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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)

Ayurveda, Lakhimpur Kheri

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Dr. Sanjeev Kumar Singh Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS) Ayurveda, Lakhimpur Kheri
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Grapefruit (Chakotara) Benefits and Side Effects in Hindi - चकोतरा के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
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Grapefruit (Chakotara) Benefits and Side Effects in Hindi - चकोतरा के फायदे और नुकसान

संतरे और नींबू के प्रजाति का ही फल है चकोतरा. लेकिन इसमें संतरे की बजाए सिट्रिक एसिड अधिक और शर्करा कम होती है. इसमें नींबू और संतरे के सभी गुण मौजूद होते हैं. स्वाद में खट्टा और कुछ मीठा लगने वाला चकोतरा की खेती सबसे पहले भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिणपूर्वी एशिया क्षेत्र में शुरू की गई थी. चकोतरा में पोटेशियम और लाइकोपीन के अलावा और भी कई पोषक तत्व और विटामिन मौजूद होते हैं. इनमें कैल्शियम, शर्करा, फॉस्फोरस, और विटामिन ए एवं सी प्रमुख हैं. आइए चकोतरा के फायदे और नुकसान को समझें.

1. आँखों के लिए
चकोतरा हमारे आँखों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. गुलाबी और लाल रंग के चकोतरा में बड़ी मात्रा में बीटा कैरोटीन पाया जाता है. बीटा कैरोटिन हमारे आँखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व है. इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए और फ्लेवोनोइड एंटीऑक्सिडेंट जैसे कि नारीरेनिन और नॉररीनिंग भी आँखों के लिए फायदेमंद है.
2. बालों के लिए
इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी कई तरह से हमारे बालों के लिए लाभकारी साबित होता है. दरअसल विटामिन सी एक एंटीऑक्सिडेंट है जो कि बालों के वृद्धि और विकास के लिए एक आवश्यक तत्व है. इसके अलावा ये बालों से रुसी और अन्य समस्याओं को भी ख़त्म करता है.
3. बुखार में
चकोतरा बुखार में भी काफी उपयोगी है. इसमें बहुमूल्य और प्राकृतिक 'क्विनिन' होता है जो मलेरिया के उपचार में मुख्य भूमिका निभाता है. इसके अलावा क्विनिन एक प्रकार का अल्कोअलॉइड है जो मलेरिया के इलाज के साथ साथ ही गठिया और पैर की ऐंठन के उपचार में भी लाभकारी है. इसके लिए चकोतरा के पल्प या रस का इस्तेमाल किया जा सकता है.
4. पेट की समस्याओं के लिए
चकोतरा के सेवन से हम पेट की समस्याओं से भी निपट सकते हैं. इसका ताजा रस पाचन के बाद एक क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करता है. इसलिए ये शरीर में एसिड गठन को रोककर कई समस्याओं को ख़त्म करता है. अपच में भी इसके रस से काफी लाभ मिलता है. इसमें मौजूद फाइबर और वेजटेटिव पल्प आंतों के लिए बल्क जोड़ता है और आपके शौच जाने को नियंत्रित करता है. कब्ज की समस्या से बचने के लिए आप इसके रस का सुबह खाली पेट इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. थकान को करे दूर
थकान मिटाने और अनिद्रा जैसी बीमारी में भी चकोतरा काफी उपयोगी है. इसके रस में नॉटकेटन नाम का एक बहुत दुर्लभ और महत्वपूर्ण यौगिक पाया जाता है. जो कि हमारे शरीर के ऊर्जा और सहनशक्ति में वृद्धि करता है. इसमें मौजूद ट्रिप्टोफान हमारे नींद से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है.
6. मूत्र विकार का उपचार
मूत्र विकार को दूर करने में भी चकोतरा काफी उपयोगी फल है. ये किडनी के पथरी और रक्तचाप में भी काफी उपयोगी है. इसके रस में पोटेशियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन सी मूत्र पीएच को बढ़ाने और जिस दर पर साइट्रिक एसिड को स्रावित किया जाता है, उसे तेज करने में मदद करता है. इसकी वजह से हमें बनने वाला कैल्शियम पथरी के खतरे को कम करता है.
7. कैंसर के उपचार में
इसमें पाया जाने वाला फ्लेवोनोइड शरीर में संक्रमण का और कार्सिनोजन के असर को कम करता है. इसके अलावा इसमें मौजूद फ्लेवोनॉइड और विटामिन ए फेफड़ों के कैंसर और मौखिक कैंसर से बचाने में मदद करता है.
8. गठिया का उपचार
इसमें पाया जाने वाला सैलिसिलिक एसिड शरीर के कैल्शियम को तोड़ने में मदद करता है. जो कि जोड़ों की कार्टिलेज को निर्मित करता है. गठिया के बेहतर उपचार के लिए चकोतरा के रस के साथ सेब का सिरका मिलकर पिएं.
9. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
चकोतरा में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल स्तर को घटाने में भी उपयोगी होता है. नियमित रूप से चकोतरा का सेवन कोलेस्ट्रॉल का स्तर 15% और ट्राइग्लिसराइड का स्तर 17% तक कम कर सकता है.
10. लिवर की के लिए
लीवर में बनने वाले कई तरह के विषाक्त पदार्थों को चकोतरा में मौजूद सफाई एजेंट हटा देते हैं. इसमें लिमोनाइड नाम का एंटीऑक्सिडेंट और फाइटो पोषक तत्व भी पाया जाता है जो कि विषाक्त पदार्थों को इक्स्क्रीट करने में मदद करता है. जिससे उन्हें पानी में अधिक घुलनशील बनाया जा सकता है.
11. वजन कम करने में
चकोतरा में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. जो कि भूख को कोलेसाइटोकिनिन नाम के पाचक रस को नियंत्रित करने वाले हारमोन को स्त्रावित करके भूख को संतुष्ट करता है. चकोतरा के सेवन से इंसुलिन कम होता है, इस प्रकार यह चीनी को संग्रह करने और वसा को बदलने की जगह, इसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में करता है. इस वजह से वजन घटाने की संभावना बढ़ जाती है.
12. त्वचा के लिए
चकोतरा में विटामिन ए और सी, खनिज और एंटी ऑक्सीडेंट भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव त्वचा को पर्यावरणीय खतरों से बचाने के साथ ही स्किन कोलेजन के उत्पादन को उत्तेजित करता है. जो कि त्वचा को चिकनाई और लोच प्रदान करके इसे कोमलता प्रदान करता है.

चकोतरा के नुकसान

  • चकोतरा के रस में कुछ दवाओं के असर को कम करने वाले रसायन पाए जाते हैं इसलिए इसके रस का इस्तेमाल सावधानी से करें.
  • इसका प्रयोग किसी चिकित्सक के परामर्श से ही करना उचित रहेगा.

Sapodilla (Chiku) Benefits in Hindi - चीकू के फायदे

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Sapodilla (Chiku) Benefits in Hindi - चीकू के फायदे

तमाम लाभदायक फलों में चीकू भी प्रमुख है. ये न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि इसमें पोषक तत्वों की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है. इसमें 71 प्रतिशत पानी, 1.5 प्रतिशत प्रोटीन, 1.5 प्रतिशत चर्बी और 25.5 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है. विटामिन ए और सी से भरपूर चीकू में 14 प्रतिशत शर्करा भी पाया जात है. प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए व सी, फॉस्फोरस, आयरन आदि पोषक तत्वों से भरपूर चीकू सेहत के दृष्टिकोण से काफी लाभदायक फल है. इसके बेहतर लाभ के लिए इसे दूध के साथ खाया जाना चाहिए. इसके लाभकारी गुणों के कारण ये गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बेहद उपयोगी है. इसके फायदे जानने के लिए निम्लिखित बिन्दुओं को देखें.

1. पेट के लिए
पेट में होने वाली कई तरह की परेशानियों को दूर करने में चीकू प्रमुख भूमिका निभाता है. चीकू आंतों को मजबूत बनाने, भूख को बढ़ाने और यूरिन की कमी एवं जलन को दूर करने में सहायक साबित होता है. चीकू में टैनिन नाम का एक उत्कृष्ट एंटीइनफ्लेमेट्री एजेंट पाया जाता है. जो कि हैं कई तरह की पेट की समस्याओं से निपटने में सहायता करता है. इसमें पाया जाने वलाल विटामिन-ए हमारी आँखों की समस्याओं को दूर करने में काफी उपयोगी है. इसमें ग्लूकोज की अधिकता होने के कारण ये शरीर को ऊर्जा देने का भी काम करता है. काफी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को एनर्जी देने का काम करता है.
2. गुर्दे के लिए
चीकू में मौजूद तमाम लाभदायक तत्व हमारे गुर्दे के लिए काफी उपयोगी साबित होता है. ये गुर्दे व् ह्रदय से जुड़े हमारे तमाम समस्याओं को दूर करता है. इसमें पाया जाने वाला भरपूर आयरन हमारे शरीर में खून की कमी को भी दूर करता है. कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्व भी इसमें पाए जाते हैं.
3. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी चीकू बेहद फायदेमंद साबित होता है. दरअसल इसमें तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि इस दौरान आवश्यक होते हैं. हमारे हड्डियों के लिए जरुरी कैल्शियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज भी काफी सहायक हैं.

चीकू के अन्य फायदे

  • ये हमारे दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होता होता है.
  • ये कब्ज और दस्त की बिमारी को ठीक करने बहुत सहायक होता है.
  • चीकू कैंसर के खतरे को भी कम करने में काफी मददगार है. 
  • इसमें पाया जाने वाला बीटा क्रिप्टोक्सैन्थीन फेफड़ो के कैंसर के खतरे को भी कम करता है.
  • चीकू एनिमिया होने की संभावना से भी हमें बचाने काम करता है.
  • यह हृदय रोगों और गुर्दे के रोगों से भी हमें बचाने का काम करता है. 
  • इसे खाने से आंतों की शक्ति बढती है और आंतें अधिक मजबूत होती हैं.
  • इसकी छाल में बुखार नाशक गुण पाया जाता है. ऐसा इसकी छाल में पाए जाने वाले टैनिन के कारण संभव हो पाता है.
  • इसके फल में थोड़ी सी मात्रा में संपोटिन नामक तत्व रहता है. चीकू के बीज मृदुरेचक और मूत्रकारक माने जाते हैं. चीकू के बीज में सापोनीन एवं संपोटिनीन नामक कड़वा पदार्थ होता है.
  • इसके पे़ड की छाल से निकले चिकना दूधिया- `रस-चिकल` नामक गोंद से चबाने का गोंद च्युंइगम बनता है. यह छोटी-छोटी वस्तुओं को जो़डने के काम आता है. दंत विज्ञान से संबन्धित शल्य चिकित्सा में `ट्रांसमीशन बेल्ट्स` बनाने में इसका उपयोग होता है.
  • चीकू ज्वर के रोगियों के लिए भी एक अत्यंत उपयोगी पदार्थ है.
  • भोजन के एक घंटे बाद यदि चीकू का सेवन किया जाए तो यह निश्चित रूप से लाभ कारक है.
  • चीकू के नित्य सेवन से धातुपुष्ट होती है तथा पेशाब में जलन की परेशानी दूर होती है.
     

Avocado Benefits and Side Effects in Hindi - एवोकाडो के फायदे और नुकसान

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Avocado Benefits and Side Effects in Hindi - एवोकाडो के फायदे और नुकसान

एवोकाडो का नाम सुनकर ही ऐसा लगता है. जैसे यह कोई विदेशी पौधा हो दरअसल इसे अमेरिका में उगाया जाता है. एवोकाडो एक सदाबहार पेड़ है. जोकि हमारे लिए कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाला है. यदि हम एवोकाडो में पाए जाने वाले पोषक तत्व और अन्य पदार्थों की बात करें तो इसमें फैटी एसिड से भरपूर मात्रा में पाई जाती है.

इसमें कैल्शियम, पोटेशियम, फास्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम, मैग्नीशियम और तांबा आदि खनिजों के साथ-साथ विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन सी, विटामिन के और विटामिन ए भी पाया जाता है. इसके अलावा एवोकाडो, फाइबर का भी एक अच्छा स्रोत माना जाता है. एवोकाडो के सेवन से शरीर में होने वाली कई परेशानियों से बच सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. तो आइए एवोकाडो के फायदे और नुकसान को निम्नलिखित बिंदुओं के द्वारा समझने की कोशिश करें.

