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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Turmeric Benefits in Hindi - हल्दी के फायदे

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Turmeric Benefits in Hindi - हल्दी के फायदे

हल्दी को इसके गुणों के आधार पर "मसालों की रानी" की संज्ञा दी जाती है. इसमें सुगंध, तेज स्वाद और सुनहरे रंग जैसी विशेषताएं मौजूद होती हैं. हल्दी में एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-वायरल, एंटी-बायोटिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह प्रोटीन, आहार फाइबर, नियासिन, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के, पोटेशियम, कैल्शियम, तांबे, लोहा, मैग्नीशियम और जस्ता जैसे पोषक तत्वों से भी भरपूर है. आप पाउडर के रूप में हल्दी को करी, तले हुए व्यंजन, चिकन, गर्म दूध और मसालेदार सलाद ड्रेसिंग में डाल सकते हैं. हल्दी को गोली के रूप में भी लिया जा सकता है. आइए हल्दी से होने वाले फायदों को जानें.
1. वजन कम करने में सहायक
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या मोटापा और अन्य संबंधित बीमारियों का इलाज करना चाहते हैं, वे प्रत्येक भोजन के साथ हल्दी पाउडर के एक चम्मच का सेवन कर सकते हैं. हल्दी में मौजूद एक घटक पित्त के प्रवाह को बढ़ाने में मदद करता है जो आहार वसा के टूटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है.
2. अल्जाइमर रोग से बचाव
हल्दी मस्तिष्क में प्लाक के गठन को हटाने और ऑक्सीजन के प्रवाह को सुधारने में सहायता करते हुए समग्र मस्तिष्क स्वास्थ्य का समर्थन करती है. यह अल्जाइमर रोग की गति को धीमा कर सकती है या फिर उस पर रोक भी लगा सकती है.
3. पाचन के लिए
हल्दी के इस्तेमाल से पाचन में सुधार होता है और ब्लोटिंग और गैस के लक्षणों में भी कमी आती है. इसके अलावा हल्दी अल्सरेटिव बृहदांत्रशोथ सहित आंतों के अधिकांश प्रकार के विकार के उपचार के लिए उपयोगी है.
4. कैंसर से शरीर का बचाव
हल्दी प्रोस्टेट कैंसर को रोकने में मदद करने के साथ-साथ मौजूदा प्रोस्टेट कैंसर के विकास को भी रोकने में सहायक है. हल्दी में निहित औषधीय गुण कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम होते हैं. हल्दी में निहित सक्रिय घटक ट्यूमर के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ संरक्षक प्रदान करने वाले आहारों में से एक है.
5. गठिया में उपयोगी
हल्दी में निहित उत्कृष्ट एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दोनों ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड गठिया के इलाज के लिए उत्तम आहार है. इसके अलावा हल्दी की एंटीऑक्सिडेंट गुण शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) को नष्ट कर देते हैं जिससे शरीर को क्षति पहुँच सकती है.
6. करे लिवर का संरक्षण
हल्दी एक प्रकार के प्राकृतिक लिवर डिटॉक्सीफायर के रूप में लिवर एंजाइमों के उत्पादन के माध्यम से रक्त को साफ़ करती है. इसके साथ ही हल्दी इन महत्वपूर्ण एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाती है. ये महत्वपूर्ण एंजाइम शरीर में विषाक्त पदार्थों को तोड़ उनकी मात्रा को कम कर देते हैं.
7. घाव को जल्दी भरने में
हल्दी में प्राकृतिक रूप से एंटीसेप्टिक और जीवाणुरोधी गुण मौजूद होने के कारण इसे संक्रमण की रोकथाम के रूप में इस्तेमाल की जाती है. हल्दी क्षतिग्रस्त त्वचा की मरम्मत में मदद करती है और इसका उपयोग छालरोग (सोरायसिस) और अन्य सूजन संबंधी त्वचा विकार के इलाज के लिए किया जा सकता है.
8. करे मधुमेह को नियंत्रित
हल्दी के इस्तेमाल से मधुमेह के इलाज में इंसुलिन के स्तर को कम किया जा सकता है. यह ग्लूकोज नियंत्रण में सुधार लाता है और मधुमेह के इलाज के लिए इस्तेमाल दवाओं के प्रभाव को बढ़ाता है. हल्दी टाइप -2 डायबिटीज की शुरुआत को रोक सकता है.
9. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
सिर्फ हल्दी को एक भोजन के रूप में इस्तेमाल करने से सीरम कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो सकता है. उचित कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखने से कई कार्डियोवास्कुलर (हृदय सम्बंधित) रोगों को रोका जा सकता है.
10. इम्युनिटी के लिए
हल्दी की जीवाणुरोधी, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल एजेंट, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायता करते हैं. एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली सर्दी, फ्लू और खांसी से पीड़ित होने की संभावना कम करती है. यदि आप सर्दी, खांसी या फ्लू से पीड़ित हैं, तो आप एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर को मिलाकर दिन में एक बार पी सकते हैं.

Dadhi Badhane ke Upay in Hindi - घनी दाढ़ी बढ़ाने के घरेलू उपाय

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Dadhi Badhane ke Upay in Hindi - घनी दाढ़ी बढ़ाने के घरेलू उपाय

