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Omni Hospitals Kothapet

Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Dermatologist & more)

#11-9-46, Kothapet X Road, Dilsukh Nagar Landmark : Opposite P V T Market Hyderabad
21 Doctors · ₹0 - 550
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Omni Hospitals Kothapet Multi-speciality Hospital (Pediatrician, Dermatologist & more) #11-9-46, Kothapet X Road, Dilsukh Nagar Landmark : Opposite P V T Market Hyderabad
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More about Omni Hospitals Kothapet
Omni Hospitals Kothapet is known for housing experienced Nephrologists. Dr. Srinivas, a well-reputed Nephrologist, practices in Hyderabad. Visit this medical health centre for Nephrologists recommended by 83 patients.

Timings

MON-SAT
09:30 AM - 08:00 PM

Location

#11-9-46, Kothapet X Road, Dilsukh Nagar Landmark : Opposite P V T Market
Kothapet Hyderabad, Telangana - 500035
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Doctors in Omni Hospitals Kothapet

Dr. Srinivas

MBBS, DNB - General Medicine
Nephrologist
21 Years experience
Unavailable today

Dr. Narender

MBBS, MS - General Surgery
General Surgeon
12 Years experience
350 at clinic
Available today
06:00 PM - 08:00 PM

Dr. N. Srinivas

MBBS, MD - Cardiology
General Physician
14 Years experience
Unavailable today

Dr. Santhosh B

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Urology
Urologist
18 Years experience
350 at clinic
Unavailable today

Dr. Purushotham Raju

MBBS, MD - Paediatrics
Pediatrician
9 Years experience
200 at clinic
Available today
02:00 PM - 08:00 PM

Dr. K.V. Venugopal Reddy

MBBS, MD, DM - Gastroenterology
Gastroenterologist
22 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Pavan Kumar Reddy

MBBS, MD - General Medicine
General Physician
20 Years experience
Unavailable today

Dr. Jayasimha Nagella

MBBS, DNB ( General Surgery ), Fellowship in Minimal Access Surgery
General Surgeon
15 Years experience
Unavailable today

Dr. Vikram Kodam

MBBS, MD - Pharmacology
General Physician
16 Years experience
250 at clinic
Available today
10:00 AM - 06:00 PM

Dr. B Srinivasa Rao

MBBS, DNB - General Medicine, DNB - Nephrology
Nephrologist
21 Years experience
450 at clinic
Available today
03:30 PM - 04:30 PM

Dr. Mastan Reddy

MBBS, MS - Neuro Surgery, M.Ch
Neurosurgeon
27 Years experience
450 at clinic
Available today
04:00 PM - 05:00 PM

Dr. Sharadha Nagaraj

MBBS, DGO
Gynaecologist
22 Years experience
250 at clinic
Unavailable today

Dr. Padma Kumari

MBBS, MD - Obstetrics & Gynaecology
Gynaecologist
27 Years experience
Unavailable today

Dr. U.P.Sharma

MBBS, DM - Neurology, Doctor of Medicine
Neurologist
18 Years experience
550 at clinic
Unavailable today

Dr. Srikanth K

MBBS, DNB (ENT), Diploma in Otorhinolaryngology (DLO)
ENT Specialist
23 Years experience
250 at clinic
Unavailable today

Dr. Vijay Bhaskar

MBBS, MD - Dermatology, Fellow of the American Academy of Dermatology (FAAD)
Dermatologist
15 Years experience
Unavailable today

Dr. Sham Sunder

MBBS, DNB - Orthopedics
Orthopedist
20 Years experience
Unavailable today

Dr. K V Ramakrishna

MBBS, Diploma in Medical Radio-Diagnosis
Radiologist
22 Years experience
250 at clinic
Available today
10:00 AM - 07:00 PM

Dr. Shyam Sunder Reddy

MBBS, DNB - Orthopedics
Orthopedist
20 Years experience
Unavailable today

Dr. G V Ramana

MBBS, DCH
Pediatrician
25 Years experience
200 at clinic
Unavailable today
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गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

गुलकंद अपने बेहतरीन स्वाद के कारण ज़्यादातर लोगों की पसंद है. जाहीर है आपमें से भी कई लोगों ने इसे खाया ही होगा. कई लोगों का आटो ये फेवरेट भी होगा. स्वाद में अच्छा लगने वाला गुलकंद आपको कई औषधीय पोशाक तत्वों से भी भर देता है. इसके इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है. इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में भी खूब किया जाता है. आपको बता दें कि गुलकंद, गुलाब की पत्तियों और शक्कर को मिलाकर बनाया जाता है. यह हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है इसलिए यह गर्मी से संबंधित कई समस्याएं जैसे सुस्ती, थकान खुजली आदि में इस्तेमाल किया जाता है. जिन भी लोगों को हथेली और पैरों में जलन की समस्या है वे भी इसे खाकर अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं. गुलकंद हमारे स्वास्थ्य से लेकर हमारे सौन्दर्य तक की समस्या को दूर करता है. आइए गुलकंद के फ़ायदों पर एक नजर डालते हैं.

