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Dr. Sanjeev Kumar Singh  - Ayurveda, Lakhimpur Kheri

Dr. Sanjeev Kumar Singh

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सब्जा के बीज के फायदे - Sabja Ke Beej Ke Fayde!

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सब्जा के बीज के फायदे - Sabja Ke Beej Ke Fayde!

आजकल के ज़्यादातर लोगों ने सब्जा के बीज का नाम भी नहीं सुना होगा. इसलिए लोग इसमें मौजूद पोशाक तत्वों और औषधीय गुणों से भी परिचित नहीं हैं. जो लोग गांवों से आते हैं या कभी कभार गाँव जाते हैं उन्हें भी सब्जा के बारे में और इसका महत्व पता होगा. उन लोगों ने गर्मी के दिनों में सब्जा के स्वादिष्ट बीजों का आस्वाद भी चखा होगा. सब्जा के स्वादिष्ट और रसीले बीजों का स्वाद यदि आपने के बार ले लिया तो आपको बार बार इसे चखने का मन करेगा. गर्मी के दिनों में गर्मी से राहत के लिए जब भी शर्बत बनाते हैं तब उसमें भी सब्जा के बीज डाल देने से उसका स्वाद और बढ़ जाता है. इस शर्बत में नींबू, पानी और चीनी के अलावा सब्जा के बीज भी डालें. सब्जा के बीज केवल स्वाद में भी बेहतर नहीं होते हैं बल्कि ये पोषक तत्वों से भी भरे होते हैं. इसमें फाइबर की प्रचुरता होती है. फिर देखें कि इससे स्वाद कितना बढ़ जाता है.
आइए इस लेख के माध्यम से हमलोग सब्जा के बीज के फायदे जानें.

1. बालों के लिए सब्जा के बीज
इसमें विटामिन, प्रोटीन और लोहा की पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं. यह पोषक तत्व बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने के लिए सहायक होते हैं. इस तरह इसके इस्तेमाल से बालों के झड़ने और गंजापन को रोक जा सकता है.

2. सुंदर त्वचा के लिए सब्जा के बीज
सब्जा के बीज और नारियल तेल के मिश्रण त्वचा से संबंधित विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाता है. सबसे पहले नारियल तेल (100 ml) मिले हुये सब्जा के बीज लें. अब इस मिश्रण को 5 मिनट तक गर्म करें. अब इसको छान ले और अपने त्वचा पर लगाएँ. यह सोरायसिस और एग्जीमा जैसी बिमारिओं के इलाज के लिए लाभदायक है.

3. सब्जा के बीज गैस के उपचार के लिए
आज कल गैस एक आम समस्या बन गया है. इसका मुख्य कारण हमारी दोषपूर्ण जीवन शैली और गलत आहार पैटर्न हैं. सब्जा के बीज पेट को ठंडक पहुँचाने में बहुत लाभदायक है. सबसे पहले दूध (1 कप) और तुलसी के बीज लें. अब इसको अच्छी तरह हिलाएं और पियें. यह पेट के जलन को कम करने के लिए प्रभावी है.

4. मधुमेह के उपचार के लिए सब्जा के बीज
तुलसी का बीज रक्त में शुगर को कम करके शुगर टाइप 2 के इलाज में फायेदमंद है. सिक्त सब्जा के बीज, स्वाद के लिए टोंड दूध (1 ग्लास) और वेनिला दिन में एक बार लें. यह आप को ऊर्जा भी देता है बिना किसी शुगर के.

5. कब्ज से भी छुटकारा दिलाता है
जब सिक्त सब्जा के बीज खाने में इस्तेमाल किया जाता है तो यह पेट को अच्छी तरह साफ़ करने में मदद करता है. यह आसान मल त्याग सुनिश्चित करता है और पेट से विष बाहर निकलवाने में मदद करता है. कब्ज की बीमारी में और अधिक लाभ पाने के लिए इसको मिल्क के साथ लिया जा सकता है.

6. ठंडक प्राप्त करने के लिए
इन बीजों को शरीर की गर्मी को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और विभिन्न प्रकार के ठंडक प्रदान करने वाले पेय पदार्थों जैसे फ़ालूदा, रुआवज़ा, नींबू पानी और शर्बत के रूप में भी ठीक से उपयोग किया जाता है.

पोषक तत्वों से भरपृ सब्जा के बीज
इसमें विभिन्न प्रकार के फाइटो-केमिकल्स और पोलिफेनोलिक फ्लेवेनॉइड्स होते हैं जैसे ओरिएंटिन, विसिएनिन और अन्य एंटिओक्सीडेंट्स. इनके पत्तियों में इसेंशियल ऑइल होते हैं. उदाहरण के लिए ईक्विनॉल, सिट्रोनेलॉल, लाइमीन, सिट्राल और टारपीनॉल आदि. इसमें दूसरे बायोकेमिकल्स की भी बहुलता होती है जैसे पोटेशियम, मैंगनीज, तांबा, कैल्शियम, फोलेट्स, मैग्नीशियम, बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन और विटामिन ए आदि प्रमुख हैं.
 

सब्जा के बीज की रेसिपी
सब्जा के बीज को आप कई रेसिपी में स्वाद बढ़ाने के लिए डाल सकते हैं. खीर, भारतीय नींबू पानी, पान गुलकंद खीर, स्ट्रॉबेरी-फ़ालूदा, आम-फ़ालूदा, आम का शर्बत, आदि. नींबू पानी, शिकंजी, शरबत, बेल शरबत, गुलाब भी महत्वपूर्ण स्वस्थ व्यंजनों में से कुछ हैं.
सब्जा के बीज के औषधीय गुण
यह पाचन समस्याओं के इलाज जैसे कब्ज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. त्वचा संक्रमण, सांस की बीमारी, गले की परेशानी और तनाव से राहत दिलाता है. यानि इसके सेवन से कई बीमारियों का इलाज ह सकता है.

बॉडी बनाने के घरेलू उपाय - Body Bnane Ke Gharelu Upay!

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बॉडी बनाने के घरेलू उपाय - Body Bnane Ke Gharelu Upay!

आजकल के युवाओं में बॉडी बनाने को लेकर बहुत उत्सुकता होती है. कई बार बॉडी बनाने के चक्कर में लोग परेशानी में भी पड़ जाते हैं. इसलिए ये आवश्यक है कि बॉडी बनाने को लेकर थोड़ा सावधान रहा जाए और ऐसे तरीके अपनाया जाए जिससे नुकसान होने की संभावना कम हो. आप आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण भी कमजोर महसूस कर सकते हैं जैसे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, अत्यधिक शराब पीना, भोजन छोड़ना, भावनात्मक तनाव और बहुत शारीरिक श्रम आदि. कई सरल घरेलू उपाय भी आपकी ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं और आपकी शक्ति को बहाल कर सकते हैं.

आइए इस लेख के माध्यम से हम बॉडी बनाने के घरेलू उपायों को जानें.

1. बादाम
बादाम में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में होती हैं जो आपको ऊर्जांवित करता हैं और शरीर में स्फूर्ति जगाती हैं. इसके अलावा बादाम में मैग्नीशियम की प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा स्रोतों में बदलने में एक अच्छी भूमिका निभाती है. मैग्नीशियम की हल्की कमी कुछ लोगों में कमजोरी का कारण हो सकती है.

