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Sanjeevan Medical Research Centre PVT LTD

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24, Ansari Road, Darya Ganj, Daryaganj, Landmark: Near Daryaganj Police Station, Delhi Delhi
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Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well....more
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Sanjeevan Medical Research Centre PVT LTD is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Anjali Srivastav, a well-reputed Gynaecologist, practices in Delhi. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 81 patients.

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11:00 AM - 01:00 PM

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24, Ansari Road, Darya Ganj, Daryaganj, Landmark: Near Daryaganj Police Station, Delhi
Daryaganj Delhi, Delhi
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Palm Oil (Taad ka tel) Benefits And Side Effects In Hindi - ताड़ के तेल के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Palm Oil (Taad ka tel) Benefits And Side Effects In Hindi - ताड़ के तेल के फायदे और नुकसान

ताड़ एक ऐसा पेड़ है जो अपने औषधीय गुणों की ज्यादा लोकप्रियता नहीं है. ये लाल या नारंगी रंग का होता है. इसकी दो किस्में हैं अमेरिकन ताड़ का तेल और अफ़्रीकी ताड़ का तेल. ताड़ के तेल में बीटा कैरोटिन का उच्च स्तर पाया जाता है. इसमें संतृप्त वसा की मात्रा काफी कम होती है. इससे एलडीएल कोलेस्ट्राल को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे कि ह्रदय के विकारों को रोकने में मदद मिलती है. कुछ देशों (दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया) में इसका इस्तेमला भोजन बनाने के लिए भी किया जाता है. ट्रांस वसा की उपस्थिति के कारण लोग अब इसे अपने आहार में इस्तेमाल करने लगे हैं. खराब कोलेस्ट्राल वाले आहार के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. आइए ताड़ के तेल के फायदे और नुकसान पर एक नजर डालें.

1. कैंसर के उपचार में
कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों के उपचार में ताड़ के तेल की सकारात्मक भूमिका दिखाई पड़ती है. दरअसल इसमें टेकोफेरोल नाम का एक तत्त्व पाया जाता है. असल में ये विटामिन ए का ही एक रूप है. ये प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करता है. मुक्त कणों को नष्ट करने वाला ये एक शक्तिशाली रक्षात्मक यौगिक है. इससे कैंसर की कोशिकाओं के विकास में मदद मिलती है. ताड़ के तेल का नियमित सेवन आपको कैंसर के खतरे से बचा सकता है.
2. आँखों के लिए
इसमें बहुत सारे एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो कि आँखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक होते हैं. ये सभी एंटीऑक्सिडेंट्स कोशिकाओं के उपापचय के लिए बेहद आवश्यक हैं. इसके अलावा एंटीऑक्सिडेंट्स मुक्त कणों को नष्ट करके भी आँखों से सम्बंधित कुछ समस्याओं का निदान करते हैं. ये धब्बेदार अधःपतन और मोतियाबिंद की समस्या को रोकने का भी काम करते हैं.
3. गर्भावस्था के दौरान
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगते हैं. उन्हें पोषक तत्वों की जबरदस्त आवश्यकता होती है. इस दौरान जच्चा-बच्चा को विटामिन की भी आवश्यकता होती है. ताड़ के तेल में वित्ममिन ए, डी, और ई पाया जाता है. ये सभी विटामिन उन दोनों के काम आती है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
4. ऊर्जा बढ़ाने में
ताड़ के तेल में पाया जाने वाले तमाम पोषक पदार्थों में से एक बीटा कैरोटिन भी है. ताड़ के तेल का रंग लाल या नारंगी इसके कारण ही होता है. ये शरीर के ऊर्जा स्तर को सुधार करने और हार्मोनल संतुलन बढ़ाने का काम करता है.
5. दिल के लिए
ह्रदय के लिए भी इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. क्योंकि इसमें अच्छा कोलेस्ट्राल और खराब कोलेस्ट्राल उच्च मात्रा में पाए जाते हैं. शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए भी ये आवश्यक होता है. कोलेस्ट्राल में संतुलन बनाकर ये ह्रदय से सम्बंधित समस्याओं को रोकता है.

