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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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अंडा खाने के फायदे - Anda Khane Ke Fayde!

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अंडा खाने के फायदे - Anda Khane Ke Fayde!

अंडा स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व आपके शरीर को कई तरह से फायदे होते हैं. अंडे सम्पूर्ण प्रोटीन की मौजूदगी वाले कुछ खाद्य पदार्थों में से एक है. अंडा में शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड उचित अनुपात में मौजूद रहता है. अंडे, विटामिन ए, विटामिन बी 12, विटामिन डी, विटामिन ई और फोलेट, सेलेनियम, कोलिन और कई अन्य खनिजों से भी भरपूर हैं.
इस लेख के माध्यम से हम अंडा खाने के फ़ायदों पर एक नजर डालेंगे.

1. मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने में-
ओमेगा -3 फैटी एसिड, विटामिन बी 12 और डी, और कोलिन से भरपूर होने की वजह से, अंडा मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए एक उत्कृष्ट आहार है. यह आपकी मेमोरी और संज्ञानात्मक शक्ति को भी सुधारता है. मस्तिष्क की उपयुक्त कार्यशीलता के लिए विटामिन बी 12 आवश्यक होता है. इस पोषक तत्व की कमी से मस्तिष्क में संकुचन हो सकता है, जो अल्जाइमर रोग और मनोभ्रंश का एक प्रमुख कारक है. ओमेगा -3 फैटी एसिड भी, मस्तिष्क की मात्रा में वृद्धि करने में मदद करते हैं. विटामिन डी भी मस्तिष्क के कार्य में सुधार लाता है.

2.वजन को संतुलित रखने में-
अंडे ऊर्जा प्रदान करने के अतिरिक्त, आपके पेट को भरा हुआ महसूस कराते हैं जिससे आप अत्यधिक भोजन खाने से बच जाते हैं. यह आपके रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि नहीं करते हैं और अंडे में मौजूद प्रोटीन आपको निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है. अंडे में विशिष्ट प्रोटीन हैं जो कि अन्य प्रकार के प्रोटीन की तुलना में भूख को दबाने में बेहतर मदद करते हैं. इस प्रकार, अंडे आपको पूरे दिन कैलोरी का सेवन सीमित करने में मदद कर सकते हैं.

3. मूड सही करने में लाभदायक-
अंडे, विटामिन बी 12 में समृद्ध होने के कारण, आपके मूड को सुधारने और खासतौर पर तनाव को दूर रखने में मदद कर सकते हैं. इनमें विटामिन बी 6 और फोलेट जैसे अन्य विटामिन बी भी शामिल हैं जो मानसिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा, अंडे का पीला भाग, लेसितिण का एक अच्छा स्रोत है, जो मूड स्टेबलाइज़र के रूप में काम करता है.

4. मांसपेशियों के निर्माण हेतु-
अंडे मांसपेशियों के निर्माण के लिए एक उत्कृष्ट भोजन माने जाते हैं. अंडे प्रोटीन में बहुत उच्च होते हैं. अंडे के सफेद भाग में एल्ब्यूमिन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो आपके शरीर में अधिक प्रोटीन अवशोषण को प्रोत्साहित करता है और मांसपेशियों की वृद्धि को सुविधाजनक बनाता है. बेहतर मांसपेशियों के निर्माण के लिए कच्चे या हल्के पके हुए अंडे खाने के सेवन को वर्जित करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि इसमें साल्मोनेला बैक्टीरिया के उपस्थिति के कारण, यह भोजन को विषैला बना सकता है.

5. कैंसर का जोखिम घटाए-
अंडे में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कैंसर के विकास को रोकने और हृदय रोग के जोखिम को कम करते हैं. विशेष रूप से, अंडे के पीले भाग में दो अमीनो एसिड-ट्रिप्टोफैन और टाइरोसिन होते हैं, जो कि एंटीऑक्सीडेंट गुण से भरपूर होते हैं. हालांकि, अंडे को उबालने या फ्राई करने से इसके इस गुण का प्रभाव कम हो जाता है. अंडे में निहित कॉलिन सामान्य कोशिका के कार्यशीलता के लिए आवश्यक होता है, जो कोशिकाओं की गतिविधियों को प्रोत्साहित कर उन्हें कैंसर का शिकार बनने से बचाता है.

6. बालों के लिए उपयोगी-
बाल और नाखून प्रोटीन से बने होते हैं इसलिए अंडे में उच्च प्रोटीन सामग्री उन्हें स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है. अपने बाल तेजी से बढ़ाने के लिए, आप अंडे से बना हुआ हेयर-मास्क भी लगा सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप एक कच्चे अंडे में जैतून के तेल का एक स्पून मिलाकर अपने बाल पर लगा सकते हैं और इसे एक स्नान टोपी के साथ कवर कर सकते हैं. 30 मिनट के बाद, नरम, रेशमी और स्वस्थ बालों के लिए बाल मास्क को शैम्पू की मदद से धो लें.

7. मुंहासे दूर करने के लिए-
आपकी त्वचा से अतिरिक्त तेल को अवशोषित करने, त्वचा को कसने, छिद्रों को हटाने, मुँहासे और मुँहासे के निशान को फीका करने के लिए और ब्लेमिशेस भरने के लिए अंडे के सफेद भाग का इस्तेमाल किया जा सकता है. आप एक अंडा का सफेद भाग अपने चेहरे पर लगा सकते हैं और टिशू पेपर के टुकड़ों से उसे कवर कर सकते हैं. इसे लगभग 10 से 20 मिनट तक लगाकर छोड़ दें. फिर टिशू पेपर निकालें और शेष पदार्थ को गुनगुने पानी से धो लें.

8. आँखों की सुरक्षा-
अंडा आँखों के स्वास्थ्य के लिए भी जाना जाता है. इसमें ल्यूटिन और ज़ेक्सैथिन पाए जाते हैं जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. इसके अलावा, यह मोतियाबिंद के खतरे को भी कम करता है.

9. गर्भावस्था में लाभकारी-
गर्भवती महिलाओं के लिए अंडा एक स्वस्थ्य आहार माना जाता है. यह गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण प्रदान करता है और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है. यह बच्चे के मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है और किसी प्रकार के स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करता है. अंडे में पाए जाने वाला कोलिन भ्रूण के मस्तिष्क विकास में गुणकारी होता है. हालांकि, कच्चे और अधपके अंडे के सेवन से परहेज करना चाहिए.

