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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

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Dr. Sanjeev Kumar Singh Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
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Buckwheat (Kuttu) Benefits and Side Effects in Hindi - कूटू के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Buckwheat (Kuttu) Benefits and Side Effects in Hindi - कूटू के फायदे और नुकसान

कूटू का वैज्ञानिक नाम फैगोपाईरम एस्कुलेंटम है. त्रिभुज की आकृति जैसा दिखने वाला कूटू गेहूं के समान ही होता है. भारत में कूटू की उपज हिमालय क्षेत्रों में ही की जाती है. कूटू का इस्तेमाल व्रतों या त्योहारों में विशेषरूप से सबसे ज्यादा किया जाता है. भारत में ये हिमालय के तराई क्षेत्रों में ही उगाया जाता है. दुनिया के अन्य देशों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, यूक्रेन आदि में भी कूटू की उपज होती है. व्रत में इस्तेमाल किए जाने का मुख्य कारण कूटू का ऊर्जा में निहित ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है.

कूटू लस से मुक्त होता है जिसके कारण यह गेहूं और राई का सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है. जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी होती है उनके लिए तो यह एक बेहतर विकल्प होता है. कूटू में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों और पोषक तत्वों में मैग्नीशियम फाइबर लोहा और प्रोटीन प्रमुख है. इसके अलावा इसमें 8 तरह के एमिनो एसिड पाया जाता है. आइए कूटू के फायदे और नुकसान के बारे में जानें.

1. हड्डियों के लिए
कूटू का उपयोग हम हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कर सकते हैं. क्योंकि कूटू में मैग्नीशियम कैल्शियम और फास्फोरस आदि की प्रचुरता होती है. इसके अलावा कूटू हमारे शरीर में ऊतकों के विकास में भी काफी सहायक साबित होता है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी बीमारियों को दूर करने में भी काफी मदद मिलती है.
2. शुगर के उपचार में
कूटू में टैनिन नाम का एक एंजाइम पाया जाता है. यह शरीर से स्टार्च के अवशोषण को रोकता है. इसके अलावा इंसुलिन एवं ग्लूकोज के स्तर को भी नियंत्रित करता है. जिससे शुगर के मरीजों के ग्लूकोज के स्तर में निरंतरता बनी रहती है. यानी ग्लूकोज के स्तर का बढ़ना यह घटना रुक जाता है.
3. ह्रदय से संबंधित विकारों में
फाइबर से समृद्ध कूटू हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. क्योंकि इसमें पाया जाने वाला फाइबर हमारे शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को दूर करने में सहायक होता है. इससे हमारे हृदय को स्वस्थ बने रहने में मदद मिलती है. कूटू के सेवन से धमनियों को सख्त होने और दिल के दौरे एवं स्ट्रोक जैसी स्थितियों से भी निजात पा सकते हैं.
4. पाचन तंत्र के लिए
कूटू में पाई जाने वाली फाइबर की भरपूर मात्रा हमारे शरीर के पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करने का काम करती है. दिन में एक बार कूटू के सेवन से हमें पूरे दिन का लगभग 48 प्रतिशत फाइबर प्राप्त हो जाता है. इससे हमारे पाचन तंत्र को तेजी से काम करने में मदद मिलती है. पेट से संबंधित तमाम बीमारियां जैसे सूजन, कब्ज, पेट में दर्द, गैस, दस्त आदि से छुटकारा मिलता है.
5. कैंसर के उपचार में
कूटू का चोकर एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर होने की संभावना को काफी हद तक कम करते हैं. क्योंकि एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को खत्म करके कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का काम करते हैं.
6. गेहूं के विकल्प के रूप में
कई लोगों को गेहूं खाने से एलर्जी की समस्या आने लगती है. ऐसे में लोगों लोग गेहूं के विकल्प के रूप में कूटू का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से आप सूजन, मतली और जठार तंत्र संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं.
7. उर्जा को बनाए रखने में
कूटू का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर को लगातार बनाए रखता है. क्योंकि कूटू में नियत से या विटामिन बी 3 पाया जाता है. जो कि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके शरीर तक पहुंचाता है. यही नहीं यह कई पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदल कर शरीर में उर्जा के स्तर को बनाए रखता है.
8. मोटापा कम करने में
कूटू का नियमित सेवन मोटापा कम कम करने वाले व्यक्तियों के लिए काफी लाभदायक होता है. कूटू में पाया जाने वाला फाइबर भूख को नियंत्रित करता है. जिससे कि आपको जल्दी जल्दी भूख नहीं लगती है. इसके अलावा इसमें अन्य पोषक तत्वों की भी मौजूदगी होती है.
9. लाल रक्त कोशिकाओं की वृद्धि में
कूटू में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी होते हैं. इसके अलावा इसमें कॉपर और आयरन भी पाए जाते हैं. जो कि हमारे शरीर में एनीमिया की संभावना को खत्म करते हैं. शरीर में पर्याप्त मात्रा में कॉपर और आयरन की मौजूदगी हमारे रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाते हैं. जिससे हमारा रक्त संचरण में मदद मिलती है.

कूटू के नुकसान

  • जिन्हें इससे एलर्जी है वो लोग कूटू का सेवन न करें.
  • ज्यादा पुराने कूटू के आटे का प्रयोग करने से समस्या हो सकती है.
  • अधिक मात्रा में कूटू के सेवन से बचें.
     
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Rye Benefits And Side Effects In Hindi - राई के फायदे और नुकसान

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Rye Benefits And Side Effects In Hindi - राई के फायदे और नुकसान

राई का वैज्ञानिक नाम से सेकेल सेरियल है. यह एक घास जैसा लगने वाला पौधा है. हलांकि इसके बीज देखने में जौ या गेहूं जैसा ही होता है. इसके उत्पादन की शुरुवात तुर्की से हुई थी लेकिन आज इसका उत्पादन संपूर्ण विश्व में किया जाता है. राई की खेती करने में सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसकी जड़ों में फंगस लग जाता है. जिससे इसके फसल के जल्दी ही सड़ जाने का डर रहता है. राई में कई तरह के पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों की प्रचुरता होती है. जैसे इसमें मैग्नीशियम, फाइबर, मैगनीज, फास्फोरस, तांबा, विटामिन बी, फिनॉलिक एंटीऑक्सीडेंट्स, आदि प्रमुख रूप से पाए जाते हैं. राई के फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में
कई शोधों से यह पता चलता है कि राई, एक महत्वपूर्ण पाचन में मदद करने वाला एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. राई हमारी कोशिकाओं की उपापचय की क्षमता को भी अनुकूलित करने के साथ-साथ हानिकारक जीन के उत्पादन को भी कम करती है.
2. कैंसर के उपचार में
राई का उपयोग कैंसर के उपचार में भी किया जाता है. क्योंकि इसमें मौजूद फेनोलिक्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट कई तरह के कैंसर जैसे की ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
3. कब्ज दूर करने में
राई फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थ होने के कारण हमारे शरीर में कब्ज जैसी समस्याओं के निदान में उपयोगी है. इसके अलावा राई में पाया जाने वाला पोषक तत्व पेट की अन्य समस्याएं जैसे कि पेट में गैस, पेट दर्द, ऐंठन, अल्सर, पित्त पथरी आदि को भी कम करने का काम करते हैं.
4. वजन घटाने में
विशेषज्ञों के अनुसार फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ वजन को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा वजन को नियंत्रित करने के लिए खाद्य पदार्थों कैलोरी की भी काफी कम होनी चाहिए. ये दोनों गुण एक साथ आपको राई में मिल जाता है. फाइबर आपको भूख नहीं लगने देता और कैलोरी की कम मात्रा दोनों मिलकर आपका वजन काफी हद तक कम कर सकते हैं.
5. शुगर के उपचार में
शुगर में हमारे शरीर में इंसुलिन के स्तर में काफी बढ़ोतरी हो जाती है. इसलिए भोजन के समय यह ध्यान रखना होता है कि उस खाद्य पदार्थ से हमारे शरीर में इंसुलिन का स्तर न बिगड़े. इसलिए आपको चाहिए ऐसा खाद्य पदार्थ जिसमें ये गुण पहले से ही मौजूद हो. राइ एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जिससे कि इन्सुलिन का स्तर प्रभावित नहीं होता है. इसका कारण ये है कि राई बड़े अणुओं से बना होता है इसलिए ये आसानी से सरल चीनी में नहीं टूटता है.
6. अस्थमा के उपचार में
राई के नियमित सेवन बच्चों में अस्थमा की संभावना को कम कर सकता है. कई शोधों में ऐसा पाया गया है कि राई का सेवन करने वाले बच्चों की तुलना में जिन बच्चों ने राई का सेवन नहीं किया था उनमें अस्थमा होने की संभावना 60% तक ज्यादा पाई गई.
7. रक्तचाप में
यदि आप एथिरोस्केलेरोसिस जिसमें धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं, या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं तो आपके लिए राई का सेवन काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. क्योंकि राई में विटामिन खनिज और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. जो कि आपकी धमनियों के ब्लॉकेज को खत्म कर सकते हैं.
8. पित्ताशय की पथरी में
फाइबर से समृद्ध खाद्य पदार्थ होने के कारण राई हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त करके इसमें होने वाली पथरी के विकास को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा यह अन्य समस्याओं को भी खत्म करता है.

राई के नुकसान

  • राई कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.
  • ऐसे लोगों को चिकित्सकीय परामर्श लेने की आवश्यकता होती है.
     
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Amaranth (Chaulai) Benefits and Side Effects in Hindi - चौलाई के फायदे और नुकसान

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Amaranth (Chaulai) Benefits and Side Effects in Hindi - चौलाई के फायदे और नुकसान

प्राचीन काल से ही आयुर्वेद के तमाम खोजों के रूप में चौलाई आज हमारे सामने है. चौलाई के सबसे पहले भारत में ही उगाए जाने का प्रमाण है. लेकिन अब अमेरिका और अन्य देशों में भी इसे उगाया जाता है. चौलाई के पत्ते भी काफी स्वास्थ्यवर्धक और लोकप्रिय हैं. इसमें तमाम पोषक तत्व संयुक्त होने के कारण हमें स्वस्थ रखने में सहायक होता है. चौलाई में पाए जाने वाले तमाम पोषक पदार्थों में बेहद मूल्यवान एंटीऑक्सीडेंट और फेनालिक यौगिक होते हैं. इसके अलावा चौलाई बीज और पत्तों में विटामिन और खनिज की प्रचुरता होती है. इसके तमाम औषधीय गुण और फायदे जानने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं को देखें.

1. आंखों के लिए
आंखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन ए काफी महत्वपूर्ण होता है. चौलाई में विटामिन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. इसलिए चौलाई हमारी आंखों में होने वाले संक्रमण और तमाम धब्बे, दाग, अधः पतन और मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करता है.
2. बालों के लिए
चौलाई में लाइसिन नाम का एक अमीनो एसिड पाया जाता है. जिसका उत्पादन हमारे शरीर में नहीं हो पाता है. इस अमीनो इस अमीनो एसिड की खासियत यह है. कि यह कैल्शियम की दक्षता में सुधार करके बालों को मजबूती प्रदान करता है. इससे आपके बाल कम झड़ते हैं. इसके अलावा आप चौलाई का उपयोग शैंपू, बालों में मालिश आदि के लिए भी कर सकते हैं. इससे आपके बाल लंबे घने खूबसूरत और मजबूत होते हैं.
3. शुगर के उपचार में
चौलाई का उपयोग शुगर के उपचार के लिए भी किया जाता है. दरअसल चौलाई में इंसुलिन के स्तर को कम करने की क्षमता होती है. इसके अलावा यह रक्त शर्करा का स्तर भी घटाता है. इस तरह से चौलाई शुगर के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ बन जाता है.
4. पाचन तंत्र के लिए
चौलाई पाचन तंत्र को मजबूत करने और इसकी सक्रियता बढ़ाने में भी प्रमुख भूमिका निभाता है. चौलाई के बीज में पाया जाने वाला फाइबर हमारे पाचन एंजाइमों को सक्रीय बनाता है. इसके अलावा यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालने का काम करता है.
5. प्रोटीन के स्रोत के रूप में
प्रोटीन के लिए हम चौलाई का प्रयोग कर सकते हैं. दरअसल इसमें सभी आवश्यक 9 अमीनो एसिड पाया जाता है. बेहद दुर्लभ माना जाने वाला लाइसिन नाम का एमिनो एसिड चौलाई में भरपूर पाया जाता है. लाइसिन का मुख्य काम कैल्शियम का अवशोषण, स्नायु प्रोटीन का निर्माण, चोटों की रिकवरी और हार्मोन, एंटीबॉडीज व एंजाइमों का उत्पादन करना है. प्रोटीन की सहायता से हमारे शरीर में महत्व और कोशिकाओं का निर्माण होता है.
6. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में
कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान लोगों के लिए चौलाई का सेवन भोजन का एक अच्छा विकल्प माना जाता है. जाहिर हे चौलाई के बीज में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. कोलेस्ट्राल के नियंत्रण के कारण ये धमनियों को सख्त होने से भी बचाता है.
7. हड्डियों के लिए
कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए बेहद जरूरी खनिज है. चौलाई कैल्शियम से समृद्ध खाद्य पदार्थ है. इसलिए यह हमें हड्डियों से संबंधित समस्याएं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस आदि से बचाता है.यही नहीं ये हड्डियों के रिपेयर और मजबूती में भी काम करता है.
8. वजन कम करने में
चौलाई हमारे शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्रभावशाली तरीके से कम करने की क्षमता रखता है. चौलाई हार्मोन को भी रिहा करके हमें पेट भरे रहने के एहसास को बरकरार रखता है. इसलिए चौलाई वजन कम करने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है.
9. सूजन के लिए
चौलाई में सूजन को कम करने वाले गुण भी होते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण यह सूजन से संबंधित कई परेशानियों को कम करता है. चौलाई हमारे सेलुलर झिल्ली को ऑक्सीडेटिव नुकसान से भी बचाने का काम करता है.
10. सीलिएक से बचाने में
सीलिएक दरअसल रक्ताल्पता से संबंधित बीमारी है. यह छोटी आंत में विकार उत्पन्न करने वाले पोषक तत्वों के पाचन को मुश्किल बनाता है. चौलाई में पाए जाने वाले पोषक तत्व इस समस्या को दूर करने का काम करते हैं.