ताड़ के तेल के नुकसान

  • ताड़ के तेल का आधिक मात्रा में सेवन करने से ह्रदय से संबंधित समस्याओं में वृद्धि हो सकता है.
  • किसी व्यक्ति में ये उच्च रक्तचाप से संबंधित समस्या भी उत्पन्न कर सकती है.
  • इसे पचाने में भी बहुत मुश्किल आती है. इसलिए कमजोर पाचन वाले व्यक्ति इसके इस्तेमाल से बचें.
     
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Clove Oil (Laung ka Tel) Benefits And Side Effects in Hindi - लौंग के तेल के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Clove Oil (Laung ka Tel) Benefits And Side Effects in Hindi - लौंग के तेल के फायदे और नुकसान

औषधीय गुणों से भरपूर लौंग का प्रयोग कई बिमारियों के उपचार में किया जाता है. लौंग के तेल के फायदे कई परेशानियों को दूर करने में सहायक होते हैं. लौंग का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता रहा है. भारतीय और चीनी सभ्यताओं में इनके इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है. यहाँ तक कि अब भी बहुत सारे चीनी और भारतीय व्यंजनों में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीमाइक्रोबियल, लोहा, एंटीफंगल और उतेजक गुण मौजूद हैं. इसके अलावा इसमें विटामिन ए, सी और कई खनिज जैसे कि फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, लोहा और हाइड्रोक्लोरिक एसिड पाए जाते हैं. लौंग के तेल से कई विकारों को दूर किया जाता है. आइए लौंग के तेल के फायदे और नुकसान को जानें.

1. प्रतिरक्षा तंत्र की मजबूती में
लौंग के तेल में प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करने की क्षमता होती है. इसमें मौजूद एंटीवायरल गुणों और रक्त को शुद्ध करने की क्षमता के कारण ये कई बीमारियों से बचाता है. इसके अलावा लौंग में एंटीऑक्सिडेंट भी पाया जाता है जो कि मुक्त कणों को शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं.
2. कानदर्द के उपचार में
कान दर्द के उपचार में भी लौंग का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए गर्म लौंग के तेल में तिल का तेल मिलाकर कान में डालना होता है. ऐसा करने से तुरंत लाभ मिल सकता है.
3. दांतों के लिए
लौंग का इस्तेमाल दांतों के लिए प्राचीन काल से ही होता आ रहा है. इसका तेल दांतों को दर्द, माउथ अल्सर और किटाणुनाशक के रूप में काफी उपयोगी साबित होता है. इसमें कैविटी के विरुद्ध और जलन को कम करने का गुण भी होता है.
4. पाचन के लिए
लौंग के अनेकों फायदों में से एक ये भी है कि इससे मोशन सिकनेस, अपच, पेट का फुलना और हिचकी जैसी समस्याओं का निदान किया जा सकता है. इसे कई खाद्य पदार्थों में मिलाकर खाने के लिए इस्तेमाल भी किया जाता है.
5. रक्त शर्करा के नियंत्रण में
रक्तशर्करा के नियंत्रण में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए ये शुगर से पीड़ित लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होता है. इसे एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
6. त्वचा के लिए
इसमें त्वचा से संबंधित कई समस्याओं से बचाने की क्षमता भी होती है. ये त्वचा पार आने वाले झुर्रियों को ख़त्म करने और त्वचा के रक्त प्रवाह को बढ़ाने में भी काफी मददगार होता है. इससे बढ़ते उम्र के लक्षणों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है.
7. तनाव से मुक्ति में
स्वभाव से कामोत्तेजक लौंग का तेल एक अच्छे तानव उन्मुलक के रूप में कार्य करता है. इससे मानसिक थकान को दूर करने के साथ ही मन को ताजा किया जा सकता है. अनिद्रा और अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए ये काफी लाभदायक है.
8. रक्तपरिसंचरण में
रक्तपरिसंचरण में वृद्धि होने से अंग प्रणालियों का ऑक्सिजनिकरण भी बढ़ता है. जिससे शुगर जैसी बिमारियों में भी राहत मिलती है. इससे विषाक्तता को दूर करने में भी मदद मिलती है. उपापचय को भी बढ़ाने का काम करता है.
9. संक्रमण के उपचार में
लौंग के तेल में कट्स, फंगल संक्रमण, खुजली और घाव आदि के उपचार की क्षमता होती है. इसे डंक के उपचार में भी प्रयोग किया जा सकता है. इस प्रकार ये कई तरह के संक्रमणों से बचाने का काम करता है.
10. मतली और सरदर्द में
उल्टी, मतली या सरदर्द जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए भी लौंग के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा इसे आप अरोमाथेरेपी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे मोर्निंग सिकनेस में भी आराम मिलता है.

