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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri

9 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
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To provide my patients with the highest quality healthcare, I'm dedicated to the newest advancements and keep up-to-date with the latest health care technologies.
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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Pair Me Sujan Ka Ilaj In Hindi - पैर में सूजन का इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Pair Me Sujan Ka Ilaj In Hindi - पैर में सूजन का इलाज

कई बार ऐसा होता है कि पैर की मोटाई सामान्य से ज्यादा हो जाती है इसे ही सामान्य भाषा में 'सूजन' कहा जाता है. ऐसा हमारे शरीर में कुछ उतकों में असामान्य रूप से द्रव इकट्ठा होने के कारण हो जाता है. ये द्रव त्वचा के निचले भाग में भी इकट्ठा हो सकता है. आमतौर पर यह टांगों में ही होता है. पैरों के सूजन, जिसको पीडल इडिमा कहा जाता है, एक सामान्य समस्या है. हालांकि इसमें अक्सर दर्द नहीं होता, लेकिन यह कई बार कष्टदायी हो सकता है और रोजाना की गतिविधियों में रुकावटें डाल सकता है. यह रक्त संचार प्रणाली, लिम्फ नोड्स, या गुर्दों से संबधित समस्याओं का संकेत हो सकता है. वृद्ध् या गर्भवती महिलाओं में यह समस्या काफी आम होती है. सूजन पैरों को हिलाने में कठिनाई पैदा कर सकती है, क्योंकि आपके पैर सुन पड़ जाते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से पैरों में होने वाले सूजन को दूर करने के लिए कुछ उपाय जानें.
1. पैरों को हिलायें-डुलायें
शरीर का जो भाग सूजा हुआ है, उसे हिलाएं, जैसे कि टांगें. ऐसा करने से उनमें जमा हुआ रक्त वापस हृदय की तरफ जाने लगता है और इससे सूजन में आराम मिलता है.
2. प्रभावित हिस्से को ऊंचाई पर रखना
दिन में कुछ समय सूजन प्रभावित हिस्सें को ह्रदय (हार्ट) के स्तर से थोड़ी ऊंचाई वाले स्थान पर रखें. इसके साथ ही कुछ मामलों में सोते समय प्रभावित हिस्से को दिल से ऊंचाई पर रखना काफी मददगार होता है.
3. मसाज या मालिश
इसमें प्रभावित स्थान को दिल की तरफ जाने वाली रक्त की गति में सहलाना होता है, लेकिन इसे ज्यादा दबाव के साथ नहीं बल्कि आराम करना चाहिए. इसकी मदद से जमा हुए द्रव को उस जगह से हटाने में मदद मिलती है.
4. दबाव देना
जिस अंग में सूजन हो उसको दबाए रखने के लिए जुराब, मोजे, दस्ताने या स्लीव आदि पहनें. क्योंकि आम तौर पर इनको पहनने से सूजन कम होने में मदद मिलती है एवं ये सूजन को और आगे बढ़ने से रोकते हैं. इसके साथ ही साथ ये प्रभावित त्वचा के उतकों में द्रव को एकत्रित होने से रोकते हैं.
5. सावधानी
सूजन प्रभावित क्षेत्र को साफ, मॉइस्चराइज और किसी भी प्रकार की चोट से मुक्त रखें. क्योकिं सूखी और फटी त्वचा में पपड़ी और संक्रमण की ज्यादा संभावना रहती है. इसलिए अपने पैर में हमेशा सुरक्षात्मक चीजें पहनें रखें, खासकर जिस जगह पर सूजन है.
6. नमक का सेवन कम करें
जब भी आपके पैरों में सूजन की समस्या उत्पन्न हो तो आपको नामक का सेवन कम से कम करना चाहिए. इसका कारण ये है कि नमक द्रव के एकत्रित होने की गति को बढ़ाता है, और सूजन को बढ़ाता है.
7. नियमित रूप से व्यायाम करें
चलना और शारीरिक व्यायाम मांसपेशियों की पंप क्रिया में सुधार करती है और पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है. एडिमा के मरीजों को सलाह दी जाती है कि खड़े होने की अवस्था के दौरान अपने शरीर के वजन को पैर के पंजों, एड़ियों तथा उंगलियों पर बराबर बदलते रहना चाहिए.
8. वजन कम करें
यदि आपका शरीर भारी है तो पैरों पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसलिए आपको शरीर का वजन कम करना चाहिए. जिससे कि पैरों शरीर का दबाव कम करता है, जिससे सूजन जैसी समस्याएं भी कम हो जाती हैं.
पैरों में सूजन होने पर ये न करें
अत्याधिक देर तक बैठे या खड़े ना रहें. यात्रा के दौरान खड़े होते रहें और थोड़ा बहुत चलते रहें. अत्याधिक तापमान से टांगों को बचाएं, जैसे बहुत गर्म पानी में नहाना आदि. ठंडे मौसम में गर्म कपड़े पहन कर रखें. मरीज को दिन में कई बार लेटना चाहिए. जब लेटे हों तब अपनी टांगों को हृदय से उपर रखें तथा घुटनों को हल्का मोड़ कर रखें.

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Pregnancy Me Pet Dard In Hindi - गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द

