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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Glucose Benefits, Sources and Side Effects in Hindi - ग्लूकोस के स्रोत, फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Glucose Benefits, Sources and Side Effects in Hindi - ग्लूकोस के स्रोत, फायदे और नुकसान

हमारी सभी गतिविधियों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता है. यहाँ तक कि हमें चलने और साँस लेने के लिए भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है. हमारी दैनिक आवश्यकताओं के लिए आवश्यक ऊर्जा का स्रोत ग्लूकोज होता है. हमारे शरीर को ग्लूकोज हमारे आहार में खाए गए स्टार्च और शुगर से प्राप्त होता है. पाचन की प्रक्रिया के दौरान इंसुलिन की सहायता से स्टार्च और शुगर चीनी में टूट जाते हैं. तब ग्लूकोज कोशिकाओं की दीवार में प्रवेश करता है. अगर भोजन में अधिक मात्रा में शुगर होता है तो यह हमारे मांसपेशियों, लिवर और शरीर के अन्य भागों में जमा हो जाता है जो बाद में फैट के रूप में परिवर्तित हो जाता है.

ग्लूकोज के स्रोत
चूंकि ग्लूकोज वजन बढ़ाने और कम करने दोनों तरीकों से काम करता है इसलिए ग्लूकोज को अपने आहार में शामिल करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि किस तरह के ग्लूकोज आहार का आपको सेवन करना चाहिए. ताजे फल जैसे तरबूज, रास्पबेरी, अंगूर, ब्लूबेरी, नाशपाती और बेर आपको फाइबर, बहुत अधिक पानी और नेचुरल शुगर प्रदान करते हैं. अतः इन फाइबर युक्त फलों का सेवन करें. रिफाइंड अनाज के सेवन से बेहतर है कि आप साबूत अनाज का सेवन करें. ये आपको फाइबर और पोटेशियम, मैग्नीशियम और सेलेनियम प्रदान करते हैं. अनाज को रिफाइन करने से पोषक तत्व और फाइबर की मात्रा कम हो जाती है. वैसे तो सभी अनाज ग्लूकोज प्रदान करते हैं लेकिन साबुत अनाज अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं. साबुत अनाज से बने आइटम जैसे ब्रेड आपको बाजार में मिल जाएंगी हैं.
फलियां प्रोटीन का समृद्ध स्रोत हैं और इनमें पोटेशियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम और फोलेट जैसे आवश्यक जैसे पोषक तत्व भी शामिल होते हैं. सेम, दाल और मटर में फाइबर (घुलनशील और अघुलनशील) प्रोटीन होते हैं और इसमें किसी भी प्रकार का कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है. ये अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक फायदेमंद होते हैं. फलियों में कोलेस्ट्रॉल और संतृप्त वसा नहीं होता है इसलिए हृदय रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है. संतृप्त वसा का सेवन सीमित करने के लिए हमें कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए. कम वसा वाले डेयरी उत्पाद हमें कम कैलोरी के साथ विटामिन, खनिज, प्रोटीन, और कैल्शियम देते हैं. पर यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आप जिस भी डेयरी उत्पाद का सेवन करते हैं उसमें चीनी की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

ग्लूकोज के फायदे
रेशेदार भोजन यानि फाइबर युक्त आहार कुछ बीमारियों जैसे टाइप 2 मधुमेह और मोटापे से लड़ने में हमारी मदद करते हैं. फाइबर अपच और कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों को नियंत्रण में रखने में मदद करता है. फाइबर हम साबुत अनाज से प्राप्त कर सकते हैं. व्यायाम और उचित कैलोरी का सेवन कई बीमारियों जैसे टाइप 2 मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं को रोकने में मदद करता है. कम वसा, कम कोलेस्ट्रॉल वाले कार्बोहाइड्रेट्स हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम कर सकते हैं.
हम में से कई लोग वजन बढ़ने के लिए ग्लूकोज को दोषी मानते हैं. लेकिन उचित तरीके से ग्लूकोज का सेवन आपके वजन को कम करने या नियंत्रित करने में मदद करता है. यदि आप सही तरह से अपने आहार में फल, सब्जियों और रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो यह आपका वजन कम करने में मदद करते हैं. ग्लूकोज में समृद्ध आहार वजन घटाने और मांसपेशियों को टोन करने में फायदेमंद है.

ग्लूकोज की अधिक मात्रा के नुकसान
अधिक मात्रा में ग्लूकोज के सेवन से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है जिसके कारण मोटापा हो सकता है. पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज क सेवन नहीं करने से कुपोषण की समस्या हो सकती है. अधिक मात्रा में चीनी का सेवन हमारे स्वस्थ के लिए अच्छा नहीं होता है. यह हमरे वजन को बढ़ाने के साथ-साथ खराब पोषण प्रदान करते है और इसके सेवन से दातों की क्षय भी हो सकती है. इसलिए कैंडी, शुगर ड्रिंक, मिठाई के सेवन से बचें. ये आपको कैलोरी के सिवा कोई पोषण प्रदान नहीं करते हैं.

Vitamin K Benefits, Deficiency, Sources and Side Effects in Hindi - विटामिन K के स्रोत,कमी के लक्षण, फायदे और नुकसान

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Vitamin K Benefits, Deficiency, Sources and Side Effects in Hindi - विटामिन K के स्रोत,कमी के लक्षण, फायदे और नुकसान

हमारे शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए विटामिन के की भी आवश्यकता होती है. क्योंकि विटामिन के हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक विटामिन है. विटामिन के भी अन्य विटामिन्स की तरह हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देता है. विटामिन के हमारी हड्डियों और दिल को स्वस्थ रखता है. इसके साथ ही यह चोट लगने से होने वाले रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है. इसके अलावा विटामिन के हमारे शरीर को अनेक प्रकार के रोगों से लड़ने में मदद करता है. आइए विटामिन के, के स्त्रोत, इसकी कमी होने पर दिखाई देने वाले लक्षण, इससे होने वाले फायदे और नुकसान को जानें.