1. प्रेगनेंसी के दौरान

आयुर्वेद के अनुसार, प्रेगनेंसी में गुलकंद के सेवन को सुरक्षित माना गया है. यह प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए दिया जाता है. गुलकंद मल को पतला कर देता है और इसमें मौजूद शुगर इंटेस्टाइन में पानी की मात्रा बनाए रखता है, जो कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है.

2. मुंह के अल्सर्स में
गुलकंद शरीर को शीतिलता प्रदान करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें शीतल गुण होते है. यह मुंह के छाले के लिए बहुत फायदेमंद है. यह मुंह के छालों के प्रभाव को कम करता है और साथ में यह छालों के कारण मुंह के जलन और दर्द को कम करने में मदद करता है.

3. त्वचा के लिए
हर दिन गुलकंद खाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और त्वचा बेजान नहीं दिखती है. यदि आप पानी कम पीते है जिसके कारण आपकी त्वचा बेजान हो रही है तो गुलकंद बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण इससे मुँहासे जैसी समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है. यह रक्त को साफ करता है, जिससे हमारी त्वचा का रंग भी सुधरता है और त्वचा की कई समस्याओं में फायदा
मिलता है.

4. सनबर्न में
गुलकंद में शीतल गुण होते है इसलिए इसका नियमित रूप से सेवन सनबर्न की समस्या से निजात दिलाता है. यह आपके बॉडी में अतिरिक्त गर्मी के प्रभाव को कम कर देता है.

5. पेट के लिए
वर्तमान समय में पेट में गैस की समस्या बहुत आम हो गयी हैं. कई लोग पेट की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए खाली पेट एंटी एसिड दवा लेते हैं. गैस के कारण हमें कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे गले में छाले, पेट में मरोड़, अपच मुंह और गले में छाले आदि. यदि हम रोजाना भोजन के बाद गुलकंद का उपयोग करते है तो इन सभी परेशानी से छुटकारा मिल जाएगी. गर्मी के दिनों में कई लोग पेट में जलन और पेट दर्द जैसी समस्या से परेशान होते है ऐसे में उनके लिए इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए गुलकंद बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. यह पेट में ठंडक प्रदान करता है. गुलकंद कब्ज जैसी समस्या से निजात दिलाने में उपयोगी है. इस में मौजूद गुण मल को पतला कर देता है और हमें मल त्यागने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है साथ में यह बवासीर के सूजन को भी कम करता है.

6. आँखो की समस्या में
गुलकंद आँखो की रोशनी बढ़ाने के लिए फायदेमंद है. यह कंजंक्टिवाइटिस के लिए अच्छी औषधि है. इनसब के अलावा यह आँखो में जलन की समस्या को भी दूर करता है.

7. वजन कम करने में
गुलाब में ड्यूरेटिक और लैक्सेटिव गुण पाए जाते है जो मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करते हैं. जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है तो शरीर में कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है जिससे वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. आर्युवेद में भी बहुत पहले से वजन कम करने के लिए गुलाब का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं तो गुलाब की कुछ 20 पंखुडियों को एक गिलास पानी में डालकर उबाले. आपको पानी को तब तक उबालें जब तक पानी का रंग गहरा गुलाबी न लगने लगे. अब इसमें एक चुटकी इलायची पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं. अब इस मिश्रण को छानकर दिन में दो बार लें. इसके सेवन से आपका वजन भी कम होता है और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है. गुलकंद में गुलाब का अर्क होता है. इस का नियमित उपयोग भी आप के वजन को कम करता है.

फिस्टुला का घरेलू उपचार - Fistula Ke Gharelu Upchar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
फिस्टुला का घरेलू उपचार - Fistula Ke Gharelu Upchar!