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Pregnancy Me Pet Dard In Hindi - गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कई तरह के शारीरिक बदलाव से गुजरती हैं. कई परिवर्तन काफी कष्टप्रद होते हैं. इस दौरान 18 से 24 सप्ताह के बीच पेट में दर्द गर्भाशय की अस्थियों में खिंचाव के कारण होता है. ये अस्थियां मूल रूप से दो ऊतकों के रूप में होती हैं जो आपके गर्भाशय को स्थिर रखती हैं. वे गर्भाशय और भ्रूण के बढ़ने के साथ खिंचते हैं. ये अधिकतर पेट के एक तरफ होता है और कभी कभी दोनों तरफ भी होता है. यह किसी ऐसी गतिविधि के फलस्वरूप हो सकता है जो जिनमें ये खिंचती हैं. जैसे खांसना, छींकना, हंसना या अचानक खड़े होने आदि पर यह हो सकता है. जब आप पहली बार दर्द महसूस करते हैं तो यह थोड़ा चिंताजनक हो सकता है. लेकिन यह पूरी तरह से सामान्य है और आमतौर पर इसके बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि अगर दर्द कुछ सेकंड से अधिक समय तक रहता है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. आइए इस लेख में इसे ठीक से समझें.
बाईं ओर पेट के निचले हिस्से (पेड़ू) में दर्द
गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द आपके गर्भाशय और उसे स्थिरता प्रदान करने वाली अस्थियों के खिंचने के कारण होता है. भ्रूण के बढ़ने के साथ गर्भाशय की आंतरिक दीवार पर तनाव पड़ता है. आम तौर पर दूसरी तिमाही के दौरान पेट में दोनों तरफ दर्द हो सकता है. यदि दर्द बायीं तरफ हो रहा है तो ऐसा आपके गर्भाशय के थोड़ा सा दायीं ओर झुकने के कारण होता है. कभी कभी दायीं तरफ की अस्थियों को आराम देने के लिए बायीं ओर की अस्थियों में खिंचाव होता है. इस दर्द के सम्बन्ध में चिकित्सक से बात करें. इससे छुटकारा पाने के लिए वो आपको पेल्विक व्यायाम या कोई अन्य इलाज बता सकते हैं.
दुर्लभ मामलों में, गर्भावस्था के दौरान गंभीर समस्या के कारण भी पेट में बायीं तरफ दर्द हो सकता है. उदाहरण के लिए, यदि भ्रूण बाएं फेलोपियन ट्यूब में असामान्य रूप से आरोपित हुआ है जिसे एक्टोपिक गर्भावस्था कहते हैं तो इस कारण भी बायीं तरफ दर्द हो सकता है. हालांकि कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के प्रारंभिक सप्ताह में कोई लक्षण अनुभव नहीं होते. एक्टोपिक गर्भधारण में यदि फैलोपियन ट्यूब फट जाये तो यह मां और बच्चे दोनों के जीवन को खतरे में डालने वाली स्थिति हो सकती है. हालांकि गर्भावस्था के प्रारम्भ में ही इसका अल्ट्रासाउंड परीक्षण द्वारा निदान हो जाता है और सर्जरी द्वारा इसका इलाज होता है. अन्य संभावित गंभीर स्थितियां जो बायीं तरफ पेट के दर्द का कारण हो सकती हैं, उनमें प्रारंभिक या समय से पूर्व प्रसव, मिस्कैरेज, किडनी में पथरी और कुछ संक्रमण प्रमुख हैं.
यदि आप गर्भावस्था के दौरान बाएं तरफा पेट के दर्द से ग्रस्त हैं तो संभावित कारण और उपचार जानने के लिए डॉक्टर से अवश्य बात करें. हालांकि हल्के दर्द का अनुभव होना अच्छा होता है क्योंकि इसका मतलब है कि आपकी गर्भावस्था सामान्य तरीके से बढ़ रही है. अगर दर्द गंभीर है या बुखार, रक्तस्राव या अन्य लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें.
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
यह ज़रूरी नहीं कि गर्भावस्था के दौरान दर्द महसूस होना हमेशा गंभीर रोग का ही संकेत हो, कभी कभी दर्द सामान्य गर्भावस्था का संकेत भी होता है. हालांकि पेट में दर्द गर्भाशय की अस्थियों के खिंचाव के कारण ही होता है लेकिन कभी कभी यह दर्द कुछ अन्य कारणों जैसे - पेट में सूजन पेट में गैस, डायरिया, कब्ज वास्तव में गर्भवती महिलाओं को अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. साथ ही गर्भावस्था के दौरान उचित समयांतराल पर डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए.
गर्भावस्था के दौरान ऊपरी पेट दर्द हमेशा, पेट में सूजन या वृद्धि होने के कारण नहीं होता है. कभी कभी यह निम्नलिखित गंभीर रोगों का भी संकेत हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान इनमें से प्रत्येक रोग गंभीर होता है और यदि इनका इलाज नहीं किया गया तो परिणाम जानलेवा हो सकते हैं. प्री-एक्लेमप्सिया - महिला का ब्लड प्रैशर घातक रूप से बढ़ जाता है.

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Nipah Symptoms, Causes And Treatment - निपाह के लक्षण, कारण और उपचार!

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Nipah Symptoms, Causes And Treatment - निपाह के लक्षण, कारण और उपचार!

निपाह वायरस के बारे में कम जानकारी उपलब्ध हो सकती है. लेकिन जब जोखिम की बात आती है, तो इससे होने वाले नुक्सान का स्कोर बहुत अधिक होता है. वर्ष 1998 के दौरान मलेशिया में इस वायरस की रिपोर्ट पहली बार की गई थी, जबकि भारत के लिए यह रोग कुछ नया नहीं है. दरअसल, इसने भारत और बांग्लादेश को कई बार अपनी जद में लिया है, जिससे लगभग 280 संक्रमण और 211 मौतें हुई थी. अब यह वायरस वापस आ गया है !

पिछले एक महीने में निपाह वायरस के चलते केरल में 9 लोगों ने अपनी जान गवाई है. पिछले दो हफ्तों में तीन लोगों को जाँच के दौरान पॉजिटिव पाया गया है और 25 से ज्यादा लोगों में इसके लक्षण देखे गए हैं, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

निपाह के कारण जो आपको पता होना चाहिए:

इस संभावित इन्फेक्शन के संकेत बुखार और श्वसन समस्या और भ्रम हैं. कुछ मामलों में फ्लू जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं. इसकी गंभीरता बहुत अधिक है, जिसके चलते कोमा की स्थिति भी हो सकती है.

संयोग से यह एक वायरस है जो शरीर में पहली बार प्रवेश के बाद महीनों या यहां तक कि वर्षों के भीतर खुद को फिर से सक्रिय कर सकता है. ऐसे मामलों में स्थायी स्वास्थ्य परिस्थितियों जैसे तेज़ ऐंठन और व्यक्तित्व परिवर्तन विकसित हो सकते हैं.

खतरे से बचें रहने के लिए सबसे अच्छा तरीका है. संक्रमित जानवरों जैसे कि सूअर और चमगादड़ के संपर्क में आने से बचा जाना चाहिए.

इंसानों को वायरस का ट्रांसमिशन अन्य एनआईवी संक्रमित लोगों से संक्रमित चमगादड़, संक्रमित सूअरों के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से होता है. इसके अलावा यह संक्रमित जानवरों के संपर्क वाले संक्रमित भोजन का उपभोग करने से होता है.

