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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

8 Years Experience  ·  200 at clinic  ·  ₹100 online
Dr. Sanjeev Kumar Singh Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
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To provide my patients with the highest quality healthcare, I'm dedicated to the newest advancements and keep up-to-date with the latest health care technologies.
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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Insomnia Treatment In Hindi - अनिद्रा दूर करने के उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Insomnia Treatment In Hindi -  अनिद्रा दूर करने के उपाय

नींद नहीं आने की बिमारी को ही अनिद्रा कहते हैं. जाहिर है कि नींद हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है. नींद के महत्व को देखते हुए इस बिमारी का जल्द उपचार जरुरी है. लेकिन इसके लिए नींद की गोलियों का सहारा लेना ठीक नहीं है. क्योंकि इसके साइड इफेक्ट बहुत ज्यादा हैं. तो इनसे बचने के लिए हम आपको कुछ आयुर्वेदिक उपाय बताते हैं जिससे आपको इससे छुटकारा मिलने में मदद मिलेगा.

1. ब्राह्मी
यदि आपको आयुर्वेद के बारे में थोड़ी भी जानकारी होगी तो आप जानते होंगे कि ब्राह्मी का इस्तेमाल मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने में किया जाता है. ये भी विदित है कि नींद का जुड़ाव दिमाग से ही है. इसलिए ब्राह्मी के इस्तेमाल से अनिद्रा की बीमारी में आश्चर्यजनक फायदा देखने को मिलता है.
2. लैवेंडर
लैवेंडर का इस्तेमाल भी आयुर्वेद में कई तरह से बताया गया है. कई सारे शोधों में भी इसके अनेक गुणों की पहचान हुई है. इन शोधों में ये पाया गया है कि इसके इस्तेमाल से अनिद्रा जैसी बिमारी को दूर किया जा सकता है. खासकरके महिलाओं और युवाओं में इसका असर बेहतरीन देखा गया है.
3. जटामांसी
विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाले जटामांसी का इस्तेमाल तीव्र गंध वाले परफ्यूम बनाने में किया जाता है. लेकिन ऐसा पाया गया है कि मस्तिष्क और नाड़ी सम्बन्धी रोगों में भी ये बेहद प्रभावशाली साबित होता है. हलांकि इसके काम करने की गति थोड़ी कम होती है लेकिन काम सटीक है. इसके लिए आपको रात में सोने से एक घंटा पहले एक चम्‍मच जटामांसी की जड़ का चूर्ण ताजे पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है.
4. शहद
अनिद्रा से निबटने के पारम्परिक तरीकों में से एक ये भी है कि आप इसके लिए दूध और शहद का सेवन करें. आपको बता दें कि दूध व शहद इन्सुलिन के स्त्राव को नियंत्रित करता है. इसके बाद ही ट्रिप्टोफेन का सही मात्रा में मस्तिष्क में स्त्राव होता है. फिर ट्रिप्टोफेन सिरोटोनिन मेंऔर सिरटोनिन, मेलेटोनिन के रूप में बदलकर मस्तिष्‍क को आराम पहुँचाने का काम करता है. फिर आपके नींद की बीमारी ठीक हो जाती है.
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा की गिनती उन पौधों में होती है जिसकी जड़, पत्तियां और तना सभी का औषधीय इस्तेमाल किया जाता है. अश्वगंधा एक अच्छा वातशामक होने के कारण थकान का निवारण भी करता है. और ये तो सबको पता है कि थकान दूर होने से नींद बहुत अच्‍छी आती है. इसके अलावा एक उपाय ये भी है कि सर्पगंधा, अश्वगंधा और भांग तीनों की एक समान मात्रा का बारीक चूर्ण बनाकर रात में सोते वक्त 3-5 ग्राम मात्रा में यह चूर्ण पानी के साथ लें. इससे नींद बहुत अच्छी आती है.
6. शंखपुष्पी
शंख की आकृति वाले फुल होने के कारण इसको शंखपुष्पी का नाम दिया गया है. एक शक्तिशाली और प्रभावी मस्तिष्क टॉनिक के रूप में पहचान रखने वाले शंखपुष्पी में नाड़ियों को भी शक्ति प्रदान करने की भी विशेष क्षमता है. अनिद्रा की शिकायत होने पर इसकी पत्तियों का चूर्ण जीरा और दूध के साथ मिश्रित करके लेने से फायदा होता है.
7. तुलसी
तुलसी के फायदों से तो हम बचपन से ही परिचित होते हैं. जाहिर है इसमें तमाम औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. लेकिन अनिद्रा में भी ये एक अचूक औषधि के रूप में काम करता है. नींद न आने पर तुलसी के पांच पत्तों को खाने और रात को सोते समय तकिए के आस-पास फैलाकर रखने से इसकी सुगंध से नींद आने लगती है. इसमें कोई झंझट भी नहीं है सबके यहाँ लोग गमलों में तुलसी का पौधा लगाए रहते हैं.
8. अलसी
रबी फसलों में अलसी का नाम प्रमुख है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी, सेलेनियम, पोटेशियम, मैगनीशियम, जिंक आदि तत्व भरपूर होते हैं. चूँकि इसे फीलगुड फूड माना जाता है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है. इसलिए इसे अनिद्रा की समस्‍या के लिए भी लाभकारी माना गया है. इसके अलावा कांसे की एक थाली में अलसी और एरण्‍ड के बीज का तेल घिसकर आंखों पर लेप लगाने से भी अनिद्रा की समस्‍या में लाभ मिलता है.
9. अजवायन
मसालों के रूप में पहचान रखने वाले आजवायन का औषधीय गुण भी भरपूर है. इसमें स्वास्थ्य, सौंदर्य, सुगंध तथा ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्वों की प्रचुरता होती है. इसका इस्तेमाल हम अपने विभिन्न पकवानों में भी करते हैं. इसके अलावा इसका इस्‍तेमाल अनिद्रा की समस्‍या को दूर करने के लिए भी किया जाता है. इसके लिए आपको लगभग आधा चम्‍मच अजवायन सुबह-शाम लेना होगा इससे आपकी अनिद्रा की समस्या खत्म हो जाएगी.
10. सौंफ
मसालों के रूप में हम सौंफ के इस्तेमाल से भी परिचित हैं. इसमें भी बहुत सारे तत्व जैसे कि कैल्शियम, सोडियम, आयरन, पोटैशियम आदि शरीर को सेहतमंद रखने वाले तत्व पाए जाते हैं. नींद न आने की बिमारी के निजात में भी इसका लाभ मिलता है. इसके लिए आपको 10 ग्राम सौंफ को आधा लीटर पानी में उबालकर जब पानी आधा रह जाए तो उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से अनिद्रा दूर होगी.
11. मेहंदी
सुन्दरता को निखारने में या बालों को चमकाने में मेहंदी के इस्तेमाल से तो हम परिचित हैं. लेकिन मेहंदी हथेली और बालों की सुंदरता निखारने के साथ-साथ अनिद्रा को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. आपको बता दें कि मेहंदी के फूल उत्‍तेजक और हृदय  मजबूती प्रदान करने वाले होते हैं. वहीँ इसका काढ़ा हृदय को संरक्षण करने तथा नींद लाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. अपने तकिये में मेंहदी के सूख फूलों को रखने से नींद अच्‍छी आती है.
 

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Throat Infection Home Remedies In Hindi - गले में खराश के घरेलु उपचार

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Throat Infection Home Remedies In Hindi - गले में खराश के घरेलु उपचार

गले में संक्रमण या खराश आजकल एक आम समस्या है. जब भी आपको 38 डीग्री सेंटीग्रेट से अधिक बुखार हो, गले या गर्दन में सुजन हो, निगलने में परेशानी हो या पेट दर्द हो तो आपके गले में संक्रमण हो सकता है. गले में खराश आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे प्रदूषित हवा, बदलता मौसम, अत्यधिक ठन्डे पदार्थों का सेवन, प्रतिकूल खान-पान आदि. इसलिए अपने गले का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है. गले में खराश से बचने और हो जाने पर इसे दूर करने के लिए कुछ घरेलु उपचार हम आपको बता रहे हैं.

1. गुनगुने पानी और नमक
गले में संक्रमण का सबसे पहला और आसान उपाय ये है कि आप गुनगुने पानी में हल्का नमक डालकर दिन में तीन बार गरारे करें. क्या होता है कि आपके गले में संक्रमण की वजह से सांस की झिल्ली की कोशिकाओं में सुजन आ जाती है और गरम पानी के गरारे से सुजन में कमी आने के कारण गले में खराश से राहत मिलती है. गुनगुने पानी में सिरका मिलाकर पिने से भी आराम मिलता है.
2. भाप से गले की सिकाई
कई बार आपके गले में खराश का कारण गले का सुखना भी हो सकता है. इसमें राहत के लिए आपको किसी गमले या इसी जैसे खुले मुंह वाले बर्तन में पानी खौला कर तौलिये या किसी बड़े कपड़े को सर पर रखकर भाप लें. दिन में दो बार ऐसा करने से आपके राहत मिलेगी.
3. अदरक और लौंग
एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर अदरक और लौंग गले में इन्फेक्शन से उबरने में काफी मदद करते हैं. एक लौंग मुंह में रखकर उसका रस धीरे-धीरे चुसें. एक कप पानी में अदरक डालकर उबालें और जब पानी गुनगुना रह जाए तो उसमें थोड़ा शहद मिलाकर इसे दिन में तीन बार पिएं. ये भी गले में संक्रमण से बचने का घरेलु उपाय है.
4. मुलेठी भी दूर करे गले का संक्रमण
मुलेठी औषधीय गुणों से भरपूर होता है. गले में खराश से बचने के लिए आप सोते समय एक ग्राम मुलेठी की छोटी सी गांठ मुख में रखकर कुछ देर चबाने से सुबह तक गला साफ़ होता है. इससे दर्द और सुजन दोनों दूर होता है.
5. काली मिर्च, बताशा और तुलसी
सभी घरों में आसानी से उपलब्ध बराबर मात्रा में काली मिर्च और बताशा मिलाकर रात में सोने से पहले धीरे-धीरे चबाएं. इसके अलावा एक कप पानी में 4-5 कालीमिर्च एवं तुलसी की पत्तियों को मिलाकर काढ़ा बनाकर पिने से भी राहत मिलती है. काली मिर्च के साथ दो बादाम पीसकर पिने से भी आराम मिलता है.
6. अंजीर और सुहागा
गले की खराश मिटाने के लिए उपलब्ध कई घरेलु तरीकों में एक ये भी है कि पानी में 5 अंजीर डालकर उबाल लें. फिर इसे छानकर पानी को सुबह-शाम गर्मा-गरम पिएं. इसके अलावा आधा ग्राम कच्चे सुहागे को भी मुंह में लेकर उसका रस चूसने से फायदा होता है.
7. मुनक्के से मिटे खराश
कई लोगों को अक्सर ही गले के संक्रमण से दो-चार होना पड़ता है. उन्हें जुकाम में एलर्जी के कारण भी गले में तकलीफ का सामना करना पड़ता है. ऐसे लोगों के लिए सबसे बढ़िया उपाय है कि वो सुबह शाम दोनों समय चार या पांच मुनक्का के दाने खूब चबाकर खाएं लेकिन ऊपर से पानी न पिएं. 10 दिन लगातार ऐसा करने से आपको राहत मिलेगा.
8. दूध का दूध, पानी का पानी
रात को सोने से पहले दूध और पानी की समान मात्रा मिलाकर पिने से भी लाभ मिलता है. ऐसा करने से गले में नमी आती है.
9. पालक
पालक के पत्तों को भी इसके लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको पालक के पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी गले में बांधनी होगी. फिर इस पट्टी को 15-20 मिनट के बाद खोल दें.
10. सौंफ
गले के संक्रमण से सौंफ भी सुरक्षा प्रदान करता है. जब भी आपके गले में संक्रमण हो आप सुबह-सुबह चुटकी भर सौंफ मुंह में लेकर धीरे-धीरे चबाएं. इससे भी आराम मिलेगा.
 

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Jatamansi (Spikenard) Benefits and Side Effects in Hindi - जटामांसी के फायदे और नुकसान

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Jatamansi (Spikenard) Benefits and Side Effects in Hindi - जटामांसी के फायदे और नुकसान

धरती पर पाए जाने वाले तमाम औषधियों गुणों वाले पौधों में जटामांसी से होने वाले फायदे भी महत्वपूर्ण हैं. जटामांसी का का नाम अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग है; जैसे कि गुजराती में जटामांसी या बालछड़, तेलगू में जटामांही, पहाडी क्षेत्रों में भूतकेश आदि नाम प्रचलित हैं. किसी साधू की जटाओं जैसी दिखने वाली रोयेंदार तने और तेज महक समाहित किए जड़ वाली जटामांसी के तने व जड़ का प्रयोग दवा के रूप में करते हैं. फायदे तो इसके बहुत सारे हैं लेकिन ठीक से इस्तेमाल न करें तो इसके नुकसान भी खूब हैं. इसलिए आइए जटामांसी के इस्तेमाल से होने वाले फायदों और इसकी सीमाओं को समझें.

जटामांसी के फायदे निम्लिखित हैं-
1. मेनोपॉज और मासिक धर्म के समय: महिलाओं के मेनोपॉज और मासिक धर्म के समय जटामांसी काफी फायदेमंद साबित होता है. मेनोपॉज के समय तो यह विशेष रूप से मददगार साबित होता है. वहीं मासिक धर्म के दौरान होने वाले कष्ट से छुटकारा पाने के लिए आप जटामांसी का काढ़ा पी सकती हैं.
2. शर्बत के रूप में: जटामांसी के फायदे इसके बने शर्बत में भी नजर आता है. इसके साथ ही ये आपके शरीर से जमे हुए काफ को भी निकालने में मदद करता है.
3. मस्तिष्क और नाड़ी विकार में: जटामांसी के लाभ हमारे मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों में भी हमारी मदद करते हैं. हलांकि इसके काम करने की गति थोड़ी धीमी होती है लेकिन असरदार भरपूर होती है.
4. मनोविकारों में: कई तरह के मनोविकारों जैसे कि पागलपन, हिस्टीरिया, मिर्गी, मन बेचैन होना, याददाश्त कम होना आदि रोगों में भी जटामांसी के फायदों से हम रोग के प्रभाव से हम मुक्त होते हैं.
5. आँखों के लिए: यदि हम जटामांसी के काढ़े को रोज पियें तो इससे आँखों की रौशनी बढ़ती है. इस तरह से ये आँखों के लिए फायदेमंद साबित होता है.
6. चमड़े के विकारों में: चर्म रोग तथा सोरायसिस जैसे रोगों में भी इसका लेप लगाने से काफी फायदा मिलता है. इससे हम चमड़े की कई समस्याओं से निजात पा सकते हैं.
7. दन्त विकारों में: दांतों में होने वाले दर्द को मिटाने के लिए जटामांसी के महीन पिसे हुए पाउडर से मंजन कीजिए निश्चित रूप से राहत मिलेगा.
8. दर्द निवारक के रूप में: जटामांसी का उपयोग आप दर्द निवारक के रूप में भी कर सकते हैं. आपके शरीर के जिस हिस्से में दर्द है वहां पर इसे पानी में पीस कर इसका लेप लगाएं.
9. अन्य रोगों में: जटामांसी को खाने या पीने से मूत्रनली, पाचननली, श्वसनली, गले, हैजा आदि के रोग ठीक होते हैं.
10. पेट के लिए: पेट फूलने में भी जटामांसी को सिरके में पीसा हुआ नमक मिलाकर लेप करने से पेट का सूजन कम होकर पेट सपाट होता है.
 
जटामांसी के ये निम्नलिखित नुकसान भी हैं-
1. मासिक धर्म: महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान इसका ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से समस्या हो सकती है.
2. गर्भावस्था के दौरान: गर्भवती महिलाओं को जटामांसी के नुकसान से बचने के लिए इस दौरान जटामांसी के इस्तेमाल से बचना चाहिए. इसके साथ ही महिलाओं को स्तनपान कराने के दौरान भी जटामांसी का इस्तेमाल रोक देना चाहिए.
3. ज्यादा इस्तेमाल से: सामान्य तौर पर भी अधिकतम इस्तेमाल से या इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से जटामांसी के नुकसान मसलन पेट दर्द की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
4. रक्तचाप में: जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या है उन्हें इसके इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेना चाहिए. ऐसा नहीं करने से आपको एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
5. अनावश्यक इस्तेमाल से: अनावश्यक रूप से जटामांसी का ज्यादा इस्तेमाल करने पर आपको उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
 

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Long Pepper (Pippali) Benefits and Side Effects in Hindi - पिप्पली के फायदे और नुकसान

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Long Pepper (Pippali) Benefits and Side Effects in Hindi - पिप्पली के फायदे और नुकसान

छोटा पीपल के उपनाम से मशहूर पिप्पली के फायदे औषधीय रूप से बहुत ज्यादा है. इसके अलावा इसे मसाले के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. लगभग शहतूत के फल के आकार वाले पिप्पली के नुकसान भी हैं. गहरे हरे रंग और ह्रदय के आकार वाले चौड़े पत्तों व कोमल लताओं वाले पिप्पली के कच्चे फलों का रंग गहरा हरा और पकने के बाद काला हो जाता है.