लौंग के तेल का नुकसान

  • इसके प्रयोग से कुछ लोगों को एलर्जी की शिकायत हो सकती है.
  • ब्लड शुगर के मरीजों को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए.
  • गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताएं इसका इस्तेमाल न करें.
     
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Post Pregnancy Care

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, FNB Reproductive Medicine, MRCOG
Gynaecologist, Mumbai
Post Pregnancy Care

Maintaining a healthy and balanced diet post pregnancy is as equally important. Abstain from alchohol, if you are breastfeeding your baby.

Healthy Pregnancy

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, FNB Reproductive Medicine, MRCOG
Gynaecologist, Mumbai
Healthy Pregnancy

2 pieces of fruits and 5 servings of vegetables is the way to go to maintain a healthy pregnancy.

Health Tip

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, FNB Reproductive Medicine, MRCOG
Gynaecologist, Mumbai
Health Tip

Taking contraceptive pills might reduce the desire for sexual involvement.

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Women's Health

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS, FNB Reproductive Medicine, MRCOG
Gynaecologist, Mumbai
Women's Health

Drinking lots of water - atleast 2 litres everyday - everyday during periods helps in maintaining the water level in your body and fastens the digestive process while taking care of the hormonal changes.

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यीस्ट संक्रमण के कारण , लक्षण और उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Allahabad
यीस्ट संक्रमण के कारण , लक्षण और उपचार

यीस्ट संक्रमण के कारण , लक्षण और उपचार 

शरीर की प्रणाली असंतुलित होने पर यीस्‍ट की समस्‍या होती है। इसमें योनि में जलन, खुजली, गाढ़ा सफेद डिस्चार्ज आदि की समस्‍या होने लगती है। लेकिन अपनी कुछ आदतों को बदलकर आप इस समस्‍या से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं।
1. यीस्‍ट संक्रमण