गुदा से जुड़ी बीमारी फिस्टुला को ही अङ्ग्रेज़ी में फिस्टुला कहते हैं. दरअसल बवासीर जब लंबे समय तक ठीक नहीं होता है तो यही पुराना होकर फिस्टुला का रूप ले लेता है. जाहीर है फिस्टुला के रूप में आ जाने पर बवासीर बहुत खतरनाक हो जाता है. इसलिए हमारा सलाह है कि आपको बवासीर को कभी नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए. यही नहीं फिस्टुला एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज़ यदि ज्यादा समय तक ना करवाया जाए तो कैंसर का रूप भी ले सकता है. यहाँ आपको बता दें कि इस कैंसर को रिक्टम कैंसर कहते हें. रिक्टम कैंसर कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है. हालांकि इस बात के सम्भावना बहुत ही कम होती है. इस बीमारी को आप नाड़ी में होने वाला रोग कह सकते हैं, जो गुदा और मलाशय के पास के भाग में स्थित होता है. फिस्टुला में पीड़ाप्रद दानें गुदा के आस-पास निकलकर फूट जाते हैं. इस रोग में गुदा और वस्ति के चारो ओर योनि के समान त्वचा फैल जाती है, जिसे फिस्टुला कहते हैं. इस घाव का एक मुख मलाशय के भीतर और दूसरा बाहर की ओर होता है. फिस्टुला रोग अधिक पुराना होने पर हड्डी में सुराख बना देता है जिससे हडि्डयों से पीव निकलता रहता है और कभी-कभी खून भी आता है. कुछ दिन बाद इसी रास्ते से मल भी आने लगता है. फिस्टुला रोग अधिक कष्टकारी होता है. यह रोग जल्दी खत्म नहीं होता है. इस रोग के होने से रोगी में चिड़चिड़ापन हो जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम फिस्टुला के विभिन्न इलाज के बारे में जानें ताकि इस विषय में जागरूक हो सकें.

1. चोपचीनी और मिस्री

फिस्टुला का इलाज चोपचीनी और मिस्री के सहयाता से भी किया जा सकता है. इसके लिए आपको इन्हें बारीक पीसकर समान मात्रा में इसमें देशी घी मिलायें. फिर इससे 20-20 ग्राम के लड्डू बना कर इसे सुबह शाम नियमित रूप से खाना होगा. ध्यान रहे इस दौरान आप नमक, तेल, खटाई, चाय, मसाले आदि न खाएं. क्योंकि इसे खाने से इस दवा का असर खत्म हो सकता है. यानि इलाज के दौरान आप फीकी रोटी को घी और शक्कर के साथ खा सकते हैं. इसके अलावा आप दलिया और बिना नमक का हलवा इत्यादि भी खा सकते हैं. यदि आपने नियमित रूप से इसका पालन किया तो लगभग 21 दिन में आपका फिस्टुला सही हो सकता है. आप चाहें तो इसके साथ सुबह शाम 1-1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को भी गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं.

2. पुनर्नवा
फिस्टुला के कई घरेलू उपचार हैं जिनसे इसे ठीक किया जा सकता है. इसके लिए आपको पुनर्नवा, हरड़, दारुहल्दी, गिलोय, हल्दी, सोंठ, चित्रक मूल, भारंगी और देवदार को एक साथ मिलाकर काढ़ा बनाएँ. फिर इस काढ़े को नियमित रूप से पियें तो सूजनयुक्त फिस्टुला में काफी लाभकारी साबित होता है. पुनर्नवा शोथ-शमन कारी गुणों से युक्त होता है.

3. नीम
नीम की पत्तियों का इस्तेमाल भी फिस्टुला के उपचार के लिए किया जाता है. इसके लिए इस पत्तियों को घी और तिल की 5-5 ग्राम की मात्रा में लें. फिर उसे कूट-पीसकर उसमें 20 ग्राम जौ का आटा मिलाकर उस पानी की सहायता से इसका लेप तैयार करें. अब इस लेप को किसी साफ कपड़े के टुकड़े पर फैलाकर फिस्टुला पर बांध लें. इससे काफी लाभ मिलता है.

4. गुड़
पुराना गुड़, नीलाथोथा, गन्दा बिरोजा और सिरस की एक समान मात्रा को थोड़े से पानी में घोंटकर इसका मलहम बनाएं. इसके बाद उस मलहम को कपड़े पर लगाकर फिस्टुला के घाव पर कुछ दिनों तक लगातार रखने से यह रोग ठीक हो सकता है.

5. शहद
फिस्टुला के इलाज के लिए शहद और सेंधानमक को एकसाथ मिलाकर इसकी एक बत्ती तैयार करें. फिर इस बत्ती को फिस्टुला के नासूर में रखें. यदि आप नियमित रूप से ऐसा करेंगे तो आपको इसका निश्चित लाभ मिलेगा.

6. केला और कपूर
एक पके केले और कपूर भी फिस्टुला के उपचार के लिए बहुत सहायक होता है. आप पके हुए केले के बीच में चीरा लगा कर चने के दाने के बराबर कपूर को रख दें और फिर इसको खाए और इसे खाने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद में कुछ भी नहीं खाना पीना चाहिए. यदि फिस्टुला बहुत पुरानी हो गयी हो और इस प्रकार की उपाय से सही नहीं होती है तो कृपया सर्जरी का सहारा लें.