पहले जानते हैं पिप्पली के फायदों को

1. दिल के मामलों में
दिल की बीमारियों में भी पिप्पली के फायदे दिखाते हैं. इसका चूर्ण बनाकर शहद में मिलाकर सुबह खाने से कोलेस्ट्राल नियंत्रित होता है. इसके अलावा पिप्पली और छोटी हरड़ की समान मात्रा पीसकर एक चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट दर्द, मरोड़ और दुर्गन्धयुक्त अतिसार में राहत मिलती है.
2. साँसों की बीमारी में
यदि आपको साँसों की बिमारी है तो इसमें भी आप पिप्पली के फायदे से राहत पा सकते हैं. इसके लिए आपको 2 ग्राम पिप्पली का चूर्ण बनाकर 4 कप पानी में उबाल लें. जब यह 2 कप रह जाए तो इसे छान लें. इसे 2-3 घंटे के अंतर पर थोड़ा-थोड़ा दिन भर पीते रहने से कुछ ही दिनों में सांस फूलने की समस्या से राहत मिलेगी.
3. सर दर्द में
इसे पानी में पीसकर माथे पर लेप लगाने से सिर दर्द में फायदा मिलता है. इसके लिए पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में मिला लें. फिर इसकी 3 ग्राम नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ लेने से सर दर्द में राहत मिलती है.
4. मोटापा से भी राहत
मोटापे में पिप्पली के फायदे लेने के लिए आपको इसका चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ रोजाना 1 महीने तक सेवन करने से मोटापा कम होता है. इसके अलावा पिप्पली के 1 से 2 दाने दूध में देर तक उबालकर उसमें से पिप्पली निकालकर खा लें और ऊपर से दूध पिने से भी मोटापे से राहत मिलती है.
5. छुआ-छूत के रोगों में
इसमें पाए जाने वाले प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुण से टी.बी. एवं अन्य संक्रामक रोगों में पिप्पली फायदेमंद है. इसके अलावा पिप्पली अनेक आयुर्वेदीय एंव आधुनिक दवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करती है.
पिप्पली के कई फायदों में से एक ये भी है कि इसके 1-2  ग्राम चूर्ण में सेंधानमक, हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांतों पर लगाने से दांत के दर्द से राहत मिलती है. 
6. वात से उत्पन्न रोगों में
इसके लिए आपको 5-6 पुरानी पिप्पली के पौधे का जड़ सुखाकर उसका चूर्ण बनाना होगा. आपको बता दें कि इस चूर्ण की 1-3 ग्राम मात्रा को गर्म पानी या गर्म दूध के साथ पिलाने से शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाले दर्द से 1-2 घंटे में ही राहत मिल जाती है. बुढ़ापे में इससे विशेष रूप से राहत मिलती है.
7. सर्दी जुकाम में
सर्दी जुकाम में पिप्पली का फायदा उठाने के लिए इसका मूल, काली मिर्च और सौंठ की बराबर मात्रा में चूर्ण लेकर इसकी 2 ग्राम की मात्रा शहद के साथ चाटने से जुकाम में राहत मिलती है. इसके अलावा आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण में समान मात्रा में भुना जीरा तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ सुबह खाली पेट लेने से बवासीर में भी लाभ होता है.

पिप्पली के नुकसान
1. बिना किसी सावधानी के, पंचकर्म और रसायन प्रक्रिया के बिना, पिप्पली को अधिक मात्रा या लंबे समय के लिए इस्तेमाल नुकसानदेह साबित हो सकता है. इससे काफ में वृद्धि होती है. पिप्पली की अन्दुरुनी गरमी के कारण पित्त दोष बढ़ता है. इसकी कम चिकनाई (Alpasneha) के कारण, यह वात संतुलन के लिए जिम्मेदार मानी जाती है.
2. छोटे बच्चों को शिशुओं को इसके सेवन से बचाना चाहिए.
3. दूध और घी के साथ, यह प्रति दिन 250 मिलीग्राम की एक छोटी खुराक में बच्चों को दिया जा सकता है.
4. जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं वैसी माताओं को भी यह कम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए.
5. जो महिलाएं गर्भावस्था में हैं उन्हें इसके उपयोग के लिए, अपने चिकित्सक की सलाह ज़रूर लेना चाहिए.
 

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Psyllium Husk (Isabgol) Benefits and Side Effects in Hindi - ईसबगोल के फायदे और नुकसान

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Psyllium Husk (Isabgol) Benefits and Side Effects in Hindi - ईसबगोल के फायदे और नुकसान

लगभग तीन फुट ऊँचाई वाला पौधा इसबगोल का उपयोग आज की तारीख में लागातार बढ़ता जा रहा है. इसका मुख्य कारण है आज ज्यादातर लोगों को हाजमे की शिकायत है. और पाचन तंत्र की समस्याओं का इससे बेहतर समाधान किया जा सकता है. यदि हम इसबगोल में पाए जाने वाले तत्वों की बात करें तो इसबगोल के बीजों के उपर सफेद भूसी पायी जाती है. इस भूसी में ही प्रचुर मात्रा में म्युसिलेज पाया जाता है. इसके अतिरिक्त इसमें जाईलोज, एरेविनोज रैमन्नोज और गैलेक्टोज आदि भी पाए जाते हैं. वैसे तो इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है लेकिन फिर भी इस्तेमाल में सावधानी न बरतने से इसबगोल के कुछ नुकसान हो सकते हैं.

ईसबगोल के सेवन से लाभ
1. जिन लोगों को जोड़ों के दर्द, कब्ज व पाचनतंत्र आदि की शिकायत है उनलोगों को अपनी परेशानियों से निजात पाने के लिए रात के खाने के बाद एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच ईसबगोल की भूसी मिलाकर लेने से निश्चित रूप से लाभ होगा. 
2. यदि आपको दस्त के दौरान रक्तस्राव हो रहा है या लंबे समय से कब्ज से ग्रसित हैं तो ऐसे में आप आधा कप पानी के साथ इसबगोल की भूसी लेने से आराम मिलेगा.
3. आँतों में होने वाली रुकावट और संक्रमण के शिकार लोगों को 20 मिलिलीटर की मात्रा में एक गिलास पानी में मिला लें और इसका एक चम्मच ईसबगोल के बीज साथ में सेवन करें. ऐसा करने से आपको अपनी समस्या से छुटकारा मिलेगा.
4. तमाम लाभकारी गुणों से युक्त इसबगोल इसके अलावा आपको शरीर में पानी की कमी, मोटापा व डायबिटीज आदि में भी आपको भरपूर फायदा देता है. इन रोगों में इसबगोल के इस्तेमाल से आप छुटकारा पा सकते हैं. 
5. मोटापे की समस्या से ग्रसित लोग भी इसबगोल के उपयोग से वजन घटा सकते हैं. इसके लिए आपको दिन में 3 बार खाने से आधा घंटा पहले लेना इसबगोल का सेवन करना चाहिए.
6. यदि आप दमा से पीड़ित हैं तो इसमें भी इसबगोल आपको फायदा पहुंचता है. इसके लिए बस आपको सुबह-शाम दो-दो चम्मच ईसबगोल की भूसी गर्म पानी के साथ लेते रहना होगा. ऐसा करने से आपकी यह शिकायत दूर हो जाएगी.

इसबगोल के नुकसान भी हैं
1. इसबगोल का नुकसान इसकी अधिक मात्रा है. इसबगोल का अधिक मात्रा में सेवन आपको भूख न लगने का कारण बन सकता है. इसलिए इसकी अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें.
2. कैप्स्यूल या बारीक पिसा हुआ पाउडर के रूप में इसबगोल का सेवन आपको परेशानी में डाल सकता है. इसलिए इसबगोल के इन रूपों के इस्तेमाल से जितना हो सके बचने का प्रयास करें.
3. इसबगोल का उपयोग कम पानी या अन्य तरल पदार्थों के साथ सेवन छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी, उल्टी या फिर कुछ निगलने में समस्या आदि परेशानियों में हमें फंसा कर उलझा सकता है.
4. इसबगोल 2 साल या इससे कम उम्र के बच्चे को तो बिलकुल ही न दें. इससे ज्यादा उम्र वाले बच्चों को बहुत कम मात्रा में दे सकते हैं. बच्चों को जब भी इसबगोल देना हो तो इसमें या तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लें या फिर बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करें. हलांकि डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा उचित रहेगा.
5. हलांकि इसबगोल से एलर्जी की समस्या नहीं के बराबर होती है. लेकिन फिर भी किसी-किसी को खुजली, चहरे पर सुजन या त्वचा पर चकते आदि लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं. यदि आपको साइलियम से एलर्जी है तो इसबगोल का सेवन भूलकर भी न करें.
6. इसबगोल का नुकसान गर्भवती महिलाओं को तो और ज्यादा होता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसबगोल से उन्हें दूर ही रखना चाहिए. गर्भवती महिलाएं ऐसा करके इसके दुष्प्रभाव से बच सकती हैं.

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Sunflower (Surajmukhi) Benefits and Side Effects in Hindi - सूरजमुखी के फायदे और नुकसान

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Sunflower (Surajmukhi) Benefits and Side Effects in Hindi - सूरजमुखी के फायदे और नुकसान

आज हर जनरल स्टोर और फ़ूड स्टोर्स पर सूरजमुखी अपने फायदेमंद गुणों के साथ आसानी से बीज या तेल के रूप में उपलब्ध है. इसका हम अपने दैनिक जीवन में धड़ल्ले से इस्तेमाल भी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे सर से लेकर पाँव तक के लिए सूरजमुखी फायदेमंद है? तो आइए सूरजमुखी के फायदे और नुकसान को समझते हैं.

इन रोगों में फायदेमंद है सूरजमुखी
1. अस्थमा और कैंसर से बचाता है : सूरजमुखी के बीज में विटामिन ई, सेलियम और कॉपर भरपूर मात्रा में होने के कारण इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है. तमाम शोधों से ये पता चला है कि ये पेट, प्रोस्ट्रेट और ब्रेस्ट कैंसर से हमारी रक्षा करता है. यही नहीं इसके प्रयोग से अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए भी सूरजमुखी फायदेमंद है.
2. पेट को दुरुस्त रखता है : इसमें पाए जाने वाले तमाम तत्वों में एक फाइबर भी है. इसमें प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला फाइबर आपके कब्ज की समस्या को दूर करके आपके पेट को भी दुरुस्त रखता है.
3. जोड़ों के दर्द में राहत : इसका तेल जोड़ों के दर्द की बिमारी यानी गठिया में भी आपको भरपूर लाभ पहुंचाता है. तो इस बिमारी से पीड़ित व्यक्ति इसका उपयोग करके आराम महसूस कर सकता है.

शरीर के विभिन्न अवयवों की देखभाल
1. दिमाग को दुरुस्त रखता है : सूरजमुखी के तमाम फायदों में से एक ये भी है कि इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम आपके दिमाग की नसों को शांत करके तनाव और माइग्रेन से आपको बचाता है.
2. दिल का भी रखे खयाल : इसके बीज विटामिन सी से भरपूर होने के कारण आपके दिल का भी भरपूर खयाल रखते हैं. इसके साथ ही इसमें पाया जाने वाला विटामिन ई कोलेस्ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोकता है. जिससे कि दिल के दौरे या स्ट्रोक का खतरा कम होता है.
3. त्वचा में लाए निखार : इसके तेल में मौजूद फैटी एसिड त्वचा को जीवाणुओं से बचाकर इसे एक्ने होने से रोकता है. इससे त्वचा की नमी बनी रहती है और त्वचा निखरता है. कुछ शोधों से ये भी पता चला है कि एक्जिमा और डर्मेटाइटिस की बीमारी में भी सूरजमुखी तेल लाभदायक है.
4. हड्डियों को मजबूत बनाता है : इसमें प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला मैग्नीशियम हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है.
5. बालों का करे विकास : इसके बीजों में जिंक तत्व की अधिकता होती है. जिंक आपके बालों को तो बढ़ाता है लेकिन इसकी अधिकता से बाल झड़ने भी लगते हैं इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करें. इसमें पाया जाने वाला विटामिन ई आपके सर में ब्लड सर्कुलेशन करके बालों के विकास में मदद करता है.

शरीर के मेंटेनेंस में भी फायदेमंद है सूरजमुखी
1. शरीर का मेंटेनेंस करता है : इसके तेल में पाया जाने वाला प्रोटीन शरीर के निर्माण, मरम्मत, हार्मोन और एंजाइमों के उत्पादन में भी मदद करती है.
2. कोलेस्ट्रॉल कम करता है : इइसके बीज में मोनो और पोलीसैच्युरेटेड फैट्स भी पाए जाते हैं. इन्हें अच्छा फैट माना जाता है और इनकी खासियत ये है कि ये यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं.

सूरजमुखी के नुकसान भी हैं
1. यदि आप जरूरत से ज्यादा सूरजमुखी का इस्तेमाल करेंगे तो इसमें मौजूद सेलेनियम और फास्फोरस आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा वजन और कोलेस्ट्राल बढ़ाने के साथ-साथ आपको पेट में गैस व दर्द की भी शिकायत हो सकती है.
2. बाजार में मिलने वाले सूरजमुखी के बीज को लेकर विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए. क्योंकि बाजार में मिलने वाले सूरजमुखी के बीज कई बारे काफी पुराने मिल जाते हैं जिससे नुकसान की ज्यादा संभवनाएं बनती हैं.
3. कुछ लोगों को सूरजमुखी परिवार के पौधों से एलर्जी हो सकती है. इसलिए उन्हें सावधान रहना चाहिए.
 

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Teeth Whitening At Home In Hindi - दांत चमकाने के घरेलू नुस्खे

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Teeth Whitening At Home In Hindi - दांत चमकाने के घरेलू नुस्खे

चेहरा कितना भी चमकदार हो लेकिन अगर दांत पीले हों तो आकर्षण कम हो जाता है। चमकते मोती से दांत सिर्फ स्वस्थ दांतों के लिए ही नहीं बल्कि अट्रैक्टिव पर्सनालिटी के लिए भी जरूरी है । आपकी हंसी के साथ अगर आपके दांत पीले दिख जाए तो सरेआम आप हंसी के पात्र बन जाते हैं। दोस्तों खिलखिलाती मुस्कान के लिए मोतियों जैसे सफेद दांतों की जरूरत पड़ती ही है। चमकते दांतों से हमारी पर्सनैलिटी को भी नई पहचान मिलती है । पर आज के दौर में हम में से ज्यादातर लोग पीले दांतों से परेशान हैं तो चलिए हम कुछ ऐसे नुस्खे  जानते हैं जिससे हमारे दांत चमकदार हो जाएं। 

पहले दांत पीले होने के कुछ कारणों को जानिए जिसे अवॉयड करना चाहिए जैसे कि _

  • हाई मात्रा में कैमिकल्स पानी
  • तंबाकू और धूम्रपाम  
  • कलर्ड फूड्स 
  • अस्वस्थ आहार

आपको टीथ व्हाइटनिंग के तमाम बाजारू इलाज मिल जाएंगे कई ब्रांड के टूथपेस्ट, मंजन आदि पर इनसे ज्यादा प्रभावी इलाज आपको अपने किचन में मिलेंगे जो ना ही खरचेलू होंगे ना किसी भी तरह के साइड इफ़ेक्ट की आशंका से भरे तो चलिए जानते हैं टीथ व्हाइटनिंग के असरदार घरेलू उपचार। 

1. दूध 
दूध से बनने वाले उत्पादों का सेवन ज्यादा करें क्योंकि उसमें कैल्शियम होता हैं जो दांतों के लिए बहुत जरूरी है। चाय कॉफी का सेवन लिमिटेड मात्रा में ही करें।  
2. पीपल की जड़ 
दांतों की समस्या को दूर करने के लिए पीपल के पेड़ की जड़ काफी कारगर साबित होती है। इससे आपको प्राकृतिक रूप से चमकदार दांत प्राप्त होंगे। आप इसे एक टूथब्रश की तरह भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। पीपल की जड़ लेकर दांत साफ़ करें और इसे फेंक दें। इनके एस्ट्रिंजेंट गुण दांतों को चमकदार और स्वस्थ बनाने में काफी फायदेमंद साबित होते हैं।

3. स्ट्रॉबेरी
स्ट्रॉबेरी में मैलिक एसिड मौजूद होता है, जो एक नैचुरल व्हाइटनिंग एजेंट है जो स्लाइवा के प्रॉडक्शन को बढ़ाकर दांतों को सफेद बनाता है। एक स्ट्रॉबेरी को मैश कर लें और टूथब्रश की मदद से दांतों पर हल्के से रगड़े और 5 मिनट बाद अच्छी तरह धो लें। ऐसा हफ्ते में एक बार जरूर करें। स्ट्रॉबेरी में अच्छी मात्र में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी होता है जो दांत सफ़ेद करने के मदद करता है।

