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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट इन हिंदी - Urine Infection Ayurvedic Treatment In Hindi!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट इन हिंदी - Urine Infection Ayurvedic Treatment In Hindi!

मूत्र संक्रमण महिलाओं और पुरुष दोनों में सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. हालांकि फिर भी महिलाओं में इसके होने की संभावना ज्यादा ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र संक्रमण के आयुर्वेदिक उपचारों पर एक नजर डालें ताकि इसे लेकर लोग कुछ जागरूक हो सकें.

क्या है मूत्र संक्रमण का कारण?

जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण-
मूत्र संक्रमण के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती महिलाएं और शादी-शुदा औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग आमतौर पर अधिक पाया जाता है.

यूरिन इन्फेक्शन के आयुर्वेदिक उपचार-
पहला प्रयोग-

मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए आपको पहले प्रयोग के अंतर्गत केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण नामक औषधि के साथ 100 मि.ली. पानी की मात्रा में मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ को अच्छे से पीसकर उसका पेडू पर लेप लगाने से पेशाब खुलकर आता है.

दूसरा प्रयोग-
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.

तीसरा प्रयोग-
मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.

चौथा प्रयोग-
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.

पाँचवाँ प्रयोग-
इस प्रयोग के लिए आपको सबसे पहले तो 50-60 ग्राम करेले के पत्तों का रस लेना होगा उसके बाद उसमें चुटकी भर हींग मिलायेँ. इस मिश्रण को पीड़ित को देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है इसके अलावा आप चाहें तो उपलब्ध हने पर 100 ग्राम बकरी के कच्चे दूध में 1 लीटर पानी और शक्कर का मिश्रण बनाकर इसे पियें.

अन्य उपचार-

1. नींबू-

नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.

2. पालक-
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.

3. गाजर-
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.

4. खीरा ककड़ी-
मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर तीन घंटे के अंतराल पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.

5. मूली के पत्तों का रस-
मूत्र संक्रमण जैसे विकारों में मरीज को मूली के पत्तों का 100 मिली रस आपको नियमित रूप से दिन में 3 बार सेवन कराना होगा. आपको बता दें कि ये एक बेहद प्रभावी और अचूक औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.

6. मट्ठा-
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.

7. भिंडी-
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.

8. सौंफ-
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है.

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मूंगफली खाने के फायदे - Mungfali Khane Ke Fayde!

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मूंगफली खाने के फायदे - Mungfali Khane Ke Fayde!

मूंगफली भारत में काफी चाव से कच्चा या भूनकर दोनों रूपों में खाई जाती है. इसके कई नाम हैं - हिंदी में 'मुंगफली', तेलुगू में 'पलेलेलू', तमिल में 'कडालाई', मलयालम में 'निलाक्कडाला', कन्नड़ में 'कदले कायी', गुजराती में सिंगानाना और मराठी में 'शेंगाडेन' इत्यादि. इसको मूल रूप से दक्षिण अमेरिका में उगाते हैं. इसका सेवन हमें कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. मूंगफली डायबिटीज, गैल्स्टोन का विकास, याददाश्त बढ़ाना, डिप्रेशन, वजन कम करना, त्वचा को स्वस्थ बनाना, पेट के कैंसर आदि समस्याओं को रोकने में मदद करती है. यानि कुल मिलाकर आप कह सकते हैं की मूंगफली सेहत का खजाना है. मूंगफली में प्रोटीन की मात्रा 25% से ज्यादा होती है. 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन पाया जाता है. साथ ही यह पाचन शक्ति बढ़ाने में भी उपयोगी है. 250 ग्राम भूनी मूंगफली की जितनी मात्रा में मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं, वो 250 ग्राम मीट से भी नहीं मिलते हैं. इसके अलावा, मूंगफली का तेल खाने में उपयोग करने से आपके शरीर के कीटाणु कम होते हैं और आपके शरीर को अच्छा पोषण मिलता है. मूँगफली में पोषक तत्व, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम मूँगफली खाने के फ़ायदों को जानें ताकि इस विषय में लोगों की जानकारी बढ़ सके.

त्वचा के लिए बेहतर-

मूंगफली में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सोरायसिस और एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों का निदान करते हैं. मूंगफली में मौजूद फैटी एसिड भी सूजन और स्किन की रेडनेस को कम करता है. मूंगफली में मौजूद फाइबर टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए जरुरी है. शरीर के अंदर टॉक्सिक पदार्थ त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल का कारण होते हैं. मूंगफली का नित्य रूप से भोजन के रूप में सेवन एक स्वस्थ त्वचा देने में मदद करता है. मैग्नीशियम से भरपूर मूंगफली हमारे तंत्रिका तंत्र, मसल्स और ब्लड वेसल्स को शिथिल करके त्वचा के लिए बेहतर ब्लड फ्लो प्रदान करती है. जिससे आपको एक युवा और स्वस्थ त्वचा मिलती है. मूंगफली में पाए जाने वाला बीटा कैरोटीन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

बढ़ाए प्रजनन शक्ति-
मूंगफली महिलाओं में प्रजनन शक्ति को बेहतर बनाती है. मूंगफली में फोलिक एसिड होता है. फोलिक एसिड, गर्भावस्था के दौरान, भ्रूण में 70% तक गंभीर न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के जोखिम को कम कर देती है.

बालों को स्वस्थ रखने में-
मूँगफली में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फायदेमंद हैं. इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड का अधिक लेवल शामिल है जो सिर की त्वचा को मजबूत और बालों के विकास को वृद्धि करने के लिए मदद करता है. मूंगफली एल आर्जिनाइन का बहुत अच्छा स्रोत है, यह एक अमीनो एसिड है जो पुरुषों में गंजेपन के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है और स्वस्थ बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है.

अल्जाइमर रोग के लिए-
किसी भी प्रकार से मूंगफली का सेवन करना अल्जाइमर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है. इनमें रेसवेरट्रोल नामक एक यौगिक होता है जो मृत्यु कोशिकाओं को कम करने, डीएनए की रक्षा करने और अल्जाइमर रोगियों में तंत्रिका संबंधी क्षति को रोकने के लिए फायदेमंद है. उबाली हुई या भुनी हुई मूंगफली ज्यादा लाभदायक होती है क्यूंकि ये रेसवेरट्रोल के स्तर को बढ़ा देती हैं. अध्ययनों से पता चला है कि नियासिन में समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे की मूंगफली, अल्जाइमर रोग के खतरे को 70% तक कम कर सकते हैं.

