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Dr. Kiran Doshi

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Dr. Kiran Doshi is a renowned Gynaecologist in Somajiguda, Hyderabad. You can consult Dr. Kiran Doshi at Dr Kiran Diabetics Clinic in Somajiguda, Hyderabad. Don’t wait in a queue, book an instant appointment online with Dr. Kiran Doshi on Lybrate.com.

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लहसुन के औषधीय गुण :

M.Sc - Psychology, PGDEMS, Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Delhi
लहसुन के औषधीय गुण :


आयुर्वेद ग्रंथ 'भावप्रकाश' कहता है कि 'लहसुन वृष्य स्निग्ध, ऊष्णवीर्य, पाचक,सारक,रस विपाक में कटु तथा मधुर रस युक्त, तीक्ष्ण भग्नसंधानक (टूटी हड्डी जोड़ने वाला), पित्त एवं रक्तवर्धक, शरीर में बल, मेधाशक्ति तथा आँखों के लिए हितकर रसायन है। यह हृदय रोग, जीर्ण रोग (ज्वरादि), कटिशूल, मल एवं वातादिक की विबंधता, अरुचि, काम, क्रोध, अर्श, कुष्ठ, वायु, श्वांस की तकलीफ तथा कफ नष्टकारी है।

मेहनतकश किसान-मजदूर तो लहसुन की चटनी, रोटी खाकर स्वस्थ और कर्मठ बने रहते हैं। यह कैंसर से लड़ने में खास उपयोगी है क्योंकि यह खाने -पीने की चीजों या प्रदूषण से शरीर में बनने वाले नाइट्रोसेमाइन के असर को कम करता है। हृदय रोग समेत कई अन्य रोगों में भी यह सुरक्षा कवच बन सकता है। इसे पूरे शरीर के लिए एक शक्तिशाली टॉनिक बताया गया है। पिछले महीने एनालिटिकल बायोकेमिस्ट्री पत्रिका में छपी रिपोर्ट में कहा गया कि नाइट्रोसेमाइन का संबंध कैंसर से होता है। ज्यादातर सब्जियों, डब्बाबंद आहार और उद्योग से निकलने वाले कचरे में नाइट्रेट की मात्रा होती है। करीब 20 प्रतिशत नाइट्रेट शरीर में जाकर नाइट्रोसेमाइन में बदल जाता है। इस अध्ययन में शामिल लोगों को, एक हफ्ते तब बिना नाइट्रेट और लहसुन वाला भोजन दिया गया। इसके बाद उन्हें सोडियम नाइट्रेट की खुराक इस प्रकार दी गई जिससे वह टॉक्सिक में न बदले। इसके बावजूद, पेशाब की जांच में, इसके टॉक्सिक में बदलने की प्रक्रिया का पता लगा। इसके बाद स्टडी में शामिल लोगों के एक ग्रुप का इलाज लहसुन के डोज से किया गया। उन्हें एक, तीन या पांच ग्राम ताजा लहसुन या तीन ग्राम लहसुन का रस दिया गया। दूसरे ग्रुप को 500 मिली ग्राम एस्कॉर्बिक एसिड या विटामिन-सी दिया गया। दोनों समूहों को सात दिन तक ये खुराक दी गई और हर दूसरे दिन उनके पेशाब के नमूने लिए गए। जांच से स्पष्ट हुआ कि लहसुन का सेवन करने वालों में नाइट्रोसेमाइन की मात्रा कम थी। 'एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन' और 'जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन' के अध्ययन का भी निष्कर्ष है कि लहसुन सेवन से कोलेस्ट्रॉल में 10 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है और हर हफ्ते सप्ताह लहसुन के पाँच दाने खाने से कैंसर का खतरा 30 से 40 फीसदी कम हो जाता है। वस्तुतः,षडरस अर्थात् भोजन के 6 रसों में, "अम्ल रस" को छोड़,शेष पाँच रस लहसुन में सदैव विद्यमान रहते हैं। आज षडरस आहार दुर्लभ हो चला है। लहसुन उसकी पूर्ति के लिए बहुत सस्ता, सुलभ विकल्प है। इसीलिए,लहसुन को गरीबों का 'मकरध्वज' कहा जाता है क्योंकि इसके लगातार प्रयोग से मनुष्य का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