1. त्वचा और बालों के लिए
एवोकाडो में विटामिन और खनिजों की प्रचुरता होती है. जो कि हमारे त्वचा और बालों को की सेहत के लिए बेहद जरूरी तत्व माने जाते हैं. यह सनबर्न के कारण होने वाली सूजन को भी कम करता है. बालों को मजबूत करने के साथ-साथ एवोकाडो हमारे त्वचा को भी विभिन्न समस्याओं से निजात दिलाता है.
2. आंखों की सेहत के लिए
एवोकाडो हमारी आंखों की सेहत के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है. दरअसल इसमें लुटेइन और जेकैक्टिन जैसे कैरोटिनोइड जो कि मोतियाबिंद आंखों के रोग और धब्बेदार अगर पतन के खिलाफ आंखों की रक्षा करने में उपयोगी साबित होते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स के प्रभावों को भी निष्क्रिय करने का काम करती है.
3. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं के लिए भी एवोकाडो एक महत्वपूर्ण पदार्थ के रूप में जाना जाता है. एवोकाडो में पाया जाने वाला विटामिन बी और सी  हमें आमतौर पर मत जी मतलाने और उल्टी जैसी समस्याओं से निजात दिलाने में उपयोगी साबित होता है.
4. वजन घटाने में
एवोकाडो का इस्तेमाल वजन घटाने के लिए भी किया जाता है. एवोकाडो हमारे शरीर के लिए कई पोषक तत्वों का स्रोत है. इसके साथ ही इसमें पाया जाने वाला तत्व मोटापा और वजन को कम करने में सहायक होते हैं.
5. शुगर के उपचार में
एवोकाडो की फली और पत्ते के अर्थ को हम शुगर के उपचार में इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें पाए जाने वाले कई पोषक तत्व रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले तत्व भोजन को उपयोगी शर्करा में भी बदलने की क्षमता रखते हैं.
6. कैंसर के उपचार में
एवोकाडो का इस्तेमाल कैंसर के उपचार में भी किया जाता है. एवोकाडो में पाया जाने वाला कैरोटीनॉइड्स और मोनोअनसैचुरेटेड फैट, प्रोस्टेट कैंसर और स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके अलावा इसमें ग्लूटाथिओन नाम का एक एंटीऑक्सीडेंट भी पाया जाता है. यह हमारे शरीर में मुक्त कणों के प्रभाव को निष्क्रिय करने में सहायक है.
7. हृदय के विकारों को दूर करने में
एवोकाडो में मौजूद बीटा-सीटेस्टेरोल स्वस्थ कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखने में सहायक साबित होता है. कई शोधों में पता चलता है कि यह एच डी एल कोलेस्ट्रोल के एंटीथोजेनिक गुणों को बढ़ाने का काम करता है. जिससे कि धमनियां नरम होती हैं और खतरा कम होता है. इसके अलावा यह उच्च रक्तचाप में भी उपयोगी है.
8. लीवर के लिए एवोकाडो में
मौजूद कुछ ऑर्गेनिक यौगिक हमारे लिवर के स्वास्थ्य को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लीवर में होने वाली क्षति को कम करने में भी एवोकाडो में पाए जाने वाले तत्व काफी उपयोगी होते हैं.
9. माउथ फ्रेशनर के रूप में
एवोकाडो का सेवन माउथ फ्रेशनर के रूप में भी किया जा सकता है. कई बार हमारे मुंह से आने वाली बदबू का कारण अपच या खराब पेट भी हो सकता है. इस दुर्गंध को दूर करने में इसमें पाए जाने वाले जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट फ्लैनेनोइड्स भी मददगार होते हैं. एवोकाडो का इस्तेमाल मुंह की बदबू रोकने के साथ-साथ माउथ कैंसर को भी दूर करने के लिए किया जा सकता है.
10. गठिया के उपचार में
एवोकाडो का इस्तेमाल गठिया जैसी बीमारियों को भी खत्म करने के लिए किया जाता है. इसमें पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स, फैटी अल्कोहल, ओमेगा-3, कैरोटिनोइड्स, फैटी एसिड, फ्लेवोनोइड्स और फिटोस्टरोल आदि गठिया को कम करने के लिए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक है. यह मांसपेशियों की सूजन को कम करने में भी सहायक होते हैं.
11. हड्डियों के लिए
एवोकाडो में पाए जाने वाले जेक्सेंथिन और ल्यूटिन नामक कैरीटिनोइड्स, ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम को घटाने का काम करते हैं. इसके अलावा एवोकाडो में कई अन्य महत्वपूर्ण खनिज जैसे कि फास्फोरस, तांबा, कैल्शियम, जस्ता और सेलेनियम आदि पाए जाते हैं. जो कि ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डी खनिज घनत्व को दुरुस्त करने का काम करते हैं.
12. किडनी के विकार दूर करने में
एवोकाडो हमारे शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ किडनी को भी दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके लिए इसमें पाया जाने वाला पोटेशियम नाम का खनिज उपयोगी होता है. दरअसल पोटेशियम कोशिकाओं और अंगों के लिए केमिकल चैनल्स के द्वारा द्रव को संतुलित बनाए रखने में काफी सहायक होता है.
13. पाचन तंत्र के लिए
एवोकाडो में पाए जाने वाले घुलनशील और अघुलनशील फाइबर हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में काफी उपयोगी होते हैं. दरअसल यह मल को पारित करने में सहायक होता है. जिससे कि गैस्ट्रिक और पाचन से संबंधित अन्य समस्याओं को दूर किया जा सकता है.
14. एंटी-एजिंग के रूप में
एवोकाडो में पाए जाने वाले एक्सथॉफिल नाम का एंटीऑक्सीडेंट का गुण हमारी उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने में काफी महत्वपूर्ण होता है. इसलिए इसका इस्तेमाल एंटी एजिंग के रूप में भी किया जाता है.
 

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Cranberry Benefits and Side Effects in Hindi - करौंदा के फायदे और नुकसान

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Cranberry Benefits and Side Effects in Hindi - करौंदा के फायदे और नुकसान

करौंदा एक ऐसा पौधा है जो सबसे पहले उत्तरी अमेरिका में उगाया गया था. अंग्रेजी में इसे क्रेनबेरी कहते हैं. इसका वैज्ञानिक नाम वैक्सीनियम मैक्रोकार्पोंन है. करौंदा छोटी-छोटी झाड़ियों के रूप में उगने वाला पौधा है. इसमें कांटे भी लगे होते हैं. इसकी फली आकार में बहुत छोटी होती है. जिसका रंग गहरा गुलाबी होता है. करौंदा को यदि कच्चा खाया जाए तो यह काफी खट्टा होता है. लेकिन पकने के बाद इसमें मिठास आ जाती है. करौंदा का इस्तेमाल सॉस, ड्रिंक्स आदि बनाने में किया जाता है. करौंदा में पोषक तत्वों की उच्च मात्रा और एंटीऑक्सीडेंट्स थी पाया जाता है. इसे अक्सर सुपर फूड के नाम से भी संबोधित किया जाता है. आइए करौंदा के कुछ फायदे और नुकसान को समझते हैं.

1. वजन घटाने में 
करौंदा में पाया जाने वाला फाइबर हमारे हमें लंबे समय तक पेट भरे रहने का एहसास कराता है. जिसकी वजह से भूख जल्दी-जल्दी नहीं लगती. इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला रस हमारे शरीर में जमा होने वाले वसा को भी खत्म करके हमारे वजन और मोटापा घटाने का काम करता है.
2. प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में
करौंदा का इस्तेमाल हम अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं. क्योंकि करौंदा में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए करौंदा हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके हमें बिमारियों से दूर रखने का काम करंता है.
3. दांतों को स्वस्थ रखने के लिए
करौंदा हमारे दांतो को भी स्वस्थ रखने में काफी उपयोगी है. कई शोधों में यह पाया गया है कि करौंदा में पाए जाने वाले तमाम लाभदायक तत्वों में से एक प्रोएंथोसायनिडीन जीवाणुओं को दांतो से दूर रखने में मददगार है. इसके अलावा यह हमारे मसूड़ों को भी कई रोगों से बचाने का काम करता है.
4. त्वचा की बेहतरी के लिए
करौंदा हमारे शरीर को कई रोगों से तो बचाता ही है. इसके अलावा ये हमारे त्वचा को भी कोमल और बेहतर बनाने में लाभदायक होता है. यदि आप ड्राई करौंदा एक चौथाई इसके तेल के साथ मिक्स करके इस्तेमाल करें तो बेहतर परिणाम मिलते हैं. इस पेस्ट को 10 मिनट के लिए त्वचा पर लगाकर इसे अच्छे से धो लें ऐसा करने से त्वचा कोमल बनती है.
5. मस्तिष्क के लिए
करौंदा की फली हमारे मस्तिष्क के लिए भी काफी उपयोगी तत्व मानी जाती है. इसमें पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट्स सूजन को तो कम करता ही है. हमारे स्मृति और समन्वय की क्षमता में भी सुधार लाता है. यानी इसका इस्तेमाल हम अपनी यादाश्त को बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं.
6. कैंसर के उपचार में
करौंदा का इस्तेमाल हम कैंसर के उपचार में भी करते हैं. विशेष रुप से प्रोस्टेट कैंसर, लीवर कैंसर, स्तन कैंसर और ओवेरियन कैंसर में इसके इस्तेमाल का प्रभाव काफी सकारात्मक देखा गया है. करौंदा ट्यूमर के बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने का काम करता है.
7. पेशाब इन्फेक्शन को दूर करने के लिए
करौंदा का इस्तेमाल मूत्रमार्ग की दीवारों से बैक्टीरिया को कम करने में भी किया जा सकता है. इसका कारण करौंदा में पाया जाने वाला प्रोएथोकेनिडिन नामक तत्व है. इसके आलावा करौंदा के सेवन से मूत्र में होने वाले संक्रमण को दूर कर सकते हैं.
8. दिल को स्वस्थ रखने में
दिल को स्वस्थ रखने में भी करौंदा का इस्तेमाल किया जा सकता है. दरअसल करौंदा का रस एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने का काम करता है. जिसे कि अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है. इसके अलावा करौंदा में पॉलीफेनाल्स भी पाया जाता है. जोकि रक्तचाप को कम करने में महत्वपूर्ण होता है.

करौंदा के नुकसान

  • गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इसके इस्तेमाल से बचें.
  • जिन लोगों को एस्पिरिन से एलर्जी है उन्हें भी इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए.
     
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Wheat Benefits In Hindi - गेहूं खाने के फायदे

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Wheat Benefits In Hindi - गेहूं खाने के फायदे

गेहूं का इस्तेमाल पूरे भारत सहित विश्व में भी किया जाता है. यह भारत के कई स्थानों पर उगाया भी जाता है. गेहूं से कई सारी चीजें बनाई जाती हैं, जैसे की दलिया, कुकीज, रोटी, केक आदि. गेहूं को मैदा के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक भी माना गया है. इसलिए गेहूं एक बहुत ही महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. जिसे आसानी से पचाया भी जा सकता है. गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आदि प्रमुख हैं. अंकुरित गेहूं हमारे शरीर के उपापचय का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ विषैले पदार्थों को निष्प्रभावी भी करता है. गेहूं के फायदों को जानने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें.

1. हड्डी के इलाज में
गेहूं का इस्तेमाल हड्डी दर्द के इलाज के लिए कर सकते हैं. क्योंकि गेहूं में कैल्शियम की प्रचुरता होती है. और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. इसलिए गेहूं का सेवन हड्डी दर्द के इलाज में उपयोगी साबित होता है.
2. कब्ज दूर करने में
कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए अंकुरित गेहूं का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाया जाने वाला प्रचुर मात्रा में फाइबर हमारे पेट की विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाता है. जिसमें कब्ज भी है.
3. शुगर के उपचार में
गेहूं का उपयोग हम शुगर जैसी बीमारियों के उपचार में भी करते हैं. शुगर के मरीजों के लिए गेहूं एक अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करें तो आपको शुगर की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है.
4. कैंसर के उपचार में
गेहूं हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है. इसका कारण है, गेहूं में पाया जाने वाला विटामिन ए और फाइबर. विटामिन ए और फाइबर हमारे शरीर से कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है.
5. खून की सफाई में
गेहूं का नियमित सेवन हमें कई तरह के फायदे पहुंचाता है. यदि आप गेहूं का नियमित सेवन करें तो हमारे शरीर में रक्त की अशुद्धियां भी दूर होती है.
6. पाचन क्रिया के लिए
गेहूं के फायदे हमें पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में भी नजर आते हैं. गेहूं में पाया जाने वाला फाइबर हमारी पाचन क्रिया को भी मजबूत बनाने का काम करता है.
7. उच्च रक्तचाप के लिए
उच्च रक्तचाप आज आम बीमारी हो गई है. यदि आप उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको मैदा का त्याग करके गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए. इससे रक्तचाप को नियंत्रित रहने रखने में मदद मिलती है.
8. सांसों की बदबू दूर करने में
कई बार मुंह से अनावश्यक बदबू आनी शुरु हो जाती है. जिससे कि कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो आपको गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए.
9. वजन कम करने में
मोटापा घटाने या वजन वजन कम करने में भी गेहूं की भूमिका सकारात्मक होती है. गेहूं में पाया जाने वाला फाइबर हमें बहुत देर तक भूख नहीं लगने देता है. इसके अलावा इस में पाया जाने वाला पोषक तत्व हमारे शरीर को पोषण भी देते हैं.
10. थायराइड के उपचार में
गेहूं के उपयोग से हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने दिनचर्या के भोजन में गेहूं को शामिल करना चाहिए.
11. गुर्दे की पथरी में
किडनी स्टोन जिसे गुर्दे की पथरी भी कहा जाता है, के उपचार के लिए गेहूं का नियमित सेवन फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाए जाने वाले तत्वों में किडनी स्टोन को गलाने की क्षमता होती है.
12. प्रोटीन के स्रोत के रूप में
गेहूं प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है. विशेष रूप से अंकुरित गेहूं. यदि आप नियमित रूप से अंकुरित गेहूं का सेवन करें तो आपके शरीर में प्रोटीन की कमी का सामना कभी नहीं करना होगा.
13. खून की कमी में
कई लोगों को खून की कमी यानी कि एनीमिया हो जाती है. लेकिन गेहूं के सेवन से इसे दूर किया जा सकता है. क्योंकि गेहूं शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण में मदद पहुंचाता है.
14. पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में
गेहूं की गिनती हल्के भोजन में की जाती है. क्योंकि इसे बहुत अच्छा आसानी से बचाया जा सकता है. इसलिए गेहूं के सेवन से पाचन क्रिया को भी आराम मिलता है.
15. हृदय विकारों से बचाने में
गेहूं के सेवन से हम हृदय से संबंधित तमाम विकारों से बच सकते हैं. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करते हैं. तो आपका दिल स्वस्थ और मजबूत रहेगा.
 