7. भोजन और परहेज
आहार-विहार के असंयम से ही रोगों की उत्पत्ति होती है. इस तरह के रोगों में खाने-पीने का संयम न रखने पर यह बढ़ जाता है. अत: इस रोग में खास तौर पर आहार-विहार पर सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकार के रोगों में सर्व प्रथम रोग की उत्पति के कारणों को दूर करना चाहिए क्योंकि उसके कारण को दूर किये बिना चिकित्सा में सफलता नहीं मिलती है. इस रोग में रोगी और चिकित्सक दोनों को सावधानी बरतनी चाहिए.

गुर्दे से संबंधित समस्याएं - Gurde Se Sambandhit Samasyaen!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुर्दे से संबंधित समस्याएं - Gurde Se Sambandhit Samasyaen!

गुर्दा हमारे शरीर में खून की सफाई के लिए प्रयुक्त होने वाला दुसरे नम्बर का फ़िल्टर है. इसी से हमें गुर्दे का महत्व पता चल सकता है कि ह्रदय द्वारा पम्प किए हुए रक्त का 20 प्रतिशत किडनी द्वारा साफ़ किया जाता है. फिर इसमें से निकले विषैले और अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के जरिए बाहर कर दिया जाता है. दुर्भाग्य से हमें गुर्दे में होने वाले रोग की जानकारी इसके पहले चरण में नहीं हो पाती है. इसलिए हमें बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है. इस संबंध में जागरूकता के लिए हमें गुर्दे से संबंधित समस्याओं के लक्षणों की पहचान करनी पड़ेगी. आइए हम गुर्दे में उत्पन्न होने वाली समस्याओं के लक्षणों को जानें.

1. बार-बार पेशाब आना

किडनी में संक्रमण के कई लक्षणों में से एक बार-बार पेशाब आना भी है. इसकी वजह से आपकी यूरीन की मात्रा और आवृत्ति में पबदलाव आ सकता है. खासतौर से रात में यूरीन में ज्‍यादा वृद्धि हो सकती है. इसमें आपको कम या ज्‍यादा मात्रा में यूरीन पीले रंग के साथ भी हो सकता है. ये भी हो सकता है कि पेशाब करने में समस्या आए और ये समस्या लगातार बनी रहे.

2. हाथ पैर या टखने का सूजन
किडनी रोग की पहचान का ये भी एक मुख्य लक्षण है. जब किडनी संक्रमित हो जाती है तो शरीर से विषैले तत्‍व बाहर नहीं निकल पाते हैं. इसलिए इससे कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं. शरीर में इकठ्ठा होने वाले अतिरिक्त तरल पदार्थ हाथ, पैर, चेहरे और टखनों में सूजन का कारण बनते हैं.

3. पेशाब में रक्त या प्रोटीन का आना
जब पेशाब में खून आने लगता है तब तो हमें आसानी से पता चल जाता है. लेकिन पेशाब के जरिए प्रोटीन के बाहर आने का पता लगाना ज़रा मुश्किल है. इसके लिए आपको लगातार निरिक्षण करते रहना होता है. दोनों ही स्थितियों में आपको तुरंत चिकित्सक के पास जाकर उन्हें पूरी बात बतानी चाहिए.

4. भूख का कम लगाना या वजन घटना
हमारे शरीर को लगातार काम करते रहने के लिए उचित पोषण और ऊर्जा की जरूरत होती है. जाहिर है ये ऊर्जा और पोषण हमें भोजन के जरिए ही मिलता है. लेकिन यदि भूख ही न लगे तो इसका एक कारण किडनी की कोई बिमारी भी हो सकती है. इसलिए जरुरी है कि किसी डॉक्टर को दिखाएँ.

5. उच्च रक्त चाप
उच्च रक्तचाप तो अपने आप में एक समस्या है. लेकिन कई बार इसका कारण किडनी में रोग भी हो सकता है. दरअसल होता ये है कि शरीर की क्षमता में कमी आने से हमारा ह्रदय तंत्रिका तंत्र के विभिन्न कार्यों को करने के लिए तेजी से रक्त पम्प करना शुरू कर देता है. ऐसे में जब दिल ज्यादा काम करता है तो उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है.

6. त्वचा में रैशेज
जैसा कि हमने आपको बताया कि किडनी का काम भी खून से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना है. लेकिन जब किडनी में संक्रमण हो जाता है तो अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं आ पाते हैं. इसकी वजह से त्वचा पर चकत्ते और खुजली जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है.

