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Dr. Thanigaivel

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I believe in health care that is based on a personal commitment to meet patient needs with compassion and care....more
I believe in health care that is based on a personal commitment to meet patient needs with compassion and care.
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Dr. Thanigaivel is a renowned Veterinarian in Santhome, Chennai. Doctor is currently practising at Heart2Heart Veterinary Hospital in Santhome, Chennai. Don’t wait in a queue, book an instant appointment online with Dr. Thanigaivel on Lybrate.com.

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My Dog is active and smart. He is a cross breed of Gradient and Rajapalyamam but he still not grown big neither fat. He is always thin and hyper. Anything to worry or concern?

MVSC
Veterinarian, Hyderabad
Hi, what is the age of your dog? if it is active you dont worry about weight of the dog. Give good food which he likes and deworm regularly.
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Vaccination In Pets

B.V.Sc
Veterinarian, Varanasi
Vaccination In Pets

Vaccination in dog

टीकाकरण की प्रकिया एक ऐसा उपाय है जिससे, कुत्तो में होने वाली कुछ प्रमुख विषाणु एवं जीवाणु जनित जानलेवा एवं लाइलाज, बीमारियों जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज तथा केनल कफ़ आदि से बचाव के लिए समय समय पर कुत्तों के शरीर में टीका लगाया जाता है,जिससे इन रोगों के खिलाफ रोगप्रतिरोधक क्षमता का शारीर में विकास हो जाता है और हमारा पालतू जानवर एक सिमित अवधि तक इन बिमारियों के घातक प्रभाव से बचा रहता है |

कुछ टीकाकरण संबंधी सामान्य प्रश्नो के जबाब -
 
१- क्या सभी उम्र के कुत्तो का टीकाकरण जरूरी होता है?
हाँ। आमतौर पर १. ५ महीने (४५ दिन) के उम्र से ऊपर सभी कुत्तो का नियमित समय पर टीकाकरण करना जरूरी होता है यदि किसी कारण वश नयमिति या कभी कराया ही न गया हो तो किसी भी उम्र से टीकाकरण शुरू किया जा सकता है। 

२. छोटे बच्चो को किस उम्र से टीका का पहली खुराक देना शुरू करना चाहिए?
४५ दिन के उम्र से ही टीके की पहली खुराक देना बेहद जरूरी होता है 

३. क्या सभी छोटे पप्स को टीकाकरण के पहले पेट के कीड़े देना जरूरी होता है -
हाँ। बहुत से परजीवी ऐसे होते है जो माँ के पेट से ही या दूध के जरिये से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाते है जिससे शरीर को कमजोर कर देते है और जब टीका लगाया जाता है तो कमजोरी के वजह से उतना अच्छा शरीर में प्रतिरोधक छमता का विकास नहीं हो पता इसलिए पहले ऐसे परजीवीओ को नष्ट करना जरूरी होता है 

४. क्या होता है टीकाकरण का सही उम्र और समयांतराल?
१. पहली खुराक -जन्म के ६ -८ सप्ताह के उपरांत(कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा हेतु) 
२. बूस्टर खुराक या दूसरी खुराक - प्रथम खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर दूसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 
३. तीसरी खुराक - रेबीज वायरस हेतु- प्रथम खुराक जन्म के ३ माह के उपरान्त। 
४. बूस्टर खुराक या चौथी खुराक - तीसरी खुराक के २-३ सप्ताह बाद ; फिर तीसरी खुराक के ठीक एक साल बाद वार्षिक खुराक साल में एक बार पूरी उम्र तक लगवाते रहना चाहिए। 