2. अंडे
बॉडी बनाने के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक संतुलित आहार पर निर्भर रहें. अंडे प्रोटीन, आयरन, विटामिन ए, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन और पैंटोफेनीक एसिड जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हैं. हर दिन अंडे का सेवन करें. आप उबले हुए अंडे, पनीर या हरी सब्जियों के साथ एक आमलेट या एग सैंडविच खा सकते हैं.

3. दूध
दूध को महत्वपूर्ण बी विटामिन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है जो कमजोरी को कम करने के लिए जाना जाता है. इसके अलावा यह कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है जो आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है.

4. मुलेठी
मुलेठी एक और जड़ी बूटी है जो कमजोरी के विभिन्न लक्षणों से लड़ती है. यह जड़ी बूटी प्राकृतिक रूप से शरीर द्वारा निर्मित एड्रि‍नल हार्मोन को प्रेरित किया जिससे आपकी ऊर्जा और चयापचय को बढ़ावा मिलता है.

5. केला
केले सुक्रोज़, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज जैसे प्राकृतिक शर्करा का एक बड़ा स्रोत है जो आपको त्वरित और पर्याप्त ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं. इसके अलावा केले में पोटेशियम है, एक खनिज जिसे आपके शरीर को शक्कर से ऊर्जा में बदलने की जरूरत है. केले में मौजूद फाइबर आपके रक्त में ग्लूकोज स्तर को बनाए रखने में भी मदद करता है.

6. एक्सरसाइज
नियमित व्यायाम और सरल शारीरिक गतिविधियां आपकी सहनशक्ति को मजबूत करती हैं और आपकी मांसपेशियों की ताकत बढ़ाती है. सुबह का समय व्यायाम के लिए सबसे अच्छा होता है. दैनिक रूप से 15 मिनट के लिए वार्म अप और स्ट्रेचिंग आपको ताज़ा और ऊर्जावान रखेंगी. योग और ध्यान भी आपके ऊर्जा के स्तर को उच्च रखने के लिए एक बढ़िया तरीका है.

7. स्ट्रॉबेरी
स्ट्रॉबेरी पूरे दिन आपको ऊर्जावान रख सकते हैं. ये विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरे हुए हैं जो शरीर के ऊतकों की रिपेयर में मदद करते हैं, प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं और मुक्त कणों की क्षति से रक्षा करते हैं. इसके अलावा, आपको स्ट्रॉबेरी से मैंगनीज, फाइबर और पानी की एक स्वस्थ खुराक मिलती है.

8. मैंगो
मैंगो एक मीठा और रसदार फल है जिसमें एक अच्छी मात्रा में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं. आम आहार फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और तांबे का भी एक उत्कृष्ट स्रोत हैं. इसके अलावा, मैंगो में मौजूद लोहा शरीर में लाल रक्त कोशिका की संख्या को बढ़ाकर मुकाबला करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, मैंगो में स्टार्च होता है, जो कि चीनी में परिवर्तित होता है जो आपको तत्काल ऊर्जा प्रदान करता है.

9. पानी
निर्जलीकरण की वजह से थकान हो सकती है, इसलिए हाइड्रेटेड रहने के लिए बहुत सारा पानी, रस, दूध या अन्य तरल पेय पदार्थ पीते रहें. फलों के रस में विटामिन ए, स, और बी 1 आप को ऊर्जावान करते हैं.

10. एक्यूप्रेशर
यह एक स्पर्श चिकित्सा है जिसमें शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए शरीर के कुछ विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव का उपयोग किया जाता है. भौंह के बीच, कंधे की मांसपेशियों में लोअर नैक की साइड में 1-2 इंच, घुटने के नीचे, छाती के बाहरी भाग पर, नाभि के नीचे तीन उंगली की चौड़ाई के बिंदुओं पर दबाव डालने से सामान्य कमजोरी से छुटकारा पा सकते हैं.

11. आंवला
आंवला एक उच्च पौष्टिक फल है जो आपके ऊर्जा स्तर को सुधार सकता है. यह विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, लोहा, कार्बोहाइड्रेट और फास्फोरस का एक अच्छा स्रोत है. रोजाना सिर्फ एक आंवला खाने से आप अपनी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकते हैं.

12. कॉफी
कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क को सक्रिय करता है और आप में तत्काल ऊर्जा को बढ़ावा देता है. कॉफी पीने से कोई नुकसान नहीं होता है जब तक आप इसे कम मात्रा में पीते हैं. ऊर्जावान महसूस कराने के अलावा, यह आपके चयापचय दर में सुधार कर सकती है, धीरज बढ़ा सकती है, फोकस में सुधार कर सकती है और दर्द कम कर सकती है. प्रति दिन दो कप कॉफी से ज्यादा पीना न पिएं. इसके अधिक सेवन से चिंता और अनिद्रा जैसी जोखिम बढ़ सकते हैं.
 

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नाक की एलर्जी का घरेलू उपचार - Naak Ki Allergy Ka Gharelu Upchaar!

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नाक की एलर्जी का घरेलू उपचार - Naak Ki Allergy Ka Gharelu Upchaar!

आजकल कई तरह की एलर्जी देखने में आती हैं. इनमें से जो एलर्जी सबसे ज्यादा परेशानी पैदा करती हैं, वे आंख और नाक की एलर्जी हैं. जब किसी इंसान का ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरोधक तंत्र वातावरण में मौजूद लगभग नुकसानरहित पदार्थों के संपर्क में आता है तो एलर्जी संबंधी समस्या होती है. शहरी वातावरण में तो इस तरह की समस्याएं और भी ज्यादा हैं. नाक की एलर्जी से पीड़ित लोगों की नाक के पूरे रास्ते में अलर्जिक सूजन पाई जाती है. ऐसा धूल और पराग कणों जैसे एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में आने की वजह से होता है. नाक की एलर्जी मुख्य तौर पर दो तरह की होती है. पहली मौसमी, जो साल में किसी खास वक्त के दौरान ही होती है और दूसरी बारहमासी, जो पूरे साल चलती है. दोनों तरह की एलर्जी के लक्षण एक जैसे होते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम नाक की एलर्जी के कुछ घरेलू उपचारों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें.

नाक की एलर्जी के प्रकार-
* मौसमी एलर्जी को आमतौर पर घास-फूस का बुखार भी कहा जाता है. साल में किसी खास समय के दौरान ही यह होता है. घास और शैवाल के पराग कण जो मौसमी होते हैं, इस तरह की एलर्जी की आम वजहें हैं.
* नाक की बारहमासी एलर्जी के लक्षण मौसम के साथ नहीं बदलते. इसकी वजह यह होती है कि जिन चीजों के प्रति आप अलर्जिक होते हैं, वे पूरे साल रहती हैं.

मौसमी एलर्जी से बचाव-
जिन चीजों से आपकी एलर्जी बढ़ जाती है, उन सभी को आप खत्म तो नहीं कर सकते, लेकिन कुछ कदम उठाकर आप इसके लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं. साथ ही, एलर्जी पैदा करने वाले उन तत्वों से बचाव भी संभव है.
* बरसात के मौसम, बादलों वाले मौसम और हवा रहित दिनों में पराग कणों का स्तर कम होता है. गर्म, शुष्क और हवा वाला मौसम वायुजनित पराग कणों और एलर्जी के लक्षणों को बढ़ा सकता है. इसलिए ऐसे दिनों में बाहर कम आएं-जाएं और खिड़कियों को बंद करके रखें.
* अपने बगीचे या आंगन को सही तरीके से रखें. लॉन की घास को दो इंच से ज्यादा न बढ़ने दें. चमकदार और रंगीन फूल सबसे अच्छे होते हैं, क्योंकि वे ऐसे पराग कण पैदा करते हैं, जिनसे एलर्जी नहीं होती.

