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Global Hospital is known for housing experienced General Physicians. Dr. Vijil Rahulan, a well-reputed General Physician, practices in Chennai. Visit this medical health centre for General Physicians recommended by 99 patients.

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MON-SAT
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439, Cheran Nagar, Chennai, Tamil Nadu 600100
Perumbakkam Chennai, Tamil Nadu - 601302
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Doctors in Global Hospital

Dr. Vijil Rahulan

MBBS, MD - CCM, Fellowship in Pulmonary and critical Care Medicine
General Physician
25 Years experience
700 at clinic
Available today
10:00 AM - 04:00 PM

Dr. Sundhari.V

MBBS, DNB - Otorhinolaryngology
ENT Specialist
21 Years experience
500 at clinic
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Srikumar Swaminathan

MBBS, MD - General Medicine, DM - Cardiology
Cardiologist
22 Years experience
600 at clinic
Available today
04:00 PM - 06:00 PM
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. V. Vaithiswaran

Gastroenterologist
Available today
09:00 AM - 03:00 PM
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Muthuveeramani

MBBS, MS - General Medicine, MCh - Urology
Urologist
30 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Saravanan Periasamy

MBBS, DNB ( General Surgery ), Membership of the Royal College of Surgeons (MRCS)
Oncologist
22 Years experience
Available today
02:00 PM - 02:30 PM
100 at clinic
Available today
08:00 AM - 05:00 PM

Dr. Kiranmayee Tirunagari

MBBS, MD - Pathology
Pathologist
13 Years experience
Available today
09:00 AM - 05:00 PM

Dr. Guruprasad

MBBS, MD, DM - Cardiology
Cardiologist
22 Years experience
1000 at clinic
Available today
09:00 PM - 09:59 PM

Dr. Abhilash Bhaskaran

BDS, MDS, FFDRCSI, MFDS RCS (Eng)
Dentist
22 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. S.Sham

MBBS, MD - General Medicine, DM - Rheumatology
Rheumatologist
13 Years experience

Dr. E Ravindra Mohan

MBBS, MD - Ophthalmology, FRCS
Ophthalmologist
34 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Dinesh Jothimani

MBBS, MRCP - Gastroenterology, CCT
Gastroenterologist
18 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Kabilan Chokkappan

MBBS, MD - Radio Diagnosis/Radiology
Radiologist
13 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. Nigel Peter Symss

MBBS, DNB (Neurology)
Neurologist
31 Years experience
700 at clinic
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. V. B. Narayana Murthy

MBBS, FRCS, DNB - Plastic Surgery
Cosmetic/Plastic Surgeon
35 Years experience
750 at clinic
Unavailable today

Dr. Deepti Sachan

MBBS, MD - Transfusion Medicine
Hematologist
14 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM

Dr. K S Sekar

MBBS
Oncologist
45 Years experience
Available today
09:00 AM - 03:00 PM
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खुजली का आयुर्वेदिक इलाज - Khujali Ka Ayurvedic Ilaaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
खुजली का आयुर्वेदिक इलाज - Khujali Ka Ayurvedic Ilaaj!

आज के प्रदूषित वातावरण में एलर्जी एक सामान्य समस्या बन गई है. इससे सभी लोग परेशान हैं. एलर्जी एक ऐसी समस्या है जो कभी भी किसी को भी हो सकती है. जहां तक बात है एलर्जी के लक्षणों की तो इसके सामान्य लक्षण हैं - बहती हुई नाक, गले में खराश, कफ, आंखों में खुजली और स्किन रैशेज. जो लोग मौसम के अनुसार एलर्जी से परेशान रहते हैं वो अपना बचाव ये समस्या शुरू होने से पहले कर सकते हैं.

आइए एलर्जी से निपटने के लिए कुछ घरेलु उपचार जानें.
1. बिच्छू बूटी-

बिच्छू बूटी बदलते मौसम के कारण होने वाली क्रोनिक एलर्जी के लिए बेहद प्रभावी है. यह प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन होने के कारण शरीर के हिस्टामिन के उत्पादन को बंद कर देती है जो आखिर में विभिन्न प्रकार के एलर्जी के लक्षणों से आराम दिलाती है. इससे राहत पाने के लिए सबसे पहले एक कप पानी में एक चम्मच सूखे बिच्छू बूटी की पत्तियों को डाल दें. इस मिश्रण को पांच मिनट तक उबलने के लिए रख दें. इसके बाद मिश्रण को छान लें और इसमें हल्का शहद जोड़ कर पी जाएँ. इस मिश्रण को दिन में दो से तीन बार पियें.