दाढ़ी बढ़ाना या कटवाना ये बेहद व्यक्तिगत मसला है क्योंकि कुछ लोगों को ये पसंद नहीं भी आ सकती है लेकिन खुद को मेच्‍योर दिखाने के लिये कुछ युवकों की कामना होती है कि उसकी दाढ़ी बढ जाये. लेकिन कई बार हारमोन की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाता है. काफी हद तक दाढ़ी का बढ़ना प्राकृतिक भी है. तो आईए आपको सामान्‍य रूप से दाढ़ी बढा़ने के कुछ नुस्‍खों के बारे में बताते हैं.
1. ऊपर से निचे या बाएं से दाएं करें सेविंग
अच्‍छा होगा कि आप उपर से नीचे की तरफ या फिर दायें से बायें तरफ शेविंग करें. मगर इस तरह की तकनीक अपनाने से पहले सावधान रहें क्‍योंकि रेजर से आपके स्किन कट भी सकती है.
2. आहार में शामिल करें ज्यादा प्रोटीन
ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन खाना दाढ़ी को तेजी से बढ़ने में मदद कर सकता है. क्‍योंकि प्रोटीन शरीर को ऐसे पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है जो ज्यादा बालों को उगाता है. इसलिए अपने आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं. प्रोटीन मांस, मछली, अंडों और नट्स में सबसे ज्‍यादा पाया जाता है. अपने आहार और ब्यूटी प्रोडक्ट में विटामिन बी को शामिल करें. विटामिन बी1, बी6 और बी12 भी बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही नियमित रूप से बायोटीन का सेवन करें. यह भी बालों और नाखूनों को तेजी से बढ़ाने में बहुत मददगार होता है.
3. ट्रिमिंग का प्रयोग करके
शेविंग के अलावा ट्रिमिंग के जरिये भी आप घनी दाढ़ी पा सकते हैं. ट्रिमिंग से आपको अनचाहें बालों से छुटकारा भी मिल जायेगा और आप के बालों की विकास भी तेजी से होगी.
4. दालचीनी के पाउडर से
दालचीनी के पाउडर में नीबू का रस मिलाकर पेस्‍ट तैयार कर लें. इसे चेहरे पर लगाये और 15 मिनट के लिये छोड़ दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ कर सूती कपड़े से पोछ लें. ऐसा करने से आपके चेहरे की मासूमियत और नमी बनी रहेगी. हफ्ते में दो बार करने से घनी दाढ़ी और मासूमियत दोनों आसनी से पाया जा सकता है.
5. आंवले के तेल से मालिश
चेहरे की बाल को बढ़ाने के लिये आंवले का तेल से चेहरे की मालिश करना एक अच्‍छा विकल्‍प है. आंवले की तेल से रोजाना अपने चेहरे की 20 मिनट तक मसाज करें और फिर उसे ठंडे पानी से धुल लें.
6. सप्ताह में तीन बार करें सेविंग
प्राकृतिक रूप से घनी दाढ़ी पाने के लिये शेविंग एक अच्‍छा उपाय है. अगर आपके दाढी के बालों का विकास धीमी रफ्तार से हो रहा है तो बेहतर होगा कि एक सप्‍ताह में तीन बार शेविंग करें.
7. आंवले का तेल और सारसों की पत्ती
आंवले की तेल के साथ सरसो की पत्‍ती को मिलाकर भी मसाज किया जा सकता है. इसके लिये पहले आप सरसो की पत्‍ती का पेस्‍ट बना लें और फिर उसमें एकाद बूंद आंवला तेल मिक्‍स करें. इसके बाद उस पेस्‍ट को दाढ़ी वाले हिस्‍से पर लगायें और 20 मिनट के लिये छोड़ दें. ठंडे पानी से चेहरे को धुल कर उसे साफ कपड़े से साफ करें. ऐसा सप्‍ताह में 3 या 4 बार करने से आप घनी दाढी पा सकते हैं.
8. उल्‍टी दिशा में शेविंग
उल्‍टी दिशा में शेविंग करना ज्‍यादा असरदार होगा. इस तरह शेविंग करने से आपके बाल की विकास भी तेजी से होगी और आप जल्‍दी घनी दाढ़ी भी पा सकेंगे.

Sun Stroke Symptoms and Treatment in Hindi - लू लगने के लक्षण, उपचार

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Sun Stroke Symptoms and Treatment in Hindi - लू लगने के लक्षण, उपचार

गर्मियों में लू लगने की समस्या आम है. अंग्रेजी में इसे हीट स्ट्रोक और सनस्ट्रोक के नाम से जाना जाता है. जब तापमान चरम पर होता है और गर्म हवा के झोंके चलते हैं तब लू लग सकती है. इसमें हमारे शरीर के द्रव सूखने जाते हैं जिससे पानी और नमक की कमी हो जाती है और लू लगने का खतरा उत्पन्न हो जाता है. लू लगने पर शरीर में गर्मी, खुश्की और थकावट महसूस होने लगती है. लू लगने के कारण कई और मामूली बीमारियां जैसे कि हीट एडेमा (शरीर का सूजना), हीट रैश, हीट क्रैम्प्स (शरीर में अकड़न) और हीट साइनकॉप (बेहोशी) आदि भी हो सकती हैं. चिकित्सकिय भाषा में शरीर के तापमान को 105 डिग्री फारेनहाइट से अधिक रहने पर और शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम में जटिलताओं के पेश आने पर लू लगना कहते हैं.

लू लगना के लक्षण
* लू लगने पर शरीर में गर्मी, खुश्की, सिरदर्द, कमजोरी, शरीर टूटना, बार-बार मुंह सूखना, उलटी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ, दस्त और कई बार निढाल या बेहोशी जैसे लक्षण नजर आते हैं. ध्यान रहे कि लू लगने पर पसीना नहीं आता है.
* लू लगने पर आँखों में जलन भी होती है.
* लू लगने के कारण अचानक बेहोशी व अंततः रोगी की मौत तक हो सकती है.
* इसमें निम्न रक्तचाप और लिवर-किडनी में सोडियम पोटैशियम का संतुलन बिगड़ जाता है. इसलिए बेहोशी भी आ सकती है. इसके अलावा ब्रेन या हार्ट स्ट्रोक की स्थिति भी बन सकती है.
* इस दौरान शरीर का तापमान एकदम से बढ़ जाता है. अक्सर बुखार बहुत ज्यादा मसलन 105 या 106 डिग्री फॉरनहाइट तक पहुंच जाता है.
* हाथ और पैरों के तलुओं में जलन-सी होती रहती है

