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velachery ks hospital

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No. 14, 10th Cross Street, Opp. Ramyam Supermarket, AGS Colony, Velachery, Chennai
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velachery ks hospital General Physician Clinic No. 14, 10th Cross Street, Opp. Ramyam Supermarket, AGS Colony, Velachery, Chennai
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It is important to us that you feel comfortable while visiting our office. To achieve this goal, we have staffed our office with caring people who will answer your questions and help you ......more
It is important to us that you feel comfortable while visiting our office. To achieve this goal, we have staffed our office with caring people who will answer your questions and help you understand your treatments.
More about velachery ks hospital
velachery ks hospital is known for housing experienced General Physicians. Dr. Usha Ragunathan, a well-reputed General Physician, practices in Chennai. Visit this medical health centre for General Physicians recommended by 54 patients.

Timings

MON-SAT
11:00 AM - 06:00 PM

Location

No. 14, 10th Cross Street, Opp. Ramyam Supermarket, AGS Colony, Velachery,
Ramapuram Chennai, Tamil Nadu - 600042
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Doctor in velachery ks hospital

Dr. Usha Ragunathan

MD
General Physician
8 Years experience
200 at clinic
Available today
11:00 AM - 06:00 PM
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मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं?

BAMS, CERTIFICATE COURSE IN KSHAR-SUTRA SURGERY
Ayurveda, Jodhpur
मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं?

नमस्कार मित्रो!
एल.एन.आयुर्वेदा एवं क्षारसूत्र क्लीनिक-जोधपुर में आप सभी का स्वागत हैं आज हम इस बात पर चर्चा करेंगें कि मल द्वार या गुदामार्ग में होने वाले रोगो में कौन-कौन से लक्षण मिलते हैं -
. मल द्वार से बिना दर्द के बूंद-बूंद या धार रूप में लगातार या रूक रूक के खून आना 
. मल द्वार में जलन, चुभन, दर्द होना 
. बैठने में या बाइक चलाते वक्त दर्द होना
. मल का पतला या बद्ध कर आना, एक बार या बार-बार आना
. मल द्वार के चारो ओर किसी फोडे. या फुडिया का बार-बार बनना और फूटना और उसमें से पस या चिपचिपा पानी आना 
. रीड्ड की हड्डी के पास नासूर का बनना 
अगर इनमें से कोई लक्षण मिलते हैं तो यह जरूरी नही कि वो पाइल्स ही हो वो और कोई बीमारी भी हो सकती हैं क्योंकि अक्सर ऐसा देखा गया हैं कि सामान्यतया अगर इनमे् से कोई लक्षण मिलता हैं तो रोगी चिकित्सक के पास जाता हैं तो वो हमेशा यही बोलता हैं कि मुझे पाइल्स की समस्या हैं और वो शर्म के कारण या अन्य किसी कारण वो चैक-अप नहीं करवाता हैं कभी कभी चिकित्सक भी बिना चैक-अप के पाइल्स समझ कर सीधा ट्रिटमेन्ट ही लिख देता हैं जिस कारण वो समस्या ठीक ना होकर या थोडे समय के लिये ठीक रहकर अगली बार विकराल रूप में प्रकट होती हैं वो कुछ भी हो सकती हैं.हो सकता हैं वो पाइल्स ना हो के फिशर हो.हो सकता हैं वो फिश्टूला हो.हो सकता हैं वो पिलोनिडल साइनस हो.या ये भी हो सकता हैं इनमें से एक भी ना होकर गुदामार्गगत केन्सर ही हो तो दोस्तो अगर ऊपर बतलाये लक्षण में से कोई भी परेशानी हो तो किसी अच्छे चिकित्सक से चैक-अप जरूर करवाये और उस समस्या का स्थायी समाधान करवायें  क्योंकि कहा भी गया हैं रोग और कर्जा कभी ज्यादा समय नहीं रखना चाहिये!

आइये चुने.स्वस्थ एवं आनन्दमय जीवन.आयुर्वेद के संग!

PCOS: Major Causes Behind

Masters In Counselling & Psychotherapy, DGO, MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery
Gynaecologist, Mumbai
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Polycystic ovary syndrome (PCOS) affects a woman’s hormone levels. It is believed that high levels of male hormones prevent the ovaries from producing hormones and making eggs normally. Moreover Genes, inflammation and insulin resistance have all been linked to excess androgen production.