निपाह वायरस के लक्षण:

  • मांसपेशियों में दर्द
  • बुखार
  • श्वांस - प्रणाली की समस्याएं
  • जी मिचलाना
  • बेहोशी
  • पेट दर्द
  • घुट
  • उल्टी
  • धुंधली दृष्टि
  • थकान

इस वायरस के लिए विकसित होने वाले लक्षणों के लिए ऊष्मायन अवधि 5 से 14 दिनों तक होती है और निदान होने के बाद उपचार तुरंत दिया जाना चाहिए. निपाह वायरस रोगियों में निम्नलिखित का कारण बन सकता है.

  • गंभीर फेफड़ों की स्थिति
  • असीमित संक्रमण
  • मस्तिष्क ऊतकों की सूजन

निवारक उपाय:

  • उन लोगों से दूर रहें जो पहले ही निपाह वायरस या एनआईवी से संक्रमित हैं.
  • अगर आपको संक्रमित व्यक्ति को छूना है, तो सुनिश्चित करें कि आप समय-समय पर अपने हाथ धो लें.
  • वायरस से संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तन, कपड़े या किसी भी अन्य सामान को अलग से रखा जाना चाहिए.
  • यदि आप इस वायरस से मरने वाले व्यक्ति के शरीर को ले जा रहे हैं, तो अपने चेहरे और खासकर नाक को कवर करना सुनिश्चित करें.

निपाह वायरस के लिए उपचार:

निपाह वायरस के साथ लोगों या जानवरों के इलाज के लिए कोई टीकाकरण या दवा उपलब्ध नहीं है. एकमात्र उपलब्ध उपचार गहन सहायक देखभाल है. जैसे ही आपको लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत अस्पताल जाए.

आश्चर्य की बात नहीं है कि निपाह वायरस शीर्ष 10 प्राथमिक बीमारियों की सूची में है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अगले बड़े प्रकोप के लिए संभावित प्राथक के रूप में निर्धारित किया है. यद्यपि उपचार वर्तमान में सीमित देखभाल है, फिर भी निपाह वायरस के प्रसार से निपटने के लिए निवारक उपायों को विकसित करने के लिए सरकार और चिकित्सा समुदाय द्वारा प्रयास चल रहे हैं.

Nephrotic Syndrome Causes, Symptoms And Treatment In Hindi - नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण, कारण और उपचार

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Nephrotic Syndrome Causes, Symptoms And Treatment In Hindi - नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण, कारण और उपचार

नेफ्रोटिक सिंड्रोम आम किडनी रोगों में से एक या रोगों का समूह कहा जा सकता है, इसमें किसी भी आयु समूह के शरीर पर सूजन होना इसके लक्षणों में से एक है. साथ ही इसमें पेशाब के दौरान प्रोटीन मात्रा का अधिक निकलना, रक्त में प्रोटीन की कमी, कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर और शरीर में सूजन इस बीमारी के लक्षणों में से एक हैं. लेकिन अधिकत्तर मामलों में देखा जाता है कि यह रोग बच्चों को अपनी पकड़ में ले लेता है. हालांकि, उचित उपचार से इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है. 

नेफ्रोटिक रोग के दुष्प्रभाव 
अगर आसान भाषा में समझने की कोशिश करें, तो यह कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छलनी का काम करती है. इसके द्वारा शरीर की अनावश्यक पदार्थ अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है.
नेफ्रोटिक रोग में किडनी की छलनी जैसे छेद बड़े हो जाने के कारण अतिरिक्त पानी और उत्सर्जी पदार्थों के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन भी पेशाब के साथ निकल जाता है. जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर में सूजन आने लगती है.

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के कारण
इस रोग को प्राथमिक या इडीयोपैथिक नेफ्रोटिक सिंड्रोम भी कहा जाता हैं. इस रोग के होने का कोई ठोस कारण नहीं होता है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि श्वेतकणों में लिम्फोसाइट्स के कार्य की खामी के कारण यह रोग होता है. आहार में परिवर्तन या दवाइँ को इस रोग के लिए जिम्मेदार मानना बिल्कुल गलत है. इस बीमारी के 90% मरीज बच्चे होते हैं जिनमें नेफ्रोटिक रोग का कोई निश्चित कारण नहीं मिल पाता है. 

वयस्कों की बात करें, तो नेफ्रोटिक सिंड्रोम के 10% से भी कम मामलों में इसकी वजह अलग-अलग बीमारियां या कारण हो सकता है. जैसे संक्रमण, किसी दवाई से हुआ नुकसान कैंसर, वंशानुगत रोग, मधुमेह, एस. एल. ई. और एमाइलॉयडोसिस आदि में यह सिंड्रोम उपरोक्त बीमारियों के कारण हो सकता है.

नेफ्रोटिक रोग के मुख्य लक्षण :

  • दो से छः वर्ष के बच्चों में यह रोग मुख्यत दिखाई देता है. अन्य उम्र के व्यक्तियों में इस रोग की संख्या बच्चों की तुलना में बहुत कम दिखाई देती है.
  • आमतौर पर इस रोग की शुरुआत बुखार और खाँसी के बाद होती है.
  • शुरुआती लक्षणों में आँखों के नीचे एवं चेहरे पर सूजन दिखाई देती है. 
  • आँखों पर सूजन होने के कारण कई बार मरीज सबसे पहले आँख के डॉक्टर के पास जाँच के लिए जाते हैं.
  • जब रोगी नींद से सुबह उठते है, तब सूजन ज्यादा दिखाई देती है. यह इस रोग की पहचान है. 
  • हालांकि यह सूजन दिन के बढ़ने के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है और शाम तक बिलकुल कम हो जाती है.
  • रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है, पेशाब कम होता है, पुरे शरीर में सूजन आने लगती है और वजन बड़ जाता है.
  • कई बार पेशाब में झाग आने और जिस जगह पर पेशाब किया हो, वहाँ सफेद दाग दिखाई देने की शिकायत होती है.