विटामिन के के फायदे
विटामिन के रक्त को जमने से रोकने के लिए और आंतरिक रक्तस्राव, बिलियरी अब्स्ट्रक्शन, ऑस्टियोपोरोसिस, अत्यधिक मासिक धर्म प्रवाह और मासिक धर्म में दर्द को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण विटामिन है. यह हड्डियों के चयापचय, धमनियों के सख़्त होने को रोकने, नर्वस सिगनलिंग में सुधार करने और गुर्दे की पथरी के लिए भी बहुत जरूरी विटामिन है. विटामिन के रक्त के जमने को नियंत्रित करता है. इसके अलावा विटामिन के पूरे शरीर में कैल्शियम को फैलाने में मदद करता है जो रक्त के जमने को नियमित करने के लिए आवश्यक है. यह विटामिन मैलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम नामक रक्त विकार को बेहतर बनाने में मदद करता है. विटामिन के हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार और हड्डियों के फ्रैक्चर के खतरे को कम करने में मदद करता है. हड्डियों को बनाने के लिए हमारा शरीर कैल्शियम का उपयोग करता है और कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने में शरीर को विटामिन के की आवश्यकता होती है.
विटामिन के दिल के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. यह धमनियों में खनिजों के निर्माण को रोकने और निम्न रक्तचाप में मदद करता है. इससे हृदय को पूरी तरह से पूरे शरीर में रक्त के परिसंचरण में मदद मिलती है. विटामिन के पेट, कोलोन, लिवर, मुँह, प्रोस्टेट और नाक के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मदद करता है. विटामिन के लेने से शरीर में इंन्सुलिन की प्रक्रिया में मदद मिलती है जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को ठीक रखता है और डायबिटीज होने के ख़तरे को कम करता है. यह विटामिन आपके मस्तिष्क को फ्री रेडिकल्स की क्षति के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है. ऑक्सीडेटिव तनाव मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और अल्जाइमर रोग, पार्किंसंस रोग जैसी बीमारियों का कारन बन सकता है.

विटामिन के के स्रोत: विटामिन के हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी विटामिन है. विटामिन के हमें हरे पत्तेदार सब्जी, सरसो का साग, मूली, गेहू, जौ, पालक , चुकंदर साग , जैतून तेल, लाल मिर्च, केले, अंकुरित अनाज, रसदार फलों से प्राप्त होता है.

विटामिन के की कमी से नुकसान: विटामिन के की कमी से रक्त स्राव की समस्या हो सकती है जैसे मासिक धर्म , मसूड़ों से व नाक से रक्त आना आदि. आंखों की समस्या भी हो सकती है. विटामिन के की कमी से रक्त धमनियाँ सख़्त हो जाती हैं. विटामिन के की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं.

विटामिन के की सही मात्रा: अनुशंसित आहार भत्ता (आरडीए) के अनुसार 14 वर्ष की आयु से अधिक लोगों को विटामिन ई 3.6 ग्राम (120 UG) के करीब लेना चाहिए. जो महिलायें स्तनपान करा रही हैं, उनको अधिक आवश्यकता हो सकती है इसलिए ऐसी महिलायें 2.7 ग्राम (90 UG) तक ले सकती हैं| सुरक्षा के लिए ऊपरी सीमा 2.7 ग्राम (90 UG) है.

Vitamin C Benefits, Deficiency, Sources, Side Effects In Hindi - विटामिन सी के स्रोत, कमी के लक्षण, फायदे और नुकसान

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Vitamin C Benefits, Deficiency, Sources, Side Effects In Hindi - विटामिन सी के स्रोत, कमी के लक्षण, फायदे और नुकसान