औषधीय गुणः
मलेरिया के रोगी को भोजन से पहले तिल के तेल में भुना लहसुन खिलाना चाहिए। लहसुन का तेल सवेरे निराहार पानी के साथ लेने से, कितनी ही पुरानी खाँसी हो, फायदा होता है। बिच्छू के काटे स्थान पर डंक साफकर लहसुन और अमचूर पीसकर लगाने से जहर उतर जाता है। डंक ग्रस्त भाग पर पिसी चटनी भी लगाएँ। इन्फ्लूएंजा में लहसुन का रस पानी में मिलाकर चार-चार घंटे बाद दें। इसके सेवन से रक्त में थक्का बनने की प्रवृत्ति बहुत कम हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। लहसुन की गंध से मच्छर भी दूर भागते हैं।यह उच्च रक्तचाप में भी काफी लाभदायक माना गया है। जी मचलने पर लहसुन की कलियाँ चबाना या लहसुनादि वटी चूसना फायदेमंद होता है। रोगाणुनाशक क्षमता होने के कारण लहसुन के एक भाग रस में तीन भाग पानी मिलाकर इसका इस्तेमाल घाव धोने के लिए किया जाता है। कुनकुने पानी में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करने से गले की खरास दूर हो जाती है। लहसुन में पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व होता है जो कि रक्त निर्माण में सहायक होता है। विटामिन-सी युक्त होने के कारण यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है। लहसुन का रस 25 ग्राम की मात्रा में प्रातः निराहार ही त्रिफला के साथ कुछ दिन लगातार लेने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। यह कब्जहारी है। इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द या गठिया में भी होता है तथा यह सूजन का भी नाश करती है। लहसुन के रस की पाँच-पाँच बूंदें सुबह-शाम लेने से काली खाँसी दूर हो जाती है। कान में दर्द होने पर, लहसुन और अदरक को बराबर की मात्रा में कूटकर कुनकुना करके कान में लेने से आराम मिलता है। 10 ग्राम लहसुन का रस मट्ठे में मिलाकर तीन बार लेने से पेचिश का शमन हो जाता है। लहसुन के सेवन से ट्यूमर को 50 से 70 फीसदी तक कम किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए। यह रक्तचाप को नियंत्रित रख कर शिशु को नुकसान से बचाता है। उससे भावी शिशु का वजन भी बढ़ता है और समय पूर्व प्रसव का खतरा भी कम होता है।

सावधानीः
लहसुन की तासीर काफी गर्म और खुश्क होने के कारण इसे उचित अनुपात में ही लेना चाहिए। खासकर गर्मी के मौसम में पित्त प्रधान प्रकृति वालों को इसका संतुलित इस्तेमाल ही करना चाहिए। कच्चा लहसुन बहुत तीक्ष्ण होता है इसीलिए इसका ज्यादा उपभोग करने से पाचन क्रिया गड़बड़ा सकती है। कुछ लोगों को लहसुन से एलर्जी भी होती है। ऐसी एलर्जी का लक्षण यह होता है कि कहीं-कहीं त्वचा लाल हो जाती है और सिरदर्द होता है। बुखार भी हो सकता है। सर्जरी से पहले लहसुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एड्स के रोगी अगर लहसुन का सेवन करते हैं तो उन्हें साइड-इफेक्ट हो सकता है। अगर लहसुन का कुछ दुष्प्रभाव महसूस हो तो मरीज को गोंद कतीरा, धनिया, बादाम-रोगन, नींबू, पुदीना देते रहने से उसका दुष्प्रभाव दूर हो जाता है। घी में भून कर लेने से भी इसका कुप्रभाव दूर हो जाता है। सूखा लहसुन छीलकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
150 people found this helpful

Hi, We want to do family planning for next 1 year. My wife is not comfortable with condoms. Can you please advise whether there are any other methods for family planning?