नेफ्रोटिक रोग का इलाज :

  • सबसे पहले जरूरी है कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम का निदान करना और प्रयोगशाला जांच से इसकी पुष्टि करना है.
  • इलाज के दौरान सामान्य और स्वस्थ आहार लेने की सलाह दी जाती है.
  • डाइट में रोगी को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन दें.
  • अगर कोई किडनी रोग है, तो प्रोटीन की मात्रा को सीमित रखें. रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए डाइट में फैट का सेवन कम करें.
  • उपचार शुरू करने से पहले बच्चे सुनिश्चित करें कि कही बच्चे को पहले से कोई इन्फेक्शन या तकलीफ न हो, ऐसे संक्रमण पर नियंत्रण स्थापित करना बहुत ही आवश्यक है.
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को सर्दी, बुखार एवं अन्य प्रकार के संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है.
  • इलाज के दौरान इन्फेक्शन होने से रोग बढ़ सकता है. इसलिए उपचार के दौरान संक्रमण न हो इसके लिए पूरी सावधानी रखना जरूरी होता है.
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Safed Daag Treatment In Hindi - सफेद दाग में परहेज

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Safed Daag Treatment In Hindi - सफेद दाग में परहेज

सफ़ेद दाग त्वचा की समस्या है जिसमें आपके त्वचा पर किसी भी जगह सफेद धब्बे उभरने लगते हैं. इसे ल्यूकोर्डमा या विटिलाइगो के नाम से भी जाना जाता है. इसमें शरीर के विभिन्न भागों की त्वचा पर सफेद दाग बनने लग जाते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि त्वचा में वर्णक (रंग) बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, इन कोशिकाओं को मेलेनोसाइट्स कहा जाता है. सफेद दाग रोग श्लेष्मा झिल्ली (मुंह और नाक के अंदर के ऊतक) और आंखों को भी प्रभावित करते हैं. सफेद दाग के संकेत और लक्षण में त्वचा का रंग खराब हो जाना, या सफेद हो जाना, शरीर के किसी भी भाग की त्वचा पर दाग पड़ जाना. ये सफेद दाग शरीर में सिर्फ एक भाग पर भी हो सकते हैं या कई भागों में अलग-अलग फैल सकते हैं. इसके ठोस कारण के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया, हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्व: प्रतिरक्षा प्रणाली की एक स्थिति होती है. उनके अनुसार सफेद दाग तब होते हैं, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा की कुछ कोशिकाओं को नष्ट कर देती है.
क्या है सफेद दाग का उपचार
सफेद दाग रोग में अनुवांशिकी घटक होते हैं, जो एक परीवार में एक व्यक्ति से दूसरों में भी फैल सकते हैं. सफेद दाग कई बार अन्य चिकित्सा स्थितियों से भी जुड़े होते हैं, जिसमें थायरॉयड रोग भी शामिल हैं. इस बात को निर्धारित नहीं किया जा सकता कि ये सफेद दाग एक ही जगह पर रहेंगे या अन्य भागों में भी फैल जाएंगे. सफेद दाग कोई दर्दनाक बीमारी या रोग नहीं है, और ना ही इसमें स्वास्थ्य से जुड़े कोई अन्य दुष्प्रभाव हैं. हालांकि, इसमें भावनात्मक और मनोवैज्ञानिकी परिणाम हो सकते हैं. कई चिकित्सा उपचार इसकी कठोरता को कम तो कर सकते हैं मगर इसका इलाज करना काफी कठिन है. सफेद दागों पर रोकथाम पाने के लिए कोई तरीका नहीं मिल पाया है. ऐसा कोई घरेलू नुस्खा भी नहीं है जिससे इसका उपचार या रोकथाम की जा सके, लेकिन प्रभावित त्वचा पर सन स्क्रीन का प्रयोग या डाई आदि का प्रयोग करके दिखावट में सुधार किया जा सकता है. 
भारत में सफेद दाग रोग की स्थिति
डर्मेटोलॉजिकल के प्रसार के मामले 9.25 प्रतिशत और विटिलाइगो के प्रसार के मामले 9.98 प्रतिशत थे. इनमें से स्थिर प्रकार के विटिलाइगो के मामले 65.21 प्रतिशत आंके गए और जिन लोगों के निचले होठ के नीचे दाग (म्यूकोसल विटिलाइगो) थे उनकी संख्या 75 प्रतिशत थी. शरीर के निचले भागों में सफेद दाग का होना विटिलाइगो की शुरूआत का सबसे सामान्य संकेत होता है. विटिलाइगो से ग्रसित लोगों में ज्याादतर लोग 40 साल की उम्र से पहले इस बीमारी से ग्रसित हो चुके जाते, और इनकी आधी संख्या के करीब लोग 20 साल की उम्र से पहले विटिलाइगो का शिकार बन जाते हैं.
सफेद दाग में परहेज़
सफ़ेद दाग की समस्या उत्पन होने पर या जब आपको पता चल जाता है कि आपको ये समस्या है तब आप कुछ सावधानियां बरतकर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं. इसमें आपको कुछ फलों का परहेज करना लाभकारी साबित होता है. इन फलों में संतरा, करौंदा, सीताफल, अमरूद, सूखा आलूबुखारा, काजू, तरबूज, खरबूज आदि. इन फलों से परहेज करके आप सफेद दाग को फैलने से रोकने में कुछ हद तक कामयाब हो सकते हैं.
इन सब्जियों का हबी करें परहेज
सफेद दाग में फलों के साथ-साथ कुछ सब्जियां का भी आपको इस्तेमाल कम या नहीं करना चाहिए. इन सब्जियों में बैंगन, लाल सोराल, अजमोद, पपीता, नींबू, टमाटर आदि. ऐसा करने से आप इसके प्रभाव को फैलने से रोक सकेंगे.
इसके अलावा आप इमली, लहसुन और दूध उप्तपाद जैसे: दूध दही या छेना छाछ गैर-शाकाहारी खाद्य पदार्थ जैसे: मछली लाल मीट बीफ (गांय का मांस) अन्य खाद्य पदार्थ जैसे: जंक फूड चॉकलेट कॉफी सोढ़ा बाइ कार्ब कार्बोनेटिड पेय पदार्थ चिकनी, तीखी और मसालेदार चीजें जैसे, अचार आदि से भी परहेज करें ताकि सफेद दाग की समस्या से प्रभावी ढंग से निपट सकें.