सामान्य उपचार

लू लगने वाले व्यक्ति को आसानी से कुछ सामान्य उपचार के जरिए भी बचाया जा सकता है. कुछ छोटे-मोटे आसन उपायों पर नजर डालिए-
* जब भी बाहर गर्मी चरम पर हो तो कम से कम बाहर निकलकर लू से बचा जा सकता है. लेकिन यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो अधिक से अधिक पानी पीकर निकलें. ध्यान रहे कि खाली पेट न निकलें.
* पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले छांव में लायें. फिर उसके लिए हवा का इंतजाम करें. गर्मी के कारण शरीर का तापमान हुई वृद्धि, छाया में लाने से तापमान सामान्य आना शुरु हो जाता है.
* उसव्यक्ति को नमक शक्कर और पानी का घोल मुँह से पिलायें, उसके कपड़े निकालकर सिर्फ अंदरूनी वस्त्र रखें. बेहतरी के लिए शरीर पर हल्का सा गर्म पानी भी छिड़क सकते हैं.
* आप चाहें तो गीली चादर में लपेटकर भी तापमान को कम करने का प्रयास कर सकते हैं.
* हाथ पैर की मालिश करें जिससे रक्त संचरण प्रभावित होता है.
* संभव हो तो बर्फ के टुकड़े कपड़े में लपेटकर गर्दन, बगलों और जांघों पर रखे. इससे गर्मी जल्दी निकलती है.
* धूप में घर से बाहर निकलें तो छतरी का इस्तेमाल करें. नंगे बदन और नंगे पैर धूप में ना खड़े हों.
* तरल पदार्थों के रूप में आप नींबू पानी, आम पना, छाछ, लस्सी, नारियल पानी, बेल या नींबू का शर्बत, खस का शर्बत जैसे तरल पदार्थों का उपयोग करते रहें.
* ढीले और सूती कपड़े पहनना ज्यादा उचित होता है.
* अचानक से गर्मी से एकदम ठंडे कमरे में ना जाएं.
* जितना ज्यादा हो सके हरी सब्जियों का सेवन करें. खीरा, ककड़ी, लौकी, तौरी आदि का भरपूर सेवन करें.
* यदि आपके पास सुविधा हो तो ठंडे वातानुकूलित कमरे में रहें.
* इमली के गूदे को हाथ पैरों पर मलें.
* शरीर का तापमान तेज होने पर सिर पर ठंडी पट्टी रखें.
* घर से बाहर निकलते समय जेब में कटा प्याज रखें.

Dehydration Symptoms - शरीर में पानी की कमी के लक्षण

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Dehydration Symptoms - शरीर में पानी की कमी के लक्षण

पानी जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है. आपके शरीर के दो-तिहाई भाग में पानी भरा हुआ है. पानी आपकी आंखों और जोड़ों को नम बनाने, आपकी त्वचा को स्वस्थ रखने, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन में मदद करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है. वयस्कों को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए. हालांकि यह भिन्न भिन्न कारकों पर निर्भर करता है. (और पढ़ें - खाली पेट पानी पीने के 9 बड़े फायदे) जब आप निर्जलित होते हैं उस समय आपके शरीर में तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में नहीं होते हैं. पानी की कमी आपके शरीर में खनिज (शर्करा और नमक के) संतुलन को बिगाड़ सकती है. यदि निर्जलीकरण का समय पर उपचार नहीं किया गया तो यह मस्तिष्क क्षति और गंभीर मामलों में मृत्यु का कारण भी बन सकता है. इसीलिए गंभीर निर्जलीकरण की स्थिति में जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा प्राप्त करायी जाती है. आइए पानी की कमी से उत्पन्न होने वाले लक्षणों को विस्तारपूर्वक समझें.
1. प्यास लगना, मुंह सूखना: जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है तो इसका सबसे मुख्य लक्षण है प्यास लगना या मुंह सुखना. दरअसल हमारे शरीर में होने वाली पानी की कमी का मुख्य सूचक ही मुंह का सुखना है. पानी की कमी होने पर मुंह सुखने लगता है.
2. कम मूत्र त्यागना: हमारे शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा न होने के कारण मूत्र त्याग और मूत्र के रंग में अंतर हो जाता है. पानी की कमी होने पर एक तो बहुत कम मूत्र त्याग होता है और दुसरे में इसका रंग भी पिला या गहरा पिला हो जाता है.
3. सूखी त्वचा, बहुत शुष्क त्वचा: निर्जलीकरण के दौरान हमारे शरीर की त्वचा बेहद शुष्क हो जाती है. जाहिर है कि हमारे त्वचा की नमी और इसे मुलायम बनाने में पानी की मुख्य भूमिका होती है. इसलिए जब पानी की कमी हो जाती है तो त्वचा शुष्क हो जाती है.
4. मांसपेशियों में ऐंठन: पानी की कमी के कारण हमारे मांसपेशियों में ऐंठन भी आ जाती है. मांसपेशियों में ऐंठन आने को भी आप शरीर में पानी की कमी ही मान सकते हैं.
5. चक्कर आना: जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है तो अक्सर ये भी देखा गया है कि चक्कर आने लगता है या सर में दर्द होने लगता है. निर्जलीकरण के दौरान अक्सर ये लक्षण भी स्पष्ट नजर आता है.
6. धड़कनों का तेज़ होना: शरीर में होने वाली पानी की कमी को आप अपने तेजी से चलते साँसों और धड़कनों के द्वारा भी महसूस कर सकते हैं. जब आपका धड़कन तेज हो जाए तो समझिए ये पानी की कमी के कारण भी हो सकता है.
7. धंसी हुई आंखें: कई लोगों में ये भी देखा गया है कि पानी की कमी के कारण उनकी आँखें धंस जाती हैं. या अन्दर की तरफ चली जाती हैं. ये भी पानी की कमी होने के मुख्य लक्षणों में से एक है.
8. जरुरत से ज्यादा नींद आना: जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है या निर्जलीकरण होता है तो हमें जरूरत से ज्यादा नींद आती है. इस दौरान ऐसा लगता है जैसे हमारे शरीर में ऊर्जा की कमी हो गई है.
9. चिड़चिड़ापन महसूस होना: पानी की कमी होने पर नजर आने वाले लक्षणों में से एक चिडचिडापन महसूस होना है. पानी की कमी या निर्जलीकरण के दौरान आप भ्रमित या चिडचिडापन महसूस करते हैं.
10. बेहोशी आना: कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि जब हमारे शरीर में पानी की जबरदस्त कमी हो जाती है तो आपको बेहोशी भी आ सकती है. ये तब होता है जब शरीर में पानी की भयंकर कमी हो जाती है.
 