MBBS, DGO
Gynaecologist, Mumbai
Hi,
We want to do family planning for next 1 year. My wife is not comfortable with condoms. Can you please advise whe...
there are many options...depend upon avtually which one u want...like inj contraceptive..3 monthly inj..or copper T ,or oral pills..ocp etc..depend on ur family,age etc factors .consult Gynec.
1 person found this helpful
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Ways To Treat Eating Disorders!

PGDRP, MPhil, PGDGC
Psychologist, Delhi
Ways To Treat Eating Disorders!

There is a commonly held view that eating disorders are a lifestyle choice. Eating disorders are actually serious and often fatal illnesses that cause severe disturbances to a person's eating behaviors. Obsessions with food, body weight, and shape may also signal an eating disorder. 

Signs and Symptoms of Common Eating Disorders are discussed below:

Anorexia Nervosa:

People with anorexia nervosa may see themselves as overweight, even when they are dangerously underweight. People with anorexia nervosa typically weigh themselves repeatedly, severely restrict the amount of food they eat, and eat very small quantities of only certain foods. Anorexia nervosa has the highest mortality rate of any mental disorder.

Symptoms:

  • Extremely restricted eating
  • Extreme thinness (emaciation)
  • A relentless pursuit of thinness and unwillingness to maintain a normal or healthy weight
  • Intense fear of gaining weight
  • Distorted body image, a self-esteem that is heavily influenced by perceptions of body weight and shape, or a denial of the seriousness of low body weight

Other symptoms may develop over time, including:

  • Thinning of the bones (osteopenia or osteoporosis)
  • Mild anemia and muscle wasting and weakness
  • Brittle hair and nails
  • Dry and yellowish skin
  • Growth of fine hair all over the body (lanugo)
  • Severe constipation
  • Low blood pressure, slowed breathing and pulse
  • Damage to the structure and function of the heart
  • Brain damage
  • Multiorgan failure
  • Drop in internal body temperature, causing a person to feel cold all the time
  • Lethargy, sluggishness, or feeling tired all the time
  • Infertility

Bulimia Nervosa:

People with bulimia nervosa have recurrent and frequent episodes of eating unusually large amounts of food and feeling a lack of control over these episodes. This binge-eating is followed by behavior that compensates for the overeating such as forced vomiting, excessive use of laxatives or diuretics, fasting, excessive exercise, or a combination of these behaviors. People with bulimia nervosa usually maintain what is considered a healthy or relatively normal weight.

Symptoms:

  • Chronically inflamed and sore throat
  • Swollen salivary glands in the neck and jaw area
  • Worn tooth enamel and increasingly sensitive and decaying teeth as a result of exposure to stomach acid
  • Acid reflux disorder and other gastrointestinal problems
  • Intestinal distress and irritation from laxative abuse
  • Severe dehydration from purging of fluids
  • Electrolyte imbalance (too low or too high levels of sodium, calcium, potassium and other minerals) which can lead to stroke or heart attack

Binge-eating Disorder:

People with binge-eating disorder lose control over his or her eating. Unlike bulimia nervosa, periods of binge-eating are not followed by purging, excessive exercise, or fasting. As a result, people with binge-eating disorder often are overweight or obese. Binge-eating disorder is the most common eating disorder.

Symptoms:

  • Eating unusually large amounts of food in a specific amount of time
  • Eating even when you're full or not hungry
  • Eating fast during binge episodes
  • Eating until you're uncomfortably full
  • Eating alone or in secret to avoid embarrassment
  • Feeling distressed, ashamed, or guilty about your eating
  • Frequently dieting, possibly without weight loss

Unspecified Eating Disorder:

  • This happens when the behavior do not meet the criteria for any food or eating problems but still pose significant threat and problems.
  • This also happens the clinician is not able to assess whether an individual is affected by a certain disorder.