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Brown Rice Benefits in Hindi - ब्राउन राइस के फायदे

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Brown Rice Benefits in Hindi - ब्राउन राइस के फायदे

हम सभी अपने दैनिक जीवन में चावल का सेवन तो करते हैं. लेकिन ब्राउन राइस, कई लोगों के लिए एक नया शब्द हो सकता है. दरअसल सफेद चावल की लोकप्रियता ज्यादा है. लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से ब्राउन राइस ज्यादा उपयोगी है. इसका कारण ब्राउन राइस में पाया जाने वाला विटामिन बी-1, बी-2, बी-3, और बी-6 की भरपूर मात्रा है. इसके अलावा ब्राउन राइस में कई तरह के खनिज और अन्य सेहतमंद तत्व भी पाए जाते हैं. ब्राउन राइस को फाइबर का भी एक समृद्ध स्रोत माना जाता है. इसमें पाए जाने वाले तमाम खनिजों में फास्फोरस, सेलेनियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और लोहा आदि प्रमुख हैं. इस प्रकार आप सफेद चावल के बदले भूरे चावल का इस्तेमाल करके अपना स्वास्थ्य सही रख सकते हैं. तो आइए ब्राउन राइस के फायदे और फायदों को जानने की कोशिश करते हैं.

1. हड्डियों को मजबूत करने में
ब्राउन राइस में पाया जाने वाले कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि खनिज पदार्थ हमारी हड्डियों की मजबूती और उसके सेहत के लिए काफी उपयोगी होते हैं. यह हड्डियों से संबंधित तमाम परेशानियों को भी दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. हड्डियों के विकास में भी इनमें हड्डियों के विकास के लिए जरूरी खनिज पदार्थ भी ब्राउन राइस में पाया जाता है.
2. वजन घटाने में
जहां सफेद चावल को वजन बढ़ाने वाला माना जाता है. वही ब्राउन राइस हमारा मोटापा कम करता है. ब्राउन राइस में पाया जाने वाला फाइबर हमारे पेट में भूख के पेट भरे रहने का एहसास लंबे समय तक कराता है. इसके अलावा यह हमारे शरीर के उपापचय से संबंधित क्रियाओं को भी उत्तेजित करने में सहायक है. इसमें पाया जाने वाला मैंगनीज वसा के संश्लेषण के लिए भी उपयोगी होता है.
3. ह्रदय के विकारों को दूर करने में
ब्राउन राइस का नियमित सेवन हमारे शरीर के रक्त धमनियों में एकत्रित होने वाले क्लॉक पर रोक लगाता है. जिसकी वजह से तमाम हृदय विकार को दूर किया जा सकता है.
4. तंत्रिका तंत्र के लिए
ब्राउन राइस का सेवन हमारे शरीर में तंत्रिका तंत्र की देख रेख के लिए भी काफी उपयोगी होता है. दरअसल ब्राउन राइस में भरपूर मात्रा में मैंगनीज पाया जाता है. जोकि फैटी एसिड्स और हारमोंस की उत्पादन को बढ़ाता है. इसके अलावा ब्राउन राइस में पाया जाने वाला विटामिन बी हमारे दिमाग को उत्तेजित करके नसों की क्रियाशीलता को भी ठीक करता है. मैग्नीशियम और पोटेशियम, कैल्शियम के साथ मिलकर नसों और मांसपेशियों की कोशिकाओं को दुरुस्त करने में उपयोगी साबित होते हैं. इसमें पाया जाने वाले विटामिन दिमाग को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने का काम करते हैं.
5. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए ब्राउन राइस का सेवन महत्वपूर्ण है. ब्राउन राइस में विटामिंस खनिज के अलावा फेनोलिक तत्व भी पाए जाते हैं. जो की प्रतिरक्षा तंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं.
6. कैंसर के उपचार में
ब्राउन राइस कैंसर के उपचार में भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभाता है. यह ल्यूकेमिया, कोलोन कैंसर, स्तन कैंसर और अन्य कई कैंसरों के उपचार में उपयोगी साबित होता है. क्योंकि इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है.
7. कोलेस्ट्रोल कम करने में
ब्राउन राइस का नियमित सेवन हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी घटाने का काम करता है. दरअसल ब्राउन राइस में पाया जाने वाला फाइबर घुलनशील फाइबर होता है. इस वजह से यह हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम कर पाता है. इसके अलावा ये अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का भी काम करता है.
8. शिशुओं के लिए
ब्राउन राइस शिशुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है. क्योंकि यह बच्चों के विकास के लिए और उनकी तंदुरुस्ती के लिए काफी उपयोगी होता है. छोटे शिशुओं के विकास के लिए ब्राउन राइस की खिचड़ी या दलिया खिलाना सबसे बेहतर होता है. यह बच्चों के मल त्याग को भी नियमित करता है. और उनकी एलर्जी और कब्ज से संबंधित समस्याओं को भी दूर करने का काम करता है.
9. शुगर के उपचार में
ब्राउन राइस शुगर के उपचार में भी उपयोगी होता है. क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक है. इसके अलावा यह धीमी गति से भी पचता है. ब्राउन राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है. इसलिए यह शुगर के लिए काफी उपयोगी खाद्य पदार्थ है.
10. पाचन शक्ति को सुधारने में
सुधार ब्राउन राइस हमारे पाचन शक्ति को भी सुधारने का काम करता है. इसके लिए ब्राउन राइस में पाया जाने वाला अघुलनशील फाइबर जिम्मेदार होता है. जो कि हमें कब्ज बवासीर आदि बीमारियों से बचाने का काम करता है. इसके ग्लूटेन फ्री होने के कारण इसके सेवन से सेलिएक जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है.
 

Oats Health Benefits In Hindi - ओट्स के फायदे

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Oats Health Benefits In Hindi - ओट्स के फायदे

पोषक तत्वों से युक्त तमाम खाद्य पदार्थों मैं से एक ओट्स भी है. ओट्स में विटामिंस और अन्य पोषक तत्वों के अलावा कई खनिज भी पाए जाते हैं. इसमें पाए जाने वाले खनिज पदार्थों में प्रमुख हैं. आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, कैल्शियम, आदि. इसके अलावा ओट्स में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. कार्बोहाइड्रेट के लिए भी ओट्स का इस्तेमाल किया जाता है. यही नहीं इसमें विटामिन बी और विटामिन ई की भी प्रचुरता होती है.

अपने इन्हीं तमाम पोषक तत्वों के कारण यह हमारे शरीर में होने वाली कई तरह की परेशानियों को दूर करने में मददगार साबित होता है. दिल से संबंधित बीमारियों और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से रोकने में भी ओट्स बहुत उपयोगी है. क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है. इसलिए इसे एंटी कैंसर भी कहा जाता है. ओट्स का सेवन गर्भवती महिलाओं और बच्चों को निश्चित रूप से करना चाहिए. आइए ओट्स के कुछ फायदे और इसके नुकसान को जानें.

1. रक्तचाप के नियंत्रण में
ओट्स हमारे शरीर में बढ़ते हुए रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है. जाहिर है बढ़ता हुआ रक्तचाप इंसान की जान तक ले सकता है. रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति ओट्स का सेवन करके रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है. इसमें पाया जाने वाला फाइबर हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी उपयोगी होता है.
2. आंतो के लिए
आंतों में होने वाली परेशानियों को दूर करने में भी ओट्स बहुत लाभदायक होता है. अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित व्यक्तियों के लिए तो यह वरदान की तरह है. ओट्स का नियमित सेवन आपको पेट से संबंधित समस्याओं जैसे कि कब्ज आदि से परेशानियों से छुटकारा दिलाता है. इसका कारण यह है कि ओट्स में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है.
3. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी कई रोगों को जन्म दे सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि हम अपने शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करें. अपने शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आप ओट्स का नियमित सेवन कर सकते हैं.
4. केंसर के लिए
ओट्स के इस्तेमाल से हम कैंसर को भी दूर कर सकते हैं. ओट्स में लिग्ननंस एंटेरोलैक्टोन की तरह ही कई फैटोकेमिकल पाए जाते हैं जो कि कैंसर दूर करने में काफी उपयोगी होते हैं. इनका काम कैंसर से संबंधित हार्मोन की रोकथाम करना होता है.
5. वजन घटाने में
ओट्स का इस्तेमाल हम वजन घटाने के लिए भी करते हैं. क्योंकि यह चर्बी को खत्म करने के लिए काफी अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है. जिससे कि आपको भूख कम लगती है. इसलिए जिनको अपना मोटापा कम करना हो या वजन घटाना हो वह इस ओट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.
6. कोलेस्ट्रोल कम करने में
ओट्स में मौजूद तमाम तत्व हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होते हैं. ओट्स में बीटा ग्लूकोज नाम का एक चिपचिपा तत्व पाया जाता है. जो हमारे आँतों की सफाई कर कब्ज की समस्या को दूर करता है. इसकी वजह से खराब कोलेस्ट्रोल हमारे शरीर में भंडारित नहीं हो पाती है.
7. त्वचा में निखार लाने के लिए
ओट्स हमारी त्वचा को नमी देकर रुखी-सूखी त्वचा में जान डाल देता है. इसके सेवन से हमारी त्वचा खिल उठती है. इसके अलावा त्वचा में होने वाली परेशानियों को भी यह दूर करने में सहायक होता है.
8. तनाव से बचने के लिए
ओट्स में मौजूद फाइबर और मैग्नीशियम हमारे दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाते हैं. जिससे मस्तिष्क कि में शांति रहती है. इस वजह से हम काफी सुकून महसूस करते हैं और हम बेहतर नींद ले पाते हैं. इसके अलावा ओट्स में ब्लूबेरी मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं.
9. शुगर के उपचार में
ओट्स में पाए जाने वाले फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा इसे शुगर के उपचार में उपयोगी बनाती है. इन तत्वों की वजह से हमारा भोजन धीरे-धीरे पचता है. जिससे कि रक्त में उपस्थित ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रहता है.
10. दिल के लिए
ओट्स में मौजूद फाइबर की प्रचुरता हमारे दिल के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होता है. ओट्स के नियमित सेवन से हम दिल से संबंधित तमाम बीमारियों को दूर कर सकते हैं.
 

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Corn Benefits and Side Effects in Hindi - मकई (कॉर्न) के फायदे और नुकसान

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Corn Benefits and Side Effects in Hindi - मकई (कॉर्न) के फायदे और नुकसान

हम सभी भुट्टा खाने हम सभी को भुट्टा खाना बहुत अच्छा लगता है. कई बार हम इसे पॉपकॉर्न के रूप में भी खाते हैं. और कई बार सड़कों पर मिलने वाले भुने हुए भुट्टे भी हम खाते हैं. भुट्टे को मकई के नाम से भी जाना जाता है. स्वास्थ्य और पोषण के दृष्टिकोण से यह एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है. कोलेस्ट्रोल और फाइबर की प्रचुरता के कारण दिल के मरीजों के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है.

