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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

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Dr. Sanjeev Kumar Singh Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
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Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) - Ravindra Nath Mukherjee Ayurvedic University - 2009

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Tomato Soup Benefits - टमाटर सूप के फायदे

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Tomato Soup Benefits - टमाटर सूप के फायदे

सब्जियों में टमाटर अलग से ही पहचान में आ जाता है क्योंकि ये देखने में बहुत सुन्दर है. टमाटर का इस्तेमाल आमतौर पर सलाद, सब्जी या चटनी बनाने के लिए किया जाता है. टमाटर का उपयोग सूप बनाने के लिए भी किया जाता रहा है. इसका सूप बहुत स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होता है. टमाटर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर, खनिज, विटामिन और कार्बनिक अम्ल प्रमुख हैं. दुनिया भर में टमाटर का उपयोग इसके पौष्टिक मूल्यों के कारण किया जाता है. जाहिर है टमाटर एक सुरक्षात्मक भोजन है. यह किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद है क्योंकि कम अवधि में तैयार हो जाता है और ये एक नकदी फसल है.
टमाटर के सूप में विटामिन ए, सी, डी, बी-6, बी-12, खनिज आयरन, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम के अतिरिक्त आहार फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आदि पाए जाते हैं. टमाटर का सूप बनाने के लिए इसे उबालकर या इसे रोस्ट करके बनाया जा सकता है. इसमें लहसुन, मक्खन, काली मिर्च, प्याज, तेज पत्ता और कॉर्नफ्लोर आदि मिला देने से ये और पौष्टिक हो जाता है. आइए टमाटर सूप के फायदे को विस्तारपूर्वक जानें.
1. गर्भवती माताओं के लिए: टमाटर में मौजूद विटामिन सी इसे गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद बनाता है. महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टमाटर का सूप या जूस भी दिया जा सकता है. इससे उन्हें खट्टे स्वाद के साथ ही पौष्टिकता भी मिलती है.
2. त्वचा के लिए: टमाटर में मौजूद कई तरह के स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ इसे हमारे त्वचा के लिए भी लाभकारी बनाते हैं. यदि आप नियमित रूप से टमाटर के सूप या जूस का सेवन करें तो आपके चेहरे पर निखार आने लगता है. इससे त्वचा के कई समस्याओं का निदान भी हो जाता है.
3. सूखा रोग में: इसका फायदा सूखा रोग के मरीजों को भी मिलता है. सूखा रोग से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना कच्चे टमाटर का सूप पिलाएं. इससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा. उन्हें कच्चा टमाटर नियमित रूप से खिलाते रहें. इससे लाभ मिलेगा.
4. गठिया के उपचार में: गठिया के उपचार में भी टमाटर के सूप भी महत्वपूर्ण भूमिका देखी जाती है. गठिया के मरीजों को टमाटर के जूस में आजवाईन मिलकर पिलाना चाहिए. ऐसा नियमित रूप से करने पर उन्हें काफी लाभ मिल सकता है.
5. पेट के कीड़ा मारने में: कई बच्चों के पेट में कीड़ा हो जाने से उन्हें काफी परेशानी होती है. ऐसे बच्चों को टमाटर के जूस में काली मिर्च डालकर देने से उन्हें काफी आराम मिलता है. नियमित रूप से ऐसा करने पर वो इससे निजात पा सकते हैं.
6. वजन कम करने के लिए: कई लोग अपना वजन कम करने को लेकर काफी सचेत रहते हैं. उन लोगों को टमाटर का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए. इसके लिए आपको बिना बटर या किसी फैट वाले पदार्थों के ही इसका सेवन करना चाहिए.
7. शुगर के उपचार में: शुगर आज एक ऐसी बिमारी है जिसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इससे बचने के लिए हमलोग कई तरह की चीजें खाते हैं. इन्हीं में से एक टमाटर भी है. टमाटर के सेवन से हम शुगर जैसी बिमारी से बच सकते हैं.
 

Hindi Remedies to Treat Hair Split Ends - दोमुंहे / स्प्लिट एंड्स बालों के बेहतर घरेलू उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Hindi Remedies to Treat Hair Split Ends - दोमुंहे / स्प्लिट एंड्स बालों के बेहतर घरेलू उपचार

दोमुंहे बालों की समस्‍या बहुत आम है. बाल अगर हेल्‍दी नहीं होते तो बहुत ज्‍यादा खराब लगते हैं. उन्‍हें देख कर साफ पता चल जाता है कि उनको पोषण नहीं मिल रहा है. प्रदूषित वातावरण की वजह से बाल दोमुंहे हो जाते हैं इसके अलावा बालों पर अत्‍यधिक रसायनिक प्रोडक्‍ट, बार-बार धोना, खराब तरह से बालों की देखभाल आदि से भी बालों पर बुरा असर पड़ता है. अगर बालों कि अच्‍छी देखभाल न की गई तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. हमारे घरों में इतनी प्राकृतिक चीज़े हैं, जिनसे हम शरीर और बालों की हजारों समस्‍याएं सही कर सकते हैं. इसी तरह से आप दोमुंहे बालों की समस्‍याओं को पूरी तरह से कंट्रोल में कर सकती हैं. बालों का दोमुंहा होना मतलब कि बालों में बिल्‍कुल पोषण नहीं है इसलिये इसे ठीक करने के लिये आपको कैमिकल वाली चीजों का कम इस्‍तमाल कर के प्राकृतिक चीज़ों का इस्‍तमाल करना शुरु करना होगा. दही, पपीता, अंडा, अंडा या फिर बीयर आदि लगा कर आप दोमुंहे बालों से छुटकारा पा सकती हैं.
1. पपाया पैक: स्‍किन के लिये पपीता बहुत अच्‍छा माना जाता है. स्किन के लिए पपाया पैक बनाने हेतु बालों की लम्बाई को ध्यान में रखते हुए पपीता काटकर इसे मिक्‍सी में पीसें फिर उसमें आधा कप दही मिलाइये. इस हेयर पैक को पूरे बालों में लगाइये खास कर के दो मुंहे बालों पर. दूध और क्रीम आधा कप दूध ले कर उसमें 1 चम्‍मच क्रीम मिक्‍स करके सिर पर लगा लीजिये. इसे 15 मिनट छोड़ने के बाद अच्‍छे से धो लीजिये.
2. अरंडी का तेल: अरंडी के तेल में बादाम तेल और ऑलिव ऑयल मिलाकर इसे अपने बालों में लगाइये. फिर बालों को तौलिये से ढंककर 30 मिनट के बाद पानी से धो लीजिये. ऐसा नियमित रूप से करने पर लाभ होगा.
3. बीयर: बीयर को भी बालों के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है. थोड़ी सी बीयर अपनी हथेलियों में लेकर इससे अपने बालों का मसाज करें. उसके कुछ घंटो के बाद सिर धो लीजिये नहीं तो गंध बालों में समा जाएगी.
4. अंडे: दोमुंहे बालों को ख़त्म करने के लिए अंडे की जर्दी का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए अंडे की जर्दी में 1 चम्‍मच बादाम तेल मिलाइये. फिर इससे सिर का मसाज करके 1 घंटे के लिये छोड़ दीजिये, फिर शैंपू से बालों को धो लीजिये.
5. काली उड़द दाल: बालों के लिए आधा कप काली उड़द दाल और 1 चम्‍मच मेथी के दानों पीसकर उसमें आधा कप दही मिलाइये और बालों पर लगा कर दो घंटों के लिये छोड़ दीजिये. फिर हल्‍के शैंपू से बालों को धो लीजिये.
6. ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल की थोड़ी सी मात्रा को गैस पर हल्‍का सा गरम करके इससे बालों तथा सिर की मसाज कीजिए. 30 मिनट के बाद सिर को धो लीजिये.
7. एवोकाडो/बटर फ्रूट: एवोकाडो को आधा ले कर पीस लीजिये और बालों को गीला कर के उस पर लगाइये. 30 मिनट के बाद सिर को शैंपू से धो लीजिये. ऐसा करने से भी आपको लाभ मिलता है.
8. मेयोनीज़: यदि आपको एवोकाडो न प्राप्‍त हो सके तब आप उसकी जगह पर मेयोनीज़ भी लगा सकती हैं. इसे 20 मिनट तक लगा रहने के बाद धो लें. अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये इसे हफ्ते में 2 दिन लगाएं.
9. जोजोबा ऑयल: अपने शैंपू के साथ दो बूंद जोजोबा ऑयल मिलाइये. इसे लगाने से बालों मुलायम हो जाएंगे और उन्‍हें नमी मिलेगी.
10. विटामिन ई कैप्‍सूल: विटामिन ई कैप्‍सूल ले कर उसे तोड़ लीजिये और उसमें से तेल निकाल लीजिये. इसे गरम पानी के साथ मिक्‍स कीजिये और बालों में मसाज कीजिये. 20 मिनट छोड़ने के बाद बालों को धो लीजिये.
 

