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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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एचआईवी एड्स के लक्षण - HIV Aids Ke Lakshan!

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एचआईवी एड्स के लक्षण - HIV Aids Ke Lakshan!

ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस एक लेंटिवायरस है, जो अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) का कारण बनता है. एड्स के कारण बॉडी की इम्यून सिस्टम विफल होने लगता है और इसके कारण ऐसे संक्रमण हो जाते हैं, जिनसे मृत्यु का जोखिम होता है. एचआईवी का इन्फेक्शन ब्लड इनफ्युजन, स्पर्म, वेजाइवनल फ्लूइड, डिस्चार्ज से पहलें निकलने वाली द्रव या मां के दूध से होता है. इन शारीरिक द्रवों में, एचआईवी मुक्त जीवाणु कणों और प्रतिरक्षा कोशिकाओं के भीतर उपस्थित जीवाणु, दोनों के रूप में उपस्थित होता है. एड्स के फैलाव के चार प्रमुख मार्ग हैं असुरक्षित यौन-संबंध, संक्रमित सुई, मां का दूध और किसी संक्रमित मां से उसके बच्चे को जन्म के समय होने वाला संचरण. एचआईवी की उपस्थिति का पता लगाने के लिये रक्त-उत्पादों की जांच करने के कारण रक्ताधान अथवा संक्रमित रक्त-उत्पादों के माध्यम से होने वाला संचरण विकसित विश्व में बड़े पैमाने पर कम हो गया है. आइए इस लेख के माध्यम से हम एचआईवी/एड्स होने के विभिन्न लक्षणों पर एक नजर डालें ताकि इस विषय में लोगों को जागरूक करके इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सके.

एचआईवी/एड्स के लक्षण-

अधिकांश एचआईवी से संक्रमित मरीजों को फ्लू जैसे लक्षणों को बहुत कम समय तक अनुभव करते हैं जो इन्फेक्शन होने के 2-6 सप्ताह बाद होते हैं. इसके बाद हो सकता है एचआईवी के कई सालों तक कोई लक्षण न हों. यह देखा गया है कि एचआईवी से संक्रमित 80 प्रतिशत लोगों को फ्लू जैसे लक्षण होते हैं. इन लक्षणों का होना मतलब यह नहीं है कि आपके शरीर में एचआईवी वायरस है. यह लक्षण किसी और स्थिति के कारण भी हो सकते हैं. इनमे सबसे आम लक्षण हैं:

1. एचआईवी के दौरान अक्सर कई मरीजों को बुखार होना या गले में ख़राश होने की शिकायत होती है.
2. कई बार हमें एचआईवी पीड़ितों के शरीर पर चकत्ते या इसी तरह की अन्य संरचनाएं भी दिख सकती हैं.
3. इस गंभीर बीमारी में आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाने के कारण आपको थकान होगा.
4. इस दौरान कई लोगों के जोड़ों में दर्द का अनुभव भी हो सकता है. ऐसा कमजोरी के कारण हो सकता है.
5. कई एचआईवी पीड़ितों को इस दौरान उनकी मांसपेशियों में दर्द का भी अनुभव हो सकता है.
6. एचआईवी जैसी खतरनाक बीमारी में कई लक्षण नजर आते हैं इनमें से एक ग्रंथियों में सूजन भी है.
7. एचआईवी की बीमारी बहुत खतरनाक होती है. इस दौरान मरीज का वज़न लगातार घटता जाता है.
8. एड्स से पीड़ित व्यक्ति को बहुकालीन दस्त की समस्या भी हो सकती है.
9. रात को पसीना आने की समस्या भी कई एचआईवी पीड़ितों ने बताई है.
10. एड्स के दौरान आपको त्वचा की समस्याएं भी हो सकती हैं.
11. इसके कई लक्षणों में से एक ये भी है कि इसमें मरीज को बार-बार संक्रमण होता रहता है.
12. एचआईवी के दौरान आपको कई तरह की गंभीर जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं.

कब तक रह सकते हैं एड्स के ये लक्षण?
आमतौर पर एचआईवी के ये लक्षण 1-2 सप्ताह तक रहते हैं लेकिन ज़्यादा समय के लिए भी रह सकते हैं. ये लक्षण सिर्फ इस बात का संकेतक है की आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के खिलाफ लड़ रही है. एक बार जब प्रतिरक्षा प्रणाली बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है तो इसके अतिरिक्त भी कई अन्य बेहद गंभीर लक्षण नजर आ सकते हैं.

भगन्दर का होम्योपैथिक इलाज - Bhagandar Ka Homeopathic Ilaj!

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भगन्दर का होम्योपैथिक इलाज - Bhagandar Ka Homeopathic Ilaj!

होम्योपैथ आज एक प्रमाणित इलाज पद्धति के रूप में काफी लोकप्रिय है. इस पद्धति के तहत कई बीमारियों का प्रभावी उपचार किया जाता है. भगंदर जैसी बीमारियों का उपचार भी होम्योपैथ के द्वारा किया जा सकता है. भगंदर खुदा के आसपास होने वाली रेप बेहद खतरनाक और गंभीर बीमारी है. इस के शुरुआती लक्षणों में मलद्वार से खून निकलना गुदा के आसपास छोटे-मोटे फोड़े होना उन फूलों से मवाद आदि निकलना है. भगंदर की बीमारी पीड़ितों को काफी दर्द देने वाली होती है. कई बार तो लोग इस कदर झेल भी नहीं पाते. आमतौर पर यह बीमारी मांसाहारी लोगों और ज्यादा मात्रा में तेल मसाला का इस्तेमाल करने वाले लोगों को होता है. ऐसा भोजन करने से गोदा के आसपास फोड़े में जल्दी सूजन आ जाती है और इन फोड़ों फूलों से मवाद भी निकलना शुरू हो जाता है. इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए इनके प्राथमिक लक्षण नजर आते ही आपको तुरंत किसी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए ताकि आप समय रहते इस बीमारी के कुचक्र से निकल सकें. आइए हम आपको इस लेख के माध्यम से भगंदर के होम्योपैथी इलाज के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दें ताकि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को इस विषय में जागरूक किया जा सके.

1. हिपर सल्फर 6, 30m

भगंदर जैसी गंभीर बीमारी का होम्योपैथ में कई बेहतर इलाज उपलब्ध है. हिपर सल्फर 6, 30m भगंदर के उपचार में काफी मददगार साबित होता है. इस दवाई किस होम्योपैथिक दवाई का सेवन आपको तब करना चाहिए जब आपको बहुत तेज दर्द महसूस होने लगे. जब भगंदर के मरीज इस दवा का नियमित सेवन करने लगते हैं तो कुछ दिन बाद ही उन्हें आराम मिल जाता है. इसके अलावा इस दवाई के सेवन से थोड़े से मवाद निकलते समय मरीज को दर्द का अनुभव नहीं होता है.

