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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

9 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Ghareloo Nuskhe Se Door Karen Purush Apanee Napunsakata - घरेलू नुस्खे से दूर करें पुरुष अपनी नपुंसकता

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ghareloo Nuskhe Se Door Karen Purush Apanee Napunsakata - घरेलू नुस्खे से दूर करें पुरुष अपनी नपुंसकता

जब किसी पुरुष के प्रजनन क्षमता में कमी आती है तो उसे ही नपुसंकता कहते हैं. इस स्थिति में पुरुष का प्रजनन अंग कमजोर हो जाता है. इसके साथ ही पुरुष के शरीर में शुक्राणुओं की कमी होने के अलावा कई लोगों में शुक्राणुओं का अभाव भी हो जाता है. जब कोई व्यक्ति नपुसंकता की समस्या से पीड़ित होता है तो वो पुरुष स्त्री के साथ सहवास करने पर उसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है. इस वजह से वो मानसिक परेशानी का भी सामना करता है. आप नपुंसकता की इस बीमारी का इलाज कई घरेलू नुस्खों से भी प्रभावी ढंग से कर सकते हैं. आइए जानें कि किन घरेलू नुस्खों से आप अपनी नपुंसकता दूर कर सकते हैं.

नपुसंकता के लक्षण
1.पुरुष को सम्भोग करने के बाद या पहले घबराहट महसूस होती हैं.
2. सम्भोग के समय पुरुष की इंद्री में कठोरता में कमी आना.
3. पुरुष का सम्भोग करने के लिए उत्तेजित न होना.
4. पुरुष के आत्मविश्वास में कमी आना.
5. पुरुष के लिंग का सामान्य से छोटा होना.
6. सम्भोग के दौरान जल्दी डिस्चार्ज हो जाना.

नपुसंकता दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

  • तिल और गोखरू: नपुसंकता की समस्या से छुटकारा पाने के लिए तिल और गोखरू बहुत ही उपयोगी होता हैं. इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए तिल लें और गोखरू लें. अब एक गिलास दूध लें और उसमें इन दोनों को मिला लें. मिलाने के बाद इस दूध का सेवन करें. तिल और गोखरू मिला हुआ दूध नपुसंकता की समस्या को दूर करने के लिए बहुत ही लाभदायक होता हैं.
  • लहसुन और शहद: नपुसंकता को दूर करने के लिए आप लहसुन और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए 400 ग्राम लहसुन लें और 800 ग्राम शहद लें. अब लहसुन को पीस लें और उसमे शहद मिला लें. अब इस मिश्रण को एक जार में भर लें और गेंहू की बोरी में एक महीने तक रख दें. 30 दिनों के बाद इसे निकालकर इसका सेवन करें. 40 से 50 दिनों तक लगातार सेवन करने पर पुरुष को इस समस्या से छुटकारा मिल जायेगा.
  • तुलसी के बीज और सफेद मूसली की जड़: नपुसंकता से छुटकारा पाने के लिए आप तुलसी के बीज और सफेद मूसली की जड़ का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए 30 ग्राम तुलसी के बीज लें तथा 60 ग्राम सफेद मूसली की जड लें. अब इन दोनों को मिला लें और अच्छी तरह से पीस लें. पिसने के बाद इसमें मिश्री के दानों को पीसकर मिला दें. अब एक जार लें और उसमे इसे डाल दें. अब इस चुर्ण क सेवन रोजाना दिन में दो बार करें. इस चुर्ण का सेवन करने से आपको जल्द ही इस समस्या से छुटकारा मिल जायेगा.
  • बेल की पत्तियाँ और बादाम गिरी: नपुसंकता की समस्या से राहत पाने के लिए आप बेल की पत्तियों का और बादाम की गिरी का भी प्रयोग कर सकते हैं. इस समस्या से मुक्त होने के लिए 20 से 25 बल की पत्तियाँ लें. 4 बादाम की गिरी लें और 200 ग्राम शक्कर लें. अब इन तीनों को मिलाकर पीस लें. पिसने के बाद एक बर्तन में पानी डालकर उसमें इस चुर्ण को डाल दें. अब धीमी आँच पर कुछ देर तक इसे पकाए. मिश्रण के पूरी तरह पकने के बाद इसका सेवन करें. आपको लाभ होगा.
  • प्याज व अदरक के रस के साथ शहद व घी: नपुसंकता की परेशानी से मुक्ति पाने के लिए प्याज का रस, अदरक का रस, शहद तथा घी का भी आप प्रयोग कर सकते हैं. नपुसंकता की परेशानी को दूर करने के लिए इन चारों को मिला लें और इस रस का सेवन करें. 30 से 35 दिनों तक लगातार सेवन करने से पुरुष को इस समस्या से छुटकारा मिल जायेगा.
  • नारियल का चूरा, बरगद का दूध, शहद और चीनी: नपुसंकता की समस्या को दूर करने के लिए आप नारियल के चूरे का, बरगद के दूध का, शहद का और चीनी का भी प्रयोग कर सकते हैं. इस उपाए को करने के लिए नारियल का चुरा लें और उसमें 6 या 7 बरगद के दूध की बूंद मिला लें. अब इस मिश्रण में 3 य़ा 4 चम्मच शहद डालें और अच्छी तरह से मिला लें. अब इस मिश्रण का सेवन करें. इस मिश्रण का सेवन करने से पुरुष की नपुसंकता की समस्या ठीक हो जाएगी.
  • जंगली पालक के बीज: नपुसंकता की परेशानी से राहत पाने के लिए आप जंगली पालक के बीजों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए 200 ग्राम पालक के बीज लें और उन्हें अच्छी तरह से पीस लें. अब एक गिलास दूध के साथ इस चुर्ण को फांक लें. दूध के साथ इस चुर्ण का सेवन करने से आपको इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी.
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Ayurvedic Remedies For Early Ejaculation - शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ayurvedic Remedies For Early Ejaculation - शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपाय

