Common Specialities
{{speciality.keyWord}}
Common Issues
{{issue.keyWord}}
Common Treatments
{{treatment.keyWord}}
Call Clinic
Book Appointment

Sri Balaji Hospital

Multi-speciality Hospital (Dentist, Endocrinologist & more)

No.1, Lawyer Jaganathan Street, Guindy Landmark : Near Kathipara Junction. Chennai
15 Doctors · ₹0 - 500
Book Appointment
Call Clinic
Sri Balaji Hospital Multi-speciality Hospital (Dentist, Endocrinologist & more) No.1, Lawyer Jaganathan Street, Guindy Landmark : Near Kathipara Junction. Chennai
15 Doctors · ₹0 - 500
Book Appointment
Call Clinic
Report Issue
Get Help
Services
Feed

About

By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have place......more
By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have placed in us.
More about Sri Balaji Hospital
Sri Balaji Hospital is known for housing experienced Orthopedists. Dr. Balaji Subramanian, a well-reputed Orthopedist, practices in Chennai. Visit this medical health centre for Orthopedists recommended by 64 patients.

Timings

MON-SUN
12:00 AM - 11:30 PM

Location

No.1, Lawyer Jaganathan Street, Guindy Landmark : Near Kathipara Junction.
Guindy Chennai, Tamil Nadu - 600032
Click to view clinic direction
Get Directions

Doctors in Sri Balaji Hospital

Dr. Balaji Subramanian

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
8 Years experience

Dr. U. S. Srinivasan

MBBS, MCh - Neuro Surgery
Neurosurgeon
30 Years experience
500 at clinic
Unavailable today

Dr. M.Mohan Kumar

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
27 Years experience
Unavailable today
200 at clinic
Available today
09:00 AM - 09:00 PM

Dr. T. Pugazhendhi

MBBS, MD - Gastroenterology, DM - Gastroenterology
Gastroenterologist
32 Years experience
500 at clinic
Available today
12:00 AM - 11:30 PM

Dr. Prasanna Kumar Thomas

MBBS, D.T.C.D, MD - Pulmonary Medicine
Pulmonologist
39 Years experience
500 at clinic
Unavailable today

Dr. Mythili.S.Raghavendra

MBBS, MS - Obstetrics and Gynaecology
Gynaecologist
10 Years experience
300 at clinic
Unavailable today

Dr. J.Srinivasan

MBBS, MS - Orthopaedics, DNB - Orthopedics
Orthopedist
22 Years experience
500 at clinic
Unavailable today
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Sengathir Selvan

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Plastic Surgery
Cosmetic/Plastic Surgeon
40 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. A.Shanmugam

MBBS, MD, Post Graduate Diploma in Diabetology (PGDD)
Endocrinologist
20 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Justin Paul

MBBS, MD - General Medicine, DNB - General Medicine, DM - Cardiology, DNB (Cardiology) -Obstetrics & Gynecology
Cardiologist
27 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. M Swaminathan

MBBS, MD - General Medicine, DM - Cardiology
Cardiologist
26 Years experience
400 at clinic
Unavailable today

Dr. Balaji

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
8 Years experience
Unavailable today

Dr. K.R.Suresh Bapu

MBBS, MS - General Surgery, MCh - Neuro Surgery
Neurosurgeon
43 Years experience
200 at clinic
Unavailable today
View All
View All

Services

Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
Get Cost Estimate
View All Services

Submit Feedback

Submit a review for Sri Balaji Hospital

Your feedback matters!
Write a Review

Feed

Nothing posted by this doctor yet. Here are some posts by similar doctors.

Hey I am having various issues. Like acne hair fall less wgt nd left body pain. So I need serious consultancy.

BHMS, Diploma in Dermatology
Sexologist, Hyderabad
Hey I am having various issues. Like acne hair fall less wgt nd left body pain. So I need serious consultancy.
Good home remedy for acne Applying tea tree oil to the skin can help reduce swelling and redness. Tea tree oil is a natural antibacterial and anti-inflammatory, which means that it might kill P. Acnes, the bacteria that causes acne. Tea tree oil's anti-inflammatory properties mean that it can also reduce the swelling and redness of pimples. Tips Regularly wash your hair with Scalp massage with essential oils. Avoid brushing wet hair. More tips to gain weight: Don't drink water before meals. This can fill your stomach and make it harder to get in enough calories. Eat more often. Drink milk. Try weight gainer shakes..
Submit FeedbackFeedback

लिवर के लिए योग - Liver Ke Liye Yog!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लिवर के लिए योग - Liver Ke Liye Yog!