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Curd Benefits and Side Effects in Hindi - दही के फायदे और नुकसान

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Curd Benefits and Side Effects in Hindi - दही के फायदे और नुकसान

दही हमारे देश के भोजन परंपरा का अहम हिस्सा है. ये स्वाद में बेहतरीन होने के साथ ही पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. दही में मौजूद तमाम ऐसे पोषक तत्‍व इनसान के शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में मददगार होते है. यह सेहत और सूरत दोनों संवारने में काफी मददगार होता है. इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन पाया जाता है. दूध के मुकाबले दही सेहत के लिए ज्यादा फायदा करता है. क्‍योंकि दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है. इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लिए लाभकारी होता है. दही में दूध की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में कैल्शियम होता है. इसके अलावा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, आयरन, फास्फोरस पाया जाता है. आइए हम आपको बताते हैं कि दही आपके शरीर के लिए कितना फायदेमंद है.

1. हड्डियों के लिए फायदेमंद: दही में पाया जाने वाला कैल्शियम की भरपूर मात्रा हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. दही खाने से दांत भी मजबूत होते हैं. दही ऑस्टियोपोरोसिस (जोडों की बीमारी) जैसी बीमारी से लड़ने में भी मददगार होती है.
2. टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम करें: दही के नियमित सेवन से डायबिटीज टाइप 2 का खतरा 28 प्रतिशत तक कम हो जाता है. दही में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम और सैचुरेटेड फैट्स अच्छी मात्रा में होते हैं जो डायबिटीज टाइप 2 से दूर रखने में आपकी मदद करते हैं. इसलिए अगर आप डायबिटीज से परेशान है तो अपने आहार में दही को शामिल करें.
3. पेट के लिए रामबाण है दही: दही पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है. पेट की बीमारी से परेशान लोगों को अपने आहार में दही को प्रचूर मात्रा में शामिल करना चाहिए. पेट में जब अच्छे किस्म के बैक्टीरिया की कमी हो जाती है, जिसके चलते भूख न लगने जैसी तमाम बीमारियां पैदा हो जाती हैं. इस स्थिति में दही सबसे अच्छा भोजन बन जाता है. इसमें अच्छे बैक्टीरिया पाये जाते हैं जो पेट की बीमारी को ठीक करते हैं. यह इन तत्वों को हजम करने में मदद करता है. दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत समाप्त होती है.
4. त्‍वचा के लिए गुणकारी: चेहरे पर दही लगाने से त्वचा मुलायम होती है और त्वचा में निखार आता है. दही से चेहरे की मसाज की जाये तो यह ब्लीच के जैसा काम करता है. गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न की समस्‍या को दूर करने के लिए दही मलना चाहिए, इससे सनबर्न और टैन में फायदा मिलता है. इसके अलावा त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए दही का प्रयोग करना चाहिए. जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ दही का चेहरे पर लगाने से चेहरे का रूखापन समाप्त होता है.
5. बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाए: इसके नियमित सेवन से बीमारियों से लड़ने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है. गर्मी के मौसम में दही और उससे बनी छाछ का ज्यादा मात्रा में प्रयोग किया जाता है. क्योंकि छाछ और लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है. दही का रोजाना सेवन करने से शरीर की बीमारियों से लडने की क्षमता बढती है.

अन्‍य लाभ:
लू से बचने के लिए दही का प्रयोग किया जाता है. लू लगने पर दही पीना चाहिए. दही पीने से पाचन क्षमता बढती है और भूख भी अच्छे से लगती है. मुंह के छालों के लिए यह बहुत ही अच्छा घरेलू नुस्खा है. मुंह में छाले होने पर दही से कुल्ला करने पर छाले समाप्त हो जाते हैं. दही के सेवन से हार्ट में होने वाले कोरोनरी आर्टरी रोग से बचाव किया जा सकता है. दही के नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है.
 

दही खाने के नुकसान
* एड्स से पीड़ित और ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले लोग डॉक्टर से पूछकर ही खाएं.
* आवश्यकतानुसार ही खाएं.
* फ्लेवर्ड दही के इस्तेमाल से आपको परेशानी हो सकती है.
* कुछ दवाओं के साथ इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
 

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Tomato Soup Benefits - टमाटर सूप के फायदे

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Tomato Soup Benefits - टमाटर सूप के फायदे