2. हल्दी-
हल्दी भी एलर्जी से छुटकारा दिलाने के लिए फायदेमन्द है, इसमें करक्यूमिन होता है जो एक सामान्य जुखाम के दवा की तरह काम करता है और एलर्जी के लक्षणों को दूर करने में सहायक है. इसके अलावा प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण हैं जो इसका इलाज मूल कारण से ठीक करते हैं. कांच के एक साफ जार में 6 चम्मच हल्दी पाउडर और शहद डालें. इस मिश्रण को अच्छे से मिला लें. एलर्जी के दौरान पूरे दिन में दो बार इस मिश्रण को एक एक चम्मच ज़रूर खाएं.

3. लहसुन-
लहसुन में प्राकृतिक एंटीबायोटिक होते हैं जो एलर्जी के लिए काफी प्रभावी है. लहसुन के एंटीवाइरल और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण डॉक्टर से आपको दूर रखते हैं. एक या दो हफ्ते के लिए रोज़ाना दो या तीन लहसुन की फांकें खाएं. अगर आपको लहसुन की गंध अच्छी नहीं लगती तो आप डॉक्टर से पूछने के बाद लहसुन के सप्लीमेंट्स को ले सकते हैं.

4. नींबू-
नींबू एक प्राकृतिक एंटीहिस्टामिन है और विटामिन सी का एक एक अच्छा स्त्रोत भी है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं. ये एन्टिटॉक्सिन की तरह भी काम करता है. नींबू एलर्जी की समस्या के लिए बेहद फायदेमंद है. मौसम के अनुसार एलर्जी शुरू होने से पहले रोज़ाना सुबह रोज़ एक कप पानी में ताज़ा नींबू का जूस निचोड़कर पीना शुरू कर दें. जब तक एलर्जी सीजन चला नहीं जाता तब तक रोज़ाना इस मिश्रण को पीते रहें.

5. नमक का पानी-
नाक को प्रतिदिन सलाइन से साफ़ करने पर राइनाइटिस एलर्जी के लक्षणों को सुधारने में मदद मिलती है. इसके लिए पहले एक चम्मच बिना आयोडीन युक्त नमक और एक चुटकी बेकिंग सोडा लें और फिर इन्हे एक चौथाई गर्म पानी में डाल दें. इसे उबलने के बाद मिश्रण को ठंडा होने तक छोड़ दें. अब इस मिश्रण अपनी एक नाम में की दस बूँदें डालें. फिर इस मिश्रण को या तो नाक से निकाल लें या मुँह से निकालें.

6. गर्म पानी-
एलर्जी के स्त्रोत से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी से नहाएं और बाहर से आने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें. इसके साथ ही गर्म पानी से नहाने से आपको साइनस को खोलने में भी मदद मिलती है जिससे आप आसानी से सांस ले पाते हैं. गर्म पानी आपको राहत देता है और सोने में भी मदद करता है. तो ये है ड्रग फ्री तरीके जो आपकी एलर्जी का इलाज करने में मदद करेंगे. हालाँकि अगर लक्षण ज़्यादा बढ़ने लगे तो अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं.

7. पेपरमिंट-
पेपरमिंट में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं जो एलर्जी रिएक्शन को कम करते हैं. पेपरमिंट टी बनाने के लिए एक चम्मच ड्राई पेपरमिंट की पत्तियों को एक कप पानी में पांच मिनट तक उबलने दें. इस मिश्रण को छान कर ठंडा होने के लिए रख दें. इसको पीने से पहले इसमें एक चम्मच शहद भी मिला लें. जब तक आपको लक्षणों से निजात नहीं मिल जाता तब तक पूरे दिन में दो या तीन बार पेपरमिंट चाय का मज़ा लें.

8. शहद-
ज़्यादातर लोगों ने ये कहा है कि लोकल शहद खाने से उन्हें एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत मिलती है. मधुमक्खियों द्वारा बनने वाला लोकल हनी एलर्जी को दूर करने में मदद करता है. एलर्जी सीजन के लक्षणों से राहत पाने के लिए पूरे दिन में तीन या चार बार एक या इससे ज़्यादा चम्मच शहद ज़रूर खाएं. अच्छा परिणाम पाने के लिए एलर्जी सीजन शुरू होने से एक महीना पहला आप ये लोकल शहद खाना शुरू कर दें.