आपको जानकार हैरानी होगी कि लीवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है. इसके साथ ही लीवर, हमारे शरीर में एक ऐसे रासायनिक प्रयोगशाला की तरह है, जिसका कार्य पित्त तैयार करना है. यह वसा को पचाने के साथ ही आंतों में उपस्थित हानिकारक कीटाणुओं को भी नष्ट करता है. लेकिन कई आज बदली हुई जीवनशैली के कुछ बुरी आदतों के कारण हमारा लिवर खराब भी हो सकता है. लीवर खराब होने के कारणों में शराब ज्यादा पीना, धूम्रपान करना इत्यादि शामिल हैं. इसके अतिरिक्त आवश्यकता से अधिक नमक और खट्टा खाने से भी आपको लिवर की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं. जाहीर है लीवर की समस्याओं से निजात पाने के कई तरीके हैं. यदि किसी कारण से लीवर में दोष उत्पन्न हो जाता है तो शरीर की पूरी प्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाती है. योग के नियमित अभ्यास से लीवर को सशक्त रखा जा सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम लीवर को ठीक करने के लिए योग के महत्व पर एक नजर डालें.
आसन-
लीवर के दोषों को दूर करने के लिए सूक्ष्म व्यायाम का नियमित अभ्यास बहुत लाभकारी होता है. इसके अतिरिक्त पवनमुक्तासन, वज्रासन, मर्करासन आदि का अभ्यास करना चाहिए. रोग की प्रारम्भिक स्थिति में कठिन आसनों को छोड़कर बाकी सभी आसन किये जा सकते हैं.

1. पवनमुक्त आसनछ:- पीठ के बल जमीन पर लेट जाइए. दांयें पैर को घुटने से मोड़कर इसके घुटने को हाथों से पकड़कर घुटने को सीने के पास लाइए. इसके बाद सिर को जमीन से ऊपर उठाइए. उस स्थिति में आरामदायक समय तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आइए. इसके बाद यही क्रिया बांयें पैर और फिर दोनों पैरों से एक साथ कीजिए. यह पवनमुक्तासन का एक चक्र है. प्रारम्भ एक या दो चक्रों से करें, धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाकर दस से पन्द्रह तक कीजिए.

2. धनुरासन:- जिन्हें फैटी लिवर की समस्या है उनके लिए ये आसन बहुत उपयोगी है. इस आसन में आपको उल्टा लेटकर अपने पैरों को पकड़ना होता है. आप जितनी देर तक आराम से इस आसन को कर सकते हैं तब तक करते रहिए. जितना हो सके इस आसन को दोहराएं.

3. गोमुख आसन:- ये आसन आपके लिवर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. ये आसन लिवर सिरोसिस के लिए बेहतर माना जाता है. लिवर सिरोसिस में संक्रमित व्यक्ति का लिवर अपने आप सिकुड़ता रहता है और कठोर हो जाता है. इसे करने के लिए पालथी मारकर बैठें. फिर बाएं पैर को मोड़कर बाएं तलवे को दाएं हिप्स के पीछे लाएं और दाएं पैर को मोड़कर दाएं तलवे को बाएं हिप्स के पीछे लाएं. फिर हथेलियों को पैरों पर रखें. इसके बाद हिप्स पर हल्का दवाब डालें और शरीर के ऊपरी भाग को सीधा रखें. अब बायीं कोहनी को मोड़कर हाथों को पीछे की ओर ले जाएं, सांस को खीचते हुए दाएं हाथ को ऊपर उठाएं. दायीं कोहनी को मोड़कर दाएं हाथ को पीछे ले जाएं फिर दोनों उंगलियों को आपस में जोड़ें. दोनों हाथों को हल्के-हल्के अपनी ओर खींचें.
4. नौकासन:- ये सबसे आसान आसन होता है. इसे करने का तरीका भी काफी आसान है. इसे करने के लिए शवासन की मुद्रा में लेटना होता है. फिर एड़ी और पंजे को मिलाएं और दोनों हाथों को कमर से सटा लें. अपनी हथेली और गर्दन को जमीन पर सीधा रखें. इसके बाद दोनों पैरों, गर्दन और हाथों को धीरे-धीरे उठाएं. आखिर में अपना वजन हिप्स डाल दें. करीब 30 सेकेंड तक ऐसे ही रहें. और धीरे-धीरे शवासन अवस्था में लेट जाएं.