सब्जियों में टमाटर अलग से ही पहचान में आ जाता है क्योंकि ये देखने में बहुत सुन्दर है. टमाटर का इस्तेमाल आमतौर पर सलाद, सब्जी या चटनी बनाने के लिए किया जाता है. टमाटर का उपयोग सूप बनाने के लिए भी किया जाता रहा है. इसका सूप बहुत स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होता है. टमाटर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर, खनिज, विटामिन और कार्बनिक अम्ल प्रमुख हैं. दुनिया भर में टमाटर का उपयोग इसके पौष्टिक मूल्यों के कारण किया जाता है. जाहिर है टमाटर एक सुरक्षात्मक भोजन है. यह किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद है क्योंकि कम अवधि में तैयार हो जाता है और ये एक नकदी फसल है.
टमाटर के सूप में विटामिन ए, सी, डी, बी-6, बी-12, खनिज आयरन, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम के अतिरिक्त आहार फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आदि पाए जाते हैं. टमाटर का सूप बनाने के लिए इसे उबालकर या इसे रोस्ट करके बनाया जा सकता है. इसमें लहसुन, मक्खन, काली मिर्च, प्याज, तेज पत्ता और कॉर्नफ्लोर आदि मिला देने से ये और पौष्टिक हो जाता है. आइए टमाटर सूप के फायदे को विस्तारपूर्वक जानें.
1. गर्भवती माताओं के लिए: टमाटर में मौजूद विटामिन सी इसे गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद बनाता है. महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टमाटर का सूप या जूस भी दिया जा सकता है. इससे उन्हें खट्टे स्वाद के साथ ही पौष्टिकता भी मिलती है.
2. त्वचा के लिए: टमाटर में मौजूद कई तरह के स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ इसे हमारे त्वचा के लिए भी लाभकारी बनाते हैं. यदि आप नियमित रूप से टमाटर के सूप या जूस का सेवन करें तो आपके चेहरे पर निखार आने लगता है. इससे त्वचा के कई समस्याओं का निदान भी हो जाता है.
3. सूखा रोग में: इसका फायदा सूखा रोग के मरीजों को भी मिलता है. सूखा रोग से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना कच्चे टमाटर का सूप पिलाएं. इससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा. उन्हें कच्चा टमाटर नियमित रूप से खिलाते रहें. इससे लाभ मिलेगा.
4. गठिया के उपचार में: गठिया के उपचार में भी टमाटर के सूप भी महत्वपूर्ण भूमिका देखी जाती है. गठिया के मरीजों को टमाटर के जूस में आजवाईन मिलकर पिलाना चाहिए. ऐसा नियमित रूप से करने पर उन्हें काफी लाभ मिल सकता है.
5. पेट के कीड़ा मारने में: कई बच्चों के पेट में कीड़ा हो जाने से उन्हें काफी परेशानी होती है. ऐसे बच्चों को टमाटर के जूस में काली मिर्च डालकर देने से उन्हें काफी आराम मिलता है. नियमित रूप से ऐसा करने पर वो इससे निजात पा सकते हैं.
6. वजन कम करने के लिए: कई लोग अपना वजन कम करने को लेकर काफी सचेत रहते हैं. उन लोगों को टमाटर का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए. इसके लिए आपको बिना बटर या किसी फैट वाले पदार्थों के ही इसका सेवन करना चाहिए.
7. शुगर के उपचार में: शुगर आज एक ऐसी बिमारी है जिसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इससे बचने के लिए हमलोग कई तरह की चीजें खाते हैं. इन्हीं में से एक टमाटर भी है. टमाटर के सेवन से हम शुगर जैसी बिमारी से बच सकते हैं.
 

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Hindi Remedies to Treat Hair Split Ends - दोमुंहे / स्प्लिट एंड्स बालों के बेहतर घरेलू उपचार

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Hindi Remedies to Treat Hair Split Ends - दोमुंहे / स्प्लिट एंड्स बालों के बेहतर घरेलू उपचार

दोमुंहे बालों की समस्‍या बहुत आम है. बाल अगर हेल्‍दी नहीं होते तो बहुत ज्‍यादा खराब लगते हैं. उन्‍हें देख कर साफ पता चल जाता है कि उनको पोषण नहीं मिल रहा है. प्रदूषित वातावरण की वजह से बाल दोमुंहे हो जाते हैं इसके अलावा बालों पर अत्‍यधिक रसायनिक प्रोडक्‍ट, बार-बार धोना, खराब तरह से बालों की देखभाल आदि से भी बालों पर बुरा असर पड़ता है. अगर बालों कि अच्‍छी देखभाल न की गई तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. हमारे घरों में इतनी प्राकृतिक चीज़े हैं, जिनसे हम शरीर और बालों की हजारों समस्‍याएं सही कर सकते हैं. इसी तरह से आप दोमुंहे बालों की समस्‍याओं को पूरी तरह से कंट्रोल में कर सकती हैं. बालों का दोमुंहा होना मतलब कि बालों में बिल्‍कुल पोषण नहीं है इसलिये इसे ठीक करने के लिये आपको कैमिकल वाली चीजों का कम इस्‍तमाल कर के प्राकृतिक चीज़ों का इस्‍तमाल करना शुरु करना होगा. दही, पपीता, अंडा, अंडा या फिर बीयर आदि लगा कर आप दोमुंहे बालों से छुटकारा पा सकती हैं.
1. पपाया पैक: स्‍किन के लिये पपीता बहुत अच्‍छा माना जाता है. स्किन के लिए पपाया पैक बनाने हेतु बालों की लम्बाई को ध्यान में रखते हुए पपीता काटकर इसे मिक्‍सी में पीसें फिर उसमें आधा कप दही मिलाइये. इस हेयर पैक को पूरे बालों में लगाइये खास कर के दो मुंहे बालों पर. दूध और क्रीम आधा कप दूध ले कर उसमें 1 चम्‍मच क्रीम मिक्‍स करके सिर पर लगा लीजिये. इसे 15 मिनट छोड़ने के बाद अच्‍छे से धो लीजिये.
2. अरंडी का तेल: अरंडी के तेल में बादाम तेल और ऑलिव ऑयल मिलाकर इसे अपने बालों में लगाइये. फिर बालों को तौलिये से ढंककर 30 मिनट के बाद पानी से धो लीजिये. ऐसा नियमित रूप से करने पर लाभ होगा.
3. बीयर: बीयर को भी बालों के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है. थोड़ी सी बीयर अपनी हथेलियों में लेकर इससे अपने बालों का मसाज करें. उसके कुछ घंटो के बाद सिर धो लीजिये नहीं तो गंध बालों में समा जाएगी.
4. अंडे: दोमुंहे बालों को ख़त्म करने के लिए अंडे की जर्दी का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए अंडे की जर्दी में 1 चम्‍मच बादाम तेल मिलाइये. फिर इससे सिर का मसाज करके 1 घंटे के लिये छोड़ दीजिये, फिर शैंपू से बालों को धो लीजिये.
5. काली उड़द दाल: बालों के लिए आधा कप काली उड़द दाल और 1 चम्‍मच मेथी के दानों पीसकर उसमें आधा कप दही मिलाइये और बालों पर लगा कर दो घंटों के लिये छोड़ दीजिये. फिर हल्‍के शैंपू से बालों को धो लीजिये.
6. ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल की थोड़ी सी मात्रा को गैस पर हल्‍का सा गरम करके इससे बालों तथा सिर की मसाज कीजिए. 30 मिनट के बाद सिर को धो लीजिये.
7. एवोकाडो/बटर फ्रूट: एवोकाडो को आधा ले कर पीस लीजिये और बालों को गीला कर के उस पर लगाइये. 30 मिनट के बाद सिर को शैंपू से धो लीजिये. ऐसा करने से भी आपको लाभ मिलता है.
8. मेयोनीज़: यदि आपको एवोकाडो न प्राप्‍त हो सके तब आप उसकी जगह पर मेयोनीज़ भी लगा सकती हैं. इसे 20 मिनट तक लगा रहने के बाद धो लें. अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये इसे हफ्ते में 2 दिन लगाएं.
9. जोजोबा ऑयल: अपने शैंपू के साथ दो बूंद जोजोबा ऑयल मिलाइये. इसे लगाने से बालों मुलायम हो जाएंगे और उन्‍हें नमी मिलेगी.
10. विटामिन ई कैप्‍सूल: विटामिन ई कैप्‍सूल ले कर उसे तोड़ लीजिये और उसमें से तेल निकाल लीजिये. इसे गरम पानी के साथ मिक्‍स कीजिये और बालों में मसाज कीजिये. 20 मिनट छोड़ने के बाद बालों को धो लीजिये.
 