विटामिन सी हमारे शरीर की मूलभूत रासायनिक क्रियाओं में यौगिकों का निर्माण और उनके कार्य करने में मदद करता है. हमारे शरीर में विटामिन सी कई तरह की रासायनिक क्रियाओं में मददगार होता है जैसे कि तंत्रिकाओं तक संदेश पहुंचाना या कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना. इसके अलावा, हड्डियों को जोड़ने वाला कोलाजेन नामक पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, लिगामेंट्स, कार्टिलेज आदि अंगों के भी अपने निर्माण के लिए विटामिन सी जरूरी होता है. विटामिन सी हमारे शरीर के कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है. यह एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है. ये शरीर की कोशिकाओं को एकजुट कर के रखता है. इसके एंटीहिस्टामीन गुण के कारण, यह सामान्य सर्दी-जुकाम में दवा के रूप में काम करता है. विटामिन सी के नियमित उपयोग से सर्दी, खांसी व अन्य तरह के इन्फेक्शन होने का खतरा नहीं होता है. इतना ही नहीं विटामिन सी अनेक प्रकार के कैंसर से भी बचाता है और हमें स्वस्थ बनाए रखता है.
विटामिन सी के स्रोत
विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं खट्टे रसदार फल जैसे आंवला, संतरा, अंगूर, टमाटर, नारंगी, नींबू आदि और केला, बेर, अमरूद, सेब, बिल्व, कटहल, शलगम, पुदीना, मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया और पालक ये सब हमारे शरीर में विटामिन सी की पूर्ति करते हैं. इसके अलावा दालों में भी विटामिन सी पाया जाता है. सूखी दालों में विटामिन सी नहीं पाया जाता है. लेकिन दालों को भीगने के बाद अच्छी मात्रा में दालों से विटामिन सी मिलता है.
विटामिन सी के फायदे
विटामिन सी का उपयोग हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है. विटामिन सी के रोजाना सेवन से हमारे शरीर को रोगों से लड़ने में मदद मिलता है. विटामिन सी झुर्रियों को ठीक करने में काफी लाभदायक होता है. विटामिन सी हमारे शरीर के सबसे छोटे सेल को एकजुट करके रखता है. यह शरीर के रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाने में मदद करता है. साथ में हड्डियों को जोड़ने वाला कोलाजेन नामक पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, लाइगामेंट्स, कार्टिलेज आदि को भी निर्माण के लिए विटामिन सी की आवशकता होती है. विटामिन सी के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है.
अधिक मात्रा में विटामिन सी लेने से नुकसान
विटामिन सी शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. विटामिन सी के उपयोग से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है. पर विटामिन सी की अत्याधिक मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है जैसे पेट खराब, डायरिया, गुर्दे, हृदय और अन्य जगह में पथरी ये सारी समस्या हो सकती है.
विटामिन सी की कमी के लक्षण और नुकसान
विटामिन सी में रोग प्रतिरोधक क्षमता होता है जिसके कारण हमारे शरीर में अनेकों बीमारियों से बचाव होता है. पर विटामिन सी की कमी से आंखों में मोतियाबिंद, आंख, कान व नाक के रोग, हड्डियों का कमजोर होना, खून का बहना, मुंह से बदबू आना, जोड़ो में दर्द, जुकाम, श्वेत प्रदर, सांस लेने में कठिनाई, फ़ेफ़डे में कमजोरी, मसूड़ों से खून व मवाद निकलना, चर्म रोग, एलर्जी, अल्सर, पाचन क्रिया में दोष, भूख न लगना, गर्भपात आदि जैसे रोग होते हैं.
विटामिन सी कितना खाना चाहिए
अनुशंसित आहार भत्ता के अनुसार जन्म से 6 महीने के उम्र के शिशु को 40 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. 9 से 13 साल के बच्चे को 45 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. 14 से 18 साल के पुरुष को 75 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. 14 से 18 साल की महिला को 65 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. 19 से 50 साल के पुरुष को 90 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. 19 से 50 साल की महिला को 75 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए. गर्भवती महिला को 85 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए और स्तनपान कराने वाली महिला को 120 मिलीग्राम के करीब लेना चाहिए.

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Vitamin B Benefits, Sources & Side Effects In Hindi - विटामिन बी के स्रोत, फायदे और नुकसान

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Vitamin B Benefits, Sources & Side Effects In Hindi - विटामिन बी के स्रोत, फायदे और नुकसान

हमें अपने शरीर को स्वस्थ और जवान बनाए रखने के लिए कुछ विटामिन तथा जरूरी पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है. उनमें से एक पोषक तत्व विटामिन बी है. विटामिन बी अपने आप में के समहू है. जिसे हम विटामिन बी कॉम्पलेक्स के नाम से जानते है. इस समूह में विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी3, विटामिन बी5, विटामिन बी6 , विटामिन बी7, विटामिन बी9, विटामिन बी12 सम्लित हैं. विटामिन बी समहू जल में घुलनशील होता है. यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी विटामिनों में से एक है.
विटामिन बी के फायदे
विटामिन बी हमारे शरीर को स्वस्थ बनाये रखने में बहुत ही मदद करता है. विटामिन बी का उपयोग हमारे मुंह, जीभ और नेत्रों के लिए बहुत ही जरुरी है. साथ-साथ विटामिन बी के उपयोग से स्नायु और पाचन प्रणाली भी स्वस्थ रहती है. विटामिन बी हमारे शरीर को जीवाणुओं से संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करता है. विटामिन बी हमारे शरीर के मेटॉबालिज्म को बढ़ाने में सहायता करता है. और हमारे त्वचा, तंत्रिका, उत्तक, हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. विटामिन बी हमारे शरीर के पोषक तत्वो को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है.
इस विटामिन के उपयोग से हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए का निर्माण तथा मरम्मत करने में मदद करता है. साथ-साथ यह विटामिन बी हमारे शरीर के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में मदद करता है. हमारे शरीर में हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण करने में भी विटामिन बी योगदान देता है. यह हमारे शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का काम करता है. विटामिन बी हमारे शरीर की त्वचा को चमकदार बनाने तथा उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करता है. विटामिन बी हमारे स्मरणशक्ति को बढ़ने में भी सहायता प्रदान करता है.
विटामिन बी के स्रोत
विटामिन बी समहू के अलग-अलग स्रोत है. विटामिन बी1 का अच्छा स्रोत गेहूँ, संतरे, हरे मटर, खमीर, अंडे, चावल, मूँगफली, हरी सब्जियाँ, अंकुर वाले बीज होते हैं. विटामिन बी2 का अच्छा स्रोत मछ्ली, चावल, मटर, दाल, खमीर, अंडे की ज़र्दी होते हैं. विटामिन बी3 का अच्छा स्रोत दूध, मेवा, अखरोट, अंडे की ज़र्दी होते हैं. विटामिन बी5 का अच्छा स्रोत दूध, दाल, पिस्ता, मक्खन, खमीर होते हैं. विटामिन बी6 का अच्छा स्रोत खमीर, चावल, मटर, गेहूँ, मछ्ली, अंडे की ज़र्दी होते हैं. विटामिन बी7 का अच्छा स्रोत गेहूं, बाजरा, मैदा, सोयाबीन, चावल, ज्वार होते हैं. विटामिन बी9 का अच्छा स्रोत दलिया, मटर, मुगफली, अंकुरित अनाज होते हैं. विटामिन बी 12 का अच्छा स्रोत अंडे, मांस, मछ्ली होते हैं.
अधिक मात्रा में विटामिन बी लेने से नुकसान
विटामिन बी 1 का अधिक मात्रा में उपयोग करना हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है. इसकी अधिक मात्रा से त्वचा में एलर्जी, नींद नहीं आना, होंठो का नीला पड़ना, सीने में दर्द और सांस सम्बन्धित बीमारी हो सकती हैं. और गर्भवती महिला तथा उस के गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.
विटामिन बी 3 का भी अधिक मात्रा में उपयोग करना हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है. इसके अधिक मात्रा में उपयोग से लिवर को नुकसान पहुंचने, पेप्टिक अल्सर तथा त्वचा पर रैशेज जैसी बहुत सारी समस्याएं होने लगती हैं.
विटामिन बी 6 का भी अधिक मात्रा में उपयोग करना हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है. इसके अधिक मात्रा में उपयोग से पेट में अकड़न जैसी समस्या होती है. साथ में नवजात शिशु को इसका अधिक मात्रा में उपयोग करना नवजात शिशु के लिए भी नुकसानदायक है. विटामिन बी 12 का अधिक मात्रा में उपयोग गर्भवती महिला के लिए अच्छा नहीं होता है.
विटामिन बी 12 का अधिक मात्रा में उपयोग करने से हमारे पर बुरा प्रभाव पड़ता है साथ-साथ त्वचा पर खुजली, चक़्कर आना, सिर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
विटामिन बी की कमी के लक्षण और नुकसान
विटामिन बी हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होता है. विटामिन बी पानी मे घुलनशील होता है. विटामिन बी का प्रमुख कार्य स्नायु को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन मे मदद करना है. पर जब हमारे शरीर में विटामिन बी की कमी हो जाती है तो बहुत से रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है.