7. थकान और सांस लेने में समस्या
शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते समय किडनी इरिथरोपोटीन नामक हार्मोन का उत्पन करता है. ऑक्सीजन को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में इस हार्मोन की ही भूमिका होती है. इसलिए जब किडनी में कोई समस्या आती है तो इरिथरोपोटीन का उत्पादन प्रभावित होता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन के वितरण के लिए जिम्मेदार लाल रक्त कोशिकाएं कम पड़ जाती हैं और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है. इसके साथ ही हमारा दिमाग, मसल्स और पूरा शरीर जल्दी ही थक जाते हैं. इसे रक्ताल्पता भी कहते हैं.

8. जी मितलाना और चक्कर आना
किडनी के काम न करने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के अधिकता हो जाती है. जिसकी वजह से जी मितलाना और उल्टी जैसी परेशानियाँ भी उत्पन्न होने लगती हैं. इसके अलावा रक्ताल्पता की वजह से भी चक्कर आने या एकाग्र न कर पाने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

9. मासपेशियों में ऐंठन
कई बार ऐसा भी हो सकता है कि किडनी में आने वाली परेशानियों की वजह से मांसपेशियों में गंभीर रूप से ऐंठन और दर्द उत्पन्न हो सकता है. ये दर्द शरीर के विभिन्न भागों में उत्पन्न हो सकता है.

10. टेस्ट
अंतिम और सबसे ज्यादा भरोसेमंद उपाय के रूप में आप इन लक्षणों के आधार पर टेस्ट करा सकते हैं. किडनी रोग में किडनी की कार्यक्षमता का अंदाजा लगाने के लिए क्रिएटिनिन के स्तर का पता लगाया जाता है. इसके लिए साधारण-सी जांच की जाती है. इसके अतिरिक्त पेशाब और स्‍क्रीनिंग के द्वारा भी किडनी के रोग की जांच होती है.
 

गुलाब जल का चेहरे पर उपयोग - Gulab Jal Ka Chehre Par Upyog!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुलाब जल का चेहरे पर उपयोग - Gulab Jal Ka Chehre Par Upyog!

गुलाब जल एक ऐसा सौन्दर्य प्रसाधन है जिसका इस्तेमाल अक्सर कई कार्यों में किया जाता है. इसके विभिन्न गुणों के आधार पर आप इसे निस्संदेह सौंदर्य के लिए जादू की औषधि भी कह सकते हैं. किसी भी प्रकार के चेहरे के लिए गुलाब जल समान रूप से उपयोगी है. चेहरे की त्वचा तैलीय, ड्राइ या नॉर्मल हो, गुलाब जल हर त्वचा के लिए सुंदरता को बढ़ाने के काम आ सकता है. गुलाबजल में बहुत सारे अच्छे गुण होते हैं जिनकी मदद से यह त्वचा की देखभाल के लिए एक बहुत अच्छा उत्पाद है. इसका प्रयोग कई सौन्दर्य उत्पादों में भी किया जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम गुलाब जल का चहर्रे पर उपयोग करने के विभिन्न कारणों पर एक नजर डालें ताकि इस विषय में लोगों की जानकारी बढ़ सके.

1. गुलाब जल मेकअप उतारने के लिए
गुलाब जल चेहरे से मेकअप उतारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. गुलाब जल में नारियल तेल की कुछ बूंदों को मिक्स कर लें और फिर रुई से अपना चेहरा साफ करें. यह मिक्सचर मेकअप को साफ करता है और साथ ही आपकी त्वचा को गहराई से साफ करने के लिए भी बहुत अच्छा काम करता है.

2. चेहरे की ताजगी के लिए
अपने चेहरे को साफ और चमकदार रखने के लिए गुलाब जल को अपने चेहरे पर स्प्रे करें. इसे आप मेकअप के उपर भी इस्तेमाल कर सकते है, यह आपके चेहरे को चमक प्रदान करेगा. आप रोजाना सुबह फ्रेश और हाइड्रेटेड रखने के लिए के लिए गुलाब जल का प्रयोग भी कर सकते है.

3. ग्लिसरीन और गुलाब जल है त्वचा क्लींजर
गुलाब जल का इस्तेमाल एक स्किन क्लींजर के रूप में भी किया जा सकता है. फेसवॉश से अपने चेहरे को अच्छे से धोने के बाद, ग्लिसरीन की कुछ बूंदों को 1 चम्मच गुलाब जल के साथ मिक्स कर लें और उसे अपने चेहरे पर लगाएँ.