Ghutno Ke Dard Ka Ilaj - घुटने का दर्द उपाय

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Ghutno Ke Dard Ka Ilaj - घुटने का दर्द उपाय

घुटनों में दर्द कमजोर हड्डी के कारण या उम्र बढ़ने की वजह से भी महसूस हो सकता है. अन्य सामान्य कारण जैसे फ्रैक्चर, लिगामेंट में चोट, मेनिसकस में चोट, गठिया की वजह से घुंटने की हड्डियों का अकड़ जाना और एक जगह से दूसरी जगह खिसक जाना, ल्यूपस और अन्य पुरानी बीमारियों के कारण घुटनों में दर्द हो सकता है. आइए घुटनों में होने वाले दर्द को दूर करने के उपाय जानें.
नींबू है उपयोगी
नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड यूरिक एसिड क्रिस्टल के लिए एक द्रावक की तरह काम करता है जो कि कुछ प्रकार के गठिया का कारण होता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए एक या दो नींबू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. कॉटन के कपडे में इन टुकड़ों को बाँधकर तिल के तेल में डुबायें और इस कपडे को प्रभावित क्षेत्रों पर दस मिनट तक लगाकर रखें.
ठंडे बैग का इस्तेमाल
घुटने में दर्द होते समय ठंडे बैग का इस्तेमाल करें इससे आपकी सूजन और दर्द दूर होंगे. इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाएंगी, प्रभावित क्षेत्रों पर रक्त का प्रवाह कम होगा और इससे सूजन को भी दूर करने में मदद मिलेगी. मुट्ठीभर बर्फ लें और उसे किसी तौलिये या कपडे में लपेटकर रख दें. 10 से 20 मिनट के लिए प्रभावित क्षेत्रों पर तौलिए या कपडे को लगाएं.
सरसों का तेल
आयुर्वेद के अनुसार, गर्म सरसों के तेल से मसाज करने से सूजन दूर होगी, रक्त रिसंचरण में सुधार होगा दर्द दूर होगा. दो चम्मच सरसों के तेल को गर्म कर लें. अब उसमें लहसुन की फांकों को डालें और तब तक गर्म करने जब तक लहसुन भूरा न हो जाये. अब तेल को छान लें और ठंडा होने के लिए रख दें. अब इस गुनगुने गर्म तेल से अपने घुटनों पर मसाज करें.
नीलगिरि का तेल
नीलगिरी के तेल में एनाल्जेसिक या दर्द निवारण गुण होते हैं जोघुटनों के दर्द से रहता दिलाने में मदद करते हैं. इस तेल का ठंडा एहसास गठिया के दर्द में आराम पहुंचाएगा. पांच से सात बूंद नीलगिरी तेल और पुदीने की तेल की बूँदें एक साथ मिला लें. फिर उसमें दो चम्मच जैतून का तेल मिलाएं. इस मिश्रण को सूरज से दूर रखे और किसी अँधेरे वाली जगह पर ढक कर रख दें.
सेब का सिरका
सेब साइडर सिरका जोड़ों में चिकनाई लाता है जिससे दर्द दूर होता है और गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है. दो चम्मच सेब के सिरके को दो कप पानी में मिलाएं. इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद पी लें. जब तक दर्द चला नहीं जाता इस मिश्रण को रोज़ाना पियें. इसके अलावा दो कप सेब के सिरके को बाल्टी भर गर्म पानी के मिलाएं. अब इसमें अपने प्रभावित क्षेत्रों को आधे घंटे के लिए डालें रखें. अब इस मिश्रण को घुटनों पर मसाज की तरह इस्तेमाल करें.
हल्दी है लाभदायक
हल्दी में करक्यूमिन मौजूद होता है जिसमें सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. ये गुण दर्द को कम करने में मदद करते हैं. हल्दी हीउमाटोइड आर्थराइटिस को कम करता है जो कि घुटने के दर्द का मुख्य कारण है. हल्दी का इस्तेमाल करने के लिए एक कप पानी में एक या आधा चम्मच अदरक और हल्दी को मिलाकर इसे दस मिनट के लिए इसे ही उबालें. अब इस मिश्रण को छानकर इसमें हल्दी को मिलाकर इसे पूरे दिन में दो बार ज़रूर पियें. एक ग्लास दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं. अब इसे शहद के साथ मिक्स करें और पूरे दिन में एक बार ज़रूर पियें.
मेथी का बीज
मेथी के बीज में सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो घुटने के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा मेथी के बीज प्राकृतिक रूप से गर्म होने के कारण गठिया के मरीजों के लिए बेहद लाभदायक होते हैं. इसके लिए रातभर एक चम्मच मेथी के बीज को भिगोकर रख दें. सुबह पानी को निकाल लें और उन बीजों को चबाएं. इस प्रक्रिया को पूरे दिन में एक या दो हफ्ते तक करें.
लाल मिर्च का करें उपयोग
लाल मिर्च में कैप्साइसिन मौजूद होता है जो दर्द निवारक की तरह काम करता है. कैप्साइसिन के प्राकृतिक एनाल्जेसिक या दर्द से राहत देने के गुण गर्माहट पैदा करते हैं और घुटनों के दर्द को दूर करते हैं. आधे कप गर्म जैतून के तेल में दो चम्मच लाल मिर्च मिलाकर इस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्रों पर एक हफ्ते तक रोज़ाना पूरे दिन में दो बार ज़रूर लगाएं. इसके अलावा आप एक चौथाई या एक चम्मच लाल मिर्च को एक कप सेब के सिरके में मिलाएं. अब एक कपडा लें और उसे इस मिश्रण में भिगोएं और प्रभावित क्षेत्रों पर बीस मिनट तक लगाकर रखें.
अदरक
अदरक में सूजनरोधी गुण मौजूद होते हैं. अदरक घुटनों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है. इसके लिए ताज़ा अदरक को सबसे पहले काट लें और उसे फिर क्रश कर लें. अब इन्हें एक कप पानी में क्रश कर लें और दस मिनट के लिए उबलने को रख दें. अब इस मिश्रण को छान लें और इसमें बराबर मात्रा में शहद और नींबू का जूस मिलाएं.
सेंधा नमक
सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट प्राकृतिक तरीकों से मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है जिससे ऊतकों से अधिक तरल पदार्थों को निकालने में मदद मिलती है. गर्म पानी के टब या बाल्टी में एक या आधा कप सेंधा नमक मिलाएं. अब अपने घुटनों को गुनगुने पानी में 15 मिनट के लिए डालें रखें. ह्रदय से सम्बंधित समस्यायों वाले और हाई बीपी और शुगर वाले व्यक्ति इसके इस्तेमाल में सावधाने बरतें.