चौलाई के नुकसान

  • अधिक मात्रा में चौलाई का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • शुगर से पीड़ित व्यक्ति इसके सेवन में सावधानी बरतें.
  • बच्चों और कुछ लोगों में जो कि लियोसिन प्रोटीन का सहन नहीं कर पाते, उनके लिए पेट दर्द का कारण बन सकता है.
     
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Roti Aur Chawal Sehat Ke Liye Kya Hai Behtar - रोटी या चावल क् या है सेहत के लिए बेहतर?

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Roti Aur Chawal Sehat Ke Liye Kya Hai Behtar - रोटी या चावल क् या है सेहत के लिए बेहतर?

अपने देश में विशेष रूप से उत्तर भारत में रोटी और चावल दोनों ही मुख्य भोजन के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं. इसका ट्रेंड कुछ ऐसा है कि रोटी का इस्तेमाल सुबह नाश्ते के लिए जबकि रात्रि भोजन के लिए चावल का इस्तेमाल किया जाता है. कई ऐसे भी राज्य हैं जहाँ या तो रोटी या फिर चावल पसंद किया जाता है. जैसे कि पंजाब में रोटी ज्यादा पसंद की जाती है तो वहीँ बंगाल के लोगों को चावल अच्छा लगता है. ये तो बात हुई पसंद-नापसंद की लेकिन अब सवाल यह उठता है कि इन दोनों में से किसका सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा ठीक रहता है.

जहाँ तक इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों की बात है तो इन दोनों में कार्बोहाइड्रेट्स और कैलोरी की एक समान मात्रा मौजूद होती है. लेकिन अब हम इन दोनों के पौष्टिक महत्व भी देख लेते हैं. इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों की बात जाए तो इसमें रोटी के सामने चावल कहीं नहीं टिकता. क्योंकि रोटी में प्रोटीन और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है. जबकि चावल में ये नहीं होते तो आइए समझने की कोशिश करें कि रोटी और चावल में से कौन हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर है.
किसमें कितना है दम?

खाद्य पदार्थ        ऊर्जा (कैलोरी)        प्रोटीन (ग्राम)        फैट (ग्राम)        कार्बोहाइड्रेट (ग्राम)
रोटी
       71        3        0.3        15
चावल        80        1        0.1        18

1. मिनरल्स के स्रोत के रूप में
हमारे शरीर को स्वस्थ बनाएं रखने और इसके बेहतर संचालन के लिए मिनरल्स की आवश्यकता होती है. मिनरल्स हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ हमें कई तरह की परेशानियों से भी बचाने का काम भी करते हैं. ये मिनरल्स हमें चपाती या चावल खाने से मिलते हैं. रोटी में आपको कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और लोहा जैसे मिनरल्स प्राप्त हो जाते हैं. जबकि चावल में हमें सिर्फ लोहा ही मिलता है. इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस हमें नहीं मिल पाते हैं. यही नहीं चावल में हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला कैल्शियम भी नहीं पाया जाता है.

2. वजन कम करने के लिए
चावल में स्टार्च की भरपूर मात्रा पाई जाती है. जिसके कारण चावल को पचाना हमारे शरीर के लिए काफी आसान काम है. लेकिन रोटी में स्टार्च न पाए जाने के कारण यह बहुत धीरे-धीरे पचता है. अपनी धीमी पाचन के कारण ही रोटी खाने से हमें लंबे समय तक भूख न लगने का एहसास होता है. इसलिए जिन लोगों को अपने वजन घटाना है उनके लिए रोटी ही बेहतर विकल्प है. लेकिन यदि आप चावल खाना चाहते हैं तो आपके लिए ब्राउन राइस एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

3. फोलेट के स्रोत में के रूप में
फोलेट भी हमारे शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है. पानी में घुलनशील विटामिन बी को ही फोलेट के नाम से भी जाना जाता है. फोलेट के स्रोत के रूप में चावल ज्यादा बेहतर है. हालांकि रोटी में भी पलट पाया जाता है लेकिन चावल की तुलना में कम होता है.

4. पोषण के लिए
रोटी में पाए जाने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, सोडियम, प्रोटीन और फाइबर हमारे शरीर को पोषण देने और इसे स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन चावल में सोडियम नहीं पाया जाता है. इसलिए यदि आप अपने डाइट में सोडियम भी लेना चाहते हैं तो आपको रोटी परेफर करना चाहिए.

5. शुगर के लिए
गेहूं और चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक जैसा ही है. इन इन दोनों खाद्य पदार्थों के सेवन का रक्त शर्करा के स्तर पर एक समान ही प्रभाव पड़ता है. यानी शुगर के मरीज रोटी और चावल का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इसे नियंत्रित मात्रा में लें. यानी नियंत्रित मात्रा में लेने से इसका ज्यादा असर नहीं होता है.
 

Bajra (Millet) Benefits and Side Effects in Hindi - बाजरा के फायदे और नुकसान

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Bajra (Millet) Benefits and Side Effects in Hindi - बाजरा के फायदे और नुकसान

बाजरे का वैज्ञानिक नाम पेन्नीसेतुम ग्लौकम है. बाजरा एक ऐसी फसल है जिसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों या उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उपजाया जा सकता है. भारत में बाजरे की खेती उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब आदि में होती है. बाजरे का प्रयोग हमारे यहां परंपरागत रुप से होता आया है. इसका मुख्य उपयोग हमारे यहां दलिया, ब्रेड और स्नेक्स बनाने में किया जाता है. इसका कारण यह है कि बाजरे में अन्य अनाजों की तुलना में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है.

बाजरे में पाए जाने वाले तमाम पोषक तत्वों में विटामिन, खनिज और कई कार्बनिक यौगिक हैं. लोहा, पोटेशियम, जस्ता, कैल्शियम, विटामिन बी और मैग्नीशियम इसके अलावा बाजरा, प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होता है. इसलिए बाजरा अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर खाद्य विकल्प माना जाता है. आईए बाजरे के फायदे और इसके नुकसान को जानते हैं.

1. वजन कम करने में
वजन घटाने के लिए बाजरे का प्रयोग किया जाता है. इसका कारण बाजरे में ट्रिप्टोफैन नाम का एक एमिनो एसिड पाया जाता है. यह भूख को कम करने का काम करता है. इससे वजन कम करने में मदद मिलती हैं. यही नहीं ये एमिनो एसिड खाना धीमी गति से पचाता है. जिससे कि हमें लंबे समय तक पेट भरे जाने का एहसास होता है. बाजरे में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला फाइबर भी हमें लंबे समय तक पेट भरे रहने का एहसास कराता है. इसलिए वजन कम करने वाले लोगों के लिए बाजरा एक बेहतर खाद्य विकल्प है.
2. विषाक्त पदार्थों को दूर करने में
बाजरे में भी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर से फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को नष्ट करने के साथ-साथ किडनी और लीवर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक होते हैं. बाजरे में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स में क्वेरसेटिन, करक्यूमिन, कैटींस और इलैजिक एसिड इलायची केसेट और कैटरीना प्रमुख हैं. इन एंटीऑक्सीडेंट्स का काम मल त्यागने और एंजाइमिक गतिविधियों को ख़त्म करके, गंदगी को शरीर से दूर ले जाने का है.
3. हृदय की विकारों के लिए
बाजरे का प्रयोग ह्रदय से संबंधित विकारों को दूर करने और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है. बाजरे में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. मैग्नीशियम का काम धमनियों को सख्त होने से बचाना है. बाजरे में पोटेशियम की भी अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है. यह हमारे रक्त वाहिका तंत्र में सुधार लाता है. इसके अलावा भी बाजरे में पाए जाने वाले पोषक तत्व हृदय के स्वास्थ्य और इसके लिए आवश्यक पदार्थों को पूरा करते हैं.
4. कैंसर के उपचार में
स्तन कैंसर को दूर करने में भी बाजरा सखी सक्रिय भूमिका निभा सकता है. इसके लिए महिलाओं को रोजाना 30 ग्राम से फाइबर का सेवन करना होता है. जो कि आपको बाजरे में आसानी से मिल जाएगा फाइबर से फाइबर के सेवन से स्तन कैंसर होने की संभावना 50% तक कम होती है.
5. अनिद्रा में
बाजरा में ट्रिप टू प्रेम पाया जाता है. इसका काम हमारे शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाना है. सेरोटोनिन हमारे शरीर में तनाव को दूर करने का काम करता है. इसलिए बाजरे का सेवन हमें शांतिपूर्ण नींद के लिए आवश्यक है.
6. अस्थमा में
अस्थमा के मरीजों के लिए भी बाजरा एक अच्छा खाद्य विकल्प साबित होता है. बाजरे का नियमित सेवन अस्थमा पीड़ितों के लिए काफी लाभदायक होता है. इससे अस्थमा के मरीजों की कई परेशानियां कम होती हैं.
7. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में
बाजरा हमारे शरीर में पाचन तंत्र के सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है. बाजरे हमारा बाजरा हमारे जठर तंत्र को दुरुस्त करके कब्ज, पेट फूलने, और गैस जैसी समस्याओं को दूर करता है. इसके अलावा बाजरा हमारे शरीर में पोषक तत्वों के स्तर को भी बनाए रखता है.
8. कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में
कोलेस्ट्रोल का हमारे शरीर में अनियंत्रित हो जाना कई तरह की परेशानियों को उत्पन्न करता है. बाजरे में पाया जाने वाला फाइबर खराब कोलेस्ट्रोल को खत्म करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के प्रभाव को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है.
9. त्वचा के लिए
बाजरे में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करते हैं. ये हमारे शरीर की त्वचा में पड़ने वाली झुर्रियों और उम्र बढ़ाने वाले अन्य लक्षणों को लक्षण खत्म करता है. क्योंकि इसके सेवन से कोशिकाओं को पुनर्जीवन मिलता है. इसके अलावा बाजरे में अमीनो एसिड भी पाया जाता है. जोकि कोलेजन के निर्माण करने में और ऊतकों को संरचना देने में काफी मददगार होते हैं. इसकी सहायता से त्वचा में लचीलापन भी आता है. बाजरे में पाए जाने वाले विटामिन ई विटामिन सी और सेलेनियम जैसे तत्व हमारी त्वचा को कैंसर और सूर्य किरणों से होने वाली क्षति की भरपाई करते हैं.
10. शुगर के उपचार में
शुगर एक बेहद गंभीर बीमारी है. बाजरा में शुगर को दूर करने की क्षमता होती है. यह विशेष रुप से टाइप-2 मधुमेह को कम करने में फायदेमंद साबित होता है. बाजरे में मैग्नीशियम भी पाया जाता है मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन और और ग्लूकोज रिसेप्टर की क्षमता बढ़ाने में उपयोगी है. एक अध्ययन के अनुसार मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से मधुमेह की संभावना में 30% तक कमी हो सकती है.
11. बालों के लिए
बालों को मजबूत करने और इसे स्वस्थ रखने में भी बाजरे की भूमिका महत्वपूर्ण है. बाजरे में पाया जाने वाला केराटिन प्रोटीन बालों के प्रत्येक किनारे की संरचना को बनाए रखने में सहायक है. बाजरे के सेवन से बालों के झड़ने की समस्या खत्म हो सकती है. इसके अलावा बाजरा, रूसी, सूजन, एक्जिमा आदि समस्याओं को भी दूर करने में काफी मददगार होता है. बाजरा को गंजेपन से भी बचा सकता है.