बारहमासी एलर्जी से बचाव-
पूरे साल के दौरान अगर आप एलर्जी से पीड़ित रहते हैं, तो इसका दोष आपके घर या ऑफिस को दिया जा सकता है. एलर्जी के लक्षणों को कम करने के लिए सबसे बढ़िया तरीका है कि आप अपने घर और ऑफिस को साफ-सुथरा रखें. इसके लिए हफ्ते में एक बार घर और ऑफिस की धूल झाड़ना अच्छा कदम है, लेकिन एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह काफी नहीं है. हो सकता है कि साफ सुथरी जगह होने के बावजूद वहां से एलर्जी पैदा करने वाले तत्व साफ न हुए हों. नाक की एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए घर को एक बेहतर जगह बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठाए जाने की जरूरत है.
* हर हफ्ते अपने बिस्तर को धोएं. इससे चादरों और तकियों के कवर पर आने वाले एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों से छुटकारा मिलेगा. अच्छा तो यह होगा कि इन्हें गर्म पानी में धोया जाए और फिर इन्हें गर्म ड्रायर में सुखाया जाए.
* जब आप बाहर जाते हैं तो पराग कण आपके जूतों से चिपक जाते हैं. इसलिए बाहर से आने से पहले पैरों को पोंछ लें या जूतों को बाहर ही उतार दें.
* कालीन और गद्देदार फर्नीचर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें.
* ऐसे गद्दों और तकियों के कवर का इस्तेमाल करें जिन पर एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों का असर न होता हो.
* अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, खासकर उन दिनों में जब पराग कण ज्यादा होते हैं.

कुछ घरेलू नुस्खे-
जिन लोगों को सर्दी के रोग हैं और हर सुबह उन्हें अपनी नाक बंद मिलती है, उन्हें नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का सेवन करना चाहिए. इससे उन्हें काफी फायदा होगा.
* सबसे अच्छा तरीका है बचाव. जिन वजहों से आपको एलर्जी के लक्षण बढ़ते हैं, उनसे आपको दूर रहना चाहिए.
* इसके लिए नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट से एक छोटी सी गोली बना लें, इसे शहद में डुबोएं और हर सुबह खाली पेट इसे निगल लें. अगले एक घंटे तक कुछ न खाएं, ताकि नीम का आपके शरीर पर असर हो सके. यह तरीका हर तरह की एलर्जी में फायदा पहुंचाता है, चाहे वह त्वचा की एलर्जी हो, भोजन की एलर्जी हो या किसी और चीज की.
* 10 से 12 काली मिर्च कूट लें. इन्हें दो चम्मच शहद में रात भर भिगोकर रखें. सुबह उठकर इसे खा लें और काली मिर्च को चबा लें. शहद में हल्दी मिला ली जाए तो वह भी अच्छा है. अगर आप सभी डेरी पदार्थों से बचकर रहते हैं तो अपने आप ही बलगम कम होता जाएगा.

जरूरी है सही तरीके से कपालभाति का अभ्यास-
एलर्जी की वजह से हो सकता है कि आपके द्वारा किए गए कार्यों की क्रिया बहुत ज्यादा प्रभावशाली न हो पा रही हो. जैसे - अगर नाक का रास्ता पूरी तरह नहीं खुला है और बलगम की ज्यादा मात्रा है तो क्रिया पूरी तरह से प्रभावशाली नहीं भी हो सकती है. अगर सही तरीके से इसका अभ्यास किया जाए, तो आपको अपने आप ही एलर्जी से छुटकारा मिल सकता है. नाक के रास्तों को साफ रखना और सही तरीके से सांस लेना एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. साफ नासिका छिद्र और श्वसन के स्वस्थ तरीके का बड़ा महत्व है. अभ्यास करते रहने से एक ऐसा वक्त भी आएगा, जब कोई अतिरिक्त बलगम नहीं होगा और आपका नासिका छिद्र हमेशा साफ रहेगा.

पथरी का होम्योपैथिक इलाज - Pathri Ka Homeopathic Ilaaj!

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पथरी का होम्योपैथिक इलाज - Pathri Ka Homeopathic Ilaaj!

आज पथरी का होम्योपैथिक इलाज संभव है. शरीर में पथरी बनने का कोई स्पष्ट कारण का तो पता नहीं चला है. पर शरीर में अतिरिक्त गर्मी बढ़ने से, गर्म जलवायु से, कम मात्रा में पानी पीने से इत्यादि कारणों से शरीर में जल की कमी होकर डिहाइड्रेशन की स्थिति हो जाती है जिससे पेशाब में कमी व सघनता हो जाती है. इस कारण शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो जाती है, कैल्शियम आक्सलेट पेशाब के माध्यम से बाहर नहीं हो पाता है, इसके अलावा फॉस्फेट, अमोनियम फॉस्फेट, मैग्नीशियम कार्बोनेट आदि तत्व किडनी के नली जमने लगते है जो धीरे-धीरे पथरी का रूप ले लेते हैं. पाचन प्रणाली के खराबी के कारण भी इस प्रकार के दोष होते हैं व पथरी बनते हैं.
हालांकि पथरी (stone) कई हिस्से में हो सकते हैं, जैसे किडनी में, मूत्राशय में, गोल ब्लाडर में, पित्ताशय में, पेशाब के नली में इत्यादि. पर किडनी में पथरी की रोग अधिक पाये जाते हैं. किडनी में पथरी बनने का मुख्य कारण गलत खानपान व कम पानी पीना है. कम पानी पीने से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है जिससे किडनी में पथरी बनते हैं.

पथरी के लक्षण-
पथरी के बनने पर पेट के निचले हिस्से में, पीठ में या कमर में तीव्र दर्द हो सकता है या चलने-फिरने पर भी दर्द हो सकता है. ये दर्द अचानक होते हैं जो धीरे-धीरे बढ़ कर असहनीय हो जाते हैं. चूँकि पथरी अलग-अलग स्थानों पर बन सकता है इसलिए दर्द का स्थान भी अलग-अलग हो सकता है. कभी-कभी पथरी का आकार छोटा रहने पर दर्द नहीं होता है जिससे पथरी होने का पता भी नहीं चलता है पर जब इसका आकार बढ़ जाता है तब या जब ये पेशाब के रास्ते में आ जाता है तब दर्द का एहसास होता है. पेशाब के रास्ता में पथरी आने पर अचानक भयंकर दर्द होता है और दर्द की तीव्रता बढ़ती जाती है जो जांघ, अंडकोष या महिलाओं में योनि द्वार तक चला जाता है. कभी-कभी मूत्रमार्ग में पथरी फँसने से पेशाब रुक जाता है या पेशाब में खून आने लगता है व पेशाब करते समय दर्द होता है. पथरी होने पर पेशाब का रंग बदल जाता है. पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या हल्का भूरा हो जाता है. किडनी में पथरी होने पर पेशाब करते समय दर्द भी होता है व जी मचलने तथा उल्टी की भी शिकायत होती है. पथरी का दर्द इतना भयंकर रहता है कि इसके वजह से मरीज न तो बैठ सकता है न लेट सकता है और न खड़ा ही रह सकता है. इस दर्द में एक बेचैनी सी रहती है.

