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L N AYURVEDA & KSHAR SUTRA CLINIC

  4.4  (26 ratings)

Ayurveda Clinic

B-4 Arvind Nagar, Opp.Central School Sceme gate no.-3 , Air Force Area, Jodhpur
1 Doctor · ₹200 · 2 Reviews
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L N AYURVEDA & KSHAR SUTRA CLINIC   4.4  (26 ratings) Ayurveda Clinic B-4 Arvind Nagar, Opp.Central School Sceme gate no.-3 , Air Force Area, Jodhpur
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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Proctologist.Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you de......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Proctologist.Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well.
More about L N AYURVEDA & KSHAR SUTRA CLINIC
L N AYURVEDA & KSHAR SUTRA CLINIC is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Motilal Sharma, a well-reputed Ayurveda, practices in Jodhpur. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 51 patients.

Timings

MON-THU, SAT-SUN
04:00 PM - 08:00 PM
MON-SUN
09:00 AM - 01:00 PM

Location

B-4 Arvind Nagar, Opp.Central School Sceme gate no.-3 , Air Force Area,
Air Force Area Jodhpur, Rajasthan - 342011
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Doctor in L N AYURVEDA & KSHAR SUTRA CLINIC

Dr. Motilal Sharma

BAMS, CERTIFICATE COURSE IN KSHAR-SUTRA SURGERY
Ayurveda
88%  (26 ratings)
6 Years experience
200 at clinic
₹200 online
Available today
09:00 AM - 01:00 PM
04:00 PM - 08:00 PM
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मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं|

BAMS, CERTIFICATE COURSE IN KSHAR-SUTRA SURGERY
Ayurveda, Jodhpur
मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं|

आज हम इस बात पर चर्चा करेंगें कि मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं -
. मल द्वार से बिना दर्द के बूंद-बूंद या धार रूप में लगातार या रूक रूक के खून आना 
. मल द्वार में जलन, चुभन, दर्द होना 
. बैठने में या बाइक चलाते वक्त दर्द होना
. मल का पतला या बद्ध कर आना, एक बार या बार-बार आना
. मल द्वार के चारो ओर किसी फोडे. या फुडिया का बार-बार बनना और फूटना और उसमें से पस या चिपचिपा पानी आना 
. रीड्ड की हड्डी के पास नासूर का बनना 
अगर इनमें से कोई लक्षण मिलते हैं तो यह जरूरी नही कि वो पाइल्स ही हो वो और कोई बीमारी भी हो सकती हैं
क्योंकि अक्सर ऐसा देखा गया हैं कि सामान्यतया अगर इनमे् से कोई लक्षण मिलता हैं तो रोगी चिकित्सक के पास जाता हैं तो वो हमेशा यही बोलता हैं कि मुझे पाइल्स की समस्या हैं और वो शर्म के कारण या अन्य किसी कारण वो चैक-अप नहीं करवाता हैं कभी कभी चिकित्सक भी बिना चैक-अप के पाइल्स समझ कर सीधा ट्रिटमेन्ट ही लिख देता हैं जिस कारण वो समस्या ठीक ना होकर या थोडे समय के लिये ठीक रहकर अगली बार विकराल रूप में प्रकट होती हैं वो कुछ भी हो सकती हैं.हो सकता हैं वो पाइल्स ना हो के फिशर हो.हो सकता हैं वो फिश्टूला हो.हो सकता हैं 
हो सकता हैं वो पिलोनिडल साइनस हो.या ये भी हो सकता हैं इनमें से एक भी ना होकर गुदामार्गगत केन्सर ही हो 
तो दोस्तो अगर ऊपर बतलाये लक्षण में से कोई भी परेशानी हो तो किसी अच्छे चिकित्सक से चैक-अप जरूर करवाये और उस समस्या का स्थायी समाधान करवायें 
क्योंकि कहा भी गया हैं रोग और कर्जा कभी ज्यादा समय नहीं रखना चाहिये! आइये चुने.स्वस्थ एवं आनन्दमय जीवन.आयुर्वेद के संग!