शीघ्र स्खलन की समस्या अक्सर कई पुरुषों में परेशानी का कारण बनती है. शरीर और स्वास्थ्य से जुडी कोई भी समस्या हमें परेशान करती है, लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जो एक व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से अत्यधिक परेशन करती है. यह बीमारी दोनों पार्टनर में चिंता और अवसाद जैसी नकारात्मक भावना को जन्म दे सकती है. आइए इस लेख के माध्यम से शीघ्र स्खलन के आयुर्वेदिक उपायों को जानें.
कस्तूरी
शीघ्र स्खलन रोकने के लिए कस्तूरी को गर्म पानी में डालें और तब तक उबलने दें जब तक वो मुलायम न हो जाये. अब इसे ठंडा होने के लिए रख दें और मिश्रण को छान लें. इस बीच, दूध को तैयार कर लें. जब दूध उबाल जाये तो उसमे मक्खन, काली मिर्च और नमक मिला दें. अब, इसमें छाना हुआ तरल पदार्थ मिलाएं. अब इस मिश्रण को उबलने को रख दें. उबलने के बाद अब इसमें कस्तूरी मिला दें. मिश्रण का सेवन करने से पहले उसे ठंडा होने के लिए रख दें.
केसर
केसर को कामोत्तेजक से भी जाना जाता है इसलिए यह शीघ्रपतन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस अद्भुत जड़ी बूटी का उपयोग करने के लिए पानी में दस बादाम रातभर सोखने दें. अगले दिन, बादाम को छीलकर उसे मिक्सर में डाल दें और उसमे गाय का दूध मिक्स करके चला दें. थोड़ा सा उसमे अब केसर, अदरक और इलायची मिलाएं. इस मिश्रण को रोज़ाना सुबह पियें
तरबूज
तरबूज रक्त वाहिकाओं को बिना किसी नुकसान के लाभ पहुंचाता है. शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिए छोटे टुकड़ों में तरबूज को काट लें. टुकड़ों पर कुछ अदरक के पाउडर और नमक को छिड़क लें. अब इसे खा लें. आप तरबूज को किसी भी फल के सलाद में मिलाकर खा सकते हैं.
कद्दू का बीज
कद्दू के बीजों में मैग्नीशियम होता है. यह खनिज टेस्टोस्टेरोन को खून के प्रवाह तक पहुंचाने में मदद करता है. कद्दू का इस्तेमाल करने के लिए बीजों को अच्छे से सबसे पहले साफ करें. फिर धुप में सूखने के लिए उन्हें बाहर रख दें. सूखने के बाद इन्हे जैतून के तेल में भुने और उसमे ऊपर से नमक और काली मिर्च ड़ालकर खाएं.
अश्वगंधा
आम तौर पर अश्वगंधा का उपयोग पुरुष बांझपन, नपुंसकता के लिए किया जाता है. यह तनाव, चिंता, अनिद्रा और हल्का ट्यूमर के विकास को भी दूर करता है. किसी भी हर्बल स्टोर से अश्वगंधा की जड़ें खरीदें. एक चम्मच अश्वगंधा की जड़ों को एक ग्लास दूध और एक चम्मच शहद के साथ मिलाएं. इस मिश्रण का इस्तेमाल रोज़ करें.
खजूर
खजूर हृदय संबंधी समस्याओं, कब्ज, एनीमिया, दस्त और पेट के कैंसर जैसे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में सहायता करते हैं. वज़न बढ़ाने के लिए भी खजूर का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ आहार विशेषज्ञों का मानना है कि एक दिन में दो खजूर खाने से स्वस्थ और संतुलित आहार मिलता है.
एस्परैगस और दूध
एस्परैगस लिली के परिवार के समूह से संबंधित होता है और यह इसके औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. बहुत कम पौधों के समान, एस्परैगस के सभी अंग बहुत ही फायदेमंद होते हैं. जड़ी बूटी बैंगनी, हरे और सफेद रंगों में आती है. शीघ्रपतन को रोकने के लिए दो चम्मच एस्परैगस और एक कप मिल्क लें. अब इस मिश्रण को गैस पर गर्म करें. आप इसमें गाय का दूध भी मिला सकते हैं.
अदरक और शहद
अदरक कई व्यंजनों में पसंदीदा मसालों और जड़ी-बूटियों में से एक है. इसका उपयोग सामान्य बीमारियों जैसे डायरिया और गठिया का इलाज करने के लिए किया गया है. अदरक को यौन समस्याएं जैसे कि शीघ्रपतन का इलाज करने के लिए जाना जाता है. अदरक और शहद का सेवन लिबिडो, और विकृत भावनाओं को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. एक चम्मच अदरक लें और उसे फिर शहद के साथ मिला दें. इस मिश्रण का इस्तेमाल कुछ महीनो तक रोज़ाना करें.
एवोकाडो
एवोकैडो में बहुत अधिक औषधीय गुण होते हैं. एवोकैडो शीघ्रपतन जैसी समस्या के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. इस समस्या को ठीक करने के लिए आपको कच्चे एवोकैडो खाने हैं. कुछ ताजे फलों के साथ फल का सलाद तैयार करें. एक कटोरे में कटा हुआ टमाटर, प्याज, एवोकैडो, नींबू का जूस, आदि लें. संतरे का जूस, ताजा पुदीना और सौंफ़ के बीज मिलाएं. अब इन्हें अच्छे से मिला लें और इनका फिर सेवन करें.
दालचीनी
दालचीनी अपने पेड़ की छाल से तैयार होती है. आम तौर पर यह छाल सर्दी जुकाम, गैस्ट्रिक समस्याओं, दस्त और जठरांत्र संबंधी परेशानी के लिए उपयोग किया जाता है. इसके अलावा दालचीनी तेल को गलारे, लोशन साबुन, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और दवा उत्पादों में उपयोग किया जाता है. हालाँकि काफी कम लोगो को यह पता है कि दालचीनी की छाल भूख को उत्तेजित करती है, मासिक धर्म में ऐंठन का इलाज करती है, शीघ्रपतन का उपचार करती है और परजीवी कीड़े और बैक्टीरिया की वजह से संक्रमण को ठीक करती है.
जायफल
इस मसाले के कामोद्दीपक गुण शीघ्रपतन की समस्या के लिए बेहद फायदेमंद घरेलू उपाय है. इसके औषधीय गुणों को अरब और मलेशिया जैसे देशों में बहुत पसंद किया जाता है. यह मसाला कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा हुआ है जैसे अपच की समस्या, दर्द से राहत, शीघ्रपतन को दूर करना, विषाक्त पदार्थों को निकालना, पूरे शरीर में खून का संचलन आदि.
हरी प्याज का बीज
इस 'बल्ब' के बीज का उपयोग शीघ्रपतन के लक्षणों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है. इस सब्जी का लाभ यह है कि यह सभी मौसमों में उगाया जा सकता है. इसकी कामोद्दीपक गुण शीघ्रपतन की समस्या से निकलने में मदद करते हैं.

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Cure For Early Ejaculation - शीघ्र स्खलन का इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Cure For Early Ejaculation - शीघ्र स्खलन का इलाज

शीघ्र स्खलन एक ऐसी समस्या है जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से अत्यधिक परेशन करती है. इन्हीं समस्याओं में से एक है शीघ्रपतन. यह बीमारी दोनों पार्टनर में चिंता और अवसाद जैसी नकारात्मक भावना को जन्म दे सकती है. यदि आप भी ऐसे ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो आइए इस लेख के माध्यम से शीघ्र स्खलन के इलाज पर रौशनी डालें.