ब्लड शुगर को संतुलित करने में-
मूंगफली में मौजूद मैंगनीज ब्लड में कैल्शियम के अवशोषण, फैट और कार्बोहाइड्रेट चयापचय और शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है. रोज खाना खाने के बाद 50 ग्राम मूंगफली खाने से आपकी बॉडी का ब्लड रेशो इनक्रीज हो सकता है. मैंगनीज, फैट और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय को बढ़ाता है, जिसकी मदद से यह मांसपेशियों और लिवर की कोशिकाओं में ग्लूकोज प्रवेश करता है, और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. एक अध्ययन के अनुसार, मूंगफली का सेवन मधुमेह के जोखिम को 21% तक कम कर सकता है.

कैंसर के जोखिम को करे कम-
मूंगफली में पॉलिफीनॉलिक नामक एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा मौजूद होती है. पी-कौमरिक एसिड में पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता होती है. मूँगफली विशेष रूप से महिलाओं में पेट के कैंसर को कम कर सकती है. 2 चम्मच मूंगफली के मक्खन का कम से कम सप्ताह में दो बार सेवन करने से महिलाओं और पुरुषों में पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं. यह महिलाओं के लिए मूंगफली के सबसे अच्छे लाभों में से एक है.

सर्दी जुकाम में उपयोगी-
मूंगफली, आमतौर पर सबको होने वाली सर्दी जुकाम के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. इसलिए यदि आप सर्दियों के मौसम में मूंगफली का सेवन करेंगे तो आपके शरीर में गर्मी रहेगी. यह खाँसी में उपयोगी होने के साथ ही आपके फेफड़े को भी मजबूत करने का काम करती है.

खराब कोलेस्ट्रॉल के लिए-
मूंगफली में पाए जाने वाले मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करते हैं. इसलिए खराब कोलेस्ट्राल को खत्म करने के लिहाज से भी मूँगफली का सेवन किया जा सकता है.

वजन कम करने के लिए-
मूँगफली वजन कम करने के लिए भी बहुत उपयोगी है. मूंगफली में प्रोटीन और फाइबर होते हैं. ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करने में प्रभावित हैं. इसलिए भोजन के बीच में कुछ मूंगफली खाने से आपकी भूक कम हो सकती है जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है.

डिप्रेशन को करे दूर-
शरीर में सेरोटोनिन का कम स्तर डिप्रेशन जैसी समस्या उत्पन्न कर सकता है. मूंगफली में मौजूद ट्रिप्टोफेन केमिकल को निकालने में मदद करता है. इस प्रकार यह आपको डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है. मूंगफली के स्वास्थ्य लाभ आप कई प्रकार से उठा सकते हैं. खतरनाक बीमारियों को दूर रखने और स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो बड़े चम्मच मूंगफली के मक्खन का सेवन करें.

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मुहासे के दाग हटाने के उपाय - Muhanse Ke Daag Hatane Ke Upaay!

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मुहासे के दाग हटाने के उपाय - Muhanse Ke Daag Hatane Ke Upaay!

मुँहासे या पिंपल्स आजकल एक आम समस्या है जिससे कई लोग परेशान हैं. मुँहासे की ये मुहासों की समस्या दो तरह से लोगों को परेशान करती है. एक तो मुँहासे हो जाने पर लोगों के चेहरे के आकर्षण में कमी आती है. दूसरी तब, जब मुँहासे तो खत्म हो जाते हैं लेकिन उनके दाग रह जाते हैं. इन दागों से निपटना भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है. यहाँ आपको ये भी जान लेना चाहिए कि तैलीय चेहरे वाले लोगों में मुँहासे अधिक होने कि संभावना रहती है. लेकिन मुँहासे किसी के भी हो सकते है.

कैसे होते हैं मुंहासे?
दरअसल यदि हम मुंहासों के जड़ में जाएँ तो हमें यही पता चलेगा कि ये मुख्य रूप से तेल ग्रंथियों का एक विकार है. ये तेल ग्रंथियां हमारे त्वचा के नीचे स्थित हैं. जाहीर है किशोरावस्था में शरीर कई परिवर्तनों से गुजर रहा होता है. ये हार्मोनल परिवर्तन तेल ग्रंथियों कि गतिविधियां काफी सी को भी हो सकते हैं. मुहांसे मूल रूप से तेल ग्रंथियों से संबंधित एक विकार है. ये तेल ग्रंथियां त्वचा के नीचे मौजूद हैं. हार्मोनल परिवर्तनों के कारण तेल के ग्रंथि की गतिविधियां किशोरावस्था के दौरान बढ़ जाती हैं जिसके कारण पिंपल्स उत्पन्न होते हैं. त्वचा के रोम छिद्र या पोर्स अंदर से तेल ग्रंथी वाली कोशिकाओं से जुड़े हुए होते हैं जिनके कारण सीबम ऑयल त्वचा के रोम छिद्र में उत्पन्न होता है. सीबम खराब कोशिकाओं को छिद्र से बाहर लाने मे मदद करता है और नये कोशिका बनता रहता है. परंतु हार्मोन असंतुलन के कारण जब ज़्यादा सीबम तेल बनने लगता है, तब यह तेल इन रोम छिद्रों को बंद कर देता है जिसके कारण पिम्पल्स या दाने होते हैं. सीबम में बैक्टीरिया का विकास भी रोम छिद्रों को बंद कर पिम्पल्स का कारण बनता है.

हार्मोन परिवर्तन-
टीनेजर्स और प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोन बदलते रहते हैं. जीवन की इन घटनाओं के दौरान, तेल ग्रंथियों की गतिविधि बढ़ जाती है और कभी-कभी अत्यधिक सेबम का उत्पादन होने लगता है जो कि त्वचा के फॉलिकल को रोकता है और पिंपल्स का कारण बनता है.