4. तुलसी
ये तो हम सब जानते हैं कि तुलसी का प्रयोग घर में पूजा के लिए किया जाता है, पर इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। तुलसी में दांतों को चमकाने एवं दांतों एवं मुंह की समस्याओं को दूर करने के गुण होते हैं। दांतों को पीलेपन से बचाने के लिए तुलसी के पत्ते तोड़ें और इन्हें धूप में कुछ घंटों के लिए रखें। एक बार इनके सूख जाने पर इन्हें पीस लें। आप तुलसी की सूखी पत्तियों के साथ सरसों के तेल का मिश्रण करके दांतों की मालिश भी मसाज करें।

5. नमक

नमक में सोडियम और क्लोराइड दोनों शामिल होता है, जो दांतों का पीलापन कम करने के लिए कारगर है। हफ्ते में दो तीन बार नमक में सरसो का तेल मिलाकर दांतो का मसाज करें।
 
6. नीम
नीम में दांत सफेद बनाने और बैक्टीरिया खत्म करने के लाजवाब गुण पाए जाते हैं। रोजाना नीम की दातून से दांत साफ करें।

7. नींबू
एक नींबू का रस निकालकर उसमें सामान मात्रा में ही पानी मिला लें। खाने के बाद इस पानी का कुल्ला करें। रोजाना ऐसा करने से दांतों का पीलापन और सांसों की दुर्गंध दूर हो जाती है।


8. बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा पीले दांतों को सफेद बनाने का सबसे बेस्ट घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा से दांतों की मसाज करें और  मुंह धो लें इससे दांतों पर जमी पीली पर्त साफ हो जाएगी।

9. दातून
एक गलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें और इसमें रातभर दातुन रख दें। सुबह इसी दातुन का इस्तेमाल करें। इससे दांतों का पीलापन खत्म हो जाएगा। यदि आप प्रतिदिन दातुन नहीं कर सकते तो सप्ताह में एक दिन जरूर दातुन अवश्य करें। इससे दांत और मसूड़े स्वस्थ व मजबूत भी होते हैं ।

10. सेब 
सेब की अम्लता दाँतों को सफ़ेद करने में मदद करती है। सेब अच्छी तरह से चबाकर खाएं। इसमें तंतु की अच्छी मात्र होती है जो दांतों को सफ़ेद करने में मदद करती है।
11. लकड़ी का कोयला
रोज के टूथपेस्ट में लकड़ी के कोयले का पाउडर मिलाएं और इससे हल्के हांथो से दांत सांफ करें । कोयले के पाउडर का दिन में 2 बार इस्तेमाल करने से आपके दांत चमकने लगेंगे।
12. संतरे का छिल्का
संतरे का विटामिन सी दाँतों के कीटाणुओं को मारता है। यह दांतों को मजबूत और ज्यादा सफ़ेद करता है। तो अब से जब भी मौका मिले रात को सोने से पहले संतरे के छिलके से दांत घिसें।

13. केले का छिलका 
 केला पोषक पदार्थों से भरपूर होता है। केले के छिलकों से भी कई लाभ मिल सकते हैं। केले के छिलको में पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज़ जैसे पोषक पदार्थ मौजूद होते हैं। इन पदार्थों की मदद से आपके दांत चमकदार बन सकते हैं। केले का थोड़ा सा छिलका लें और इसके सफ़ेद भाग को दांतों पर 2 से 3 मिनट तक घिसें। इसके बाद इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें और किसी अचछे टूथपेस्ट से दांतों को साफ़ करें। 2 से 3 हफ़्तों तक ऐसा करने पर आपको बेहतर रिजल्ट  नजर आने लगेगा।
14. किशमिश 
किशमिश इस्तेमाल से आपके पीले दांत सफ़ेद हो सकते हैं। जब भी आपको समय मिले तो किशमिश चबाना शुरू कर दें।  इससे मुंह के अंदर लार बनेगी और प्लाक पूरी तरह हट जाएगा।
15. दूध और दही 
आपके दांतों को अच्छे से स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम और फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है। आप दूध और दही के मिश्रण की सहायता से पीले दांतों की समस्या को दूर कर सकते हैं। इससे आपके दांतों के इनेमल में खनिज की मात्रा दोबारा भर जाती है। चमकदार दांतों के लिए यह काफी बेहतरीन उपाय है।

एक बात का ध्यान रहे कि गलत खान-पीन की वजह से भी दांतों में पीलापन आता है। फास्ट फूड, मीठा हमारे दांतों पर चिपक जाता हैं जो दांतों को पीला बनाता है। सबसे पहले तो अपने खान-पान का ध्यान रखें। ऐसे फल और सब्जियों को खाएं जिन्हें चबाने की जरूरत पड़े।

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Symptoms Of Jaundice In Hindi - पीलिया के लक्षण

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Symptoms Of Jaundice In Hindi - पीलिया के लक्षण

पीलिया नाम की बीमारी ऐसी है जो कभी न कभी हर किसीको हुई होती है। पीलिया जिसे हम जॉइंडिस नाम सेभी जानते हैं,यहबीमारीइतनी आम है कि गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा होने वालीमुख्यबीमारियों में से यह एक है। पीलिया होने की सबसे अहम वजह है भारी गर्मी में बार बार प्यास बुझाने के लिए बाहर का प्रदूषित पानी पीना। मतलब आप समझ ही गए होंगे कि पीलिया होने की वजह है गंदे पानी और दूषित भोजन का सेवन। पीलिया आमतौर पर हेपेटाइटिस ए वायरस की वजह से होता है जो दूषित या संक्रमित खानपान से फैलता है। यही नहीं कई और बीमारियां हैं जिनके होने से लिवर पर असर पड़ता है, जो पीलिया होने की एक और वजह हो सकती है।पीलिया बच्चे बूढ़े किसीको भी हो सकता है। बस इसके होने की वजह और लक्षण के बार उम्र के हिसाब से अलग अलग नजर आते हैं। पीलिया वैसे तो प्राणघातक नहीं है पर अगर ज्यादा देर हो जाए तो खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहतेपीलिया का जल्द से जल्द  लक्षण जानकर उसका इलाज किया जाए। अब आप लक्षण की पहचान कैसे की जाए इस सोच में ना पढ़ें क्योंकि आज हम आपको पीलिया के बारीक से बारीक सिम्पटम्स बताएंगे जिससे सही समय पर उपचार करके खुदको स्वस्थ और सुरक्षित रख सकेंगे।

पीलिया के सिम्पटम्स

1. नवजात शिशु को पीलिया
नवजात शिशु को होने वाला पीलिया वयस्कों को होने वाले पीलिया से काफी अलग होता है। शिशुओं को पीलिया लीवर की बीमारी की वजह से नहीं होता। बच्चों का लीवर इतना सक्षम नहीं होता कि वो वयस्कों के लीवर की तरह बिलिरुबिन को कम कर सके। इस वजह से रक्त में बिलिरुबिन जमा हो जाता है और पीलिया हो जाता है। बच्चों में होने वाले पीलिया के सामान्य लक्षण आंखों व त्वचा का पीलापन, अनिद्रा, भूख में कमी और बहुत तेज़ रोना आदि हो सकते हैं।

2. शरीर और आंखों का पीला होना
पीलिया शब्द ही पीले रंग से लिया गया है। त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला हो जाना इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण है। ऐसा बिलिरुबिन का स्तर गिरने के कारण होता है जो कि एक ऐसा पिगमेंट है जो लीवर में रेड ब्लड सेल्स नष्ट होने से पैदा होता है। इसलिए कोई भी बीमारी जो लीवर के सिस्टम को प्रभावित करती है उसमें भी बिलिरुबिन का स्तर ऊंचा हो सकता है और उसका प्रभाव त्वचा पर दिख सकता है।

3. स्टूल में चेंजेस
जिस इंसान को पीलिया होता है उसके बिलिरुबिन की अत्यधिक मात्रा का अधिकतर हिस्सा यूरीन में निकल जाता है लेकिन जितना हिस्सा बचता है वो पूरे शरीर की कोशिकाओं में फैल जाता है। और इसी वजह से स्टूल का रंग बदल जाता है।

4. पेट में दर्द होना
पीलिया बिले डक्ट में बिलिरूबिन की रूकावट के कारण भी हो सकता है। ये रूकावट आमतौर पर गालस्टोन के रूप में या फिर बाइल डक्ट में सूजन के कारण होती है। इससे पिगमेंट का स्तर बढ़ जाता है। बहुत से लोगों को ऐसे में पेट दर्द होता है। आमतौर पर ये दर्द पेट के दाहिने तरफ होता है। 

5. पेशाब का रंग गहरा होना
आमतौर पर ऐसा होता है कि लाल रक्त कोशिकाएं बिलिरुबिन में और फिर बाइल कहलाने वाले एक पिगमेंट में बदल जाते हैं। बिलिरुबिन के असामान्य स्तर होने पर यूरीन में बाइल पिगमेंट की मात्रा बढ़ जाती है। इससे यूरीन का रंग गहरा हो जाता है।

6. वोमिटिंग होना
पीलिया में उल्टी और मतली की शिकायत भी हो सकती है। अगर इसका इलाज ठीक प्रकार से न किया जाए तो आगे चलकर ये समस्या बहुत बड़ी भी हो सकती है। 

7. शरीर में इचिंग होना
कोलेस्टासिस की वजह से जिन लोगों को पीलिया होता है उनको खुजली की शिकायत भी हो जाती है।शुरुआत में खुजली हाथों में होती है और फिर पैरों में। फिर धीरे धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। रात को खुजली की ये समस्या काफी बढ़ जाती है।

8. नींद में प्रॉब्लम होना
जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें नींद से जुड़ी समस्याएं काफी आम है। साथ ही, भावनात्मक कष्ट भी महसूस हो सकता है।

9. ज्यादा थकान लगना
जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें सबसे सामान्य लक्षण थकान है। ये आमतौर पर प्राइमरी बाइलिअरी सर्होसिस, प्राइमरी स्केरोसिंग कोलेंजाटाइसऔर बाइल डक्ट सिंड्रोममें होता है।

10. दर्दरहित पीलिया
जब पीलिया में दर्द महसूस नहीं होता तो संभव है कि बालइ डक्ट में रुकावट आ रही हो। इस तरह के मामलों में पीलिया में, त्वचा पीली होने के साथ साथ, वजन घटना या दस्त या कब्ज़ जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
 

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Ayurvedic Treatment Of Gas - गैस का आयुर्वेदिक इलाज

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Ayurvedic Treatment Of Gas - गैस का आयुर्वेदिक इलाज

वर्तमान परिदृश्य मेंबहुत सी ऐसी बीमारियां हैं, जो हमारी गलत आदतोंऔर लापरवाहियों की देन हैं। जैसेअनियमित खान-पान के कारण उभरे कब्ज की समस्या और लंबे कब्ज के बाद गैस की बीमारी। गैस या वात की समस्या होने के बाद यह समस्या गैस्ट्रिक ट्रबल शरीर में कई अन्य प्रॉब्लम्स, जिन्हें आयुर्वेद की भाषा में वात रोग कहते हैं, का कारण बनती है। गैस से पीड़ित लोगों  न सिर्फ पेट की तकलीफ बल्कि सिरदर्द, कमरदर्द, पेटदर्द, सीने में दर्द जैसी कई तकलीफों का सामना करना पड़ता है। 
यह देखने मे आया है कि जिसे गैस की समस्या होती है उसे एसिड रिफ्लक्स की समस्या भी होने लगती हैं। इसके लक्षण मरीज की हालत खराब कर देते हैं, उसे नींद नहीं आती है। कई बार जब ये समस्या अपनी मनपसंद चीज खाने पर हो जाए तो उससे भी तौबा करने का मन होने लगता है। दरअसल, इस समस्या का मुख्य कारण कुछ आदतें या अनियमित दिनचर्या है। अगर आपको भी अक्सर गैस की समस्या हो जाया करती है तो सावधान। इसे हल्के में हरगिज़ ना लें वरना यह आपको गम्भीर कर देगा। और इस फ़ज़ीहत रूपी गैस की बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि आप इसके कारण एयर लक्षण जानें एयर साथ ही आजमाएं हमारे द्वारा बताई गई कुछ असरदार गुणों से भरे आयुर्वेदिक नुस्खे। 

लक्षण
 पेट अच्छी तरह साफ़ नहीं हो रहा हो और आपको भोजन के बाद पेट दर्द या गैस या दस्त हो जाते हों,भोजन पचता नहीं हो, हृदय पर बोझ अनुभव होता हो, पेट फूल जाता हो, पुराना कब्ज हो, कोलाइटिस हो, मतली,उल्टी, लगातार हिचकी, पेटदर्द और सूजन की तकलीफ होती हो, भोजन में अरुचि हो तो आप इसे गैस की बीमारी के सिम्पयमस ही समझे और तुरन्त लाग जाएं हमारे बताए जा रहे आयुर्वेदिक तरीकों से इसके इलाज में। 

1. चूर्ण
सौंठ, हींग और काल नमक इन तीनो को बराबर मिला कर चूर्ण बना लें, और चूर्ण को खाएं इससे तुरन्त गैस को बाहर निकालता है। 
2.बेल–बिल्व
बेल का शरबत, या मुरब्बा या चूर्ण, किसी भी प्रकार से बेल का सेवन आंतो की पूर्ण सफाई करता हैं। पेट के रोगो से ग्रसित रोगो को बेल का नियमित सेवन करना चाहिए। ये कोलाइटिस के रोगियों के लिए भी अमृत के समान हैं। 

3. अदरक
अदरक में एंटीबैक्टिीरियल और एंटीइंफ्लामेंट्री तत्व पाए जाते हैं। यह पेट और इसोफेगस की समस्या तुरंत दूर करने की क्षमता रखते हैं। इसके सेवन से गैस की समस्या पैदा करने वाले बैक्टिरिया खत्म हो जाते हैं। थोड़ा सा सूखा अदरक चाय में डालकर पीने से गैस से तुरंत राहत मिल जाती है। या अदरक के एक टुकड़े को घी में सेंककर काला नमक लगाकर खाने पर गैस से छुटकारा मिल जाता है। सूखे अदरक का काढ़ा बनाकर पीने से भी यह समस्या खत्म हो जाती है। 

4. पाइनएप्पल
 पाइनएप्पल में पाचक एन्जाइम्स मौजूद होते हैं। गैस की समस्या हो तो एल्कलाइन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए और पाइनएप्पल में  एल्कलाइन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसीलिए इसके सेवन से गैस की समस्या दूर हो जाती है, लेकिन ये ध्यान रखें हमेशा पका हुआ पाइनएप्पल ही खाएं। कच्चा पाइनएप्पल पेट को फायदे की बजाए नुकसान पहुंचा सकता है। 

5. पुदीना
अगर आपको गैस और एसिडिटी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो पुदीना की हेल्प लें। पुदीने की कुछ पत्तियां चबा लें या पुदीने की चाय बनाकर पिएं। गैस की समस्या तुरन्त दूर हो जाएगी। 

6. कालीमिर्च
कालीमिर्च गैस की समस्या से छुटकारा पाने का एक असरदार उपाय है। लगभग आधा ग्राम कालीमिर्च को पीसकर उसमें शहद मिलाकर लेने से फौरन आराम मिलता है। 

7. तुलसी
तुलसी कई बीमारियों में जबरदस्त औषधि की तरह काम करती है। रोजाना पांच तुलसी के पत्ते खाने से गैस की समस्या के साथ ही पेट के अन्य कई रोग खत्म हो जाते हैं। गैस की समस्या में तुलसी की चाय बनाकर या उसका रस पीने से भी तुरंत आराम होता है। 

8. छाछ
थोड़े मेथीदाने, हल्दी और हींग व जीरा मिलाकर पाउडर बनाकर रख लें। सुबह खाना खाने के बाद इस पाउडर को छाछ में डालकर पिएं। अगर आपने कुछ दिन ऐसा किया तो गैस व एसिडिटी की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। 

9. जीरा
जीरा खाने से डायजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसीलिए जब भी आपको गैस की समस्या परेशान करें। एक चम्मच जीरा पाउडर ठंडे पानी में घोलकर पिएं, असर जल्द महसूस करने लगेंगे। 

10. हल्दी
हल्दी में एंटीइंफ्लामेंट्री व एंटीफंगल तत्व पाए जाते हैं। यह कई रोगों में दवा का काम करती है। विशेषकर पेट के रोगों में। थोड़ा हल्दी पाउडर ठंडे पानी से लें और फिर दही या केला खाएं। 

11. लौंग
लौंग एक ऐसा मसाला है, जो गैस की समस्या से परेशान लोगों के लिए एक बेहतरीन इलाज है। लौंग चुसने से या लौंग पाउडर को शहद के साथ लेने से एसिड रिफ्लक्स और गैस की समस्या दूर हो जाती है। 

12. पपीता
पपीता बीटा- केरोटीन से भरपूर फल है। इसमें खाना जल्दी पचाने वाले तत्व पाए जाते हैं। पपीता में पेपिन नाम का एन्जाइम पाया जाता है, जो कि शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। गैस की समस्या हो रही हो तो खाना कम खाएं, उसके बाद थोड़ा काला नमक डालकर पपीता खाएं। कब्ज और गैस दोनों की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। 