बाजरा के नुकसान

  • यदि आपके शरीर में बाजरा को पचाने में अधिक समय लगता है. तो आपके लिए से नुकसान भी हो सकता है.
  • बाजरे के इस्तेमाल से आपको घेंघा और थायराइड जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. क्योंकि बाजरा आयोडीन के शोषण को बाधित करता है.
  • हाइपोथायरायडिज्म पीड़ित व्यक्ति बाजरे के सेवन से बचें.
     
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Sorghum (Jowar) Benefits And Side Effects in Hindi - ज्वार के फायदे और नुकसान

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Sorghum (Jowar) Benefits And Side Effects in Hindi - ज्वार के फायदे और नुकसान

ज्वार का वैज्ञानिक नाम ज्वार बायकलर है. ज्वार उपोष्णकटिबंधीय देशों और उष्णकटिबंधीय देशों में पाई जाने वाली घास का एक प्रकार है. इसके ज्यादातर प्रजातियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता रहा है. ज्वार बायकलर का ही उपयोग हम मनुष्यों के लिए अनाज, ज्वार शिरा, ज्वार सिरप आदि के रूप में करते हैं. आज की तारीख में ज्वार का उपयोग शराब बनाने और जमींदारों के लिए भी किया जाता है.

ज्वार का प्रयोग उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जिन्हें गेहूं से एलर्जी होती है. ज्वार में भी पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है. इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रुप से नियासिन, यामीन, राइबोफ्लेविन, मैग्नीशियम, लोहा, तांबा, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर हैं. ज्वार के फायदे और नुकसान के बारे में जानने के लिए निम्लिखित बिन्दुओं पर गौर करें.

1. हड्डियों के लिए
ज्वार का उपयोग हम हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कर सकते हैं. क्योंकि ज्वार में मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस आदि की प्रचुरता होती है. इसके अलावा जवाहर हमारे शरीर में ऊतकों के विकास में भी काफी सहायक साबित होता है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी बीमारियों को दूर करने में भी काफी मदद मिलती है.
2. शुगर के उपचार में
ज्वार में टैनिन नाम का एक एंजाइम पाया जाता है. यह शरीर से स्टार्च के अवशोषण को रोकता है. और इंसुलिन एवं ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है. जिससे शुगर के मरीजों में ग्लूकोज के स्तर में निरंतरता बनी रहती है. यानी ग्लूकोज के स्तर का बढ़ना यह घटना रुक जाता है.
3. ह्रदय से संबंधित विकारों में
फाइबर से समृद्ध ज्वार हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. क्योंकि फाइबर हमारे शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को दूर करने में काफी सहायक होता है. इससे हमारे हृदय को स्वस्थ बने रहने में मदद मिलती है. ज्वार के सेवन से धमनियों को सख्त होने और दिल के दौरे एवं स्ट्रोक जैसी स्थितियों से भी निजात पा सकते हैं.
4. पाचन तंत्र के लिए
ज्वार में पाई जाने वाली फाइबर की भरपूर मात्रा हमारे शरीर के पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करने का काम करती है. दिन में एक बार ज्वार के सेवन से हमें पूरे दिन का लगभग 48 प्रतिशत फाइबर प्राप्त हो जाता है. इससे हमारे पाचन तंत्र को तेजी से काम करने में मदद मिलती है. और पेट से संबंधित तमाम बीमारियां जैसे सूजन, कब्ज पेट में दर्द, दस्त, गैस आदि से छुटकारा मिलता है.
5. कैंसर के उपचार में
ज्वार का चोकर एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर के जन्म लेने की संभावना को काफी हद तक कम करते हैं. क्योंकि एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को खत्म करके कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का काम करते हैं.
6. एलर्जी को दूर करने में
कई लोगों को गेहूं खाने से एलर्जी की समस्या होने लगती है. ऐसे में लोगों लोग गेहूं के विकल्प के रूप में ज्वार का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से आप सूजन मतली और जठार तंत्र संबंधी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं.
7. उर्जा को बनाए रखने में
ज्वार का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर को लगातार बनाए रखता है. क्योंकि ज्वार में नियासिन या विटामिन बी 3 पाया जाता है. जो कि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके शरीर तक पहुंचाता है. यही नहीं यह कई पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदल कर उपापचय के द्वारा शरीर में उर्जा के स्तर को बनाए रखता है.
8. मोटापा कम करने में
ज्वार का नियमित सेवन मोटापा कम करने वाले व्यक्तियों के लिए काफी लाभदायक होता है. ज्वार में पाया जाने वाला फाइबर भूख को नियंत्रित करता है. जिससे कि आपको जल्दी जल्दी भूख नहीं लगती है. इसके अलावा इसमें अन्य पोषक तत्वों की भी मौजूदगी होती है.
9. लाल रक्त कोशिकाओं की वृद्धि में
ज्वार में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों में कैल्शियम और कैल्शियम भी होते हैं. इसके अलावा इसमें कॉपर और आयरन भी पाए जाते हैं. जो कि हमारे शरीर में एनीमिया की संभावना को खत्म करते हैं. शरीर में पर्याप्त मात्रा में कॉपर और आयरन की मौजूदगी हमारे रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाते हैं. जिससे हमारा रक्त संचरण में मदद मिलती है.

ज्वार के नुकसान

  • ज्वार के सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो सकती है.
  • ज्वार का आवश्यकता से अधिक मात्रा में सेवन हमें कई परेशानियों में डाल सकता है.
     
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Red Lentils (Masoor Dal) Benefits in Hindi - मसूर दाल के फायदे

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Red Lentils (Masoor Dal) Benefits in Hindi - मसूर दाल के फायदे

पोषक तत्वों से भरपूर मसूर दाल हमारे देश में प्राचीन काल से ही इस्तेमाल होती आ रही है. दरअसल यह सबसे पुराने और सबसे ज्यादा खपत होने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है. दूसरे दलों की अपेक्षा इसे भिगोने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. मसूर दाल में कई तरह के पोषक तत्वों और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले तत्व की प्रचुरता होती है. इसमें पाए जाने वाले स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों के आधार पर भी इसे संतुलित आहार की श्रेणी में रखा जाता है. मसूर दाल में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन बी, और फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं. इस मेंपाए जाने वाले खनिज पदार्थों में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, लोहा, सेलेनियम, पोटेशियम, जस्ता आदि प्रमुख है. इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. जो कि शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं. आइए मसूर दाल के फायदे और नुकसान को विस्तारपूर्वक जानें.

1. हड्डियों और दांतों को के लिए
मसूर दाल मैग्नीशियम कैल्शियम फास्फोरस और कई तरह के खनिज पदार्थों का एक बेहतरीन स्त्रोत है. यह मजबूत और स्वस्थ हड्डियों के लिए तो आवश्यक है ही, हमारे दांतो के विकास और वृद्धि में भी फायदेमंद साबित होती है.
2. सूजन कम करने में
मसूर दाल में फोलेट, विटामिन बी, प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाने की वजह से यह हमारे शरीर से सूजन को खत्म करने में मददगार होता है. कई शोधों में पता चलता है कि यदि हम नियमित रूप से मसूर दाल का सेवन करें तो सूजन से जुड़ी कई बीमारियों की संभावना खत्म होती है.
3. कैंसर के उपचार में
कैंसर एक गंभीर बीमारी है. लेकिन मसूर दाल के कैंसर रोधी गुण पाया जाता है. जिसमें फोलेट और फाइबर की प्रमुखता होती है. के कारण यह हमें कैंसर से बचाता है. मसूर दाल में पाए जाने वाले कैंसररोधी घटकों में एंटीऑक्सीडेंट्स, सेलेनियम और जस्ता भी हैं. इस प्रकार मसूर दाल का नियमित सेवन हमें कैंसर के खतरों से बचाता है.
4. त्वचा की सुंदरता के लिए
मसूर दाल का नियमित सेवन आपकी त्वचा को सुंदर और चमकदार बनाने में भी सहायक होता है. मसूर दाल के सेवन से त्वचा मुलायम, कोमल और निखिल हुई लगती है. इसके अलावा मसूर दाल हमारे चेहरे पर होने वाले मुंहासों में भी काफी हद तक कमी लाता है. यह त्वचा की लकीरों, झुर्रियों और काले धब्बों को भी खत्म करता है.
5. हृदय की समस्याओं में
मसूर दाल का नियमित सेवन हमारे शरीर में फाइबर की मौजूदगी को बनाए रखता है. इसके अलावा इसमें पाए जाने वाला फोलेट और मैग्नीशियम भी हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में काफी उपयोगी साबित होते हैं. मैग्नीशियम हमारे शरीर में रक्त संचार, ऑक्सीजन और अन्य उपयोगी तत्वों को दुरुस्त करंता है. जबकि मैग्नीशियम हमारे शरीर में ह्रदय को सेहतमंद रखने का काम करता है. मसूर दाल में घुलनशील फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. जो कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर के हृदय की धमनियों को साफ करने में मददगार साबित होता है. इससे स्ट्रोक और दिल के दौरे पड़ने का खतरा कम होता है.
6. पाचन के सुधार में
मसूर दाल में पाई जाने वाली फाइबर हमारे शरीर में पाचन से संबंधित समस्याओं को दूर करने में उपयोगी होती है. इसके अलावा यह हमारे शरीर से विषाक्तता को भी हटाने में फायदेमंद होती है. मसूर दाल में पाए जाने वाला घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रोल को घटाकर हमारी आंत्र की गतिविधियों को भी नियमित करता है. इससे कब्ज और पाचन की अन्य समस्याओं में काफी राहत मिलती है.
7. शुगर के उपचार में
मसूर दाल शुगर के मरीजों के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है. क्योंकि इसका ग्लिसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है. मसूर दाल हमारे शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को भी नियंत्रित करने में मददगार होता है. इसके अलावा ये शुगर और इंसुलिन की अन्य समस्याओं में भी उपयोगी साबित होती है.
8. वजन कम करने में
मसूर दाल का उपयोग मोटापा या वजन कम करने के लिए भी किया जाता है. क्योंकि इसमें वसा की कम मात्रा और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है. इसमें पाए जाने वाले फाइबर के कारण हमें भूख कम लगती है. जिससे की हम खाना कम खाते हैं और वजन में कमी आती है.

मसूर दाल के नुकसान

  • मसूर दाल का आवश्यकता से अधिक उपयोग हमारे शरीर में पेट फूलने, किडनी की समस्या और पोटेशियम विषाक्तता जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.
  • इसके अलावा कुछ लोगों को मसूर दाल के सेवन से एलर्जी भी हो सकती है.
     
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Black Gram (Urad Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - उड़द दाल के फायदे और नुकसान

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Black Gram (Urad Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - उड़द दाल के फायदे और नुकसान