5. अर्ध मत्सयेंद्रासन:- अगर आपका लिवर खराब हो गया है तो ये आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. दोनों पैरों को फैलाकर बैठें. फिर बाएं पैर को मोड़कर बायीं एड़ी को दाहिनें हिप के नीचे रखें. अब दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं पैर का तलवा लाएं और घुटने की बायीं ओर जमीन पर रखें. इसके बाद बाएं हाथ को दाएं घुटने की दायीं ओर ले जाएं और कमर को घुमाते हुए दाएं पैर के तलवे को पकड़ लें और दाएं हाथ को कमर पर रखें. सिर से कमर तक के हिस्से को दायीं और मोड़ें. अब ऐसा दूसरी ओर से भी करें.

प्राणायाम
1. शीतली प्राणायाम:- लीवर बढ़ने की समस्या से ग्रस्त लोगों को शीतकारी या शीतली प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए. शीतली प्राणायाम के अभ्यास की विधि इस प्रकार है-
पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाइए. दोनों हाथों को घुटनों पर सहजता से रखें. आंखों को ढीली बन्द कर चेहरे को शान्त कर लें. अब जीभ को बाहर निकालकर दोनों किनारों से मोड़ लें. इसके बाद मुंह से गहरी तथा धीमी सांस बाहर निकालें. इसकी प्रारम्भ में 12 आवृतियों का अभ्यास करें. धीरे-धीरे संख्या बढ़ाकर 24 से 30 कर लीजिए.

2. कपालभाति प्राणायाम:- इसमें आपको सिद्धासन, पदमासन या वज्रासन में बैठना होता है. इसके बाद गहरी सांस लें और इसे नाक से निकालें. एक बार सांस लेने की क्रिया पांच से दस सेकेंड के बीच होनी चाहिए. इसमें सबसे ज्यादा ध्यान आपको सांस निकालने पर देना है. इस योग को रोजाना पंद्रह मिनट के लिए करें. इसे करने से लिवर की कार्यक्षमता सुधरती है.

नोट: कफ की समस्या से ग्रस्त लोग इसका अभ्यास न कर नाड़ी शोधन का अभ्यास करें. लीवर की समस्या से ग्रस्त लोगों को ध्यान का प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए.

लेसिक लेजर सर्जरी के नुकसान - Lasik Laser Surgery Ke Nuksaan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लेसिक लेजर सर्जरी के नुकसान - Lasik Laser Surgery Ke Nuksaan!

आँख हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है. यह जितना महत्वपूर्ण है उतना ही सेंसेटिव होता है. इसलिए आपको आँखों को विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए. बदलते जीवनशैली और पर्यावरण में बढ़ते प्रदुषण के कारण आंखों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है. आँखों के खराब होने के कई कारण हो सकते है, इससे निदान पाने के लिए लोग ज्यादातर चश्मा का सहारा लेते है.एक बार चश्मा लगाने के बाद फिर पूरी जिंदगी चश्मा लगाना पड़ता है. लेकिन आजकल के उन्नत तकनीक ने चश्मे का बोझ उतरने का विकल्प ला दिया है. अब आप चश्मे के बजाए लेसिक सर्जरी का विकल्प अपना सकते है. डॉक्टर अब लेसिक आई सर्जरी का सुझाव दते है और लोग इसका अनुसरन भी कर रहे हैं. हालाँकि, लेसिक सर्जरी के कुछ नुकसान भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइये जानते है लेसिक सर्जरी क्या होता है और इसके फायदे और नुकसान क्या है.

लेसिक सर्जरी आंखों में मौजूद डिफेक्ट्स को दूर करने के लिए किया जाता है. यह आपको दूर दृष्ट और नजदीक की दृष्टि को ठीक करने के लिए किया जाता है. लेकिन जिन लोगो की आँख पूरी तरह से खराब हो गयी है, वह लेसिक सर्जरी के लिए योग्य नहीं है. हालंकि, लेज़र आई सर्जरी कराने के बाद भी कुछ मरीजों को रात में वाहन चलाते समय चश्मा लगाने की जरुरत पड़ सकती है. लेसिक सर्जरी के लिए ज्यादा समय नहीं पड़ती है. इसके लिए आपको 1 से 2 घंटे लग सकते है और सर्जरी की प्रक्रिया को पूरी करने में 15 मिनट लगते है. सर्जरी के बाद आँख को रिकवर होने में 8 घंटे का समय लगता है. सर्जरी के बाद आँखों में कुछ समय के लिए खुजली या जलन या फिर आँखों से असामान्य रूप से आंसू निकल सकते है. जो आँखों के ठीक होने के संकेत होते है.