9. सेब का सिरका-
सेब का सिरका एलर्जी के लिए बहुत ही पुराना उपाय है. इसके एंटीबायोटिक और एंटीहिस्टामिन गुण एलर्जी रिएक्शन का इलाज करने में मदद करते हैं. ये एलर्जी के कारणों का इलाज करता है और जल्दी जल्दी आने वाली छीकों, बंद नाक, खुजली, सिर दर्द और कफ के लक्षणों को भी ठीक करता है. एक चम्मच सेब के सिरके को एक ग्लास पानी में मिलाएं. फिर इसमें एक चम्मच ताज़ा नींबू का जूस और एक या आधा चम्मच शहद मिलाकर पी जाएँ.

10. स्टीम से फायदा-
स्टीम से कई फायदे होते है उसमे एक फायदा एलर्जी के कई लक्षणों से राहत दिलाना है. स्टीम आपको साइनस से राहत प्रदान करता है और साथ ही नजल ट्रैक्ट से बलगम और अन्य इरिटैंट को भी साफ़ करता है. आप पानी को भाप निकलने तक उबाल लें. इसको उबालने के बाद तीन से चार बूँद नीलगिरी तेल, पेपरमिंट तेल, रोज़मेरी या टी ट्री तेल की डालें. अब अपने सिर के चारो तरफ तौलिये को रखें और दस से 15 मिनट तक गर्म पानी से भाप लें.
 

सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

आज का वक्त बहुत बदल गया है. हर किसी को हर चीज़ अच्छी चाहिए जैसे अच्छी तनख्वाह, अच्छा घर, लक्सरी लाइफ आदि. यह सब पाने की होड़ में लोग संघर्ष में लगे है. उन्नति हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत में लगे है. इस लगातार किये जाने वाली मेहनत से हमें हर चीज़ तो बेहतर मिल रही है लेकिन यह हमारे स्वास्थ्य पर मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर पर गलत असर डाल रही है. हमारी इच्छाओं के चलते हम स्वयं को ज़रूरत से ज़्यादा तनावग्रस्त कर लेते हैं व शरीर को दिन रात काम करने वाली एक मशीन समझ लेते है. इस कड़ी मेहनत के चलते अति सामान्य रोग जो हम सभी को प्रभावित करता है, वह है गर्दन का दर्द. गर्दन का दर्द को चिकित्सा शब्दावली में ‘सर्विकालजिया’ कहा जाता हैं. यह दर्द लंबे अंतराल तक निरंतर एक ही मुद्रा में बैठे रहने, या पूरी रात ठीक से न सोने और कम व्यायाम करने के कारण होता है. कंप्यूटर पर काम करने वालो को यह समस्या बहुत ज्यादा होती है. इन लोगो को गर्दन और कंधे दोनों में दर्द होता रहता है.
मॉडर्न साइंस में सर्वाइकल स्पौण्डिलाइटिस का उपचार फिजियोथेरेपी और पेनकिलर टैबलेट हैं. इन तरीको से शीघ्र राहत तो मिल जाता है, लेकिन यह केवल अस्थायी राहत है. यदि इस समस्या का कोई स्थाई समाधान है तो वो है योग. योग इस बीमारी को जड़ से ठीक कर देता है. किन्तु एकदम से कठिन योग का अभ्यास करना सही नहीं है. कठिन योग करने से पहले कुछ आसान योग करने चाहिए. दरहसल हल्के फुल्के योग करने से धीरे-धीरे शरीर में लचक आ जाती है और कठिन योग के लिए शरीर तैयार हो जाता है. योग का एक सामान्य नियम यहीं है कि योग शुरू करते समय कुछ हलके फुल्के आसन करने चाहिए. इन हलके फुल्के आसनो से शरीर में उर्जा का संचार होता है और हमारा शरीर भी कठिन योगों के लिए तैयार होता है. यदि हम हल्के फुल्के आसन की जगह सीधे कठिन आसन शुरू करते है तो किसी प्रकार की परेशानियां भी आ सकती हैं.