  • अदरक और शहद: अदरक कई व्यंजनों में पसंदीदा मसालों और जड़ी-बूटियों में से एक है. इसका उपयोग सामान्य बीमारियों जैसे डायरिया और गठिया का इलाज करने के लिए किया गया है. अदरक को यौन समस्याएं जैसे कि शीघ्रपतन का इलाज करने के लिए जाना जाता है. अदरक और शहद का सेवन लिबिडो, और विकृत भावनाओं को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. एक चम्मच अदरक लें और उसे फिर शहद के साथ मिला दें. इस मिश्रण का इस्तेमाल कुछ महीनो तक रोज़ाना करें.
  • केसर: केसर को कामोत्तेजक से भी जाना जाता है इसलिए यह शीघ्रपतन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस अद्भुत जड़ी बूटी का उपयोग करने के लिए पानी में दस बादाम रातभर सोखने दें. अगले दिन, बादाम को छीलकर उसे मिक्सर में डाल दें और उसमे गाय का दूध मिक्स करके चला दें. थोड़ा सा उसमे अब केसर, अदरक और इलायची मिलाएं. इस मिश्रण को रोज़ाना सुबह पियें
  • तरबूज: तरबूज रक्त वाहिकाओं को बिना किसी नुकसान के लाभ पहुंचाता है. शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिए छोटे टुकड़ों में तरबूज को काट लें. टुकड़ों पर कुछ अदरक के पाउडर और नमक को छिड़क लें. अब इसे खा लें. आप तरबूज को किसी भी फल के सलाद में मिलाकर खा सकते हैं.
  • कद्दू का बीज: कद्दू के बीजों में मैग्नीशियम होता है. यह खनिज टेस्टोस्टेरोन को खून के प्रवाह तक पहुंचाने में मदद करता है. कद्दू का इस्तेमाल करने के लिए बीजों को अच्छे से सबसे पहले साफ करें. फिर धुप में सूखने के लिए उन्हें बाहर रख दें. सूखने के बाद इन्हे जैतून के तेल में भुने और उसमे ऊपर से नमक और काली मिर्च ड़ालकर खाएं.
  • कस्तूरी: शीघ्र स्खलन रोकने के लिए कस्तूरी को गर्म पानी में डालें और तब तक उबलने दें जब तक वो मुलायम न हो जाये. अब इसे ठंडा होने के लिए रख दें और मिश्रण को छान लें. इस बीच, दूध को तैयार कर लें. जब दूध उबाल जाये तो उसमे मक्खन, काली मिर्च और नमक मिला दें. अब, इसमें छाना हुआ तरल पदार्थ मिलाएं. अब इस मिश्रण को उबलने को रख दें. उबलने के बाद अब इसमें कस्तूरी मिला दें. मिश्रण का सेवन करने से पहले उसे ठंडा होने के लिए रख दें.
  • अश्वगंधा: आम तौर पर अश्वगंधा का उपयोग पुरुष बांझपन, नपुंसकता के लिए किया जाता है. यह तनाव, चिंता, अनिद्रा और हल्का ट्यूमर के विकास को भी दूर करता है. किसी भी हर्बल स्टोर से अश्वगंधा की जड़ें खरीदें. एक चम्मच अश्वगंधा की जड़ों को एक ग्लास दूध और एक चम्मच शहद के साथ मिलाएं. इस मिश्रण का इस्तेमाल रोज़ करें.
  • खजूर: जूर हृदय संबंधी समस्याओं, कब्ज, एनीमिया, दस्त और पेट के कैंसर जैसे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में सहायता करते हैं. वज़न बढ़ाने के लिए भी खजूर का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ आहार विशेषज्ञों का मानना है कि एक दिन में दो खजूर खाने से स्वस्थ और संतुलित आहार मिलता है.
  • एवोकाडो: एवोकैडो में बहुत अधिक औषधीय गुण होते हैं. एवोकैडो शीघ्रपतन जैसी समस्या के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. इस समस्या को ठीक करने के लिए आपको कच्चे एवोकैडो खाने हैं. कुछ ताजे फलों के साथ फल का सलाद तैयार करें. एक कटोरे में कटा हुआ टमाटर, प्याज, एवोकैडो, नींबू का जूस, आदि लें. संतरे का जूस, ताजा पुदीना और सौंफ़ के बीज मिलाएं. अब इन्हें अच्छे से मिला लें और इनका फिर सेवन करें.
  • दालचीनी: दालचीनी अपने पेड़ की छाल से तैयार होती है. आम तौर पर यह छाल सर्दी जुकाम, गैस्ट्रिक समस्याओं, दस्त और जठरांत्र संबंधी परेशानी के लिए उपयोग किया जाता है. इसके अलावा दालचीनी तेल को गलारे, लोशन साबुन, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और दवा उत्पादों में उपयोग किया जाता है. हालाँकि काफी कम लोगो को यह पता है कि दालचीनी की छाल भूख को उत्तेजित करती है, मासिक धर्म में ऐंठन का इलाज करती है, शीघ्रपतन का उपचार करती है और परजीवी कीड़े और बैक्टीरिया की वजह से संक्रमण को ठीक करती है.
  • जायफल: इस मसाले के कामोद्दीपक गुण शीघ्रपतन की समस्या के लिए बेहद फायदेमंद घरेलू उपाय है. इसके औषधीय गुणों को अरब और मलेशिया जैसे देशों में बहुत पसंद किया जाता है. यह मसाला कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा हुआ है जैसे अपच की समस्या, दर्द से राहत, शीघ्रपतन को दूर करना, विषाक्त पदार्थों को निकालना, पूरे शरीर में खून का संचलन आदि.
  • हरी प्याज का बीज: इस 'बल्ब' के बीज का उपयोग शीघ्रपतन के लक्षणों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है. इस सब्जी का लाभ यह है कि यह सभी मौसमों में उगाया जा सकता है. इसकी कामोद्दीपक गुण शीघ्रपतन की समस्या से निकलने में मदद करते हैं.
  • एस्परैगस और दूध: एस्परैगस लिली के परिवार के समूह से संबंधित होता है और यह इसके औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. बहुत कम पौधों के समान, एस्परैगस के सभी अंग बहुत ही फायदेमंद होते हैं. जड़ी बूटी बैंगनी, हरे और सफेद रंगों में आती है. शीघ्रपतन को रोकने के लिए दो चम्मच एस्परैगस और एक कप मिल्क लें. अब इस मिश्रण को गैस पर गर्म करें. आप इसमें गाय का दूध भी मिला सकते हैं.
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Premature Ejaculation

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Premature Ejaculation

शीघ्रपतन आज कल युवाओं में एक बढ़ती हुई समस्या है. शीघ्रपतन या शीघ्र स्खलन के दुष्प्रभाव से आज कई लोग परेशान हैं. आपको बता दें कि स्खलन का अर्थ है लिंग के माध्यम से शरीर से वीर्य का स्राव होना. इस तरह शीघ्र स्खलन या शीघ्रपतन (प्रिमेच्यूर ईजॅक्युलेशन या पीई) का आर्थ यह हुआ कि वो स्थिति जिसमें किसी पुरुष का सेक्स के दौरान उसके साथी की तुलना में शीघ्र ही स्खलन हो जाता है. कभी-कभी शीघ्र स्खलन को तेजी से स्खलन, समय से पहले चरमोत्कर्ष या जल्दी स्खलन के रूप में भी जाना जाता है. सामान्यतः शीघ्रपतन चिंता का कारण नहीं है. बल्कि इसमें दिक्कत ये होती है कि अगर यह सेक्स को कम आनंददायक बनाता है तो इससे आपके साथी के साथ रिश्तों पर प्रभाव पड़ता है. इसलिए यह काफी निराशाजनक हो सकता है. यदि ऐसा अक्सर होता है तो समस्याएं और बढ़ती जाती हैं क्योंकि आपके साथी की सेक्स संतुष्टि एक स्वस्थ और खुशनुमा जीवन के लिए आवश्यक है.

युवकों पर शीघ्रपतन का प्रभाव
एक अनुमान के अनुसार आज 30% से अधिक पुरुष कभी न कभी समय से पहले स्खलन से पीड़ित हुए हैं. इसमें परेशानी की बात ये है कि यह व्यक्ति के आत्मसम्मान को प्रभावित करता है. इसके साथ साथ यदि आप सेक्स दौरान शीघ्र स्खलित हो गए तो ये पार्टनर को असंतुष्ट छोड़ देता है. इसलिए समस्या को अक्सर मनोवैज्ञानिक माना जाता है, लेकिन कुछ बायोलॉजिकल कारक भी हो सकते हैं. स्खलन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है. जब पुरुष यौन उत्तेजित होते हैं, तो संकेत आपके रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में भेजे जाते हैं. जब पुरुष उत्तेजना के एक निश्चित स्तर तक पहुँचते हैं, तब संकेत आपके दिमाग से आपके प्रजनन अंगों को भेजे जाते हैं. इससे लिंग (स्खलन) के माध्यम से वीर्य स्राव किया जा सकता है.

शीघ्रपतन के लक्षण
शीघ्र स्खलन के लक्षणों को बेहद आसानी से पहचाना जा सकता है. क्योंकि ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से पता कर सकता है. इसके लिए आपको निम्नलिखित प्रमुख लक्षणों पर गौर फरमाना होगा.
* शीघ्र स्खलन के लक्षणों में प्रमुख हा एक तेज उत्तेजना.
* स्तंभन भी शीघ्रपतन का ही एक अन्य लक्षण है.
* स्खलन प्रक्रिया
स्खलन आमतौर पर उत्तेजना के कुछ सेकंड या मिनट के भीतर हो जाता है. हालांकि, सभी यौन स्थितियों में शीघ्र स्खलन की समस्या हो सकती है, हस्तमैथुन के दौरान भी. बहुत से पुरुषों का मानना है कि उनको समयपूर्व स्खलन के लक्षण हैं, लेकिन वे लक्षण समयपूर्व स्खलन के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं. इसके बजाय इन पुरुषों को प्राकृतिक परिवर्तन वाला समयपूर्व स्खलन हो सकता है, जिसमें तीव्र स्खलन के साथ-साथ सामान्य स्खलन की अवधि भी शामिल है.