शरीर में यीस्‍ट के बहुत अधिक बढ़ जाने से बहुत सी महिलाओं को यीस्‍ट संक्रमण की समस्‍या हो जाती है। आमतौर पर यह तभी होता है जब आपके शरीर की प्रणाली असंतुलित हो जाती है। और आपके शरीर में जीवाणु और यीस्ट का संतुलन बिगाड़ कर यीस्ट को बहुत अधिक बढ़ा देता है। यीस्ट इन्फेक्शन में खुजली और दर्द होता है लेकिन इसका इलाज आसान है और जल्दी ही इससे छुटकारा भी मिल जाता है।
2. यीस्‍ट संक्रमण कैसे होता है ?
आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को हाई ब्लड शुगर की वजह से यीस्ट इन्फेक्शन की समस्या होती है। एचआईवी पॉजिटिव होने पर डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीफंगल दवाओं के कारण भी यीस्ट इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा ज्‍यादा चीनी के सेवन व इम्यून सिस्‍टम की कमजोरी के कारण भी यीस्‍ट संक्रमण बढ़ जाता है।
3. यीस्ट संक्रमण के लक्षण क्या हैं ?
योनि या इसके आसपास खुजली, गाढ़ा सफेद डिस्चार्ज, पेशाब करते वक्त या सेक्स के दौरान योनि में जलन और दर्द, योनि  के आस पास की त्वचा का लाल होना, बदबूदार डिस्चार्ज आदि इसके लक्षण है। लेकिन जब यह बहुत अधिक बढ़ जाता है तो इन जगहों पर खुजली और तकलीफदेह लक्षण नजर आने लगते हैं। यीस्ट इन्फेक्शन के बहुत अधिक बढ़ जाने पर इन जगहों पर खुजली और तकलीफदेह लक्षण नजर आने लगते हैं। लेकिन अपनी कुछ आदतों को बदलकर आप इस समस्‍या से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं।
4. यीस्‍ट संक्रमण से बचाव
संक्रमण होने पर बिना किसी शर्म या संकोच के फौरन स्त्री रोग विशेषज्ञा से मिलकर इस को को सुनिश्चित करें कि योनि में खुजली या जलन की असली वजह क्या है। क्‍या यह वाक्‍य में यीस्‍ट संक्रमण है।
5. कंडोम का इस्‍तेमाल
यीस्‍ट संक्रमण सेक्‍स संबंध से भी फैल सकता है, इसलिए अगर आप या आपका साथी दोनों में से कोई भी इससे पीड़ित हो तो सेक्‍स के समय बिना हार्मोन वाले गर्भनिरोधक उपायों, जैसे कंडोम, आईयूडी डायाफ्राम विधियों का प्रयोग करें और ओरल सेक्‍स से परहेज करें। इसके अलावा अपने साथी को सेक्‍स से पहले अपने प्राइवेट पार्ट को और हाथों को अ‍च्‍छी तरह धोने के लिए कहें।
6. साफ-सफाई का ध्‍यान रखें
योनि के अंदरूनी और बाहरी हिस्सों को अच्छी तरह धोएं, जहां यीस्ट के पनपने की संभावना सबसे अधिक होती है। शॉवर या स्नान करने के बाद अपनी योनि के आस-पास की जगह को अच्छी तरह सुखाएं। टायलेट के प्रयोग के बाद योनि से गुदा तक अच्छी तरह सुखाएं। ऐसी जगह पर कठोर साबुन, परफ्यूम या टाल्कम पावडर का प्रयोग न करें।

Donor Egg/Donor Embryo

DNB (Obstetrics and Gynecology), MBBS
IVF Specialist, Delhi
Donor Egg/Donor Embryo

Donor Egg/ Donor Embryo

If you’re over 40 or can no longer produce healthy eggs, donor eggs can help you carry and deliver a baby. This is also a good option if you’re at risk for passing a genetic disease such as Tay-Sachs disease or sickle cell anemia to your child.

Treatment: What to expect

  • If you decide on an anonymous egg donor, you can find her through your fertility clinic. You’ll usually be able to choose based on her physical characteristics, ethnic background, educational record, and occupation. Most donors are between 21 and 29 years old and have undergone psychological, medical, and genetic screening. Ask how your clinic screens candidates ” some do less extensive tests and background checks than others. If you choose to use donor embryos, you can either pick unrelated egg and sperm donors or use a frozen embryo donated by a couple that had extras.
  • Once you pick a donor, both you and she will take birth control pills to get your reproductive cycles in sync ” she needs to ovulate when your uterine lining can support an embryo. She’ll also take a fertility drug to help her develop several mature eggs for fertilization, while you will receive estrogen and progesterone to prepare your uterus for pregnancy. Once her eggs are mature, your doctor will give her an anesthetic and remove her eggs from her ovaries by inserting a needle through her vaginal wall using an ultrasound for guidance.
  • From here on out, the procedure is just like that of in vitro fertilization (IVF). Your partner’s sperm or a donor’s sperm will be combined with your donor’s eggs in a dish in a laboratory. Two to five days later, each of the fertilized eggs will be a ball of cells called an embryo. Your doctor will insert two to four embryos into your uterus through your cervix using a thin catheter. Although it’s not a common practice, many experts say couples should consider transfer of a single embryo to avoid the risk of twins or triplets. Extra embryos, if there are any, may be frozen in case this cycle doesn’t succeed. If the treatment does succeed, an embryo will implant in your uterine wall and continue to grow into a baby. In about 40 percent of ART pregnancies using donor eggs, more than one embryo implants itself and women give birth to multiples.