2. मिरिस्टिका 3x
जिन भगंदर के मरीजों का दर्द हिपर सल्फर खाने के बाद भी कम होता हुआ ना महसूस हो उन लोगों को मिरिस्टिका 3X का सेवन करना चाहिए. इसमें पर्ची दवाई के सेवन से आप तो दर्द तो कम होता ही है. इसके अलावा यह दवा कुछ ही दिनों में रोगी को भैया ने परेशानियों से भी राहत दे सकती है. जिन व्यक्तियों को ज्यादा परेशानी है वो इसका सहारा ले सकते हैं.

3. सल्फर 30, 200m
भगंदर के पीड़ितों को इस बीमारी से बचने के लिए होम्योपैथिक दवाइयों का सहारा लेना चाहिए. होम्योपैथिक दवाइयों में भी इस बीमारी को दूर करने की क्षमता होती है. भगंदर होने पर जब मलद्वार में सूजन आ जाती है या फिर मल त्याग करते समय गुदा में दर्द उत्पन्न होने लगता है तब आप इस दवाई का सेवन करें. सल्फर 30 दूसरों के सेवन से भगंदर का सूजन और उसका प्रभाव भी कम होता है. इसलिए आप इस दौरान इसका इस्तेमाला करके अपनी परेशानी को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

4. सिलिसिया 200m
भगंदर की बीमारी का उपचार करने के क्रम में सिलिसिया 201 एवं का इस्तेमाल तब करें जब आपको चलने-फिरने अमल त्यागने में अत्यधिक दर्द का अनुभव होने लगे या फिर मलद्वार के पास के फोड़े से तीव्र गंध वाली मवाद निकलने लगे. जैसे ही आप इस दवा का सेवन करेंगे आप देखेंगे कि भगंदर के लक्षण धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं. इस प्रकार आप इसके इस्तेमाल से भगंदर की बीमारी से निजात पा सकते हैं.

नोट: - उपरोक्त सभी दवाइयाँ शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए हैं. इसलिए यदि आप इन्हें इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है. क्योंकि इन दवाइयों के विषय में उचित राय विशेषज्ञ ही दे सकते हैं. अतः आप इसे स्वयं इस्तेमाल करने की गलती न करें.

हेल्थ बनाने के तरीके - Health Bnane Ke Tarike!

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हेल्थ बनाने के तरीके - Health Bnane Ke Tarike!

हैल्थ इज वेल्थ वाली कहावत तो आपने भी सुनी ही होगी. दरअसल ये बात शत प्रतिशत सही है. क्योंकि बिना स्वास्थ्य के इस दुनिया में कुछ भी नहीं है. इस संसार में जीवन यापन करने के लिए आपके शरीर का ठीक ढंग से काम करना बेहद आवश्यक है. यदि आप अभी तक अपने हेल्थ को लेकर सचेत नहीं हैं तो अब आपको इसे लेकर सचेत हो जाना चाहिए.

सण्‍डे हो मण्‍डे रोज खाएं अण्‍डे-
अपने दिन की शुरुआत उबले अण्‍डों से कीजिए. सुबह नाश्‍ते में दो अण्‍डे खाने से आपकी मांसपेशियां और वजन तेजी से बढ़ेगा. अण्‍डा प्रोटीन का उच्‍च स्रोत होता है. एक अंडे में छह से आठ ग्राम तक प्रोटीन होता है. इसके साथ ही इसमें जिंक, विटामिन, आयरन और कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह सब चीजें मिलकर इसे एक कम्‍प्‍लीट आहार बनाते हैं.

कलेजी-
चिकन जिम जाने वालों के लिए अति आवश्‍यक आहार माना जाता है. हर सौ ग्राम कलेजी में 30 ग्राम प्रोटीन होता है और इसमें वसा की मात्रा बहुत कम होती है. इनकी कीमत भी कम होती है साथ ही इन्‍हें बनाना भी आसान होता है.

पानी है जरूरी-
पानी कई मामलों में आहार से भी ज्‍यादा जरूरी हो जाता है. हमारे शरीर का 70 फीसदी हिस्‍सा पानी होता है और मांसपेशियां 75 प्रतिशत पानी की बनी होती हैं. अपनी मांसपेशियों में तरलता बनाए रखने और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए पानी बेहद जरूरी है. इससे एनर्जी लेवल बढ़ता है और पाचन क्रिया ठीक रहती है. अपने वजन के अनुसार पानी पीना चाहिए.

अनानास-
अनानास में मौजूद तत्‍व ब्रोमिलीन प्रोटीन को पचाने में मदद करता है. इसके साथ ही यह मांसपेशियों में जलन को भी कम करता है. इसलिए वर्क आउट के बाद आपके आहार में जरूर शामिल करें. यह खाने में भी लजीज होता है, इसलिए आप एक बार जो इसे खाना शुरू करेंगे तो बस खाते ही जाएंगे.

पालक-
एक रिसर्च के अनुसार पालक मांसपेशियों के निर्माण की गति 20 फीसदी तक बढ़ा देती है. रोजाना करीब एक किलो पालक खाने से आपको काफी फायदा मिलेगा. शाकाहारी लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी आहार है.

शकरकंदी-
मांसपेशियां बनाने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए यह बहुत उपयोगी हो सकती है. इनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है. यह शरीर के लिए बेहद जरूरी पौष्टिक तत्‍व होता है. यह मांसपेशियों के लिए भी मददगार होता है. इसके साथ ही इसमें विटामिन और मिनरल की भी प्रचुर मात्रा होती है. इससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी नियंत्रित रहता है.

बादाम-
बादाम तो लंबे समय से ताकत और बुद्धिमत्‍ता की पहचान रहा है. इसमें प्रोटीन और वसा प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. लेकिन, सबसे अहम इसमें पाया जाने वाला विटामिन ई होता है, जो मांसपेशियों के निर्माण में काफी अहम होता है. यह शक्तिशाली एंटी-ऑक्‍सीडेंट शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे आपको व्‍यायाम से जल्‍द रिकवर होने में मदद मिलती है.

पनीर-
कुछ लोगों की नजर में यह खाने के बाद मुंह का जायका बदलने की चीज भर हो सकती है. लेकिन मांसपेशियों के निर्माण में यह बहुत उपयोगी होता है. कॉटेज चीज के एक कप में 28 ग्राम प्रोटीन होता है. इसे खाने के बाद काफी देर तक भूख भी नहीं लगती.

