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Harpeet Eye & Dental Care Centre and lasik laser surgery centre

Multi-speciality Clinic (Ophthalmologist & Dentist)

244-R, New Jawahar Nagar, Jalandhar- 144003 Jalandhar
2 Doctors · ₹100 · 1 Reviews
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Harpeet Eye & Dental Care Centre and lasik laser surgery centre Multi-speciality Clinic (Ophthalmologist & Dentist) 244-R, New Jawahar Nagar, Jalandhar- 144003 Jalandhar
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Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care....more
Our mission is to blend state-of-the-art medical technology & research with a dedication to patient welfare & healing to provide you with the best possible health care.
More about Harpeet Eye & Dental Care Centre and lasik laser surgery centre
Harpeet Eye & Dental Care Centre and lasik laser surgery centre is known for housing experienced Ophthalmologists. Dr. Harpreet Singh, a well-reputed Ophthalmologist, practices in Jalandhar. Visit this medical health centre for Ophthalmologists recommended by 90 patients.

Timings

MON-SAT
05:00 AM - 07:00 PM

Location

244-R, New Jawahar Nagar, Jalandhar- 144003
New Jawahar Nagar Jalandhar, Punjab - 144003
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Doctors in Harpeet Eye & Dental Care Centre and lasik laser surgery centre

Dr. Harpreet Singh

MS - Ophthalmology
Ophthalmologist
23 Years experience
Available today
09:00 AM - 02:00 PM
05:00 AM - 07:00 PM

Dr. Nancy Dhiman

BDS, Fellowship In Implantologist
Dentist
21 Years experience
100 at clinic
Available today
09:00 AM - 02:00 PM
05:00 PM - 07:00 PM
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लेसिक लेजर का खर्च - Lasic Lazer Ka Kharch!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लेसिक लेजर का खर्च - Lasic Lazer Ka Kharch!

जब आपकी दृष्टि कमजोर पड़ जाती है तो डॉक्टर आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस निर्धारित करता है जो शायद हर किसी को पसंद नहीं आता है. ऐसे में हम दुसरे विकल्प की तरफ देखते है जिसमे हमें सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है. वर्तमान समय में लेजर तकनीक से होने वाली सर्जरी बहुत उन्नत हो गयी है. इसकी सहायता से बिना किसी ज्यादा जोखिम के आप दृष्टि के समस्या से निजात पा सकते हैं. इस लेख में आपको लेज़र तकनीक सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. लेसिक लेजर या कॉर्नियोरिफ्रेक्टिव सर्जरी कॉन्टैक्ट लेंस हटाने के लिए दो तकनीक है. इससे जिन दोषों में चश्मा हटाया जा सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम लेसिक लेजर सर्जरी में होने वाले अनुमानित खर्च को जानें ताकि लोगों को इस संदर्भ परेशानी का सामना न करना पड़े.

लेसिक लेजर सर्जरी 3 प्रकार के होते है
* सिंपल लेसिक लेजर
* ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर
* सी-लेसिक या कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर

1. सिंपल लेसिक लेजर सर्जरी: - इस सर्जिकल प्रक्रिया में आँखों में लोकल एनेस्थीसिया डाला जाता है. इसके बाद लेजर से फ्लैप बनाया जाता हैं. इसके कट निरंतर कॉर्नियो को री-शेप करता रहता है. इस पूरे प्रक्रिया में लगभग 20-25 मिनट लगते हैं.

2. ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर सर्जरी: - यह तकनीक लगभग सिंपल लेसिक जैसा ही होता है. इसमें केवल एक ही फर्क होता है इसमें इस्तेमाल होने वाला मशीन ज्यादा एडवांस होता हैं.

3. सी-लेसिक: कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर सर्जरी: - यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है और इसके परिबाम बहुत बेहतर होते हैं. ओवर या अंडर करेक्शन नहीं होती और नतीजा सटीक होता है. मरीज को अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं होती. साइड इफेक्ट्स काफी कम होते हैं. महंगा प्रोसेस है यह. दोनों आंखों के ऑपरेशन पर 40 हजार तक खर्च आता है. कुछ अस्पताल इससे ज्यादा भी वसूल लेते हैं. आंख लाल होने, खुजली होने, एक की बजाय दो दिखने जैसी प्रॉब्लम आ सकती हैं, जो आसानी से ठीक हो जाती हैं.