BAMS, CERTIFICATE COURSE IN KSHAR-SUTRA SURGERY
Ayurveda, Jodhpur
एक ऐसा आयुर्वेदिक चिकित्सा केन्द्र जहाँ विभिन्न प्रकार की बीमारियों का विश्वसनीय ईलाज संभव है -
1. आयुर्वेद प्राचीन क्षार-सूत्र चिकित्सा विधि तथा शास्त्रीय अनुभूत योगो द्वारा विभिन्न गुदागत रोगो का विश्वसनीय ईलाज -
# FISSURE IN ANO. (गुद परिकर्तिका -गुदा में कट. लगना, जलन, चुभन, कैंची से काटने सा दर्द होना-- LATEST CLOSED POSTERIOR SPHINCTERACTOMY TECHNIC द्वारा
# FISTULA IN ANO. (भगन्दर) - latest bypass Technic द्वारा multiples fistula treatment
#BLEEDING PILES(मस्सा, बवासीर)
# Anal stenosis (सनिरूद्ध गुद)- गुद द्वार का छोटा हो जाना
#RECTAL POLYP( गुदांकुर) - बच्चो में बिना दर्द के खून आना व मांस का बाहर आना
# RECTAL PROLAPSE (गुदविभ्रन्श)
#SENTINEL PILES- बार-बार फिशर बनने से मांस का बढना
# PRACTOCOLITIS
# HYDRANITIS SUPPURATIVA
2. आयुर्वेदिक शास्त्रीय अनुभूत योगो द्वारा विभिन्न त्वचागत रोगो (SKIN DISEASES) का विश्वसनीय ईलाज -
# VITILIGO (सफेद दाग /leucodrma)
# PSORIASIS (छाल रोग)
# creck foot( पादारि)
# scabies(पामा)
# Dark Pigmentosa Of face(व्यंग्य /झांइयॉं)
# Acne (यौवन पीडिका)
ANY OTHERS DISEASES
3. आयुर्वेदिक शास्त्रीय योगो द्वारा संधिगत रोगो/वात रोगो (JOINT DISEASES ) का विश्वसनीय ईलाज -
# oseteoarthritis (संधिवात)
# RHEUMATIC ARTHRITIS ( आम वात)
# GOUT (वात रक्त)
# एडी का दर्द (वात कंटक)
# Burning Foot(पाद दाह)
# Sciatica pain(गृध्रशी)
4. आयुर्वेदिक शास्त्रीय योगो द्वारा महिलाओं के रोगो का विश्वसनीय ईलाज -
# सफेद पानी (Leukorrhea)
# रक्त प्रदर ( metrorrhagia)
# नष्टार्त्तव(Amenorrhoea)
# कृच्छार्त्तव( Dysmenorrhoea)
5. अन्य विभिन्न प्रकार के रोगो का विश्वसनीय ईलाज आयुर्वेद शास्त्रीय योगो द्वारा -
#Chronic fever( जीर्ण ज्वर)
# Bronchial Asthma (श्वास रोग)
# Chronic Bronchitis (जीर्ण कास)
#(ACIDITY) अम्लपित्त
# गृहणी (sprue/IBS)
DR. MOTILAL SHARMA
B.A.M.S., CRAV in KSHAR-SUTRA(National Academy of Ayurveda, Ministry of health and family welfare,Dept.of ayush, govt. Of India, New Delhi)
GENERAL AYURVED PRACTITIONER &
CONSULTANT AYURVEDA PROCTOLOGIST

https://goo.gl/maps/76r744XdSq62

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Chronic Pilonidal Sinus

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Ayurveda, Jodhpur
Chronic Pilonidal Sinus