Sore Throat

DNB (ENT), JLN Medical college,Ajmer, Senior Residency ENT, Junior Residency in Neurology, Junior Residency in Anaesthesia
ENT Specialist, Delhi
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Sore throat refers to a painful , dry or scratchy feeling in the throat. Sore throats usually feel dry,irritated,scratchy and at times burning as well. Those that are caused by a viral infection usually get better on their own in two to seven days. Yet some causes of a sore throat need to be treated.

Ayurvedic Treatment Of Tuberculosis - क्षय रोग का आयुर्वेदिक उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ayurvedic Treatment Of Tuberculosis - क्षय रोग का आयुर्वेदिक उपचार

क्षय रोग जिसे टीबी के नाम से भी जानते हैं, इसकी बिमारी ट्यूबरकल बेसिलाई नामक जीवाणु के द्वारा उत्पन्न होता है. इस बिमारी के प्रमुख लक्षणों में खाँसी का तीन हफ़्तों से ज़्यादा रहना, थूक का रंग परिवर्तित हो जाना या उसमें रक्त की आभा नजर आना, बुखार, थकान, सीने में दर्द, भूख में कमी, साँस लेते समय या खाँसते समय दर्द महसूस करना आदि शामिल हैं. टीबी  एक संक्रामक रोग है. यानी ये तपेदिक रोगी के खाँसने या छींकने से इसके जीवाणु हवा में फैल जाते हैं और उसको स्वस्थ व्यक्ति श्वसन के जरिए ग्रहण कर लेता है. हलांकि जो व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में ध्रूमपान या शराब का सेवन करते हैं, उन्हें इसके होने की संभावना ज्यादा रहती है. यदि आपको इसके लक्षण नजर आएं तो तुरन्त जाँच केंद्र में जाकर अपने थूक की जाँच करवायें और डब्ल्यू.एच.ओ. द्वारा प्रमाणित डॉट्स के अंतगर्त अपना उचित उपचार करवायें. ताकि पूरी तरह से ठीक हो सकें ध्यान रहे कि टी.बी. का उपचार आधा करके नहीं छोड़ना चाहिए. आइए अब हम आपको क्षय रोग के कुछ आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में बताएं.
लहसुन
लहसुन में मौजूद एलीसिन नामक तत्व टीबी के जीवाणुओं के विकास को बाधित करता है. क्षय रोग के उपचार में लहसुन का उपयोग करने के लिए आप एक कप दूध में 4 कप पानी मिलाकर इसमें 5 लहसुन की कली पीसकर मिलाएं और इसे चौथाई भाग शेष रहने तक उबालें. अब इसे उतारकर ठंडा होने पर दिन में तीन बार लें.
प्याज का रस और हिंग
क्षय रोग के मरीजों को नियमित रूप से सुबह और शाम को खाली पेट आधा कप प्याज के रस में एक चुटकी हींग मिलाकर एक सप्ताह तक पीना चाहिए. इससे आपको एक सप्ताह के बाद फर्क दिखना शुरू हो जाएगा.
शहद
क्षय रोग में आप सभी घरों में आसानी से मौजूद शहद का इस्तेमाल भी अपनी परेशानी को कम करने के लिए कर सकते हैं. इसके लिए 200 ग्राम शहद, 200 ग्राम मिश्री और 100 ग्राम गाय के घी को मिलाकर तीनों को 6-6 ग्राम दिन में कई बार चाटें. और बेहतरी के लिए ऊपर से गाय या बकरी का दूध भी पिलायें.
पीपल वृक्ष की राख
पीपल वृक्ष के छाल की राख का उपयोग भी टीबी के मरीज कर सकते हैं. इसके लिए 10 ग्राम से 20 ग्राम तक पीपल वृक्ष के राख बकरी को बकरी के गर्म दूध में मिला कर नियमित रूप से सेवन करें. इसमें आवश्यकतानुसार मिश्री या शहद भी मिला सकते हैं.
पत्थर के कोयले की सफ़ेद राख
टीबी के मरीज पत्थर के कोयले की सफ़ेद राख के आधा ग्राम को मक्खन मलाई अथवा दूध के साथ नियमित रूप से सुबह शाम खाएं तो लाभ मिलता है. फेफड़ों से खून आने वाले मरीजों के लिए ये बेहद प्रभावी है.
रुदंती वृक्ष की छाल
रुदंती नामक वृक्ष के फल से निर्मित चूर्ण से लगभग सभी प्रकार के असाध्य क्षय रोगी आसानी से ठीक हो सकते हैं. इसके लिए कुछ आयुर्वेदिक फार्मेसियां रुदंती के छाल से कैप्सूल भी बनाती हैं. इससे रोगियों को स्वास्थ्य लाभ मिलने का दावा किया जाता है.
केला
केला के ऊर्जा देने की क्षमता से लगभग सभी परिचित हैं. केला में मौजूद पोषक तत्व हमारे शरीर के प्रतिरक्षातन्त्र को मजबूती प्रदान करते हैं. इसके लिए आप एक पका केला को मसलकर इसमें एक कप नारियल का पानी मिलाकर इसमें आधा कप दही और एक चम्मच शहद मिलाकर इसे दिन में दो बार लें.
सहजन की फली
सहजन के फली को सब्जी के रूप में आपने भी इस्तेमाल किया ही होगा. आपको बता दें कि इसमें जीवाणु नाशक और सूजन रोधी तत्व मौजूद होते हैं. इसके यही गुण टीबी के जीवाणु से लड़ने में हमारी मदद करते हैं. इसके लिए आप मुट्ठी भर सहजन के पत्ते को एक गिलास पानी में उबालकर इसमें नमक, काली मिर्च और नींबू का रस मिलाएं.  अब नियमित रूप से सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. इसके अलावा आप सहजन की फलियों को उबालकर सेवन करके अपने फेफड़ों को जीवाणु मुक्त कर सकते हैं.
आंवला
अपने अपने सूजन नाशक एवं जीवाणु रोधी गुणों के लिए आंवला मशहूर है. इसमें मौजूद पोषक तत्त्व शरीर की प्रक्रियाओं को ठीक ढंग से चलाने में मददगार हैं. इसके लिए आप 4-5 आंवले का बीज निकालकर इसका जूस बनाएं और इसका प्रतिदिन सुबह खाली पेट लें. यह टीबी रोगियों के के लिए अमृत के समान है. आप चाहें तो आंवला चूर्ण भी ले सकते हैं.
आक की कली
क्षय रोग के मरीजों को आक की कली खाने की सलाह भी दी जाती है. इसके लिए पहले दिन तो आपको ईसकी एक कली को निगल जाना है. फिर दुसरे दिन दो कली और तीसरे दिन तीन इसी तरह क्रमशः 15 दिन तक लेने से काफी लाभ मिलेगा.

