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Sanjeevani Ayurveda

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F 3&4, Manish Location Plaza, Plot no 1, Ashirwad Chowk, Sec 12, Dwarka Delhi
1 Doctor · ₹300
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Sanjeevani Ayurveda Ayurveda Clinic F 3&4, Manish Location Plaza, Plot no 1, Ashirwad Chowk, Sec 12, Dwarka Delhi
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We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply....more
We will always attempt to answer your questions thoroughly, so that you never have to worry needlessly, and we will explain complicated things clearly and simply.
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Sanjeevani Ayurveda is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. C P Verma, a well-reputed Ayurveda, practices in Delhi. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 108 patients.

Timings

MON-TUE, THU-SAT
10:00 AM - 07:30 PM

Location

F 3&4, Manish Location Plaza, Plot no 1, Ashirwad Chowk, Sec 12, Dwarka
Dwarka Delhi, Delhi - 110078

Doctor in Sanjeevani Ayurveda

Dr. C P Verma

B.A.M.S., M.D.
Ayurveda
14 Years experience
300 at clinic
₹500 online
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Yoga In Diabetes!

B.A.M.S
Ayurveda, Pune
Yoga In Diabetes!

Single yoga pose that is haalassan helps to lower sugar levels. This aasan stimulate pancreas to secret insulin.

आंतों की कमजोरी - Intestinal Weakness!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
आंतों की कमजोरी - Intestinal Weakness!

आंत हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हम जो भी खाते हैं वो पचने के बाद हमारे आंतों से होकर ही गुजरता है. हमारे पचे हुए भोजन का अंतिम हिस्सा आंत में अवशिष्ट पदार्थ के रूप में तब तक जमा रहता हैं जब तक उसे मल के रूप में शरीर से निकाल नहीं दिया जाता. यही कारण है कि आंतों का स्‍वस्‍थ होना बेहद आवश्यक है. अब तक आप ये समझ ही चुके होंगे कि हमारे शरीर में आंत आहार नली का ही एक भाग है जो कि पेट से गुदा तक फैली होती है. इसलिए इसके अस्‍वस्‍थ होने का सीधा असर हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है. आँतों को स्वस्थ रखने के लिए आइए इस लेख के माध्यम से आँतों की कमजोरी को दूर करने के कुछ तरीकों को जानें.

क्या है इसके कमजोरी का कारण?

जो व्यक्ति अपने दिनचर्या में सुस्ती भरा जीवन व्यतीत करता है उसके आंत के खराब होने की संभावना अधिक रहती है. लेकिन यदि आप नियमित रूप से योग व व्यायाम करेंगे तो आपके पाचनतंत्र की समस्या आपसे मीलों दूर रहती है. कुछ समय के लिए शाम और सुबह टहलना बेहद फायदेमंद होता है. आंतों को दुरुस्‍त रखने के लिए कम से कम 20 मिनट हर दिन किसी जोरदार तरीके को चुनकर

व्यायाम करें.

फाइबर युक्त खाद्यपदार्थ
वसायुक्त और संसाधित खाद्य पदार्थो से दूर रहें, ये कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को जन्‍म देती हैं. इसलिए इसे कम और फाइबर युक्त संतुलित खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें. सब्जियां, फल, अनाज और नट्स में मौजूद फाइबर आपकी आंतों को ठीक प्रकार से कार्य करने में मदद करता हैं, लेकिन फिटनेस बार और जूस ड्रिंक्‍स की तरह अपेक्षाकृत स्वस्थ नाश्ते आंतों के कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न करते हैं.

पानी की पर्याप्त मात्रा

अगर आप फाइबर की अधिक मात्रा में लेते हैं, और इसके साथ पर्याप्‍त पानी नहीं पीते हैं तो आपकी आंतों को नुकसान हो सकता है. इसलिए इन स्‍वस्‍थ अनाज और सब्जियों के साथ पानी की उचित मात्रा लेना कभी नहीं भूलना चाहिए.

विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना

डिटॉक्सिफिकेशन शरीर को सेहतमंद और तरोताजा रखने की एक प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया के जरिए शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकाला जाता है, ताकि आपको शरीर के तमाम विकारों से मुक्ति मिल सके. डिटॉक्‍स के लिए कैफीन युक्त ड्रिंक की बजाय बिना छना ताजे फलों का जूस लें. यह न सिर्फ बॉडी में विटामिन की कमी दूर करेगा, बल्कि फाइबर की जरूरत भी पूरी करेगा. इससे पेट साफ रखने में काफी मदद मिलती है. इसके अलावा, हर्बल टी भी डिटॉक्सिफाई करने का काम करती है. आप चाहें, तो ग्रीन टी और नींबू पानी भी ले सकते हैं.

प्रोबायोटिक्स

नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, आंत्र रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियों को दूर करने में प्रोबायोटिक्स बहुत मददगार होता है. हमारी आंत असंख्य बैक्टेरिया से भरी होती है. इनमें से कुछ हमारे शरीर के लिए रोग का कारण भी हो सकते हैं और जो अच्छे होते हैं, वे भोजन को पचाने का काम करते हैं तथा पाचन तंत्र को संतुलित रखने का काम करते हैं. प्रोबायोटिक भोज्य पदार्थों के सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली को सशक्त बनाया जा सकता है, इन्फेक्शन से बचाव किया जा सकता है. प्रोबायोटिक मुख्यत: डेयरी प्रोडक्ट में ही होता है, जैसे दूध व दही.

आराम करें

शायद यह सबसे महत्‍वपूर्ण है. आपकी आंत सचमुच एक दूसरा मस्तिष्क होता है - शरीर में मौजूद लगभग 95 प्रतिशत सेरोटोनिन आपके आंत्र पथ को अपनी एक अलग मस्तिष्क संबंधी प्रणाली में रखता है. इसलिए आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मस्तिष्‍क का स्‍वास्‍थ्‍य होना जरूरी है. आपने नोटिस किया होगा कि तनावग्रस्‍त या चिंतित होने पर अक्‍सर आपका पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है. शांत जगह पर सिर्फ 5 मिनट आंखें बंद करके सांस लेने पर आप अपनी आंतों में काफी सुधार कर सकते हैं.

नियमित रूप से खाओ, लेकिन लगातार नहीं

हर समय खाते रहने की आदत आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी नहीं होती है. क्‍योंकि आंतों को साफ, बैक्‍टीरिया और अपशिष्ट मुक्त करने के लिए, पाचन को आराम देने की जरूरत होती है. हर दो घंटे के बाद कुछ मिनट के लिए आपकी आंतें, मौजूद चिकनी मसल्‍स पाचन तंत्र के माध्‍यम से बैक्‍टीरिया और अपशिष्‍ट को बाहर निकालती है. लेकिन खाते समय यह प्रक्रिया रूक जाती है. इसलिए आंतों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दो भोजन के बीच थोड़ा सा अंतराल होना जरूरी होता है.
 

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Cancer Screening - Why, In Whom, When? And How?

Oncologist, Panchkula
Cancer Screening - Why, In Whom, When? And How?

WHY ? CANCER SCREENING- Checking for cancer in people who have no symptoms is cancer screening .Can help doctors find and treat several type of cancers early, before they cause symptoms. Early detection is important because when abnormal tissue or cancer is found early, it may be easier to treat .By the time symptoms appear, cancer may have begun to spread and be harder to treat.

In Whom? - In Diseases where following principles can be followed like Disease should be important health problem in terms of frequency .Natural history of disease presents window of opportunity for early detection. Effective treatment should be available that favorably alters natural  history of disease. Treatment should be more effective if  initiated earlier than during the  symptomatic  stage .Suitable screening test - Cheap/Easily Available/Reproducible/Socially Acceptable

Caution!! Easier Said than Done due to False positive results  - anxiety /unwanted additional tests False negative results - false reassurance, leading to delays in diagnosis

Over-diagnosis - cancer detected was slow growing and would not have harmed that person in his or her lifetime

Some screening tests may cause bleeding or other health problems – Sigmoidoscopy/Colonoscopy Cost burden on healthcare/ Radiation Exposure  of  some tests / Incidental Lesions

When? & How? - In cancers like Breast,Prostate,Colon and Cervix 

 

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आइये जानें क्या है व्यक्तित्व व सेक्स के बीच संबंध!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Allahabad
आइये जानें क्या है व्यक्तित्व व सेक्स के बीच संबंध!

