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Dr. Neeru Arora

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Hello and thank you for visiting my Lybrate profile! I want to let you know that here at my office my staff and I will do our best to make you comfortable. I strongly believe in ethics; a......more
Hello and thank you for visiting my Lybrate profile! I want to let you know that here at my office my staff and I will do our best to make you comfortable. I strongly believe in ethics; as a health provider being ethical is not just a remembered value, but a strongly observed one.
More about Dr. Neeru Arora
Dr. Neeru Arora is one of the best Gynaecologists in Janakpuri, Delhi. You can meet Dr. Neeru Arora personally at Noble Medicare in Janakpuri, Delhi. Book an appointment online with Dr. Neeru Arora and consult privately on Lybrate.com.

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Shatavari Ke Uses

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Sindhudurg
Shatavari Ke Uses

शतावरी खाने के फायदे

By speaking tree
सौ रोगों को हरने वाली शतावरी

आज हम आपको एक झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते है, जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं.नाम है"शतावरी. I
आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा.अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं, इसके प्रयोग को! आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार, शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीरको रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है. I इसे शुक्रजनन,शीतल,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है I महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक (चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है. I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं i

अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग क़ी जानकारी देंगे.जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा!

- यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें,इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे!

-शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यवकूट करें,इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें,हो गया मालिश का तेल तैयार.इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें i

-यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम,वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली,मिश्री के साथ लें और लाभ देखें i

-प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है!

-यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है i

-यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है i

-शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है!

-यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम,मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर.पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह,प्री -मेच्युर -इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है i

-गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं, तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है.अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं i

-शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है!

-वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार) से मुक्ति प्रदान करता है. I

-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन,दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारीयों में लाभ मिलता है. I

. शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदोस ग्निपुष्टिदा! चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित.उदधृत किया है.तो शतावरी एक बुद्धिवर्धक,अग्निवर्धक,शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली स्तन्यजनक औषधि है!

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Almonds Vs. Walnuts: Which Nut Has More Benefits?

M. Sc. Foods, Nutrition & Dietetics, B.Sc-Home Science
Dietitian/Nutritionist, Visakhapatnam
Almonds Vs. Walnuts: Which Nut Has More Benefits?

Whenever you peruse through snack options in a store, looking for a fulfilling yet healthy option, it often turns out to be really challenging. This is where you might consider nuts, such as almonds or walnuts to fulfill your hunger. They both are quite healthy snacking options with rich reserves of protein, fibre, and energy.

However, given the choice between almonds and walnuts, there are certain things which need to be kept in mind.

  • Energy content: Almonds contain 14 grams worth of fat, and 164 calories whereas, walnuts contain approximately 18 grams of fat but give 185 calories. Thus, we find that walnuts contain a slightly higher amount of fat than almonds, but provide more energy in the form of calories.
  • Protein content: Almonds and walnuts are both protein powerhouses - containing 13% and 9% of protein content respectively. Thus, both these nuts are great sources of protein.
  • Mineral content: Both almonds and walnuts are rich in various kinds of minerals. When it comes to Iron, which is essential for muscle health and blood formation, both nuts contain very similar amounts (approx 5%). Almonds pack 19% magnesium, essential for strong bones, compared to the 11% in walnuts. Walnuts, however, have very high amount of copper (50%) and manganese (54%) which prove to be useful in reducing symptoms of PMS as compared to almonds.
  • Fibre content: Fiber, which plays a vital role in completing the process of digestion, is another component that these nuts pack healthy amounts of. Almonds contain 16% fiber whereas walnuts have 8%.
  • Vitamin content: While walnuts contain 12% Vitamin B6, compared to the 3% in almonds, the real point of difference between these two highly healthy nuts is in their content of Vitamin E essential for healthy skin and eyes. Almonds contain almost 48% of it, whereas walnuts contain only about 2% of the same.