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Ayurvedic Treatment Of Prostate - प्रोस्टेट का आयुर्वेदिक उपचार

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ayurvedic Treatment Of Prostate - प्रोस्टेट का आयुर्वेदिक उपचार

लगभग 60 वर्ष की उम्र से ज्यादा के लोग ही प्रोस्टेट की समस्या से परेशान होते हैं. हलांकि लगभग तिस फीसदी लोग 30 या उससे ज्यादा के उम्र के भी हैं. प्रोस्टेट डिसऑर्डर की समस्या उत्पन्न होने का कारण प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ जाना है. आपको बता दें कि प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी कहा जाता है. हमारे शरीर में पौरुष ग्रंथि कई आवश्यक क्रियाओं को अंजाम देती है. इसके कुछ प्रमुख कामों में यूरिन के बहाव को कंट्रोल करना और प्रजनन के लिए सीमेन निर्मित करना है. प्रारंम्भ में ये ग्रंथि छोटी होती है लेकिन बढ़ते उम्र के साथ इसका बिकास होता जाता है. लेकिन कई बार अनावश्यक रूप से इसमें वृद्धि नुकसानदेह है, इस समस्या को बीपीएच कहा जाता है.
 

प्रोस्टेट में अवरोध का कारण
प्रोस्टेट ग्रंथि में ज्यादा वृद्धि हो जाने के कारण मूत्र उत्सर्जन में परेशानी आने लगती है. इसके आकार में वृद्धि के कारण ही मूत्र नलिका का मार्ग अवरुद्ध हो जा जाता है. इसकी वजह से पेशाब रुक जाता है. अभी तक प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है. बढ़ती उम्र के साथ ही हमारे शरीर में होने वाला हार्मोनल परिवर्तन इसका एक संभावित कारण हो सकता है. आइए प्रोस्टेट के आयुर्वेदिक उपचार को जानें.
 