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि भुट्टे को पकाने के बाद उसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स में 50% तक की बढ़ोतरी हो जाती है. पके हुए भुट्टे में कैरोटिनोइड में विटामिन ए पाया जाता है. भुट्टे का पिला रंग कैरोटिन के कारण ही होता है. इसके अलावा इसमें विटामिन, फोलिक एसिड और कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा भी पाई जाती है. इसमें पाए जाने वाले तात्व कैंसर जैसी बीमारियों को दूर करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भुट्टे का पीला रंग इस में पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण होता है. भुट्टा या मकई विटामिन कार्बोहाइड्रेट्स और फोलिक एसिड का मुख्य स्रोत है. आइए भुट्टे से होने वाले कुछ फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1. वजन बढ़ाने में
कुछ लोगों के लिए मोटापा कम करना जरूरी होता है. तो वहीं कई लोग बेहद दुबले-पतले भी होते हैं. जिनकी इच्छा अपने मोटापे में वृद्धि की करने की होती है, उनके लिए भुट्टा एक बेहतर विकल्प हो सकता है. जिससे आप अपनी मोटापा को बढ़ा सकते हैं. यानी जिनका वजन कम है. वह भुट्टे खा कर अपना वजन बढ़ा सकते हैं. मकई में पाया जाने वाला मकई में मौजूद कैलोरी आपके आपके वजन को बढ़ाने में मददगार साबित होती है. इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
2. कैंसर के उपचार में
कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां किसी को भी डरा देती हैं. यदि आप कैंसर से होने वाले खतरे को रोकना चाहते हैं या कैंसर से बचना चाहते हैं. तो आपको मकई का नियमित सेवन करना चाहिए क्योंकि मकई में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करने का काम करते हैं. जिससे कैंसर पीड़ितों को काफी राहत मिलती है.
3. खून की कमी होने पर
खून की कमी होने की बीमारी को ही हम एनीमिया के नाम से जानते हैं. इस बीमारी को दूर करने में मकई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यदि आप नियमित रूप से मकई का सेवन करें तो इस में पाया जाने वाला विटामिन बी और फोलिक एसिड हमें एनीमिया की बीमारी से बचाने का काम करता है.
4. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस दौरान महिलाओं में कई तरह के खनिज पदार्थों और पोषक तत्वों की भी कमी होने लगती है. ऐसे में गर्भावस्था के दौरान मकई का सेवन एक बेहतरीन खाद्य विकल्प हो सकता है. क्योंकि इसमें तमाम पोषक पदार्थों के साथ-साथ फोलिक एसिड भी पाया जाता है. ये होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर साबित होता है.
5. खराब कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में
हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रोल होते हैं. एक खराब कोलेस्ट्रोल और दूसरा अच्छा कोलेस्ट्रॉल. खराब कोलेस्ट्रोल के कारण हमारे दिल में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं. उन्हें दूर करने के लिए मकई करना काफी उपयोगी होता है. क्योंकि मकई में विटामिन सी और कैरोटीन पाया जाता है. जो कि हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करके रक्त प्रवाह को सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

मकई के नुकसान

  • मकई की ज्यादा खुराक आपके पेट के लिए परेशानियां पैदा कर सकती हैं. इसलिए इसे उचित मात्रा में ही खाएं
  • मकई ज्यादा मात्रा में खाना खा लेने से आपको विटामिन की कमी जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है.
  • मकई को कच्चा खाने से दस्त और पेट से संबंधित कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
  • मकई के सेवन से कई लोगों को एलर्जी और त्वचा पर चकत्ते या उल्टी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
     
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Buckwheat (Kuttu) Benefits and Side Effects in Hindi - कूटू के फायदे और नुकसान

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Buckwheat (Kuttu) Benefits and Side Effects in Hindi - कूटू के फायदे और नुकसान

कूटू का वैज्ञानिक नाम फैगोपाईरम एस्कुलेंटम है. त्रिभुज की आकृति जैसा दिखने वाला कूटू गेहूं के समान ही होता है. भारत में कूटू की उपज हिमालय क्षेत्रों में ही की जाती है. कूटू का इस्तेमाल व्रतों या त्योहारों में विशेषरूप से सबसे ज्यादा किया जाता है. भारत में ये हिमालय के तराई क्षेत्रों में ही उगाया जाता है. दुनिया के अन्य देशों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, यूक्रेन आदि में भी कूटू की उपज होती है. व्रत में इस्तेमाल किए जाने का मुख्य कारण कूटू का ऊर्जा में निहित ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है.

कूटू लस से मुक्त होता है जिसके कारण यह गेहूं और राई का सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है. जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी होती है उनके लिए तो यह एक बेहतर विकल्प होता है. कूटू में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों और पोषक तत्वों में मैग्नीशियम फाइबर लोहा और प्रोटीन प्रमुख है. इसके अलावा इसमें 8 तरह के एमिनो एसिड पाया जाता है. आइए कूटू के फायदे और नुकसान के बारे में जानें.

1. हड्डियों के लिए
कूटू का उपयोग हम हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कर सकते हैं. क्योंकि कूटू में मैग्नीशियम कैल्शियम और फास्फोरस आदि की प्रचुरता होती है. इसके अलावा कूटू हमारे शरीर में ऊतकों के विकास में भी काफी सहायक साबित होता है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी बीमारियों को दूर करने में भी काफी मदद मिलती है.
2. शुगर के उपचार में
कूटू में टैनिन नाम का एक एंजाइम पाया जाता है. यह शरीर से स्टार्च के अवशोषण को रोकता है. इसके अलावा इंसुलिन एवं ग्लूकोज के स्तर को भी नियंत्रित करता है. जिससे शुगर के मरीजों के ग्लूकोज के स्तर में निरंतरता बनी रहती है. यानी ग्लूकोज के स्तर का बढ़ना यह घटना रुक जाता है.
3. ह्रदय से संबंधित विकारों में
फाइबर से समृद्ध कूटू हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. क्योंकि इसमें पाया जाने वाला फाइबर हमारे शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को दूर करने में सहायक होता है. इससे हमारे हृदय को स्वस्थ बने रहने में मदद मिलती है. कूटू के सेवन से धमनियों को सख्त होने और दिल के दौरे एवं स्ट्रोक जैसी स्थितियों से भी निजात पा सकते हैं.
4. पाचन तंत्र के लिए
कूटू में पाई जाने वाली फाइबर की भरपूर मात्रा हमारे शरीर के पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करने का काम करती है. दिन में एक बार कूटू के सेवन से हमें पूरे दिन का लगभग 48 प्रतिशत फाइबर प्राप्त हो जाता है. इससे हमारे पाचन तंत्र को तेजी से काम करने में मदद मिलती है. पेट से संबंधित तमाम बीमारियां जैसे सूजन, कब्ज, पेट में दर्द, गैस, दस्त आदि से छुटकारा मिलता है.
5. कैंसर के उपचार में
कूटू का चोकर एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर होने की संभावना को काफी हद तक कम करते हैं. क्योंकि एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को खत्म करके कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का काम करते हैं.
6. गेहूं के विकल्प के रूप में
कई लोगों को गेहूं खाने से एलर्जी की समस्या आने लगती है. ऐसे में लोगों लोग गेहूं के विकल्प के रूप में कूटू का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से आप सूजन, मतली और जठार तंत्र संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं.
7. उर्जा को बनाए रखने में
कूटू का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर को लगातार बनाए रखता है. क्योंकि कूटू में नियत से या विटामिन बी 3 पाया जाता है. जो कि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके शरीर तक पहुंचाता है. यही नहीं यह कई पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदल कर शरीर में उर्जा के स्तर को बनाए रखता है.
8. मोटापा कम करने में
कूटू का नियमित सेवन मोटापा कम कम करने वाले व्यक्तियों के लिए काफी लाभदायक होता है. कूटू में पाया जाने वाला फाइबर भूख को नियंत्रित करता है. जिससे कि आपको जल्दी जल्दी भूख नहीं लगती है. इसके अलावा इसमें अन्य पोषक तत्वों की भी मौजूदगी होती है.
9. लाल रक्त कोशिकाओं की वृद्धि में
कूटू में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी होते हैं. इसके अलावा इसमें कॉपर और आयरन भी पाए जाते हैं. जो कि हमारे शरीर में एनीमिया की संभावना को खत्म करते हैं. शरीर में पर्याप्त मात्रा में कॉपर और आयरन की मौजूदगी हमारे रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाते हैं. जिससे हमारा रक्त संचरण में मदद मिलती है.

कूटू के नुकसान

  • जिन्हें इससे एलर्जी है वो लोग कूटू का सेवन न करें.
  • ज्यादा पुराने कूटू के आटे का प्रयोग करने से समस्या हो सकती है.
  • अधिक मात्रा में कूटू के सेवन से बचें.
     
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Rye Benefits And Side Effects In Hindi - राई के फायदे और नुकसान

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Rye Benefits And Side Effects In Hindi - राई के फायदे और नुकसान

राई का वैज्ञानिक नाम से सेकेल सेरियल है. यह एक घास जैसा लगने वाला पौधा है. हलांकि इसके बीज देखने में जौ या गेहूं जैसा ही होता है. इसके उत्पादन की शुरुवात तुर्की से हुई थी लेकिन आज इसका उत्पादन संपूर्ण विश्व में किया जाता है. राई की खेती करने में सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसकी जड़ों में फंगस लग जाता है. जिससे इसके फसल के जल्दी ही सड़ जाने का डर रहता है. राई में कई तरह के पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों की प्रचुरता होती है. जैसे इसमें मैग्नीशियम, फाइबर, मैगनीज, फास्फोरस, तांबा, विटामिन बी, फिनॉलिक एंटीऑक्सीडेंट्स, आदि प्रमुख रूप से पाए जाते हैं. राई के फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में
कई शोधों से यह पता चलता है कि राई, एक महत्वपूर्ण पाचन में मदद करने वाला एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. राई हमारी कोशिकाओं की उपापचय की क्षमता को भी अनुकूलित करने के साथ-साथ हानिकारक जीन के उत्पादन को भी कम करती है.
2. कैंसर के उपचार में
राई का उपयोग कैंसर के उपचार में भी किया जाता है. क्योंकि इसमें मौजूद फेनोलिक्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट कई तरह के कैंसर जैसे की ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
3. कब्ज दूर करने में
राई फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थ होने के कारण हमारे शरीर में कब्ज जैसी समस्याओं के निदान में उपयोगी है. इसके अलावा राई में पाया जाने वाला पोषक तत्व पेट की अन्य समस्याएं जैसे कि पेट में गैस, पेट दर्द, ऐंठन, अल्सर, पित्त पथरी आदि को भी कम करने का काम करते हैं.
4. वजन घटाने में
विशेषज्ञों के अनुसार फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ वजन को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा वजन को नियंत्रित करने के लिए खाद्य पदार्थों कैलोरी की भी काफी कम होनी चाहिए. ये दोनों गुण एक साथ आपको राई में मिल जाता है. फाइबर आपको भूख नहीं लगने देता और कैलोरी की कम मात्रा दोनों मिलकर आपका वजन काफी हद तक कम कर सकते हैं.
5. शुगर के उपचार में
शुगर में हमारे शरीर में इंसुलिन के स्तर में काफी बढ़ोतरी हो जाती है. इसलिए भोजन के समय यह ध्यान रखना होता है कि उस खाद्य पदार्थ से हमारे शरीर में इंसुलिन का स्तर न बिगड़े. इसलिए आपको चाहिए ऐसा खाद्य पदार्थ जिसमें ये गुण पहले से ही मौजूद हो. राइ एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जिससे कि इन्सुलिन का स्तर प्रभावित नहीं होता है. इसका कारण ये है कि राई बड़े अणुओं से बना होता है इसलिए ये आसानी से सरल चीनी में नहीं टूटता है.
6. अस्थमा के उपचार में
राई के नियमित सेवन बच्चों में अस्थमा की संभावना को कम कर सकता है. कई शोधों में ऐसा पाया गया है कि राई का सेवन करने वाले बच्चों की तुलना में जिन बच्चों ने राई का सेवन नहीं किया था उनमें अस्थमा होने की संभावना 60% तक ज्यादा पाई गई.
7. रक्तचाप में
यदि आप एथिरोस्केलेरोसिस जिसमें धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं, या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं तो आपके लिए राई का सेवन काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. क्योंकि राई में विटामिन खनिज और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. जो कि आपकी धमनियों के ब्लॉकेज को खत्म कर सकते हैं.
8. पित्ताशय की पथरी में
फाइबर से समृद्ध खाद्य पदार्थ होने के कारण राई हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त करके इसमें होने वाली पथरी के विकास को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा यह अन्य समस्याओं को भी खत्म करता है.

राई के नुकसान

  • राई कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.
  • ऐसे लोगों को चिकित्सकीय परामर्श लेने की आवश्यकता होती है.
     