Noise Pollution in Hindi - ध्वनि प्रदूषण के कारण और उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Noise Pollution in Hindi - ध्वनि प्रदूषण के कारण और उपाय

आज दुनिया की सबसे मुख्य चिंता प्रदुषण है. मुख्य प्रदूषणों में से एक है ध्वनि प्रदुषण. आज शोरगुल के कई स्त्रोत हो जाने से ये हमारे मुख्य चिंता का विषय बन गया है. इसमें परिवहन प्रणालियों, मोटर वाहन और वैमानिक शौर-शराबा तथा रेल से होने वाला शोर भी शामिल हैं. इसके साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय इमारतें आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण का कारण बन सकते हैं. इसके अन्य स्रोतों में कार्यालय के उपकरण, फैक्टरी मशीनरी, निर्माण कार्य, उपकरण, बिजली उपकरण, प्रकाश व्यवस्था गुनगुनाना एवं ऑडियो मनोरंजन सिस्टम आते है. आइए ध्वनि प्रदुषण के कारण और उपायों को जानें.
ध्वनि प्रदुषण के कारण

1. उद्योग
लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्र ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित हैं कल-कारखानों में चलने वाली मशीनों से उत्पन्न आवाज/गड़गड़ाहट इसका प्रमुख कारण है. ताप विद्युत गृहों में लगे ब्यायलर, टरबाइन काफी शोर उत्पन्न करते हैं.
2. परिवहन के साधन
परिवहन के सभी साधन कम या अधिक मात्रा में ध्वनि उत्पन्न करते हैं. इनसे होने वाला प्रदूषण बहुत अधिक क्षेत्र में होता है. इससे ध्वनि प्रदूषण के साथ वायु प्रदूषण की कल्पना स्वतः की जा सकती है. 
3. मनोरंजन के साधन
मनुष्य अपने मनोरंजन के लिए टी.वी., रेडियो, टेपरिकॉर्डर, म्यूजिक सिस्टम (डी.जे.) जैसे साधनों से अपना मनोरंजन करता है परन्तु इनसे उत्पन्न तीव्र ध्वनि शोर का कारण बन जाती है. विवाह, धार्मिक आयोजनों, मेंलों, पार्टियों में लाऊड स्पीकर का प्रयोग और डी.जे. के चलन भी ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है.
4. निर्माण कार्य
घर बनाने के लिए आजकल लगातार कंस्ट्रक्शन का काम चलता ही रहता है. विभिन्न निर्माण कार्यों में प्रयुक्त विभिन्न मशीनों और औजारों के प्रयोग से भी फलस्वरूप ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है.
5. आतिशबाजी
हमारे देश में विभिन्न त्योहारों, उत्सवों, मेंलों, सांस्कृतिक/वैवाहिक समारोहों में आतिशबाजी एक आम बात है. इन आतिशबाजियों से वायु प्रदूषण तो होता ही है साथ ही ध्वनि तरंगों की तीव्रता भी इतनी अधिक होती है, जो ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्या को जन्म देती है.
6. अन्य कारण
विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक रैलियों श्रमिक संगठनों की रैलियों का आयोजन इत्यादि अवसरों पर एकत्रित जनसमूहों के वार्तालाप से भी ध्वनि तरंग तीव्रता अपेक्षाकृत अधिक होती है. इसी प्रकार प्रशासनिक कार्यालयों, स्कूलों, कालेजों, बस स्टैण्डों, रेलवे स्टेशनों पर भी विशाल जनसंख्या के शोरगुल के फलस्वरूप भी ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है.

ध्वनि प्रदुषण से बचाव के उपाय
1. सरकार और जनता के संयुक्त प्रयासों से ध्वनि तथा शोर की तीव्रता को कम करके हम ध्वनि प्रदुषण से निजात पा सकते हैं.
2. ध्वनि प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिए ये भी बेहद आवश्यक है कि हम ध्वनि एवं शोर को नियंत्रित करें. ताकि इसके प्रभाव को कम किया जा सके.
3. विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों के किनारे हरे वृक्षों की कतार खड़ी करके ध्वनि प्रदूषण से बचा जा सकता है क्योंकि हरे पौधे ध्वनि की तीव्रता को 10 से 15 डी.वी. तक कम कर सकते हैं. महानगरीय क्षेत्रों में हरित वनस्पतियों की पट्टी विकसित की जा सकती है.
4. प्रेशर हार्न बंद किए जाएं, इंजन व मशीनों की मरम्मत लगातार हो. सही तरह से ट्रैफिक का संचालन हो एवं शहरों के नए इलाके बसाते समय सही योजना बने.
5. इसके अतिरिक्त भी हम कई तरह के प्रयास जैसे कि सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल और कई ऐसे अन्य तरीके अपनाकर इसे कम कर सकते हैं.
 