4. गुलाब जल स्किन टोन के लिए
गुलाब जल स्किन टोन के लिए भी एक बेहतर प्राकृतक विकल्प है. ठंडे गुलाब जल में रुई को डुबोकर चेहरे पर लगाएँ. यह आपके स्किन को टोन कर में मदद करेगा. इसके हल्के कसैले गुण रोम छिद्र को टाइट और स्किन को टोन करने में मदद करते हैं. इस प्रकार यदि आप भी अपने चेहरे का स्किन टोन टाइट चाहते हैं तो आप गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

5. गुलाब जल दिलाए सन टैन से छुटकारा
सन टैन से छुटकारा पाने के लिए 2 बड़े चम्मच बेसन को गुलाब जल और नींबू के रस के साथ मिक्स करें और एक पेस्ट तैयार करें. इसे अब 15 मिनट तक प्रभावित जगह पर इस्तेमाल करें. सन टैन से छुटकारा पाने के लिए भी आप गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

6. गुलाब जल करे मुंहासों को दूर
मुहांसे से राहत पाने के लिए 1 चम्मच नींबू का रस और 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल को एक साथ मिलाएं और इसे प्रभावित त्वचा पर लगायें और इसे 30 मिनट तक रहने दें और उसके बाद ताजे पानी से धोएं. इसके अलावा आप मुलतानी मिट्टी में गुलाब जल को मिक्स करके भी चेहरे पर लगा सकते हैं.

अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

गेहूं का इस्तेमाल हम आटे के रूप में तो करते ही हैं लेकिन इसके साथ ही गेहूं को अंकुरित करके भी उपयोग में लाया जाता है. गेहूं को अंकुरित करने से इसके पोषक तत्वों को बढ़ाया या बदला जा सकता है. जाहीर है गेहूं को पूरे भारत सहित विश्व में भी किया जाता है. इससे कई सारी चीजें बनाई जाती हैं, जैसे की दलिया, कुकीज, रोटी, केक आदि. गेहूं को मैदा के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक भी माना गया है. इसलिए गेहूं एक बहुत ही महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. जिसे आसानी से पचाया भी जा सकता है. गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आदि प्रमुख हैं. अंकुरित गेहूं हमारे शरीर के उपापचय का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ विषैले पदार्थों को निष्प्रभावी भी करता है. यदि आप रोजाना अंकुरित गेहूं का सेवन करेंगे तो आपके शरीर को विटामिन, मिनरल्‍स, फाइबर, फोलेट आदि मिलेंगे जो कि आपके त्‍वचा और बालों के लिये फायदेमंद है. इसे खाने से किडनी, ग्रंथियां, तंत्रिका तंत्र की मजबूती और रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में मदद मिलती है. आइए अंकुरित गेहूं के फ़ायदों पर एक नजर डालें.

1. अंकुरित गेहूं के फायदे वजन कम करने में
अंकुरित गेहूं के सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म रेट भी बढ़ता है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. इससे शरीर की गंदगी बाहर निकलती है और रक्‍त शुद्ध होता है. अंकुरित भोजन शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है. यह शरीर में बनने वाले विषैले तत्वों को बेअसर कर, रक्त को शुध्द करता है.

2. पाचन संबंधी समस्याओं के निदान में
जिन लोगों को हर वक्‍त पाचन संबन्‍धी समस्‍या रहती है उनके लिये अं‍कुरित गेहूं अच्‍छा रहता है क्‍योंकि यह फाइबर से भरा होता है. यह अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाता है. अंकुरित खाने में एंटीआक्सीडेंट, विटामिन ए, बी, सी, ई पाया जाता है. इससे कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक मिलता है. रेशे से भरपूर अंकुरित अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाते हैं.

3. यौवन क्षमता को बढ़ाने में
अंकुर उगे हुए गेहूं में विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होता है. शरीर की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-ई एक आवश्यक पोषक तत्व है.

4. बाल और त्वचा को चमकदार बनाने में
यही नहीं, इस तरह के गेहूं के सेवन से त्वचा और बाल भी चमकदार बने रहते हैं. किडनी, ग्रंथियों, तंत्रिका तंत्र की मजबूत तथा नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी इससे मदद मिलती है. अंकुरित गेहूं में मौजूद तत्व शरीर से अतिरिक्त वसा का भी शोषण कर लेते हैं.

5. कोशिकाओं के शुद्धिकरण में
अंकुरित गेहूं के दानों को चबाकर खाने से शरीर की कोशिकाएं शुध्द होती हैं और इससे नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है. अंकुरित भोज्य पदार्थ में मौजूद विटामिन और प्रोटीन होते हैं तो शरीर को फिट रखते हैं और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है.

6. शरीर की शक्ति बढ़ाने में
अंकुरित मूंग, चना, मसूर, मूंगफली के दानें आदि शरीर की शक्ति बढ़ाते हैं. अंकुरित दालें थकान, प्रदूषण व बाहर के खाने से उत्पन्न होने वाले ऐसिड्स को बेअसर कर देतीं हैं और साथ ही ये ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ा देती हैं.