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Amaranth (Chaulai) Benefits and Side Effects in Hindi - चौलाई के फायदे और नुकसान

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Amaranth (Chaulai) Benefits and Side Effects in Hindi - चौलाई के फायदे और नुकसान

प्राचीन काल से ही आयुर्वेद के तमाम खोजों के रूप में चौलाई आज हमारे सामने है. चौलाई के सबसे पहले भारत में ही उगाए जाने का प्रमाण है. लेकिन अब अमेरिका और अन्य देशों में भी इसे उगाया जाता है. चौलाई के पत्ते भी काफी स्वास्थ्यवर्धक और लोकप्रिय हैं. इसमें तमाम पोषक तत्व संयुक्त होने के कारण हमें स्वस्थ रखने में सहायक होता है. चौलाई में पाए जाने वाले तमाम पोषक पदार्थों में बेहद मूल्यवान एंटीऑक्सीडेंट और फेनालिक यौगिक होते हैं. इसके अलावा चौलाई बीज और पत्तों में विटामिन और खनिज की प्रचुरता होती है. इसके तमाम औषधीय गुण और फायदे जानने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं को देखें.

1. आंखों के लिए
आंखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन ए काफी महत्वपूर्ण होता है. चौलाई में विटामिन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. इसलिए चौलाई हमारी आंखों में होने वाले संक्रमण और तमाम धब्बे, दाग, अधः पतन और मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करता है.
2. बालों के लिए
चौलाई में लाइसिन नाम का एक अमीनो एसिड पाया जाता है. जिसका उत्पादन हमारे शरीर में नहीं हो पाता है. इस अमीनो इस अमीनो एसिड की खासियत यह है. कि यह कैल्शियम की दक्षता में सुधार करके बालों को मजबूती प्रदान करता है. इससे आपके बाल कम झड़ते हैं. इसके अलावा आप चौलाई का उपयोग शैंपू, बालों में मालिश आदि के लिए भी कर सकते हैं. इससे आपके बाल लंबे घने खूबसूरत और मजबूत होते हैं.
3. शुगर के उपचार में
चौलाई का उपयोग शुगर के उपचार के लिए भी किया जाता है. दरअसल चौलाई में इंसुलिन के स्तर को कम करने की क्षमता होती है. इसके अलावा यह रक्त शर्करा का स्तर भी घटाता है. इस तरह से चौलाई शुगर के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ बन जाता है.
4. पाचन तंत्र के लिए
चौलाई पाचन तंत्र को मजबूत करने और इसकी सक्रियता बढ़ाने में भी प्रमुख भूमिका निभाता है. चौलाई के बीज में पाया जाने वाला फाइबर हमारे पाचन एंजाइमों को सक्रीय बनाता है. इसके अलावा यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालने का काम करता है.
5. प्रोटीन के स्रोत के रूप में
प्रोटीन के लिए हम चौलाई का प्रयोग कर सकते हैं. दरअसल इसमें सभी आवश्यक 9 अमीनो एसिड पाया जाता है. बेहद दुर्लभ माना जाने वाला लाइसिन नाम का एमिनो एसिड चौलाई में भरपूर पाया जाता है. लाइसिन का मुख्य काम कैल्शियम का अवशोषण, स्नायु प्रोटीन का निर्माण, चोटों की रिकवरी और हार्मोन, एंटीबॉडीज व एंजाइमों का उत्पादन करना है. प्रोटीन की सहायता से हमारे शरीर में महत्व और कोशिकाओं का निर्माण होता है.
6. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में
कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान लोगों के लिए चौलाई का सेवन भोजन का एक अच्छा विकल्प माना जाता है. जाहिर हे चौलाई के बीज में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. कोलेस्ट्राल के नियंत्रण के कारण ये धमनियों को सख्त होने से भी बचाता है.
7. हड्डियों के लिए
कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए बेहद जरूरी खनिज है. चौलाई कैल्शियम से समृद्ध खाद्य पदार्थ है. इसलिए यह हमें हड्डियों से संबंधित समस्याएं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस आदि से बचाता है.यही नहीं ये हड्डियों के रिपेयर और मजबूती में भी काम करता है.
8. वजन कम करने में
चौलाई हमारे शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्रभावशाली तरीके से कम करने की क्षमता रखता है. चौलाई हार्मोन को भी रिहा करके हमें पेट भरे रहने के एहसास को बरकरार रखता है. इसलिए चौलाई वजन कम करने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है.
9. सूजन के लिए
चौलाई में सूजन को कम करने वाले गुण भी होते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण यह सूजन से संबंधित कई परेशानियों को कम करता है. चौलाई हमारे सेलुलर झिल्ली को ऑक्सीडेटिव नुकसान से भी बचाने का काम करता है.
10. सीलिएक से बचाने में
सीलिएक दरअसल रक्ताल्पता से संबंधित बीमारी है. यह छोटी आंत में विकार उत्पन्न करने वाले पोषक तत्वों के पाचन को मुश्किल बनाता है. चौलाई में पाए जाने वाले पोषक तत्व इस समस्या को दूर करने का काम करते हैं.

चौलाई के नुकसान

  • अधिक मात्रा में चौलाई का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • शुगर से पीड़ित व्यक्ति इसके सेवन में सावधानी बरतें.
  • बच्चों और कुछ लोगों में जो कि लियोसिन प्रोटीन का सहन नहीं कर पाते, उनके लिए पेट दर्द का कारण बन सकता है.
     
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Roti Aur Chawal Sehat Ke Liye Kya Hai Behtar - रोटी या चावल क् या है सेहत के लिए बेहतर?

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Roti Aur Chawal Sehat Ke Liye Kya Hai Behtar - रोटी या चावल क् या है सेहत के लिए बेहतर?

अपने देश में विशेष रूप से उत्तर भारत में रोटी और चावल दोनों ही मुख्य भोजन के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं. इसका ट्रेंड कुछ ऐसा है कि रोटी का इस्तेमाल सुबह नाश्ते के लिए जबकि रात्रि भोजन के लिए चावल का इस्तेमाल किया जाता है. कई ऐसे भी राज्य हैं जहाँ या तो रोटी या फिर चावल पसंद किया जाता है. जैसे कि पंजाब में रोटी ज्यादा पसंद की जाती है तो वहीँ बंगाल के लोगों को चावल अच्छा लगता है. ये तो बात हुई पसंद-नापसंद की लेकिन अब सवाल यह उठता है कि इन दोनों में से किसका सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा ठीक रहता है.

जहाँ तक इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों की बात है तो इन दोनों में कार्बोहाइड्रेट्स और कैलोरी की एक समान मात्रा मौजूद होती है. लेकिन अब हम इन दोनों के पौष्टिक महत्व भी देख लेते हैं. इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों की बात जाए तो इसमें रोटी के सामने चावल कहीं नहीं टिकता. क्योंकि रोटी में प्रोटीन और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है. जबकि चावल में ये नहीं होते तो आइए समझने की कोशिश करें कि रोटी और चावल में से कौन हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर है.
किसमें कितना है दम?

खाद्य पदार्थ        ऊर्जा (कैलोरी)        प्रोटीन (ग्राम)        फैट (ग्राम)        कार्बोहाइड्रेट (ग्राम)
रोटी
       71        3        0.3        15
चावल        80        1        0.1        18

1. मिनरल्स के स्रोत के रूप में
हमारे शरीर को स्वस्थ बनाएं रखने और इसके बेहतर संचालन के लिए मिनरल्स की आवश्यकता होती है. मिनरल्स हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ हमें कई तरह की परेशानियों से भी बचाने का काम भी करते हैं. ये मिनरल्स हमें चपाती या चावल खाने से मिलते हैं. रोटी में आपको कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और लोहा जैसे मिनरल्स प्राप्त हो जाते हैं. जबकि चावल में हमें सिर्फ लोहा ही मिलता है. इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस हमें नहीं मिल पाते हैं. यही नहीं चावल में हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला कैल्शियम भी नहीं पाया जाता है.

2. वजन कम करने के लिए
चावल में स्टार्च की भरपूर मात्रा पाई जाती है. जिसके कारण चावल को पचाना हमारे शरीर के लिए काफी आसान काम है. लेकिन रोटी में स्टार्च न पाए जाने के कारण यह बहुत धीरे-धीरे पचता है. अपनी धीमी पाचन के कारण ही रोटी खाने से हमें लंबे समय तक भूख न लगने का एहसास होता है. इसलिए जिन लोगों को अपने वजन घटाना है उनके लिए रोटी ही बेहतर विकल्प है. लेकिन यदि आप चावल खाना चाहते हैं तो आपके लिए ब्राउन राइस एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

3. फोलेट के स्रोत में के रूप में
फोलेट भी हमारे शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है. पानी में घुलनशील विटामिन बी को ही फोलेट के नाम से भी जाना जाता है. फोलेट के स्रोत के रूप में चावल ज्यादा बेहतर है. हालांकि रोटी में भी पलट पाया जाता है लेकिन चावल की तुलना में कम होता है.

4. पोषण के लिए
रोटी में पाए जाने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, सोडियम, प्रोटीन और फाइबर हमारे शरीर को पोषण देने और इसे स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन चावल में सोडियम नहीं पाया जाता है. इसलिए यदि आप अपने डाइट में सोडियम भी लेना चाहते हैं तो आपको रोटी परेफर करना चाहिए.

5. शुगर के लिए
गेहूं और चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक जैसा ही है. इन इन दोनों खाद्य पदार्थों के सेवन का रक्त शर्करा के स्तर पर एक समान ही प्रभाव पड़ता है. यानी शुगर के मरीज रोटी और चावल का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इसे नियंत्रित मात्रा में लें. यानी नियंत्रित मात्रा में लेने से इसका ज्यादा असर नहीं होता है.
 

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Bajra (Millet) Benefits and Side Effects in Hindi - बाजरा के फायदे और नुकसान

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Bajra (Millet) Benefits and Side Effects in Hindi - बाजरा के फायदे और नुकसान

बाजरे का वैज्ञानिक नाम पेन्नीसेतुम ग्लौकम है. बाजरा एक ऐसी फसल है जिसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों या उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उपजाया जा सकता है. भारत में बाजरे की खेती उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब आदि में होती है. बाजरे का प्रयोग हमारे यहां परंपरागत रुप से होता आया है. इसका मुख्य उपयोग हमारे यहां दलिया, ब्रेड और स्नेक्स बनाने में किया जाता है. इसका कारण यह है कि बाजरे में अन्य अनाजों की तुलना में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है.

बाजरे में पाए जाने वाले तमाम पोषक तत्वों में विटामिन, खनिज और कई कार्बनिक यौगिक हैं. लोहा, पोटेशियम, जस्ता, कैल्शियम, विटामिन बी और मैग्नीशियम इसके अलावा बाजरा, प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होता है. इसलिए बाजरा अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर खाद्य विकल्प माना जाता है. आईए बाजरे के फायदे और इसके नुकसान को जानते हैं.