* ग्रीवा संचालन
ग्रीवा संचालन आसन के अभ्यास से गर्दन से सम्बन्धित कई परेशानियों में लाभ मिलता है. जो लोगों को लम्बे समय तक गर्दन को एक ही स्थिति में रखकर काम करना होता है, उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए. इस आसन को आराम की मुद्रा में बैठकर किया जाता है. इस योग के दौरान गर्दन के मूवमेंट के अनुसार श्वास प्रश्वास करना चाहिए. इस योग क्रिया में श्वसन पर भी नियंत्रण करने का अभ्यास किया जा सकता है. ग्रीवा संचालन का नियमित अभ्यास करने से चेहरे पर कांति आती है और गर्दन सुडौल होती है. यह तनाव कम करता है और साथ ही शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम और सुकून देता है. शारारिक तनाव के अलावा यह मानसिक तनाव भी कम करता है. योग में बल की जरूरत नहीं होती है इसलिए ग्रीवा संचालन के दौरान गर्दन को अनावश्य रूप से तानना नहीं चाहिए.

* बालासन योग मुद्रा
बालासन योग मुद्रा का अभ्यास करने से गर्दन और पीठ के दर्द से निजाद मिलती है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले फर्श पर घुटने के बल बैठ जाएँ. इसके पश्चात सिर को ज़मीन से लगाएं. फिर अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और आपकी हथेलिया जमीं से छूती हुई होना चाहिए. अब अपने हिप्स को ऐड़ियों की ओर ले जाते हुए बहार की और सांस छोड़े. इस अवस्था में कम से 15 सेकेण्ड से 1 मिनट तक रहें. यह आसन का अभ्यास आपके कूल्हों, जांघों और पिंडलियों को लचीला भी बनाता है. यह आपके मन को शांत भी करता है.

* मत्स्यासन – फिश पोज़
मत्स्यासन करने के लिए सर्वप्रथम किसी समतल जगह पर चादर बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं. अब अपनी कुहनियों के सहारे सर तथा धड़ के भाग को जमीन पर रखें. अब इस स्थिति में पीठ का ऊपरी हिस्सा तथा गर्दन जमीन से ऊपर की और उठाए. हाथों को सीधा कर पेट पर रख लें. इस स्थिति में जितनी देर आसानी से रुक सकते हैं रुकें. फिर वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं.

* विपरीत कर्णी आसन
विपरीत कर्णी आसन आपको हल्के-फुल्के पीठ दर्द से आराम देता है. इस आसन में दीवार के सहारे पैर उपर करते है. सबसे पहले तो अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और अपने टाँगों को दीवार का सहारा देते हुए पैरों को छत की ओर उठा लें. अपनी बाहों को फैला कर शरीर के दोनों तरफ ज़मीन पर रख दें और आपकी हथेली आकाश की तरफ मोड़ कर खुली हुई होना चाहिए. कुछ सेकण्ड्स इस मुद्रा में रहे और गहरी लंबी श्वास लें और छोड़ें. यह योग क्रिया आपकी गर्दन के पिछले हिस्से को मालिश जैसा फायदा देता है और थकान को दूर कर पैरों की ऐंठन को दूर करता

* शवासन
इस आसन को सबसे बाद में करना चाहिए. यह आसन करने में सबसे सरल है. इसमें शरीर को ज़मीन पर स्थिर अवस्था में रखना है. सबसे पहले तो ज़मीन पर सीधे लेट जायें और हाथों को शरीर के दोनों ओर रख लें, पैरों को थोड़ा सा खोल दें. इस स्तिथि में आपकी हथेलिया आकाश की तरफ होनी चाहिए. मांसपेशियों तथा खुद को विश्राम देने के लिए शरीर को इस स्थिति में कम से कम 5 मिनट तक रखे.
 

कपूर के फायदे और नुकसान - Kapoor Ke Fayde Aur Nuksaan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
कपूर के फायदे और नुकसान - Kapoor Ke Fayde Aur Nuksaan!

आज कपूर हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चूका है. इसके औषधीय और गैर औषधीय दोनों तरह के इस्तेमाल हैं. चाइनीज और भारतीय प्राचीन काल से ही कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज और धार्मिक उद्देश्यों के लिए करते आ रहे हैं. उस समय उनका मानना था कि कपूर में गहरी चिकित्सा शक्तियां हैं लेकिन आज यह सिर्फ एक लोकप्रिय लोककथा न होकर हकीकत बन चुका है. आयुर्वेद में, कपूर को जलाना मानव मन और शरीर के लिए उपचार माना जाता है. कपूर सिनामोमस कैफ़ोरा नामक एक पेड़ से मिलता है. इस पेड़ के चीन, जापान में सबसे पहले उगाए जाने के संकेत मिलते हैं. भारत में यह देहरादून, सहारनपुर, नीलगिरि और मैसूर आदि में उगाया जाता है. आइए इसके फायदे और नुकसान को जानते हैं.