13. निम्बू
एक गिलास गर्म पानी में एक निम्बू का रस मिलाकर बार बार पीते रहने से पाचन अंगो की धुलाई हो जाती हैं। रक्त और शरीर के समस्त विषैले पदार्थ मूत्र द्वारा निकल जाते हैं। परिणामतः कुछ ही दिनों में शरीर में नई स्फूर्ति और नई शक्ति अनुभव करने लगेंगे। 
अगर अपच होने पर तो नम्बू की फांक पर नमक डालकर गर्म करके चूसने से खाना सरलता से पच जाता है। यह यकृत के समस्त रोगों में निम्बू लाभदायक होता हैं। 

14. नारंगी
अगर आपकी पाचन शक्ति कमज़ोर हैं तो नारंगी का रस तीन गुना पानी में मिलाकर पीना चाहिए। 

15. पालक
कच्चे पालक का रस प्रात: पीते रहने से कुछ ही दिनों में कब्ज ठीक हो जाता है। आँतों के रोगों में इसकी सब्जी लाभदायक है। पालक और बथुए की सब्जी खाने से भी कब्ज दूर होता है। कुछ दिन लगातार पालक अधिक मात्रा में खाने से पेट के रोगों में लाभ होता है। 

15. मूली
अग्निमांध, अरुचि, पुराना कब्ज, गैस होने पर भोजन के साथ मूली पर नमक, काली मिर्च डालकर दो माह तक नित्य खाएं। इससे लाभ होगा। पेट के रोग में मूली की चटनी, आचार सभी भी उपयोगी हैं। ध्यान रहे मूली सेवन का सही समय दोपहर ही है। रात को मूली नहीं खानी चाहिए। 

16. बथुआ
जब तक मौसम में बथुआ मिलता रहे रोजाना इसकी सब्जी खाएं इससे पेट के हर प्रकार के रोग यकृत मतलब लिवरतिल्ली , गैस, अजीर्ण, कृमि, अर्श ठीक हो जाती हैं।

Amla Churna Ke Fayde In Hindi - आंवला चूर्ण के फायदे

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Amla Churna Ke Fayde In Hindi - आंवला चूर्ण के फायदे

कुदरत ने हमें कुछ ऐसी चीजों से नवाजा है जो अनाज की तरह हमारा पेट नहीं भरते और ना ही मसाले सब्जियों की तरह हमारे भोजन का स्वाद बढाते हैं, बल्कि वह तो औषधीय गुणों से परिपूर्ण होकर हमारे गलत खान-पान, अनहेल्दी लाइफस्टाइल के रिजल्ट में हुई शारीरिक तकलीफों से निजात दिलाने में हमारी मदद करता हैं जिनमें से एक है आंवला। जी हां आंवला में हैं कई बीमारियों से निपटने की शक्ति। आंवला में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता हैं। और आंवले  में पोटासियम , कार्बोहायड्रेट , फाइबर, प्रोटीन्स, विटामिन्स ‘ए’, ’बी काम्प्लेक्स, मैग्नीशियम, विटामिन ‘सी’, आयरन युक्त होने के साथ ही यह विटामिन ‘सी’ से भरपूर होता है।

आंवला चूर्ण, अचार जूस आदि किसी ना किसी रूप में लगभग हम सभी के घरों में मौजूद होता है। आंवला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी रूप में खाया जाए यह अपने गुणों फायदा ही पहुंचाता है। हमारे यहां आंवले का चूर्ण खाने का काफी प्रचलन है क्योंकि इसे घर पर बनाना या बाहर से लाकर महीनों रखकर खाना किसी और तरीके से बेहतर है क्योंकि ना खराब होने की टेंशन ना ज्यादा महंगा जबकि इसके फायदे कई दूसरे ऑप्शन्स से कहीं ज्यादा महंगे हैं। आंवला चुर्ण के फायदों की लंबी फेहरिस्त है जिनमें से आज हम जानेंगे कुछ खास होने वाले स्वास्थ्य संबन्धी फायदों की।

शरीर के विभिन्न हिस्सों को आंवला चूर्ण से होने वाले लाभ 


1. मेटाबोलिज्म 
आंवला मेटाबोलिक क्रियाशीलता को बढाता हैं। मेटाबोलिज्म क्रियाशीलता से हमारा शरीर स्वस्थ और सुखी होता हैं। आवला भोजन को पचाने में बहुत मददगार साबित होता हैं खाने में अगर प्रतिदिन आवले की चटनी, मुरब्बा, अचार, रस, चूर्ण या चवनप्रास कैसे भी रोजमरा की जिन्दगी में शामिल करना चाहिए। इससे कब्ज की शिकायत दूर होती हैं पेट हल्का रहता हैं। रक्त की मात्रा में बढ़ोतरी होती हैं। खट्टे ढकार आना, गैस का बनाना, भोजन का न पचना, इत्यादि में 5 ग्राम आवला चूर्ण को पानी में भिगों कर सुबह शाम खाएं इससे अम्लीय पित्त के बुरे प्रभाव से छुटकारा मिलता हैं।

2. डायबिटीज
आवला में क्रोमियम तत्व पाया जाता हैं जो डायबिटिक के उपयोगी होता हैं। आवला इंसुलिन होरमोंस को को सुदृढ़ करता हैं और खून में सुगर की मात्रा को नियंत्रित करता हैं। क्रोमियम बीटा ब्लॉकर के प्रभाव को कम करता हैं, जो की ह्रदय के लिए अच्छा होता हैं ह्रदय को स्वस्थ बनाता हैं।आवला खराब कोलेस्ट्रोल को ख़त्म कर अच्छे कोलेस्ट्रोल को बनाने में मदद करता हैं। डायबिटिक आंवले को चूर्ण, जूस या किसी न किसी रूप में अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 

3. पीरियड्स प्रॉब्लम
महिलाओं में पीरियड्स संबन्धी पीरियड्स देर से आना, ज्यादा ब्लीडिंग होना, जल्दी जल्दी पीरियड्स आना, कम आना, पेट में दर्द का होने जैसी कई समस्यां होती रहती हैं। इसलिए उन महिलाओं को यह जानना काफी जरूरी है कि अब चिंता ना करें क्योंकि आंवला के सेवन से वे इन तकलीफों से राहत पा सकती हैं। दरसल आवला में मिनिरल्स, विटामिन्स पाया जाता हैं जो महावारी में बहुत आराम दिलाता हैं इसलिए नियमित रूप से आप आंवला और खासकर चूर्ण का सेवन करना शुरू कर दें इससे आपको महावारी की समस्याओ से छुटकारा मिल जाएगा।

4. प्रजनन समस्या
आंवला प्रजनन के लिए बहुत ही उत्तम हैं महिलाओ और पुरुषो के लिए आंवला के सेवन से पुरुषो में शुक्राणु की क्रियाशीलता और मात्रा बढती हैं और महिलाओं में अंडाणु अच्छे और स्वस्थ बनते हैं साथ ही माहवारी नियमित हो जाती हैं। इस तरह दोनों को ही अपनी प्रजनन क्षमता में सुधार और दोषमुक्त करने के लिए नियमित आंवला चूर्ण का सेवन करना चाहिए।

5. हड्डियों की मजबूती 
आंवला के सेवन से हड्डियाँ मजबूत और ताकत मिलती हैं। आंवला के सेवन से ओस्ट्रोपोरोसिस और आर्थराइटिस एवं जोरो के दर्द में भी आराम दिलाती हैं। इए रोजाना आंवला चूर्ण खाने की आदत डालें।

6. तनाव से मुक्ति
आमला खाने से तनाव में आराम मिलता हैं अच्छी नींद आती हैं। आवला के तेल को बालों के जड़ों में लगाया जाये तो कलर ब्लाइंडनेस से छुटकारा मिलता हैं।सर को ठडा रखता हैं।और राहत देता हैं। इसलिए अपनी दिनचर्या में आंवला चूर्ण को स्थान दें।

7. हार्ट प्रॉब्लम
आवला हमारे ह्रदय के मांसपेशियों के लिए उत्तम होता हैं। आमला हमारे ह्रदय को स्वस्थ बनाने में कारगर हैं।आमला ह्रदय की नालिकाओ में होने वाली रुकावट को ख़त्म करता हैं।खराब कलेस्ट्रोल को ख़त्म कर अच्छे कलेस्ट्रोल को बनाने में मदद करता हैं।।आवला में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं। जो शरीर में फ्री रेडिकल को बनाने ही नहीं देता।एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में एमिनो एसिड और पेक्टिन पाए जाते हैं।जो की कलेस्ट्रोल को नहीं बनाने देता हैं और ह्रदय की मांशपेशियों को मजबूती देता हैं।आवला का रस या चूर्ण रोजाना ग्रहण करना काफी फायदेमंद है।

8. आँखों 
आंवला का चूर्ण आँखों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। आंवला आँखों की दृष्टी को या ज्योति को बढाता हैं। मोतियाबिंद में, कलर ब्लाइंडनेस, रतोंधी या कम दिखाई पड़ता हो तो भी आंवला का सेवन किसी भी रूप में करें लाभ होगा। आखों के दर्द में भी काफी फायदा होता हैं।

9. संक्रमण से सेफ्टी 
आंवला में बक्टेरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता होती हैं और ये बाहरी बीमारियों से भी हमें बचाती हैं। आंवला शरीर को पुष्ट कर उसे रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाती हैं, और टोक्सिन को यानी विषाक्त प्रदार्थ को हमारे शरीर से निकाल देती हैं। आंवला अल्सर, अल्सरेटिव, कोलेटीस, पेट में संक्रमण, जैसे विकार को  खत्म करता हैं। आंवला का रस या पाउडर रोजाना लेने से बहुत फायदा होता हैं।

10. वजन घटाए
आंवला के रस का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती हैं। आंवला हमारे मेटाबोलिज्म को तेज कर वजन कम करने में मदद करती हैं। आंवला के सेवन से भूख कम लगती हैं और काफी देर तक पेट भरा हुआ रहता हैं। 

11. नकसीर
अगर किसी को नकसीर की तकलीफ हैं तो उन्हें आवला का सेवन करते रहना चाहिए। रोजाना एक चम्मच आंवला पाउडर को पानी में मिलाकर पीने से नाक से खून आने की आदत से आराम मिलता है।

12. उग्रता व उत्तेजना से आराम
आंवला  के सेवन से हमेशा आने वाले उत्तेजना से शांति मिलती हैं, अचानक से पसीना आना, गर्मी लगना, धातु के रोग, प्रमेय, प्रदर, बार बार कामुक विचार का आना इत्यादि चीजों से आराम दिलाता हैं।इसलिए रोज आंवला चूर्ण की खुराक लें।

13. उल्टी या वमन से राहत
आंवला का पाउडर और शहद का सेवन करें या आवला के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से उल्टियों का आना बंद हो जाता हैं।

14. रोग प्रतिरोध 
आंवले में एंटी ओक्सिडेंट होते हैं जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और ये मौसम में होने वाले बदलाव के कारण होने वाले वाइरल संक्रमण से भी बचाता है। इसलिए आंवला चूर्ण का भरपूर सेवन करें।

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Home Remedies For Acidity In Hindi - एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार

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Home Remedies For Acidity In Hindi - एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार

हमारे पूरे शरीर में पेट सबसे अहम हिस्सों में से एक है। अगर यह दुरुस्त ना हो तो शरीर का संतुलन में रह पाना असंभव है। क्योंकि पेट के ही एक्टिविटीस की बदौलत पूरे शरीर को मिलती है ऊर्जा और अन्य पोषक तत्व। पर आज का माहौल ऐसा है कि हर दूसरा व्यक्ति पेट की किसी ना किसी तकलीफ से बेहाल है और इनमें सबसे ज्यादा पेट संबन्धी समस्या में मिलते हैं एसिडिटी के मरीज। पहले तो एक उम्र गुजारने के बाद पेट की अन्य बीमारी या एसिडिटी की शिकायत होती थी पर अब समय ऐसा बिगड़ा है कि बड़े- बूढ़े, महिला-पुरूष किसीको भी एसिडिटी की समस्या सताने लगती है। इसलिए जरूरी है की हम सभी एसिडिटी होने के कारणों, लक्षण से वाकिफ हों ताकि इसका उचित इलाज कर सकें। 

दरसल हमारे पेट में बनने वाला एसिड या अम्ल उस भोजन को पचाने का काम करता है, जो हम खाते हैं, लेकिन कई बार पचाने के लिए पेट में पर्याप्त भोजन ही नहीं होता या फिर एसिड ही आवश्यक मात्रा से ज्यादा बन जाता है। ऐसे में एसिडिटी या अम्लता की समस्या हो जाती है। इसे आमतौर पर दिल की चुभन या हार्टबर्न भी कहा जाता है। वसायुक्त और मसालेदार भोजन का सेवन आमतौर पर एसिडिटी की प्रमुख वजह है। इस तरह का भोजन पचाने में मुश्किल होता है और एसिड पैदा करने वाली कोशिकाओं को जरूरत से ज्यादा एसिड बनाने के लिए उत्तेजित करता है।

एसिडिटी के कारण 

  • लगातार बाहर का भोजन करना।
  • खाना न खाना
  • ईररेगुलर खाना खाना
  • ज्यादा मसालेदार भोजन करना
  • ज्यादा स्ट्रेस लेना 
  • ज्यादा समय तक वर्क लोड रहना
  • आदि एसिडिटी के कारण हो सकते हैं।

एसिडिटी के लक्षण 

  • पेट में जलन होना
  • गले में जलन
  • खट्टी डकार आना
  • कब्ज होना
  • बेचैनी महसूस होना
  • पेट में गैस होना

ऐसी तकलीफें अगर होने लगे तो समझ जाइए की आप एसिडिटी के शिकार हो गए हैं। और जब एसिडिटी हो ही गया हो तो बिना देर के फौरन बताए गए आसान घरेलू नुस्खे आजमाएं और एसिडिटी से राहत पाएं।

1. जीरा
एक गिलास पानी में कुछ जीरे के दाने डालकर उबाल ले और ठंडा होने के बाद बाद इसे पिए। पेट में जलन एसिडिटी के इलाज  में जीरा एक अच्छा घरेलु नुस्खा है।  जीरा से एक प्रकार का सलाइवा बनता है जो पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है जिससे पेट के गैस बाहर निकलने और तेज़ाब खत्म करने में मदद मिलती है।

2. इलायची
2 इलायची के पाउडर को एक गिलास पानी में डालकर उबालें और ठंडा करके पी जाएं। 
इलायची में कई ऐसे गुण होते है जो ज्यादा एसिड बनने से रोकने के साथ खाना हजम करने की प्रक्रिया को अच्छा करता है।  पेट में होने वाला स्पाज्म को भी काम करने में मददगार है।
 
3. पानी
 सुबह उठने के तुरंत बाद पानी पिएं। इस तरह रात भर में पेट में बने आवश्यकता से अधिक एसिड और दूसरी गैर जरूरी और हानिकारक चीजों को इस पानी के जरिए शरीर से बाहर निकाल जाता है। इसलिए सुबह सबसे पहले चाय नही बल्कि खाली पेट पानी पिएं।

4. फ्रूट्स 
 फलों की खूबियों से तो हम सभी वाकिफ हैं इसलिए हम सभी को रोजाना फल खाने की आदत डालनी चाहिए। और अगर आप एसिडिटी शिक़ार हों तो केला, तरबूज, पपीता और खीरा को रोजाना के भोजन में शामिल करें। तरबूज का रस भी एसिडिटी के इलाज में बड़ा कारगर है।

5. नारियल पानी
अगर किसी को एसिडिटी की शिकायत है, तो नारियल पानी पीने से काफी आराम मिलता है। 

6. अदरक
खाने में अदरक को शामिल करें। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और जलन से भी राहत मिलेगा। 

7. ठंडा दूध
बिना शक्कर के ठंडा दूध दिन में 2-3 बार पिएं। डर्सलक दूध में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है जो एसिड बनने से रोकता है और जो पहले से मौजूद एसिड है दूध उसको अपने में ऑब्जर्व कर लेता है। जो पेट में तेज़ाब से छुटकारा दिलाता है। और जो जलन होती है उससे भी राहत मिलती है। बेहतर रिजल्टके लिए दूध में एक चमच्च देसी घी मिला लें। 

8. सब्जियां
बींस, सेम, कद्दू, बंदगोभी और गाजर जैसी सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। इससे एसिडिटी से लम्बी राहत मिलेगी।

9. लौंग
 एक लौंग अगर कुछ देर के लिए मुंह में रख ली जाए तो इससे एसिडिटी में राहत मिलती है। लौंग का रस मुंह की लार के साथ मिलकर जब पेट में पहुंचता है, तो इससे काफी आराम मिलता है।
10. तुलसी की पत्ती
जब भी  कभी आपको ये महसूस की एसिडिटी का प्रकोप बढ़ रहा है तो तुलसी की कुछ पत्तियां  चबाएं। कुछ देर में महसूस होगा कि पेट में जलन, बेचैनी कम होने लगी है। 

