में ये पाया गया है कि सिगरेट व शराब का सेवन ज़्यादा करने वाले लोगों में मोतियाबिंद होने का खतरा अधिक होता है.इसलिए इसके सेवन से बचें.
  • स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें - हम सभी के लिए एक स्वस्थ आहार प्राथमिकता होनी चाहिए. हमें अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त खाद्य पदार्थ, विटामिन सी और विटामिन ई की भरपूर मात्रा लेनी चाहिए.
  • सूर्य की सीधी रौशनी से बचें - सूर्य की रौशनी से अपनी आँखों को ढकें पराबैंगनी विकिरण से मोतियाबिंद होने का जोखिम बढ़ जाता इसीलिए अपने जोखिम को कम करने के लिए किसी भी मौसम में यूवीए/यूवीबी से बचने वाला धूप का चश्मा और टोपी पहनें.
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Treatment of Eye Weakness - आँखों की कमजोरी का इलाज

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Treatment of Eye Weakness - आँखों की कमजोरी का इलाज

आँखें ही हमारे शरीर का वो अंग है जिससे हम इस दुनिया को पूरी तरह महसूस कर सकते हैं. आँखों के बिना सब कुछ अजीब लगता है. जाहिर है कई लोगों के पास प्राकृतिक रूप से और कुछ लोग दुर्घटनावश आँखें नहीं होतीं. इसलिए उनका जीवन थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसलिए हमें हमारी आँखों के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. आँखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत हिस्सा हैं. इसलिए आँखों की देखभाल अत्यंत आवश्यक है. दृष्टि होने से हम अपने चारों ओर एक रंगीन और विविध दुनिया देख पाते हैं और स्पष्ट रूप से देखने की क्षमता सब कुछ बेहतर बना देती है. आपको बता दें कि आँखों की माशपेशियां शरीर में सबसे अधिक क्रियाशील होती हैं. तो इसलिए आइए हम अपने बेहतर दृष्टि के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्राकृतिक तरीके जानें.

  • आंवला: आँवला रेटिना की कोशिकाओं के समुचित कार्य को भी सुनिश्चित करता है. आँवला विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट के साथ समृद्ध होता है और आँखों की देखभाल के लिए बहुत अच्छा है. आप आँवले का कच्चे रूप में या एक अचार के रूप में भी उपभोग कर सकते हैं. आप स्वस्थ आँखों के लिए एक गिलास आँवले का रस हर दिन पी सकते हैं.
  • सौंफ: सौंफ एक अद्भुत महान जड़ी बूटी है जो प्राचीन रोम के लोगों द्वारा दृष्टि के लिए प्रयोग की गई थी. यह पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है जो दृष्टि में सुधार कर सकते हैं. रात का खाना खाने के बाद, आप हर रात कुछ चीनी के साथ सौंफ खा सकते हैं और इसके बाद गर्म दूध का एक गिलास ले सकते हैं.
  • पर्याप्त नींद: आपकी कीमती आँखों को समुचित आराम चाहिए होता है. आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आप उन्हें सीमा से परे थकने ना दें. उचित विश्राम के लिए दैनिक 7-8 घंटे की एक अच्छी नींद लें. नींद आँखों के तनाव से छुटकारा पाने और आपको ताज़ा रखने में मदद करती है. रात में देर तक जागना आपकी दृष्टि खराब कर सकता है.
  • ब्लू बेरी: यह एक जड़ी बूटी है जो एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है. यह रेटिना को उत्तेजित करती है और दृष्टि में सुधार भी करती है. यह विभिन्न नेत्र विकारों से भी सुरक्षा प्रदान करती है. जैसे मांसपेशियों का अध यह फल विशेष रूप से अच्छा है और बेहतर नेत्र दृष्टि के लिए आहार में शामिल किया जा सकता है.
  • आँखों का व्यायाम: एक आरामदायक स्थिति में बैठें और अपने अंगूठे के साथ अपने हाथ को बाहर खींछे. अब अपने अंगूठे पर ध्यान केंद्रित करें. हर समय ध्यान केंद्रित करते हुए, जब तक आपका अंगूठा आपके चेहरे के सामने लगभग 3 इंच तक ना आ जाए और फिर दूर करें जब तक आपका हाथ पूरी तरह से फैल ना जाए. कुछ मिनटों के लिए यह करें. यह व्यायाम ध्यान केंद्रित करने और आंख की मांसपेशियों में सुधार लाने में मदद करता है. एक और उपयोगी व्यायाम है, अपनी आँखो को बाएं किनारे से दाहिने किनारे तक ले जाएं, फिर ऊपर की तरफ भौं केंद्रित करें और फिर नीचे की ओर नाक की नोंक पर देखें.
  • सूखे मेवे: सूखे मेवे और नट्स खाना भी आँखों के लिए फायदेमंद होता है. नट्स जैसे बादाम में ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन ई होता है जो आंखों के लिए अच्छा है. यह भूख को संतुष्ट कर जंक फूड की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • हरी सब्जियां: एक बहुत अच्छे नेत्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में पालक, चुकंदर, मीठे आलू, शतावरी, ब्रोकोली, वसायुक्त मछली, अंडा आदि अन्य खाद्य पदार्थ भी फायदेमंद होते हैं.
  • गाजर: गाजर आँखों के लिए एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है, जिसमे विटामिन ए होता जो आँखों के लिए फायदेमंद है. अच्छे नेत्र स्वास्थ्य के लिए एक नियमित आधार पर गाजर का सेवन करते रहें. आप हर दिन एक गिलास गाजर के रस को भी पी सकते हैं.
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Paachan Shakti Badhaane Ke Upaay - पाचन शक्ति बढ़ाने के उपाय