1. जोड़ों के दर्द में-
जोड़ों और मांसपेशियों के आसपास दर्द का सामना करने वाले लोग कपूर के इलाज से इसे ठीक कर सकते हैं. कपूर तेल एक वार्मिंग सेंसेशन पैदा करता है, जिसके परिणामस्वरूप नसों के विचलन होता है, जो आपको दर्द से राहत देता है. ऐंठन के लिए, आपको गर्म तिल के तेल में कपूर को मिक्स करके इस्तेमाल करने से राहत मिलती है.

2. खुजली में-
कपूर को खुजली वाली त्वचा में राहत प्रदान करने के लिए जाना जाता है. इसकी ख़ास बात ये है कि यह रोम छिद्रों द्वारा अवशोषित हो जाता है जिससे आपकी त्वचा को ठंडक मिलता है. इसके लिए एक कप नारियल तेल में पिसे हुए एक चम्मच कपूर को मिक्स करके इस मिश्रण को खुजली वाले क्षेत्र में 1-2 बार लगायें.

3. त्वचा को ठीक करने में-
कपूर आपकी त्वचा को टाइट करने के अलावा बैक्टीरिया निर्माण से मुक्ति पाने में भी मदद करता है. ये एक एंटी इंफेक्टिव एजेंट के रूप में कार्य करता है. एक अध्ययन के अनुसार कपूर तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिससे यह मुँहासे उपचार के लिए बहुत उपयोगी है.

4. मच्छरों भगाने के लिए-
यह एक प्राकृतिक मच्छर रिपिलन्ट. यह पारंपरिक रूप से पतंगों से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया गया है. अपने कमरे के कोने में एक कपूर टैबलेट जलाएं. इससे मच्छर दूर होते हैं.

5. जलने के उपचार में-
अगर आपकी त्वचा कही से हल्की सी जल जाएँ तो उसके लिए कपूर का उपयोग करें. यह जली हुई त्वचा को ठीक करने में मदद कर सकता है. न केवल यह आपको दर्द या जलन बल्कि घावों से मुक्त करता है. इसका नियमित आवेदन भी निशान को हल्का कर सकता है. इसका कारण यह है कि कपूर तेल तंत्रिका को उत्तेजित करता है, जिसके बदले में त्वचा को ठंडक मिलती है.

6. खाँसी के उपचार में-
कफ को दूर करने के लिए कपूर सबसे लोकप्रिय लाभों में से एक रूकी हुई छाती और नाक को साफ करने की क्षमता है. कपूर तेल में एक मजबूत गंध है जो एक भीड़भाड़ वाले श्वसन पथ को खोलती है. स्वीट आयल और कपूर का एक समान भाफ मिलाकर छाती पर धीरे से रगड़ें.

7. बालों के लिए-
नारियल के तेल के साथ कपूर की मालिश करने से स्वस्थ बाल विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है. हालांकि, नारियल के तेल ने बालों के नुकसान को रोकने, रूसी को कम करने और कंडीशनर के रूप में काम किया है.

8. कपूर के अन्य फायदे-
तुलसी के पत्तों के रस में कपूर को मिला कर दो दो बूँद को कान में डाल लें. इससे आपके कान का दर्द दूर होगा. कपूर, जायफल और हल्दी को बराबर मात्रा में मिला कर उसमें थोड़ा पानी डालें. इस मिश्रण को पेट पर लगायें और आपका दर्द कम हो जाएगा.

कपूर के नुकसान-
* इसे सीधे-सीधे त्वचा में लगाने से जलन हो सकती है इसलिए किसी भी वाहक तेल के साथ कपूर तेल को मिक्स करके इस्तेमाल करें.
* 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कपूर का उपयोग नहीं करना चाहिए.
* गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कपूर से बचना चाहिए.
* कपूर को मौखिक रूप से न लें क्योंकि यह अत्यधिक जहरीला होता है.

आँख के रोग - Aankh Ke Rog!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
आँख के रोग - Aankh Ke Rog!