ब्रोकली-
कसरत के बाद के अपने आहार में ब्रोकली, पालक, टमाटर, मक्‍का और प्‍याज जैसे फाइबरयुक्‍त पदार्थों को शामिल करें. दिन में कम से कम पांच से सात बार फलों और सब्जियों का सेवन करें. विटामिन, मिनरल और फाइबर का इससे बेहतर अन्‍य कोई भोजन नहीं हो सकता. अपनी सब्जियों को अधिक न पकाएं इससे उनमें मौजूद पौष्टिक पदार्थ समाप्‍त हो जाते हैं.

चॉकलेट मिल्‍क-
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ स्‍पोटर्स एंड एक्‍सरसाइज मेटाबॉलिज्‍म, में प्रकाशित एक स्‍टडी के अनुसार, चॉकलेट मिल्‍क स्‍पोटर्स ड्रिंक्‍स जैसा ही फायदेमंद होता है. इससे व्‍यायाम का पूरा लाभ भी मिलता है साथ ही साथ शरीर खोई हुयी ऊर्जा भी जल्‍द ही हासिल कर लेता है.

साबुत अनाज-
अगर जिम के दौरान उचित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट न मिले तो मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती है. इसलिए शरीर को भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स देने के लिए साबुत अनाज खाना चाहिए. साबुत अनाज जैसे – चावल, गेहूं, बाजरा, दलिया आदि हैं. यदि आपके पास ज्यादा एनर्जी होगी तो आप ज्यादा देर तक व्‍यायाम कर सकते हैं.

फल-
ताजे फल जिम के दौरान शरीर का ऊर्जा प्रदान करने के लिए बहुत ही आवश्यक हैं. संतरा और सेब मांसपेशियों के निर्माण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण फल हैं. संतरे में विटामिन बी और सेब में पेक्टिन पाया जाता है जो मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं.

सूखे मेवे-
सूखे मेवे में प्रोटीन ओर विटामिन की ज्यादा मात्रा होती है. हालांकि इनमें फैट भी अच्छी मात्रा में होता है लेकिन यह स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक नहीं होता है और इससे मोटापा नहीं बढता है. जिम करने वाले को हर रोज लगभग, 15-20 बादाम, काजू और अखरोट आदि का सेवन करना चाहिए.

दुबले-पतले शरीर वाले लोगों के लिए-
हाइप्रोटिन फूड रेग्युलर डाइट में शामिल करें. हाई कैलोरी का खाना खाएं. उन खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जिनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो. सुबह हेवी नाश्ता करें. च्यवनप्राश वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधी है. शतावरी कल्पा लेने से न सिर्फ आंखें और मसल्स अच्छी रहती है बल्कि इससे वजन भी बढ़ता है. वसंतकुसुमकर रस वजन को जल्दी बढ़ाने में भी लाभकारी है. अश्वगंधा वलेहा को पानी और दूध से लेने से जल्दी असर करता है. 50 ग्राम किशमिश को साफ पानी में भिगो दें. सुबह-सुबह उठकर तीन महीनों तक इसका सेवन लगातार करें. ऐसा करने से आपका वजन जल्दी ही बढऩे लगेगा. इसके साथ ही नाश्ते के समय बादाम का दूध या मक्खन, घी इत्यादि भी लेते रहने से आप स्वस्थ रहेंगे और अपना वजन भी बढ़ा पाएंगे.

रिलेशनशिप टिप्स- ताकि रिश्तों के बीच कभी दूरियां ना आएं - Relationship Tips- Taki Rishton Ke Bich Kabhi Dooriyan Na Aayen!

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रिलेशनशिप टिप्स- ताकि रिश्तों के बीच कभी दूरियां ना आएं - Relationship Tips- Taki Rishton Ke Bich Kabhi Dooriyan Na A...

हेल्दी रिलेशनशिप आजकल एक मिथ्य बनाता जा रहा है. इसका मूल कारण तो तेजी से बदलती हुई जीवनशैली है. लोगों के अतिरिक्त काम इतने ज्यादा हो गए हैं कि उनके पास रिश्तों के लिए समय ही नहीं मिल पाता. ऐसे में ही रिश्ते गड़बड़ होने लगते हैं. कई बार तो केवल बातचीत किए हुए ही बरसों हो जाते हैं. अगर आप भी अपने रिश्ते में नई जान डालना चाहते हैं, अपने साथी के साथ अपने प्यार को और मजबूत करना चाहते हैं, तो इसके लिए किसी को तो पहले एफर्ट करनी ही होगी. बिना मेहनत के कोई भी चीज सुंदर नहीं बनती, भले ही वह कोई रिश्ता ही क्यों न हो. इस लेख के माध्यम से हम रिश्तों की अहमियत और हेल्दी रिलेशनशिप के टिप्स के बारे में जानेंगे ताकि इस विषय में हमारी समझ बढ़े.

1. रिश्तों के लिए समय निकालें

कम से कम एक घंटा दिन और घंटा रात में ऐसा निकालें, जब आप दोनों एक दूसरे से बातें कर सकें. रिश्ते में सुविधा का ध्यान रखना भी जरूरी है. परिवार में बच्चें हैं, तो साथी को उनकी देखभाल के लिए कहें, फिर भले ही वे इसके लिए बेहतर विकल्प हों या नहीं.

2. बातचीत को करें नया और रोमांचक
जब वह आपकी बातें ध्यान से सुन रहे हों, तो उन्हें इसके लिए धन्यवाद कहें, ताकि भविष्य में भी वह इसके लिए प्रोत्साहित हों. रिश्ते में ताजगी के लिए कुछ नया और रोमांचक करने की आदत डालें, जो रिश्ते को मज़बूती और सा‍थी के चेहरे पर प्यारी से हंसी दे.

3. बातचीत के जरिए दूर करें मनमुटाव
अगर साथी की किसी बात से नाराज हैं, तो उन्हें खुल कर बताएं. क्योंकि मन में दबे मन मुटाव रिश्तों में जहर का काम करते हैं. प्रेमी जोड़ों में विवाद का सबसे बड़ा कारण पैसा होता है, इसलिए आर्थिक मुद्दों पर मिलकर चर्चा करें व बजट बनाएं.

4. एकदूजे की सुविधाओं का रखें ध्यान
अपने नियमित कार्यों की एक सूची बनाएं और इस पर अपने साथी से चर्चा करें. और सहमति से कामों को पूरे परिवार में विभाजित कर दें. एक-दूसरे की जरूरतों और सुविधाओं का ख्याल रखें. जीवन साथी पर निर्भरता को नियंत्रित रखें. उन्हें बताएं कि वे आपके जीवन में कितने जरूरी हैं, लेकिन आवश्यक दूरी का भी ध्यान रखें.