 SUCESS STORY OF 8 YRS.CHRONIC PILONIDAL SINUS PATIENT-

एक पुरूष रोगी जिनकी उम्र-32 वर्ष , जो विगत आठ साल से पिलोनिडल साइनस की समस्या से परेशान थे जिनका क्षार सूत्र विधि से ईलाज एल.एन.आयुर्वेद एवं क्षार सूत्र क्लीनिक-जोधपुर में दो महिने तक हुआ आज वो बिल्कुल स्वस्थ हो गये हैं ध्यान रहे उपयुक्त ईलाज सिर्फ क्षारसूत्र विधि से ही किया गया उस दौरान किसी प्रकार की दर्द निवारक या एन्टिबायोटिक का उपयोग नहीं किया गया ... !! विश्वसनीय आयुर्वेद एवं क्षार सूत्र क्लीनिक !! अगर कोई रोगी किसी प्रकार की गुदागत समस्या से परेशान हो और ठीक ना हो रहा हो तो एक बार जरूर सम्पर्क करे .

   पिलेनिडल साइनस क्या होता हैं इसते बारे में जानकारी-- PILONIDAL SINUS - ( रीड्ड की हड्डी के पास नासूर)- दोस्तो आज हम रीड्ड की हड्डी के पास होने वाले नासूर के बारे में चर्चा करेंगे .

परिचय(introduction)- pilonidal sinus एक ऐसा रोग हैं जिसमें रोगी के natal clefts के बीच mid sacrococcygeal line में एक या अनेक छिद्र बन जाते हैं जिसमें शुरू में itching होती हैं तथा बाद में वहां सें seropurulent discharge होता रहता हैं तथा रोगी को बैठने पर दर्द होता हैं इसे jeep disease भी कहते हैं

कारण(causes)- pilonidal sinus के बहुत से कारण हो सकते हैं जिनमें से प्रमुख कारण इस प्रकार हैं -

1. अधिक समय पर एक ही जगह पर बैठे रहना

2. साइकिल, मोटर साइकिल,गाडी का अत्यधिक चलाना या बैठना

3. Hairy व Fatty Body होना

लक्षण( symptoms)- 1. रीड्ड की हड्डी के पास एक या अधिक छिद्र बनना तथा उसमें से seropurulent foul discharge होना

2. बैठने पर दर्द होना

3. भारीपन लगना चिकित्सा - आयुर्वेद में इसकी एक मात्र चिकित्सा क्षार सूत्र ही हैं औषधि चिकित्सा से इसको ठीक करना मुश्किल हैं विभिन्न रोगियो में किये गये क्षार सूत्र चिकित्सा प्रयोग से ये सिद्ध हुआ हैं कि क्षार सूत्र चिकित्सा इसके उपचार की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा हैं 98.5 % cure rate हैं इस चिकित्सा की 

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औषधियो का राजा आंवला गुणधर्म

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औषधियो का राजा आंवला गुणधर्म

औषधियो का राजा"आंवला" के औषधिय गुणकर्म-
 नमस्कार दोस्तो आज हम आपको विभिन्न प्रकार की औषधिय गुणो से युक्त औषधियो का राजा और आयुर्वेद में अमृत कहे जाने वाले आंवला के गुणकर्म एवं विभिन्न प्रकार के रोगो में नुस्खो के रूप में प्रयोग के बारे में बतलाते हैं-