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Air Pollution in Hindi - वायु प्रदुषण के कारण और उपाय

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Air Pollution in Hindi - वायु प्रदुषण के कारण और उपाय

वायु, इस धरती पर जीवित प्राणियों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है. कह सकते हैं कि जीवन का आधार ही वायु है. लेकिन आज हमने वायु को हद से ज्यादा प्रदूषित कर दिया है. इसलिए आज वायु प्रदुषण हमारे जीवन के लिए खतरा बन गया है. हमारे वायुमण्डल में मौजूद वायु का होना हमारे लिए अति आवश्यक है. इसलिए वायुरहित स्थान पर मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि मानव वायु के बिना 5-6 मिनट से अधिक जिन्दा नहीं रह सकता है. आइए हम वायु प्रदुषण के कारणों और इससे बचने के उपायों को समझें ताकि इससे होने वाली समस्या से बचा जा सके.

क्या है वायु प्रदूषण के कारण

1. बढ़ती हुई जनसँख्या
जाहिर है आज हमारी जनसंख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है. बढ़ती हुई जनसँख्या के कारण लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग किया है. शहरों की बदतर होती स्थति का एक कारण इन शहरों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही जनसंख्या भी है. इसके कारण शहरों व नगरों में आवास-समस्या भी उत्पन्न होने लगी है. आवास की समस्या से परेशान लोगों ने बेतरतीब बस्तियों का निर्माण किया जिससे वहाँ पर जल-निकासी, नालियों आदि की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई. इन्हीं गन्दी बस्तियों ने आगे चलकर वायुप्रदूषण को बढ़ावा दिया.
2. बढ़ते हुए उद्योग
उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और कृषि में रासायनों के अंधाधुंध उपयोग से भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा कारखानों में होने वाली भयंकर दुर्घटनाओं की भी भूमिका होती है. भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने की दुर्घटना भी इसी तरह की गत वर्षों की बड़ी दुर्घटना थी. इसमें एक ही समय हजारों व्यक्तियों को असमय मौत का शिकार बनना पड़ा था. ज़िंदा बचे लोग विकंलाग और विकृत हो गए.
3. संचार के साधन
आज बढ़ती आबादी के कारण संचार के विभिन्न साधनों में वृद्धि बहुत अधिक हो रही है. इन साधनों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से इंजनों, बसों, वायुयानों, स्कूटरों आदि की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. ये सभी वाहन अपने धुएं से वायुमण्डल में लगातार असन्तुलन पैदा करने का काम कर रहे हैं.
4. वनों की अंधाधुंध कटाई
हम सभी मनुष्यों ने अपनी सुख-सुविधा के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई की है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा है. जाहिर है वृक्ष वायुमण्डल के प्रदूषण को निरन्तर कम करने का काम करते हैं. पौधे हमारे लिए हानिकारक गैस कार्बन डाई आक्साइड को अपने भोजन के लिए ग्रहण करके जीवनदायिनी गैस आक्सीजन प्रदान करते हैं.
5. परमाणु परिक्षण
हमने आपसी वैमनष्य को इस कदर बढ़ाया कि देशों के बीच लड़ाइयाँ क लगने लगी और हथियारों का होड़ लग गया. इस वजह से लोगों ने परमाणु बम जैसे बेहद घातक और प्रदुषण फैलाने वाला हथियार मिल गया.

वायु प्रदूषण से बचने के उपाय

1. वनों की हो रही अन्धाधुन्ध अनियंत्रित कटाई को रोका जाना चाहिए. इस कार्य में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ व प्रत्येक मानव को चाहिए कि वनों को नष्ट होने से रोके व वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग ले.
2. शहरी करण की प्रक्रिया को रोकने के लिए गाँवों व कस्बों में ही रोजगार व कुटीर उद्योगों व अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए.
3. कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करना चाहिए, साथ ही ऐसी तकनीक उपयोग में लाने के लिए बाध्य करना चाहिए जिससे कि धुएँ का अधिकतर भाग अवशोषित हो और अवशिष्ट पदार्थ व गैसें अधिक मात्रा में वायु में न मिल पायें.
4. जनसंख्या शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए ताकि जनसंख्या वृद्धि को बढ़ने से रोका जाए.
5. वाहनों में ईंधन से निकलने वाले धुएँ को ऐसे समायोजित, करना होगा जिससे की कम-से-कम धुआँ बाहर निकले.
6. ऐसे ईंधन के उपयोग की सलाह दी जाए जिसके उपयोग करने से उसका पूर्ण आक्सीकरण हो जाय व धुआँ कम-से-कम निकले.
7. निर्धूम चूल्हे व सौर ऊर्जा की तकनीकि को प्रोत्साहित करइसे और ज्यादा उन्नत एवं सुलभ बनाना चाहिए.
8. शहरों-नगरों में अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन हेतु सीवरेज को सभी जगह बढ़ावा देना चाहिए.
9. इन सभी चीजों को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों में इसके प्रति चेतना एवं जागृत फैलाई जानी चाहिए.
10. इसकी जानकारी व इससे होने वाली हानियों के प्रति मानव समाज को सचेत करने हेतु प्रचार माध्यम जैसे दूरदर्शन, रेडियो पत्र-पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्रचार करना चाहिए.
 

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Water Pollution in Hindi - जल प्रदुषण के कारण और उपाय

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Water Pollution in Hindi - जल प्रदुषण के कारण और उपाय

जल का महत्त्व हम इसी बात से समझ सकते हैं कि हमारे शरीर का लगभग 70 प्रतिशत पानी है. इसलिए कह सकते हैं कि वायु के बाद हमारी दूसरी महत्वपूर्ण जरूत ही है. हालांकि धरती पर भी चार में से तीन हिस्सा पानी का ही है. लेकिन विडम्बना है कि अत्यधिक जल प्रदुषण और सागरों का पानी खारा होने के कारण हम इसका प्रयोग नहीं कर पाते हैं. जाहिर है जल प्रदुषण के कई कारण हैं. ये सभी कारण कहीं न कहीं हमारे मानवीय इच्छाओं का शिकार है. हालात इतना गंभीर है कि भारत में कोई भी ऐसा जल स्रोत नहीं बचा है, जो जरा भी प्रदूषित न हो. दूसरी हकीकत यह है कि देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा जल स्त्रोत बहुत ज्यादा प्रदूषित हो चुके हैं. आइए जल प्रदुषण के कारण और इसके निवारण के बारे में जानें.