10. हड्डियों को बनाए मजबूत-
अंडा में उच्च मात्रा में फास्फोरस, विटामिन डी और कैल्शियम शामिल होते हैं, ये आपके हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. अंडा हड्डियों की वृद्धि को तो प्रोत्साहित करता ही है परन्तु साथ ही में हड्डियों को बुढापे के जड़कन में आने से भी बचाता है. फास्फोरस भी मजबूत हड्डियों को बढ़ावा देने के लिए कैल्शियम के साथ काम करता है और उचित अस्थि घनत्व के लिए आवश्यक है.
 

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अखरोट खाने का तरीका - Akhrot Khaane Ke Tarika!

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अखरोट खाने का तरीका - Akhrot Khaane Ke Tarika!

अखरोट की अद्भुत पौष्टिकता से हम सभी वाकिफ हैं. इसकी खाल ऊपर से जीतनी मजबूत और सख्त होती है उतनी ही सख्ती से ये हमारे स्वास्थ्य का भी ध्यान रखता है. ऊपर से भले ही ये सख्त है लेकिन अंदर से बेहद नर्म और स्वादिष्ट होता है. अखरोट हमें अनेक गंभीर बीमारियों से बचाने के साथ ही और भी कई लाभ देता है. कई एसे खाद्य पदार्थ हैं जो स्वाद में कड़वे और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होते हैं. लेकिन अखरोट स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के दृष्टिकोण से फायदेमंद है. हम इसे जितना आनंद लेकर खा सकते हैं उतना ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. आइए अखरोट के फायदे और नुकसान को विस्तारपूर्वक समझते हैं. अगर आप ताक़त बढाने के लिए अखरोट का ऐसे ही सेवन कर लेते हैं और आपको कोई ज्यादा फायदा भी नहीं हो रहा हैं तो आज हम आपको बता रहें हैं के कैसे करे अखरोट का सही प्रकार से सेवन जिस से मर्दाना ताक़त और वीर्यवृद्धि होकर शरीर कांतिमय हो जाए.
आइए इस लेख में हम अखरोट खाने के तरीके और इससे होने वाले फ़ायदों को जानें.

अखरोट खाने का सही तरीका-

1. 15 ग्राम अखरोट एक गिलास दूध में डालकर उबालना शुरू कीजिये. उबलने के बाद पीसी हुयी मिश्री मिला लीजिये. ध्यान रहे के चीनी जो आजकल बाज़ार में आती है वो नहीं डालनी, मिश्री को पीस लीजिये, वो डालनी है. अभी इसमें 2-4 केसर की पत्तियां डाल लीजिये. इसको अच्छे से उबलने दीजिये. अभी इस मिश्रण को सुहाता सुहाता गर्म गर्म पियें.

2. अत्यंत मर्दानाशक्तिवर्धक
अभी जानिये अखरोट का एक ऐसा प्रयोग जिस से जवान तो जवान बूढ़े भी जवानी का अनुभव करेंगे. 8 अखरोट की गिरियाँ, 4 बादाम की गिरियाँ, 10 मुनक्का (बीज निकाल कर) ये तीनो एक साथ खा कर ऊपर से गर्म गर्म दूध मिश्री मिला हुआ पीजिये. ये जवानों और बूढों में भी अत्यंत शक्ति भर देगा.
त्वचा के लिए
अखरोट के नियमित सेवन से हमारी त्वचा जवान और चमकादार बनती है. यही नहीं इससे त्वचा मुलायम होने के साथ ही दाग, धब्बे और झुर्रियों को भी हटाता है. इससे त्वचा में निखार आती है और त्वचा दमक उठती है.

3. गर्भावस्था में
गर्भावस्था के दौरान यदि महिलाएं अखरोट का सेवन करें तो इसके फायदे उन्हें गर्भाशय की मजबूती के रूप में दिखेंगे. इसके अलावा ये उनके बच्चे को पोषित कर उन्हें तंदुरुस्त बनाने के साथ ही यह बच्चे के दिमागी विकास के लिए भी अत्यंत फायदेमंद है.
बालों के लिए
बालों की मज़बूती और उन्हें झड़ने से बचाने के लिए अखरोट काफी फायदेमंद साबित होता है. इसके सेवन से बालों के लम्बाई बढ़ने के साथ-साथ उन्हें उचित पोषण भी मिलता है. इसलिए अच्छे और मजबूत बालों के लिए आप अखरोट खाएं.

4. वज़न कम करने में-
ये एक आम धारणा है कि अखरोट में बहुत फैट होता होगा इसलिए इसके सेवन से वजन बढ़ सकता है लेकिन ये सही नहीं है. बल्कि अखरोट वजन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें प्रोटीन, फैट्स व कैलोरीज़ की संतुलित मात्रा पाई जाती है.

5. हड्डियों के लिए
अखरोट का सेवन हड्डियों को स्वस्थ और मज़बूत रखने का एक बेहतरीन तरीका है. अखरोट खाने से हड्डियाँ खनिजों का अवशोषण अच्छे से कर पाती है और मूत्र के माध्यम से कैल्शियम की बर्बादी भी कम होती है. यह हड्डियों में सूजन व प्रज्वलन को भी कम करता है और हड्डियों से संबंधित बीमारियों को काफी हद तक कम करने का काम करता है.

6. हृदय रोग में
हमारे हृदय को तंदुरुस्त और निरोग रखने में भी अखरोट की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसके सेवन से हृदय के कृत्य का संचालन और नियमन होने के साथ उसमें सुधार भी आता है. अखरोट स्वस्थ रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने और दिल से संबंधित रोगों को दूर रखने में भी मददगार है. शुगर के उपचार में भी अखरोट की महत्वपूर्ण भूमिका है.

7. शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ाने में
अखरोट के नियमित सेवन से शुक्राणु की गुणवत्ता, गतिशीलता व आयतन में वृद्धि होती है. इसके अलावा अखरोट पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य में भी काफी सुधार लाने का काम करता है. यानि आप खुद को तंदुरुस्त बनाने के लिए भी इसे खा सकते हैं.