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Noise Pollution in Hindi - ध्वनि प्रदूषण के कारण और उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Noise Pollution in Hindi - ध्वनि प्रदूषण के कारण और उपाय

आज दुनिया की सबसे मुख्य चिंता प्रदुषण है. मुख्य प्रदूषणों में से एक है ध्वनि प्रदुषण. आज शोरगुल के कई स्त्रोत हो जाने से ये हमारे मुख्य चिंता का विषय बन गया है. इसमें परिवहन प्रणालियों, मोटर वाहन और वैमानिक शौर-शराबा तथा रेल से होने वाला शोर भी शामिल हैं. इसके साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय इमारतें आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण का कारण बन सकते हैं. इसके अन्य स्रोतों में कार्यालय के उपकरण, फैक्टरी मशीनरी, निर्माण कार्य, उपकरण, बिजली उपकरण, प्रकाश व्यवस्था गुनगुनाना एवं ऑडियो मनोरंजन सिस्टम आते है. आइए ध्वनि प्रदुषण के कारण और उपायों को जानें.
ध्वनि प्रदुषण के कारण

1. उद्योग
लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्र ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित हैं कल-कारखानों में चलने वाली मशीनों से उत्पन्न आवाज/गड़गड़ाहट इसका प्रमुख कारण है. ताप विद्युत गृहों में लगे ब्यायलर, टरबाइन काफी शोर उत्पन्न करते हैं.
2. परिवहन के साधन
परिवहन के सभी साधन कम या अधिक मात्रा में ध्वनि उत्पन्न करते हैं. इनसे होने वाला प्रदूषण बहुत अधिक क्षेत्र में होता है. इससे ध्वनि प्रदूषण के साथ वायु प्रदूषण की कल्पना स्वतः की जा सकती है. 
3. मनोरंजन के साधन
मनुष्य अपने मनोरंजन के लिए टी.वी., रेडियो, टेपरिकॉर्डर, म्यूजिक सिस्टम (डी.जे.) जैसे साधनों से अपना मनोरंजन करता है परन्तु इनसे उत्पन्न तीव्र ध्वनि शोर का कारण बन जाती है. विवाह, धार्मिक आयोजनों, मेंलों, पार्टियों में लाऊड स्पीकर का प्रयोग और डी.जे. के चलन भी ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है.
4. निर्माण कार्य
घर बनाने के लिए आजकल लगातार कंस्ट्रक्शन का काम चलता ही रहता है. विभिन्न निर्माण कार्यों में प्रयुक्त विभिन्न मशीनों और औजारों के प्रयोग से भी फलस्वरूप ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है.
5. आतिशबाजी
हमारे देश में विभिन्न त्योहारों, उत्सवों, मेंलों, सांस्कृतिक/वैवाहिक समारोहों में आतिशबाजी एक आम बात है. इन आतिशबाजियों से वायु प्रदूषण तो होता ही है साथ ही ध्वनि तरंगों की तीव्रता भी इतनी अधिक होती है, जो ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्या को जन्म देती है.
6. अन्य कारण
विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक रैलियों श्रमिक संगठनों की रैलियों का आयोजन इत्यादि अवसरों पर एकत्रित जनसमूहों के वार्तालाप से भी ध्वनि तरंग तीव्रता अपेक्षाकृत अधिक होती है. इसी प्रकार प्रशासनिक कार्यालयों, स्कूलों, कालेजों, बस स्टैण्डों, रेलवे स्टेशनों पर भी विशाल जनसंख्या के शोरगुल के फलस्वरूप भी ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है.

ध्वनि प्रदुषण से बचाव के उपाय
1. सरकार और जनता के संयुक्त प्रयासों से ध्वनि तथा शोर की तीव्रता को कम करके हम ध्वनि प्रदुषण से निजात पा सकते हैं.
2. ध्वनि प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिए ये भी बेहद आवश्यक है कि हम ध्वनि एवं शोर को नियंत्रित करें. ताकि इसके प्रभाव को कम किया जा सके.
3. विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों के किनारे हरे वृक्षों की कतार खड़ी करके ध्वनि प्रदूषण से बचा जा सकता है क्योंकि हरे पौधे ध्वनि की तीव्रता को 10 से 15 डी.वी. तक कम कर सकते हैं. महानगरीय क्षेत्रों में हरित वनस्पतियों की पट्टी विकसित की जा सकती है.
4. प्रेशर हार्न बंद किए जाएं, इंजन व मशीनों की मरम्मत लगातार हो. सही तरह से ट्रैफिक का संचालन हो एवं शहरों के नए इलाके बसाते समय सही योजना बने.
5. इसके अतिरिक्त भी हम कई तरह के प्रयास जैसे कि सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल और कई ऐसे अन्य तरीके अपनाकर इसे कम कर सकते हैं.
 