आइये जानें क्या है व्यक्तित्व व सेक्स के बीच संबंध
                

यौन इच्‍छा आदमी की जरूरत है और मनोविकार उसमें बाधा। व्‍यक्तित्‍व विकार यानी कि पर्सनालिटी डिसार्डर ऐसी बीमारी है जिसमें आदमी अपनी शख्सियत भूल जाता है। इसमें आदमी अपने व्‍यक्तिगत संबंधों को लेकर बहुत ही अनिश्चित हो जाता है। इस बीमारी से ग्रस्‍त लोग अपनी फीलिंग्‍स पर काबू नही रख पाते हैं। बीपीडी से ग्रस्‍त व्‍यक्ति में सेक्‍स को लेकर इस प्रकार के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त ज्‍यादा एक्‍साइटेड होना, ज्‍यादातर अलग-अलग पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाना, कई दिनों तक यौन संबंध बनाने की इच्‍छा न होना, अजनबियों से शारीरिक संबंध बनाना, रेप का शिकार होना आदि।
पर्सनालिटी डिसॉर्डर होने पर ऐसा भी हो सकता है कि आदमी के अंदर यौन संवेदनायें पैदा ही न हों और ऐसी स्थिति भी आ सकती है वह बार-बार सेक्‍स संबंध बनाने की इच्‍छा जताये । आइए हम आपको बताते हैं कि पर्सनालिटी डिसॉर्डर और सेक्‍स एक-दूसरे को कितना प्रभावित करते हैं ।
यह एक दिमागी बीमारी है जिसमें आदमी सोचने और समझने की शक्ति खो देता है । सामान्‍य शब्‍दों में कहा जाये तो व्‍यक्तित्‍व विकार ऐसा रोग है जिसमें आदमी सामान्‍य स्थितियों में भी बेतुकी बहस करता है ।
दूसरे की बातें गलत लगती हैं और आदमी अपनी बात को मनवाने की कोशिश करता है। व्यक्तित्व विकार का पता अक्सर भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से लगाया जा सकता है। व्यक्ति की भावनात्मक तरीके में प्रतिक्रिया व्यक्त करने की प्रवृत्ति अलग होती है।
व्‍यक्तित्‍व विकार से ग्रस्‍त आदमी अपनी भावनाओं पर काबू नही रख पाता है। सार्वजनिक जगहों पर इंटीमेसी दिखाने में भी उसे कोई दिक्‍कत नही होती है।
ऐसे लोग बड़ी जल्‍दी सेक्‍सुअल पार्टनर भी ढूंढ़ लेते हैं। अक्‍सर इस बीमारी से ग्रस्‍त लोगों के सेक्‍सुअल पार्टनर अलग-अलग होते हैं।
इस बीमारी से ग्रस्‍त लोग एक महिला या पुरुष के साथ यौन संपर्क बनाने से बचते हैं। ऐसे लोग एक पार्टनर के ज्‍यादा करीब भी आने की कोशिश नही करते हैं।
ऐसे लोगों को सेक्‍स आकर्षित नही कर पाता है । इस बीमारी से ग्रस्‍त लोग कई दिनों तक सेक्‍स संबंध भी नही बनाते हैं।
ऐसे लोग यौन इच्‍छा की पूर्ति के लिए ज्‍यादातर अजनबियों के प्रति आकर्षित होते हैं । महिलायें हर बार नए पार्टनर की तलाश करती हैं।
बार-बार एक जैसा माहौल और पुराने लागों की संगत से दूर भागते हैं। पुरानी जगहों पर बार-बार जाने से बचते हैं ।
व्‍यक्तित्‍व विकार से ग्रस्‍त लोग एकांत गतिविधियों में लिप्‍त रहना पसंद करते हैं। लोगों के संपर्क में आने से कतराते हैं और मेलजोल करने से बचते हैं।
इस बीमारी से ग्रस्‍त आदमी को सेक्‍स क्रियायें उत्‍तेजित नही करती हैं क्‍योंकि दिमाग काम करना बंद कर देता है और यौन संकेतों को समझने में दिक्‍कत होती है।
बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी से ग्रस्‍त लोग यौन संबंध बनाते वक्‍त अचानक ज्‍यादा एग्रेसिव हो सकते हैं और पार्टनर का रेप भी कर सकते हैं।
व्‍यक्तित्‍व विकार से ग्रस्‍त महिलायें अक्‍सर किसी अजनबी आदमी से रेप का शिकार होती हैं क्‍योंकि वो अपनी भावनाओं को काबू नही कर पाती और अनजान व्‍यक्ति यौन संबंध बना लेती हैं।
ऐसे लोग होमोसेक्‍सुअल गतिविधियों में भी लिप्‍त रहते हैं। ऐसी स्थिति महिलाओं में ज्‍यादा देखी जाती है। महिलायें पुरुषों की तुलना में महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाती है 
बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी से ग्रस्‍त लोग रिश्‍तों को ज्‍यादा दिनों तक बनाये रखने में सफल नही होते हैं। मानसिक विकार के कारण ऐसे लोगों में अलगाव बहुत जल्‍दी हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलायें इस बीमारी का ज्‍यादा शिकार होती हैं ।