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Paachan Shakti Badhaane Ke Upaay - पाचन शक्ति बढ़ाने के उपाय

आयुर्वेद के अनुसार भोजन को पचाने के लिए हमारे शरीर में पाचन अग्नि होती है जिसको पाचन ऊर्जा भी कहते हैं. अक्सर हमलोग बिना किसी परेशानी के पाचन आदि पर ध्यान नहीं देते जिसके कारण हमारी पाचन शक्ति कमजोर पद जाती है. कमजोर पाचन अग्नि खाने के बाद थकान की समस्या पैदा करती है. हमें हमें अपनी पाचन ऊर्जा को नियमित करने के लिए भोजन करने से पहले ताजे अदरक और थोड़े नींबू के रस में एक चुटकी नमक मिलाकर लेना चाहिए. इससे लार ग्रंथियाँ सक्रिय होती हैं और हमारे भोजन से पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है. जिससे कि आवश्यक एंजाइम आसानी से बन जाते हैं. आयुर्वेद में इस बात का उल्लेख है कि पाचन अग्नि को संतुलित करते रहना बेहद जरूरी है यदि हमारी पाचन ऊर्जा कम होती जाएगी तो खाने को पचाना मुश्किल हो सकता है. लेकिन यदि पाचन अग्नि प्रचुर मात्रा में होती है तो यह भोजन जला देती है. आइए पाचन शक्ति को दुरुस्त करने के तरीके को जानें.

1. आयुर्वेदिक दवा त्रिफला
कोलन को विषमुक्त करने में त्रिफला की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. दरअसल त्रिफला एक ऐसा शक्तिशाली फार्मूला है जो तीन जड़ी बूटियों आमलकी, बिभीतकी और हरीतकी के मिश्रण से बना हुआ है. इसका उपयोग हमलोग पोषक तत्वों के अवशोषण में भी वृद्धि करने के लिए करते हैं. ये हमारे पेट से तमाम विषाक्त पदार्थों को साफ करने में बहुत उपयोगी है. यह हमारे शरीर से धीरे-धीरे शरीर विषाक्तता को दूर करके पाचन को तीव्र करती है. इसके लिए त्रिफला की तीन गोलियाँ या एक चम्मच पाउडर सोने से पहले पानी के साथ सेवन करनी चाहिए.
2. खाने का मज़ा लें
जब भी खाना खाएं बहूत उत्साह से और खाने पर ध्यान केन्द्रित करके खाएं. क्योंकि खाना हमें जीवन देता है. आयुर्वेद के अनुसार खाना हमारी चेतना के विकास के साथ ही हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरुरी है. यदि आप नीचे बैठकर खाएंगे तो ये उचित होता है. जब हम नीचे बैठ कर खाना खाते हैं तो हमारा पेट सुकून की मुद्रा में रहता है और हमारा सारा ध्यान खाने के स्वाद, खाना कैसा बना हुआ है और भोजन की सुगंध पर रहता है जो हमारे पाचन में काफी सुधार करता है. इसे आजमा कर देखना बेहद आसान भी है.
3. खाने के बाद लें दही या लस्सी
खाने को ठीक से हजम करने के लिए खाना खाने के बाद दही या लस्सी का सेवन एक प्रभावी तरिका है. इससे खाना तो बेहतर तरीके से पच ही जाता है हमें कई अन्य पोषक तत्व भी मिल जाते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं. इसके अलावा पाचन स्वास्थ्य को सुधारने में दही को सबसे अच्छा उपचार माना जाता है. लस्सी में हलके और आवश्यक बैक्टीरिया होते हैं जो खाने को सुचारू रूप से पचाने में मददगार होते हैं.
4. खाना सुकून से खाएं
हम में से कई व्यक्ति दोपहर का भोजन मल्टीटास्किंग करते हुए मतलब यातायात में ड्राइविंग हुए, काम करते हुए मेज पर या फिर खड़े-खड़े ही खाने लगते हैं क्योंकि हमारे पास समय का अभाव होता है. आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर को भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में उचित वातावरण की जरूरत होती है. इसलिए खड़े-खड़े, ड्राइविंग करते हुए, रस्ते पर चलते-चलते भोजन नहीं करना चाहिए. अगर आप के पास समय का अभाव है, फिर भी आप को बैठ कर ही भोजन करना चाहिए.
5. सही समय पर खाएं सही चीज
आजकल हमलोग अक्सर अनुचित तरीके से भोजन करने के दुष्प्रभाव देखते हैं. यदि आप इसके दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं तो आपको उपयुक्त समय और प्रकृति के लय का पालन करते हुए भोजन करना चाहिए. दोपहर का भोजन हमें 12 से 2 बजे तक कर लेना चाहिए. इस समय हमारी पाचन ऊर्जा मजबूत होती है. दोपहर के भोजन का सेवन प्रचुर मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि उस समय हमारी पाचन ऊर्जा अधिक शक्ति से काम करती है. रात का खाना दोपहर के भोजन की तुलना में हल्का होना चाहिए और हमें रात 8:00 बजे तक भोजन का सेवन कर लेना चाहिए. रात 10:00 बजे के बाद हमारा शरीर विषाक्त पदार्थों को नष्ट करने का काम करता है. इसलिए रात 10:00 बजे के बाद भोजन करने से विषाक्त पदार्थ भोजन प्रणाली में जमा हो जाते हैं जिसकी वजह से अगले दिन हम थकान महसूस करते हैं.
 