आँखों से ही हम इस दुनिया के दृश्य रूप का अनुभव कर पाते हैं या फिर इसके अद्भुत सौंदर्य को निहार पाते हैं. इसीलिए आँखों को इवान ज्योति भी कहा जाता है. आँख के रोग होना आम तौर पर होने वाली परेशानियों में से एक है. इस समस्या के लिए कोई ख़ास उम्र नहीं होती है. ये किसी को भी कभी भी हो सकती है. ये रोग आपको जीवाणु, विषाणु, कवक या अन्य किसी प्रकार से भी हो सकता है. ये रोग आँखों के विभिन्न भागों में हो सकता है. हो सकता है कि ये एक साथ दोनों आँखों को प्रभावित कर दे. एक रोग होने के कारण ये एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को हो सकता है. इस दौरान आपको लालिमा, खुजली, सूजन, दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम आँखों के विभिन्न रोगों के बारे में जानें ताकि इस विषय में लोगों को जागरूक किया जा सके.
 

आँख के रोग के प्रकार

हमारे आँखों में होने वला ये रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. एक है कंजंक्टिवाइटिस जिसे हम आम तौर पर पिंक आई के रूप में भी जाना जाता है. इस रोग का असर बच्चों पर बहुत ज्यादा पड़ता है. दुसरे का नाम है स्टाई, इसके होने का कारण है जीवाणुओं का हमारी त्वचा से पलकों के हेयर फॉलिकल पर आ जाना. इसकी वजह से ये प्रभावित होता है.

 आँखों को के रोग के लक्षण
इसके लक्षणों में लालिमा, खुजली, सूजन, दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं. उपचार रोग के कारणों पर निर्भर करता है और इसमें आई ड्रॉप्स, क्रीम, या एंटीबायोटिक्स शामिल हो सकते हैं. नेत्र रोग आम तौर पर आत्म-सीमित होते हैं, और यह न्यूनतम इलाज या बिना इलाज के ठीक हो जाता है. कभी-कभी समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि यह अपने आप ठीक नहीं होता और दवाइयों और इलाज की आवश्यकता पड़ती है.

आँखों में होने वाले रोग का उपचार
अक्सर डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर और आपकी आँख की जाँच करके कंजंक्टिवाइटिस का निदान कर लेते हैं. हालांकि, कभी-कभी संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस और अन्य प्रकार के कंजंक्टिवाइटिस के निदान में भ्रम हो सकता है. संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस में डॉक्टर इसके लक्षणों और उपस्थिति से इसका निदान करते हैं. इसमें आंख को आमतौर पर एक स्लिट लैंप से देखा जाता है. संक्रमित रिसाव के नमूने को एकत्रित करके जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है ताकि रोग करने वाले जीव का पता लगाया जा सके.

लक्षण गंभीर पाए जाने पर
जब लक्षण गंभीर या बारम्बार होते हैं. जब रोग की वजह क्लैमाइडिया ट्रैस्कोमैटिस या नेइसेरिया गानोरिआ को माना जाता है. जब व्यक्ति को प्रतिरक्षा प्रणाली का एक नुकसान होता है. जब व्यक्ति को कोई आंख की समस्या होती है जैसे कि कॉर्नियल ट्रांसप्लांट या ग्रेव्स रोग के कारण आंख में फुलाव. स्वैब टेस्ट इस टेस्ट में स्वैब (जो कि रुई के फोहे जैसा दिखता है) के द्वारा आपकी संक्रमित आँख से चिपचिपे पदार्थ जिसे म्यूकस कहते हैं के एक छोटे से नमूने को इकट्ठा करके परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है ताकि कंजंक्टिवाइटिस के प्रकार की पुष्टि हो सके.

कंजंक्टिवाइटिस
इसका उपचार इसके होने की वजह पर निर्भर करता है. यदि आपको यह एक रासायनिक पदार्थ की वजह से हुआ है तो शायद कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाएं लेकिन यदि यह एक जीवाणु, वायरस, या एलर्जी से हुआ है, तो कुछ उपचार विकल्प हैं - बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस बैक्टीरियल रोग के लिए, एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है. एंटीबायोटिक दवा से लक्षण कुछ ही दिनों में चले जाते हैं. वायरल कंजंक्टिवाइटिस वायरल रोग के लिए कोई इलाज उपलब्ध नहीं है. यह रोग सात से दस दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है. तब तक, सिकाई करने से आपके लक्षणों में कमी आ सकती है.