नींद की कमी-
किसी भी वजह से पर्याप्त नींद ना मिलना, आपकी प्राकृतिक मेटाबोलिक रेट में इंटरफेयर कर सकता है. तनाव अनुचित नींद के कारण होता है जिसका शरीर में मेटाबोलिक प्रक्रियाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है. यदि ये प्रक्रियाएं अपनी क्षमता खो देती हैं तो शरीर में टॉक्सिक पदार्थ जमा हो जाते हैं जो अंत में मुंहासे का निर्माण करते हैं.

क्रीम लोशन का अत्यधिक इस्तेमाल-
अपने चेहरे और गर्दन पर विभिन्न प्रकार के क्रीम और लोशन का इस्तेमाल करना भी कभी-कभी पिंपल्स का कारण होता है. ये त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं और कभी-कभी त्वचा अवांछित टॉक्सिक पदार्थों से भर जाती है जिससे मुंहासे होते हैं.

पाचन तंत्र में समस्या-
जब पाचन प्रक्रिया उतनी अच्छी नहीं होती है जितनी की होनी चाहिए, तब अन्य स्वास्थ्य संबंधित विकारों की समस्याएं होने लगती हैं. शरीर में जमे विषाक्त पदार्थ मुंहासे के निर्माण में योगदान कर सकते हैं. परेशान पाचन तंत्र आमतौर पर वात असंतुलन की वजह से होता है. यह सूखा, मसालेदार और तेलयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण हो सकता है. कच्चे और अधपके भोजन तथा ठंडे पेय और आइसक्रीम जैसे ठंडे व्यंजनों से भी पिंपल्स होते हैं. बेहतर पाचन के लिए स्वस्थ और गर्म भोजन खाएं.

पिम्पल्स से बचाव-
पिम्पल्स एक त्वचा संबंधी समस्या हैं. यह आमतौर पर चेहरे और गर्दन पर देखे जाते हैं. इन्हें रोकने के लिए बहुत जरूरी है कि आप अपनी त्वचा को साफ़ रखें.कभी-कभी आपके शरीर की आंतरिक कारणों कि वजह से भी मुंहासे होते हैं. इसलिए अपने डाइट और लाइफस्टाइल में परिवर्तन करने से आप मुहांसों से निजात पा सकते हैं.

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मुल्तानी मिट्टी के फायदे - Multani Mittee Ke Fayde!

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मुल्तानी मिट्टी के फायदे - Multani Mittee Ke Fayde!

मुल्तानी मिट्टी सौंदर्य उद्योग में प्राचीन काल से ही उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख घटक है. हर्बल उत्पादों के निर्माता अक्सर त्वचा और बाल उत्पादों में इस प्राकृतिक संघटक का उपयोग करते हैं. मुल्तानी मिट्टी का नाम इसके जन्म स्थल के आधार पर रखा गया है. यह मिट्टी पकिस्तान में स्थिति मुल्तान नामक जगह में पायी जाती है. मुल्तानी मिट्टी में मैग्नीशियम, क्वार्ट्ज, सिलिका, आयरन, कैल्शियम, कैल्साइट और डोलोमाइट जैसे फायदेमंद मिनरल शामिल हैं. यह बाज़ार में आमतौर पर पाउडर के रूप में उपलब्ध है. इसके अलावा, यह सफेद, हरी, नीली, भूरी या जैतून इत्यादि जैसे विभिन्न रंगों में आती है. आइए इस लेख के माध्यम से मुल्तानी मिट्टी के फायदे जानें.

1. घाव का निशान हटाने के लिए-

मुल्तानी मिट्टी घाव के निशान, जलने के छोटे-मोटे निशान या किसी अन्य प्रकार के निशान को बहुत हद तक कम कर सकती है. घाव व जले हुए निशान को अदृश्य करने करने के लिए मुल्तानी मिट्टी, विटामिन ई तेल और नींबू का रस, प्रत्येक का आधा चम्मच अच्छी तरह से मिला लें. इस मिश्रण को निशान पड़े हुए क्षेत्र पर लगा लें. इसे 20 मिनट के लिए लगा कर छोड़ दें और फिर पानी से धो लें.

2. चेहरे की सफाई के लिए फेस पैक-
मुल्तानी मिट्टी एक उत्कृष्ट सफाई एजेंट है जो आपकी त्वचा की रंगत को सुधारने में और निखार लाने में अत्यंत लाभदायक है. अपनी त्वचा की रंगत में सुधार लाने के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में दही के दो बड़े चम्मच मिलाएं. इस मिश्रण को 30 मिनट के लिए छोड़ दें. इसमें एक चम्मच पुदीना का पाउडर मिलाएँ और अच्छी तरह से मिश्रण को मिक्स कर लें. अपने चेहरे और गर्दन के क्षेत्र पर मिश्रण लगा लें. इसे 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गर्म पानी से धो लें.

3. त्वचा से अतिरिक्त तेल अवशोषित-
मुल्तानी मिट्टी एक प्राकृतिक एब्सोर्बेर होने के कारण, मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल निकालने के लिए उपयोग की जाती है. यह त्वचा के पोर्स को खोलती है और त्वचा के प्राकृतिक पी.एच. स्तर को संतुलित करती है. यह आमतौर पर एक घरेलू फेस पैक के रूप में प्रयोग की जाती है.

4. पैर और हाथ को आराम देने में-
जब आपके हाथ या पैर थके हुए हों या फिर किसी प्रकार की इंजरी हो, तो राहत पाने के लिए मुल्तानी मिट्टी के पेस्ट का उपयोग कर सकते हैं. मुल्तानी मिट्टी रक्त के संचालन को उत्तेजित करती है और कुछ मिनटों में ही थकान से राहत मिल जाती है. रक्त संचालन में वृद्धि ना केवल आपकी थकावट को दूर करता है, बल्कि यह ह्रदय, मांसपेशियों और पूरे शरीर में धमनियों को भी लाभ पहुंचाता है.

5. दो मुहें बालों के उपचार में-
अगर बालों की सही तरह से केयर न की जाए तो वे दोमुंहे हो जाते हैं. मुलतानी मिट्टी को प्राकृतिक शैंपू और कंडीशनर कहा जाता है. दोमुहें बाल होने पर बालों में मुलतानी मिट्टी लगाने से यह समस्‍या दूर होती है और आपके बाल घने और मुलायम भी होते हैं.