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Air Pollution in Hindi - वायु प्रदुषण के कारण और उपाय

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Air Pollution in Hindi - वायु प्रदुषण के कारण और उपाय

वायु, इस धरती पर जीवित प्राणियों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है. कह सकते हैं कि जीवन का आधार ही वायु है. लेकिन आज हमने वायु को हद से ज्यादा प्रदूषित कर दिया है. इसलिए आज वायु प्रदुषण हमारे जीवन के लिए खतरा बन गया है. हमारे वायुमण्डल में मौजूद वायु का होना हमारे लिए अति आवश्यक है. इसलिए वायुरहित स्थान पर मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि मानव वायु के बिना 5-6 मिनट से अधिक जिन्दा नहीं रह सकता है. आइए हम वायु प्रदुषण के कारणों और इससे बचने के उपायों को समझें ताकि इससे होने वाली समस्या से बचा जा सके.

क्या है वायु प्रदूषण के कारण

1. बढ़ती हुई जनसँख्या
जाहिर है आज हमारी जनसंख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है. बढ़ती हुई जनसँख्या के कारण लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग किया है. शहरों की बदतर होती स्थति का एक कारण इन शहरों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही जनसंख्या भी है. इसके कारण शहरों व नगरों में आवास-समस्या भी उत्पन्न होने लगी है. आवास की समस्या से परेशान लोगों ने बेतरतीब बस्तियों का निर्माण किया जिससे वहाँ पर जल-निकासी, नालियों आदि की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई. इन्हीं गन्दी बस्तियों ने आगे चलकर वायुप्रदूषण को बढ़ावा दिया.
2. बढ़ते हुए उद्योग
उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और कृषि में रासायनों के अंधाधुंध उपयोग से भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा कारखानों में होने वाली भयंकर दुर्घटनाओं की भी भूमिका होती है. भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने की दुर्घटना भी इसी तरह की गत वर्षों की बड़ी दुर्घटना थी. इसमें एक ही समय हजारों व्यक्तियों को असमय मौत का शिकार बनना पड़ा था. ज़िंदा बचे लोग विकंलाग और विकृत हो गए.
3. संचार के साधन
आज बढ़ती आबादी के कारण संचार के विभिन्न साधनों में वृद्धि बहुत अधिक हो रही है. इन साधनों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से इंजनों, बसों, वायुयानों, स्कूटरों आदि की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. ये सभी वाहन अपने धुएं से वायुमण्डल में लगातार असन्तुलन पैदा करने का काम कर रहे हैं.
4. वनों की अंधाधुंध कटाई
हम सभी मनुष्यों ने अपनी सुख-सुविधा के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई की है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा है. जाहिर है वृक्ष वायुमण्डल के प्रदूषण को निरन्तर कम करने का काम करते हैं. पौधे हमारे लिए हानिकारक गैस कार्बन डाई आक्साइड को अपने भोजन के लिए ग्रहण करके जीवनदायिनी गैस आक्सीजन प्रदान करते हैं.
5. परमाणु परिक्षण
हमने आपसी वैमनष्य को इस कदर बढ़ाया कि देशों के बीच लड़ाइयाँ क लगने लगी और हथियारों का होड़ लग गया. इस वजह से लोगों ने परमाणु बम जैसे बेहद घातक और प्रदुषण फैलाने वाला हथियार मिल गया.

वायु प्रदूषण से बचने के उपाय

1. वनों की हो रही अन्धाधुन्ध अनियंत्रित कटाई को रोका जाना चाहिए. इस कार्य में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ व प्रत्येक मानव को चाहिए कि वनों को नष्ट होने से रोके व वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग ले.
2. शहरी करण की प्रक्रिया को रोकने के लिए गाँवों व कस्बों में ही रोजगार व कुटीर उद्योगों व अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए.
3. कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करना चाहिए, साथ ही ऐसी तकनीक उपयोग में लाने के लिए बाध्य करना चाहिए जिससे कि धुएँ का अधिकतर भाग अवशोषित हो और अवशिष्ट पदार्थ व गैसें अधिक मात्रा में वायु में न मिल पायें.
4. जनसंख्या शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए ताकि जनसंख्या वृद्धि को बढ़ने से रोका जाए.
5. वाहनों में ईंधन से निकलने वाले धुएँ को ऐसे समायोजित, करना होगा जिससे की कम-से-कम धुआँ बाहर निकले.
6. ऐसे ईंधन के उपयोग की सलाह दी जाए जिसके उपयोग करने से उसका पूर्ण आक्सीकरण हो जाय व धुआँ कम-से-कम निकले.
7. निर्धूम चूल्हे व सौर ऊर्जा की तकनीकि को प्रोत्साहित करइसे और ज्यादा उन्नत एवं सुलभ बनाना चाहिए.
8. शहरों-नगरों में अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन हेतु सीवरेज को सभी जगह बढ़ावा देना चाहिए.
9. इन सभी चीजों को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों में इसके प्रति चेतना एवं जागृत फैलाई जानी चाहिए.
10. इसकी जानकारी व इससे होने वाली हानियों के प्रति मानव समाज को सचेत करने हेतु प्रचार माध्यम जैसे दूरदर्शन, रेडियो पत्र-पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्रचार करना चाहिए.
 