My gf and I tried sex for the 1st time when I try to insert it into her vagina I can't make it because she was in so much pain I try for 2-3 times using Condom I didn't even ejaculate is there any fear of her pregnancy from this? We tried at 20th Oct After 10 days later she gets her period? On 30th Nov but after a 40 days still she cannot gets her period and she has irregular periods some time she misses whole month what to do And Please advise.

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery
General Physician, Bangalore
Hello I understand your problem even if you have used condoms chances of she becoming pregnant is there but don't panic take a pregnancy test kit n check with her early morning first urine. If you have any doubts or if you feel like discussing anything with me you can text any tym.
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4 Stages Associated To Syphilis

MD - Physician
Sexologist, Coimbatore
4 Stages Associated To Syphilis

Syphilis is one of the most common STD and can affect both men and women. This bacterial infection can be easily treated, but if left unattended it can cause serious problems. Syphilis can be caught by mere skin to skin contact with an infected person’s genitals or mouth. Hence even if you do not have intercourse with an infected person, you can still get infected from them. If a woman who is pregnant gets infected with this disease, she could pass it on to her unborn child as well.

A person suffering from syphilis may not always exhibit symptoms of the disease. This disease goes through active as well as dormant phases with symptoms being present only in the former. Even its dormant phase, this disease can be transmitted from one person to another.

There are four stages of syphilis and each of them have their own symptoms.

  1. Primary stage: In its first stage, syphilis is marked by the presence of open sores called chancres. This can occur in the mouth, genitals are or around the anus. It can also be seen in other parts of the body where bacteria may have entered the body. These chancres are painless and may be accompanied by a swelling of the lymph nodes around it. This is the most contagious stage of the disease. Without treatment, these sores will resolve themselves in 3-6 weeks but the syphilis bacteria itself will remain in the body.
  2. Secondary stage: Anywhere between 2 weeks to 12 weeks after coming in contact with the bacteria, this infection may move into its second phase or secondary stage. At this point, you will notice a rash on your skin. This rash can be seen as a collection of small, flat or raised skin sores along with small, open sores on mucous membranes. These sores may contain pus. Dark-skinned people may notice that these sores are lighter than the surrounding skin. Along with this, the patient may also have fever, a sore throat, headaches, weakness, irritability and suffer from weight loss.
  3. Latent stage: Once the rash clears, this disease moves into its dormant or latent phase. This is also known as the hidden stage and can last anywhere from 1 to 20 years. It is very difficult to diagnose syphilis in this stage as there are no visible symptoms.
  4. Late (tertiary) stage: If the disease is not diagnosed and treated by the time it reaches this stage, it can cause a number of serious health problems. This includes blindness, cardiovascular problems, mental disorders and even death.
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Today during sex with my wife, condom broken. After ejaculating immediately she went to bathroom and sperm came out. Her periods are came 15 days back. What are the chances of pregnancy. When she can take ipill or unwanted 72. What are the side effects?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Zirakpur
Today during sex with my wife, condom broken. After ejaculating immediately she went to bathroom and sperm came out. ...
Immediate use of unwanted may spoil the ground for fertilization but you can never predict accurate outcome. Chances after 20 days of bleeding are almost null. Indiscriminate use of med also may not be permitted.
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I'm thyroid patient takes daily dose of 25 mg. I did unprotected sex and took unwanted 72 ipill within 24 hours, so it's already 4 weeks. Am I pregnant? Please suggest.

BHMS
Homeopath, Ahmedabad
I'm thyroid patient takes daily dose of 25 mg. I did unprotected sex and took unwanted 72 ipill within 24 hours, so i...
Please checkup urine with prega card, it shows you result, if there is any further query .than you can take online consultation.
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I am taking infertility allopathy treatment for pcod for last 2 years but there is no improvement my amh level is very high 7.i want to know about the homeopathy treatment for pcod is it helpful.