Kamar Dard Ke Gharelu Upay In Hindi - कमर दर्द का घरेलू इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Kamar Dard Ke Gharelu Upay In Hindi - कमर दर्द का घरेलू इलाज

हमारे शरीर में कमर ही वो हिस्सा है जो पैरों को शरीर से जोड़ता है. कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है. सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं. कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है. अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है. यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है. बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है. नतीजा काम करने में परेशानी. कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है. आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं. आइए आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कमर दर्द के कुछ घरेलू उपचारों के बारे में बताएं.
कमर दर्द से बचाने वाले घरेलू उपाय
1. लहसुन

रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें. ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें.
2. नमक और गर्म पानी
नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें. इसके बाद पेट के बल लेट जाएं. दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें. कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है.
3. नमक की सिकाई
कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें. इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें. कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है.
4. अजवाइन
अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें. ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं. इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है.
ध्यान में रखने लायक बातें
5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें. हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें.
6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए. कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए. ऐसा नियमित रूप से करना भी काफी लाभदायक साबित होता है.
7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है. भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं. हलांकि ये हमेशा ध्यान रखें कि कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करना है.
8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें. इससे भी काफी लाभ मिलता है.
9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए. सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं. तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है. साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए. व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा.
10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं.
11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें. नियमित रूप से ऐसा करना बहुत लाभदायक सिद्ध होता है.
12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें. अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे. गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है.

Sharab Mukti Ke Upay In Hindi - शराब मुक्ति के उपाय

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Sharab Mukti Ke Upay In Hindi - शराब मुक्ति के उपाय

शराब की लत छोड़ने की पहल वैश्विक स्तर पर किया जाता है. शराब पिने वाले लोगों की संख्या भी विश्व स्तर पर बहुत ज्यादा है. लेकिन जो लोग इसके आदि हो जाते हैं यानी वो बिना पिए रह ही नहीं सकते उन्हें शराब न मिलने पर बेचैनी होने लगती है. ऐसे लोग समाज में कई बार खतरा बन जाते हैं. इसलिए शराब की लत लगने को छुड़ाना आवश्यक है. ऐसे लोग नशे के सेवन से पहले असामान्य रहते हैं और उसे पाने के बाद खुद को सामान्य स्थिति में पाते हैं. यह स्थिति ऐसे लोगों को पूरी तरह बीमार बना देती है. दरअसल शराब की लत लगना एक लाइलाज बीमारी है. यह कई बहाने से शरीर में प्रवेश करती है और धीरे-धीरे जिंदगी को अपनी गिरफ्त में ले लेती है. शराब पीने की लत एक चतुर, शक्तिशाली और मायावी बीमारी है. शराबी को जब इसकी तलब होती है तो वह झूठ बोलने, कसमें खाने से भी परहेज नहीं करता. आइए शराब की लत छुड़ाने के कुछ तरीकों पर नजर डालते हैं.
1. घरेलू नुस्खे
1. संतरा और नीबू के रस तथा सेव, केला आदि के सेवन से ऐल्कॉहॉल की वजह से शरीर में जमा जहर कम हो जाता है.
2. खजूर काफी फायदेमंद रहता है. 3-4 खजूर को आधे गिलास पानी में रगड़कर देने से शराब की आदत छोड़ने में मदद मिलती है.
3. धूम्रपान करना बिल्कुल बंद कर दें. धूम्रपान से ऐल्कॉहॉल लेने की इच्छा प्रबल होने लगती है.
4. आधा गिलास पानी और समान मात्रा में अजवाइन से बने रस को मिलाकर रोजाना एक महीने तक पीने से काफी फायदा मिलता है.


1. आयुर्वेद
आयुर्वेद में कई रोगों का प्रभावी इलाज उपलब्ध है. शराब छोड़ने के लिए इसमें कोई विशेष प्रवाधान तो नहीं है लेकिन शराब से होने वाली बीमारियों को दूर करने के उपचार किया जाता है. लिवर में सूजन, पेट और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां के उपचार के लिए दी जाने वाली वाली दवाएं ही अन्य लाभ के रूप में शराब छुड़ा सकती हैं. जैसे  ऐलोवेरा लिवर के लिए फायदेमंद है, जबकि अश्वगंधा तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को पुष्ट बनाता है. सार्थक चूर्ण, ब्राह्मी घृतम आदि शरीर से शराब के जहर को कम करते हैं. इसके अलावा शंखपुष्पी, कुटकी, आरोग्य वर्धनी आदि भी दिए जाते हैं. शराब के विकल्प के रूप में सुरा का सेवन कराया जाता है. शराब के बदले मृतसंजीवनी सुरा 30-40 एमएल दी जाती है. लेकिन इन दवाओं का इस्तेमाल किसी चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करना चाहिए.
2. होम्योपैथी
होम्योपैथी में भी कई ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से शराब और इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है. ये दवाएं बीमारियों को ठीक करने के साथ ही मनोवैज्ञानिक नजरिये से भी फायदा पहुंचाती हैं. लेकिन इन दवाओं के इस्तेमाल के लिए किसी डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें. इसके लिए क्यूरकस क्यू, सिनकोना ऑफिसिनैलिस, कैलिडोनियम आदि दवाएं चिकित्सक के निर्देशानुसार इस्तेमाल की जा सकती हैं.
3. ध्यान और योगाभ्यास
योगाभ्यास के जरिए भी इसको दूर किया जा सकता है. मुद्रा, ध्यान तथा योग क्रियाओं के माध्यम से उनके शरीर से विकार को दूर किया जाता है. इसके लिए कुछ
ज्ञान मुद्रा : ज्ञान मुद्रा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और इससे मन का शुद्धिकरण होता है. ज्ञान मुद्रा करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को तर्जनी के टिप पर लगाएं और बाईं हथेली को छाती के ऊपर रखें. इस क्रिया को लगातार 45 मिनट तक करने से काफी फायदा मिलता है.
ध्यान : ध्यान करने से शरीर के अंदर से खराब तत्व बाहर हो जाते हैं. एकाग्रता लाने के लिए त्राटक किया जाता है. इसमें बिना पलक झपकाए प्रकाश की रोशनी को लगातार देखने का अभ्यास किया जाता है. इसके अलावा कई तरह की योगक्रियायें भी आप कर सकते हैं जैसे कि कुंजल क्रिया, वस्ति, शंख प्रक्षालन, शंख प्रक्षालन में सावधानी आदि.
4. ऐल्कॉहॉलिक्स एनॉनिमस
ऐल्कॉहॉलिक्स एनॉनिमस. संस्था न कहकर इसे ऐल्कॉहॉलिजम के शिकार महिला, पुरुषों का परिवार कहें तो बेहतर होगा. यहां किसी तरह की फीस नहीं ली जाती. इस परिवार से जुड़ने वाले हर नए सदस्य का पूरे सम्मान के साथ यहां स्वागत किया जाता है. यहां होने वाली मीटिंग में सभी सदस्य अपने अनुभव और उन गलतियों को शेयर करते हैं, जो उन्होंने शराब की वजह से कीं. नए सदस्य को एक ट्रेनर को सौंप दिया जाता है जिसे स्पॉन्सर कहते हैं. स्पॉन्सर उनके साथ हमेशा कॉन्टैक्ट बनाए रखता है. इसके लिए लगातार 90 मीटिंग अटेंड करने की सलाह दी जाती है. अगर किसी ने शराब भी पी रखी है तो भी वह मीटिंग अटेंड कर सकता है. मीटिंग जॉइन करने वाले नए सदस्य से उनके बीते दिनों के अनुभवों को लिखवाया जाता है. अगर कोई अनपढ़ है तो उसकी बातों को टेप किया जाता है या कोई साथी सदस्य उसके कहे अनुसार लिखने में मदद करता है. व्यक्तित्व में बदलाव के लिए पूरे 12 सूत्र बनाए गए हैं.

