Common Specialities
{{speciality.keyWord}}
Common Issues
{{issue.keyWord}}
Common Treatments
{{treatment.keyWord}}
Book
Call

Mr. Karan

Veterinarian, Dehradun

Book Appointment
Call Doctor
Mr. Karan Veterinarian, Dehradun
Book Appointment
Call Doctor
Submit Feedback
Report Issue
Get Help
Feed
Services

Personal Statement

Our team includes experienced and caring professionals who share the belief that our care should be comprehensive and courteous - responding fully to your individual needs and preferences....more
Our team includes experienced and caring professionals who share the belief that our care should be comprehensive and courteous - responding fully to your individual needs and preferences.
More about Mr. Karan
Don’t wait in a queue, book an instant appointment online with Mr. Karan on Lybrate.com.

Lybrate.com has a nexus of the most experienced Veterinarians in India. You will find Veterinarians with more than 36 years of experience on Lybrate.com. Find the best Veterinarians online in Dehradun. View the profile of medical specialists and their reviews from other patients to make an informed decision.

Info

Languages spoken
English
Hindi

Location

Book Clinic Appointment with Mr. Karan

karan

ghDehradun Get Directions
...more
View All

Services

Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
View All Services

Submit Feedback

Submit a review for Mr. Karan

Your feedback matters!
Write a Review

Feed

Nothing posted by this doctor yet. Here are some posts by similar doctors.

Sir my dog is 4 years old and has started behaving weird. He used to b joyful with family n known people. Bt now since 1 or 2 weeks he has changed to being abit violent. He has started attacking. He has now acting grumpy to me also. We are really tensed to know about it.

bachelor of veterinary & Animal Husbandary
Veterinarian, Noida
Sir my dog is 4 years old and has started behaving weird. He used to b joyful with family n known people. Bt now sinc...
Violent or weird behaviour of your pet may b of many reasons. Some of very common reasons are like introduction of new pet, spending less time with your pet, having some fear or insecured feeling, some kind of physical sickness. So it's better to take to vet so that he/she can examine your pet and then let them decide whether violet behaviour is due to hormonal, genetical,behavioural or due to his dominance nature.
Submit FeedbackFeedback

Vaccination In Pets

B.V.Sc
Veterinarian, Ballia
Vaccination In Pets

Vaccination in dog

टीकाकरण की प्रकिया एक ऐसा उपाय है जिससे, कुत्तो में होने वाली कुछ प्रमुख विषाणु एवं जीवाणु जनित जानलेवा एवं लाइलाज, बीमारियों जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज तथा केनल कफ़ आदि से बचाव के लिए समय समय पर कुत्तों के शरीर में टीका लगाया जाता है,जिससे इन रोगों के खिलाफ रोगप्रतिरोधक क्षमता का शारीर में विकास हो जाता है और हमारा पालतू जानवर एक सिमित अवधि तक इन बिमारियों के घातक प्रभाव से बचा रहता है |

कुछ टीकाकरण संबंधी सामान्य प्रश्नो के जबाब -
 
१- क्या सभी उम्र के कुत्तो का टीकाकरण जरूरी होता है?
हाँ। आमतौर पर १. ५ महीने (४५ दिन) के उम्र से ऊपर सभी कुत्तो का नियमित समय पर टीकाकरण करना जरूरी होता है यदि किसी कारण वश नयमिति या कभी कराया ही न गया हो तो किसी भी उम्र से टीकाकरण शुरू किया जा सकता है। 

२. छोटे बच्चो को किस उम्र से टीका का पहली खुराक देना शुरू करना चाहिए?
४५ दिन के उम्र से ही टीके की पहली खुराक देना बेहद जरूरी होता है 