5. यदि बहस करें तो भी तोल-मोल कर बोलें
बोरियत गुस्से की निशानी होती है, बोरियत महसूस हो रही हो, तो खुद से पूछें कि आखिर कौन सी बात है, जिससे आपको गुस्सा आया है. बेहतर तरीके से बात और बहस करना सीखें. बहस के दौरान कभी भी कुछ ऐसा न बोलें, जो आप खुद सुनना पसंद नहीं करते. काम और जरूरतों में मोल-तोल करना सीखें. जहां दोनों के मत अलग हों, वहां साथ बैठकर बातचीत से कोई बीच का रास्ता निकालें.

6. मीठी सी मुस्कान के साथ करें दिन की शुरुवात
एक-दूसरे को विश्वांस में लेना और अपनी रुचियों को साझा करना सीखें. कभी भी एक-दूसरे के सम्मान को आहत न करें. दिन की शुरुआत एक मीठी मुस्कान के साथ करें. सुबह उठते ही एक-दूसरे को देखकर मुस्काएं और प्यार के साथ दिन की शुरुआत करें.

7. लगातार बातचीत करते रहें और इसे मनोरंजक बनाते रहें
जिंदगी में साथ मुस्कराने को अपनी आदत बनाएं. जीवन साथी के साथ चुटकुले या जिंदगी के मजाकिया किस्से बांटते रहें. इस तरह से लगातार बातचीत करते रहें और इसे मनोरंजक बनाना भी हेल्दी रिलेशनशिप का एक टिप्स है.

8. समय-समय पर एकदूजे का हाथ थामें और गले लगाएं
सोने से पहले लव नोट लिख कर एक-दूसरे के सिरहाने तले छिपा दें. बाद में उन्हें निकालकर एक साथ पढ़ें. जब भी आपको मौका मिले, एक-दूसरे को गले जरूर लगाएं. बिस्तर पर टीवी देखते समय भी एक-दूसरे को गले लगाएं. हाथ न थामना अच्छा संकेत नहीं है, इसे अपनी आदत में शुमार न करें. कोशिश करें कि दिन में एक बार एक-दूसरे का हाथ जरूर थामें.

9. एकदूसरे में डूब जाएं
एक-दूसरे के लिए समय जरूर निकालें. इस खास समय में अपने मन की बातें कहें और साथी की बातें भी सुनें. एक साथ शोपिंग, पिकनिक या सैर पर जाएं. इस दौरान एक-दूसरे के साथ को पूरी तरह से महसूस करें. कभी-कभी समय निकाल कर एक-दूसरे के साथ कॉफी या डिनर पर बाहर जाएं, और प्यार को बढ़ने का मौका दें.

कमजोरी दूर करने के घरेलू नुस्खे - Kamzori Door Karne Ke Gharelu Nuskhe!

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कमजोरी दूर करने के घरेलू नुस्खे - Kamzori Door Karne Ke Gharelu Nuskhe!

कमजोरी का अनुभव करना एक सामान्य समस्या हैं. कमजोरी को शारीरिक या मांसपेशियों में कमी और रोजाना के कार्यो को करने में अतिरिक परिश्रम की आवश्यकता को ही कमजोरी के रूप में दर्शाया जाता है. कमजोरी दूर करने के लिए कुछ लोग तो बाजार से तमाम स्वास्थ्यवर्धक औषधियों को इस्तेमाल करते हैं. इन औषधियों के कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं. हलांकि इसके लिए आपको अपनी रोजाना की दिनचर्या बदलने से लेकर कई अन्य तरीकों को भी अपनाना चाहिए. कमजोरी के अन्य लक्षणों में बहुत ज्यादा पसीना आना, भूख की कमी, फोकस करने में कठिनाई और पर्याप्त नींद नहीं लेना शामिल हैं. आप आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण भी कमजोर महसूस कर सकते हैं जैसे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, अत्यधिक शराब पीना, भोजन छोड़ना, भावनात्मक तनाव और अत्यधिक शारीरिक श्रम आदि. कई सरल घरेलू उपाय को अपना कर भी ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं और आपकी शक्ति को बहाल कर सकते हैं. इस लेख के माध्यम से आप हेल्थ बनाने के तरीकों के बारे में जानेंगे.

1. अंडे-

कमजोरी से लड़ने के लिए सबसे बेहतर और सरल उपायों में से एक संतुलित आहार का सेवन करना हैं. अंडे के सेवन करना भी एक संतुलित आहार में शामिल है. अंडे में प्रोटीन, आयरन, विटामिन ए, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन और पैंटोफेनीक एसिड जैसे भरपूर पोषक तत्व हैं. अंडे को किसी भी समय कमजोरी को दूर भगाने के लिए खा सकते है. आप एक हार्ड बॉईल एग, पनीर या हरी सब्जियों के साथ एक आमलेट या एग सैंडविच खा सकते हैं.

2. दूध-
दूध को विटामिन बी का सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है जो कमजोरी को दूर भगाने के लिए जाना जाता है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है जो आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है.

3. एक्यूप्रेशर-
यह एक स्पर्श थेरेपी है जिसमें बॉडी को पुनर्जीवित करने के लिए बॉडी के कुछ विशिष्ट बिंदुओं पर प्रेशर का उपयोग किया जाता है. भौंह के बीच, कंधे की मांसपेशियों में लोअर नैक की साइड में 1-2 इंच, घुटने के नीचे, छाती के बाहरी भाग पर, नाभि के नीचे तीन उंगली की चौड़ाई के बिंदुओं पर प्रेशर डालने से सामान्य कमजोरी से छुटकारा पा सकते हैं.

4. मुलेठी-
मुलेठी एक औषधीय जड़ी बूटी है जो कमजोरी के अलग-अलग लक्षणों से लड़ सकती है. इस जड़ी बूटी ने प्राकृतिक रूप से शरीर द्वारा निर्मित एड्रि‍नल हार्मोन को प्रेरित करता है जिससे आपकी एनर्जी और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है.

5. केला-
केले फ्रुक्टोज, ग्लूकोज और सुक्रोज़ जैसे नैचुरल शुगर का एक बड़ा स्रोत है जो आपको शीघ्र और पर्याप्त ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा केले में पोटेशियम पायी जाती है, जो एक मिनरल है जिसे आपके बॉडी को शुगर से एनर्जी में बदलने की जरूरत है. केले में मौजूद फाइबर आपके ब्लड में ग्लूकोज लेवल को बनाए रखने में भी सहायता करता है.

6. एक्सरसाइज-
रोजाना एक्सरसाइज और सरल शारीरिक एक्टिविटी से आपकी स्टैमिना बढती हैं और आपकी मसल्स की ताकत बढ़ाती है. सुबह का समय एक्सरसाइज के लिए सबसे अच्छा होता है. दैनिक रूप से 15 मिनट के लिए वार्म अप और स्ट्रेचिंग आपको फ्रेश और एनेर्जेटीक रखेंगी. योग और ध्यान भी आपके एनर्जी के लेवल को हाई रखने के लिए एक बेहतर तरीका है.