कितना खर्च-
लेसिक लेजर सर्जरी के दौरान पुतली (कॉर्निया) को पुन: नए सिरे से आकार दिया जाता है. इसके परिणामस्वरूप मरीज चश्मा पहने बगैर स्पष्ट देख सकता है. आज ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी की मदद से लेजर के द्वारा यह विधि क ी जाती है. इस कारण यह विधि सटीक और लगभग त्रुटि रहित है. आमतौर पर यह सर्जरी 15,000 से 90,000 रुपये में करायी जा सकती है, हालांकि इसकी कीमत लेसिक सर्जरी के तरीके पर निर्भर करती है. लेसिक सर्जरी से मरीज लगभग 1 दिन बाद या कुछ घंटों बाद ही मनचाहा परिणाम प्राप्त कर सकता है. यह प्रक्रिया बहुत जल्दी खत्म हो जाती है और इसमें किसी टांके व पट्टी का प्रयोग नहीं होता. इसके अतिरिक्त यह एक पीड़ाहीन विधि है. दोनों आंखों का खर्च औसतन 30-40 हजार रुपये आता है. हालांकि कुछ प्राइवेट अस्पताल इससे ज्यादा भी लेते हैं. सरकारी अस्पतालों में काफी कम खर्च में काम हो जाता है.

कहां होता है लेसिक लेजर-
लेसिक लेजर सर्जरी तमाम बड़े प्राइवेट अस्पतालों और कुछ बड़े क्लिनिकों में भी हो सकता है. in सब के अलावा बड़े सरकारी अस्पतालों जैसे एम्स पीजीआई जैसे अस्पतालों में भी हो सकता है. इन जगहों पर इलाज बेहतर तरीकों के साथ रेट भी कम लगते हैं लेकिन लंबी लाइन होने की वजह से वेटिंग अक्सर ज्यादा होती है

लेसिक आई सर्जरी - Lasik Eye Surgery!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लेसिक आई सर्जरी - Lasik Eye Surgery!

जब आपकी दृष्टि कमजोर पड़ जाती है तो डॉक्टर आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस निर्धारित करता है जो शायद हर किसी को पसंद नहीं आता है. ऐसे में हम दुसरे विकल्प की तरफ देखते है जिसमे हमें सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है. वर्तमान समय में लेजर तकनीक से होने वाली सर्जरी बहुत उन्नत हो गयी है. इसकी सहायता से बिना किसी ज्यादा जोखिम के आप दृष्टि के समस्या से निजात पा सकते हैं. इस लेख में आपको लेज़र तकनीक सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. लेसिक लेजर या कॉर्नियोरिफ्रेक्टिव सर्जरी कॉन्टैक्ट लेंस हटाने के लिए दो तकनीक है. इससे जिन दोषों में चश्मा हटाया जा सकता है, वे निम्नलिखित हैं:

1. मायोपिया:
मायोपिया को निकट दूर दृष्टि भी कहा जाता है. इसमें किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बन जाता है, जिससे दूर का देखने में समस्या होती है. इसे ठीक करने के लिए माइनस यानी कॉनकेव लेंस की आवश्यकता पड़ती है.

2. हायपरमेट्रोपिया: हायपरमेट्रोपिया को दूरदृष्टि दोष के रूप में भी जाना जाता है. इस स्थिति में किसी भी चीज का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है, जिससे पास का देखने में समस्या होती है. इसे ठीक करने के लिए प्लस यानी कॉनवेक्स लेंस की जरूरत होती है.

3. एस्टिगमेटिज्म: इसमें आंख के पर्दे पर रोशनी की किरणें अलग-अलग जगह केंद्रित होती हैं, जिससे दूर या पास या दोनों तरफ की चीजें साफ नजर नहीं आतीं है.

कैसे करता है काम-
लेसिक लेजर की सहायता से कॉर्निया को इस तरह से बदल दिया जाता है की नजर दोष में जिस तरह के कांटेक्ट लेंस की जरुरत पड़ती है, वह उसी तरह से काम करने लग जाता है. इससे किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनने लगता है और बिना चश्मे लगाए सब कुछ साफ नज़र आने लगता है.

लेसिक सर्जरी के प्रकार-
लेसिक लेजर 3 प्रकार का होता है.
* सिंपल लेसिक लेजर
* ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर
* सी-लेसिक या कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर

सिंपल लेसिक लेजर-
इस प्रक्रिया में आँखों में लोकल एनेस्थीसिया इंजेक्ट किया जाता है. इसके बाद लेजर से आँखों में फ्लैप बनाते हैं. और कट निरंतर कॉर्नियो के आकार को दोबारा आकार देता है. इस पूरे प्रक्रिया में लगभग 20-25 मिनट लगते हैं.