३. क्या सभी छोटे पप्स को टीकाकरण के पहले पेट के कीड़े देना जरूरी होता है -
हाँ। बहुत से परजीवी ऐसे होते है जो माँ के पेट से ही या दूध के जरिये से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाते है जिससे शरीर को कमजोर कर देते है और जब टीका लगाया जाता है तो कमजोरी के वजह से उतना अच्छा शरीर में प्रतिरोधक छमता का विकास नहीं हो पता इसलिए पहले ऐसे परजीवीओ को नष्ट करना जरूरी होता है 

४. क्या होता है टीकाकरण का सही उम्र और समयांतराल?
१. पहली खुराक -जन्म के ६ -८ सप्ताह के उपरांत(कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा हेतु) 
२. बूस्टर खुराक या दूसरी खुराक - प्रथम खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर दूसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 
३. तीसरी खुराक - रेबीज वायरस हेतु- प्रथम खुराक जन्म के ३ माह के उपरान्त। 
४. बूस्टर खुराक या चौथी खुराक - तीसरी खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर तीसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 

५. क्या बूस्टर खुराक देना जरूरी होता है या नहीं?
जन्म के साथ ही माँ से प्राप्त एंटीबाडीज और प्रथम दूध से मिलने वाली सुरछा कवच कुछ सप्ताह तक नवजात के खून में मौज़ूद रह करअनेको बीमारयों से सुरछा प्रदान करती है परन्तु समय के साथ साथ इनकी मात्रा बच्चे के शरीर में कम होने लगती है। जिससे बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए लगभग ४५ दिन के बाद टिका का प्रथम खुराक देते है यद्पि ये पता नहीं रहता की माँ से मिलने वाली सुरछा का असर किस स्तर का है जिससे आमतौर पर ये स्तर अधिक होने पर प्रथम खुराक से बच्चे के शरीर में टीकाकरण की गुणवत्ता को बाधित करती है, जो की पप्पस में रोगप्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने में असक्षम हो जाता है इसलिए कुछ सप्ताह बाद टीकाकरण के दूसरी खुराक दे कर टीकाकरण से रोगप्रतिरोधक क्षमता करने के उद्देश्य को प्राप्त करते है ऐसी दूसरी खुराक को बूस्टर खुराक कहते है। 

६. क्या है टीकाकरण की सही खुराक देने के मात्रा:
डॉग चाहे किसी भी उम्र, भार, लिंग अथवा नस्ल के हों उनको समान मात्रा में टीकाकरण का खुराक दिया जाता है 

७. क्या है टीकाकरण का सही तरीका:
टीकाकरण खाल के नीचे:कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा तथा रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए खाल के नीचे दिया जाता है
 नथुनों में:केनल कफ़ का टीकाकरण कुत्ते के नथुनों में दवा डाल कर किया जाता है

८. क्या सभी टीके एक ही प्रकार के होते है:कुत्तों में टीकाकरण दो प्रकार की होती है
 १. कोर टीकाकरण - टीकाकरण जो सभी कुत्तों के लिये आवश्यक है. यह उन बिमारीयों में दिया जाता है जो आसानी से फैलती हैं अथवा घातक होती हैं जैसे रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर.
 २. नान कोर टीकाकरण – उपरोक्त ४ बिमाँरीयों (रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर) के टीकाकरण को छोड़कर अन्य सभी नानकोर टीकाकरण माना जाता है | यह उन बिमाँरियों से सुरक्षा प्रदान करता है जो वातावरण के अनावरण अथवा जीवनचर्या पर निर्भर करती है जैसे लाइम डिजीज, केनलकफ और लेप्टोस्पाइरोसिस.