11. कार्बोहाइडे्रट
 कार्बोहाइडे्रट से भरपूर भोजन जैसे चावल एसिडिटी रोकने में मददगार है, क्योंकि ऐसे भोजन की वजह से पेट में एसिड की कम मात्रा बनती है। शेंग, डॉयफ्रूइट्स, फ्रूट्स, फ्रूट्स सलाद जैसी चीजें खाएं।

12. व्यायाम
नियमित व्यायाम और ध्यान की क्रियाएं पेट, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र का संतुलन बनाए रखती हैं।

एसिडिटी से बचने के लिए कुछ विशेष परहेज

  • तला भुना, वसायुक्त भोजन, ज्यादा चॉकलेट और जंक फ़ूड न खाएं।
  • शरीर का वजन बढ़ने न दें।
  • ज्यादा धूम्रपान और किसी भी तरह की मदिरा का सेवन एसिडिटी बढ़ाता है, इसलिए इनसे परहेज करें।
  • सोडा युक्त कोल्डड्रिंक व कैफीन आदि का सेवन न करें। इसकी बजाय हर्बल टी का प्रयोग करना बेहतर है। 
  • घर का बना खाना ही खाएं। 
  • जितना हो सके, बाहर के खाने से बचें।
  • दो बार के खाने में ज्यादा अंतराल रखने से भी एसिडिटी हो सकती है।
  • कम मात्रा में थोड़े-थोड़े समय अंतराल पर खाना खाते रहें।
  • अचार, मसालेदार चटनी और सिरके का प्रयोग भी न करें।
     

Late Periods Problem In Hindi - पीरियड मिस या लेट होने के कारण

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Late Periods Problem In Hindi - पीरियड मिस या लेट होने के कारण

क्या आपका पीरियड मिस या लेट हुआ है और आप इस सोच में हैं की किसी गलती के कारण आप प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई। यदि ऐसा है तो हम आपको बता दें की पीरियड मिस या लेट होने के प्रेगनेंसी के अलावा और बहुत से कारण होते हैं। कई बार नियमित चल रही माहवारी, अचानक अनियमित हो जाती है या फिर आना बंद हो जाती है। यदि आपके साथ भी ऐसा ही है, तो विचार करें कि क्या आपकी जीवनशैली में कोई बदलाव हुआ है। उदाहरण के तौर पर, बहुत ज्यादा स्ट्रेस, ज्यादा व्यायाम, वजन कम होना या वजन बढ़ना आदि सभी आपके हॉर्मोन स्तरों को प्रभावित करते हैं और आपके माहवारी चक्र में दखल दे सकते हैं।

दरसल आपके अंडाशय सामान्यत: हर महीने लगभग एक अंडा जारी करते हैं। यह आपकी माहवारी के पहले दिन से 12 या 14 दिन बाद होता है। अगर, अंडा निषेचित नहीं हो पाता, तो आपके गर्भाशय की अंदरुनी परत झड़ जाती है और आपकी माहवारी शुरु होती है।

अगर, आपके अंडाशय सामान्य ढंग से अंडे जारी नहीं कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आपके गर्भाशय को माहवारी शुरु करने के जरुरी सभी संकेत नहीं मिल पा रहे हों। इसलिए महिलाओं का पीरियड होना ओव्यूलेशन होने के दिन पर निर्भर करता है इसलिए जिन महिलाओं का पीरियड लेट होता है या देरी से होता है उनका ओव्यूलेशन 14 वें  दिन न होकर 8 से 20 दिनों में होता है। लेकिन आगर आपका पीरियड इससे भी लेट होने लगे तो बिना लापरवाही किए आप फॉरन डॉक्टर से मिलें।

पीरियड का लेट  होना कई कारणों पर निर्भर करता है जैसे कि :

1. प्रेगनेंसी
अगर आपने हाल ही में असुरक्षित सेक्सुअल रिलेशन बनाया है तो हो सकता है कि आपका पीरियड गर्भधारण करने की वजह से ना आया हो।
सोल्यूशन:  तुरन्त प्रेगनेंसी की जांच कराएं।

2. मासिक चक्र की शुरुवात
जब मासिक चक्र की शुरुवात होती है तो जरुरी नहीं की हर लड़की में वो चक्र नियमित हो मतलब कुछ में वो समय से होगा और कुछ में नहीं। कई लड़कियों में शुरुवात के सालों में पीरियड में अनियमितता होती है जो की बाद में धीरे धीरे ठीक हो जाती है। 
सोल्यूशन: अगर आपका पीरियड हाल ही में शुरू हुआ है तो आपको ज्यादा घबराने की जरुरत नहीं।अथवा डॉक्टर से संपर्क करें।

3. वजन का बढ़ना
मोटापे की वजह से शरीर में हॉर्मोन्स सही ढंग से कार्य नहीं कर पाते जिसके कारण पीरियड में देरी या पीरियड मिस हो सकता है। सोलुशन:  नियमित व्यायाम, सही डाइट और अच्छे लाइफस्टाइल को अपना कर अपना वजन कंट्रोल करें।

4. अंडर वेट होना
कुछ लडकियां और महिलाएं बहुत दुबली पतली होती हैं और वजन का सामान्य से कम होना भी पीरियड की परेशानियों के लिए जिम्मेदार होता है क्योंकि उनका शरीर उचित मात्रा में एस्ट्रोजन नहीं बना पाता इस कारण उनका ओव्यूलेशन नहीं हो पाता। 
सोल्यूशन: व्यायाम और अच्छी डाइट के जरिए कम वज़न और लेट पीरियड की समस्या से छुटकारा पाएं।

5. खान पान में कमी
कुछ महिलाओं में ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया या बुलिमिया पाया जाता है ऐसी महिलाएं कम खा कर अपने वज़न को एक दम से कम करना चाहती है। सही पोषण की कमी का असर उनके पीरियड पर पड़ता है जिससे पीरियड अनियमित, मिस या लेट होने की समस्या जन्म लेती है।
सोल्यूशन: शरीर के साथ जो भी करें एक्सपर्ट की राय और शरीर जरूरत के अनुकूल ही करें।

6. खिलाडी या डांसर होना
अकसर खिलाडी और डांसर आपना स्टैमिना और परफॉरमेंस बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा प्रैक्टिस कर लेती हैं। शरीर के जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल का विपरीत प्रभाव उनके एस्ट्रोजन हॉर्मोन के लेवल पर पड़ता है जिसके फलसवरूप ऐसी लड़कियों या महिलाओं को अमेनोररहीया यानि पीरियड डिले होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। 
सोल्यूशन: सही पोषण युक्त डाइट और कुछ दिन आराम करके माहवारी को फिर से सामान्य करने की कोशिश करें।

7. ओवर एक्सरसाइज
कुछ महिलाएं आकर्षक शरीर पाने के लिए जरुरत से ज्यादा व्यायाम करती हैं। ऐसी महिलाओं को अनियमित पीरियड प्रॉब्लम की समस्या हो जाती है।
सोल्यूशन: जरुरत से ज्यादा व्यायाम करने से बचें

8. गर्भनिरोधक गोलियां लेना
गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी मासिक चक्र को डिस्टर्ब कर सकता है।
सोल्यूशन: जितना हो सके गर्भ निरोधक गोलियों के इस्तेमाल से बचें।

9. थाइरोइड की प्रॉब्लम 
कई बार हमें थाइरोइड की परेशानी होती है और हमें उसका पता भी नहीं चलता। दोनों हाइपो-थयरोइडिस्म और  हाइपर-थयरोइडिस्म होना आपके मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है।
सोल्यूशन: पीरियड लेट होने की वजह जानने के लिए अपना थाइरोइड टेस्ट करवाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।

10. हार्मोनल लेवल का असंतुलन
PCOS के अलावा कुछ शारीरिक रोग या मानसिक तनाव होने का असर शरीर के हार्मोनल के संतुलन को बिगाड़ सकता है जिसके फलसवरूप आपका पीरियड लेट हो सकता है।
सोल्यूशन: हॉर्मोन को संतुलित बनाए रखने का प्रयास करें।

11. प्रीमेनोपॉज़
जो महिलाएं रजोनिवृत्ति यानि मेनोपॉज़ की ओर बढ़ रही होती हैं उनमें पीरियड मिस और डिले होने की प्रॉब्लम आम होती हैं। ऐसी महिलाओं में मासिक स्त्राव और मासिक चक्र की आवर्ती पर काफी असर पड़ता है।
सोलुशन: मेनोपॉज के आसपास की एज में अगर हैं तो ज्यादा चिंता न करें।

12. दवाइयों का सेवन
थाइरोइड, कैंसर, कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, मासिक रोगों के लिए दी जाने वाली दवाइयां और स्टेरॉइड्स आदि कुछ ऐसी दवाइयां हैं जो की आपके मासिक चक्र को प्रभावित कर सकती हैं।
सोल्यूशन: बीमारी के ठीक होने तक ऐसी समस्या पर धैर्य रखें और अगर ज्यादा समय तक सुधार ना हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

13. मानसिक तनाव और चिंता
मानसिक तनाव, चिंता, घरेलू झगड़े, इमोशनल चेंजेस, डिप्रेशन आदि का असर सीधा आपके हॉर्मोनल लेवल पर पड़ता है जिसके कारण आपके शरीर के हॉर्मोन्स के कार्य प्रभावित होते हैं। हॉर्मोन्स का चेंज होना आपके दिमाग के हाइपो-थैलेमस नाम के हिस्से को प्रभावित करता है। यह हिस्सा आपके मासिक चक्र को नियंत्रित करता है।
सोल्यूशन: मानसिक तनाव, बात-विवाद, डिप्रेशन, चिंता आदि से बचें और मैडिटेशन, योगा को अपनी रूटीन लाइफ में शामिल करें।
 
14. स्केड्यूल बदलने या सफर करना
 कई बार ऑफिसियल टाइम बदलने, एग्जाम के दौरान ज्यादा देर जागने, सफ़र का प्रभाव आपके स्केड्यूल, खान पान, नींद, बॉडी क्लॉक, दिमाग आदि को प्रभावित करता है जिसके कारण आपका पीरियड लेट हो सकता है। 
सोल्यूशन: पूरी नींद, नियमित व्यायाम, सही डाइट आदि से आप पीरियड को नियमित कर सकते हैं।

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Naso Ki Kamzori ka ilaj - नसों की कमजोरी का इलाज

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Naso Ki Kamzori ka ilaj - नसों की कमजोरी का इलाज

हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हमारी नसें होती हैं, जो हमारे शरीर में रक्त संचारित करती रहती है, जो हमें जिन्दा रहने के लिए बहुत अहम होता है। पर कई बार कुछ कारणों से ये कमजोर पड़ जाती हैं जिसकी वजह से हमें कई शरीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तो आइए दोस्तों आज हम जानेंगे इन नसों की कमज़ोरी के कारण और इससे निजात पाने के आसन घरेलू उपायों की।

दरसल शरीर का कोई भी हिस्सा जैसे पीठ, कमर, हाथ, गर्दन आदि की नस के दबने से होने वाला दर्द काफी तकलीफदेय होता है। इसकी वजह से हम कोई भी काम सही ढंग से नही कर पाते। नसें हमारे शरीर मे मौजूद भिन्न- भिन्न अंगों से होकर गुजरती है और जब कोई अंग कमज़ोर पड़ता है तो सबसे पहले वहां की नसों पर इफ़ेक्ट पड़ता है। कई बार हमारे शरीर की नसें गलत व्यायाम करने से या वज़न बढ़ने की वजह से या किसी अन्य वजहों के कारण दब जाती है और शरीर के उस हिस्से में दर्द होने लगता है। जिसकी वजह से हमारा रक्त उस अंग में नही पहुंच पाता, जिससे वह कमज़ोर पड़ने लगती हैं। ऐसे में हम इस समस्या का समाधान किसी अच्छे डॉक्टर की मदद से या खुद घर बैठे भी कर सकते है ।

  •  पर ध्यान रहे नसों में होने वाले दर्द का इलाज़ करने की जानकारी आपको पूरी तरह से होना बेहद जरूरी है, क्योंकि नसें बहुत ही डेलिकेट होती है और गलत इलाज करने से इसे काफी नुकसान पहुंच सकता है। 
  • यदि आपके शरीर के किसी भी अंग की नसें कमज़ोर हो गई हों तो उसका घर बैठ इलाज करने से पहले इन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
  • दबी हुई नस को जितना हो सके दबाना या मोड़ना टालें।
  • यदि सूजन हो तो सूजन कम करने के लिए बर्फ और गर्म चीज़ों से बारी-बारी से मसाज करें।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
  • आराम पाने के लिए ज्यादा दबाव न डालें हल्की मालिश ही करें।
  • जितना हो सके सफेद या ब्राउन पट्टी की मदद से नस को एक जगह पर स्थिर रखें।
  • हद से ज्यादा दर्द हो तो ही कोई दर्द निवारक दवा लें अथवा किसी भी तरह की दवा लेने से बचें।

नसों के कमजोर होने के लक्षण

  • यदि आपके शरीर की नसें कमज़ोर हो गई हैं, तो इससे शरीर में होने वाले इफ़ेक्ट की पहचान करना जरूरी होता है जिससे सही इलाज करने में सहायता मिलती है। 
  • यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं।
  • चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।
  • रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है।
  • अपच होना भी एक संकेत है।
  • अनिन्द्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी।
  • हदय-स्पंदन
  • शरीर में खून की कमी होना।

नसों की कमज़ोरी का इलाज
 इनमें से कोई भी लक्षण जब शरीर में घटित होता है तो नसों में बहुत तेजी के साथ दर्द होने लगता है, जो परेशानी का सबब बन जाता है। तो अब जानते हैं  नसों के दर्द को दूर करने के कुछ आसान घरेलू इलाज जिसे आप ठीक से फॉलो करेंगे तो यकीनन फायदा होगा।
1. पुदीने का तेल 
यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें । इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी।
2. सरसो का तेल
सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।
3. लेवेंडर का फूल
लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं ।
4. बेर की गुठलियां
नसों की कंजोरी को दूर करने के लिए आप बेर की गुठलियों को गुड़ के साथ खाएं जिससे की नसों में मज़बूती आएगी और शरीर बलवान बन जाता है।
5. गाय का दूध 
नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप गाय के दूध के साथ मक्खन, मिश्री भी खा सकते है, जिससे काफी हद तक नसों की कमजोरी में आराम मिलता है।
6. किसमिस
किसमिस खाने की आदत डाल लें। यह शरीर में अन्य लाभ पहुंचाने के साथ ही नसों की कमजोरी का भी बेहतरीन इलाज  है। पर हाँ इसका इस्तेमाल आप सर्दियों के मौसम में ही करने की कोशिश करें।
7. आयुर्वेद का साथ
अश्वगन्धा 100 ग्राम, सतावर 100 ग्राम, बाहीपत्र 100 ग्राम, इसबगोल की भूसी 100 ग्राम, तालमिश्री 400 ग्राम इस सबका एक मिश्रण बना ले और उस मिश्रण को सुबह व शाम को दूध के साथ लें। लगभग एक महीने के प्रयोग से ही शरीर की रक्त क्षमता बढ़ जाती है। और नशों में ताक़त आजाती है ।
8. व्यायाम 
यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।
9. भ्रस्तिका प्राणायाम
भ्रस्तिका प्राणायाम करने से भी नसों के रोगी को बहुत लाभ होता है। लाभ होता है इसलिए रोजाना यह प्राणायाम करें
10. अनुलोम विलोम 
अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी नसों में होने वाली दिक्कत को एक दम से दूर किया जा सकता है और बहुत दिनों तक करेंगे तो ये बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाएगी।
11. मसाज का सहारा
नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।
 

Patli Kamar Paane Ke Upaay - पतली कमर पाने के उपाय

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Patli Kamar Paane Ke Upaay - पतली कमर पाने के उपाय

कमर शरीर का सबसे आकर्षक और अहम हिस्सा होता है वह भी केलव लुक के लिहाज से ही नहीं बल्कि फिटनेस के लिहाज से भी। पर आजके समय में अनियमित जीवन शैली अनहेल्दी खानपान के कारण ना हमारा आकर्षण बरकरार रह पाता है ना हम फिट ही रह पाते हैं। बदन के जिस भी हिस्से में ज्यादा चर्बी हो जाती है वह हिस्सा अस्वस्थ और मोटा दोनों हो जाता है और मोटापे को सबसे ज्यादा पसंद है कमर का हिस्सा। ऐसे में मोटापे के शिकार लोगों के पेट और कमर वाले हिस्से पर सबसे ज्यादा मोटापा दिखाई देता है। और पतली कमर के लिए लड़का हो या लड़की सभी सौ पैंतरे आजमाने से पीछे नहीं हटते। पर जब वे दवाओं और तमाम बाजारू बेल्ट्स के चक्कर में पड़ते हैं तब उनके पैसे तो वेस्ट होते ही हैं साथ ही केवल साइड इफ़ेक्ट या निराशा हाथ लगती है। क्योंकि दोस्तों मोटापा रोक पाना या मोटे होने के बाद उसे कम कर पाना बेहद मुश्किल काम है। पर कहते हैं ना कि दुनिया में कुछ भी नामुनकिन नहीं तो कमर भी पतली की जा सकती हैं लेकिन उसके लिए पहले आपको अपनी कमर कसनी होगी कि आपको बताए हुए सारे तरीके अपनाकर मोटी कमर के खिलाफ जंग छेड़नी पड़ेगी। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं पतली कमर पाने के नायाब उपाय।