7. स्ट्रॉबेरी-
स्ट्रॉबेरी आपको पूरे दिन उर्जा की कमी का अनुभव नहीं होने देता हैं. यह विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से समृद्ध हैं जो बॉडी के टिश्यू को रिपेयर करने में में मदद करते हैं, इम्यून को बढ़ावा देते हैं और फ्री एलेमेंट्स की क्षति से रक्षा करते हैं. इसके अलावा, आपको स्ट्रॉबेरी से मैंगनीज, फाइबर और पानी की एक स्वस्थ खुराक मिलती है.

8. आम-
आम एक मीठा और रसीला फल है जिसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं. आम आहार फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कॉपर का भी एक समृद्ध स्रोत हैं. इसके अलावा, आम में मौजूद आयरन बॉडी में रेड ब्लड सेल्स की संख्या को बढ़ाकर कमजोरी दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा, आम में स्टार्च होता है जो कि शुगर में परिवर्तित होता है जो आपको शीघ्र ऊर्जा प्रदान करता है.

9. बादाम-
बादाम विटामिन ई से समृद्ध हैं जो आपको ऊर्जावान महसूस करा सकते हैं और सामान्य कमजोरी के लक्षणों से लड़ने में मदद करता हैं. इसके अलावा बादाम में मैग्नीशियम की हाई डोज़ प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा स्रोतों में बदलने में एक अच्छी भूमिका निभाती है. मैग्नीशियम की कमी कुछ लोगों में कमजोरी का कारण हो सकती है.

10. आंवला-
आंवला एक पौष्टिक फल है जो आपके एनर्जी लेवल को सुधार सकता है. यह विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट और फास्फोरस का एक समृद्ध स्रोत है. हरदिन केवल एक आंवला खाने से भी आप अपनी कमजोर इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं.

11. कॉफी-
कॉफी में मौजूद कैफीन माइंड को एक्टिव करता है और आप में तत्काल ऊर्जा को बढ़ावा देता है. कॉफी को सिमित मात्रा में पीने से कोई नुकसान नहीं होता है. ऊर्जावान महसूस कराने के अलावा, यह आपके मेटाबोलिक रेट में भी सुधार कर सकती है, फोकस में सुधार कर सकती है और दर्द कम कर सकती है. प्रति दिन दो कप कॉफी से ज्यादा पीना न पिएं. इसके अधिक सेवन से चिंता और अनिद्रा जैसी जोखिम बढ़ सकते हैं.

हेयर स्पा के फायदे - Hair Spa Ke Fayde!

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हेयर स्पा के फायदे - Hair Spa Ke Fayde!

हेयर स्पा आपके बालों की लगभग सभी समस्याओं का बेहतरीन उपचार है. दरअसल सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हेयर स्पा नीरस और बेजान बालों के लिए पहला और शायद आखिरी सर्वोत्तम उपचार है. बेजान और हलके बालों के उपचार के अलावा, हेयर स्पा झड़ते बालों, क्षतिग्रस्त बालों, दोमुंहे बालों और रूसी आदि सामान्य बालों की समस्याओं का इलाज भी करता है. यही कारण है कि यह सभी उम्र के लोगों के लिए एक बढ़िया हेयर ट्रीटमेंट के रूप में उभरा है. आइये इस लेख के माध्यम से हेयर स्पा के फायदों पर एक नजर डालें.

क्या हो सकता है हेयर स्पा से?

हेयर स्‍पा बालों की खूबसूरती बढाने में मदद करता है. इसके साथ ही हेयर स्पा बालों का टेक्सचर और चमकदार बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है. यह बालों के फ्रिजनेस को कम करता है, जिससे बालों को मनपसंद स्टाइल दिया जा सकता है.

हेयर स्‍पा कराने में लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है. यह बालों के विभिन्न प्रकार के ट्रीटमेंट्स में उपयोगी है. हेयर स्‍पा में मसाज, क्रीम, मशीन और हेयर मास्क इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है. किसी भी प्रकार के ट्रीटमेंट को शुरू करने से पहले बालों को अच्छे से शैंपू किया जाता है. बालों के टेक्सचर के मुताबिक क्रीम चुनकर उससे तकरीबन 45 मिनट मसाज दी जाती है.

जुल्फों को हेयर स्पा की देखभाल दें-
हेयर स्पा के बारे में अधिकांश लोग जानते नहीं हैं लेकिन फिर भी यह तेजी से लोगों के बिच में प्रचलित हो रहा है. हेयर स्पा की माध्यम से आप अपने बालोंको नयी ताजगी दे सकते है. इससे आपके मानसिक तनाव भी कम होता है. लाइफस्‍टाल के कारण बालों की सही देखभाल कर पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है, ऐसे में बालों की प्राकृतिक सुंदरता को बरकरार रखने में हेयर स्‍पा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

स्पा कल्चर-
आज कल हेयर स्पा बहुत आसानी से आपको हर जगह उपलब्ध हो जाएगी. इसके लिए आपको ज्यादा पैसे भी खर्च नही करने पड़ते. अब हमारी तेज-रफ्तार जिंदगी के दौर में, डे स्पा एक आदर्श विकल्प बन गया है. वास्तव में, अधिकतर सैलूनों ने डे स्पा की सुविधा देनी शुरू कर दी है इसलिए आपको अब स्पा का आनंद और फायदे लेने के लिए कोई दूर की यात्रा करने की ज़रूरत नहीं रही.

हेयर स्पा के लाभ-
आपके बालों की बनावट और चमक को नये सिरे से सुधारने के लिए हेयर स्पा एक आदर्श तरीका है. हेयर स्पा में ऑयल मसाजिंग, शैम्पू , हेयर मॉस्क और कंडीशनिंग शामिल होते हैं. इससे आपके बालों में फिर से चमक और नमी वापस लाने में मदद मिलती है जो प्रदूषण और सूखेपन के कारण खो जाती है. शैम्पू के दौरान सिर की त्वचा को कम से कम 10 मिनट तक मसाज किया जाता है. शैम्पू के बाद डीप कंडीशनिंग मॉस्क लगाकर 20 से 25 मिनट तक मसाज किया जाता है. फिर बालों की जड़ से सिरे तक एक क्रीम लगाई जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 45 मिनट से एक घंटा लगता है.

बीमारियों को रखे दूर-
हेयर स्पा बालों को कई तरह की परेशानियों से बचाव करता है. आमतौर पर स्‍पा कराने से बालों से डैन्ड्रफ, हेयर फॉल और सिर की त्वचा की समस्याएं खत्म होती हैं. इसके अलावा स्‍पा के मदद से बालों की खोयी हुई चमक और नमी को वापस लाने में मदद करता है. हेयर स्‍पा में प्रोटीन ट्रीटमेंट्स को भी शामिल किया जा सकता है ताकि आपके बाल रोजाना की विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने लायक मज़बूत हो सकें.