Treatment:

Treatment is available. Recovery is possible.

Eating disorders are serious health conditions that can be both physically and emotionally destructive. People with eating disorders need to seek professional help. Early diagnosis and intervention may enhance recovery. Eating disorders can become chronic, debilitating, and even life-threatening conditions.

When you begin to notice that disordered eating habits are affecting your life, your happiness, and your ability to concentrate, it is important that you talk to somebody about what you are going through.

The most effective and long-lasting treatment for an eating disorder is some form of psychotherapy or psychological counseling, coupled with careful attention to medical and nutritional needs. Ideally, this treatment should be tailored to the individual and will vary according to both the severities of the disorder and the patient's particular problems, needs, and strengths. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Psychologist.

3604 people found this helpful

She is suffering from nausea vomiting conditions from 4-5 months. Sudden painful backaches. Pain during micturition. ! 1 month ago she was diagnosed for gallstones. And urinary tract infection. She was treated for uti . Day before yesterday suddenly she got backache and pain in vagina. And in her reports she was diagnosed with 90-100hpf Pus cells in urine. Again a uti was reported . Now she is treated with iv. ondansetron . And tazobactam.

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Bangalore
Hi. Thanku for writing into lybrate. Com 5. Feeling tired or shaky 6. Fever or chills (a sign the infection may have reached your kidneys) medications:- 1. Neeri syrup-10 ml with warm water. 2. Tab gokshuradi guggulu-2 tab daily thrice. 3. Tab c. P. Vati-2 tab daily twice. Tips:- 1. Empty your bladder frequently as soon as you feel the need to go; don't rush, and be sure you've emptied your bladder completely. 2. Wipe from front to back. 3. Drink lots of water. 4. Choose showers over baths. 5. Stay away from feminine hygiene sprays, scented douches, and scented bath products -- they'll only increase irritation. 6. Cleanse your genital area before sex. 7. Urinate after sex to flush away any bacteria that may have entered your urethra. 8. If you use a diaphragm, unlubricated condoms, or spermicidal jelly for birth control, consider switching to another method. Diaphragms can increase bacteria growth, while unlubricated condoms and spermicides can cause irritation. All can make uti symptoms more likely. 9. Keep your genital area dry by wearing cotton underwear and loose-fitting clothes. Avoid tight jeans and nylon underwear -- they can trap moisture, creating the perfect environment for bacteria growth. Follow this for 15 days, if nt reduces consult us on lybrate. Com.
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Am so much stressed doctor I have sex with a lady 5 days ago while so I forgot to check for the breakage or leaks in the condom since it was dark and after 20 min I washed my private part with water and am have a doubt that the HIV virus may have entered my stream I need your help doctor. I took the condom holding index finger and thumb as" O"

C.S.C, D.C.H, M.B.B.S
General Physician, Alappuzha
There is nothing to so now and you may not have got it and can check after 6 months and relax now as it is only your fear
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My period got delayed, last tym I had periods around ,12 the November, but still it's hasn't came. I know this is due to my weight gain. Can I get any tablets to get my periods.

DHMS (Hons.)
Homeopath, Patna
My period got delayed, last tym I had periods around ,12 the November, but still it's hasn't came. I know this is due...
Hello, Tk, plenty of water to hydrate yourself ,to eliminate toxins  to absorb neutrients to nourish your body, establishing your flow.  • Go for meditation to reduce your stress, anxiety to calm your nerve to ease your stress in order to improve haemoglobin level. • your diet be simple, non- irritant, easily digestible on time to maintain your digestion, avoiding gastric disorder. •Tk, Apple,carrots, cheese,milk, banana,papaya, pomegranate, spinach,almonds, walnuts. •Tk, Homoeo medicine, gentle & rapid in action with no adverse effect, thereof. @ Pulsatilla 200-6 pills, thrice. @ Sepia200 -6 pills at bed time. •Ensure, sound sleep in d night for at least 7 hrs. • Avoid, caffiene,junkfood, dust,smoke, exertion > Your feedback will highly b appreciated for further, follow up. Tk,care,
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कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है....