Thus, we get a fair idea about the high nutritional content for both these nuts. They are both essential, especially if they can be incorporated into our diets in the correct proportions. If you wish to discuss any specific problem, you can consult a Dietitian/Nutritionist.

7637 people found this helpful

Healthy Lifestyle Tips In Hindi - स्वस्थ जीवन के टिप्स

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Healthy Lifestyle Tips In Hindi - स्वस्थ जीवन के टिप्स

जीवन में स्वस्थ रहने के लिए कुछ चीजें आपको बदलनी होंगी. जैसे कि अपने खानपान और जीवन शैली पर विशेष ध्यान देना होगा. आपको एक संतुलन बनाकर चलाना पड़ेगा. जिससे आप जीवन के भागदौड़ का शिकार न हो सकें. समय-समय पर चिकित्सक का भी परामर्श लेते रहें. लेकिन निम्लिखित 5 तरीके भी आपके जीवन को स्वस्थ बनाएंगे.
1. तांबे के बर्तन में रखकर पानी पीयें

तांबे के बैक्टीरिया-नाशक गुणों में मेडिकल साईंस बड़ी गहरी रुचि ले रहा है. यह पानी खास तौर पर आपके लीवर के लिए और आम तौर पर आपकी सेहत और शक्ति-स्फूर्ति के लिए उत्तम होता है. अगर पानी बड़ी तेजी के साथ पंप हो कर अनगिनत मोड़ों के चक्कर लगाकर लोहे या प्लास्टिक की पाइप के सहारे आपके घर तक पहुंचता है तो इन सब मोड़ों से रगड़ाते-टकराते गुजरने के कारण उसमें काफ़ी दोष आ जाता है.
2. शरीर को पर्याप्त आराम दें
आप सोने किस वक्त जाते हैं, यह तो आपके लाइफ स्टाइल पर निर्भर करता है, लेकिन महत्व इस बात का है कि आपको कितने घंटे की नींद की जरूरत है. अकसर कहा जाता है कि दिन में आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए. आपके शरीर को जिस चीज की जरूरत है, वह नींद नहीं है, वह आराम है. अगर आप पूरे दिन अपने शरीर को आराम दें, अगर आपका काम, आपकी एक्सरसाइज सब कुछ आपके लिए एक आराम की तरह हैं तो अपने आप ही आपकी नींद के घंटे कम हो जाएंगे. लोग हर चीज तनाव में करना चाहते हैं, लोग पार्क में टहलते वक्त भी तनाव में होते हैं.
3. दो हफ्ते में एक बार उपवास करें
अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना आपके वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं. कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं. एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफ़ी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी. इस समस्या का तो एक ही हल है. अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें. पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचें. अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचाएगा. यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न की जाए.
4. पीठ को सीधा रखकर बैठें
शरीर के ज्यादातर महत्वपूर्ण भीतरी अंग छाती और पेट के हिस्से में होते हैं. इन अंगों को सबसे ज्यादा आराम तभी मिल सकता है, जब आप अपनी रीढ़ को सीधा रखकर बैठने की आदत डालें. शरीर को सीधा रखने का मतलब यह कतई नहीं है कि हमें आराम पसंद नहीं है, बल्कि इसकी सीधी सी वजह यह है कि हम आराम को बिल्कुल अलग ढंग से समझते और महसूस करते हैं. आप अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए भी अपनी मांसपेशियों को आराम में रहने की आदत डाल सकते हैं. लेकिन इसके विपरीत, जब आपकी मांसपेशियां झुकीं हों, तो आप अपने अंगों को आराम में नहीं रख सकते. आराम देने का कोई और तरीका नहीं है. इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने शरीर को इस तरह तैयार करें कि रीढ़ को सीधा रखते हुए हमारे शरीर का ढांचा और स्नायुतंत्र आराम की स्थिति में बने रहें.
5. प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन जिएं
आप जिस चीज़ को शरीर कहते हैं वो बस इस धरती का एक टुकडा है. ये शरीर भी धरती की सतह पर चला जाएगा, यह बस धरती का एक टुकड़ा है. तो यह अपने सर्वोत्तम रूप में तब रहेगा, जब आप धरती से थोडा संपर्क बनाकर रखें. फिलहाल आप हर वक़्त सूट और बूट पहन कर पचासवें फ्लोर पर चलते रहते हैं, और कभी भी धरती के संपर्क में नहीं आते. ऐसे में आपका शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार होना स्वाभाविक है.