➡ औषधिय गुण-

  • आयुर्वेदिक के अनुसार, आंवला त्रिदोष नाशक होता है, यानी वात, पित और कफ़ को नष्ट करता है। शीतल प्रकृति, नेत्र, त्वचा, केश, फेफड़ों के लिए हितकारी, भूख बढ़ाने वाला, रक्त शोधक, मृदुरेचक, वृद्धावस्था दूर करने वाला, शरीर की गर्मी दूर करने वाला, चर्मविकार नाशक, स्मरण शक्ति, ओज, हृदय का बल और आयु बढ़ाने वाला भी होता है।
  • यूनानी मतानुसार आंवला आमाशय, मस्तिष्क एवं हृदय को बल देने वाला, पित्तशामक, शीतल, शोधक होता है। शीतल गुण के कारण रक्त की गर्मी और पित्त की तेजी को घटाता है। रूखे गुण के कारण रक्त का शुद्धीकरण करता है। गर्भाशय, नेत्रों, आमाशय, बुद्धि को तीव्र करना, उनके दोषों को दूर करना इसका विशेष गुण है।
  • वैज्ञानिक मतानुसार आंवला के रासायनिक तत्वों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके 100 ग्राम रस में 921 मिलीग्राम और गूदे में 720 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है, जबकि आर्द्रता 81.2, प्रोटीन 0.5, वसा 0.1, कार्बोहाइड्रेट 14.1, खनिज द्रव्य 0.7 प्रतिशत तथा कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, निकोटिनिक एसिडि, गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा (ग्लूकोज) भी पाया जाता है।
  • आँवले को आयुर्वेद में अमृत माना गया है और इसकी बहुत सारे गुणों को बहुत बिस्तार से बताया गया है | 

➡ विभिन्न प्रकार ती समस्यीओ में औषधिय रूप में प्रयोग-
 आप यहाँ जानेंगे की आँवले का प्रयोग घरेलु औषधि बनाने में कैसे प्रयोग किया जाता है और आप कैसे अपने स्वास्थ्य के रक्षा कर सकते हैं |

आंवले में सभी रोगों को दूर करने की शक्ति होती है, फिर भी यदि आंवले का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ नियमित रूप से सेवन किया जाय, तो ह्र्दय की बेचनी,धड़कन, कमजोरी, नेत्र ज्योति, वीर्य की दुर्बलता, दांतोंऔर मसूड़ों के विकार, केशों का कमजोर होना और झड़ना, रक्ताल्पता, श्वास रोग, विकार, पाचन शक्ति की खराबी, चर्म रोग,रक्तचाप की अधिकता, स्कर्वी, रक्त, पित्त, वमन, सुजाक, बहुमूत्र, दांत रोग जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है।

1. पेशाब में जलन होने पर: 
 हरे आंवले का रस 50 ग्राम, शहद 20 ग्राम दोनों को मिलाकर एक मात्रा तैयार करे | दिन में दो बार लेने से मूत्र पर्याप्त होगा और मूत्र मार्ग की जलन समाप्त हो जायेगी |

2. कृमि पड़ना – 
 खान–पान की गडबडी के कारण यदि पेट में कीड़े पड़ गए हो तो थोड़ा–थोड़ा आंवले का रस एक सप्ताह तक पीने से वे समाप्त हो जाते है |

3. गर्मी के विकार – 
 ग्रीष्म ऋतु में गर्मी की अधिकता के कारण कमजोरी प्रतीत हो, चक्कर आये, मूत्र का रंग पीला हो जाए तो प्रतिदिन सुबह के समय एक नाग आंवले का मुरब्बा खाकर ऊपर से शीतल जल पी ले गर्मी के विकार दूर हो जायेगें |