लेसिक सर्जरी के फायदे
1. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है की अधिकाँश मरीजों को बेहतर आँखों की रौशनी प्राप्त हो जाती है.
2. इस सर्जरी में बहुत कम समय लगता है और रिकवरी का समय भी बहुत कम है.
3. इसमें मरीज को किसी तरह का असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है और प्रक्रिया पूरी तरह से दर्द रहित है.
4. रोगी को चश्मे से पूरी तरह से आजादी मिल जाती है.
5. यदि उम्र ढलने पर आँख खराब होती है तो इसे सुधारा भी जा सकता है.
6. सर्जरी के बाद आँखों को ठीक होने में बहुत कम समय लगता है.

लेसिक सर्जरी के नुकसान
लेसिक सर्जरी के फायदे तो है लेकिन कुछ नुकसान भी है जिसे दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता है. आइये लेसिक सर्जरी के नुकसान पर नजर डालें.


1. लेसिक सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया है, इसमें आँखों की रौशनी जाने का भी खतरा होता है.
2. सर्जरी के दौरान कॉर्निया में होने वाले परिवर्तन को दोबारा उसी स्थिति में नहीं लाया जा सकता है.
3. कई मामलें में सर्जरी के दौरान कॉर्निया के लटके हुए टिश्यू के काटने से आँखों के रौशनी की रौशनी खतरा होता है.
4. लेसिक सर्जरी हर किसी के लिए संभव नहीं है और सभी डॉक्टर इस सर्जरी को करने में सफल नहीं होते है, तो सर्जरी करवाने से पहलें लेसिक सर्जरी से होने वाले नुकसान को भी जान लें.

मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मसूड़ों के रोगों का उपचार - Masudo Ke Rogo Ka Upchaar!

आपके मसूड़ों से नियमित रूप से खून का बहना आमतौर पर प्लेटलेट विकार या ल्यूकेमिया जैसे कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. ऐसा आमतौर पर मुंह में स्वच्छता न होने के कारण होता है. अक्सर देखा जाता है कि कई लोगों के मसूड़ों में सूजन आ जाता है. लेकिन इस बीमारी की शुरुआत को जिंजिवाइटिस के नाम से जाना जाता है. जिंजिवाइटिस के दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है. यहाँ तक कि ये खून ब्रश या फ्लॉस करते समय कभी-कभी अपने-आप ही निकल पड़ता है. इकई बार ऐसा भी होता है कि मसूड़ों पर चोट लगने या अधिक गर्म पदार्थ व सख्त चीज़ें खाने से मसूड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण भी मसूड़ों में सूजन उत्पन्न हो जाती है. इससे आपके मसूड़े ढीले-ढाले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का काफी नुकसान हो सकता है. आइए मसूड़ों की बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानें.

मसूड़ों के सूजन को दूर करने के उपाय-

1. बबूल की छाल – यदि आप मसूड़ों में होने वाले सूजन से बचना चाहते हैं तो आपको भी बबूल की छाल के उपयोग करना चाहिए. इससे मसूड़ों के सूजन को आसानी से समाप्त किया जा सकता है. इसके लिए बबूल की छाल के काढ़े से कुल्‍ला करें. इससे आपके मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगती है.

2. अरंडी का तेल और कपूर – यदि आप अरंडी के तेल में थोड़ी मात्रा में कपूर मिला कर प्रतिदिन सुबह तथा शाम मसूड़ों की मालिश करें तो ऐसा करके भी मसूड़ों की सूजन कम होने लगती है.

3. अजवायन – अजवायन का उपयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने के लिए एक अच्छा विकल्प है. इसके लिए अजवायन को तवे पर भून कर पीसने के बाद इसमें 2-3 बूंद राई का तेल मिला कर हल्‍का-हल्‍का मसूड़ों पर मलें. ऐसा करने से मसूड़ों को आराम मिलता है साथ ही दांतों के अन्य रोग भी दूर किए जा सकते हैं.

4. अदरक और नमक – मसूड़ों से सम्बंधित समस्याओं को दुर करने के लिए थोड़े से अदरख में थोड़ा नमक मिलकर इसे अच्छे से पीस कर मिला लें. अब इस मिश्रण से धीरे-धीरे मसूड़ों को मले. इससे मसूड़ों की सूजन कम होने लगेगी.