8. दिमाग तेज करने
मस्तिष्क की तीव्रता और इसके कार्यों में बेहतरी के लिए भी अखरोट का सेवन बेहतर विकल्प है. इसके अलावा अखरोट मस्तिष्क के स्मरणशक्ति एवं एकाग्रता को बेहतर बनाता है. वृद्धावस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखि जाती है.

9. अनिद्रा में
यदि आप अनिद्रा जैसी समस्याओं से दो चार हो रहे हैं तो भी आपके लिए अखरोट का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है. दरअसल इसके सेवन से अनिद्रा के लिए जिम्मेदार मेलेटोनिन नामक हॉरमोन नियमित रूप से काम करता है.

10. कैंसर के उपचार में
कैंसर जैसी गंभीर बिमारी को भी आपसे दूर करने में अखरोट की शक्ति काम आती है. इसके नियमित सेवन से आप ब्रेस्ट कैंसर, कोलोन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर दरअसल अखरोट में कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता है.

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प्रेगनेंसी कितने दिन में पता चलता है - Pregnancy Kitne Din Mein Pata Chalta Hai?

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प्रेगनेंसी कितने दिन में पता चलता है - Pregnancy Kitne Din Mein Pata Chalta Hai?

अक्सर लोग प्रेगनेंसी की जांच ये पता लगाने के लिए करते हैं कि कितने दिनों में प्रेगनेंसी का पता चलेगा. हालांकि कई बार दूसरे कारणों के होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि प्रेगनेंसी को आसानी से जांचा जा सकता है. इसे जांचने के कई उपाय उपलब्ध हैं. यहाँ तक की बाजार में कई तरह के प्रेगनेंसी कीट भी उपलब्ध हैं जो कि आसानी से आपको इसकी जानकारी दे सकते हैं.

आइए इस लेख के माध्यम से हम ये जानें कि प्रेगनेंसी का पता कितने दिनों में और किन किन तरीकों से लगा सकते हैं.
1. पेशाब से करें पता -
ये भी एक बेहद आसन तरीका है. इसमें आपको एक छोटी सी कटोरी या डिबिया लेनी है. इसक कटोरी या डिबिया में आपको अपना मूत्र भरकर 3-4 घंटों के लिए छोड़ देना है. ध्यान रहे डिबिया को हिलाना-डुलाना बिलकुल नहीं है. इसके बाद यदि पेशाब की सतह पर सफ़ेद रंग की एक पतली सतह बनती है तो समझिए कि आप गर्भ से हैं. लेकिन यदि पेशाब की सतह पर कोई परत नहीं है तो सझिए कि आप प्रेगनेंट नहीं हैं.

2. गेहूं और जौ-
यह एक परम्परागत तरीका है. इसमें प्रेगनेंसी जांचने के लिए आपको जौ और गेहूं का इस्तेमाल करना पड़ता है. कहा जाता है कि मुट्ठी भर जौ और गेहूं के दाने लेकर उनपर पेशाब करना होता है. उनपर पेशाब करने से यदि वो अंकुरित हो जाते हैं तो समझिए कि आप गर्भवती हैं. लेकिन यदि दोनों में से कोई भी अंकुरित नहीं होता है तो समझिए कि आप प्रेग्नेंट नहीं हैं.

3. सफ़ेद सिरका-
सफ़ेद सिरके की सहायता से भी आप अपनी प्रेगनेंसी की जांच कर सकती हैं. जाहिर है ये भी एक आसान तरीका है. इसमें आपको एक कटोरी में आधा कप सफेद सिरका लेना है और इसमें आधा कप सुबह का सफ़ेद मूत्र डालना है. इसके बाद इसका निरिक्षण करना है. इसमें देखना ये है कि इसका रंग बदलता है या नहीं. यदि रंग बदल जाता है तो आप प्रेग्नेंट हैं लेकिन यदि नहीं बदलता है तो इसका मतलब है कि आप गर्भ से नहीं हैं.

4. सरसों से जांचें, प्रेग्नेंट हैं कि नहीं-
आसानी से सबके घरों में उपलब्ध सरसों को पीरियड्स शुरू करने का एक कारगर नुस्खा माना जाता है. इसके लिए आपको करना बस इतना है कि एक टब में दो कप सरसों के बीज का पाउडर मिला लीजिए. फिर इस टब में कुछ देर तक अपना गर्दन डूबा कर रखिए. ध्यान रहे कि बर्दाश्त करने भर ही. इसके बाद गर्म पानी से स्नान कर लीजिए. ऐसा करने के एक या दो दिन में पीरियड्स फिर से शुरू हो जाए तो समझिए कि आप प्रेग्नेंट नहीं हैं और यदि दो हफ्ते तक भी पीरियड्स शुरू नहीं हुए तो समझिए कि आप गर्भ से हैं.

5.चीनी से भी कर सकते हैं जांच-
जाहिर है कि चीनी भी बहुत आसानी से सबके घरों में उपलब्ध है. चीनी की सहायता से प्रेगनेंसी जांचने के लिए सुबह का पहला मूत्र तीन चम्मच लें और फिर इसे कटोरी में रखी एक चम्मच चीनी पर डालें. फिर कुछ देर तक इसका निरीक्षण करें. यदि चीनी कुछ समय बाद घुल जाती है तो आप प्रेग्नेंट नहीं हैं लेकिन जब नहीं घुले तो समझ जाइए कि आप गर्भवती हैं. इसके पीछे का लॉजिक ये है कि प्रेग्नेंट होने पर जो हार्मोन निकलता है वो वो चीनी को घुलने से रोकता है.

6. टूथपेस्ट भी आता है काम-
रोजाना इस्तेमाल होने वाला टूथपेस्ट भी आपके गर्भ की जांच कर सकता है. लेकिन इसमें एक बात का जरुर ध्यान रखना है कि टूथपेस्ट का रंग सफेद हो. यानी कि कोलगेट या पेप्सोडेंट जैसा. क्लोजप या मैक्स फ्रेश जेल नहीं चलेगा. आपको इस टूथपेस्ट को एक डिब्बी में डालना है और उसमें थोड़ी सी अपने पेशाब डालें. इसके कुछ घंटे बाद इसे देखें कि इसका रंग बदलता है या इसमें झाग बनता है या नहीं? यदि इसका जवाब हाँ में है तो आप गर्भवती हैं और यदि नहीं में है तो आप गर्भवती नहीं हैं.