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Weak Bones Ka ilaj In Hindi - कमजोर हड्डियां का इलाज

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Weak Bones Ka ilaj In Hindi - कमजोर हड्डियां का इलाज

हमारे बदलते रहन-सहन और खान-पान के कारण अब हड्डियों की समस्या एक आम समस्या है. हड्डियों से संबंधित कई तरह के परेशानियों से लोग पीड़ित हैं. हड्डियों के इन परेशानियों को आपको गंभीरता से लेना चाहिए. यदि आप भी ऐसा सोचते हैं कि दिन में एक गिलास दूध पी लेने से हड्डियों में एक दिन के कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है, तो आप गलत हैं. दरअसल कैल्शियम, हड्डियों के स्वास्थ्य और मजबूती के साथ ही ब्लड क्लॉटिंग और मांसपेशियों के विकाश में भी मददगार होती है. यही कारण है कि शरीर को अधिक मात्रा में कैल्शियम चाहिए. लेकिन जो व्यक्ति दिल की बीमारी या पथरी से ग्रसित है उसे कैल्शियम की अत्‍यधिक मात्रा नहीं लेनी चाहिए. ऐसे में आपको चिकित्सक के परार्मश से ही कैल्शियम लेनी चाहिए. हड्डियों में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्या है ऑस्टियोपोरोसिस. अब सवाल ये है कि आखिर ये ऑस्टियोपोरोसिस है क्या? तो आपको बता दें कि यह एक छुपा हुआ रोग है. इसके बारे में तब तक पता नहीं चलता है जब तक की खुशी चोट की वजह से आप किसी ने वजह से कोई अधिक टूट ना जाए. जाहिर है जब हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, तभी उनके टूटने की शुरुआत होती है. आइए इसके बारे में जानें की हम ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम और इसका उपचार कैसे कर सकते हैं.

1. धूप जरूरी है
धूप दरअसल ऑस्टियोपोरोसिस के दौरान कैल्शियम का अवशोषण करने के लिए शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है. इसलिए इस दौरान यदि आप धूप में 20 मिनट के लिए रोजाना जाएं तो इससे आवश्यक विटामिन डी की कमी की आपूर्ति हो जाती है. लेकिन लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपको धूप में जबरदस्ती नहीं बैठना है.
2. कैल्शियम और संतुलित आहार से
जब हमें पता चलता है कि ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या किसी व्यक्ति में उत्पन्न हो गई है तो प्रारंभिक तौर पर इसके मरीज को कैल्शियम और विटामिन डी जैसे जरूरी सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है इसके साथ ही उन्हें यह भी कहा जाता है कि शारीरिक सक्रियता को बनाए रखें ऑस्टियोपोरोसिस में खाने-पीने से संबंधित कोई विशेष परहेज नहीं किया जाता है. लेकिन संतुलित आहार दैनिक रूप से लिया जाना चाहिए.
3. अखरोट और बादाम
ऑस्टियोपोरोसिस के दौरान आपकी हड्डियों को कैल्शियम विटामिन ई और ओमेगा 3 जैसे फैटी एसिड्स की आवश्यकता होती है. इसके अलावा बदाम में फास्फोरस भी मौजूद होता है जो की हड्डियों और दांतों के लिए बेहद आवश्यक होता है. इसके साथ ही अखरोट में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो कि मांसपेशियों और हड्डियों की तकलीफ से निजात दिलाने का काम करते हैं. इसलिए नियमित रूप से सुबह खाली पेट 3-4 अखरोट की गिरी खाने से काफी लाभ मिलता है.
4. दूध की सहायता से
दूध को एक संपूर्ण आहार माना जाता है. क्योंकि इसमें कई पोषक तत्वों के अलावा कैल्शियम और अन्य खनिज पदार्थों की भी उपस्थिति होती है. जो की हड्डियों के लिए बेहद जरूरी होते हैं. इसलिए इस दौरान दूध या दूध से बनी हुई चीजें जैसे कि दही, छाछ, पनीर आदि को अवश्य अपने आहार में शामिल करना चाहिए.
5. सूखे मेवे
सूखे मेवे का सेवन इस ऑस्टियोपोरोसिस के दौरान काफी लाभदायक साबित होता है. इसके साथ-साथ आप ताजी हरी सब्जियां, अंडे, चने, राजमा, आदि को भी अपने दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए.
6. जरूरी है व्यायाम
व्यायाम के कई फायदे होते हैं. यह हमें कई रोगों से बचाने का काम करता है. इसलिए कोई बीमारी नहीं भी हो तो भी हमें व्यायाम अवश्य करना चाहिए. ऑस्टियोपोरोसिस के दौरान हड्डियों की मजबूती के लिए और मांसपेशियों में लचक के लिए दिन में 30 मिनट का व्यायाम अवश्य करना चाहिए. इस दौरान बेहतर होगा कि किसी चिकित्सक से परामर्श ले लें कि आपको कौन सा व्यायाम करना है.

ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में सिर्फ़ हड्डियाँ ही कमजोर नही होती बल्कि शरीर के कई अंग भी प्रभावित होते है जैसे दाँत, नाख़ून, मांसपेशियाँ आदि. आहार में पौष्टिकता और सतर्कता से हम इस विकार को बड़ी आसानी से दूर कर सकते है. यह कोई लाइलाज बीमारी नही है. वर्तमान समय में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या सिर्फ़ महिलाओं में ही नही बल्कि पुरुषों में भी देखने को मिलती है. इसलिए सतर्कता और सावधानी सभी के लिए ज़रूरी है. क्योंकि असंतुलित भोजन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसा रोग किसी को भी हो सकता है. समस्या सामने आते ही अपने डॉक्टर से उपचार तुरंत लें, जिससे कुछ समय पश्चात आप फिर से एक स्वस्थ जीवन जी सकें.
 