5. नींबू का रस - नींबू के रस को ताजे पानी में नींबू में डाल लें. इसके बाद बाद इस पानी से कुल्‍ला करें. कुछ दिन इसका प्रयोग करें इससे मसूड़ों की सूजन दूर होने के साथ-साथ मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होने लगती है.

6. प्याज - प्याज मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके सेवन के लिए प्याज में नमक मिलाकर खाने से एवं प्याज को पीसकर मसूड़ों पर दिन में करीब तीन बार मलने से मसूड़ों की सूजन ख़त्म हो जाती है तथा मसूड़े स्वस्थ बने रहते हैं.

7. फिटकरी - फिटकरी का प्रयोग भी मसूड़ों की सूजन को दूर करने का अच्छा उपाय है. इसके लिए फिटकरी के चूर्ण को मसूड़ों पर मले इससे मसूड़ों की सूजन को कम किया जा सकता है.
 

मसूड़ों से खून निकलने का उपचार
1. खट्टे फल:- यदि आपके मसूड़ों से खून बह रहा है तो इसका एक कारण आपके शरीर में विटामिन सी की कमी भी हो सकती है. ऐसे में विटामिन सी की आपूर्ति के लिए आपको खट्टे फल जैसे नारंगी, नींबू, आदि और सब्जियां विशेष कर ब्रॉकली और बंद गोभी आदि का सेवन करना चाहिए. इससे रक्तस्त्राव में कमी आएगी.

2. दूध:- हमारे मसूड़ों के लिए कैल्शियम भी आवश्यक होता है. कैल्शियम का सबसे अच्छा स्त्रोत दूध है. यदि आप दूध का सेवन करते हैं तो आपके मसूड़ों का रक्तस्त्राव ख़त्म हो सकता है. इसके लिए आप नियमित रूप से दूध का सेवन करते रहें.

3. कच्ची सब्जियां:- कई बार मसूड़ों में रक्त संचरण न होने के कारण भी रक्तस्त्राव होता है. इसके लिए आपको कच्ची सजियाँ चबाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे आपका दांत भी साफ़ होता है. यदि आप नियमित रूप से कच्ची सब्जियां खाने की आदत डालें तो आप ऐसी परेशानियों से बच सकते हैं.

4. क्रैनबेरी और गेहूँ की घास का रस:- मसूड़ों से होने वाले रक्तस्त्राव से राहत पाने के लिए आप क्रैनबेरी या गेहूँ की घास का रस का उपयोग कर सकते हैं. इसका जूस जीवाणुरोधी गुणों से युक्त होता है जिससे कि आपके मसूड़ों से जिवाणुओं का खात्मा हो सकता है.

5. बेकिंग सोडा:- बेकिंग सोडा का उपयोग भी मसूड़ों की देखभाल के लिए किया जाता है. दरअसल बेकिंग सोडा का इस्तेमाल माइक्रोइंवायरनमेंट तैयार करके मुंह में ही बेक्‍टीरिया को मारने के लिए किया जाता है. आप चाहें तो इसे अपने मसूड़ों पर उंगली से भी लगा सकते हैं.

6. लौंग:- लौंग उन औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक है जिसका इस्तेमाल हम प्राचीन काल से ही अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए करते आ रहे हैं. जब भी आपको इस तरह की समस्या हो तो आपको एक लौंग अपने मुंह में रखना चाहिए. इससे राहत मिलती है. लेकिन यदि लम्बे समय तक ऐसा हो तो आपको चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.

7. कपूर, पिपरमिंट का तेल:- मसूड़ों को स्वस्थ बनाने के कई तरीके हैं. उनमें से एक है कपूर और पिपरमिंट के तेल. इसका इस्‍तेमाल आप अपने मुंह की ताज़गी और स्‍वच्‍छता बनाये रखने के लिये कर सकते हैं.

8. कैलेंडूला की पत्‍ती और कैमोमाइल चाय:- मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने के लिए ऐसी चाय पीनी चाहिए जिसमें कैलेंडुला और कैमोमाइल की पत्‍ती डाल कर पकायी जाए. क्योंकि ये मसूड़ों में खून आना रोकती है.

डीएनए टेस्ट कैसे होता है - DNA Test Kaise Hota Hai!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
डीएनए टेस्ट कैसे होता है - DNA Test Kaise Hota Hai!