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
एलर्जी के कारण हुए कंजंक्टिवाइटिस के इलाज के लिए आपके डॉक्टर शायद सूजन को रोकने के लिए आपको एंटीहिस्टामाइन देंगे. लोराटाडिन और डिफेनहाइडरामाइन एंटीहिस्टामाइन होते हैं जो केमिस्ट के पास आसानी से उपलब्ध हैं. वे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस सहित एलर्जी के लक्षणों को ठीक करने में मदद करते हैं. डॉक्टर आपको एंटीहिस्टामाइन आईड्रॉप्स या एंटी-इंफ्लेमटरी आईड्रॉप्स भी दे सकते हैं.
 

आँख की रोशनी बढाने का उपाय - Aankh Ki Raushani Badhane Ka Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
आँख की रोशनी बढाने का उपाय - Aankh Ki Raushani Badhane Ka Upay!

आँखों के बिना सब कुछ अजीब लगता है. जाहिर है कई लोगों के पास प्राकृतिक रूप से और कुछ लोग दुर्घटनावश आँखें नहीं होतीं. इसलिए उनका जीवन थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसलिए हमें हमारी आँखों के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. आँखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत हिस्सा हैं. इसलिए आँखों की देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है. आँखों की बेहतर दृष्टि से हम अपने चारों ओर एक खूबसूरत एक विविधता से भरी दुनिया देखते हैं. आपको बता दें कि आँखों की माशपेशियां शरीर में सबसे अधिक क्रियाशील होती हैं. तो इसलिए आइए हम अपने आंखों की रौशनी बढ़ाने के

उपायों के तरीके जानें.
1. आंवला-
आँवला आँखों के बेहतर दृष्टि के लिए बहुत फायदेमंद है. यह रेटिना की कोशिकाओं के समुचित कार्य करने में सहायक होता है. आँवला विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट के साथ समृद्ध होता है और आँखों की देखभाल के लिए बहुत अच्छा है. आप आँवले का कच्चे रूप में या एक अचार के रूप में भी उपभोग कर सकते हैं. आप स्वस्थ आँखों के लिए एक गिलास आँवले का रस हर दिन पी सकते हैं.

2. सौंफ-
सौंफ एक अद्भुत महान जड़ी बूटी है जो प्राचीन रोम के लोगों द्वारा दृष्टि के लिए प्रयोग की गई थी. यह पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है जो दृष्टि में सुधार कर सकते हैं. रात का खाना खाने के बाद, आप हर रात कुछ चीनी के साथ सौंफ खा सकते हैं और इसके बाद गर्म दूध का एक गिलास ले सकते हैं.

3. पर्याप्त नींद-
यह हम सभी को पता है की आँखों को आराम देना कितना महत्वपूर्ण है. आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए की आँखों को अत्यधिक तनाव ना दें. आँखों को प्रयाप्त आराम देने के लिए प्रतिदिन 7-8 घंटे की एक अच्छी नींद लें. एक अच्छी नींद आँखों के तनाव से छुटकारा पाने और तरोताज़ा रखने में मदद करती है. रात में देर तक जागने से आँखों को नुकसान होता है.

4. ब्लू बेरी-
ब्लू बेरी एक महान जड़ी-बूटी है जो एंटीऑक्सीडेंट के साथ भरी हुई है. यह रेटिना को उत्तेजित करती है और दृष्टि में सुधार भी करती है. यह कई तरह के आँखों के विकार से छुटकारा दिलाती है. जैसे मांसपेशियों का अध यह फल विशेष रूप से अच्छा है और बेहतर नेत्र दृष्टि के लिए आहार में शामिल किया जा सकता है.

5. आँखों का व्यायाम-
एक आरामदायक स्थिति में बैठें और अपने अंगूठे के साथ अपने हाथ को बाहर खींछे. अब अपने अंगूठे पर ध्यान केंद्रित करें. हर समय ध्यान केंद्रित करते हुए, जब तक आपका अंगूठा आपके चेहरे के सामने लगभग 3 इंच तक ना आ जाए और फिर दूर करें जब तक आपका हाथ पूरी तरह से फैल ना जाए. कुछ मिनटों के लिए यह करें. यह व्यायाम ध्यान केंद्रित करने और आंख की मांसपेशियों में सुधार लाने में मदद करता है. एक और उपयोगी व्यायाम है, अपनी आँखो को बाएं किनारे से दाहिने किनारे तक ले जाएं, फिर ऊपर की तरफ भौं केंद्रित करें और फिर नीचे की ओर नाक की नोंक पर देखें.