6. एक्ने के उपचार में-
यदि आप मुँहासों से परेशान हैं, तो फुलर अर्थ निश्चित रूप से आपकी समस्या को हल कर सकती है. यह बंद पोर्स से मुक्ति पाने में मदद करती है और अतिरिक्त तेल स्राव को कम करती है, जो मुँहासों के दो मुख्य कारण हैं.

7. डैंड्रफ भगाने के लिए-
डैंड्रफ बालों की बड़ी समस्‍या है, अगर इसका समय पर उपचार न किया जाए तो हेयरफाॅल होने लगते हैं. चार चम्‍मच मुलतानी मिट्टी के साथ दो-दो चम्‍मच नींबू का रस और शहद लेकर एक पेस्‍ट बना लीजिए. कुछ सप्‍ताह तक निरंतर नहाने से 20 मिनट पहले इस पेस्‍ट को बालों पर लगाने से डैंड्रफ की समस्‍या से निजात मिल जाती है.

8. त्वचा में लचक के लिए-
उम्र के कारण ढीली होती त्वचा एक सामान्य समस्या है. परंतु आप इसे लेकर चिंतित न हों, नहीं तो आपकी त्वचा की लचक और भी कम हो जायेगी. इस समस्या के हल के लिए आप मुल्तानी मिट्टी पर विश्वास कर सकते हैं. यह आपकी त्वचा की खोयी हुई लचक लाने के साथ-साथ उसे चिकना और टाइट भी बना देती है.

मिश्री खाने के फायदे - Mishri Khane Ke Fayde!

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मिश्री खाने के फायदे - Mishri Khane Ke Fayde!

मिश्री का नाम ही इतना प्यारा है कि इसे सुनना भी बड़ा प्यारा लगता है. मिश्री के गुणों और बेहतरीन स्वाद की बदौलत ही इसे मुहावरे के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. जब कोई बहुत मीठी आवाज में बोलता है तो कहा जाता है कि – ‘तुमने तो मेरे कान में मिश्री घोल दी’. मिश्री एक बेहद लोकप्रिय और औषधीय गुणों से युक्त खाद्य पदार्थ है. बहुत पहले से ही इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. मिश्री को ऐसे भी खाया जाता है. कई लोग पानी पीने सपहले थोड़ी मिश्री खाकर पानी पीते हैं. आपको बता दें कि बड़े पैमाने पर मिठाईयों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसके कई उपनाम भी प्रचलित हो गए हैं. इसके प्रचलित उपनामों में से एक है स्टीव कैंडी. अङ्ग्रेज़ी में भी सीए स्वीट कैंडी के नाम से ही पुकारा जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हा आपको मिश्री से जुड़े अद्भुत स्वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में कई जानने योग्य बातें बताएं.

मिश्री है स्वास्थ्य के लिए मीठी औषधि-
मिश्री को रॉक शुगर के नाम से बी जाना जाता है जो कि क्रिस्टल का एक रूप होता है. इसे सबसे पहले भारत में इस्तेमाल की गइ थी. भारत में इसे हिन्दु धर्म के लोगो द्वारा भगवान को भोग लगाने और प्रसाद के रूप में बांटने में भी प्रयोग किया जाता है. क्‍या आप जानते हैं कि कई प्रकार की मिठाईयों में बड़े पैमाने पर प्रयोग होने वाली मिश्री कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभों से भरपूर भी है. आइए मिश्री आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए क्‍यों अच्‍छी है, इससे जुड़े अद्भुत कारणों के बारे में जानते हैं.

माउथ फ्रेशनर के लिए-
सौंफ के साथ मिश्री का प्रयोग आमतौर पर माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है. मिश्री का मीठा स्‍वाद और फ्लेवर आपको तरोताजा रखने के साथ मुंह में बैक्‍टीरिया के विकास को भी रोकता है. यही कारण है कि भारत में अधिकांश लोग भोजन के बाद मिश्री खाना पसंद करते है.

मिश्री है ताजा पेय-
भारत के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान मिश्री को व्यापक रूप से ताजा पेय के लिए इस्तेमाल करते है. एक चम्‍मच मिश्री पाउडर को एक ग्लास में पानी में मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. यह माइंड और बॉडी पर आरामदायक प्रभाव डाल स्ट्रेस से राहत देता है. ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि यह ग्‍लूकोज के रूप में एनर्जी प्रदान कर राहत देता है.

खांसी से छुटकारा दिलाये-
आमतौर पर मौसम में परिवर्तन के दौरान बच्‍चे सर्दी और खांसी के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं. हालांकि खांसी से निजात पाने के लिए कफ सिरप जैसे व्‍यापक रूप से पसंदीदा विकल्‍प मौजूद है, लेकिन मिश्री तुरंत राहत पाने वाला सबसे प्रभावी घरेलू उपचारों में से एक है. इसमें मौजूद आवश्‍यक पोषक तत्‍व कफ को साफ कर गले को आरामदायक प्रभाव देता है.

चीनी का सेहतमंद विकल्‍प-
चीनी का अनरिफाइंड रूप होने के कारण मिश्री को टेबल शुगर की तुलना में स्‍वस्‍थ विकल्‍प माना जाता है. यही कारण है कि मिश्री का इस्तेमाल कन्फेक्शनेरी जैसे लालीपॉप और चॉकलेट से लेकर स्‍वीट ड्रिंक जैसे पन्‍ने जैसे स्‍वीट की तैयारी में किया जाता है. इसे कई मामलों में चीनी से बेहतर उत्पाद माना जाता ही है. इसीलिए इसका औषधीय इस्तेमाल भी भरपूर किया जाता है. इसके कई औषधीय लाभ हमें कई बार लाभ पहुँचाते हैं.

गले में खराश का प्रभावी उपचार-
अगर आपका बच्‍चा बहती नाक या गले में खराश से पीड़ित है? तो आप मिश्री से बना पानी अपने बच्‍चे को दे सकते हैं. यह आम सर्दी और उसके लक्षणों से राहत देने के लिए प्राकृतिक रूप से काम करता है, साथ ही आपको तुरंत राहत प्रदान करता है. गले में खराश से राहत पाने के लिए आप अपने बच्‍चे को मिश्री का छोटा टुकड़ा चूसने के लिए भी दे सकते हैं.