4. कट जाने पर – 
 किसी कारण शरीर का कोई अंग कट जाए और उससे खून निकालने लगे तो आंवले का ताजा रस लगा देने से रक्तश्राव बन्द हो जाता है कटी हुई जगह जल्द ठीक हो जायेगी |
5. विष–अफीम का असर खत्म करना – 
 आंवले की ताजा पत्तियाँ 100 ग्राम को 500 ग्राम पानी में उबालकर और छानकर पिलाने से शरीर में अधिक दिनों से रमा हुआ अफीम का विष भी शांत हो जाता है |
6. मुख, नाक, गुदा से या खून की गर्मी के कारण रक्तश्राव – 
 ऐसा होने पर ताजा आंवले के रस में मधु (शहद) मिलाकर रोगी व्यक्ति को पिलाना चाहिये |
7. नकसीर – 
 ताजा आंवले के सिथरे हुए रस की 3-4 बूदे रोगी के नथुनों (नासाछिद्रों) में डालें तथा इसी प्रकार प्रति 15-20 मिनट बाद नस्य देकर ऊपर को चढ़ाने को कहें, नकशीर बन्द हो जायेगी | साथ ही आंवले को भी भूनकर छाछ (मठ्ठा) या काँजी में पीसकर मस्तिष्क पर लेप करा देने से शीघ्र लाभ होगा |
8. बहुमूत्र – 
 आंवले के पत्ते का रस २०० ग्राम में दारूहल्दी घिसकर और मिलाकर पिलाने से बहुमूत्र व्याधि से लाभ हो जाता हैं |
9. मूर्च्छा – 
 पित्त की विकृति कारण हुई मूर्च्छा में आंवले के रस में आधी मात्रा गाय का घी मिलाकर, थोड़ा- थोड़ा दिन में कई बार देकर ऊपर से गाय का दूध पिला देना चाहिये | कुछ दिनों तक इसके इस्तेमाल से मूर्छा रोग हमेशा के लिए खत्म हो जाता है |
10. पीलिया, शरीर में खून की कमी – 
 जीर्ण ज्वरादि से उत्पन्न पाण्डु-रोग को दूर करने के लिए ताजे आंवले के रस में गन्ने का ताजा रस और थोड़ा सा शहद मिलाकर पीना चाहिए, इससे लाभ होगा |
11. मिरगी या अपस्मार – 
 ताजे आंवले के 4 किलो रस में मुलेठी 50 ग्राम तथा गोघृत 250 ग्राम मिला मन्दाग्नि पर पकाकर घृत सिद्ध कर ले | इस घृत के सेवन से मिरगी में लाभ हो जाता है |
12. अम्लपित्त, रक्तपित्त, ह्रदय की धड्कन, वातगुल्म, दाह – ताजे आवले का कपड़े से छना हुआ रस 25 ग्राम में सममात्रा में मधु मिलाकर (यह एक मात्रा है) प्रातः एवं सायं पिलाने से सभी व्याधियों में आशातीत लाभ होता है |

नेत्रों की लाली –
 (1) ताजे आँवले के रस को कलईदार पात्र में भरकर पकावें | गाढ़ा होने पर लंबी – लंबी गोलियां बनाकर रखा ले | इसे पानी में घिसकर सलाई से लगाते रहने से नेत्रों की लालिमा दूर हो जाती है | (2) आँख आना या नेत्राभिश्यन्द रोग की प्रारम्भिक अवस्था में भली प्रकार पके ताजा आँवले के रस की बूँद आँखों में टपकाते रहने से नेत्रों की जलन, दाहकता, पीड़ा व लालिमा दूर हो जाती है |
दाँत निकलना –
 बच्चों के दाँत निकलते समय आँवले के रस को मसूढ़ों पर मलने से आराम से और बिना कष्ट दाँत निकल आते है |

हिचकी, वमन, तृषा उबकाई –
 (1) आँवले के रस में शक्कर या मधु मिलाकर देने से पित्तजन्य वमन, हिचकी आदि बन्द हो जाती है | (2) किसी भी कारण से पित्त का प्रकोप हो और नेत्रों में धुधला सा छाने लगे तो आँवले के रस 20 ग्राम में सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहिये |

केश श्वेत हो जाने पर –
 ताजे आँवले उबाल, मथ, रस छानकर बचे गूदे में चतुर्थांश घी मिलाकर भून ले | भली प्रकार भून जाने पर उसमे सामान मात्रा में कुटी हुई मिश्री मिलाकर किसे कलईदार पात्र में या अम्रतावान में भर कर रखें | 20-20 ग्राम मात्रा सुबह-शाम मधु के साथ सेवन करके ऊपर से गाय का दूध पिए | शरीर पुष्ठ होकर असमय पके सफ़ेद बाल काले और चिकने हो जायेगें | यह बाजीकरण का बहुत अच्छा रसायन है |
 

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