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Reasons for Weakness In Hindi - कमजोरी के कारण

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Reasons for Weakness In Hindi - कमजोरी के कारण

भारत जैसे विकासशीलदेशों में कमजोरी एक आम समस्या है. यहाँ लोगों को इस विषय में जागरूक किए जाने की आवश्यकता है कि उन्हें कितनी कैलोरी या अन्य घटकों की जरुरत है. क्योंकि आम तौर पर देखा यही जाता है कि हम अपने दैनिक जीवन में अपने लिए आवश्यक कैलोरी का पता नहीं होता है. इसके अलावा हमारी बदलती हुई जीवनशैली भी कमजोरी के लिए जिम्मेदार है. कमजोरी के कारण ही हमें थकान का भी अनुभव होता है. हम इस मुद्दे को इस बदलती जीवनशैली में हर कोई थकान या कमजोरी का सामना करता है. मांसपेशियों में शारीरिक कमजोरी का सीधा संबंध थकान से है. आइए समझें कि शारीरिक कमजोरी आखिर है क्या और इसके क्या कारण हैं.

कमजोरी आखिर है क्या?
शारीरिक कमजोरी दरअसल शरीर में थकावट की एक भावना है. इसके अंतर्गत कमजोरी का अनुभव करने वाला व्यक्ति अपने शरीर को ठीक तरीके से संचालित करने में सफल नहीं होता है. इसके अलावा कुछ लोग अपने शरीर के किसी विशेष हिस्से में कमजोरी का अनुभव करते हैं, जैसे कि हाथ या पैर. वहीं कुछ लोगों को पूरे शरीर की कमजोरी का अनुभव हो सकता है, जो आमतौर पर इन्फ्लूएंजा या हेपेटाइटिस जैसी बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण का परिणाम होता है.

क्या हैं कमजोरी के कारण?

1. बुखार या फ्लू
आम तौर पर ऐसा होता है कि बुखार या फ्लू के दौरान मांसपेशियों और जोड़ों में बहुत दर्द होता है, जो शारीरिक कमजोरी का कारण बनता है. ये बहुत अस्थायी होता है फ्लू का असर खत्म होते ही आप ठीक महसूस करने लगते हैं.
2. थायराइड का ठीक से काम न करना
कई बार ऐसा होता है जब आपका थायरॉयड ठीक से काम नहीं करता है. ऐसे में थायराइड आपको परेशान या थका हुआ महसूस करा सकता है. इस दौरान आपकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और आपका वजन घट या बढ़ सकता है.
3. नींद में कमी
यदि आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो आपको बता दें कि अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है. जरूरत से कम नींद लेना शारीरिक कमजोरी और कमजोरी का कारण बन सकता है. आपके शरीर के हर भाग को अच्छी नींद की जरूरत है. पर्याप्त नींद से आपके शरीर के बॉडी बार्ट रिपेयर होते हैं.
4. पीरियड्स के दौरान
महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय कई परिवर्तन लाता है. इस दौरान रक्त का अत्यधिक निकलना भी शारीरिक कमजोरी का कारण है. ये भी अस्थायी होता है क्योंकि कुछ दिनों में ये समाप्त हो जाता है.
5.तनाव या अवसाद
तनाव या चिंता के दौरान भी व्यक्ति सीधे थकान और कम ऊर्जा का अनुभव करता है. लेकिन ये वास्तविक कमजोरी नहीं है. चिंता लेने से कुछ लोग अपने अंगों में सुन्नता या कमजोरियों की भावनाओं में उतार-चढ़ाव देखा जाता है.
6. शुगर
शुगर के दौरान इसके मरीज को कई समस्याओं से जुझना पड़ता है. जब आपका मधुमेह नियंत्रित होता है, तो आपको थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
7. दिल की विफलता के कारण
कोंजेस्टिव हार्ट फेल्योर के कारण भी आपको थकान और कमजोरी जैसी समस्या से जुझना पड़ता है. दिल की विफलता के लक्षणों में थकान, मतली, खाँसी, हल्केपन, और भूख की हानि शामिल हैं.
8. विटामिन बी-12 की कमी
शरीर को काम करने के लिए विटामिन बी 12 महत्वपूर्ण है, जिन लोगों के पास विटामिन बी 12 की कमी है उन्हें थकावट महसूस हो सकता है और ऊर्जा की कमी भी देखने को मिलेगा. विटामिन बी 12 की कमी का सीधा जुड़ाव शारीरिक कमजोरी से है.

दूर करने के उपाय
यदि आपको ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको चिकित्सक से संपर्क करें. लेकिन यदि ये छोटे रूप में है तो इसके लिए स्वास्थ्य की देखभाल करना एक अच्छा निवारक उपाय है. इसके अलावा तरल पदार्थ का सेवन कीजिए और नियमित रूप से कसरत करने से आपकी कमजोरी से उबरने में मदद मिल सकती है और इसे रोक भी सकते हैं.
 

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Anemic Reasons In Hindi - खून की कमी

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Anemic Reasons In Hindi - खून की कमी

हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत पानी है. इस पानी का ज्यादातर हिस्सा हमारे शरीर में खून के रूप में उपस्थित है. रक्त ही हमारे शरीर में वो महत्वपूर्ण माध्यम है जो कई जरुरी पोषक तत्वों और कई अन्य चीजों को विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का काम करता है. यदि खून न हो हो या खून की कमी हो जाए तो हमारे शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लगेंगी. हिमोग्लोबिन, हमारे शरीर में मौजूद रक्त का सबसे महत्वपूर्ण भाग है. हमारे शरीर में कई खनिज पाए जाते हैं. आयरन उनमें से ही एक है.