पथरी से बचाव व इलाज-
पथरी से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए. भोजन में कैल्शियम व आक्सलेट युक्त पदार्थ का सेवन सीमित मात्रा में ही करनी चाहिए. पथरी होने पर टमाटर, मूली, भिंडी, पालक, बैगन व मीट का सेवन नहीं करना चाहिए. पथरी होने पर एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में इसे ऑपरेशन करके या ‘लिथोट्रिप्टर’ नामक यंत्र से किरण के माध्यम से गलाकर बाहर निकालते हैं. यह अत्यधिक महँगा इलाज है और इससे पथरी निकल तो जाती है पर इससे पथरी बनने की प्रवृति समाप्त नहीं होती है. पर होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति में कई ऐसे चमत्कारी दवाई हैं जिनका लक्षण के आधार पर सेवन करके बिना ऑपरेशन के दवाई द्वारा ही पथरी को निकालकर पथरी बनने के कारण को भी समाप्त किया जा सकता है. पथरी यदि छोटा (समान्यतः 3 मिमी से छोटा) रहता है तो दवाई के प्रयोग से ही यह आसानी से बाहर आ जाता है. पर पथरी बड़ा रहने पर होमियोपैथी दवा के साथ अन्य आधुनिक उपचार की भी जरूरत होती है. आइये पथरी का होमियोपैथिक इलाज से संबंधित कुछ दवाओं पर नजर डालें.

पथरी के इलाज के लिए होमियोपैथिक दवाई-
बर्बेरिस बल्गारिस (Berberis Vulgaris): - किडनी व पित्ताशय दोनों तरह की पथरी के लिए यह उत्तम दवा है. किडनी के जगह से दर्द शुरू होकर पेट के निचले हिस्से तक या पाँव तक दर्द का जाना, हिलने-डुलने या दबाव से दर्द बढ़ना, दर्द कम होने पर रोगी का दाहिने ओर झुकना, म्यूकस युक्त या चिपचिपा लाल या चमकदार लाल कण युक्त पेशाब होना, पेशाब में जलन होना, बार-बार पेशाब होना, पेशाब करने के बाद ऐसा महसूस होना जैसे कुछ पेशाब अभी रह गया हो, पेशाब करने पर जांघ या कमर में दर्द होना इत्यादि लक्षण में इस दवाई का सेवन करना चाहिए.
लाइकोपोडियम (Lycopodium): - पेशाब होने से पहले कमर में तीव्र दर्द होना, दायें किडनी में दर्द व पथरी होना, मूत्रमार्ग से मूत्राशय तक जानेवाला दर्द होना, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना, पेशाब में ईंट के चुरा जैसा लाल पदार्थ निकलना, किसी शीशी में पेशाब रखने पर नीचे लाल कण का जम जाना व पेशाब बिल्कुल साफ रहना, पेशाब धीरे-धीरे होना आदि लक्षणों में इस दवाई का सेवन करना चाहिए.
सारसापेरिला (Sarsaparilla): - बैठकर पेशाब करने में तकलीफ होना व बूंद-बूंद पेशाब उतरना जबकि खड़े होकर पेशाब करने में आसानी से पेशाब उतरना, पेशाब का मटमैला होना व पेशाब में सफेद पदार्थ निकलना, पेशाब के अंत में असह्य दर्द होना व गर्म चीजों के सेवन से यह दर्द बढ़ना आदि लक्षणों में इस दवाई का सेवन करना चाहिए.
कैल्केरिया कार्ब (Calcarea Carb): - यह दवा दर्द दूर करने का उत्तम दवा है. किडनी के पथरी में इसे दिया जा सकता है. मूत्र नली में पथरी हो या पथरी के जगह पर तीव्र दर्द हो, रोगी को खूब पसीना आ रहा हो आदि लक्षणों में इस दवा का प्रयोग किया जा सकता है.
ओसिमम कैनम (Ocimum Canum): - तुलसी पत्ता से बनने वाली इस औषधि में यूरिक एसिड बनने के प्रवृति रोकने की गुण है अतः यूरिक एसिड से बनने वाली पथरी में यह दवा लाभकारी होता है. पेशाब में लाल कण आता हो, दाहिना तरफ किडनी के जगह पर दर्द हो तो इस दवा का सेवन किया जा सकता है.

नोट: -
यहाँ पथरी के इलाज संबंधी कुछ होम्योपैथिक दवाई का उल्लेख किया गया है, जो जानकारी मात्र के लिए है. पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने चिकित्सक के देखरेख में ही इलाज कारायें व चिकित्सक के परामर्श से ही किसी भी प्रकार का दवाई का सेवन करें.
 

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खुजली का आयुर्वेदिक इलाज - Khujali Ka Ayurvedic Ilaaj!

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खुजली का आयुर्वेदिक इलाज - Khujali Ka Ayurvedic Ilaaj!

आज के प्रदूषित वातावरण में एलर्जी एक सामान्य समस्या बन गई है. इससे सभी लोग परेशान हैं. एलर्जी एक ऐसी समस्या है जो कभी भी किसी को भी हो सकती है. जहां तक बात है एलर्जी के लक्षणों की तो इसके सामान्य लक्षण हैं - बहती हुई नाक, गले में खराश, कफ, आंखों में खुजली और स्किन रैशेज. जो लोग मौसम के अनुसार एलर्जी से परेशान रहते हैं वो अपना बचाव ये समस्या शुरू होने से पहले कर सकते हैं.

आइए एलर्जी से निपटने के लिए कुछ घरेलु उपचार जानें.
1. बिच्छू बूटी-

बिच्छू बूटी बदलते मौसम के कारण होने वाली क्रोनिक एलर्जी के लिए बेहद प्रभावी है. यह प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन होने के कारण शरीर के हिस्टामिन के उत्पादन को बंद कर देती है जो आखिर में विभिन्न प्रकार के एलर्जी के लक्षणों से आराम दिलाती है. इससे राहत पाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में एक चम्मच सूखे बिच्छू बूटी की पत्तियों को डाल दें. इस मिश्रण को पांच मिनट तक उबलने के लिए रख दें. इसके बाद मिश्रण को छान लें और इसमें हल्का शहद जोड़ कर पी जाएँ. इस मिश्रण को दिन में दो से तीन बार पियें.

2. हल्दी-
हल्दी भी एलर्जी से छुटकारा दिलाने के लिए फायदेमन्द है, इसमें करक्यूमिन होता है जो एक सामान्य जुखाम के दवा की तरह काम करता है और एलर्जी के लक्षणों को दूर करने में सहायक है. इसके अलावा प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण हैं जो इसका इलाज मूल कारण से ठीक करते हैं. कांच के एक साफ जार में 6 चम्मच हल्दी पाउडर और शहद डालें. इस मिश्रण को अच्छे से मिला लें. एलर्जी के दौरान पूरे दिन में दो बार इस मिश्रण को एक एक चम्मच ज़रूर खाएं.