7. ब्लीच से जांच-
ब्लीचिंग पाउडर के प्रयोग से भी प्रेगनेंसी को जांचा जा सकता है. इसके लिए आपको सुबह का अपना पहला मूत्र एक कटोरी में लेना है. इसके बाद इसमें थोड़ा सा ब्लीचिंग पाउडर मिलाना है. फिर इसका निरिक्षण कीजिए. यदि इसमें से बुलबुले उठते हैं या झाग बनती है तो समझिए कि आप प्रेग्नेंट हैं लेकिन यदि ऐसा कुछ नहीं होता है तो आप प्रेग्नेंट नहीं हैं.

8. गुप्तांग का रंग देखकर-
प्रेगनेंसी को जांचने का एक और भी आसान तरीका है. इसके अनुसार आपको अपने गुप्तांग का रंग देखना है. यदि आपके गुप्तांग का रंग गहरा नीला या बैंगनी लाल है तो इसका मतलब ये हुआ कि आप गर्भवती हैं. इसका कारण ये है कि गर्भ के दौरान खून का दौरा तेज हो जाता है. लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो चिंता करने की कोई बात नहीं है.

9. प्रेगनेंसी किट-
हलांकि सबसे बेहतर उपाय यही है कि आप बाजार से प्रेगनेंसी किट ले आएं और उसकी सहायता से ही जांच करें. इसकी कीमत भी कोई बहुत ज्यादा नहीं होती है. इसका परिणाम सबसे ज्यादा विश्वसनीय है.

मैगी के नुकसान - Maggi Ke Nuksaan!

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मैगी के नुकसान - Maggi Ke Nuksaan!

2 मिनट में खाने योग्य बनने वाला मैगी (Maggi) नूडल्स के कई सारे नुकसान भी हैं. जी हाँ, नेस्ले इंडिया कंपनी द्वारा Maggi नाम से बेचे जाने वाले नूडल्स अपने स्वाद के कारण व जल्द (सिर्फ 2 मिनट में) खाने लायक बन जाने के कारण भारत के बाजार में बहुत ही तेजी से फैला. लोग बहुत ही चाव से इसे खाते हैं. आज लगभग हरेक किचन में इसका प्रयोग होता है. भूख लगी है पर खाने के लिए कुछ नहीं है या खाना बनाने के लिए समय नहीं है तो क्या हुआ - मैगी है न, बस 2 मिनट में तैयार हो जाएगा. और इस प्रकार 2 मिनट में मैगी तैयार करके लोग खूब खा रहे हैं. पर हमें जानना चाहिए कि यह मैगी बनाने में जितना आसान है व खाने में जितना अच्छा लगता है, उसके विपरीत यह हमारे शरीर व स्वास्थ्य के लिए उतना ही नुकसानदेह भी है. जी हाँ, अधिक मात्रा में मैगी खाने से किडनी की समस्या व कैंसर होने की संभावना बढ़ने के अलावा यह हमारे शरीर व स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं.

आइये हम मैगी के नुकसान पर चर्चा करते हैं.

मैगी के नुकसान-

1. ट्रांस फैट के कारण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह: - मैगी पहले से फ्राई की हुयी रहती है इसीलिए इसे खाने के लिए पकाने में केवल 2 मिनट का समय लगता है. मैगी में ट्रांस फैट का इस्तेमाल होता है. जबकि ट्रांस फैट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. स्वास्थ्य के दृष्टि से ट्रांस फैट से दूर रहने की ही सलाह दी जाती है. ट्रांस फैट के कई नुकसान हैं पर इसके फायदा एक भी नहीं है. इस स्थिति में जब मैगी बनाने में ट्रांस फैट का इस्तेमाल किया जाता है तो यह सेहत के लिए फायदेमंद के जगह नुकसानदेह ही है.

2. कई प्रकार के स्वास्थ्य समस्या: - मैगी में खतरनाक केमिकल मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) रहता है, जिसे आमतौर पर लीड या सीसा कहते हैं. यह एमएसजी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही नुकसानदेह है. एमएसजी की मात्रा हमारे शरीर में बढ़ने से यह कई तरह से हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे शरीर में आए एमएसजी या सीसा फिर शरीर से बाहर नहीं हो पाते हैं. जिस कारण से मैगी अधिक खाने से शरीर में एमएसजी जमा होते रहते हैं और यह हमारे स्वास्थ्य व शरीर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं.

3. शरीर में एमएसजी या सीसा इकट्ठा होकर हमारे शरीर पर दीर्घकालिक विपरीत प्रभाव डालता है जैसे – यह पाचन क्रिया पर बुरा असर डालता है. यह दिमाग, किडनी व प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करता है. एमएसजी व लीड के ज्यादा मात्रा होने से कैंसर भी हो सकता है. इस प्रकार मैगी का अधिक

प्रयोग से कैंसर का खतरा बढ़ता है.

  • ज्यादा मात्रा में मैगी खाने से कई तरह के स्वास्थ्य समस्याएँ होने की संभावना रहती है. ज्यादा मैगी खाने से खून की कमी, जोड़ों की समस्या हो सकती है. मैगी खाने से हमारी याददाश्त पर भी असर पड़ता है व याददाश्त कमजोर होता है. मैगी खाने से किडनी व लीवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है व मैगी के सेवन से न सुनने की समस्या भी हो सकती है. मैगी के सेवन से सिर दर्द की समस्या व भूख न लगने की समस्या भी होती है. मैगी खाने से मोटापा भी बढ़ती है.
  • मैगी खाने से पाचन तंत्र पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है. यह खाना सही तरीका से पचने नहीं देता है, जिससे पेट में दर्द होता है. गर्भवती महिलाओं के लिए मैगी बहुत ही नुकसानदायक होता है. इसमें पाये जाने वाले लीड की थोड़ी सी अधिक मात्रा गर्भ में पल रहे शिशु के आईक्यू पर असर डालता है.
  • खाली पेट मैगी खाने से गैस बनता है. मैगी के सेवन से भूख नहीं लगती है. मैगी के सेवन से सुनने की समस्या व जोड़ों में दर्द भी हो सकती है. मैदा से बने होने के कारण मैगी का अधिक सेवन से यह आंत में चिपक जाती है जिससे कब्ज की समस्या व अन्य कई बीमारियाँ होने लगती है. कुल मिलाकर मैगी (Maggi) कई प्रकार से हमारे शरीर व स्वास्थ्य को नुकसान ही पहुंचाते हैं.
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ध्यान क्या है - Dhyan Kya Hai!