आयरन का काम है हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करना. लाल रक्त कोशिकाएं हिमोग्लोबिन का निर्माण करती हैं. हिमोग्लोबिन हमारे शरीर में प्राण वायु ऑक्सिजन को फेफड़ों से लेकर हमारे खून में पहुंचाता है. फिर रक्त में संचरण करते हुए ऑक्सिजन शरीर के अन्य हिस्सों में जाता है. लेकिन जब हमारे शरीर में आयरन की कमी होती है तब लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कमी आती है और इससे हिमोग्लोबिन में भी कमी आ जाती है. इस अवस्था में हमारे शरीर में ऑक्सिजन की भी कमी हो जाती है जिसे हम एनीमिया या खून की कमी कहते हैं. इसमें हमें थाकान और कमजोरी महसूस होने लगता है.


एनीमिया के लक्षण

  • थकान होना
  • त्वचा का पीला पड़ना
  • आंखों के नीचे काले घेरे
  • चक्कर आना
  • सीने में दर्द
  • लगातार सिर में दर्द
  • तलवे और हथेलियों का ठंडा पड़ना
  • शरीर में तापमान की कम

कौन होता है आसानी से इसका शिकार?

यदि ध्यान न रखा जाए तो प्राकृतिक कारणों से महिलाएं इसकी आसान शिकार बन जाती हैं. दरअसल पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे परिवर्तन होते हैं जिनसे महिलाओं में एनीमिया जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक मात्रा में विटामिन, मिनरल व फाइबर आदि की आवश्यकता होती है. जबकि इस दौरान रक्त में लौह तत्वों की कमी होने से शारीरिक दुर्बलता बढ़ सकती है. जबकि पीरियड्स के दौरान खून ज्यादा निकल जाने के कारण भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है. स्तनपान कराने वाली माताओं को भी एनीमिया होने का खतरा रहता है. लड़कियों में अक्सर डाइटिंग का क्रेज देखने को मिलता है. वजन कम करने के लिए डाइटिंग कर रही लड़कियां भी इसकी शिकार हो सकती हैं. कुछ अन्य कारणों से भी महिलाओं या पुरुषों में हो सकता है जैस पाइल्स या अल्सर के कारण भी एनीमिया हो सकता है.  अब तो पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्व भी एनीमिया का कारण बन रहे हैं.

बचने के उपाय
एनीमिया अपने आप में कोई बिमारी नहीं है बल्कि इसके कारण कई अन्य बीमारियाँ हो सकतीं हैं. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना अत्यंत आवश्यक है. इसको ठीक होने में कम से कम छह महीने का समय लगता है. यदि आप एनीमिया से बचना चाहते हैं तो आपको मांस, अंडा, मछली, किशमिश, सूखी खुबानी, हरी बीन्स, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे आयरन से परिपूर्ण आहार आदि का सेवन अवश्य करना चाहिए. आयरन युक्त आहार तभी प्रभावी है जब उसके साथ विटामिन सी का भी सेवन किया जाता है. विटामिन-सी के लिए अमरूद, आंवला और संतरे का जूस लें.

इन आहारों से होती है खून में वृद्धि

कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका इस्तेमाल रक्तवर्धन के लिए किया जा सकता है. इनके इस्तेमाल से भी आप एनीमिया के जोखिम को कम कर सकते हैं.
1. चुकंदर - यह आयरन का अच्छा स्त्रोत है. इसको रोज खाने में सलाद या सब्जी के तौर पर शामिल करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती.
2. हरी पत्तेदार सब्जी - पालक, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं. वजन कम होने के साथ खून भी बढ़ता है. पेट भी ठीक रहता है.
3. सूखे मेवे - खजूर, बादाम और किशमिश का खूब प्रयोग करना चाहिए. इसमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है.
4. फल - खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, किशमिश और अनार खाने से खून बढ़ता है. अनार खाना एनीमिया में काफी फायदा करता है. प्रतिदिन अनार का सेवन करें.
 

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Shortness of Breath Treatment - साँसों की कमी और उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Shortness of Breath Treatment - साँसों की कमी और उपचार

साँसों की कमी की बिमारी को हाइपोजेमिया या हाइपोक्सिया कहते हैं. इसमें हमारे शरीर में ऑक्सीजन की खतरनाक रूप से कमी हो जाती है. जाहिर है बिना ऑक्सीजन के हमारा ज़िंदा रहना नामुमकिन है. बिना ऑक्सीजन  के हमारे शरीर को कोई भी अंग अपना काम नहीं कर पाएगा. ऑक्सीजन हमारे लिए प्राण वायु है. यानी ये है तो हम हैं ये नहीं तो हम नहीं. हमारे शरीर के सभी कामों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऑक्सीजन जिम्मेदार है. हमारे शरीर के उतकों और कोशिकाओं में ऑक्सीजन रक्त के माष्यम से पहुंचता है. रक्त में मौजूद आयरन से क्रिया करके हिमोग्लोबिन सभी जरूरतमंद अंगों तक पहुंचता है. हमारे शरीर में ये प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. जब हम सो रहे होते हैं तब भी ये प्रक्रिया चलती ही रहती है. लेकिन जब किसी कारणवश ऑक्सीजन का स्तर नीचे आ जाता है तब इसे हाइपोजेमिया या हाइपोक्सिया कहा जाता है. इसका मुख्य लक्षण है साँस लेने में तकलीफ होना.