जेनोटिक टेस्टिंग एक प्रकार का मेडिकल टेस्ट होता है जिसमें जैव, क्रोमोसोम्स और प्रोटीन की पहचान की जाती है. इस टेस्ट के माध्यम से यह पताया लगाया जा सकता है क्या कोई व्यक्ति किसी ऐसी स्थिति जैसे हेल्थ प्रॉब्लम से ग्रस्त है, जिससे उसकी आने वाली पीढ़ियों निकट भविष्य में ग्रस्त हो सकती है. इसके अलावा, इससे जीन की जांच भी होती है जो हमारे माता-पिता से मिलते है. यह टेस्ट उचित इलाज का चयन करने और यह जानने में मदद करता है कि संबंधित समस्या उपचार के प्रति कैसी प्रतिक्रिया दे सकती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम डीएनए टेस्ट कैसे होता है ये जानें ताकि इस विषय में हमारी जागरूकता बढ़ सके.

डीएनए टेस्ट कैसे होता है?
डीएनए टेस्ट के लिए आपके शरीर से कुछ सैंपल लिया जाता है. इसमें आपके खून, उल्ब तरल, बाल या त्वचा आदि लिया जा सकता है. आपको बता दें कि उल्ब तरल या एम्नियोटिक फ्लूइड गर्भावस्था में भ्रूण के चारों ओर मौजूद तरल को कहते हैं. इसके अतिरिक्त आप डीएनए टेस्ट कराने वाले व्यक्ति के गालों के अंदरूनी भाग से भी सैंपल लिए जा सकते हैं. इन नमूनों के जाँच के लिए जगह-जगह पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएँ बनाईं गईं हैं. इन प्रयोगशालाओं में आप एक निश्चित रकम जो कि 10 से 40 हजार के बीच हो सकती है, चुका कर डीएनए टेस्ट करवा सकते हैं. जाँच की रिपोर्ट आपको 15 दिनों के अंदर मिल सकती है.

डीएनए टेस्ट कब करवाना चाहिए?
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य उम्र के एक पड़ाव पर आकार एक जैसे तरीके के रोगों से ग्रस्त हो जाते है तो आप डीएनए टेस्ट करवा सकते है. हम में से बहुत से लोगों को पता नही होता है कि उन्हें कौनसा वंशानुगत रोग है, ऐसे में डीएनए टेस्ट करवाया जा सकता है. जिन महिलाओं को गर्भपात हुआ है, उन्हें इस टेस्ट को करवाना चाहिए.

डीएनए टेस्ट किसलिए किया जाता है?
जेनेटिक टेस्ट की कई वजह हो सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकती हैं –
1. जन्म लेने से पहले शिशु में जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच तलाश करने के लिए.
2. अगर किसी व्यक्ति के जीन में कोई रोग है और जो उसके बच्चों में फैल सकता है, तो डीएनए टेस्ट द्वारा इसकी जांच की जाती है.

भ्रूण में रोग की जांच करना.
व्यस्कों में रोग लक्षणों के विकसित होने से पहले ही जेनेटिक संबंधी रोगों की जांच करने के लिए.
जिन लोगों में रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनके टेस्ट करने के लिए. इससे किसी व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर दवा और उसकी खुराक का पता लगाने में भी मदद मिलती है.

हर व्यक्ति में टेस्ट करवाने के और टेस्ट ना करवाने की कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं. कुछ लोगों के लिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि अगर उनमें टेस्ट का रिजल्ट पोजिटिव आता है तो क्या उस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है या इसका इलाज किया जा सकता है. कुछ मामलों में ईलाज संभव नहीं हो पाता, लेकिन टेस्ट की मदद से व्यक्ति अपने जीवन के कई जरूरी फैसले कर पाता है, जैसे परिवार नियोजन या बीमाकृत राशि आदि. एक आनुवंशिक परामर्शदाता आपको टेस्ट के फायदे व नुकसान से संबंधित सभी जानकारियां दे सकता है.

आंत के रोग के लक्षण - Aant Rog Ke Lakshan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
आंत के रोग के लक्षण - Aant Rog Ke Lakshan!

