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Dr. V B Sharma

BVSc & AH

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Hello and thank you for visiting my Lybrate profile! I want to let you know that here at my office my staff and I will do our best to make you comfortable. I strongly believe in ethics; a......more
Hello and thank you for visiting my Lybrate profile! I want to let you know that here at my office my staff and I will do our best to make you comfortable. I strongly believe in ethics; as a health provider being ethical is not just a remembered value, but a strongly observed one.
More about Dr. V B Sharma
Dr. V B Sharma is a trusted Veterinarian in Rohini, Delhi. He has been a successful Veterinarian for the last 44 years. He studied and completed BVSc & AH . He is currently associated with Dog Care Centre in Rohini, Delhi. You can book an instant appointment online with Dr. V B Sharma on Lybrate.com.

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Info

Specialty
Education
BVSc & AH - G B Pant University, - 1974
Languages spoken
English
Hindi
Professional Memberships
Indian Veterinary Association

Location

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Dog Care Centre

B 5 /18, Sector 7, Rohini. Landmark: Near HDFC ATM, DelhiDelhi Get Directions
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Vaccination In Pets

B.V.Sc
Veterinarian, Varanasi
Vaccination In Pets

Vaccination in dog

टीकाकरण की प्रकिया एक ऐसा उपाय है जिससे, कुत्तो में होने वाली कुछ प्रमुख विषाणु एवं जीवाणु जनित जानलेवा एवं लाइलाज, बीमारियों जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज तथा केनल कफ़ आदि से बचाव के लिए समय समय पर कुत्तों के शरीर में टीका लगाया जाता है,जिससे इन रोगों के खिलाफ रोगप्रतिरोधक क्षमता का शारीर में विकास हो जाता है और हमारा पालतू जानवर एक सिमित अवधि तक इन बिमारियों के घातक प्रभाव से बचा रहता है |

कुछ टीकाकरण संबंधी सामान्य प्रश्नो के जबाब -
 
१- क्या सभी उम्र के कुत्तो का टीकाकरण जरूरी होता है?
हाँ। आमतौर पर १. ५ महीने (४५ दिन) के उम्र से ऊपर सभी कुत्तो का नियमित समय पर टीकाकरण करना जरूरी होता है यदि किसी कारण वश नयमिति या कभी कराया ही न गया हो तो किसी भी उम्र से टीकाकरण शुरू किया जा सकता है। 

२. छोटे बच्चो को किस उम्र से टीका का पहली खुराक देना शुरू करना चाहिए?
४५ दिन के उम्र से ही टीके की पहली खुराक देना बेहद जरूरी होता है 

३. क्या सभी छोटे पप्स को टीकाकरण के पहले पेट के कीड़े देना जरूरी होता है -
हाँ। बहुत से परजीवी ऐसे होते है जो माँ के पेट से ही या दूध के जरिये से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाते है जिससे शरीर को कमजोर कर देते है और जब टीका लगाया जाता है तो कमजोरी के वजह से उतना अच्छा शरीर में प्रतिरोधक छमता का विकास नहीं हो पता इसलिए पहले ऐसे परजीवीओ को नष्ट करना जरूरी होता है 

४. क्या होता है टीकाकरण का सही उम्र और समयांतराल?
१. पहली खुराक -जन्म के ६ -८ सप्ताह के उपरांत(कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा हेतु) 
२. बूस्टर खुराक या दूसरी खुराक - प्रथम खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर दूसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 
३. तीसरी खुराक - रेबीज वायरस हेतु- प्रथम खुराक जन्म के ३ माह के उपरान्त। 
४. बूस्टर खुराक या चौथी खुराक - तीसरी खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर तीसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 