फायदे-
1. इस सर्जरी की मदद से आँखों से चश्मा उतर जाता है और दृष्टि स्पष्ट हो जाती है.
2. इस सर्जरी में खर्च भी बहुत कम हो जाता है. इस सर्जरी को करने में दोनों आंखों के लिए लगभग 20 हजार रुपये खर्च आता है.

नुकसान-
1. हालाँकि, इस सर्जरी का इस्तेमाल ज्यादा नहीं होता है. अब इससे बेहतर तकनीक भी मौजूद हैं.
2. इस सर्जरी के बाद काफी समस्याओं का शंका बना रहता है.


2. ई-लेसिक या इपिलेसिक लेजर
यह प्रक्रिया तकरीबन सिंपल लेसिक के जैसा ही होता है. इसमें मूल अंतर मशीन का होता है. इसमें ज्यादा उन्नत मशीन इस्तेमाल की जाती हैं.

फायदे-
1. यह अच्छे परिणाम देते हैं और ज्यादातर मामलों में सफलता मिलती है.
2. मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते है.
3. जोखिम कम होती हैं.


नुकसान
1. सिंपल लेसिक के तुलना में थोडा महंगा होता है. इन दोनों आंखों के ऑपरेशन पर लगभग 35-40 हजार रुपये तक खर्च आता है.
2. छोटी-मोटी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि आंख लाल होना, चौंध लगना इत्यादि.
3. कभी-कभार आंख में फूलने जैसी समस्या भी आ सकता है.


3. सी-लेसिक: कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर
यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है और परिणाम बहुत बेहतर होते हैं. इसमें ओवर या अंडर करेक्शन नहीं होती और नतीजा सटीक होता है. इस प्रक्रिया के दौरान ज्यादा समय नहीं लगता है, जिसमे मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है. और इसके साइड इफेक्ट्स काफी कम होते हैं.

नुकसान
1. यह एक महंगी प्रक्रिया है. इसमें दोनों आंखों के ऑपरेशन पर करीब 40 हजार तक खर्च हो सकता है. कुछ अस्पताल इससे ज्यादा पैसे भी ले सकते हैं.
2. इसके साइड इफेक्ट्स में आंख लाल होने, खुजली, डबल विज़न जैसी समस्या आ सकती हैं, लेकिन यह आसानी से ठीक हो जाती हैं.

कुछ और खासियतें
1. आज कल कांटेक्ट लेंस या चश्मा हटाने के लिए ज्यादातर इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. सिंपल लेसिक सर्जरी मरीज को पहले से बने एक प्रोग्राम के जरिए आंख का ऑपरेशन किया जाता है, जबकि सी-लेसिक सर्जरी में आपकी आंख के साइज के हिसाब से पूरा प्रोग्राम बनाया जाता है.

2. सर्जन का अनुभव, काबिलियत, लेसिक लेजर से पहले और बाद की देखभाल की गुणवत्ता लेसिक लेजर सर्जरी के नतीजे के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है.

3. चश्मे का नंबर अगर 1 से लेकर 8 डायप्टर है तो लेसिक लेजर ज्यादा उपयोगी होता है.

4. आज-कल लेसिक लेजर सर्जरी से -10 से -12 डायप्टर तक के मायोपिया, +4 से +5 डायप्टर तक के हायपरमेट्रोपिया और 5 डायप्टर तक के एस्टिग्मेटिज्म का इलाज किया जाता है.

कैसे करते हैं ऑपरेशन-
इस ऑपरेशन में बहुत कम समय लगता है, इसे करने में ज्यादा से ज्यादा 10 से 15 मिनट तक का समय लग सकता है. इस सर्जरी के दौरान मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरुरत नहीं होती है. ऑपरेशन की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर आँखों को अच्छे से चेक करते हैं. इसके बाद ही सर्जरी करने का निर्णय लिया जाता है. जब ऑपरेशन करने का निर्णय लिया जाता है तो शुरू होने से पहले आँखों को आई-ड्रॉप के द्वारा सुन्न (एनेस्थिसिया) किया जाता है. फिर मरीज को कमर के बल लेटकर आंख पर पड़ रही एक टिमटिमाती लाइट को देखते रहने को कहा जाता है. अब एक विषेशरूप से तैयार किए गए यंत्र माइक्रोकिरेटोम की सहायता से आंख के कॉर्निया पर कट लगाकर आंख की झिल्ली को उठा देते हैं. हालांकि अब भी इस झिल्ली का एक हिस्सा आंख से जुड़ा ही रहता है. अब ऑलरेडी तैयार एक कंप्यूटर प्रोग्राम के द्वारा इस झिल्ली के नीचे लेजर बीम डालते हैं. लेजर बीम कितनी देर तक डालते रहना है इसे चिकित्सक जांच के दौरान ही पता कर लेते हैं. लेजर बीम पड़ने के बाद झिल्ली को वापस कॉर्निया पर लगा दिया जाता है और ऑपरेशन पूरा हो जाता है. यह झिल्ली एक-दो दिन में खुद ही कॉर्निया के साथ जुड़ जाती है और आंख नॉर्मल हो जाती है. मरीज उसी दिन अपने घर जा सकता है. कुछ लोग ऑपरेशन के ठीक बाद रोशनी लौटने का अनुभव कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर में सही विजन आने में एक या दिन का समय लग जाता है.