1. औद्योगिक कूड़ा
हमारे उद्योगों से भारी मात्रा में कचड़े और प्रदूषित जल का निर्माण होता है. लेकिन इसके निस्तारण के पर्याप्त उपाय न हो पाने के कारण ये आद्योगिक कूड़ा हमारे नदियों में जाकर अपने हानिकारक तत्वों के साथ भूमिगत जल में मिल जाता है. 
2. कृषि क्षेत्र में अनुचित गतिविधियां
कृषि कार्यों के बदौलत ही हमें अन्न मिल पाता है लेकिन कृषि में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायन इतने खतरनाक होते हैं कि ये भूमिगत जल को भी प्रदूषित करते हैं. इसके कारण कई तरह की बीमारियाँ भी उत्पन्न होती हैं.
3. नदियों के पानी की गुणवत्ता में कमी
हमारे देश की नदियाँ हमारे लिए जरुरी पानी उपलब्ध तो करा देता है लेकिन इसकी गुणवत्ता भी लगातार खराब होती जा रही है. इसके लिए हमारे उद्योग और अन्य कई कारण जिम्मेदार हैं इसलिए हमें पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए.
4. सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाज
जल को प्रदूषित करने में हमारे परम्पराओं और रीति रिवाजों की भी प्रमुख भूमिका है. जैसे पानी में शव को बहाने, नहाने, कचरा फेंकने आदि से हमारी नदियाँ और अन्य जल के स्त्रोत प्रदूषित होते हैं. हमें इसे रोकना होगा.
5. जहाजों से होने वाला तेल का रिसाव
आपने अक्सर खबरों में सूना होगा कि समुन्दर में तेल वाहक जहाजों से तेल का रिसाव होता है. कई बार तो पूरा टैंकर ही तबाह हो जाता है. हलांकि इसे अवशोषित किया जाता है लेकिन फिर भी काफी हिसा पानी में मिल जाता है और जल को प्रदूषित कर देता है.
6. अम्ल वर्षा
अम्ल वर्षा, वायु प्रदुषण के कारण होता है. वायु प्रदुषण के कारण हवा में कई ख़तरनाक रसायन और अम्ल मिश्रित हो जाते हैं. जब बारिश होती है तो पानी के साथ मिलकर ये धरती पर गिरते हैं. जिससे कई बार काफी नुकसान होता है, जल तो प्रदूषित होता ही है.
7. ग्लोबल वार्मिंग
ग्लोबल वार्मिंग हमारे लिए कई खतरे उत्पन्न कर रहा है. इन खतरों में कई ऐसे हैं जिनसे हमारा अस्तित्व भी खतरे में है. जल प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग के इन्हीं दुष्प्रभावों में से एक है. इस दिशा में बहुत प्रयास किए जाने की जरुरत है.
8. यूट्रोफिकेशन
जल प्रदुषण के लिए जिम्मेदार अनेकों कारणों में से एक यूट्रोफिकेशन भी है. इसके कारण होने वाले जल प्रदुषण के कारणों को ख़त्म करके इसे रोका जा सकता है. इस दिशा में प्रयास किये जाने की जरुरत है.
9. औद्योगिक कचरे के निपटान की अपर्याप्त व्यवस्था
चाहे जल प्रदुषण की बात हो या वायु प्रदुषण की इन सबके लिए आद्योगिक कचरे जिम्मेदार हैं. इससे होने वाला प्रदुषण इस कचरे के निपटान की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण और भी बढ़ जाता है.
10. डीनाइट्रिफिकेशन
डीनाइट्रिफिकेशन भी जल प्रदुषण के लिए जिम्मेदार अनेक प्रमुख कारणों में से एक है. यदि इससे जल्दी ही निपटा न गया तो इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं. जल प्रदुषण को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

जल प्रदूषण का समाधान
मिट्टी के कटाव की वजह से भी जल प्रदूषित होता है. ऐसे में, यदि मिट्टी का संरक्षण होता है तो हम कुछ हद तक पानी का प्रदूषण रोक सकते हैं. हम ज्यादा से ज्यादा पौधे या पेड़ लगाकर मिट्टी के कटाव को रोक सकते हैं. खेती के ऐसे तरीके अपना सकते हैं, जो मिट्टी की सेहत की चिंता करें और उसे बिगाड़ने के बजाय सुधारे. इसके साथ ही जहरीले कचरे के निपटान के सही तरीकों को अपना भी बेहद महत्वपूर्ण है. शुरुआत में, हम ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल न या कम करें जिनमें उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले जैविक यौगिक शामिल हो. जिन मामलों में पेंट्स, साफ-सफाई और दाग मिटाने वाले रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, वहां पानी का सुरक्षित निपटान बेहद जरूरी है. कार या अन्य मशीनों से होने वाले तेल के रिसाव पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है. ये भी समाधान हो सकता है.

1. पानी के रास्ते और समुद्री तटों की सफाई.
2. प्लास्टिक जैसे जैविक तौर पर नष्ट न होने वाले पदार्थों का इस्तेमाल न करें.
3. जल प्रदूषण को कम करने के तरीकों पर काम करें.
 

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Nariyal Ke Doodh Ke Fayde Aur Nuksan in Hindi - नारियल के दूध के फायदे और नुकसान

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Nariyal Ke Doodh Ke Fayde Aur Nuksan in Hindi - नारियल के दूध के फायदे और नुकसान

कोकोनट मिल्क जिसको हिंदी में नारियल का दूध कहा जाता है इसे नारियल को कस करके निकाला जाता है. अधिक मलाईदार होने के कारण, इसको दूध के विकल्प में इस्तेमाल किया जा सकता है. नारियल के दूध में विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन बी-1, विटामिन बी-3, विटामिन बी-5 और विटामिन बी-6 के साथ-साथ लोहा, सेलेनियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस में समृद्ध होता है. इस प्रकार, यह मिठाई मलाईदार तरल एक स्वस्थ आहार का एक हिस्सा हो सकता है और जिन लोगों को पशु दूध से एलर्जी होती है यह उन लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प है. नारियल के दूध के फायदे और नुकसान निम्नलिखित हैं.