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Premature Ejaculation!

MD - General Medicine
Sexologist, Delhi
Premature Ejaculation!

Premature ejaculation (also known as early discharge or quick orgasm, early fall, Shigra-patan) is one of the most frequent, of sexual disorders in the male and is characterized by sudden ejaculation of the semen, just prior to or immediately after vaginal penetration during intercourse (before one wishes or before he could satisfy the female partner). Approximately 10% to 30% people of all age group suffer with quick semen discharge. Premature or 'before time' in other words, is a condition where the man has no voluntary control over his ejaculation. He is quick on the trigger once he starts the coitus. This is a very frustrating disorders of male sexual function in which man feels totally helpless. This leads to bitterness in husbands & wife relationships. For the man, lack of control of his body functioning leaves him feeling unsure of himself. His pleasure is often decreased by the abrupt early discharge. Eventually his preoccupation with trying to postpone ejaculation will hinder his ability enjoy himself to sexual pleasure. When a man is, feeling inadequate, and ejaculating fast, the woman will probably be left unsatisfied. Her frustration will only increase the negative pattern. This is an easily treatable condition. 

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Celebrating Festivals With A Pinch Of Good Health!

MD- Homoeopathy
Homeopath,
Celebrating Festivals With A Pinch Of Good Health!

​​​​​​​In the upcoming festive season enjoy the celebration, let me take care of your health with a few simple tips and medicines.

The festive season is about to start with pomp and splendour and so is your preparation; however, your health should not be ignored. While you take care of your diet and exercise, a few homoeopathic medicines can help you enjoy your festivities and celebration with fervour without worries about your health.

​​​​​​​Taking care of your little ones

The most excited of us all are the children during this time; be it food or the random fun during the celebrations. They may get easily affected and fall sick. A simple close watch on hygiene and regular hand washing can avoid cough, cold or throat infections. Children also tend to gorge on the festive food being completely ignorant of the consequences including indigestion. Parents should see to it that the children eat only warm and properly cooked food, only when hungry. The outside or the roadside food for children may further lead to diseases, like diarrhoea, spoiling the fun for them. Do not stop your child from eating sweets; educate them about the proper way of brushing the teeth and oral hygiene so that the child does not develop a toothache. Parents and elders around children must also protect the children from burn injuries, common during Diwali.

Throat infection, running nose and cough

Bio-combination 5 to prevent respiratory infections, 4 tablets twice a day in the first two days of symptoms. Allium Cepa 30, 6 pills twice a day for running nose for 4 days.

Indigestion

Carbo Veg 30, 6 pills one dose per day for 5 days.

Diarrhoea

Arsenicum Album 30, a single dose of 6 pills for 3 days.