शीघ्रपतन के बचाव के उपाय
क्योंकि शीघ्रपतन आपके लिए मानसिक चिंता की स्थिति उत्पन्न करता है इसलिए आपके लिए मानसिक रूप से मजबूत रहना बेहद आवश्यक है. यदि आप मानसिक स्तर पर खुद को ठीक कर लेते हैं तो आपकी आधी समस्या हल हो गई समझिए.
* शीघ्र स्खलन से बचने के लिए अन्य यौन सुखों पर ध्यान दें. इससे चिंता कम हो सकती है और आपको स्खलन पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.
* स्खलन रिफ्लेक्स (शरीर का एक स्वत: रिफ्लेक्स, जिसके दौरान स्खलन होता है) को रोकने के लिए एक गहरी सांस लें.
* अपने साथी के साथ सेक्स करते हुए उसे ऊपर रहने को कहें (जब आप स्खलन के करीब हो तो वो दूर हट सके). सेक्स के दौरान रुके और कुछ उबाऊ चीज के बारे में सोचे.

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Jhaiyaan Hataane Ke Upaay - झाइयां हटाने के उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Jhaiyaan Hataane Ke Upaay - झाइयां हटाने के उपाय

कई त्वचा संक्रमणों में से एक है रंजकता या झाइयां जिसके कारण चेहरे का रंग असामान्य हो जाता है. त्वचा के द्वारा निर्मित मेलेनिन त्वचा को रंग देता है. मेलेनिन का कम उत्पादन कुछ क्षेत्रों में हाइपोपिगमेंटेशन का कारण बनता है जो त्वचा को सफेद धब्बों की ओर ले जाता है या जिसके कारण त्वचा पर हल्के रंग के पैच बन जाते हैं. मेलेनिन का उच्च उत्पादन हाइपरपिगमेंटेशन का कारण बनता है जो परिणामस्वरूप त्वचा पर गहरे या भूरे रंग के धब्बों को उत्पन्न करता है या जिसकी वजह से त्वचा पर गहरे रंग के पैच बन जाते हैं. आइए चेहरे से झाइयाँ हटाने के उपाय जानें.
1. संतरे का छिलका
संतरे के छिलकों को सूरज के सामने सूखने के लिए रख दें. तब तक रखें जब तक ये डिहाइड्रेटेड न हो जाएँ. जब एक बार सूख जाएँ फिर छिलकों को मिक्सर में डालकर एक पाउडर तैयार कर लें. पाउडर में अन्य बची सामग्रियों को भी डाल दें. अब इस मिश्रण को अच्छे से चलाने के बाद प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. इस मिश्रण को त्वचा पर 20 मिनट के लिए ऐसे लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. हफ्ते में तीन से चार बार इस प्रक्रिया को दोहराएं.
2. एवोकाडो
एवोकाडो को तब तक मैश करें जब तक इसकी गुठली बनना कम न हो जाये. अब मैश एवोकाडो को त्वचा पर लगाएं और इसे फिर आधे घंटे के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. एक महीने के लिए इस पेस्ट को पूरे दिन में दो बार ज़रूर लगाएं. एवोकाडो में विटामिन सी और ओलिक एसिड होता है जो झाइयों के लिए एक बेहतरीन उपाय है.
3. हल्दी पाउडर और नींबू
एक कटोरे में दोनों सामग्री को मिला लें और एक मुलायम पेस्ट तैयार कर लें. अब अपनी त्वचा को सबसे पहले साफ़ कर लें और फिर इस मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगाएं. 15 मिनट तक इस मिश्रण को लगे रहने दें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. इस मिश्रण को रात को सोने से पहले पूरे दिन में एक बार ज़रूर लगाएं. हल्दी को आमतौर पर सभी के घरों में इस्तेमाल किया जाता है.
4. सेब का सिरका
सबसे पहले सेब के सिरके को पानी में मिला लें. अब इस मिश्रण को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. इस मिश्रण को पांच मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. जब तक आपको नतीजा न दिख जाये तब तक इसका इस्तेमाल पूरे दिन में दो बार ज़रूर करें. सेब के सिरके में मौजूद एस्ट्रिजेंट गुण त्वचा के प्राकृतिक रंग को बनाये रखने में मदद करते हैं.
5. उपचार करें खीरा से
एक कटोरे में सबसे पहले सारी सामग्री को मिला लें. अब इस मिश्रण को अपनी त्वचा पर लगाएं. अब मिश्रण को दस मिनट के लिए त्वचा पर ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. रोज़ाना इस मिश्रण को पूरे दिन में दो बार लगाएं. खीरा त्वचा को फिर से निखारने के लिए जाना जाता है.
6. चंदन की लकड़ी
सभी सामग्रियों को एक साथ मिला लें और एक मुलायम पेस्ट तैयार कर लें. अब इस पेस्ट को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. पेस्ट को लगाने के बाद इसे आधे घंटे के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब इस पेस्ट को गुनगुने पानी से धो लें. इस पेस्ट को पूरे दिन में दो बार ज़रूर लगाएं. चंदन एक बेहद प्रभावी ब्लड प्यूरीफायर है जो झाइयों का इलाज करने में मदद करता है. ये सामग्री आमतौर पर सनस्क्रीन में इस्तेमाल की जाती है. चंदन सूरज की किरणों से बचाने में बेहद लाभदायक सामग्री है.
7. कच्चे आलू
सबसे पहले आलू को धो लें और उसे फिर आधे आधे हिस्से में काट लें. अब कटे हिस्से के ऊपर पानी की कुछ मात्रा डालें. फिर आधे आलू को प्रभावित क्षेत्रों पर सब तरफ से लगाएं. अब दस मिनट तक इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें और फिर प्रभावित क्षेत्र को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. पूरे दिन में तीन से चार बार एक महीने के लिए इस प्रक्रिया को करते रहें. आलू को चेहरे पर रगड़ने से झाइयां, काले धब्बे जैसे निशान कम होते नज़र आएंगे.
8. कच्चे आलू
सबसे पहले आलू को धो लें और उसे फिर आधे आधे हिस्से में काट लें. अब कटे हिस्से के ऊपर पानी की कुछ मात्रा डालें. फिर आधे आलू को प्रभावित क्षेत्रों पर सब तरफ से लगाएं. अब दस मिनट तक इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें और फिर प्रभावित क्षेत्र को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. पूरे दिन में तीन से चार बार एक महीने के लिए इस प्रक्रिया को करते रहें. आलू को चेहरे पर रगड़ने से झाइयां, काले धब्बे जैसे निशान कम होते नज़र आएंगे.
9. उपाय है दही
एक चम्मच फूल फैट दही लें. अब दही को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. फिर 20 मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. दही को हफ्ते में दो बार ज़रूर लगाएं. दही में लैक्टिक एसिड होता है जो त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद करता है और मेलानोसाईट को धीरे धीरे कम करता है. ये झाइयों के दौरान खराब होने वाली त्वचा को भी ठीक करता हैं.
10. टमाटर
एक कटोरे में ये सभी सामग्रियों को एक साथ मिला लें. अब इस मिश्रण को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. जब तक ये मिश्रण सूख न जाये तब तक इसे बीस मिनट तक लगाकर रखें. फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. इस पेस्ट को पूरे दिन में एक बार ज़रूर लगाएं. टमाटर में प्राकृतिक ब्लीचिंग उत्पाद होता है और टमाटर से बना फेस मास्क त्वचा को फिरसे निखारने में मदद करता है. दही में लैक्टिक एसिड होता है जो त्वचा में कसाव लाता है और धब्बों को दूर करता है.