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ध्यान क्या है - Dhyan Kya Hai!

"ध्यान" को अंग्रेजी में "मैडिटेशन" कहते है. यह एक विश्राम की स्थिति होती है जिसमे व्यक्ति अपने आप को विश्राम की मुद्रा में लेकर जाता है और अपने दिमाग और मन को एकाग्रित करने की कोशिश करता है. ध्यान करने का अभ्यास सदियों से किया जा रहा है. प्राचीन काल में ऋषि मुनि कई सालों तक ध्यान में लगे होते थे. ध्यान आपको मानसिक रूप से शांति करने के अलावा शारीरिक रूप से भी स्वस्थ बनाता है. ध्यान एक क्रिया है जिसमें आप किसी भी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करते है. ऐसा करते समय अपनी आँखों को बंद करके दिमाग के बीचों बिच ध्यान लगाना होता है. यह शुरुआत में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन एक बार जब आप इसे नियमित रूप से करने लग जाएंगे तो यह आसान हो जाता है. ध्यान करने से आपका माइंड स्टेबल होता है और सकरात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

मेडिटेशन के फायदे -
1. तनाव- आजकल के भागदौड़ से भरी दुनिया में तनाव एक आम समस्या बन कर उभरी है. तनाव से निजात पाने के कई तरीकें है, लेकिन उन सभी तरीकों में ध्यान सबसे सरल और प्रभावी है. ध्यान आपके दिमाग में स्थिरता पैदा करती है. यह आपके शरीर में नहीं ऊर्जा का संचार करता है जो आपके तनाव को कम करता है। यह कामकाजी लोगों के लिए बहुत प्रभावशील होता है जो हर दिन कई तरह के तनाव का सामना करते है. इसलिए नियमित रूप से ध्यान करने से आपको तनाव से लड़ने में मदद मिलेगी।

2. स्वास्थ्य संबंधित फायदे- अगर आप किसी तरह की बीमारी जैसे हाई ब्लड प्रेशर या सांस की बिमारी से परेशान है तो फिर ध्यान लगाने का प्रयास करें। ध्यान आपके रकत प्रवाह को नियंत्रित करता है और आपको स्वस्थ्य रखता है. यह आपको सांस की समस्या से भी छुटकारा दिलाती है. तनाव से संबंधित सिरदर्द, सोने की परेशानी या शारीरिक दर्द से भी छुटकारा दिलाती है. इन सब के अलावा मानसिक और शारीरिक थकावट से भी राहत प्रदान करती है जिससे शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होता है.

3. भावनात्मक समस्या- यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से परेशान है या डिप्रेशन का सामना कर रहा है तो उसके लिए मेडिटेशन से बढ़ कर कोई उपाय नहीं है. यह आपको अपनी भावनाओं पर काबू रखने में मदद करता है जिससे आप खुद को काबू कर पाएंगे और भावनात्मक समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

4. एकाग्रता- एकाग्रता हर काम के लिए जरुरी है, आप चाहे पढाई करते हो या जॉब इसकी जरुरत हर जगह होती है. ऐसे में एकाग्रता बढ़ाने के लिए ध्यान एक सबसे सरल और प्रभावी तरीका है. यह विशेष कर छात्रों के लिए ज्यादा लाभकारी है, जब बच्चे एग्जाम को लेकर एंग्जायटी का सामना कर रहे है तो ऐसे में ध्यान करना फायदेमंद है.

ध्यान कैसे करें-
1. जब आप ध्यान करना शुरू करते है तो सबसे पहले एक शांत जगह पर जाएं, जहां कोई बाहरी शोर ना सुनाई दें। ध्यान करने के दौरान आपको शांति की आवश्यकता होती है, क्योंकि आपका दिमाग बाहरी शोर से विचलित हो सकता है.

2. ध्यान करने के लिए सही समय का चुनाव भी बहुत महत्वपूर्ण है. ज्यादातर ध्यान सुबह या शाम के समय किया जाता है. अगर आप सुबह या शाम के समय फ्री नहीः है तो आप किसी भी समय कर सकते है.

3. आपको अपने बैठने की मुद्रा भी निर्धारित करना चाहिए। ध्यान करने के लिए एक सही मुद्रा में बैठना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि इस वक़्त आपका शरीर आराम की मुद्रा में होता है.
 

ब्रेन स्ट्रोक का उपचार - Brain Stroke Ka Upchaar!

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ब्रेन स्ट्रोक का उपचार - Brain Stroke Ka Upchaar!

दुनिया में हर 6 आदमी में 1 ब्रेन स्ट्रोक का सामना करता है. हमारे शरीर में मस्तिष्क कोशिकाओं को ब्लड आपूर्ति करने के लिए रक्त कोशिकाएं लगातार मस्तिष्क को ब्लड पहुंचाती है. जब मस्तिष्क में ब्लड की आपूर्ति अवरुद्ध हो जाती है तो मस्तिष्क में कोशिकाएं मरने लग जाती है और परिणामस्वरूप मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जो अंत में ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन जाता हैं. इस स्थिति में ब्रेन के कुछ हिस्से डैमेज हो जाते है या काम करना बंद कर देती है. इसके अलावा मस्तिष्क में ब्लड क्लॉटिंग या ब्लीडिंग के कारण भी ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

इस लेख में हम ब्रेन स्ट्रोक का उपचार करने के कुछ उपाय जानें.

 1. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करना
अपने स्ट्रोक जोखिम को कम करने के लिए रक्तचाप को नियंत्रित करना आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है. यदि आपको स्ट्रोक था, तो अपने रक्तचाप को कम करके क्षणिक इस्कीमिक स्ट्रोक या गंभीर स्ट्रोक को रोकने में मदद मिल सकती है. तनाव का प्रबंधन करने से, सही खान पान व स्वस्थ वजन बनाए रखने से, व्यायाम करने से, और सोडियम और अल्कोहल या शराब की मात्रा को सीमित करने से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है. जीवनशैली में बदलाव के सलाह के अलावा, आपका डॉक्टर उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए दवाएं लिख सकता है.