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GILOY, GUDUCHI, Indian Tinospora, Tinospora cordifolia

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Zirakpur
GILOY, GUDUCHI, Indian Tinospora, Tinospora cordifolia

Indian tinospora, heart-leaved moonseed, #giloy, #guduchi #amrita
#tinospora #cordifolia

Its a wonderful medicinal herb blessed by nature. Guduchi is highly rich in anti oxidants. It has wound healing property, antipyretic (fever- reducing) and anti-viral properties.

Use in diabetes:
It is a very good herb for diabetes. But if you are taking other medicines, it may further lower the blood glucose levels. Hence people with diabetes should take this herb only under medical supervision.

Interesting fact: the areal roots of guduchi are so thin yet so strong that, sushruta used to use this for suturing surgical wounds. This had duel benefits. One was – the thread were very strong so, there was no chance of wound rupture. Second is, guduchi has potent wound healing property. Hence wound healing used to happen very quickly.

Nutritional composition of giloy:
Calcium, phosphorus, iron, copper, zinc, manganese.

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Hello doctor what should I do to increase my breast milk and my child crossed one month still her weight is same as born weight please suggest what to do.

MBBS, MD
Pediatrician, Gurgaon
child is just one month old.hence he should be fed every two hourly for 10 minutes on each breast.breastmilk increases more with sucking.drugs are not effective.
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I had unprotected sex with my girlfriend on last month 27. Till now she did not have her periods (mensuration) came. After sex she took an I pill tab. And mostly on every month her mensuration date on last of every month. Are we in safe zone doctor? Is there any need of pregnancy check up required?

EMDR, FRCOG (LONDON) (Fellow of Royal College of Obstetricians and Gynaecologists), MFSRH , Diploma in psychosexual therapy, Medical diploma in clinical Hypnosis, Diploma in Evidence Based Healthcare, DNB (Obstetrics and Gynecology), MD - Obstetrics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist, Pune
I had unprotected sex with my girlfriend on last month 27. Till now she did not have her periods (mensuration) came. ...
Thank you for your question. Taking the ipill is associated with the side effects such as abdominal pain, unscheduled bleeding, bloating, period like discomfort, early or late periods and also of course a pregnancy. If she took the ipill within 24 hours of unprotected intercourse you are 95% sure to avoid a pregnancy. Any later and the success rate also reduces. I would suggest that you wait for her period to come. If it is delayed by over 7 days to do a pregnancy test. I would also suggest that you see your local gynaecologist to discuss other reliable methods of contraception if you will be having sex regularly. Ipill is an emergency contraceptive and should only be used for emergencies when your regular contraceptive fails. It is important to know that there is really no such thing as a safe period in young fertile women. Even if you are using condoms consistently and correctly you will have a failure rate of about 15 %. Unprotected intercourse has a 40% risk of unwanted pregnancy in any part of the cycle greater when it is midcycle. Please seek advice regarding more reliable contraception if you do not wish to have a baby just yet. Best wishes.
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Lam married women from 11 yrs, I have no children, we both are having normal reports, but still lam not conceiving, give me some advice.

BHMS
Homeopath, Faridabad
Lam married women from 11 yrs, I have no children, we both are having normal reports, but still lam not conceiving, g...
Hello, try to have intercourse between 10 th to 18 th day of your menstrual cycle , this is a maximum fertile period for a woman when ovum releases from the ovary. Most women ovulate anywhere between Day 11 – Day 21 of their cycle, counting from the first day of the LMP.
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Hi Doc, I am male 26 years old, I am married since 1 years and now we are planning for a baby, could you pls tell me rit tym to mate, as while mating when I put my semen inside and take out then after few seconds semen also comes out. Pls help me out to get through this.