7. हड्डी के इलाज में
गेहूं का इस्तेमाल हड्डी दर्द के इलाज के लिए कर सकते हैं. क्योंकि गेहूं में कैल्शियम की प्रचुरता होती है. और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. इसलिए गेहूं का सेवन हड्डी दर्द के इलाज में उपयोगी साबित होता है.

8. कब्ज दूर करने में
कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए अंकुरित गेहूं का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाया जाने वाला प्रचुर मात्रा में फाइबर हमारे पेट की विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाता है. जिसमें कब्ज भी है.

9. शुगर के उपचार में
गेहूं का उपयोग हम शुगर जैसी बीमारियों के उपचार में भी करते हैं. शुगर के मरीजों के लिए गेहूं एक अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करें तो आपको शुगर की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है.

10. कैंसर के उपचार में
गेहूं हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है. इसका कारण है, गेहूं में पाया जाने वाला विटामिन ए और फाइबर. विटामिन ए और फाइबर हमारे शरीर से कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है.

11. उच्च रक्तचाप के लिए
उच्च रक्तचाप आज आम बीमारी हो गई है. यदि आप उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको मैदा का त्याग करके गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए. इससे रक्तचाप को नियंत्रित रहने रखने में मदद मिलती है.

12. सांसों की बदबू दूर करने में
कई बार मुंह से अनावश्यक बदबू आनी शुरु हो जाती है. जिससे कि कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो आपको गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए.

13. थायराइड के उपचार में
गेहूं के उपयोग से हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने दिनचर्या के भोजन में गेहूं को शामिल करना चाहिए.

14. गुर्दे की पथरी में
किडनी स्टोन जिसे गुर्दे की पथरी भी कहा जाता है, के उपचार के लिए गेहूं का नियमित सेवन फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाए जाने वाले तत्वों में किडनी स्टोन को गलाने की क्षमता होती है.

15. प्रोटीन के स्रोत और खून की कमी दूर कने में
गेहूं प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है. विशेष रूप से अंकुरित गेहूं. यदि आप नियमित रूप से अंकुरित गेहूं का सेवन करें तो आपके शरीर में प्रोटीन की कमी का सामना कभी नहीं करना होगा. कई लोगों को खून की कमी यानी कि एनीमिया हो जाती है. लेकिन गेहूं के सेवन से इसे दूर किया जा सकता है. क्योंकि गेहूं शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण में मदद पहुंचाता है.

16. हृदय विकारों से बचाने में
गेहूं के सेवन से हम हृदय से संबंधित तमाम विकारों से बच सकते हैं. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करते हैं. तो आपका दिल स्वस्थ और मजबूत रहेगा.

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Care Givers - The Support System One Needs!

PhD - Clinical Psychology, Diploma in Clinical and Community Psychology, MA - Clinical Psychology, BA - Psychology
Psychologist, Delhi
Care Givers - The Support System One Needs!

Family members are the primary caregivers of persons with mental illnesses. The family caregiver plays multiple roles in the care of persons with mental illness, including taking day-to-day care, supervising medications, taking the patient to the hospital and looking after the financial needs. 

The family caregiver also has to bear with the behavioral disturbances in the patient. Thus, the family caregiver experiences considerable stress and burden and needs help in coping with it. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden.

 An unhealthy coping style is likely to adversely affect the care giving function. Hence, it is important to take care of the needs of family caregivers. The caregivers caring for their patient with mental illness feel stressed, anxious and low since the illness tends to be chronic and demanding. In the long run, there may occur burnout and emotional exhaustion. The caregivers feel isolated from the society, both due to the restriction of their social and leisure activities, as well as the social discrimination and stigma attached to the mental illnesses. 

Most caregivers take up the caring role in the absence of any significant knowledge about the illness. The role and demands are incorporated within the regular family responsibilities. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden of caregiving. A lot of trial and error may be involved in coping. 

Coping mechanisms of the caregiver: It is important to understand caregivers’ coping mechanisms for tackling burden because it affects caregivers’ day-to-day functioning. The burden is a constant source of stress, and how the caregivers cope with it, affects the course of illness. The burden and the coping methods also influence the physical and mental health of the caregiver and hence their further efficacy as a caregiver.

The coping strategies can be broadly grouped into two groups: Emotion-focused and problem focused. ·    

 1. The emotion-focused strategies aim to diminish the negative emotional impact of the stressor, and include avoidance, denial, fatalism, or looking to religion. The emotion-focused coping has been reported to be associated with the perception of a higher burden 

2. The problem focused coping refers to direct actions, which individual undertakes to change the situation. These include problem-solving or seeking social support to resolve the stress of care giving. Problem-focused and fewer emotion-focused coping strategies lead to reduced perception of burden. Problem-solving coping has been reported to be associated with better functioning

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Being Feminine - A Gift!