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Vitamin A Benefits, Sources, Side Effects In Hindi - विटामिन ए के स्रोत, फायदे और नुकसान

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Vitamin A Benefits, Sources, Side Effects In Hindi - विटामिन ए के स्रोत, फायदे और नुकसान

विटामिन ए मानव शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है. विटामिन ए का उपयोग आँखों की रोशनी, माँसपेशियों की मजबूती, हड्डियों की वृद्धि और रक्त में कैल्शियम का स्तर सही बनाए रखने में बहुत लाभदायक होता है. विटामिन ए वसा में घुलनशील विटामिन है. विटामिन ए आमतौर पर रेटिनॉयड और कैरोटिनॉयड दो रूपों में पाया जाता है. हमारे शरीर के लिये विटामिन ए अत्यधिक महत्तवपूर्ण है जो फलों और सब्जियों में मुख्य रूप से पाया जाने वाला विटामिन होता है. फलों और सब्जियों में कैरोटिनॉयड की मात्रा भरपूर होने के कारण सब्जियों का रंग गहरा और चमकीला होता है. विटामिन हमारे शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं. विटामिन ए अनेक फलों तथा सब्जियों में अधिक मात्रा में पाया जाता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है.

विटामिन ए के स्रोत
विटामिन ए के अच्छे स्रोत हैं गाजर, चुकंदर, शलजम, शकरकंद, मटर, टमाटर, ब्रोकली, कद्दू, साबुत अनाज, हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां, धनिया, गिरीदार फल, पीले या नारंगी रंग के फल, आम, तरबूत, पपीता, चीकू, पनीर, सरसों, राजमा, बींस, अंडा आदि इन सभी में उचित मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है.

विटामिन ए के फायदे
स्वस्थ शरीर के लिए विटामिन बहुत जरूरी होता है. विटामिन ए के उपयोग से हमारी आँखों की रौशनी तेज होती है और आँखों की मांसपेशिया भी मजबूत बनती हैं. यह आंखों के रेटिना में रंग उत्पन्न करता है. विटामिन ए एक एंटी-ऑक्सीडेंट है. एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के हानिकारक प्रभावों से बचाने का काम करता है. विटामिन ए हृदय रोगों, अस्थमा, डायबिटीज और कई अन्य रोगों में भी लाभदायक है. विटामिन ए इम्यून तंत्र को मजबूत बनाने में बहुत ही अच्छा होता है जिससे हमारी कोशिकाएं सक्रिय होने से बची रहती है. इसलिए हमें रोजाना विटामिन ए युक्त आहार का सेवन करना चाहिए. विटामिन ए युक्त आहार के सेवन से हमारा शरीर और त्वचा स्वस्थ और जवान बनी रहती है.

विटामिन ए लेने से नुकसान
अत्याधिक विटामिन ए की मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है सिरदर्द, दस्त, बाल गिरना, देखने में दिक्कत, थकावट, स्किन खराब हो जाना, हड्डी और जोडों में दर्द, हृदय को नुकसान पहुंचना और लडकियों में असमय मासिक धर्म जैसी समस्या हो सकती है. गर्भवती महिला में गर्भ के दौरान अत्याधिक विटामिन ए की मात्रा लेने से पेट में पलते बच्चे को नुकसान हो सकता है.

विटामिन ए की कमी के लक्षण और नुकसान
विटामिन ए हमारे शरीर की त्वचा, बाल, नाखूनों आदि के लिए लाभदायक होता है. विटामिन ए की कमी से कमजोर दांत, थकान, सूखे बाल, सूखी त्वचा, साइनस, क्रोनिक डायरिया, निमोनिया, सर्दी – जुखाम, वजन में कमी, नींद ना आना, नाईट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) जैसे रोग होते है.