सर्जरी के बाद-
1. ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिन तक आराम करना होता है और उसके बाद मरीज नॉर्मल तरीके से काम पर लौट सकता है.
2. लेसिक लेजर सर्जरी के बाद मरीज को बहुत कम दर्द महसूस होता है और किसी टांके या पट्टी की जरूरत नहीं होती.
3. आंख की पूरी रोशनी बहुत जल्दी (2-3 दिन में) लौट आती है और चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस के बिना भी मरीज को साफ दिखने लगता है.
4. स्विमिंग, मेकअप आदि से कुछ हफ्ते परहेज करना होता है.
5. करीब 90 फीसदी लोगों में यह सर्जरी पूरी तरह कामयाब होती है. बाकी लोगों में 0.25 से लेकर 0.5 नंबर तक के चश्मे की जरूरत पड़ सकती है.
6. जो बदलाव कॉर्निया में किया गया है, वह स्थायी है इसलिए नंबर बढ़ने या चश्मा दोबारा लगने की भी कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन कुछ और वजहों, मसलन डायबीटीज या उम्र बढ़ने के साथ चश्मा लग जाए, तो अलग बात है.

कौन करा सकता है-
1. जिनकी उम्र 20 साल से ज्यादा हो. इसके बाद किसी भी उम्र में करा सकते हैं.
2. चश्मे/कॉन्टैक्ट लेंस का नंबर पिछले कम-से-कम एक साल से बदला न हो.
3. मरीज का कॉर्निया ठीक हो. उसका डायमीटर सही हो. उसमें इन्फेक्शन या फूला/माड़ा न हो.
4. लेसिक सर्जरी से कम-से-कम तीन हफ्ते पहले लेंस पहनना बंद कर देना चाहिए.

कौन नहीं करा सकता-
1. किसी की उम्र 18 साल से ज्यादा है लेकिन उसका नंबर स्थायी नहीं हुआ है, तो उसकी सर्जरी नहीं की जाती.
2. जिन लोगों का कॉर्निया पतला (450 मिमी से कम) है, उन्हें ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए.
3. गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन नहीं किया जाता.
विकल्प: चश्मा/कॉन्टैक्ट लेंस ऐसे लोगों के लिए ऑप्शन हैं.

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Oral Hygiene Tips!

BDS, Certificate of Speciality Training In Restorative Dentistry & Endodontics, Advanced Certificate Course In Aesthetic Dentistry
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Everybody Loves Cheese 
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Eye Checkup - Why It Is Necessary?

MD - Ophthalmology, MBBS
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Sight is one of our most important senses. To ensure that your vision is not compromised, regular eye examinations are essential. This is regardless of age and overall health because the only way to diagnose conditions in the eye in the early stages is with a comprehensive eye exam. By arresting them in the early stages, many eye disorders can be easily controlled and treated.

During a routine eye examination, the doctor will look into a number of aspects of your eye's health. An eye examination can also indicate serious health issues like diabetes, macular degeneration and glaucoma. Some of the conditions an eye doctor looks for during an eye exam are:

Refractive error
If you already have a prescription this will be checked. In other cases, the strength of the eye muscles is checked for near sightedness, far sightedness and astigmatism which can be corrected with lasik surgery, spectacles or lenses. The earlier a refractive error is corrected, the lower are its chances of increasing. When it comes to children, they often do not realize signs of vision deterioration and hence, an eye examination becomes essential.

Amblyopia
This is a condition where one eye has a much higher refractive error than the other or where the eyes are misaligned. If this is not treated in time, amblyopia can stunt vision in the affected eye and result in blindness.

Strabismus
Crossed or turned eyes are termed as cases of strabismus. This is caused by the misalignment of the eyes and can cause problems with depth perception. This can lead to amblyopia and eventual blindness if not treated in time.