M.Sc - Psychology, PGDEMS, Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Delhi
कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है....


* आपका लगातार वजन बढ़ रहा है तो सावधान हो जाइए।

* आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे छोटे-छोटे नुस्खे, जिन्हें अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत किए वजन को नियंत्रित कर सकते हैं:--

* पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर चपाती के साथ खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है।

* आधा चम्मच सौंफ को एक कप खौलते पानी में डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा तीन माह तक लगातार करने से वजन कम होने लगता है।

* पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।

* दही खाने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।

* छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।

* ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

* केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।

* सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है।


* मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।



* खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।

* रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।

* गुग्गुल गोंद को दिन मे दो बार पानी में घोलकर या हल्का गुनगुना कर सेवन करने से ‪#‎वजन‬ कम करने में मदद मिलती है।

* हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण 50 ग्राम परवल के जूस (1 गिलास) के साथ मिलाकर रोज लें, वजन तेजी से कम होने लगेगा।

* करेले की सब्जी खाने से भी वजन कम करने में मदद मिलती है। सहजन के नियमित सेवन से भी वजन नियंत्रित रहता है।

* सौंठ, दालचीनी की छाल और काली मिर्च (3 -3 ग्राम) पीसकर चूर्ण बना लें। सुबह खाली पेट और रात सोने से पहले पानी से इस चूर्ण को लें, #मोटापा कम होने लगेगा।
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Can full fledged yoga (12 surayanamaskars, pranayama, all kinds of asanas) be practiced during periods? Even if the bleeding is not very heavy. No cramps or any sort of discomfort. Does the practice during periods cause any harm to the body? Thank you.

BHMS
Homeopath, Faridabad
Can full fledged yoga (12 surayanamaskars, pranayama, all kinds of asanas) be practiced during periods? Even if the b...
Hello, Except pranayam, anulom-vilom, no other yoga-asanas should be performed during the time of menses as the pelvic muscles are already working during that time and exerting them during menses will cause them weak and exhausted! Let them rest!
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Which are the best health syrup or tonic or supplement for the women of above 40 years of age to fulfill the daily needs. The concerned medicine should be of affordable price with easy availability.

B.H.M.S., Senior Homeopath Consultant
Homeopath, Delhi
Which are the best health syrup or tonic or supplement for the women of above 40 years of age to fulfill the daily ne...
There are so many multivitamins available in the market, but which is to be take depend on patient to patient. kindly consult privately.
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Please suggest Best breast feeding powder after delivery for good milk production?

BHMS
Homeopath, Bhopal
Dear Lybrate User, You can take Shatavari powder/Capsules daily twice after meal. Alfalfa tonic for Maintain your good health. Drink much liquids ;Water, Home-made fresh juices, Coconut water (only during day time). High Protein diet with Good Multivitamins food items like green leafy vegetables, Fruits, Flaxseed, Pumpkin seeds. Good amount of Dairy products like Milk and Curd. Take Rest and Avoid stress. Always feed your child with Happy mood; it affects you child's Health. For further information and details you can consult online. Take Care.
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Dr. Papolu Rama Devi

Advanced Infertility, MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS
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Dr. Saraschandrika P. V.

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Obstetrics & Gynaecology
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Dr. Sunitha Ilinani

MD - Obstetrics & Gynaecolog, MBBS
Gynaecologist
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Dr. Haritha Yalamanchili

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Obstetrics & Gynaecology, MRCOG
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Dr. Vandana Hegde

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology, Post Doctoral Fellowship in Reproductive Medicine, Fellowship in Infertility, Diploma in Assisted Reproductive Technology & Embryology
Gynaecologist
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Dr. Sadhvi Reddy

Fellowship In Minimal Access Surgery, MS - Obstetrics and Gynaecology, MBBS
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