विटामिन ए को कितना खाना चाहिए
स्वस्थ शरीर के लिए विटामिन बहुत जरूरी होता है. विटामिन ए के उपयोग से हमारी आँखों की रौशनी तेज होती है और आँखों की मांसपेशिया भी मजबूत बनती हैं. यह आंखों के रेटिना में रंग उत्पन्न करता है. विटामिन ए एक एंटी-ऑक्सीडेंट है. एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के हानिकारक प्रभावों से बचाने का काम करता है. विटामिन ए हृदय रोगों, अस्थमा, डायबिटीज और कई अन्य रोगों में भी लाभदायक है. विटामिन ए इम्यून तंत्र को मजबूत बनाने में बहुत ही अच्छा होता है जिससे हमारी कोशिकाएं सक्रिय होने से बची रहती है. इसलिए हमें रोजाना विटामिन ए युक्त आहार का सेवन करना चाहिए. विटामिन ए युक्त आहार के सेवन से हमारा शरीर और त्वचा स्वस्थ और जवान बनी रहती है.

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Potassium Benefits, Sources , Side Effects In Hindi - पोटेशियम के स्रोत, फायदे और नुकसान

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Potassium Benefits, Sources , Side Effects In Hindi - पोटेशियम के स्रोत, फायदे और नुकसान

हमारे शरीर के लिए कई खनिज पदार्थों की आवश्यकता होती है. पोटेशियम इन्हीं खनिजों में से एक है. ये एक ऐसा खनिज है जो मानव शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पोटेशियम हमारे हृदय, गुर्दे तथा अन्य अंगो के सामान्य रूप से काम करने के लिए बहुत ही जरूरी खनिज है. पोटेशियम हमारे ऊतकों, कोशिकाओं, नसों और मांसपेशियों के विकास लिए आवश्यक है. पोटेशियम हमारे शरीर में पोषक तत्वों को कोशिकाओं के अन्दर और बेकार के तत्वों को कोशिकाओं से बाहर ले जाने में सहायता करता है. पोटेशियम हमारे रक्तचाप को सामान्य बनाये रखने और सोडियम के हानिकारक प्रभावों को कम करने में भी मदद करता है. पोटेशियम पाचन सामान्य बनाये रखने और मांसपेशियों के सही काम करने में मदद करता है. इसके अलावा भी पोटेशियम हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है. आइए पोटेशियम के स्त्रोत, इससे होने वाले फायदे और पोटेशियम के नुकसान को जानें ताकि इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों की आपके पास जानकारी हो. इससे आप पहले से सचेत रहेंगे.

पोटेशियम के स्रोत
अन्य खनिज की तरह पोटेशियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्वों में से एक है जब भी इसकी कमी हमारे शरीर में होती है, हम रोगों के चपेट में आने लगते हैं. हम इस की कमी आसानी से अपने खान पान की मदद से शरीर में पूरी कर सकते हैं. पोटेशियम के प्राकृतिक और अच्छे स्रोत केले, ऐवाकेडो, बादाम और मूँगफली, संतरा और अंगूर, हरी पत्तेदार सब्जियां, जड़ वाली सब्जियां, गाजर और आलू , शकरकंद, चुकंदर का साग, खजूर, दही, टमाटर, दूध हैं.

पोटेशियम के फायदे
अन्य खनिज की तरह पोटेशियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्वों में से एक है. इसके फायदे हमें कई प्रकार की समस्याओं से निजात दिलाने का काम करते हैं. जब भी इसकी कमी हमारे शरीर में होती है, हम रोगों के चपेट में आने लगते हैं. हम इस की कमी आसानी से अपने खान पान की मदद से शरीर में पूरी कर सकते हैं. पोटेशियम के प्राकृतिक और अच्छे स्रोत केले, ऐवाकेडो, बादाम और मूँगफली, संतरा और अंगूर, हरी पत्तेदार सब्जियां, जड़ वाली सब्जियां, गाजर और आलू , शकरकंद, चुकंदर का साग, खजूर, दही, टमाटर, दूध हैं.

पोटेशियम से होने वाले नुकसान
पोटेशियम हमारे शरीर में जितना जरुरी है इसकी अधिकता उतनी ही नुकसानदेह है. अधिकता से नुकसान जिस तरह पोटेशियम हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है उसी तरह इस की अधिक मात्रा हमारे शरीर के लिए हानिकरक भी है. इसलिए जरुरी है कि इसके बारे में भी जाना जाए ताकि आगे चलाकर कोई अनावश्यक परेशानी न आए. पोटेशियम की अत्‍यधिक मात्रा हमारे शरीर में स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कई परेशानियों को जन्म दे सकती है. इस की अत्‍यधिक मात्रा से किडनी कमजोर और डैमेज हो सकती है. अत्‍यधिक पोटेशियम को मूत्र के जरिए सही तरीके से हटाया नहीं जा सकता है. इससे लिंग संबंधी परेशानी हो सकती है. पोटेशियम की कमी हमारे शरीर में अनेकों समस्याओं को जन्म देती है. पोटेशियम ह्रदय, दिमाग और मांसपेशियों के काम करने में मदद करता है. इस की कमी से शरीर में हाइपोकैलीमिया होने का खतरा हो जाता है. मांसपेशियों में जकड़न, हृदय से जुड़ी बीमारियां, थकान, तनाव, कब्ज, चक्कर और बेहोशी, बाल झड़ना, बार-बार बाथरूम जाना, पाचन संबंधी समस्याएं, हाई ब्लड प्रेशर, हडि्डयों में दर्द - ये सब शरीर में पोटेशियम की कमी के लक्षण हैं.