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Home Remedies For Hair Removal - शरीर से बाल हटाने के घरेलू उपाय

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Home Remedies For Hair Removal - शरीर से बाल हटाने के घरेलू उपाय

हमारे शरीर में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके से बालों का फैलाव हुआ है. कई बार ये बाल अनचाहे स्थानों पर भी उग आते हैं या कई स्थानों पर कुछ ज्यादा ही घने हो जाते हैं. इसके अलावा कई लोगों बालों से इरिटेट भी होते हैं. इसलिए लोग अपने शरीर से बालों को हटाना चाहते हैं. शरीर से बालों को हटाने के कई ऊपाय हैं. कई लोग इसके लिए थ्रेडिंग का सहारा भी लेते हैं. लेकिन इसमें आपको दर्द तो होता ही है इसके साइड इफेक्ट भी हो जाते हैं. इसके अलावा आपको हर महीने थ्रेडिंग का खर्चा भी उठाना पड़ता है. इसलिए यदि आप अपने शरीर से बालों को हटाना चाहते हैं तो इसके लिए निम्नलिखित घरेलू उपायों को आजमा सकते हैं.
अंडा
अंडे के मास्‍क की सहायता से आप अपने शरीर के बालों को हटा सकते हैं. इसके लिए आपको इसे वैक्‍स की तरह इस्‍तेमाल करना होगा. इसे बनाने के लिए एक अंडे के सफेद भाग को फेंटकर अपने चेहरे पर लगाये और सूखने पर गुनगुने पानी से धो लें. इससे अनचाहे बाल निकलने के साथ झुर्रियों की समस्‍या से भी निजात मिल जाता है.
हल्दी
हल्‍दी एक ऐसा बेहतरीन एंटीसेप्टिक है जिसका इस्तेमाल हम अपने दिनचर्या में नियमित रूप से करते हैं. इसकी सहायता से अप अपने अनचाहे बालों को भी दूर कर सकते हैं. इसे लगाने से चेहरे पर बाल नही उगते और त्‍वचा की रंगत भी निखरती है. रोज पांच से दस मिनट हल्दी का लेप लगाएं.
बेसन
इसको शरीर के बाल हटाने में इस्‍तेमाल करने के लिए थोड़े से बेसन में एक चुटकी हल्दी और पानी मिलाकर पैक बनाकर लगाएं और सूखने पर पानी से धो लें. इस पैक को आप रोज अपने चेहरे पर लगा सकते हैं. इसके अलावा थोड़ा सा बेसन, एक चुटकी हल्‍दी और थोड़ा सा सरसों का तेल डाल कर गाढा पेस्‍ट बनाकर चेहरे पर लगा कर रगडिये और इसे हफ्ते में दो दिन लगाइये. अनचाहे बालों से छुटकारा मिल जाएगा.
कार्न फ्लोर
कार्न फ्लोर का स्‍क्रब बनाकर लगाने से अनचाहे बालों से छुटकारा मिल जाता है. इसे बनाने के लिए एक कटोरे में 1 अंडे का सफेद भाग, थोड़ी सी चीनी और कार्न फ्लोर को मिलाकर स्‍क्रब बना लें. फिर इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाकर 15 मिनट मसाज करें. फिर सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद पानी से धो लीजिये. ऐसा हफ्ते में तीन बार करें.
चीनी
चीनी मृत त्‍वचा को हटाकर अनचाहे बालों को जड़ से निकाल देती है. इसके लिए अपने चेहरे को पानी से गीला करके, उस पर चीनी लगा कर रगडिये. ऐसा हफ्ते में कम से कम दो बार जरुर करें.
काबुली चने का आटा
काबुली चने के आटा का शरीर के अनचाहे बालों को दूर करने और रोकने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है. इसे बनाने के लिए आधा कटोरी चने का आटा, आधा कटोरी दूध, एक चम्‍मच हल्‍दी और एक चम्‍मच क्रीम लेकर इसे मिक्‍स करके चेहरे पर लगाएं. आधा घंटा लगे रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें.
नारियल का तेल
त्‍वचा से अनचाहे बालों को हटाने के लिए गुनगुने नारियल तेल में हल्‍दी पाउडर को मिलाकर पेस्‍ट बना लें. अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं. इससे त्वचा मुलायम होने के साथ ही शरीर के अनचाहे बाल भी धीरे-धीरे हट जाते हैं.
शुगर वैक्स
अगर आप चेहरे के अनचाहे बालों से परेशान हैं तो आप घर में बनी प्राकृतिक वैक्‍स से वैक्सिंग कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए शक्कर को पिघलाकर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं और पेस्ट तैयार कर लें. पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और वैक्स की तरह साफ करें.
मसूर की दाल
मसूर की दाल को रात भर भिगोने के बाद उसमें नींबू का रस, शहद, आलू का रस और एक चुटकी हल्‍दी मिला दें. यह एक प्रभावी फेस पैक है जो अनचाहे बालों को हटाने के साथ शेष बालों को ब्‍ली‍च कर देता है.
कच्चा पपीता
कच्‍चे पपीते में पैपेन नामक सक्रिय एंजाइम होता है जो बालों के कूप को निष्‍पक्ष करने और बालों के विकास को सीमित करने में सक्षम होता है. पपीता संवेदनशील त्वचा के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त होता है. इसके पैक को बनाने के लिए दो बड़े चम्‍मच पपीते का पेस्ट और आधा चम्मच हल्दी पाउडर लेकर पेस्‍ट बना लें. 15 मिनट के लिए इस पेस्ट से अपने चेहरे पर मसाज करें और पानी से धो लें. बेहतर परिणाम के लिए इसे एक सप्ताह में दो बार करने की कोशिश करें.

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Gora Hone Ke Gharelu Upay - गोरा होने का घरेलू उपाय

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Gora Hone Ke Gharelu Upay - गोरा होने का घरेलू उपाय