3. लहसुन-
लहसुन में प्राकृतिक एंटीबायोटिक होते हैं जो एलर्जी के लिए काफी प्रभावी है. लहसुन के एंटीवाइरल और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण डॉक्टर से आपको दूर रखते हैं. एक या दो हफ्ते के लिए रोज़ाना दो या तीन लहसुन की फांकें खाएं. अगर आपको लहसुन की गंध अच्छी नहीं लगती तो आप डॉक्टर से पूछने के बाद लहसुन के सप्लीमेंट्स को ले सकते हैं.

4. नींबू-
नींबू एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामिन है और विटामिन सी का एक एक अच्छा स्त्रोत भी है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं. ये एन्टिटॉक्सिन की तरह भी काम करता है. नींबू एलर्जी की समस्या के लिए बेहद फायदेमंद है. मौसम के अनुसार एलर्जी शुरू होने से पहले रोज़ाना सुबह रोज़ एक कप पानी में ताज़ा नींबू का जूस निचोड़कर पीना शुरू कर दें. जब तक एलर्जी सीजन चला नहीं जाता तब तक रोज़ाना इस मिश्रण को पीते रहें.

5. नमक का पानी-
नाक को प्रतिदिन सलाइन से साफ़ करने पर राइनाइटिस एलर्जी के लक्षणों को सुधारने में मदद मिलती है. इसके लिए पहले एक चम्मच बिना आयोडीन युक्त नमक और एक चुटकी बेकिंग सोडा लें और फिर इन्हे एक चौथाई गर्म पानी में डाल दें. इसे उबलने के बाद मिश्रण को ठंडा होने तक छोड़ दें. अब इस मिश्रण अपनी एक नाम में की दस बूँदें डालें. फिर इस मिश्रण को या तो नाक से निकाल लें या मुँह से निकालें.

6. गर्म पानी-
एलर्जी के स्त्रोत से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी से नहाएं और बाहर से आने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें. इसके साथ ही गर्म पानी से नहाने से आपको साइनस को खोलने में भी मदद मिलती है जिससे आप आसानी से सांस ले पाते हैं. गर्म पानी आपको राहत देता है और सोने में भी मदद करता है. तो ये है ड्रग फ्री तरीके जो आपकी एलर्जी का इलाज करने में मदद करेंगे. हालाँकि अगर लक्षण ज़्यादा बढ़ने लगे तो अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं.

7. पेपरमिंट-
पेपरमिंट में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं जो एलर्जी रिएक्शन को कम करते हैं. पेपरमिंट टी बनाने के लिए एक चम्मच ड्राई पेपरमिंट की पत्तियों को एक कप पानी में पांच मिनट तक उबलने दें. इस मिश्रण को छान कर ठंडा होने के लिए रख दें. इसको पीने से पहले इसमें एक चम्मच शहद भी मिला लें. जब तक आपको लक्षणों से निजात नहीं मिल जाता तब तक पूरे दिन में दो या तीन बार पेपरमिंट चाय का मज़ा लें.

8. शहद-
ज़्यादातर लोगों ने ये कहा है कि लोकल शहद खाने से उन्हें एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत मिलती है. मधुमक्खियों द्वारा बनने वाला लोकल हनी एलर्जी को दूर करने में मदद करता है. एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत पाने के लिए पूरे दिन में तीन या चार बार एक या इससे ज़्यादा चम्मच शहद ज़रूर खाएं. अच्छा परिणाम पाने के लिए एलर्जी सीजन शुरू होने से एक महीना पहला आप ये लोकल शहद खाना शुरू कर दें.

9. सेब का सिरका-
सेब का सिरका एलर्जी के लिए बहुत ही पुराना उपाय है. इसके एंटीबायोटिक और एंटीहिस्टामिन गुण एलर्जी रिएक्शन का इलाज करने में मदद करते हैं. ये एलर्जी के कारणों का इलाज करता है और जल्दी जल्दी आने वाली छीकों, बंद नाक, खुजली, सिर दर्द और कफ के लक्षणों को भी ठीक करता है. एक चम्मच सेब के सिरके को एक ग्लास पानी में मिलाएं. फिर इसमें एक चम्मच ताज़ा नींबू का जूस और एक या आधा चम्मच शहद मिलाकर पी जाएँ.

10. स्टीम से फायदा-
स्टीम से कई फायदे होते है उसमे एक फायदा एलर्जी के कई लक्षणों से राहत दिलाना है. स्टीम आपको साइनस से राहत प्रदान करता है और साथ ही नजल ट्रैक्ट से बलगम और अन्य इरिटैंट को भी साफ़ करता है. आप पानी को भाप निकलने तक उबाल लें. इसको उबालने के बाद तीन से चार बूँद नीलगिरी तेल, पेपरमिंट तेल, रोज़मेरी या टी ट्री तेल की डालें. अब अपने सिर के चारो तरफ तौलिये को रखें और दस से 15 मिनट तक गर्म पानी से भाप लें.
 

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सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

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सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

आज का वक्त बहुत बदल गया है. हर किसी को हर चीज़ अच्छी चाहिए जैसे अच्छी तनख्वाह, अच्छा घर, लक्सरी लाइफ आदि. यह सब पाने की होड़ में लोग संघर्ष में लगे है. उन्नति हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत में लगे है. इस लगातार किये जाने वाली मेहनत से हमें हर चीज़ तो बेहतर मिल रही है लेकिन यह हमारे स्वास्थ्य पर मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर पर गलत असर डाल रही है. हमारी इच्छाओं के चलते हम स्वयं को ज़रूरत से ज़्यादा तनावग्रस्त कर लेते हैं व शरीर को दिन रात काम करने वाली एक मशीन समझ लेते है. इस कड़ी मेहनत के चलते अति सामान्य रोग जो हम सभी को प्रभावित करता है, वह है गर्दन का दर्द. गर्दन का दर्द को चिकित्सा शब्दावली में ‘सर्विकालजिया’ कहा जाता हैं. यह दर्द लंबे अंतराल तक निरंतर एक ही मुद्रा में बैठे रहने, या पूरी रात ठीक से न सोने और कम व्यायाम करने के कारण होता है. कंप्यूटर पर काम करने वालो को यह समस्या बहुत ज्यादा होती है. इन लोगो को गर्दन और कंधे दोनों में दर्द होता रहता है.
मॉडर्न साइंस में सर्वाइकल स्पौण्डिलाइटिस का उपचार फिजियोथेरेपी और पेनकिलर टैबलेट हैं. इन तरीको से शीघ्र राहत तो मिल जाता है, लेकिन यह केवल अस्थायी राहत है. यदि इस समस्या का कोई स्थाई समाधान है तो वो है योग. योग इस बीमारी को जड़ से ठीक कर देता है. किन्तु एकदम से कठिन योग का अभ्यास करना सही नहीं है. कठिन योग करने से पहले कुछ आसान योग करने चाहिए. दरहसल हल्के फुल्के योग करने से धीरे-धीरे शरीर में लचक आ जाती है और कठिन योग के लिए शरीर तैयार हो जाता है. योग का एक सामान्य नियम यहीं है कि योग शुरू करते समय कुछ हलके फुल्के आसन करने चाहिए. इन हलके फुल्के आसनो से शरीर में उर्जा का संचार होता है और हमारा शरीर भी कठिन योगों के लिए तैयार होता है. यदि हम हल्के फुल्के आसन की जगह सीधे कठिन आसन शुरू करते है तो किसी प्रकार की परेशानियां भी आ सकती हैं.