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Tips for Healthy Liver In Hindi - लीवर की देखभाल

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Tips for Healthy Liver In Hindi - लीवर की देखभाल

लीवर हमारे शरीर के सार्वाधिक महत्वपूर्ण अंगों में से एक है. एक तरह से आप ये कह सकते हैं कि लीवर के सेहत पर ही हमारा सेहत टिका हुआ है. यदि आपके लीवर में कोई खराबी आई है तो इसे खतरे की घंटी समझें. लोगों के बीच ये भी भ्रम रहता है कि जो शराब पिता है सिर्फ उसकी ही लीवर ख़राब होती है. ऐसा नहीं है, ये के गलत धारणा है. हलांकि लीवर के खराब होने के लक्षणों के बारे में लोगों के पास जानकारी का अभाव है. इसलिए हम आपको सबसे पहले लीवर के खराब होने की पहचान करने वाले लक्षणों को बताएँगे. इन परीक्षणों को करने के बाद आप लीवर के खराबी की पहचान कर सकते हैं.
1. मुंह से बदबू आना
मुंह से गन्दी बदबू आने कई कारण हैं, लीवर का ख़राब होना भी उन्हीं कारणों में से एक है. लीवर के खराब होने पर मुंह से गन्दी बदबू इसलिए आती है क्योंकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है.
2. त्वचा का ख़राबहोना
यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो समझिये कि लीवर ख़राब है. लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी.
3. पाचन तंत्र में खराबी
पाचनतंत्र के खराब होने का भी ये कारण हो सकता है कि आपके लीवर में कोई समस्या आ गई है. इस दौरान आपके लीवर पर वसा जमा हुआ हो सकता है. या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा.
4. गहरे रंग का मल
यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है. यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है.
5. आँखों में पीलापन
यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है. इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है.
6. मुंह के स्वाद में कड़वापन आना
लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है. यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है.
7. पेट का सूजन
जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं.
 

लीवर में आई खराबी को दूर करने के कुछ घरेलु उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी परेशानी कम कर सकते हैं. आइए लीवर की देखभाल के लिए आवश्यक खद्यपदार्थों पर एक नजर डालें.
1. नारियल पानी

लीवर के हर रोग में हरे नारियल का पानी बेहद कारगर है. दिन में 2 या 3 हरे नारियल का पानी पीना चाहिए. इसका रिजल्ट किसी भी एलॉपथी दवा से कई गुणा अधिक तेज़ है.
2. हल्‍दी
इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है. हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है. हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं.
3. सेब का सिरका
लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है. सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं.
4. आंवला
विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है. आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं. लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.
5. मुलेठी
लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है. इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें. फिर ठंड़ा होने पर छान लें.
6. अलसी के बीज
फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है. अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है.
7. एवोकैडो और अखरोट
एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है.
8. पपीता
लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए. हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं.
9. सिंहपर्णी
जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है. अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं. आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं.

Calcium Benefits, Sources , Side Effects In Hindi - कैल्शियम के स्रोत, फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Calcium Benefits, Sources , Side Effects In Hindi - कैल्शियम के स्रोत, फायदे और नुकसान

कैल्शियम हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक खनिजों में से एक है. कैल्शियम की कमी मानव शरीर में कई बीमारियों को जन्म दे सकती है. हमारे शरीर का ढांचा हमारे हड्डियों से ही मिलकर बना है. हमारी चलने फिरने से लेकर सारी गतिविधियों के लिए हमारी हड्डियाँ आवश्यक हैं. इनकी मजबूती भी आवश्यक है. इसके लिए यानी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कुछ चीजों का पालन करना बेहद आवश्यक है. कैल्शियम हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए बहुत ही जरूरी है. कैल्शियम हर उम्र के इंसान के लिए, चाहे बच्चे, बूढ़ा और जवान सब के लिए जरूरी है, खास कर महिलाओं के लिए. महिलाओं में कैल्शियम की सबसे अधिक कमी होती है, क्योंकि महिलाओं में मासिक स्राव और प्रसव के समय शरीर से अधिक मात्रा में कैल्शियम नष्ट होता है. तो आइए कैल्शियम के स्त्रोत, फायदे और नुकसान केबारे में विस्तारपूर्वक जाने और इसे समझने की कोशिश करें.
कैल्शियम के स्रोत
कैल्शियम की कमी को हम अपने खान पान के माध्यम से दूर कर सकते हैं. कैल्शियम के अच्छे और प्राकृतिक स्रोत दूध, पनीर, दही, पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, टमाटर, गाजर, अरबी, मूली और पत्तागोभी, मटर, फ़लियां, सीताफल, तुरई, लहसुन, संतरा, अनानास, पपीता, लीची, जामुन, अमरूद, अनार, अंगूर, केला, खरबूजा, पिस्ता, बादाम, खजूर, मुनक्का, सोयाबीन, दालें, चना, राजमा, मूंग, रागी, तिल, आंवला, सूर्यमुखी के बीज, मूंगफ़ली, सिंघाड़ा आदि हैं.
कैल्शियम से होने वाले फायदे
कैल्शियम हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है. कैल्शियम हमारें हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है. कैल्शियम हमारे नाखूनों को मजबूत रखने के लिए भी जरूरी है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमें कैल्शियम हड्डियों की खनिज के लिए आवश्यक होता है. ह्रदय को अच्छे तरीके से काम करने तथा नसों और रक्त के थक्के जमने में भी कैल्शियम बहुत आवश्यक है.
हमारे शरीर में पाए जाने वाल कैल्शियम का 99% मात्रा हड्डियों और दांतों में पाया जाता है. बाकी कैल्शियम हमारे रक्त, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों में होती है. कैल्शियम हड्डियों को मुलायम तथा उनमें दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है. गर्भावस्था के दौरान पैर में होने वाले खिंचाव और हाई बीपी को कम करने में कैल्शियम मदद करता है. कैल्शियम उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, बच्चों में उच्च फ्लोराइड के स्तर को नियंत्रित करता है.मधुमेह रोगी, स्तनपान कराने वाली महिला, स्त्रियों में मासिक चक्र तथा प्रसव और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए कैल्शियम बहुत हो फायदेमंद होता है.
कैल्शियम के नुकसान
हर चीज में एक निश्चित संतुलन जरुरी है. क्योंकि जैसे ही किसी चीज में संतुलन में गड़बड़ी आएगी आपको उसका नुकसान उठाना पड़ता है. हलांकि ये सही है कि कैल्शियम हमारे लिए एक बेहद आवश्यक खनिज पदार्थ है. लेकिन इसका इस्तेमाल करने पर कुछ सावधानियां बरतनी पड़ेंगी. जैसे कि इसकी अधिक मात्रा का इस्तेमाल न करें. इस की अधिक मात्रा का सेवन कभी कभी हमारे लिए हानिकारक हो सकता है. शरीर में कैल्शियम की अधिक मात्रा से गुर्दे की पथरी हो सकती है. इसके अलावा और भी कई ऐसी समस्याओं का सामना आपको करना पड़ सकता है. इसलिए यदि आप अनावश्यक परेशानियों से बचना चाहते हैं तो आपको इसे एक सिमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए. किसी भी प्रकार की समस्या होने पर विशेषज्ञों की राय भी अवश्य लेनी चाहिए.