५. क्या बूस्टर खुराक देना जरूरी होता है या नहीं?
जन्म के साथ ही माँ से प्राप्त एंटीबाडीज और प्रथम दूध से मिलने वाली सुरछा कवच कुछ सप्ताह तक नवजात के खून में मौज़ूद रह करअनेको बीमारयों से सुरछा प्रदान करती है परन्तु समय के साथ साथ इनकी मात्रा बच्चे के शरीर में कम होने लगती है। जिससे बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए लगभग ४५ दिन के बाद टिका का प्रथम खुराक देते है यद्पि ये पता नहीं रहता की माँ से मिलने वाली सुरछा का असर किस स्तर का है जिससे आमतौर पर ये स्तर अधिक होने पर प्रथम खुराक से बच्चे के शरीर में टीकाकरण की गुणवत्ता को बाधित करती है, जो की पप्पस में रोगप्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने में असक्षम हो जाता है इसलिए कुछ सप्ताह बाद टीकाकरण के दूसरी खुराक दे कर टीकाकरण से रोगप्रतिरोधक क्षमता करने के उद्देश्य को प्राप्त करते है ऐसी दूसरी खुराक को बूस्टर खुराक कहते है। 

६. क्या है टीकाकरण की सही खुराक देने के मात्रा:
डॉग चाहे किसी भी उम्र, भार, लिंग अथवा नस्ल के हों उनको समान मात्रा में टीकाकरण का खुराक दिया जाता है 

७. क्या है टीकाकरण का सही तरीका:
टीकाकरण खाल के नीचे:कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा तथा रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए खाल के नीचे दिया जाता है
 नथुनों में:केनल कफ़ का टीकाकरण कुत्ते के नथुनों में दवा डाल कर किया जाता है

८. क्या सभी टीके एक ही प्रकार के होते है:कुत्तों में टीकाकरण दो प्रकार की होती है
 १. कोर टीकाकरण - टीकाकरण जो सभी कुत्तों के लिये आवश्यक है. यह उन बिमारीयों में दिया जाता है जो आसानी से फैलती हैं अथवा घातक होती हैं जैसे रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर.
 २. नान कोर टीकाकरण – उपरोक्त ४ बिमाँरीयों (रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर) के टीकाकरण को छोड़कर अन्य सभी नानकोर टीकाकरण माना जाता है | यह उन बिमाँरियों से सुरक्षा प्रदान करता है जो वातावरण के अनावरण अथवा जीवनचर्या पर निर्भर करती है जैसे लाइम डिजीज, केनलकफ और लेप्टोस्पाइरोसिस.

९. एक सफल टीकाकरण करने के बाद क्या फिर भी टीकाकरण विफल हो सकता है?हाँ। 
 टीकाकरण के विफलता के कारण कुत्ते में बीमारी होने के निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते है –
१. टीकाकरण के दौरान कुत्ते की रोगप्रतिरोधक क्षमता का सम्पूर्ण रूप से कार्य न करना |
२.आयु – कम उम्र के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्णतः विकसित नही होती और बड़े आयु के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली कई कारणों से अक्सर कमज़ोर या क्षीण हो जाती है |
३. मानवीय चूक (टीके का अनुचित संग्रहण या अनुचित मिश्रण)- टीकों का संग्रहण एवं इस्तेमाल भी निर्देशानुसार ही होना आवश्यक है | सूरज की रोशनी,गर्म तापमान टीके के प्रभाव को नस्ट कर सकता है | टीके का मिश्रण पशु में टीकाकरण के तुरंत पहले तैयार करना चाहिए | टीके खरीदने के पहले पता करना चाहिए कि टीकों को उचित तापमान एवं देखभाल से रखा गया है या नहीं |
४. डीवार्मिंग – टीकाकरण करने के पहले पेट के कीड़े मारने के लिए डीवर्मिंग करना आवश्यक है, वरना इस तरह का तनाव टीकाकरण के प्रभाव को कम कर सकता है |
५. गलत सीरोटाईप / स्टेन का इस्तेमाल – प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बहुत विशिष्ट होती है | अतः टीके में होने वाली जीवाणु या विषाणु की सही स्टेन होनी चाहिए वरना उससे उत्पन्न होने वाली प्रतिरक्षा जानवर में सही तौर पर सुरक्षा नहीं कर पाती |
६. अनुवांशिक बीमारियाँ – कुछ जानवरों में आनुवंशिक बिमारियों की वजह से सभी रोगों के लिए प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पर कम ही उत्पन्न हो पाती है |
७. वैक्सीन की गुणवत्ता – टीके में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में प्रतिजनी की मात्रा होना चाहिए वरना टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रयाप्त नहीं होती है |
८. पुराने या अवधि समाप्त टीके – पुराने टीकों में आवश्यक प्रतिजनी गुण समाप्त या कम हो जाता है | इस तरह के टीके लगाने से जानवरों को बेमतलब तनाव दिया जाता है |
९. टीकाकरण का अनुचित समय – टीका निर्माता के निर्देशों के अनुसार टीकाकरण का समय (उम्र एवं मौसम के अनुसार), लगाने का तरीका एवं मात्रा तथा दोबारा लगाये जाने की अवधि, इत्यादि निश्चित होता है |इन निर्देशों का पालन सही समय पर न करने से टीकाकरण विफल या निष्क्रिय हो जाता है |
१०. पोषण की स्तिथि- कुपोषण की वजह से जिन पशुओं में पोषक तत्वों की कमी रह जाती है उनमे टीकाकरण के बाद भी प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पे कम ही उत्पन्न हो पाती है |