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist, Gurgaon
Being Feminine - A Gift!

Every woman is given nature's gift of being feminine. However, the many roles of a woman take a toll on her health and body.
Pregnancy, childbirth, hormonal changes all create challenges for her to maintain her youthfulness. 
So whether it is a recurrent urinary and vaginal infection, vaginal looseness, unable to enjoy your sexual life or loss of control over urine and urine leakage, don't be shy or embarrassed.
O shot/ PRP treatments along with laser techniques are now available which can cure these issues quickly and discreetly. 
 

Some benefits of this are:
1. Improved pelvic/gynecological health
2. Better immunity against vaginal and urinary tract infections
3. Vaginal tightening
4. Better control over urine
5. Improved aesthetics and looks of your private parts
6. Better experience during lovemaking

So girls, go ahead and talk to your gynecologist about these unspoken issues and reclaim your confidence.

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What Is Emotional Quotient (EQ)?

Ph. D - Psychology
Psychologist, Delhi
What Is Emotional Quotient (EQ)?

Emotional Intelligence means using emotions and thinking together – it’s about balance. In layman’s words, it means being smarter with feelingsEmotional Quotient (EQ) means knowing and managing your own emotions and recognizes and manages other people’s emotions and motivates yourself too. It helps to manage relationships so that a person can achieve personal and professional goals through the use of other people.

EQ mainly represents personal and social competence.

Personal Competence: It means knowing your emotions means Self-awareness about how you feel. It helps to access your emotional state. It has three aspects which includes

  • Self-Assessment-means awareness about your positive and negatives, strengths and weaknesses.
  • Self Confidence- to be positive and secure and assured whatever situation you are.
  • Self-Management- to understand and control your emotions so that they don’t control you i.e. self-control which means maintaining positivism in the face of the problematic. The people who excel in it can bounce back far more quickly from life’s setbacks and disappointments.

Social Competence: It means how well you manage your relationship with others, including their emotions. It has two concepts.

  • Social Awareness-means understanding the emotions of those people around you and empathizes with others and aware about what is affecting them.
  • Social Management- by using the awareness of owns emotions and others to build a healthy relationship. It’s a way to communicatepersuade and lead others, whilst being direct and lowest without alienating People who excel in these skills do well at anything that relies on interacting smoothly with others.

The Four Fundamental Aspects of Emotional Intelligence are:-

  • Recognizing emotions
  • Understanding emotions
  • Regulating emotions
  • Using emotions

Emotional Quotient (EQ) is more important than Intelligence Quotient (IQ). It is more important for personal and professional success. The research found that IQ had little relation to success at work and in the rest of their lives. Once you are established in some particular work or job/ life, success is more likely to depend on your ability to persist in the face of difficulty and to get along well with others. It can be remedied to a great extent.  It represents a habit and response that can be improved with the right effort.

 

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Role Of Balanced Diet For Healthy Hair!

Dermatologist
Dermatologist, Noida
Role Of Balanced Diet For Healthy Hair!

Food is important for the health and growth of your hair as well, like every other body part. The only difference is that you have to supply the food to the hair follicles before the hair strand grows since once it grows out it is nothing but a dead cell and nothing can make the hair thicker or straighter or healthier. But a healthy diet can keep the hair follicles nourished and the scalp healthy thus preventing hair fall and other various ailments that cause hair fall.

Just like your skin, your hair shows damage through dieting too. Just that the skin shows immediately and the hair to show the extent of damage would take longer. But nevertheless, a crash dieting or an unhealthy lifestyle would surely take a toll on your hair too along with your skin. There are other reasons for unhealthy hair too like smoking excessively, drinking excessively, keeping your hair unclean and so on. But maintaining a healthy diet throughout would help in combating these much more effectively than any cosmetic products ever can.

There are many food items that help in healthy hair growth. Taking just any food that is regarded as healthy will not help. You would have to know exactly what the ingredients are that are the building block of healthy hair and in which food items you would get these ingredients. You have to then include these food items into your daily diet plan. For instance, protein is the most important ingredient that aids in healthy hair growth. The reason is that the hair strand is mostly made of protein and hence a protein-rich diet would ensure that your hair stand is strong such that it does not break easily.

 A healthy scalp is necessary for healthy hair too and for a healthy scalp, you would need a diet rich in iron, vitamin E and some essential minerals like copper, selenium and magnesium. Vitamin D is also important. You would get Vitamin D through the sunlight but remember that too much sunlight can damage the hair instead of supplying it with vitamin D. For protein, minerals and vitamin E, you should take ample amounts of fishes like salmon, eggs, lean beef; vegetables like spinach as well as lentils too.

It is important though that you consult a good doctor first before taking all the above-mentioned food items at once. Your doctor can plan out a balanced diet for you.

 

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