C.S.C, D.C.H, M.B.B.S
General Physician,
Hi Doc, I am male 26 years old, I am married since 1 years and now we are planning for a baby, could you pls tell me ...
Semen coming out is not a problem and sufficient is going inside . If cycle is regular of 28 days the 14 th day is ovulation time and you can mate every day why look for dates
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Spinal Bifida - Know The Signs That Indicate It!

MCh - Neurosurgery, MS-General Surgery, MBBS
Neurosurgeon, Delhi
Spinal Bifida - Know The Signs That Indicate It!

The medical term ‘spina bifida’ or spinal bifida refers to a congenital defect in the spine. In simpler terms, spina bifida is a defect in the neural tube. Based on the severity of this disease, spina bifida can be divided into three different types:

  • Myelomeningocele
  • Meningocele
  • Occulta

The symptoms of spina bifida vary depending on each of these three types. Let's take a closer look at its symptoms here:

Myelomeningocele

Myelomeningocele is the most severe form of spina bifida. In this type of neural defect, spinal canal of the baby remains open in the middle or lower back along a few vertebrae. Due to this opening, a sac is formed at the back of the baby at birth, which exposes the baby to several life-threatening infections.

Some of the common symptoms of this type of spina bifida are:

  1. Seizures
  2. Presence of uneven hips
  3. Deformed feet
  4. Curved spine or scoliosis
  5. Bladder and bowel problems
  6. Muscle weakness
  7. Paralyzed leg muscles.

Physical deformities from moderate to severe levels are also very common in this type of spina bifida.

Meningocele

Meningocele is a ratherrare form of spinal bifida in which a sack of fluid stays in open at the back of the baby. Here the protective membranes that usually stay around the spinal cord push out through the vertebrae’s opening. Though this sack contains no part of the spinal cord, it may cause minor disabilities.

Some common symptoms of this kind of spina bifida are:

  1. Membranes forming a visible sack on the back at birth
  2. Presence of a small opening in the baby's back

The good news is that this sack can be removed through surgery without hampering the normal development of the spinal cord.

Occulta
Spina bifida occulta is the mildest form of spina bifida, which, in majority of the cases, often stays hidden as its symptoms are rarely visible. As it doesn’t even cause any form of disabilities, it generally goes unnoticed. It doesn’t cause any damages to the nerves or the spinal cord.

Some common symptoms of occulta are:

  1. Presence of a gap between the vertebrae
  2. An area on the back formed with extra fat
  3. Acluster or small group of hair on the back
  4. A dimple or birthmark on the back.

In this kind of spina bifida, neither any sack of fluid is formed, nor are there any visible opening in the back. Sometimes, people who have spina bifida are not aware of it due to its minimal symptoms.
Spina bifida usually affects a child before birth, when the brain or the cord or the protective covering over them fails to develop completely. Knowing about the symptoms can be one of the best ways to identify and diagnose this disease and opt for proper treatment solutions. If you wish to discuss about any specific problem, you can consult a Neurosurgeon.

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Hi , can you please tell me how many contraceptive pills can I take within a week, for pregnancy prevention? Pregnancy prevention medicine like unwanted-72, i-pill etc. My bf come for 8 days so in 8 days how many single dose I can take. Please inform me.

MBBS, MS - Obstetrics & Gynecology, Fellowship in Infertility (IVF Specialist)
Gynaecologist, Aurangabad
Hi , can you please tell me how many contraceptive pills can I take within a week, for pregnancy prevention? Pregnanc...
hi Divyanka, it is not good idea to use multiple ipill at time better to use proper contraceptive pills or condom. please share details of period pattern and dates to guide you further.
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Dr. Gitanjali

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