उड़द की दाल में भी कई तरह के पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है. बाजार में उड़द दाल, साबुत, छिलका लगी हुई या बिना छिलके के लिए बिक्री के लिए उपलब्ध होता है. उड़द का वैज्ञानिक नाम विग्न मुंगों है. हमारे यहां इसका उपयोग प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है. भारत और दक्षिण एशियाई देशों की संस्कृतियों में भी इससे बने व्यंजनों की भरमार रही है. उड़द की दाल में पाए जाने वाले विभिन्न तत्वों में विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर प्रमुख हैं. आइए उड़द की दाल से होने वाले कुछ प्रमुख फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1.शुगर के उपचार में
शुगर से पीड़ित व्यक्ति उड़द की दाल में पाए जाने वाले फाइबर की सहायता से लाभान्वित हो सकता है. फाइबर हाथ में पोषक तत्वों की तीव्रता को विनियमित करने में फायदेमंद होता है. यह हमारे रक्त में इंसुलिन और गोलू के ग्लूकोज का स्तर भी नियमित करने में उपयोगी होता है. शुगर के मरीजों के लिए इंसुलिन और ग्लूकोज का स्तर संतुलित रखना काफी राहत देने वाला होता है.
2. बदन दर्द से राहत में
उड़द की दाल के प्रयोग से आप शरीर के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं. उड़द की दाल में पाए जाने वाले खनिज और विटामिन हमारे उपापचय की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं. इसके साथ ही ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके हमारे शरीर से दर्द और सूजन को मिटाने में सहायक होते हैं. इस तरह शरीर के दर्द को भगाने के लिए उड़द की दाल का नियमित सेवन लाभदायक होता है.
3. पाचन की समस्या दूर करने में
उड़द की दाल में पाया जाने वाला फाइबर हमारे जठर तंत्र के किसी भी समस्या से निपट सकता है. दरअसल फाइबर, मल को त्यागने और पेस्टलेटिक गति को प्रोत्साहित करने का काम करता है. उड़द की दाल पेट फूलने, कब्ज, पेट में ऐंठन आदि पेट की समस्याओं को दूर करती है. इसके साथ ही भोजन के पोषक तत्वों को अवशोषित करके भोजन का सम्पूर्ण लाभ प्रदान करती है.
4. हड्डियों को मजबूत करने में
उड़द की दाल में फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आदि खनिजों की मौजूदगी हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है. इन तत्वों से हड्डियों में होने वाली टूटन कम होती है. इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व भी बरकरार रहता है. कमजोर हड्डियों में मजबूती आ जाने से ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी समस्याएं भी समाप्त होती हैं. हड्डियों में लचीलापन लाने के साथ ही ये हड्डियों की अन्य समस्याओं की संभावना को भी खत्म करती है.
5. ऊर्जा को बढ़ाने में
उड़द की दाल हमारे शरीर की ऊर्जा स्तर में वृद्धि करती है. इसके साथ-साथ ये जीवन शक्ति की वृद्धि करने का भी एक बेहतर विकल्प साबित होती है. उड़द की दाल में पाया जाने वाला आयरन हमारे शरीर की रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह रक्त कोशिकाएं, हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने में काफी मददगार होती है. ऑक्सीजन का हमारे शरीर में संचरण होने से उर्जा के स्तर में वृद्धि होती है. इससे आयरन की कमी से होने वाले रोगों की संभावना काफी हद तक कम होती है.
6. त्वचा के लिए
उड़द की दाल का प्रयोग हमारे त्वचा को भी स्वस्थ रखने में लाभदायक साबित होता है. उड़द की दाल में मौजूद खनिज और विटामिन हमें सूजन जैसी समस्याओं से निजात दिलाते हैं. इसके अलावा यह ब्यूटी मार्क्स से और त्वचा से संबंधित अन्य समस्याओं से भी छुटकारा दिलाते हैं. त्वचा पर ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में भी उड़द की दाल की भूमिका काफी सकारात्मक होती है. सन बर्न और मुंहासों जैसे लक्षणों को भी उड़द की दाल से नियंत्रित किया जा सकता है.
7. दिल के लिए
उड़द की दाल हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में भी फायदेमंद होती है. दरअसल इस में पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर आदि जैसे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं. जो कि ह्रदय को स्वस्थ रखने में काफी मददगार होते हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित किया जाता है.

उड़द की दाल के नुकसान

  • उड़द की दाल के सेवन से किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड की वृद्धि हो सकती है.
  • गुर्दे की पथरी और पित्त की पथरी से पीड़ित मरीज इसका सेवन ना करें.
  • किसी भी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें.
     
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Mung Beans (Green Gram) Benefits in Hindi - मूंग दाल खाने के फायदे

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Mung Beans (Green Gram) Benefits in Hindi - मूंग दाल खाने के फायदे

मूंग दाल का प्रयोग शरीर से शरीर के कई समस्याओं के उपचार में किया जाता है.. प्राचीन काल से ही मुंग दाल का प्रयोग हमारे देश में किया जाता रहा है. मुंग दाल हमारे यहाँ परम्परागत रूप से खाया जाता रहा है. हलांकि ये जरुर है. कि मुंग दाल उतना लोकप्रिय नहीं है. मुंग दाल में मैग्नीशियम, फाइबर, जस्ता, प्रोटीन, विटामिन बी, मैंगनीज, तांबा, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि पाए जाते हैं. इसे अन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. आइए इससे होने वाले कुछ फायदे और नुकसान को जानें.

1. आँखों के लिए
मूंग की दाल आंखों को स्वस्थ रखने में काफी लाभदायक होती है. आंखों के लिए आवश्यक विटामिन सी ह में मूंग की दाल से मिल जाती है. इसके अलावा और मूंग की दाल में विटामिन-बी6 और विटामिन बी5 आदि भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं. विटामिन सी रेटिना को सही रखने के लिए उचित होता है. इस प्रकार मूंग का दाल आंखों की देखभाल के लिए एक बेहतर विकल्प है.
2. शुगर दूर करने में
मूंग की हरी दाल हमारे शरीर में मौजूद शुगर के स्तर को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हरी मूंग की दाल खाने का एक और फायदा यह है कि इससे छीनी आसानी से पचने के लायक बन जाती है. इसलिए वह रक्त में घूमती नहीं है. मूंग की दाल खाने से शुगर का स्तर हमारे शरीर में सामान्य बना रहता है. जिससे शुगर की बीमारी को रोका जा सकता है.
3. रक्तचाप के नियंत्रण में
मूंग की दाल में मौजूद मैग्नीशियम नामक तत्व रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक सिद्ध होता है. यही नहीं मूंग की दाल रक्त में मैग्नीशियम का स्तर भी सामान्य बनाए रखती है. और हमारे संपूर्ण शरीर में मैग्नीशियम का संचार भी मैग्नीशियम हमारे शरीर में रक्त संचरण को बनाए रख कर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है. मूंग की दाल वसा को भी नियंत्रित रखने में सहायक होती है.
4. बदहजमी दूर करने में
मूंग की दाल हमारे शरीर में होने वाले बदहजमी और पेट में जलन की शिकायत को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दरअसल मुंग दाल में पाया जाने वाला फाइबर हमारे शरीर की पाचन क्रिया को दुरुस्त करने का काम करती है. इससे उपापचय की स्थिति में सुधार आता है. और पाचन क्रिया सही से संचालित होने पर हमारा पेट भी ठीक रहता है.
5. हड्डियों को मजबूत बनाने में
मूंग की दाल हमारे शरीर में हड्डियों को मजबूत रखने का काम करती है. या कैल्शियम की जरूरत पूरा करके हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होती है. मूंग की दाल से मिलने वाला कैल्शियम हड्डियों के निर्माण में आने वाली बाधाओं को रोकता है. इसके साथ ही यह तनाव भी कम करने में उपयोगी होता है.
6. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं को आमतौर पर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इनमें से प्रमुख है, पाचन तंत्र का अनियमित रूप से काम करना. इस वजह से गैस और जलन जैसी समस्याएं आनी शुरू हो जाती हैं. इन सब से छुटकारा पाने के लिए नेता दाल खाना सबसे आसान और अच्छा तरीका है.
7. कोलेस्ट्राल के नियंत्रण में
अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल के कारण हमारे शरीर में कई तरह की अनियमितताएं होने लगती हैं. मुख्य रूप से हृदय से जुड़ी बीमारियां बीमारियों का कारण कोलेस्ट्राल का अनियंत्रण ही है. मूंग की दाल खाने से दिल की धमनियों और कोशिकाओं में जमा कोलेस्ट्राल में कमी आने लगती है. और रक्त संचार में भी आसानी होने लगती है. इसलिए यदि आप हृदय से संबंधित परेशानियों से दूर रहना चाहते हैं. तो अपने खाद्य पदार्थ में मूंग की दाल को शामिल करें
8. बालों के लिए
मूंग की दाल बालों को मजबूत बनाने और उसकी देखभाल करने में काफी फायदेमंद साबित होती है. मूंग की दाल में पाया जाने वाला कॉपर हमारे शरीर में लोहा कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा को पूरा करता है. यह हमारे दिमाग में ऑक्सीजन बिना किसी रूकावट के ठीक तरीके से पहुंचाने का भी काम करता है. जिससे कि हमारे सिर के बालो के जड़ो को मजबूती मिलती है. इसके अलावा इस से बाल घने लंबे और चमकदार भी बनते हैं.
9. त्वचा के लिए
त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मूंग की दाल की भूमिका काफी सकारात्मक होती है. नियमित रूप से मूंग की दाल का सेवन हमारे चेहरे पर छुपी हुई झुर्रियों काले घेरे और दाग धब्बे आदि को दूर करता है. इसका नियमित सेवन हमारे लिए एंटी एजिंग का भी काम करती है. इसलिए यदि आप भी ढलती उम्र को रोकना चाहते हैं. तो मूंग की दाल का सेवन शुरू कर दें.
 

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Pigeon Peas (Arhar Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - अरहर (तुअर) दाल के फायदे और नुकसान

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Pigeon Peas (Arhar Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - अरहर (तुअर) दाल के फायदे और नुकसान

आज संपूर्ण विश्व में अरहर की खेती व्यापक रूप से की जाती है. लेकिन इसकी शुरुआत भारत से ही हुई थी. इसके बाद फिर और पूर्वी अफ्रीकी देशों में से होते हुए अमेरिका और अन्य देशों में गया हर हर एक दलहन फसल है. और इसकी उपयोगिता कई समस्याओं के निदान में सहायक होती है. अरहर दाल से शरीर की वृद्धि रक्तचाप में संतुलन वजन में संतुलन शरीर की ऊर्जा का संचयन पाचन क्रिया में सुधार गृह से जुड़ी बीमारी में निदान आदी हो सकता है. सभी दलहन फसलें प्रोटीन का मुख्य स्रोत तो होती ही हैं. लेकिन अरहर दाल में प्रोटीन के अलावा फाइबर विटामिन एंटीऑक्सीडेंट्स खनिज आदि भी पाया जाता है. इसलिए अरहर दाल संपूर्ण शरीर के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आइए अरहर दाल के फायदे पर एक नजर डालते हैं.

1. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
तुवर दाल के कई उपयोगिताओं में से एक है इसका प्रतिरक्षा प्रणाली में योगदान अरहर की कच्ची फली खाना भी काफी लाभदायक होता है. यदि आप पका हुआ अरहर दाल का मटन खाते हैं. तो उसमें विटामिन सी का स्तर लगभग 25% तक घट जाता है. लेकिन यदि आपको उसे पूरी उर्जा के साथ खाना है. तो कच्चा अरहर की फली खाएं इससे विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलती है. और रक्त कोशिकाओं श्वेत रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है. शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स में वृद्धि करने के कारण अरहर दाल हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.
2. वजन घटाने में
अरहर दाल में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है. यही नहीं इस में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल भी काफी कम मात्रा में पाया जाता है. इस वजह से अरहर दाल ऊर्जा को तो बढ़ाता है. लेकिन और वसा को कम करता है. इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला फाइबर आपको फुर्सत पोषण तो देता ही है. साथ में आपके भूख लगने को भी कम करता है. ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में अरहर दाल में पाया जाने वाला पोटेशियम भी काफी उपयोगी साबित होता है.
3. उच्च रक्तचाप को कम करने में
अरहर दाल खाने से शरीर में बिना किसी रुकावट के रक्त संचरण होता रहता है. पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में अरहर दाल पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करने में सक्रिय भूमिका निभाता है. अरहर दाल की पल्लू में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. जिसकी वजह से शरीर में होने उच्च रक्तचाप वाली समस्याएं नहीं होती हैं.
4. एनीमिया में
अरहर दाल में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने वाला फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. खून की कमी से हमारे शरीर में खून की कमी एनीमिया की बीमारी होती है. लेकिन जब आप अरहर दाल का सेवन करने लगते हैं. तो यह कमी पूरी हो जाती है. जिससे कि आप एनीमिया की समस्या से छुटकारा पा लेते हैं.
5. शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में
अरहर दाल का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति करता रहता है. दरअसल यह संभव हो पाता है अरहर की फलियों में मौजूद विटामिन बी और विटामिन डी से. इसके अलावा इसमें नया सीन और राइबोफ्लेविन शरीर में मौजूद वसा को भंडारित होने से रोकता है.
6. शारीरिक विकास में
अरहर दाल दुनिया भर में भोजन का हिस्सा इसलिए बन चुकी है. क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. लगभग एक कप पकी हुई अरहर दाल में 11 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. जो कि हमारे शरीर के संपूर्ण वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक है. यह प्रोटीन हमारे शरीर की तमाम कोशिकाओं मांसपेशियों पुस्तकों और हड्डियों का निर्माण करने में काफी सहायक सिद्ध होता है.
7. दिल को स्वस्थ रखने में
अरहर दाल में पाया जाने वाला फाइबर पोटेशियम और निम्न स्तर का कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी से हमें राहत दिलाती है. पोटेशियम हमारे शरीर में रक्त के दबाव को कम करके दिल पर आने वाले तनाव को कम करता है. फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मददगार है.
8. सूजन के उपचार में
अरहर दाल के पेड़ और उसके पत्ते कवि सभी का प्रयोग कमल औषधीय प्रयोजनों के लिए कर सकते हैं. मुख्य रूप से इन सब का प्रयोग करके हम सूजन को जल्द से जल्द ठीक कर सकते हैं. इन सबसे बड़ा पेस्ट बवासीर के लिए भी फायदेमंद साबित होता है.

अरहर दाल के नुकसान
आमतौर पर अरहर दाल का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है. लेकिन हो सकता है. किसी को अरहर दाल से एलर्जी महसूस हो ऐसा होने पर उन्हें चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए.
 