९. एक सफल टीकाकरण करने के बाद क्या फिर भी टीकाकरण विफल हो सकता है?हाँ। 
 टीकाकरण के विफलता के कारण कुत्ते में बीमारी होने के निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते है –
१. टीकाकरण के दौरान कुत्ते की रोगप्रतिरोधक क्षमता का सम्पूर्ण रूप से कार्य न करना |
२.आयु – कम उम्र के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्णतः विकसित नही होती और बड़े आयु के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली कई कारणों से अक्सर कमज़ोर या क्षीण हो जाती है |
३. मानवीय चूक (टीके का अनुचित संग्रहण या अनुचित मिश्रण)- टीकों का संग्रहण एवं इस्तेमाल भी निर्देशानुसार ही होना आवश्यक है | सूरज की रोशनी,गर्म तापमान टीके के प्रभाव को नस्ट कर सकता है | टीके का मिश्रण पशु में टीकाकरण के तुरंत पहले तैयार करना चाहिए | टीके खरीदने के पहले पता करना चाहिए कि टीकों को उचित तापमान एवं देखभाल से रखा गया है या नहीं |
४. डीवार्मिंग – टीकाकरण करने के पहले पेट के कीड़े मारने के लिए डीवर्मिंग करना आवश्यक है, वरना इस तरह का तनाव टीकाकरण के प्रभाव को कम कर सकता है |
५. गलत सीरोटाईप / स्टेन का इस्तेमाल – प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बहुत विशिष्ट होती है | अतः टीके में होने वाली जीवाणु या विषाणु की सही स्टेन होनी चाहिए वरना उससे उत्पन्न होने वाली प्रतिरक्षा जानवर में सही तौर पर सुरक्षा नहीं कर पाती |
६. अनुवांशिक बीमारियाँ – कुछ जानवरों में आनुवंशिक बिमारियों की वजह से सभी रोगों के लिए प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पर कम ही उत्पन्न हो पाती है |
७. वैक्सीन की गुणवत्ता – टीके में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में प्रतिजनी की मात्रा होना चाहिए वरना टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रयाप्त नहीं होती है |
८. पुराने या अवधि समाप्त टीके – पुराने टीकों में आवश्यक प्रतिजनी गुण समाप्त या कम हो जाता है | इस तरह के टीके लगाने से जानवरों को बेमतलब तनाव दिया जाता है |
९. टीकाकरण का अनुचित समय – टीका निर्माता के निर्देशों के अनुसार टीकाकरण का समय (उम्र एवं मौसम के अनुसार), लगाने का तरीका एवं मात्रा तथा दोबारा लगाये जाने की अवधि, इत्यादि निश्चित होता है |इन निर्देशों का पालन सही समय पर न करने से टीकाकरण विफल या निष्क्रिय हो जाता है |
१०. पोषण की स्तिथि- कुपोषण की वजह से जिन पशुओं में पोषक तत्वों की कमी रह जाती है उनमे टीकाकरण के बाद भी प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पे कम ही उत्पन्न हो पाती है |

10. क्या वैक्सीन लगते समय कुत्ते पर कोई दुस्प्रभाव हो सकते है? हाँ 
 कुछ कुत्तो प्रतिरोधक छमता अधिक सक्रिय होने की वजह से कुछ सामान्य लचण जैसे ज्वर, उल्टी, दस्त, लासीका ग्रंथियों का सूजना, मुख का सूजना, हीव्स, यकृत विफलता और कभी -कभी मौत भी हो सकती है।

1 person found this helpful

My Dog name is bruzoo, my dog is labera. he is very week and my dog is nothing eat like food pedigree and my dog leg is very slim. Please help me.

M.V.Sc (Surgery)
Veterinarian, Mohali
You can start giving high nutritious diet to you dog like egg, chicken paneer etc. You can give him good quality feed like pedigree professional or royal canin for growth.
2 people found this helpful
Submit FeedbackFeedback

Hi doctor, I have a german shepherd of one and half year old. It is so agressive and barks a lot. We have received complaint from our neighbour regarding this. I just wanted to know is there any injection for dogs to reduce the aggressiveness and not to bark a lot. because I have heard there is a injection for dogs to become calm.

B.V.Sc. & A.H.
Veterinarian, Hoshiarpur
It is a behavioural problem treat the dogs with extra love and affection train him to become calm and avoid undue entry of strangers whole time in dogs area and do not apply force to tackle the problem. Be more friendly and try to play with your dog avoid medication to solely treat this condition
4 people found this helpful
Submit FeedbackFeedback

I am having a Persian cat and have noticed a puss kind of stuff around his ear any suggestions can I put ear drops which we human use in his ears or what to do vet not close by so I can't take him there at least for a week please suggest.