आंतों की बीमारियां सूजन प्रक्रियाओं का एक समूह होती हैं जो बड़ी और छोटी आंत में होती हैं. विभिन्न नकारात्मक कारकों, घावों और श्लेष्म झिल्ली को पतला करने के कारण आंतरिक अंगों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं. गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट आंतों की समस्याओं में लगे हुए हैं. नकारात्मक कारकों के शरीर पर प्रभाव के कारण पेट और आंतों के रोग, और दुर्लभ मामलों में, सूजन का कारण कुछ एक परिस्थिति है. अधिक विभिन्न कारणों से एक साथ मानव शरीर को प्रभावित होता है, और अधिक कठिन रोग होता है और, इसके परिणामस्वरूप, इसका इलाज करना अधिक कठिन होगा. छोटी आंत की बीमारी में शामिल हैं आंतशोथ (छोटी आंत की विकृति संबंधी विकृति), कार्बोहाइड्रेट असहिष्णुता, लस एंटाइपेथी (शरीर में आवश्यक एंजाइमों की कमी के कारण), नाड़ी और छोटी आंतों की एलर्जी संबंधी बीमारियां, व्हाइपल का रोग और अन्य. अनुचित पोषण या विशिष्ट दवाइयां लेने के कारण, छोटी आंतों में चिपचिपा झिल्ली के अखंडता या जलन के उल्लंघन के कारण उनमें से सभी अपना विकास शुरू करते हैं.
बड़ी आंत के रोगों में बृहदांत्रशोथ, अल्सर, क्रोहन रोग, डिवर्टक्यूलोसिस और बृहदान्त्र, ट्यूमर और अन्य बीमारियों के अन्य परेशानियां शामिल हैं. इस क्षेत्र में अधिकांश भड़काऊ प्रक्रियाएं बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती हैं, लेकिन जब कारण एंटीबायोटिक दवाओं का एक लंबा कोर्स होता है, विकारों को खाने और इतने पर.

छोटी आंत रोग के लक्षण
आंत रोग के साथ, लक्षण और उपचार सूजन की गंभीरता और इसके स्थानीयकरण की स्थिति पर निर्भर करता है. रोग के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं. रोग के सक्रिय चरण की अवधि को छूट की अवधि के द्वारा बदल दिया जाता है. छोटी आंत की सूजन की क्लिनिकल तस्वीर निम्नलिखित अभिव्यक्तियों की विशेषता है:
* दस्त समान बीमारियों वाले लोगों के लिए एक आम समस्या है.
* उच्च शरीर का तापमान और थकान की बढ़ती भावना अक्सर आंतों के साथ समस्याओं के साथ, एक व्यक्ति के पास एक निम्न श्रेणी के बुखार होता है, वह थका हुआ और टूटा लगता है.
* पेट में दर्द, पेट का दर्द सूजन और छोटी आंत म्यूकोसा के अल्सर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के माध्यम से भोजन की सामान्य गति को प्रभावित कर सकता है और इस तरह दर्द और ऐंठन पैदा कर सकता है.
* मल में खून की उपस्थिति यह आमतौर पर छोटी आंत की आंतरिक खून बह रहा है.
* भूख में कमी पेट दर्द और पेट का दर्द, साथ ही शरीर में सूजन प्रक्रिया की उपस्थिति, भूख की भावना को सुस्त लगती है.
* तीव्र गति से वजन का घटना.

बड़ी आंत के रोगों के लक्षण
आंतों के रोगों के कई लक्षण आम हैं और एक दूसरे के साथ प्रतिध्वनित होते हैं. लक्षण लक्षण एक सुस्त या ऐंठन चरित्र के पेट दर्द में शामिल हैं, ऐंठन संभव है. बड़ी आंत की आंतरिक सतह घावों से भरा है जो रक्तस्राव कर सकती है. रोगी सुबह की थकान, रक्त और बलगम, रक्ताल्पता (रक्त की बड़ी मात्रा में कमी के साथ), जोड़ों की बीमारी से मुक्ति के बारे में शिकायत करते हैं. अक्सर जब रोग अनियंत्रित वजन घटाने, भूख की हानि, बुखार, पेट फूलना, निर्जलीकरण होता है अक्सर रोगी में गुदा उथल-पुथल होता है. यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बड़ी आंत की ऐसी बीमारी, जिनमें से लक्षण अन्य रोगों के लिए गलत हो सकते हैं, समय पर निदान किया गया था. पर्याप्त उपचार की अनुपस्थिति में, रोगी जटिलताओं (ऑन्कोलॉजी, फिस्टुला, आंतों के टूटना और आंतों की रुकावट) के लिए बढ़ते जोखिम पर है.