कमर पतली करने के तरीके

1. भरपूर पिएं पानी 
जल ही जीवन है ये यह बात सच साबित करने के लिए पानी के ढेरों फायदे मिल जाएंगे। वैसे अगर कमर करनी है पतली तो पानी से जोड़िए खास रिश्ता।जी हां कुछ ही दिनों में पेट की चर्बी से छुटकारा पाने के लिए हर रोज जितना हो सके उतना पानी पिएं। इससे शरीर से नुकसानदायक टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। एक बात और पानी पीते वक्त उसे एक घूंट में पीने के बजाय छोटी- छोटी घूंट करके पिएं। ऐसा करने से पेट में एसिड कम बनता है, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम दुरुस्त बना रहता है, और पाचन क्रिया अच्छी होगी तो वजन भी जल्दी कम होगा।

2. शहद युक्त नींबू पानी
नींबू पानी अपने फ़ायदों के लिए मशहूर है। पर शहद के साथ मिलकर नींबू पानी बन जाता है मोटापे का खास दुश्मHन इसलिए हर हर रोज एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। लगातार कुछ महीने ऐसा करते रहने से आपको अपनी कमर पतली होती महसूस होने लगेगी।

3. पिएं ग्रीन टी 
दूधवाली चाय पीकर अगर आप अपना वजन कम करने की सोच रहे हैं तो फिर ये भूल जाइए कि आपका वजन कम होगा। जबकि दिन में कम से कम तीन बार ग्रीन टी पिएं। इसके अलावा रात को सोने से आधा घंटे पहले ग्रीन टी पीने से पेट और कमर की चर्बी जल्दी घटने लगती है।

4. आइडियल डाइट लें
पौष्टिक  आहार अतिरिक्‍त चर्बी को हटाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल कीजिए जिनमें कैलोरी और फैट की मात्रा कम हो। ताजे फल, सब्जियां और कम वसा वाले डेयरी उत्‍पाद आपके लिए ठीक रहेंगे। साबुत अनाज तो आपके खाने का अहम हिस्‍सा होना चाहिए। प्रसंस्कृत भोजन, फास्ट फूड, जंक फूड और चीनी या रिफाइंड आटा शामिल भोजन से बचना चाहिए। अस्वस्थ नमकीन, चिप्स, कुकीज, केक और ऐसे ही पदार्थो के स्‍थान पर ताजा फल, दही, सब्जियां, नट्स, बीज और अनाज लें।
5. खाना पकाने का सही तरीका
खाना पकाने का तरीका हमारे समग्र वजन घटाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें हिप्‍स में फैट की कमी भी शामिल है। खाना पकाने का तरीका  जिसमें स्‍टीमिंग, बोइलिंग, बेकिंग, रॉस्टिंग और ग्रिल्लिंगका उपयोग , पकाने और तलने की बजाय बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक हैं। इसलिए, कमर की चर्बी को कम करने वालों को सबसे पहले अपने आहार का आकलन करना चाहिए।

6. अपनाएं खास एक्सरसाइज 
आज हम आपको ऐसे व्यायाम के बारे में बताएंगे, जिसकी मदद से आप अपनी कमर को पतला और अपने मोटापे को कम कर सकेंगे।
 
7. रस्‍सी कूदना
अगर आप अपनी कमर को पतला करना चाहती है तो यह व्यायाम आपके लिए काफी जरूरी है। यह कमर को पतला करने के साथ ही पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। शुरू में इसको केवल एक मिनट तक करें और बाद में 15 सेकेंड का तक आराम करके पांच बार दोहराएं। 

8. बर्पी करें
इस व्यायाम को हाई इंटेसिटी इंटरवल ट्रेनिंग भी कहा जाता है। इसको करने के लिए स्‍क्‍वैट की मुद्रा की तरह दोनों हाथों को जमीन पर रखकर शुरू करें। फिर  एक पैर को ऊपर उठाकर पुश-अप की मुद्रा में आएं। इससे आपकी कमर को परफेक्ट शेप मिलेंगी साथ ही फैट कम होगा।  

9. कार्डियो
कार्डियो व्यायाम शरीर से वसा कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। कार्डियो एक्‍सरसाइज मेटाबॉलिज्‍म को नियंत्रित रखती है और अतिरिक्‍त कैलोरी जलाने में मदद करती है। इन अभ्यासों से हृदय भी मजबूत बनता है।

10. बाइसाइकिल क्रंचेज
 पैरों को स्थिर रखने की बजाए उसे साइकिल की तरह चलाना बाइसाइकिल क्रंचेज कहलाता है। यह पेट, जांघों, कमर के आसपास की चर्बी को कम करता है। 

11. प्‍लैंक
प्‍लैंक व्‍यायाम से भी कमर के आसपास की चर्बी कम होती है। साथ ही यह हाथों और सीने को भी मजबूत बनाने वाला व्‍यायाम है। 

12. स्विमिंग
तैराकी को सबसे अच्‍छा व्‍यायाम माना जाता है। नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तैरने से कमर के साथ साथ पूरे शरीर को पतला करने के लिए मशहूर है।

13. बॉल के साथ व्‍यायाम
इस व्यायाम को करने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि बॉल के आगे जाने से पेट की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। सबसे पहले बॉल को लेकर प्‍लैंक की‍ स्थिति में आएं। इसे करने से कमर की चर्बी कम होती है।   
दोस्तों वजन कम करने के लिए संतुलित डायट के अलावा शारीरिक कसरत करना बेहद जरूरी है। पेट और कमर की चर्बी को घटाने के लिए सुबह और शाम के वक्त टहलने की आदत के साथ बताए गए इन व्यायाम के प्रकारों को जरूर करें।

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Dry Skin Care Tips in hindi - ड्राई स्किन की देखभाल कैसे करें

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Dry Skin Care Tips in hindi - ड्राई स्किन की देखभाल कैसे करें

हर किसी की अपनी अलग तरह की स्किन होती है किसी ड्राई, किसीकी ऑयली और कुछ लकी लोग होते हैं जिनकी स्किन सामान्य प्रकृति यानी नार्मल होती है ना ज्यादा ड्राई ना ही ज्यादा ऑइली। पर ऑयली और ड्राई स्किन वालों की मौसम के हिसाब से फ़ज़ीहत बढ़ जाती है, और इस बारिश के बाद आने वाले ठंड के मौसम में ड्राई स्किन वालों की परेशानी बढ़ने वाली है। शुष्क मौसम का असर चेहरे के रंग पर भी पढता है। इसलिए ड्राई स्‍किन को नम बनाना जरुरी है| ऐसे में चेहरे की सुंदरता कायम रखने के लिए घरेलू नुश्खे कारगर साबित होते है| घरेलु नुश्खो के प्रयोग से चेहरे पर प्राकृतिक नमी लौट आती है। और इससे किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट होने का खतरा भी नहीं रहता है। तो आइए आज हम जानते हैं ड्राई स्किन की वजह और सोल्यूशन दोनो के बारे में। 

ड्रायनेस की वजह 

ड्राई स्किन की समस्या की सबसे अहम वजह है सर्दियों का मौसम। जितनी भी बार आप अपनी त्वचा को साबुन या फेसवॉश से साफ करती हैं वह उतनी ही रूखी होती जाती है, क्योंकि क्लींजिंग करने के बाद त्वचा की कुदरती नमी नष्ट हो जाती है। त्वचा पर इसका असर दिखाई देना शुरू हो जाता है। त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। होंठ फटने लगते हैं और पैरों की एड़ियां रूखी और बेजान हो जाती हैं। इस मौसम में वातावरण में नमी कम होने से त्वचा अपनी नैचरल साइन भी खो देती है।

अब जानते हैं ड्राई स्किन का आसान असरदार उपचार 

1. व्यायाम
जब आप एक्‍सरसाइज करते हैं तब आपको पसीना होता है। इससे आपके रोम छिद्र खुल जाते हैं और यह अंदर से प्राकृतिक तेल को बाहर निकालता है। यह तेल आपके चेहरे को नमी प्रदान करता है। ड्रायनेस पर लगाम लगाता है।
2. शहद 
रूखी त्वचा के लिए शहद बेहद ही फायदेमंद है। अकसर मौसम के बदलने के कारण त्वचा रूखी हो जाती है। ऐसे में चेहरे पर शहद लगाने से त्वचा को नमी मिलती है। बेहतर परिणामो के लिए आप चाहे तो हर रोज इसे लगा सकते है। बस इसे चेहरे पर 10 मिनट लगा कर रखे और बाद में चेहरा धो ले। इसका नियमित रूप से प्रयोग करने पर आपको खुद ही परिवर्तन नजर आएगा।
3. दूध 
रूखी त्वचा को अच्छा बनाने के लिए आधा कप ठंडे दूध में जैतून के तेल की कुछ बूंदें डालिए, उसके बाद इन दोनों को एक बोतल में डालकर हिलाए| फिर इस मिश्रण को रूई के फाहे का प्रयोग करके चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा में निखार आएगा।
4. हर्बल चाय 
नमी की कमी के कारण त्वचा की कोमलता नष्ट हो जाती है। इसलिए इससे बचने के लिए हम गर्म पदार्थ जैसे हर्बल टी आदि का दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं। अदरक और नींबू के मिश्रण से बनी चाय का सेवन करने से त्वचा हमेशा दमकती रहती है और जो इसका नियमित सेवन करते है उनका पाचन तंत्र भी ठीक रहता है।
5. तिल का तेल
एक चम्मच तिल के तेल  में थोडी-सी क्रीम या दूध की मलाई मिलाकर अच्छी तरह फेंट लीजिए, फिर उसे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 20 मिनट हलका मसाज करने के बाद चेहरा सादे पानी से धो लीजिए। चेहरे का रूखापन दूर करने के लिए तेल भी एक अच्छा विकल्प है| इससे आपका चेहरा नर्म, मुलायम और चमकदार हो जाएगा। आप चाहे तो ऑलिव ऑयल का भी इस्तेमाल कर सकते है।

6. बादाम का तेल 
 बादाम का तेल और शहद बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर नाखूनों और क्यूटिकल्स में लगाकर मसाज करें। 15 मिनट बाद गीले तौलिए से पोंछ लीजिए, रूखी त्वचा में निखार आएगा। इसके अलावा रात को सोने से पहले दूध में एक चम्म्च बादाम का तेल डालकर पिएं इससे बहुत फायदा होगा।

7. नारियल का तेल
नारियल तेल में स्किन रिलेटेड हर प्रॉब्लम को सॉल्व करने का गुण है पर सबसे ज्यादा इफेक्टिव है यह ड्राई स्किन वालों के लिए। ड्राई स्किन है आपकी तो नारियल के तेल लगाएं  एक दिन या कुछ घण्टे रहने दे उसके बाद नहा लें आपको इसका असर पहले दूसरे दिन से महसूस होने लगेगा।
8. मैंगो
चेहरे को नमी और चमक प्रदान करने के लिए आम से बना फेस पैक भी बहुत फायदा करता है। इसे बनाने के लिए एक पका हुआ आम लें और इसे छीलकर गूदा अलग कर लें। गूदे को मिक्सर में डालकर क्रश कर लें। उसके बाद एक टेबलस्पून गूदे में एक टेबलस्पून शहद और तीन टेबलस्पून जैतून का तेल  डालकर अच्छे से मिलाएं। इसे चेहरे पर लगााए और आधे घंटे बाद सादे पानी से चेहरा धो लें|
9. अंडा
अंडे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते है| लेकिन बहुत कम लोग यह बात जानते है की त्वचा के लिए भी अंडे बहुत फायदेमंद हैं। अंडे का पीला हिस्सा लगाने से चेहरे की शुष्कता समाप्त होती है। या अंडे का प्रयोग एक अच्छा फेस मास्क के रूप में हो सकता है। यह त्वचा के लिए आवश्यक प्रोटीन तो प्रदान करता ही है, साथ ही त्वचा पर कसाव भी लाने में मदद करता है।

10. बेसन 
एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच शहद और थोड़े से दूध में दो बड़े चम्मच बेसन मिलाकर तैयार करें। नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर इस पैक को चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर गर्म पानी से धो लें। इससे लगाने से धीरे धीरे आपका रंग भी निखरने लगेगा। एक्चुअली बेसन ड्राई स्किन को हाइड्रेट करने में मदद करता है। इसके अलावा महीन लाइनों और झुर्रियों को दूर करने में भी इसका उपयोग फायदेमंद है| 

11. सिरका
अगर आपकी त्वचा ज्यादा रूखी है और उसमें जलन भी होती है, तो ऐसे में 2 चम्मच सिरके को एक मग पानी में मिलाएं और नहाने के बाद जहां-जहां रूखी त्वचा हो वहां लगाइए, इससे जल्द ही फायदा होगा।

12. ध्यान रहे
चेहरे को हल्के हाथों से साफ करें। सर्दियों में त्वचा के मृत कोशों को हटाने के लिए तेजी के साथ-साथ जल्दी-जल्दी स्क्रब करने से बचें, ताकि झुर्रियां न पड़ें।

Spondylitis In Hindi - जाने क्या है स्पोंडिलोसिस की बीमारी

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Spondylitis In Hindi - जाने क्या है स्पोंडिलोसिस की बीमारी

हमारी मॉडर्न लाइफस्टाइल में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो लंबे समय तक हमारा साथ नही छोड़ती। जिनमें से एक है स्पोंडिलोसिस की बीमारी। स्पोंडिलोसिस को हम स्पॉन्डिलाइटिस के नाम से भी जानते है।स्पोंडिलोसिस दो यूनानी शब्द ‘स्पॉन्डिल’ तथा ‘आइटिस’ से मिलकर बना है। स्पॉन्डिल का अर्थ है वर्टिब्रा तथा ‘आइटिस’ का अर्थ सूजन होता है इसका मतलब वर्टिब्रा यानी रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत को ही स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है। इसमें पीड़ित को गर्दन को दाएं- बाएं और ऊपर-नीचे करने में काफी दर्द होता है। स्पोंडिलोसिस की समस्या आम तौर पे स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। स्पोंडिलोसिस रीढ़ की हड्डियों की असामान्य बढ़ोत्तरी और वर्टेबट के बीच के कुशन में कैल्शियम की कमी और अपने स्थान से सरकने की वजह से होता है।
आमतौर पर इसके शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं। आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही लोग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण गलत पॉश्चर है, जिससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी दूसरा महत्वपूर्ण कारण है। एक दशक पहले के आंकड़ों से तुलना करें तो इस बीमारी के मरीजों की संख्या तीन गुनी बढ़ी है। वे युवा ज्यादा परेशान मिलते हैं, जो आईटी इंडस्ट्री या बीपीओ में काम करते हैं या जो लोग कम्प्यूटर के सामने अधिक समय बिताते हैं। अनुमानतः हमारे देश का हर सातवाँ व्यक्ति गर्दन और पीठ दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान लोग मिल जाते हैं।

स्पोंडिलोसिस के प्रकार

शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पोंडिलोसिस तीन प्रकार का होता है

1. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस
गर्दन में दर्द, जो सर्वाइकल को प्रभावित करता है वह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहलाता है। यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से, दोनों कंधों, कॉलर बोन और कंधों के जोड़ तक पहुंच जाता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है और कमजोर मांसपेशियों के कारण बांहों को हिलाना भी कठिन होता है।
2. लम्बर स्पोंडिलोसिस
इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।
3. एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस
यह बीमारी जोड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा कंधों और कूल्हों के जोड़ इससे प्रभावित होते हैं। एंकायलूजिंग स्पोंडिलोसिस होने पर स्पाइन, घुटने, एड़ियां, कूल्हे, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।

स्पोंडिलोसिस के सिम्पटम्स

  • गर्दन या पीठ में दर्द और उनका कड़ा हो जाना है।
  • यदि आपकी स्पाइनल कोर्ड दब गई है तो ब्लेडर या बाउल पर नियंत्रण खत्म हो सकता है।
  • इस रोग का दर्द हाथ की उंगलियों से सिर तक हो सकता है। उंगलियां सुन्न होने लगती हैं।
  • कंधे, कमर के निचले हिस्से और पैरों के ऊपरी हिस्से में कमजोरी और कड़ापन आ जाता है।
  • कभी-कभी सीने में दर्द होने लगता है और मांसपेशियों में सूजन आ जाती है।
  • स्पोंडिलिसिस का दर्द गर्दन से कंधों और वहां से होता हुआ हाथों, सिर के निचले हिस्से और पीठ के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकता है।
  • छींकना, खांसना और गर्दन की दूसरी गतिविधियां इन लक्षणों को और गंभीर बना सकती हैं।
  • शारीरिक संतुलन गड़बड़ा सकता है और समय बीतने के साथ दर्द का गंभीर हो जाता है।
  • स्पोंडिलोसिस की समस्या होने पर यह सिर्फ जोड़ो तक ही सीमित नहीं रहती। समस्या गंभीर होने पर बुखार, थकान, उल्टी होना, चक्कर आना और भूख की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