6. सूखे मेवे-
सूखे मेवे और नट्स खाना भी आँखों के लिए फायदेमंद होता है. नट्स जैसे बादाम में ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन ई होता है जो आंखों के लिए अच्छा है. यह भूख को संतुष्ट कर जंक फूड की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.

7. हरी सब्जियां-
एक बहुत अच्छे नेत्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में पालक, चुकंदर, मीठे आलू, शतावरी, ब्रोकोली, वसायुक्त मछली, अंडा आदि अन्य खाद्य पदार्थ भी फायदेमंद होते हैं.

8. गाजर-
गाजर आँखों के लिए एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है, जिसमे विटामिन ए होता जो आँखों के लिए फायदेमंद है. अच्छे नेत्र स्वास्थ्य के लिए एक नियमित आधार पर गाजर का सेवन करते रहें. आप हर दिन एक गिलास गाजर के रस को भी पी सकते हैं.

Leucoderma - Know More About It!

B.A.M.S.
Ayurveda, Navi Mumbai

Leucoderma is a genetic disorder triggered due to stress, irregular life style and constipation.

Skin Care Tip!

MBBS, MD - Dermatology
Dermatologist, Bhubaneswar
Skin Care Tip!

Whether or not you have acne, it's important to wash your face twice daily to remove impurities, dead skin cells, and extra oil from your skin's surface.

Ayurvedic Methods Of Semen Analysis (Sperm Test)!

Bachelor of Ayurveda, Medicine & Surgery (BAMS)
Ayurveda, Nashik
Ayurvedic Methods Of Semen Analysis (Sperm Test)!

AYURVEDIC METHODS OF SEMEN ANALYSIS :- 
DETAILED description of examination of the seminal fluid is available in the ayurvedic classics. It is in common practice to use the terms retas, shukra, and virya to be vaguely
However, these words are coined for a specific purpose; that is to say, Shukra denotes the whole testicular secretion comprising of sperms and androgens; while retas denotes the ejaculate and Virya, the androgens .
The examination of retas (semen) has been explained by Charaka under eight factors, where as Sushruta has described different pathological conditions of the semen .

The eight factors of examination of semen are said to be. 
* Phenila 
*Puti 
*Tanu 
*Picchila 
*Ruksha 
*Anya dhatu samsrsta 
*Vivarna 
*Avasadi

More About Unani System Of Medicine!

Doctor In Unani Medicine(D.U.M.B.I.M)
Sexologist, Delhi
More About Unani System Of Medicine!

 

Introduction
The Unani System of Medicine has a long and impressive record in India. It was introduced in India by the Arabs and Persians sometime around the eleventh century. Today, India is one of the leading countries in so far as the practice of Unani medicine is concerned. It has the largest number of Unani educational, research and health care institutions.

As the name indicates, the Unani system originated in Greece. The foundation of the Unani system was laid by Hippocrates. The system owes its present form to the Arabs who not only saved much of the Greek literature by rendering it into Arabic but also enriched the medicine of their day with their own contributions. In this process, they made extensive use of the science of Physics, Chemistry, Botany, Anatomy, Physiology, Pathology, Therapeutics and Surgery.

Unani Medicines got enriched by imbibing what was best in the contemporary systems of traditional medicines in Egypt, Syria, Iraq, Persia, India, China, and other Middle East countries.  In India, Unani System of Medicine was introduced by Arabs and soon it took firm roots.  The Delhi Sultans (rulers) provided patronage to the scholars of Unani System and even enrolled some as state employees and court physicians.

After independence, the Unani System along with other Indian systems of medicine received a fresh boost under the patronage of the National Government and its people. The government of India took several steps for the all round development of this system. It passed laws to regulate and promote its education and training. It established research institutions, testing laboratories and standardized regulations for the production of drugs and for its practice. Today the Unani system of medicine with its recognized practitioners, hospitals and educational and research institutions, forms an integral part of the national health care delivery system.

Skin Care Tip!

MBBS, MD - Dermatology
Dermatologist, Bhubaneswar
Skin Care Tip!

Drink at least eight glasses (64 ounces total) of water daily. Water flushes waste out of our system and keeps the skin hydrated, acting as an internal moisturizer.

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