मिर्गी का उपचार - Mirgi Ka Upchar!

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मिर्गी का उपचार - Mirgi Ka Upchar!

मिर्गी उन बिमारियों में से है जिनका पहचान काफी पहले ही हो चुकी थी. आज हम मिर्गी के लक्षण, कारण और उपचार को लेकर बात करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार मिर्गी की बीमारी तंत्रिका तंत्र में विकार आने के कारण होती है. तंत्रिका तंत्र का सीधा सम्बन्ध मस्तिष्क से है. जब मस्तिष्क में विकार आता है तो इसकी वजह से तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है. फिर मिर्गी का अटैक आता है और पीड़ित का शरीर अकड़ जाता है. इस बीमारी को लेकर पहले समाज में कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित थीं. हलांकि अब भी कई लोग इसे भुत-प्रेत से जोड़कर देखते हैं. कई बार तो मिर्गी के मरीज को पागल की तरह भी ट्रीट किया जाता है. यहाँ ये बताना आवश्यक है कि मिर्गी भी बस एक बीमारी के सिवा कुछ नहीं है. इस लिए इसके मरीजों को तुरंत किसी चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए. हम मिर्गी के के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं.


मिर्गी होने का क्या कारण-
शरीर के सभी अंगों की संवेदनशीलता मस्तिष्क द्वारा तंत्रिका तंत्र को दिए गए निर्देश के अनुसार ही काम करती है. मस्तिष्क में स्थित न्यूरॉन्स ही तंत्रिका तंत्र को सिग्नल देते हैं. लेकिन जब इस प्रक्रिया में बाधा पहुंचती है यानी कि न्यूरॉन्स तंत्रिका तंत्र को सही निर्देश नहीं दे पाते हैं तब मरीज को मिर्गी का दौरा पड़ता है. इसमें शरीर का अंग विशेष कुछ देर के लिए निष्क्रिय हो जाता है.
1. न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स जैसे कि अल्जाईमर.
2. अनुवांशिक कारण यानि आपके खानदान में किसी को रहा हो या हो.
3. ब्रेन ट्यूमर
4. जन्म से ही मस्तिष्क में ऑक्सीजन का आवागमन पूर्ण रूप से बंद होने पर.
5. मस्तिष्क ज्वर और इन्सेफेलाइटिस के के संक्रमण से.
6. ब्रेन स्ट्रोक के कारण ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुँचने से.
7. कार्बन मोनोऑक्साइड की विषाक्तता से.
8. अत्यधिक मात्रा में ड्रग लेना.


मिर्गी के उपचार और रोकथाम-
उपचार-

मिर्गी एक बेहद संवेदनशील बिमारी है. इसके उपचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय बताया जाता है कि जब भी मिर्गी का दौरा आए उस समय सीजर को नियंत्रित करना. इसे नियंत्रित करने के लिए एन्टी एपिलेप्टिक ड्रग थेरपी और कुछ सर्जरी होती है. हलांकि डॉक्टर्स का ये भी कहना है कि जिन लोगों पर दवाई का असर नहीं होता है उन्हें सर्जरी करने की सलाह दी जाती है. मिर्गी के मरीजों को ज्यादा वसा वाले खाने से दूर ही रहना चाहिए. खाने में ज्यादा से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे सीजर की आवृत्ति में कमी आती है.

रोकथाम के उपाय-
आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि अभी भी मिर्गी के कारणों का ठीक से पता नहीं लगाया जा सका है. हलांकि शिशुओं के जन्म के दौरान जेनेटिक स्क्रीनिंग की सहायता से माँ को बच्चे में इसके होने का पता लगाया जा सकता है. इससे बचने के लिए आप इस बात का ध्यान रखें की आपके सर में चोट न लगे. इसके अलावा आप ये उपाय कर सकते हैं-
1. जितना हो सके तनाव से दूर रहें.
2. खाने में संतुलित आहार लें.
3. डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का सही तरीके से सेवन करते रहें.
4. नियमित रूप से चिकित्सक से सलाह लेते रहें.
5. पर्याप्त नींद लेना भी अत्यंत जरुरी है.


मिर्गी का आयुर्वेदिक उपचार
1. लहसुन

लहसुुन भारतीय औषधियों में कई बीमारियों को ठीक करने के लिए इस्तमाल में लाया जाता रहा है. इससे शरीर की एैठन भी दूर होती है. इसमें एंटी-स्पास्म, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री विशेषता होती है जिससे दौरों से बचाव होता है. आधा कप दूध और पानी को मिलाकर इनमें 5 लहसन की कलियाँ डालकर उबाल लें. तब तक उबालें जब तक मिश्रण आधा न हो जाए. इस मिश्रण को नियमित रूप से पीने पर दौरे नहीं पड़ेंगे.
2. ब्रह्मी
ब्रह्मी एक ऐसा ही हर्ब है जिसे आयुर्वेद लेने की सलाह देता है. इससे तनाव भी कम होता है और शरीर को फ्री रैडिकल से बचाता है. यह दिमाग सम्बन्धी बीमारियों के उपचार के लिये काफी लाभदायक है. यह दिमाग में न्यूरोन का तालमेल ठीक करता है जिससे एपिलेप्सी के इलाज में मदद मिलती है. जिस इंसान को दौरे आते हैं उसे रोज़ ब्रह्मी के 5-6 पत्ते खाने चाहिए. इसके बाद एक ग्लास गर्म दूध पी लेना चाहिए. ऐसा करने से धीरे धीरे दौरे आना बंद हो जाएंगे.
3. तुलसी
भारतीय घरों में यह मिलना आम बात है तुलसी पूज्यनीय पेड़ है. यह दौरों को खत्म करने में भी काफी मददगार साबित होता है. इससे तनाव भी दूर होता है. तुलसी के पत्तों को रोज़ चबाना या एक चम्मच तुलसी का जूस पीने से दिमाग में न्यूरोन का तालमेल बैठता है और दौरे नहीं पड़ते.
4. ऐश गॉर्ड
इसे सफेद कद्दू या पेठा भी कहते हैं और इसका विवरण इसके रोगनाशक गुण की कारण 'चरक संहिता' में भी किया गया है. यह दौरे के इलाज के रूप में काफी असरदार सिद्ध हो सकता है. ऐश गॉर्ड को घिसकर इससे आधा कप जूस निकाल लें. सुबह उठकर यह जूस पीएं. इससे दौरे पड़ना बंद हो जाएंगे.
5. नारियल तेल
नारियल तेल से दौरों में काफी फायदा होता है. इससे दिमाग में न्यूरोन को ऊर्जा मिलती है और ब्रेन वेव पर इसका शांतिदायक असर पड़ता है. नारियल में जो फैटी ऐसिड होते हैं वह एपिलेप्सी से निजात पाने में मदद करते हैं. दिन में एक चम्मच नारियल का तेल खाएं. आप चाहें तो खाना नारियल तेल में ही बनाएं या सलाद पर डाल कर खाएं.