BHMS
Homeopath, Bhopal
I am taking infertility allopathy treatment for pcod for last 2 years but there is no improvement my amh level is ver...
Dear Lybrate User, Polycystic Ovarian Syndrome is curable with the Homeopathic mode of treatment. Homeopathic treatment for polycystic ovarian syndrome is very safe and free from any side effect. Which Homeopathic medicine is required to extract the disease from its roots varies from case to case. Both the physical and mental spheres of the patient are thoroughly investigated while prescribing the Homeopathic medicine. The complete cure of PCOS is a time-consuming process and it cannot be expected in a few days. It requires complete observation regarding the change of symptoms in the patient and frequent clinical follow-ups. For further information and Consultation you can consult online. Take Care.
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I am getting marriage at my first night is it necessary that I have to wear a condom or I go for direct because I heard that without a condom it may cause STD due that I am afraid so please suggest.

D.M.S.
Homeopath,
Obviously use condom as it not only saves you from any STD but most importantly it will cut down the chances of unwanted pregnancy. But whenever both of you (husband and wife) start thinking of a baby, stop using it and forget about STD, in most of the cases, it has been seen that if someone who is having sex with one partner, then chances of STD is very very less.
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I'm 42 years old female with 2daughters 1 age 16 and other 9. I got my periods after 3 months through medicine. Today is my sixth day. I have a drop of bleeding yet going on. Which will b best time for us to hav direct relation to prevent unwanted pregnancy.

BHMS
Homeopath, Bhopal
I'm 42 years old female with 2daughters 1 age 16 and other 9. I got my periods after 3 months through medicine. Today...
Dear Lybrate User, According to normal and regular Menstrual cycle since day 8 to day 19 are the higher risk period or fertile period after day 20 to till your next Menstrual cycle are safe periods you can enjoy sex. For making this calculation easy you can use app which are present in play store like cycle beads etc. For further information and details you can consult online. Take Care.
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Hello. Sir kal muje vagina se over discharge hua 2/3 bar din me bina kisi bjah sai. Sir kya problem hai jisse asa hua. Sir please advise

Practising Unani Physician
Unani Specialist, Coimbatore
Hello Do not worry. White discharge may common for ladies. Please make hygenic. Keep the body cool. Avoid non veg. Take oil bath once in two times a week.
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Simple Steps To Help You Say No!

B.A.(H)Psychology, M.A.Psychology, Ph. D - Psychology
Psychologist, Noida
Simple Steps To Help You Say No!

Many of us tend to comply with every single request that is put forward to us by our peers, family, or at the workplace by our superiors. We choose to take up more jobs than we can efficiently handle and put unnecessary stress on ourselves even at the cost of our time and well-being. Must we always do that? Why do we say yes?

People have the notion that saying no can come across as rude or uncaring. You may feel that you are letting someone down by turning down their request or risking a relationship when in reality, it has mostly to do with your self-confidence than your relationships with people. People who have low self-confidence tend to value their own needs less than the needs of others.

It may branch from overbearing parents, high expectations set by your peers and mentors or experiencing parenthood yourself and setting unreasonable standards for yourself. Childhood influences are usually the biggest cause of people always saying ‘yes’ all the time.

How to start saying say no?
If you want to take a step back and start saying no to make sure your own needs are valued, here’s what you need to do.

  1. Refuse politely, when it seems not possible: Do not overcomplicate responses and try to be as simple in your responses as you can be. If you are asked to do something, and you want to say no, try to be polite in your body language and state that it is not convenient for you at the moment and that you would rather get back to it later.
  2. Seek time before committing: The transition from saying ‘yes’ all the time to saying no does take time! Start to give yourself more time and ask people to get back to you later. This way you can begin to build more self-confidence and learn to say no over time. This also allows you to evaluate your response instead of immediately saying yes or no to the person asking the favor or task.
  3. Do not feel guilty: Deep down if you want to do a favor, you can go ahead with it, but you should also understand that it is okay to say no, and there is no need to associate guilt with it. You should set boundaries and allow people around you to understand how much favors they can ask you for instead of presenting you with an endless amount of favors from you.
  4. Set your boundaries: Refusal does not amount to rejection as you have just as much right to say ‘no’ as the person who is asking the favor from you. You are simply turning down a request, and in most situations, there is a middle ground for compromises where both you and the requester can be satisfied. If you have limited time to fulfill a request, let the person know and help out only as much as you can without overstepping your boundaries.