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Nariyal Ke Doodh Ke Fayde Aur Nuksan in Hindi - नारियल के दूध के फायदे और नुकसान

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Nariyal Ke Doodh Ke Fayde Aur Nuksan in Hindi - नारियल के दूध के फायदे और नुकसान

कोकोनट मिल्क जिसको हिंदी में नारियल का दूध कहा जाता है इसे नारियल को कस करके निकाला जाता है. अधिक मलाईदार होने के कारण, इसको दूध के विकल्प में इस्तेमाल किया जा सकता है. नारियल के दूध में विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन बी-1, विटामिन बी-3, विटामिन बी-5 और विटामिन बी-6 के साथ-साथ लोहा, सेलेनियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस में समृद्ध होता है. इस प्रकार, यह मिठाई मलाईदार तरल एक स्वस्थ आहार का एक हिस्सा हो सकता है और जिन लोगों को पशु दूध से एलर्जी होती है यह उन लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प है. नारियल के दूध के फायदे और नुकसान निम्नलिखित हैं.

1. वजन कम करने में
नारियल का दूध फाइबर में समृद्ध है जिससे आपको लम्बे समय तक भूख नहीं लगती है. और यदि आप इसका सेवन सिमित मात्रा में करते हैं तो वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
2. त्वचा के लिए
इसकी मॉइस्चराइजिंग गुणों के कारण, नारियल के दूध से छालरोग, डर्मेटाइटिस और एक्जिमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है. इस दूध में प्राकृतिक फैटी एसिड ड्राई और खुरदरी त्वचा का इलाज करने और आपकी त्वचा से हानिकारक बैक्टीरिया को दूर करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा नारियल का दूध मेकअप रिमूवर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. आप 1: 2 के अनुपात में नारियल तेल और नारियल दूध को मिक्स कर सकते हैं और आई मेकअप हटाने के साथ-साथ त्वचा को मॉइस्चराइज करने के लिए इस मिश्रण का उपयोग करें. इस प्रकार, यह आपके चेहरे के सबसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास मेक-अप से छुटकारा पाने के लिए एक बहुत ही बढ़िया विकल्प है.
3. मजबूत हड्डियों के लिए
हालांकि नारियल के दूध में नियमित रूप से उपयोग किये जाने वाले दूध ज्यादा कैल्शियम नहीं होता है, लेकिन यह फास्फोरस का एक समृद्ध स्रोत है. इसलिए यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है.
4. हेयर कंडीशनर के रूप में
नारियल का दूध एक बहुत ही अच्छा हेयर कंडीशनर है. ये आपको लंबे और मोटे बाल प्रदान करता है. आप अपने हाथों में बराबर मात्रा में नारियल के दूध और शैंपू को लेकर बालों को शैम्पू करें और उसके बाद अच्छे से धो लें.
5. त्वचा के लिए
नारियल का दूध एक बहुत ही अच्छा मॉइस्चर है. ये निर्जलित त्वचा में नमी को बढ़ा सकता है. एक कप गुलाब की पंखुड़ी, आधा कप गुलाब जल और एक कप नारियल के दूध को गुनगुने स्नान करने वाले पानी में मिलाकर इससे स्नान करें. आप सीधे अपनी त्वचा पर नारियल के दूध को रगड़ सकते हैं और अवशोषित होने के लिए इसे 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ सकते हैं.
7. बचाए सनबर्न से
सन बर्न से बचने के लिए नारियल के दूध की पतली परत को सनबर्न क्षेत्र में लगाएं. इस दूध में वसा और तेल की मदद से लालिमा कम हो जाती है और त्वचा की नमी वापिस आ जाती है. नारियल के दूध को रात भर प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर लगाकर छोड़ दें और सुबह उठ कर स्नान कर लें.
7. गठिया का इलाज
इसमें मौजूद सेलेनियम एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो मुक्त कणों को नियंत्रित करने और जोड़ों की सूजन के जोखिम को कम करने के द्वारा गठिया के लक्षणों से दूर रखने में मदद करता है.
8. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में
यह मक्खन और डेयरी आधारित क्रीम की तुलना में, कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम कर सकता है. ये हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी में मददगार हो सकता है. इसका कारण यह है कि इसमें लैरीक एसिड पाया जाता है जो एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है.
9. बढ़ती उम्र को कम करे
नारियल के दूध में मौजूद तांबे और विटामिन सी के कारण, यह त्वचा की लोच बढ़ाने में मदद करता है. ये पोषक तत्व त्वचा और रक्त वाहिकाओं के लचीलेपन को बनाए रखने के द्वारा आपकी त्वचा और शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं.
10. मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत
नारियल का दूध मैग्नीशियम का एक समृद्ध स्रोत है. यह खनिज तंत्रिकाओं को शांत करने और रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करता है. इससे मांसपेशियों के संकुचन में कमी आती है जिससे आपको अधिक आराम महसूस होता है.
11. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए
इसमें लोरिक एसिड, रोगाणुरोधी लिपिड और कैपिक एसिड होने के अलावा इसमें जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं. मानव शरीर में प्रवेश करने पर लोरिक एसिड मोनोलॉरिन नामक एक यौगिक में परिवर्तित हो जाता है जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए जाना जाता है.
12. बालों के लिए
सिर पर नारियल का दूध लगाने से ठंडक मिलती है. यह बालों से लेकर जड़ों तक प्राकृतिक पोषण प्रदान करता है. आप तीन से पांच मिनट के लिए कुछ ताजा होममेड नारियल के दूध से मालिश करें. इसे 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें. यह बालों के विकास को बढ़ाने में मदद करेगा. यह क्षतिग्रस्त, कमजोर और दोमुंहे बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है.

नारियल के दूध के नुकसान

  • यदि आपको ट्री नट्स से एलर्जी है, तो आप इसका इस्तेमाल न करें.
  • यदि आप इसका अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो आपका वजन बढ़ सकता है.
  • हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को बहुत अधिक मात्रा में नारियल दूध के सेवन से बचना चाहिए.
  • कुछ लोगों में पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है.
     
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