ये तो हम सभी जानते हैं त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग होती है. सुंदरता को बनाये रखने के लिए त्वचा बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. अगर आपकी त्वचा गोरी और चमकदार है तो हर कोई आपको खूबसूरत और आकर्षित समझने लगता है. केमिकल युक्त उत्पादों को इस्तेमाल करने की बजाए घर की गुणकारी सामग्रियों का कुछ दिनों तक उपयोग करके देखिए.
ओटमील फायदेमंद
दोनों ही सामग्रियां आपकी त्वचा को गोरी बनाने में मदद करती हैं. ओटमील आपकी मृत कोशिकाओं को बाहर निकालता है और टमाटर आपकी त्वचा को गोरा और चमकदार बनाता है. ओटमील और टमाटर के जूस को सबसे पहले एक साथ मिला लें. अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं और फिर कुछ मिनट तक इसे स्क्रब की तरह रगड़ें. फिर इसे 20 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. 20 मिनट के बाद त्वचा को ठंडे पानी से धो लें. आप इस उपाय को रोज़ाना दो हफ़्तों तक दोहरा सकते हैं.
हल्दी
हल्दी त्वचा को गोरी बनाने के लिए भी बेहद प्रभावी घरेलू उपाय है. हल्दी स्किन टोन को सुधारती है और चमकदार बनाने में भी मदद करती है. यह त्वचा की लोच को भी ठीक करती है. मास्क बनाने के लिए सबसे पहले हल्दी पाउडर और ताज़ा नींबू के जूस को मिलाएं. अब पेस्ट को अच्छे से मिलाने के बाद त्वचा पर लगाएं और इसे 15 मिनट तक ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब त्वचा को पानी से धो लें. इस पेस्ट को हफ्ते में दो से तीन बार ज़रूर लगाएं. जिनकी त्वचा संवेदनशील है वो इस पेस्ट में थोड़ा पानी डाल लें.
गुलाब जल
गुलाब जल विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध होता है. ये त्वचा को कोमल, मुलायम बनाता है और त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है. इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा का टोन बदलने में मदद मिलेगी साथ ही त्वचा गोरी भी बनेगी. पहले चार चम्मच जई को आधे घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोने के लिए रख दें. अब आधे घंटे के बाद जई को पानी में से निकाल लें और फिर उसमें गुलाब जल और आधा चम्मच दही डालें. अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं और 20 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर त्वचा को पानी से साफ कर लें. गुलाब जल का इस्तेमाल कब तक करें – इस पेस्ट का इस्तेमाल रोज़ाना पूरे दिन में दो बार ज़रूर करें.
संतरा
संतरे में विटामिन सी मौजूद होता है. इसके सेवन से न ही आपकी सेहत बनती है बल्कि आपकी त्वचा भी स्वस्थ रहती है. कई उत्पादों में संतरे का इस्तेमाल किया जाता है जिससे आपकी त्वचा को गोरी और चमकदार बनने में मदद मिले. संतरे के जूस को हल्दी पाउडर में मिला लें. अब इस मिश्रण को अच्छे से चला लें जिससे कि एक पेस्ट तैयार हो जाये. अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं और रातभर के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. सुबह को अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. अच्छा परिणाम पाने के लिए आप इस उपाय को रोज़ाना दोहराएं.
टमाटर
टमाटर में लाइकोपीन होता है जो टैन और त्वचा की डार्कनेस को दूर करने में मदद करता है. इसका रोज़ाना इस्तेमाल आपकी त्वचा में मौजूद मृत कोशिकाओं को निकालता है और आपकी त्वचा को गोरा बनाता है. दो टमाटर मिक्सर में मिक्स करें और फिर उसमें दो चम्मच नींबू का जूस मिलाएं. अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं. फिर इसे 20 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब अपनी त्वचा को पानी से साफ़ कर लें. इस पेस्ट को तब तक लगाएं जब तक आपको अच्छा परिणाम न दिख जाये.
मुलेठी
मुलेठी का जूस टैन, डार्कनेस को कम करता है. ये सूरज की वजह से खराब होने वाली त्वचा के लिए भी बेहद प्रभावी है. इसके रोज़ाना इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा गोरी और चमकदार दिखेगी. मुलेठी का जूस तैयार कर लें. अब उसमें रूई डुबाकर उसे अपनी त्वचा पर रात को सोने से पहले लगाएं. अपनी त्वचा पर इसे रातभर लगा हुआ रहने दें. फिर सुबह त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. अच्छा परिणाम पाने के लिए इस उपाय को रोज़ाना दोहराएं.
नींबू
नींबू त्वचा गोरा बनाने का सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि इसमें ब्लीचिंग तत्व होता है जो त्वचा को अंदर से निखारने में मदद करता है. ये दाग और धब्बों को भी दूर करता है. त्वचा पर नींबू का जूस लगाकर 10 मिनट के लिए ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. इसके बाद त्वचा को ठंडे पानी से धो लें. एक दिन छोड़ छोड़कर आप नींबू के जूस का इस्तेमाल कर सकते हैं. ध्यान रहे जब आप इस उपाय का इस्तेमाल करें तो कभी सूरज के सामने न जाएँ. चोट और काटने वाली जगह पर नींबू को संभालकर लगाएं. जिन लोगों की त्वचा सवेदनशील होती है वो नींबू के जूस को पानी में डालकर इस्तेमाल करें.
बेसन
त्वचा को गोरी करने के लिए बेसन एक और अच्छा उपाय है. ये एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है. ये टैन को दूर करता है और किसी भी तरह के काले धब्बों को कम करने में मदद करता है. बेसन के इस्तेमाल से आपकी त्वचा को प्राकृतिक गोरापन लाने में मदद मिलेगी. पांच चम्मच बेसन और एक चम्मच हल्दी पाउडर को एक साथ मिला लें. अब इस पेस्ट को त्वचा पर अच्छे से लगाएं. अब 20 मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर त्वचा को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. बेसन का इस्तेमाल रोज़ाना नहाने से पहले ज़रूर करें.
नट्स
नट्स विटामिन, प्रोटीन से समृद्ध होते हैं जो आपकी त्वचा को स्वस्थ, गोरा और चमदार बनाने में मदद करते हैं. पानी में भीगे हुए बादाम और अखरोट को मिक्सर में मिक्स करने के लिए डाल दें. अब उसमें दही और अलसी को मिला दें. अच्छे से पेस्ट तैयार होने के बाद इसे अपनी त्वचा पर लगाएं. 10 मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर त्वचा को ठंडे पानी से साफ़ कर लें. इस पेस्ट को आप पूरे दिन में दो बार ज़रूर इस्तेमाल करें.
एलोवेरा
एलो वेरा जेल त्वचा को गोरी करने वाला एक अन्य बेहतरीन घरेलू उपाय है. क्योंकि इसमें एन्थ्राक्यूनोन कंपाउंड होता है जो त्वचा की ऊपरी सतह निकालकर अंदर छिपी गोरी त्वचा को निकालने में मदद करता है. एलो वेरा जेल लगाने के अलावा आप इसका लोशन या क्रीम भी लगा सकते हैं. एलो वेरा जेल को पूरे शरीर पर लगाकर मसाज करें. मसाज करने के बाद 20 से 30 मिनट तक उसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर अच्छे से सूखने के बाद शरीर को पानी से साफ़ कर लें. एलो वेरा जेल का इस्तेमाल रोज़ाना करें.
शहद और नींबू
नींबू में विटामिन सी होता है जो आपकी त्वचा को गोरा बनाता है और शहद त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है. चार चम्मच शहद में चार चम्मच नींबू का जूस मिलाएं. दोनों सामग्रियों को अच्छे से मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाएं और 15 -20 मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. इसके बाद अपनी त्वचा को गर्म पानी से धो लें. गोरी और कोमल त्वचा पाने के लिए इस पेस्ट का इस्तेमाल कम से कम हफ्ते में तीन बार ज़रूर करें. 
चावल का पाउडर
चावल के पाउडर में पारा-अमीनोबेंज़ोइक एसिड होता है जो न ही आपकी त्वचा को सूरज से बचाता है बल्कि शरीर में विटामिन सी के स्तर को भी बनाये रखता है. चावल का पाउडर विटामिन सी, विटामिन ई, एंटीऑक्सीडेंट और फेरुलिक एसिड से समृद्ध होता है. इसलिए चावल का पाउडर हाइड्रेटिंग और त्वचा को मॉइस्चराइज़ करने में मदद करता है. कच्चे चावलों को मिक्सर में मिक्स कर लें और एक पाउडर तैयार कर लें. अब इस पाउडर में बराबर मात्रा में दूध मिलाएं जिससे एक मुलायम पेस्ट बन सके. अब इस पेस्ट को अच्छे से चलाने के बाद अपनी त्वचा पर आधे घंटे के लिए लगाकर रखें. अब अपनी त्वचा को साफ़ पानी से धो लें. अच्छा परिणाम पाने के लिए आप इस पेस्ट को दो से तीन हफ्ते तक दोहराते रहें.
चुकंदर
चुकंदर आयरन और विटामिन से समृद्ध होता है जिसकी मदद से आपके छिद्र साफ़ होते हैं और आपकी त्वचा को एक प्राकृतिक गोरा निखार मिलता है. चार चम्मच बेसन, दो चम्मच हल्दी पाउडर और एक कटोरी में ताज़ी क्रीम लें. अब चुकंदर को छीलकर उसे मिक्सर में मिक्स करने के लिए डाल दें. अब इसके गूदे को निचोड़कर इसका जूस एक कटोरे में निकाल लें. फिर इसमें बेसन, हल्दी और क्रीम को एक साथ मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. फिर इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर 20 मिनट के लिए लगाकर रखें. इसके बाद अपनी त्वचा को ठंडे पानी से साफ़ कर लें.इसका इस्तेमाल आप हफ्ते में तीन बार ज़रूर करें.