मानसिक तनाव दूर करने के उपाय - Mansik Tanaw Door Karne Ke Upay!

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मानसिक तनाव दूर करने के उपाय - Mansik Tanaw Door Karne Ke Upay!

मानसिक तनाव उन बीमारियों में से है जो कई और बिमारियों को जन्म देती हैं. इसे आप डिप्रेशन, तनाव या चिंता में डूबा रहना भी कह सकते हैं. दुर्भाग्य से इस बीमारी के शुरुवात में या तो हमें पता नहीं चल पाता है या फिर हम इस तरफ ध्यान नहीं दे पाते हैं. यदि हम मानसिक तनाव के लक्षण की बात करें तो इसमें अनिद्रा, उदासी, वजन का अत्यधिक कम या ज्यादा होना, आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करना एकाग्रता में कमी इसका प्रमुख है. आइए इस लेख के माध्यम से हम मानसिक तनाव को दूर करने के उपायों पर एक नजर डालें ताकि हम इसके बारे में विस्तारपूर्वक समझें.

खान-पान भी तनाव से बचाता है
1. काजू

तनाव को ठीक करने में तंत्रिकातंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. इसमें विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और ये विटामिन ही तंत्रिका तंत्र को ठीक रखता है. इसके साथ ही काजू आपके शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाकर आपको सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

2. अंडे
प्रोटीन के भण्डार अंडा में डीएचए भी पाया जाता है. आपको बता दें कि डीएचए पचास फीसदी तनाव को ठीक कर सकता है. अंडा न सिर्फ तनाव को ठीक करेगा बल्कि आपको निरोग रखने में भी मदद करता है.

3. सेब
तमाम पौष्टिक गुणों से भरपूर सेब आपके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखता है. इसमें पाया जाने वाले विटामिन बी, फास्फोरस और पोटैशियम मिलकर ग्लूटामिक एसिड का निर्माण करते हैं. ये एसिड मानसिक स्वस्थ्य ठीक रखता है.

4. डेजर्ट
तनाव को दूर करने में चीनी की भी भूमिका देखी गई है. दरअसल इसके प्रयोग से शरीर के शुगर लेवल को एक नई ऊर्जा दी जाती है. आप चाहें तो इसके लिए चीनी से बने किसी भी खाद्य पदार्थ केक, डेजर्ट या जूस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

5. टोस्ट या जैम
मानसिक असाद से पीड़ित लोगों के लिए कार्बोहाइड्रेट का सेवन लाभकारी होता है. कई लोग तो इसके लिए ब्रेड पर जैम लगाकर भी खाते हैं.

6. आयरन युक्त भोजन
हमारे शरीर में आयरन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. लेकिन कई लोगों में आयरन की कमी होती है खासकरके लड़कियों में. आयरनयुक्त भोजन करने से आपमें आयरन लेवल तो ठीक रहता ही है, साथ में आपका मूड भी ठीक रहता है. आयरन के लिए सबसे अच्छा स्त्रोत पालक है.

7. इलायची
आप खुद को तरोताजा रखने के लिए इलायची का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना करना है कि इलायची के पिसे हुए बीज को पानी के साथ उबाल कर या चाय के साथ लें. इससे आपका मूड फ्रेश हो जाएगा.

ये पाँच तत्व भी आपको डिप्रेशन से बचाते हैं
1. आयोडीन

हमारे शरीर में आयोडीन के महत्व से तो आप परिचित होंगे ही. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी कमी से हमारा दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता है. आयोडीन के लिए आप आलू, दही, लहसुन आदि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

2. ओमेगा थ्री
विशेषज्ञों के अनुसार ओमेगा थ्री के नियमित सेवन से हमारे दिमाग में न्यूरॉन से सेल्स की वृद्धि होती है. इसलिए इसे डिप्रेशन से बचने का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है. यदि ओमेगा थ्री के स्त्रोतों की बात करें तो मछली, सुखा मेवा, सरसों के बीज, सोयाबीन, गोभी, फल और हरी बीन्स आदि प्रमुख हैं.

3. जिंक
हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाया जाने वाले जिंक की कमी से डिप्रेशन के अलावा और भी कई बीमारियाँ हो सकती हैं. इसलिए जिंक का नियमित सेवन भी जरुरी है. इसे हम मूंगफली, लहसुन, राजमां, दालें, सोयाबीन, बादाम, अंडे, बीज, मटर आदि से प्राप्त कर सकते हैं.

4. मैग्नीशियम
याद्दाश्त को बनाए रखने में मैग्नीशियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसलिए इसकी कमी से याद्दाश्त कमजोर होने के साथ ही डिप्रेशन भी बढ़ सकता है. मैग्नीशियम हमें काजू, बादाम, पीनट बटर, अंजीर आदि खाकर मिल सकता है.

5. दूध और इसके उत्पाद
कहा जाता है कि दूध एक सम्पूर्ण पौष्टिक आहार है. तो ऐसे में शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी को हम दूध और इसके विभिन्न उत्पादों से पूर्ति कर सकते हैं. जाहिर है कुपोषित शरीर के तनाव ग्रस्त होने की संभावना अधिक होती है.

तनाव को दूर करता है म्यूजिक थेरेपी
जैसा कि आम तौर पर कहा जाता है कि संगीत हमें दुसरी दुनिया में ले जाता है. चूँकि तनाव मानसिक भटकाव की तरफ ले जाता है और संगीत हमें एकाग्रचित होने में मदद करता है इसलिए संगीत के माध्यम से हम तनाव का सफल उपचार कर सकते हैं. इससे हमें नींद भी गहरी आती है और हमारा शरीर पूरी तरह से रिचार्ज हो जता है.