A toothache

Mag Phos 200, a dose of 6 pills, four times before every meal, for 5 days, Chamomilla 30, 5 pills every half an hour, only 4 doses to reduce the pain immediately.

Injuries

Cantharis ointment for minor burns. Cantharis 30, 6 pills every two hours for 1 day to help prevent blister formation and reduce the pain, consult your doctor for wound management.

​​​​​​​The multi-tasking ladies

Leading the charge of the festive preparations, the lady of the house neglects her health. Continuous exertion and the hard work of hosting the guests can be tiring, leading to body ache and muscle soreness. Learn the art of planning and delegating tasks to all the family members. Fasting during the festivals and the anxiety can lead to weakness and headache; keep yourself hydrated and take enough rest. Don’t forget to eat fruits in your diet to keep yourself healthy while you fast.

Many women worry about their menstrual cycles during the festive seasons; interfering with nature and postponing your cycles can lead to heavy bleeding. Meditation and yoga can help you tackle the physical and the mental stress, helping you feel relaxed and enjoy the celebrations.

To look beautiful, maintain a healthy lifestyle even during the festivities; a bit of makeup will help you look good, perhaps, but staying alive from within is essential. Avoid cosmetics that may harm your skin and hair. Never forget to remove your make up with a make-up-remover, cleanse and moisturise the skin it before you go to sleep.

Body ache and muscle soreness

Arnica 200, 6 pills twice a day 2 days before the celebrations,continue if needed uptil 8 days.

Headache

Iris V 30, 6 pills thrice a day will help ameliorate a headache for 5 days . Kali Phos 30, a single dose of 8 pills for 8 days, at night for a good sleep, and to tackle anxiety.

Weakness and tiredness

Five Phos 6X, 4 tablets thrice a day to help you feel and look fresh for 10 days.

Heavy menstrual bleeding and the pain

Secale Cor 30, 6 pills four times a day to control bleeding; continue until the bleeding reduces for 3 days. Viburnum Opulus 30, 6 pills thrice a day for 3 days to help manage the pain.

Skin rashes and eruptions

Bovista 30, 6 pills thrice a day for 7 days to help clear up the eruptions. Calendula mother tincture, 15 drops per day in half a glass of water for 10 days, for clear skin.

​​​​​​​Grandmas and grandpas, don’t hold back

We all are sensitive to noise and air pollution; avoid the areas of excessive noise and air pollution. Engage with children by teaching them rangoli, cooking, drawing, making handicrafts for the festival to move them away from noisy parties and polluting firecrackers. The engagement will keep you active and keep away a headache and annoyance. If you are asthmatic, avoid the incense-sticks at home and switch on the exhaust fans in the kitchen when deep-frying to prevent cough and breathlessness. If you suffer from BP and diabetes, you must not ignore your medication.

Headache, tiredness and annoyance

Natrum Mur 200, 6 pills a day for 2 days to control a headache which occurs due to noise exposure. Kali Phos 30, 8 pills at night for 5 days, to reduce the irritability and tiredness.

Cough and breathlessness

Ipecac 30, 6 pills a day for 2 days to avoid breathlessness in asthma. Antim Tart 30, 6 pills thrice a day for 3 days, if a cough with expectoration develops. Blatta Orientalis 6C, 6 pills thrice a day for 2 days, to prevent wheezing.

Irritability

Kali Phos 6X, 4 tablets twice a day for 5 days.


 

 

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Egg Myth Vs Facts!

M.Sc. in Dietetics and Food Service Management , Post Graduate Diploma In Computer Application, P.G.Diploma in Clinical Nutrition & Dietetics , B.Sc.Clinical Nutrition & Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Mumbai
Egg Myth Vs Facts!

Egg Myth Vs Facts!

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Eating Disorders - How To Manage Them In Case Of Diabetes?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MD - Internal Medicine, DM - Endocrinology, DNB (Endocrinology)
Endocrinologist, Pune
Eating Disorders - How To Manage Them In Case Of Diabetes?

Diabulimia is a type of eating disorder in which patients of Type 1 diabetes take less amount of insulin purposely, in order to lose weight. These patients have excessive concerns related to body weight and body shape, and a disturbed body image emerges (regarding oneself overweight despite a normal or reduced body weight). These patients attribute too much importance to body weight and body shape and fear of gaining weight. 