* ग्रीवा संचालन
ग्रीवा संचालन आसन के अभ्यास से गर्दन से सम्बन्धित कई परेशानियों में लाभ मिलता है. जो लोगों को लम्बे समय तक गर्दन को एक ही स्थिति में रखकर काम करना होता है, उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए. इस आसन को आराम की मुद्रा में बैठकर किया जाता है. इस योग के दौरान गर्दन के मूवमेंट के अनुसार श्वास प्रश्वास करना चाहिए. इस योग क्रिया में श्वसन पर भी नियंत्रण करने का अभ्यास किया जा सकता है. ग्रीवा संचालन का नियमित अभ्यास करने से चेहरे पर कांति आती है और गर्दन सुडौल होती है. यह तनाव कम करता है और साथ ही शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम और सुकून देता है. शारारिक तनाव के अलावा यह मानसिक तनाव भी कम करता है. योग में बल की जरूरत नहीं होती है इसलिए ग्रीवा संचालन के दौरान गर्दन को अनावश्य रूप से तानना नहीं चाहिए.

* बालासन योग मुद्रा
बालासन योग मुद्रा का अभ्यास करने से गर्दन और पीठ के दर्द से निजाद मिलती है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले फर्श पर घुटने के बल बैठ जाएँ. इसके पश्चात सिर को ज़मीन से लगाएं. फिर अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और आपकी हथेलिया जमीं से छूती हुई होना चाहिए. अब अपने हिप्स को ऐड़ियों की ओर ले जाते हुए बहार की और सांस छोड़े. इस अवस्था में कम से 15 सेकेण्ड से 1 मिनट तक रहें. यह आसन का अभ्यास आपके कूल्हों, जांघों और पिंडलियों को लचीला भी बनाता है. यह आपके मन को शांत भी करता है.

* मत्स्यासन – फिश पोज़
मत्स्यासन करने के लिए सर्वप्रथम किसी समतल जगह पर चादर बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं. अब अपनी कुहनियों के सहारे सर तथा धड़ के भाग को जमीन पर रखें. अब इस स्थिति में पीठ का ऊपरी हिस्सा तथा गर्दन जमीन से ऊपर की और उठाए. हाथों को सीधा कर पेट पर रख लें. इस स्थिति में जितनी देर आसानी से रुक सकते हैं रुकें. फिर वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं.

* विपरीत कर्णी आसन
विपरीत कर्णी आसन आपको हल्के-फुल्के पीठ दर्द से आराम देता है. इस आसन में दीवार के सहारे पैर उपर करते है. सबसे पहले तो अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और अपने टाँगों को दीवार का सहारा देते हुए पैरों को छत की ओर उठा लें. अपनी बाहों को फैला कर शरीर के दोनों तरफ ज़मीन पर रख दें और आपकी हथेली आकाश की तरफ मोड़ कर खुली हुई होना चाहिए. कुछ सेकण्ड्स इस मुद्रा में रहे और गहरी लंबी श्वास लें और छोड़ें. यह योग क्रिया आपकी गर्दन के पिछले हिस्से को मालिश जैसा फायदा देता है और थकान को दूर कर पैरों की ऐंठन को दूर करता

* शवासन
इस आसन को सबसे बाद में करना चाहिए. यह आसन करने में सबसे सरल है. इसमें शरीर को ज़मीन पर स्थिर अवस्था में रखना है. सबसे पहले तो ज़मीन पर सीधे लेट जायें और हाथों को शरीर के दोनों ओर रख लें, पैरों को थोड़ा सा खोल दें. इस स्तिथि में आपकी हथेलिया आकाश की तरफ होनी चाहिए. मांसपेशियों तथा खुद को विश्राम देने के लिए शरीर को इस स्थिति में कम से कम 5 मिनट तक रखे.
 

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कपूर के फायदे और नुकसान - Kapoor Ke Fayde Aur Nuksaan!

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कपूर के फायदे और नुकसान - Kapoor Ke Fayde Aur Nuksaan!

आज कपूर हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चूका है. इसके औषधीय और गैर औषधीय दोनों तरह के इस्तेमाल हैं. चाइनीज और भारतीय प्राचीन काल से ही कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज और धार्मिक उद्देश्यों के लिए करते आ रहे हैं. उस समय उनका मानना था कि कपूर में गहरी चिकित्सा शक्तियां हैं लेकिन आज यह सिर्फ एक लोकप्रिय लोककथा न होकर हकीकत बन चुका है. आयुर्वेद में, कपूर को जलाना मानव मन और शरीर के लिए उपचार माना जाता है. कपूर सिनामोमस कैफ़ोरा नामक एक पेड़ से मिलता है. इस पेड़ के चीन, जापान में सबसे पहले उगाए जाने के संकेत मिलते हैं. भारत में यह देहरादून, सहारनपुर, नीलगिरि और मैसूर आदि में उगाया जाता है. आइए इसके फायदे और नुकसान को जानते हैं.

1. जोड़ों के दर्द में-
जोड़ों और मांसपेशियों के आसपास दर्द का सामना करने वाले लोग कपूर के इलाज से इसे ठीक कर सकते हैं. कपूर तेल एक वार्मिंग सेंसेशन पैदा करता है, जिसके परिणामस्वरूप नसों के विचलन होता है, जो आपको दर्द से राहत देता है. ऐंठन के लिए, आपको गर्म तिल के तेल में कपूर को मिक्स करके इस्तेमाल करने से राहत मिलती है.

2. खुजली में-
कपूर को खुजली वाली त्वचा में राहत प्रदान करने के लिए जाना जाता है. इसकी ख़ास बात ये है कि यह रोम छिद्रों द्वारा अवशोषित हो जाता है जिससे आपकी त्वचा को ठंडक मिलता है. इसके लिए एक कप नारियल तेल में पिसे हुए एक चम्मच कपूर को मिक्स करके इस मिश्रण को खुजली वाले क्षेत्र में 1-2 बार लगायें.

3. त्वचा को ठीक करने में-
कपूर आपकी त्वचा को टाइट करने के अलावा बैक्टीरिया निर्माण से मुक्ति पाने में भी मदद करता है. ये एक एंटी इंफेक्टिव एजेंट के रूप में कार्य करता है. एक अध्ययन के अनुसार कपूर तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिससे यह मुँहासे उपचार के लिए बहुत उपयोगी है.

4. मच्छरों भगाने के लिए-
यह एक प्राकृतिक मच्छर रिपिलन्ट. यह पारंपरिक रूप से पतंगों से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया गया है. अपने कमरे के कोने में एक कपूर टैबलेट जलाएं. इससे मच्छर दूर होते हैं.

5. जलने के उपचार में-
अगर आपकी त्वचा कही से हल्की सी जल जाएँ तो उसके लिए कपूर का उपयोग करें. यह जली हुई त्वचा को ठीक करने में मदद कर सकता है. न केवल यह आपको दर्द या जलन बल्कि घावों से मुक्त करता है. इसका नियमित आवेदन भी निशान को हल्का कर सकता है. इसका कारण यह है कि कपूर तेल तंत्रिका को उत्तेजित करता है, जिसके बदले में त्वचा को ठंडक मिलती है.