2. आहार में कोलेस्ट्रॉल व संतृप्त वसा की मात्रा कम करके
अपने आहार में कोलेस्ट्रॉल व संतृप्त वसा की मात्रा कम करके आप स्ट्रोक से बचाव कर सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल और वसा, विशेष रूप से संतृप्त वसा और ट्रांस वसा, आपके धमनियों में फैटी जमावट (प्लाक) को बढाते हैं. यदि आप अपने कोलेस्ट्रोल को और वसा के स्तर को आहार से नहीं नियंत्रित कर सकते तो आपका डॉक्टर दवाइयां लिख सकता है.

3. धूम्रपान न करके
तम्बाकू के प्रयोग से व धूम्रपान करने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. उनके लिए भी जो अप्रत्यक्ष रूप से हानिकारक धुएं को ले रहे हों. धूम्रपान न करें.

4. मधुमेह को नियंत्रित करके
मधुमेह पर नियंत्रण करें. आप आहार, व्यायाम, वजन नियंत्रण और दवा के साथ मधुमेह पर नियंत्रण पा सकते हैं. स्वस्थ वजन बनाए रखना ज़रूरी है. अधिक वजन वालों को अन्य स्ट्रोक के जोखिम का खतरा होता है, जैसे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह.

5.फलों और सब्जियों से समृद्ध आहार लेकर
फलों और सब्जियों से समृद्ध आहार को रोज़ खाने से स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है. उसके बाद भूमध्य आहार का सेवन करें जिसमे जैतून का तेल, फल, नट्स या फली, सब्जियां और साबुत अनाज होता है.

6. नियमित रूप से व्यायाम करके
नियमित रूप से व्यायाम करने से जैसे एरोबिक या "कार्डियो" व्यायाम कई तरह से स्ट्रोक का खतरा कम कर सकता है. व्यायाम आपके उच्च रक्तचाप को कम कर सकता है, उच्च-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है, और आपके रक्त वाहिकाओं और हृदय के समग्र स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है. यह आपको अपना वजन कम करने, मधुमेह को नियंत्रित करने और तनाव कम करने में भी मदद करता है. धीरे - धीरे 30 मिनट की गतिविधि तक व्यायाम करें - जैसे चलना, जॉगिंग, तैराकी या साइकिल चलाना, यदि रोज़ नहीं तो ज़्याद से ज़्यादा दिन करें.​

7. शराब कम पियेँ
ज़्यादा शराब पीने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है यदि आप पीते भी हैं तो इसे सीमा में पीएं यानी कम पीएं. ज़्यादा शराब पीने से उच्च रक्तचाप, इस्केमिक स्ट्रोक और रक्तस्रावी स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, कम शराब पीने से, जैसे कि एक दिन में एक पीना, आइकेमिक स्ट्रोक को रोकने में मदद कर सकता है और आपके रक्त की थक्के की प्रवृत्ति कम कर सकता है. शराब अन्य दवाइयों जो आप ले रहे हैं उनपे दुष्प्रभाव भी डाल सकता है.

8. प्रतिरोधी स्लीप एपनिया
प्रतिरोधी स्लीप एपनिया आपका डॉक्टर यह आपको है या नहीं इसके लिए आपकी जांच करेगा और पाए जाने पर तुरंत इसका इलाज करेगा.

9. अवैध नशीले पदार्थों से बचकर
अवैध नशीले पदार्थों से बचें जैसे कोकेन और मेथाम्फेटामाइन, क्यूंकि यह टीआईए या स्ट्रोक के निर्धारित जोखिम कारक हैं. कोकीन रक्त के प्रवाह को कम करता है और धमनियों को पतला कर सकता है.

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How Important Are Preventive Health Check-Ups?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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How Important Are Preventive Health Check-Ups?

Preventive health check-ups have become more indispensable to positive health in the 21st century than even a healthy diet and regular exercise. This is because a number of factors have cropped up and factored into human health maintenance, which is beyond people’s control. These factors include environmental pollution, faulty genes, and adulterated food products.

Therefore, to ensure that your health is really fine, and if not, to diagnose diseases as early as possible, regular health check-ups are something you should do without fault. These are the most important types:


1. A complete body check: You should get your body fully checked once every year. This acts as a blanket test for all your organs, including the visceral and the internal, from head to foot.

2. Thyroid examination: This helps clear up doubts related to an under or over-performing thyroid gland, or hormonal deficiencies. You should drop by for this test once after every five years.

3. Blood pressure: This has risks related to heart diseases and even fatal strokes, so you should get your levels checked every month.

4. Liver function: This comprises of a total of 11 tests that detect possible problems with your liver, and otherwise testifies to its healthy functioning. It mainly tests bilirubin, albumin, and serum globulin levels.

5. Kidney function: This comprehensively tests your kidney functioning through five extensive tests. This tests for calcium, urea nitrogen, and uric acid levels.

6. Lipid profile: This is a very important test for you in terms of your entire body. It checks for normalcy of triglyceride and cholesterol levels, that can get lethal if garbles.

7. Iron deficiency profile: This checks for iron functioning and deficiencies in your body, checking for important parameters like serum iron and its total binding capacity.

8. Diabetes profile: This is also a very essential test as diabetes paralyses millions of Indian lives across the country every year. This tests for blood glucose levels.

9. Complete blood count: This checks for all kinds of important blood cells you have in your body, which are essential for basic bodily functions like defence against infection, oxygen production and hemoglobin level maintenance in blood. It checks for red and white blood cells, platelets, and all their sub-branches.

10. Vitamin D total: This checks for deficiencies or otherwise normal levels of vitamin D in your body. Vitamin D is a very important element and its deficiency causes rickets.

11. Vitamin B12:  This checks for normalcy of vitamin B12 levels in your body. Vitamin B12 is also integral to your body’s healthy functioning. It helps in DNA production and in keeping your nerve and blood cells in good shape.

Preventive and regular health check-ups have become an integral need for good health in current times. If you are ready with the results of the 12 above, you can comfortably go to bed each night, feeling good about your body instead of pressurized.

आँख में बारूद पड़ने पर क्या करें - Aankh Main Baarud Padne Par Kya Karen!