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Semolina Flour (Suji) Benefits and Side Effects in Hindi - सूजी के फायदे और नुकसान

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Semolina Flour (Suji) Benefits and Side Effects in Hindi - सूजी के फायदे और नुकसान

सूजी दरअसल एक तरह से आटा का विकल्प है. इसके अलावा यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है. जो आपके भोजन संबंधी सभी उद्देश्यों को भी पूरा करता है. सूजी का प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में ब्रेड पास्ता पिज़्ज़ा क्रस्ट हलवा आदि बनाने के लिए खूब करते रहे हैं. कोलेस्ट्रोल संतृप्त वसा आदि से रहित दलिया दुरूम गेहूं से बनी होती है. हलके पीले रंग वाली सुजीत में प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है. यह शुगर के मरीजों के लिए एक उपयुक्त आहार के रूप में प्रचलित है. आइए सूजी के ऐसे ही कई फायदों और इसके नुकसान के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं.

1. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में
सूजी में कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. सेलेनियम उनमें से एक है. सेलेनियम का काम हमारे शरीर की कोशिका झिल्ली और डीएनए के ऑक्सीकरण को रोकना होता है. यदि यह ऑक्सीकरण यदि इस ऑक्सीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो यह विभिन्न रोगों और हृदय से संबंधित बीमारियों में अपनी भूमिका निभा सकता है. हमारे शरीर में सेलेनियम की प्रचुरता हमारे प्रतिरक्षा तंत्र के लिए भी काफी उपयोगी है.
2. ऊर्जा की पूर्ति के लिए सूजी में
कार्बोहाइड्रेट्स की प्रचुरता इसे हमारे शरीर के ऊर्जा उत्पादन के लिए काफी लाभदायक बनाती है. सुजी को ऐसे लोगों के लिए एक आदर्श भोजन माना जाता है, जिन्हें ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होती है. तमाम पोषक तत्वों से समृद्ध सुजी में विटामिन ए और बी कॉन्प्लेक्स पाया जाता है. जो कि इसे एक संतुलित आहार के रुप में स्थापित करता है.
3. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
सूजी का काम हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल के विकास को रोकना भी है. इसमें पाया जाने वाला ट्रांस एसिड और संतृप्त वसा उच्च कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में सहायक सिद्ध होती है. सूजी को एक डाइट फ़ूड के रूप में आप इस्तेमाल कर सकते हैं. विशेष रुप से जब बुखार या पेट खराब होने जैसी स्थिति हो तो इस दौरान यह काफी उपयोगी साबित होता है.
4. शुगर के उपचार में
शुगर के मरीजों के लिए सुजीत एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है. कह सकते हैं. कि यह उनके लिए भोजन का सबसे अच्छा विकल्प भी है. इसका कारण इसमें कम मात्रा में पाया जाने वाला जीई है. ऐसा इसलिए भी है. क्योंकि सुजीत सफेद आटे की तुलना में हमारे पेट और आंतों में पहुंचने और और सुजीत होने में काफी कम समय लेता है. लेकिन यह धीमी दर पर पड़ता है. और सरकार हमारे शरीर से शर्करा के स्तर को बेहद बेहद प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है. हमारे शरीर में रक्त ग्लूकोज के स्तरों स्तरों मैं तीव्र उतार चढ़ाव को भी रुकता है.
5. वजन कम करने में
सूजी एक डाइट वाले भोजन के रूप में काफी प्रचलित है. इसलिए वजन कम करने वाले लोगों के लिए भी यह एक बेहतर भोजन का विकल्प साबित होता है. सूजी के सेवन से आपको भूख कम लगती है. और आपको जल्दी जल्दी खाना नहीं खाना पड़ता है. इससे आपका वजन कम होता है.
6. शरीर की क्रियाशीलता को बढ़ाने में
हमारे शरीर में तमाम पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में सूजी एक आवश्यक खाद्य पदार्थ है. सूजी का सेवन दिल और किडनी के कार्यों को भी समृद्ध करता है. सुजी का सेवन हमारी मांसपेशियों को सुचारु ढंग से काम करने में भी सहायक है. सुजी में पाया जाने वाला फर्स्ट फुआ एनर्जी मेटाबोलिज्म के लिए आवश्यक है. इस में उपस्थित मैग्नीशियम हड्डी तंत्रिका और मांस पेशियों के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करता है.

सूजी के नुकसान

  • सूजी के सेवन से आपको कई बार पेट में दर्द क्रॉनिक डायरिया, ब्लोटिंग जैसी शिकायत हो सकती है.
  • जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी है. उन्हें भी सूजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
  • सुजी से होने वाले नुकसानों में सिर में दर्द जोड़ों में दर्द आदि भी हैं.
     
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Bulgur Wheat (Daliya) Benefits and Side Effects in Hindi - दलिया के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Bulgur Wheat (Daliya) Benefits and Side Effects in Hindi - दलिया के फायदे और नुकसान

गेहूं को रिफाइंड करके दुनियाभर में इससे कई तरह के अनाज बनाए जाते हैं. दलिया भी उन में से एक है. इसका प्रयोग भारत, मिडिल ईस्ट, यूरोप के देशों आदि में एक महत्वपूर्ण व्यंजन के रूप में किया जाता है. इसे एक साइड डिश माना जाता है. दलिया में पाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्व आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक साबित होते हैं. यह एक प्राकृतिक पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ है. इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन, खनिज, पोटेशियम, मैंगनीज, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, जस्ता और तांबा इत्यादि पाया जाता है. इसके साथ ही इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है. आईए दलिया के फायदे और नुकसान को समझते हैं.

1. प्रोटीन के स्रोत के रूप में
दलिया को प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है. जाहिर है प्रोटीन हमारे शरीर के विकास के लिए बहुत आवश्यक पदार्थ है. दलिया हमारे शरीर में नए कोशिकाओं ऊतकों और रक्त वाहिकाओं को बढ़ाने का काम करती है. इससे किसी चोट या अन्य बीमारियों में जिसमें प्रोटीन की आवश्यकता होती है, काफी मदद मिलती है.
2. मोटापा कम करने में
जाहिर है दलिया में कैलोरी और वसा की कम मात्रा इसे वजन कम करने में बहुत महत्वपूर्ण बनाती है. इसके अलावा दलिया में फाइबर की प्रचुरता भी आपका पेट जल्दी भरने में मदद करती है. इससे आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती है. वजन कम करने के लिए दलिया से बेहतर खाद्य विकल्प नहीं है.
3. ह्रदय को स्वस्थ रखने में
दलिया का मदद हम हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भी ले सकते हैं. दलिया हमारे दिल में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण के करती है. दलिया पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत होने के कारण हमारे रक्त वाहिकाओं और धमनियों में निम्न रक्तचाप पर तनाव को घटाने में उपयोगी साबित होती है. ह्रदय से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में दलिया की भूमिका महत्वपूर्ण है.
4. पाचन शक्ति के लिए
हमारे शरीर में पाचन क्रिया से संबंधित बिमारियों जैसे कि कब्ज, सूजन और ऐंठन आदि को रोकने के लिए दलिया काफी उपयोगी है. दरअसल इन सभी समस्याओं के उपचार के लिए फाइबर की सख्त जरूरत होती है. और दलिया फाइबर से भरपूर होता है. इसके अलावा दलिया में ओमेगा-3 फैटी एसिड को भी समाप्त करने की क्षमता होती है. दलिया हमारे पेट में पोषक तत्वों की क्षमता में सुधार कर सकता है.
5. प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए
दलिया हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी काफी मददगार साबित होती है. दरअसल इस में पाए जाने वाले विटामिन और खनिजों की भरपूर मात्रा ही हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक होती है. विशेष रुप से जस्ता शरीर की मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र के लिए एक जरूरी तत्व है.
6. कैंसर के उपचार में
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर दलिया में फैटोन्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं. इस शरीर में इसका काम सूजन को खत्म करके स्वस्थ कोशिकाओं को परिवर्तित करना होता है. जो कि कैंसर को खत्म करने के लिए बहुत आवश्यक होता है. शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करके ऑक्सीडेटिव तनाव को प्रोत्साहित करने में भी इसकी भूमिका होती है.
7. शुगर के लिए
दलिया में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के रक्त रक्त शर्करा स्तर को कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं. यह बात मधुमेह के मरीजों के लिए काफी मायने रखती है. क्योंकि इससे उनका शुगर कम होता है.
8. अच्छी नींद के लिए
दलिया में पाया जाने वाला मैग्नीशियम न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है. जैसे ही हमारा शरीर न्यूरोट्रांसमीटर छोड़ता है तो इससे तंत्रिका तंत्र और मन को शांति मिलती है. यह बात हमारे हमारे लिए अच्छी नींद के लिए काफी जरुरी है. अनिद्रा या नींद से संबंधित अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोग अपने आहार में दलिया को शामिल करके इसे काफी हद तक इससे निजात पा सकते हैं.
9. एनीमिया से बचने में
जब हमारे शरीर में खून की कमी होती है. तो इसे एनीमिया के नाम से जाना जाता है. दरअसल लोहा एक ऐसा तत्व है जो हमारे शरीर में रक्त संचरण के लिए काफी आवश्यक है. दलिया लोहे से भरपूर होती है. इसलिए यह एनीमिया से राहत देने के लिए काफी उपयोगी है.
10. हड्डियों की मजबूती के लिए
दलिया में मौजूद तमाम खनिज पदार्थ हमारे शरीर के हड्डियों को मजबूत करने का काम करते हैं. दलिया में हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए और ऑस्टियोपोरोसिस से लड़ने के लिए प्रचुर मात्रा में फास्फोरस, लोहा और मैंगनीज पाया जाता है.

दलिया के नुकसान

  • आवश्यकता से अधिक दलिया के सेवन से हमारे शरीर में सूजन और गैस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
  • दलिया का अत्यधिक सेवन कभी-कभी आपको दर्द, दस्त और उल्टी जैसी समस्याओं से भी सामना करा सकता है.
     
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Side Effects of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Side Effects of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

वायु प्रदुषण आज सम्पूर्ण विश्व के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. ऐसा नहीं है कि हमेशा से ये स्थिति थी. प्राचीन काल में हमारे सामने वायु प्रदूषण जैसी समस्या नहीं आई क्योंकि प्रदूषण का दायरा सीमित था. इसके अलावा प्रकृति भी पर्यावरण को संतुलित रखने का लगातार प्रयास करती रहती है. प्रकृति के संतुलन से और उस समय प्रदूषण के सीमित होने के कारण पहले हमें ऐसी विकट स्थिति का मामना नहीं करना पड़ता था. लेकिन आज हम तथाकथित विकास के नाम पर कई ऐसे काम कर रहे हैं जिनका असर वायु की शुद्धता पर पड़ रहा है. औद्योगीकरण के बाद से लगातार उत्पादन क्षमता बढ़ता जा रहा है.

दरअसल हम सभी ने अपने औद्योगिक लाभ के लिए बिना सोचे-समझे प्राकृतिक साधनों का भयंकर दोहन और विनाश किया है. इसी कारण से प्राकृति का सन्तुलन बिगड़ने लगा और फिर वायुमंडल भी इससे बच नहीं सका. आज भारत के साथ विश्व के कई देश इसके दुष्प्रभाव को झेलने के लिए बाध्य हैं. आपको बता दें कि हमारे वायुमण्डल में नाइट्रोजन, आक्सीजन, कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड आदि गैसों की उपस्थिति एक निश्चित अनुपात में रहती है. जब किसी अन्य कारणों से इनके अनुपात के सन्तुलन में परिवर्तन होता है तो वायुमण्डल अशुद्ध हो जाता है. वायुमंडल को अशुद्ध करने वाले कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, हाइड्रोकार्बन, धूल मिट्टी के कण हैं जो वायुमण्डल को प्रदूषित करने का काम करते हैं. आइए वायु प्रदुषण के कुछ महत्वपूर्ण दुष्प्रभावों को जानें.