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Fisher's Home Remedies - फिशर का घरेलू उपचार

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Fisher's Home Remedies - फिशर का घरेलू उपचार

बवासीर और एनल फिशर में कुछ हद तक समानता होने के के कारण आमतौर पर लोग गुदा अर्थात एनल संबंधी किसी भी समस्या को बवासीर मान लेते हैं. लेकिन एनल से संबंधित हर समस्या बवासीर नहीं होती है. शायद जिसे आप बवासीर समझने की गलती कर रहे हों, वह एनल फिशर भी हो सकता है. दरअसल कई बार एनल कैनाल के आसपास के हिस्से में दरारें जैसी बन जाती हैं, इसी को फिशर कहा जाता है. ये दरारें मामूली ये बेहद बड़ी हो सकती हैं. बड़ी दरारें होने में इनसे खून भी आ सकता है और ये लगातार होने वाले दर्द, जलन और असहजता का कारण बन सकती हैं. कब्ज से पीड़ित लोगों को इस बीमारी के होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि कब्ज की स्थिति में कठोर मल गुदा के अस्तर में दरार का कारण बन सकता है. हालांकि सही तरह से साफ-सफाई कर व कुछ घरेलू उपचार की मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से एनल फिशर के घरेलु उपचार के बारे में जानें.
ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल अर्थात जैतून के तेल में स्वस्थ वसा काफी होती है, जोकि मल त्याग को आसान बनाती है. इसके साथ-साथ इसके सूजन व जलन कम करने वाले गुण एनल फिशर का कारण होने वाले दर्द को कम करते हैं. वर्ष 2006 में साइंटिफिक वर्ल्ड जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, एनल फिशर से पीड़ित रोगियों में ऑलिव ऑयल, शहद और मोम के मिश्रण के उपयोग से फिशर का कारण होने वाले दर्द, खून बहने व खुजली आदि लक्षणों में कमी आई. समान मात्रा में ऑलिव ऑयल, शहद और मोम को मिला लें. अब इसे माइक्रोवेव में तब तक गर्म करें, जब तक कि मोम पूरी तरह पिघल न जाए. इसके ठंडा हो जाने के बाद प्रभीवित क्षेत्र पर इसे लगाएं. दिन में कई बार इसका उपयोग करें. 
एलो वेरा
एलोवेरा प्राकृतिक चिकित्सा शक्तियां और दर्द से राहत दिलाने वाले गुण होते हैं, जोकि एनल फिशर के लक्षणों कम कर सकते हैं और क्षतिग्रस्त त्वचा ऊतकों की मरम्मत में सहायक होते हैं. साल 2014 में यूरोपियन रिव्यु फॉर मेडिकल एंड फार्माकोलॉजिकल साइंसेज प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि एलोवेरा जूस युक्त टॉपिकल क्रीम, क्रोनिक एनल फिशर के उपचार में लाभदायक थी. एक एलोवेरा के पत्ते को काटें और इसके आड़े टुकड़े कर, एक चम्मच की मदद से इसका जेल निकाल लें. प्रभावित क्षेत्र पर इस जेल को लगाएं. दिन में कई बार इसका उपयोग करें.
हॉट बाथ
एनल फिशर के कारण होने वाली असुविधा को कम करने और चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिये, हॉट बाथ ली जा सकती है. इससे गुदा क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को सुचारू करने में मदद मिलती है, जिससे मामूली दरारों और ऊतक के विभाजन को ठीक करने में सहायता होती है. यह दर्द, सूजन और खुजली को भी कम करने में मदद करता है. एक बड़े बाथ टब को कुनकुने पानी से भर लें. इसमें लैवेंडर तेल की कुछ बूंदें डालें और अच्छी तरह से मिला लें. अब 15 से 20 मिनट के लिए कमर के बल बाथटब में बैठें. इस बाथ में दिन में 2 से 3 बार लें. आप चाहें तो साधारण गर्म पानी से भी मल त्याग के बाद सेक ले सकते हैं. 
नारियल तेल
नारियल तेल भी एनल फिशर के लिये एक असरदार घरेलू उपाय है. मध्यम श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स युक्त नारियल तेल आसानी से त्वचा में प्रवेश कर जाता है, और प्रभावित क्षेत्र को चिकनाई प्रदान कर घाव भरने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. गुदा को दबाने वाला अंग पर दिन में 2 से 3 बार नारियल तेल लगाएं. क्रोनिक फिशर होने पर इसे दिन में कई बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं. अगर आप कब्ज या किसी प्रकार की पाचन समस्याओं से पीड़ित हैं, तो अपने आहार के में नारियल तेल शामिल करने की कोशिश करें.

Treatment Of Piles - पाइल्स का इलाज

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Treatment Of Piles - पाइल्स का इलाज

पाइल्स में गुदा के अंदर और गुदा के आसपास की जगह पर सूजन होती है. गुदा नलिका बड़ी आंत का अंतिम भाग है और लगभग 4 सेमी लंबा होता है जो गुदा नलिका के निचले सिरे पर बाहर की ओर खुलता है जिसके माध्यम से मल पास होता है. बवासीर एक बहुत ही दुख और तकलीफ देने वाला रोग होता है जिसमें अत्यधिक दर्द होने के कारण रोगी बहुत अधिक परेशान और दुखी हो जाता है. मुख्य रूप से बवासीर 2 प्रकार की होती है - आंतरिक और बाहरी. आंतरिक बवासीर वो होती है जो गुदा नलिका के अंदर 2-3 सेंटीमीटर ऊपर होती है. आंतरिक बवासीर आम तौर पर पीड़ारहित होती है क्योंकि ऊपरी गुदा नलिका में कोई दर्द तंत्रिका फाइबर नहीं होता है. आइए पाइल्स यानी बवासीर के इलाज पर प्रकाश डालें..
 

पाइल्स का इलाज
ज़्यादातर मामलों में, बिना कोई इलाज किये बवासीर अपने आप ठीक हो जाता है. बहुत सारे मरीज़ों ने यह पाया हैं कि इलाज से काफी हद तक पीड़ा और खुजली में आराम मिलता है. जीवनशैली में परिवर्तन एक अच्छा डॉक्टर शुरूआती तौर पर जीवनशैली में परिवर्तन लाने के लिए कहेगा. कब्ज़ होने की वजह से मल त्यागते वक़्त बहुत ज़ोर लगाया जाता है जिसकी वजह से बवासीर होता है. आहार में परिवर्तन करने से मल नियमित और मुलायम हो हो सकता है.
अपने खाने में ज़्यादा से ज़्यादा फाइबर, जैसे की फल और सब्जियां, शामिल करना चाहिए और नाश्ते में अनाज की जगह चोकर शामिल करना चाहिए. पानी बहुत ही उत्तम पेय पदार्थ है, और मरीज़ों को यह सलाह दी जाती है कि वह ज़्यादा से ज़्यादा पानी का सेवन करें. साथ ही उन खाद्य पदार्थ जिनमें कैफीन होता है, उनका सेवन कम करें. अगर मरीज़ मोटा है तो, वज़न कम करने से बवासीर की तीव्रता को रोका जा सकता है. बहुत आसान चीज़ों से आप अपने आप को बवासीर होने से बचा सकतें हैं: मल त्यागते वक़्त बहुत ज़ोर न लगाए जुलाब से दूर रहें व्यायाम करें.
 

दवाइयां मरहम, क्रीम, पैड्स या दूसरी दवाइयां
बहुत सारी तुरंत लगाने वाली दवाइयां हैं जिससे मलाशय के आस-पास होने वाली लालिमा और सूजन में आराम मिलता है. जिसमे से कुछ में विच हेज़ल, हीड्रोकॉर्टिसोने जैसी सक्रिय सामग्री होती है जिससे खुजली और दर्द में आराम मिलता है. यह ध्यान रखें की इनसे बवासीर ठीक नहीं होता, इनसे सिर्फ लक्षण ठीक किये जातें हैं. इन्हे सात दिन तक लगातार इस्तेमाल करने के बाद, इस्तेमाल न करें - ज़्यादा समय तक इस्तेमाल करने से मलाशय में परेशानी और उसके आस-पास की त्वचा पतली हो सकती है. डॉक्टर से परामर्श लिए बिना दो या दो से ज़्यादा दवाइयों का एक साथ इस्तेमाल न करें.
 

कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स - इससे जलन और दर्द कम होता है.