1. वजन कम करने में
नारियल का दूध फाइबर में समृद्ध है जिससे आपको लम्बे समय तक भूख नहीं लगती है. और यदि आप इसका सेवन सिमित मात्रा में करते हैं तो वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
2. त्वचा के लिए
इसकी मॉइस्चराइजिंग गुणों के कारण, नारियल के दूध से छालरोग, डर्मेटाइटिस और एक्जिमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है. इस दूध में प्राकृतिक फैटी एसिड ड्राई और खुरदरी त्वचा का इलाज करने और आपकी त्वचा से हानिकारक बैक्टीरिया को दूर करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा नारियल का दूध मेकअप रिमूवर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. आप 1: 2 के अनुपात में नारियल तेल और नारियल दूध को मिक्स कर सकते हैं और आई मेकअप हटाने के साथ-साथ त्वचा को मॉइस्चराइज करने के लिए इस मिश्रण का उपयोग करें. इस प्रकार, यह आपके चेहरे के सबसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास मेक-अप से छुटकारा पाने के लिए एक बहुत ही बढ़िया विकल्प है.
3. मजबूत हड्डियों के लिए
हालांकि नारियल के दूध में नियमित रूप से उपयोग किये जाने वाले दूध ज्यादा कैल्शियम नहीं होता है, लेकिन यह फास्फोरस का एक समृद्ध स्रोत है. इसलिए यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है.
4. हेयर कंडीशनर के रूप में
नारियल का दूध एक बहुत ही अच्छा हेयर कंडीशनर है. ये आपको लंबे और मोटे बाल प्रदान करता है. आप अपने हाथों में बराबर मात्रा में नारियल के दूध और शैंपू को लेकर बालों को शैम्पू करें और उसके बाद अच्छे से धो लें.
5. त्वचा के लिए
नारियल का दूध एक बहुत ही अच्छा मॉइस्चर है. ये निर्जलित त्वचा में नमी को बढ़ा सकता है. एक कप गुलाब की पंखुड़ी, आधा कप गुलाब जल और एक कप नारियल के दूध को गुनगुने स्नान करने वाले पानी में मिलाकर इससे स्नान करें. आप सीधे अपनी त्वचा पर नारियल के दूध को रगड़ सकते हैं और अवशोषित होने के लिए इसे 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ सकते हैं.
7. बचाए सनबर्न से
सन बर्न से बचने के लिए नारियल के दूध की पतली परत को सनबर्न क्षेत्र में लगाएं. इस दूध में वसा और तेल की मदद से लालिमा कम हो जाती है और त्वचा की नमी वापिस आ जाती है. नारियल के दूध को रात भर प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर लगाकर छोड़ दें और सुबह उठ कर स्नान कर लें.
7. गठिया का इलाज
इसमें मौजूद सेलेनियम एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो मुक्त कणों को नियंत्रित करने और जोड़ों की सूजन के जोखिम को कम करने के द्वारा गठिया के लक्षणों से दूर रखने में मदद करता है.
8. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में
यह मक्खन और डेयरी आधारित क्रीम की तुलना में, कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम कर सकता है. ये हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी में मददगार हो सकता है. इसका कारण यह है कि इसमें लैरीक एसिड पाया जाता है जो एचडीएल (अच्छे) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है.
9. बढ़ती उम्र को कम करे
नारियल के दूध में मौजूद तांबे और विटामिन सी के कारण, यह त्वचा की लोच बढ़ाने में मदद करता है. ये पोषक तत्व त्वचा और रक्त वाहिकाओं के लचीलेपन को बनाए रखने के द्वारा आपकी त्वचा और शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं.
10. मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत
नारियल का दूध मैग्नीशियम का एक समृद्ध स्रोत है. यह खनिज तंत्रिकाओं को शांत करने और रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करता है. इससे मांसपेशियों के संकुचन में कमी आती है जिससे आपको अधिक आराम महसूस होता है.
11. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए
इसमें लोरिक एसिड, रोगाणुरोधी लिपिड और कैपिक एसिड होने के अलावा इसमें जीवाणुरोधी, एंटिफंगल और एंटीवायरल गुण भी होते हैं. मानव शरीर में प्रवेश करने पर लोरिक एसिड मोनोलॉरिन नामक एक यौगिक में परिवर्तित हो जाता है जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए जाना जाता है.
12. बालों के लिए
सिर पर नारियल का दूध लगाने से ठंडक मिलती है. यह बालों से लेकर जड़ों तक प्राकृतिक पोषण प्रदान करता है. आप तीन से पांच मिनट के लिए कुछ ताजा होममेड नारियल के दूध से मालिश करें. इसे 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें. यह बालों के विकास को बढ़ाने में मदद करेगा. यह क्षतिग्रस्त, कमजोर और दोमुंहे बालों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है.

नारियल के दूध के नुकसान

  • यदि आपको ट्री नट्स से एलर्जी है, तो आप इसका इस्तेमाल न करें.
  • यदि आप इसका अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो आपका वजन बढ़ सकता है.
  • हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को बहुत अधिक मात्रा में नारियल दूध के सेवन से बचना चाहिए.
  • कुछ लोगों में पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है.
     
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Cabbage Benefits and Side Effects in Hindi - पत्ता गोभी के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Cabbage Benefits and Side Effects in Hindi - पत्ता गोभी के फायदे और नुकसान

पत्ता गोभी एक ऐसी सब्जी है जिसमें केवल पत्ते ही पत्ते होते हैं. पत्ता गोभी का इस्तेमाल कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी सब्जी बनाकर या इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खा सकते हैं. इसकी कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं. लेकिन इन सबमें रेड और ग्रीन कैबेज बहुत ज्यादा पाई जाती है. पत्तागोभी में विटामिन, लोहा और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसका उपयोग इंडियन और वेस्टर्न दोनों तरह के खाने में किया जाता है. इसका एक आतिरिक्त फायदा ये भी है कि बाजार में ये आपको सालों भर मिल सकता है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरुरी होते हैं. आइए पत्ता गोभी के फायदे और नुकसान को विस्तार पूर्वक जानें ताकि इसका सही इस्तेमाल किया जा सके.
1. अल्सर में लाभदायक: पत्ता गोभी में पाया जाने वाला ग्लूटामाइन नामक पदार्थ हमें पेप्टिक अल्सर जैसे बिमारी से बचाने का काम करता है. इसके सेवन से अल्सर होने की संभावना बहुत कम हो जाती है. इसलिए अल्सर के मरीजों को इसका इस्तेमाल अपने आहार में करना चाहिए.
2. मांसपेशियों को रखें स्वस्थ: इसमें लैक्टिक एसिड काफी अच्छी मात्रा में पाए जाने के कारण ये मांसपेशियों को चोटिल होने से बचाता है. इसके साथ ही ये उन्हें स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने में भी सहायक सिद्ध होता है. इसलिए आपको इसका नियमित सेवन करना चाहिए.
3. कैंसर के लिए: पत्ता गोभी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचने में हमारी मदद कर सकते हैं. इन तत्वों में सिनिग्रिन, इन्डोल और कार्बिनोल जैसे पदार्थ पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाने का काम करते हैं. कैंसर का जोखिम कम करने के लिए आपको इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
4. आँखों के लिए: पत्ता गोभी के सेवन से मोतियाबिंद का ख़तरा काफी हद तक कम हो जाता है. यदि आप लगातार इसका सेवन करें तो शरीर में बीटा कैरोटीन का स्तर बढ़ जाता है जिससे आँखे सही रहती हैं.
5. कब्ज को दूर: जाहिर है कि पत्तागोभी में बहुत ज्यादा रेशे होते हैं जिसकी वजह से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है. इससे पेट भी ठीक रहता है और कब्ज की शिकायत भी दूर हो जाती है. पेट साफ़ रखने में यह बहुत प्रभावी है.
6. त्वचा के लिए: इसमें पाया जाने वाला काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर की स्किन की सही देखभाल करने में सहायक होते हैं. इससे आपके चेहरे और त्वचा में लाभ होता है. इसे खाने से चेहरे पर ग्लो आता है और पिंपल्स भी दूर हो जाते हैं.
7. त्वचा के लिए: पत्ता गोभी में काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो स्किन की सही देखभाल करने में सहायक होते हैं. इससे आपके चेहरे और त्वचा में लाभ होता है. इसे खाने से चेहरे पर ग्लो आता है और पिंपल्स भी दूर हो जाते हैं.
8. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए: बंद गोभी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और उसे बढ़ाने में बहुत सहायक होती है. इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर  की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. डाइटिंग करने वाले लोगों के लिए ये एक अच्छा विकल्प है.
9. वजन कम करने में: पत्ता गोभी वजन कम करने में भी बहुत सहायक होती है. इसमें बहुत कम कैलोरी होती है, तो इसका भरपूर सेवन करने से आपका पेट भी भर जाता है और वजन भी घट जाता है. 
 