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Olive Oil Benefits And Side Effects In Hindi - जैतून के फायदे और नुकसान

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Olive Oil Benefits And Side Effects In Hindi - जैतून के फायदे और नुकसान

जैतून के तेल से हमें कई परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है. हालांकि जब भी आप बाजार से जैतून का तेल लेते हैं तो इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि बाजार में कम गुणवत्ता वाले जैतून के तेल भी खूब बिकते हैं. सबसे अच्छा जैतून का तेल उसे माना जाता है जो कोल्ड प्रेस्ड होता है. इसमें सबसे अच्छा स्वाद और गंध मौजूद होता है. जैतून के तेल की खास बात यह है कि इसका इस्तेमाल आंतरिक और बाह्य दोनों तरीके से किया जा सकता है. तो आइए जैतून के तेल के फायदे और नुकसान पर प्रकाश डालें.
1. वजन घटाने में
जैतून के तेल में मौजूद स्वस्थ मोनो सैचुरेटेड फैट, पेट की चर्बी और वजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यदि सही मात्रा में इसका उपयोग किया जाए तो आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं. मोटापे से बचने के लिए आपको रोजाना एक से दो चम्मच जैतून का तेल का प्रत्येक सुबह सेवन करना होगा.
2. सूजन के लिए
जैतून का तेल में सूजन को कम करने के गुण भी मौजूद होते हैं. विशेष रुप से लंबे समय से चले आ रहे सूजन को कम करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसके अलावा कैंसर, अल्जाइमर, ह्रदय रोग, मधुमेह और गठिया जैसी बीमारीयों को भी दूर कर सकता है.
3. बालों के लिए
जैतून के तेल में फैटी एसिड और कई सारे एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ ही विटामिन ई भी भरपूर मात्रा में पाई जाती है. इसमें मौजूद ये सभी तत्व, सूखे और क्षतिग्रस्त बालों के इलाज में काफी उपयोगी साबित होते हैं. इससे दो मुंह वाले बालों की समस्याओं का भी उचित समाधान होता है.
4. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
जैतून का तेल का उपयोग करने से आपके शरीर में कम घनत्व कम घनत्व वाले लियोप्रोटीन या यूँ कहें कि खराब कोलेस्ट्रॉल में काफी कमी आती है. इससे धमनियों में संकुचन पैदा हो सकता है. इसके उलट जैतून का तेल हमारे शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी बढ़ाता है जो कि सुरक्षा सुरक्षा भूमिका निभाता है. जैतून के तेल की सहायता से आप का दिल मजबूत होता है और दौरा पड़ने की संभावना में कमी आती है.
5. कैंसर के उपचार में
जैतून के तेल में मौजूद पॉलीफाइनल एंटीऑक्सीडेंट्स आपके शरीर में सूजन को कम करने के साथ ही कैंसर के जोखिम को भी कम करते हैं. इसके लिए आपको शुद्ध जैतून के तेल का एक से दो चम्मच रोजाना इस्तेमाल करना चाहिए.
6. चेहरे के लिए
जैतून का तेल को त्वचा की नमी के लिए एक अच्छा मॉइस्चराइजर माना जाता है. इसमें विटामिन ए और ई के साथ ही फैटी एसिड भी पाया जाता है. जिससे आपके शरीर की त्वचा में झुर्रियों का बनना तो रुकता ही है चेहरे पर पड़ने वाली लाइंस को भी रोकता है.
7. उच्च रक्तचाप में
जैतून का तेल की सहायता से आप उच्च रक्तचाप में राहत पा सकते हैं. इसके अलावा खाने में जैतून का तेल इस्तेमाल करने से हमारे शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार आता है. इससे रक्तचाप की समस्या भी दूर होती है.
8. हड्डियों की मजबूती के लिए
जैतून के तेल की मालिश करने से आपके शरीर की हड्डियों मैं मजबूती आती है. जैतून का तेल के इस्तेमाल से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी कम होता है. इसलिए हड्डियों के स्वस्थ्य को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें.
9. दिमाग के लिए
जैतून के तेल के नियमित इस्तेमाल से संज्ञानात्मक जोखिम को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही दिमाग में होने वाली परेशानियों जैसे अल्जाइमर डिमेंशिया को दूर करने में भी इसकी भूमिका होती है. इसके अलावा ये डिप्रेशन के खतरे को कम कर सकता है.
10. मधुमेह के उपचार में
शुद्ध जैतून के तेल का इस्तेमाल हम मधुमेह में भी कर सकते हैं. क्योंकि यह शर्करा को नियंत्रित करके इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है. इसके साथ ही जैतून का तेल ट्राइग्लिसराइड के स्तर को भी बनाए रखने में मददगार है.
 