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भांग कैसे बनती है - Bhang Kaise Banti Hai!

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भांग कैसे बनती है  - Bhang Kaise Banti Hai!

होली का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है वैसे ही हमारे मन में रंगों के साथ साथ भांग का घोटा और भांग से बने पकवान का स्वाद लेने के लिए मन में लालच आ जाता है. भांग हमारे देश में खास कर उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है. भांग के बिना होली मानो अधूरी सी लगती है. इसका उपयोग आम तौर पर खाने में, भांग की गोली और भांग की ठंडाई के रूप में किया जाता है. भांग का घोटा पी कर होली में नाचने का मजा ही कुछ और होता है . तो आज ही लेख में हम भांग कैसे बनती है, भांग का घोटा क्या होता है और भांग का नशा उतरने की दवा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं तो आइए जानते हैं कि भांग कैसे बनती है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है साथ ही साथ भांग का घोटा बनाने की विधि क्या है?

भांग का घोटा क्या है-
भांग एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाने वाली जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है. भांग के पेड़ की लम्बाई 3 से 7 फीट की होती है. भांग आमतौर पर भांग के पेड़ की पत्तियों से लिया जाता है. इसका उपयोग विभिन्न प्रकार से की जाती है जैसे भांग की ठंडाई, भांग का घोटा और खाने में. भांग कैसे बनती है और ये कितने तरीके से इस्तेमाल किया जाता है इसके बारे में निम्न विस्तार से बताया गया है.

भांग का घोटा बनाने के विधि:-
भांग को घोटा बनाने के लिए हरे पत्तियों के पाउडर को दही और मट्ठे के साथ मिक्स कर के तैयार की जाती है. इसका सही तरह से मिश्रण करने के लिए हाथों से अच्छे तरह से मथा जाता है. यह बेहद स्वादिष्ट और ताज़ा होता है. इसके साथ ही कहीं-कहीं भांग के पकौड़े भी खाए जाते है.

भांग का घोटा के अलावा यह गोली और ठंडाई के रूप में भी इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां होली के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां भांग को पानी के साथ मिक्स कर के बनाया जाता है. हालाँकि, इसके खाने के कई साइड इफेक्ट्स भी है. इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में और प्रतिदिन नहीं करना चाहिए. भारत में यह जगहों पर इसे बैन कर दिया गया है. 

भांग में शामिल होने वाली सामग्री- 

  • आधा लीटर पानी 
  • आधा कप चीनी 
  • एक कप दूध 
  • एक चमच बादाम
  • 10 से 15 भांग की गोलियां 
  • आधा चम्मच इलायची 

होली के दौरान भांग का अलग ही महत्व होता है लेकिन यदि भांग का सेवन सीमित मात्रा से ज्यादा कर लिया जाए, तो भांग का नशा बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. तो आइए जानते है कि भांग का नशा कैसे उतारा जाता है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है.
1. भांग का नशा उतारने के लिए खट्टे पदार्थो का सेवन करें
यदि भांगा का नशा ज्यादा हो जाए तो जितना हो सकता है खट्टे पदार्थों का सेवन करें जैसे की नीम्बू का रस, दही, छाछ, इमली आदि. इससे नशा जल्दी उतर जाता है. 

2. भांग का नशा उतारने  के लिए घी का सेवन भी बहुत कारगर सिद्ध हो सकता है. यह नशे को बहुत हद्द तक कम कर सकती है. 

3. भांग का नशे उतारने के लिए भुने हुए चने या नारंगी का सेवन भी कर सकते है.

4. नारियल पानी भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह आपके बॉडी में मीनरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बढ़ाता है जिससे भांग का प्रभाव जल्दी कम हो जाता है और नशा उतर जाता है.

5. यदि आप भांग के नशे से बेहोश हो गए तो सरसों के तेल को थोड़ा गुनगुना कर, कान में डालने से बेहोशी दूर हो जाती है और व्यक्ति होश में आ जाता है.

6. अदरक भी भांग का नशा उतारने में सहायक हो सकती है.

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भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

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भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

वैसे तो भांग एक औषधि है, लेकिन इसका गलत उपयोग काफी बढ़ी मात्रा में किया जाता रहा है. ऐसे लोगों की संख्या काफी बड़ी है जो भांग का सेवन ज्यादा मात्रा में नशा करने के लिए करते है. जिसके चलते उन्हें ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ता है. जबकि भारत के परिपेक्ष की बात करें, तो भांग का उपयोग होली के त्यौहार पर अधिक मात्रा में होता है. 

जहाँ लोग भांग के पकौड़े और भांग की ठंडाई आदि बनाते है और इनका सेवन करने वाले लोगों को पता नही होता है कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है या भांग पीने के साइड इफेक्ट क्या होते है. लेकिन इस लेख में हम आपको बताएंगे भांग का नशा कितने दिन तक रहता है, तो आपको बता दें कि किसी भी नशे को उतारने के लिए नींबू का उपयोग सबसे बेहतर बताया गया है. 

नींबू का इस्तेमाल - इसके लिए आप नशे में लिप्त व्यक्ति को नींबू का रस चटा सकते है. इससे भांग का नशा थोड़ा कम हो जाता है.

दही का उपयोग - अगर आप भांग का नशा उतारना चाहते है, तो इसके लिए जरूरी है दही का उपयोग, लेकिन याद रहें कि भांग के नशे से ग्रसित व्यक्ति को किसी भी प्रकार के पेय में मीठा मिलाकर न दें क्योंकि किसी भी मीठी चीज़ का उपयोग करने पर भांग का नशा ज्यादा चढ़ जाता है.