Bringing in these changes can help you be more self-confident, and at the same time enable you to say no when you need to without weighing yourself down with expectations and fear or rejection.

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Hot Or Cold Water Bath In Winter - Which Is Better?

Modern Allopathic System of Medicine
Ayurveda, Ahmedabad
Hot Or Cold Water Bath In Winter -  Which Is Better?

As the days become warm, you tend to turn the shower towards the cold water and as the days get cooler, bathing water usually gets warmer. A cold water shower can be refreshing in the summer. In the same way, a warm shower in the winter can be quite relaxing. However, have you ever thought about what is really good for you? Well, there is no hard and fast rule about which one is better. As a general rule of thumb, according to Ayurveda, hot water should be used to bathe the body and cold water should be used for the head. However, when you clearly have to choose between hot water and cold water, a number of factors have to considered, such as individual’s age, constitution, habits, diseases if any, season, etc.

Let’s take a closer look
Age: Young children and elderly people will get more benefit from warm to hot water bath. Teenagers and people up to the age of about 45-50 years can have a cold water bath. For students who need to be alert and be able to focus on their studies, a cold water bath is ideal.
Constitution: According to Ayurveda, there are three types of doshas; vatta, pitta, and kapha. If you have a pitta body type, you should bathe with cold water. On the other hand, if you have a vata or kapha body type, a hot water shower is much better.
Habits: Your habits can also influence the water temperature. If you like to bathe in the early morning, have a cold water bath. However, if you like to bathe in the evening, try a hot water shower. As the evening is dominated by the vata dosha, hence it is ideal. Similarly, if you like to exercise before your bath, you must bathe with hot water.
Diseases: If you are suffering from diseases caused by an imbalance of the pitta dosha, you should bathe with cold water. Such diseases include indigestion and liver disorders. If you are suffering from an imbalance of the vata or kapha dosha bathe with hot water. Diseases caused by the vata dosha imbalance include arthritis, joint pain and foot pain. Those caused by kapha dosha imbalance include respiratory diseases and allergies.

Some Ayurvedic practitioners also advise alternating between hot and cold baths. What is important is that you should not bathe with water that is either too hot or too cold as bathing with really hot water can disturb the pH level of the skin while bathing with water that is too cold can make you catch a cold.

In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!

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Jasmine Oil Benefits and Side Effects in Hindi - चमेली के तेल के फायदे और नुकसान

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Jasmine Oil Benefits and Side Effects in Hindi - चमेली के तेल के फायदे और नुकसान

चमेली का वैज्ञानिक नाम जैस्मिन ग्रैंडफ्लोरा है. लेकिन तेल जैस्मिनुम आफिसनाल से निकाला जाता है. वैज्ञानिक नाम वाले चमेली के फूलों की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है. इसके फूलों का इस्तेमाल हम पूजा-पाठ में करते आए हैं. लेकिन इसका औषधिय इस्तेमाल भी बहुत ज्यादा है. रोमांटिक सुगंध से परिपूर्ण चमेली के फुलों से निकलने वाला तेल कई स्वास्थ्यवर्धक तत्वों से युक्त होता है. चमेली के तेल में मुख्य रूप से बेंजाल्डीहाइड, इन्डोल, गेरानीयनोल, बेनोजिक एसिड, युजिनोल, बेन्जिल अल्कोहल, बेन्जिल बेंजोएट आदि होते हैं. चमेली के फायदे और नुकसान के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं के देखें.