Focusing and communicative problems between the eyes
An eye examination can also determine problems with focusing on objects. With children this can be a sign of underdeveloped focusing skills while in adults it can be a symptom of presbyopia or age related diminished focusing ability. Your doctor will also check how well your eyes work together. If they do not work in tandem, it can cause headaches, eye strains and problems with reading.

Diseases
By looking at the blood vessels and retina of the eyes, doctors can detect signs of high blood pressure, cholesterol etc. Leaks in the blood vessels or bleeding in the eyes can also be a sign of diabetes or swelling of the macula.

Age related conditions
As with the rest of the body, the eye tissues and muscles also degenerate with time. Cataract is one of the most common age related issues that affect the eyes.

My kid is nearly 4 years old. I see some cavity in her upper tooth. We use kidodent tooth paste and brush twice a day. We give her chocolate only once a week. Can you advise what may be the reason for this? And any treatment required for this? Please advise.

BDS , MDS
Dentist,
My kid is nearly 4 years old. I see some cavity in her upper tooth. We use kidodent tooth paste and brush twice a day...
Any cavity, if there, needs filling to stop the progression. Furthermore, as the cavity is in front region, filling will retain esthetics and hence child's confidence. Some times, even if you focus on diet and hygiene, cavities happen. But stay motivated for hygiene and healthy diet. Go to dentist every 6 months to get new cavities detected at earliest.

5 Home Remedies To Get Rid Of Teeth Discoloration!

BDS, Fellow of Academy of General Education (FAGE), Advanced Endotontic Course On Root Canal, Postgraduate in Aesthetic Dentistry
Dentist, Kolkata
5 Home Remedies To Get Rid Of Teeth Discoloration!

A sparkling set of shiny white teeth can make a smile more appealing and infectious. Yellow teeth can be extremely embarrassing and annoying. The important dental tissues that make up a tooth include the Enamel, Dentin, Cementum and the Pulp, of these four tissues, the enamel (the white and hard teeth surface) and the dentin (pale brown) are responsible for the tooth colour. Any damage to these two tissues bring about teeth discolouration and factors that contribute significantly towards yellowing of teeth include:

  1. Poor dental care and hygiene like improper and inadequate flossing and brushing techniques.
  2. Unhealthy lifestyle habits like chewing of tobacco and betel nuts, smoking, excessive consumption of alcohol, tea and coffee.
  3. Certain medical conditions and treatments (chemotherapy and radiation) can adversely affect the dentin and the enamel. Antihistamines are also known to stain the teeth. It is best to avoid mouth washes containing Cetylpyridinium Chloride.
  4. With age, the enamel tends to thin naturally exposing the dentin that lies underneath it.
  5. Fluoride intake in excess can stain and discolour the teeth.
  6. Yellow or discoloured teeth can also be genetic.

Yellow teeth, though frustrating, can be fully treated. The mode and success of the treatment is largely influenced by the extent of the teeth discolouration.

  1. Avoid smoking and chewing of tobacco as much as possible. Control the intake of drinks and foods that can stain and discolour your teeth.
  2. Practice healthy dental hygiene. Brush your teeth twice daily.
  3. Some whitening agents (over-the-counter) can be effectively used to treat yellow teeth.
  4. Dental veneers are a great way to deal with yellow teeth.
  5. For a healthy set of white teeth with pearly shine, visit your dentist every six months.

In addition, several natural and homemade remedies can also prove to be beneficial

  1. Nothing can treat yellow teeth more effectively than baking soda. Brushing your teeth with toothpaste mixed with baking soda (about a quarter teaspoon) can do the yellow teeth a world of good. Using a mixture of baking soda with vinegar (white), lemon juice and hydrogen peroxide is an effective natural remedy.
  2. A healthy practice to get rid of yellow teeth is to rub the teeth with orange peel every night.
  3. Rubbing the teeth with Strawberry paste will help to reduce the yellow stain greatly.
  4. The benefits of lemon are known to all. Brush your teeth with a mixture of lemon juice and salt. Wash it off after a few minutes and the yellow tinge will be a thing of the past.
  5. Charcoal, Apples and Basil leaves are powerful natural ingredients to treat yellow teeth.

Your smile is precious! Do not lose it to yellow teeth.

I have pyria problem. Got flap surgery done 2 times but still, puss in gums comes again. Pleae advise treatment.

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Please see a periodontist (gum specialist) for your problem if it persists despite repeated treatments.

How to remove the white coating from my tongue? I applied sea salt (as seen in a youtube video) on my tongue for two weeks and did not notice anything.

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