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आँख में बारूद पड़ने पर क्या करें - Aankh Main Baarud Padne Par Kya Karen!

हमारे शरीर में आँखों का कार्य सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए आँखों की देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता हैं. वातावरण में फैले प्रदुषण के अलावा भी कई फैक्टर है जिससे आँखों को नुकसान पहुँचता है. यह विशेष रूप से दिपावली जैसे त्योहारों के दौरान होता है, जब आपको अपनी आँखों का अतिरिक्त ख्याल रखना पड़ता है. दिवाली की बात करें, तो इस दौरान हर जगह आतिशबाजी होने के साथ ही पटाखों का शोर सुनाई देता है. ऐसे में अपनी आखों को बचाना जरूरी हो जाता है. जिसके लिए सबसे जरूरी पटाखों से दूरी बनाना है. साथ ही इस समय अपने बच्चों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत होती हैं. बच्चे उत्साह में आकर कई बार पटाखों को समीप जाकर जलाते हैं, जिससे कई बार पटाखे हाथ में ही फूट जाते है और परिणामस्वरूप पटाखों में मौजूद बारूद आँखों में चला जाता है और आँखों को नुकसान पहुंचता है. इस तरह की दुर्घटनाओं से बचने के लिए लिए अपनी आँखों की देखभाल करना जरुरी हो जाता है. आज इस लेख में हम आपको बताएंगे आँख में बारूद जाने पर क्या करें, कुछ बातों का ख्याल रख कर ऐसी दुर्घटनाओं से बच सकते है.

कैसे रखें पटाखों से खुद को सुरक्षित

दिपावली रौशनी का त्यौहार है और जरुरी नहीं है कि आप पटाखें जलाकर ही इस पर्व का आनंद लें. आप यह कोशिश कर सकते है कि आप जितना कम हो सके उतने कम पटाखें जलाएं. अपने बच्चे को पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में समझाएं और उन्हें पटाखे न जलाने के लिए प्रोत्साहित करें. जिससे उनकी हेल्थ समग्र रहें. इसके लिए यहां कुछ निम्नलिखित कुछ सुझाव दिए गए है जो इस प्रकार हैं - प्रयाप्त

  • पटाखें छोड़ते समय प्रयाप्त दूरी बनाना सबसे जरुरी है. यदि आपके बच्चे पटाखे जला रहा है तो उन पर निगरानी रखें. पटाखों से निकलने वाला धुंआ आपकी आँखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है और साथ ही इनका हाथ में फूटने का डर भी बना रहता है.

  • कभी भी बंद या छोटी जगह पर पटाखे ना छोड़े. इससे आग पकड़ने का खतरा होता है. पटाखे छोड़ने के लिए आप कोई बड़ी जगह पर जा सकते है.

  • पटाखें छोड़ते समय प्रयाप्त सुरक्षा किट अपने पास रखें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना में त्वरित राहत मिल पाएं.

  • कभी भी पटाखे को दोबारा जलाने का प्रयास ना करें. यदि एक बार पटाखे नहीं जलते है तो फिर उस पटाखे को नष्ट कर दें या उस पर पानी डाल दें.

  • पटाखे जलाते समय हमेशा कॉटन कपडे पहने और सिल्क के कपड़ों को ना पहनें.

यदि पटाखें जलाते समय आँख में बारूद पड़ जाए तो आप कुछ घरेलु उपाय के अलावा गंभीर स्थिति में डॉक्टर के पास जाएँ. इसके पहले आप निम्न तरीकें को अपना सकते है.

  • आँखों में बारूद या चिंगारी पड़ने पर किसी कपड़े या हाथ से रगड़ने के बजाए निरंतर पानी से धोते रहें या अपने आँखों को पानी में डुबोए रखें.

  • आँखों को अच्छी तरह से पानी से धुलने के बाद एक साफ कपड़े को आँख पर रख दें.

  • यदि घर पर एंटीसेप्टिक क्रीम मौजूद है तो आप जलने की स्थिति पर क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

  • इसके बाद जितनी जल्दी हो सके, किसी नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें और चिकित्सीय सहायता प्राप्त करें.

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कान के पर्दे में छेद, लक्षण और कारण - Kaan Ke Parde Main Chhed, Lakshan Aur Kaaran!

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कान के पर्दे में छेद, लक्षण और कारण - Kaan Ke Parde Main Chhed, Lakshan Aur Kaaran!

मनुष्यों के कान में पर्दे को टिम्पेनिक झिल्ली कहा जाता है. यह इंसान के मध्य और बाहरी कान को अलग करता है. जबकि इस झिल्ली के फट जाने को कान में छेद होना कहा जाता है. कान में छेद होने का नुकसान यह होता है कि इससे ग्रसित व्यक्ति कुछ भी ठंग से नही सुन पाता है और उसके सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. वहीं अगर स्थिति गंभीर है तो इससे पीडित व्यक्ति की सुनने की क्षमता हमेशा के लिए जा सकती है. आज इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कान के पर्दे में छेद, लक्षण और कारण, जो इस प्रकार है -

कान के पर्दे में छेद के लक्षण

1.सुनाई न देना

बहुत से लोगों को कान में छेद होने के कारण सुनाई देने में समस्या का सामना करना पड़ता है. जिसकी वजह से चक्कर आना, सीटी बजना और साथ ही सिरदर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है.

2.मतली और उल्टी

कान के पर्दे में छेद होने वाले लोगों को मतली और उल्टी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे रोगियों को जी मिचलाना और उल्टी होने की समस्या से ग्रसित देखा जाता है.

3.कान से पस बहना

ऐसे लोगों को कान से पस निकलना आदि जैसी समस्याओं से ग्रसित देखा जाता है. जिस कारण इन्फेक्शन हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि रोगी अपने कानों को सूखा रखें, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम रहें.

4.खून निकलना

इंफेक्शन के कारण लोगों के कान खून बहना, दर्द होना, कान बजना आदि समस्या का सामना करना पड़ता है.

5.बहरापन

ऐसे लोगों की सुनने की क्षमता कम होने के कारण बहरापन हो जाता है. जिसके कारण वह जल्दी से कुछ नही सुन पाते है.