1. श्वसन की समस्याएं
वायु प्रदुषण का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ये है कि इससे वायुमण्डल में लगातार अवांछित रूप से कार्बन डाइ आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, नाइट्रोजन, आक्साइड, हाइड्रो कार्बन आदि हमारे फेफड़ों से होता हुआ शरीर के अंदर जाता रहे तो श्वसन से संबंधित कई तरह की परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं. इसमें आपको उल्टी घुटन, सिर दर्द, आँखों में जलन आदि समस्याएं हो सकती हैं.
2. भूमि की उर्वरता नष्ट होती है
आज के समय में बहुतायत मात्रा में मौजूद वाहनों व कारखानों से निकलने वाले धुएँ में सल्फर डाइ आक्साइड की मात्रा पाई जाती है. ये पहले सल्फाइड और इसके बाद सल्फ्यूरिक अम्ल में परिवर्तित होकर वायु में बूदों के रूप में मौजूद रहती है. जब वर्षा का मौसम आता है तो यह वर्षा के पानी के साथ पृथ्वी पर गिरती है जिससे कि भूमि की अम्लता बढ़ती है और उत्पादन-क्षमता घटने लगती है.
3. कैंसर की संभावना
प्रदूषित वायु के कई तरह के जहरीले तत्व पाए जाते हैं जिनसे कैंसर जैसी खरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं. प्रदुषण के कारण निकली कुछ रासायनिक गैसें वायुमण्डल में पहुँच कर वहाँ ओजोन मण्डल से क्रिया करके उसकी मात्रा को घटाने का काम करती हैं. जाहिर है ओजोन मण्डल अन्तरिक्ष से आने वाली हानिकारक विकरणों को अवशोषित कर लेती है. इसलिए ओजोन मण्डल हमारे लिए ढाल का काम करता है. लेकिन प्रदुषण के कारण जब ओजोन मण्डल कमजोर पड़ता है तो तब त्वचा कैंसर जैसे भयंकर रोग हो सकते हैं.
4. प्राचीन स्मारकों पर दुष्प्रभाव
वायु प्रदुषण का प्रभाव विभिन्न प्राणियों के स्वास्थ्य पर तो पड़ता ही है भवनों, धातु व स्मारकों आदि का भी क्षय होता है. इसका उदाहरण ताजमहल को खतरा मथुरा तेल शोधक कारखाने से हुआ नुकसान है.
5. ऑक्सीजन की कमी
हमारे वायुमण्डल में वायु पप्रदुषण के कारण आक्सीजन के स्तर में आती लगातार कमी मानवों के साथ-साथ विभिन्न प्राणियों के लिए भी घातक है. आक्सीजन की कमी से प्राणियों को श्वसन में बाधा आयेगी.
6. अन्य प्राणियों पर
वायु प्रदुषण के कारणों के जड़ में केवल मनुष्य हैं लेकिन इसका दुष्परिणाम हमारे साथ-साथ विभिन्न प्राणी भी भुगत रहे हैं. कारखानों से निकलने के बाद कई हानिकारक रासायनिक पदार्थ व गैसों का अवशोषण फसलों, वृक्षों आदि द्वारा किए जाने पर प्राणियों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.
 

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Causes and Prevention of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के कारण एवं बचाव

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Causes and Prevention of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के कारण एवं बचाव

इस धरती पर समस्त प्राणियों के जीवन का आधार ही वायु है. लेकिन आज हमने वायु को विभिन्न कारणों से हद से ज्यादा प्रदूषित कर दिया है. इसके परिणाम स्वरूप आज वायु प्रदुषण हमारे लिए खतरा बन गया है. हमारे वायुमण्डल में मौजूद वायु का होना हमारे लिए अति आवश्यक है. इसलिए वायुरहित स्थान पर मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि मानव वायु के बिना 5-6 मिनट से अधिक जिन्दा नहीं रह सकता है. आपको बता दें कि हम मनुष्य दिन भर में औसतन 20 हजार बार श्वास लेते हैं. यानी श्वसन के दौरान हम मानव 35 पौण्ड वायु का प्रयोग करते हैं. आइए हम वायु प्रदुषण के कारणों और इससे बचने के उपायों को समझें ताकि इससे होने वाली समस्या से बचा जा सके.

वायु प्रदूषण के कारण

1. बढ़ती हुई जनसँख्या
जाहिर है आज हमारी जनसंख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है. बढ़ती हुई जनसँख्या के कारण लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग किया है. ऐसा हमेशा से नहीं था, ये तब से शुरू हुआ जब से औद्योगीकरण की शुरुवात हुई है. तभी से बड़े-बड़े उद्योगों के कारण शहर बंजर बनते जा रहे हैं. शहरों की बदतर होती स्थति का एक कारण इन शहरों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही जनसंख्या भी है. इसके कारण शहरों व नगरों में आवास-समस्या भी उत्पन्न होने लगी है. आवास की समस्या से परेशान लोगों ने बेतरतीब बस्तियों का निर्माण किया जिससे वहाँ पर जल-निकासी, नालियों आदि की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई. इन्हीं गन्दी बस्तियों ने आगे चलकर वायुप्रदूषण को बढ़ावा दिया.
2. बढ़ते हुए उद्योग
उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और कृषि में रासायनों के अंधाधुंध उपयोग से भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा कारखानों में होने वाली भयंकर दुर्घटनाओं की भी भूमिका होती है. भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने की दुर्घटना भी इसी तरह की गत वर्षों की बड़ी दुर्घटना थी. इसमें एक ही समय हजारों व्यक्तियों को असमय मौत का शिकार बनना पड़ा था. ज़िंदा बचे लोग विकंलाग और विकृत हो गए.
3. संचार के साधन
आज बढ़ती आबादी के कारण संचार के विभिन्न साधनों में वृद्धि बहुत अधिक हो रही है. इन साधनों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से इंजनों, बसों, वायुयानों, स्कूटरों आदि की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. ये सभी वाहन अपने धुएं से वायुमण्डल में लगातार असन्तुलन पैदा करने का काम कर रहे हैं.
4. वनों की अंधाधुंध कटाई
हम सभी मनुष्यों ने अपनी सुख-सुविधा के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई की है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा है. जाहिर है वृक्ष वायुमण्डल के प्रदूषण को निरन्तर कम करने का काम करते हैं. पौधे हमारे लिए हानिकारक गैस कार्बन डाई आक्साइड को अपने भोजन के लिए ग्रहण करके जीवनदायिनी गैस आक्सीजन प्रदान करते हैं.
5. परमाणु परिक्षण
हमने आपसी वैमनष्य को इस कदर बढ़ाया कि देशों के बीच लड़ाइयाँ क लगने लगी और हथियारों का होड़ लग गया. इस वजह से लोगों ने परमाणु बम जैसे बेहद घातक और प्रदुषण फैलाने वाला हथियार मिल गया.

वायु प्रदूषण से बचने के उपाय

1. वनों की हो रही अन्धाधुन्ध अनियंत्रित कटाई को रोका जाना चाहिए. इस कार्य में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ व प्रत्येक मानव को चाहिए कि वनों को नष्ट होने से रोके व वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग ले.
2. शहरी करण की प्रक्रिया को रोकने के लिए गाँवों व कस्बों में ही रोजगार व कुटीर उद्योगों व अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए.
3. कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करना चाहिए, साथ ही ऐसी तकनीक उपयोग में लाने के लिए बाध्य करना चाहिए जिससे कि धुएँ का अधिकतर भाग अवशोषित हो और अवशिष्ट पदार्थ व गैसें अधिक मात्रा में वायु में न मिल पायें.
4. जनसंख्या शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए ताकि जनसंख्या वृद्धि को बढ़ने से रोका जाए.
5. वाहनों में ईंधन से निकलने वाले धुएँ को ऐसे समायोजित, करना होगा जिससे की कम-से-कम धुआँ बाहर निकले.
6. ऐसे ईंधन के उपयोग की सलाह दी जाए जिसके उपयोग करने से उसका पूर्ण आक्सीकरण हो जाय व धुआँ कम-से-कम निकले.
7. निर्धूम चूल्हे व सौर ऊर्जा की तकनीकि को प्रोत्साहित करइसे और ज्यादा उन्नत एवं सुलभ बनाना चाहिए.
8. शहरों-नगरों में अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन हेतु सीवरेज को सभी जगह बढ़ावा देना चाहिए.
9. इन सभी चीजों को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों में इसके प्रति चेतना एवं जागृत फैलाई जानी चाहिए.
10. इसकी जानकारी व इससे होने वाली हानियों के प्रति मानव समाज को सचेत करने हेतु प्रचार माध्यम जैसे दूरदर्शन, रेडियो पत्र-पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्रचार करना चाहिए.
 

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Diet That Can Reduce Side Effects Of Air Pollution - वायु प्रदूषण से बचाने वाले खानपान

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Diet That Can Reduce Side Effects Of Air Pollution - वायु प्रदूषण से बचाने वाले खानपान

हमारे जिन्दा रहने के लिए हवा का होना बेहद जरुरी है. लेकिन ये हवा साफ-सुथरी होनी चाहिए. यदि प्रदूषित हवा (जिसमें ओज़ोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, बारीक कण, डीज़ल से निकले कण आदि मिश्रित हों) लेंगे तो ये हमारे जिन्दगी को मुश्किलों से भर देगा. इसलिए जितना हो सके प्रदूषित हवा से बचें. कुछ प्राकृतिक एंटी-ऑक्सिडेंट्स हमारे शरीर को इस खतरनाक प्रदूषण से लड़ने में मदद करते हैं. यहाँ हम आप कुछ ऐसे पोषक तत्वों के बारे में बताएंगे जिससे आप कुछ हद तक वायु प्रदुषण से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. को अपने रूटीन में शामिल करके स्वस्थ रह सकते हैं. दरअसल फेफड़े के परत पर उपस्थित बचाने वाले एंटी-ऑक्सिडेंट्स जब तक ज्यादा मात्रा में होते हैं तब तक इन सब से तब तक लड़ते हैं. लेकिन जैसे ही इनकी संख्या कम होती है प्रदूषित कण हमारे प्रतिरक्षातंत्र पर हमला कर देते हैं और शरीर को मुक्त कणों के माध्यम से प्रभावित करते हैं. इसलिए अआप्को वायु प्रदुषण से बचने के लिए इन पोषक तत्वों को अपने दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए.

1. विटामिन सी
विटामिन सी को पानी में घुलनशील होने के कारण हमारे शरीर के लिए सबसे शक्तिशाली एंटी-ऑक्सिडेंट माना जाता है. ये पानी के द्वारा पुरे शरीर में जाकर मुक्त कणों की सफाई करता है. चूँकि हमारी सांस फेफड़ों से होकर ही जाती है इसलिए विटामिन सी की यहाँ मौजूदगी के लिए इसके स्त्रोत आहारों को अपने दैनिक आहार में शामिल करें. विटामिन सी की भूमिका विटामिन ई के निर्माण में भी होती है.इसके लिए आपको सिट्रस फ्रूट्स, चौलाई, गोभी, शल्जम का साग, धनिया के पत्ते, आंवला, अमरूद, नींबू का रस आदि लेते रहना चाहिए.
2. विटामिन ई
वसा में घुलनशील विटामिन ई हमारे उतकों को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है. इसका प्रमुख स्त्रोत खाना बनाने में उपयोग किए जाने वाले तेल जैसे कि सूरजमुखी, सैफ्फलाउर और राइस ब्रान तेल आदि हैं. इसके अलावा ये कनौला, पीनट और जैतून के तेल में भी मौजूद होता है. इसके लिए आप बादाम कुछ मछली के साथ मसाले और जड़ी बूटियां जैसे मिर्च पाउडर, पैप्रिका, लौंग, ओरिगौनो, बैज़ल और पार्सले आदि का सेवन कर सकते हैं.
3. बीटा कैरोटिन
बीटा कैरोटिन एक ऐसा एंटी-ऑक्सिडेंट है जो कि इंफ्लैमेशन को निंयत्रित रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी एक खासियत ये भी है कि ये हमारे शरीर के अन्दर विटामिन ए में बदल जाता है. इसके लिए आपको अपने दैनिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे चौलाई का साग, धनिया, मेथी, लेटस और पालक आदि का सेवन करना चाहिए. आप चाहें तो इसे पाने के लिए मूली के पत्ते और गाजर भी खा सकते हैं.
4. ओमेगा 3 फैट
वायु प्रदुषण हमारे शरीर में कई परेशानियाँ पैदा करता है. यह साँसों के रूप में ह्रदय में जाकर यह शरीर को वायु प्रदूषण से पहुंचने वाले हानिकारक प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में दिल के स्वस्थ बनाए रखने के लिए नट्स और बीज जैसे अखरोट, चिया के बीज, अलसी के बीज को दही में डालकर खाना ठीक रहता है. इसके अलावा मेथी के बीज, सरसों के बीज, हरे पत्तेदार सब्जियां, काले चने, राजमा और बाजरा आदि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिसमें ओमेगा 3 की मौजूदगी होती है.
5. हल्दी
हल्दी के औषधीय गुण आपको वायु प्रदुषण से भी बचाने के काम आते हैं. जाहिर है ये एक लोकप्रिय एंटी-ऑक्सिडेंट है और प्रदूषण के जहरीले प्रभावों से फेफड़ों को बचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. यदि आप हल्दी को घी के साथ मिलाकर खाएं तो इससे खांसी और अस्थमा में आराम मिलता है. जब भी अस्थमा अटैक हो तो उस दौरान गुड़ के साथ हल्दी और मक्खन देने से राहत मिलती है.
6. हरीतकी
वायु प्रदुषण से बचाने में हरीतकी की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है. यदि आप हरीतकी को गुड़ के साथ मिश्रित करके सोने से पहले और सुबह में लें टी इससे कफ में आराम मिलता है. यही नहीं अस्थमा के दौरान भी आयुर्वेद कड़वी और कसैली फूड से भरपूर डाइट है, जो मीठे या नमकीन फूड के विपरीत होती है.
 