स्पोंडिलोसिस होने की अहम वजह

  • भोजन में पोषक तत्वों, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों का कमजोर हो जाना हीस्पोंडिलोसिस होने का सबसे बड़ा कारण है।
  • बैठने या खड़े रहने का गलत तरीका आपको स्पोंडिलोसिस की समस्या का सामना करवा सकता है।
  • बढ़ती उम्र भी एक एहम कारण है स्पोंडिलोसिस होने का।
  • मसालेदार, ठंडी या बासी चीजों को खाने से भी स्पोंडिलोसिस हो सकता है।
  • आलस्य से भरी जीवनशैली आपको आगे चलके स्पोंडिलोसिस की परेशानी दे सकती है।
  • लंबे समय तक ड्राइविंग करना भी खतरनाक साबित हो सकता है।
  • महिलाओं में अनियमित पीरियड्स आना भी एक बड़ी वजह बन सकता है स्पोंडिलोसिस होने का।
  • उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का क्षय होना भी एक कारण है ,अक्सर फ्रैक्चर के बाद भी हड्डियों में क्षय की स्थिति होने लगती है।

स्पोंडिलोसिस से राहत पाने के आसान तरीके

1. सेंधा नमक 
सेंधा नमक में मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने से यह शरीर के पीएच स्तर को नियंत्रित करता है और गर्दन की अकड़ और कड़ेपन को कम करता है।
2. लहसुन
आधे ग्लास पानी में दो चम्मच सेंधा नमक मिला कर पेस्ट बना लें और उसे गर्दन के प्रभावित क्षेत्र में लगाएं, या गुनगुने पानी में दो कप सेंधा नमक डाल कर रोजाना स्नान करें, इन दोनों ही तरीकों से काफी फायदा मिलेगा।

3. लहसुन
सुबह खाली पेट पानी के साथ कच्चा लहसुन नियमित खाएं अथवा तेल में लहसुन को पका कर गर्दन में मालिश करें, इससे दर्द में काफी राहत मिलेगी। दरसल लहसुन में दर्द निवारक गुण होता है और यह सूजन को भी कम करता है।

4. हल्दी
हल्दी असहनीय दर्द को खत्म करने में सबसे कारगर दवाई साबित हुई है। इतना ही नहीं यह मांसपेशियों के खिचांव को भी ठीक करता है।
5. तिल के बीज
तिल के गर्म तेल से गर्दन की हल्की मालिश 5 से 10 मिनट तक करें, फिर वहां गर्म पानी की पट्टी डालें, या आप एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डाल कर पीएं, दर्द से निजात मिलेगी और गर्दन की अकड़ भी कम होगी। तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, विटामिन के और डी काफी मात्रा में पाई जाती है जो हमारे हड्डी और मांसपेशियों के सेहत के लिए काफी जरुरी है। स्पांडलाइसिस के दर्द में भी तिल काफी कारगर है।

आराम पाने के अन्य तरीके

  • पौष्टिक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन जो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर हो।
  • चाय और कैफीन का सेवन कम करें।
  • पैदल चलने की कोशिश करें। इससे बोन मास बढ़ता है और शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।
  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें।
  • हमेशा आरामदायक बिस्तर पर सोएं। इस बात का ध्यान रखें कि बिस्तर न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत नर्म।
  • स्पोंडिलोसिस से पीड़ित लोग गर्दन के नीचे या पैरो के नीचे तकिया रखने की आदत से बचें। 

Back Pain Treatment in hindi - बैक पेन का इलाज

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Back Pain Treatment in hindi - बैक पेन का इलाज

      
  बीमारियां नाम से ही मनहूस लगती हैं ना ? और हम हर मुमकिन कोशिश करते हैं कि ये हमारे गले न पडें, पर आज का वक़्त ऐसा चल रहा है कि लाख जतन करने के बाद भी हम किसी ना किसी बीमारी के शिकार हो ही जाते हैं पर कई बार हार्ट अटैक। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं तो कई बार माइग्रेन, पेट दर्द,सर्वाइकल पेन, बैक पेन जैसी बीमारियां घेर लेती हैं जो जान तो नहीं लेती पर जब इसका दर्द शुरू होता है तब मरीज की तड़प देखकर जान सुख जाती है। अब बैक पेन की बात करें तो जाहिर  सी बात है कमर हमारे शरीर ऐसा हिस्सा होता है जिसके सहारे ही हम पूरे शरीर का सन्तुलन बना पाते हैं, इसलिए जब कमर दर्द होता है तब सिर्फ कमर का हिस्सा ही डिस्टर्ब नहीं होता बल्कि पूरा शरीर और साथ ही हमारा सारा काम डिस्टर्ब होने लगता है । कमर दर्द की तकलीफ किसी को भी हो सकता है जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं इसलिए ये दर्द ज्यादा परेशान हमें शुरुआती लक्षण की जानकारी लेकर समय रहते इलाज कर लेना चाहिए । तो आइए आज हम जानते हैं कमर दर्द के कारण, लक्षण और इलाज।

कमर दर्द के कारण

  • ज्यादा देर तक बैठे-बैठे या खड़े होकर कार्य करना
  • शरीर का कमजोर होना 
  • अनियमति जीवनशैली
  • नरम गदों पर सोने
  • ऑफिस या घर पर भारी वजन उठाने
  • मांसपेशियों में खिंचाव होना,

बैक पेन के मुख्य लक्षण

  • कमर में बहुत दर्द
  • उठने-बैठने के समय दर्द होना
  • सुबह उठने पर कमर दर्द तथा झुकने पर भी तेज दर्द होने जैसी स्थितियां कमर दर्द के खास सिम्पटम्स होते हैं ।

कमर दर्द से छुटकारा पाने के आसान उपाय 

1. कमर दर्द का अचूक नुस्खा अदरक 

अदरक को कमर दर्द में आराम पाने के लिए औषधि की तरह असरदायक माना जाता है।इसलिए जब भी जब भी कमर का दर्द सताए अदरक को विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल करें जैसे कि अदरक का पेस्ट बनाकर दर्द वाली जगह पर लगायें और ऊपर से नीलगिरी का तेल लगा लें। या ताजा अदरक के 4-5 टुकड़े लें और डेढ़ कप पानी में डालकर10 से 15 मिनट के लिए हलकी आंच में उबालें। इसके बाद छानकर कुछ देर के लिए ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पी लें। इस तरह इस पेय को प्रतिदिन पीने की आदत डालें। या फिरआधा चम्मच काली मिर्च, डेढ़ चम्मच लौंग के पाउडर और एक चम्मच अदरक का पाउडर मिलाकर हर्बल टी बनाएं और स्वाद के साथ ही दर्द से भी राहत पाएं।
 दरसल अदरक में एंटी-इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड्स होते हैं जो हमें दर्द में राहत पहुंचाते हैं।

2.  तुलसी की पत्तियों का जादू
एक कप पानी में 8-10 तुलसी की पत्तियां डालकर तबतक उबालें जबतक कि यह उबलकर आधा न हो जाये, और इसके ठंडा होने के बाद इसमें एक चुटकी नमक डालकर रोजाना पिएं। इससे कमर दर्द में लंबे समय के लिए आराम मिलने लगेगा।

3. खसखस के बीज है खास
एक-एक कप खसखस के बीज और मिश्री का पाउडर रोज सुबह शाम दो-दो चम्मच एक गिलास दूध में डालकर पिएं। यह जल्द ही आपको कमर दर्द में आराम दिलाएगा क्योंकि खसखस के बीज, कमर के इलाज में रामवाण औषधि की तरह असर करता है ।

4. हर्बल ऑयल
हर्बल ऑयल से कमर की मालिश करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और दर्द कम होता है। आप कोई भी हर्बल आयल इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे नीलगिरी का तेल, बादाम का तेल, जैतून का तेल या नारियल का तेल आदि। पहले तेल को थोड़ा गर्म कर लें और फिर धीरे-धीरे दर्द वाली जगह पर मालिश करें।
5. लहसुन
रोज सुबह खाली पेट लहसुन की तीन-चार कलियों का सेवन करना शुरू कर दें । इससे सिर्फ कमर को ही नहीं बल्कि शरीर के कई अहम हिस्सों को फायदा होगा । साथ ही तेल इस्तेमाल करें ऐसे में। लहसुन का तेल बनाने के लिए नारियल के तेल, सरसों के तेल या तिल के तेल में तीन लहसुन की कलियाँ डालें। अब इसे तब तक उबालें जब तक कि लहसुन की कलियाँ काली न पड़ जाएँ। अब इस तेल को छान लें और ठंडा होने दें। आपका लहसुन का तेल तैयार है, और इस लहसुन के तेल से अगर दर्द ज्यादा हो रहा हो तक मसाज करें। फौरन आराम मिलेगा।
6. गेहूं
रात को एक मुट्ठी गेहूं को पानी में डालकर रख दें। सुबह इस गेहूं को पानी से अलग कर लें और फिर एक गिलास दूध में डालकर गर्म करें। अब इस पेय को दिन में दो बार पिएं । दरसल गेहूं में ऐसे कंपाउंड्स पाए जाते हैं जिनका शरीर पर दर्दनिवारक प्रभाव होता है, जिससे कमर दर्द में आराम मिलता है।
7. बर्फ
बर्फ की ठंडी तासीर दर्द और सूजन को कम करने में कारगर उपायों में से एक है। तो जब आपको कमर में दर्द हो रहा हो तो बर्फ से सिकाई करें इससे थोड़ी देर के लिए वह हिस्सा सुन्न भी कर देगा और आपको आराम महसूस होगा। या बर्फ को कूटकर एक कपड़े में बांध लें और इसे दर्द वाली जगह पर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें। ऐसा इसे हर दो घंटे में दोहराएँ। आपको जल्द ही दर्द से छुटकारा मिलता महसूस होगा।

8. सेंधा नमक
सेंधा नमक में पानी डालकर गाड़ा पेस्ट तैयार करें। अब इसे एक कपड़े में डालकर निचोड़ दें जिससे बचा हुआ पानी भी बाहर निकल जाये। अब इस पेस्ट को अपनी कमर में लगा लें।
सेंधा नमक दर्द को कम करता और इन्फ्लामेशन में राहत प्रदान करता है।
9. कैमोमाइल टी
एक चम्मच कैमोमाइल को एक कप पानी में 10 मिनट के लिए उबालें। अब इसे छानकर पी लें। रोज इस चाय को दो बार सेवन करें। यह इतना असरदार होता है कि एक कप हॉट कैमोमाइल मांशपेशियों की ऐंठन को ठीक करने के लिए काफी होती है।

10. दूध
दूध कैल्शियम का स्रोत है जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाये रखने में मदद करता है। शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण भी कमर दर्द की समस्या होती है। इसलिए दूध का नियमित रूप से सेवन करें। और यदि मीठे की जरूरत महसूस हो तो शहद मिलाकर पिएं।
 
नुस्खों को अपनाने के साथ ही इस बात का भी ध्यान दें कि नरम गद्दीदार आसान छोड़कर सख्त कुर्सी या तख़्त पर सीधे बैठने की आदत अपनाएं। सोने के लिए तख़्त का इस्तेमाल करें। तभी ज्यादा बेहतर असर महसूस होगा।

Cervical Pain Treatment in hindi - सर्वाइकल पेन का इलाज

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Cervical Pain Treatment in hindi - सर्वाइकल पेन का इलाज

इन दिनों कई ऐसी बीमारियाँ हैं जो कुछ साल पहले तक किसी बीमारी की श्रेणी में गिनी ही नहीं जाती थी, जो अब बड़ी तकलीफ बनकर खड़ी हो जाती हैं, जी हां जॉइंट पेन, बैक पेन, सर्वाइकल पेन जैसी शरीरिक तकलीफें ऐसी दर्दनाक होती हैं, जिसे देखने वाला समझ नहीं पाता और झेलने वाला इसके दर्द को बयान नहीं कर पाता। ये समस्याएं आम तो है पर सिर्फ उनके लिए जिनसे अब तक इसका पाला नहीं पड़ा पर जो इस दर्द के साथ जीते हैं उनके लिए हर एक पल काटना भारी हो जाता है। तो दोस्तों आइए आज हम इन्हीं बीमारियों में से एक सर्वाइकल पेन की बात करते हैं। 
यह समस्या हड्डियों से जुड़ी है, जिसके होने पर कंधों, गरदन आदि में भयानक दर्द होता है जिसे हम सर्वाइकल का दर्द कहते हैं। यह समस्या किसीको  भी हो सकती है। आज के दौर में अव्यवस्थित दिनचर्या और अनियमितताओं के कारण लगभग हर तीसरे व्यक्ति को सर्वाइकल की परेशानी सहनी पडती हैं। घंटों बैठे रहना, खराब पोश्चर, झुक कर बैठना और कई अन्य गलत आदतों की वजह से इस परेशानी का सामना बड़ी तादाद में लोगों को करना पड़ता है पर हमें अपनी आदतों या इससे बचने के उपाय नहीं मालूम होते इसलिए हम सभी को सर्वाइकल दर्द की वजह, लक्षण और इसके आसान घरेलू उपचार की जानकारी होनी बहुत जरूरी है । 

सर्वाइकल पेन के कारण

  • गलत पोजीशन में सोने से आपको सर्वाइकल पेन होने लगता है।
  • ज्यादातर लोगों को भारी वजन को सिर पर उठाने से सर्वाइकल पेन होता है।
  • गर्दन को बहुत देर तक झुकाये रखने से भी सर्वाइकल पेन हो सकता है।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने से सर्वाइकल पेन शुरू हो जाता है।
  • ऊंचे और बड़े तकिये का प्रयोग करने से सर्वाइकल पेन होता है।
  • भारी वजन के हेलमेट डालकर बाइक राइडिंग करने से भी सर्वाइकल हो सकता है।
  • गलत उठने, बैठने और सोने के तरीकों के कारण भी सर्वाइकल हो सकता है।

सर्वाइकल पेन के लक्षण

  • सिर का दर्द
  • गर्दन को हिलाने पर गर्दन में से हड्डियों के टिडक्ने के जैसी आवाज़ का आना। 
  • हाथ, बाजू और उंगलियों में कमजोरी महसूस होना या उनका सुन्न हो जाना 
  • व्यक्ति को हाथ और पैरों में कमजोरी के कारण चलने में समस्या होना और अपना संतुलन खो देना 
  • गर्दन और कंधों पर अकड़न होना 

दोस्तों वैसे तो चिकित्सा विभाग के पास हर बीमारी का इलाज उपलब्ध होता है, पर अक्सर ये दवाएं हमें साइड इफ़ेक्ट के तौर पर दूसरी बीमारियों से मिलवा देती हैं और साथ ही जेब पर भी पड़ता है भारी, तो क्यों ना आप देशी घरेलू नुस्खों की आजमाइश करें जिसके सहारे हमारे बड़े बुजुर्ग डॉक्टर्स से हमेशा दूर रहकर भी हेल्दी रहा करते थे।

गर्दन में दर्द के घरेलू उपाय

1. सही ढंग से सोएं 
अक्सर मुलायम ऊंचे गद्दे और तकिए पर हम सोना पसंद करते हैं । पर यह सर्वाइकल पेन का कारण हो सकता है इसलिए सख्त गद्दे का ही हमेशा प्रयोग करें । ऊंची तकिया से दुश्मनी कर लें तो बेहतर है । अपना सिर जमीन के तल पर रखकर सोने की आदत डाल लें। या ज्यादा से ज्यादा पीठ को 15 डिग्री तक मोड़ने वाले तकिये का प्रयोग करें। पेट के बल ना सोएँ। ये गर्दन को फैलाता है। पीठ के बल या करवट लेकर सोएँ। इससे आपको दर्द से राहत पाने में मदद करेगा और जिन्हें नहीं है वह बचे रहेंगे।
2. गर्म और ठंडा सेख
दर्द कम करने के लिए गर्दन पर ठंडा या गर्म पदार्थ लेकर सिंकाई करें। किसी एक से ही करते रहने के मुकाबले बारी-बारी से गर्म और ठन्डे का प्रयोग करना फायदेमंद होगा ।
3. मसाज 
मसाज करवाना तो वैसे भी कई लोगों को पसंद होता है और यह तुरन्त रिलीफ पहुंचाता है पर सिर्फ बॉडी पेन में ही नहीं बल्कि सर्वाइकल पेन के दर्द से राहत के लिए आप मसाज का सहारा भी ले सकते है। 

4. खूब पानी पियें
हम यूँही नहीं कहते कि जल ही जीवन है । हमारे शरीर का अधिकतम वजन पानी की वजह से होता है क्योंकि शरीर में होने वाले अधिकांश कामो के लिए पानी बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ है। साथ ही हमारे रीढ़ की हड्डी के जोड़ो के बीच में डिस्क और जॉइंट होते है उनमे अधिकतर हिस्सा पानी का बना होता है और ऐसे में शरीर में पानी की कमी होने से उनकी कार्यक्षमता में कमी हो जाती है इसलिए जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पियें |