पत्ता गोभी के नुकसान
* इसका सेवन पेट में समस्या उत्पन्न कर सकता है.
* जो लोग इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे पाचन रोगों से पीड़ित है उनको पत्ता गोभी के सेवन से बचना चाहिए.
* गैस या पेट फूलना पत्ता गोभी का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है.
* बहुत ज्यादा पत्ता गोभी का सेवन आपके थायराइड के सामान्य कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है.

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Coconut Oil Benefits and Side Effects in Hindi - नारियल तेल के फायदे और नुकसान

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Coconut Oil Benefits and Side Effects in Hindi - नारियल तेल के फायदे और नुकसान

नारियल का इस्तेमाल कई रूप में किया जाता है. कच्चे नारियल का पानी पीते हैं, फिर हम इसकी मलाई भी खाते हैं और इसके तेल का भी इस्तेमाल करते हैं. नारियल का तेल स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है. ये न सिर्फ त्वचा की देखभाल एवं बालों की देखभाल करता है बल्कि साथ में पाचन में सुधार और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का का भी काम करता है. आइए आपको नारियल तेल के फायदों से परिचित कराते हैं.

1. खिंचाव के निशान हटाने में: नारियल तेल में मॉइस्चराइजिंग और एंटीऑक्सीडेंट गुणों की मौजूदगी के कारण ये खिंचाव के निशानों को कम करता है. इसके अलावा नारियल का तेल सोरायसिस, जिल्द की सूजन, एक्जिमा और अन्य त्वचा संक्रमण सहित विभिन्न त्वचा की समस्याओं के इलाज में सहायक है.
2. प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती में: नारियल का तेल स्वस्थ वसा से निर्मित होता है. इसमें जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और रोगाणुरोधी गुण होते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इससे आप दाद, इन्फ्लूएंजा, कैंडिडा और यहां तक कि एचआईवी जैसी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं.
3. पाचन तंत्र के लिए: नारियल का तेल आपके पाचन प्रक्रिया को सुधारता है और आपको अपच, चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम, बवासीर और कब्ज़ जैसे विभिन्न पेट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से भी बचाता है. नारियल का तेल पचने और अवशोषित होने में आसान है. इसके अलावा, नारियल तेल विटामिन, खनिज और एमिनो एसिड जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है.
4. बालों के लिए: बालों के लिए तो नारियल का तेल वरदान की तरह है क्योंकि यह बालों को सुंदर, स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है. मध्यम श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स में समृद्ध होने के नाते, यह तेल आसानी से बालों की गहराई में प्रवेश करता है और बालों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को पहुँचाता है. नारियल तेल की अनूठी रसायनिक संरचना आपके बालों और सिर को रूसी और जूँ से मुक्त करने में सहायक है.
5. वज़न घटाने के लिए: नारियल के तेल में मध्यम श्रृंखला फैटी एसिड, सीधे कोशिकाओं में अवशोषित होते हैं. जिससे वसा शरीर में जमा न होकर ऊर्जा के रूप में जला दिया जाता है. इसके अलावा, इस खाद्य तेल को पचाना आसान है और यह शरीर की चयापचय दर को बढ़ाने में मदद करता है.
6. खामिर संक्रमण में उपयोग: नारियल के तेल का खमीर संक्रमण यानि कैंडिडा को रोकने और उसके उपचार में विशेष लाभ है. प्रभावित त्वचा पर शुद्ध नारियल तेल लगाने से कैंडिडा की वजह से हो रही सूजन से आपको आराम मिलता है. इसके अलावा, नारियल तेल की उच्च नमी बनाए रखने की क्षमता त्वचा को छिलने से रोकती है.
7. कोलेस्ट्रॉल कम करने में: इसमें संतृप्त वसा की अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है. इसलिए यह दिल के लिए फायदेमंद है. नारियल तेल में मौजूद 50% लौरिक एसिड, सक्रिय रूप से हृदय की विभिन्न समस्याओं को रोकने में मदद करता है. नारियल तेल का उपयोग अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है और खून में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है.
8. मधुमेह के उपचार में: ये इंसुलिन के स्राव में सुधार के द्वारा रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है. मध्यम श्रृंखला फैटी एसिड नारियल के तेल में मौजूद टाइप 2 मधुमेह का खतरा कम कर देते हैं. ये वसा कोशिकाओं में आसानी से अवशोषित होते हैं और जल्दी से ऊर्जा में परिवर्तित होते हैं. इस प्रक्रिया से इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में सुधार आता है. नारियल का तेल रक्त ग्लूकोज के प्रभावी उपयोग को भी बढ़ावा देता है.
9. अल्ज़ाइमर में लाभ: यदि आप नारियल तेल का नियमित रूप से सेवन करें तो अल्ज़ाइमर और अन्य मस्तिष्क की समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं. इसमें पायी मध्यम श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स कीटोन निकायों में रक्त के स्तर को बढ़ा सकती हैं जो एक वैकल्पिक मस्तिष्क के ईंधन के रूप में काम करती हैं.
10. हड्डियों को मजबूती में: अपने हड्डियों की मजबूती के लिए भी आप नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन डी और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के शरीर में अवशोषण में मदद करता है. कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं.