घर पर स्पा ट्रीटमेंट-
आप हेयर स्‍पा ट्रीटमेंट को घर पर भी कर सकते है. अगर आप घर पर हेयर स्पा करना चाहती हैं, तो शैंपू, तौलिया और हेयर कंडिशनिंग किट रख लें. इसके बाद सबसे पहलें अपने बालों को अच्छी तरह से माइल्ड शैंपू से धोएं और फिर कंडिशनर का इस्तेमाल करें. गीलें बालों को बिना सुखाएं तौलिये से साफ कर लें. इसके बाद अपने बालों को कंघी कर लें. फिर अपने बालों में हेयर मास्क लगायें. अब अपने बालों को स्‍पा दीजिए.

हॉट ऑयल हेयर ट्रीटमेंट-
बेजान बालों को नयी रौनक देने और डैन्ड्रफ से छुटकारा पाने का असरदार और आसान तरीका.

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हेपेटाइटिस बी का आयुर्वेदिक इलाज - Hepatitis B Ka Ayurvedic Ilaj!

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हेपेटाइटिस बी का आयुर्वेदिक इलाज - Hepatitis B Ka Ayurvedic Ilaj!

हेपेटाइटिस बी एक वायरस है जो लिवर को संक्रमित करता है. ज्यादातर लोग इससे ग्रसित होने पर कुछ सामय बाद ही बेहतर महसूस करने लगते जिसे एक्यूट हेपेटाइटिस बी कहा जाता है. लेकिन कभी-कभी इन्फेक्शन लंबे समय तक भी रह सकता है जिसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी कहा जाता है. यह आपको लम्बे समय में लीवर को नुकसान पहुंचाता है. वायरस से संक्रमित शिशुओं और छोटे बच्चों को क्रोनिक हेपेटाइटिस होने का ज्यादा खतरा रहता है. कभी-कभार ऐसा भी होता है की आप हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हो और आपको इस बीमारी का अनुभव तक नहीं होता. ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा संभव है कि इसके लक्षण दिखाई ना दें. यदि इसके लक्षण नज़र आते भी हैं तो वह फ्लू के लक्षण जैसे प्रतीत होते हैं. लेकिन इस स्थिति में भी आप इससे अपने आस-पास के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.

क्या है हेपेटाइटिस बी की बिमारी?
पीलिया या हेपेटाइटिस एक सामान्य लीवर डिसऑर्डर हैं, जो कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से से हो सकते हैं. पीलिया होने पर किसी व्यक्ति को सिर दर्द, लो-ग्रेड फीवर, मतली और उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली और थकान आदि लक्षण होते हैं. त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है. इसमें मल पीला और मूत्र गाढ़ा हो जाता है. हालांकि ऐसे में कुछ घरेलू उपचार आपकी काफी मदद कर सकते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिए कुछ घरेलू उपचारों के बारे में जानें.

1. मूली का रस व पत्ते
मूली के हरे पत्ते पीलिया में फायदेमंद होते है. मूली के रस में बहुत प्रभावी गुण होते है कि यह खून और लीवर से अत्‍यधिक बिलिरूबीन को निकाल देने में सक्षम होते है. पीलिया या हेपेटाइटिस में रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस जरुर पीना चाहिये. इसके साथ ही पत्ते पीसकर उनका रस निकालकर और छानकर पीएं.

2. टमाटर का रस
टमाटर का रस पीलिया में बहुत फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन सी पाया जाता है, जिस वजह से यह लाइकोपीन में समृद्ध होता होता है. इसके रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीएं.

3. आंवला
आवंले विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है. आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर भी खा सकते हैं. इसके अलावा जूस के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. इससे आपको संक्रमण से बहुत राहत मिल सकती है.

4. नींबू या पाइनएप्‍पल का जूस
नींबू का रस पीने से पेट साफ होता है. इसे रोज खाली पेट सुबह पीना पीलिया में लाभदायक होता है. इसके अवाला पाइनएप्‍पल भी लाभदायक होता है. पाइनएप्‍पल अंदर से पेट के सिस्‍टम को साफ रखता है.

5. नीम
नीम में कई प्रकार के वायरल विरोधी घटक पाए जाते हैं, जिस वजह से यह हेपेटाइटिस के इलाज में उपयोगी होता है. यह लिवर में उत्पन्न टॉक्सिक पदार्थों को नष्ट करने में भी सक्षम होता है. इसकी पत्तियों के साथ में शहद मिलाकर सुबह-सुबह पियें.

6. अर्जुन की छाल
अर्जुन के पेड़ की छाल, हार्ट और यूरिन सिस्टम को अच्छा बनाने के लिए माने जाती है. हालांकि, इसमें मौजूद एल्कलॉइड लिवर में कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को विनियमित करने की क्षमता भी रखता है. और यह गुण इसे हैपेटाइटिस के खिलाफ एक मूल्यवान दवा बनाता है.

7. हल्दी
देश के कुछ भागों में, लोगों को यह ग़लतफ़हमी है कि, क्योंकि हल्दी का रंग पीला होता है, पीलिया के रोगी को इसाक सेवन नहीं करना चाहिए. हालांकि यह एक कमाल का एंटी-इन्फ्लेमेट्री, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव वाली तथा बढ़े हुए यकृत नलिकाओं को हटाने वाली होती है. हल्दी हैपेटाइटिस के खिलाफ सबसे प्रभावी उपायों में से एक है.

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ह्रदय रोग से बचाव - Hriday Rog Se Bachaw!

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ह्रदय रोग से बचाव - Hriday Rog Se Bachaw!

हृदय हमारे जीवन का आधार है. इसलिए जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो हम उसके हृदय की धड़कन चेक करते हैं. यदि दिल धड़क रहा है तो व्यक्ति जीवित है लेकिन जब धड़कन बंद तो समझिए कि व्यक्ति की मृत्यु हो गई. इसलिए दिल की धड़कनों का खयाल विशेष तौर पर रखना चाहिए क्योंकि उसी से हम जिंदा हैं. जरा सी भी अव्यवस्थित जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही आप के नाजुक दिल के लिए खतरा पैदा कर सकती है. बदलती जीवन शैली ने हमारे दिल के लिए खतरा बढ़ा दिया है. जीवनशैली व खानपान में बदलाव ने लोगों को हृदय संबंधी रोगों के करीब पहुंचा दिया है. हृदय रोग किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकते हैं. ये रोग ऐसे होते हैं जिनका इलाज बहुत मुश्किल होता है. इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम शुरू से ही अपने हृदय की खास देखभाल करें और उसे स्वस्थ रखें. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में ही थोड़े बदलाव लाने की जरुरत होती है. अपने खानपान व जीवनशैली की आदतों में कुछ नई बातों को शामिल करने और कुछ खराब आदतों को निकाल देने से हमारे हृदय को फायदा होता है. आइये इस लेख के माध्यम से ये जानें कि हृदय रोगों से बचाव कैसे करें?