५. क्या बूस्टर खुराक देना जरूरी होता है या नहीं?
जन्म के साथ ही माँ से प्राप्त एंटीबाडीज और प्रथम दूध से मिलने वाली सुरछा कवच कुछ सप्ताह तक नवजात के खून में मौज़ूद रह करअनेको बीमारयों से सुरछा प्रदान करती है परन्तु समय के साथ साथ इनकी मात्रा बच्चे के शरीर में कम होने लगती है। जिससे बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए लगभग ४५ दिन के बाद टिका का प्रथम खुराक देते है यद्पि ये पता नहीं रहता की माँ से मिलने वाली सुरछा का असर किस स्तर का है जिससे आमतौर पर ये स्तर अधिक होने पर प्रथम खुराक से बच्चे के शरीर में टीकाकरण की गुणवत्ता को बाधित करती है, जो की पप्पस में रोगप्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने में असक्षम हो जाता है इसलिए कुछ सप्ताह बाद टीकाकरण के दूसरी खुराक दे कर टीकाकरण से रोगप्रतिरोधक क्षमता करने के उद्देश्य को प्राप्त करते है ऐसी दूसरी खुराक को बूस्टर खुराक कहते है। 

६. क्या है टीकाकरण की सही खुराक देने के मात्रा:
डॉग चाहे किसी भी उम्र, भार, लिंग अथवा नस्ल के हों उनको समान मात्रा में टीकाकरण का खुराक दिया जाता है 

७. क्या है टीकाकरण का सही तरीका:
टीकाकरण खाल के नीचे:कैनाइन डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस, पार्वो वायरस, लेप्टोस्पायरोसिस, पैराइन्फ़्लुएन्ज़ा तथा रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए खाल के नीचे दिया जाता है
 नथुनों में:केनल कफ़ का टीकाकरण कुत्ते के नथुनों में दवा डाल कर किया जाता है

८. क्या सभी टीके एक ही प्रकार के होते है:कुत्तों में टीकाकरण दो प्रकार की होती है
 १. कोर टीकाकरण - टीकाकरण जो सभी कुत्तों के लिये आवश्यक है. यह उन बिमारीयों में दिया जाता है जो आसानी से फैलती हैं अथवा घातक होती हैं जैसे रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर.
 २. नान कोर टीकाकरण – उपरोक्त ४ बिमाँरीयों (रेबीज, एडीनोवायरस, पार्वोवायरस, और डिस्टेंपर) के टीकाकरण को छोड़कर अन्य सभी नानकोर टीकाकरण माना जाता है | यह उन बिमाँरियों से सुरक्षा प्रदान करता है जो वातावरण के अनावरण अथवा जीवनचर्या पर निर्भर करती है जैसे लाइम डिजीज, केनलकफ और लेप्टोस्पाइरोसिस.