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Phool Gobhi Ke Fayde aur Nuksan in Hindi - फूलगोभी के फायदे और नुकसान

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Phool Gobhi Ke Fayde aur Nuksan in Hindi - फूलगोभी के फायदे और नुकसान

फूल गोभी का नाम लैटिन कौलिस से निकला है इसका मतलब है कि फूल के साथ गोभी. फूलगोभी के शीर्ष उत्पादक हैं भारत, चीन, इटली, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका आदि. फूलगोभी सफेद रंग के अलावा हरे, बैंगनी और ऑरेंज रंग में भी उगाई जाती है. ऑरेंज फूलगोभी बहुत पौष्टिक है और इसमें सफेद किस्म की तुलना में विटामिन ए की बहुत अधिक मात्रा होती है. यह विटामिन सी, फोलेट, विटामिन K और विटामिन बी-6 का एक उत्कृष्ट स्रोत है. विटामिन बी-1, बी-2, बी-3, और ई भी कम मात्रा में मौजूद हैं. इसमें महत्वपूर्ण खनिज जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम और मैंगनीज आदि भी पाए जाते हैं. यह आहार फाइबर भी प्रदान करता है और इसमें प्राकृतिक शर्करा की एक छोटी मात्रा होती है.

1. वजन कम करने में
फूलगोभी में स्वस्थ घटक होते हैं जैसे कि इंडोल्स जिसमें एंटी-ओबेसिटी वाले प्रभाव होते हैं. फूलगोभी की खपत शरीर में विभिन्न सूजन और चयापचय संबंधी विकारों को रोकने में फायदेमंद है. यह वसा जलने वाले उष्म जनन उत्तेजना में भी मदद करती है और मोटापा को रोकती है.
2. कोलाइटिस के लिए
फूलगोभी के अर्क का अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों पर सूजन को कम करने वाला प्रभाव पड़ता है. इसमें मौजूद फेनीलिथील आइसोथियोसाइनेट सुरक्षात्मक प्रभाव के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.
3. हृदय के लिए
इसमें मौजूद ग्लूकोराफेनिन की उपस्थिति के कारण स्वस्थ रक्त परिसंचरण सुनिश्चित करती है. ये रक्त वाहिकाओं को बनाए रखने में मदद करती है. ग्लूकोराफेनिन, आइसोथियोसाइनेट में बदल जाता है जो कि सूजन को कम करने वाली गतिविधियों को सक्रिय करने और रक्त वाहिकाओं में लिपिड के संचय को रोकने में मदद करता है. यह रक्त के अबाधित प्रवाह में सहायता करके एथारोस्क्लेरोसिस जैसी स्थितियों के जोखिम को कम करता है और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है.
4. अल्जाइमर के लिए
फूलगोभी में मौजूद सल्फोराफेन और इंडोल्स, न्यूरो डिजेनरेटिव रोगों की प्रगति को कम करता है. ये विषाक्तता एंजाइम को सक्रिय करते हैं, जो ग्लूटाथियोन के स्तर को ऊपर उठाते हैं और अल्जाइमर और पार्किंसंस रोगों में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण होने वाली न्यूरॉनल चोटों के उपचार में मदद करते हैं.
5. गर्भावस्था में लाभकारी
इसमें फोलेट की उपस्थिति के कारण आहार में फूलगोभी को शामिल करना गर्भावस्था के दौरान फायदेमंद होता है, जो कि शिशु के स्वस्थ तंत्रिका विकास में मदद करता है. इसमें फाइबर सहित अन्य आवश्यक विटामिन और खनिज भी हैं.
6. कोलेस्ट्रॉल को रखे कम
फूलगोभी में मौजूद ग्लाइकोराफेनिन और सल्फोराफेन की एंटीऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण से एलडीएल के स्तर और कुल कोलेस्ट्रॉल के स्तर के साथ ऑक्सीडेटिव तनाव भी कम होता है. यह एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की उत्तेजना को बढ़ावा देकर रक्तचाप को कम करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर और ओमेगा -3 फैटी एसिड भी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता है और धमनियों को सख्त होने से रोकता है.
7. मधुमेह के लिए
फूलगोभी का नियमित सेवन विटामिन सी और पोटेशियम की मौजूदगी के कारण मधुमेह के खतरे को कम करने में मदद करता है. शरीर में पोटेशियम का निम्न स्तर रक्त ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा सकता है और मधुमेह के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है.
8. प्रतिरक्षा करे को मजबूत
फूलगोभी एंटीऑक्सिडेंट और प्रतिरक्षा-मजबूत पोषक तत्वों में समृद्ध है. अन्य स्वस्थ घटकों के साथ, इसमें विटामिन सी की मौजूदगी विभिन्न प्रकार के संक्रमणों को रोकने में मदद करती है.
9. पाचन के लिए
यह आहार फाइबर का एक स्रोत है जो पाचन में सहायक और शरीर से विषाक्त पदार्थों के उन्मूलन को बढ़ावा देता है. फूलगोभी में ग्लूकोसिनॉल, ग्लूकोराफेनिन और सल्फोराफेन की उपस्थिति पेट की दीवारों को बचाती है और हेलिओबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के विकास का विरोध करने में मदद करती है. इस रक्षा तंत्र के अलावा, फूलगोभी में मौजूद आहार आइसोथियोसाइनेट पेट के अल्सर और पेट के कैंसर जैसे विभिन्न पेट विकारों के जोखिम को रोकते हैं.
10. मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए
इसमें कोलीन और फास्फोरस होते हैं जो कोशिका झिल्ली की रिपेयर में प्रभावी हैं. तंत्रिका संकेतों को प्रेषित करने के लिए मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के कुशल कामकाज के लिए आवश्यक है. इसके अलावा, फूलगोभी में पोटेशियम और विटामिन बी -6 की उपस्थिति मस्तिष्क स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और न्यूरोट्रांसमीटर सहित कई आवश्यक नर्वस तंत्रिका में उचित संचार को बढ़ावा देने के लिए डोपामाइन और नोरेपेनेफ़्रिन भी शामिल है.
11. कैंसर उपचार के लिए
फूलगोभी में ग्लूकोसाइनोलेट्स शामिल हैं, जो स्वस्थ यौगिक जैसे सुल्फोराफेन और इसोथियोसाइनेट्स प्रदान करते हैं, जिन्हें इन्डोल -3 कार्बनोल कहा जाता है. इनमें कैमोप्रिस्टिव और एंटी-एस्ट्रोजन प्रभाव होते हैं जो कैंसर कोशिकाओं के विकास में बाधा डालते हैं. फूलगोभी की खपत फेफड़े के कैंसर, मूत्राशय के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर और ग्रीवा कैंसर जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायता करती है.
12. हड्डियों के विकास लिए
फूलगोभी में विटामिन सी होता है, जो कोलेजन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो सूजन से होने वाली क्षति से जोड़ों और हड्डियों की सुरक्षा करता है. इसके अलावा, इसमें विटामिन K होता है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में हड्डियों की हानि को रोकने में मदद कर सकता है.