Fungal Nail Infection In Hindi - कवक नाखून संक्रमण

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Fungal Nail Infection In Hindi - कवक नाखून संक्रमण

कवक नाख़ून संक्रमण में जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें आपके हाथ या पैर के नाखून की नोक के नीचे एक सफेद या पीले रंग का धब्बा बन जाता है. ये धब्बा कवक के संक्रमण के कारण बनता है और समय के साथ गहरा होता जाता है. इस संक्रमण के दुष्प्रभाव के रूप में आपका नाखून बदरंग, मोटा और किनारे से उखाड़ हुआ लगने लगता है. इसके अलावा ये एक से ज्यादा नाखूनों को प्रभावित कर सकता है लेकिन आम तौर पर ऐसा सभी मामलों में नहीं होता है लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. हलांकि ये जरुर है कि यदि आपकी स्थिति हलकी है और आपको कोई विशेष परेशानी नहीं है तो आपको इलाज की आवश्यकता नहीं होती है. लेकिन यदि आपका कवक नाख़ून संक्रमण दर्दनाक है और इसने आपके नाखूनों को मोटा कर दिया है तो आपको शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेनी चाहिए.
बिना चिकित्सकीय परार्ष के न लें दवा
कवक नाख़ून संक्रमण से गंभीर रूप से ग्रसित होने पर आपको शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. चूँकि कवक नाख़ून संक्रमण के कई प्रकार होते हैं. इसका पता विधिवत चिकित्सकीय जांच के बाद ही पता चल पाता है कि आपको वास्तव में कौन सी दवा खानी है. यदि आप बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है.
कैसे प्रभावित करता है कवक नाख़ून संक्रमण
इसका उदय मधुमेह और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में ज्यादा होता है. इसके अलावा ये बुजुर्ग व्यक्तियों को भी अपना शिकार बनाता है. इसे फफूंद कील संक्रमण के नाम से जाना जाता है. फफूंद कील संक्रमण से प्रभावित लोगों की सामान्य उम्र 60 और 70 के बीच है. वो लोग इसके जल्दी शिकार बनते हैं जो हमेशा किसी न किसी के सम्पर्क में रहते हैं, जैसे तैराक, एथलीट या अन्य लोग.
कवक नाख़ून संक्रमण के कारण
1. एथलीट जब आपस में संपर्क में रहते हैं, जैसे तैराकी या अन्य गेम्स में इससे नहीं बचा जा सकता है. तो वहां से इनकी त्वचा के सम्पर्क में आते ही ये संक्रमण फ़ैल जाता है. फिर ये धीरे धीरे अपना प्रभावक्षेत्र बढ़ाता जाता है.
2. जब ये एक बार आपके शरीर में आ जाता है तब आपकी कई गतिविधियाँ जैसे खुजलाना या इधर-उधर छूना इसे फैलाता है.
3. जितना ज्यादा खुजली और छूना जारी रखेंगे इसके फैलने के उतनी ही प्रबल संभावना बनती है. इसलिए जब आपको पता चले कि कवक नाख़ून संक्रमण है तो इस तरह की गतिविधियाँ कम कर दें.
4. आजकल फैशन नेल आर्ट है. इसके अलावा भी कई तरह के केमिकल और नाख़ून का सौंदर्य बढाने वाली चीजें आ गई हैं. उनके इस्तेमाल से भी कवक नाख़ून संक्रमण की संभावना बनती है.
5. जिन लोगों के हाथ अक्सर पानी के संपर्क में रहता है उनके लिए इसके होने की सम्भावना है. कई लोगों का काम जैसे कि सफाई करने वाले या इसी तरह के व्यवसाय से जुड़े लोगों में इसकी संभावना बढ़ जाती है.
6. लगातार कपड़े धोते रहने से भी आपका हाथ पानी के संपर्क में रहता है. इसलिए ये भी कवक नाख़ून होने की संभावना को बढ़ाती है.
7. गर्म और आर्द्र जलवायु में रहने वाले व्यक्तियों में भी इसके होने का जोखिम ज्यादा होता है. क्रोनिक स्वास्थ्य स्थितियों के साथ फफूंद कील संक्रमण का खतरा होता है.
8. मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी इसका शिकार बनते देखा गया है.
9. कुछ तपेदिक के मरीजों में भी कवक नाख़ून संक्रमण की सम्भावनाएं पनपती हैं.
10. यदि आपकी उंगलियों और पैर की उंगलियों में रक्त परिसंचरण कमजोर पड़ रहा है तब भी इसके होने का खतरा है.
11. कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों में भी इसके जोखिम देखे गए हैं. उदाहरण के लिए एड्स या कैंसर से पीड़ित मरीज.
12. धूम्रपान करने वालों के भी फफूंद कील संक्रमण का उच्च जोखिम है. यह उंगलियों और दीर्घकालिक धूम्रपान के कारण पैर की उंगलियों में गरीब रक्त परिसंचरण के कारण हो सकता है.
13. व्यक्ति की आयु एक जोखिम कारक है. वयस्कों से बच्चों की हालत पीड़ित करने के लिए लगभग 30 गुना अधिक होने की संभावना है. फफूंद कील संक्रमणों से 18 साल छोटे बच्चों के 2.6% है, लेकिन लोगों को 70 साल से अधिक उम्र के रूप में कई के रूप में 90% को प्रभावित करता है.
14. कभी-कभी संक्रमण का कारण अज्ञात है और पूरी तरह से स्वस्थ व्यक्तियों फफूंद कील संक्रमण संक्रमण के साथ अन्य लोगों के साथ संपर्क के कारण हो सकता है.