९. एक सफल टीकाकरण करने के बाद क्या फिर भी टीकाकरण विफल हो सकता है?हाँ। 
 टीकाकरण के विफलता के कारण कुत्ते में बीमारी होने के निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते है –
१. टीकाकरण के दौरान कुत्ते की रोगप्रतिरोधक क्षमता का सम्पूर्ण रूप से कार्य न करना |
२.आयु – कम उम्र के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्णतः विकसित नही होती और बड़े आयु के जानवरों की प्रतिरक्षा प्रणाली कई कारणों से अक्सर कमज़ोर या क्षीण हो जाती है |
३. मानवीय चूक (टीके का अनुचित संग्रहण या अनुचित मिश्रण)- टीकों का संग्रहण एवं इस्तेमाल भी निर्देशानुसार ही होना आवश्यक है | सूरज की रोशनी,गर्म तापमान टीके के प्रभाव को नस्ट कर सकता है | टीके का मिश्रण पशु में टीकाकरण के तुरंत पहले तैयार करना चाहिए | टीके खरीदने के पहले पता करना चाहिए कि टीकों को उचित तापमान एवं देखभाल से रखा गया है या नहीं |
४. डीवार्मिंग – टीकाकरण करने के पहले पेट के कीड़े मारने के लिए डीवर्मिंग करना आवश्यक है, वरना इस तरह का तनाव टीकाकरण के प्रभाव को कम कर सकता है |
५. गलत सीरोटाईप / स्टेन का इस्तेमाल – प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बहुत विशिष्ट होती है | अतः टीके में होने वाली जीवाणु या विषाणु की सही स्टेन होनी चाहिए वरना उससे उत्पन्न होने वाली प्रतिरक्षा जानवर में सही तौर पर सुरक्षा नहीं कर पाती |
६. अनुवांशिक बीमारियाँ – कुछ जानवरों में आनुवंशिक बिमारियों की वजह से सभी रोगों के लिए प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पर कम ही उत्पन्न हो पाती है |
७. वैक्सीन की गुणवत्ता – टीके में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयाप्त मात्रा में प्रतिजनी की मात्रा होना चाहिए वरना टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रयाप्त नहीं होती है |
८. पुराने या अवधि समाप्त टीके – पुराने टीकों में आवश्यक प्रतिजनी गुण समाप्त या कम हो जाता है | इस तरह के टीके लगाने से जानवरों को बेमतलब तनाव दिया जाता है |
९. टीकाकरण का अनुचित समय – टीका निर्माता के निर्देशों के अनुसार टीकाकरण का समय (उम्र एवं मौसम के अनुसार), लगाने का तरीका एवं मात्रा तथा दोबारा लगाये जाने की अवधि, इत्यादि निश्चित होता है |इन निर्देशों का पालन सही समय पर न करने से टीकाकरण विफल या निष्क्रिय हो जाता है |
१०. पोषण की स्तिथि- कुपोषण की वजह से जिन पशुओं में पोषक तत्वों की कमी रह जाती है उनमे टीकाकरण के बाद भी प्रतिरोधक छमता सामान्य तौर पे कम ही उत्पन्न हो पाती है |

10. क्या वैक्सीन लगते समय कुत्ते पर कोई दुस्प्रभाव हो सकते है? हाँ 
 कुछ कुत्तो प्रतिरोधक छमता अधिक सक्रिय होने की वजह से कुछ सामान्य लचण जैसे ज्वर, उल्टी, दस्त, लासीका ग्रंथियों का सूजना, मुख का सूजना, हीव्स, यकृत विफलता और कभी -कभी मौत भी हो सकती है।

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My dog is having some kind of invection on his ear.Like its kind of spoiled or anything.What shall i do?

MVSC
Veterinarian, Hyderabad
First look at the ear lobes of your dog, is it erect or drooping. Check for any discharge from the ears, if possible try to clean gently with sterile ear bud. If you see any colour or smell of ear bud , take to vet for ear cleaning. If the infection seems to be severe, even the culture of ear washings can help us for right antibiotic.
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MVSc
Veterinarian,
Five Common Summer Hazards for Dogs

1. Dehydration
One of the best ways to keep your dog safe in the summer time is by providing lots of cool, clean, fresh water. Consider preparing low sodium chicken broth or yogurt ice cubes, and introducing canned dog foods (best when frozen in a Kong!) to increase the moisture content in your dog’s diet.

2. Burned Pads
Under the summer sun, asphalt on sidewalks and streets can heat to a temperature that can burn a dog’s paws. To avoid scorched paws, walk your dog very early in the morning or in the late evening when the streets have cooled off. If you must walk your dog during the day, dog booties can protect his feet. Always put your hand down on the asphalt for about thirty seconds – if you must pull your hand away because the street is too hot, it is too hot for your dog to walk on without hurting his paws. If you don’t want your hand on the street for thirty seconds, your dog probably does not want his paws on it for thirty or more minutes of walking.

3. Parasites
Summer is the season for fleas, ticks, and mosquitoes; pests which can present a minor discomfort to your dog at best and at worst may be life threatening or cause self-mutilating behaviors. Feeding your dog a high quality diet, without preservatives or chemicals will build his immune system, making him generally more resistant to parasite infestation. There are a wide variety of preventatives on the market, including chemical spot-on treatments, repellent shampoos, essential oils, and flea/tick collars; talk to your vet to see what she recommends for your dog. Cleaning your house frequently and keeping your dog well groomed will also reduce the risk of parasite infestation.