10. क्या वैक्सीन लगते समय कुत्ते पर कोई दुस्प्रभाव हो सकते है? हाँ 
 कुछ कुत्तो प्रतिरोधक छमता अधिक सक्रिय होने की वजह से कुछ सामान्य लचण जैसे ज्वर, उल्टी, दस्त, लासीका ग्रंथियों का सूजना, मुख का सूजना, हीव्स, यकृत विफलता और कभी -कभी मौत भी हो सकती है।

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MVSc, BVSc
Veterinarian,
WHAT IS CANINE HIP DYSPLASIA?
Canine hip dysplasia is the abnormal development and growth of a dog's hip joint. It occurs commonly in large breed dogs such as Labrador retrievers, German Shepherds, Rottweilers, and Saint Bernards, but it can occur in dogs of any breed and size, and even in cats. There is no single cause of hip dysplasia; rather it is caused by multiple factors, some of which include genetics and nutrition. The abnormal development of the hip joint that occurs in young dogs with dysplasia leads to excessive hip joint laxity (looseness). This laxity causes stretching of the supporting ligaments, joint capsule, and muscles around the hip joint, leading to joint instability, pain, and permanent damage to the anatomy of the affected hip joint. If left untreated, dogs with hip dysplasia usually develop osteoarthritis (degenerative joint disease).
Dogs with hip dysplasia commonly show clinical signs of hind limb lameness, pain, and muscle wasting (atrophy). Owners report that their dogs are lame after exercise, run with a "bunny-hopping" gait, are reluctant to rise or jump, or aren't as active as other puppies. Many dysplastic dogs will show these signs early in life (6-12 months of age), but some dogs do not show signs of pain until they are older.
Diagnosis: Examination by touch and confirmation by radiographs.
Treatment and care: Conservative treatment benefits many patients when they experience signs of hip dysplasia. This treatment includes enforced rest, anti-inflammatory drugs and pain medication. Once the clinical signs are controlled, the therapy includes weight reduction if needed and an exercise program designed to improve the strength of your pet’s rear legs. Such an exercise program might include swimming and walking uphill. Surgical treatment being more invasive, is not practiced regularly, and does not preclude the need of conservative therapy.
The signs may aggravate during the season transition and patients may need support of pain medications during such period.
Nutrition: For younger patients – food that supports development and tissue repair may be offered. Optimal nutrition is also targeted to reduce health risks associated with excessive calcium and phosphorus (which may cause skeletal problems), and excess calories (which may cause obesity). Dietary therapy for dogs with hip dysplasia includes a diet that will help dogs run better, play better and rise more easily while maintaining optimal body weight. A joint diet should have added EPA (eicosapentanoic acid) an omega-3 fatty acid that has been shown to help maintain joint function, enhanced levels of glucosamine and chondroitin to provide the building blocks of healthy cartilage
and L-carnitine to maintain optimal weight.
Pets with hip dysplasia should not be mated/bred, as they can potentially transmit the “Defective Gene” to their progeny!
2 people found this helpful