टहलना है हृदय के स्वास्थ्य के जरूरी-
रोज आधे घंटे तक जरूर टहलें. टहलने की रफ्तार इतनी होनी चाहिए कि जिससे सीने में दर्द न हो और आप हांफने भी न लगें. यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है. आप सुबह, शाम या फिर रात को खाने के बाद किसी भी वक्त टहल सकते हैं.

व्यायाम करना है दिल के लिए फायदेमंद-
रोज 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें. यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा. आपको सक्रिय रखेगा और आपके हृदय रोग को नियंत्रित करने में मददगार होगा. व्यायाम करने से न सिर्फ आपका हृदय बल्कि संपूर्ण शरीर चुस्त-दुरुस्त महसूस करने लगेगा.

तनाव मुक्त रहें-
आजकल की जीवनशैली का एक हिस्सा तनाव बन गया है. दफ्तर हो या परिवार, इंसान किसी न किसी वजह से तनाव में घिरा रहता है. लेकिन, तनाव आपके हृदय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं. इसलिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें. इससे आपको हृदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि तनाव हृदय की बीमारियों की मुख्य वजह है.

कोलेस्ट्रॉल को रखें नियंत्रित-
अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को 130 एमजी/ डीएल तक बनाए रखें. कोलेस्ट्रॉल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद हैं, इनसे जितना अधिक हो, बचने की कोशिश करनी चाहिए. यदि आपके यकृत यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल का निर्माण हो रहा हो तब आपको कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है.

वजन सामान्य रखें-
हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है कि शरीर के वजन को सामान्य रखें. आपका बॉडी मास इंडेक्स 25 से नीचे रहना चाहिए. इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्क्वेयर के साथ घटाकर कर सकते हैं. तेल के परहेज और निम्न रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं.

रेशेदार भोजन करें-
स्वस्थ हृदय के लिए रेशेदार भोजन का सेवन करें. भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें. ये आपके भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होते हैं. इससे आपकी पाचन क्षमता भी अच्छी बनी रहती है.

शुगर पर रखें नजर-
यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो शुगर को नियंत्रण में रखें. आपका फास्टिंग ब्लड शुगर 100 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए. व्यायाम, वजन में कमी, भोजन में अधिक रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए डायबिटीज को खतरनाक न बनने दें. यदि जरूरत परे तो हल्की दवाओं का सेवन करना चाहिए.

रक्त चाप को अनदेखा न करें-
अपने रक्त चाप को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें. रक्त चाप विशेष रूप से 130/ 90 से ऊपर आपके ब्लॉकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ाएगा. इसको कम करने के लिए खाने में नमक का कम इस्तेमाल करें और जरुरत पड़े तो हल्की दवाएं लेकर भी रक्त चाप को कम किया जा सकता है.

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हृदय गति रुकना - Hriday Gati Rukna!

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हृदय गति रुकना - Hriday Gati Rukna!

हृदय की गति रुकना एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है. इसे ही कार्डियक अरेस्ट भी कहा जाता है. देखा जाए तो दिल के दौरे से मिलते जुलते ऐसे ही दो-तीन बीमारियाँ और हैं जिन्हें लेकर लोगों में अक्सर कन्फ़्यूजन होता है. लोग हृदय संबंधी समस्या होने पर हार्ट अटैक और कार्डिक अरेस्ट (अचानक हृदय गति रुकना) शब्द का इस्तेमाल एक ही रूप में करते हैं, लेकिन ये समानार्थक शब्द नहीं है. इन दोनों बीमारियों के कारण भिन्न होते हैं. दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब होता है जब हृदय में पहुंचने वाला रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है. वहीं दूसरी ओर हृदय गति रुकना तब होता है, जब हृदय विद्युतीय प्रक्रिया में अचानक समस्या आ जाती है और हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है. सरल शब्दों में समझा जाएं तो हार्ट अटैक का सीधा संबंध रक्त प्रवाह से है, जबकि हृदय गति रुकना का संबंध हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई समस्या से होता है. हृदय गति रुकना को हृदय गति रुकना भी कहा जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम हृदय की गति रुकने के कारणों और इससे जुड़ी अन्य बातों को जानें.

कार्डियक अरेस्ट को लेकर दूर करें संदेह-
कार्डियक अरेस्ट बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक हो जाता है. यह समस्या हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई खराबी के कारण उत्पन्न होती है. इसके कारण हृदय की दर अनियमित हो जाती है. हृदय की धड़कनों व पम्पिंग क्रिया में बाधा आने के कारण हृदय मस्तिष्क, फेफड़ों और अन्य अंगों को रक्त नहीं पहुंचा पाता है. इसके बाद व्यक्ति को बेहोशी आने लगती है और कुछ समय के बाद नसों में रक्त बहना बंद हो जाता है. इस समस्या में व्यक्ति का तुरंत इलाज न हो पाने की स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है.

यह दोनों समस्याएं कैसे एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं?
यह दोनों ही समस्याएं हृदय से संबंध रखती हैं और यह दोनों हृदय रोग है. अचानक होने लाने वाला हृदय गति रुकना हार्ट अटैक के बाद होता है या हार्ट अटैक के ठीक होने की प्रक्रिया में हो सकता है. इससे कहा जा सकता है कि हार्ट अटैक के बाद हृदय गति रुकना होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. ऐसा जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक की समस्या होने पर हृदय गति रुकना होता ही हो, परंतु हृदय गति रुकना के कई मामलों में हार्ट अटैक का होना एक मुख्य वजह के रूप में देखा जाता है. हृदय से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हृदय की धड़कनों को भी बाधित कर सकती है और हृदय गति रुकना की वजह बन सकती है. इन समस्याओं में हृदय की मांसपेशियों का अकड़ना (कार्डियोम्योपैथी), दिल की विफलता, अनियमित दिल की धड़कन, वेंट्रिकुलर फैब्रिलेशन और क्यूटी सिंड्रोम शामिल हैं.

अचानक हृदय गति रुकना होने पर ये करें-
हृदय गति रुकना के कुछ ही मिनटों में इलाज प्रदान करने से इसको ठीक किया जा सकता है. इसके लिए आप सबसे पहले अस्पताल कॉल कर एंबुलेंस व अपातकाल चिकित्सा को बुलाएं. जब तक अपातकालीन इलाज शुरू नहीं होता तब तक आप मरीज को डिफब्रिलेटर (हृदय पर विद्युतिय झटके देने वाली मशीन) से प्राथमिक इलाज करते रहें. इसके अलावा हृदय गति रुकना मरीज को तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिसासिटेशन (हृदय धड़कन रूकने पर मरीज को दी जाने वाली चिकित्सीय प्रक्रिया) देनी चाहिए.