B.V.Sc
Veterinarian, Ballia
I am having a Persian cat and have noticed a puss kind of stuff around his ear any suggestions can I put ear drops wh...
Pus coming from ear is Otitis. You need to clean the ears thoroughly with hydrogen peroxide and ear cleaners. If it's severe, you need to take a course of antibiotics for a week or so. Ear drops need to be instilled three to four times daily.
1 person found this helpful
Submit FeedbackFeedback

What to do when my petbird is injured on head? What should I do? It also can't fly properly.

MVSc, BVSc
Veterinarian, Secunderabad
Hi lybrate-user, what type of injury on head. Is it deep or superficial. You have to take to nearest vet. First flush the injury with normal fresh water and apply betadine lotion and take to vet.
Submit FeedbackFeedback

Dear Doctor, My rabbit's hair removes from his mouth side,is their any medicine ? please advise .

MVSC
Veterinarian, Hyderabad
Check what he is eating. Check for any allergic compounds in the grass while nibling. Check for the external parasites like nits or lice on the hair. Change the place for feeding and see the difference.
Submit FeedbackFeedback

C.S.C, D.C.H, M.B.B.S
General Physician,
TAKING CARE OF PETS

Dog hygiene
Risk of transmission from contact with dogs is low and may be further reduced by simple precautions.
Dogs should be seen by a veterinarian on a regular basis.
Dogs should be treated promptly for diarrhea.
Dogs should be vaccinated for rabies.
Dogs should be treated to prevent heartworm disease (Dirofilaria immitis).
Effective flea control requires treatment of affected dogs, their environment, and other animals they contact.
Dogs should be fed high quality commercial food.
Dogs should not eat raw meat or eggs. Raw meat may have higher rates of Campylobacter and Salmonella in their stools
Dogs should not be allowed to eat garbage, feces, or hunt.
Dogs should not be allowed to drink non-potable water (e.G, surface water or toilet water).
Dogs should be inspected for ticks regularly.
Dog owners should wash their hands following contact with or cleaning up dog feces.
Groups at high risk for serious infection from pets include: Persons with waning immunity (e.G, older adults); children less than five years old; pregnant women and immunocompromised patients with AIDS, those without a functioning spleen or taking immunosuppressive therapy
To avoid infections, people at higher risk should take particular precautions with any animal contact.
They should do thorough and frequent hand wash
They should avoid contact with animals and their environment (e.G, pens, bedding and manure).
HIV positive patients should carry following precautions
When obtaining a new pet, they should avoid animals aged 6 months (or 1 year for cats)
They should be cautious when obtaining a pet from pet-breeding facilities, pet stores, and animal shelters, because of highly variable hygienic and sanitary conditions.
They should avoid stray animals.
They should avoid contact with any animal that has diarrhea.
They should seek veterinary care for animals with diarrheal illness, and a fecal sample from such animals should be examined for Cryptosporidium, Salmonella and Campylobacter.
They should wash their hands after handling pets, including before eating, and should avoid contact with pets' feces.
They should avoid contact with reptiles (e.G, snakes, lizards, iguanas, and turtles) as well as chicks and ducklings because of the risk for salmonellosis.
They should wear gloves during aquarium cleaning to reduce the risk for infection with Mycobacterium marinum.
They should avoid contact with exotic pets (e.G, nonhuman primates).
3 people found this helpful

My dog actually got a tumor just below it's rib. My dog is not feeling any pain when I touch the tumour I am afraid please help what medication should be taken.

M.V.Sc, B.V.Sc. & A.H.
Veterinarian, Kolkata
Surgery could be required. But before surgery there are many things (investigations, medications etc.) needed to covered up. Consult accordingly.
2 people found this helpful
Submit FeedbackFeedback
View All Feed