कैसी होती है हाइपोजेमिया की जांच?
हाइपोजेमिया की जांच डॉक्टर आपके शरीर में नजर आने वाले लक्षणों के आधार पर करता है. ऑक्सीजन के स्तर रक्त की जाँच करने के लिए आपके किसी भी आर्टरी से रक्त का नमूना लिया जाता है और फिर उसमें ऑक्सीजन के स्तर की जाँच की जाती है. इसके अलावा, ऑक्सीमीटर के द्वारा भी, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की जाँच की जा सकती है. ये बहुत आसान प्रक्रिया है जिसमें एक छोटी सी क्लिप को आपकी ऊँगली पर लगाकर रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को छोटी सी स्क्रीन पर दिखाया जाता है.

हमारे शरीर में ऑक्सीजन का सामान्य स्तर?
हमारे शरीर में ऑक्सीजन का सामान्य स्तर 95 से 100 तक होता है. लेकिन जब ये 90% से नीचे जाने लगता है तो इसे ऑक्सीजन का कम स्तर माना जाता है. ऑक्सीजन के स्तर को बना कर रखने का एक तरीका यह भी है कि अस्थमा जैसी बीमारी को नियंत्रण में रखा जाए. इस बीमारी के कारण, बहुत से हो सकते हैं, जिनमें से फेंफड़ों के रोग जैसे अस्थमा, न्यूमोनिया यानी (सी.ओ.पी.डी) की सभी बीमारियां शामिल हैं. इसके अलावा शरीर में ऑक्सीजन की कमी का सबसे प्रमुख कारण आयरन की कमी होता है. इस बीमारी के लक्षण, साँसों में तकलीफ, हृदय गति बढ़ जाना, साँसे तेज हो जाना, त्वचा का रंग नीला हो जाना, अकारण ही पसीना निकलना, मानसिक भ्रम हो जाना के रूप में सामने आते हैं.

हाइपोजेमिया के कारण
आमतौर पर तो ये किसी को भी हो सकता है लेकिन बीमारीग्रस्त इंसान को होने की संभावना ज्यादा रहती है. ये उन लोगों में ज्यादा हो सकता है जिन्हें साँसों से संबंधित अन्य परेशानी जैसे अस्थमा, निमोनिया आदि बीमारियां होती हैं. इसका कारण हमारे शरीर में होने वाली आयरन की कमी है.

हाइपोजेमिया के लक्षण

  • हृदय गति बढ़ जाना.
  • त्वचा का नीला पड़ना.
  • सीने में दर्द होना.
  • सांस लेने में तकलीफ होना.
  • साँसे तेज हो जाना.
  • बिना शारीरिक मेहनत के पसीना आना.
  • त्वचा की नमी खोना.
  •  मानसिक भ्रम.

कैसे बचा जा सकता है हाइपोजेमिया से
जैसा कि आमतौर पर कुछ सावधानियां बरतकर हम किसी भी बिमारी की संभावना को कुछ हद तक कम कर सकते हैं. ठीक उसी तरह हाइपोजेमिया से से बचने के लिए भी कुछ प्राथमिक उपाय कर सकते हैं. हलांकि इस तरह की गंभीर बीमारियों को बेहतर इलाज के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है. फिर भी निम्लिखित सावधानियां बरतकर हम इसकी संभावना को जरुर कम कर सकते हैं.

  • रोजाना पांच से दस मिनट एक्सरसाइज जरूर करें.
  • आयरन से भरपूर भोजन करें.
  • कमरा बंद ना रखें, सबुह के समय खिड़कियां जरूर खोलें.
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पीयें, रोज 8 से 10 गिलास पानी पीयें.
  • अपने घर में पेड़-पौधे जरूर लगायें जिससे हरियाली बनी रहे.

नोट :- यदि आपको इस तरह की कोई समस्या होती है तो प्राथमिक तौर पर आप इन्हें आजमा सकते हैं लेकिन चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है.
 

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Bhook Ka Na Lagna in Hindi - भूख में कमी और उपचार

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Bhook Ka Na Lagna in Hindi - भूख में कमी और उपचार

हमारे शरीर के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व खनिज पदार्थ विटामिंस आदि को हम भोजन के द्वारा ही ग्रहण करते हैं. जाहिर है. भोजन हम तभी करते हैं. जब हमें भूख लगती है. लेकिन क्या आपने सोचा है. तब क्या होगा जब आपको भूख ही नहीं लगेगी भूख न लगने से सबसे पहले तो आप खाना नहीं खाएंगे और खाना नहीं खाने के कारण शरीर में के लिए आवश्यक कोई भी तत्व आप नहीं ग्रहण कर पाएंगे जिससे कि कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होगी यह समस्या गंभीर भी हो सकती हैं. इसलिए अत्यंत आवश्यक है. कि हमें भूख लग हमें समय समय पर भूख लगती रहे और हम भोजन के रूप में शरीर के लिए आवश्यक सभी पदार्थों और कई अन्य स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों का भी सेवन करते रहे जब आदमी को भूख नहीं लगती है. तो यदि जबरदस्ती किया जाए तू भी ज्यादा नहीं खा पाते खाने में खाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता ऐसा आमाशय पाचन तंत्र में कमी होने के कारण भी हो सकता है. या इसके कई अन्य कारण जैसे की चिंता क्रोध भय घबराहट आदि भी हो सकती है. आइए भूख में कमी और इसके उपचार को विस्तार से समझते हैं.