1. वजन कम करने में
वजन घटाने के लिए बाजरे का प्रयोग किया जाता है. इसका कारण बाजरे में ट्रिप्टोफैन नाम का एक एमिनो एसिड पाया जाता है. यह भूख को कम करने का काम करता है. इससे वजन कम करने में मदद मिलती हैं. यही नहीं ये एमिनो एसिड खाना धीमी गति से पचाता है. जिससे कि हमें लंबे समय तक पेट भरे जाने का एहसास होता है. बाजरे में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला फाइबर भी हमें लंबे समय तक पेट भरे रहने का एहसास कराता है. इसलिए वजन कम करने वाले लोगों के लिए बाजरा एक बेहतर खाद्य विकल्प है.
2. विषाक्त पदार्थों को दूर करने में
बाजरे में भी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर से फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को नष्ट करने के साथ-साथ किडनी और लीवर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक होते हैं. बाजरे में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स में क्वेरसेटिन, करक्यूमिन, कैटींस और इलैजिक एसिड इलायची केसेट और कैटरीना प्रमुख हैं. इन एंटीऑक्सीडेंट्स का काम मल त्यागने और एंजाइमिक गतिविधियों को ख़त्म करके, गंदगी को शरीर से दूर ले जाने का है.
3. हृदय की विकारों के लिए
बाजरे का प्रयोग ह्रदय से संबंधित विकारों को दूर करने और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है. बाजरे में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. मैग्नीशियम का काम धमनियों को सख्त होने से बचाना है. बाजरे में पोटेशियम की भी अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है. यह हमारे रक्त वाहिका तंत्र में सुधार लाता है. इसके अलावा भी बाजरे में पाए जाने वाले पोषक तत्व हृदय के स्वास्थ्य और इसके लिए आवश्यक पदार्थों को पूरा करते हैं.
4. कैंसर के उपचार में
स्तन कैंसर को दूर करने में भी बाजरा सखी सक्रिय भूमिका निभा सकता है. इसके लिए महिलाओं को रोजाना 30 ग्राम से फाइबर का सेवन करना होता है. जो कि आपको बाजरे में आसानी से मिल जाएगा फाइबर से फाइबर के सेवन से स्तन कैंसर होने की संभावना 50% तक कम होती है.
5. अनिद्रा में
बाजरा में ट्रिप टू प्रेम पाया जाता है. इसका काम हमारे शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाना है. सेरोटोनिन हमारे शरीर में तनाव को दूर करने का काम करता है. इसलिए बाजरे का सेवन हमें शांतिपूर्ण नींद के लिए आवश्यक है.
6. अस्थमा में
अस्थमा के मरीजों के लिए भी बाजरा एक अच्छा खाद्य विकल्प साबित होता है. बाजरे का नियमित सेवन अस्थमा पीड़ितों के लिए काफी लाभदायक होता है. इससे अस्थमा के मरीजों की कई परेशानियां कम होती हैं.
7. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में
बाजरा हमारे शरीर में पाचन तंत्र के सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है. बाजरे हमारा बाजरा हमारे जठर तंत्र को दुरुस्त करके कब्ज, पेट फूलने, और गैस जैसी समस्याओं को दूर करता है. इसके अलावा बाजरा हमारे शरीर में पोषक तत्वों के स्तर को भी बनाए रखता है.
8. कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में
कोलेस्ट्रोल का हमारे शरीर में अनियंत्रित हो जाना कई तरह की परेशानियों को उत्पन्न करता है. बाजरे में पाया जाने वाला फाइबर खराब कोलेस्ट्रोल को खत्म करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के प्रभाव को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है.
9. त्वचा के लिए
बाजरे में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करते हैं. ये हमारे शरीर की त्वचा में पड़ने वाली झुर्रियों और उम्र बढ़ाने वाले अन्य लक्षणों को लक्षण खत्म करता है. क्योंकि इसके सेवन से कोशिकाओं को पुनर्जीवन मिलता है. इसके अलावा बाजरे में अमीनो एसिड भी पाया जाता है. जोकि कोलेजन के निर्माण करने में और ऊतकों को संरचना देने में काफी मददगार होते हैं. इसकी सहायता से त्वचा में लचीलापन भी आता है. बाजरे में पाए जाने वाले विटामिन ई विटामिन सी और सेलेनियम जैसे तत्व हमारी त्वचा को कैंसर और सूर्य किरणों से होने वाली क्षति की भरपाई करते हैं.
10. शुगर के उपचार में
शुगर एक बेहद गंभीर बीमारी है. बाजरा में शुगर को दूर करने की क्षमता होती है. यह विशेष रुप से टाइप-2 मधुमेह को कम करने में फायदेमंद साबित होता है. बाजरे में मैग्नीशियम भी पाया जाता है मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन और और ग्लूकोज रिसेप्टर की क्षमता बढ़ाने में उपयोगी है. एक अध्ययन के अनुसार मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से मधुमेह की संभावना में 30% तक कमी हो सकती है.
11. बालों के लिए
बालों को मजबूत करने और इसे स्वस्थ रखने में भी बाजरे की भूमिका महत्वपूर्ण है. बाजरे में पाया जाने वाला केराटिन प्रोटीन बालों के प्रत्येक किनारे की संरचना को बनाए रखने में सहायक है. बाजरे के सेवन से बालों के झड़ने की समस्या खत्म हो सकती है. इसके अलावा बाजरा, रूसी, सूजन, एक्जिमा आदि समस्याओं को भी दूर करने में काफी मददगार होता है. बाजरा को गंजेपन से भी बचा सकता है.

बाजरा के नुकसान

  • यदि आपके शरीर में बाजरा को पचाने में अधिक समय लगता है. तो आपके लिए से नुकसान भी हो सकता है.
  • बाजरे के इस्तेमाल से आपको घेंघा और थायराइड जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. क्योंकि बाजरा आयोडीन के शोषण को बाधित करता है.
  • हाइपोथायरायडिज्म पीड़ित व्यक्ति बाजरे के सेवन से बचें.
     
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Sorghum (Jowar) Benefits And Side Effects in Hindi - ज्वार के फायदे और नुकसान

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Sorghum (Jowar) Benefits And Side Effects in Hindi - ज्वार के फायदे और नुकसान

ज्वार का वैज्ञानिक नाम ज्वार बायकलर है. ज्वार उपोष्णकटिबंधीय देशों और उष्णकटिबंधीय देशों में पाई जाने वाली घास का एक प्रकार है. इसके ज्यादातर प्रजातियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता रहा है. ज्वार बायकलर का ही उपयोग हम मनुष्यों के लिए अनाज, ज्वार शिरा, ज्वार सिरप आदि के रूप में करते हैं. आज की तारीख में ज्वार का उपयोग शराब बनाने और जमींदारों के लिए भी किया जाता है.

ज्वार का प्रयोग उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जिन्हें गेहूं से एलर्जी होती है. ज्वार में भी पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है. इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रुप से नियासिन, यामीन, राइबोफ्लेविन, मैग्नीशियम, लोहा, तांबा, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर हैं. ज्वार के फायदे और नुकसान के बारे में जानने के लिए निम्लिखित बिन्दुओं पर गौर करें.

1. हड्डियों के लिए
ज्वार का उपयोग हम हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कर सकते हैं. क्योंकि ज्वार में मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस आदि की प्रचुरता होती है. इसके अलावा जवाहर हमारे शरीर में ऊतकों के विकास में भी काफी सहायक साबित होता है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी बीमारियों को दूर करने में भी काफी मदद मिलती है.
2. शुगर के उपचार में
ज्वार में टैनिन नाम का एक एंजाइम पाया जाता है. यह शरीर से स्टार्च के अवशोषण को रोकता है. और इंसुलिन एवं ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है. जिससे शुगर के मरीजों में ग्लूकोज के स्तर में निरंतरता बनी रहती है. यानी ग्लूकोज के स्तर का बढ़ना यह घटना रुक जाता है.
3. ह्रदय से संबंधित विकारों में
फाइबर से समृद्ध ज्वार हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. क्योंकि फाइबर हमारे शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को दूर करने में काफी सहायक होता है. इससे हमारे हृदय को स्वस्थ बने रहने में मदद मिलती है. ज्वार के सेवन से धमनियों को सख्त होने और दिल के दौरे एवं स्ट्रोक जैसी स्थितियों से भी निजात पा सकते हैं.
4. पाचन तंत्र के लिए
ज्वार में पाई जाने वाली फाइबर की भरपूर मात्रा हमारे शरीर के पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करने का काम करती है. दिन में एक बार ज्वार के सेवन से हमें पूरे दिन का लगभग 48 प्रतिशत फाइबर प्राप्त हो जाता है. इससे हमारे पाचन तंत्र को तेजी से काम करने में मदद मिलती है. और पेट से संबंधित तमाम बीमारियां जैसे सूजन, कब्ज पेट में दर्द, दस्त, गैस आदि से छुटकारा मिलता है.
5. कैंसर के उपचार में
ज्वार का चोकर एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत है. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर के जन्म लेने की संभावना को काफी हद तक कम करते हैं. क्योंकि एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को खत्म करके कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का काम करते हैं.
6. एलर्जी को दूर करने में
कई लोगों को गेहूं खाने से एलर्जी की समस्या होने लगती है. ऐसे में लोगों लोग गेहूं के विकल्प के रूप में ज्वार का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से आप सूजन मतली और जठार तंत्र संबंधी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं.
7. उर्जा को बनाए रखने में
ज्वार का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर को लगातार बनाए रखता है. क्योंकि ज्वार में नियासिन या विटामिन बी 3 पाया जाता है. जो कि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके शरीर तक पहुंचाता है. यही नहीं यह कई पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदल कर उपापचय के द्वारा शरीर में उर्जा के स्तर को बनाए रखता है.
8. मोटापा कम करने में
ज्वार का नियमित सेवन मोटापा कम करने वाले व्यक्तियों के लिए काफी लाभदायक होता है. ज्वार में पाया जाने वाला फाइबर भूख को नियंत्रित करता है. जिससे कि आपको जल्दी जल्दी भूख नहीं लगती है. इसके अलावा इसमें अन्य पोषक तत्वों की भी मौजूदगी होती है.
9. लाल रक्त कोशिकाओं की वृद्धि में
ज्वार में पाए जाने वाले खनिज पदार्थों में कैल्शियम और कैल्शियम भी होते हैं. इसके अलावा इसमें कॉपर और आयरन भी पाए जाते हैं. जो कि हमारे शरीर में एनीमिया की संभावना को खत्म करते हैं. शरीर में पर्याप्त मात्रा में कॉपर और आयरन की मौजूदगी हमारे रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाते हैं. जिससे हमारा रक्त संचरण में मदद मिलती है.

ज्वार के नुकसान

  • ज्वार के सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो सकती है.
  • ज्वार का आवश्यकता से अधिक मात्रा में सेवन हमें कई परेशानियों में डाल सकता है.
     
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Red Lentils (Masoor Dal) Benefits in Hindi - मसूर दाल के फायदे

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Red Lentils (Masoor Dal) Benefits in Hindi - मसूर दाल के फायदे

पोषक तत्वों से भरपूर मसूर दाल हमारे देश में प्राचीन काल से ही इस्तेमाल होती आ रही है. दरअसल यह सबसे पुराने और सबसे ज्यादा खपत होने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है. दूसरे दलों की अपेक्षा इसे भिगोने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. मसूर दाल में कई तरह के पोषक तत्वों और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले तत्व की प्रचुरता होती है. इसमें पाए जाने वाले स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों के आधार पर भी इसे संतुलित आहार की श्रेणी में रखा जाता है. मसूर दाल में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन बी, और फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं. इस मेंपाए जाने वाले खनिज पदार्थों में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, लोहा, सेलेनियम, पोटेशियम, जस्ता आदि प्रमुख है. इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. जो कि शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं. आइए मसूर दाल के फायदे और नुकसान को विस्तारपूर्वक जानें.

1. हड्डियों और दांतों को के लिए
मसूर दाल मैग्नीशियम कैल्शियम फास्फोरस और कई तरह के खनिज पदार्थों का एक बेहतरीन स्त्रोत है. यह मजबूत और स्वस्थ हड्डियों के लिए तो आवश्यक है ही, हमारे दांतो के विकास और वृद्धि में भी फायदेमंद साबित होती है.
2. सूजन कम करने में
मसूर दाल में फोलेट, विटामिन बी, प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाने की वजह से यह हमारे शरीर से सूजन को खत्म करने में मददगार होता है. कई शोधों में पता चलता है कि यदि हम नियमित रूप से मसूर दाल का सेवन करें तो सूजन से जुड़ी कई बीमारियों की संभावना खत्म होती है.
3. कैंसर के उपचार में
कैंसर एक गंभीर बीमारी है. लेकिन मसूर दाल के कैंसर रोधी गुण पाया जाता है. जिसमें फोलेट और फाइबर की प्रमुखता होती है. के कारण यह हमें कैंसर से बचाता है. मसूर दाल में पाए जाने वाले कैंसररोधी घटकों में एंटीऑक्सीडेंट्स, सेलेनियम और जस्ता भी हैं. इस प्रकार मसूर दाल का नियमित सेवन हमें कैंसर के खतरों से बचाता है.
4. त्वचा की सुंदरता के लिए
मसूर दाल का नियमित सेवन आपकी त्वचा को सुंदर और चमकदार बनाने में भी सहायक होता है. मसूर दाल के सेवन से त्वचा मुलायम, कोमल और निखिल हुई लगती है. इसके अलावा मसूर दाल हमारे चेहरे पर होने वाले मुंहासों में भी काफी हद तक कमी लाता है. यह त्वचा की लकीरों, झुर्रियों और काले धब्बों को भी खत्म करता है.
5. हृदय की समस्याओं में
मसूर दाल का नियमित सेवन हमारे शरीर में फाइबर की मौजूदगी को बनाए रखता है. इसके अलावा इसमें पाए जाने वाला फोलेट और मैग्नीशियम भी हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में काफी उपयोगी साबित होते हैं. मैग्नीशियम हमारे शरीर में रक्त संचार, ऑक्सीजन और अन्य उपयोगी तत्वों को दुरुस्त करंता है. जबकि मैग्नीशियम हमारे शरीर में ह्रदय को सेहतमंद रखने का काम करता है. मसूर दाल में घुलनशील फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. जो कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर के हृदय की धमनियों को साफ करने में मददगार साबित होता है. इससे स्ट्रोक और दिल के दौरे पड़ने का खतरा कम होता है.
6. पाचन के सुधार में
मसूर दाल में पाई जाने वाली फाइबर हमारे शरीर में पाचन से संबंधित समस्याओं को दूर करने में उपयोगी होती है. इसके अलावा यह हमारे शरीर से विषाक्तता को भी हटाने में फायदेमंद होती है. मसूर दाल में पाए जाने वाला घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रोल को घटाकर हमारी आंत्र की गतिविधियों को भी नियमित करता है. इससे कब्ज और पाचन की अन्य समस्याओं में काफी राहत मिलती है.
7. शुगर के उपचार में
मसूर दाल शुगर के मरीजों के लिए एक आदर्श खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है. क्योंकि इसका ग्लिसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है. मसूर दाल हमारे शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को भी नियंत्रित करने में मददगार होता है. इसके अलावा ये शुगर और इंसुलिन की अन्य समस्याओं में भी उपयोगी साबित होती है.
8. वजन कम करने में
मसूर दाल का उपयोग मोटापा या वजन कम करने के लिए भी किया जाता है. क्योंकि इसमें वसा की कम मात्रा और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है. इसमें पाए जाने वाले फाइबर के कारण हमें भूख कम लगती है. जिससे की हम खाना कम खाते हैं और वजन में कमी आती है.