Our body requires insulin for moving glucose from the blood to the cells. In type 1 diabetes patients, the pancreas stop producing insulin and glucose gets stored in our bloodstream. Kidney excretes excess glucose leading to increased urination. The body gets devoid of glucose and the calories associated with it and a rapid loss of weight occur.  Once the patient is started on insulin they develop weight gain. Patient with disturbed body image stops insulin in order to lose weight. Patients develop binge eating,  with more emphasis on sugar and carbohydrate enriched foods. The excess sugar gets out of the body by urinating.
Symptoms including excessive thirst, increased water intake, increased urination, and weakness are observed in the early period, irreversible findings including neuropathy, retinopathy, nephropathy, and osteoporosis, which occur in poorly controlled diabetics, are observed in the long term. It has been proven by research that almost 30% of type 1 diabetes patients are the ones who abstain from or avoid using insulin in order to lose weight. This habit leads to the risk of many other fatal diseases which may be permanent in nature.

Prevention

Diabulimia is more common among teenage girls who suffer from type 1 diabetes and are generally obsessed with body image. Proper patient education can help a lot in these patients.  It is advised not to neglect your insulin.
 

I am having difficulties in gaining muscle mass. What should I do to gain a good amount of muscle?

MD - Physical Medicine & Rehabilitation
General Physician, Ranchi
I am having difficulties in gaining muscle mass. What should I do to gain a good amount of muscle?
There is no shortcut you have to take good deit and specific exercises. It will take 5 to 6 months. Take care.
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Know The Types Of Lung Diseases!

Internal Medicine Specialist, Delhi
Know The Types Of Lung Diseases!

Lung diseases are some of the most common diseases suffered by human beings throughout the world. Smoking and infections are responsible for most lung diseases. The lungs perform one of the most important functions of the body. It is also one of the most active organs in the human body and hence lung problems can arise due to problems in any other part of the body. Some of the most common and infectious lung diseases are discussed below- 

1. Asthma
Asthma is a common long term disease which is characterized by reversible airflow obstruction and bronchospasm. The symptoms of asthma include coughing, shortness of breath and tightness of chest. These symptoms may occur frequently during a day and depending on the person, it may become worse during night or during a certain exercise.

2. Pneumonia
Pneumonia is another common lung problem which is suffered due to inflammation in the microscopic air sacs in the lungs known as alveoli. Symptoms of pneumonia include dry cough, chest pain, breathing problem and fever. Pneumonia is caused most commonly by viruses or bacteria. It is also caused by certain medications and conditions which are popularly known as autoimmune diseases. There are a number of vaccines available to prevent certain types of pneumonia. Other methods include hand washing and refraining from smoking.

3. Tuberculosis
Tuberculosis is a very infectious disease which is caused by the bacteria Mycobacterium tuberculosis. Although tuberculosis generally affects the lungs, but it has been known to affect other parts of the body as well. Symptoms of tuberculosis include cough containing sputum with blood, night sweats, fever and weight loss. Air is an active medium for spreading tuberculosis. This happens when people who already have tuberculosis sneeze, cough or speak. Infection occurs more in those who have HIV/AIDS or those who smoke. Prevention of tuberculosis includes staying away and keeping those who are at high risk, early detection and treatment and vaccination.

4. Mesothelioma
Mesothelioma is a type of cancer which affects the lungs. It affects the lining of the lungs and chest wall. Symptoms of mesothelioma include shortness of breath, swollen abdomen, cough, chest pain, weight loss and general lethargy. Mesothelioma is caused mainly due to exposure to asbestos. Those people who mine asbestos, produce products from asbestos, work with asbestos products are at high risk. Mesothelioma also results from genetical problems and due to infection caused by the simian virus 40.

5. Pulmonary Embolism
This is a disease caused due to blockage of an artery in the lungs by a substance which has travelled from another part of the body by the bloodstream. Symptoms of this disease include chest pain, breath shortness and coughing up of blood. There may also be signs of blood clot in the legs.

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