6. खाँसी के उपचार में-
कफ को दूर करने के लिए कपूर सबसे लोकप्रिय लाभों में से एक रूकी हुई छाती और नाक को साफ करने की क्षमता है. कपूर तेल में एक मजबूत गंध है जो एक भीड़भाड़ वाले श्वसन पथ को खोलती है. स्वीट आयल और कपूर का एक समान भाफ मिलाकर छाती पर धीरे से रगड़ें.

7. बालों के लिए-
नारियल के तेल के साथ कपूर की मालिश करने से स्वस्थ बाल विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है. हालांकि, नारियल के तेल ने बालों के नुकसान को रोकने, रूसी को कम करने और कंडीशनर के रूप में काम किया है.

8. कपूर के अन्य फायदे-
तुलसी के पत्तों के रस में कपूर को मिला कर दो दो बूँद को कान में डाल लें. इससे आपके कान का दर्द दूर होगा. कपूर, जायफल और हल्दी को बराबर मात्रा में मिला कर उसमें थोड़ा पानी डालें. इस मिश्रण को पेट पर लगायें और आपका दर्द कम हो जाएगा.

कपूर के नुकसान-
* इसे सीधे-सीधे त्वचा में लगाने से जलन हो सकती है इसलिए किसी भी वाहक तेल के साथ कपूर तेल को मिक्स करके इस्तेमाल करें.
* 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कपूर का उपयोग नहीं करना चाहिए.
* गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कपूर से बचना चाहिए.
* कपूर को मौखिक रूप से न लें क्योंकि यह अत्यधिक जहरीला होता है.

आँख के रोग - Aankh Ke Rog!

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आँख के रोग - Aankh Ke Rog!

आँखों से ही हम इस दुनिया के दृश्य रूप का अनुभव कर पाते हैं या फिर इसके अद्भुत सौंदर्य को निहार पाते हैं. इसीलिए आँखों को इवान ज्योति भी कहा जाता है. आँख के रोग होना आम तौर पर होने वाली परेशानियों में से एक है. इस समस्या के लिए कोई ख़ास उम्र नहीं होती है. ये किसी को भी कभी भी हो सकती है. ये रोग आपको जीवाणु, विषाणु, कवक या अन्य किसी प्रकार से भी हो सकता है. ये रोग आँखों के विभिन्न भागों में हो सकता है. हो सकता है कि ये एक साथ दोनों आँखों को प्रभावित कर दे. एक रोग होने के कारण ये एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को हो सकता है. इस दौरान आपको लालिमा, खुजली, सूजन, दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम आँखों के विभिन्न रोगों के बारे में जानें ताकि इस विषय में लोगों को जागरूक किया जा सके.
 

आँख के रोग के प्रकार

हमारे आँखों में होने वला ये रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. एक है कंजंक्टिवाइटिस जिसे हम आम तौर पर पिंक आई के रूप में भी जाना जाता है. इस रोग का असर बच्चों पर बहुत ज्यादा पड़ता है. दुसरे का नाम है स्टाई, इसके होने का कारण है जीवाणुओं का हमारी त्वचा से पलकों के हेयर फॉलिकल पर आ जाना. इसकी वजह से ये प्रभावित होता है.

 आँखों को के रोग के लक्षण
इसके लक्षणों में लालिमा, खुजली, सूजन, दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं. उपचार रोग के कारणों पर निर्भर करता है और इसमें आई ड्रॉप्स, क्रीम, या एंटीबायोटिक्स शामिल हो सकते हैं. नेत्र रोग आम तौर पर आत्म-सीमित होते हैं, और यह न्यूनतम इलाज या बिना इलाज के ठीक हो जाता है. कभी-कभी समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि यह अपने आप ठीक नहीं होता और दवाइयों और इलाज की आवश्यकता पड़ती है.

आँखों में होने वाले रोग का उपचार
अक्सर डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर और आपकी आँख की जाँच करके कंजंक्टिवाइटिस का निदान कर लेते हैं. हालांकि, कभी-कभी संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस और अन्य प्रकार के कंजंक्टिवाइटिस के निदान में भ्रम हो सकता है. संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस में डॉक्टर इसके लक्षणों और उपस्थिति से इसका निदान करते हैं. इसमें आंख को आमतौर पर एक स्लिट लैंप से देखा जाता है. संक्रमित रिसाव के नमूने को एकत्रित करके जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है ताकि रोग करने वाले जीव का पता लगाया जा सके.

लक्षण गंभीर पाए जाने पर
जब लक्षण गंभीर या बारम्बार होते हैं. जब रोग की वजह क्लैमाइडिया ट्रैस्कोमैटिस या नेइसेरिया गानोरिआ को माना जाता है. जब व्यक्ति को प्रतिरक्षा प्रणाली का एक नुकसान होता है. जब व्यक्ति को कोई आंख की समस्या होती है जैसे कि कॉर्नियल ट्रांसप्लांट या ग्रेव्स रोग के कारण आंख में फुलाव. स्वैब टेस्ट इस टेस्ट में स्वैब (जो कि रुई के फोहे जैसा दिखता है) के द्वारा आपकी संक्रमित आँख से चिपचिपे पदार्थ जिसे म्यूकस कहते हैं के एक छोटे से नमूने को इकट्ठा करके परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है ताकि कंजंक्टिवाइटिस के प्रकार की पुष्टि हो सके.

कंजंक्टिवाइटिस
इसका उपचार इसके होने की वजह पर निर्भर करता है. यदि आपको यह एक रासायनिक पदार्थ की वजह से हुआ है तो शायद कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाएं लेकिन यदि यह एक जीवाणु, वायरस, या एलर्जी से हुआ है, तो कुछ उपचार विकल्प हैं - बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस बैक्टीरियल रोग के लिए, एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है. एंटीबायोटिक दवा से लक्षण कुछ ही दिनों में चले जाते हैं. वायरल कंजंक्टिवाइटिस वायरल रोग के लिए कोई इलाज उपलब्ध नहीं है. यह रोग सात से दस दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है. तब तक, सिकाई करने से आपके लक्षणों में कमी आ सकती है.

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
एलर्जी के कारण हुए कंजंक्टिवाइटिस के इलाज के लिए आपके डॉक्टर शायद सूजन को रोकने के लिए आपको एंटीहिस्टामाइन देंगे. लोराटाडिन और डिफेनहाइडरामाइन एंटीहिस्टामाइन होते हैं जो केमिस्ट के पास आसानी से उपलब्ध हैं. वे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस सहित एलर्जी के लक्षणों को ठीक करने में मदद करते हैं. डॉक्टर आपको एंटीहिस्टामाइन आईड्रॉप्स या एंटी-इंफ्लेमटरी आईड्रॉप्स भी दे सकते हैं.
 

आँख की रोशनी बढाने का उपाय - Aankh Ki Raushani Badhane Ka Upay!

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आँख की रोशनी बढाने का उपाय - Aankh Ki Raushani Badhane Ka Upay!