फूलगोभी के नुकसान

  • यदि आप थक्का-रोधी ड्रग्स ले रहे हों, तो विटामिन K में समृद्ध खाद्य पदार्थों के सेवन से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें.
  • फूलगोभी में मौजूद कई जटिल कार्बोहाइड्रेट सूजन और हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे सुगंधित गैसों की रिहाई का करण बन सकते हैं.
  • फूलगोभी में उपस्थित प्यूरीन, अधिक सेवन के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का कारण बन सकता है.
  • कुछ लोगों को फूलगोभी के सेवन से एलर्जी हो सकते हैं.
     

Cucumber Benefits and Side Effects in Hindi - खीरे के फायदे और नुकसान

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Cucumber Benefits and Side Effects in Hindi - खीरे के फायदे और नुकसान

यदि खीरा को सलाद की जान कहा जाए तो ये अतिश्योक्ति नहीं होगी. लेकिन ये सलाद का जायका बढाने की साथ ही आपकी सेहत को भी बनाता है. इसमें कम मात्रा में वसा और कैलोरीज़ होते हैं, उच्च मात्रा में पानी, विटामिन के, सी और बी एवं अच्छी मात्रा में सोडियम, तांबा, अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, पोटेशियम, मैंगनीज, फैटी एसिड, फास्फोरस, मैग्नीशियम, बायोटिन और सिलिका जैसे खनिज पाए जाते हैं. इसके अलावा, खीरे में कई स्वास्थ्य संबंधी फायटो न्यूट्रिएंट्स भी उपस्थित हैं. खीरा के फायदे और नुकसान निम्लिखित हैं.

1. हैंगओवर को दूर करने में
यदि आप भी हैंगओवर से परेशान हैं तो इससे निपटने के लिए सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प खीरा है. इसमें उच्च मात्रा में विटामिन बी, शुगर, इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी पाए जाते हैं जो शराब पीने के दौरान पोषक तत्वों की भरपाई एवं शरीर को हाइड्रेट कर हैंगओवर्स की तीव्रता कम कर देते हैं.
2. ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में
इसमें मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर रक्तचाप को विनियमित करने में मददगार है. यह कम और उच्च दोनों तरह के रक्तचाप के इलाज के लिए अच्छे माना जाता है. इसके अलावा, यह एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है जो शरीर को हाइड्रेट रखकर धमनियों में दबाव को कम करता है.
3. कैंसर से लड़ने में
खीरे में कई ऐसे प्रदार्थ होते हैं जो शरीर में हो रही कैंसर गतिविधियों पर रोक लगाते हैं. यह पदार्थ प्रोस्टेट और स्तन कैंसर से लड़ने में बहुत सक्षम होते हैं. खीरे में क्यूकरबिटासिन्स नाम एक तत्व होता है जो इसमें कड़वाहट लाता है और एंटी-कैंसर उपयोगिताओं के लिए जाना जाता है. खीरा में विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर को कैंसर से होने वाली क्षति से बचाता है.
4. शुगर का स्तर कम करने में
खीरा में अग्न्याशय को उतेज्जित करके इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देने और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा में परिवर्तित करने का गुण होता है. इसके अतिरिक्त, ग्लाइसेमिक सूचि में खीरे को 0 रेटिंग मिली है, अर्थात शुगर के रोगी बिना चिंता किये बिना इसका सेवन जी भरकर कर सकते हैं.
5. निर्जलीकरण में
पानी से भरपूर खीरा में 95 प्रतिशत पानी होता है. यही पानी आपके शरीर को निर्जलीकरण से बचाता है. इससे शरीर के तापमान को सामान्य रखने में भी मदद करता है. इसके अलावा, खीरा विटामिन ए एवं सी, फोलिक एसिड और फाइबर का एक बहुत अच्छा स्रोत है मिलती है.
6. पाचन क्रिया को सुधारने में
खीरे में पाचन तंत्र से हानिकारक विषाक्त पदार्थों से छुटकारा दिलाने का गुण होता है. इसके साथ ही इसमें मौजूद एरैपसिन एंजाइम शरीर में प्रोटीन का पाचन एवं अवशोषण बेहतर करता है. अम्लता, कब्ज, सीने में जलन, गैस्ट्राइटिस और अल्सर आदि को भी दूर करने में सहायक है.
7. आंखों के लिए
खीरे में उपस्थित एस्कॉर्बिक एसिड और कुछ एंजाइम आँखों में हो रही सूजन को कम करने में मदद करते हैं. खीरे के कुछ स्लाइस काट कर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. 10 मिनट के लिए एक-एक स्लाइस को अपनी दोनों आँखों पर रखें और फिर आँखों को गुनगुने पानी से धो लें.
8. सांस को तरोताज़ा रखने में
खीरे का एक स्लाइस काटें और अपनी जीभ की मदद से कुछ सेकंड्स तक मुंह के ऊपर वाले तले से सटा कर रखें. खीरे में उपस्थित तत्व लार के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं और बदबू फैलाने वाले बैक्टीरिया का खत्म कर देते हैं.
9. सेल्युलाईट को कम करने में
खीरा सेल्युलाईट को कम करने में भी सक्षम होता है. यह त्वचा के नीचे से अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकाल त्वचा में कसाव लाता है. इसके लिए आधे कप कॉफी में पर्याप्त खीरे का रस मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं. फिर इस पेस्ट में एक चम्मच कच्चा शहद मिलाकर इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और एक मलमल के कपड़े से लपेट दें. 30 मिनट के बाद कपड़ा हटाएं और फिर धीरे से पेस्ट को रगड़कर निकालें. इस प्रक्रिया को हर हफ्ते दो बार दोहराएं.
10. सन बर्न में
खीरा मैग्नीशियम, पोटेशियम और सिलिकॉन जैसे त्वचा के लिए आवश्यक खनिजों से भरपूर है जो ना केवल धूप की कालिमा को कम करता है अपितु त्वचा में एक नया निखार लाता है. खीरे को ब्लेंड कर प्रभावित त्वचा पर लगाकर सूखने दें और फिर ठंडे पानी से नहा लें. कुछ दिनों के लिए यह प्रक्रिया एक बार रोज़ दोहराएं.

खीरे के नुकसान

  • यदि आप साइनसाइटिस या पुरानी सांस की बिमारी से पीड़ित हैं, तो खीरा खाने से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
  • ज़रूरत से ज्यादा खीरे का सेवन आपको परेशान कर सकता है.
  • खीरे की मूत्रवर्धक प्रकृति के कारण अक्सर पेशाब आता है जिससे आप चिड़चिड़ा और असुविधाजनक महसूस करते हैं.
  • अनियंत्रित मात्रा में खीरा खाने से आप फूला हुआ महसूस करते हैं. आपको पेट में दर्द का अनुभव भी हो सकता है.
     
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