4. Heat Stroke
Heat stroke is a serious risk to dog’s health – in worst case scenarios, it can be fatal. You can prevent heat stroke by restricting your pet’s exercise during the hottest hours of the day (early morning or late evening are the best times for exercise during the summer), by making sure he is well hydrated, providing cool places for him to relax, providing opportunities to swim, cooling mats, and by never leaving your dog unattended in the car during summer heat.

Many dogs die annually in hot cars. Even if your windows are cracked or you park in the shade, heat can build quickly in a car in the summer, turning it into an oven. If it’s 95 degrees at noon and you leave your windows cracked, the temperature in your car may still rise as high as 113 degrees. This is a recipe for disaster for your dog. If you must leave your dog in the car for any period of time, the air conditioning should stay on. Leaving a dog to die in a hot car is not just a health risk for your dog, but may be cause for animal cruelty charges in some area. The solution? Don’t leave your dog in a hot car.

5. Leptospirosis
Leptospirosis is contracted through bodily fluids or tissue and can be transmitted through direct (as in the case of a bite or ingestion of flesh) or indirect contact (through water sources, food, etc.) with an infected animal. Stagnant waters are a common source of leptospirosis bacteria. Lepto can cause permanent health problems or death if not treated quickly. Symptoms include fever, vomiting, trembling/shaking, lethargy, anorexia, tenderness of joints and muscles, and increased water intake. If you suspect your dog has lepto, get him to a vet right away, an emergency vet if need be.

There are vaccines for lepto but they do not prevent all strains and can cause significant adverse reactions. Talk to your vet about weighing the risk of infection with the risks associated with the lepto vaccine.
3 people found this helpful

Sir I have a golden retriever puppy of 30 days old nw it has fleas on it nw I afraid weather they will be gone by anti fleas powder or they will not.

B.V.Sc. & A.H., MVS
Veterinarian, Ahmedabad
Sir I have a golden retriever puppy of 30 days old nw it has fleas on it nw I afraid weather they will be gone by ant...
Notix/Bolfo powder is the only compound safe enough to use on such a young puppy. When using that remember to brush out the coat after application. Also, since he has fleas, he must also be dewormed with a puppy dewormer.
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My dog has injured his hands. And he is continuously licking it and it is making it worse. Blood is coming out of it.

MVSc
Veterinarian,
You can apply neem oil on its wound, so that your dog will stop licking the wound due to its smell and taste, and need oil is also heals wound and acts as antibacterial and antifungal medicine.
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My dog, a mix of labra and pomerian, getting a lot of hair fall from last 2-3 days. She has recently recovered from fever and stomach infection. She was given bath 2 days back and since then a lot of hair fall althouh hair fall was before this bath also but not much.

Master of sciences, B.V.Sc. & A.H.
Veterinarian, Salem
I think it has combined affect of winter shedding and also the skin infection, so please go for omega 3, 6 fatty acids supplement and if not recovered on 15 days pls consult an vet near by.
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How to identify that my dog has fever for two days he is not eating anything there is changes in him.

Masters Of Veterinary Science In Veterinary Surgery And Radiology
Veterinarian, Gurgaon
If possible you can take Rectal temperature. If it’s more than 102.5 degree Fahrenheit, it may be fever. If fever is there go for routine blood test to know the cause of fever.
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If a dog is kept outdoors in summers India and if we pour water on her and leave outside only then can it cause heatstroke.

B.V.Sc. & A.H., M.V.Sc.-Pathology
Veterinarian, Bangalore
Yes, the chances are high. Its always better to keep the dog indoors during summer and provide adequate amount of water to drink.
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