हार्ट अटैक (हृदयघात) क्या होता है?
हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां जब अवरुद्ध होकर हृदय के एक भाग तक ऑक्सीजन युक्त रक्त को जाने से रोक देती है, तो इस स्थिति को हार्ट अटैक कहा जाता है. यदि इस अवरुद्ध धमनी को जल्दी से नहीं खोला जाता है, तो इस धमनी की वजह से हृदय पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है. लंबे समय तक इस समस्या का उपचार न करने से हृदय की क्षति में बढ़ोतरी हो जाती है. हार्ट अटैक के लक्षण तत्काल और तीव्र हो सकते हैं. कई बार इस समस्या के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और लंबे समय तक उपचार न होने पर यह हार्ट अटैक का कारण बन जाते हैं. आपको बता दें कि अचानक होने वाले हृदय गति रुकना के विपरीत हार्ट अटैक में दिल की धड़कने बंद नहीं होती हैं.

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एड़ी की हड्डी का बढ़ना - Adi Ki Haddi Ka Badhna!

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एड़ी की हड्डी का बढ़ना - Adi Ki Haddi Ka Badhna!

हमारे पैर में कुल 26 हड्डियां होती है जिसमे सबसे बड़ी एड़ी की हड्डी (कैलकेनियस) होती है. इंसान की एड़ी की हड्डी को स्वाभाविक रूप से पुरे शरीर का वजन उठाने और संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है. जब हम चलते है या दौड़ते है तो शरीर पर पड़ने वाले वजन को एड़ी के माध्यम से ही झेला जाता है. हमारे शरीर में एड़ी का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है, यदि किसी कारणवश एड़ी में कोई चोट या कोई समस्या उत्पन्न हो जाती है तो इसका प्रभाव आपके पूरे शारीरक गतिविधि पर पड़ सकता है. ऐसी ही एक समस्या है एड़ी की हड्डी का बढ़ना जिसमे एड़ी और पंजे के बीच के हिस्से में कैल्शियम जमा हो जाता है जिसके कारण एड़ी में हड्डी जैसा उभार आ जाता है. एड़ी की हड्डी बढ़ने से एड़ी में दर्द,सूजन और जलन जैसे लक्षण हो सकते है. इस समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टर एक्स-रे और शरीरिक परिक्षण की मदद लेते है. इस लेख में हम एड़ी के हड्डी के बढ़ने के कारणों और उसके निदानों पर प्रकाश डालेगें.

एड़ी के हड्डी बढ़ने के लक्षण:
आमतौर पर एड़ी की हड्डी बढ़ने के कोई लक्षण नहीं होता है. इसके कुछ सामान्य लक्षण है जो निम्नलिखित है:
1. सुबह उठने पर आपके एड़ी में तेज दर्द होता है.
2. एड़ी के आगे के हिस्से में सूजन और जलन होता है.
3. एड़ी में गर्मी का अनुभव हो सकता है.
4. एड़ी के निचले हिस्से में हड्डी जैसा उभार दिखता है.

एड़ी में हड्डी बढ़ने का कारण:
एड़ी की हड्डी बनने का मुख्य कारण “प्लैंटर फेशिया” होता है, जो एड़ी और पंजे के बीच के हिस्से को सहारा देने वाला फैटी टिश्यू होता है. प्लैंटर फेशिया के ऊपर अधिक दबाब या चोट लगने के कारण एड़ी की हड्डी बढ़ता है.
प्लैंटर फेशिया में और चोट लगने से बॉडी प्रभावित क्षेत्र को ठीक करने के लिए कैल्शियम एकत्रित करने लग जाता है, जब कैल्शियम जरुरत से अधिक एकत्रित हो जाता है तो एड़ी में हड्डी जैसा उभार बन जाता है.

एड़ी की हड्डी बढ़ने से बचाव:
एड़ी की हड्डी बढ़ने से बचने के लिए पैरों पर पड़ने वाले दबाब को कभी नजरअंदाज ना करें और अपने पैरों को आराम दें.
1. एड़ी में होने वाले किसी भी प्रकार के दर्द को नजरअंदाज न करें. दर्द होने पर किसी भी भारी गतिविधि में शामिल ना हो जैसे एक्सरसाइज करना या दौड़ना या फिर जूत्ते पहने रखने से एड़ी की हड्डी बढ़ने की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
2. अगर किसी शारीरक गतिविधि से दर्द उत्पन्न होता है तो उस प्रभावित क्षेत्र पर इचे लगाएं और अपने पैरों को राहत पहुंचाए.
3. हमेशा सही नाप वाले जूत्ते ही पहने.
4. एड़ी और पंजे पर ज्यादा दबाब वाले जूत्ते न पहनें.

एड़ी के हड्डी बढ़ने का इलाज:
एड़ी के हड्डी बढ़ने का निम्नलिखित उपचार है:


नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट:-
1. मौजे- जूत्ते के अन्दर विशेष रूप से बनाए गए मौजों का इस्तेमाल करें, जो एड़ी के दबाब को कम करता है.
2. जब आप नंगे पैर चलते है तो आपके प्लैंटर फेशिया पर अधिक दबाब पड़ता है, इसलिए नंगे पैर न चलने की कोशिश करें.
3. हमेशा उचित नाप और आरामदायक जूत्ते पहनें, यह आपके पैर से दबाब और दर्द को कम करता है.
4. कोर्टीसोन के टीके से प्रभावित क्षेत्र में सूजन और दर्द कम होता है. अगर दवा से कोई असर नहीं होता है तो टीका एक प्रभावी उपाय हो सकता है.
5. दर्द से निदान पाने के लिए आइस भी एक प्रभावी उपचार साबित हो सकता है. यह दर्द और सूजन से राहत प्रदान करता है.
6. दर्द होने पर प्रयाप्त आराम भी प्रभावित क्षेत्र पर दर्द और सूजन को कम करता है.
7. दर्द से छुटकारा पाने के लिए पिंडली की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाले एक्सरसाइज से दर्द में कमी आती है.

सर्जिकल ट्रीटमेंट-
अगर ऊपर दिए गए उपचार से एड़ी की हड्डी बढ़ने का कोई निदान नहीं होता है तो आपको सर्जरी करवाना पद सकता है.

सर्जरी में दो तरीके अपनाए जाते है.
1.प्लैंटर फेशिया को निकाल कर एड़ी की बढ़ी हुई हड्डियों का इलाज किया जा सकता है.
2. सर्जरी के द्वारा बढ़ी हुई हड्डियों का निकाल कर भी निदान किया जा सकता है.

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