मसूर दाल के नुकसान

  • मसूर दाल का आवश्यकता से अधिक उपयोग हमारे शरीर में पेट फूलने, किडनी की समस्या और पोटेशियम विषाक्तता जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.
  • इसके अलावा कुछ लोगों को मसूर दाल के सेवन से एलर्जी भी हो सकती है.
     
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Black Gram (Urad Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - उड़द दाल के फायदे और नुकसान

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Black Gram (Urad Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - उड़द दाल के फायदे और नुकसान

उड़द की दाल में भी कई तरह के पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है. बाजार में उड़द दाल, साबुत, छिलका लगी हुई या बिना छिलके के लिए बिक्री के लिए उपलब्ध होता है. उड़द का वैज्ञानिक नाम विग्न मुंगों है. हमारे यहां इसका उपयोग प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है. भारत और दक्षिण एशियाई देशों की संस्कृतियों में भी इससे बने व्यंजनों की भरमार रही है. उड़द की दाल में पाए जाने वाले विभिन्न तत्वों में विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर प्रमुख हैं. आइए उड़द की दाल से होने वाले कुछ प्रमुख फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1.शुगर के उपचार में
शुगर से पीड़ित व्यक्ति उड़द की दाल में पाए जाने वाले फाइबर की सहायता से लाभान्वित हो सकता है. फाइबर हाथ में पोषक तत्वों की तीव्रता को विनियमित करने में फायदेमंद होता है. यह हमारे रक्त में इंसुलिन और गोलू के ग्लूकोज का स्तर भी नियमित करने में उपयोगी होता है. शुगर के मरीजों के लिए इंसुलिन और ग्लूकोज का स्तर संतुलित रखना काफी राहत देने वाला होता है.
2. बदन दर्द से राहत में
उड़द की दाल के प्रयोग से आप शरीर के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं. उड़द की दाल में पाए जाने वाले खनिज और विटामिन हमारे उपापचय की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं. इसके साथ ही ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके हमारे शरीर से दर्द और सूजन को मिटाने में सहायक होते हैं. इस तरह शरीर के दर्द को भगाने के लिए उड़द की दाल का नियमित सेवन लाभदायक होता है.
3. पाचन की समस्या दूर करने में
उड़द की दाल में पाया जाने वाला फाइबर हमारे जठर तंत्र के किसी भी समस्या से निपट सकता है. दरअसल फाइबर, मल को त्यागने और पेस्टलेटिक गति को प्रोत्साहित करने का काम करता है. उड़द की दाल पेट फूलने, कब्ज, पेट में ऐंठन आदि पेट की समस्याओं को दूर करती है. इसके साथ ही भोजन के पोषक तत्वों को अवशोषित करके भोजन का सम्पूर्ण लाभ प्रदान करती है.
4. हड्डियों को मजबूत करने में
उड़द की दाल में फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आदि खनिजों की मौजूदगी हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है. इन तत्वों से हड्डियों में होने वाली टूटन कम होती है. इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व भी बरकरार रहता है. कमजोर हड्डियों में मजबूती आ जाने से ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी समस्याएं भी समाप्त होती हैं. हड्डियों में लचीलापन लाने के साथ ही ये हड्डियों की अन्य समस्याओं की संभावना को भी खत्म करती है.
5. ऊर्जा को बढ़ाने में
उड़द की दाल हमारे शरीर की ऊर्जा स्तर में वृद्धि करती है. इसके साथ-साथ ये जीवन शक्ति की वृद्धि करने का भी एक बेहतर विकल्प साबित होती है. उड़द की दाल में पाया जाने वाला आयरन हमारे शरीर की रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह रक्त कोशिकाएं, हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने में काफी मददगार होती है. ऑक्सीजन का हमारे शरीर में संचरण होने से उर्जा के स्तर में वृद्धि होती है. इससे आयरन की कमी से होने वाले रोगों की संभावना काफी हद तक कम होती है.
6. त्वचा के लिए
उड़द की दाल का प्रयोग हमारे त्वचा को भी स्वस्थ रखने में लाभदायक साबित होता है. उड़द की दाल में मौजूद खनिज और विटामिन हमें सूजन जैसी समस्याओं से निजात दिलाते हैं. इसके अलावा यह ब्यूटी मार्क्स से और त्वचा से संबंधित अन्य समस्याओं से भी छुटकारा दिलाते हैं. त्वचा पर ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में भी उड़द की दाल की भूमिका काफी सकारात्मक होती है. सन बर्न और मुंहासों जैसे लक्षणों को भी उड़द की दाल से नियंत्रित किया जा सकता है.
7. दिल के लिए
उड़द की दाल हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में भी फायदेमंद होती है. दरअसल इस में पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर आदि जैसे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं. जो कि ह्रदय को स्वस्थ रखने में काफी मददगार होते हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित किया जाता है.

उड़द की दाल के नुकसान

  • उड़द की दाल के सेवन से किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड की वृद्धि हो सकती है.
  • गुर्दे की पथरी और पित्त की पथरी से पीड़ित मरीज इसका सेवन ना करें.
  • किसी भी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें.
     
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Mung Beans (Green Gram) Benefits in Hindi - मूंग दाल खाने के फायदे

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Mung Beans (Green Gram) Benefits in Hindi - मूंग दाल खाने के फायदे

मूंग दाल का प्रयोग शरीर से शरीर के कई समस्याओं के उपचार में किया जाता है.. प्राचीन काल से ही मुंग दाल का प्रयोग हमारे देश में किया जाता रहा है. मुंग दाल हमारे यहाँ परम्परागत रूप से खाया जाता रहा है. हलांकि ये जरुर है. कि मुंग दाल उतना लोकप्रिय नहीं है. मुंग दाल में मैग्नीशियम, फाइबर, जस्ता, प्रोटीन, विटामिन बी, मैंगनीज, तांबा, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि पाए जाते हैं. इसे अन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. आइए इससे होने वाले कुछ फायदे और नुकसान को जानें.

1. आँखों के लिए
मूंग की दाल आंखों को स्वस्थ रखने में काफी लाभदायक होती है. आंखों के लिए आवश्यक विटामिन सी ह में मूंग की दाल से मिल जाती है. इसके अलावा और मूंग की दाल में विटामिन-बी6 और विटामिन बी5 आदि भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं. विटामिन सी रेटिना को सही रखने के लिए उचित होता है. इस प्रकार मूंग का दाल आंखों की देखभाल के लिए एक बेहतर विकल्प है.
2. शुगर दूर करने में
मूंग की हरी दाल हमारे शरीर में मौजूद शुगर के स्तर को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हरी मूंग की दाल खाने का एक और फायदा यह है कि इससे छीनी आसानी से पचने के लायक बन जाती है. इसलिए वह रक्त में घूमती नहीं है. मूंग की दाल खाने से शुगर का स्तर हमारे शरीर में सामान्य बना रहता है. जिससे शुगर की बीमारी को रोका जा सकता है.
3. रक्तचाप के नियंत्रण में
मूंग की दाल में मौजूद मैग्नीशियम नामक तत्व रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक सिद्ध होता है. यही नहीं मूंग की दाल रक्त में मैग्नीशियम का स्तर भी सामान्य बनाए रखती है. और हमारे संपूर्ण शरीर में मैग्नीशियम का संचार भी मैग्नीशियम हमारे शरीर में रक्त संचरण को बनाए रख कर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है. मूंग की दाल वसा को भी नियंत्रित रखने में सहायक होती है.
4. बदहजमी दूर करने में
मूंग की दाल हमारे शरीर में होने वाले बदहजमी और पेट में जलन की शिकायत को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दरअसल मुंग दाल में पाया जाने वाला फाइबर हमारे शरीर की पाचन क्रिया को दुरुस्त करने का काम करती है. इससे उपापचय की स्थिति में सुधार आता है. और पाचन क्रिया सही से संचालित होने पर हमारा पेट भी ठीक रहता है.
5. हड्डियों को मजबूत बनाने में
मूंग की दाल हमारे शरीर में हड्डियों को मजबूत रखने का काम करती है. या कैल्शियम की जरूरत पूरा करके हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होती है. मूंग की दाल से मिलने वाला कैल्शियम हड्डियों के निर्माण में आने वाली बाधाओं को रोकता है. इसके साथ ही यह तनाव भी कम करने में उपयोगी होता है.
6. गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं को आमतौर पर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इनमें से प्रमुख है, पाचन तंत्र का अनियमित रूप से काम करना. इस वजह से गैस और जलन जैसी समस्याएं आनी शुरू हो जाती हैं. इन सब से छुटकारा पाने के लिए नेता दाल खाना सबसे आसान और अच्छा तरीका है.
7. कोलेस्ट्राल के नियंत्रण में
अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल के कारण हमारे शरीर में कई तरह की अनियमितताएं होने लगती हैं. मुख्य रूप से हृदय से जुड़ी बीमारियां बीमारियों का कारण कोलेस्ट्राल का अनियंत्रण ही है. मूंग की दाल खाने से दिल की धमनियों और कोशिकाओं में जमा कोलेस्ट्राल में कमी आने लगती है. और रक्त संचार में भी आसानी होने लगती है. इसलिए यदि आप हृदय से संबंधित परेशानियों से दूर रहना चाहते हैं. तो अपने खाद्य पदार्थ में मूंग की दाल को शामिल करें
8. बालों के लिए
मूंग की दाल बालों को मजबूत बनाने और उसकी देखभाल करने में काफी फायदेमंद साबित होती है. मूंग की दाल में पाया जाने वाला कॉपर हमारे शरीर में लोहा कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा को पूरा करता है. यह हमारे दिमाग में ऑक्सीजन बिना किसी रूकावट के ठीक तरीके से पहुंचाने का भी काम करता है. जिससे कि हमारे सिर के बालो के जड़ो को मजबूती मिलती है. इसके अलावा इस से बाल घने लंबे और चमकदार भी बनते हैं.
9. त्वचा के लिए
त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मूंग की दाल की भूमिका काफी सकारात्मक होती है. नियमित रूप से मूंग की दाल का सेवन हमारे चेहरे पर छुपी हुई झुर्रियों काले घेरे और दाग धब्बे आदि को दूर करता है. इसका नियमित सेवन हमारे लिए एंटी एजिंग का भी काम करती है. इसलिए यदि आप भी ढलती उम्र को रोकना चाहते हैं. तो मूंग की दाल का सेवन शुरू कर दें.
 

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Pigeon Peas (Arhar Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - अरहर (तुअर) दाल के फायदे और नुकसान

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Pigeon Peas (Arhar Dal) Benefits and Side Effects in Hindi - अरहर (तुअर) दाल के फायदे और नुकसान

आज संपूर्ण विश्व में अरहर की खेती व्यापक रूप से की जाती है. लेकिन इसकी शुरुआत भारत से ही हुई थी. इसके बाद फिर और पूर्वी अफ्रीकी देशों में से होते हुए अमेरिका और अन्य देशों में गया हर हर एक दलहन फसल है. और इसकी उपयोगिता कई समस्याओं के निदान में सहायक होती है. अरहर दाल से शरीर की वृद्धि रक्तचाप में संतुलन वजन में संतुलन शरीर की ऊर्जा का संचयन पाचन क्रिया में सुधार गृह से जुड़ी बीमारी में निदान आदी हो सकता है. सभी दलहन फसलें प्रोटीन का मुख्य स्रोत तो होती ही हैं. लेकिन अरहर दाल में प्रोटीन के अलावा फाइबर विटामिन एंटीऑक्सीडेंट्स खनिज आदि भी पाया जाता है. इसलिए अरहर दाल संपूर्ण शरीर के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आइए अरहर दाल के फायदे पर एक नजर डालते हैं.

1. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में
तुवर दाल के कई उपयोगिताओं में से एक है इसका प्रतिरक्षा प्रणाली में योगदान अरहर की कच्ची फली खाना भी काफी लाभदायक होता है. यदि आप पका हुआ अरहर दाल का मटन खाते हैं. तो उसमें विटामिन सी का स्तर लगभग 25% तक घट जाता है. लेकिन यदि आपको उसे पूरी उर्जा के साथ खाना है. तो कच्चा अरहर की फली खाएं इससे विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलती है. और रक्त कोशिकाओं श्वेत रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है. शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स में वृद्धि करने के कारण अरहर दाल हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.
2. वजन घटाने में
अरहर दाल में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है. यही नहीं इस में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल भी काफी कम मात्रा में पाया जाता है. इस वजह से अरहर दाल ऊर्जा को तो बढ़ाता है. लेकिन और वसा को कम करता है. इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला फाइबर आपको फुर्सत पोषण तो देता ही है. साथ में आपके भूख लगने को भी कम करता है. ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में अरहर दाल में पाया जाने वाला पोटेशियम भी काफी उपयोगी साबित होता है.
3. उच्च रक्तचाप को कम करने में
अरहर दाल खाने से शरीर में बिना किसी रुकावट के रक्त संचरण होता रहता है. पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में अरहर दाल पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करने में सक्रिय भूमिका निभाता है. अरहर दाल की पल्लू में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. जिसकी वजह से शरीर में होने उच्च रक्तचाप वाली समस्याएं नहीं होती हैं.
4. एनीमिया में
अरहर दाल में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने वाला फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. खून की कमी से हमारे शरीर में खून की कमी एनीमिया की बीमारी होती है. लेकिन जब आप अरहर दाल का सेवन करने लगते हैं. तो यह कमी पूरी हो जाती है. जिससे कि आप एनीमिया की समस्या से छुटकारा पा लेते हैं.
5. शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में
अरहर दाल का नियमित सेवन हमारे शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति करता रहता है. दरअसल यह संभव हो पाता है अरहर की फलियों में मौजूद विटामिन बी और विटामिन डी से. इसके अलावा इसमें नया सीन और राइबोफ्लेविन शरीर में मौजूद वसा को भंडारित होने से रोकता है.
6. शारीरिक विकास में
अरहर दाल दुनिया भर में भोजन का हिस्सा इसलिए बन चुकी है. क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. लगभग एक कप पकी हुई अरहर दाल में 11 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. जो कि हमारे शरीर के संपूर्ण वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक है. यह प्रोटीन हमारे शरीर की तमाम कोशिकाओं मांसपेशियों पुस्तकों और हड्डियों का निर्माण करने में काफी सहायक सिद्ध होता है.
7. दिल को स्वस्थ रखने में
अरहर दाल में पाया जाने वाला फाइबर पोटेशियम और निम्न स्तर का कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी से हमें राहत दिलाती है. पोटेशियम हमारे शरीर में रक्त के दबाव को कम करके दिल पर आने वाले तनाव को कम करता है. फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मददगार है.
8. सूजन के उपचार में
अरहर दाल के पेड़ और उसके पत्ते कवि सभी का प्रयोग कमल औषधीय प्रयोजनों के लिए कर सकते हैं. मुख्य रूप से इन सब का प्रयोग करके हम सूजन को जल्द से जल्द ठीक कर सकते हैं. इन सबसे बड़ा पेस्ट बवासीर के लिए भी फायदेमंद साबित होता है.

अरहर दाल के नुकसान
आमतौर पर अरहर दाल का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है. लेकिन हो सकता है. किसी को अरहर दाल से एलर्जी महसूस हो ऐसा होने पर उन्हें चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए.
 

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Semolina Flour (Suji) Benefits and Side Effects in Hindi - सूजी के फायदे और नुकसान

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Semolina Flour (Suji) Benefits and Side Effects in Hindi - सूजी के फायदे और नुकसान

सूजी दरअसल एक तरह से आटा का विकल्प है. इसके अलावा यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है. जो आपके भोजन संबंधी सभी उद्देश्यों को भी पूरा करता है. सूजी का प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में ब्रेड पास्ता पिज़्ज़ा क्रस्ट हलवा आदि बनाने के लिए खूब करते रहे हैं. कोलेस्ट्रोल संतृप्त वसा आदि से रहित दलिया दुरूम गेहूं से बनी होती है. हलके पीले रंग वाली सुजीत में प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है. यह शुगर के मरीजों के लिए एक उपयुक्त आहार के रूप में प्रचलित है. आइए सूजी के ऐसे ही कई फायदों और इसके नुकसान के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं.

1. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में
सूजी में कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. सेलेनियम उनमें से एक है. सेलेनियम का काम हमारे शरीर की कोशिका झिल्ली और डीएनए के ऑक्सीकरण को रोकना होता है. यदि यह ऑक्सीकरण यदि इस ऑक्सीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो यह विभिन्न रोगों और हृदय से संबंधित बीमारियों में अपनी भूमिका निभा सकता है. हमारे शरीर में सेलेनियम की प्रचुरता हमारे प्रतिरक्षा तंत्र के लिए भी काफी उपयोगी है.
2. ऊर्जा की पूर्ति के लिए सूजी में
कार्बोहाइड्रेट्स की प्रचुरता इसे हमारे शरीर के ऊर्जा उत्पादन के लिए काफी लाभदायक बनाती है. सुजी को ऐसे लोगों के लिए एक आदर्श भोजन माना जाता है, जिन्हें ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होती है. तमाम पोषक तत्वों से समृद्ध सुजी में विटामिन ए और बी कॉन्प्लेक्स पाया जाता है. जो कि इसे एक संतुलित आहार के रुप में स्थापित करता है.
3. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में
सूजी का काम हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल के विकास को रोकना भी है. इसमें पाया जाने वाला ट्रांस एसिड और संतृप्त वसा उच्च कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में सहायक सिद्ध होती है. सूजी को एक डाइट फ़ूड के रूप में आप इस्तेमाल कर सकते हैं. विशेष रुप से जब बुखार या पेट खराब होने जैसी स्थिति हो तो इस दौरान यह काफी उपयोगी साबित होता है.
4. शुगर के उपचार में
शुगर के मरीजों के लिए सुजीत एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है. कह सकते हैं. कि यह उनके लिए भोजन का सबसे अच्छा विकल्प भी है. इसका कारण इसमें कम मात्रा में पाया जाने वाला जीई है. ऐसा इसलिए भी है. क्योंकि सुजीत सफेद आटे की तुलना में हमारे पेट और आंतों में पहुंचने और और सुजीत होने में काफी कम समय लेता है. लेकिन यह धीमी दर पर पड़ता है. और सरकार हमारे शरीर से शर्करा के स्तर को बेहद बेहद प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है. हमारे शरीर में रक्त ग्लूकोज के स्तरों स्तरों मैं तीव्र उतार चढ़ाव को भी रुकता है.
5. वजन कम करने में
सूजी एक डाइट वाले भोजन के रूप में काफी प्रचलित है. इसलिए वजन कम करने वाले लोगों के लिए भी यह एक बेहतर भोजन का विकल्प साबित होता है. सूजी के सेवन से आपको भूख कम लगती है. और आपको जल्दी जल्दी खाना नहीं खाना पड़ता है. इससे आपका वजन कम होता है.
6. शरीर की क्रियाशीलता को बढ़ाने में
हमारे शरीर में तमाम पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में सूजी एक आवश्यक खाद्य पदार्थ है. सूजी का सेवन दिल और किडनी के कार्यों को भी समृद्ध करता है. सुजी का सेवन हमारी मांसपेशियों को सुचारु ढंग से काम करने में भी सहायक है. सुजी में पाया जाने वाला फर्स्ट फुआ एनर्जी मेटाबोलिज्म के लिए आवश्यक है. इस में उपस्थित मैग्नीशियम हड्डी तंत्रिका और मांस पेशियों के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करता है.

सूजी के नुकसान

  • सूजी के सेवन से आपको कई बार पेट में दर्द क्रॉनिक डायरिया, ब्लोटिंग जैसी शिकायत हो सकती है.
  • जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी है. उन्हें भी सूजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
  • सुजी से होने वाले नुकसानों में सिर में दर्द जोड़ों में दर्द आदि भी हैं.
     
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Bulgur Wheat (Daliya) Benefits and Side Effects in Hindi - दलिया के फायदे और नुकसान

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Bulgur Wheat (Daliya) Benefits and Side Effects in Hindi - दलिया के फायदे और नुकसान

गेहूं को रिफाइंड करके दुनियाभर में इससे कई तरह के अनाज बनाए जाते हैं. दलिया भी उन में से एक है. इसका प्रयोग भारत, मिडिल ईस्ट, यूरोप के देशों आदि में एक महत्वपूर्ण व्यंजन के रूप में किया जाता है. इसे एक साइड डिश माना जाता है. दलिया में पाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट और अन्य पोषक तत्व आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक साबित होते हैं. यह एक प्राकृतिक पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ है. इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन, खनिज, पोटेशियम, मैंगनीज, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, जस्ता और तांबा इत्यादि पाया जाता है. इसके साथ ही इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है. आईए दलिया के फायदे और नुकसान को समझते हैं.

1. प्रोटीन के स्रोत के रूप में
दलिया को प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है. जाहिर है प्रोटीन हमारे शरीर के विकास के लिए बहुत आवश्यक पदार्थ है. दलिया हमारे शरीर में नए कोशिकाओं ऊतकों और रक्त वाहिकाओं को बढ़ाने का काम करती है. इससे किसी चोट या अन्य बीमारियों में जिसमें प्रोटीन की आवश्यकता होती है, काफी मदद मिलती है.
2. मोटापा कम करने में
जाहिर है दलिया में कैलोरी और वसा की कम मात्रा इसे वजन कम करने में बहुत महत्वपूर्ण बनाती है. इसके अलावा दलिया में फाइबर की प्रचुरता भी आपका पेट जल्दी भरने में मदद करती है. इससे आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती है. वजन कम करने के लिए दलिया से बेहतर खाद्य विकल्प नहीं है.
3. ह्रदय को स्वस्थ रखने में
दलिया का मदद हम हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भी ले सकते हैं. दलिया हमारे दिल में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण के करती है. दलिया पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत होने के कारण हमारे रक्त वाहिकाओं और धमनियों में निम्न रक्तचाप पर तनाव को घटाने में उपयोगी साबित होती है. ह्रदय से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में दलिया की भूमिका महत्वपूर्ण है.
4. पाचन शक्ति के लिए
हमारे शरीर में पाचन क्रिया से संबंधित बिमारियों जैसे कि कब्ज, सूजन और ऐंठन आदि को रोकने के लिए दलिया काफी उपयोगी है. दरअसल इन सभी समस्याओं के उपचार के लिए फाइबर की सख्त जरूरत होती है. और दलिया फाइबर से भरपूर होता है. इसके अलावा दलिया में ओमेगा-3 फैटी एसिड को भी समाप्त करने की क्षमता होती है. दलिया हमारे पेट में पोषक तत्वों की क्षमता में सुधार कर सकता है.
5. प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए
दलिया हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी काफी मददगार साबित होती है. दरअसल इस में पाए जाने वाले विटामिन और खनिजों की भरपूर मात्रा ही हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक होती है. विशेष रुप से जस्ता शरीर की मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र के लिए एक जरूरी तत्व है.
6. कैंसर के उपचार में
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर दलिया में फैटोन्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं. इस शरीर में इसका काम सूजन को खत्म करके स्वस्थ कोशिकाओं को परिवर्तित करना होता है. जो कि कैंसर को खत्म करने के लिए बहुत आवश्यक होता है. शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करके ऑक्सीडेटिव तनाव को प्रोत्साहित करने में भी इसकी भूमिका होती है.
7. शुगर के लिए
दलिया में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के रक्त रक्त शर्करा स्तर को कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं. यह बात मधुमेह के मरीजों के लिए काफी मायने रखती है. क्योंकि इससे उनका शुगर कम होता है.
8. अच्छी नींद के लिए
दलिया में पाया जाने वाला मैग्नीशियम न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है. जैसे ही हमारा शरीर न्यूरोट्रांसमीटर छोड़ता है तो इससे तंत्रिका तंत्र और मन को शांति मिलती है. यह बात हमारे हमारे लिए अच्छी नींद के लिए काफी जरुरी है. अनिद्रा या नींद से संबंधित अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोग अपने आहार में दलिया को शामिल करके इसे काफी हद तक इससे निजात पा सकते हैं.
9. एनीमिया से बचने में
जब हमारे शरीर में खून की कमी होती है. तो इसे एनीमिया के नाम से जाना जाता है. दरअसल लोहा एक ऐसा तत्व है जो हमारे शरीर में रक्त संचरण के लिए काफी आवश्यक है. दलिया लोहे से भरपूर होती है. इसलिए यह एनीमिया से राहत देने के लिए काफी उपयोगी है.
10. हड्डियों की मजबूती के लिए
दलिया में मौजूद तमाम खनिज पदार्थ हमारे शरीर के हड्डियों को मजबूत करने का काम करते हैं. दलिया में हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए और ऑस्टियोपोरोसिस से लड़ने के लिए प्रचुर मात्रा में फास्फोरस, लोहा और मैंगनीज पाया जाता है.

दलिया के नुकसान

  • आवश्यकता से अधिक दलिया के सेवन से हमारे शरीर में सूजन और गैस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
  • दलिया का अत्यधिक सेवन कभी-कभी आपको दर्द, दस्त और उल्टी जैसी समस्याओं से भी सामना करा सकता है.
     
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