आँखों के बिना सब कुछ अजीब लगता है. जाहिर है कई लोगों के पास प्राकृतिक रूप से और कुछ लोग दुर्घटनावश आँखें नहीं होतीं. इसलिए उनका जीवन थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसलिए हमें हमारी आँखों के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. आँखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत हिस्सा हैं. इसलिए आँखों की देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है. आँखों की बेहतर दृष्टि से हम अपने चारों ओर एक खूबसूरत एक विविधता से भरी दुनिया देखते हैं. आपको बता दें कि आँखों की माशपेशियां शरीर में सबसे अधिक क्रियाशील होती हैं. तो इसलिए आइए हम अपने आंखों की रौशनी बढ़ाने के

उपायों के तरीके जानें.
1. आंवला-
आँवला आँखों के बेहतर दृष्टि के लिए बहुत फायदेमंद है. यह रेटिना की कोशिकाओं के समुचित कार्य करने में सहायक होता है. आँवला विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट के साथ समृद्ध होता है और आँखों की देखभाल के लिए बहुत अच्छा है. आप आँवले का कच्चे रूप में या एक अचार के रूप में भी उपभोग कर सकते हैं. आप स्वस्थ आँखों के लिए एक गिलास आँवले का रस हर दिन पी सकते हैं.

2. सौंफ-
सौंफ एक अद्भुत महान जड़ी बूटी है जो प्राचीन रोम के लोगों द्वारा दृष्टि के लिए प्रयोग की गई थी. यह पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है जो दृष्टि में सुधार कर सकते हैं. रात का खाना खाने के बाद, आप हर रात कुछ चीनी के साथ सौंफ खा सकते हैं और इसके बाद गर्म दूध का एक गिलास ले सकते हैं.

3. पर्याप्त नींद-
यह हम सभी को पता है की आँखों को आराम देना कितना महत्वपूर्ण है. आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए की आँखों को अत्यधिक तनाव ना दें. आँखों को प्रयाप्त आराम देने के लिए प्रतिदिन 7-8 घंटे की एक अच्छी नींद लें. एक अच्छी नींद आँखों के तनाव से छुटकारा पाने और तरोताज़ा रखने में मदद करती है. रात में देर तक जागने से आँखों को नुकसान होता है.

4. ब्लू बेरी-
ब्लू बेरी एक महान जड़ी-बूटी है जो एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है. यह रेटिना को उत्तेजित करती है और दृष्टि में सुधार भी करती है. यह कई तरह के आँखों के विकार से छुटकारा दिलाती है. जैसे मांसपेशियों का अध यह फल विशेष रूप से अच्छा है और बेहतर नेत्र दृष्टि के लिए आहार में शामिल किया जा सकता है.

5. आँखों का व्यायाम-
एक आरामदायक स्थिति में बैठें और अपने अंगूठे के साथ अपने हाथ को बाहर खींछे. अब अपने अंगूठे पर ध्यान केंद्रित करें. हर समय ध्यान केंद्रित करते हुए, जब तक आपका अंगूठा आपके चेहरे के सामने लगभग 3 इंच तक ना आ जाए और फिर दूर करें जब तक आपका हाथ पूरी तरह से फैल ना जाए. कुछ मिनटों के लिए यह करें. यह व्यायाम ध्यान केंद्रित करने और आंख की मांसपेशियों में सुधार लाने में मदद करता है. एक और उपयोगी व्यायाम है, अपनी आँखो को बाएं किनारे से दाहिने किनारे तक ले जाएं, फिर ऊपर की तरफ भौं केंद्रित करें और फिर नीचे की ओर नाक की नोंक पर देखें.

6. सूखे मेवे-
सूखे मेवे और नट्स खाना भी आँखों के लिए फायदेमंद होता है. नट्स जैसे बादाम में ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन ई होता है जो आंखों के लिए अच्छा है. यह भूख को संतुष्ट कर जंक फूड की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.

7. हरी सब्जियां-
एक बहुत अच्छे नेत्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में पालक, चुकंदर, मीठे आलू, शतावरी, ब्रोकोली, वसायुक्त मछली, अंडा आदि अन्य खाद्य पदार्थ भी फायदेमंद होते हैं.

8. गाजर-
गाजर आँखों के लिए एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है, जिसमे विटामिन ए होता जो आँखों के लिए फायदेमंद है. अच्छे नेत्र स्वास्थ्य के लिए एक नियमित आधार पर गाजर का सेवन करते रहें. आप हर दिन एक गिलास गाजर के रस को भी पी सकते हैं.

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज - Asthma Ka Ayurvedic Ilaaj!

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अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज - Asthma Ka Ayurvedic Ilaaj!

अस्थमा श्वसन संबंधी रोग होता है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है. अस्थमा में श्वास नलियों की सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसनमार्ग संकुचित हो जाता है. श्वसनमार्ग के संकुचित हो जाने से सांस लेते समय आवाज़ आना, श्वास की कमी, सीने में जकड़न और खाँसी आदि समस्याएं होने लगती हैं.
इस लेख के माध्यम से हम आपको अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज बताने जा रहे हैं.

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज-


* आयुर्वेदिक दवाएं में कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता हैं और सुरक्षित है. यह अस्थमा के इलाज में बहुत हद्द तक कारगर है. कुछ आयुर्वेदिक दवाओं को शामिल कर के अस्थमा को ठीक किया जा सकता है जैसे कंटकारी अवालेह, अगस्त्याप्रश, चित्रक, कनाकसव इत्यादि.
* रात का खाना जितना हल्का हो सके लें व सोने से एक घंटे पहले ही खा लें.
* अस्थमा से बचने के लिए सुबह और शाम को टहलने के लिए निकलें. इसके अलावा योग में आसान भी कर सकते है जैसे ‘प्राणायाम’ और मेडिटेशन.
* अस्थमा के मरीज को मुश्किल एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए.
* हवादार कमरे में रहें और सोएं. एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की सीधी हवा से बचें.
* अस्थमा रोगी को ठंडे और नम स्थानों से दूर रहना चाहिए.
* स्मोकिंग,टोबैको और ड्रिंक करने से बचे. कमरे में किसी खुसबूदार चीजे जैसे इत्र अगरबत्ती या अन्य चीजों का प्रयोग ना करें.
* गजर और पालक के उचित अनुपात मरीन मिलकर रोजाना रस पीएं.
* जौ, कुल्थी, बथुआ, द्रम स्तिच्क अदरक, करेला, लहसुन को अस्थमा रोगी को नियमित रूप से लेना चाहिए.
* मूलेठी और अदरक को आधा चम्मच एक कप पानी में डाल कर पीएं.
* तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है, इसलिए अस्थमा के मरीजों को तुलसी का सेवन करना चाहिए.
* जो लोग इस रोग का सामना आकर रहे हैं, वह हर मौसम के आगमन पर पंचकर्म की नस्य या शिरोविरेचन की साहयता लें.
* यदि रात में अस्थमा का अटैक आ जाए, तो छाती और पीठ पर गर्म तिल के तेल का सेंक करें.
* घर में एक शीशी प्राणधारा की अवश्य रखें. उसमें अजवाइन का सत् होता है, जिसकी भाप दमा के दौरे में राहत देती है.
* एक चौथाई चम्मच सोंठ, छ: काली मिर्च, काला नमक एक चौथाई चम्मच, तुलसी की 5 पत्तियों को पानी में उबाल कर पीने से भी दमा में आराम मिलता है.
* एक चौथाई प्याज का रस, शहद एक चम्मच, काली मिर्च 1/8 चम्मच को पानी के साथ लें.

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