5. स्ट्रेस से बचें
आपको ये सुनकर थोडा अजीब लगेगा कि सर्वाइकल पेन की वजह स्ट्रेस यानी तनाव भी हो सकता है और यह कम से कम 60 फीसदी मामलों में देखा गया है इसलिए अगर आपको पेन है तो आपको इसपर और भी ध्यान देना चाहिए और तनाव को कम करने के लिए उपयोगी कदम उठाने चाहिए।
6. राइट डे शेड्यूल अपनाएं
एक अच्छी दिनचर्या आपके लिए चीजें आसान कर सकती हैं, इसलिए अपनी दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम और सही भोजन को शामिल करें और अगर आप  मेहनत वाला काम करते हों तो बिना लापरवाही किए अपने शरीर को भरपुर आराम दें।
7. स्ट्रेच एक्सरसाइज की आदत डालें
अपने शरीर को कुछ छोटे छोटे एक्सरसाइज के साथ आप अपने दर्द से प्रभावित हिस्सों को आराम दे सकते है इनमे कुछ स्ट्रेच एक्सरसाइज भी शामिल है। स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से शरीर एवं गर्दन की मास पेशियां खुल जाती है और सर्वाइकल पेन से राहत मिलने लगती है।

जरूरी आदतें

  • दोस्तों सर्वाइकल पेन के कारण,लक्षण और इलाज जानने के साथ ही आपको कुछ आदतें छोड़नी और कुछ आदतें जरूरी तौर पर अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करनी होंगी  जैसे कि
  • ज्यादा वजन वाले सामान उठाने की आदत छोड़ दें।
  • वज्रासन, चक्रासन और मत्स्यासन के अलावा गर्दन को गोल गोल घुमाने का अभ्यास करे
  • प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर कम से कम 3 किलोमीटर तेज़ रफ्तार से पैदल चलें
  • अपने ऑफिस में ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में न बैठकर हर एक घंटे के बाद थोड़ी थोड़ी देर के लिए ब्रेक लेकर थोडा वाक करने की आदत डालें।
  • अगर आप घरेलू महिला है तो ज्यादा देर न सोये और घरेलू कार्यों के बीच थोडा थोडा ब्रेक ले कर आराम करें।
  • बैठ कर फर्श पर पोछा लगाने का शौख पालें इससे काफी आराम मिलेगा। 
  • ध्यान रहे यह शुरुआती तकलीफ के लिए बेहतर उपाय हैं लेकिन अगर तकलीफ से राहत ना मिले तो तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें।
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Blemish Treatment in hindi - चेहरे के दाग धब्बे के इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Blemish Treatment in hindi - चेहरे के दाग धब्बे के इलाज

हमारा लुक खुदके और सामने वाले दोनों के लिए काफी अहम होता है। जितनी जरूरत हमें अंदर से मजबूत, चुस्त-दुरुस्त होने की है उतनी ही जरूरत है बाहर से भी हसीन जवान बेदाग खूबसूरत रहने की। पर कई बार कई सारी वजहों से त्वचा पर कुछ दाग धब्बे ऐसे हो जाते हैं जो हमारी परेशानी का सबब बन जाते हैं। ब्लेमिश यानी स्किन के दाग धब्बे शरीर के रंगहीन और दाग धब्बे वाले भाग को कहते हैं। त्वचा के दाग धब्बों को छुपाने के लिए आप क्या-क्या नहीं करते, लेकिन जब कई तरह के जतन करने के बाद त्वचा के दाग धब्बे नहीं जाते तब, सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है। आजकल की तेज़ भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में त्वचा को सूर्य की तेज़ किरणों से छुपा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है, सुर्य की रोशनी त्वचा में मेलेनिन में वृद्धि कर देता है, जो त्वचा के रंग को परिवर्तित कर देते हैं, और हमारे शरीर पर काले, भूरे,सफेद आदि रंग के धब्बे पड़ जाते हैं जो काफी बदसूरत लगते हैं। इसके अलावा कई बार कुछ घटनाओं से हमारी त्वचा के रंग में बदलाव आता है। खैर जो भी हो धब्बे तो आखिर धब्बे ही हैं जो हमें परेशान कर देते हैं, और हम इनसे छुटकारा पाने के लिए बार-बार डॉक्टर का दरवाजा खटखटाते है, कॉस्मेटिक्स का सहारा लेने लगते हैं और इन सबके ज्यादा ज्यादा इस्तेमाल से हमें फायदा की बजाय नुकसान होने लगता है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद लेना बेहतर है जो काम खरचेलू ज्यादा असरदार और सबसे बड़ी बार बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के हमें इनसे छुटकारा दिलाने में मदद करता है। तो आइए दाग धब्बों के  इलाज के नुस्खों को जाने के पहले जान लेते हैं इसके होने के विभिन्न कारण। 

त्वचा में दाग धब्बे होने के कारण

  • जलने के कारण निशान या दाग हो सकते है।यदि किसी वजह से शरीर का कोई अंग जल जाये तो उस जगह जलने का निशान हो जाता है।
  • किसी दुर्घटना के कारण जब गहरी चोट लगती है तब वही चोट आगे चलकर निशान का रूप ले लेती है।
  • मुंहासों के कारण भी चेहरे, गले, गर्दन या पीठ पर दाग या निशान बनते हैं।
  • किसी कीड़े-मकोड़े के काटने से भी निशान बन जाते हैं।
  • किसी तरह का खरोच भी दाग या निशान का कारण हो सकता है।
  • किसी प्रकार के ऑपरेशन या सर्जरी के कारण भी निशान हो सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान वजन तथा पेट बढ़ता है जिसकी वजह से पेट की त्वचा पर खिंचाव होता है और निशान बन जाते हैं।

 इस तरह ब्लेमिश के इन विभिन्न कारणों में से कोई भी कारण बिगाड़ देते हैं हमारी लुक तो आइए अब जानते हैं इनसे छुटकारा पाने के आसान नुस्खे।

दाग धब्बो से छुटकारा पाने के नुस्खे

1. निम्बू और शहद
नींबू के रस में शहद मिलाएं और पेस्ट को अच्छे से मिक्स करें। इस मिश्रण को चेहरे के इफेक्टिव एरियाज पर लगाएं। आधे घंटे बाद चेहरे को धो लें। नींबू के रस से त्वचा शुष्क हो सकती है लेकिन शहद से त्वचा को मॉशचरराइजर मिलता है जो त्वचा को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। इस तरह दोनों के मिश्रण का इस्तेमाल करने से ब्लेमिश की परेशानी से निपटने में मदद मिलती है।

2. नीम 
नीम की पत्तियों को तोड़ कर उन्हें अलग करके पानी के साथ इसे पीसकर पेस्ट तैयार कर लें। अब इसे धब्बों और दाग वाली जगह पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें। अब साफ पानी से अपना चेहरा धो लें। एैसा करने से आपको बहुत जल्दी दाग और धब्बों से छुटकारा मिल जाएगा।
शरीर के किसी भी हिस्से के दाग व धब्बों को कम करने के लिए नीम का प्रयोग करना चाहिए। नीम में एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो सीधे त्वचा से दाग धब्बों और जलन को खत्म कर देते हैं। 

3. बेकिंग सोडा
सोडे इस्तेमाल बहुत सी चीजों में किया जाता है पर शायद आप नही जानते होंगे कि ब्लेमिश के लिए भी सोडा है असरदार नुस्खा। जी हां बस आप त्वचा पर जहां भी दाग-धब्बे हों, वहां पर थोड़ा सा बेकिंग सोडा और शहद मिलाकर लगाएं। कुछ समय रखकर इसे ठंडे पानी से धो लें। इससे कुछ ही दिनों में आपको दाग धब्बे धीरे-धीरे कम होते नजर आने लगेंगे।

4. दही 
दही में नींबू का रस मिलाए, और उस  पेस्ट को चेहरे के स्पॉट वाले हिस्से पर रगड़ें या मास्क की तरह भी लगाएं। और करीब आधे घण्टे बाद चेहरे को सादे पानी से धो लें।

5. चावल और तरबूज का मास्क
कच्चे चावल को अच्छे से पीस कर तरबूज के रस में मिलाकर एक मास्क तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाएं और पंद्रह मिनट बाद सादे पानी से चेहरे को धो लें। यह बहुत ही इफेक्टिव नुस्खा है ब्लेमिश से मुक्ति पाने का।


6. पाइनएप्पल
अनानास के रस को कॉटन की मदद से स्पॉट पर लगाएं। कुछ दिनों तक रोजाना ये नुस्खा आजमाएं, ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपको  असर महसूस होने लगेगा।

7. पपाया
पीपते के गुदे को चेहरे के दाग वाले हिस्से पर हल्के हाथों से रगड़ें। 15-20 मिनट के लिए चेहरे को ऐसे ही छोड़ दें। फिर हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को साफ कर लें। ऐसा करने से चेहरे साफ व चमकदार बनेगा।

8. एलोवेरा 
एलोवेरा जैल को चेहरे के दाग-धब्बे वाले हिस्से पर लगाएं। इसे चेहरे पर 45 मिनट के लिए छोड़ दें। कुछ ही हफ्तों में आपको क्लीन स्किन मिलने लगेगी और दाग धब्बे बाय बाय करते नजर आएंगे।

9. कैस्टर आयल
रोजाना बॉडी के ब्लेमिश एरिया पर कैस्टर आयल से मसाज करें। अरंडी के तेल को चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बों से छुटकारा मिलता है। इसके प्रयोग से दाग धीरे-धीरे हल्के पड़ने शुरु हो जाते हैं। 

पर हां इन नुस्खों को आजमाने के साथ ही एक बात हमेशा ध्यान रखें कि सावधानी और सुरक्षा रखकर आप दाग-धब्बों को उभरने से रोक सकते हैं। इसके लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें। इससे न केवल दाग-धब्बे कम होंगे बल्कि इनके होने के चांसेस भी कम हो जाएंगे।
 

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Teeth Pain Solution in hindi - दांत दर्द का इलाज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Teeth Pain Solution in hindi - दांत दर्द का इलाज

दोस्तों वैसे तो दांत में दर्द का होना एक आम  समस्या मानी जाती है, लेकिन जब जिसे दाँत में दर्द होता है तो मानो उसकी जान ही निकल जाती है। इस दर्द के कारण ठीक से बोल पाना भी मुश्किल हो जाता है। कभी कभी ज्यादा दर्द होने की वजह से खाने पीने में भी कठिनाइयाँ होती है। अक्सर हम चाहते हैं कि दांत मोती जैसे चमकदार, सुंदर हों पर दर्द सहने वाले को ही मजबूत दांत की एहमियत मालूम होती है। इसलिए तो हर विज्ञापनों में हर बार स्वस्थ मसूडें, मजबूत दांत की बात कही जती है। पर आपको एक बात का ध्यान देना होगा कि केवल किसी अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल ही काफी नही स्वस्थ दांतों के लिए। बल्कि मजबूत स्वस्थ दांत के लिए आपको रखने होते हैं दांतो का खास ख्याल। दांतों को स्वस्थ रखने के लिए सफाई के साथ ही जरूरी है कैल्शियम और प्रोटीन से भरे आहार की पर्याप्तता।

  • जबकी आम तौर पर लोग अपने दाँतों की सुरक्षा पर ध्यान नही देते है। जिससे विभिन्न स्थितयों में दांत में दर्द होने लगता है जो कई बार असहनीय हो जाता है। 
  •  खट्टा, मीठा, ठंडा या गर्म चीज़ खाने या पीने से कमजोर अस्वस्थ दाँतों में दर्द उभरता है। 
  • दाँतों में बैक्टीरिया होने पर इन्फेक्शन की वजह से दर्द होने लगता है। 
  • ज्यादातर कैल्शियम की कमी से या फिर दांत को ठीक से साफ़ ना करने की वजह से दांतों में बैक्टीरिया लग जाते है, जिसकी वजह से दांत में दर्द होने लगता है। 
  • हम में से ज्यादातर लोग दांत दर्द होने पर फौरन डेंटिस्ट के पास जाना पसंद करते हैं। पर बहुत से लोगों के बजट में नही होता कि हर बार डेंटिस्ट के पास जाया जाए या के बार डेंटिस्ट भी सही मौके पर अवेलेबल नहीं होते जिसकी वजह से दर्द सहने का ही विकल्प रह जाता है। पर अब चिंता करने की जरूरत नहीं दांत में दर्द हो तक डेंटिस्ट को दिखाने या दर्द सहने के अलावा आपके पास है तीसरा विकल्प जो सबसे बेहतर है जो हम आपको बताएंगे। जी हां हैम बताएंगे ऐसे घरेलू नुस्खे जिसे अपनाने से आपको दांत दर्द में मिलेगा झटपट आराम। 

इलाज करने से पहले ध्यान दें

  • जब दांत दर्द हो तब मीठे पदार्थ खाने या पीने से परहेज करें क्योंकि ये बैकटीरिया, जर्म्स, जीवाणु इत्यादि को और बढ़ावा देते है जिनसे आपकी तकलीफ और बढ सकती है।
  • बताए गए घरेलू उपचारों से दाँत दर्द कम न हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
  • घरेलू उपचार अस्थाई दांत दर्द या मामूली दांत दर्द के लिए होते हैं। अगर आपको जिंजीवाईटीज जैसी दांत की कोई समस्या हो तो दवाईयाँ अथवा डाक्टरी निरीक्षण जरुरी हो जाता है।

दाँतो के दर्द का घरेलू इलाज

दोस्तों नीचे दिए गए सभी तरीकों में से कोई भी तरीका अपनाने से आप तुरंत अपने दाँतों के दर्द से छुटकारा पा सकते है और इसका कोई नुकसान या साइड इफ़ेक्ट भी नही होता है।
1. आंवला और कपूर
दाँत में कीड़ा लगा होने के कारण यदि दाँतों में दर्द हो तो आँवले के रस में जरा-सा कपूर मिलाकर दाँत पर लगा लें। या कपूर में तिल का तेल मिलाकर पेस्ट बनाएं और उस पेस्ट से दर्द वाली जगह पर मालिश करें। ऐसा करने से फौरन दांत दर्द से राहत मिलेगी।

2. प्याज
दाँत में दर्द या मसूढ़ों में दर्द होने पर प्याज का टुकड़ा उस जगह रख के दबा लें, ऐसा करने से दाँत दर्द दूर हो जाता है।

3. नीम और नमक
नीम के उबले पानी में ज़रा सा सेंधा नमक डालकर कुल्ला करें इससे  दाँतो के दर्द में आराम मिलेगा।

4. हींग
चुटकी भर हीं दर्द वाले दांत या दर्द वाले मसूढ़ों पर दबा कर कुछ देर रखें। या हल्दी और हींग दोनों को पीसकर ज़रा सा पानी डालकर गोली बनाएं  और उस। गोली को दुखते दाँत के नीचे रखकर दबा ले, ऐसा करने से दाँत दर्द में राहत मिलेगी।
 
5. सरसो का तेल
दांत में तेज दर्द हो रहा हो तो  दर्द वाली जगह पर सरसों के तेल में पिसी हल्दी और नमक अच्छे  से मिक्स करके लगाएं। इससे दांत दर्द में तुरन्त आराम मिलेगा। 

6. अदरक
अदरक के गुणों से हम सभी वाकिफ होते हैं और इसके बहुउपयोगी गुणों में एक गुण है दांत दर्द से राहत दिलाना। अदरक पावडर को आप पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को दाँतों में लगाने से मिनटों में दर्द कम हो जाएगा। अगर आप यह भी करना नहीं चाहते हैं तो अदरक को चबाकर खाने से उसका रस दर्द वाले जगह पर लगने से भी राहत मिलती है।  इसके अलावा अदरक का एन्टीबैक्टिरीअल गुण छोटे-मोटे घाव, संक्रमण और सूजन को भी जल्दी ठीक करता है।
7. लौंग
अगर आप दांत दर्द से परेशान हैं तो वैसे भी लौंग को दाँत के नीचे दबाकर रखने की आदत डाल लें। और दर्द होने पर रुई के फाहे में लौंग का तेल डालकर दर्द वाले दांत के नीचे दबाकर रखें। कुछ लौंग एक गिलास पानी में उबले जब पानी एक चौथाई रह जाये तो इस पानी से कुल्ला करे दाँत दर्द ठीक हो जायेगा।
8. लहसुन
दो लहसुन की काली ले और उसे तवे पे सेक ले और जिस दाँत में दर्द हो रहा उस जगह दबा दें। या  लौकी 24 ग्राम, लहसुन 20 ग्राम दोनों को पीसकर दो गिलास पानी में डालकर उबालें जब पानी एक चौथाई रह जाये तो छान कर इस पानी से कुल्ला कर लें इससे आपको तुरंत दांत दर्द से राहत मिलेगा।

बच्चों से लेके जवान और बूढ़ों तक सभी को कभी न कभी दाँतों की परेशानी होती ही है। तो अब जब भी दांत में दर्द हो तो आजमाएं इन नुस्खों को और पाएं आराम। पर इससे बेहतर यब होगा कि अपने दांत का हमेशा इस तरह ख्याल रखें कि आपको दर्द का दिन देखना ही न पड़े।

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