Virya Badhane Ki Dawa In Hindi - वीर्य बढ़ाने की दवा

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Virya Badhane Ki Dawa In Hindi - वीर्य बढ़ाने की दवा

कई पुरुष वीर्य की कमी से जूझते हैं. आजकल नई जीवन शैली ने हमें कई तरह से प्रभावित किया है, यौन समस्याएं भी इन्हीं में से एक है. पुरुष नपुसंकता के लिए सबसे आम कारणों में से एक है क्योंकि जो शुक्राणु अंडे से निषेचन करने वाला हो, हो सकता है कि उस शुक्राणु का उत्पादन ही न हो. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वीर्य की सामान्य संख्या कम से कम 20 मिलियन प्रति मिली लीटर वीर्य होती है. कम से कम 15 मिलियन शुक्राणु प्रति लीटर को कम शुक्राणु की संख्या में माना जाता है जिसे ओलिगोस्पर्मिया भी कहते हैं. तो आइए जानें कि वीर्य को कैसे बढ़ाया जा सकता है.
1. लहसुन
लहसुन को साधू संत लोग तो इसलिए ही नहीं खाते क्योंकि ये एक प्राकृतिक कामोद्दीपक की तरह कार्य करता है. लहसुन, शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा देने में मददगार है. इसमें एल्लीसिन नामक यौगिक मौजूद होता है जो वीर्य को बढ़ाता है और रक्त परिसंचरण में सुधार भी करता है. इसके अलावा, लहसुन में मौजूद सेलेनियम शुक्राणु गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.
2. ट्रिबूलस टेर्रेस्ट्रिस
ट्रिबूलस टेर्रेस्ट्रिस जिसे गोकशुरा भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक उपाय है जो वीर्य की संख्या बढ़ाने और शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार के लिए जाना जाता है. यह हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने में मदद करता है. तीन महीनों के लिए एक से तीन ट्रिबूलस टेर्रेस्ट्रिस के 500 मिलीग्राम कैप्सूल्स का सेवन करें. इनका सेवन करने से पहले या किसी भी सप्लीमेंट्स को लेने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
3. व्यायाम
व्यायाम स्वस्थ शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं. वीर्य की संख्या में वृद्धि करने के लिए पूरे दिन में एक घंटे तक व्यायाम रोज़ाना ज़रूर करें. बाहर से जुडी शारीरिक गतिविधियां (साइकिलिंग छोड़कर) और साथ ही भार प्रशिक्षण भी इस समस्या के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. हालांकि ज़्यादा व्यायाम भी न करें इससे आपके वीर्य की संख्या गिर सकती है.
4. दमियना
दमियना वीर्य की घटती संख्या के लिए एक अन्य उपयोगी जड़ी बूटी है. एक चौथाई चम्मच सूखी दमियना की पत्तियों को एक कप गर्म पानी में डालकर 5-10 मिनट तक उबालकर छानने के बाद उसमें कुछ मात्रा में शहद को मिलाक्र दिन में तीन बार कुछ महीने के लिए पियें. लेकिन चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है.
5. सॉ पालमेत्तो
सॉ पालमेत्तो का इस्तेमाल आमतौर पर प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए किया जाता है. यह एक जड़ी बूटी है जो वीर्य की संख्या बढ़ाने में मदद करती है. अपने डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही कुछ महीनो के लिए पूरे दिन में दो बार 160 मिलीग्राम सॉ पालमेत्तो का जूस पियें.
6. हॉर्नी गोट वीड
हॉर्नी गोट वीड, चाइनीज दवाईयों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह शुक्राणु उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है. हॉर्नी गोट वीड सप्लीमेंट्स को सुरक्षात्मक तरीको के लिए इसका परिक्षण अच्छे से अभी तक नहीं किया गया है. ध्यान रहे चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही हॉर्नी गोट वीड का सेवन करें.
7. ग्रीन टी
ग्रीन टी में एंटीऑक्सिडेंट की अधिक मात्रा फर्टिलिटी को बढ़ाती है क्योंकि ये शुक्राणु कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने वाले मुक्त कणों को बेअसर कर देते हैं. ग्रीन टी में मौजूद एपीगैलोकैटेचिन गेलेट शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करता है जिससे गतिशीलता बढ़ती है और इस प्रकार गर्भ निषेचन के लिए इसकी क्षमता में सुधार होता है.
8. माका जड़
काला किस्म का माका जड़ शुक्राणु उत्पादन और उसकी गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद करता है. यह एक लोकप्रिय प्रजनन जड़ीबूटी है जो हार्मोन संतुलन में मदद करती है. इसके लिए कुछ महीने तक रोज़ाना एक से तीन चम्मच माका जड़ का सेवन पूरे दिन में दो बार ज़रूर करें. आप इसे एक ग्लास पानी में, प्रोटीन शेक या फिर इसे चुटकीभर लेकर अपने खाने में मिला सकते हैं.
9. अश्वगंधा
अश्वगंधा की जड़ का जूस वीर्य को बढ़ाने में मदद करता है और वीर्य की मात्रा या शुक्राणु गतिशीलता को भी बढ़ाता है. इसके अलावा, यह जड़ी बूटी स्वस्थ टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को भी बढ़ावा देती है. एक ग्लास दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाएं जिसे इंडियन जिंसेंग भी कहा जाता है. कुछ महीनों के लिए इस मिश्रण को पूरे दिन में दो बार ज़रूर पियें. इसके अलावा आप अश्वगंधा जड़ का जूस भी पी सकते हैं. लेकिन चिकित्सकीय परामर्श लेना न भूलें.
10. पैनेक्स जिंसेंग
पैनेक्स जिंसेंग को कोरियन जिंसेंग भी कहा जाता है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर तनाव से दूर रहने के लिए चाइनीज दवाइयों में किया जाता है. टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए और वीर्य की संख्या और गतिशीलता की वृद्धि करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

नोट:- इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी तरह के उपचार के लिए चिकित्सक का परामर्श आवश्यक है.

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