क्रोनिक एन्डोकॉलिटिस
क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस, दोनों छोटी और बड़ी आंतों का एक साथ सूजन है, जो आंतों की आंतरिक सतह को लपेटने वाले श्लेष्म झिल्ली के शोष द्वारा विशेषता है, जो आंतों के कार्यों की परेशानी का कारण बनता है. भड़काऊ प्रक्रिया के स्थान पर निर्भर करते हुए, बीमारी को पतली और मोटी आंतों के लिए अलग से वर्गीकृत किया जाता है.
क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस के कारण निम्न रोग संबंधी कारकों के मानव शरीर पर प्रभाव के कारण होते हैं:
* दीर्घकालिक कुपोषण
* बिगड़ा प्रतिरक्षा और चयापचय
* हार्मोनल विकार, तनाव
* दवाओं और रसायनों के साथ नशा
* आंत की संरचना की विशेषताएं
* आंतरिक अंगों के रोग
* आंतों और परजीवी संक्रमण.

क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस के सबसे आम रोगजनकों में से एक आंतों का लैम्ब्लीस. वे तेजी से गुणा करने में सक्षम हैं और लैम्ब्लियासिस का कारण है. रोग के लक्षणों में अतिसार, अतिरिक्त गैस, ऐंठन और पेट में दर्द, मतली, उल्टी शामिल है. दो रूपों में मौजूद: सक्रिय और निष्क्रिय परजीवी के सक्रिय रूप से मानव शरीर में रहते हैं, जब वे मल के साथ बाहर निकलते हैं तो वे एक निष्क्रिय रूप में जाते हैं और शरीर के बाहर संक्रमण फैलाते हैं. क्रोनिक एन्स्ट्रोकलाइटिस अक्सर सूजन आंत प्रक्रियाओं के तीव्र रूपों के असामान्य या खराब गुणवत्ता के उपचार से परिणामस्वरूप होता है. इसके अलावा, विरासत का खतरा है और जो लोग बचपन के लिए स्तनपान कर चुके हैं.

Epilepsy

MBBS, MD - Medicine, DM - Neurology
Neurologist, Gurgaon
Play video

Epilepsy is a relatively common disorder. Most cases of epilepsy can be controlled with a combination of drug therapy and healthy lifestyle. In some cases, surgery may also be advised. Epilepsy affects not only the lifestyle of the patient but also that of their caregiver.

Patient-Doctor Relationship

MBBS, DNB (General Surgery), MNAMS (Membership of the National Academy) (General Surgery) , Fellowship In Minimal Access Surgery, Fellow of Indian association og gastro intestinal endo surgeons
General Surgeon, Ghaziabad
Play video

When you approach the doctor you should check the qualification. This can help you to find new good doctor who can treat you.

185 people found this helpful

Does Bilateral asymptomatic ovarian cyst require surgical removal in 60 + female person?

BHMS, Diploma in Dermatology
Sexologist, Hyderabad
Does Bilateral asymptomatic ovarian cyst require surgical removal in 60 + female person?
An ovarian cyst is a fluid-filled sac within the ovary. Often they cause no symptoms. Occasionally they may produce bloating, lower abdominal pain, or lower back pain. Many small cysts occur in both ovaries in polycystic ovarian syndrome.
Submit FeedbackFeedback

My mother is 52 years old, height 4'10" weight 56 kgs. She is very active throughout the day as she is a field supervisor. She walks nearly 1.5-2 km daily. Beneath all these she gets her sugar level to 110 before diet and 220 after diet. So is it diabetic? And how to control it?

BHMS
Homeopath, Hyderabad
My mother is 52 years old, height 4'10" weight 56 kgs. She is very active throughout the day as she is a field superv...
Healthy fats from nuts, olive oil, fish oils, flax seeds, or avocados. Fruits and vegetables—ideally fresh, the more colorful the better; whole fruit rather than juices. High-fiber cereals and breads made from whole grains. Fish and shellfish, organic chicken or turkey.
Submit FeedbackFeedback
View All Feed

Near By Clinics

Sri Balaji Hospital

Guindy, Chennai, Chennai
View Clinic

Sri Balaji Hospital

Guindy, Chennai, Chennai
View Clinic

Sri Balaji Hospital

Guindy, Chennai, Chennai
View Clinic

Sri Balaji Hospital

Guindy, Chennai, Chennai
View Clinic

Sri Balaji Hospital

Guindy, Chennai, Chennai
View Clinic