Brahmi Benefits and Side Effects in Hindi - ब्राह्मी के फायदे और नुकसान

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Brahmi Benefits and Side Effects in Hindi - ब्राह्मी के फायदे और नुकसान

ब्राह्मी का नाम अक्षर गोटू कोला के लिए भी किया जाता रहा है. क्योंकि दोनों के गुणों में काफी हद तक समानता है. ब्राह्मी का वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोन्नियरी है. ब्राह्मी एक बारहमासी जड़ी-बूटी है. यह प्राचीन काल से ही हमारे यहां के आयुर्वेदिक परंपराओं में उपयोग में लाई जाती रही है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ब्राह्मी शब्द ब्रह्मा से लिया गया है. यानी कि जो देवता ब्रह्मांड की उत्पत्ति के लिए जाने जाते हैं, उन के आधार पर ही इसका नाम रखा गया है. ब्राह्मी, जलीय स्थानों जैसे कि नदी नालों और नहर के किनारों पर या उनके आसपास पाया जाता है. स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है. ब्राह्मी में पाए जाने वाले तत्वों में कई विटामिन और अन्य पदार्थ शामिल हैं. ब्राह्मी का स्वाद फीका और तासीर ठंडी होती है. आइए ब्राह्मी के फायदे को विस्तार पूर्वक जानते हैं.

1. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है.
ब्राह्मी का उपयोग हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाता है. क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट जीवाणुओं और वायरसों के खिलाफ हमारी प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को गति देते हैं.
2. शुगर कम करने में
ब्राह्मी का उपयोग शुगर को कम करने के लिए भी किया जा सकता है. कई शब्दों में यह पाया गया है कि ब्राह्मी, हमारे शरीर में बढ़े हुए रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है. और आपका शुगर कम करके एक स्वस्थ जीवन जीने में आपकी मदद कर सकता है.
3. श्वसन संबंधी समस्याओं में
ब्राह्मी की पत्तियां आपके श्वसन से संबंधित कई परेशानियों को दूर कर सकती हैं. जैसे कि ब्रोंकाइटिस, रक्त-संतुलन, सीने में सर्दी और साइनस आदि समस्याएं ब्राह्मी दूर कर सकती है. इसके लिए आप ब्राह्मी  का चाय पी सकते हैं या इसके कच्ची पतियों को चबा सकते हैं. यही नहीं ब्राह्मी गले की सूजन और सांस लेने में भी आपकी मदद करती है.
4. सूजन के उपचार में
ब्राह्मी का इस्तेमाल सूजन के उपचार के लिए भी किया जाता रहा है. ब्राह्मणी सूजन को कम करने के साथ ही जलन को भी कम करता है. ये उत्तेजना खत्म करता है. इसके लिए ब्राह्मी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर शरीर के प्रभावित हिस्से पर लेप लगाना चाहिए
5. याददाश्त बढ़ाने में
ब्राह्मी का सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल यादाश्त बढ़ाने में किया जाता है. दरअसल ब्राम्ही हमारे स्मृति एकाग्रता और दिमाग को उत्तेजित कर सकती है. ब्राह्मी हमारे संज्ञानात्मक क्षमता को भी बढ़ाती है. और मस्तिष्क में होने वाले हलचलों को शांत करती हैं.
6. हृदय प्रणाली को दुरुस्त करने में
ब्राह्मी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे मस्तिष्क को तो शक्तिशाली बनाते ही हैं. इसके साथ ही हमारे शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करके हमारी त्वचा और हृदय प्रणाली को भी दुरुस्त करने का काम करते हैं. ब्राह्मी का इस्तेमाल आप एक नियमित खुराक के रूप में एक स्वस्थ उपापचय को बरकरार रखने के लिए कर सकते हैं.
7. तनाव से छुटकारा पाने में
ब्राह्मी का उपयोग हम तनाव या मानसिक अवसाद की स्थिति से उबरने के लिए भी कर सकते हैं. ब्राह्मी में कई सारे ऐसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं. जो हमारे शरीर के हार्मोनल असंतुलन को बरकरार रखने का काम करते हैं. इसलिए ब्राह्मी के सेवन से आप चिंता और कई अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव से भी बच सकते हैं.
8. अल्जाइमर के उपचार में
ब्राह्मी में अल्जाइमर जैसे विकारों को भी दूर करने की क्षमता पाई जाती है. आयुर्वेद में तो ब्राह्मी को अल्जाइमर के लिए एक बहुत आशाजनक जड़ी-बूटी बताया गया है.
9. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में
ब्राह्मी का इस्तेमाल हमारे शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त करने के लिए भी किया जाता है. ब्राह्मी हमारे शरीर में होने वाले अवसर और जेठा तंत्र जैसे विकारों को दूर करने का काम करता है. इसलिए इसे एक शाम और सुखदायक जड़ी बूटी भी कहा जाता है.
10. त्वचा के लिए
त्वचा में निखार लाने या त्वचा में होने वाले घाव को भरने के लिए भी ब्राम्ही का इस्तेमाल किया जाता है. इस के लिए प्रभावित क्षेत्र पर ब्राह्मी का रहस्य तेल लगाना होता है. इससे त्वचा में चिकनाई भी आती है. और चाचा स्वस्थ भी डरता है.
11. मिर्गी के उपचार में
ब्राह्मी की पत्तियां मिर्गी के लिए प्राचीन काल से ही एक प्रभावी इलाज के रूप में प्रचलित रहे हैं. ब्राह्मी न सिर्फ मिर्गी के दौरे को रोकती है. बल्कि कई अन्य मानसिक रोगों और नसों के दर्द सहित कई द्विध्रुवी विकार और को भी हमारे शरीर से दूर करने में हमारी मदद करती है.

ब्राह्मी के नुकसान

  • संवेदनशील पेट वाले लोग जिन्हें अल्सर है. या जिन्हें इसका सेवन जो इसका सेवन झेलना पा रहे हो वह घी के साथ प्रयोग कर सकते हैं.
  • ब्राह्मी का इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक और बिना आवश्यकता के नहीं करना चाहिए.
  • ब्राह्मी का इस्तेमाल किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए.
     
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Bhringraj Benefits and Side Effects in Hindi - भृंगराज के फायदे और नुकसान

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Bhringraj Benefits and Side Effects in Hindi - भृंगराज के फायदे और नुकसान

आयुर्वेद में भृंगराज के बहुत सारे गुड्डू को बताया गया है. आयुर्वेद में इसे रसायन कह कर संबोधित किया गया है. भारत में यह कवि जगहों पर पाया जाता है. विशेष रुप से दर्शनीय स्थानों पर भृंगराज के किसानों का वर्गीकरण इसके फूलों के रंगों के आधार पर किया जाता है. इनमें से सर्वाधिक प्रचलित सफेद भृंगराज यानि सफ़ेद एक्लिपटा एल्बा है. भृंगराज में लोगों को ऊर्जावान बनाने और बढ़ती उम्र के लक्षणों को घटाने का विशेष गुण होता है.

स्वाद में कड़वा और तीखा लगने वाला भृंगराज कफ दोष और वाद दोस्त को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बालों के झड़ने को रोकना हो या उसे घना बनाना हो, सूजन को कम करने की बात हो या पेट दर्द की परेशानियों से निपटारे की बात हो, सबमें लाभकारी है. इसके अलावा भी कई अन्य परेशानियों को दूर करने में यह काफी उपयोगी है. भृंगराज के फायदे और नुकसान निम्नलिखित हैं

1. पेशाब में इंफेक्शन रोकने में
अपने जीवाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण भृंगराज मुत्र संक्रमण को रोकने में काफी कारगर साबित होता है. दरअसल भृंगराज मूत्राशय के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के लिए जीवाणुओं के असर को खत्म करता है. पेशाब में संक्रमण की ज्यादातर समस्याएं महिलाओं में पाई जाती हैं इसके लिए भृंगराज के पत्तों में थोड़ा सा पानी डाल कर इसे पीस लें. फिर इसे छानकर, रस को दिन में दो बार नियमित रूप से पीने से लाभ मिलता है.
2. श्वसन के संक्रमण में
भृंगराज के पत्तों के रस को तिल की बराबर मात्रा के साथ उबाल कर इसे छान लें. इसे दिन में दो बार सेवन करने से आपको श्वसन संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है. भृंगराज का नियमित सेवन आपके श्वसन और फेफड़ों की परेशानियों को दूर करने में भी उपयोगी साबित हो जाए होता है. भृंगराज के अर्थ में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसके अलावा भृंगराज के फायदे आपको सर्दी खांसी आदि में भी मिलते हैं
3. लीवर की परेशानियां दूर करने में
लीवर से संबंधित विभिन्न परेशानियों को दूर करने के लिए भृंगराज का प्रयोग प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है. दरअसल इसके लिए लगभग 10 ग्राम भृंगराज के पत्ते तथा 2 ग्राम साबुत काली मिर्च को एक साथ पीस लें फिर इस पृष्ठ में छाछ में मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें ऐसा करने से आपको पीलिया से छुटकारा मिलता है. पीलिया सीधे सीधे सीधे लीवर और उसके कार्य क्षमता को प्रभावित करता है.
4. बालों के लिए
यदि भृंगराज को बालों के लिए वरदान कहा जाए तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी बालों से जुड़ी तमाम समस्याओं के निदान में भृंगराज की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बालों को झड़ने, बालों में रूसी जैसी समस्यायों को भृंगराज और इसमें कई अन्य पदार्थों को मिलाकर दूर की जा सकती हैं. बालों की लंबाई बढ़ाने में भी भृंगराज का तेल काफी प्रभावशाली है. भृंगराज का तेल बालों की त्वचा में रक्त प्रवाह को भी बढ़ाता है और जोड़ों को भी मजबूत बनाता है. इसके लिए आप विराज के तेल में तिल अथवा नारियल का तेल भी मिला सकते हैं.
5. पाचन शक्ति को सही करने में
भृंगराज हमारे शरीर के बड़ी आंत में पाए जाने वाले तमाम जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी मदद करता है. यह कब्ज और पेट की अन्य समस्याओं को ठीक करने का सबसे उत्तम उपाय माना जाता है. इस के लिए भृंगराज के चार से पांच पत्ते प्रतिदिन सुबह में लिया जाए तो कब जी जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती है.
6. आंखों के लिए
भृंगराज में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट स्वास्थ्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इसके साथ ही भृंगराज की पत्तियों में कैरोटीन भरपूर मात्रा में पाई जाती है. जो की आंखों की स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. कैरोटीन मुक्त कणों को खत्म करने का काम करती है. जिससे कि मोतियाबिंद जैसी समस्याएं खत्म होती है. यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी आंखें सालों-साल सुरक्षित और स्वस्थ रहें तो आज ही से आपको भी भृंगराज का सेवन शुरू कर देना चाहिए.
इसके लिए भृंगराज की पत्तियों को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं. इसमें लगभग 3 ग्राम शहद और 3 ग्राम गाय की घी मिलाकर प्रतिदिन सोने से पहले रात में 40 दिन तक इसका सेवन करें. इससे आंखों की कमजोरी और आंखों से संबंधित समस्याएं दूर होती हैं.
7. ऊर्जा के स्रोत के रूप में
भृंगराज कई रोगों से लड़ने में हमारी मदद करता है. इसके साथ ही भृंगराज का रस कायाकल्प करने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है. इस दौरान मरीज को दूध के साथ पका हुआ चावल खाने की सलाह दी जाती है. ऐसा करने से शरीर में ताकत प्रतिरक्षा और प्रजनन आदि में काफी सुधार आता है.

भृंगराज का नुकसान

  • भृंगराज के सेवन से लोगों को किसी विशेष परिस्थितियों के कारण एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
  • गर्भवती महिलाएं भृंगराज के इस्तेमाल किसी चिकित्सा के परामर्श के बाद ही करें
  • भृंगराज की सेवन नियमित रूप से करें.
     
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Sarpagandha Benefits and Side Effects in Hindi - सर्पगंधा के फायदे और नुकसान

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Sarpagandha Benefits and Side Effects in Hindi - सर्पगंधा के फायदे और नुकसान

दुनिया भर में सर्पगंधा की कई प्रजातियां पाई जाती हैं. लेकिन यदि बात इसके औषधीय पौधों की करें तो इसमें सभी लगभग एक समान ही हैं. हलांकि अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से इनमें कई गुण अलग-अलग भी हैं लेकिन कुछ गुणों में समानता भी है. सर्पगंधा का वैज्ञानिक नाम रावोल्फिया सर्पेंटीना है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है सर्पगंधा, सांप के काटने में बहुत उपयोगी साबित होता है. इसकी जड़ का औषधीय इस्तेमाल बहुत व्यापक है. आइए सर्पगंधा के फायदे और नुकसान को जानने की कोशिश करते हैं.