My dog is having problem that . It happens quite regularly when we take him out fr walk . He is having some sort of pain he lie on ground legs bend to all sides sliva coming out and starts trembling . It happen fr almost 10 minutes and after that again normal . Whats the problem to him . Some time it happens at home also . Can u help ?

MVSC
Veterinarian, Hyderabad
De-worming should be done . Give a well balanced diet. Supplement with calcium and multivitamins available in the local market. Even the symptoms doesn't reduce after 10 days take to the nearest vet for further investigation.
3 people found this helpful

B.V.Sc
Veterinarian, Varanasi
The skin of your dog is entirely different from ours. There is significant ph difference so their skin is more sensitive than ours. Their body secretes some essential oils which gets depleted once you start bathing them daily. It results in drying of skin leading to flakes formation of policy kit is.
Some tips to remember---
*bathe your pets once in 10 days.
*groom your pets daily.
*do not use dettol/phenolic compounds on their body. It can be allergic.
*don't allow ticks/fleas/mites to thrive on their body.
*for hairy breeds, go for a complete hair-cut in summers.
*for breeds with drooping ears, take special care about ear cleaning.
*never use human soaps & shampoos like dove/clinic plus on dogs body. It can cause allergic dermatitis.
2 people found this helpful

Hi doctor, my German shepherd 2 months puppy is attacked by Parvo disease, how much it will cost to cure it.

B.V.Sc. & A.H., M.V.Sc.-Pathology
Veterinarian, Bangalore
Hello. It depends on the veterinarian's consultation fee and the line of treatment he chooses. Usually it might cost you around 2000 for the dog to recover completely.

My dog is not eating food since last three or four days.If we feed her food with spone or our hand then she will eat otherwise she drinkd only mink and eag and left the bread.

Master of sciences, B.V.Sc. & A.H.
Veterinarian, Salem
She has been practised so . Please don't encourage such thing in future and if they don't take food also please leave him after few days automatically they will take .This is behavioural problem
1 person found this helpful

My dog drank an entire bottle of furamist nasal spray, which contains fluticasone furoate 27.5 mcg in each spray. There is no reaction as of yet (first 5 mins). Should I be worried?

BVSc
Veterinarian, Rajkot
Donot worry it is for allergic rhinitis. Fluticasone furoate clinical trial on dog says one time exposure there is no issue but repeated exposure may reproductive disorders so donot worry if and symptoms you see, take drug according to that symptoms like if acidity you give Anti Acidity Drugs like wise. If any other issue consult your vet.
1 person found this helpful

Processed food like royal canine, padegiry good for my dog? Also suggest some natural diet for my dog.

MVSC
Veterinarian, Hyderabad
Hi, yes any processed food is good for your dog if fed as per the specifications of brand. For natural diet you can offer curd rice/ milk/ meat etc as per you and your dog choice.

I have two budgies of 3 nd 5 months. One of them is constantly going through lose motion. And bcums lethargic. Also from few days they are making a kind of choking sound and also seem troubled. Kind of dnt know what to do?

MBBS
General Physician, Mumbai
You will have to take them to a veterinarian doctor for a clinical checkup and For loos emotions drink ors solution and to stop the frequency of motions take capsule roko and Avoid spicy food in diet and eat only curd rice or khichdi and if necessary we should take prescribed antibiotics.
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