प्रोस्टेट ग्रंथि में गड़बड़ी के लक्षण
* पेशाब करने की आवृति में वृद्धि.
* पेशाब करने जाने पर धार के चालू होने में अनावश्यक विलम्ब होना.
* बहुत जोर से पेशाब का अहसास होना लेकिन पेशाब करने जानें पर बूंद-बूंद करके निकलना या पेशाब रुक-रुक के आना.
* मूत्र विसर्जन के पश्चात् मूत्राशय में कुछ मूत्र शेष रह जाना. इससे रोगाणुओं की उत्पति होती है.
* पेशाब करने  में पेशानी का अनुभव करना.
* अंडकोष में लगातार दर्द का अनुभव करते रहना.
* मूत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाना.
* रात्री में बार-बार पेशाब की तलब लगना.
* पेशाब करते समय जलन का अनुभव करना.
 

प्रोस्टेट का आयुर्वेदिक उपचार

  • अलसी के बीज: प्रोस्टेट का उपचार करने के लिए आयुर्वेद काफी उपयोगी औषधियां उपलब्ध कराता है. अलसी का बीज प्रोस्टेट के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके लिए अलसी के बीज को मिक्सी में पीसकर पाउडर बनायें. फिर प्रतिदिन इसे 20 ग्राम पानी के साथ लें.
  • सीताफल के बीज: सीताफल के बीज में कॉपर, मैग्नीशियम, मैंगनीज, आयरन, ट्रिप्टोफैन, फ़ॉस्फोरस, फाइटोस्टेरोल, प्रोटीन और आवश्यक फैटी एसिड आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसके अलावा सीताफल के बीज को जिंक का भी स्त्रोत माना जाता है और इसमें बीटा-सिस्टेरॉल की भी मौजूदगी होती है जो कि टेस्टोस्टेरॉन को डिहाइडड्रोटेस्टेरॉन में परिवर्तित होने से रोकता है. प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने की संभावना को ख़त्म करने के लिए आप सीताफल के बीजों को कच्चा, भूनकर या फिर दुसरे बीजों के साथ मिश्रित करके भी ले सकते हैं. यही नहीं आप इन बीजों को सलाद, सूप,पोहा आदि में भी डालकर खा सकते हैं. इनमें बहुत सारे पोषक तत्वों की मौजूदगी होती है.
  • सोयाबीन: प्रोस्टेट से छुटकारा दिलाने में सोयाबीन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सोयाबीन की सहायता से आप प्रोस्टेट का उपचार कर सकते हैं. प्रोस्टेट का उपचार सोयाबीन से करने के लिए आपको रोजाना सोयाबीन खाना होगा. ऐसा करने से आपका टेटोस्टरोन के स्तर में कमी आती है.
  • पानी के इस्तेमाल से: अपने दैनिक जीवन में हम सभी पानी पीते ही हैं. लेकिन कई लोग इसे ज्यादा महत्त्व नहीं देते हैं और वो उचित अंतराल या उचित मात्रा में पानी नहीं पीते हैं. ऐसा करने से आपके शरीर में कई अनियमिताएं आने लागती हैं. प्रोस्टेट की परेशानी के दौरान आपको नियमित रूप से पानी पीना लाभ पहुंचाता है.
  • चर्बीयुक्त और वसायुक्त भोजन का परहेज करें: जब भी आपको प्रोस्टेट की समस्या हो तो आपको चर्बीयुक्त और वसायुक्त भोजन का परहेज करें. आप देखेंगे कि चर्बीयुक्त और वसायुक्त भोजन का परहेज करने से प्रोस्टेट डिसऑर्डर में काफी लाभ मिलता है.
  • टमाटर नींबू आदि का खूब इस्तेमाल करें: टमाटर, नींबू आदि में विटामिन सी की प्रचुरता होती है. प्रोस्टेट डिसऑर्डर के दौरान आपको विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा लेनी चाहिए. इसलिए इस दौरान विटामिन सी की प्रचुरता वाले खाद्य पादार्थों का सेवन करना चाहिए.

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I sir or madam my name is Mohammed Sohail age 23 I am getting sex desire to have sex with any one but I don't want to cheat to my coming girls in my life how should I control my sex desires please help me.

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