कान के पर्दे में छेद के कारण

1.चोट

कान के पर्दे में छेद के कई कारण हो सकते है, जिसमें से चोट एक है. चोट किसी भी कारण हो सकती है जैसे खेल के दौरान चोट लगना, कोई दुर्घटना हो जाने के कारण कान के पर्दे में छेद हो जाना या खेलने के दौरान कान में चोट लगना हो सकता है.

2.कान की सीमा से तेज़ सुनना

मनुष्य के कान में ध्वनि सुनने की एक क्षमता होती है. उस क्षमता से तेज़ ध्वनि सुनने से कान को काफी नुकसान पँहुचता है.  

3.खेलने के दौरान

बहुत बार देखा जाता है कि खेल कूद के दौरान सिर में चोट लग जाती है. जिसके कारण कान को क्षति हो सकती है. इसके अलावा स्कूबा डाइविंग जैसे खेलों के कारण भी यह हो सकता है. जिसके दौरान पानी में गहराई तक जाने पर कान पर ज्यादा दबाव पड़ता है और कान की समस्या पैदा हो सकती है. ऐसे में आप जब भी नहाने जाए या स्कूबा डाइविंग करें तो कान में रूई डालें. इससे कान के संक्रमण होने का खतरा कम रहता है.

4.कान में मैल का होना

अपने स्वास्थ को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि नियमित रूप से अपने कान का मैल साफ करें. जिससे किसी बी प्रकार का दबाव आपके कान के पर्दे पर न पड़े.

इन सभी के अलावा कान में पर्दे के छेद का पता लगाने के लिए टेस्ट करवाए जा सकते है. इसके लिए ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाया जा सकता है. जो आपके कुछ टेस्ट करें और पता लगाए कि आपके कान से रिसाव क्यों हो रहा है. इसके लिए वे आपको दवा आदि भी निर्धारित कर सकते है. अगर स्थिति गंभीर हो तो हो सकता है कि सर्जरी आदि की भी जरूरत हो. इसके अलावा कान के पर्दे में छेद के लक्षण और कारण के घरेलू उपचार की बात करें, तो आप गर्म सिकाई कर सकते है या पेन किलर आदि भी ले सकते है. इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का उपयोग न करें.

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कान का पर्दा फटना - Kaan Ka Parda Phatna!

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कान का पर्दा फटना - Kaan Ka Parda Phatna!

कान का पर्दे फटना या कान के पर्दे में छेद हो जाना, किसी भी पीड़ित के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति हो सकती है. इसका होना अचानक से बिजली गिर जाना हो सकता है. इसके हो जाने कान में बहुत तेज़ दर्द का अनुभव हो सकता है. जबकि कुछ मामलों में देखा गया हैं कि इससे पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरह के लक्षण का कोई अनुभव नहीं होता है. इसे साइंटिफिक भाषा में टिम्पेनिक मेम्ब्रेन कहा जाता है.

कान का पर्दा फट जाने से मिडल कान का इन्फेक्शन और सुनने में परेशानी हो सकती है. अगर स्थिति गंभीर हो तो हो सकता है कि सर्जरी आदि की ज़रूरत भी हो सकती है. इंसान के कान का पर्दा दो जरूरी भागों से फंक्शन करता है जो साउंड वेव को सेंस करता है और वाइब्रेशन को धमनी के ज़रिए दिमाग तक पहुँचाती है. साथ ही मिडल कान को इन्फेक्शन और पानी आदि से भी बचाता है. वहीँ कान का पर्दे फट जाने से इन्फेक्शन मिडिल कान तक पहुँच जाता है. जिस कारण कान में इन्फेक्शन हो जाता है.

कान का पर्दा फटने के कई कारण हो सकते है. जैसे अत्यधिक दबाव के कारण भी कान का पर्दा फट सकता है. जिस कारण अचानक दर्द आदि हो सकता है. जिसके बाद कान से मवाद या कहे पस आदि डिस्चार्ज हो सकता है.

इसके अलावा बहुत बार देखा जाता है कि पिन आदि से कान साफ़ करने के चक्कर में भी कान के पर्दे को क्षति पहुँच जाती है. अगर बात करें बच्चे की तो बहुत बार देखा जाता है कि बच्चे अपने कान में कुछ भी डाल लेते है. जिस कारण से उनके कान के पर्दे को नुकसान पहुँच जाता है.

कुछ कान के पर्दे में छेद होने की स्थिति को बैरोट्रामा कहा जाता है. इसका कारण होता है कान के अंदर और बाहर समान दबाव को न होना. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है, एयरोप्लेन में सफर करना है. जब अल्टीटुड बदलता है तो कान में दबाव पड़ता है, जिस कारण कान में तेज़ दर्द आदि होता है. आजकल प्लेन में केबिन क्रू अंदर का दबाव बदलता है जिससे ऐसा नहीं होता है. ऐसी ही स्थिति स्कूबा डाइवर के साथ होती है.

इसके अलावा देखा जाता है कि बहुत से लोगों को सिर में चोट आदि लग जाती है. जिस कारण उनके सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही मानव कान की शोर सुनने की एक क्षमता होती है. उस क्षमता से तेज़ शोर सुनने से भी कान के पर्दे पर दुष्प्रभाव पड़ता है. जिस कारण कान का पर्दा फट सकता है.

कान का पर्दा फटने से पीड़ित व्यक्ति को कान में तेज़ और धीमा दर्द होता रहता है. साथ ही हो सकता है कि उसके कान में कोई शोर चलता रहें. इसके अलावा सुनने की क्षति, सिरदर्द, मतली, उल्टी या कान के पर्दे का टीयर आदि हो सकता है.

अगर इलाज की बात करें तो कान के फटे पर्दे का कोई स्पष्ट इलाज नही होता है. ऐसा होने पर डॉक्टर से परामर्श बहुत जरूरी है. हो सकता है कि डॉक्टर आपको कुछ एंटीबायोटिक दवा आदि दें, जिससे आपका इंफेक्शन आदि कम हो सके. गंभीर मामलों में देखा गया है कि चिकित्सक आपको सर्जरी की सलाह दे सकता है. जिसके बाद इसके ठीक होने तक आपको तैराकी या स्कूबा डाइविंग आदि से दूर रहना पड़ेगा. साथ ही डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना पड़ेगा.

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