1. गेहूं का चोकर, अजवाइन और सेंधा नमक
भूख न लगने की समस्या को हम गेहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवाइन मिलाकर इसकी रोटी बनाकर खाने से भी दूर कर सकते हैं. इससे आपका आपको एक खाद्य पदार्थ भी मिल जाएगा और आपकी भूख लगने की समस्या भी दूर होगी. इसे कहते हैं एक पंथ दुई काज.
2. मेथी
मेथी के प्रयोग से भी आप भूख लगने की समस्या को दूर कर सकते हैं. कहां तक मेथी के सेवन की बात है तो आप मेथी को प्रतिदिन सब्जी या दाल में तड़का लगाने के समय इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे सब्जियां दाल के स्वाद में भी वृद्धि होगी और आपकी भूख न लगने की समस्या भी दूर होगी.
3. हिंग, पुदीना और काली मिर्च
यदि आप एक गिलास पानी में 3 ग्राम जीरा पुदीना और काली मिर्च के साथ नमक डालकर पीते हैं. तो आपकी भूख न लगने की समस्या निश्चित रूप से दूर होगी. हिंग और पुदीना आपके पेट की विभिन्न समस्याओं को शांत करके कई अन्य समस्याओं को भी ठीक करने का काम करते हैं.
4. सेब
सेब की सहायता से हम कई परेशानियों को दूर करने का काम कर सकते हैं. भूख न लगने की समस्या भी इन्हीं समस्त परेशानियों में से एक है. यदि आप प्रतिदिन सेब के रस का सेवन करें तो इससे रक्त शुद्धि भी होती है. और भूख भी काफी तेज लगती है.
5. नींबू
नींबू को काटकर इसमें से सेंधा नमक डालकर यदि आप खाना खाने से पहले इसे चूसें तो इससे ना सिर्फ कब्ज दूर होगा बल्कि इससे पाचन में भी वृद्धि होती है और आपको खुलकर भूख लगता है. इसके अलावा इससे आपको अन्य लाभ भी मिलता है.
6. अजवाइन और काला नमक
जब भी आपको भूख न लगने की समस्या महसूस हो तो आप अजवाइन में स्वादानुसार काला नमक मिलाकर इसे गर्म पानी के साथ सेवन करें. इससे आपको खुलकर भूख लगती है. और आपकी भूख न लगने की समस्या दूर होती है.
 

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Insomnia Treatment in Hindi - नींद न आने की बीमारी का इलाज

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Insomnia Treatment in Hindi - नींद न आने की बीमारी का इलाज

हमारे शरीर को तरोताजा और स्वस्थ फोटो बनाए रखने के लिए नींद का आना बेहद जरूरी होता है. आपने महसूस भी किया होगा कि सोने के बाद आदमी कई तरह के थकान और परेशानियों से अपने आप को मुक्त पाता है. इसलिए अनिद्रा की समस्या काफी गंभीर है. अनिद्रा से हमें थकान, टेंशन, सरदर्द, डिप्रेशन, आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अनिद्रा की बीमारी को आमतौर पर दो भागों में बांटा जाता है - एक्यूट और क्रोनिक. थोड़े समय के लिए होने वाली अनिद्रा को एक्यूट जबकि लंबे समय तक या सालों तक चलने वाली अनिद्रा को हम क्रोनिक के अंतर्गत रखते हैं. अनिद्रा की समस्या को हम दूर कर सकते हैं, लेकिन कैसे? यहां पर हम आपको कुछ घरेलू उपचारों के बारे में बता रहे हैं जिसके प्रयोग से आप अनिद्रा को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

1. कैमोमाइल टी
कैमोमाइल टी का उपयोग प्राचीन काल से ही नींद को बेहतर बनाने की औषधि के रूप में किया जाता रहा है. आज होने वाले कई शोधों में यह देखा गया है कि इसमें मौजूद एपीजे नींद नामक योग्य इसके लिए जिम्मेदार है. इसलिए जब भी आपको अनिद्रा महसूस हो या ऐसा लगे कि नींद नहीं आ रही है. आपके मोबाइल का सेवन करें इसका स्वाद बनाने के लिए आप इसमें दालचीनी और शहद भी मिला सकते हैं.
2. मेथी का जूस
मेथी के जूस के नियमित सेवन से आप अनिद्रा की बीमारी को दूर कर सकते हैं. इसके लिए मेथी की ताजी पत्तियों को पीसकर इसका जूस बनाना चाहिए. इसके दो चम्मच जूस में दो चम्मच दो चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें.
3. एप्पल साइडर विनेगर और शहद
एप्पल साइडर विनेगर और शहद हमारे शरीर में मौजूद फैटी एसिड्स को तोड़कर नियासिन में परिवर्तित करने का काम करते हैं. इससे अनिद्रा की बीमारी को दूर करने में काफी लाभ मिलता है. इसके अलावा शहद इंसुलिन और से सेरोटोनिन के स्राव को बढ़ाकर नींद लाने में फायदा पहुंचाता है. यदि आप दो-दो चम्मच ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और शहद को एक गिलास गर्म पानी में मिश्रित करके सोने से पहले पिएं तो काफी लाभ मिलेगा. आप चाहे तो दो चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को एक कप शहद में मिलाकर टॉनिक के रूप में भी रोज एक चम्मच ले सकते हैं.
4. जीरा
जीरा हमारे पाचन शक्ति को बढ़ाने में काफी लाभदायक होता है. इसके अलावा यह नींद को भी ठीक करने का काम करता है. हमारे यहां प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में नींद को बढ़ाने वाले औषधियों में जीरा का उल्लेख मिलता है. इसके लिए आप जीरा के चाय का सेवन कर सकते हैं या फिर केले को मसल कर उसमें एक चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर रोज रात को सोने से पहले इसका सेवन करें. इससे आपको काफी लाभ मिलेगा.
5. केसर
केसर का सेवन हमारे लिए शांतिदायक गुणों में वृद्धि करने वाला होता है. यदि आप नींद के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं तो केसर की दो लड़कों को एक कप गर्म दूध में मिलाकर रात में सोने से पहले इसका सेवन करें. ऐसा करने से आपको अनिद्रा की समस्या दूर करने में मदद मिलेगा.
6. गर्म दूध
अनिद्रा की समस्या में सबसे जरूरी होता है कि आपके दिमाग और शरीर को आराम मिले. दूध इस काम को बहुत अच्छे से कर सकता है. क्योंकि इसमें नियासिन एमिनो एसिड पाया जाता है जो कि नींद को बढ़ावा देता है. इसके बेहतर उपयोग के लिए आप एक कप गर्म दूध में एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर सोने की 1 घंटे पहले इसे पी लें.
7. जायफल
जायफल का उपयोग हम प्राकृतिक निद्रा को बढ़ावा देने के लिए करते हैं. जाहीर इसमें शामक गुण होते हैं. एक चौथाई चम्मच जायफल के पाउडर को एक कप गर्म दूध में मिलाकर इसे सोने से पहले लें या फिर एक चौथाई चम्मच जायफल के पाउडर को एक कप गर्म पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं. इसके अतिरिक्त एक चुटकी जायफल के पाउडर को एक चम्मच आवला में मिलाकर दिन में तीन बार लेने से भी अनिद्रा और बदहजमी में लाभ मिलता है.
8. हॉट बाथ
सोने से दो-तीन घंटे पहले हॉट बात लेने से भी अच्छी नींद आती है. इससे शरीर और तंत्रिका तंत्र को भी आराम मिलता है. यदि आप इसे और कार्य करना चाहते हैं तो पानी में कुछ बूंदें रामरस कैमोमाइल आयल लैवेंडर आयल आदि मिला दें.
 