1. अनिद्रा में
अनिद्रा में चमेली का तेल सकारत्मक भूमिका निभाता है. ये एक एंटीस्पास्मोडिक के रूप में काम करते हुए नींद की समस्या को ख़त्म करता है. इससे आप एक अच्छी और सुकूनभरी नींद ले पाते हैं जिससे कि अनावश्यक थकान भी मिटती है.
2. शीघ्रपतन में
इसमें कामोत्तेजक गुण भी पाए जाते हैं. इसलिए इसका सुगंध रोमांटिक एहसास देता है. इसके तेल के प्रयोग से शीघ्रपतन, नपुंसकता एवं अन्य कई यौन विकारों को दूर किया जा सकता है. शरीर के भीतर हार्मोन और रासायनिक प्रतिक्रियाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ता है.
3. शामक के रूप में
चमेली के तेल की सबसे बड़ी खासियत यही होती है कि ये मन और आत्मा को शान्ति प्रदान करता है. जिससे कि आप तनाव, झुंझलाहट और क्रोध आदि से बच सकते हैं और आपका मूड सही रहता है. इसमें सूजन और गठिया को भी दूर करने का लक्षण होता है.
4. प्रसव में
प्रसव के दौरान महिलाएं भयंकर पीड़ा से गुजरती हैं. चमेली के तेल में मौजूद गुणों की वजह से आप प्रसव के दौरान होने वाले इस दर्द से छुटकारा पा सकते हैं. दरअसल इसमें हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करने की क्षमता होती है. ये इस दौरान संकुचन को भी मजबूती प्रदान करता है.
5. घाव भरने के लिए
इसमें एंटीसेप्टिक और कीटाणुनाशक गुण भी मौजूद होते हैं. जिससे कि इसे बाह्य घावों में लगाने से घावों में सेप्टिक के विकास को रोकता है. इसके साथ ही ये टेटनस के संभावना को भी ख़त्म करता है. इसमें एंटीवायरल, फंगल, किटाणुनाशी और जीवाणुनाशी गुण भी पाए जाते हैं. इससे सर्दी-खांसी में भी राहत मिलता है.
6. त्वचा के लिए
चमेली का तेल एक तरह से सीक्रेटेंट का काम करता है और त्वचा को कई तरह के परेशानियों से दूर करता है. चमेली का तेल मुंहासे, घाव और फोड़े आदि को दूर करने के लिए भी चमेली का तेल काफी मददगार होता है.
7. गर्भाशय के लिए
गर्भाशय के सेहत के लिए भी चमेली का तेल काफी उपयोगी साबित होता है. क्योंकि इस दौरान ये कुछ ऐसे हार्मोनों को स्त्रावित कर देता है जो कि गर्भाशय के कार्यों को सुनिश्चित करता है. रजनोवृत्ति के बाद ये एस्ट्रोजेन के प्रवाह को भी सिमित करता है.
8. खांसी के उपचार में
चमेली के तेल की सहायता से आप सर्दी खांसी जैसी समस्याओं से भी निपट सकते हैं. ये खांसी के दौरान होने वाली कफ की समस्या को दूर करता है. इसके आलावा ये खांसी, सांस लेने की समस्या और ऐंठन आदि को भी ख़त्म कर सकता है.
9. अवसाद दूर करने में
चमेली के तेल का सुगंध बेहतरीन होता है. इसकी खुशबु हमारे अंदर रोमांटिक और काव्यात्मक भावनाएं जगाने वाली होती है. दरअसल इसके सुगंध में सेरोटोनिन सहित कई तरह के हार्मोन को उत्तेजित करने की क्षमता होती है. यदि आप इसके सुगंध को महसूस करेंगे तो आप मूड भी अच्छा हो जाएगा और आप सुकून का अनुभव करेंगे.
10. पीरियड्स के दौरान
चमेली के तेल में मौजूद आर्तावजनक गुण पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं. इसके अलावा ये पीरियड्स के दौरान महिलाओं को होने वाली समस्याओं जैसे कि मतली, थकान, झुंझलाहट और ख़राब मूड जैसी समस्याओं को भी दूर करने का काम करता है.

चमेली के तेल के नुकसान

  • इससे एलर्जी वाले लोगों को इससे बचना चाहिए.
  • गर्भवती महिलाओं को इसके उपयोग से बचना चाहिए.
  • इसमें उत्तेजक गुण होता है इसलिए इसके  ज्यादा खुराक से बचना चाहिए.
     
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