  • दर्द निवारक दवाइयां - अपने केमिस्ट से उपयुक्त दर्द निवारक दवाइयों के बारे में पूछे – जैसे कि पैरासिटामोल.
  • जुलाब - अगर कोई मरीज़ कब्ज़ से झूझ रहा है तो डॉक्टर उसे यह लेने कि सलाह दे सकतें हैं.
  • बैंडिंग - डॉक्टर मलाशय के अंदर, बवासीर के तले के आस-पास इलास्टिक बैंड लगा देंगे, जिससे खून की आपूर्ति रुक जाएगी और कुछ दिन बाद बवासीर झड़ कर निकल जाएगा. यह इलाज बवासीर की ग्रेड 2 और 3 के लिए काम करेगा.
  • सर्जरी स्क्लेरोथेरपी - एक दवाई दी जाती है जिससे बवासीर सिकुड़ जाता है और अंत में सूख जाता है. यह बवासीर के ग्रेड 2 और 3 में प्रभावी है, यह बैंडिंग का विकल्प है.
  • इंफ्रारेड कोएगुलशन - इसे इंफ्रारेड लाइट कोएगुलशन भी कहतें हैं. इसका इस्तेमाल बवासीर की ग्रेड 1 और 2 में किया जाता है. यह एक तरह का यन्त्र है जिससे बवासीर के मस्सों की जमावट को रोशनी द्वारा जला दिया जाता है.
  • जेनेरल सर्जरी - इसे बड़ी बवासीर में इस्तेमाल किया जाता है या ग्रेड 3 या 4 की बवासीर में इस्तेमाल किया जाता है. अधिकतर सर्जरी तब की जाती है जब दूसरी प्रकिरियाओ से आराम नहीं पड़ता. कभी-कभी सर्जरी आउटपेशेंट प्रक्रिया की तरह की जाती है, यानी जिसमें मरीज़ सर्जरी की प्रक्रिया पूरी होने पर घर जा सकता है.
  • हेमोर्रोइडेक्टमी - बहुत सारे ऊतक जिनकी वजह से खून आ रहा है उसे सर्जरी द्वारा हटा दिया जाता है. इसे बहुत सारे तरीकों से किया जाता है. इसमें स्थानीय एनेस्थेटिक, बेहोश करने की प्रक्रिया, रीढ़ की हड्डी में दिया जाने वाला एनेस्थेटिक और सामान्य अनेस्थेटिक का मेल इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरह की सर्जरी बवासीर को जड़ से मिटाने में कारगर है, लेकिन इसमें जटिलताएं पैदा होने का जोखिम है, जैसे की मल निकलने में दिक्कत और मूत्र पथ में संक्रमण.
  • हेमोर्रोइड को बांधना - बवासीर की ऊतक की तरफ हो रहे खून के बहाव को रोक दिया जाता है. यह प्रक्रिया हेमोर्रोइडेक्टमी से कम दर्दनाक होती है. लेकिन बवासीर के फिर से होने का और मलाशय के आगे बढ़ना का जोखिम बढ़ जाता है.

Ayurvedic Treatment Of Wart - मस्से का आयुर्वेदिक उपचार

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ayurvedic Treatment Of Wart - मस्से का आयुर्वेदिक उपचार

मस्से की समस्या ऐसी है कि ये कई लोगों को इरिटेट करती है. ये त्वचा पर लगभग फोड़े जैसी शक्ल में दिखाई पड़ती है. लेकिन ये फोड़ा-फुंसी नहीं होता है. ये कोई बहुत गंभीर समस्या तो नहीं है लेकिन इसे इसे हल्के में लेना भी ठीक नहीं है. यदि आपको इसके साथ कोई और समस्या हो या फिर इस दौरान दर्द हो तो आपको चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. मस्से कि समस्या से पीड़ितों की संख्या भी अब अच्छी-ख़ासी है. मस्से हमारे त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं. इसके साथ ही ये सुसाध्य भी समझे जाते हैं. हालांकि ये कैंसरयुक्त तो नहीं होते हैं लेकिन फिर भी इनसे ग्रसित कई लोग इन्हें निकालने के लिए परेशान रहते हैं. इसके पीछे कारण ये है कि मस्से त्वचा पर अच्छे नहीं लगते हैं. यहाँ आपको ये भी बता दें कि आपके शरीर पर मस्से 'ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस' के कारण विकसित हो पाते हैं. इसके अलावा हमारे शरीर कि त्वचा पर बेडौल और रुखी सतहों का विकसित होना भी मस्सों के लक्षण हो सकते हैं. ज़्यादातर बार मस्से अपने आप विकसित होकर अपने आप ही गायब भी हो जाते हैं. हलांकी कुछ मस्से अत्याधिक पीड़ादायक साबित होते हैं. ऊपर से ये फैलते भी बहुत तेजी से हैं. आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि इनमें से कई मस्से तो बरसों तक बने रहते हैं. इसलिए इनका उपचार बेहद आवश्यक है. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम आपको मस्से का कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताएं.
बरगद के पत्तों से
बरगद का पेड़ हमारे यहाँ काफी लोकप्रिय है. इसी के नीचे भगवान बुद्ध, बुद्धत्व को प्राप्त हुए थे. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके पत्ते का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही प्रभावी साबित होता है. इसके इस्तेमाल से त्वचा मुलायम भी हो जाती है और मस्से अपने आप गिरने लग जाते हैं.
हल्दी पाउडर के द्वारा
हल्दी पाउडर का इस्तेमाल किए बिना हमारे यहाँ भोजन नहीं बनता है. इसके सहायता से आप मस्सों का उपचार कर सकते हैं. इसके लिए आपको एक चम्मच कोथमीर का रस लेकर उसमें एक चुटकी हल्दी डालकर इसका सेवन करने से मस्सों से निजात मिलती है.
आलू भी है उपचार
आलू के बिना सब्जियाँ कैसी लगेंगी? सभी सब्जियों में आलू कॉमन होता है. इसके इस्तेमाल से आप मस्सों से छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए कच्चे आलू के एक स्लाइस को आप नियमित रूप से दस मिनट तक मस्से पर लगाकर रखें इससे लाभ मिलेगा.
केले का छिलका
केले के छिलके कि सहायता से आप मस्से को दूर कर सकते हैं. इसके लिए आपको केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसपर एक पट्टी बांध लें. नियमित रूप से दिन में दो बार लगातार ऐसा करने से मस्से ख़तम हो जाते हैं.
अरंडी के तेल कि सहायता से
यदि आप अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें तो इससे भी मस्से नरम पड़ सकते हैं. कुछ दिन तक इसे लगाते रहने से मस्से धीरे धीरे गायब हो जायेंगे. आप चाहें तो अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
लहसुन के इस्तेमाल से
मस्से को दूर करने के लिए लहसून के एक टुकड़े को पीसकर रखें. हलांकी ये ध्यान रखें कि ये बहुत महीन न हो और इस पीसे हुए लहसून को मस्से पर रखकर इसे पट्टी से बांध लें. इससे भी मस्सों के उपचार में काफी सहायता मिलती है.
कारगर है मौसम्मी का रस
मौसम्मी के रस कि एक ताजा बूँद यदि आप अपने मस्से पर नियमित रूप से लगाएँ तो इससे भी काफी राहत मिलती है. लगाने के बाद इसपर पट्टी बाँध लें. दिन में 3-4 बार ऐसा करने पर आपके मस्से गायब हो जाएंगे.
अम्लाकी से
अम्लाकी का रस भी मस्सों को दूर करने में सहायक साबित होता है. इसका रस आपको मस्सों पर तब तक मलते रहना होगा जब तक कि मस्से उस रस को सोख न लें. इसके बाद अम्लाकी के रस को मस्से पर मल कर पट्टी से बांध लें.
अन्य विभिन्न तरीके
इसके लिए आपको बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्ते के डंठल का रस मस्से पर लगाने से मस्से झड़ जाते हैं. यदि तब भी न असर न हो तो आपको पान में खाने का चूना मिलाकर घिसना चाहिए.

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