जैतून के तेल के नुकसान
* कुछ लोगों में इसके इस्तेमाल से एलर्जी की भी समस्या हो सकती है.
* जैतून के तेल का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने से रक्तचाप में भारी गिरावट आ सकती है.
* जैतून के तेल की उच्च वसा की मात्रा पाचन विकार का कारण बन सकती है. और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को पैदा कर सकती है.
* जैतून का तेल जब आपकी तेलीय औऱ चिकनी त्वचा के साथ जुड़ता है तो यह गंभीर जलन, चकत्ते और आपकी त्वचा पर लालिमा का कारण बन सकता है.

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Depression Symptoms In Hindi - डिप्रेशन के लक्षण

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Depression Symptoms In Hindi - डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन यानी तनाव, अवसाद या चिंता. दरअसल ये अपने आप में एक बिमारी होने के साथ ही कई बीमारियों की जड़ भी है. इस बिमारी में हमें मुख्य रूप से दुःख, बुरा महसूस करना, दैनिक गतिविधियों में रुचि या खुशी ना रखना आदि लक्षण दिखाई पड़ते हैं. जाहिर है इससे हम भी इन सभी बातों से भी लगभग परिचित ही होते हैं. यदि ये लक्षण थोड़े समय तक दिखाई दें तो ज्यादा परेशान होने की बात नहीं है लेकिन जब यही सारे लक्षण हमारे जीवन में अधिक समय तक रहते हैं तब ये हमें बहुत अधिक प्रभावित करते हैं. ये स्थिति बेहद तनाव से भरी होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अवसाद की परिभाषा के अनुसार दुनिया भर में अवसाद सबसे सामान्य बीमारी है. आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में लगभग 350 मिलियन लोग अवसाद से प्रभावित हैं. अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जो कि कुछ दिनों की समस्या न होकरके एक लम्बी बीमारी है.
अवसाद जैसा ही लगने वाली एक और समस्या है मूड का उतार-चढ़ाव. लेकिन आपको बता दें कि ये अवसाद से अलग है. मूड का उतार-चढ़ाव तो हम अपने सामान्य और स्वस्थ जीवन में भी अनुभव करते ही रहते हैं. लेकिन हमारे दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों के प्रति हमारी अस्थायी भावुक प्रतिक्रियाएं अवसाद को जन्म नहीं दे पाती हैं. जैसे कि जब हमारे किसी करीबी की मौत होती है और हम दुखी होते हैं तो वो भावना अवसाद की श्रेणी में नहीं आती है. लेकिन यही दुःख जब लम्बे समय तक बरकरार रह जाती है अवसाद की समस्या हो सकती है.

आइए अवसाद के लक्षणों पर एक नजर डालते हैं.
1. डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति में आमतौर पर दिखाई देने वाला लक्षण है उदासी.
2. तनाग्रस्त लोग थकान का भी अनुभव करते हैं.
3. तनाव में जी रहे लोगों को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है.
4. इन लोगों को अक्सर दुखी रहते देखा जा सकता है.
5. आमतौर पर दिखाई देने वाले लक्षणों में गुस्सा भी एक है.
6. जिन लोगों को डिप्रेशन की समस्या होती है वो चिड़चिड़े से रहते हैं.
7. डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति में हताशा भी आमतौर पर दिखाई देने वाला लक्षण है.
8. आम तौर पर हम लोग त्योहारों या नया मौकों पर आनंददायक या मजेदार गतिविधियों में भाग लेते हैं जिससे कि एक तरह की ताजगी मिलती है.
9. तनाव के दौरान लोगों को बहुत अधिक नींद या बहुत कम नींद आने की समस्या होती है.
10. तनाग्रस्त व्यक्ति के ऊर्जा में कमी स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है.
11. ये लोग अक्सर अस्वस्थ भोजन की लालसा करते हैं.
12. हमेशा चिंतामें डूबे रहना भी डिप्रेशन का ही एक लक्षण है.
13. कटा-कटा सा और दूसरों से अलग रहना भी एक कारण है.
14. अवसाद से परेशान व्यक्ति के अंदर बेचैनी जैसे भाव भी देखे जाते हैं.
15. उन लोगों को स्पष्ट रूप से सोचने या निर्णय लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
16. इन सब कारणों से वो काम या स्कूल में खराब प्रदर्शन करते हैं जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है.
17. डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति अपराधबोध से ग्रसित होता है.
18. परेशानियों से तंग आकर उनके मन में आत्मघाती विचार भी आते हैं.
19. आम तौर पर तनाव से पीड़ित लोगों के सिर या मांसपेशियों में दर्द रहने की शिकायत भी होती है.
20. कई बार डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति दवा या शराब का दुरुपयोग भी करता है.

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