इन सभी के अलावा भांग पीने के साइड इफेक्ट की बात करें तो इससें -

  • किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है. 
  • प्रेगनेंट महिलाओं की बात करें, तो उनके भूण पर बूरा असर पड़ता है.
  • बातें भूल जाना, ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट के कारण होता है.
  • इसके अलावा आँखों के लिए भी भांग को अच्छा नही माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद यौगिक आँख के अलावा कान और पेट की समस्या भी पैदा करते है.
  • कुछ लोगों में देखा गया है कि भांग पीने के बाद उन्हें चिंता, मतिभ्रम, भय और भ्रम आदि का सामना करना पड़ सकता है.
  • अगर छात्रों द्वारा इसका प्रयोग किया जाता है तो उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी हो सकती है.
  • इन सभी के अलावा उल्टी, घबराहट, अधिक खाने की इच्छा या भूख न लगना, क्रोध बढ़ना, चिड़चिड़ापन आदि भांग पीने के साइड इफेक्ट है.
  • इन सभी के अलावा दिन में सपने देखना भांग पीने के साइड इफेक्ट में से एक है.

आम परिपेक्ष में देखा जाए तो होली के समय में लोग भांग के नशे में कई न की जाने वाली चीज़े भी करते है. जिसमें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार न करना शामिल है. अगर बात करें, कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है तो यह आपके द्वारा ली गई भांग के सेवन पर करती है. इसके अधिक सेवन से शरीर में खून का दौरा तेज़ हो जाता है. जिसके चलते लोगों का उनके नर्वस सिस्टम पर कंट्रोल नही रहता है, जिसके चलते व्यक्ति या तो हंसता रहता है या वह रोने लगता है. काफी लोग मौज़ मस्ती के लिए भी ऐसे काम करते है.

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Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

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Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

होली को रंगों का त्यौहार माना जाता है, इस पर्व के दौरान लोग रंग और गुलाल के साथ तो खेलते ही है साथ में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ़ उठाते है. इन सब के बीच एक और ऐसी चीज है जिसके बिना होली का मजा अधुरा रह जाता है. यदि आपके मन में भांग और ठंडाई का नाम आया है तो बिल्कुल सही सोच रहे हैं. हम भांग की ही बात कर रहे हैं. होली का मौका हो और भांग और ठंडाई न पी जाए, तो यह बात हजम नहीं होती है.

भारत के उत्तर प्रांत के राज्यों में होली के दिन भांग पीने की बहुत पुरानी प्रथा है. भांग पीने के कई भांग के बिना होली भले ही अधुरा रह जाता हो, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी की बात तब हो सकती है जब भांग के प्रभाव ज्यादा हो जाता है और आपके रोज के दिनचर्या और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होता है. इसलिए भांग का सेवन करें लेकिन इसका भी ख्याल रखें की भांग का नशा आपके दिनचर्या को प्रभावित ना करें.

हालाँकि, भांग में कई तरह के औषधीय गुण भी होते है जो आपको कई गंभीर बिमारियों में इलाज के रूप में उपयोग किया जाता है. भांग के प्रभाव से होने वाले फायदों में निम्न बीमारियां शामिल है:-

  1. ग्लूकोमा- भांग के सेवन से ग्लूकोमा के लक्षण ठीक होते है.
  2. कैंसर- भांग का उपयोग कई कैंसर को ठीक करने के लिए दवाओं में उपयोग किया जाता है. भांग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है.
  3. कान की समस्या- भांग के 8 से 10 बूँद रस को कान में डालने से कान की समस्या ठीक हो जाती है.
  4. अस्थमा- भांग को जला कर उसके धुंए को सूंघने से अस्थमा की समस्या से लाभ मिलता है.

ऐसे कई लोग हैं जिनको भांग हज़म नहीं होती, वे कई दिनों तक भांग के हैंगओवर से उबर नहीं पाते हैं. यह स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो सकती है की आपको हस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है. आमतौर पर भांग खाने पर नर्वस सिस्टम का नियंत्रण नहीं रहता है इसलिए लोग अपने किसी भी एक्टिविटी को कंट्रोल नहीं कर पाते. जब आपको भांग का हैंगओवर होता है तो आपको कई तरह के लक्षण अनुभव होंगे. जिसमे निम्नलिखित शामिल है:-

  1. असामान्य रूप से हंसना
  2. अचानक रोने लग जाना 
  3. बहुत ज्यादा नींद आना
  4. अत्यधिक भूख लगना
  5. बहुत अधिक भांग खाने से याद रखने में असमर्थता 
  6. भांग खाने के दौरान कई लोग आँख खोल कर सोते है, जो बहुत ही गंभीर स्थिति होती है.

भांग का नशा उतारने के उपाय में सबसे बेहतर घरेलू नुस्खे को अपनाना है. इसके लिए आप खटाई, दही, नींबू छाछ, या फिर इमली का इस्तेमाल कर सकते है. भांग का हैंगओवर आपके बॉडी में कमजोरी, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है.  इन समस्याओं से निजात पाने के घरेलू उपाय के साथ आयुर्वेदिक उपाय सबसे बेहतर तरीका है. 

भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके-

  1. भांग हैंगओवर लक्षण दिखने और नशा हो जाने पर उतारने के तरीके में  250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक घी का सेवन करें. यह उपाय बहुत फायदेमंद साबित होते है.
  2. भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके लिए खटाई का सेवन भी एक कारगर तरीका है. इसके साथ आप कोई भी खट्टा पदार्थ जैसे निम्बू, दही, इमली का पानी भी ले सकते है.
  3. अगर कोई भांग हैंगओवर उतारने के लिए बेसुध पड़े व्यक्ति के कान में सरसों का तेल हल्का गुनगुना कर ले. एक दो बूँद तेल प्रभावित व्यक्ति के कान में डालें.
  4. सफेद मक्खन भी भांग का हैंगओवर उतारने के उपायों में काफी फायदेमंद साबित होता है. 
  5. भांग का सेवन किसे नहीं करना चाहिए 

बच्चों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए, यह उनके एकग्रता में कमी ला सकता है.

  1. जो लोग रोजाना काम पर जाते हैं उनके लिए भी भांग फायदेमंद नहीं है, क्योंकि यह उनके दिनचर्या के काम को प्रभावित कर सकता है. वह अपने काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं.
  2. गर्भवती महिलायों को भी भांग के सेवन से परहेज करना चाहिए, यह गर्भपात जैसी परिस्थिति का भी कारन बन सकती है.
  3. ऐसे लोग जो मानसिक समस्या से पीड़ित है, वे भी भांग के सेवन से दूर रहें. भांग के प्रभाव उनके लिए भी नुकसानदायक सिद्ध हो सकते है.
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