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Fruit Juice Benefits in Hindi - फलों के रस के फायदे

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Fruit Juice Benefits in Hindi - फलों के रस के फायदे

फल का प्रयोग तो हम करते ही हैं. हमारे यहाँ तो फलों को धार्मिक रूप से भी काफ महत्वपूर्ण माना जाता है. फलों के फायदों के बारे में तो हम सभी जानते ही हैं लगभग सभी फलों में कई तरह के पोषक तत्व विटामिन और कई अन्य स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों की प्रचुरता होती है. इसलिए ताजे फलों या कुछ सब्जियों को भी स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है. जाहिर है इन फलों के रस भी हमारे लिए लाभकारी साबित होते हैं. इसलिए यदि आप नियमित रूप से विटामिन, खनिज, एंजाइम और प्राकृतिक शर्करा कि अपने शरीर में आपूर्ति चाहते हैं तो आपको फलों के रस का सेवन करना चाहिए. यदि आप अपने शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं और शरीर की सभी क्रियाओं को सामान्य करना चाहते हैं तो आपको फलों का रस जरूर लेना चाहिए. फलों के रस के लाभ को विस्तार से समझने के लिए और इसके फायदों को ठीक से जानने के लिए हमें निम्लिखित बिन्दुओं का अध्ययन करना चाहिए.

1. एंटी एजिंग के रूप में
फलों के रस में पाए जाने वाले कैल्शियम, पोटेशियम, आदि खनिजों से हमारे शरीर के कोशिकाओं में जैव रसायन और खनिज का सही संतुलन बनाए रखने में काफी मददगार होते हैं. इस संतुलन के कारण हमारे पूरा होने की प्रक्रिया काफी हद तक धीमी हो जाती है. जिससे हम काफी समय तक जवान दिख सकते हैं.
2. तुरंत पोषक तत्वों की आपूर्ति
फलों के रस का सेवन हमें ऊर्जा से भर देता है. यानी आपको जब तुरंत उर्जा चाहिए तो आपको फलों के रस या जूस का सेवन करना चाहिए. जब हम फलों के रस का सेवन करते हैं तो यह सुपाच्य होने के कारण जल्दी ही इस में उपस्थित सभी पोषक तत्व हमारे खून में सीधे-सीधे मिल जाते हैं.
3. तत्वों के संतुलन में
फलों के ताजा रस के सेवन से हमारे शरीर में क्षारीय तत्व की अधिकता होती है. जिसे हमारे खून व शरीर की कोशिकाओं में अम्लीय और क्षारीय तत्वों का संतुलन सामान्य हो जाता है. हमारे शरीर में ऐसे संतुलन का सकारात्मक असर होता है. इससे हम कई तरह की परेशानियों से बच सकते हैं.
4. मोटापा कम करने में
यदि आप सुबह में एक नींबू गर्म पानी में के साथ भी है. तो इससे और इसके बाद 12 औंस गाजर का रस और 4 औंस पालक को मिलाकर इसका मिश्रण नियमित रूप से पिएं तो इसे मोटापा कम होता है. मोटापा कम करने का ये आसान और प्राकृतिक तरीका है.
5. चेहरे की सुंदरता के लिए
कई फलो का उपयोग हम चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं गाजर, संतरा, टमाटर और चुकंदर आदि फलों में से किसी के भी रस का 25 ग्राम यदि हम रोजाना लगातार दो महीने तक सेवन करें. तो इससे हमारे चेहरे की चेहरे पर उपस्थित सभी तरह के दाग मुंहासे दूर होकर चेहरे में चमक आती है. इसके अलावा इससे आपके शरीर को अच्छा ख़ासा पोषण भी मिल जाएगा.
6. लकवा में
लकवा से पीड़ित मरीज को सेब, अंगूर, नाशपाती आदि फलों के रस की एक समान मात्रा को मिश्रित करके इसका सेवन नियमित रूप से करते रहना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से लकवा का असर काफी हद तक कम होता है और इसके मरीजों को राहत भी मिलती है. इसका इस्तेमाल बहुत आसान और आसानी से उपलब्ध हो सकने वाला है.
 

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