1. सांप काटने में
सर्पगंधा का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के जहरीले पदार्थों को निष्क्रिय करने में किया जाता है. इसलिए सर्प दंश के उपचार में भी यह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा सर्पगंधा का उपयोग ज्वर, अतिसार और हैजा जैसी समस्याओं के उपचार में भी किया जाता है. सांप के काटने सांप काटने के उपचार में सर्पगंधा की जड़ का एक से दो तोला पानी के साथ घीसें. फिर इसे जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है उसे पिलायें और जहाँ सांप ने काटा है वहां पर इसका लेप करें. ऐसा करने से विषाक्तता कम होती हैं इसके अलावा सर्पगंधा की ताजी पत्तियों को पांव के तलवे के नीचे लगाने से भी लाभ मिलता है.
2. नींद ना आने पर
नींद ना आने की बीमारी जिसे अनिद्रा कहा जाता है. उसमें भी सर्पगंधा काफी लाभदायक साबित होता है. इसके अलावा बेचैनी, थकान और अनिद्रा जैसी समस्याओं में भी काफी राहत देने का काम करता है. यदि आप भी अनिद्रा के शिकार हैं तो सोने सोने से पहले एक चौथाई छोटा चम्मच सर्पगंधा चूर्ण को घी के साथ मिलाकर सेवन करें. ऐसा करने से आपको अनिद्रा में लाभ मिलता है.
3. ह्रदय रोग से सम्बंधित विकारों में
हृदय रोग से संबंधित कई तरह के विकारों को दूर करने में सर्पगंधा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. सर्पगंधा हमारे दिल की गति को सामान्य करता. इसके अलावा सर्पगंधा की जड़ों कारस दिया और उच्च रक्तचाप के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि है. सर्पगंधा धमनियों के साथ होने स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसी स्थिति हो को भी कम कर सकता है.
4. पीरियड्स के दौरान
सर्पगंधा महिलाओं के अनियमित हो रहे पीरियड्स को नियमित करने में भी काफी मददगार साबित होता है. इसके अलावा पीरियड्स के दौरान होने वाली विभिन्न परेशानियों को भी दूर करने में इसकी भूमिका होती है. इस दौरान होने वाले अवसाद मैडम सूजन आदि को भी यह सर्पगंधा दूर करता है.
5. गठिया के उपचार में
सर्पगंधा का उपयोग गठिया पीड़ित भी कर सकते हैं. जोड़ों में होने वाले दर्द को भी सर्पगंधा की सहायता से दूर किया जा सकता है. इसके अलावा सर्पगंधा का उपयोग मोतियाबिंद, शीघ्रपतन और जल्दी स्खलन आदि के उपचार में भी किया जाता है. यदि आप भी इन समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं तो इसका इस्तेमाल करें.

सर्पगंधा के नुकसान

  • तनाव से पीड़ित व्यक्ति इसका इस्तेमाल नहीं करें.
  • गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं सर्पगंधा का इस्तेमाल करने से बचें.
  • कई लोगों के लिए सर्पगंधा का इस्तेमाल पेट में जलन जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.
  • शराबी लोग भी इसका इस्तेमाल करने से बचे. क्योंकि इससे नींद आने की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
  • सर्पगंधा में पाए जाने वाले रसायन की वजह से कुछ लोगों को नाशिक खून बने उल्टी होने जी मत लाने और भूख न लगने जैसे समस्या हो सकती हैं.
  • कोशिश करें कि किसी चिकित्सक की सलाह से ही सर्पगंधा का सेवन करें.
     
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Haritaki Benefits and Side Effects in Hindi - हरीतकी (हरड़) के फायदे और नुकसान

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Haritaki Benefits and Side Effects in Hindi - हरीतकी (हरड़) के फायदे और नुकसान

हरीतकी यानी की हरड़ जिसका उपयोग कई आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में किया जाता है. विशेष रूप से इसका इस्तेमाल त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए किया जाता है. जो है. इसे इसकी विशेषताओं को देखते हुए इसे कायाकल्प जड़ी बूटी के रूप में भी जाना जाता है. भारत में हरित की हिमालय के निचले क्षेत्रों से लेकर, पूर्व बंगाल, असम तक यानी 5000 फीट की ऊंचाई तक पाया जाता है. आयुर्वेद में इसके कोई और नाम जैसे कायस्था प्राणदा अमृता आदि नामों से बुखार आ गया है. यह स्वाद में कसैला होता है.आइए हरड़ के फायदे और नुकसान को जानें.

1. पाचन शक्ति में
हरड़ जिसे हरितकी भी कहा जाता है. का उपयोग मुख्य रूप से पाचन शक्ति से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. हरीतकी का 1 से 3 ग्राम मात्रा एक कप गर्म पानी में मिलाकर पीने से पाचन शक्ति से संबंधित समस्याओं और उपापचय में मदद मिलती है.
2. दस्त में
दस्त में हरीतकी का लाभ लेने के लिए आपको इसकी चटनी बनानी होगी. कच्चे हरड़ की कचनार फली फलियों को पीसकर इसकी चटनी बनाकर रोजाना दिन में तीन बार लेने से दस्त की समस्या खत्म होती है. इसके अलावा हरड़ हमारे शरीर और मलाशय में हल्कापन भी लाता है. जिसके कारण रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं.
3. यौन समस्याओं के निदान में
यौन समस्याओं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी हरड़ को उपयोग में लाया जा सकता है. हरीतकी आपकी यौन ऊर्जा को बढ़ा देता है. इसके लिए आपको रोजाना 1 से 2 ग्राम हरड़ एक महीने तक खाना होता है. लेकिन इसके साथ एक बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि लंबी अवधि तक इसका प्रयोग करने से यौन शक्ति में कमी का कारण भी बन सकता है. इसके साथ ही हरीतकी शीघ्रपतन की भी उपचार में प्रयुक्त होता है. इसके अलावा इसका प्रयोग विधि की मात्रा कम शुक्राणु और उन्नत शिश्न की समस्याओं के निदान में भी किया जाता है.
4. तिल्ली रोग के उपचार में
तिल्ली रोग के उपचार में भी हरड़ का उपयोग किया जाता है. इसके लिए 3 से 5 ग्राम हरड़ दिन में एक या दो बार दूध से 3 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर किया जाता है. इससे तिल्ली बढ़ने की समस्या से निजात पाई जा सकती है.
5. बवासीर के लिए
बवासीर, मल त्याग में आने वाली जत्ता उनसे संबंधित बीमारी है. हरितकी का प्रयोग बवासीर के दौरान होने वाले समस्याओं में किया जाता है. इसके लिए दो बड़े चम्मच हरीतकी या फिर त्रिफला चूर्ण पानी आधी बाल्टी पानी में स्नान करने से 10 मिनट पहले डाल कर छोड़ दें इसके बाद इस पानी से स्नान करने से सूजन कम होता है. इससे घाव भी जल्दी भरता है.
6. उल्टी में राहत के लिए
यदि आपको उल्टी आ रही है. तो इस इस परेशानी से निजात पाने के लिए भी आप हरितकी का प्रयोग कर सकते हैं इसके लिए हरीतकी पाउडर के साथ शहद मिलाकर लेना होता है. ऐसा करने से विषाक्त पदार्थ बाहर आते हैं और उल्टी बंद हो जाती हैं.
7. सूजन से संबंधित विकारों में
सूजन से संबंधित विकारों में भी हरीतकी का प्रयोग किया जाता है. इसके लिए गोमूत्र और हरितकी को एक साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. इस से सूजन में राहत मिलती है.

हरीतकी के नुकसान

  • गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए.
  • 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भी इसका इस्तेमाल ना करें.
  • लंबे समय तक उपवास करने वाले लोगों को भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • बढ़े हुए पेट और अपच की समस्या से पीड़ित लोग इसका इस्तेमाल न करें.
  • शुष्क और दुर्बल महसूस करने वाले लोगों को भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • हरीतकी का इस्तेमाल किसी चिकित्सक से परामर्श करना ज्यादा उचित रहता है.
     
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Calendula Benefits in Hindi - गेंदे के फूल के फायदे

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Calendula Benefits in Hindi - गेंदे के फूल के फायदे

गेंदे के फूल से लगभग सभी लोग परिचित होंगे. किसी भी समारोह या उत्सव में इसके फूलों के प्रयोग से ही सजावट की जाती है. लेकिन इसके औषधीय गुणों को जानकर आप चौंक जाएंगे. गेंदे के फूल में कई प्रकार के लाभदायक तत्व जैसे की कैरिटोनॉईड, गंध तेल, स्टेरोल्स, ग्लाइकोसाइड्स और फ्लावोनॉईड्स आदि पाए जाते हैं. गेंदे के फूल से बनी कई सारी चीजें बाजार में मिल जाती है. जिससे कि आपके कई तरह की परेशानियां दूर होती हैं. आइए गेंदे के फूल से होने वाले फायदे को जानें.

1. त्वचा के लिए
गेंदे का फूल हमारी त्वचा को कई तरीके से समृद्ध करता है. गेंदे के फूल से बना तेल यदि हम अपने चेहरे पर मालिश करें तो यह त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यदि आप नियमित रूप से गेंदे के फूल के तेल का चेहरे पर मालिश करेंगे तो रक्त संचार में भी वृद्धि होती है. परिणा इसके परिणाम स्वरुप आपकी त्वचा में निखार भी आता है.
2. घाव भरने में
गेंदे का फूल एंटीसेप्टिक और एंटी माइक्रोबियल गुणों से संपन्न होता है. इसलिए ही जब हम घाव पर या जले हुए स्थान पर गेंदे के फूल का तेल लगाते हैं, तो यह घाव को भरने में मदद करता है. इसकी सहायता से घाव या जले को जल्दी से ठीक किया जा सकता है. गेंदे के फूल से बनी हुई क्रीम भी घाव को जल्दी भरने में सहायक सिद्ध होती है.
3. नई कोशिकाएं बनाने में
दरअसल बढ़ती उम्र के साथ त्वचा की कोशिकाओं में कमजोरी आने लगती है. और त्वचा पर झुर्रियों का की मात्रा बढ़ने लगती है. गेंदे का फूल से बना क्रीम त्वचा की कोशिकाओं को फिर से बनने में मदद करता है. और इसकी सहायता से त्वचा पर बनने वाली झुर्रियों में कमी आती है. गेंदे के फूल में फायटोकॉन्स्टीटूएंट्स पाया जाता है. जो कि एंटी-एजिंग प्रक्रिया को रोकता है. यही नहीं गेंदा ऊतकों की भी पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इससे आप जवान दिखते हैं.
4. आंखों के लिए
गेंदे की चाय में एंटीऑक्सीडेंट्स, जेक्सनथिन, लुटेइन और ल्योकोपेन आदि मौजूद होते हैं. जो कि आंखों के सभी समस्याओं को दूर करने में और अंधेपन को रोकने में सहायक होते हैं. इसके अलावा गेंदे का रस लाल पीड़ादायक आंखों को धोनी से उस की लालिमा और पीड़ा को कम करता है.
5. मुहांसों को रोकने में
चेहरे पर धूल मिट्टी पढ़ने के कारण कई बार मुहांसे या जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. ऐसे में गेंदे के फूल का तेल हमारी मदद करता है. क्योंकि इसमें एंटीफंगल गुण होते हैं. जो दाग धब्बे और मुंहासे आदि को हटाने में सहायक होते हैं.
6. पाचन की समस्याओं में
पाचन से संबंधित कई समस्याएं जैसे कि पेट की बीमारी दोस्त या एसिडिटी आदि से निपटने में भी गेंदे का फूल हमारी मदद करता है. गेंदे के फूल की सहायता से कब्ज की समस्या भी दूर की जा सकती है. गेंदे का फूल हमारे शरीर की उपापचय क्रिया में सुधार करके विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है.
7. कान दर्द के उपचार में
इसके अलावा गेंदे के फूल का रस कान में डालने से कान के दर्द में भी काफी राहत मिलती है. कान के दर्द के साथ-साथ कान से निकलने वाली विभिन्न गंदगियों को भी यह साफ करता है. मिश्री के साथ खाने से खांसी दमा आदि जैसी समस्याएं भी ठीक होती हैं. श्वसन में राहत मिलती है.
8. सूजन कम करने में
गेंदे के फूल का प्रयोग हम सूजन को कम करने के लिए भी कर सकते हैं. शरीर के किसी भी हिस्से में अधिक सूजन आ गई हो तो गेंदे के फूल को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से सूजन खत्म होती है.

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